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चंडीगढ़ एक्सप्रेस हादसा : 14 डिब्बे पटरी से उतरे, चार की मौत, कई जख्मी
Published / 2024-07-18 20:56:54
चंडीगढ़ एक्सप्रेस हादसा : 14 डिब्बे पटरी से उतरे, चार की मौत, कई जख्मी

चंडीगढ़ एक्सप्रेस के 14 डिब्बे पटरी से उतरे, चार यात्रियों की मौत, 14 जख्मीएबीएन सेंट्रल डेस्क। गोंडा जिले के गोंडा- मनकापुर रेलखंड के बीच चंडीगढ़ एक्सप्रेस के 14 डिब्बे पटरी से उतर गये। हादसे में चार लोगों की मौत की खबर है जबकि 14 लोग जख्मी हो गये हैं। 15904 -चंडीगढ़ एक्सप्रेस चंडीगढ़ से गोरखपुर जा रही थी। हादसा मोतीगंज थाना क्षेत्र के पिकौरा गांव के पास हुआ। पौने तीन बजे दो डिब्बे बेपटरी हुए, उसके बाद 12 और डिब्बे पलट गये। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने घटना का संज्ञान लिया है। उन्होंने अधिकारियों को तत्काल मौके पर पहुंच कर राहत कार्य में तेजी लाने व घायलों के समुचित उपचार के निर्देश दिये हैं। सीएम योगी ने जिला प्रशासन के अधिकारियों को हर संभव सहायता पहुंचाने के निर्देश दिये हैं। सीएम के निर्देश पर आसपास के जिलों के सभी अस्पतालों, सीएचसी और पीएचसी को अलर्ट मोड पर रखा गया है। एसडीआरएफ की टीम को मौके पर पहुंच कर राहत कार्यों में तेजी लाने के भी निर्देश दिये गये हैं।

कानूनी कार्रवाई है बाल विवाह के खात्मे की कुंजी : रिपोर्ट
Published / 2024-07-17 23:06:36
कानूनी कार्रवाई है बाल विवाह के खात्मे की कुंजी : रिपोर्ट

