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त्याग की मिसाल हैं अरविंद केजरीवाल : आतिशी
Published / 2024-09-17 16:38:32
त्याग की मिसाल हैं अरविंद केजरीवाल : आतिशी

अरविंद केजरीवाल ने त्याग की मिसाल पेश कीमुख्यमंत्री चुने जाने के बाद पहली बार बोलीं आतिशीएबीएन सेंट्रल डेस्क। मुख्यमंत्री पद की दौड़ में कई नाम शामिल थे। इसमें मौजूदा कैबिनेट के सदस्य आतिशी, सौरभ भारद्वाज, गोपाल राय, कैलाश गहलोत के अलावा पूर्वी दिल्ली लोकसभा के प्रत्याशी रहे कुलदीप कुमार, विधानसभा उपाध्यक्ष राखी बिड़लान समेत दूसरे नाम भी शामिल थे। लेकिन आतिशी के नाम पर मुहर लग गई है।आम आदमी पार्टी के एक विधायक सत्येंद्र जैन अभी जेल में है। दो विधायक पार्टी को छोड़कर भाजपा में शामिल हो चुके हैं। जबकि एक विधायक ने पार्टी को छोड़कर कांग्रेस ज्वाइन कर ली है। भाजपा में गए राजकुमार आनंद की विधायक की सदस्यता जा चुकी है। वह पूर्व विधायक हो गए हैं। केजरीवाल के आवास पर चली बैठक में 57 विधायक मौजूद रहे।

100 दिन में विपक्ष ने मुझे बहुत अपमानित किया : नरेंद्र मोदी
Published / 2024-09-16 19:33:45
100 दिन में विपक्ष ने मुझे बहुत अपमानित किया : नरेंद्र मोदी

Narendra modi ने INDI गठबंधन पर साधा निशानाएबीएन सेंट्रल डेस्क। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि मेरे तीसरे कार्यकाल के पहले 100 दिन में विपक्ष ने मेरा मजाक उड़ाया और अपमानित किया।मैंने फैसला किया कि किसी भी अपमान पर प्रतिक्रिया नहीं दूंगा, बल्कि 100 दिन के अपनी सरकार के एजेंडे को पूरा करना तय किया। पीएम मोदी ने कहा कि हमारे देश के लिए यह स्वर्णिम समय है, हम अगले 25 वर्षों में भारत को एक विकसित राष्ट्र बनाएंगे।मोदी ने कहा कि नकारात्मकता से भरे कुछ लोग भारत की एकता और अखंडता को निशाना बना रहे हैं, वे देश को बांटना चाहते हैं। नफरत से भरे लोग भारत और गुजरात को बदनाम करने का कोई मौका नहीं छोड़ रहे।

निफ्ट के साथ मिलकर खादी को नया आयाम देने की तैयारी
Published / 2024-09-13 20:15:28
निफ्ट के साथ मिलकर खादी को नया आयाम देने की तैयारी

नये भारत की नयी खादी के लिए निफ्ट के साथ समझौताएबीएन सेंट्रल डेस्क (नयी दिल्ली)। खादी एवं ग्रामोद्योग आयोग ने ह्यनये भारत की नयी खादी को नयी ऊंचाई पर पहुंचाने के लिए राष्ट्रीय फैशन संस्थान (निफ्ट) के साथ खादी उत्कृष्टता केंद्र स्थापित करने के एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किये हैं। खादी आयोग के अध्यक्ष मनोज कुमार ने शुक्रवार को यहां बताया कि खादी को वैश्विक ब्रांड के रूप में विकसित करने के लिए यह निफ्ट के साथ समझौता क्रांतिकारी कदम है। उन्होंने कहा कि नये भारत की नयी खादी को नयी ऊंचाइयों पर पहुंचाने के लिए तथा घरेलू और अंतर्राष्ट्रीय बाजारों में इसकी पहुंच बढ़ाने के लिए महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किये हैं। उन्होंने बताया कि खादी की गुणवत्ता और ब्रांड को सशक्त करने के लिए आयोग अगले तीन वर्षों में करीब 25.17 करोड़ रुपये खर्च करेगा।

