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दिल्ली में देश का पहला ऊष्मा आघात उपचार केंद्र
Published / 2024-05-08 20:19:52
दिल्ली में देश का पहला ऊष्मा आघात उपचार केंद्र

एबीएन सेंट्रल डेस्क। राष्ट्रीय राजधानी के डा राम मनोहर लोहिया अस्पताल में बुधवार को देश का पहला हीट स्ट्रोक- ऊष्मा आघात उपचार केंद्र शुरू किया जिसमें लू लगने से संबंधित बीमारियों से पीड़ित रोगियों को उपचार किया जायेगा। केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय में अवर सचिव रोली सिंह ने इस अत्याधुनिक उपचार केंद्र के उद्घाटन करते हुए हुए कहा कि यह गर्मी से संबंधित बीमारियों के जोखिमों से निपटने में गहत्वपूर्ण कदम साबित होगा। मौके पर निदेशक और चिकित्सा अधीक्षक डॉ. प्रोफेसर अजय शुक्ला भी उपस्थिति रहे। श्रीमती सिंह ने कहा कि इस उपचार का लक्ष्य गर्मी से संबंधित बीमारियों के खतरों के बारे में जागरूकता बढ़ाना और व्यक्तियों को निवारक कार्रवाई करने के लिए सशक्त बनाना है।उपचार केंद्र को अत्याधुनिक चिकित्सा प्रौद्योगिकी से सुसज्जित किया गया है। इसे गर्मी से संबंधित बीमारियों से प्रभावित लोगों को तत्काल और विशेष देखभाल के लिए तैयार किया गया है। इससे लू के रोगियों में मृत्यु दर और रुग्णता को कम करने में मदद मिलेगी। आंकड़ों के अनुसार ऊष्मा आघात का अगर समय पर और शीघ्र उपचार नहीं किया जाए तो मृत्यु दर 80 प्रतिशत तक हो सकती है।

64 साल की उम्र में भी आखिर कैसे इतने फिट हैं चीफ जस्टिस चंद्रचूड़
Published / 2024-05-05 21:52:44
64 साल की उम्र में भी आखिर कैसे इतने फिट हैं चीफ जस्टिस चंद्रचूड़

क्या खाते हैं, कैसा है दिनभर का रूटीनएबीएन सेंट्रल डेस्क। भारत के मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ इस साल के आखिर में सुप्रीम कोर्ट से रिटायर हो जायेंगे। 11 नवंबर 1959 को जन्में चंद्रचूड़ 64 साल के हो चले हैं, लेकिन उनकी फिटनेस ऐसी है कि उम्र का अंदाजा लगाना मुश्किल होता है। हमेशा हंसते-मुस्कुराते रहने वाले सीजेआई अपनी फिटनेस का राज होलिस्टिक लाइफस्टाइल को देते हैं।  सीजेआई चंद्रचूड़ के दिन की शुरुआत तड़के 3.30 बजे होती है। हाल ही में एक कार्यक्रम में उन्होंने बताया कि वह हर दिन सुबह 3:30 बजे जग जाते हैं। इसके बाद करीब 1 घंटे योगाभ्यास और तरह-तरह के व्यायाम करते हैं। इसके बाद ब्रेकफास्ट वगैरह करते हैं। सीजेआई चंद्रचूड़ पूरी तरह शाकाहारी हैं। उन्होंने खुद बताया कि वह और उनकी पत्नी, दोनों पिछले कुछ महीनों ने वीगन डाइट फॉलो कर रहे हैं। वीगन डाइट में मांस, मछली, दूध, दही, घी, पनीर, डेयरी प्रोडक्ट्स, शहद जैसी चीजें शामिल नहीं है। सिर्फ पेड़-पौधों से मिलने वाले फल, सब्जियां, अनाज, मेवे वगैरह खाते हैं। सीजेआई कहते हैं कि मेरी लाइफस्टाइल और डेली रूटीन में पूजा-पाठ अनिवार्य तौर पर शामिल है। एक इंटरव्यू में सीजेआई डीवाई चंद्रचूड़ बताते हैं कि मेरा एक निश्चित समय पूजा-पाठ के लिए निर्धारित है। बिना पूजा-अर्चना के घर से बाहर नहीं निकलता हूं। मैं अपने कुल देवता को मानता हूं। मेरे परिवार का एक पूजा रूम है, जो बिल्कुल मराठी परिवारों जैसा है। पूजा रूम में मेरी परदादी की भी एक तस्वीर लगी है, जिसके आगे मैं हर दिन सिर झुकाता हूं। चंद्रचूड़ नियमित संगीत भी सुनते हैं। बॉब डायलन, अब्बा, डायर स्ट्रेट्स उनके फेवरेट हैं। सीजेआई कहते हैं कि मेरी बेटियां मेरे फोन में नियमित नए गाने डाउनलोड करती रहती हैं। मैं कोर्ट आते-जाते संगीत सुनता हूं। भारतीय शास्त्रीय संगीत भी पसंद है।  चीफ जस्टिस चंद्रचूड़ को किताबें पढ़ना बहुत पसंद है। वह कहते हैं कि मैं एक साथ कई किताबें पढ़ता हूं, क्योंकि सिर्फ एक किताब पढ़ते हुए बोर हो जाता हूं। मेरे बेडरूम में सिरहाने किताबों का ढेर लगा रहता है। सोने से पहले कोशिश करता हूं कि कुछ जरूर पढ़ूं। पहले हर दिन कम से कम 30 पेज पढ़ता था। अब भी कोशिश रहती है कि 10 पेज जरूर पढ़ूं।