रिपोर्ट टूवार्ड्स जस्टिस : इंडिंग चाइल्ड मैरेज के अनुसार असम में कानूनी हस्तक्षपों से बाल विवाह में आयी 81 प्रतिशत की कमीराज्य के 30 प्रतिशत गांवों में बाल विवाह के पूरी तरह खात्मे और 40 प्रतिशत गांवों में इसमें उल्लेखनीय कमी से असम मॉडल की उपयोगिता साबितमौजूदा दर के हिसाब से बाल विवाह के लंबित मामलों के निपटारे में भारत को लग सकते हैं 19 सालएबीएन सेंट्रल डेस्क। अंतरराष्ट्रीय न्याय दिवस के अवसर पर इंडिया चाइल्ड प्रोटेक्शन के अध्ययन दल की रिपोर्ट टूवार्ड्स जस्टिस : इंडिंग चाइल्ड मैरेज ने बाल विवाह की रोकथाम में कानूनी कार्रवाइयों और अभियोजन की अहम भूमिका को उजागर किया है। असम और देश के बाकी हिस्सों से जुटाये गये आंकड़ों के अध्ययन के बाद तैयार की गयी इस रिपोर्ट के नतीजे बताते हैं कि 2021-22 से 2023-24 के बीच असम के 20 जिलों में बाल विवाह के मामलों में 81 प्रतिशत की कमी आई है। नई दिल्ली में राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (एनसीपीसीआर) के अध्यक्ष प्रियंक कानूनगो और बाल विवाह मुक्त भारत (सीएमएफआई) के संस्थापक और बाल अधिकार कार्यकर्ता भुवन ऋभु की मौजूदगी में बाल विवाह पीड़ितों द्वारा जारी की गयी यह रिपोर्ट इस बात की ओर साफ संकेत करती है कि कानूनी कार्रवाई बाल विवाह के खात्मे के लिए सबसे प्रभावी औजार है। 2021-22 से 2023-24 के बीच असम के 20 जिलों में बाल विवाह के मामलों में 81% की कमी आयी है।इस अध्ययन में राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) और असम के 20 जिलों के 1,132 गांवों से आंकड़े जुटाये गये जहां कुल आबादी 21 लाख है जिनमें 8 लाख बच्चे हैं। नतीजे बताते हैं कि बाल विवाह के खिलाफ जारी असम सरकार के अभियान के नतीजे में राज्य के 30 प्रतिशत गांवों में बाल विवाह पर पूरी तरह रोक लग चुकी है जबकि 40 प्रतिशत उन गांवों में इसमें उल्लेखनीय कमी देखने को मिली जहां कभी बड़े पैमाने पर बाल विवाह का चलन था। रिपोर्ट यह भी बताती है कि इन 20 में से 12 जिलों के 90 प्रतिशत लोगों ने इस बात में भरोसा जताया कि इस तरह के मामलों में एफआईआर और गिरफ्तारी जैसी कानूनी कार्रवाइयों से बाल विवाह की कारगर तरीके से रोकथाम की जा सकती है। रिपोर्ट बाल विवाह के खात्मे के लिए न्यायिक तंत्र द्वारा पूरे देश में फौरी कदम उठाने की आवश्यकता को रेखांकित करती है। रिपोर्ट के अनुसार 2022 में देश भर में बाल विवाह के कुल 3,563 मामले दर्ज हुए, जिसमें सिर्फ 181 मामलों का सफलतापूर्वक निपटारा हुआ। यानी लंबित मामलों की दर 92 प्रतिशत है। मौजूदा दर के हिसाब से इन 3,365 मामलों के निपटारे में 19 साल का समय लगेगा। राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (एनसीपीसीआर) के अध्यक्ष प्रियंक कानूनगो ने कहा- भारत हर मायने में वैश्विक नेता बनने की राह पर है। बच्चों पर इस महान राष्ट्र के कल का दारोमदार है और उनके भविष्य को सुरक्षित एवं संरक्षित करने की आवश्यकता है। सरकार इस लक्ष्य को हासिल करने के प्रयासों में कोई कसर नहीं छोड़ रही है। यह रिपोर्ट बहुत ही महत्वपूर्ण समय पर आयी है। हम इसे ध्यानपूर्वक देखेंगे ताकि यह समझ सकें कि इसके निष्कर्ष बाल विवाह के मुद्दे पर हमारे कामकाज और समझ में कैसे मदद कर सकते हैं।असम के एफआईआर दर्ज कर बाल विवाह रोकने के मॉडल का देश में ही नहीं बल्कि दुनिया के अन्य देशों को भी अनुकरण करना चाहिए। उन्होंने आगे कहा, आयोग अपने रुख को लेकर स्पष्ट है कि धार्मिक आधार पर बच्चों के साथ भेदभाव नहीं होना चाहिए। बाल विवाह निषेध कानून (पीसीएमए) और पॉक्सो धर्मनिरपेक्ष कानून हैं और वे किसी भी धर्म या समुदाय के रीतिरिवाजों का नियमन करने वाले कानूनों से ऊपर हैं।प्रख्यात बाल अधिकार कार्यकर्ता और बाल विवाह मुक्त भारत के संस्थापक भुवन ऋभु ने रिपोर्ट पर चर्चा करते हुए कहा कि असम ने यह दिखाया है कि निवारक उपायों के तौर पर कानूनी कार्रवाइयां बाल विवाह के खिलाफ जागरूकता का संदेश पहुंचाने में सबसे प्रभावी औजार हैं। आज असम में 98 प्रतिशत लोग मानते हैं कि अभियोजन बाल विवाह को समाप्त करने की कुंजी है। बाल विवाह मुक्त भारत बनाने के लिए असम का यह संदेश पूरे देश में फैलना चाहिए। भारत को दुनिया को यह दिखाना होगा कि सतत विकास लक्ष्यों को हासिल करना तभी संभव है जब हम अगले दस सालों में बाल विवाह मुक्त दुनिया के निर्माण के लिए ठोस और प्रभावी कानूनी कदम उठायें।रिपोर्ट ने लंबित मामलों के निपटारे के लिए फास्ट ट्रैक अदालतों के गठन के अलावा बाल विवाह को बलात्कार की आपराधिक साजिश के बराबर मानते हुए इसमें सहभागी माता-पिता, अभिभावकों और पंचायत प्रतिनिधियों के लिए सजा को दोगुना करने की भी सिफारिश की है। आईसीपी, बाल विवाह मुक्त भारत का गठबंधन सहयोगी है जिसने 2022 में राष्ट्रव्यापी अभियान की शुरुआत की और इसके 200 सहयोगी संगठन भुवन ऋभु की बेस्टसेलर किताब व्हेन चिल्ड्रेन हैव चिल्ड्रेन : टिपिंग प्वाइंट टू इंड चाइल्ड मैरेज में सुझायी गयी कार्ययोजना पर अमल करते हुए पूरे देश में काम कर रहे हैं। सीएमआफआई अपने कामकाज में मुख्य रूप से कानूनी हस्तक्षेपों और परिवारों एवं समुदायों को बाल विवाह के दुष्परिणामों के बारे में समझाने बुझाने के उपायों का इस्तेमाल करता है। सीएमएफआई के सहयोगी संगठनों ने कानूनी हस्तक्षेपों की मदद से 2023-24 में 14,137 और पंचायतों की मदद से 59,364 बाल विवाह रुकवाये।इस रिपोर्ट में पंचायती राज संस्थाओं के प्रतिनिधियों और बाल सुरक्षा पहलों से जुड़े गैरसरकारी संगठनों के कार्यकर्ताओं जैसे प्रमुख हितधारकों की मदद से गांव स्तर पर जुटाये गये प्राथमिक आंकड़ों का इस्तेमाल किया गया है और इनका राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वे-5 और राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो जैसे सरकारी स्रोतों से जुटाये गये द्वितीयक आंकड़ों से मिलान किया गया।