चाक-चौबंद सुरक्षा व्यवस्था के बीच रांची आयेंगी राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू
Published / 2024-09-13 20:12:40
चाक-चौबंद सुरक्षा व्यवस्था के बीच रांची आयेंगी राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के रांची दौरे को लेकर सुरक्षा के कड़े इंतजामटीम एबीएन, रांची। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू दो दिवसीय दौरे पर रांची आ रही हैं। 19 और 20 सितंबर को वे रांची में रहेंगी। उनके आगमन पर सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए जा रहे हैं। उपायुक्त राहुल कुमार सिन्हा के निर्देश के आलोक में सुरक्षा के दृष्टिकोण से बिरसा मुंडा एयरपोर्ट से राजभवन एवं कार्यक्रम स्थल के आसपास के क्षेत्रों में Drones, Paragliding and Hot Air Ballons पूरी तरह वर्जित किए गए हैं। अन्य संबंधित गतिविधियों पर भी रोक लगायी गयी है। इस संबंध में रांची के सदर अनुमंडल दंडाधिकारी द्वारा No Fly Zone और No Drone Zone  घोषित किया गया है। दोनों दिन सुबह पांच बजे से रात 10 बजे तक निषेधाज्ञा जारी रहेगी। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के रांची दौरे को लेकर सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए जा रहे हैं। रांची के सदर अनुमंडल दंडाधिकारी ने सुरक्षा के दृष्टिकोण से बीएनएसएस की धारा-163 के अंतर्गत प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए निषेधाज्ञा जारी की है।

विशेष त्वरित अदालतों से खत्म हो रही तारीख पर तारीख की संस्कृति
Published / 2024-09-11 19:29:03
विशेष त्वरित अदालतों से खत्म हो रही तारीख पर तारीख की संस्कृति

