एबीएन सेंट्रल डेस्क। हत्या के लिए अब आईपीसी की धारा 302 नहीं, भारतीय न्याय संहिता की धारा 103 लगेगी। अंग्रेजों के जमाने से चले आ रहे कानून 163 साल बाद खत्म हो गये हैं। अगर 5000 से कम की चोरी करते पकड़े गये तो कोर्ट गली-मोहल्ले में झाड़ू लगाने की सजा भी सुना सकती है। पूरे देश में 1 जुलाई 2024 से नया भारतीय दंड संहिता का नाम भारतीय न्याय संहिता हो गया है। कानून में हुए नये बदलावों को लेकर सोमवार को मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने वीसी के जरिए राजस्थान पुलिस, सीएलजी मेंबर, पुलिस मित्र और सुरक्षा सखियों को संबोधित किया। इस दौरान उन्होंने कहा कि नये कानून के तहत जल्द ही न्याय मिलेगा। इसी को लेकर पाली जिले के सादड़ी थाना में नये भारतीय दंड संहिता के तहत प्रदेश का पहला मामला सोमवार सुबह 10 बजकर 22 मिनट पर दर्ज किया गया है। पीड़ित के साथ खेत से ट्रैक्टर निकालने की बात को लेकर विवाद हुआ था, जिसके बाद उसकी पिटाई की गई। सादड़ी थाने के सीआई चंपाराम ने बताया कि मोरखा निवासी मदनलाल ने रिपोर्ट देकर बताया कि वह ट्रैक्टर चलाता है। वह किराये से लोगों के खेतों में खड़ाई का कार्य करता है। 30 जून रविवार को सरदारसिंह के खेत में खड़ाई की, जिसके पास में सुमेर सिंह का खेत है। मदनलाल ने बताया कि सुमेर सिंह के खेत में से ट्रैक्टर निकाला तो वह नाराज हो गया। सोमवार सुबह वह ट्रैक्टर लेकर जा रहा था। इसी दौरान सुमेर सिंह ने बीच रास्ते उसे रुकवाया और मारपीट कर दी। इससे सिर व कोहनी में चोट आयी है। सीआई ने बताया कि बीएनएस की धारा 115 (2), 126 (2), 324 (4) और 324 (5) में दर्ज हुई। जबकि यह पूर्व में 323, 341 व 427 आईपीसी में दर्ज होती थी। घायल का सादड़ी के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में इलाज चल रहा है। दौसा के लालसोट थाने में भी एक महिला की शिकायत पर नये कानून के तहत मामला दर्ज करवाया है। डीएसपी उदय सिंह ने बताया कि पीड़िता सोमवार सुबह 7 बजे दिल्ली से थाना क्षेत्र में अपने ससुराल पहुंची। जहां उसके दो देवर और एक देवरानी आये और उसका सामान घर से बाहर फेंकना शुरू कर दिया। जब उसने विरोध किया तो उसके साथ मारपीट की गयी। कपड़े फाड़कर लज्जा भंग की गयी। इस दौरान आरोपियों ने उसके कान से टॉप्स छीन लिये। इस दौरान गांव के लोगों ने बीच बचाव किया नहीं तो आरोपी उसे जान से मार देते। इस दौरान आरोपियों ने ससुराल में नहीं रहने देने की धमकी भी दी। महिला 12:30 बजे पहुंची। उसके बाद दोपहर को 12:51 पर बीएनएस की धाराओं में मामला दर्ज कर लिया। मामले की शिकायत लेकर जब महिला थाने पहुंची तो उस समय मुख्यमंत्री की वीसी पूरी हुई थी। पुलिस अधिकारी भी थाने में मौजूद थे। जैसे ही महिला ने शिकायत दी तो भारतीय न्यायिक संहिता की धारा 115/2, 126/2, 303/2, 74 और 351/2 के तहत मुकदमा दर्ज किया