भाजपा मंडल मृगवास की कामकाजी बृहद बैठक संपन्न
Published / 2024-07-15 20:57:53
भाजपा मंडल मृगवास की कामकाजी बृहद बैठक संपन्न

कुंभराज से कमल सिंह लोधा की रिपोर्टएबीएन न्यूज नेटवर्क, कुंभराज। मृगवास भारतीय जनता पार्टी मंडल मृगवास की कामकाजी बैठक संपन्न हुई, जिसमें सर्वप्रथम डॉ श्यामा प्रसाद मुखर्जी एवं पंडित दीनदयाल उपाध्याय के चित्र पर दीप प्रज्ज्वलित कर बैठक की शुरुआत हुई। जिसमें मुख अतिथि भाजपा के पूर्व जिला मंत्री डा हरज्ञान सिंह गुर्जर एवं विशिष्ट अथिति कुंभराज के पूर्व मंडल अध्यक्ष बाबू लाल जी सेन एवं मृगवास मंडल अध्यक्ष अरविंद माहेश्वरी मंचासीन रहे। बैठक में विधानसभा एवं लोकसभा चुनाव में काम करने वाले सभी बूथ अध्यक्ष एवं सभी कार्यकर्ताओं का स्वागत सम्मान मुख्य अतिथि पूर्व जिला मंत्री डा हर ज्ञान सिंह गुर्जर व बाबूलाल जी सेन एवं मंडल अध्यक्ष अरविंद महेश्वरी ने किया। कार्यक्रम में वक्ताओं ने कार्यकर्ता की मेहनत व समर्पण पर प्रकाश डालकर कहा कि कार्यकर्ता ही पार्टी की नींव का पत्थर है। हमें कार्यकर्ताओं का हमेशा ध्यान रखना चाहिए।  कार्यकर्ताओं का पार्टी के प्रति लगन, निष्ठा और समर्पण से ही भाजपा आज विश्व की सबसे बड़ी पार्टी है। तीसरी बार आज हमारी केंद्र में पीएम मोदी के नेत्तृत्व में भाजपा की सरकार है। उन्होंने पार्टी के शक्ति केंद्रों की बैठक और पार्टी के अन्य कार्यक्रमों पर भी प्रकाश डाला।बैठक में सीताराम बैरागी, करण सिंह गुर्जर, युवा मोर्चा मंडल अध्यक्ष राजाराम गुर्जर, मंडल महामंत्री मोरध्वज लोधा, रमेश मीणा, धनलाल गुर्जर, छगनलाल भील, नरेंद्र शर्मा, गोकुलदास बैरागी, सरपंच कौशल मीणा, सरपंच शिवदयाल शर्मा, सरपंच हरनारायण गुर्जर, सरपंच लाल सिंह लालू, बंजारा सरपंच मजबूत सिंह लोधा, सरपंच पुरुषोत्तम भील, जनपद सदस्य हल्कू राम पचबर्या, उमाशंकर शर्मा, सानाई कपिल, महेश्वरी सानई समेत सभी शक्ति केंद्रों के संयोजक बूथों के अध्यक्ष सहित वरिष्ठ कार्यकर्ता उपस्थित रहे।

सांवरिया मैरिज गार्डन बारां में संत रामपाल जी महाराज का हुआ सत्संग और दहेज मुक्त विवाह
Published / 2024-07-14 22:25:03
सांवरिया मैरिज गार्डन बारां में संत रामपाल जी महाराज का हुआ सत्संग और दहेज मुक्त विवाह

