हरियाणा में जीत की शानदार हैट्रिक, इन 4 पॉइंट से समझिए क्या हैं भाजपा के लिए चुनाव नतीजों के मायने हरियाणा चुनावों में भाजपा की सफल रणनीति ने तीसरी बार सत्ता में पहुंचाया, जबकि जम्मू-कश्मीर में लोकल लीडरशिप की कमी और कार्यकर्ताओं की नाराजगी ने उसकी उम्मीदों को धक्का पहुंचाया। अनुछेद 370 हटाने के बावजूद भाजपा का प्रदर्शन जम्मू में ही सीमित रहा एबीएन सेंट्रल डेस्क। भाजपा ने हरियाणा में जीत दर्ज कर नया रेकॉर्ड बनाया है। पहली बार लगातार किसी पार्टी की तीसरी बार सरकार बनी है। वहीं जम्मू-कश्मीर में भाजा का प्रदर्शन उसकी उम्मीद के मुताबिक नहीं रहा। जम्मू रीजन में भाजपा पहले भी लगभग इतनी सीटें जीत चुकी है और इस चुनाव में भाजपा ने कुछ खास नहीं किया। 2014 में जब जम्मू रीजन में 37 सीटें थी तब भाजपा इसमें से 25 सीटें जीती थी। अब जम्मू रीजन में 43 सीटों में से 29 सीटें जीती है। कश्मीर रीजन में पहले की तरह इस बार भी भाजपा का खाता नहीं खुला है। हरियाणा और जम्मू-कश्मीर के नतीजों में भाजपा के लिए क्या संदेश है और इसके क्या मायने हैं : 1. लोकल लीडरशिप अहम इन नतीजों ने फिर दिखाया है कि विधानसभा के चुनाव जीतने के लिए केंद्रीय नेतृत्व ही काफी नहीं है बल्कि लोकल लीडरशिप भी अहम है। हरियाणा में भाजपा ने सीएम नायब सिंह सैनी का चेहरा आगे कर चुनाव लड़ा। एंटी इनकंबेंसी से बचने के लिए भाजपा ने पूर्व सीएम मनोहर लाल खट्टर को हटाया और सीएम हटाने का बीजेपी का ये फॉर्मूला गुजरात, उत्तराखंड, त्रिपुरा, कर्नाटक के बाद हरियाणा में भी सफल रहा। जम्मू-कश्मीर में भाजपा के पास कोई लोकल लीडरशिप नहीं है जिसके चेहरे पर भाजपा चुनाव लड़ सकती। वहां के चुनाव में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह ही पोस्टर बॉय थे। 2. तब तक हार नहीं जब तक नतीजे न आयें हरियाणा के नतीजों ने ये साबित किया है कि सही रणनीति और बूथ मैनेजेमेंट से हारी बाजी को भी जीता जा सकता है। भाजपा ने हरियाणा में यही किया। बूथ मैनेजमेंट पर फोकस रहा। कार्यकर्ता जो निराश थे उनमें पार्टी ने जोश भरा। हरियाणा के नतीजों से भाजपा कार्यकर्ताओं का आत्मविश्वास बढ़ा है। जल्द ही महाराष्ट्र और झारखंड के चुनाव का ऐलान हो जायेगा। हरियाणा की जीत का पॉजिटिव असर इन दो राज्यों के चुनावी कैंपेन में दिखेगा। फिर अगले साल दिल्ली में विधानसभा चुनाव हैं और पड़ोसी राज्य में जीत का फायदा भाजपा दिल्ली में भी माहौल बनाने के लिए कर सकती है। 3. कार्यकर्ताओं नाराज तो मना लें जहां हरियाणा में कार्यकर्ताओं में जोश भरकर भाजपा जीत की राह पर आगे बढ़ी वही जम्मू-कश्मीर में कार्यकर्ताओं की नाराजगी ही भाजपा पर भारी पड़ी। जम्मू रीजन में पार्टी कार्यकर्ता इसलिए नाराज थे क्योंकि पार्टी ने दूसरी पार्टी से आये लोगों को तव्वजो दी और शुरू से पार्टी के साथ खड़े कार्यकर्ताओं को दरकिनार किया। वहीं कुछ पार्टी नेता और उम्मीदवार को लेकर ही पार्टी कार्यकर्ता नाराज थे और उन्होंने पार्टी के इन उम्मीदवारों के हराने का काम किया। जम्मू-कश्मीर की नौशेरा सीट पर पार्टी नेता और उम्मीदवार रवींद्र रैना के खिलाफ जबर्दस्त नाराजगी थी। वह नतीजों में भी दिखी। 4. आर्टिकल 370 भले हटा, पर जम्मू-कश्मीर बदला नहीं भाजपा ने जम्मू कश्मीर में अपना पूरा चुनाव आर्टिकल 370 हटाने के बाद हुए फायदे पर केंद्रित किया था। भाजपा लगातार दावा कर रही थी कि जम्मू-कश्मीर में जमकर विकास हुआ है और शांति आयी है। लेकिन जम्मू-कश्मीर के नतीजों ने दिखाया कि लोगों ने इसे नहीं माना। अब भी जम्मू-कश्मीर में भाजपा की परफॉर्मेंस लगभग वही है जैसी 10 साल पहले थी। साथ ही भाजपा जम्मू में हिंदू बहुल सीटें ही जीतती रही है और अब भी वही हुआ। जहां मिक्स्ड आबादी है वहां अब भी भाजपा के लिए चुनाव जीतने में मुश्किल हो रही है। भाजपा अभी मुस्लिम आबादी का भरोसा और दिल नहीं जीत पायी है।
