24 कोच की नजर आयेंगी वंदे भारत एक्सप्रेस, जानिए क्यों रेलवे उठाने जा रहा ये कदम?एबीएन सेंट्रल डेस्क। केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार सेमी हाई-स्पीड ट्रेन वंदे भारत में बड़ा बदलाव करने जा रही है। यात्रियों की सुविधा के लिए रेलवे अब 24 डिब्बे वाली वंदे भारत ट्रेन बनाने जा रहा है। यदि ऐसी ट्रेन बनती है, तो वंदे भारत प्रीमियम ट्रेनों में सबसे लंबी ट्रेन बन जायेगी। अब तक इस श्रेणी में केवल राजधानी एक्सप्रेस है। इस ट्रेन में अधिकतम 22 कोच जोड़े जाते हैं। दरअसल, पिछले दिनों वंदे भारत ट्रेनों के कोच बनाने को लेकर 35 हजार करोड़ रुपये के टेंडर कैंसिल हो गये थे। इसका इसका टेंडर लेने वाली कंपनी ने ज्यादा पैसे की डिमांड थी। लेकिन रेलवे अपने तय मानकों पर टिका रहा। इसके चलते ये टेंडर रद्द करना पड़ा। ऐसे में अब रेलवे ने फिर से टेंडर तैयार किया है। इसमें व्यापक तौर पर बदलाव किए गए हैं, ताकि इस बार इसे रद्द नहीं करना पड़े। रेलवे पुराने टेंडर में 200 स्लीपर वर्जन की वंदे भारत ट्रेन बनाने का आॅर्डर था। इसमें हर ट्रेन में 16 कोच लगाने थे। इसके अलावा कंपनी को इन ट्रेनों का अगले 35 साल तक मेंटेनेंस भी देखना था। इस कॉन्ट्रैक्ट के एल-1 बोलीदाता को लातूर में मराठवाड़ा रेल कोच फैक्ट्री में 120 ट्रेन सेट का उत्पादन करना था, जबकि एल-2 बोलीदाता चेन्नई में आईसीएफ में 80 ट्रेन सेट के लिए जिम्मेदार था। अब रेल मंत्रालय द्वारा वर्क आफ स्कोप में हाल ही में किए गए बदलाव के तहत अब 24 कोचों वाले 80 ट्रेन सेटों के उत्पादन की आवश्यकता है। नये टेंडर के तहत हर ट्रेन सेट के लिए 120 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत रखी गयी है। नये आर्डर में सिर्फ 80 ट्रेनें चलाये जाने की तैयारी है। प्रत्येक ट्रेन में 24 कोच लगाये जायेंगे। महाराष्ट्र के लातूर में बनी फैक्ट्री को यह टेंडर इस साल नवंबर तक हैंडओवर कर दिया जायेगा। इस ट्रेंडर को रेल विकास निगम लिमिटेड और रूस का कंसोर्टियम पूरा करेगा। इस आर्डर का पहला प्रोटोटाइप सितंबर, 2025 तक पेश कर दिया जाएगा। इस प्रोजेक्ट को 4 कंपनियां किनेट रेलवे सॉल्यूशंस, जेवी-इंडिया रेल विकास निगम लिमिटेड, रसियन इंजीनियरिंग कंपनी मेट्रोवॉगोन्मेश और लोकोमोटिव इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम मिलकर पूरा करेंगे। पहली दोनों कंपनियां 25 फीसदी, दूसरी 70 फीसदी और तीसरी 5 फीसदी ट्रेनों का निर्माण पूरा करेंगी। इस कॉन्ट्रैक्ट के तहत 12 वंदे भारत ट्रेनों का पहला बैच प्रोटोटाइप आने के एक साल के भीतर आना है। प्रोटोटाइप सितंबर, 2025 में आयेगा तो पहला बैच सितंबर, 2026 तक आ जाना चाहिए। इसके बाद दूसरे साल 18 ट्रेनों का बैच बनाया जायेगा। फिर हर साल 25 ट्रेनें उतारी जायेंगी। इन ट्रेनों की मेंटेनेंस सुविधाओं को जोधपुर, दिल्ली और बैंगलोर में विकसित किया जायेगा।
