प्रधानमंत्री मोदी ने कन्याकुमारी विवेकानंद रॉक मेमोरियल में ध्यान साधना शुरू कीएबीएन सेंट्रल डेस्क। तिरुवनंतपुरम से हेलीकॉप्टर द्वारा यहां पहुंचने के बाद मोदी ने भगवती अम्मन मंदिर में पूजा की और नौका सेवा के जरिये रॉक मेमोरियल पहुंचे तथा ध्यान लगाना शुरू किया। प्रधानमंत्री की ध्यान साधना एक जून तक चलेगी।धोती और सफेद शॉल ओढ़े मोदी ने मंदिर में पूजा-अर्चना की और गर्भगृह की परिक्रमा की। पुजारियों ने एक विशेष आरती की और उन्हें मंदिर का प्रसाद दिया गया, जिसमें एक शॉल और मंदिर के देवता की फ्रेमयुक्त तस्वीर शामिल थी।बाद में, वह राज्य सरकार के जहाजरानी निगम द्वारा संचालित नौका सेवा के जरिये रॉक मेमोरियल पहुंचे और ध्यान मंडपम में ध्यान लगाना शुरू किया। ध्यान लगाना शुरू करने से पहले, मोदी कुछ देर के लिए मंडप की ओर जाने वाली सीढ़ियों पर खड़े रहे।प्रधानमंत्री एक जून को अपनी रवानगी से पहले स्मारक के पास तमिल कवि तिरुवल्लुवर की प्रतिमा को देखने के लिए भी जा सकते हैं। पीएम मोदी उसी स्थान पर दिन-रात ध्यान पर बैठे, जहां स्वामी विवेकानंद ने ध्यान किया था, यानी ध्यान मंडपम में।पीएम मोदी के दौरे के मद्देनजर पूरे जिले में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गयी है। प्रधानमंत्री मोदी उसी स्थान पर दिन-रात ध्यान करेंगे, जहां स्वामी विवेकानंद ने ध्यान किया था। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने तमिलनाडु के कन्याकुमारी में श्री भगवती अम्मन मंदिर में प्रार्थना की।वे 30 मई की शाम से 1 जून की शाम तक ध्यान करेंगे। एक जून को अपनी रवानगी से पहले प्रधानमंत्री मोदी संभवतः तमिल कवि तिरुवल्लुवर की 133 फुट ऊंची प्रतिमा को भी देखने के लिए जा सकते हैं। यह प्रतिमा रॉक मेमोरियल के ठीक बगल में स्थित है।
भारत बन रहा है कैंसर हब डॉ अजय खेमरिया एबीएन सेंट्रल डेस्क। देश में औसतन 2215 लोग रोजाना कैंसर से मौत के मुंह में जा रहे हैं। भारत में चीन के बाद सर्वाधिक मौतें कैंसर से हो रही हैं। आईसीएमआर और राष्ट्रीय कैंसर रजिस्ट्री प्रोग्राम के आंकड़े बताते हैं कि भारत में कैंसर की भयाभहता किस त्रासदपूर्ण तरीके से बढ़ रही है क्योंकि देश के 64 फीसदी मरीज ग्रामीण इलाकों से आ रहे हैं और सार्वजनिक स्वास्थ्य केंद्रों पर व्यवहारिक रूप में कैंसर की पहचान के लिए कोई प्रमाणिक तंत्र ही उपलब्ध नहीं है। संसद में हालिया सरकार ने जो जानकारी दी है उसके अनुसार उत्तरप्रदेश, महाराष्ट्र, बंगाल,तमिलनाडु और राजस्थान देश में कैंसर के बड़े हब के रूप में विकसित हो रहे हैं। पंजाब की हालत पहले से ही इस मामले में खराब है। नेशनल कैंसर रजिस्ट्री के आंकड़ों को ही विश्लेषित किया जाये तो देश में हर साल जितने मरीज कैंसर रोगी के रूप में चिह्नित होते है उनमें से 55 प्रतिशत की मौत हो जाती है।