विशेष त्वरित अदालतों के कामकाज पर इंडिया चाइल्ड प्रोटेक्शन की रिपोर्ट फास्ट ट्रैकिंग जस्टिस : रोल आॅफ फास्ट ट्रैक स्पेशल कोर्ट्स इन रिड्यूसिंग केस बैकलॉग्स के अनुसार इन विशेष अदालतों में मामलों के निपटारे की दर 83 प्रतिशत रही जबकि अन्य अदालतों में सिर्फ 10 प्रतिशत रिपोर्ट के अनुसार अगर सभी विशेष त्वरित अदालतों (एफटीएससी) को संचालित रखने के अलावा अगर 1000 नई विशेष अदालतों का गठन नहीं हुआ तो शायद कभी खत्म नहीं होंगे लंबित मामले  साल भर के भीतर सभी लंबित मामलों का खात्मा करना है तो हर तीन मिनट में करना होगा बलात्कार या पॉक्सो के एक मामले का निपटारा  सिर्फ दो प्रतिशत मामलों के निपटारे की दर के साथ पश्चिम बंगाल देश में सबसे नीचे, राज्य में 123 विशेष अदालतों की स्वीकृति के बावजूद महज तीन विशेष अदालतें ही कर रहीं कामएबीएन सेंट्रल डेस्क। अदालती मामलों में तारीख पर तारीख संस्कृति के लिए कुख्याति के बावजूद फास्ट ट्रैक स्पेशल कोर्ट्स (एफटीएससी) यानी विशेष त्वरित अदालतें मामलों के निपटारे की अपनी रफ्तार के कारण न्याय की प्रतीक्षा कर रहे बलात्कार व यौन शोषण पीड़ितों के लिए उम्मीद की किरण बनकर उभरी हैं। इंडिया चाइल्ड प्रोटेक्शन की हाल ही में जारी एक रिपोर्ट के अनुसार जहां पूरे देश की अदालतों में बलात्कार व पॉक्सो के मामलों के निपटारे की दर 2022 में सिर्फ 10 प्रतिशत थी, वहीं इन विशेष त्वरित अदालतों में यह दर 83 प्रतिशत रही जो 2023 में बढ़कर 94 प्रतिशत तक पहुंच गयी। रिपोर्ट फास्ट ट्रैकिंग जस्टिस : रोल आफ फास्ट ट्रैक स्पेशल कोर्ट्स इन रिड्यूसिंग केस बैकलॉग्स ने यह भी चेताया है कि अगर अदालतों में एक भी नया मामला नहीं जोड़ा जाए और अगर हर तीन मिनट में बलात्कार या पॉक्सो के एक मामले का निपटारा किया जाए तब कहीं जाकर दिसंबर 2023 तक के लंबित मामले साल भर में खत्म हो सकते हैं। रिपोर्ट ने लंबित मामलों के निपटारे के लिए देशभर में काम कर रही सभी विशेष त्वरित अदालतों को चालू रखने के अलावा एक हजार नई विशेष त्वरित अदालतों के गठन की सिफारिश की है। रिपोर्ट ने इस बात का भी संज्ञान लिया कि निर्भया फंड में पड़ी अप्रयुक्त राशि के उपयोग से दो साल में ये अतिरिक्त विशेष अदालतें गठित की जा सकती हैं। रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि इन अतिरिक्त त्वरित विशेष अदालतों का गठन नहीं होने की स्थिति में बलात्कार व पॉक्सो के लंबित मामलों का शायद कभी भी निपटारा नहीं हो पायेगा। पीड़ितों के लिए न्याय सुनिश्चित करने में इन विशेष त्वरित अदालतों की आवश्यकता और इनकी केंद्रीय भूमिका को रेखांकित करते हुए प्रख्यात बाल अधिकार कार्यकर्ता और बाल विवाह मुक्त भारत के संस्थापक भुवन ऋभु ने कहा, बलात्कार व यौन शोषण के मामलों में न्याय के लिए पीड़ितों की अंतहीन प्रतीक्षा के खात्मे की दिशा में भारत अब टिपिंग प्वाइंट यानी वह बिंदु जहां एक छोटा सा बदलाव किसी बड़े परिवर्तन का वाहक बन जाता है, तक पहुंच रहा है। यह एक बेहद अहम क्षण है जब हमें अपने बच्चों व महिलाओं की सुरक्षा व संरक्षण में निवेश करना चाहिए और अगले तीन साल में सभी लंबित मामलों के निपटारे के लिए एक हजार विशेष त्वरित अदालतों के गठन से हम पीड़ितों के लिए न्याय का अधिकार सुनिश्चित कर सकते हैं। यह वो क्षण है जब पीड़ितों के लिए पुनर्वास और क्षतिपूर्ति सुनिश्चित करते हुए समाज में न्याय की प्रतिरोधक शक्ति को स्थापित करने के लिए लंबित मामलों व अपीलों के समयबद्ध निपटारे के बाबत एक नीति बनाई जाए ताकि न्याय वितरण प्रक्रिया में हाई कोर्ट व सुप्रीम कोर्ट सहित सभी अदालतों की जवाबदेही तय हो सके। बाल विवाह मुक्त भारत 200 से ज्यादा गैरसरकारी संगठनों का एक राष्ट्रव्यापी गठबंधन है जो देश के 400 से ज्यादा जिलों में बाल विवाह के खात्मे के लिए काम कर रहा है। इंडिया चाइल्ड प्रोटेक्शन और... (एनजीओ का नाम) बाल विवाह मुक्त भारत के