Breaking
ताज़ा समाचार लोड हो रहा है...

देश

View All
कमर्शियल गैस सिलिंडर 39 रुपये महंगा
Published / 2024-09-01 17:18:23
कमर्शियल गैस सिलिंडर 39 रुपये महंगा

वाणिज्यिक रसोई गैस सिलेंडर 39 रुपये महंगाएबीएन सेंट्रल डेस्क। तेल विपणन कंपनियों (ओएमसी) ने 19 किलोग्राम वाले वाणिज्यिक रसोई गैस (एलपीजी) गैस सिलेंडर की कीमत में 39 रुपये प्रति सिलेंडर की बढ़ोतरी की है।इस बढ़ोतरी से 01 सितंबर 2024 से दिल्ली में 19 किलोग्राम का वाणिज्यिक रसोई गैस सिलेंडर 1691.50 रुपये में उपलब्ध होगा। इससे पहले इस वर्ष जुलाई में तेल विपणन कंपनियों ने उपभोक्ताओं को राहत देते हुए वाणिज्यिक रसोई गैस सिलेंडर की कीमत में 30 रुपये प्रति सिलेंडर की कटौती की थी।तेल विपणन कंपनियां वैश्विक बाजारों में कच्चे तेल की कीमतों और मुद्रा विनिमय दर जैसे विभिन्न कारकों को ध्यान में रखते हुए वाणिज्यिक रसोई गैस सिलेंडर की कीमतों में बदलाव करती हैं। उल्लेखनीय है कि 19 किलोग्राम के वाणिज्यिक रसोई गैस सिलेंडर का इस्तेमाल आम तौर पर होटल, रेस्तरां और खाने-पीने की दुकानों में किया जाता है।

हरियाणा में अब पांच अक्टूबर को होगा मतदान
Published / 2024-08-31 21:22:22
हरियाणा में अब पांच अक्टूबर को होगा मतदान

हरियाणा विस चुनाव में मतदान की तिथि एक अक्टूबर की जगह पांच अक्टूबरएबीएन सेंट्रल डेस्क। चुनाव आयोग ने हरियाणा में असोज अमावस्या त्योहार पर स्थानीय लोगों के बड़े पैमाने पर भ्रमण के मद्देनजर राज्य विधानसभा चुनाव में मतदान की तिथि एक अक्टूबर के स्थान पर पांच अक्टूबर को करने की शनिवार को घोषणा की। इसके साथ ही जम्मू-कश्मीर और हरियाणा विधानसभा के चुनावों की मतगणना की तिथि भी चार अक्टूबर से बढ़ाकर आठ अक्टूबर कर दी गयी है। आयोग ने कहा है कि अब दोनों विधानसभाओं के चुनाव की प्रक्रिया 10 अक्टूबर तक पूरी करा ली गयी जायेगी जबकि आयोग ने 16 अगस्त को जारी चुनाव कार्यक्रम में छह अक्टूबर तक संपन्न कराने की घोषणा की थी। आयोग ने यहां जारी एक प्रेस विज्ञप्ति में कहा है कि उसे विभिन्न राष्ट्रीय राजनीतिक दलों, हरियाणा के राजनीतिक दलों और अखिल भारतीय विश्नोई महासभा की ओर से कई ज्ञापन मिले थे, जिसमें मतदान की तिथि बदलने का आग्रह किया गया था। विज्ञापनों में कहा गया था कि राज्य में सदियों पुराने असोज अमावस्या त्योहार के अवसर पर हरियाणा के विश्नोई समाज के बड़ी संख्या में लोग राजस्थान में इस त्योहार में भाग लेने के लिये जाते हैं, इन दलों और संगठनों का कहना था कि पूर्व में घोषिति तिथि में मतदान कराने से लोगों को मतदान के अपने अधिकार से वंचित होना पड़ सकता है और मतदान का प्रतिशत भी घट सकता है। आयोग ने इस के मद्देनजर केवल हरियाणा में मतदान की तिथि को एक अक्टूबर से बढ़ाकर पांच अक्टूबर 2024 (शनिवार) करने का फैसला किया है। इसके अनुसार दोनों विधानसभाओं के मतदान की गणना की तिथि भी बदल दी गयी है। दोनों विधानसभाओं के चुनाव में मतदान प्रक्रिया की बाकी तिथियों में कोई बदलाव नहीं किया गया है। उल्लेखनीय है कि आयोग ने 90 सदस्यीय जम्मू-कश्मीर विधानसभा में चुनाव तीन चरणों में कराने की घोषणा की है जबकि 90 सदस्यीय हरियाणा विधानसभा में चुनाव एक चरण में कराया जा रहा है। जम्मू-कश्मीर में तीसरे और अंतिम चरण के चुनाव की अधिसूचना पांच सितंबर को जारी की जायेगी और इस अंतिम चरण के लिये मतदान एक अक्टूबर को कराये जायेंगे। हरियाणा विधानसभा की सभी सीटों के लिये चुनाव की अधिसूचना पांच सितंबर को जारी करने का कार्यक्रम है। राज्य में 12 सितंबर तक नामांकन दाखिल किये जा सकेंगे और उनकी जांच 13 सितंबर को होगी और नाम वापसी की अंतिम तिथि 16 सितंबर है।

