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मध्य प्रदेश : रायसेन में शराब बनाने की नामी फैक्टरी पर छापे में 58 बाल मजदूर मुक्त
Published / 2024-06-15 21:09:30
मध्य प्रदेश : रायसेन में शराब बनाने की नामी फैक्टरी पर छापे में 58 बाल मजदूर मुक्त

बचपन बचाओ आंदोलन की शिकायत पर एनसीपीसीआर ने की छापे की कार्रवाईमुक्त कराये गये 58 बच्चों में 19 लड़कियांखतरनाक रसायनों के संपक्र में आने से ज्यादातर बच्चों के हाथ जले हुए थेएबीएन सेंट्रल डेस्क। बाल मजदूरी की रोकथाम के लिए एक बेहद अहम और सख्त कार्रवाई करते हुए राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (एनसीपीसीआर) ने एसोसिएशन फॉर वालंटरी एक्शन (जिसे बचपन बचाओ आंदोलन (बीबीए) के नाम से जाना जाता है) के साथ मिलकर मध्य प्रदेश के रायसेन जिले में शराब बनाने की एक नामी फैक्टरी पर छापे की कार्रवाई में 58 बाल मजदूरों को मुक्त कराया।बीबीए की सूचना पर एनसीपीसीआर के अध्यक्ष प्रियंक कानूनगो की अगुवाई में सोम डिस्टिलरी पर मारे गये इस छापे में मुक्त कराये गये बच्चों में 19 लड़कियां और 39 लड़के हैं। इस मामले में कानूनी कार्रवाई जारी है और मुक्त कराये गये बच्चों को सुरक्षित जगह भेज दिया गया है। खतरनाक रसायनों और अल्कोहल के संपर्क में आने से खासतौर से इन बच्चों के हाथ और शरीर के अन्य हिस्से जले हुए थे।प्रशासन की आंख में धूल झोंकने के लिए इन बच्चों को स्कूल बस से डिस्टिलरी पहुंचाया जाता था, जहां इनसे मामूली तनख्वाह पर रोजाना 12-14 घंटे काम कराया जाता था। बताते चलें कि सोम डिस्टिलरीज एंड ब्रेवरीज शराब, बीयर और अन्य अल्कोहल उत्पाद बनाने वाली एक आईएसओ प्रमाणित कंपनी है। इस मामले में आबकारी अधिकारी के खिलाफ भी कानूनी कार्रवाई शुरू की है जिनका कार्यालय इसी डिस्टिलरी के परिसर में है। सरकारी नियमों के अनुसार किसी भी डिस्टिलरी के कामकाज की निगरानी के लिए उस डिस्टिलरी के परिसर में आबकारी अधिकारी की मौजूदगी अनिवार्य है। बच्चों को मुक्त कराने की इस कार्रवाई पर संतोष जाहिर करते हुए बचपन बचाओ आंदोलन के निदेशक मनीष शर्मा (जो छापामार टीम में भी शामिल थे) ने कहा कि अल्कोहल और रसायनों की दुर्गंध हम जैसे वयस्कों के लिए भी असहनीय है। कल्पना ही की जा सकती है कि ये बच्चे इन स्थितियों में कैसे रोजाना इतने घंटे काम कर रहे थे। हम इस डिस्टिलरी के मालिकों के खिलाफ बेहद सख्त कार्रवाई की मांग करते हैं ताकि यह दूसरों के लिए भी एक उदाहरण साबित हो सके। हम ऐसी भयावह स्थितियों में काम करने वाले बच्चों को मुक्त कराने का अपना अभियान जारी रखेंगे लेकिन देश को बाल मजदूरी के खिलाफ कड़े कानूनों और इसके खिलाफ निगरानी बढ़ाने की जरूरत है। सरकार से हमारी अपील है कि वह बच्चों की ट्रैफिकिंग और बाल मजदूरी को रोकने के लिए कड़े से कड़े कदम उठाए ताकि बच्चों के साथ इस अन्याय और अत्याचार को रोका जा सके। बताते चलें कि इससे पहले 14 जून को एनसीपीसीआर ने बीबीए की शिकायत पर इसी जिले के मंडीदीप कस्बे में छापे की कार्रवाई में 25 लड़कियों सहित कुल 36 बाल मजदूरों को मुक्त कराया था। एनसीपीसीआर ने जून को एक्शन मंथ घोषित कर रखा है और पूरे देश में बच्चों की ट्रैफिकिंग और उन्हें बाल मजदूरी से मुक्त कराने के इस अभियान में बीबीए उसका सहयोग कर रहा है।

रायसेन के तीन कारखानों से 25 लड़कियों सहित 36 बाल मजदूरों को कराया मुक्त
Published / 2024-06-14 19:29:19
रायसेन के तीन कारखानों से 25 लड़कियों सहित 36 बाल मजदूरों को कराया मुक्त