गठबंधन सहयोगी हैं। रिपोर्ट के अनुसार अगर लंबित मामलों में एक भी नया मामला नहीं जोड़ा जाये तो भी विशेष त्वरित अदालतों में बलात्कार व पॉक्सो के 2,02,175 मामलों के निपटारे में अनुमानित तीन साल का समय लगेगा। इसके मद्देनजर तत्काल एक हजार नई विशेष त्वरित अदालतों के गठन के अलावा यह सुनिश्चित करने की सिफारिश की गई है कि मौजूदा सभी 1023 विशेष अदालतों में कामकाज सुचारू जारी रहे। रिपोर्ट में कहा गया है कि नयी वशेष अदालतों के गठन के बगैर यदि मौजूदा अदालतों में नये मामले सुनवाई के लिए आते रहे तो लंबित मामलों के निपटारे में वर्षों लग सकते हैं। आज की तारीख में देश की 1,023 विशेष त्वरित अदालतों में सिर्फ 755 अदालतों में ही कामकाज हो रहा है। रिपोर्ट में साफ तौर पर यह तथ्य उजागर हुआ है कि विशेष त्वरित अदालतें लंबित मामलों के तेजी से निपटारे में कारगर साबित हुई हैं और इनके गठन के बाद से इनमें सुनवाई के लिए आए 4,16,638 मामलों में से 2,14,463 मामलों का निपटारा हो चुका है। महाराष्ट्र (80 प्रतिशत) और पंजाब (71 प्रतिशत) मामलों के निपटारे में शीर्ष पर हैं जबकि महज दो प्रतिशत मामलों के निपटारे की दर के साथ देश के सभी राज्यों और केंद्रशासित क्षेत्रों में पश्चिम बंगाल सबसे निचले स्थान पर है। ध्यान देने वाली बात यह है कि राज्य में 123 विशेष त्वरित अदालतों के गठन की स्वीकृति है लेकिन महज तीन अदालतें ही काम कर रही हैं। सरकार ने आपराधिक कानून (संशोधन) विधेयक, 2018 में प्रस्तावित सख्त समयसीमा और सुप्रीम कोर्ट के निदेर्शों का पालन करते हुए बलात्कार व पॉक्सो मामलों के तेजी से निपटारे के लिए अगस्त 2019 में स्पेशल फास्ट ट्रैक कोर्ट्स यानी विशेष त्वरित अदालतों के गठन को मंजूरी दी थी। रिपोर्ट में यह भी सिफारिश की गयी है कि मौजूदा विशेष अदालतों में कामकाज सुचारु रूप से जारी रखने और नई विशेष अदालतों के गठन के लिए निर्भया फंड की अप्रयुक्त राशि का उपयोग किया जा सकता है। रिपोर्ट कहती है कि निर्भया फंड में 1700 करोड़ रुपए की अप्रयुक्त राशि बची हुई है जबकि इन नई अदालतों के लिए 1,302 करोड़ रुपये की ही जरूरत है। रिपोर्ट आगे कहती है कि न्याय के लिए एक पीड़ित की लड़ाई इन विशेष अदालतों में आरोपी को सजा सुनाए जाने के साथ ही खत्म नहीं हो जाती बल्कि यह तब तक जारी रहती है जब तक की ऊपरी अदालतों में लंबित अपीलों का निपटारा न हो जाये। इसलिए यह बेहद जरूरी है कि शीघ्रता से न्याय सुनिश्चित करने के लिए मुकदमों और अपीलों के निपटारे के लिए एक समयसीमा तय की जाए। इस बाबत हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में दायर अपीलों के निपटारे की समयसीमा तय करने के लिए एक नीतिगत रूपरेखा की आवश्यकता है। रिपोर्ट ने बलात्कार व पॉक्सो के मामलों में पूरे देश में अभियुक्तों की दोषसिद्धि और उनके बरी होने के आंकड़े रखने और इसे नियमित रूप से अद्यतन करने की भी सिफारिश की है। इसमें कहा गया है कि सभी विशेष अदालतों के सूचनापट पर मुकदमे के निपटारे की स्थिति भी अंकित की जाए ताकि इनके आधार पर पीड़ित या राज्य अभियुक्त की रिहाई को चुनौती दे सकें और साथ ही हाई कोर्ट व सुप्रीम कोर्ट में लंबित मामलों से संबंधित आंकड़े भी उपलब्ध हो सकें। रिपोर्ट में प्रासंगिक जानकारी इकट्ठा करने के लिए कई माध्यमिक डेटा स्रोतों का उपयोग किया गया, जिसमें राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो की रिपोर्ट, संसद में पूछे गए विभिन्न प्रश्नों और उनके उत्तर और पत्र सूचना कार्यालय से प्रकाशित दस्तावेज शामिल हैं। इसके अलावा मुकदमे के निपटारे में देरी का पीड़ित पर होने वाले असर को जानने के लिए बाल यौन शोषण के खिलाफ दुनिया की सबसे बड़ी कानूनी हस्तक्षेप पहलों में से एक एक्सेस टू जस्टिस के दस्तावेजों व आंकड़ों का भी अध्ययन किया गया। इससे संबंधित और जानकारी के लिए जितेंद्र परमार (8595950825) से संपर्क करें।