कुंभराज से कमल सिंह लोधा की रिपोर्टएबीएन न्यूज नेटवर्क, बारां। सांवरिया मैरिज गार्डन तहसील बारां में रविवार (14 जुलाई 2024) को संत रामपाल जी महाराज का सत्संग समागम संपन्न हुआ जिसमें संत रामपाल जी महाराज के सैकड़ों अनुयायियों ने भाग लिया। वही सत्संग में एक दहेज़ मुक्त विवाह भी देखने को मिला इस सत्संग समागम में संत रामपाल जी महाराज ने पूर्ण ब्रह्म की सत भक्ति का मार्ग बताया।जिसमें श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक ज्ञान के माध्यम से पूर्ण मोक्ष की प्राप्ति के लिए विधि और उपाय बताये गये। उन्होंने भक्ति के माध्यम से पाप कर्म कटने का मार्ग दिखाया और जीव को अनमोल जीवन की महत्वपूर्णता समझायी। संत रामपाल जी महाराज के ज्ञान को समझकर उनके अनुयायियों ने आजीवन बुराइयों से दूर रहने का संकल्प लिया। उनके सत्संग में नामदीक्षा का आयोजन भी किया गया, जिससे भक्तों को आध्यात्मिक जीवन में आगे बढ़ने की दिशा में मदद मिली। संत रामपाल जी महाराज ने समझाया कि मान और बढ़ाई भक्ति नाशक होते हैं और पूर्ण संत के सत्संग से ही जीव को अपने स्तर का पता चलता है। इस समागम में शामिल होकर श्रद्धालुओं ने अपने को सुधारने और सच्चे मार्ग परचलने का दृढ़ संकल्प लिया।

कुंभराज के वार्ड 15 में खुली नाली में फंसे मवेशी की मौत, वार्डवासियों में आक्रोश
Published / 2024-07-13 20:35:49
कुंभराज के वार्ड 15 में खुली नाली में फंसे मवेशी की मौत, वार्डवासियों में आक्रोश

कुंभराज से कमल सिंह लोधा रिपोर्टएबीएन न्यूज नेटवर्क, गुना। कुंभराज नगर परिषद के वार्ड 15 के वार्डवासीयो की परेशानी कम होने का नाम नहीं ले रही है। कभी पानी की समस्या तो कभी बिजली की समस्या से, अब तो बरसात के दिनों में कच्ची रोड पर नालियों का गंदा पानी जमा होने से वार्डवासियों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।इस वार्ड में नालियां बनी तो है, लेकिन नालियां खुली होने से मवेशियों के गिरने का खतरा बना हुआ है। वहीं आज एक मवेशी नाली में गिरने से मौत हो गयी। जिससे वार्डवासियों में आक्रोश देखा गया। वार्ड वासियों का कहना था कि नगर परिषद की लापरवाही की वजह से नालियों का खुला होने से उसमे मवेशी गिर रहे हैं। आज रात एक मवेशी नाली में गिरने से मौत हो गयी। नालियों में भरा गंदा पानी निकासी नहीं होने से सड़क पर जमा होता है, जिससे वार्डवासी परेशान हैं। हेमराज ने बताया कि यह नाली अगर पैक यानी ढंकी होती तो गौ माता फंसकर नहीं मरती। नाली बनायी तो उसकी देखरेख होनी चाहिए। सीएमओ साहब ध्यान नहीं दे रहे हैं। कई बार सुनते नहीं है। वार्ड 15 में तीन-चार वर्र्षों से समस्या आ रही है। रोड भी नहीं बन रही है। बारिश होगी तो यहां तालाब बन जायेगा। जगदीश प्रसाद ने बताया कि इस वार्ड में जगह-जगह रोड कीचड़ हो रहा। नालियों के खुला होने उसमें मवेशी गिर रहे हैं। आज रात एक गाय की नाली में फंसने से मौत गयी।

उत्तर प्रदेश : वज्रपात से एक दिन में करीब 38 लोगों की मौत
Published / 2024-07-11 20:36:25
उत्तर प्रदेश : वज्रपात से एक दिन में करीब 38 लोगों की मौत

