Breaking
ताज़ा समाचार लोड हो रहा है...

देश

View All
आपातकाल के काले दिन लाने वाले संविधान के प्रति प्रेम का दावा नहीं कर सकते : मोदी
Published / 2024-06-25 19:08:31
आपातकाल के काले दिन लाने वाले संविधान के प्रति प्रेम का दावा नहीं कर सकते : मोदी

एबीएन सेंट्रल डेस्क। इंडिया समूह के भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के खिलाफ देश के संविधान के लिए सबसे बड़ा खतरा होने का नारा लगाये जाने के एक दिन बाद प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने मंगलवार को पलटवार करते हुये कहा कि आपातकाल लगाने वालों को संविधान के प्रति प्रेम का दावा करने का कोई अधिकार नहीं है।श्री मोदी ने सोशल मीडिया पर सिलसिलेवार पोस्ट में कांग्रेस पर 1975 में तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी द्वारा करीब 21 महीने तक लगाये गये आपातकाल के लिए हमला बोला। आपातकाल को काले दिन के रूप में याद करते हुए उन्होंने कहा कि यह दिन हमें याद दिलायेगा कि कैसे कांग्रेस ने बुनियादी स्वतंत्रताओं को नष्ट किया और भारत के संविधान को रौंद दिया, जिसका हर भारतीय बहुत सम्मान करता है।उन्होंने कहा- जिस मानसिकता के कारण आपातकाल लगाया गया था, वह अभी भी उसी पार्टी में जीवित है। आज का दिन उन सभी महान पुरुषों और महिलाओं को श्रद्धांजलि देने का दिन है , जिन्होंने आपातकाल का विरोध किया। प्रधानमंत्री की यह टिप्पणी ऐसे समय में आयी है, जब देश आज 25 जून को आपातकाल लागू होने की 49 साल पूरे हो रहे हैं। उन्होंने कहा, सिर्फ सत्ता पर काबिज रहने के लिये तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने हर लोकतांत्रिक सिद्धांत की अवहेलना की और देश को जेल बना दिया। कांग्रेस से असहमत होने वाले किसी भी व्यक्ति को प्रताड़ित और परेशान किया जाता था। सबसे कमजोर वर्गों को निशाना बनाने के लिये सामाजिक रूप से प्रतिगामी नीतियां लागू की गयी थी।श्री मोदी ने कांग्रेस पर परोक्ष रूप से हमला करते हुये कहा, आपातकाल लागू करने वालों को हमारे संविधान के प्रति अपने प्रेम का दावा करने का कोई अधिकार नहीं है। ये वही लोग हैं, जिन्होंने अनगिनत मौकों पर अनुच्छेद 356 लगाने के साथ ही प्रेस की स्वतंत्रता को खत्म करने वाला विधेयक पारित किया तथा संघवाद को नष्ट किया। संविधान के हर पहलू का उल्लंघन किया।उन्होंने दोहराया कि जिस मानसिकता के कारण आपातकाल लगाया गया, वह अभी भी उसी पार्टी में जीवित है। उन्होंने कहा, वे अपने दिखावे के जरिये संविधान के प्रति अपनी घृणा को छिपाते हैं, लेकिन देश के लोगों ने उनकी हरकतों को समझ लिया है और इसीलिए उन्होंने उन्हें बार-बार नकार दिया है। आपातकाल की घोषणा ठीक 49 साल पहले 24-25 जून- 1975 की मध्यरात्रि को की गयी थी, जिसे 21 मार्च को हटाया गया था।

विपक्ष से जनआकांक्षाओं के लिए जिम्मेदारी से काम करने की उम्मीद : मोदी
Published / 2024-06-24 20:31:34
विपक्ष से जनआकांक्षाओं के लिए जिम्मेदारी से काम करने की उम्मीद : मोदी