2022 में 1461427 मरीज कैंसर रोगी के रूप में अलग अलग अस्पताल में भर्ती किये गए इनमें से 808558 की मौत हो गयी। इसी तरह वर्ष 2021 में 1426441 में से 789202 एवं 2020 में 1392179 में से 770236 की मौत रिकॉर्ड पर दर्ज हुई हैं। कैंसर पीड़ित में 65 फीसदी मरीज 45 से 60 साल आयुवर्ग की है और खास ध्यान देने वाला तथ्य यह है कि महिलाओं में तीसरी सबसे बड़ी बीमारी को कैंसर के रूप में चिह्नित किया गया है। इन आंकड़ों के इतर जमीनी सच्चाई का एक अहम पहलू यह है कि आज भी देश के मैदानी हलकों में कैंसर की पहचान के लिए सार्वजनिक स्वास्थ्य केंद्र सक्षम नहीं है। जिला चिकित्सालय जैसे सरकारी केंद्रों पर भी कैंसर की पहचान के लिए कोई व्यवस्था नहीं हैं। इन केंद्रों पर न तो आन्कोलॉजी विभाग है और न प्रयोगशाला जहां मरीजों के शुरुआती लक्षणों की जांच की जाती है। मजबूरी में ऐसे मरीजों के लिए जांच हेतु मेडिकल कॉलेज स्तर के शहरी केंद्रों पर जाना पड़ता है इस दौरान कैंसर के प्रारंभिक लक्षण गंभीर होकर शरीर में फैल जाते हैं।त्रासदी यहीं तक सीमित नहीं है क्योंकि बड़े शहरी केंद्रों पर भी कैंसर की पहचान और निदान की जो व्यवस्था है वह बहुत ही खर्चीली हैं। डॉक्टर के प्रारंभिक परामर्श शुल्क मुंबई, दिल्ली, भोपाल, लखनऊ, पटना जैसे शहरों में 800 रुपये से लेकर 5000 तक होते हैं। पीएफटी, ईईजी, सीबीसी, सीटी, पेट स्केन लैब टेस्ट अगर एक साथ हो तो खर्च एक लाख तक आ सकता है। बायोफ्सी के 35000 और एंडोस्कोपी के लिए अस्पताल 10 से 50 हजार तक चार्ज करते हैं। कैंसर का पता चल जाने के बाद साधारण सर्जरी का खर्च 2.80 लाख से 10 लाख आम है। रोबोटिक सर्जरी पर लगभग 5.25 लाख का व्यय आता है। कीमोथेरेपी की एक यूनिट औसतन 18 हजार की पड़ती है। इंटरनल रेडियेशन थेरैपी 61960 से 516337 और एक्सटर्नल रेडियेशन का खर्चा तीन लाख से बीस लाख तक जाता है। इम्यूनोथेरेपी की औसत दर 441000 है। बॉनमोरो ट्रांसप्लांट पर 15 लाख से 48 लाख खर्च होता है। इनके अलावा टॉरगेट एवं हार्मोन थैरेपी का विकल्प भी लाखों में बैठता है। इस खर्च में अस्पताल की रेटिंग्स का खर्चा भी 5 से 15 प्रतिशत अलग से जुड़ जाता है। जाहिर है भारत में कैंसर के इस उपचार को वहन करना केवल आर्थिक रूप से करोड़पति पृष्ठभूमि वाले परिवारों के लिए ही संभव हैं। असल में कैंसर की बीमारी हमारी विकृत जीवनशैली के साथ पारिस्थितिकी तंत्र में आये बदलाब के कारण भी तेजी से बढ़ी है। दूसरी तरफ सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवाओं में कैंसर की नैदानिक सेवा उच्च स्तरीय विशेज्ञयता की मांग करती है। हमारे देश में विशेज्ञता प्राप्त डॉक्टर जिला मुख्यालय को भी अपना परामर्श केंद्र बनाना पसंद नहीं करते हैं। ऐसे में ग्रामीण क्षेत्रों में कैंसर के मानक उपचार की आशा करना आज बेमानी है। यूं तो सरकार ने 1975 में ही कैंसर की बीमारी की रोकथाम के लिए एक राष्ट्रीय कार्यक्रम आरंभ कर दिया था। 