एबीएन सेंट्रल डेस्क। आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक एवं दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने कहा कि महंगाई कम करने और रोजगार देने वाला प्रधानमंत्री चाहिए जो हमारी समस्याओं का समाधान करे, देश को तरक्की के रास्ते पर लेकर जाये। श्री केजरीवाल ने बुधवार को नयी दिल्ली लोकसभा से इंडिया गठबंधन के प्रत्याशी सोमनाथ भारती के समर्थन में पांच नुक्कड़ सभाएं की। इस दौरान कहा कि देश को महंगाई कम करने और रोजगार देने वाला प्रधानमंत्री चाहिए। हमें ऐसा प्रधानमंत्री चाहिए जो हमारी समस्याओं का समाधान करे, हमारे देश को तरक्की के रास्ते पर लेकर जाए। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी रोजगार और महंगाई पर कभी बात ही नहीं करते हैं इसलिए पूरे देश के लोगों में भारी गुस्सा है। चार जून को अच्छे दिन आने वाले हैं और श्री मोदी जाने वाले हैं।उन्होंने कहा कि देश की जनता इस समय महंगाई से त्रस्त है। हमें ऐसा प्रधानमंत्री चाहिए जो पेट्रोल, डीजल के दाम कम करने के बारे में सोचे, लोगों के गैस के दाम कम करने के बार में सोचे। दूध, सब्जियां, दाल सस्ता करे। लोगों को रोजगार देने के बार में सोचे। श्री मोदी रोजगार और महंगाई की बात ही नहीं करते हैं। केवल जेल में डालने के बारे में सोचते हैं। क्या ऐसे देश चलायेंगे? पिछले एक हफ्ते में पंजाब, हरियाणा, कुरुक्षेत्र, लखनऊ, महाराष्ट्र भिवंडी, मुंबई और जमशेदपुर गया। हर जगह लोग महंगाई से त्रस्त हैं। लोगों की नौकरियां चली गयीं, लोगों के पास रोजगार नहीं है। लोग बहुत ज्यादा नाराज हैं। आप नेता ने कहा कि प्रधानमंत्री जानते हैं कि वह हार रहे हैं इसलिए ये बुरी तरह से बौखलाये हुए हैं और अजीब-अजीब से भाषण दे रहे हैं।
तकनीकी तंत्र की हकीकतएबीएन सेंट्रल डेस्क। भारत में 2017 के राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय के सर्वेक्षण में, केरल में सबसे अधिक 96 प्रतिशत साक्षरता दर दर्ज की गयी थी और सबसे कम साक्षरता दर बिहार में 71 प्रतिशत थी। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के लिए 2024 के चुनाव अभियान की एक बड़ी चुनौती यह है कि उसे विपक्षी दलों की ओर से प्रधानमंत्री पद का कोई ऐसा दावेदार नहीं मिल रहा है जिसके खिलाफ मोर्चा खोला जा सके। अगर ऐसा होता तब भाजपा को विपक्ष के प्रधानमंत्री पद के दावेदार के खिलाफ जोरदार तरीके से मुहिम छेड़ने में काफी आसानी हो जाती। वर्ष 2014 से ही भाजपा की लोक सभा की चुनावी रणनीति, एक व्यक्ति पर केंद्रित राष्ट्रपति शैली वाले प्रचार अभियान पर आधारित रही है। यह बेहद सामान्य रणनीति है लेकिन स्टार प्रचारक के होने का फायदा भी पार्टी को मिलता रहा है। हालांकि पार्टी के पक्ष में यह बात ज्यादा अच्छी होती अगर सामने विपक्ष का कोई कमजोर प्रधानमंत्री उम्मीदवार होता। ऐसे में इस उम्मीदवार को लक्षित करना और तुलनात्मक रूप से कमतर दिखाना भी सरल हो जाता। लेकिन इस चुनाव में ऐसा कोई एक व्यक्ति सामने नहीं हैं जिसे सत्ता पक्ष के मुख्य चेहरे के बरक्स खड़ा कर निशाना साधा जाये। विपक्ष से जुड़े किसी ऐसे व्यक्ति के अभाव में सत्ता पक्ष के स्टार प्रचारक को मतदाताओं से स्थानीय मुद्दों पर बात करने