बिजली गिरने से पूरे उत्तर प्रदेश में एक दिन में कम से कम 38 लोगों की मौतएबीएन सेंट्रल डेस्क। उत्तर प्रदेश में बुधवार को बिजली गिरने से अलग-अलग घटनाओं में कम से कम 38 लोगों की मौत हो गयी। ये मौतें तब बतायी गयी हैं, जब राज्य बाढ़ से जूझ रहा है। जिससे सामान्य जनजीवन ठप हो गया है। 11 मौतों के साथ प्रतापगढ़ में बिजली गिरने से सबसे अधिक मौतें हुईं। इसके बाद सुल्तानपुर में सात, चंदौली में छह, मैनपुरी में पांच, प्रयागराज में चार, औरैया, देवरिया, हाथरस, वाराणसी और सिद्धार्थनगर में एक-एक मौत हुई। इन जिलों में दर्जनों लोग झुलस भी गये हैं। प्रतापगढ़ में पांच अलग-अलग क्षेत्रों में हुई मौतों के बाद उनके शवों को एकत्र कर पोस्टमॉर्टम के लिए भेजा गया है। इस बीच पूर्वी उत्तर प्रदेश के चंदौली में भी कई लोग घायल हो गये और फिलहाल जिला अस्पताल में उनका इलाज चल रहा है। जिले में बुधवार शाम 4 बजे से 6 बजे के बीच बिजली चमकने के साथ भारी बारिश हुई। अधिकांश पीड़ित, जिनमें 13 और 15 वर्ष की आयु के दो चचेरे भाई-बहन शामिल हैं। खेत में काम करते समय या मछली पकड़ते समय बिजली की चपेट में आ गये। सुल्तानपुर में हुई सात मौतों में तीन बच्चे थे। पीड़ित उस समय बिजली की चपेट में आ गये जब वे धान लगा रहे थे या आम तोड़ने या पानी लाने गये थे। बुधवार को भारी बारिश के दौरान एक पेड़ के नीचे शरण ले रही एक महिला की बिजली गिरने से मौके पर ही मौत हो गयी। औरैया में बारिश के कारण आम के पेड़ के नीचे शरण लेते समय एक 14 वर्षीय लड़के की मौत हो गयी। देवरिया में खेत की ओर जाते समय आकाशीय बिजली गिरने से 5 साल की एक बच्ची की मौत हो गयी, जहां उसके परिवार के सदस्य पहले से ही मौजूद थे। वाराणसी में आकाशीय बिजली गिरने से दो भाइयों की मौत हो गयी, जिसमें एक की झुलसकर मौत हो गयी, जबकि दूसरे का फिलहाल इलाज चल रहा है। हालांकि, भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) ने अगले पांच दिनों में उत्तर प्रदेश और इसके आसपास के राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में अधिक व्यापक वर्षा जारी रहने का अनुमान लगाया है।

गर्व की बात... 150 आस्ट्रियाई कंपनियां भारत में
Published / 2024-07-10 21:21:36
गर्व की बात... 150 आस्ट्रियाई कंपनियां भारत में