1990 में जिला स्तर पर कैंसर नियंत्रण कार्यक्रम भी शुरू हुआ बाद में 2005 औ? 2017 में देश के 100 जिलों में उत्कृष्ट कैंसर संस्थान के लिए पहल हुई। इसके बाबजूद आज कैंसर रोगियों की संख्या लगातार बढ़ रही है। लाखों मरीज तो आरंभिक जांच के लिए भी चिन्हित नही हो पाते हैं और जिस तरह 55 फीसदी मरीज सालाना इस बीमारी से मर रहे हैं, वह बताता है कि हमारे देश में कैंसर की उपचारात्मक प्रविधियां नाकाम साबित हो रही हैं। जहां तक संसाधनों का सवाल है इस मामले में भी हम बहुत पिछड़े हुए है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार प्रति 10 लाख की आबादी पर एक रेडियेशन मशीन की आवश्यकता होती है लेकिन हमारे यहां यह केवल 0.41 ही है। नेशनल मेडिकल काउंसिल के अनुसार देश में कुल 594 एमडी रेडियेशन आन्कोलॉजी की पीजी सीट्स है जिनमें 282 निजी कॉलेजों में हैं। जाहिर है जिस तरह से कैंसर की चुनौती तेज हो रही है उस अनुपात में हमारे पास दक्ष कार्यबल नहीं है। ऐसा नही है कि सरकार इस चुनौती को समझ नहीं रही है, हरियाणा के झज्जर में एक राष्ट्रीय अनुसंधान केंद्र की स्थापना इसी उद्देश्य से की जा रही है ताकि इससे संबंधित शोध और डेटा को ज्यादा प्रामाणिक बनाया जा सके। केंद्र और राज्य सरकारों ने कैंसर को विलंब से ही सही अपनी प्राथमिकतताओं में लेना शुरू भी किया है। पिछले कुछ सालों में सरकारी जिला अस्पतालो में कैंसर यूनिट की स्थापना आरम्भ हुई हैं। मेडिकल कालेजों में भी रोग की पहचान,परीक्षण और निदान के संस्थागत प्रयास संस्थित हुए हैं। लेकिन सबसे बड़ी समस्या कैंसर उपचार का अत्यधिक महंगा होना और इस रोग के आरंभिक लक्षणों का बहुत देर से पता चल पाना। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि मैदानी स्तर पर अभी भी काबिल डॉक्टर उपलब्ध नही है और सरकार ने जिन सार्वजनिक स्वास्थ्य केंद्रों पर जांच के लिए उपकरण उपलब्ध कराएं है उन्हें संचालित करने के लिए एलाइड सर्विसेज की भारी कमी है। अधिकतर सरकारी मैदानी अस्पतालों एवं नये मेडिकल कॉलेजों में उपकरण तो खरीद कर स्थापित कर दिये गये हैं, लेकिन मानव संसाधन के अभाव में यह अनुपयोगी साबित हो रहे हैं। दूसरा महत्वपूर्ण पक्ष है जागरूकता की कमी। कैंसर को लेकर संचारी रोगों की तरह जागरूकता नही है। सरकार को चाहिए कि अन्य बीमारियों की तरह इसे लेकर भी माइक्रो स्तर पर जनजागरूकता सुनिश्चित करने वाले राष्ट्र व्यापी अभियान आरंभ किये जायें। ताकि आरंभिक लक्षणों के साथ ही कैंसर के शरीर में प्राणघातक फैलाव को रोका जा सके। एक हालिया अध्ययन से पता चला है कि अगर आरंभिक स्तर पर ही कैंसर की पहचान कर निदान शुरू किया जाये तो एशिया में करीब 60 फीसदी मौतों को रोका जा सकता है। इसके साथ ही आयुष्मान समेत अन्य बीमा योजनाओं को कैंसर के मामले में समावेशी बनाया जाए। निजी बीमा कम्पनियां अक्सर स्वास्थ्य बीमा करते समय केंसर की अनदेखी करती हैं। आयुष्मान में केवल पांच लाख तक बीमा कवरेज है लेकिन आम तौर पर मरीजों का उपचार इससे ज्यादा होता है ऐसे में आयुष्मान योजना भी कैंसर पीड़ितों को अंतिम रूप से मदद नही कर पा रही है। महिलाओं के लिए भारत में सर्वाइकल कैंसर सबसे