के लिए बाध्य होना पड़ रहा है, जबकि क्षेत्रीय दल कई स्पष्ट और भावनात्मक तर्क पेश करने में सक्षम हैं। विपक्ष थोड़ा बेहतर तरीके से ऐसे संगठित है कि कई क्षेत्रीय दल अपने गढ़ में अच्छी टक्कर देने के लिए तैयार हैं और कांग्रेस भी द्विपक्षीय गठबंधन में कनिष्ठ साझेदार बनने के लिए तैयार है। इसी वजह से भाजपा के स्टार प्रचारक को वास्तविक मुद्दों के बजाय अक्सर निजी हमले का सहारा लेना पड़ रहा है। मिसाल के तौर पर उन्होंने अपमानजनक लहजे में किसी एक राज्य के मुख्यमंत्री के लिए दावा किया कि मुख्यमंत्री को जिले के मुख्यालय का नाम नहीं पता है और दूसरी क्षेत्रीय पार्टी को फर्जी बच्चा भी कह दिया। आखिरी दो लोक सभा चुनावों के मुद्दे स्पष्ट और सामान्य थे जिसे भाजपा ने अच्छी तरह सोच-समझकर तैयार करते हुए पेश भी किया। वर्ष 2014 में इस मुद्दे को जोर-शोर से उठाया गया कि भाजपा के मुख्य उम्मीदवार ऐसे सुधारक हैं जो भ्रष्टाचार खत्म कर वृद्धि की रफ्तार बढ़ायेंगे। हकीकत चाहे जो भी हो लेकिन यह कथ्य (नैरेटिव) लोगों को बेहद भाया। वर्ष 2019 में भी देश की सुरक्षा करने वाले जैसी बातें लोगों ने स्वीकार कीं। इसी वजह से भाजपा चुनावी लहर में दो बार जीतने में सक्षम रही। पार्टी की वोट हिस्सेदारी में वर्ष 2009 (22 फीसदी) और 2019 (37 फीसदी) के बीच 15 प्रतिशत की वृद्धि हुई और इसकी सीटें भी 116 (वर्ष 2009) से बढ़कर 303 (वर्ष 2019) हो गयी। वर्ष 2024 के चुनाव का सामान्य मुद्दा, बेरोजगारी और आर्थिक संकट से जुड़ा है और भाजपा इस स्थिति में नहीं है कि वह दावा कर सके कि उसके पास इसका कोई ठोस समाधान है क्योंकि पार्टी 10 साल से सत्ता में है और वह इन मुद्दों पर कोई सार्थक पहल करने में सक्षम नहीं हो पाई है। भारत इतना विविधताओं और असमानताओं से भरा हुआ है कि इसे किसी सरल कथ्य या बयान से नहीं समझाया जा सकता। यहां दुनिया के किसी भी देश से ज्यादा मान्यता प्राप्त भाषाएं हैं। यहां की जलवायु तथा भौगोलिक दशाओं में भी काफी विविधता है। इसके अलावा आर्थिक और मानव विकास सूचकांक में भी बड़ा अंतर है। विविधता के मामले में इसकी केवल यूरोपीय संघ के साथ तुलना की जा सकती है जो एक महाद्वीप में फैले 27 अलग-अलग संप्रभु राष्ट्रों का समूह है। हालांकि यूरोपीय संघ भी भारत की तुलना में कम विविधता वाला है। वहां आर्थिक असमानता भी कम होने के साथ ही मानव विकास सूचकांक का दायरा भी कम है। असमानता मापने के लिए प्रति व्यक्ति आय और साक्षरता दर को आधार माना जा सकता है। भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के अनुमान के अनुसार, वित्त वर्ष 2022-23 में बिहार (सबसे गरीब राज्य) की प्रति व्यक्ति आय लगभग 48,000 रुपये सालाना थी जबकि गोवा में यह सालाना लगभग 4.7 लाख रुपये थी जो देश के शीर्ष और सबसे निचले मानकों वाले राज्यों के बीच लगभग 10:1 के अंतर को दशार्ता है। राष्ट्रीय स्तर पर प्रति व्यक्ति औसत आमदनी लगभग 1.48 लाख रुपये थी। यूरोपीय संघ के देशों में बुल्गारिया सबसे गरीब है जिसकी प्रति व्यक्ति आय 16,900 डॉलर है वहीं लक्जमबर्ग सबसे अमीर है, जिसकी प्रति व्यक्ति आय 1,31,380 डॉलर है। यूरोपीय संघ की औसत प्रति व्यक्ति आय 36,000 डॉलर है। पूरे यूरोपीय संघ में साक्षरता दर करीब शत-प्रतिशत है। भारत में 2017 के राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय के सर्वेक्षण में, केरल में सबसे अधिक 96 प्रतिशत साक्षरता दर दर्ज की गयी थी और सबसे कम साक्षरता दर बिहार में 71 प्रतिशत थी।