हमारे स्टार्टअप, मीडिया-मनोरंजन क्षेत्र के लिए खास ये देशएबीएन सेंट्रल डेस्क। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपना दो दिवसीय रूस दौरा खत्म कर अब आस्ट्रिया में हैं। इस विदेश यात्रा में पीएम 9 जुलाई से 10 जुलाई तक आस्ट्रिया की राजधानी वियना में रहेंगे। यह आस्ट्रिया की पीएम मोदी की पहली यात्रा है। वहीं चार दशकों में किसी भारतीय प्रधानमंत्री की भी पहली आस्ट्रिया यात्रा है। इस दौरे से पहले पीएम मोदी ने कहा कि आॅस्ट्रिया हमारा दृढ़ और विश्वसनीय साझेदार है और दोनों देश लोकतंत्र और बहुलवाद के आदर्शों को साझा करते हैं।पीएम मोदी की आस्ट्रिया यात्रा का कार्यक्रम क्या है?प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 9 से 10 जुलाई तक आस्ट्रिया के आधिकारिक दौरे पर हैं। पीएम मोदी की यह यात्रा उस वक्त हो रही है जब भारत और आस्ट्रिया अपने राजनयिक संबंधों की स्थापना की 75वीं वर्षगांठ मना रहे हैं। 1949 में आस्ट्रिया गणराज्य और भारत ने राजनयिक संबंध स्थापित किये थे।  पीएम मोदी मंगलवार को मॉस्को की दो दिवसीय यात्रा के बाद वियना पहुंचे। आस्ट्रियाई विदेश मंत्री अलेक्जेंडर शेलेनबर्ग ने वियना हवाई अड्डे पर उनका स्वागत किया। इसके बाद पीएम मोदी और चांसलर कार्ल नेहमर के बीच अनौपचारिक रात्रिभोज हुआ, जिसमें दोनों विदेश मंत्री शेलेनबर्ग और एस जयशंकर भी शामिल हुए। प्रधानमंत्री मोदी एक बड़े प्रतिनिधिमंडल के साथ आस्ट्रिया की यात्रा पर हैं, जिसमें विदेश मंत्री जयशंकर, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल और कई व्यापारिक प्रतिनिधि शामिल हैं।  अपनी पहली आस्ट्रियाई यात्रा के पहले दिन प्रधानमंत्री मोदी ने आस्ट्रिया के राष्ट्रपति अलेक्जेंडर वान डेर बेलन से मुलाकात की और आस्ट्रिया के चांसलर कार्ल नेहमर के साथ वार्ता की। दूसरे दिन दोनों शासनाध्यक्षों के बीच एक कार्य बैठक हुई, जिसके बाद एक साझा प्रेस वक्तव्य जारी किया गया। संयुक्त बयान के दौरान पीएम ने कहा- मैंने पहले भी कहा है, यह युद्ध का समय नहीं है, हम युद्ध के मैदान में समस्याओं का समाधान नहीं खोज पायेंगे। चाहे वह कहीं भी हो, निर्दोष लोगों की हत्या अस्वीकार्य है। भारत और आस्ट्रिया संवाद और कूटनीति पर जोर देते हैं, और इसके लिए हम साथ मिलकर कोई भी मदद देने के लिए तैयार हैं। बुधवार को प्रधानमंत्री मोदी और चांसलर नेहमर का भारत और आस्ट्रिया के व्यापारिक नेताओं को संबोधन का कार्यक्रम है। प्रधानमंत्री ने मॉस्को के बाद वियना में भारतीय समुदाय के सदस्यों से भी बातचीत करेंगे। चर्चा के लिए कौन-कौन से मुद्दे हैं? भारतीय प्रधानमंत्री रूसी की राजधानी में राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ वार्ता करके वियना आये हैं। भारत और रूस की दोस्ती किसी से छिपी नहीं है। दोनों देश ब्रिक्स देशों (ब्राजील, रूस, भारत, चीन, दक्षिण अफ्रीका, आदि) के साथ-साथ शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) के अहम सदस्य हैं। रूस-यूक्रेन युद्ध और पश्चिम और रूस और चीन के बीच आर्थिक संघर्षों में, भारत आमतौर पर बराबर दूरी की स्थिति में रहता है।  दौरे से पहले आस्ट्रियाई मीडिया ने लिखा था कि पुतिन के साथ नरेंद्र मोदी के अच्छे संबंधों को देखते हुए चांसलर रूस-यूक्रेन युद्ध के संबंध में मंगलवार शाम को आयोजित रात्रिभोज में दुनिया में शांति और स्थिरता के लिए साझा जिम्मेदारी के बारे में बात करना चाहते हैं। आस्ट्रियाई विदेश मंत्रालय ने जानकारी दी थी कि रात्रिभोज में रूस-यूक्रेन युद्ध, हिंद-प्रशांत में घटनाक्रम, मध्य पूर्व की स्थिति और द्विपक्षीय आर्थिक संबंधों के विस्तार पर चर्चा होने की संभावना है। चांसलर नेहमर का मानना है कि ब्रिक्स देशों से समान स्तर पर बात करना महत्वपूर्ण है। वे रूस-यूक्रेन युद्ध में विशेष भूमिका निभाते हैं। चांसलर ने कहा, पुतिन उनकी बात सुनते हैं। अमेरिका एक सैन्य और आर्थिक महाशक्ति है और युद्ध या शांति की बात करें तो ये हमेशा एक अहम कड़ी है। लेकिन ब्रिक्स देश भी महत्वपूर्ण भागीदार हैं। और मैं भारत पर बहुत अधिक निर्भर करता हूं। नेहमर भारत के साथ आर्थिक संबंधों को भी मजबूत करना चाहते हैं। आस्ट्रियाई दृष्टिकोण से यह यात्रा का दूसरा फोकस है।

आत्मनिर्भरता की बदौलत देश में हर साल पैदा हो रहे 2 करोड़ नये रोजगार
Published / 2024-07-10 21:07:44
आत्मनिर्भरता की बदौलत देश में हर साल पैदा हो रहे 2 करोड़ नये रोजगार