बड़ी चुनौती है इसका उपचार आसान हो सकता है अगर 14 साल तक की बालिकाओं के मध्य पाठ्यक्रम स्तर पर जागरूकता सुनिश्चित की जाये। इसी तरह मुख और गले का कैंसर पुरुषों में सर्वाधिक देखा जाता है इसके लिए सरकार को तंबाकू खासकर सिगरेट और गुटखे पर मौजूदा करा रोपण की स्लैब को चार गुना बढ़ाने में कंजूसी नही करनी चाहिए। जागरूकता और कैंसर फैलाव वाले कारकों पर सख्ती के साथ सरकार कैंसर की रोकथाम पर कारगर साबित हो सकती है। साथ ही दक्ष मानव संसाधन खासकर सहबद्ध सेवाओं को विकसित करने के लिए भी चरणबद्ध ढंग से मेडिकल कॉलेजों को केंद्र बना सकती है। (लेखक, वरिष्ठ स्तंभकार हैं।)
इंडिगो की बंपर सेलइंटरनेशनल टिकट भी मिल रही सस्ते में एबीएन सेंट्रल डेस्क। इंडिगो सेल 29 मई से शुरू हो चुकी है और 31 मई तक चलेगी। इन कम किरायों का लाभ उठाने के लिए इसी अवधि में अपनी टिकट बुक कर लें। भारत की प्रमुख एयरलाइन इंडिगो ने घरेलू और अंतरराष्ट्रीय उड़ानों पर शानदार डील्स देने वाली सीमित समय की सेल की घोषणा की है। इस सेल के तहत घरेलू उड़ानों के लिए किराया मात्र 1,199 से शुरू हो रहा है और अंतरराष्ट्रीय यात्राओं के लिए 4,499 से। आप इस सेल का लाभ उठाकर गर्मियों की छुट्टियों के लिए कम खर्च के साथ निकल सकते हैं। सेल 29 मई से शुरू हो चुकी है और 31 मई तक चलेगी। इन कम किरायों का लाभ उठाने के लिए इसी अवधि में अपनी टिकट बुक कर लें! ज्यादा बचत: एयरलाइन पसंदीदा सीट चुनने के शुल्क पर भी 20% तक की विशेष छूट दे रही है। कम दाम में अपनी पसंद की सीट चुनें और आराम से यात्रा करें! आप अतिरिक्त लेगरूम वाली सीट या खिड़की वाली सीट चुन सकते हैं। ये कम दाम एयरपोर्ट चार्ज, सरकारी टैक्स और शुल्कों पर लागू नहीं होते हैं। साथ ही, इस आफर के तहत मिलने वाली स्पेशल फेयर टिकट सीमित संख्या में ही उपलब्ध हैं और इन्हें देने का पूरा अधिकार इंडिगो के पास है। इंडिगो के ग्लोबल सेल्स हेड विनय मल्होत्रा ने कहा- हम घरेलू और अंतरराष्ट्रीय उड़ानों पर इस सीमित समय की बिक्री की घोषणा करके बहुत खुश हैं। यह पहल किफायती किराये, समय पर उड़ान और पूरे नेटवर्क पर विनम्र और परेशानी मुक्त सेवा प्रदान करने की हमारी कमिटमेंट को मजबूत करती है। एयरलाइन ने बताया है कि पिछले साल की समान अवधि के मुकाबले अप्रैल में उसके मार्केट शेयर में 10 बेसिस पॉइंट (0.1%) की बढ़ोतरी हुई है। यह भारत में सबसे बड़ी एयरलाइन के रूप में उनकी स्थिति को मजबूत करता है, जिसके पास इस समय 60.6% का बाजार हिस्सा है। इसके अलावा, इंडिगो ने सिर्फ अप्रैल महीने में ही 80 लाख यात्रियों को सफलतापूर्वक अपनी डेस्टिनेशन तक पहुंचाया, जो भारतीय विमानन उद्योग में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका को दर्शाता है।