इसी तरह जीवन प्रत्याशा, शिशु मृत्यु दर, कुल प्रजनन दर आदि में भी इतना ही बड़ा अंतर हैं। सिक्किम, नगालैंड, मिजोरम और केरल (प्रत्येक हजार में 5 से कम) में शिशु मृत्यु दर जर्मनी के बराबर है जबकि असम, उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश में शिशु मृत्यु दर 40 से ऊपर है जो लगभग सूडान के समान स्तर पर है। इसका मतलब है कि राष्ट्रीय स्तर पर सामान्य कथ्य के अनुरूप की गई नीतिगत पहल ज्यादा उपयोगी नहीं होती है। उदाहरण के लिए पूरे भारत में शिशु मृत्यु दर को कम करने के लिए एक समान तरीके से बनायी गयी योजना निश्चित रूप से बेतुकी होगी। कई मौजूदा कल्याणकारी योजनाओं में भी इसी तरह के बेतुकेपन की झलक मिलती है।चुनावी लहर सामान्य बयानों और कथ्यों से बनायी जा सकती है। लेकिन भारत को सामान्य बयानों और कथ्यों के आधार पर काम करने वाली एक मजबूत केंद्र सरकार की आवश्यकता नहीं है। इसे राज्यों और क्षेत्रों में क्षेत्रीय दलों के प्रतिनिधित्व वाले एक ऐसे गठबंधन की आवश्यकता है जो असमानताओं का प्रबंधन प्रभावी ढंग से कर सके।
प्रशांत किशोर पर तो बहुत नजर रहती है, पर इस अमेरिकी पोल पंडित ने बताया, भाजपा को मिल रही कितनी सीटेंइयॉन ब्रेमर दुनिया के जानेमाने पॉलिटिकल साइंटिस्ट हैंएबीएन सेंट्रल डेस्क। लोकसभा चुनाव अब अंतिम दौर में पहुंच चुका है। इस बीच देश-विदेश के जानेमाने चुनावी पंडित सीटों को लेकर अनुमान लगाने लगे हैं। एक दिन पहले ही देश के जानेमाने चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर ने भाजपा को मिलने वाली संभावित सीटों के बारे में अनुमान जताया था। अब इस बारे में एक अमेरिकी चुनावी पोल के जानकार का अनुमान सामने आ गया है। उन्होंने भाजपा को बीते 2019 से अधिक सीटें दी हैं। ऐसे में लगता है कि इस बार एनडीए का 400 पार का नारा काफी हद तक सही साबित हो जाएगा। इस पॉलिटिकल साइंटिस्ट और चुनाव विशेषज्ञ का नाम इयॉन ब्रेमर है। उन्होंने समाचार चैनल एनडीटीवी प्रॉफिट से बातचीत में यह दावा किया है कि 2024 के लोकसभा चुनाव में भाजपा को 305 (+/-10) सीटें मिलेंगी। यानी भाजपा को अधिकतम 315 और न्यूनमता 295 सीटें मिल सकती हैं। इयॉन ब्रेमर यूरेशिया ग्रुप के संस्थापक हैं। यह एक रिस्क एंड रिसर्च कंसल्टेंसी कंपनी है। उन्होंने भारत के आम चुनाव के बारे में कहा कि वैश्विक नजरिये से देखें तो केवल भारत का आम चुनाव पूरी तरह स्टैबल दिख है। वरना हर चीज यहां तक कि इस साल नवंबर में अमेरिका में होने वाला चुनाव भी समस्याओं से भरा हुआ दिख रहा है। दुनिया में व्यापक अस्थिरताउन्होंने आगे कहा कि हमारे सामने व्यापक स्तर पर मैक्रो-लेवल की जियोपॉलिटिकल अनिश्चितता है और जिस तरह कंपनियां सोचती थीं, वैसा ग्लोबलाइजेशन का भविष्य नहीं दिखा रहा है। यहां तक कि राजनीति खुद ग्लोबल मार्केट प्लैस में घुस आई है। युद्ध, अमेरिका-चीन रिलेशन और अमेरिकी चुनाव ये सभी बड़ी चीजें हैं। उन्होंने कहा कि ये सभी चीजें