चुनौतियों से जूझ रहे औद्योगिक पार्क
Published / 2024-08-31 20:51:36
चुनौतियों से जूझ रहे औद्योगिक पार्क

औद्योगिक पार्कों की राह में चुनौतियां, हल करने होंगे कई मुद्दे12 ऐसे एन्क्लेव विकसित करने की योजना है जिसे पीयूष गोयल ने औद्योगिक पार्कों के स्वर्णिम चतुर्भुज का नाम दिया है। यह अटल बिहारी वाजपेयी की सफल सड़क निर्माण परियोजना का नाम था एबीएन सेंट्रल डेस्क। केंद्रीय मंत्रिमंडल द्वारा इस सप्ताह मंजूर की गई सरकार की औद्योगिक पार्क नीति, विशेष आर्थिक क्षेत्र (एसईजेड) अधिनियम 2005 के बाद कारोबार के अनुकूल क्षेत्र तैयार करने की सबसे महत्त्वाकांक्षी पहल है। 28,600 करोड़ रुपये की लागत से 12 ऐसे एन्क्लेव विकसित करने की योजना है जिसे वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने औद्योगिक पार्कों के स्वर्णिम चतुर्भुज का नाम दिया है। याद रहे कि यह अटल बिहारी वाजपेयी की सफल सड़क निर्माण परियोजना का नाम था। योजना के मुताबिक राज्य सरकारों और निजी क्षेत्र के साथ मिलकर एकीकृत स्मार्ट औद्योगिक शहर बसाये जाने हैं जिनमें आवासीय और वाणिज्यिक क्षेत्र होंगे। इसके जरिये 1.5 लाख करोड़ रुपये का निवेश आकर्षित करने का लक्ष्य है। राज्यों का योगदान जमीन के रूप में होगा और केंद्र सरकार इक्विटी या डेट मुहैया करायेगी। कुछ औद्योगिक टाउनशिप अन्य देशों के साथ मिलकर विकसित की जाएंगी जिन्होंने ऐसी व्यवस्था में अभिरुचि दिखायी है। इस विषय में सरकार की मंशा कहीं से गड़बड़ नहीं लग रही। बहरहाल एक सवाल यह है कि इसका क्रियान्वयन कैसे होगा? ऐसा इसलिए क्योंकि अतीत में औद्योगिक गतिविधियों को देश की कारोबारी सुगमता क्षेत्र की मानक अकुशलताओं से अलग-थलग रखने के प्रयासों को बहुत सीमित सफलता मिली है।सरकारी आंकड़े बताते हैं देश में करीब 4,420 औद्योगिक पार्क और 270 एसईजेड हैं। इनमें से अधिकांश को निवेश बढ़ाने में कोई उल्लेखनीय कामयाबी नहीं मिली है। एसईजेड नीति में भी इसी प्रकार इलाके चिह्नित किए गए थे जहां कर राहत प्रदान करके चीन की शैली में निर्यात क्षेत्र विकसित किए गए। शुरूआती रुचि के बाद जब कर रियायत समाप्त हुई तो ये क्षेत्र अपेक्षाओं पर खरे नहीं उतरे और इन्हें लेकर उत्साह समाप्त हो गया। देश के कुल निर्यात में एसईजेड की हिस्सेदारी केवल एक तिहाई रह गई। विनिर्माण में निवेश आकर्षित करने की सरकार की नीतिगत मंशा सफल नहीं