अजित डोभाल की रूस यात्रा के कई मायने
Published / 2024-09-08 20:37:17
अजित डोभाल की रूस यात्रा के कई मायने

रूस जायेंगे एनएसए अजित डोभाल, पुतिन ने शांति वार्ता के लिए भारत पर जताया भरोसा एबीएन सेंट्रल डेस्क। रूस और यूक्रेन के बीच दो साल से भी अधिक समय से युद्ध जारी है। रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने हाल में ही कहा था कि भारत, चीन और ब्राजील यूक्रेन के साथ शांति वार्ता के लिए मध्यस्थ की भूमिका निभा सकते हैं। पुतिन के बाद इटली ने भी भारत की साखा को माना था। इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी ने कहा था कि भारत यूक्रेन युद्ध को समाप्त कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। इन सबके बीच खबर आ रही है कि राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार एनएसए अजित डोभाल अगले सप्ताह रूस जायेंगे। इस दौरान वे कजान में होने वाले शिखर सम्मेलन से पहले ब्रिक्स देशों के एनएसए की बैठक में शामिल होंगे। डोभाल इस दौरान रूस-यूक्रेन संघर्ष को सुलझाने के लिए काम कर सकते हैं। उम्मीद है कि वे इस दौरान चीनी एनएसए के साथ भी मुलाकात कर सकते हैं। इस दौरान डोभाल रूसी एनएसए सहित अन्य देशों के समकक्षों से मुलाकात करेंगे।रूस-यूक्रेन के दौरा कर चुके पीएम मोदीरूस और यूक्रेन के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हाल ही में रूस गये थे। इस दौरान दोनों दोस्त साथ खुश दिखे थे। पीएम मोदी के रूस दौरे से अमेरिका और यूक्रेन सहित अन्य यूरोपीय देशों ने आपत्ति जतायी थी। पुतिन ने गले लगाकर पीएम मोदी का स्वागत किया था। द्विपक्षीय बैठक के दौरान, पीएम मोदी ने पुतिन को नसीहत दी थी कि युद्ध के बजाये शांति को बढ़ावा दिया जाये। पीएम मोदी रूस दौरे के कुछ दिनों बाद यूक्रेन की यात्रा पर भी गए थे। इस दौरान पीएम मोदी के सम्मान में रूस ने ऐलान किया था कि जब तक पीएम मोदी यूक्रेन में रहेंगे। वे हमला नहीं करेंगे।इटली ने मानी भारत की साखइटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी ने भी भारत की साख मानी है। इसके अलावा, अमेरिका ने भी कहा था कि सिर्फ भारत ही रूस को शांति प्रस्ताव के लिए मना सकता है।

तेलंगाना की गणेश प्रतिमा की देशभर में चर्चा, जानें क्यों...
Published / 2024-09-08 20:32:08
तेलंगाना की गणेश प्रतिमा की देशभर में चर्चा, जानें क्यों...

70 फीट ऊंची... लगे 66 दिन, 150 कारीगरों ने खैरताबाद में तैयार की देश की सबसे बड़ी गणेश मूर्तिएबीएन सेंट्रल डेस्क। गणेश उत्सव के लिए इस बार तेलंगाना के खैरताबाद विधानसभा क्षेत्र में देश की सबसे बड़ी गणेश मूर्ति तैयार की गयी है। इस मूर्ति का निर्माण 1954 में स्वतंत्रता सेनानी स्वर्गीय एस शंकरय्या द्वारा स्थापित गणेश उत्सव समिति, खैरताबाद द्वारा किया जा रहा है। गणेश उत्सव समिति की स्थापना के समय एक फुट ऊंची मूर्ति बनाई गई थी। इसके बाद से हर साल मूर्ति की ऊंचाई एक फीट बढ़ाई जाती रही है। इस साल समिति की 70वीं वर्षगांठ पर 70 फुट ऊंची गणेश मूर्ति बनाई गई है। इस 11 दिवसीय गणेश उत्सव में प्रतिदिन लाखों भक्त पूजा के लिए आते हैं। इस वर्ष तेलंगाना के मुख्यमंत्री के चंद्रशेखर राव भी गणेश जी की पूजा करने के लिए यहां आयेंगे। गणेश उत्सव के 11वें दिन, विशाल मूर्ति का भव्य जुलूस निकाला जायेगा और फिर हुसैन सागर झील में विसर्जित किया जायेगा। राज कुमार, शंकरय्या के परपोते ने बताया कि पहले मूर्ति बनाने में 100 दिन लगते थे, लेकिन इस बार केवल 66 दिन में मूर्ति तैयार हो गयी। इस बार की मूर्ति को बनाने में 150 कारीगरों ने काम किया और कुल 85 लाख रुपए का खर्च आया। पहले प्लास्टर आॅफ पेरिस की मूर्तियां बनायी जाती थीं, लेकिन अब मिट्टी की मूर्तियों का निर्माण किया जा रहा है। टाटा समूह के चेयरमैन एन चंद्रशेखरन ने वित्तीय वर्ष 2024 में 135 करोड़ रुपये का वेतन प्राप्त किया है। इस वेतन के साथ ही उन्होंने देश के सबसे ज्यादा वेतन पाने वाले मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) का खिताब प्राप्त किया है। एन चंद्रशेखरन को वित्तीय वर्ष 2024 में 135 करोड़ रुपए का जो वेतन मिला है, वो पिछले वर्ष की तुलना से 20 प्रतिशत अधिक है। इसके अलावा, टाटा स्टील के प्रबंध निदेशक और वैश्विक सीईओ टीवी नरेंद्रन को इस वित्तीय वर्ष में 17 करोड़ रुपये का वेतन मिला है। वहीं, टाटा समूह के मुख्य वित्तीय अधिकारी (सीएफओ) सौरभ अग्रवाल की कमाई 30 करोड़ रुपये रही है।