ठीक तरीके से मैनेज नहीं हो रही हैं और इनका प्रभाव ज्यादा नकारात्मक है। सच्चाई यह है कि राजनीतिक रूप से एक चीज जो स्टैबल दिख रही है वो है भारत का चुनाव। नहीं तो हर एक चीज परेशानी वाली दिख रही है। भारत के चुनाव के बारे में उनके अनुमान को लेकर पूछे गए एक सवाल पर उन्होंने कहा कि यूरेशिय रिसर्च ग्रुप का अनुमान है कि भाजपा 295 से 315 के बीच सीटें जीत सकती है। अगर ऐसा होता है तो यह भाजपा की अब तक की सबसे बड़ी जीत होगी। 2014 के लोकसभाच चुनाव में भाजपा को 282 और 2019 में 303 सीटें मिली थीं।
बम निरोधक दस्ता मौके पर मौजूदएबीएन सेंट्रल डेस्क। दिल्ली में गृह मंत्रालय को बम की धमकी वाला मेल मिला। अधिकारियों ने बताया कि राष्ट्रीय राजधानी के नॉर्थ ब्लॉक, जहां गृह मंत्रालय सहित कई मंत्रालय हैं, को बुधवार दोपहर को बम से उड़ाने की धमकी मिली। धमकी मिलने के बाद वहां अफरा-तफरी का माहौल बन गया। कार्यालय को जल्द ही खाली कराया गया। दिल्ली पुलिस भी मौके पर मौजदू है और हमारत की तलाशी अभियान में जुटी हुई है। पुलिस सूत्रों ने बताया कि दमकल गाड़ियों और खोजी कुत्तों के साथ बम निरोधक दस्ते की एक टीम को घटनास्थल पर भेजा गया है।दिल्ली फायर सर्विस ने कहा कि नई दिल्ली इलाके में नॉर्थ ब्लॉक स्थित पुलिस कंट्रोल रूम से बम की धमकी वाला मेल मिला था। बुधवार दोपहर करीब साढ़े तीन बजे धमकी भरा मेल मिलने पर पुलिस ने इमारत की गहन तलाशी ली, लेकिन कुछ नहीं मिला। ताजा धमकी दिल्ली के कई अस्पतालों, इंदिरा गांधी अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे और तिहाड़ जेल को बम धमकी वाले ईमेल से निशाना बनाये जाने के कुछ दिनों बाद आई है, जिसमें उनके परिसर में विस्फोटकों की मौजूदगी का आरोप लगाया गया था। हालांकि, दिल्ली पुलिस की बाद की जांच से पता चला कि धमकियां झूठी थीं। लगभग 20 दिन पहले दिल्ली-एनसीआर के 150 से अधिक स्कूलों को फर्जी धमकी भरे ईमेल मिले, जिसके बाद व्यापक पुलिस प्रतिक्रिया हुई।
एबीएन न्यूज नेटवर्क, गुना। भारत स्काउट एवं गाइड जिला संघ गुना के पदेन अध्यक्ष कलेक्टर डॉ सत्येन्द्र सिंह के मार्गदर्शन, जिला आयुक्त आलोक जैन एवं जिला कमीशनर जिला शिक्षा अधिकारी चंद्रशेखर सिसोदिया के नेतृत्व में वार्षिक कार्यक्रम के अनुसार ग्रीष्मकालीन जल सेवा गुना रेल्वे स्टेशन पर स्टेशन चल रही है। जिसमे आज कब कमीशन हरिदत्त एवं रोवर कमीशनर ए के चक्रवती भारत विकास परिषद शाखा गुना के परिषद के सदस्य मनीष भार्गव, आनंद कृष्णानी प्रांतीय संगठन मंत्री, अध्यक्ष घनश्याम सिंह रघुवंशी शाखा सचिव प्रमोद मेहरा, अजय शर्मा, कोषाध्यक्ष नीरज साहू, डीओसी जितेन्द्र ब्रह्मभट्ट यूथ मोटिवेटर एवं लाइफ कोच ने बताया कि जब हमारे स्काउट गाइड के बच्चे और युवा जल सेवा करते है तो पहले लोग जल देने में संकोच फिर जब हम फ्री पानी कहते हैं, तो लोग फिर पानी लेते है हमारा मुख्य लक्ष्य जरनल डिब्बे रहते है।