अगले 6 सालों में मुंबई में बनेंगी 34% और गगनचुंबी बिंल्डिंगगगनचुंबी इमारतों की संख्या बढ़ने के पीछे मुख्य कारण पिछले दशक में आबादी में तेजी से वृद्धि और फ्लोर स्पेस इंडेक्स सीमा का बढ़ना हैएबीएन सेंट्रल डेस्क। मुंबई महानगरीय क्षेत्र में इस समय 40 मंजिलों से ज्यादा वाली 154 गगनचुंबी इमारतें हैं और अनुमान है कि 2030 तक यह संख्या 34 प्रतिशत बढ़कर 207 हो जायेगी। यह जानकारी रियल एस्टेट कंसल्टेंसी एनारॉक द्वारा गुरुवार को जारी किये गये आंकड़ों के अनुसार है। इस रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि कोविड-19 महामारी के बाद से ज्यादातर अन्य शहरों में गगनचुंबी इमारतों की संख्या में गिरावट आयी है, लेकिन मुंबई महानगरीय क्षेत्र इस मामले में अपवाद है। गगनचुंबी इमारतों की संख्या बढ़ने के पीछे मुख्य कारण पिछले दशक में आबादी में तेजी से वृद्धि और फ्लोर स्पेस इंडेक्स सीमा का बढ़ना है। शहर में किसी जमीन के प्लॉट पर अधिकतम स्वीकृत निर्माण क्षेत्र है। इसके अलावा, राज्य सरकार ने 2019 में शहर में सभी आवासीय और व्यावसायिक परियोजनाओं के लिए दो साल के लिए प्रीमियम कम कर दिया, जिससे डेवलपर्स को राहत मिली।एनारॉक ग्रुप के चेयरमैन अनुज पुरी ने कहा कि डेवलपर्स ने जाहिर तौर पर इस फैसले का स्वागत किया, क्योंकि इसने निर्माण लागत में लगने वाले एक महत्वपूर्ण खर्च फ्लोर स्पेस प्रीमियम को आवासीय भवनों के लिए 25 प्रतिशत तक कम कर दिया। कुल मिलाकर निर्माण लागत कम होने और मांग अधिक होने के कारण डेवलपर्स को और अधिक ऊंची इमारतें बनाने के लिए प्रोत्साहित किया गया।गगनचुंबी इमारतों के विकास से अक्सर शहरों में भीड़ कम करने में मदद मिलती है। साथ ही, इन इमारतों में सुविधाएं और आवास एक ही वर्टिकल जगह पर होते हैं, जिससे निवासियों को छोटे-मोटे कामों के लिए बाहर निकलने की जरूरत कम हो जाती है। ट्रैफिक जाम कम करने के अलावा, ये इमारतें अपने आसपास बेहतर सड़कें और सार्वजनिक परिवहन सुविधाओं सहित बुनियादी ढांचे के महत्वपूर्ण विकास को भी बढ़ावा देती हैं। एनारॉक ने यह भी बताया कि कुल 361 टावरों में से 154 बनकर तैयार हैं और 207 निर्माणाधीन हैं। इनमें से सबसे ज्यादा टावर (103) दक्षिण मध्य मुंबई में हैं। इनमें से कम से कम 61 टावर बनकर तैयार हैं और अन्य 42 टावर 2024-2030 की अवधि के भीतर बनकर तैयार हो जायेंगे। केंद्रीय उपनगरीय इलाकों में 87 गगनचुंबी इमारतें हैं। इनमें से 42 बन चुकी हैं और 45 अन्य टावर निमार्णाधीन हैं। पश्चिमी उपनगरीय इलाकों में 80 गगनचुंबी इमारतें हैं, जिनमें से 50 टावर पहले ही बन चुके हैं और 30 टावर अगले छह सालों में बनने वाले हैं।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। लोकसभा चुनाव 2024 के महापर्व के लिए गुरुवार को शाम पांच बजे प्रचार खत्म हो गया। अंतिम दौर की वोटिंग शनिवार को होगी और इसी के साथ अब सबकी नजर चार जून को आने वाले नतीजे पर रहेगी। चुनावी नतीजे जो भी हो उसके बारे में कुछ नहीं कहा जा सकता। जनता का जो भी फैसला आएगा उसे सब स्वीकार करेंगे। लेकिन, करीब दो माह तक चले लोकतंत्र के इस महापर्व में पीएम नरेंद्र मोदी की ऊर्जा की तुलना किसी अन्य नेता से नहीं की