गया। पूर्व में आईपीसी के तहत यह मुकदमा धारा 323, 341, 379, 354, 506 का अपराध बनता था। मगर भारतीय दंड संहिता की जगह अब भारतीय न्याय संहिता लागू होने से धाराओं में बदलाव हो चुका है और नए कानून पूरे देश में लागू हो चुके हैं। गृह राज्य मंत्री जवाहर सिंह बेढम ने कहा कि न्याय अगर देरी से मिलता है तो वह न्याय नहीं है। इस लिए नये कानून से न्याय जल्द से जल्द मिलेगा। केन्द्र सरकार ने पीड़ित का दर्द समझा इसीलिए यह कानून लेकर आए हैं। तत्काल न्याय देने के लिए पुलिस की बड़ी भूमिका होती हैं इसलिए पुलिस को बड़ी जिम्मेदारी से काम करने की जरूरत है।
कमल सिंह लोधागुना। केंद्रीय गृह मंत्रालय द्वारा देश में लागू तीन नये कानून भारतीय न्याय संहिता (BNS), भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (S) एवं भारतीय साक्ष्य संहिता (BSA) आगामी दिनांक 01 जुलाई 2024 से अस्तित्व में आ जाएंगे । 01 जूलाई से देश में नये कानून के प्रभावी होते ही हत्या, दुष्कर्म, अपहरण, चोरी-लूट-डकैती, धोखाधड़ी आदि गंभीर बारदातों समेत अन्य सभी बारदातों के लिये नवीन धाराओं के तहत मुकदमा कायम किये जावेंगे । उदाहरण के लिये आईपीसी में हत्या के लिये अभी तक धारा 302 लगाई जाती थी अब हत्या के लिये BNS 2023 की धारा 103(1) का इस्तेमाल किया जावेगा। इसी तरह गैर इरादतन हत्या के लिये 105, 106 लगेगी, पहले इनके लिये क्रमश: 304, 304ए लगाई जाती थी । छेड़छाड़ में अब 354, 354ए, सी, डी की जगह BNS धारा 74, 75, 76, 78 लगाई जावेगी । इसी प्रकार बलात्कार के अलग-अलग प्रकृति के मामलों में 64, 64(2), 65(1), 65(2), 70(1), 70(2) लगेगी । अपहरण के मामलों में 363, 366 की बजाय अब धारा 137(2) व धारा 87 के तहत कार्यवाही होगी । आत्महत्या के लिये उकसाने पर 306 की जगह पर BNS 106 लगेगी । धोखाधड़ी सहित अन्य गंभीर वित्तीय धोखाधड़ी के लिये 420, 467, 468 के स्थान पर क्रमश: 318, 338, 336(3) लगेगी । इसी तरह सामान्य मारपीट से लेकर गंभीर मारपीट, साक्ष्य मिटाने की कोशिश, बलवा आदि समेत अन्य सभी बारदातों से जुड़ी विभिन्न धाराएं नये कानून में बदल जाएंगी, यही स्थिति सीआरपीसी की धाराओं के लिये रहेगी, इसमें भी धाराओं के नंबर बदले गये हैं । साथ ही अब धाराओं के आगे IPC/CRPC के स्थान पर BNS/BNSS लिखा जावेगा ।जिले में नवीन आपराधिक कानून के क्रियान्वयन हेतु जिले के समस्त पुलिस अधिकारियों, कर्मचारियों को विगत् दो माह से प्रशिक्षण देकर प्रशिक्षित किया गया है । इसके साथ ही नवीन आपराधिक कानून का लोगों के बीच प्रचार-प्रसार हेतु जिले के सभी थानों पर नये कानून से संबंधित पोस्टर्स चस्पा किये गये हैं एवं मीडिया सोशल मीडिया, रेडियो एफएम के माध्यम से भी लोगों को नवीन कानून के संबंध में जानकारी दी जा रही है । इसके अलावा पुलिस द्वारा विभिन्न स्कूल, कॉलेज सहित अन्य सार्वजनिक व भीड़भाड़ वाली जगहों पर रैली, आमसभा आदि के माध्यम से लोगों से जन संवाद कर नवीन अपराधिक अधिनियम के संबंध में जागरूक किया जा रहा है।