एबीएन सेंट्रल डेस्क (नयी दिल्ली)। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा है कि युद्धों में निरंतर नयी प्रौद्योगिकी के इस्तेमाल को देखते हुए भारतीय रक्षा उद्योग को भी हथियारों को बनाने में गैर पारंपरिक और दोहरे इस्तेमाल तथा असैन्य प्रौद्योगिकियों के इस्तेमाल की दिशा में कदम उठाने होंगे। श्री सिंह ने सोमवार को यहां एक कार्यक्रम में कुछ देशों के बीच चल रहे युद्धों का उल्लेख करते हुए कहा कि समय की जरूरत है कि भारत भी किसी से पीछे न रहे। उन्होंने कहा, आज हम तरह-तरह के युद्धों, और युद्धों की संभावनाओं के बीच जी रहे हैं। इन युद्धों में लगातार नयी-नयी प्रौद्योगिकी का समावेश हुए चला जा रहा है। इनमें न सिर्फ पारंपरिक हथियारों और गोला बारूद का इस्तेमाल हो रहा है, बल्कि कई प्रकार के दोहरे इस्तेमाल या असैन्य वस्तुओं तथा प्रौद्योगिकी का इस्तेमाल किया जा रहा है। उन्हें वैपनाइज किया जा रहा है। ऐसे में हमें इस प्रकार की प्रौद्योगिकी को गहराई से समझना होगा। हमें देखना होगा कि किस प्रकार से इन प्रौद्योगिकियों का कल्पना के आधार पर इस्तेमाल हम अपनी रक्षा के लिए कर सकते हैं। मैं यहां, सिर्फ दूसरे युद्ध ग्रसित पक्षों के अनुप्रयोगों की नकल की बात नहीं कर रहा हूं। मैं इससे आगे बढ़ते हुए, उन प्रणालियों या ऐप की ओर आपका ध्यान ले जाना चाहूंगा, जो बिल्कुल नयी हों, और सिर्फ हमारी हों। उन्होंने कहा कि हमें आई डैक्स और इस तरह की योजनाओं तथा चुनौतियों के समाधान से आगे बढ़ते हुए, ऐसी प्रौद्योगिकी ऐसे नवाचार ले आयें जो अब तक की जरूरतों से भी कहीं आगे की चीज हों, और वे हमारी जरूरत बन जाये। रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता के लिए सभी हितधारकों के सहयोग का आह्वान करते हुए उन्होंने कहा, आत्मनिर्भरता जैसा बड़ा काम केवल अकेले सरकार अपने दम पर नहीं कर सकती। बल्कि इसके लिए हमें इससे जुड़े हुए सभी हितधारकों का साथ जरूरी है। उन्होंने कहा कि अभी सभी हितधारक सरकार के साथ कदम से कदम मिलाकर चले हैं और उन्हें विश्वास है कि यह संबंध आगे और मजबूत होगा तथा भारत में रक्षा इकोसिस्टम सबसे मजबूत तथा आधुनिक बनेगा। रक्षा मंत्री ने कहा कि रक्षा क्षेत्र को मजबूत बनाने के लिए आज अनेक पहल और शुरूआत की गयी हैं। उन्होंने कहा कि इसी प्रकार परीक्षण और जांच के लिए पोर्टल का शुरू होना भी नवाचार को बढ़ावा देने की दिशा में महत्त्वपूर्ण कदम है। उन्होंने आश्वस्त किया कि सरकार रक्षा क्षेत्र की जरूरतों को पूरा करने के लिए हर प्रयास करेगी। उन्होंने कहा, भारत सरकार हमेशा आपके साथ खड़ी है। जरूरत है तो आप सभी के और मजबूती के साथ आगे आने की।
मेडिसिन के नोबेल से नवाजे गये विक्टर एंब्रोस और गैरी रुवकुन, माइक्रो आरएनए की खोज के लिए मिला अवॉर्ड एबीएन सेंट्रल डेस्क। चिकित्सा के क्षेत्र में नोबेल पुरस्कार का ऐलान हो चुका है। इस साल विक्टर एंब्रोस और गैरी रुवकुन चिकित्सा के नोबेल पुरस्कार से नवाजे गये हैं। इन दोनों ही दिग्गजों ने मइक्रो फठअ की खोज की थी। नोबेल असेंबली ने कहा कि दोनों वैज्ञानिकों की खोज जीवों के विकास और कार्य करने के तरीके के लिए मौलिक रूप से महत्वपूर्ण साबित हो रही है। विक्टर एंब्रोस