कांग्रेस की आर्थिक सोच माओवादी और सामाजिक-राजनीतिक सोच मुस्लिम लीगी : जयशंकर
Published / 2024-05-05 14:26:49
कांग्रेस की आर्थिक सोच माओवादी और सामाजिक-राजनीतिक सोच मुस्लिम लीगी : जयशंकर

एबीएन सेंट्रल डेस्क। विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कहा है कि आज की कांग्रेस की सामाजिक राजनीति सोच मुस्लिम लीग की और आर्थिक सोच माओवादी है। इसीलिए कांग्रेस के नेता आपसी मतभेदों के कारण विदेशी शक्तियों को आमंत्रित करके उसी इतिहास को दोहराने की कोशिश कर रहे हैं जिसने देश का बहुत बड़ा नुकसान किया है।विदेश मंत्री डॉ जयशंकर ने एक टेलीविजन नेटवर्क के साथ आज एक साक्षात्कार में यह बात कही। उन्होंने कहा कि चार जून को भाजपा के नेतृत्व वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) को 400 से अधिक सीटें मिलेंगी। उन्होंने कांग्रेस नेता राहुल गांधी के विदेशों में जाकर भारतीय लोकतंत्र को बचाने की गुहार लगाने पर अफसोस जताया और दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की गिरफ्तारी को कानून का राज बताया।यह पूछे जाने पर कि क्या वाकई में इन चुनावों में 400 पार का आंकड़ा हासिल कर पाएंगे जबकि कम मतदान को लेकर विपक्ष हावी हो रहा है, विदेश मंत्री ने कहा,  विपक्ष तो ऐसा कहेगा ही। लेकिन आपको यह पूछना होगा कि मतदान स्थल तक किसके मतदाता नहीं पहुंचे। हमें तो लगता है कि हमारे तो पहुंचे हैं। मैं तो यहीं कहूंगा कि 4 जून को आप 400 का आंकड़ा देखेंगे। उन्होंने कहा कि ये दस साल का रिकॉर्ड है। लोगों को मोदी सरकार पर विश्वास है। लोगों की सोच में यह स्वाभिक लगता है कि अब ऐसी सरकार होनी चाहिए कि जो वे वायदा करते हैं उसे बहुत ही सोच-समझकर करते हैं और उसे पूरा भी करते हैं। इसलिए मतदान प्रतिशत थोड़ा बहुत ऊपर-नीचे जा सकता है। इसके कई कारण हो सकते हैं लेकिन हमारी पार्टी में जो बातचीत चल रही है कि अगर कहीं वोटिंग कम भी हुई है तो हम अपने वोटर पर पूरा भरोसा रखते हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह के मुस्लिम आरक्षण को लेकर आ रहे बयानों, कांग्रेस के घोषणा पत्र की तुलना मुस्लिम लीग से किये जाने के मुद्दे पर राय पूछे जाने पर डाॅ जयशंकर ने कहा- आरक्षण के विषय को कांग्रेस पार्टी ने लोगों के सामने रखा है और इसे वह कई वर्षों से रखती आ रही है। मनमोहन सिंह सरकार ने आंध्र प्रदेश में क्या किया था, कांग्रेस सरकार कर्नाटक में अभी क्या कर रही है। आरक्षण के मुद्दे पर हम लोग अपना रुख स्पष्ट कर रहे हैं। प्रधानमंत्री ने भी कहा था कि धर्म के आधार पर आरक्षण नहीं होना चाहिए।उन्होंने कहा कि रही बात कांग्रेस पार्टी के घोषणा पत्र की तो यह 50 फीसदी मुस्लिम लीग और 50 फीसदी माओवादी है। उनकी आर्थिक सोच बिल्कुल माओवादी है। उनकी सामाजिक और राजनीतिक सोच मुस्लिम लीग है। इन दोनों का आधा-आधा मिला लें तो आज की कांग्रेस पार्टी वही है।