हुई। एसईजेड में आए निवेश का करीब 60 फीसदी आईटी और आईटीईएस में आया। उसके बाद आया डेवलपमेंट आफ एंटरप्राइज ऐंड सर्विस हब्स (देश), विधेयक 2023। इसके माध्यम से एसईजेड कानून की कमियों को दूर करने का प्रयास किया गया। इस विधेयक की स्थिति अस्पष्ट है। खबरों के अनुसार तो शायद इसे खारिज भी कर दिया गया है। ताजातरीन नीति में देश में निवेश से जुड़ी शाश्वत बाधाओं को दूर करने का प्रयास दिखता है।उदाहरण के लिए भूमि अधिग्रहण हमेशा से एक चुनौती रहा है। यहां तक कि एसईजेड भी निजी क्षेत्र के अचल संपत्ति कारोबार में बदलकर रह गये। औद्योगिक पार्कों में वे जमीनें शामिल होंगी, जो सरकार द्वारा पहले ही अधिग्रहीत हैं और जिनके लिए पर्यावरण मंजूरी मिल चुकी है। दूसरा, एकल खिड़की मंजूरी के लिए स्पेशल परपज व्हीकल बनाने का प्रस्ताव भी है। तीसरा, पार्कों की लोकेशन को समर्पित माल ढुलाई गलियारे से लगे औद्योगिक गलियारे से जोड़ा गया है जिससे लॉजिस्टिक्स की एक अहम समस्या दूर हो सके। इनमें से पांच अमृतसर-कोलकाता बेल्ट पर, दो दिल्ली-मुंबई बेल्ट पर और पांच दक्षिणी एवं मध्य मार्गों पर स्थित हैं। इस लिहाज से देखें तो कई व्यापक मुद्दे हैं जिन्हें हल करना होगा, तभी हमारे पार्क चीन जैसा प्रभाव उत्पन्न कर सकेंगे। उनमें से एक है आकार ताकि विनिर्माताओं के पास वैश्विक अर्थव्यवस्थाओं जैसी पहुंच हो सके और वे सही मायनों में प्रतिस्पर्धी बन सकें। यह एक चुनौती हो सकती है। देश में एसईजेड का औसत आकार 0.25 वर्ग किमी से 14 वर्ग किमी तक का है। इसके विपरीत चीन के सबसे पुराने और बड़े एसईजेड में से एक शेनझेन का आकार 316 वर्ग किमी का है। इन शहरों के इर्द-गिर्द जीवंत सामाजिक ढांचे की उपलब्धता भी अहम है। गुरुग्राम और बेंगलुरु इस मामले में मिसाल हैं क्योंकि उन्होंने नये दौर के श्रमिकों के समायोजन के लिए ढांचा विकसित किया है। यहां तक कि केरल जैसी अंकुश वाली मदिरा नीति या बिहार जैसी पूर्ण शराबबंदी भी पार्कों में विदेशी निवेश के निर्णयों को प्रभावित कर सकती हैं। नवीनतम नीति यकीनन निवेश जुटाने की एक नयी कोशिश है। देखना होगा कि इसे कामयाबी मिलती है या नहीं।

श्वेतांबर जैन मूर्ति पूजक संघ का महापर्व पर्यूषण पर्व आज से जैन मंदिर डोरंडा में शुरू
Published / 2024-08-31 20:43:03
श्वेतांबर जैन मूर्ति पूजक संघ का महापर्व पर्यूषण पर्व आज से जैन मंदिर डोरंडा में शुरू