भूमि पूजन के साथ वृक्षारोपण कार्यक्रम का आयोजनएबीएन सेंट्रल डेस्क (नई दिल्ली)। राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली फिर से राममय होने जा रही है। दिल्ली के सबसे बड़े रामलीला आयोजकों में शुमार श्री रामलीला कमेटी पीतमपुरा (पंजीकृत) ने अपनी दशकों पुरानी समृद्ध परंपरा को आगे बढ़ाते हुए इस वर्ष फिर भव्य और विराट रामलीला के आयोजन की तैयारी कर ली है। इसके लिए पीतमपुरा के यूवी स्थित रामलीला मैदान में रामलीला भूमि पूजन और वृक्षारोपण कार्यक्रम का आयोजन श्री विभूषित ब्रह्मचारी कौशलेंद्र जी महाराज के सान्निध्य में हुआ। इसमें क्षेत्र के प्रमुख लोगों व जनप्रतिनिधियों ने बड़ी संख्या में भाग लिया। इसके बाद आयोजकों ने रामलीला के कलाकारों से परिचय करवाया। इस अवसर पर कलाकारों ने सीता स्वयंवर व हनुमान -रावण संवाद प्रसंगों का प्रभावशाली पूर्वाभ्यास मंचित कर उपस्थित लोगों को भाव-विभोर कर दिया।इस दौरान सभी वक्ताओं व आयोजकों ने स्वाधीनता दिवस की बधाई दी। रामलीला के कलाकारों ने ही देशभक्ति पर शानदार कार्यक्रम भी पेश किया। इस अवसर पर विधायक वंदना कुमारी, शिवचरण गोयल, पवन शर्मा व पार्षद रेखा गुप्ता, डा.अमित नागपाल, जलज चौधरी तथा नेहा गुप्ता एवं नगर निगम में नेता सदन मुकेश गोयल उपस्थित थे। श्री राम लीला कमेटी के प्रधान कृष्ण बासिया, कोषाध्यक्ष विनय सिंघल, कार्यकारी अध्यक्ष सुभाष जैन, विजय गुप्ता, महासचिव संजय बागड़िया व नरेश मेहता ने सभी विशिष्ट अतिथियों व जनप्रतिनिधियों का स्वागत किया। श्री राम लीला कमेटी प्रधान कृष्ण बासिया ने बताया कि इस बार पिछली फिर से अधिक दिव्य और भव्य रामलीला का आयोजन होगा जिसे देखने के लिए दिल्ली के हर कोने से हजारों लोग हर दिन पीतमपुरा के रामलीला मैदान पहुंचेंगे।
एबीएन न्यूज 24 खबर का असरकमल सिंह लोधा की रिपोर्टएबीएन न्यूज नेटवर्क, मध्य प्रदेश गुना। एक बार फिर एबीएन न्यूज 24 खबर का असर हुआ। आपको बता दें कुंभराज के अंबेडकर मांगलिक भवन में फैली गंदगी को लेकर एबीएन न्यूज 24 ने 02 अगस्त को खबर को प्रमुखता से लगाया था। खबर लगने के बाद सफाईकर्मी इस भवन की सफाई करने पहुंचे। सफाईकर्मियों ने बताया गया आज इस मांगलिक भवन की सफाई की जा रही है। गेट के पास नाली का गंदा पानी जमा हो रहा है। उसकी भी सफाई की जायेगी। कल भी इस भवन की सफाई की जायेगी।
नगर परिषद नहीं दे रहा है ध्यानकमल सिंह लोधा एबीएन सेंट्रल डेस्क (मध्य प्रदेश गुना)। जिले के तहसील कुंभराज के डॉ अंबेडकर मांगलिक भवन में गंदगी ही गंदगी देखने को मिल रही है। यह भवन भमावद रोड पर स्थित है। हमारी टीम गुरुवार को इस भवन पहुंची, तो देखा गया कि इस भवन के गेट पर नाली का गंदा पानी जमा हुआ है। वहीं भवन के अंदर जगह-जगह कचरा पड़ा हुआ है। लेकिन नगर परिषद कुंभराज के द्वारा सफाई नहीं की जा रही है। पिछले कुछ दिनों में हुई बारिश के कारण इस भवन में जगह-जगह कचरे होने से दुर्गंध आ रही। कोई भी व्यक्ति इस भवन में कचरे के दुर्गंध की वजह से अंदर खड़ा भी नहीं रह सकता। एक ओर केंद्र और राज्य सरकार स्वच्छता पर फोकस कर रहे हैं। वहीं कुंभराज के डॉ आंबेडकर मांगलिक भवन में नालियों