उसके बाद स्लीपर आज कुशाग्र ब्रह्मभट्ट ने बताया कि एक अंकल ने पानी की चार वोटल भरवाकर पांच सौ रुपये दिये तब कुशाग्र ने कहा कि अंकल हमे पैसे नही आशीर्वाद दीजिए। प्रखर समाज सेवी डॉ एस एन सुब्बाराव जी संचालित राष्ट्रीय युवा योजना इकाई गुना की ओर से राधिका धाकड़ ने बताया राष्ट्रीय युवा योजना के संस्थापक डॉ एस एन सुब्बाराव जी हमेशा कहते थे एक घंटा देश को और एक घंटा देह को देना चाहिए। एन वाय पी की ओर से आज की जल सेवा मे प्रियंका धाकड़, नंदनी भार्गव, शारदा धाकड़, कुशाग्र ब्रह्मभट्ट, जितेन्द्र धाकड़, पुष्कर ब्रह्मभट्ट शिवा खंगार, प्रताप रजक, राजपाल जाटव, रोहित जाटव, रिंकू राठौर, मोहित जाटव, साजिया खान, राधिका धाकड़, स्काउट गाइड प्रमोद रघुवंशी, रत्नेश नामदेव, गोपाल शर्मा, कविता शिवहरे, सुरेन्द्र शर्मा, रवि पलिया, नरेंद्र सिंह, राजीव शर्मा अपनी सेवा दे रहे हैं।
एबीएन न्यूज नेटवर्क, गुना। भीषण गर्मी के इस दौर में आज हर कोई बेबस नजर आ रहा है, लोगों की दिनचर्या पूरी तरह से बदल चुकी है। प्रचंड गर्मी अपने चरम पर है, दिन के समय बाजार में लोगों की आवाजाही बेहद कम हो चुकी है। ऐसे विकट मौसम में भी कोई है जो निरंतर अपने कर्तव्य पर तैनात होकर पूरी निष्ठा से कार्य कर रहे हैं। इस विषय पर विस्तार से जानकारी देते हुए राष्ट्रवादी संघ के अध्यक्ष एडवोकेट मनोज सिंह राठौड़ ने बताया कि विगत कुछ दिनों से तापमान निरंतर अपने उच्चतम स्तर पर पहुंच रहा है। ऐसे में जनसामान्य की दिनचर्या पूरी तरह से बदल चुकी है। दोपहर के समय लोगों का बाजार में निकलना बेहद कम हो चुका है। ऐसी भीषण गर्मी की स्थिति में भी शहर के विभिन्न चौराहों और प्रमुख मार्गों पर तैनात पुलिसकर्मी शहर की यातायात व्यवस्था को सुचारू रूप से संचालित करने का कार्य कर रहे हैं। ऐसे कर्तव्यनिष्ठ पुलिस कर्मियों के हौंसले की सराहना करते हुए इन्हें सम्मानित करने और दोपहर की भीषण गर्मी से राहत देने की मंशा से राष्ट्रवादी संघ की ओर से शहर के हनुमान चौराहा, जय स्तंभ चौराहा, तेलघानी चौराहा, अंबेडकर चौराहा, सुगन चौराहा, निचला बाजार चौराहा, और कुशमौदा चौकी पहुंचकर पुलिस कर्मियों को शीतल जल, फल, और सूती गमछा प्रदान कर सम्मानित किया गया। और उनके सहयोग के लिए सदैव कंधे से कंधा मिलाकर सामाजिक व्यवस्था बनाने में सहयोग का आश्वासन दिया गया।मौके पर राष्ट्रवादी संघ की ओर से राष्ट्रवादी संघ के अध्यक्ष मनोज सिंह राठौड़ एडवोकेट, उपाध्यक्ष कप्तान राव देशमुख, महासचिव कमल अस्थाना, कोष एवं विधि प्रमुख धर्मेन्द्र साहू, जिला अध्यक्ष दीपक कुशवाह, गोपाल ठेकेदार, नगर अध्यक्ष रजनीश कश्यप, अभिनय मोरे, नैतिक जादौन, राजा पंत, पलाश सूद, देवेंद्र साहू आदि राष्ट्रवादी संघ के सदस्य उपस्थित रहे।
अमित शाह ने बताया, केजरीवाल के चुनाव प्रचार पर कही बड़ी बातअमित शाह ने एक इंटरव्यू में बहुमत नहीं आने के बाद का प्लान बतायाएबीएन सेंट्रल डेस्क। लोकसभा चुनाव के बीच देश के गृह मंत्री अमित शाह ने न्यूज एजेंसी एएनआई को एक इंटरव्यू दिया है। इस दौरान उन्होंने कई सवालों का जवाब दिया है। क्या बीजेपी के पास बहुमत के आंकड़े तक नहीं पहुंचने की स्थिति में कोई प्लान बी है? अमित शाह ने इस सवाल का काफी दिलचस्प जवाब दिया है। उन्होंने कहा है कि ह्यप्लान बी तभी बनाने की जरूरत है, जब प्लान ए (सफल होने) की 60% से कम संभावना हो। मुझे यकीन है कि पीएम मोदी प्रचंड बहुमत के साथ सत्ता में आयेंगे। दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल के चुनाव प्रचार पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि एक मतदाता के रूप में, मेरा मानना है कि वह जहां भी जायेंगे लोग शराब घोटाले को याद करेंगे। कई लोगों को तो बड़ी बोतल दिखेगी। दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के अगर आप मुझे वोट देंगे तो मुझे जेल नहीं जाना पड़ेगा। वाले बयान पर कहा कि इससे बड़ी सुप्रीम कोर्ट की कोई अवमानना नहीं हो सकती है। क्या सुप्रीम कोर्ट (चुनावी) जीत और हार पर फैसला करेगा? भाजपा के 400 पार और संविधान में बदलाव की अटकलों पर गृह मंत्री ने कहा कि हमारे पास पिछले 10 सालों से संविधान बदलने के लिए बहुमत है। ऐसा कभी नहीं किया। बहुमत का दुरूपयोग का इतिहास मेरी पार्टी का नहीं है। बहुमत के दुरूपयोग का इतिहास, इंदिरा गांधी के समय कांग्रेस ने किया। लेकिन हां, हम 400 सीटें चाहते हैं क्योंकि हम देश की राजनीति में स्थिरता लाना चाहते हैं। क्योंकि हम देश की सीमाओं को सुरक्षित रखना चाहते हैं हम यूसीसी लाना चाहते हैं। हमने 10 सालों में अपनी सीटों का उपयोग कैसे किया? अनुच्छेद 370 को निरस्त करने में, तीन तलाक को खत्म कर राम मंदिर का निर्माण। यह क्लीन चिट नहीं- अमित शाह शराब नीति मामले में दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल को अंतरिम जमानत पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा, मैं सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर कोई टिप्पणी नहीं करना चाहता। लेकिन जिस तरह से आप, कुछ मीडिया समूह और ज्यादातर पत्रकार इसे केजरीवाल की जीत मानते हैं। मैं इसे थोड़ा स्पष्ट करना चाहूंगा, यह क्लीन चिट नहीं है। आरोपपत्र अभी भी सर्वोच्च न्यायालय के समक्ष है, यदि उन्हें इतना भरोसा था, तो उन्हें सत्र न्यायालय के समक्ष इसे रद्द करने की प्रार्थना करनी चाहिए थी।
प्रशांत किशोर ने बताया कितनी सीट जीतेगी भाजपा, बोले- पीएम मोदी के खिलाफ कोई नाराजगी नहीं इंडिया टुडे से एक्सक्लूसिव बात करते हुए प्रशांत किशोर (पीके) ने कहा कि भाजपा के लिए अपने दम पर 370 सीटें हासिल करना असंभव है और अनुमान जताया कि पार्टी को लगभग 300 सीटें मिलेंगी। पीके के मुताबिक भाजपा की सीटों में दक्षिण और पूर्व राज्यों से (बिहार, बंगाल, ओडिशा, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु और केरल) बढ़ोतरी देखने को मिलेगीएबीएन सेंट्रल डेस्क। पॉलिटिकल स्ट्रैटेजिस्ट प्रशांत किशोरने इंडिया टुडे से खास बातचीत की। इस दौरान उन्होंने कहा कि भाजपा को लोकसभा चुनाव में लगभग 300 सीटें मिलने की संभावना है, साथ ही उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ कोई व्यापक गुस्सा नहीं है। इंडिया टुडे से एक्सक्लूसिव बात करते हुए प्रशांत किशोर ने कहा कि बीजेपी के लिए अपने दम पर 370 सीटें हासिल करना असंभव है और अनुमान जताया कि पार्टी को लगभग 300 सीटें मिलेंगी। राहुल गांधी को प्रशांत किशोर ने क्या सलाह दी प्रशांत किशोर ने कहा, जिस दिन से पीएम मोदी ने कहा कि बीजेपी को 370 सीटें मिलेंगी और एनडीए 400 का आंकड़ा पार करेगा, मैंने कहा कि यह संभव नहीं है। यह सब कार्यकर्ताओं का मनोबल बढ़ाने के लिए नारेबाजी है। बीजेपी के लिए 370 सीटें हासिल करना असंभव है, लेकिन यह