टीम एबीएन, रांची। पर्यूषण पर्व श्री जैन श्वेतांबर मूर्तिपूजक संघ का डोरंडा जैन मंदिर में आज से शुरू हुआ एवं श्री साधुमार्गी जैन श्वेतांबर संघ एवं तेरापंथ धर्मसंघ का कल से 01 सितंबर से  शुरू हो रहा है, जिसका प्रवचन दिगंबर जैन भवन में कल से शुरू होगा। डोरंडा स्थित जैन मंदिर में परम पूज्य श्री खतरगच्छाधिपति मणीप्रज्ञ सागर सुरीश्वर जी की आज्ञा से परम पूज्य गुरूवर्या श्री लयस्मिता श्री जी, पु.अभिवर्षा श्री जी, पु.भव्योंदया श्री जी, पु. गुणोंदया श्री जी,पु. जिनवर्षा श्री जी आदि ठाना 5 की आज्ञा से चातुर्मास चल रहा है।  आज डोरंडा जैन मंदिर में सुबह स्नात्र पूजा हुई तत्पश्चात पुज्य माताजी महाराज लयस्मिता श्री जी आदि ठाणा ने डोरंडा जैन उपाश्रय में पर्युषणपर्व का स्वागत किया एवं प्रवचन में बताया कि इस पर्यूषण पर्व के दौरान हमें अपनी आत्मा में चारों तरफ से लगे हुए कर्मों को हटाने के लिए ही ये पर्व आता है। अपने आत्मा को जगाने के लिये तैयारी करने के लिये हमें ये आठ दिन मिलते हैं। अपने पर्यूषण पर्व का स्वागत हमे तीन पुलो से करना है जिसमें पहला है सुंदरता अर्थात अपने मन की आत्मा को अंदर से सुंदर, सुंगधित करना दूसरा है शांतभाव हमें अपनी आत्मा को शांतभाव से परमात्य भवित करना है, तथा तीसरा पुल है सावधानी अर्थात हमारे कषाय इतने अलर्ट है कि इन कषायों को सावधानी से हटाकर परमात्मा की भक्ति करना है। दोपहर में ज्ञान शाला एवं शाम में 7 बजे से भक्ति भजन कार्यक्रम हुआ। आज के प्रवचन में काफी संख्या में समाज के लोग उपस्थित हुए। इधर, दिगंबर जैन भवन, हरमू रोड में श्री साधुमार्गी जैन श्वेतांबर संघ रांची के द्वारा कल से (1 सितम्बर से) पर्यूषण पर्व का कार्यक्रम रखा गया है। इस अवसर पर धर्म की प्रभावना करने स्वाध्यायी बंधु श्रीमान गौतम जी रांका और सुरेश जी बोरडिया आज मुंबई से रांची आये हैं। कल से सुबह प्रार्थना के पश्चात 8:30 बजे से 9:30 बजे तक 1 सितंबर 2024 से प्रवचन होगा। दोपहर में धर्म चर्चा और संध्या के समय प्रतिक्रमण होगी।इसके उपरांत हर दिन अलग-अलग कार्यक्रम आयोजित होंगे। 4 सितंबर 2024 को पारस हॉस्पिटल के सहयोग से नि:शुल्क स्वास्थ्य जांच शिविर और चिकित्सक से निशुल्क परामर्श का आयोजन होगा। 8 सितंबर 2024 को संवत्सरी महापर्व का आयोजन किया जायेगा, जो त्याग और तपस्या का प्रतीक है। क्षमा याचना और विदाई समारोह 9 सितंबर को आयोजित किया जायेगा। उक्त जानकारी मीडिया प्रभारी सुरेश जैन ने दी।

बंगाल सरकार केंद्रीय कानून को सख्ती से लागू करें : अन्नपूर्णा देवी
Published / 2024-08-31 20:40:10
बंगाल सरकार केंद्रीय कानून को सख्ती से लागू करें : अन्नपूर्णा देवी