एबीएन सेंट्रल डेस्क। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने सबकी सहमति से सरकार चलाने का भरोसा देते हुए सोमवार को कहा कि जन आकांक्षाओं की पूर्ति के लिए विपक्ष की भी आवश्यक है और उन्हें उम्मीद है कि विपक्षी दल जिम्मेदारी के साथ अपने दायित्वों का निर्वहन करेंगे। श्री मोदी ने 18वीं लोकसभा के पहले सत्र की शुरुआत से पूर्व संसद भवन परिसर में पत्रकारों को संबोधित करते हुए कहा कि स्वस्थ लोकतंत्र के लिए विपक्ष की भूमिका आवश्यक है और उसके लिए भी जन आकांक्षाओं पर खराब उतरने की जरुरत है इसलिए उन्हें उम्मीद है कि विपक्ष जिम्मेदारी से अपने दायित्व निभायेगा। उन्होंने कहा कि देश की जनता को विपक्ष से अच्छे कदमों की अपेक्षा हैं। अब तक उससे निराशा ही मिली है लेकिन अब उम्मीद है कि विपक्ष जनता की आकांक्षाओं पर खराब उतरेगा। श्री मोदी ने कहा कि देश को अच्छे और जिम्मेदार विपक्ष का आवश्यकता है। हमें विश्वास है कि 18वीं लोकसभा में जो सांसद जीत कर आए हैं वे लोगों की आकांक्षा को पूरा करेंगे। देश को आगे बढ़ने का हम सब का दायित्व है और हम सबको मिलकर जनता जे विश्वास पर खरा उतारते हुए आगे बढ़ाना है।

शिक्षा प्रणाली में मौजूद खामियों को दूर करने की जरूरत : शिक्षा मंत्री
Published / 2024-06-21 21:33:50
शिक्षा प्रणाली में मौजूद खामियों को दूर करने की जरूरत : शिक्षा मंत्री

