एएससीपीसीआर और बचपन बचाओ आंदोलन की साझा राज्यस्तरीय कार्यशाला में असम को बाल विवाह मुक्त बनाने के उपायों पर मंथन एबीएन सेंट्रल डेस्क। बाल विवाह के खिलाफ लड़ाई में अनुकरणीय और अभूतपूर्व साहस दिखाने वाली असम सरकार ने इस सामाजिक बुराई के खिलाफ प्रयासों को मजबूती देने की कड़ी में असम राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग (एएससीपीसीआर) ने बाल विवाह मुक्त भारत (सीएमएफआई) के गठबंधन सहयोगी बचपन बचाओ आंदोलन के साथ संयुक्त रूप से गुवाहाटी में एक राज्यस्तरीय कार्यशाला का आयोजन किया। दिन भर चली इस कार्यशाला में असम को 2030 तक बाल विवाह मुक्त करने के प्रयासों के तहत उठाए जाने वाले कदमों की रूपरेखा तैयार की गई।कार्यशाला को एएससीपीसीआर के अध्यक्ष एवं सेवानिवृत्त आईपीएस अधिकारी डॉ श्यामल प्रसाद सैकिया, एएससीपीसीआर की सदस्य जानकी खाउंड, एसीएस की संयुक्त सचिव (पंचायत एवं ग्रामीण विकास) बासवी ठाकुरिया, स्वास्थ्य सेवाएं निदेशालय, परिवार कल्याण के संयुक्त निदेशक ड़ा. जदुमोनी कोटोकी, महिला एवं बाल कल्याण विभाग की उपसचिव डॉ प्रीति लेखा डेका, वरिष्ठ पत्रकार प्रणय बारदोलोई और कोसी लोक मंच के कार्यकारी निदेशक ऋषि कांत ने संबोधित किया। कार्यसाला में वक्ताओं ने कहा कि राज्य सरकार बाल विवाह के खिलाफ लड़ाई में कोई ढिलाई नहीं बरतेगी और प्रदेश को बाल विवाह मुक्त बनाने के प्रयास इसी रफ्तार से जारी रहेंगे। एएससीपीसीआर के अध्यक्ष एवं सेवानिवृत्त आईपीएस अधिकारी डॉ श्यामल प्रसाद सैकिया ने कहा कि कानून और कुछ नहीं बल्कि जनता के सामान्य बोध को जनहित में संहिताबद्ध करने का नाम है। असम में बच्चियों को इनके अधिकारों, शिक्षा जैसी हर चीज में भेदभाव का सामना करना पड़ता है। जिन समाजों में अशिक्षा, गरीबी और लिंग आधारित भेदभाव मौजूद हैं, वहां बाल विवाह की समस्या चुनौती पेश करती रहेगी। बाल विवाह की रोकथाम के लिए विभिन्न कानूनों और योजनाओं पर किस तरह अमल हो रहा है, इस पर एएससीपीसीआर जैसी निगरानी एजेंसियों को नजर बनाए रखनी होगी। कोसी लोक मंच के कार्यकारी निदेशक ऋषि कांत ने जबरन विवाह और असम की लड़कियों को हरियाणा ले जाकर वेश्यावृत्ति में झोंकने की समस्या की चर्चा की। उन्होंने बाल विवाह और बाल दुर्व्यापार रोकने के प्रयासों के लिए मुख्यमंत्री हिमंत बिस्व सरमा की सराहना करते हुए कहा कि बच्चियों की शिक्षा को प्रोत्साहित करने के लिए उच्चतर माध्यमिक की शिक्षा के लिए 10,000 रुपये, स्नातक के लिए 10,000 रुपये और स्नातकोत्तर की शिक्षा के लिए 15,000 रुपए की राशि देने जैसे प्रोत्साहन उपाय बाल विवाह रोकने और लड़कियों के सशक्तीकरण में सहायक होंगे।महिला एवं बाल कल्याण विभाग की उपसचिव डॉ. प्रीति लेखा डेका ने कहा, बाल विवाह से बाल दुव्यार्पार यानी बच्चों की ट्रैफिकिंग का खतरा भी बढ़ता है। इससे मुक्त करायी गयी बच्चियों के पुनर्वास में नागरिक समाज की भूमिका महत्वपूर्ण है। इन बच्चियों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए इनके कौशल विकास की जरूरत है ताकि वे अलग थलग नहीं महसूस करें। बाल विवाह और बच्चों के यौन शोषण को रोकने में सभी हितधारकों के समन्वित प्रयासों की जरूरत है।