जा सकती है। पीएम मोदी ने देश में चुनाव के ऐलान के बाद के करीब दो महीने के दौरान 206 रैलियां कीं। इसमें रोडशो भी शामिल है। इस दौरान पीएम मोदी ने तमाम मीडिया संस्थाओं को 80 इंटरव्यू दिए। इसमें हर तरह के मीडिया संस्थान हिंदी, अंग्रेजी और देश के अन्य भाषाओं के अखबार और टीवी चैनल शामिल हैं। आज गुरुवार को पीएम मोदी ने पंजाब के होशियारपुर में अपनी अंतिम चुनावी रैली की। पंजाब की सभी 13 सीटों पर अंतिम चरण में एक जून को वोटिंग है। पीएम मोदी ने इस बार के चुनाव में अपने प्रचार अभियान की शुरूआत बिहार के जमुई जिले से की थी। जमुई में पहले चरण में 19 अप्रैल को वोटिंग हुई थी। आज से मेडिटेशन पर पीएम मोदी गुरुवार को प्रचार अभियान खत्म करने के बाद पीएम मोदी आज ही 48 घंटे के लिए मेडिटेशन पर जा रहे हैं। इस दौरान वह तमिलनाडु के कन्याकुमारी के रॉक मेमोरियल में ध्यान करेंगे। 2019 में भी पीएम मोदी अंतिम चरण के मतदान से पहले चुनाव प्रचार खत्म कर उत्तराखंड के केदारनाथ में मेडिटेशन पर चले गए थे। जहां तक इस चुनाव में दूसरे नेताओं की भागीदारी की बात है तो कांग्रेस पार्टी की ओर से राहुल गांधी, मल्लिकार्जुन खड़गे और प्रियंका गांधी स्टार प्रचारक रहे लेकिन तीनों ने मिलकर भी पीएम मोदी जितनी सक्रियता नहीं दिखाई। इस चुनाव के दौरान पीएम मोदी ने जहां 80 इंटरव्यू दिए वहीं राहुल गांधी ने एक मात्र इंटरव्यू न्यूज18 इंडिया को दिया। राहुल ने केवल 76 रोड शो और रैलियां कीं। प्रियंका गांधी ने 28 सभाएं और 10 रोड शो किए। विपक्षी नेताओं में अखिलेश यादव ने 54 रैलियां कीं, वहीं मायावती ने केवल 21 रैलियां कीं। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने 31 सभाएं कीं।
सिर्फ एसी कंप्रेसर ही नहीं, उनमें भरने वाली गैस के सिलेंडर भी फट जा रहे, 100 मीटर दूर तक जा बिखरेएबीएन सेंट्रल डेस्क। राजस्थान के नोखा में गुरुवार को बड़ा हादसा होते होते बच गया। यहां नवलीगेट पर सड़क किनारे रखे एसी और फ्रिज में भरने वाली गैस से भरे सिलेंडरों में अचानक विस्फोट हो गया। विस्फोट में एक युवक घायल हो गया, जिसे इलाज के लिए अस्पताल ले जाया गया है। पुलिस के मुताबिक, सिलेंडर नवलीगेट पर सड़क किनारे रखे हुए थे। अचानक इनमें विस्फोट हो गया, जिससे आसपास के क्षेत्र में दहशत फैल गयी। विस्फोट इतना तेज था कि 100 मीटर दूर तक सिलेंडर बिखर गये।
सातवें और अंतिम चरण का चुनाव प्रचार खत्म, 1 जून को होगा मतदान, 4 को आयेंगे नतीजेटीम एबीएन, रांची। देश में सातवें और आखिरी चरण का चुनाव प्रचार गुरुवार को खत्म हो गया। करीब 75 दिन चले चुनाव प्रचार का आज आखिरी दिन था। सातवें चरण में 8 राज्यों की 57 सीटों पर 1 जून को मतदान होगा। चार जून को चुनावों के नतीजे घोषित किये जायेंगे। बता दें कि 16 मार्च को चुनाव आयोग ने देश में लोकसभा चुनावों की तारीखों का ऐलान किया था। अब तक 6 चरणों का चुनाव हो चुका है। छह चरणों में 486 सीटों पर चुनाव हो चुका है। इन चुनावों में सातवें