PoK हमारा था, है और रहेगा : राजनाथ सिंह
Published / 2024-05-05 14:23:13
PoK हमारा था, है और रहेगा : राजनाथ सिंह

रक्षा मंत्री बोले- कब्जा करने के लिए बल की जरूरत नहीं पड़ेगी क्योंकि...एबीएन सेंट्रल डेस्क। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा है कि भारत पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) पर अपना दावा कभी नहीं छोड़ेगा लेकिन इसे बलपूर्वक अपने कब्जे में करने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी क्योंकि इसके लोग कश्मीर में विकास को देखने के बाद स्वयं इसमें शामिल होना चाहेंगे। श्री सिंह ने एक विशेष साक्षात्कार में कहा कि जम्मू-कश्मीर में जमीनी स्थिति में काफी सुधार हुआ है और एक समय ऐसा आएगा जब केंद्र शासित प्रदेश में अफस्पा (सशस्त्र बल विशेष शक्तियां अधिनियम) की आवश्यकता नहीं होगी। हालांकि, रक्षा मंत्री ने कहा कि यह मामला केंद्रीय गृह मंत्रालय के अधीन है और वह उचित निर्णय लेगा।उन्होंने कहा कि जम्मू-कश्मीर में चुनाव भी जरूर होंगे, लेकिन उन्होंने इसके लिए कोई समयसीमा नहीं दी। उन्होंने कहा, मुझे लगता है कि भारत को कुछ नहीं करना पड़ेगा। जम्मू-कश्मीर में जिस तरह से जमीनी हालात बदले हैं, क्षेत्र में जिस तरह से आर्थिक प्रगति हो रही है और वहां जिस तरह से शांति लौटी है, मुझे लगता है कि पीओके के लोगों की ओर से यह मांग उठेगी कि उनका भारत के साथ विलय होना चाहिए। उन्होंने कहा, हमें पीओके पर अपना कब्जा करने के लिए बल का प्रयोग नहीं करना पड़ेगा क्योंकि लोग ही कहेंगे कि हमें भारत में विलय करना चाहिए। ऐसी मांगें अब उठ रही हैं। रक्षा मंत्री ने जोर देकर कहा, पीओके हमारा था, है और हमारा रहेगा।जम्मू-कश्मीर में जमीनी हालात में सुधार का हवाला देते हुए सिंह ने कहा कि वहां जल्द ही विधानसभा चुनाव होंगे लेकिन उन्होंने इसके लिए कोई समयसीमा नहीं बतायी। उन्होंने कहा- जम्मू-कश्मीर में जिस तरह से स्थिति में सुधार हो रहा है, उसे देखकर मुझे लगता है कि एक समय आयेगा जब वहां अफस्पा की आवश्यकता नहीं होगी। यह मेरा विचार है और इस पर निर्णय गृह मंत्रालय को लेना है। अफस्पा सुरक्षा बलों को अभियान चलाने और बिना किसी पूर्व वारंट के किसी को भी गिरफ्तार करने का अधिकार देता है। यदि सुरक्षा बलों की कार्रवाई में गोली लगने से किसी की मौत हो जाती है तो ऐसी स्थिति में अफस्पा उन्हें सजा से छूट देता है।रक्षा मंत्री ने जम्मू-कश्मीर में पाकिस्तान के छद्म युद्ध का जिक्र करते हुए कहा कि इस्लामाबाद को सीमा पार आतंकवाद को रोकना होगा। उन्होंने कहा कि वे भारत को अस्थिर करने की कोशिश कर रहे हैं और हम ऐसा नहीं होने देंगे। पुलवामा आतंकवादी हमले के जवाब में फरवरी 2019 में भारत के युद्धक विमानों द्वारा पाकिस्तान के बालाकोट में जैश-ए-मोहम्मद के आतंकवादी प्रशिक्षण शिविर पर हमला किये जाने के बाद भारत और पाकिस्तान के बीच संबंधों में गंभीर तनाव पैदा हो गया है। भारत द्वारा पांच अगस्त, 2019 को जम्मू-कश्मीर का विशेष दर्जा समाप्त करने और राज्य को दो केंद्र शासित प्रदेशों में विभाजित करने की घोषणा किये जाने के बाद संबंध और भी खराब हो गये। भारत का कहना है कि वह पाकिस्तान के साथ पड़ोसी देशों की तरह सामान्य संबंध रखना चाहता है लेकिन इसके लिए आतंकवाद और शत्रुता से मुक्त माहौल बनाने की जिम्मेदारी इस्लामाबाद पर है।