बाल विवाह के खिलाफ असम में हिमंत बिस्व सरमा के नेतृत्व में राज्य सरकार द्वारा उठाये गये कदमों की सराहना करते हुए बचपन बचाओ आंदोलन के कार्यकारी निदेशक धनंजय टिंगल ने कहा, राज्य में बाल विवाह के खात्मे के लिए असम सरकार द्वारा उठाए गए कदम अनुकरणीय हैं और पूरे देश के लिए एक नजीर हैं। राज्य सरकार की ओर से 2026 तक असम को बाल विवाह मुक्त बनाने एवं पीड़ितों के पुनर्वास के लिए 200 करोड़ रुपए के बजट का आबंटन सही दिशा में एक सही कदम है। इस तरह की कार्यशालाएं एवं परामर्श सत्र राज्य से बाल विवाह के खात्मे के लिए आबंटित राशि के प्रभावी तरीके से उपयोग सुनिश्चित करने की दिशा में कारगर साबित होंगे। साथ ही राज्य सरकार की सख्ती और दोषियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई से आगे चलकर बाल विवाह के खिलाफ लड़ाई की सफलता सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी। बचपन बचाओ आंदोलन जिसे एसोसिएशन फॉर वालंटरी एक्शन (एवीए) के नाम से जाना जाता है, बाल विवाह मुक्त भारत (सीएमएफआई) का गठबंधन सहयोगी है। सीएमएफआई राज्य सरकारों के सहयोग व मार्गदर्शन से देश को 2030 तक बाल विवाह मुक्त बनाने के लिए जमीनी स्तर पर काम कर रहा है। पिछले वर्ष 16 अक्टूबर को असम सरकार के पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग, स्कूली शिक्षा विभाग, राज्य विधिक सेवाएं प्राधिकरण तथा महिला एवं बाल संरक्षण निदेशालय जैसे तमाम विभागों ने अधिसूचना जारी कर अपने कर्मचारियों व अधिकारियों से बाल विवाह मुक्त असम अभियान में शामिल होने व बाल विवाह के खिलाफ शपथ लेने का निर्देश जारी किया था। बताते चलें कि राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वे-5 (2019-2021) के अनुसार देश में 20 से 24 साल की 23.3 प्रतिशत लड़कियों का विवाह उनके 18 वर्ष का होने से पूर्व ही हो गया था जबकि असम में 31.8 प्रतिशत लड़कियों का विवाह 18 से पूर्व हो जाता है जो कि राष्ट्रीय औसत से बहुत ज्यादा है। लेकिन वर्ष 2023 से बाल विवाह की रोकथाम के लिए असम सरकार द्वारा उठाये गये सख्त कदमों से हालात बदलते दिख रहे हैं और अचानक बाल विवाह के मामलों में तेजी से गिरावट आई है।
हिम्मत है तो राष्ट्रपति शासन लगाकर दिखाइयेभाजपा और मिथुन चक्रवर्ती के बयान पर भड़की टीएमसीएबीएन सेंट्रल डेस्क। संदेशखाली मुद्दे पर बंगाल की राजनीति गरमाई हुई है। हाल ही में भाजपा नेताओं ने बंगाल में बिगड़ती कानून व्यवस्था के मुद्दे पर राज्य में राष्ट्रपति शासन लागू करने की मांग की थी। अब टीएमसी ने इस पर तगड़ा पलटवार किया है। टीएमसी प्रवक्ता कुणाल घोष ने भाजपा की राष्ट्रपति शासन लागू करने की मांग पर कहा कि मैं चुनौती देता हूं कि यहां (पश्चिम बंगाल) राष्ट्रपति शासन लगाकर दिखाइये। हमें डराने की कोशिश मत कीजिये। आप चुनी हुई सरकार को हटा सकते हैं, ऐसे बयान अपने तक सीमित रखिये।बंगाल में राष्ट्रपति शासन की उठी मांगकुणाल घोष ने कहा कि अगर आपमें हिम्मत है तो करके दिखाइये, बस बातें मत करिये। मिथुन चक्रवर्ती का संदेशखाली पर दिया गया बयान आधारहीन है।