अमेरिका में पेशेंट एडवोकेसी एडुकेशनल अवार्ड से नवाजे गये कैंसर पीड़ित पत्रकार रवि प्रकाश
Published / 2024-09-08 12:43:20
अमेरिका में पेशेंट एडवोकेसी एडुकेशनल अवार्ड से नवाजे गये कैंसर पीड़ित पत्रकार रवि प्रकाश

अमेरिका में पेशेंट एडवोकेसी एडुकेशनल अवार्ड से नवजे गये कैंसर पीड़ित पत्रकार रवि प्रकाशएबीएन सेंट्रल डेस्क (सैन डियेगो कैलिफ़ोर्निया)। अमेरिका के तटीय शहर सैन डियेगो में 7 सितंबर से शुरू वर्ल्ड लंग कैंसर कांफ्रेंस (WCLC-2024) में वरिष्ठ पत्रकार रवि प्रकाश को पेशेंट एडवोकेसी एडुकेशनल अवार्ड दिया गया। इस साल यह पुरस्कार पाने वाले वह भारत के इकलौते व्यक्ति हैं। लंग कैंसर पर काम करने वाली दुनिया की प्रतिष्ठित संस्था इंटरनेशनल एसोसिएशन फॉर द स्टडी ऑफ लंग कैंसर (IASLC) हर साल यह पुरस्कार विश्व के उन चुनिंदा लोगों को देती है, जो अपने-अपने देश में मरीज़ों की आवाज बन चुके हैं।इस साल भारत से रवि के अलावा यह पुरस्कार दुनिया के 9 और लोगों को दिया गया है। इनमें आस्ट्रेलिया और मैक्सिको के 2-2, अमेरिका, इटली, यूके (इंग्लैंड), नाइजीरिया और थाइलैंड से 1-1 पेशेंट एडवोकेट शामिल हैं। इन दस लोगों में रवि इकलौते व्यक्ति हैं, जो खुद मरीज होकर पेशेंट एडवोकेसी करते हैं. बाकी के विजेता या तो केयरगिवर्स हैं या फिर लंग कैंसर के लिए काम करने वाली संस्थाओं के प्रतिनिधि। 7 सितंबर, शनिवार की शाम सैन डियेगो कन्वेंशन सेंटर में आयोजित भव्य समारोह में करीब 100 देशों के प्रतिनिधियों के समक्ष यह पुरस्कार दिया गया।झारखंडी बंडी में लिया रवि ने पुरस्कार यह पुरस्कार लेते वक्त पत्रकार रवि प्रकाश ने झारखंड की विशेष बंडी पहनी थी और उन्होंने सरना गमछा भी रखा था। विश्व लंग कैंसर कांफ्रेंस में 100 देशों के प्रतिनिधियों के बीच अपने परिधान से रवि ने बड़ी बारीकी से सरना धर्म कोड की वकालत वैश्विक स्तर पर कर दी। यह प्रस्ताव फ़िलहाल भारत सरकार के पास विचाराधीन है।रवि ने मीडिया से कहा, बात किसी और धर्म विशेष के प्रचार की नहीं है। हम भारत के लोग हैं और संविधान की प्रस्तावना में ही धर्मनिरपेक्ष शब्द लिखा है। लेकिन, आप 75 सालों तक आदिवासियों से उनके धर्म की पहचान नही छीन सकते। वे धर्म के कॉलम में अन्य शब्द कब तक लिखेंगे। इसलिए मैंने यह बंडी पहन कर पुरस्कार लेने का निर्णय लिया था। इसके लिए मैं जोहारग्राम का आभारी हूं।