वाराणसी : 13 को रोड शो और 14 को नॉमिनेशन करेंगे पीएम मोदी
Published / 2024-05-03 22:21:59
वाराणसी : 13 को रोड शो और 14 को नॉमिनेशन करेंगे पीएम मोदी

एबीएन सेंट्रल डेस्क। लोकसभा चुनाव पर सभी पार्टियां जोर लगा रही है और एक दूसरे पर खूब तानाशाही बरसा रही है। इस बीच एक बड़ी खबर सामने आ रही है कि पीएम मोदी 13 मई को वाराणसी में रोड शो करेंगे, अगले दिन यानि 14 मई को नामांकन दाखिल करेंगे।बता दें कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी उत्तर प्रदेश की वाराणसी लोकसभा सीट से सांसद हैं। भारतीय जनता पार्टी ने पीएम मोदी को इसबार भी वाराणसी से ही उम्मीदवार बनाया है। वाराणसी में आखिरी चरण के दौरान मतदान होना है, यानी 1 जून को प्रधानमंत्री मोदी के निर्वाचन क्षेत्र में वोटिंग होगी।दो बार से वाराणसी से सांसद हैं पीएम मोदीराय के अलावा, स्टैंड-अप कॉमेडियन श्याम रंगीला ने भी पीएम मोदी के खिलाफ वाराणसी से चुनावी शुरुआत करने की घोषणा की है। राजस्थान के रहने वाले श्याम रंगीला पीएम मोदी की अनोखी नकल उतारने के लिए मशहूर हैं। रंगीला ने बुधवार, 1 मई को सोशल मीडिया पर लोकसभा 2024 के लिए वाराणसी से अपनी उम्मीदवारी की घोषणा की है।बता दें कि पीएम मोदी वाराणसी लोकसभा सीट से दो बार से सांसद हैं। साल 2014 के लोकसभा चुनाव में पीएम मोदी ने पहली बार वाराणसी से चुनाव लड़ा था और कहा था कि मां गंगा ने उन्हें बुलाया है। उस चुनाव में उन्होंने आम आदमी पार्टी के उम्मीदवार और दिल्ली के वर्तमान सीएम अरविंद केजरीवाल को हराया था।

जिहादियों के षडयंत्र पर चुप्पी खतरनाक : विजय शंकर तिवारी
Published / 2024-05-02 21:31:45
जिहादियों के षडयंत्र पर चुप्पी खतरनाक : विजय शंकर तिवारी