दरअसल, भाजपा नेता और केंद्रीय राज्यमंत्री दर्शना जरदोश ने बंगाल में राष्ट्रपति शासन लगाने की मांग की। उन्होंने कहा कि एक महिला सीएम होते हुए उन्हें (ममता बनर्जी) जिम्मेदारी लेनी चाहिए और इस्तीफा देना चाहिए। राष्ट्रपति शासन लागू होना चाहिए। संदेशखाली में चल रहा हंगामापश्चिम बंगाल के उत्तरी 24 परगना जिले में स्थित संदेशखाली में बीते करीब 10 दिनों से हंगामा चल रहा है। संदेशखाली में महिलाओं ने आरोप लगाये हैं कि टीएमसी नेता शाहजहां शेख और उसके सहयोगियों ने स्थानीय लोगों की जमीन पर कब्जा कर लिया। कई महिलाओं ने यौन शोषण के भी आरोप लगाये। इसे लेकर महिलाओं ने विरोध प्रदर्शन किया और अब भाजपा इस मुद्दे पर टीएमसी को घेरने की कोशिश कर रही है। मिथुन चक्रवर्ती ने बंगाल सरकार पर उठाये थे सवालफिल्म अभिनेता से राजनेता बने मिथुन चक्रवर्ती ने भी संदेशखाली मामले और बंगाल की कानून व्यवस्था पर सवाल उठाये। उन्होंने मीडिया से बात करते हुए कहा कि महिलाओं के साथ इससे बुरी चीज कुछ भी नहीं हो सकती। आप इस तरह का गंदा खेल खेल रहे हैं? यह विश्वास से परे है। हम सभी राजनीति करते हैं, लेकिन ये राजनीति से परे हैं। ऐसा नहीं होना चाहिए। हम सभी को इसकी जिम्मेदारी लेनी चाहिए और इसके खिलाफ आवाज उठानी चाहिए ताकि कोई और ऐसी परेशानी से न गुजरे।
रामभद्राचार्य, गुलजार अट्ठावनवें ज्ञानपीठ पुरस्कार से सम्मानित किये जायेंगेएबीएन सेंट्रल डेस्क। संस्कृत के प्रकांड विद्वान जगद्गुरु रामभद्राचार्य और उर्दूके साहित्यकार गुलजार को अट्ठावनवें ज्ञानपीठ पुरस्कार से सम्मानित किया जायेगा।ज्ञानपीठ पुरस्कारों के निर्णायक मंडल ने शनिवार को वर्ष 2023 के लिये अट्ठावनवें ज्ञानपीठ पुरस्कारों की घोषणा की।ज्ञानपीठ पुरस्कार समिति की तरफ से शनिवार को जारी विज्ञप्ति में कहा गया कि अट्ठावनवां ज्ञानपीठ पुरस्कार दो भाषाओं के लब्धप्रतिष्ठ लेखकों, जगद्गुरु रामभद्राचार्य (संस्कृत साहित्य) और श्री गुलजार (उर्दू साहित्यकार) देने का निर्णय किया गया है।सुप्रसिद्ध कथाकार और ज्ञानपीठ पुरस्कार से सम्मानित प्रतिभा राय की अध्यक्षता में हुई चयन समिति की बैठक में यह निर्णय लिया गया। इस बैठक में चयन समिति के अन्य सदस्य सर्वश्री माधव कौशिक, दामोदर मौजो, प्रो. सुरंजन दास, प्रो. पुरुषोत्तम बिल्माले, प्रफुल्ल शिलेदार, प्रो हरीश त्रिवेदी, प्रभा वर्मा, डॉ जानकी प्रसाद शर्मा, ए कृष्णा राव और ज्ञानपीठ के निदेशक मधुसुदन आनन्द शामिल थे। उत्तर प्रदेश के चित्रकूट के निवासी श्री रामभद्राचार्य प्रख्यात विद्वान्, शिक्षाविद्, बहुभाषाविद्, रचनाकार, प्रवचनकार, दार्शनिक और हिन्दू धर्मगुरु हैं। वह चित्रकूट स्थित संत तुलसीदास के नाम पर स्थापित तुलसी पीठ नामक धार्मिक और सामाजिक सेवा संस्थान के संस्थापक और अध्यक्ष हैं। वे बहुभाषाविद् हैं और 22 भाषायें बोलते हैं। वह संस्कृत, हिन्दी, अवधी, मैथिली सहित कई भाषाओं में आशुकवि और रचनाकार हैं। उन्होंने 240 से अधिक पुस्तकों और ग्रंथों की रचना की है। उनके द्वारा लिखे गये चार महाकाव्य में दो संस्कृत भाषा और दो हिंदी भाषा में लिखे गये हैं। इससे पहले, उन्हें 2015 में पद्म विभूषण से सम्मानित किया जा चुका है। ग़ुलज़ार नाम से प्रसिद्ध सम्पूर्ण सिंह कालरा (1934) हिन्दी फिल्मों के एक प्रसिद्ध गीतकार हैं। इसके अलावा, वह एक कवि, पटकथा लेखक, फ़िल्म निर्देशक नाटककार तथा प्रसिद्ध शायर हैं। उनकी रचनायें मुख्यतः हिन्दी, उर्दू तथा पंजाबी में हैं। इससे पहले, गुलज़ार को वर्ष 2002 में सहित्य अकादमी पुरस्कार और वर्ष 2004 में पद्म भूषण से सम्मानित किया जा चुका है।