कमल सिंह लोधा की रिपोर्टएबीएन न्यूज नेटवर्क, गुना। केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया चुनाव में अपने रिकॉर्ड जीत के बाद अपने क्षेत्र के विकास के लिए अत्यधिक संवेदनशील तरीके से कार्य कर रहे है। प्राप्त जानकारी के अनुसार केंद्रीय मंत्री सिंधिया ने गुना लोकसभा क्षेत्र के कई विकास कार्यों के लिए मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव व सम्बंधित विभाग के मंत्रियों को पत्र लिखकर विभिन्न विकास कार्यों को जल्द से जल्द करवाने की मांग की है। इसमें सबसे महत्वपूर्ण गुना में मेडिकल कालेज स्थापना के लिए जल्द कारवाई की मांग की है। इसके साथ ही गुना जिले अस्पताल को मरीज़ों की भीड़ देखते हुए 400 बेड से 600 बेड करने की मांग की है। मांगों में मुख्यमंत्री मोहन यादव को गुना में मेडिकल कालेज की स्थापना के लिए शीघ्र कारवाई की मांग करते हुए मुख्यमंत्री गुना के जिला अस्पताल में बेड संख्या की बढ़ोत्तरी, नये डॉक्टर व स्टाफ़ एवं मूलभूत सुविधा प्रदान की मांग की।
धरना, रैली, जुलूस, प्रदर्शन और ध्वनि विस्तारक यंत्र का उपयोग प्रतिबंधित कमल सिंह लोधाएबीएन न्यूज नेटवर्क, गुना। कलेक्टर एवं जिला मजिस्ट्रेट डॉ. सतेन्द्र सिंह द्वारा कलेक्टर कार्यालय परिसर गुना में संचालित न्यायालयों/ विभागों एवं कार्यालयों का कार्य सुचारू रूप से संचालन, शासकीय कर्मचारियों एवं आगंतुकों की जान-माल की सुरक्षा एवं लोक शांति एवं कानून व्यवस्था बनाये रखने की दृष्टि से लोकहित में दंड प्रक्रिया संहिता की धारा-144 के तहत विभिन्न प्रतिबंधात्मक आदेश जारी किये गये हैं। जारी आदेश अनुसार कलेक्टर कार्यालय परिसर में राजनैतिक, गैर राजनैतिक, सामाजिक एवं अन्य घटनाओं आदि के विरोध में आयोजनकर्ता/ आंदोलनकारियों के किसी भी प्रकार के धरना, रैली, जुलूस, प्रदर्शन एवं इसी तरह के अन्य आयोजन पूर्णत: प्रतिबंधित रहेंगे। राजनैतिक, गैर राजनैतिक, सामाजिक, एवं अन्य घटनाओं आदि के विरोध में आयोजनकर्ता/ आंदोलनकारी यदि किसी ज्वलंत समस्या के कारण ज्ञापन देने हेतु उक्त परिसर में स्थित किसी कार्यालय में प्रवेश चाहते हैं, तो इसके कारण सहित लिखित सूचना 48 घंटे पूर्व कलेक्टर/ अपर कलेक्टर को देनी होगी। जिसकी एक प्रति पुलिस अधीक्षक गुना, एसडीएम गुना, सीएसपी गुना एवं थाना प्रभारी केंट को भी दी जाना अनिवार्य होगी। उक्तानुसार लिखित सूचना उपरांत ही कलेक्ट्रेट के मुख्य प्रवेश द्वार (पोर्च) पर ज्ञापन दिया जा सकेगा। मुख्य भवन के भीतर ज्ञापन नहीं दिया जायेगा। ध्वनि विस्तारक यंत्र का उपयोग प्रतिबंधित रहेगा। अनुमति उपरांत ही संबंधित कार्यालय में अपनी मांगों/समस्याओं के संबंध में चर्चा अथवा भेंट हेतु अधिकतम 04 व्यक्ति का