एनसीपीसीआर) की अगुआई में बचपन बचाओ आंदोलन के सहयोग से चलाया गया अभियानतीन कारखाने सील, नियोक्ताओं के खिलाफ कानूनी कार्रवाई शुरूएबीएन सेंट्रल डेस्क। राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (एनसीपीसीआर) की अगुआई में पुलिस और एसोसिएशन फॉर वालंटरी एक्शन जिसे बचपन बचाओ आंदोलन (बीबीए) के नाम से जाना जाता है, के सहयोग से चलाये गये अभियान में भोपाल के पास रायसेन जिले के मंडीदीप कस्बे में तीन फैक्टरियों से 25 लड़कियों सहित कुल 36 बच्चों को मुक्त कराया गया। यह अभियान बीबीए की ओर से दर्ज करायी गयी शिकायत के बाद चलाया गया जिसने पाया कि इस औद्योगिक कस्बे में बहुत से वाणिज्यिक प्रतिष्ठान ऐसे हैं जो देशभर में बच्चों की ट्रैफिकिंग (दुर्व्यापार) में लिप्त हैं और उनका इस्तेमाल फैक्टरियों में मजदूरी के लिए कर रहे हैं। छापों के बाद तीन फैक्टरियों को सील कर कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी गयी है। मुक्त कराये गये इन बच्चों की हालत बेहद दयनीय थी। वे मैले-कुचैले, भूखे-प्यासे, कुपोषित और थके से दिख रहे थे। इनसे बेकरी और इलेक्ट्रॉनिक आपूर्ति श्रृंखला उत्पाद बनाने वाली इकाइयों में रोजाना 12 से 14 घंटे काम कराया जाता था। इन सभी बच्चों की उम्र 15 से 17 साल के बीच है और ये बिहार, झारखंड और छत्तीसगढ़ के अलावा भोपाल के आस पास के जिलों के हैं। मुक्त करायी गयी ज्यादातर लड़कियां आदिवासी इलाकों की हैं। इन बच्चों को बाल कल्याण समिति के समक्ष पेश किया गया और इन्हें जल्द ही बाल देखभाल केंद्रों में भेज दिया जायेगा। सील किये गये इन कारखानों में एक बेकरी इकाई है जहां बिस्कुट और रस बनाये जाते हैं जबकि दूसरी एक खाद्य प्रसंस्करण इकाई है। तीसरी फैक्टरी में प्लास्टिक के इलेक्ट्रॉनिक सामान बनाये जाते थे।इस तरह आपूर्ति श्रृंखला प्रतिष्ठानों में बाल मजदूरी की स्थिति पर चिंता जताते हुए बचपन बचाओ आंदोलन के निदेशक मनीष शर्मा ने कहा कि आपूर्ति श्रृंखला उत्पाद प्रतिष्ठानों में बेहद घिनौने और बदतरीन तरीके से बाल मजदूरों का इस्तेमाल किया जाता है। उत्पादन से लेकर वितरण तक हर चरण में ये नियोक्ता सस्ते श्रम के लालच में अंधे हो चुके हैं। बच्चे इनके सबसे आसान शिकार हैं जिनकी नियमित रूप से ट्रैफिकिंग की जाती है और इन्हें मजदूरी के लिए खरीदा और बेचा जाता है। इन बच्चों के मां-बाप और परिवार ट्रैफिकिंग गिरोहों और नियोक्ताओं के झूठे वादों के झांसे में आ जाते हैं। हमारे देश में बेहद सख्त कानून हैं और कानून प्रवर्तन एजेंसियां मांग और आपूर्ति के इस दुष्चक्र को तोड़ने का हरसंभव प्रयास कर रही हैं। हमें उम्मीद है कि बच्चों के अधिकारों को रौंदे जाने से बचाने के लिए सरकार जल्द ही बहुप्रतीक्षित एंटी ट्रैफिकिंग बिल को पास करायेगी।

अजीत डोभाल बने रहेंगे राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार
Published / 2024-06-13 23:19:20
अजीत डोभाल बने रहेंगे राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार

राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार के रूप में अजीत डोभाल का कार्यकाल बढ़ाया गयाएबीएन सेंट्रल डेस्क। डोभाल तीसरे कार्यकाल के विस्तार के साथ राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (एनएसए) के रूप में अपनी भूमिका में बरकरार रहेंगे। शीर्ष अधिकारी अजीत डोभाल, पीके मिश्रा, अमित खरे और तरुण कपूर प्रधानमंत्री आफिस में अपनी नौकरी पर बने रहेंगे।डोभाल तीसरे कार्यकाल के विस्तार के साथ राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (एनएसए) के रूप में अपनी भूमिका में बरकरार रहेंगे। मिश्रा को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रधान सचिव के रूप में फिर से नियुक्त किया गया है। खरे और कपूर, जो पूर्व आईएएस अधिकारी हैं, प्रधानमंत्री के सलाहकार के रूप में बने रहेंगे।आधिकारिक आदेश में कहा गया है कि अजीत डोभाल का कार्यकाल प्रधानमंत्री के कार्यकाल तक या अगली सूचना तक रहेगा। कार्मिक मंत्रालय के आदेश में कहा गया है कि मंत्रिमंडल की नियुक्ति समिति ने 10.06.2024 से राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार के रूप में रिटायर्ड आईपीएस अजीत डोभाल को मंजूरी दे दी है।आदेश में कहा गया है कि अपने कार्यकाल के दौरान डोभाल को कैबिनेट मंत्री का दर्जा प्राप्त होगा। साथ ही यह भी कहा गया है कि उनकी नियुक्ति का विवरण अलग से साझा किया जायेगा। कार्मिक मंत्रालय के एक अन्य आदेश में कहा गया है कि मिश्रा की नियुक्ति भी 10 जून से शुरू होगी। आदेश में आगे कहा गया है कि मंत्रिमंडल की नियुक्ति समिति ने 10.06.2024 से प्रधानमंत्री के प्रधान सचिव के रूप में रिटायर्ड आईएएस डॉ पीके मिश्रा को मंजूरी दे दी है। उनकी नियुक्ति प्रधानमंत्री के कार्यकाल तक या अगली सूचना तक, जो भी पहले हो, तक रहेगी।

मोदी 3.0 की पहली विदेश यात्रा पर मोदी इटली रवाना
Published / 2024-06-13 20:48:48
मोदी 3.0 की पहली विदेश यात्रा पर मोदी इटली रवाना

जॉर्जिया मेलोनी से करेंगे मुलाकात, जी-7 समिट में लेंगे हिस्साएबीएन सेंट्रल डेस्क। नरेंद्र मोदी तीसरी बार प्रधानमंत्री बनने के बाद अपनी पहली विदेश यात्रा के लिए इटली रवाना हो गये हैं। पीएम मोदी इटली में चल रही जी-7 समिट में हिस्सा लेंगे। इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी ने भारत को जी-7 समिट में हिस्सा लेने के लिए आमंत्रित किया है। इटली रवाना होने से पहले पीएम मोदी ने कहा कि सम्मेलन में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई), ऊर्जा, अफ्रीका और भूमध्यसागरीय क्षेत्र पर ध्यान केंद्रित किया जायेगा। मोदी ने तीसरे कार्यकाल के लिए प्रधानमंत्री बनने के बाद अपनी पहली विदेश यात्रा के तहत यूरोपीय देश रवाना होने से पहले एक बयान में यह बात कही। प्रधानमंत्री ने कहा कि आउटरीच सत्र में ग्लोबल साउथ के लिए महत्वपूर्ण मुद्दों पर भी विचार-विमर्श किया जाएगा। इटली के अपुलिया क्षेत्र के बोर्गो एग्नाजिया के आलीशान रिसॉर्ट में 13 से 15 जून तक आयोजित होने वाले जी-7 शिखर सम्मेलन में यूक्रेन में युद्ध और गाजा में संघर्ष के मुद्दों के छाये रहने की उम्मीद है। मोदी ने कहा कि प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी के निमंत्रण पर मैं 14 जून को जी-7 आउटरीच शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए इटली के अपुलिया क्षेत्र की यात्रा कर रहा हूं। मोदी ने कहा कि उन्हें खुशी है कि लगातार तीसरे कार्यकाल के लिए प्रधानमंत्री चुने जाने के बाद उनकी पहली यात्रा जी-7 शिखर सम्मेलन के लिए इटली की है। मोदी ने कहा- आउटरीच सत्र में चर्चा के दौरान कृत्रिम बुद्धिमत्ता, ऊर्जा, अफ्रीका और भूमध्यसागरीय क्षेत्र पर ध्यान केंद्रित किया जायेगा। उन्होंने कहा, यह भारत की अध्यक्षता में आयोजित जी-20 शिखर सम्मेलन और आगामी जी-7 शिखर सम्मेलन के परिणामों के बीच अधिक तालमेल लाने और ग्लोबल साउथ के लिए महत्वपूर्ण मुद्दों पर विचार-विमर्श करने का अवसर होगा। मोदी इटली की प्रधानमंत्री मेलोनी के साथ द्विपक्षीय बैठक भी करेंगे। प्रधानमंत्री ने कहा कि पिछले साल प्रधानमंत्री मेलोनी की भारत की दो यात्राओं ने हमारे द्विपक्षीय एजेंडे को गति और गहराई देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभायी। उन्होंने कहा- हम भारत-इटली रणनीतिक साझेदारी को मजबूत करने और हिंद-प्रशांत एवं भूमध्यसागरीय क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध हैं। प्रधानमंत्री के शिखर सम्मेलन से इतर कई द्विपक्षीय बैठकें करने की संभावना है। उन्होंने कहा, मैं शिखर सम्मेलन में भाग लेने वाले अन्य नेताओं से मिलने को लेकर भी उत्सुक हूं। जी-7 में अमेरिका, ब्रिटेन, फ्रांस, इटली, जर्मनी, कनाडा और जापान शामिल हैं। इटली जी-7 (सात देशों के समूह) शिखर सम्मेलन की वर्तमान में अध्यक्षता और मेजबानी कर रहा है। इटली ने अपनी अध्यक्षता में हो रही इस बैठक में नियम-आधारित अंतरराष्ट्रीय प्रणाली की रक्षा करने पर जोर दिया है।