अपनी लम्बी फ़िल्मी यात्रा के साथ साथ गुलज़ारअदब के मैदान में नई नई मंज़िलें तय करते रहे हैं। नज़्म में इन्होंने एक नई विधा त्रिवेणी का आविष्कार किया है जो तीन पंक्तियों की ग़ैर मुक़फ़्फ़ा नज़्म होती है।उल्लेखनीय है कि संस्कृत भाषा को दूसरी बार और उर्दू के लिये पांचवीं बार यह पुरस्कार प्रदान किया जा रहा है। देश के सर्वोच्च साहित्य सम्मान ज्ञानपीठ पुरस्कार के रूप में विजेताओं को पुरस्कार स्वरूप रुपये 11 लाख की राशि, वाग्देवी की प्रतिमा और प्रशस्ति
भारत के ताजे फलों के निर्यात में 29% की वृद्धि, 111 देशों तक पहुंच एबीएन सेंट्रल डेस्क। कृषि और प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (एपीडा) के नवीनतम आंकड़ों के अनुसार अप्रैल से दिसंबर 2023 तक 9 महीने की अवधि में 29 प्रतिशत की मजबूत वृद्धि के साथ ताजे फल भारत के कृषि निर्यात में एक उत्कृष्ट प्रदर्शनकर्त्ता के रूप में उभरे हैं। भारत के ताजे फलों का बाज़ार इस अवधि के दौरान पिछले वर्ष के 102 देशों की तुलना में 111 देशों में फैल गया है। यह 100 मिलियन डॉलर से अधिक के निर्यात की श्रेणी में अग्रणी है। अप्रैल-नवंबर 2023 के दौरान कई प्रमुख वस्तुओं में पिछले वर्ष की तुलना में पर्याप्त वृद्धि देखी गई, जैसे केले 63 प्रतिशत और केसर व दशहरी आम क्रमशः 120 और 140 प्रतिशत, दाल (सूखी और छिलके वाली) 110 प्रतिशत, ताजे अंडे 160 प्रतिशत। अप्रैल से दिसंबर 2023 की अवधि के दौरान बासमती चावल का निर्यात मूल्य 19 प्रतिशत बढ़ गया, जो पिछले वर्ष के 3.33 बिलियन अमरीकी डॉलर की तुलना में 3.97 बिलियन अमरीकी डॉलर तक पहुंच गया। इसके साथ ही निर्यात की मात्रा में 11 प्रतिशत की उल्लेखनीय वृद्धि देखी गई, जो समान समय-सीमा के भीतर 31.98 लाख मीट्रिक टन से बढ़कर 35.43 लाख मीट्रिक टन हो गई। बासमती चावल ने शीर्ष बाजारों में अपनी जगह बना ली है। ईरान, इराक, सऊदी अरब, अमरीका और संयुक्त अरब अमीरात इन निर्यातों के लिए शीर्ष पांच गंतव्यों के रूप में उभरे हैं। यह मजबूत प्रदर्शन बासमती चावल की स्थायी लोकप्रियता और वैश्विक मांग को रेखांकित करता है, जिससे भारत के निर्यात पोर्टफोलियो में एक प्रमुख कृषि उत्पाद के रूप में इसकी स्थिति और मजबूत हो गयी है। सब्जियों के निर्यात में भी 24 प्रतिशत की वृद्धि इस अवधि के दौरान प्रसंस्कृत सब्जियों के निर्यात में भी 24 प्रतिशत की वृद्धि हुई। इसके बाद विविध प्रसंस्कृत वस्तुओं का निर्यात बढ़ा। ताजी सब्जियों की बिक्री में भी पिछले वर्ष की इसी अवधि की तुलना में पर्याप्त वृद्धि देखी गयी। अप्रैल-दिसंबर, 2023 की अवधि में एपीडा की निर्यात टोकरी में 23 प्रमुख वस्तुओं (पी.सी.) में से 18 ने सकारात्मक वृद्धि प्रदर्शित की। विशेष रूप से आंकड़ों से पता चलता है कि पिछले वर्ष 100 मिलियन अमरीकी डॉलर से अधिक निर्यात वाले 15 बड़े पी.सी. में से 13 में सकारात्मक वृद्धि हुई, औसत वृद्धि दर 12 प्रतिशत रही। वित्तीय वर्ष 2022-23 के दौरान भारत का कृषि निर्यात 53.1 बिलियन अमरीकी डॉलर तक पहुंच गया था, जिसमें एपीडा की कमोडिटी बास्केट का भारत के कृषि-निर्यात में 51 प्रतिशत का महत्वपूर्ण योगदान था।