जिहादियों के द्वारा रचे जा रहे नित नये षड्यंत्रों पर मुस्लिम संस्थाओं व सेक्युलर ब्रिगेड की चुप्पी खतरनाक एबीएन सेंट्रल डेस्क। विश्व हिंदू परिषद ने जिहाद के नये-नये प्रकार और जिहादियों के नित नये षडयंत्रों पर सेकुलर ब्रिगेड और मुस्लिम संस्थाओं की चुप्पी को देश के लिए खतरनाक बताया है। परिषद के राष्ट्रीय प्रवक्ता व अखिल भारतीय प्रचार प्रसार प्रमुख विजय शंकर तिवारी ने आज कहा है कि वोट जिहाद के नाम पर वोट मांगना लोकतंत्र के लिए खतरे का संकेत हैं।इस्लामिक नारों के साथ जिहादियों द्वारा देश की राजधानी के शिक्षकों, बच्चों और अभिभावकों को आतंकित करने हेतु बम विस्फोट की धमकी वाला 178 स्कूलों को मेल किया गया था जिससे पूरे दिन न सिर्फ राजधानी दिल्ली को वल्कि सम्पूर्ण देश को स्तब्ध कर दिया है। हजारों बच्चे और उनके अभिभावक,  विद्यालयों के अध्यापक, कर्मचारी तथा पुलिस प्रशासन व शासन भी पूरे दिन एक गंभीर ट्रॉमा का शिकार हुए। इस धमकी वाले मेल की भाषा को अगर देखें तो स्पष्ट होता है कि अल्लाह के नाम पर जिस तरह का जिहाद करने की बात कही गई वह इस्लाम के नाम पर मानवीय जीवन मूल्यों की हत्या से बढ़कर है। गंभीर बात यह भी है कि इन दोनों घटनाओं के ऊपर किसी भी मुस्लिम संस्था या सेकुलर ब्रिगेड के किसी नेता द्वारा निंदा के दो शब्द तक नहीं निकले। जो कि एक सभ्य समाज के लिए एक खतरनाक बात है। श्री तिवारी ने पिछले कुछ दिनों में जिहादियों द्वारा की गयी अनेक नृशंस हत्याओं का जिक्र करते हुए यह भी कहा कि दिल्ली के जहांगीरपुरी में हमारी शोभायात्राओं को तो रोक दिया जाता है, हिंदू महिला के साथ बर्बरता होती है, उदयपुर के कन्हैया की गला काट कर हत्या की जाती है, हाल ही में मुंबई में एक बहन की हत्या हो या फिर कर्नाटक में कांग्रेसी नेता की बेटी नेहा की नृशंस हत्या हो, इन सब घटनाओं से लगातार उनका पाशविक चेहरा सामने आ रहा है। हमास के अत्याचार और बर्बरता की कहानी भी सब ने सुनी है लेकिन, उस पर आज तक किसी मुस्लिम उलेमा या उनकी संस्था द्वारा कोई निंदा के दो शब्द क्यों नहीं निकले। उन्होंने कहा कि बात सिर्फ़ कांग्रेस-सपा के द्वारा संयुक्त रूप से वोट जिहाद की ही नहीं अपितु, कांग्रेस के कद्दावर नेता व पूर्व केंद्रीय कानून मंत्री के साथ उनके अनेक साथी वरिष्ठ वकीलों द्वारा आतंकवादियों व देश द्रोहियों के केस कोर्ट में लड़ने वालों की भी एक लंबी श्रृंखला है। वोट जिहाद का नारा भी एक सभ्य समाज के लिए व लोकतंत्र के लिए एक बड़े खतरे का संकेत देता है। विश्व हिंदू परिषद सभी प्रकार के हिंसा व आतंक फैलाने से जुड़ी जिहादी घटनाओंकी घोर निंदा करते हुए भारतीय समाज से आह्वान करती है कि वह ऐसे देशद्रोही व जिहादियों के झांसे में न आये और न ही उनके किसी प्रकार के दबाव को स्वीकार करें। देश का चुनाव आयोग लोकतंत्र के इस महापर्व के सफल आयोजन के लिए जुटा ही है, हिंदू समाज को भी इन लोगों के घृणित षड्यंत्रों को बेनकाब करते हुए हिंदू हित में शत प्रतिशत मतदान की ओर बढ़ाना होगा। उक्त जानकारी विहिप के राष्ट्रीय प्रवक्ता विनोद बंसल ने एक प्रेस विज्ञप्ति जारी कर दी।

डीआरडीओ की बनायी पनडुब्बी रोधी मिसाइल का सफल परीक्षण
Published / 2024-05-01 22:03:51
डीआरडीओ की बनायी पनडुब्बी रोधी मिसाइल का सफल परीक्षण