का गंदा पानी जमा हो रहा है। वहीं इस भवन में ओपन जिम की मशीनें भी लगी हुई हैं। लेकिन ओपन जिम के पास नाली का कचरा और अधिक घास होने से लोग ओपन जिम में नहीं आ रहे। लोगो का कहना था नगर परिषद कुंभराज के द्वारा इस मांगलिक भवन की रसीद काटी जाती है। यह रसीद उन लोगों की काटी जाती है, जो इस भवन में कोई कार्यक्रम करते हैं। किसी से 1100 तो किसी ने 2100 रुपये लिये जाते हैं। अब सवाल यह है नगर परिषद के द्वारा रसीद काटने के बाद भी सफाई क्यों नहीं की जाती है? कोई भी व्यक्ति इस भवन में कार्यक्रम करता है लेकिन वह गंदगी की वजह परेशान रहेगा। वहीं लाइट की व्यवस्था भी नहीं है। रात में अंधेरा होने की वजह से डर का माहौल भी बना रहता है। अब देखना होगा नगर परिषद कब तक इस भवन में सफाई करवायेगा और कब तक लाइट की व्यवस्था करवाता है?
बीच भाषण में रेलमंत्री को आया गुस्सा, रेल मंत्री ने कहा- मैं यहां राजनीति नहीं करना चाहता, तथ्यों को सबके सामने स्पष्ट रूप से रखना चाहता हूं एबीएन सेंट्रल डेस्क। रेलमंत्री अश्विनी वैष्णन आज सदन में बजट की चर्चा के दौरान बोलते हुए विपक्ष पर कटाक्ष करते नजर आये वे रेलवे को लेकर बात कर रहे थे कि तभी विपक्ष हंगामा करने लगा। जिस पर रेलमंत्री ने कहा कि हम आपकी तरह रील बनाकर दिखाने वाले लोग नहीं हैं। काम करने वाले लोग हैं। ये क्या तरीका है? कुछ भी बीच में बोल देते हैं। बता दें कि रेलवे की सुरक्षा को लेकर कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों पर झूठ की दुकान चलाने का आरोप लगाते हुए रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बृहस्पतिवार को कहा कि रेलवे में सुरक्षा की कवच प्रणाली के आधुनिक संस्करण को देश के प्रत्येक किलोमीटर रेल नेटवर्क पर लगाने में कोई कसर नहीं छोड़ी जायेगी। रेल मंत्रालय के नियंत्रणाधीन अनुदान की मांगों पर लोकसभा में पिछले दो दिन में हुई चर्चा का जवाब देते हुए वैष्णव ने यह भी बताया कि रेलगाड़ियों में सामान्य डिब्बों की बढ़ती मांग को ध्यान में रखते हुए करीब ढाई हजार सामान्य कोच के उत्पादन का विचार सरकार ने किया है। 50 और अमृत ट्रेन के निर्माण का फैसला लिया गया है तथा कम दूरी वाले दो शहरों के बीच वंदे मेट्रो चलायी जायेंगी।उन्होंने कहा कि ट्रेनों की सुरक्षा के लिए स्वचालित रेलगाड़ी सुरक्षा (एटीपी) प्रणाली दुनिया के अधिकतर देशों में 1970 और 1980 के दशक में लगायी गयी थी, लेकिन दुर्भाग्य की बात है कि कांग्रेस के 58 साल के कार्यकाल में और 2014 से पहले तक भारत के एक भी किलोमीटर रेलवे नेटवर्क पर यह प्रणाली नहीं लग पायी। उन्होंने कहा- हम मानते हैं कि कांग्रेस के समय रेलवे में कई प्रयोग किये गये, लेकिन जिस संवेदना के साथ या जिस भावना से काम होना चाहिए, नहीं किया गया। पश्चिम बंगाल के कुछ सदस्यों ने ममता बनर्जी के रेल मंत्री रहने के दौरान लागू टक्कर रोधी उपकरण प्रणाली का उल्लेख किये जाने पर वैष्णव ने कहा कि 2006 में देश के करीब 1500 किलोमीटर रेल मार्ग पर यह प्रणाली लगायी