राजनाथ के सान्निध्य में काम करने को लेकर उत्साहित हैं सांसद संजय सेठ
Published / 2024-06-11 23:01:37
राजनाथ के सान्निध्य में काम करने को लेकर उत्साहित हैं सांसद संजय सेठ

रक्षा मंत्रालय की नयी पहलों को पूरा करने पर ध्यान देंगे संजय सेठटीम एबीएन, रांची। रांची लोकसभा सीट से दूसरी बार जीतकर संसद पहुंचे श्री संजय सेठ ने मंगलवार को रक्षा मंत्रालय में राज्य मंत्री का पदभार ग्रहण किया।इस मौके पर रक्षा सचिव गिरिधर अरमाने और रक्षा मंत्रालय के अन्य वरिष्ठ अधिकारियों ने उनका स्वागत किया। श्री सेठ ने मंत्रिमंडल में जिम्मेदारी देने के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को धन्यवाद दिया। उन्होंने कहा कि वह रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के मार्गदर्शन में सेवा करने के लिए उत्सुक हैं, जिनके साथ उन्होंने पहले विभिन्न पदों पर काम किया है। श्री सेठ ने कहा कि वह रक्षा मंत्रालय की उन पहलों को पूरा करने का प्रयास करेंगे जिनका उद्देश्य राष्ट्र की सुरक्षा को मजबूत करना है। कार्यभार संभालने से पहले उन्होंने श्री सिंह से उनके आधिकारिक आवास पर मुलाकात की। रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन के अध्यक्ष डा समीर वी कामत ने भी श्री सेठ से मुलाकात की और उन्हें डीआरडीओ की परियोजनाओं के बारे में जानकारी दी।प्रमुख रक्षा अध्यक्ष जनरल अनिल चौहान, सेना प्रमुख जनरल मनोज पांडे, वायु सेना प्रमुख वी आर चौधरी और नौसेना प्रमुख एडमिरल दिनेश त्रिपाठी ने भी रक्षा राज्य मंत्री से मुलाकात की और रक्षा क्षेत्र से संबंधित विभिन्न विषयों पर चर्चा की।वर्ष 2019 में लोकसभा के सांसद के रूप में सूचना प्रौद्योगिकी से संबंधित स्थायी समिति तथा अन्य पिछड़ा वर्ग कल्याण समिति के भी सदस्य थे। वह वर्ष 2016-2019 तक झारखंड राज्य खादी और ग्रामोद्योग बोर्ड के अध्यक्ष भी रहे हैं।

जानें कितनी सफल होती हैं गठबंधन की सरकारें
Published / 2024-06-10 21:51:09
जानें कितनी सफल होती हैं गठबंधन की सरकारें