भी निश्चित है कि पार्टी 270 के आंकड़े से नीचे नहीं जा रही है। मुझे लगता है कि भाजपा पिछले लोकसभा चुनाव में मिली संख्या के बराबर ही सीटें हासिल करने में सफल रहेगी, जो कि 303 सीटें या शायद उससे थोड़ी बेहतर है। भाजपा को कहां फायदा-कहां नुकसान 300 सीटों के अनुमान पर विस्तार से बताते हुए उन्होंने कहा कि भाजपा को लोकसभा चुनाव में उत्तर और पश्चिम क्षेत्रों में कोई भौतिकवादी नुकसान नहीं हो रहा है, जबकि दक्षिण और पूर्व (बिहार, बंगाल, ओडिशा, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु और केरल) में उसकी सीटों में वृद्धि देखी जाएगी। क्या कहता है पीके का गणितप्रशांत किशोर ने बताया कि 2019 के चुनावों में भाजपा ने अपनी 303 सीटें कहां हासिल कीं। उन 303 सीटों में से 250 उत्तर और पश्चिम क्षेत्रों से आयीं। ऐसे में मुख्य सवाल यह है कि क्या भाजपा को इन क्षेत्रों में जरूरी नुकसान (50 या अधिक सीटें) का सामना करना पड़ रहा है? वर्तमान में पूर्व और दक्षिण क्षेत्र में, भाजपा के पास लोकसभा में लगभग 50 सीटें हैं। इसलिए माना जा रहा है कि पूर्व और दक्षिण क्षेत्रों में भाजपा की हिस्सेदारी 15-20 सीटों पर बढ़ने की उम्मीद है, जबकि पार्टी को उत्तर और पश्चिम में कोई खासा नुकसान नहीं हो रहा है।क्या महाराष्ट्र में भाजपा को हो रहा नुकसानइस पर प्रशांत किशोर ने कहा कि विपक्ष यह मानकर चृल रहा है कि वे महाराष्ट्र में 20 से 25 सीटें जीतेंगे। ऐसे में अगर विपक्ष 25 सीटें जीत भी जाता है तो भी भाजपा को कोई नुकसान नहीं पहुंचा पायेगा। ऐसा इसलिए क्योंकि वर्तमान में महाराष्ट्र में भाजपा की 48 में से सिर्फ 23 सीटें ही हैं। ऐसे में विपक्ष की बढ़ोतरी से भी भाजपा को कोई नुकसान नहीं है। वहीं यूपी में भाजपा का नंबर घटने पर पीके ने कहा, आप याद कीजिए कि 2014 के मुकाबले बिहार और यूपी मिलाकर भाजपा को करीब 25 सीटों का नुकसान 2019 में झेलना पड़ा था। 2019 में बसपा और सपा के साथ लड़ने से भाजपा 73 से घटकर 62 पर आ गयी थी। तो ऐसे में अगर विपक्ष यह मानकर चलेगा कि इस बार भाजपा को 20 सीटों का नुकसान हो रहा है तो ऐसे में भी विपक्ष भाजपा को बहुत ज्यादा चोट नहीं पहुंचा पाएगा। क्योंकि 2019 में भाजपा आलरेडी 18 सीटें हारकर भी अपना आंकड़ा बंगाल से बढ़ाने में सफल रही थी। पीके ने सुझाव दिया कि विपक्ष को जरूरत है कि वो भाजपा की 40 सीटों का नुकसान करे तब जाकर उन्हें फायदा होगा।राजस्थान या हरियाणा में 5-7 सीट के हारने से भाजपा को होगा भारी नुकसानराजस्थान और हरियाणा में भाजपा के नुकसान पर बोलते हुए प्रशांत किशोर ने कहा, 2-5 सीटों का नुकसान ही हो सकेगा। लेकिन ऐसा कोई राज्य नहीं है जिसमें विपक्ष बंपर बढ़ोतरी करते हुए दिख रहा हो। पीके के मुताबिक पश्चिम और उत्तर के क्षेत्रों में भाजपा को अधिकतम भी 50 सीटों का नुकसान नहीं है। बल्कि इससे इतर पूर्व और दक्षिण के क्षेत्रों में इतनी बढ़ोतरी मिलेगी जिससे कि भाजपा की भरपाई हो सकेगी। क्यों हारती हैं सरकारेंपीके ने कहा कि ऐसा तब होता है जब कि देश के नेता के खिलाफ लोगों में गुस्सा हो। लेकिन मोदी और भाजपा की 10 साल की सरकार को लेकर आम जनमानस में हल्की बहुत नाराजगी जरूर है, लेकिन अबतक ऐसा खुले तौर पर नहीं देखा गया कि इसे सरकार के खिलाफ गुस्सा कहा जा सके। प्रशांत किशोर ने कहा कि हल्की बहुत नाराजगी के बावजूद भी लोगों में अभी ऐसी धारणा नहीं है कि मोदी को हटाना है।