एबीएन सेंट्रल डेस्क। भारत में रोजगार की बढ़ोतरी ज्यादातर स्व-रोजगार करने वालों, बिना वेतन काम करने वालों और खेतों में अस्थायी रूप से काम करने वालों की वजह से हो रही है। प्राइवेट सेक्टर के अर्थशास्त्रियों का कहना है कि ये नौकरियां रेगुलर वेतन वाली औपचारिक नौकरियों के बराबर नहीं हैं। यह बयान श्रम विभाग के आंकड़ों के बाद आया है, जो इस हफ्ते जारी किये गये थे। इन आंकड़ों के अनुसार, 2017-18 से हर साल 2 करोड़ नये रोजगार पैदा हुए हैं। यह सिटी बैंक की उस रिपोर्ट को गलत साबित करता है जिसमें कहा गया था कि 2012 के बाद से हर साल केवल 88 लाख नौकरियां ही दी गयी हैं। कृषि और स्व-रोजगार से आ रही है रोजगार में वृद्धि अजीम प्रेमजी विश्वविद्यालय में सेंटर फॉर सस्टेनेबल एम्प्लॉयमेंट के हेड अमित बसाले ने कहा- यह स्पष्ट है कि रोजगार में होने वाली बढ़ोतरी का एक बड़ा हिस्सा कृषि और स्व-रोजगार से आ रहा है, जिसमें खुद का काम करना या बिना वेतन वाला पारिवारिक काम शामिल है। बसाले ने कहा कि वित्तीय वर्ष 2022-23 तक के विस्तृत आंकड़ों के आधार पर रोजगार में हुई वृद्धि को नियमित वेतन वाली औपचारिक नौकरियों के बराबर नहीं माना जा सकता है। मार्च 2024 में खत्म हुए वित्तीय वर्ष में भारतीय अर्थव्यवस्था में रोजगार की संख्या में 4.67 करोड़ की बढ़ोतरी हुई है। रिजर्व बैंक के अनुसार, कुल रोजगार अब 64.33 करोड़ हो गया है, जो कि एक साल पहले 59.67 करोड़ था। कृषि क्षेत्र में 4.8 करोड़ नये रोजगा हालांकि, आंकड़ों के पीछे की कहानी थोड़ी जटिल है। अजीम प्रेमजी विश्वविद्यालय के अमित बसाले का कहना है कि रिजर्व बैंक के डेटा में बताये गये 10 करोड़ नये रोजगारों में से 4.8 करोड़ सिर्फ खेती से जुड़े हैं। बसाले ने ये भी कहा कि मैं इन्हें असली नौकरी नहीं मानता। ये वो लोग हैं जो खेती कर रहे हैं या खुद का छोटा काम कर रहे हैं क्योंकि बाजार में कंपनियों द्वारा पर्याप्त कर्मचारियों की मांग नहीं है। रिजर्व बैंक ने रोजगार में हुई बढ़ोत्तरी का अनुमान तो लगाया है, लेकिन ये नहीं बताया कि किन क्षेत्रों में ये नौकरियां पैदा हुई हैं। राजनीतिक दबाव और आलोचनाएं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पार्टी ने पिछले महीने हुए चुनावों में पूर्ण बहुमत खो दिया था। सत्ता बचाये रखने के लिए उन्हें सहयोगी दलों का सहारा लेना पड़ा। मोदी ने 2014 में पहली बार सत्ता हासिल की थी, उस वक्त उन्होंने हर साल 2 करोड़ नौकरियां पैदा करने का वादा किया था। लेकिन विश्लेषकों और राजनीतिक विरोधियों ने वादा पूरा न करने के लिए उनकी आलोचना की है। मुख्य विपक्षी पार्टी कांग्रेस के अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने इस हफ्ते कहा- मोदी सरकार का एकमात्र मिशन युवाओं को बेरोजगार बनाना है। यह बयान सिटी बैंक की रिपोर्ट के बाद आया था, जिसने भारत में रोजगार को लेकर फिर से बहस छेड़ दी है। मोदी की पार्टी ने इस साल के आम चुनाव के घोषणापत्र में बुनियादी ढांचा, दवाइयां और हरित ऊर्जा जैसे क्षेत्रों में निवेश के माध्यम से रोजगार पैदा करने का वादा किया था। मोदी की पार्टी को पूर्ण बहुमत न मिलने का एक कारण ये भी माना जा रहा है कि लोगों को नौकरियों की कमी और महंगाई से परेशानी है। भारत के पूर्व मुख्य सांख्यिकीविद् प्रणब सेन ने कहा, हां, तकनीकी रूप से नौकरीपेशा लोगों की संख्या में भारी वृद्धि हुई है। लेकिन, यह बढ़ोतरी ज्यादातर कृषि और दिहाड़ी मजदूरी करने वालों में हुई है। उन्होंने आगे कहा कि खेती में रोजगार का बढ़ना बहुत पिछड़ी सोच है क्योंकि भारत का लक्ष्य है कि ज्यादा से ज्यादा लोग खेती से हटकर दूसरे क्षेत्रों में काम करें। सेन ने सवाल किया- देखिये, क्या आप वाकई मानते हैं कि इतने सारे रोजगार पैदा हो रहे हैं? ये मुश्किल लगता है। उन्होंने कहा कि भारत के रोजगार के आंकड़ों पर बहस से स्थिति साफ होने के बजाय उलझती जा रही है। आर्थिक चुनौतियां और खपत में असमानता सरकारी आंकड़ों के अनुसार, 2022-23 तक भारत के कुल वर्कफोर्स में सिर्फ 20.9% लोगों की ही वेतन के रूप में नियमित आय होती है। अर्थशास्त्रियों ने इस बात की तरफ ध्यान दिलाया है कि अर्थव्यवस्था में खपत कमजोर है। 2023-24 में अर्थव्यवस्था सिर्फ 4% ही बढ़ी है, जो कि सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) की वृद्धि दर का आधा है। जीडीपी की रफ्तार दुनिया में सबसे तेज 8.2% रही थी। स्वतंत्र अर्थशास्त्री रूपा रेगे नित्सुरे का कहना है कि हम आंकड़ों पर बहस कर सकते हैं, लेकिन आखिर में हमें नतीजे देखने चाहिए। अगर पर्याप्त रोजगार पैदा हो रहे हैं, तो लोगों की आमदनी भी बढ़नी चाहिए और इससे बड़े पैमाने पर खपत में भी बढ़ोतरी होनी चाहिए। लेकिन खर्च करने में इतनी असमानता क्यों देखी जा रही है?