देश में कब-कब बनी गठबंधन की सरकार, कितनी रहीं सफल, कितनी कार्यकाल भी पूरा नहीं कर सकीं? 1977 के लोकसभा चुनाव के बाद मोराजी देसाई प्रधानमंत्री बने। दो साल बाद ही सत्ताधारी जनता पार्टी दो हिस्से में टूट गयी। चौधरी चरण सिंह ने नेतृत्व वाले धड़े ने कांग्रेस के समर्थन से सरकार बनाई। यह देश में गठबंधन का पहला प्रयोग था, जो महज 23 दिन चला था।  एबीएन सेंट्रल डेस्क। 9 जून को देश को नयी सरकार मिल गयी। वाराणसी से सांसद चुने गये नरेंद्र मोदी लगातार तीसरी बार प्रधानमंत्री पद की शपथ लिये। नरेंद्र मोदी के पहले दो कार्यकाल में भाजपा को स्पष्ट बहुमत था, इस बार उन्हें गठबंधन की सरकार चलानी है। यह पहली बार है जब मोदी गठबंधन की सरकार चलाएंगे। इससे पहले 2001 से 2013 तक मोदी गुजरात के मुख्यमंत्री रहे और 2014 से 2024 तक प्रधानमंत्री रहे तो भाजपा की बहुमत वाली सरकारें रहीं। देश के संसदीय इतिहास में 10 साल बाद फिर से गठबंधन सरकार का दौर लौट रहा है। जब किसी एक दल को स्पष्ट बहुमत नहीं है। आइये जानते हैं कि देश में कब-कब इस तरह की सरकारें बनीं? गठजोड़ वाली सरकारें कितने समय तक चलीं? सबसे ज्यादा और सबसे कब गठबंधन की सरकारें चलीं?  1979 में बनी देश की पहली गठबंधन सरकार 1977 में कई दलों ने मिलकर एक दल के चुनाव चिह्न पर चुनाव लड़ा। स्पष्ट बहुमत की सरकार बनी। यह देश की पहली गैर-कांग्रेसी सरकार थी। जीत के बाद मोरारजी देसाई प्रधानमंत्री बने। मोरारजी के नेतृत्व में गठबंधन दो साल तक चला, लेकिन वैचारिक मतभेदों के कारण जनता पार्टी टूट गई। सरकार के गृह मंत्री रहे चरण सिंह ने पार्टी से अलग होकर जनता पार्टी सेक्युलर बनाई। कांग्रेस पार्टी के बाहरी समर्थन से चरण सिंह प्रधानमंत्री बने। यह देश में गठबंधन का पहला प्रयोग था। यह प्रयोग केवल 23 दिनों तक चला। 28 जुलाई 1979 को चरण सिंह सरकार ने शपथ ली। 20 अगस्त 1979 को जब नई सरकार को बहुमत के लिए संसद का सत्र बुलाया गया तो कांग्रेस ने चरण सिंह सरकार के समर्थन वापसी का एलान कर दिया। इसके बाद चरण सिंह को इस्तीफा देना पड़ा। हालांकि, नये सिरे से चुनाव होने तक चरण सिंह कार्यवाहक प्रधानमंत्री के तौर पर पद पर बने रहे। इसके बाद 1980 में देश में पहली बार मध्यावधि चुनाव हुए जिसमें जीतकर इंदिरा गांधी के नेतृत्व में कांग्रेस वापस सत्ता में आयी। 1989 में वीपी सिंह ने गठबंधन सरकार बनायी 1980 के लोकसभा चुनाव के करीब नौ साल बाद देश में एक बार फिर गठबंधन सरकार वाला दौर लौटा। 1989 में देश में लोकसभा के चुनाव हुए जिसमें राजीव गांधी के नेतृत्व वाली कांग्रेस को हार का सामना करना पड़ा। यह पहली बार था जब किसी भी पार्टी या चुनाव-पूर्व गठबंधन को स्पष्ट बहुमत नहीं मिला था। चुनाव के लिए पूर्व कांग्रेस नेता विश्व नाथ प्रताप सिंह ने राष्ट्रीय मोर्चा नाम से एक नया गठबंधन बनाया।वी.पी. सिंह के नेतृत्व वाले जनता दल ने 143 सीटें हासिल कीं।  वी.पी. सिंह को भाजपा और लेफ्ट ने बाहर से समर्थन दिया। वहीं, डीएमके, एजेपी और टीडीपी जैसे दल सरकार का हिस्सा बने। इस तरह कुल 280 सांसदों के समर्थन से वीपी सिंह प्रधानमंत्री बने। वहीं, 194 सीटों वाली सबसे बड़ी पार्टी कांग्रेस विपक्ष में बैठी। वीपी सिंह की यह सरकार एक साल भी नहीं चल सकी। 