गयी। उन्होंने कहा- दुर्भाग्य से इसका कोई सुरक्षा प्रमाणपत्र नहीं था और 2012 में इसे हटा दिया गया। काम करने की जैसी पद्धति, रेलवे में जैसी गंभीरता होनी चाहिए थी, तब नहीं थी, लेकिन आज है। विपक्ष के कुछ सदस्य इस पर आपत्ति जताते देखे गये। रेल मंत्री ने कहा कि मैं यहां राजनीति नहीं करना चाहता, तथ्यों को सबके सामने स्पष्ट रूप से रखना चाहता हूं। उन्होंने कहा कि 2014 में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की सरकार बनने के बाद कवच प्रणाली के बारे में विचार किया गया और 2016 में इसे लागू करने का निर्णय ले लिया गया। वैष्णव ने कहा कि 2019 में कवच के लिए सबसे उच्चतम स्तर के प्रमाणपत्र को प्राप्त कर लिया गया जिसे प्राप्त करने की एक कठिन प्रक्रिया है। उन्होंने कहा- कोविड के बावजूद 2020 और 2021 में इसके आगे के परीक्षण हुए और 2022 में 3000 किलोमीटर रेल नेटवर्क की परियोजना में कवच का क्रियान्वयन किया गया और इस दौरान काफी कुछ सीखने को मिला। सभी बातों को ध्यान में रखते हुए 17 जुलाई 2024 को कवच का संस्करण 4.0 स्वीकृत किया गया है। वैष्णव ने कहा, हमारे पास इस तकनीक के तीन विनिर्माता हैं, दो नए विनिर्माता जुड़ने वाले हैं, 8000 से अधिक इंजीनियर और कर्मियों को इसका प्रशिक्षण दिया गया है तथा छह विश्वविद्यालयों के पाठ्यक्रम में इसे शामिल किया गया है। उन्होंने कहा कि इतने परिश्रम के बाद 9000 किलोमीटर रेलमार्ग के लिए निविदा की प्रक्रिया चल रही है। वैष्णव ने कहा कि भारत में रेलवे का करीब 70 हजार किलोमीटर का नेटवर्क है। उन्होंने कहा कि इससे आधे नेटवर्क के आकार वाले देशों ने एटीपी प्रणाली को लागू करने में करीब 20 साल लगाए। उन्होंने कहा, मैं भरोसा दिलाना चाहूंगा कि कवच को लागू करने में कोई कसर नहीं छोड़ेंगे। दिन रात लगकर और जी-जान लगाकर पूरे नेटवर्क पर और प्रत्येक किलोमीटर रेलमार्ग पर इसे लगाने का पूरा का पूरा प्रयास करेंगे।
5 लाख हस्ताक्षर अभियान का सफलतापूर्वक समापन, मजबूत हुई पृथक बुंदेलखंड की मांग बुंदेलखंड को पृथक राज्य बनाये जाने की मुहीम से जुड़े लाखों स्थानीय निवासी, केंद्र के सामने फिर रखी अलग राज्य की मांग बुंदेलखंड 24 गुणा 7 के हस्ताक्षर अभियान से लाखों की सख्या में जुड़े स्थानीय निवासी हर उम्र वर्ग के लोगों ने लिया बढ़-चढ़ कर हिस्सा बुंदेलखंड विकास बोर्ड के उपाध्यक्ष राजा बुंदेला, बुंदेलखंड मुक्ति मोर्चा के अध्यक्ष हरिमोहन विश्वकर्मा, बुंदेली सेना के संयोजक आश्रय सिंह आदि भी हुए शामिलएबीएन सेंट्रल डेस्क (भोपाल/लखनऊ)। लगभग 70 सालों से बुंदेलखंड को पृथक राज्य बनाये जाने की मुहिम चल रही है। समय-समय पर अलग-अलग सामाजिक संगठनों व व्यक्ति विशेषों द्वारा भारतीय मानचित्र पर बुंदेलखंड को पुन: अस्तित्व में लाने की मांग जोर पकड़ती रही है, लेकिन अब तक इस पर कोई सकारात्मक हल नहीं निकला है। बुंदेलखंड के लोकप्रिय डिजिटल न्यूज प्लेटफार्म बुंदेलखंड 24 गुणा 7 ने लगभग एक माह पूर्व बुंदेलखंड को अलग राज्य बनाये जाने के