भारत की बड़ी कामयाबीएबीएन सेंट्रल डेस्क। भारत को रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता के मामले में एक और बड़ी कामयाबी मिली है। दरअसल भारतीय नौसेना ने पनडुब्बी रोधी मिसाइल सिस्टम का सफल परीक्षण किया है। यह मिसाइल सिस्टम डीआरडीओ ने नौसेना के लिए ही विकसित किया है। भारतीय नौसेना ने बुधवार को ओडिशा में बालासोर के तट पर सुपरसोनिक मिसाइल असिस्टेड रिलीज ऑफ टॉरपीडो (SMART) मिसाइल सिस्टम का सफल परीक्षण किया। पनडुब्बी रोधी युद्ध में यह मिसाइल सिस्टम बेहद अहम है। यह एक कैनिस्टर आधारित मिसाइल सिस्टम है। यह एक लंबी दूरी की मिसाइल है, जिसे युद्धक जहाज के साथ ही तटीय इलाकों से भी लॉन्च किया जा सकता है।  यह मिसाइल अपनी अधिकांश उड़ान कम ऊंचाई पर हवा में पूरी करती है और अपने लक्ष्य के नजदीक जाकर मिसाइल से टॉरपीडो रिलीज होकर पानी के भीतर लक्ष्य को भेद देगा।टॉरपीडो एक सिगार के आकार का हथियार होता है, जिसे पनडुब्बी, युद्धक जहाज या लड़ाकू विमान से दागा जा सकता है। यह टॉरपीडो अपने लक्ष्य के संपर्क में आते ही धमाके के साथ विस्फोट हो जाती है। इस मिसाइल सिस्टम के नौसेना में शामिल होने के बाद नौसेना की मेरीटाइम क्षमता काफी बढ़ जायेगी। पनडुब्बी रोधी युद्ध में यह मिसाइल सिस्टम बेहद अहम साबित होगा।

लाल-सफेद प्याज में क्षेत्रीय भेदभाव का घुला रंग
Published / 2024-04-30 21:13:20
लाल-सफेद प्याज में क्षेत्रीय भेदभाव का घुला रंग

चुनावी समर में राजनीतिक हथियार बनी प्याज एबीएन सेंट्रल डेस्क। महाराष्ट्र में मुख्य रूप से लाल प्याज की खेती होती है जबकि गुजरात में सफेद प्याज की पैदावार ज्यादा होती है। लोकसभा चुनाव के बीच महाराष्ट्र में प्याज एक बार फिर से चुनावी मुद्दा बनता जा रहा है। निर्यात की अनुमति मिलने के बावजूद महाराष्ट्र की अधिकांश प्याज मंड़ियों में प्याज के दाम जमीन पर है। किसानों को 5-6 रुपये किलों का भाव मिल रहा है जिससे प्याज किसान सरकार से नाराज है। किसानों की नाराजगी कम करने के लिए सरकार ने प्याज निर्यात में ढील जरुर दी लेकिन उसको भी राजनीतिक दल लाल-सफेद यानी महाराष्ट्र झ्र गुजरात का मुद्दा बना कर पेश कर रहे हैं। भाव काम होने और चुनाव के बाद कीमतों में सुधार होने की उम्मीद की वजह से मंड़ियों में प्याज की आवक बहुत कम हो गयी है। थोक मंडियों में करीब 5-7 रुपये किलो प्याज के दाम महाराष्ट्र की अधिकांश प्याज मंडियों में प्याज के दाम किसानों को रुला रहे हैं। थोक मंड़ियों में करीब 5-7 रुपये किलो प्याज के दाम बोले जा रहे हैं, जिससे किसानों के हाथ में मुश्किल से प्रति किलोग्राम 