1990 वह वक्त था जब अयोध्या में राम मंदिर के लिए आंदोलन चरम पर था। इसी आंदोलन के दौरान भाजपा के सबसे बड़े नेता लाल कृष्ण आडवाणी को अयोध्या में राम मंदिर बनाने के लिए देशव्यापी यात्रा निकाल रहे थे। इसी दौरान उन्हें बिहार के समस्तीपुर में गिरफ्तार कर लिया गया था। इसके बाद भाजपा ने वीपी सिंह सरकार से अपना समर्थन वापस ले लिया। इस सियासी घटनाक्रम के बाद एक और गठबंधन सरकार बनाने की कवायद हुई। इसी कड़ी में राष्ट्रीय मोर्चे का हिस्सा रही जनता दल दो धड़ों में बंट गयी। जनता दल के वरिष्ठ नेता चंद्रशेखर नवंबर 1990 में कांग्रेस पार्टी के बाहरी समर्थन से वीपी सिंह के बाद प्रधानमंत्री बने। चंद्रशेखर की सरकार भी चंद महीनों बाद गिर गयी। 1991 में नये सिरे से आम चुनाव कराये गये जिसमें कांग्रेस फिर से सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरी। चुनाव नतीजों के बाद कांग्रेस नेता पीवी नरसिम्हा राव जनता दल के बाहरी समर्थन से प्रधानमंत्री बने। इस चुनाव में कांग्रेस को 244 सीटें मिलीं और वह बहुमत के आंकड़े से दूर रह गई। नरसिम्हा राव ने पांच साल तक अल्पमत की सरकार चलाई।   1996 में अटल ने चलायी 13 दिन की सरकार  1996 में लोकभा के चुनाव हुए जिसमें भाजपा पहली बार सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरी। भाजपा ने 161 सीटें जीतीं, जबकि कांग्रेस 140 सीटों के साथ दूसरे स्थान पर रही और जनता दल 46 सीटों के साथ तीसरे स्थान पर रहा। कई छोटे दलों के समर्थन के साथ भाजपा के वरिष्ठ नेता अटल बिहारी वाजपेयी ने प्रधानमंत्री पद की शपथ ली, लेकिन वे संसद में बहुमत हासिल नहीं कर सके। उनकी सरकार केवल 13 दिन ही चल सकी। अटल बिहारी वाजपेयी सकरार के गिरने के बाद संयुक्त मोर्चा बना। एचडी देवगौड़ा के नेतृत्व वाले संयुक्त मोर्चे में जनता दल और तेलुगु देशम पार्टी (टीडीपी) के साथ-साथ वामपंथी और कम्युनिस्ट पार्टियां शामिल थीं। यह गठबंधन भी आपसी झगड़े के कारण बहुत दिनों तक नहीं चल पाया और देवगौड़ा की सरकार एक साल के भीतर ही गिर गई। इंद्र कुमार गुजराल ने उनकी जगह ली, लेकिन उनकी सरकार भी एक साल से ज्यादा नहीं चल सकी। 1998 में अटल ने 13 महीने की सरकार चलायी 1998 के लोकसभा चुनाव में देश ने एक बार फिर एक गठबंधन सरकार आयी। 1998 के चुनावों में अटल बिहारी ने नेशनल डेमोक्रेटिक अलायंस यानी एनडीए नाम से गठबंधन बनाया, जिसमें शिवसेना और एआईएडीएमके जैसी पार्टियां शामिल थीं। यह सरकार 13 महीने तक चली उसके बाद एआईएडीएमके ने समर्थन वापस ले लिया। इसके बाद नये सिरे से चुनाव हुए। इस चुनाव में भाजपा ने 182 सीटों पर जीत दर्ज की। 299 सदस्यों के समर्थन के साथ वाजपेयी ने तीसरी बार प्रधानमंत्री पद की शपथ ली। इस बार वाजपेयी सरकार ने अपना कार्यकाल पूरा किया। यह देश की पहली गठबंधन सरकार थी, जिसने अपना कार्यकाल पूरा किया था।   2004-2014 तक यूपीए दो बार सत्ता में रहा  अपना कार्यकाल पूरा करने के बाद 2004 में एनडीए को झटका लगा। इन चुनावों में सोनिया गांधी के नेतृत्व में कांग्रेस सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी। इसके बाद संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (यूपीए) नाम से देश में एक नया गठबंधन बना। पहले यूपीए सरकार में मनमोहन सिंह को प्रधानमंत्री चुना गया जो वित्त मंत्री रह चुके थे। मनमोहन सिंह के नेतृत्व में यूपीए गठबंधन को 2009 के चुनाव में दूसरे कार्यकाल के लिए फिर से चुना गया। एक बार फिर कांग्रेस ने 2009 से 2014 तक गठबंधन की सरकार चलाई। करीब 10 साल बाद देश में एक बार फिर गठबंधन सरकार बन रही है जिसके मुखिया नरेंद्र मोदी हैं।