वहीं सरकारों के हारने के दूसरे कारण पर जोर देते हुए प्रशांत किशोर ने कहा कि ऐसा तब होता है कि अगर कोई नया आदमी आए और लोगों के मन में उसके प्रति सकारात्म छवि हो। लोगों के मन में नए व्यक्ति को लेकर यह धारणा बन जाए कि ये आकर हमारी स्थिति मोदी जी से भी बेहतर कर देगा, तब लोग बदलाव के मूड में आते हैं। लेकिन फिलहाल जनता के मन में ऐसी स्थिति नहीं है कि उन्हें बदलाव चाहिए और ना ही ऐसी इमेज सामने है कि नया व्यक्ति इनसे बेहतर काम करेगा।मोदी 3.0 को कैसे देखते हैं प्रशांत किशोर वहीं मोदी 3.0 पर बात करते हुए प्रशांत किशोर ने कह, पीएम मोदी के संभावित तीसरे कार्यकाल में राज्यों की वित्तीय स्वायत्तता में कटौती करने की कोशिश की जायेगी। सरकार द्वारा अपने तीसरे कार्यकाल में लिए जा सकने वाले कुछ महत्वपूर्ण फैसलों के बारे में बात करते हुए, प्रशांत किशोर ने अनुमान जताया, मुझे लगता है कि वे धमाकेदार शुरुआत करेंगे। व्यापक रूप से, सत्ता और संसाधनों का केंद्रीकरण होगा। साथ ही उन्होंने कहा, राज्यों की वित्तीय स्वायत्तता को कम करने की भी एक जरूरी कोशिश की जा सकती है।
तीन साल बाद खुला राज, तो आरोपी गिरफ्तार कमल लोधाएबीएन न्यूज नेटवर्क, गुना। मधुसूदनगढ़ थाना क्षेत्र के ग्राम वापची में तीन वर्ष पूर्व 13 वर्षीय एक नाबालिग बालिका की फांसी पर लटकी लाश की गुत्थी सुलझाकर बालिका की दम घोंटकर हत्या करने उपरांत लाश को फांसी पर लटकाने वाले आरोपी को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है। मधुसूदनगढ़ थाना पुलिस द्वारा घटना के हर पहलू पर बारीकी से जांच की गई एवं साक्षियों के कथन लिये गये। मृतका की पोस्टमार्टम रिपोर्ट की क्यूरी कराये जाने पर डॉक्टर द्वारा अपनी रिपोर्ट में मृतिका के गले पर कोई लिगेचर मार्क नहीं पाया जाना एवं मृतिका को मृत्यु पश्चात फंदे पर लटकाया जाना लेख किया गया। प्रकरण की संपूर्ण मर्ग जांच पर मृतिका की दम घोंटकर हत्या कर लाश को फंदे पर लटकाना पाये जाने पर दिनांक 06 मार्च 2024 को अज्ञात आरोपी के विरूद्ध मधुसूदनगढ़ थाने पर अप.क्र. 35/24 जुर्म धारा 302 के तहत अपराध दर्ज कर विवेचना में लिया गया। पुलिस द्वारा मृतका के भाई धीरज सिंह पुत्र उमराव सिंह लोधी उम्र 23 साल निवासी ग्राम बापची थाना मधुसूदनगढ़ को संदेही मानकर हिरासत में लेकर पूछताछ करने पर उसने पहले तो पुलिस को गुमराह करने की कोशिश की गयी, लेकिन पुलिस द्वारा उसके खिलाफ एकत्रित सबूत उसे बताये गये तो वह एकदम से टूट गया।अपनी बहन के प्रेम-प्रसंग के चलते उसकी हरकतों से परेशान होकर लोक शर्म के कारण गुस्से में आकर घर में मौका पाकर अपनी बहन के नाक-मुंह दबाकर उसे मार देना एवं लाश को फांसी पर लटका देना स्वीकार किया । 13 वर्षीय नाबालिग बालिका की 3 वर्ष पूर्व की गई हत्या के उपरोक्त प्रकरण में पुलिस द्वारा आरोपी धीरज सिंह लोधी को गिरफ्तार कर माननीय न्यायालय पेश किया गया जहां से उसे जेल भेज दिया है। प्रकरण की विवेचना जारी है।
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