एवं अंतिम चरण में आठ राज्यों और केंद्र शासित प्रदेश चंड़ीगढ़ सहित 57 संसदीय सीटों के लिये मतदान शनिवार को होगा। इसके साथ ही उसी दिन ओडिशा विधानसभा के चौथे और अंतिम चरण में 42 सीटों के लिये मतदान कराया जायेगा। नियमों के तहत इन सीटों पर सार्वजनिक प्रचार अभियान मतदान समाप्त होने के 48 घंटे पहले आज शाम छह बजे शाम छह बजे थम गया। प्रचार अभियान में भाजपा के नेतृत्व वाले सत्तारूढ़ गठबंधन ने कांग्रेस और अन्य दलों के इंडिया समूह पर परिवारवाद, तुष्टिकरण और भ्रष्टाचार को लेकर आक्रमण किया। विपक्ष ने भाजपा नीत सरकार पर चुनावी बांड में भ्रष्टाचार, धार्मिक विभाजन की राजनीति और विपक्षी नेताओं के खिलाफ जांच एजेंसियों के इस्तेमाल के साथ-साथ संविधान को बदलने का मंसूबा रखने के आरोप लगाये। सातवें चरण के आम चुनाव के लिये सत्तारूढ़ राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) और विपक्षी इंडिया समूह के स्टार प्रचारकों के अलावा उनके घटक दल के नेताओं ने अपने उम्मीदवारों के लिये सार्वजनिक सभाओं और रोड-शो आदि के माध्यम से जम कर प्रचार किया।निष्पक्ष और स्वतंत्र चुनाव के लिए चुनाव आयोग की व्यवस्था के अनुसार सार्वजनिक प्रचार अभियान मतदान की अवधि समाप्त होने के 48 घंटे पहले बंद कर दिया जाता है। इसके बाद प्रत्याशी और उनके समर्थक निजी स्तर पर संपकर् कर मतदाताओं का समर्थन जुटा सकते हैं।
इन सीटों और प्रत्याशियों पर रहेगी सभी की नजरएबीएन सेंट्रल डेस्क। लोकसभा चुनाव 2024 में सातवें चरण का मतदान बाकी है। सातवें चरण की वोटिंग एक जून को होनी है और इसके साथ मतदान प्रक्रिया पूरी तरह से खत्म हो जायेगी। लोकसभा चुनाव के परिणाम चार जून को घोषित किये जायेंगे। लोकसभा चुनाव में कौन किस गठबंधन की सरकार बनेगी यह शाम चार बजे तक स्पष्ट होने की उम्मीद है। अगर मुकाबला करीबी भी हुआ, तो अगले दिन पांच जून की सुबह तक चुनाव आयोग सभी रिजल्ट घोषित कर देगा और फिर राजनैतिक दल अपने आगे के पत्ते सोच विचार कर खोलेंगे।
एबीएन न्यूज नेटवर्क, चाचौड़ा। महिला एवं बाल विकास विभाग चाचौड़ा जिला गुना ने उदिता योजना के अंतर्गत आज विकासखंड चाचौड़ा में विश्व माहवारी स्वच्छता दिवस कार्यक्रम का आयोजन किया, जिसमें परियोजना अधिकारी श्रवण कुमार नागले और स्वास्थ्य विभाग से डॉ अमित जायसवाल उपस्थित रहे। उन्होंने किशोरी बालिकाओं को महावारी के दौरान आने वाली समस्याओं के बारे में जानकारी दी। साथ ही उनका निराकरण किया। इसके अलावे समाज में फैली भ्रांतियां दूर करने का प्रयास किया गया। माहवारी के दौरान बालिकाओं को परिवार के सदस्यों का सहयोग एवं प्यार की आवश्यकता एवं अच्छे पोषण की उपलब्धता पर जानकारी दी गयी। बालिकाओं को बिना किसी भय के समाज में पूरे स्वाभिमान के साथ जीवन जीने के बारे में बताया गया। कार्यक्रम में अधिक संख्या में किशोरी, बालिकाएं एवं आंगनबाड़ी कार्यकर्ता एवं सहायिकाएं मौजूद रही।
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