2-3 रुपये मिल पा रहे हैं। दाम कम होने की वजह से मंड़ियों में प्याज की आवक भी बहुत कम हो गयी है। एशिया की सबसे बड़ी प्याज मंड़ी लासनगांव में इस समय औसत प्रति दिन 200 टन प्याज आ रही है जबकि एक महीने पहले आवक करीब 1300 टन थी और औसत कीमत 1700 रुपये प्रति क्विंटल के पार थी। महाराष्ट्र की लगभग सभी प्याज मंड़ियों का यही हाल है कीमतें कम होने के कारण किसान मंड़ियों में प्याज नहीं ला रहे हैं। किसानों के बीच सरकार को लेकर गुस्सा प्याज के दाम कम मिलने से किसानों के बीच सरकार को लेकर गुस्सा है। दाम कम मिलने की वजह किसान निर्यातबंदी को मान रहे हैं। इस बात को सरकार भी समझ रही है इसीलिए हाल ही में सरकार ने प्याज के निर्यात पर बड़ा फैसला लिया है। हाल ही में सरकार ने निर्यात पर प्रतिबंध के बावजूद छह देशों को 99,150 टन प्याज भेजने की मंजूरी दी है। उपभोक्ता मामले, खाद्य और सार्वजनिक वितरण मंत्रालय ने आधिकारिक बयान में कहा कि सरकार ने छह देशों बांग्लादेश, यूएई, भूटान, बहरीन, मॉरीशस और श्रीलंका को 99,150 टन प्याज के निर्यात की मंजूरी दी है। केंद्र ने पश्चिम एशिया और कुछ यूरोपीय देशों के निर्यात बाजारों के लिए विशेष रूप से उगाये गये 2,000 टन सफेद प्याज के निर्यात की भी मंजूरी दी है। सरकार ने 8 दिसंबर, 2023 को प्याज के निर्यात पर प्रतिबंध लगा दिया था। 25 अप्रैल केंद्र सरकार की तरफ से गुजरात से 2,000 टन सफेद प्याज के निर्यात को मंजूरी देने के फैसले को राजनीतिक रंग दिया जा रहा है। महाराष्ट्र के प्याज किसानों को लग रहा है कि उन्हें नजरअंदाज किया गया है। दरअसल, महाराष्ट्र में मुख्य रूप से लाल प्याज की खेती होती है जबकि गुजरात में सफेद प्याज की पैदावार ज्यादा होती है। महाराष्ट्र के किसान सवाल उठाते हुए कहते हैं कि सफेद और लाल प्याज के लिए अलग-अलग नियम क्यों हैं। प्याज उत्पादक संघ के राज्य अध्यक्ष भरत दिघोले कहते हैं कि अधिसूचना का कोई मतलब नहीं है, यह कदम पूरी तरह से वोट हासिल करने के लिए है और संभावित मतदाताओं को खुश करने का एक झूठा प्रयास है। महाराष्ट्र कांदा उत्पादक संगठन के पदाधिकारियों के अनुसार राज्य में प्याज की उत्पादन लागत 18 रुपये किलो तक पहुंच गयी है। जबकि किसान के हाथ में एक या दो रुपये मिल रहे हैं ऐसे में किसानों को प्याज की खेती से धीरे धीरे मोहभंग हो रहा है। देश में इस साल करीब 5 से 10 मिलियन टन प्याज का उत्पादन होने की उम्मीद है। किसानों को उनके उपज का सही दाम मिले तो इसके लिए केंद्र सरकार कम से कम 15 लाख टन प्याज के निर्यात को मंजूरी दे जिससे किसानों को अच्छी आमदनी हो सके।