संघर्ष को फिर से जीवित करने का कार्य किया और 5 लाख हस्ताक्षर अभियान के तहत बुंदेलखंड वासियों की आवाज को केंद्र सरकार तक पहुंचाने का प्रयास किया। अभियान का समापन देश के पूर्व राष्ट्रपति भारत रत्न डॉ एपीजे अब्दुल कलाम की पुण्यतिथि पर किया गया, जिसके तहत 5 लाख से अधिक लोगों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया और आनलाइन व आफलाइन माध्यम से बुंदेलखंड को पृथक राज्य बनाने के पक्ष में अपने हस्ताक्षर दर्ज किये। अभियान के तहत उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश के पिछले हिस्सों में फैले बुंदेलखंड क्षेत्र के सभी जिलों में जमीनी स्तर पर स्थानीय लोगों से पृथक राज्य को लेकर उनकी सहमति दर्ज की गयी। इसमें बुंदेलखंड को पृथक किये जाने की मुखर आवाज रहे बुंदेलखंड विकास बोर्ड के उपाध्यक्ष राजा बुंदेला, बुंदेलखंड मुक्ति मोर्चा के अध्यक्ष हरिमोहन विश्वकर्मा, बुंदेली सेना के संयोजक आश्रय सिंह जैसे अन्य सामाजिक सदस्यों व आम जनता ने अपनी सहमति जाहिर की। अभियान को लेकर छतरपुर निवासी सुरेश तिवारी ने कहा- हम उत्तराखंड, झारखंड व छत्तीसगढ़ की तरह बुंदेलखंड को आत्मनिर्भर राज्य बनाने के लिए सालों से संघर्षरत हैं। चैनल की मुहीम से जुड़कर हमने एक बार फिर अपनी आवाज सत्तापक्ष तक पहुँचाने की कोशिश की है। हमें उम्मीद है कि केंद्र व राज्य सरकारें इस दिशा में अवश्य जल्द ही फैसला लेंगी। अभियान की सफलता पर बोलते हुए बुंदेलखंड 24 गुणा 7 के फाउंडर अतुल मलिकराम ने कहा कि हमारा प्रमुख उद्देश्य केंद्र सरकार के समक्ष दशकों से चली आ रही पृथक बुंदेलखंड राज्य की मांग को मजबूती से पेश करना तथा इस महत्वपूर्ण विषय पर गंभीरता से विचार करने के लिए प्रेरित करना था। यह साफ है कि बुंदेलखंड के लोग एक अलग राज्य चाहते हैं और एक स्वतंत्र, सफल व समृद्ध बुंदेलखंड के स्वप्न को साकार होते देखने के लिए उत्साहित हैं। हर वर्ग विशेष से मिले समर्थन ने हमें और सकारात्मक ढंग से इस पहल को आगे बढ़ाने के लिए प्रेरित किया है। हम पलायन मुक्त और संस्कृतियुक्त बुंदेलखंड बनाने के लिए प्रतिबद्ध हैं। 5 लाख हस्ताक्षर अभियान के समापन पर चैनल हेड आसिफ पटेल ने कहा- इस अभियान में लोगों का जो जबरदस्त समर्थन मिला है, वह हमारे लिए प्रेरणादायी है। हमें विश्वास है कि बुंदेलखंड राज्य बनने के साथ ही क्षेत्र का विकास होगा और लोगों के जीवनस्तर में अभूतपूर्व सुधार देखने को मिलेगा। जिस उत्साह और समर्थन के साथ लोगों ने इस अभियान में हिस्सा लिया है, वह दशार्ता है कि बुंदेलखंड के लोग अपने क्षेत्र के विकास और उन्नति के लिए किस हद तक जागरूरक हैं। चैनल ने पूर्व में बुंदेली संस्कृति, लोकगीत व लोक कलाकारों को लेकर विभिन्न अभियानों का सञ्चालन किया है तथा बुंदेलखंड के हितों की रक्षा के लिए हरसंभव प्रयास जारी रखने की प्रतिबद्धता भी जाहिर की है।