समूह ही प्रवेश कर सकेगा तथा इस दौरान किसी भी प्रकार की नारेबाजी पूर्णत: प्रतिबंधित होगी। कलेक्ट्रेट भवन में किसी भी प्रकार का हथियार (धारदार एवं अन्य लायसेंसी हथियार) धारण करने पर पूर्णत: प्रतिबंधित रहेगा। अपाहिज तथा वृद्ध के अतिरिक्त कोई भी व्यक्ति परिसर में लाठी/ डंडे लेकर नहीं घूमेगा। जारी आदेश दण्ड प्रक्रिया संहिता 1973 की धारा 144 (2) के अन्तर्गत यह आदेश एक पक्षीय रूप से पारित किया गया है। उक्त आदेश का उल्लंघन करने की दशा में संबंधित के विरूद्ध भारतीय दण्ड संहिता की धारा-188 तथा अन्य अधिनियमों के अन्तर्गत दंडात्मक कार्यवाही की जायेगी। उक्त आदेश तत्काल प्रभाव दिनांक 27 जून 2024 से 26 अगस्त 2024 तक की अवधि के लिए प्रभावशील रहेगा।
टीम एबीएन, रांची। अंतर्राष्ट्रीय हिंदू परिषद के झारखंड प्रदेश के पदधारियों की बैठक रांची के पिस्का मोड़ स्थित होटल में 26 जून, 2024 को हुई। इसमें संगठन के गुजरात, राजस्थान और पटना क्षेत्र के संगठन मंत्री मुख्य रूप से उपस्थित थे। उक्त बैठक में अनुनय मंत्री को झारखंड प्रदेश हिंदू हेल्पलाइन का अध्यक्ष मनोनीत किया गया। सभी पदधारी को एक-एक जिले में श्री हनुमान चालीसा केंद्र अधिक से अधिक चलने की जिम्मेदारी दी गयी। इस वर्ष महाकुंभ के अवसर पर विराट हिंदू महासम्मेलन प्रयागराज में किया जायेगा। इस वर्ष देश भर में 1 लाख हनुमान चालीसा केंद्र का निर्माण करने का निर्णय लिया गया। इसी कड़ी में झारखंड में भी अधिक से अधिक हनुमान चालीसा केंद्र का निर्माण किया जायेगा। यह प्रांत बैठक प्रत्येक माह में होगी। इसका मूल्यांकन अगली बैठक में किया जायेगा। बैठक में प्रांत महामंत्री दिलीप वेद, संगठन मंत्री कन्हैया लाल, प्रांत मंत्री प्रशांत सिंह, विनोद सिंह, एडवोकेट फॉर्म के प्रांत उपाध्यक्ष अधिवक्ता नित्यानंद सिंह, राष्ट्रीय छात्र परिषद के अध्यक्ष प्रोफेसर गोपाल महतो, इंडिया हेल्थ लाइन के प्रांत मंत्री राजीव रंजन मिश्रा, राष्ट्रीय महिला परिषद की मंत्री सीमा शर्मा, राष्ट्रीय महिला परिषद की उपाध्यक्ष शीला देवी मौजूद थे। इसके अलावा ओजस्विनी की प्रांत मंत्री डोली कुमारी, हिंदू हेल्पलाइन प्रदीप राणा, धनबाद विभाग के अध्यक्ष रवि शंकर पांडे, रांची विभाग अध्यक्ष ओपी मिश्रा, जमशेदपुर विभाग अध्यक्ष अधिवक्ता प्रमोद पाठक, मंत्री टीवीआर राजू, राष्ट्रीय बजरंग दल रांची के विभाग अध्यक्ष छोटन माहली, कार्यसमिति सदस्य आदित्य स्वर्णकार एवं रोहित कुमार भी बैठक में उपस्थित थे।