बड़े शहरों में किरायेदारों को चुकाना पड़ रहा ज्यादा पैसा
Published / 2024-04-30 21:07:20
बड़े शहरों में किरायेदारों को चुकाना पड़ रहा ज्यादा पैसा

किराये के घरों पर महंगाई का कहर पुणे, नोएडा, दिल्ली, नवी मुंबई और ठाणे जैसे शहरों में महामारी से पहले के मुकाबले किराये की कमाई बेहतर हो गयी है एबीएन सेंट्रल डेस्क। बेंगलुरु, भारत की सिलिकॉन वैली, किराये की यील्ड के मामले में सबसे आगे है। प्रॉपर्टी कंसल्टिंग फर्म एनारॉक के आंकड़ों के अनुसार, 2024 की पहली तिमाही में शहर ने 4.45% की किराये में यील्ड दर्ज की। यह 2019 में महामारी से पहले के स्तर (3.6%) की तुलना में 24% की बड़ी वृद्धि है। एनारॉक के अनुसार महामारी के बाद किराये के घरों की मजबूत मांग के कारण, शहर के प्रमुख क्षेत्रों में किराए के प्राइस लगातार बढ़ रहे हैं, खासकर आईटी कंपनियों के कर्मचारियों के आफिस वापस लौटने के बाद। किराये की यील्ड दरअसल किसी संपत्ति से सालाना मिलने वाले किराये से निवेश पर मिलने वाले लाभ को दशार्ती है। उदाहरण के लिए, मान लीजिए आपके पास 1 करोड़ रुपये की संपत्ति है जो हर महीने 50,000 रुपये का किराया देती है। सालाना आप इससे 6 लाख रुपये (50,000 रुपये/माह 12 महीने) कमाते हैं। इस स्थिति में, आपकी किराये की आय 6% [(6,00,000 रुपये / 1,00,00,000 रुपये) गुणा 100] है। यानी हर साल 1 करोड़ के निवेश पर आपको 6 लाख की कमाई हो रही है। बेंगलुरु जैसे शहर इस मामले में बेहतर हैं, जहां किराये की आय 4.45% है। मुंबई और गुरुग्राम भी पीछे नहीं हैं, जिनमें क्रमश: 4.15% और 4.1% की किराये की आय है। महामारी के बाद तेजी से बढ़ी किराये होने वाली कमाई पूरे देश में किराये की कमाई (किराये की यील्ड) बढ़ रही है। पुणे, नोएडा, दिल्ली, नवी मुंबई और ठाणे जैसे शहरों में महामारी से पहले के मुकाबले किराये की कमाई बेहतर हो गयी है। इसकी वजह बताते हुए विशेषज्ञ कहते हैं कि महामारी से पहले कई सालों तक पूरे देश में किराये की कमाई 3% के आसपास स्थिर थी। मगर महामारी के बाद, खासकर आइटी वाले शहरों में किराये की मांग तेजी से बढ़ी जिसने कमाई को ऊपर चढ़ा दिया। ये पॉजिटिव बदलाव किराये की रकम पर भी नजर आ रहे हैं। 2023 में भारत के बड़े शहरों में किराए में 30% से ज्यादा की सालाना बढ़ोतरी देखी गयी। हालांकि 2023 की आखिरी तिमाही में मौसम की वजह से थोड़ी रुकावट आयी थी, लेकिन 2024 की पहली तिमाही में फिर से तेजी आ गयी है। किराये के मोर्चे पर हालात किराएदारों के लिए थोड़े चिंताजनक हैं। एनारॉक के अध्यक्ष संतोष कुमार के मुताबिक, 2024 की पहली तिमाही में, बड़े शहरों के प्रमुख इलाकों में किराए में 4 से 9 फीसदी तक की बढ़ोतरी हुई है।आमतौर पर सालाना 5-10 फीसदी की बढ़ोतरी होती है, लेकिन इस बार का उछाल ज्यादा है। ये भले ही मकान मालिकों के लिए अच्छी खबर है, लेकिन किरायेदारों की जेब पर बोझ डाल सकता है। बेंगलुरु में किराये में सबसे ज्यादा उछाल देखा गया है। पिछली तिमाही के मुकाबले यहां एक स्टैंडर्ड 2 इऌङ फ्लैट के किराये में 8 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। 2022 के मुकाबले तो ये बढ़ोतरी और भी ज्यादा है, कुछ इलाकों में तो 40 फीसदी या उससे भी ज्यादा किराया बढ़ गया है। सरजापुर रोड में अब 2 बीएचके फ्लैट का किराया 34000 रुपये सरजापुर रोड जैसे इलाके, जहां 1000 वर्ग फुट का एक स्टैंडर्ड 2 बीएचके फ्लैट पिछले तिमाही में 31,600 रुपये में मिलता था, वहां अब किराया 34,000 रुपये हो गया है। ये 8% की बढ़ोतरी है। व्हाइटफील्ड में भी यही कहानी है, जहां किराया 30,200 रुपये से बढ़कर 32,500 रुपये हो गया है। और ये तो सिर्फ कुछ महीनों की बात है। 2022 के अंत से तुलना करें, तो बेंगलुरु के कुछ इलाकों में किराया 40% या उससे भी ज्यादा बढ़ गया है। हालांकि ये ट्रेंड सिर्फ बेंगलुरु तक सीमित नहीं है, दूसरे बड़े शहरों में भी किराया बढ़ रहा है, लेकिन बेंगलुरु जैसी तेजी से नहीं। दिल्ली एनसीआर में नोएडा सेक्टर 150 में बढ़ा सबसे ज्यादा किराया एनसीआर में नोएडा के सेक्टर 150 में किराया 9% और दिल्ली के द्वारका में 6% बढ़ गया है। मुंबई में भी चेंबूर और मुलुंड जैसे इलाकों में किराया 4% बढ़ा है। चेंबूर की बात करें तो वहां पिछली तिमाही में 60,000 रुपये महीने का किराया अब 62,500 रुपये हो गया है। कोलकाता में किराये में सबसे कम बढ़ोतरी देखी गई है, राजारहाट इलाके में सिर्फ 3% की मामूली बढ़ोतरी हुई है। हैदराबाद में हालांकि थोड़ा ज्यादा उछाल देखा गया है, वहां हाईटेक सिटी और गाचीबोवली जैसे इलाकों में किराया 5% बढ़ा है। किराये में राहत की उम्मीद फिलहाल नहीं एनारॉक के अध्यक्ष संतोष कुमार का कहना है कि फिलहाल किराये में बढ़ोतरी का ट्रेंड कम होने का कोई संकेत नहीं है, बल्कि अगले कुछ महीनों में इसमें और तेजी आने की आशंका है। इसकी वजह ये है कि आमतौर पर वित्तीय वर्ष की पहली दो तिमाहियों में किराये की गतिविधियां ज्यादा होती हैं।

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