कैसी है तबीयत है रवि प्रकाश कीरवि प्रकाश पिछले पौने चार साल से लंग कैंसर के अंतिम स्टेज के मरीज हैं। पिछले जून में उनकी बीमारी बढ़ कर दिमाग में भी आ गयी। इसके बाद उनका पुराना मेडिकेशन रोक दिया गया। इसके बाद उनकी बीमारी फिर से प्रोग्रेस कर गई और वे गंभीर रुप से बीमार हैं। पिछले डेढ़ महीने से मुंबई में उनकी कार-टी सेल थेरेपी चल रही है। अभी तक उन्हें गामा-डेल्टा सेल के तीन इन्फ्यूजन दिए जा चुके हैं। अमेरिका से लौटते ही उन्हें चौथा इन्फ्यूजन दिया जाना है। रवि ने बताया कि वे अमेरिका से सीधे मुंबई लौटेंगे।कैसे मरीज़ों की आवाज बने रविरवि ने खुद कैंसर मरीज रहते हुए कैंसर के इलाज की कठिनाई, खर्च, सरकार की सुविधाओं और योजनाओं की कमियों को लेकर कई लेख लिखे। वे देश-विदेश के अलग-अलग कांफ्रेंस में यह बात उठाते रहे हैं। पिछले साल भी सार्क फ़ेडरेशन ऑफ आंकोलॉजिस्ट के वर्ल्ड कांफ्रेंस में उन्होंने काठमांडू में अपनी बात ज़ोरदार तरीके से रखी थी।उन्होंने झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से भी मिलकर कैंसर मरीज़ों की कठिनाइयों का ज़िक्र किया। उसके बाद झारखंड सरकार ने मुख्यमंत्री गंभीर बीमारी उपचार योजना की सीमा 5 से बढाकर 10 लाख करने का निर्णय लिया था। रवि इसके लिए मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की तारीफ करते हुए कहते हैं कि हेमंत जी संवेदनशील इंसान है। बात सुनते और उसपर अमल करते हैं। इसलिए मैं उनका आभारी हूँ. मैंने उनसे यह सीमा अब 15 लाख करने का अनुरोध किया है।रवि कहते हैं कि कैंसर मरीज़ों के लिए आयुष्मान योजना और प्रधानमंत्री राष्ट्रीय राहत कोष से मदद भी बड़ी राहत देती है। इसके बावजूद आयुष्मान योजना के प्रावधानों में कई तरह के सुधार की आवश्यकता है। उम्मीद है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इसमें व्यक्तिगत  रुचि लेंगे। लंग कनेक्ट इंडिया फ़ाउंडेशन रवि प्रकाश लंग कैंसर के मरीज़ों के लिए काम करने वाली भारत की प्रतिष्ठित संस्था लंग कनेक्ट इंडिया फ़ाउंडेशन के सह संस्थापक और निदेशक भी हैं।टाटा मेमोरियल हॉस्पिटल मुंबई के प्रोफ़ेसर डॉक्टर कुमार प्रभाष की पहल पर स्थापित लंग कनेक्ट में रवि और संजीव शर्मा निदेशक के तौर पर काम करते हैं। इस सपोर्ट ग्रुप ने अभी तक 15 हजार से भी अधिक लंग कैंसर मरीज़ों की सहायता की है। इसके अलावा रवि कैंसर वाला कैमरा का आयोजन भी करते हैं, जिसकी काफी चर्चा होती रही है।

गुना : बेनियम कानून की निकल रही झांकियां
Published / 2024-09-07 20:57:59
गुना : बेनियम कानून की निकल रही झांकियां