जानें पांच साल में कौन से बड़े फैसले लेगी मोदी सरकार
Published / 2024-06-10 21:47:05
जानें पांच साल में कौन से बड़े फैसले लेगी मोदी सरकार

सहयोगियों के साथ किस एजेंडे को बढ़ायेंगे मोदी? 9 जून को नरेंद्र मोदी लगातार तीसरी बार प्रधानमंत्री पद की शपथ लेंगे। मोदी लगातार कहते रहे हैं कि उनका तीसरा कार्यकाल बड़े फैसलों वाला होगा। पिछले 10 साल का कार्य तो सिर्फ ट्रेलर है। आइये जानते हैं कि आखिर एनडीए सरकार कौन से बड़े और कड़े फैसले ले सकती है? एबीएन सेंट्रल डेस्क। रविवार को देश में नयी सरकार की गठन होगा। नरेंद्र मोदी लगातार तीसरी बार प्रधानमंत्री पद की शपथ लेंगे। करीब छह दशक के बाद यह पहली बार होगा जब कोई नेता लगातार तीसरी बार प्रधानमंत्री बनेगा। नरेंद्र मोदी की ताजपोशी के साथ उनके नेतृत्व वाली तीसरी सरकार काम करना शुरू कर देगी। मोदी लगातार कहते रहे हैं कि उनका तीसरा कार्यकाल बड़े फैसलों वाला होगा। पिछले 10 साल का कार्य तो सिर्फ ट्रेलर है। जब उन्हें एनडीए संसदीय दल का नेता चुना गया तब भी उन्होंने ये बातें दोहरायी। मोदी के दूसरे कार्यकाल में जम्मू कश्मीर से धारा 370 का हटाना, राम मंदिर का निर्माण, नागरिकता अधिनियम कानून का लागू होना बड़े फैसलों के रूप में गिना जाता है। ऐसे में लोगों के मन भी सवाल है कि आखिर इस बार एनडीए सरकार कौन से बड़े और कड़े फैसले ले सकती है? आखिर किन क्षेत्रों में बड़े निर्णय हो सकते हैं? एक देश एक चुनाव लोकसभा चुनाव 2024 में भाजपा के घोषणा पत्र में एक देश एक चुनाव का वादा किया गया है। नरेंद्र मोदी समेत भाजपा के तमाम बड़े नेता इसे लागू करने की वकालत कर रहे हैं। दरअसल, नरेंद्र मोदी ने 2019 के स्वतंत्रता दिवस पर एक देश एक चुनाव का जिक्र किया था। तब से अब तक कई मौकों पर भाजपा की ओर एक देश एक चुनाव की बात की जाती रही है। दरअसल, एक देश एक चुनाव की बहस 2018 में विधि आयोग के एक मसौदा रिपोर्ट के बाद शुरू हुई थी। उस रिपोर्ट में आर्थिक वजहों को गिनाया गया था। आयोग का कहना था कि 2014 में लोकसभा चुनावों का खर्च और उसके बाद हुए विधानसभा चुनावों का खर्च लगभग समान रहा है। वहीं, साथ-साथ चुनाव होने पर यह खर्च 50:50 के अनुपात में बंट जायेगा। फिलहाल पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद की अध्यक्षता में एक समिति का गठन किया गया है। समिति ने अपनी रिपोर्ट भी राष्ट्रपति को सौंप दी है। अब तीसरे कार्यकाल में एनडीए सरकार इसे लागू करने पर जोर दे सकती है। एनडीए सरकार में प्रमुख दल बन चुकी जदयू ने भी इस पर अपना समर्थन जताया है।  समान नागरिक संहिता  देशभर में सबके लिए एक समान कानून करना भाजपा के एजेंडे में रहा है। पार्टी ने 2024 के घोषणापत्र में इस विषय को रखा गया है। भारतीय जनता पार्टी ने 2022 में हुए उत्तराखंड विधानसभा चुनाव में इसे मुद्दा बनाया था और चुनाव जीतने के बाद इसे लागू भी कर दिया। अब भाजपा के नेतृत्व वाले एनडीए के तीसरे कार्यकाल में समान नागरिक संहिता को आगे बढ़ाने पर जोर दिया जा सकता है। हालांकि, इसके लिए सहयोगी दलों का समर्थन जुटाना बड़ी चुनौती होगी। यूसीसी के मामले में जदयू ने भी कहा है कि इसमें सबकी राय जरूरी है। विदेश नीति में यूएएनएसी की स्थायी सदस्यता पर जोर  नरेंद्र मोदी अक्सर अपने भाषणों में भारत की वैश्विक नेता के रूप में स्थिति को मजबूत करने पर जोर देते रहे हैं। अपने तीसरे कार्यकाल में मोदी की विदेश नीति के लक्ष्य होंगे संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (यूएनएससी) में भारत की लंबे समय से प्रतीक्षित स्थायी सदस्यता को साकार करना। विदेश नीति के मोर्चे पर सरकार यूएनएससी की सदस्यता पर जोर देगी, लेकिन इस प्रयास में संयुक्त राष्ट्र में सुधार भी शामिल है। यूएनएससी में सुधार करना एक बड़ी चुनौती होगी क्योंकि स्थायी सदस्य चीन अक्सर भारत को इसमें शामिल करने का विरोध करता आया है। स्वास्थ्य क्षेत्र में आयुष्मान भारत का विस्तार तीसरे कार्यकाल में केंद्र सरकार की प्रमुख स्वास्थ्य बीमा योजना आयुष्मान भारत को बड़े आकार में देखा जा सकता है। नरेंद्र मोदी चुनावी कार्यक्रमों में यह कहते रहे हैं कि तीसरे कार्यकाल में बड़े फैसलों के लिए मोदी की गारंटी पूरी की जायेगी। चुनाव परिणाम घोषित होने के बाद भाजपा कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए मोदी ने भविष्य के लिए अपने विजन को रेखांकित किया था। मोदी ने आयुष्मान भारत के तहत प्रदान की जाने वाली मुफ्त स्वास्थ्य सेवा तक अभूतपूर्व पहुंच पर जोर दिया। इसके अलावा भाजपा के 2024 के घोषणापत्र में आयुष्मान भारत के कवरेज को 70 वर्ष से अधिक उम्र के वरिष्ठ नागरिकों और ट्रांसजेंडर समुदाय को शामिल करने के लिए आगे बढ़ाने का भी वादा किया गया है।