एबीएन सेंट्रल डेस्क। केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्री अन्नपूर्णा देवी ने पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को लिखे एक पत्र में कहा है कि राज्य में महिलाओं और बच्चों के खिलाफ अपराध रोकने के लिए केंद्रीय कानूनों को सख्ती से लागू किया जाना चाहिए।अन्नपूर्णा देवी ने शुक्रवार को पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री को लिखे पत्र में कहा है कि दुष्कर्म और महिलाओं के खिलाफ अन्य अपराधों के शीघ्र निपटान के लिए केंद्रीय कानून द्वारा निर्धारित प्रक्रिया का पालन किया जाना चाहिए। केंद्रीय मंत्री का सुश्री बनर्जी को कोलकाता दुष्कर्म मामले के संदर्भ यह दूसरा पत्र है। इससे पहले सुश्री बनर्जी केंद्रीय कानून को सख्त बनाने की मांग करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को दो पत्र लिख चुकी हैं।अन्नपूर्णा देवी ने दूसरे पत्र का जवाब देते हुए कहा कि पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री द्वारा प्रदान किये गये आंकड़े तथ्यात्मक रूप से गलत है और राज्य की ओर से देरी को छिपाने का प्रयास है। उन्होंने कहा कि यौन अपराध और दुष्कर्म के मामलों का तेजी से निपटान करने के लिए बाल यौन अपराध संरक्षण अधिनियम - पोक्सो के प्रावधानों के अंतर्गत त्वरित न्यायालय स्थापित किये जाने चाहिए। उन्होंने मुख्यमंत्री से यह सुनिश्चित करने को कहा कि न्याय तेजी से और कुशलता से दिया जाये। महिलाओं के खिलाफ अपराधों से निपटने के लिए केंद्र सरकार की प्रतिबद्धता की पुष्टि करते हुए अन्नपूर्णा देवी ने बताया कि भारतीय न्याय संहिता में पहले से ही दुष्कर्म के लिए न्यूनतम 10 साल के कठोर कारावास सहित कठोर दंड का प्रावधान है, जिसे अपराध की गंभीरता के आधार पर आजीवन कारावास या यहां तक कि मृत्युदंड तक बढ़ाया जा सकता है। उन्होंने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता में ऐसे मामलों की समय पर जांच और सुनवाई के लिए प्रावधानों का भी उल्लेख किया।

महिला सुरक्षा पर मोदी और चंद्रचूड़ दिखे साथ-साथ
Published / 2024-08-31 18:42:47
महिला सुरक्षा पर मोदी और चंद्रचूड़ दिखे साथ-साथ

एबीएन सेंट्रल डेस्क। कोलकाता रेप कांड का मामल इस समय देश में काफी गमार्या हुआ है। इस बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने महिलाओं की सुरक्षा पर एक महत्वपूर्ण बयान दिया है। उन्होंने कहा कि महिलाओं के खिलाफ अपराधों में जल्दी न्याय होना बहुत जरूरी है, ताकि महिलाओं को अपनी सुरक्षा पर अधिक भरोसा हो सके। न्यायपालिका को संविधान का रक्षक माना जाता है और सुप्रीम कोर्ट तथा न्यायपालिका ने अपनी जिम्मेदारी अच्छे से निभायी है। भारत के मुख्य न्यायाधीश डी वाई चंद्रचूड़ की मौजूदगी में जिला न्यायपालिका के राष्ट्रीय सम्मेलन के उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए मोदी ने कहा कि भारत के लोगों ने कभी भी सुप्रीम कोर्ट या न्यायपालिका पर कोई अविश्वास नहीं दिखाया है। पीएम ने आपातकाल को एक काला दौर बताते हुए कहा कि इस समय न्यायपालिका ने मौलिक अधिकारों की रक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभायी।न्यायपालिका ने राष्ट्रीय सुरक्षा के मामलों में भी बहुत अच्छा काम किया। विशेष रूप से न्यायपालिका ने हमेशा राष्ट्रीय हितों को सर्वोपरि रखते हुए देश की अखंडता की रक्षा की है। पीएम मोदी ने आगे कहा- महिलाओं के खिलाफ अत्याचार और बच्चों की सुरक्षा समाज के लिए गंभीर चिंता का विषय है। महिलाओं के खिलाफ अत्याचार के मामलों में जितनी तेजी से न्याय मिलेगा, आधी आबादी को अपनी सुरक्षा के बारे में उतना ही अधिक भरोसा होगा। महिलाओं के खिलाफ अपराधों से निपटने के लिए कई कड़े कानून हैं और त्वरित न्याय सुनिश्चित करने के लिए आपराधिक न्याय प्रणाली के बीच बेहतर समन्वय सुनिश्चित करने की आवश्यकता है।