राष्ट्रीय अधिवेशन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बताया भाजपा ने क्यों तय किया 370 सीट का टारगेट? एबीएन सेंट्रल डेस्क। भाजपा के दो दिवसीय राष्ट्रीय अधिवेशन की शुरुआत राष्ट्रीय पदाधिकारियों की बैठक के साथ हुई। इस बैठक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने साफ संदेश दिया कि भाजपा के लिए इस लोकसभा चुनाव में 370 सीटें जीतने का लक्ष्य सिर्फ आंकड़ा नहीं है, बल्कि यह श्यामा प्रसाद मुखर्जी को भाजपा के सभी कार्यकर्ताओं की श्रद्धांजलि होगी। दरअसल, भारतीय जनसंघ के संस्थापक श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने 1951 में कहा था कि एक देश में दो निशान, दो प्रधान और दो विधान नहीं चलेंगे। मुखर्जी ने यह नारा जम्मू-कश्मीर में दिया था। भाजपा अब 370 सीटों के टारगेट के जरिए यह संदेश भी दे रही है कि मोदी सरकार ने जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि फर्स्ट टाइम वोटर को 2014 से पहले का भारत और 2014 के बाद के भारत में फर्क बताएं और उन्हें बताएं कि कैसे भारत का गौरव बढ़ा है। महिला वोटर हमारे लिए सिर्फ वोटर नहीं हैं। जिस तरह का काम पिछले 10 साल में हमारी सरकार ने किया है, वह देखते हुए माता-बहनों का आशीर्वाद हमें इस चुनाव में प्राप्त करना है, इसके लिए ज्यादा सक्रिय रहें।प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आगे कहा कि लोकसभा चुनाव में इस बार भाजपा का चुनाव चिन्ह कमल पार्टी का उम्मीदवार होगा। पीएम ने इसी के साथ सभी से अपनी जीत सुनिश्चित करने का आह्वान किया। पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा ने कहा कि 10 साल की विकास यात्रा अभूतपूर्व यात्रा रही। उन्होंने कहा कि लोकसभा प्रवास योजना में 161 लोकसभा में 430 प्रवास केंद्रीय मंत्रियों के हुए। यानी एक लोकसभा में तीन प्रवास हुए। ये 161 सीटें वे हैं जो पिछले चुनाव में भाजपा हारी थी। नड्डा ने भरोसा जताया कि इसमें से ज्यादातर सीटें जीतने में हम कामयाब होंगे। आने वाले 100 दिन में भाजपा का कार्यकर्ता सीधे बूथ पर टारगेट करेगा और विकास की बातें हर वोटर तक ले जाने में सफल रहेगा। राजनीतिक और आर्थिक प्रस्ताव पेश होने की संभावना भाजपा के राष्ट्रीय अधिवेशन में राजनीतिक और आर्थिक प्रस्ताव पेश हो सकते हैं। राजनीतिक प्रस्ताव में मोदी सरकार की 10 साल की बड़ी उपलब्धियां गिनाते हुए 2024 चुनाव में लगातार तीसरी जीत का अपना रोड मैप पेश किया जायेगा। आर्थिक प्रस्ताव में भारत को दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनाने का संकल्प लिया जायेगा, जिसका एलान खुद प्रधानमंत्री कर चुके हैं। किसान आंदोलन को देखते हुए ये माना जा रहा है कि पीएम