एबीएन सेंट्रल डेस्क। यूजीसी-राष्ट्रीय पात्रता परीक्षा (नेट) रद्द होने के एक दिन बाद गुरुवार को शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि मंत्रालय इस पूरे मामले में उजागर हुईं अनियमितताओं की जिम्मेदारी लेता है। प्रधान ने कहा कि शिक्षा प्रणाली में मौजूद खामियों को दूर करने की जरूरत है। प्रधान ने कहा कि राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) की कार्य प्रणाली में सुधार और खामियां (अगर पायी जाती हैं) दूर करने के लिए एक समिति गठित की जायेगी। शिक्षा मंत्री ने कहा कि यूजीसी-नेट परीक्षा के प्रश्न पत्र डार्क नेट पर सार्वजनिक (लीक) हुए थे, जिसके बाद मंत्रालय को यह परीक्षा रद्द करने का फैसला लेना पड़ा। हालांकि, प्रधान ने कहा कि व्यवस्थागत ढांचे पर विश्वास बरकरार चाहिए क्योंकि सरकार किसी भी तरह की अनियमितता बर्दाश्त नहीं करेगी। उन्होंने कहा कि मंत्रालय छात्रों के हितों की रक्षा के लिए पूरी तरह मुस्तैद है परीक्षाओं में हर हाल में पारदर्शिता बरती जायेगी। प्रधान ने यह भी कहा कि हमे राष्ट्रीय पात्रता-सह-प्रवेश परीक्षा-स्नातक (नीट-यूजी) पर राजनीति करने से दूर रहना चाहिए। अगर अनियमितता की कोई छिटपुट घटना हुई है तो इसके लिए उन लाखों छात्रों को नुकसान नहीं होना चाहिए, जिन्होंने अपनी प्रतिभा के दम पर यह परीक्षा उत्तीर्ण की है। प्रधान ने कहा कि बिहार में नीट का पर्चा लीक होने के मामले में मंत्रालय लगातार राज्य सरकार के संपर्क में है। इससे पहले शिक्षा मंत्रालय ने कहा कि छात्रों के हितों की रक्षा के लिए यह परीक्षा रद्द की गई है। राष्ट्रीय साइबर अपराध खतरा विश्लेषण इकाई (एनसीटीएयू) ने इस परीक्षा में अनियमितता की आशंका जताई थी और मंत्रालय को इससे अवगत करा दिया था। इसके बाद परीक्षा रद्द करने निर्देश जारी कर दिया गया। यह परीक्षा देश भर में मंगलवार को आयोजित हुई थी जिसमें 9 लाख छात्र शामिल हुए थे। यूजीसी-नेट परीक्षा की नई तारीख जल्द ही घोषित की जा सकती है। महाविद्यालयों में सहायक प्राध्यापक एवं जूनियर रिसर्च फेलोशिप (जेआरएफ) की पात्रता निर्धारित करने के लिए नेट का संचालन किया जाता है। यह मामला ऐसे समय में उठा है जब एनटीए नीट-यूजी परीक्षा में अनियमितताओं के लिए आलोचना झेल रही है। पर्चा लीक में राजद संलिप्त : उप-मुख्यमंत्री बिहार के उप-मुख्यमंत्री विजय कुमार सिन्हा ने आरोप लगाया है कि नीट-यूजी 2024 के कथित पेपर लीक के मामले में गिरफ्तार मुख्य आरोपी के राजद नेता तेजस्वी यादव से जुड़े अधिकारियों के साथ संबंध हैं। सिन्हा ने इसकी उच्च स्तरीय जांच कराने की मांग की है। पटना में संवाददाता सम्मेलन में सिन्हा ने दावा किया कि राजद नेता एवं बिहार के पूर्व उप-मुख्यमंत्री तेजस्वी यादव से जुड़ा एक अधिकारी नीट-यूजी 2024 के कथित पेपर लीक मामले में बिहार पुलिस द्वारा गिरफ्तार किए गए मुख्य आरोपी सिकंदर प्रसाद यादवेंदु के साथ लगातार संपर्क में था। उन्होंने कहा कि राजद नेता से जुड़े अधिकारी और मुख्य आरोपी के बीच संबंधों की गहन जांच की जानी चाहिए। सिन्हा ने कहा कि तेजस्वी यादव से जुड़ा एक अधिकारी सिकंदर के लिए पटना और अन्य स्थानों के गेस्ट हाउसों में ठहरने की व्यवस्था करता था। मेरे पास उन संदेशों का विवरण है जो अधिकारी ने सिकंदर के ठहरने की व्यवस्था करने के लिए संबंधित व्यक्तियों को भेजे थे। उन्होंने कहा कि उनके पास वह मोबाइल नंबर है जिससे यादवेंदु के ठहरने के लिए संदेश भेजे गए थे। सिन्हा ने कहा कि इस पूरे मामले की गहन जांच होनी चाहिए। राजद नेता मनोज झा ने इस आरोपों को बेबुनियाद बताया और कहा कि तेजस्वी का नाम एक साजिश के तहत इस मामले में उछाला जा रहा है।

कितना जायज है ईवीएम पर सवाल
Published / 2024-06-20 22:05:06
कितना जायज है ईवीएम पर सवाल