मोदी-पुतिन की बैठक पर दुनिया की नजर, जानें क्यों
Published / 2024-07-09 21:19:01
मोदी-पुतिन की बैठक पर दुनिया की नजर, जानें क्यों

युद्ध के मैदान में समाधान संभव नहीं, बातचीत ही रास्ता पुतिन के साथ द्विपक्षीय बैठक में बोले पीएम मोदी एबीएन सेंट्रल डेस्क। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के बीच द्विपक्षीय बैठक हुई है। बैठक में पीएम मोदी ने आतंकवाद का मुद्दा उठाया है। पीएम ने कहा कि आतंकवाद हर देश के लिए खतरा है। इसके साथ-साथ पीएम मोदी ने मॉस्को पर हुए आतंकी हमलों का जिक्र करते हुए कहा कि हम उस दर्द को समझते हैं। भारत 40 साल से आतंकवाद को झेल रहा है। दूसरी ओर पुतिन ने कहा पीएम मोदी यूक्रेन युद्ध को खत्म कराने की कोशिश कर रहे हैं। पीएम मोदी ने कहा कि रूस के साथ भारत का दशकों पुराना नाता है। भारत हर तरह से आतंकवाद की निंदा करता है। पिछले कुछ साल मानवता के लिए चुनौतीपूर्ण रहे हैं। आने वाले समय में भारत और रूस संबंध और मजबूत होंगे। रूस की मदद से तेल की कीमत में स्थिरता रही है। भारत को रूस की मदद से सस्ता तेल मिल रहा है। भारत ने ग्लोबल साउथ की आवाज को उठाया है। हमने खुले मन से यूके्रन युद्ध पर विचार रखे हैं। बैठक में पीएम मोदी ने और क्या कहा पीएम मोदी ने आगे कहा कि आने वाले समय में भारत और रूस के संबंध और मजूबत होंगे। एक सच्चे दोस्त की तरह कल आपने मुझे बुलाया। पेट्रोल और डीजल को लेकर आपका सहयोग सराहनीय है। पूरी दुनिया की नजर मेरे इस यात्रा पर है। यूक्रेन पर हम दोनों ने अपने-अपने विचार रखे। युद्द के मैदान से समाधान संभव नहीं है। युद्ध मानवता के लिए एक बड़ा चुनौती है। दोनों देशों के बीच शांति बहाली के लिए भारत हर संभव सहायता के लिए तैयार है। हम दोनों साथ मिलकर काम करेंगे। पीएम मोदी ने पुतिन के साथ बैठक में कहा कि पिछले पांज सालों में दुनिया को अनेक चुनौतियों का सामना करना पड़ा है। पहले कोविड-19 के कारण और फिर अलग-अलग संघर्षों के की वजह से कई चुनौतियां सामने आईं। भारत रूस और यूक्रेनु के बीच शांति के पक्ष में है। समस्या का समाधान शांति से ही निकल सकता है। भारत शांति के पक्ष में है। पिछले ढाई दशकों से मेरा रूस के साथ-साथ आपके के साथ भी संबंध रहा है। करीब 10 साल में हम 17 बार मिल चुके हैं। पिछले 25 वर्षों में हमारी लगभग 22 द्विपक्षीय बैठकें हुई हैं। यह हमारे संबंधों की गहराई को दशार्ता है। सम्मान को लेकर पुतिन से क्या बोले पीएम मोदी? पुतिन के साथ द्विपक्षीय बैठक में पीएम मोदी ने कहा कि महामहिम और मेरे दोस्त, मैं इस भव्य स्वागत और सम्मान के लिए आपका आभार व्यक्त करता हूं। भारत में चुनावों में हमें अभूतपूर्व जीत मिली। उसके बाद आपने जो शुभकामनाएं दीं, उसके लिए भी मैं आपका आभार व्यक्त करता हूं। मार्च में आपने भी शानदार प्रदर्शन किया था। चुनाव में जीत के लिए मैं एक बार फिर आपको शुभकामनाएं देता हूं।

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