आपने इतिहास रच दिया..., पीएम मोदी ने स्पीकर बनने पर ओम बिरला को दी बधाईएबीएन सेंट्रल डेस्क। तीन बार के भाजपा सांसद ओम बिड़ला को मंगलवार को दूसरी बार लोकसभा अध्यक्ष चुना गया, जब उन्होंने एक दुर्लभ मुकाबले में इंडिया ब्लॉक के उम्मीदवार के सुरेश को ध्वनि मत से हराया। स्पीकर की कुर्सी पर बैठते ही ओम बिड़ला मुस्कुरा रहे थे। इस क्षण में प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी, विपक्ष के नेता राहुल गांधी और संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू भी एक साथ आए और ओम बिड़ला को कुर्सी तक ले गये। नये अध्यक्ष के साथ उनकी कुर्सी तक जाने से पहले, पीएम मोदी और राहुल गांधी ने भी मुस्कुराहट का आदान-प्रदान किया और हाथ मिलाया। पीएम मोदी ने ओम बिरला को दूसरी बार अध्यक्ष चुने जाने पर बधाई दी। उनके बयान में बिड़ला की मधुर मुस्कान की तारीफ भी थी। प्रधानमंत्री ने कहा, मैं सदन की ओर से आपको बधाई देना चाहता हूं। अमृत काल के दौरान इस पद पर दूसरी बार बैठना आपके लिए एक बड़ी जिम्मेदारी है। हमें उम्मीद है कि आप अपने अनुभव से अगले 5 वर्षों तक हमारा मार्गदर्शन करेंगे। आपके चेहरे की मधुर मुस्कान पूरे सदन को खुश रखेगी। पूरे सफेद परिधान में सजे राहुल गांधी ने भी ओम बिड़ला को "संपूर्ण भारतीय गठबंधन की ओर से और उस आवाज के अंतिम मध्यस्थ बनने के लिए बधाई दी।विपक्ष के नेता ने कहा, मैं आपके सफल चुनाव के लिए आपको बधाई देना चाहता हूं कि आप दूसरी बार चुने गये हैं। मैं आपको पूरे विपक्ष और भारतीय गठबंधन की ओर से बधाई देना चाहता हूं। यह सदन भारत के लोगों की आवाज का प्रतिनिधित्व करता है, और आप हैं उस आवाज का अंतिम मध्यस्थ। सरकार के पास राजनीतिक शक्ति है, लेकिन विपक्ष भी भारत के लोगों की आवाज का प्रतिनिधित्व करता है और इस बार, विपक्ष पिछली बार की तुलना में काफी अधिक भारतीय लोगों की आवाज का प्रतिनिधित्व करता है। राहुल गांधी ने आगे कहा कि विपक्ष के नेतृत्व वाला भारत गुट ओम बिड़ला को अपना काम करने और सदन को अक्सर और अच्छी तरह से काम करने में सहायता करना चाहेगा। कांग्रेस सांसद ने कहा, यह बहुत महत्वपूर्ण है कि सहयोग विश्वास के आधार पर हो। यह बहुत महत्वपूर्ण है कि विपक्ष की आवाज को इस सदन में प्रतिनिधित्व करने की अनुमति दी जाये।
कमल सिंह लोधाएबीएन न्यूज नेटवर्क, गुना। कलेक्टर एवं जिला मजिस्ट्रेट डॉ सतेंद्र सिंह द्वारा ग्रीष्म ऋतु में पानी की कमी की समस्या को ध्यान में रख दंड प्रक्रिया संहिता 1973 की धारा 144 के अंतर्गत वाहन धुलाई केंद्रों को प्रतिबंधित करने के आदेश जारी किये गये हैं। जारी आदेश अनुसार जिले में रोड की साईड पर व अन्य स्थानों पर स्थापित वाहन धुलाई केंद्रों पर वाहनों की धुलाई की जा रही है, जिससे पानी का अपव्यय हो रहा हैं। जिसके दृष्टिगत ग्रीष्म ऋतु में पानी की कमी की समस्या को ध्यान में रखे हुये वाहन धुलाई केंद्रों को प्रतिबंधित किया जाना अति-आवश्यक है। जिसके चलते कलेक्टर एवं जिला मजिस्ट्रेट द्वारा दंड प्रक्रिया संहिता 1973 की धारा-144 के अंतर्गत प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुये जिला गुना में वाहनों की धुलाई कार्य करने वाले केंद्रों को प्रतिबंधित करने के आदेश जारी किये गये हैं।