कमल सिंह लोधा गुना ब्यूरो चीफएबीएन न्यूज नेटवर्क, गुना। बरसात के इन दिनों जिले के तहसील कुंभराज मुख्यालय में गोवंशी सड़कों पर डेरा जमाने लगे हैं। वर्षा का दौर चल रहा है, ऐसे में सूखी जगह के चक्कर में गोवंशी मुख्य मार्गो की सड़कों पर बैठ रहे हैं। इसके कारण हादसों का खतरा भी बन रहा है। कुंभराज नगर के सभी प्रमुख मार्गों पर वाहनों के बाद सबसे ज्यादा संख्या में गोवंशी दिख रहे हैं। गुरूवार को कुंभराज के छबड़ा चौराहा, नगर परिषद के सामने, कृषि उपज मंडी में, कॉलोनी के कई वार्डो में सैकड़ो की संख्या में गौवंशो को सड़कों पर देखा गया। इनके लिए कोई भी व्यवस्था नहीं है। स्थानीय प्रशासन की भी जागरूकता देखने को नही मिल रही है, न ही गौ भक्तों का सहारा है। अभी बारिश का मौसम होने से सड़कों पर मवेशी घूम रहे हैं। दिन के साथ ही रात में भी स़ड़कों पर इनके जमा रहने से वाहन चालक दुर्घटना का शिकार हो जाते हैं। सुनील, गोविंद, रामदयाल, संतोष ने बताया कि कुंभराज के छाबड़ा चौराहा पर दिन भर सड़क पर गायों के झुंड रहते हैं।वाहन चालकों को आने-जाने में परेशानी आती है। कई वाहन चालक दुर्घटना का शिकार हो जाते रोजाना कई गायों की मौत रही है। यहां कोई भी सरकारी गौशाला नहीं है एक प्राइवेट गौशाला बनी है, लेकीन उसमें व्यवस्था नही हे अब देखना होगा। खबर प्रकाशित होने के बाद में कुंभराज में सरकारी गौशाला बनती है या फिर इसी तरह गौ माताओ को कुंभराज की सड़कों पर दर-दर भटकने को मजबूर रहेगी।
23 जुलाई को बजट पेश करने के साथ ही निर्मला सीतारमण रचेंगी इतिहासटूट जायेगा मोरारजी देसाई का ये रिकॉर्डएबीएन सेंट्रल डेस्क। मोदी 3.0 का पहला पूर्ण बजट मंगलवार को पेश होने जा रहा है। यह बजट कई मायनों में खास होगा। सरकार के सामने महंगाई, बेरोजगारी और ग्लोबल टेंशन से निपटने की चुनौती होगी।साथ में सरकार किसानों के आय को दोगुना करने की दिशा में भी कदम उठा सकती है। इतना ही नहीं इस बजट को एक बार फिर वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण पेश करेंगी। वह इस बजट को पेश करते ही एक नया रिकॉर्ड बना देंगी। 23 जुलाई को बजट पेश होना है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण मोदी 3.0 का पहला पूर्ण बजट पेश करके इतिहास रचने के लिए तैयार हैं।दरअसल, फाइनेंस मिनिस्टर के रूप में सीतारमण को ये लगातार सातवां बजट होगा और इसमें छह पूर्ण बजट और एक अंतरिम बजट शामिल हैं। इस हिसाब से वित्त मंत्री मोरारजी देसाई के रिकॉर्ड को पीछे छोड़ देंगी। उन्होंने साल 1959-1964 के बीच 5 वार्षिक बजट और एक अंतरिम बजट पेश किये थे। इस बार लोकसभा चुनाव में भाजपा को पूर्ण बहुमत नहीं मिला है और एनडीए गठबंधन की सरकार बनी है। ऐसे में सरकार के पूर्ण बजट में आम जनता से लेकर टैक्सपेयर्स और नौकरीपेशा लोगों के लिए बड़े ऐलान किये जाने की उम्मीद जतायी जा रही है। इस बार मिडल क्लास पर सरकार का मुख्य तौर पर फोकस रह सकता है। इसके लिए इनकम टैक्स में राहत का ऐलान संभव है। रिपोर्ट्स की मानें तो वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण जुलाई में आने वाले बजट में टैक्स के नियमों में बदलाव कर सकती हैं। अभी तक 3 लाख रुपये कमाने वालों को कोई टैक्स नहीं देना पड़ता है और इस एक्जेम्पशन लिमिट को 5 लाख रुपए किया जा सकता है।