देश के जीडीपी ग्रोथ में आयी गिरावट
Published / 2024-08-30 21:37:11
देश के जीडीपी ग्रोथ में आयी गिरावट

पहली तिमाही में 6.7 प्रतिशत की दर से बढ़ी भारत की इकोनॉमी सरकार ने वर्ष 2024-25 की पहली तिमाही के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) के आंकड़े जारी कर दिये हैं।  सांख्यिकी मंत्रालय द्वारा जारी आंकड़ों के मुताबिक, पहली तिमाही में भारत की अर्थव्यवस्था 6.7 प्रतिशत की दर से बढ़ी है। जो कि पिछली पांच तिमाहियों में सबसे कम है। जबकि एक साल पहले इसी अवधि में 8.2 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की थी। बैंकिंग सेक्टर के रेगुलेटर भारतीय रिजर्व बैंक ने मौजूदा वर्ष की पहली तिमाही में 7.1 फीसदी जीडीपी का अनुमान जताया था। 8.2 फीसदी के मुकाबले 6.7 फीसदी रही इकोनॉमी सांख्यिकी मंत्रालय के एनएसओ ने मौजूदा वित्त वर्ष की पहली तिमाही के लिए जीडीपी का डेटा जारी किया है। इस डेटा के मुताबिक 2024-25 की पहली तिमाही में आर्थिक विकास दर 6.7 फीसदी के दर से बढ़ी है जो कि पिछले वित्त वर्ष 2023-24 की पहली तिमाही में 8.2 फीसदी से दर से बढ़ी थी। यानि पिछले वर्ष के मुकाबले ग्रोथ रेट में 1.5 फीसदी की इस वर्ष की पहली तिमाही में कमी देखने को मिली है। 2024-25 की पहली तिमाही में रियल जीडीपी कॉंस्टेंट प्राइस के हिसाब से 43.64 लाख करोड़ रुपये रही है जो पिछले वित्त वर्ष की पहली तिमाही में 40.91 फीसदी रही थी। मुख्य रूप से कृषि क्षेत्र के खराब प्रदर्शन के चलते पहली तिमाही में आर्थिक वृद्धि की रफ्तार घटी है। हालांकि, भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ने वाली प्रमुख वैश्विक अर्थव्यवस्था बना हुआ है। गौरतलब है कि अप्रैल-जून तिमाही में चीन की जीडीपी वृद्धि दर 4.7 प्रतिशत थी। राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (एनएसओ) ने शुक्रवार को जारी आंकड़ों में बताया कि समीक्षाधीन तिमाही के दौरान कृषि क्षेत्र की वृद्धि दर दो प्रतिशत रही। बीते वित्त वर्ष 2023-24 की अप्रैल-जून तिमाही में यह आंकड़ा 3.7 प्रतिशत था। दूसरी ओर विनिर्माण क्षेत्र की वृद्धि सालाना आधार पर पांच प्रतिशत से बढ़कर चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में सात प्रतिशत हो गयी। तिमाही आधार पर जीडीपी वृद्धि की न्यूनतम दर जनवरी-मार्च, 2023 में 6.2 प्रतिशत थी।

पीएम मोदी ने दिये लंबे समय तक सत्ता में रहने के संकेत...
Published / 2024-08-30 21:35:59
पीएम मोदी ने दिये लंबे समय तक सत्ता में रहने के संकेत...