गुना जिले के कुंभराज के वार्ड नंबर 8 में गणेश झांकी में नियमों का उल्लंघन, बिना आयोजककर्ता से झांकी लग रही, कुंभराज पुलिस बेबस कुंभराज से कमल सिंह लोधा की रिपोर्टएबीएन सेंट्रल डेस्क (गुना)। जिले के तहसील कुंभराज में गणेश जी की झांकियां लगना शुरू हो चुकी है। लेकिन झांकियों के आयोजनकर्ताओं का पता ही नहीं है। बिना आयोजककर्ता के गणेश जी की झांकियां स्थापित  की जा रही है। ताजा मामला 6 सितंबर का है। कुंभराज के वार्ड नंबर 8 में गणेश जी की झांकी लग रही है हमारी टीम ने जब गणेश जी झांकी लगाने वालो से पूछा तो बताया गया।इस गणेश जी झांकी का कोई भी आयोजककर्ता नहीं है बिना आयोजककर्ता के झांकी लगायी जायेगी। कोई कुछ नहीं कर सकता अब सवाल यह है बिना आयोजककर्ता के झांकी लगाने वालों पर पुलिस कैसे कार्रवाई करेगी, जबकि कुंभराज पुलिस ने 10 नियमों का पालन करने के कहा है जो कुछ इस प्रकार है।समस्त गणेश प्रतिमाओं के आयोजकों से यह अपेक्षा है कि गणेश प्रतिमा/झांकी की स्थापना परंपरागत स्थलों पर ही हो किसी अन्य नवीन या विवादित स्थल पर प्रतिमा/झांकी की स्थापना नहीं की जाये।आयोजकों से अपेक्षा है कि प्रतिमा स्थल एवं चल समारोह के दौरान प्रयोग होने वाले ध्वनि विस्तारक यंत्रों के संबंध में माननीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा निर्धारित मापदण्डों के अनुसार ही इनका प्रयोग करें एवं निर्धारित समय अनुसार ही इनका उपयोग करें।कई बार ऐसा देखने में आया है कि आयोजन स्थल पर प्रकाश व्यवस्था हेतु बिजली के खुले तारों का प्रयोग किया जाता है जिससे शॉर्ट सर्किट होने अथवा किसी को किसी भी दर्शनार्थी को करेंट लगने जैसी अप्रिय घटना को रोकने हेतु आयोजकों से अपेक्षा है कि बिजली उपकरणों का कुशल मैकेनिक से परीक्षण कराया जावे एवं किसी भी स्थिति में खुले तारों का प्रयोग नहीं किया जाये।  आयोजकों से अपेक्षा है कि गणेश उत्सव के दौरान तेज आवाज में आपत्तिजनक व उत्तेजक गाने न बजायें  आयोजकों से अपेक्षा है कि किसी भी स्थिति में स्थापित होने वाली प्रतिमाओं की खुले में स्थापना न की जाये एवं प्रतिमाओं की सुरक्षा हेतु पर्याप्त टेंट एवं बेरिकेटिंग की व्यवस्था की जाये। ऐसे और भी पांच नियम है जिनको झांकी के आयोजनकर्ता को पालन करना है ।अब सवाल यह है जब गणेश जी की झांकी का आयोजककर्ता ही नहीं होगा तो नियमों का पालन कौन करेगा ऐसे में मोहल्ले के  लोग कोई भी नियमों का उल्लंघन कर सकता है जब नियमों का उल्लगन होगा तो कुंभराज पुलिस कैसे कार्रवाई करेगी इस संबंध में कुंभराज थाना प्रभारी नीरज राणा से फोन पर संपर्क किया तो उन्होंने फोन रिसीव नहीं किया।वहीं चाचौड़ा एसडीओपी दिव्या राजावत से इस संबंध में बात की गई तो बताया गया मे कुंभराज पुलिस को बता देती हूं वार्ड नंबर 8 जाकर किसी न किसी को कोशिश करेंगे जिम्मेदारी की और जो डीजे हैं उसका भी बताएंगे 10 बजे के बाद डीजे नही बजाएंगे अब देखना होगा आने वाले दिनों में कुंभराज में गणेश जी की झांकियां पर नियमों का उल्लंघन करने पर कैसे कार्रवाई करेगी।

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