मोदी के किसानों के लिए अब तक किये कामों की चर्चा कर भविष्य में किसानों के लिए प्रस्तावित योजनाओं पर भी प्रस्ताव आ सकता है। मंदिर निर्माण पर धन्यवाद प्रस्ताव भाजपा के राष्ट्रीय अधिवेशन में राम मंदिर निर्माण के लिए धन्यवाद प्रस्ताव भी लाया जा सकता है। भाजपा राम मंदिर निर्माण का मुद्दा जन-जन तक पहुंचाना चाहती है, जिसके लिए प्रस्ताव लाया जायेगा। हाल ही में 3 राज्यों में पार्टी की जीत पर भी धन्यवाद प्रस्ताव आ सकता है।
पीएम मोदी का विकसित भारत और 370 सीटों का दृष्टिकोण, भाजपा ने लोकसभा चुनाव से पहले बुलाई दो दिवसीय मीटिंग एबीएन सेंट्रल डेस्क। आगामी लोकसभा चुनाव में अपनी स्थिति मजबूत करने और 370 से अधिक सीटें सुरक्षित करने के लिए भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने 17-18 फरवरी को दिल्ली के भारत मंडपम में दो दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन का आयोजन किया है। इस कार्यक्रम में पार्टी के सभी स्तरों के नेताओं सहित 11,000 से अधिक सदस्यों के शामिल होने की संभावना है। 17 फरवरी को बीजेपी के राष्ट्रीय नेताओं की बैठक होगी, जिसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के शामिल होने की संभावना है। पीएम मोदी ने लोकसभा चुनाव में बीजेपी के लिए 370 सीटें और एनडीए गठबंधन के लिए 400 से ज्यादा सीटें जीतने का लक्ष्य रखा है। सत्र का समापन 18 फरवरी को पीएम मोदी के संबोधन के साथ होगा। प्रमुख एजेंडा और प्रतिभागी यह सम्मेलन शनिवार को दोपहर 3 बजे भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा के संबोधन के साथ शुरू होने वाला है। बैठक के दौरान राम मंदिर, महिला आरक्षण, कृषि पहल और युवा कल्याण जैसे मुद्दों पर चर्चा के साथ-साथ दो महत्वपूर्ण प्रस्ताव भी चर्चा के लिए निर्धारित हैं। सम्मेलन से पहले सुबह 11 बजे राष्ट्रीय पदाधिकारियों की बैठक होनी है, जिसमें पीएम मोदी भी मौजूद रहेंगे। इस सभा में केंद्र सरकार के मंत्री, मुख्यमंत्री, भाजपा शासित राज्यों के उपमुख्यमंत्री, सांसद, विधायक, राज्य के अधिकारी, जिला पंचायत सदस्य, नगर निगम के सदस्य, साथ ही विभिन्न विभागों के अध्यक्ष और अधिकारी सहित भाजपा के कई दिग्गज शामिल हैं। पार्टी के भीतर पदानुक्रमित स्तर। राजनीतिक, आर्थिक और सामाजिक प्रस्तावों पर ध्यान दें राजनीतिक एजेंडे से परे, सम्मेलन में आर्थिक और सामाजिक कल्याण से संबंधित प्रस्तावों पर भी चर्चा होगी। पार्टी की दो दिवसीय राष्ट्रीय परिषद की बैठक से ठीक एक दिन पहले जेपी नड्डा ने शुक्रवार को भारत मंडपम में विकसित भारत विषय पर केंद्रित एक प्रदर्शनी का उद्घाटन किया। प्रतिनिधियों के लिए बैठक स्थल पर स्थित यह प्रदर्शनी, प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी के भारत को एक विकसित राष्ट्र में बदलने के लक्ष्य पर प्रकाश डालती है। यह लोगों के कल्याण और देश की उन्नति के प्रति सरकार के प्रयासों को भी प्रदर्शित करता है।