सुरेश हिन्दुस्तानी एबीएन सेंट्रल डेस्क। देश में प्राय: हर उस चुनाव के बाद विद्युतीय मतदान मशीन (इलेक्ट्रानिक वोटिंग मशीन) पर सवाल उठते रहे हैं, जब किसी भी विपक्ष की सरकार नहीं बन पाती। इस बार भी लोकसभा चुनाव के बाद देर से ही सही, लेकिन (इलेक्ट्रानिक वोटिंग मशीन) ईवीएम पर सवाल उठने लगे हैं। हालांकि अभी स्वर इसलिए भी धीमे हैं, क्योंकि लोकसभा चुनाव में विपक्ष के राजनीतिक दलों ने अपनी ताकत बढ़ाकर एक मजबूत विपक्ष बनने का रास्ता तैयार कर लिया है। देश के राजनीतिक इतिहास में ऐसा दृश्य पहली बार दिख रहा है, जब विपक्ष सरकार बनाने से दूर रहकर भी अपनी विजय का अहसास करा रहा है। इसके विपरीत सत्ता पाने वाले राजग इस बात की समीक्षा कर रहा है कि उसकी सीटें कम कैसे हो गईं। जबकि यह समीक्षा विपक्षी दलों को करना चाहिए। खैरङ्घ बात हो रही थी ईवीएम की। इस लोकसभा चुनाव से पूर्व भी भाजपा के नेतृत्व में दो बार केंद्र में सरकार बनी, तब भी विपक्ष का यही मानना था कि ईवीएम की गड़बड़ी के कारण ही भाजपा ने विजय प्राप्त की है। हालांकि इन दस वर्ष के दौरान कई बार ऐसे चुनाव परिणाम भी आए हैं, जिसमें भाजपा को हार का सामना करना पड़ा। लेकिन विसंगति यही है कि इसके बाद विपक्ष की ओर से ईवीएम पर कोई सवाल नहीं उठाये गये। ऐसी स्थिति में यही कहा जा सकता है कि विपक्ष की ओर से स्थिति देखकर ही सवाल उठाये जाते हैं। विपक्षी राजनीतिक दलों को ऐसा ही लगता है कि भाजपा के पास कोई जनाधार नहीं है। वे मात्र ईवीएम के सहारे ही जीतते हैं। जबकि विपक्ष के किसी राजनीतिक दल को किसी राज्य में सत्ता प्राप्त हो जाये तो फिर ईवीएम पर सवाल नहीं उठाये जाते। हम जानते हैं कि विपक्ष को केवल भाजपा की जीत से परहेज है। वे भाजपा की जीत को पचा नहीं पाते, जबकि दिल्ली और पंजाब में आम आदमी पार्टी को छप्पर फाड़ समर्थन मिला था, लेकिन तब ईवीएम पर कोई सवाल नहीं उठा। हमें स्मरण होगा कि सन 2014 के लोकसभा चुनाव परिणाम के बाद विपक्षी दलों के अधिकतर नेताओं ने एक स्वर में ईवीएम पर सवाल खड़े किये थे। तब इन सवालों का जवाब देने के लिए चुनाव आयोग ने सारे राजनीतिक दलों को बुलाया था कि ईवीएम को कोई हैक करके दिखाए। लेकिन उस समय ज्यादा विरोध करने वाले कोई भी राजनेता चुनाव आयोग के बुलावे पर नहीं पहुंचे। इसका तात्पर्य यही है कि विपक्ष के ईवीएम पर आरोप का कोई पुष्ट आधार नहीं है। इस बार भी केवल आशंका के आधार पर ईवीएम को निशाने पर लाने की कोशिश की जाने लगी है। चुनाव परिणाम के बाद इस बात की पूरी संभावना बन रही थी कि इस बार ईवीएम को आड़े हाथ लिया जायेगा। इसलिए चुनाव आयोग ने भी ईवीएम को लेकर उत्पन्न होने वाले भ्रम को दूर करने का प्रयास किया। लेकिन इतना होने के बाद भी यह भ्रम दूर नहीं