जारी आदेश का उल्लंघन करने पर संबंधित के विरुद्ध भारतीय दंड संहिता की धारा 188 के अन्तर्गत वैधानिक दांडिक कार्यवाही की जायेगी। इस आशय का जारी आदेश तत्काल प्रभाव से लागू किया गया है जो 24 अगस्त 2024 तक प्रभावशील रहेगा।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। वर्ल्ड योगासन के अध्यक्ष परम पूज्य स्वामी रामदेव जी महाराज के मार्गदर्शन में वर्ल्ड योगासन के महासचिव डॉ जयदीप आर्य तथा एशियन योगासन के अध्यक्ष डॉ संजय मालपानी जी, महासचिव उमंग डॉन, योगासन भारत के राष्ट्रीय अध्यक्ष उदित सेठ एवं कोषाध्यक्ष रचित कौशिक ने डॉ पीटी उषा के योगासन खेल को एशिया ओलिंपिक परिषद् में सम्मिलित करने के प्रस्ताव का हृदय से स्वागत किया। मौके पर उन्होंने भारत के प्रधानमंत्री, खेल मंत्री, आयुष सचिव, खेल सचिव एवं भारतीय खेल प्राधिकरण के माननीय महानिदेशक का भी अभिनंदन करते हुए उनका आभार ज्ञापन किया कि उन सबके प्रयासों से ही योगासन के खिलाड़ियों को यह अवसर प्राप्त हो रहा है कि उनका खेल अब एशिया और ओलिंपिक की ओर अग्रसर हो गया है। हम सब 3 लाख योगासन खिलाड़ियों की ओर से और योगासन खेल के सभी कोच, प्रबंधक और अभिभावकों की ओर से भारत सरकार का अभिनंदन करते हैं। विशेषत: भारतीय ओलिंपिक संघ की अध्यक्षा और ओलिंपिक संघ, भारत का अभिनंदन और धन्यवाद ज्ञापित करते हैं। डॉ पीटी उषा भारत की एक जानी-मानी धाविका हैं। साथ ही शिरोमणि संस्था भारतीय ओलिंपिक संघ की अध्यक्ष भी हैं। उन्होंने गोवा में आयोजित हुए 37वें राष्ट्रीय खेलों के दौरान योगासन प्रतियोगिता को देखते हुए यह आश्वासन दिया था कि वह योगासन खेल को एशियाई पटल पर स्थापित करने के लिए प्रयास करेंगीं। इसी क्रम में भारतीय ओलंपिक संघ ने एशियाई ओलंपिक परिषद् में योगासन खेल को सम्मिलित करने के प्रस्ताव हेतु वर्ल्ड योगासन एवं योगासन भारत के महासचिव डॉ जयदीप आर्य ने स्वागत किया। भारतीय ओलंपिक संघ की अध्यक्ष डॉ पीटी उषा ने आज एशियाई खेलों के कार्यक्रम में योगासन खेल को शामिल करने की जोरदार वकालत की। एशियाई ओलंपिक परिषद के अध्यक्ष राजा रणधीर सिंह को एक भावपूर्ण पत्र में उन्होंने एशियाई खेल समुदाय से शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य को बढ़ावा देने वाले प्राचीन भारतीय अनुशासन को शामिल करने का आग्रह किया। डॉ उषा ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दृष्टिकोण के कारण दुनिया ने योग को अपनाया है। उन्होंने कहा कि दुनिया ने 21 जून को 10वां अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस मनाया और इसकी सार्वभौमिक अपील पर जबरदस्त प्रतिक्रिया रही है। देश भर के लोगों ने योग को अपनाया है और लाभ प्राप्त किया है। उन्होंने कहा कि खेल के सबसे बड़े समारोहों में योगासन को शामिल करने के प्रयासों का नेतृत्व करना भारत के लिए महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा- मुझे विश्वास है कि योग एवं योगासन के आध्यात्मिक महत्व हैं। घर और विश्वगुरु के रूप में, भारत एशियाई खेलों और अंतत: ओलंपिक खेलों में भी इस खेल को शामिल करने के लिए अभियान चला सकता है। उन्होंने इस तथ्य की ओर ध्यान आकर्षित किया कि पेरिस में प्रसिद्ध लूव्र संग्रहालय अगले महीने ओलंपिक से पहले आगंतुकों को प्रशिक्षकों के साथ योग सत्र में भाग लेने का मौका देगा। उन्होंने कहा, यह खुशी की बात है कि लूव्र योग का स्वागत कर रहा है। एशियाई खेलों और ओलंपिक खेलों में इसे शामिल कराकर इस खेल को पहचान दिलाना हमारी जिम्मेदारी है। आईओए अध्यक्ष ने कहा कि केंद्रीय युवा मामले और खेल मंत्री मनसुख मंडाविया एशियाई खेलों में योगासन के लिए मामला बनाने के विचार के लिए बहुत प्रोत्साहित और सराहना कर रहे थे। डॉ उषा ने कहा, उन्होंने मुझसे कहा कि उन्हें लगता है कि एशियाई खेलों में शामिल किया जाना इस खेल को ओलंपिक में ले जाने की दिशा में पहला कदम होगा। हमें अपने स्वदेशी खेल को ऐसे मंचों पर लाने की जरूरत है। उन्होंने कहा, एक खेल के रूप में योगासन प्रसारकों के लिए एक बहुत ही आकर्षक प्रस्ताव हो सकता है। योगासन खेलो इंडिया गेम्स का एक हिस्सा रहा है। इसकी सफलता को देखते हुए, गोवा में राष्ट्रीय खेलों के आयोजकों ने मल्लखंभ और योगासन को नेशनल गेम्स में शामिल किया। मुझे यकीन है कि एशियाई ओलंपिक परिषद योगासन खेल को सम्मिलित कर मेरा प्रस्ताव स्वीकार करते हुए भारत की इस खेल विधा को सम्मान देगी। इस बड़ी उपलब्धि पर झारखंड योगासन स्पॉट संगठन के अध्यक्ष संजय सिंह महासचिव विपिन कुमार पांडे कोषाध्यक्ष मनोज तिवारी सरस्वती सुधा झा राज्य कार्यकारिणी के सभी सदस्यों ने एवं जिला कमेटी के सभी सदस्यों ने बधाई दी एवं झारखंड में भी इस खेल को अब और नई पहचान और नया मुकाम मिलेगा। इसी भावना के साथ राजा स्तरीय योग एक्सीलेंस सेंटर स्थापना का संकल्प लिया गया।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। देश की अप्रत्यक्ष कर व्यवस्था में आमूलचूल बदलाव हुए सात वर्ष बीत चुके हैं। इस बदलाव के तहत ही वस्तु एवं सेवा कर यानी जीएसटी प्रणाली लागू की गयी थी। जीएसटी के अंतिम स्वरूप के बारे में बहुत कुछ ऐसा था जो एक तरह का समझौता था। इसमें केंद्र सरकार और संदेह करने वाले राज्यों के बीच का समझौता भी शामिल था। उस समय माना जा रहा था कि ये समझौते जीएसटी के सुधारों को सीमित करेंगे।इस समाचार पत्र समेत कई लोगों को उम्मीद थी कि समय के साथ जीएसटी के भीतर की ढांचागत दिक्कतें दूर कर दी जायेंगी और इसका पूरा लाभ मिलना शुरू हो जायेगा। परंतु सात वर्ष और दो आम चुनाव बीतने के बाद भी यह स्पष्ट है कि व्यवस्था में बुनियादी सुधार के लिए और अधिक प्रयास करने की आवश्यकता है। जीएसटी की निगरानी जीएसटी परिषद करती है। यह राज्यों और केंद्र सरकार के वित्त मंत्रालयों को एक साथ लाती है। बीते सप्ताहांत परिषद की बैठक हुई लेकिन इस बार भी जीएसटी में अहम सुधारों के गहरे प्रश्न आगे की बैठकों के लिए टल गये। कहने का अर्थ यह नहीं है कि परिषद ने अहम काम नहीं किये।केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने संकेत दिया कि जीएसटी परिषद द्वारा लिये गये निर्णयों में मांग नोटिस को चुनौती देने के तरीके और अपील में बदलाव तथा अनुपालन व्यवस्था में अन्य सुधार शामिल हैं। उदाहरण के लिए अगर किन्हीं मामलों में धोखाधड़ी नहीं हुई है तो उनमें ब्याज या जुर्माना नहीं मांगा जायेगा और विभाग अपने विरुद्ध निर्णयों के खिलाफ स्वत: ऊपरी अदालतों में अपील नहीं करेगा। बल्कि ये संशोधित मौद्रिक सीमा के अधीन होंगे। चूंकि दो फीसदी आकलनों को चुनौती दी जा रही है इसलिए ऐसे बदलाव बहुत अधिक महत्त्व रखते हैं। जीएसटी को लेकर एक वादा यह था कि इसका इस्तेमाल सुगम होगा। परंतु ऐसा अपेक्षित स्तर पर नहीं हुआ है। अब वक्त आ गया है कि जीएसटी के बुनियादी ढांचे में सुधार करने का प्रयास किया जाए। यह सवाल उठाया जाना चाहिए कि राज्य और केंद्र सरकार के स्तर पर दोहरा ढांचा क्यों होना चाहिए? जीएसटी के अधूरे एजेंडे में दरों और स्लैब को युक्तिसंगत बनाया जाना भी शामिल है। अप्रत्यक्ष कर व्यवस्था की प्रारंभिक परिकल्पना एक दर के साथ की गयी थी। जिससे स्पष्टता और किफायत सुनिश्चित होती। परंतु इसकी जगह कई दरें पेश की गईं और जीएसटी परिषद भी इन दरों में लोकलुभावन ढंग से बदलाव करने का मोह नहीं त्याग पायी। यहां तक कि पिछली बैठक में भी बॉक्स पैक करने पर लगने वाली दर को 18 फीसदी से कम करके 12 फीसदी कर दिया गया। ऐसे बदलावों के बाद इस प्रकार और मांग सामने आने की आशंका बढ़ जाती है और परिषद का समय भी बरबाद होता है। बहरहाल, परिषद ने वादा किया था कि पेट्रोल और डीजल को जीएसटी व्यवस्था में लाने के विषय में चर्चा की जायेगी। अल्कोहल की तरह इन पर भी फिलहाल राज्यों द्वारा कर लगाया जाता है। व्यवस्था के भीतर लागत और अक्षमता की एक बड़ी वजह यह भी है। उन्हें जीएसटी के दायरे में लाना बहुत लंबे समय से लंबित है। इससे भी बड़ा प्रश्न यह है कि जीएसटी क्षतिपूर्ति उपकर अधिशेष का क्या होगा जिसकी राशि 70,000 करोड़ रुपये तक हो सकती है। यह उपकर तंबाकू, महंगे वाहनों आदि पर लगाया जाता है। इस उपकर को लगाने की एक आंशिक वह यह भी थी कि महामारी के दौरान राज्यों की ओर से लिये गये ऋण को चुकाने में इसका इस्तेमाल किया जाये। परंतु लग रहा है कि काफी अधिक राशि बची रह जाएगी। इसके उपयोग को लेकर चर्चा टलती रही है। इसके इस्तेमाल को लेकर बहस होना स्वाभाविक है लेकिन इसके चलते जीएसटी सुधार से जुड़े अहम प्रश्नों को हल करने में देरी नहीं होनी चाहिए।
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