सर्वसम्मति से कांग्रेस संसदीय दल की अध्यक्ष चुनी गयीं सोनिया गांधी
Published / 2024-06-08 21:26:19
सर्वसम्मति से कांग्रेस संसदीय दल की अध्यक्ष चुनी गयीं सोनिया गांधी

बोलीं- खड़गे के नेतृत्व में हम डंटे रहेएबीएन सेंट्रल डेस्क। कांग्रेस की पूर्व अध्यक्ष सोनिया गांधी को शनिवार को एक बार फिर से पार्टी संसदीय दल (सीपीपी) का प्रमुख चुना गया। मौके पर उन्होंने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी पर करारा प्रहार किया और कहा कि लोकसभा चुनाव में मोदी की राजनीतिक और नैतिक हार हुई है तथा उन्होंने नेतृत्व करने का अधिकार खो दिया है। कांग्रेस नेताओं ने बताया कि संविधान सदन (पुराने संसद भवन) के केंद्रीय कक्ष में हुई कांग्रेस संसदीय दल की बैठक में पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने सोनिया गांधी को सीपीपी प्रमुख नियुक्त करने का प्रस्ताव पेश किया, जिसका पार्टी के तीन सांसदों गौरव गोगोई, तारिक अनवर और के सुधाकरन ने अनुमोदन किया। फिर से सीपीपी प्रमुख चुने जाने पर सोनिया ने पार्टी नेताओं का आभार जताया और कहा कि कांग्रेस ने इस चुनाव में अपनी दृढ़ता का परिचय दिया है। उन्होंने यह दावा भी किया कि लोकसभा चुनाव में प्रधानमंत्री मोदी की राजनीतिक और नैतिक हार हुई है तथा ऐसे में उन्होंने न सिर्फ जनादेश बल्कि नेतृत्व करने का अधिकार भी खो दिया है। सोनिया ने कहा कि देश की जनता ने विभाजन की राजनीति और तानाशाही को खारिज करने के लिए निर्णायक वोट दिया है। उन्होंने संसदीय राजनीति को मजबूत करने और संविधान की रक्षा के लिए मतदान किया। उन्होंने कहा कि भारत जोड़ो यात्रा और भारत जोड़ो न्याय यात्रा ऐतिहासिक आंदोलन थे, जिन्होंने पार्टी में हर स्तर पर नयी जान फूंकी। सोनिया ने कहा कि राहुल गांधी अभूतपूर्व व्यक्तिगत व राजनीतिक हमलों का मुकाबला करने की अपनी प्रतिबद्धता के लिए विशेष धन्यवाद के पात्र हैं। सोनिया के सीपीसी प्रमुख चुने जाने से पहले पार्टी की कार्य समिति (सीडब्ल्यूसी) की बैठक में सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित कर राहुल गांधी से लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष की जिम्मेदारी संभालने का आग्रह किया गया। हालिया लोकसभा चुनाव में कांग्रेस ने 99 सीट पर जीत दर्ज की है।

रामोजी ग्रुप के संस्थापक रामोजी राव का निधन
Published / 2024-06-08 11:57:13
रामोजी ग्रुप के संस्थापक रामोजी राव का निधन

एबीएन न्यूज नेटवर्क। रामोजी ग्रुप के संस्थापक और चेयरमैन रामोजी राव का निधन हो गया। रामोजी राव को इस महीने की 5 तारीख को बिगड़ती सेहत के कारण अस्पताल में भर्ती कराया गया था। शनिवार सुबह 4:50 बजे उनका निधन हो गया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी समेत कई दिग्गज नेताओं ने उनके निधन पर शोक जताया।निधन से कुछ दिन पहले से ही राव स्वास्थ्य संबंधी जटिलताओं से जूझ रहे थे। रिपोर्टों के अनुसार रामोजी राव के पार्थिव शरीर को रामोजी फिल्म सिटी स्थित उनके आवास पर ले जाने की तैयारी चल रही है। जहां परिवार के सदस्य, मित्र और शुभचिंतक दिवंगत आत्मा को अंतिम श्रद्धांजलि देंगे।ईनाडु ग्रुप के चेयरमैन रामोजी राव का हृदय संबंधी समस्याओं के कारण हैदराबाद के एक अस्पताल में इलाज के दौरान निधन हो गया। सांस लेने में तकलीफ के चलते उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया था। उनका इलाज आईसीयू में चल रहा था। इलाज के दौरान ही उन्होंने आज सुबह अंतिम सांस ली।

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