हो सका और ईवीएम पर आरोप लगने शुरू हो गये हैं। यह विवाद कितनी दूर तक जाएगा, यह तो कहना मुश्किल है, लेकिन जब धुआं उठने लगा है तो आग भी कहीं न कहीं लगी ही होगी। अब विपक्ष के निशाने पर चुनाव आयोग और ईवीएम दोनों ही हैं। विपक्ष की ओर से यह कई बार कहा गया कि चुनाव आयोग केंद्र सरकार के संकेत पर कार्य करता है। वास्तविकता यह है कि चुनाव आयोग एक स्वायत्त संस्था है, जिस पर न तो किसी सरकार का कोई प्रभाव रहता है और न ही किसी राजनीतिक दल का। फिर भी चुनाव आयोग को क्यों विवाद में घसीटा जाता है। यहां यह भी बताना बहुत महत्वपूर्ण है कि अगर विदेश का कोई व्यक्ति या संस्था भारत के बारे में कोई सवाल उठाता है तो हमारे देश के कुछ लोग उस पर आंख बंद करके विश्वास कर लेते हैं, जबकि हमारे देश के संस्थान केवल सफाई देते रहते हैं। अभी हाल ही में एलन मस्क द्वारा यह कहकर सनसनी फैलाने का ही काम किया है कि ईवीएम हैक हो सकती है। एलन मस्क ने यह बयान क्यों दिया, यह तो वही जानें, लेकिन विदेश के लोगों द्वारा भारत के बारे में ऐसे विवादित बयान कई बार दिए जा चुके हैं, जिसको आधार बनाकर भारत की राजनीति को प्रभावित करने का प्रयास किया गया। पाकिस्तान की तरफ से तो मोदी सरकार को सत्ता से हटाने के लिए एक अभियान सा चलता दिखाई दिया। बेहतर यही होता कि विदेश के किसी भी व्यक्ति को सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों तरफ से आईना दिखाने का कार्य किया जाता। क्योंकि यह भारत के अंदरुनी मामले हैं, जिनका समाधान कोई विदेशी कभी नहीं निकाल सकता। ईवीएम पर सवाल उठाने से पहले यह सोचना होगा कि भारत एक बड़ा देश है। ईवीएम प्रणाली से समय की बचत तो होती ही है, साथ ही व्यय में भी कमी आती है। ईवीएम को लेकर जो सवाल अभी उठ रहे हैं, वे सवाल वास्तव में उस समय उठने चाहिए थे, जब ईवीएम को भारत में लाया गया। उस समय की कांग्रेस की सरकार इसे लेकर आई। ऐसा लगता है कि उस समय यह ठीक थी, लेकिन बाद में उसी को बुराई के रूप में देखा जाने लगा। सत्यता यही है कि किसी भी विवाद में एक पक्ष को पराजित होना ही पड़ता है। यह पराजय भले ही न्यायपूर्ण हो, लेकिन जो हारता है उसे वह न्याय भी अन्याय जैसा ही लगता है। ईवीएम भी कुछ ऐसे ही वाकये का शिकार हो रही है। लोकसभा चुनाव के बाद देश में नई सरकार का गठन हो चुका है। परिणाम के बाद जो राजनीतिक स्थिति बनी है, उसके अनुसार भारतीय जनता पार्टी अन्य सभी दलों से बहुत आगे है। इसका तात्पर्य यही है कि भारत की जनता की पहली पसंद आज भी भाजपा ही है। इस सत्य को स्वीकार करना ही होगा। निराधार आरोप लगाने की राजनीति ने कभी देश का भला नहीं किया, इसलिए अब देश के बारे में सोचिये। यह समय की मांग है। (लेखक, स्वतंत्र टिप्पणीकार हैं।)