सीनियर सिटिजन को मिल सकता है बजट में सस्ती रेल यात्रा का तोहफा, बहाल होगी ये छूट!एबीएन सेंट्रल डेस्क। भारतीय रेल से यात्रा करने वाले यात्रियों खास तौर पर वरिष्ठ नागरिकों को किराये में मिलने वाली छूट ज्वलंत मुद्दा बना हुआ है। बीते दिनों लोकसभा चुनाव के दौरान भी यह मुद्दा सामने आया था। अब बजट से पहले इस छूट की मांग एक बार फिर से तेज हो गई है, जो कोरोना काल से बंद है। ऐसी उम्मीद की जा रही है कि वरिष्ठ यात्रियों को किराये में मिलने वाली छूट इस साल के बजट में दोबारा बहाल की जा सकती है। भारतीय रेल से यात्रा करने वाले वरिष्ठ नागरिकों को लंबे समय से किराये पर छूट का लाभ मिल रहा था। हालांकि यह छूट मार्च 2020 से बंद हो गयी है। वरिष्ठ नागरिकों के अलावा महिलाओं को मिलने वाली छूट भी तब से बंद है। उससे पहले तक महिला सीनियर सिटीजन को किराये पर 50 फीसदी जबकि पुरुष और ट्रांसजेंडर सीनियर सिटीजंस को 40 फीसदी की छूट मिलती थी। रेलवे के हिसाब से 60 साल या उससे ऊपर के पुरुषों और ट्रांसजेंडर तथा 58 वर्ष या उससे ऊपर की महिलाओं को वरिष्ठ नागरिक माना जाता है। उन्हें राजधानी, शताब्दी, दूरंतो और जन शताब्दी ट्रेन समेत सभी मेल और एक्सप्रेस ट्रेनों में किराये पर रियायत मिलती थी।कोविड के समय जब पूरे देश में लॉकडाउन लगा था, कुछ महीने के लिए ट्रेनों के पहिए भी थम गए थे। उसके बाद जब धीरे-धीरे ट्रेनों का परिचालन शुरू हुआ, वरिष्ठ नागरिकों व महिलाओं को मिलने वाली छूट बहाल नहीं की गयी। अब जबकि महामारी का दौर बहुत पीछे छूट चुका है, सब्सिडी को पुन: बहाल करने की लगातार मांग उठ रही है। हालांकि अभी तक सरकार ने सब्सिडी को फिर से बहाल करने का कोई इरादा जाहिर नहीं किया है। केंद्र सरकार का मानना है कि सरकार पहले से ही यात्रियों को किराए पर छूट दे रही है। ऐसे में वरिष्ठ नागरिकों व महिलाओं को अतिरिक्त छूट देने से रेलवे पर बोझ बढ़ेगा। रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने पिछले साल दिसंबर में बताया था कि रेलवे ने 2019-20 में यात्री टिकटों पर सब्सिडी के रूप में 59,837 करोड़ रुपए की भारी-भरकम राशि खर्च की थी। यह आंकड़ा सभी यात्रियों के लिए टिकटों पर औसत 53 फीसदी की छूट के बराबर है।वहीं बीते दिनों एक आरटीआई में खुलासा हुआ था कि वरिष्ठ नागरिकों की सब्सिडी बंद करने से रेलवे को मोटी कमाई हो रही है। आरटीआई के तहत पूछे जाने पर खुद रेलवे ने बताया था कि एक अप्रैल 2022 से 31 मार्च 2023 के बीच उसने करीब 8 करोड़ वरिष्ठ नागरिकों को रियायतें नहीं दीं। उनमें लगभग 4.6 करोड़ पुरुष, 3.3 करोड़ महिलाएं और 18,000 ट्रांसजेंडर शामिल थे। इस अवधि में वरिष्ठ नागरिकों से रेलवे को कुल 5,062 करोड़ रुपए का राजस्व प्राप्त हुआ। उसमें सब्सिडी खत्म होने से अर्जित अतिरिक्त 2,242 करोड़ रुपए शामिल हैं।
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