वर्ल्ड बुक फेयर 2024 रोजाना आ रहे लाखों पुस्तक प्रेमी, इतिहास-संस्कृति की किताबों का विशेष आकर्षण एबीएन सेंट्रल डेस्क। विश्व पुस्तक मेले में युवाओं से लेकर बुजुर्गों तक सभी उम्र के पाठक बड़ी संख्या में आ रहे हैं। प्रगति मैदान के हॉल नं 1 से 5 तक लाखों उपयोगी किताबें उपलब्ध हैं। पुस्तक मेला 18 फरवरी तक चलेगा। यहां सभी भाषाओं के 1000 से अधिक प्रकाशकों की किताबें हैं। स्कूल यूनिफॉर्म में बच्चों, वरिष्ठ नागरिकों और दिव्यांगों के लिए प्रवेश नि:शुल्क है। टिकट आईटीपीओ वेबसाइट और चुनिंदा मेट्रो स्टेशनों पर आनलाइन उपलब्ध हैं। विश्व पुस्तक मेला में पाठकों की रुचि अलग अलग विषयों पर केंद्रित रही है। इस साल यहां लोग ऐसी किताबें खोज रहे हैं जो उन्हें उनकी जड़ों और उनकी अपनी संस्कृति से जोड़ती हैं। एक मशहूर प्रकाशक का कहना है- बच्चों और युवाओं का किताबों के प्रति रुझान बढ़ा है। वे पौराणिक पुस्तकें अधिक खरीद रहे हैं। बच्चे रामायण और महाभारत पढ़ना चाहते हैं और युवा अपनी संस्कृति को समझने के लिए क्षेत्रीय भाषाओं में प्रकाशित पुस्तकों की मांग कर रहे हैं। युवाओं में उन विषयों के प्रति ज्यादा आकर्षण बढ़ा है, जिनसे वे आमतौर पर घिरे रहते हैं या सोशल मीडिया पर देखते हैं। खास बात ये कि हिंदी और अंग्रेजी के अलावा युवा अपनी-अपनी मातृभाषा मसलन गुजराती, मराठी, बांग्ला और अन्य क्षेत्रीय भाषाओं में भी स्थानीय संस्कृति पर गर्व करने वाली किताबों की मांग कर रहे हैं। इसमें प्रतियोगिता दर्पण जैसे प्रकाशन से लेकर पेंगुइन, क्रॉसवर्ड, ब्लूम्सबरी और कई अन्य प्रकाशकों के फिक्शन और नॉन-फिक्शन की किताबें शामिल हैं।
16 फरवरी को भारत बंद: क्या कल बंद रहेंगे बैंक और दफ्तरजानिये क्या खुला रहेगा और किन चीजों पर पाबंदीएबीएन सेंट्रल डेस्क। संयुक्त किसान मोर्चा (एसकेएम) ने केंद्रीय ट्रेड यूनियनों के साथ 16 फरवरी को होने वाले आगामी ग्रामीण भारत बंद के लिए निर्देश जारी किये हैं। भारत बंद सुबह 6 बजे से शाम 4 बजे तक रखा जायेगा, जिसमें किसान दोपहर 12 बजे से शाम 4 बजे तक देश भर की प्रमुख सड़कों पर व्यापक चक्का जाम में भाग लेंगे। पंजाब में विरोध प्रदर्शन के दौरान राज्य और राष्ट्रीय राजमार्गों का एक बड़ा हिस्सा चार घंटे के लिए बंद रहेगा। शनिवार को लुधियाना में बुलायी गयी बैठक के दौरान बीकेयू लाखोवाल के महासचिव हरिंदर सिंह लाखोवाल ने ग्रामीण भारत बंद को लेकर रणनीति का खुलासा किया।मुख्य रूप से पंजाब के किसानों ने, हरियाणा और उत्तर प्रदेश के समकक्षों के साथ मिलकर, केंद्र सरकार के साथ एक अनिर्णायक बैठक के बाद 13 फरवरी को अपना चलो दिल्ली मार्च शुरू किया। संयुक्त किसान मोर्चा (गैर-राजनीतिक) और किसान मजदूर मोर्चा ने फसलों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) की गारंटी के लिए कानून बनाने सहित उनकी मांगों को स्वीकार करने के लिए केंद्र पर दबाव डालने के लिए विरोध प्रदर्शन का आह्वान किया।क्या बंद रहेगा क्या खुलेगा जानें, डिटेल वहीं किसानों का कहना है कि इस दौरान ग्रामीण इलाकों में परिवहन, कृषि गतिविधियां, मनरेगा के तहत काम, निजी दफ्तर, गांवों की दुकानें बंद रहेंगी। इसके अलावा ग्रामीण क्षेत्रों में औद्योगिक गतिविधियों को भी बंद रखा जायेगा।