कश्मीर में योग दिवस मनायेंगे पीएम मोदी
Published / 2024-06-19 21:20:53
कश्मीर में योग दिवस मनायेंगे पीएम मोदी

तीन हजार करोड़ से अधिक की परियोजनाएं भी मिलेंगीएबीएन सेंट्रल डेस्क। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस समारोह में शामिल होने के लिए कल जम्मू-कश्मीर की दो दिन की यात्रा पर जायेंगे, जहां वह तीन हजार करोड़ रुपये से भी अधिक लागत की 80 से भी अधिक विकास योजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास भी करेंगे। प्रधानमंत्री कार्यालय के अनुसार श्री मोदी गुरूवार शाम श्रीनगर के शेर-ए-कश्मीर इंटरनेशनल कॉन्फ्रेंस सेंटर में युवा सशक्तिकरण, जम्मू कश्मीर में बदलाव कार्यक्रम में भाग लेंगे। वह जम्मू-कश्मीर में कई विकास परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास करेंगे तथा कृषि और संबद्ध क्षेत्रों में प्रतिस्पर्धात्मकता सुधार परियोजना का भी शुभारंभ करेंगे। श्री मोदी शुक्रवार सुबह श्रीनगर में 10वें अंतरराष्ट्रीय योग दिवस कार्यक्रम में हिस्सा लेंगे। वह इस अवसर पर लोगों को संबोधित करेंगे और उसके बाद योग सत्र में भाग लेंगे। प्रधानमंत्री केंद्र शासित प्रदेश में 1500 करोड़ रुपये से अधिक की लागत से 84 प्रमुख विकासात्मक परियोजनाओं का शिलान्यास और उद्घाटन करेंगे। इनमें सड़क बुनियादी ढांचे, जल आपूर्ति योजनाओं और उच्च शिक्षा में बुनियादी ढांचे आदि से संबंधित परियोजनाएं शामिल हैं। इसके अतिरिक्त, प्रधानमंत्री चेनानी-पटनीटॉप-नाशरी खंड के सुधार, औद्योगिक संपदा के विकास और छह सरकारी डिग्री कॉलेज के निर्माण परियोजनाओं की आधारशिला रखेंगे। प्रधान मंत्री 1800 करोड़ रुपये की कृषि और संबद्ध क्षेत्रों में प्रतिस्पर्धात्मकता सुधार परियोजना का भी शुभारंभ करेंगे। यह परियोजना जम्मू-कश्मीर के 20 जिलों के 90 ब्लॉकों में लागू की जाएगी और 15 लाख लाभार्थियों वाले तीन लाख घरों को कवर करेगी। प्रधानमंत्री सरकारी सेवा में नियुक्त दो हजार से अधिक लोगों को नियुक्ति पत्र भी वितरित करेंगे। इन परियोजनाओं के से युवा सशक्त होंगे और जम्मू-कश्मीर में बुनियादी ढांचे का उन्नयन होगा। श्री मोदी शुक्रवार को दसवें अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर श्रीनगर में अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस समारोह का नेतृत्व करेंगे। इस वर्ष का आयोजन युवा मन और शरीर पर योग के गहरे प्रभाव को रेखांकित करता है। इस उत्सव का उद्देश्य वैश्विक स्तर पर स्वास्थ्य और कल्याण को बढ़ावा देने, योग के अभ्यास से हजारों लोगों को एकजुट करना है।

लाल मिर्च ने बनाया नया रिकार्ड
Published / 2024-06-19 21:19:33
लाल मिर्च ने बनाया नया रिकार्ड