10वें फिनटेक में भी आऊंगा, पीएम मोदी का लंबे समय तक सत्ता में बने रहने का इरादा, बताया पूरा प्लानएबीएन सेंट्रल डेस्क। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने शुक्रवार को विश्वास जताया कि वह 2029 में रिकॉर्ड चौथे कार्यकाल के लिए सत्ता में वापसी करेंगे। कुछ राजनीतिक पंडितों ने दावा किया था कि हाल में संपन्न लोकसभा चुनाव में भाजपा के अपने दम पर बहुमत हासिल नहीं करने के कारण मोदी की चमक फीकी पड़ गई है, लेकिन प्रधानमंत्री ने फिनटेक उद्योग के कुछ जाने-माने लोगों के एक समूह से कहा कि वह 2029 में उनके 10वें वार्षिक कार्यक्रम में भी मौजूद रहेंगे। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने 2014 और 2019 के लोकसभा चुनाव में अपने दम पर बहुमत हासिल किया था, लेकिन 2024 में उसके सांसदों की संख्या बहुमत के लिए जरूरी 272 के आंकड़े को नहीं छू पायी और सरकार राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) के दूसरे घटक दलों के समर्थन पर निर्भर है। अगले आम चुनाव अप्रैल-मई 2029 में होने हैं। मोदी ने अपने भाषण में कहा, यह ग्लोबल फिनटेक फेस्ट का पांचवां संस्करण है। मैं 10वें संस्करण में भी आऊंगा। यह वार्षिक आयोजन 2020 में शुरू हुआ था और 10वें संस्करण का आयोजन 2029 में होगा। प्रधानमंत्री ने कहा, मुझे पूरा भरोसा है कि भारत का फिनटेक इकोसिस्टम पूरी दुनिया के जीवन को आसान बनाएगा। हमारा सर्वश्रेष्ठ अभी आना बाकी है... मैंने यहां कुछ स्टार्टअप शुरू करने वालों से मुलाकात की और उन्हें 10 काम सौंपे हैं, क्योंकि फिनटेक एक बहुत ही आशाजनक क्षेत्र है। मोदी ने कहा कि भारत की फिनटेक क्रांति व्यापक रूप से फैली हुई है और कोई भी व्यक्ति हवाई अड्डे पर पहुंचने से लेकर स्ट्रीट फूड और शॉपिंग सेंटर तक इसका साक्षी बन सकता है। उन्होंने कहा कि पिछले 10 वर्ष में उद्योग को 31 अरब डॉलर से अधिक का रिकॉर्ड निवेश प्राप्त हुआ है और साथ ही स्टार्टअप में 500 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। उन्होंने कहा कि सस्ते मोबाइल फोन, सस्ता डेटा और शून्य बैलेंस वाले जन धन बैंक खातों ने भारत में कमाल कर दिया है। विपक्ष को आड़े हाथ लेते हुए मोदी ने कहा कि अपने को विद्वान मानने वाले कुछ लोग संसद में खड़े होकर पूछते थे कि गांवों में बैंक नहीं हैं, इंटरनेट कनेक्शन नहीं हैं और बिजली नहीं है, रिचार्जिंग कहां होगा, तो फिनटेक क्रांति कैसे आयेगी। उन्होंने कहा, सरस्वती जब बुद्धि बांट रही थीं, तो ऐसे लोग रास्ते में पहले ही खड़े थे। वो मुझ जैसे चायवाले से भी यह पूछते थे। मोदी ने कहा कि फिर भी भारत ने एक दशक में असाधारण क्रांति देखी है।

महिला अपराध पर हो सामूहिक प्रयास : मल्लिकार्जुन खड़गे
Published / 2024-08-29 20:14:27
महिला अपराध पर हो सामूहिक प्रयास : मल्लिकार्जुन खड़गे