हालांकि इस ग्रामीण भारत बंद से एंबुलेंस के संचालन, अखबार वितरण, शादी, मेडिकल दुकानें और परीक्षा देने जा रहे छात्र प्रभावित नहीं होंगे। उन्हें रोका नहीं जायेगा। एसकेएम राष्ट्रीय समन्वय समिति (एनसीसी) के सदस्य डॉ दर्शन पाल ने कहा कि उन्होंने आगे उल्लेख किया कि सब्जियों और अन्य फसलों का व्यापार और खरीद रोक दी जायेगी। गांव की दुकानें, अनाज बाज़ार, सब्जी बाज़ार, सरकारी और गैर-सरकारी कार्यालय, ग्रामीण औद्योगिक और सेवा क्षेत्र के प्रतिष्ठान, साथ ही निजी क्षेत्र के उद्यमों को बंद करने का आग्रह किया गया है। इसके अतिरिक्त, हड़ताल की अवधि के दौरान गांवों के पड़ोसी कस्बों में दुकानें और व्यवसाय बंद रहेंगे।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। दक्षिण एशिया में हमारे सबसे बड़े साझेदार भारत के साथ हमने पिछले साल जनवरी में महत्वपूर्ण और उभरती प्रौद्योगिकी पर अमेरिका-भारत पहल शुरू की है। अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडन के प्रशासन ने भारत को दक्षिण एशिया में अपना सबसे बड़ा साझेदार बताते हुए कहा कि वह नयी दिल्ली के साथ अरबों डॉलर के जलवायु बुनियादी ढांचे को विकसित करने और एक नए कोष पर काम कर रहा है जिसमें उसके विकास वित्त संस्थान से 50 करोड़ डॉलर का निवेश शामिल होगा। दक्षिण और मध्य एशियाई मामलों के ब्यूरो (एससीए) में सहायक उप सचिव अफरीन अख्तर ने वाशिंगटन फॉरेन प्रेस सेंटर द्वारा आयोजित एक समाचार सम्मेलन में यह कहा। अख्तर ने कहा कि दक्षिण एशिया में हमारे सबसे बड़े साझेदार भारत के साथ हमने पिछले साल जनवरी में महत्वपूर्ण और उभरती प्रौद्योगिकी पर अमेरिका-भारत पहल शुरू की है। उन्होंने बुधवार को कहा कि इसका लक्ष्य एक लचीली सेमीकंडक्टर आपूर्ति श्रृंखला का निर्माण करना, अंतरिक्ष सहयोग को बढ़ाना और दूरसंचार की अगली पीढ़ी में भागीदार बनाना है जो फिर से भारत के साथ महत्वपूर्ण और उभरती प्रौद्योगिकियों पर सहयोग बनाने की एक महत्वाकांक्षी पहल है। अख्तर ने कहा कि हम अरबों डॉलर के जलवायु बुनियादी ढांचे को विकसित करने और एक नए कोष पर भारत के साथ मिलकर काम कर रहे हैं जिसमें हमारे विकास वित्त संस्थान से 50 करोड़ डॉलर का निवेश शामिल होगा। उन्होंने कहा कि अमेरिका और भारत ने संयुक्त अभ्यासों, रक्षा औद्योगिक सहयोग मजबूत कर और टू प्लस टू मंत्री स्तरीय वार्षिक संवाद मजबूत कर व्यापक तथा बहुआयामी रक्षा साझेदारी को और गहरा बनाया है। उन्होंने कहा, हम वास्तव में उस रक्षा संबंध के निर्माण पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं। यह हमारी हिंद-प्रशांत रणनीति की अहम विशेषताओं में से एक है। अख्तर ने कहा कि अमेरिका पूरे दक्षिण एशिया में बड़े निवेश कर रहा है। उन्होंने कहा, अमेरिका और भारत के अडाणी समूह ने श्रीलंका में कोलंबो बंदरगाह में 50 करोड़ डॉलर के निवेश की घोषणा की है। इस निवेश का उद्देश्य बंदरगाह की क्षमता का विस्तार करना है, जो पहले से ही 90 प्रतिशत की क्षमता पर काम कर रहा है और वास्तव में श्रीलंका को इस क्षेत्र में एक बड़ा आर्थिक खिलाड़ी बनने में सक्षम बनाना है क्योंकि यह इस प्रमुख समुद्री मार्ग के रास्ते में स्थित है।
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