भारत के मसाला एक्सपोर्ट ने तोड़ा रिकॉर्ड, लाल मिर्च का रहा जलवाएबीएन सेंट्रल डेस्क। भारत ने वित्त वर्ष 2023-24 में मसालों और उसके उत्पादों के निर्यात (एक्सपोर्ट)का रिकॉर्ड बना दिया है। मसाला निर्यात रिकॉर्ड 4.46 बिलियन डॉलर पर पहुंच गया, जो अब तक के उच्चतम स्तर पर पहुंच गया है। इसके साथ ही भारत वैश्विक व्यापार में एक प्रमुख खिलाड़ी बन गया है।यह बढ़ौतरी मात्रा में उछाल और काली मिर्च, इलायची और हल्दी जैसी कुछ किस्मों के लिए उच्च कीमतों के कारण देखी गयी। खबर के मुताबिक, वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय के तहत मसाला बोर्ड के लेटेस्ट आंकड़ों के मुताबिक, वित्त वर्ष 2023-24 के दौरान देश से मसालों/ मसाला उत्पादों का निर्यात 36,958.80 करोड़ रुपये (4.46 बिलियन डॉलर) मूल्य का 15,39,692 टन रहा है।खबर के मुताबिक, लाल मिर्च का निर्यात वित्त वर्ष 2024 में रिकॉर्ड 1.5 बिलियन डॉलर पर पहुंच गया, जो पिछले वर्ष के 1.3 बिलियन डॉलर से 15 प्रतिशत अधिक है, जो चीन और बांग्लादेश से मजबूत मांग से प्रेरित है। मसाला बोर्ड के आंकड़ों के अनुसार, वित्त वर्ष 2024 में लाल मिर्च का निर्यात मात्रा पिछले वर्ष के 5.24 लाख टन से 15 प्रतिशत बढ़कर 6.01 लाख टन हो गयी। 1.5 बिलियन डॉलर मूल्य की लाल मिर्च का निर्यात भारत के कुल मसाला निर्यात का लगभग 34 प्रतिशत है।केडिया एडवाइजरी के मुताबिक, वित्त वर्ष 24 में चीन भारतीय लाल मिर्च का शीर्ष आयातक था, जिसने 4,123 करोड़ रुपए मूल्य की 1.79 लाख टन से अधिक की खरीद की। यह वित्त वर्ष 23 में 3,408 करोड़ रुपये मूल्य के 1.57 लाख टन से मात्रा में 14 प्रतिशत और मूल्य में 21 प्रतिशत की वृद्धि दर्शाता है। बांग्लादेश को मिर्च का निर्यात वित्त वर्ष 24 में 67 प्रतिशत बढ़कर 90,570 टन पर पहुंच गया, जो पिछले वर्ष 53,986 टन था।केडिया एडवाइजरी ने कहा कि भारत का लाल मिर्च निर्यात वित्त वर्ष 24 में अभूतपूर्व ऊंचाइयों पर पहुंच गया है, जो प्रमुख आयातक देशों की बढ़ती मांग से प्रेरित है। निर्यात में वृद्धि, विशेष रूप से चीन और बांग्लादेश को, दुनिया भर में भारतीय मसालों के लिए बढ़ती मान्यता और पसंद को दर्शाती है।

कल वाराणसी में किसानों की नब्ज टटोलेंगे पीएम मोदी
Published / 2024-06-17 20:54:53
कल वाराणसी में किसानों की नब्ज टटोलेंगे पीएम मोदी

तीसरी बार पीएम बनने के बाद कल वाराणसी में मोदी, किसान सम्मेलन को करेंगे संबोधितएबीएन सेंट्रल डेस्क। तीसरी बार प्रधानमंत्री बनने के बाद नरेन्द्र मोदी मंगलवार को अपने संसदीय क्षेत्र वाराणसी आ रहे हैं, जहां वे विभिन्न कार्यक्रमों में हिस्सा लेंगे। भाजपा के एक पदाधिकारी ने वाराणसी में सोमवार को बताया कि मोदी 18 जून को अपने संसदीय क्षेत्र वाराणसी में किसान सम्मेलन को संबोधित करेंगे। इस दौरान प्रधानमंत्री देश के 9.60 करोड़ किसानों के खाते में प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना की 17वीं किस्त के तहत 20 हजार करोड़ से ज्यादा की राशि अंतरित करेंगे। भाजपा की जिला इकाई के मीडिया प्रभारी अरविंद मिश्रा ने बताया कि नरेन्द्र मोदी तीसरी बार प्रधानमंत्री पद की शपथ लेने के बाद अपने क्षेत्र के मतदाताओं का आभार जताने मंगलवार को काशी आ रहे हैं। प्रधानमंत्री मंगलवार की शाम को बाबतपुर हवाई अड्डा पहुंचेंगे, जहां से वे हेलीकॉप्टर से मिजार्मुराद के मेंहदीगंज में किसान संवाद कार्यक्रम स्थल पहुंचेंगे। वहां किसानों को संबोधित करने के साथ ही वे देश के 9.60 करोड़ किसानों के खाते में डीबीटी के तहत 20 हजार करोड़ से ज्यादा की पीएम किसान सम्मान निधि योजना की 17वीं किस्त जारी करेंगे।