महिलाओं के खिलाफ अपराध रोकने के लिए मिलकर प्रयास करने की जरूरत: खडगेएबीएन सेंट्रल डेस्क। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खडगे ने कहा है कि देश में महिलाओं के खिलाफ अत्याचार की घटनाएं बार-बार हो रही हैं और उन्हें रोकने के लिए मोदी सरकार ने पिछले 10 साल में कोई कदम नहीं उठाये हैं इसलिए इस दिशा में सबको मिलकर काम करने के सख्त जरूरत है। श्री खडगे ने कहा- हमारी महिलाओं के साथ हुआ कोई भी अन्याय असहनीय, पीड़ा दायक और घोर निंदनीय है। हमें बेटी बचाओ नहीं बेटी को बराबरी का हक सुनिश्चित करो चाहिए। महिलाओं को संरक्षण नहीं, भययुक्त वातावरण चाहिए। उन्होंने कहा कि देश में हर घंटे महिलाओं के खिलाफ 43 अपराध रिकॉर्ड होते हैं। हर दिन 22 अपराध ऐसे हैं, जो हमारे देश के सबसे कमजोर दलित-आदिवासी वर्ग की महिलाओं और बच्चों के खिलाफ दर्ज होते हैं। अनगिनत ऐसे अपराध है जो दर्ज ही नहीं होते - डर से, भय से, सामाजिक कारणों के चलते। प्रधानमंत्री मोदी जी लाल किले के भाषणों में कई बार महिला सुरक्षा पर बात कर चुके हैं, पर उनकी सरकार ने पिछले 10 वर्षों में ऐसा कुछ ठोस नहीं किया, जिससे महिलाओं के खिलाफ अपराधों में कुछ रोकथाम हो। उल्टा, उनकी पार्टी ने कई बार पीड़िता का चरित्र हनन भी किया है, जो शर्मनाक है। कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा, हर दीवार पर बेटी बचाओ पेंट करवा देने से क्या सामाजिक बदलाव आयेगा या सरकारें व कानून व्यवस्था सक्षम बनेगी। क्या हम सुरक्षात्मक कदम उठा पा रहे हैं। क्या हमारी न्याय व्यवस्था में सुधार हुआ है। क्या समाज के शोषित व वंचित अब एक सुरक्षित वातावरण में रह पा रहे हैं। क्या सरकार और प्रशासन ने वारदात को छिपाने का काम नहीं किया है। क्या पुलिस ने पीड़िताओं का अंतिम संस्कार जबरन करना बंद कर दिया है, ताकि सच्चाई बाहर न आ पाये। श्री खडगे ने कहा- हमें ये सोचना है कि जब 2012 में दिल्ली में निर्भया के साथ वारदात हुई तो जस्टिस वर्मा कमेटी की सिफारिशें लागू हुई थी, आज क्या उन सिफारिशों को हम पूर्णत: लागू कर पा रहे हैं। क्या 2013 में कार्यस्थल पर महिलाओं के साथ यौन अपराध रोकने संबंधी कानून के प्रावधानों का ठीक ढंग से पालन हो रहा है, जिससे कार्यस्थल पर हमारी महिलाओं के लिए भययुक्त वातावरण तैयार हो सके। संविधान ने महिलाओं को बराबरी का स्थान दिया है। महिलाओं के खिलाफ अपराध एक गंभीर मुद्दा है। इन अपराधों को रोकना देश के लिए एक बड़ी चुनौती है। हम सबको एकजुट होकर, समाज के हर तबके को साथ लेकर इसके उपाय तलाशने होंगे। उन्होंने कहा कि अब वक्त आ गया है कि महिलाओं के साथ हर जगह न्याय हो। शहरों में स्ट्रीट लाइट, महिला शौचालय या अन्य सभी मूलभूत सुविधा हो या फिर पुलिस तथा न्याय व्यवस्था में सुधार की बात हो, हम हर वह कदम उठायें, जिससे महिलाओं के लिए भययुक्त वातावरण सुनिश्चित हो सके।

Newsletter

Subscribe to our website and get the latest updates straight to your inbox.

We do not share your information.

abnnews24

सच तो सामने आकर रहेगा

टीम एबीएन न्यूज़ 24 अपने सभी पाठकों और प्रेरणाश्रोतों का अभिनन्दन करता है। आपके सहयोग और विश्वास के लिए धन्यवाद।

विज्ञापन

© 2026 ABN News 24. All Rights Reserved.

कुल पाठक (Total Visitors): 87,685