खड़ी कंचनजंगा एक्सप्रेस में मालगाड़ी ने मारी टक्कर, 15 की मौत, 60 घायल
Published / 2024-06-17 20:47:34
खड़ी कंचनजंगा एक्सप्रेस में मालगाड़ी ने मारी टक्कर, 15 की मौत, 60 घायल

कंचनजंगा एक्सप्रेस हादसे में 15 की मौत, 60 घायलएबीएन सेंट्रल डेस्क। पश्चिम बंगाल में जलपाईगुड़ी के पास खड़ी कंचनजंगा एक्सप्रेस में पीछे से एक मालगाड़ी ने टक्कर मार दी। रंगापानी और निजबाड़ी के पास हुए हादसे में तीन बोगियां बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गयीं। रेलवे की टीम रेस्क्यू आॅपरेशन में जुटी है। इस हादसे में 15 लोगों की मौत और 60 लोग घायल बताये जा रहे हैं। पश्चिम बंगाल में हुए रेल हादसे पर रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा कि हादसे के पीड़ितों को दी जाने वाले अनुग्रह राशि में बढ़ोत्तरी की गयी है। इसमें मरने वाले के परिजनों को 10-10 लाख रुपये, गंभीर रूप से घायलों को 2.5-2.5 लाख रुपये और मामूली रूप से घायल होने वालों को 50-50 हजार सहायता राशि दी जायेगी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने घोषणा की है कि पश्चिम बंगाल में रेल दुर्घटना में मारे गये प्रत्येक व्यक्ति के परिजनों को प्रधानमंत्री राष्ट्रीय राहत कोष से 2-2 लाख रुपये की अनुग्रह राशि दी जायेगी। जबकि घायलों को 50-50 हजार रुपये दिये जायेंगे।

स्वास्थ्य सुविधाओं की गुणवत्ता पर स्वास्थ्य मंत्री नड्डा ने दिया जोर
Published / 2024-06-15 21:24:36
स्वास्थ्य सुविधाओं की गुणवत्ता पर स्वास्थ्य मंत्री नड्डा ने दिया जोर

एबीएन सेंट्रल डेस्क। केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री जगत प्रकाश नड्डा ने शुक्रवार को कहा कि स्वास्थ्य सुविधाओं और स्वास्थ्य प्रणालियों की गुणवत्ता तथा इनका दायरा बढ़ाने पर जोर दिया जाना चाहिए। श्री नड्डा ने यहां नयी सरकार के गठन के पहले 100 दिनों में स्वास्थ्य लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए वरिष्ठ अधिकारियों के साथ एक उच्च स्तरीय बैठक की अध्यक्षता की। इस बैठक में केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण राज्य मंत्री अनुप्रिया पटेल और प्रतापराव गणपतराव जाधव तथा सचिव अपूर्व चंद्रा भी शामिल हुए। श्री नड्डा ने निर्देश दिया कि स्वास्थ्य सुविधाओं और स्वास्थ्य प्रणालियों की गुणवत्ता पर जोर दिया जाना चाहिए। उन्होंने एबी पीएमजेएवाई के तहत स्वास्थ्य सेवा के विस्तार और टीकाकरण तथा स्वास्थ्य आपातकालीन प्रबंधन जैसे अवसरों में प्रौद्योगिकी का लाभ उठाने पर जोर दिया। केंद्रीय मंत्री ने गैर-संचारी रोगों के पीड़ितों की बढ़ती संख्या और स्वस्थ आहार तथा जीवन शैली के बारे में जागरूकता के महत्व पर जोर दिया।

Newsletter

Subscribe to our website and get the latest updates straight to your inbox.

We do not share your information.

abnnews24

सच तो सामने आकर रहेगा

टीम एबीएन न्यूज़ 24 अपने सभी पाठकों और प्रेरणाश्रोतों का अभिनन्दन करता है। आपके सहयोग और विश्वास के लिए धन्यवाद।

विज्ञापन

© 2026 ABN News 24. All Rights Reserved.

कुल पाठक (Total Visitors): 120,745