और गैरी रुवकुन को चिकित्सा में नोबेल पुरस्कार माइक्रो आरएनए की खोज के लिए दिया गया। यह जो एक छोटा अणु है जो जीन गतिविधि को विनियमित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। जानें क्यों अहम है माइक्रो आरएनए की खोज हालांकि हमारे शरीर की सभी कोशिकाओं में समान जीन होते हैं, लेकिन मांसपेशी और तंत्रिका जैसी कोशिकाएं अलग-अलग कार्य करती हैं। यह जीन विनियमन के जरिए संभव होता है। जिससे कोशिकाएं केवल वही जीन सक्रिय करती हैं जिनकी उन्हें जरूरत होती है। एंब्रोस और रुवकुन की माइक्रो आरएनए की खोज ने इस प्रक्रिया का एक नया तरीका बताया है। पिछले साल मेडिसिन में किसे मिला था नोबेल पुरस्कार उनकी खोज ने यह समझने में मदद की है कि जीव, विशेषकर इंसान, कैसे विकसित होते हैं और कार्य करते हैं। पिछले साल चिकित्सा के क्षेत्र में नोबेल पुरस्कार कातालिन कारिको और ड्रू वाइसमैन को मिला था। इन दोनों ने कोविड-19 के खिलाफ वैक्सीन विकसित करने में अहम योगदान दिया था। लगभग 8.3 करोड़ का नकद पुरस्कारइस पुरस्कार में 11 मिलियन स्वीडिश क्रोनर (लगभग 8.3 करोड़) का नकद पुरस्कार शामिल है, जो स्वीडिश आविष्कारक अल्फ्रेड नोबेल की विरासत का हिस्सा है। सभी पुरस्कार विजेता 10 दिसंबर को अपने पुरस्कार प्राप्त करेंगे। इसी दिन नोबेल की पुण्यतिथि भी है।
दिल्ली हाई कोर्ट बार एसोसिएशन ने इंडिया चाइल्ड प्रोटेक्शन की कार्यकारी निदेशक संपूर्णा बेहुरा को फाइट 4 जस्टिस पुरस्कार से सम्मानित कियाएबीएन सेंट्रल डेस्क। दिल्ली हाई कोर्ट बार एसोसिएशन ने नई दिल्ली में एक समारोह में देश में बच्चों के अधिकारों के संरक्षण के लिए काम कर रहे गैरसरकारी संगठन इंडिया चाइल्ड प्रोटेक्शन की कार्यकारी निदेशक डॉ संपूर्णा बेहुरा को 2024 के फाइट 4 जस्टिस पुरस्कार से सम्मानित किया। बेहुरा को यह पुरस्कार सुप्रीम कोर्ट और विभिन्न उच्च न्यायालयों में दायर की गई उनकी जनहित याचिकाओं के लिए प्रदान किया गया जिसके नतीजे में बच्चों के अधिकारों की सुरक्षा को लेकर कानूनी परिदृश्य में बेहद उल्लेखनीय बदलाव आये। बाल अधिकार श्रेणी में यह पुरस्कार उन्हें सुप्रीम कोर्ट के न्यायमूर्ति एन कोटिश्वर सिंह ने प्रदान किया।बेहुरा ने किशोर न्याय कानून 2005 पर अमल में प्रणालीगत खामियों पर केंद्रित जनहित याचिका दायर की, जिसके नतीजे में बाल सुरक्षा कानूनों में उल्लेखनीय सुधार हुए और पूरे देश में व्यवस्थागत तंत्र को मजबूत किया गया। इस बात पर जोर देते हुए कि यह पुरस्कार समाज को पूरे देश में बच्चों की सुरक्षा के लिए प्रभावी बदलावों को जारी रखने के संकल्प को मजबूती देगा, इंडिया चाइल्ड प्रोटेक्शन की कार्यकारी निदेशक संपूर्णा बेहुरा ने कहा, यह सम्मान एक ऐसे मंच की स्थापना में मदद करेगा जहां लोग एक साथ और एक सुर में शोषण और उत्पीड़न से बच्चों की सुरक्षा के लिए अपनी सामूहिक आवाज बुलंद करते हुए एक ऐसे परिवेश और पारिस्थितिकी का निर्माण करेंगे जहां बच्चों की सुरक्षा और संरक्षण सुनिश्चित हो सके। इंडिया चाइल्ड प्रोटेक्शन देश के 400 से भी ज्यादा जिलों में बाल अधिकारों की सुरक्षा के लिए काम कर रहे 200 गैरसरकारी संगठनों के गठबंधन जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रेन एलायंस के मुख्य सहयोगियों में से एक है। गठबंधन के सक्रिय सदस्य के तौर पर मूलत: ओड़ीशा की रहने वाली डॉ संपूर्णा बेहुरा ने देश में बाल अधिकारों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के उद्देश्य से कई जनहित याचिकाएं दायर की हैं।बेहुरा को मिले सम्मान का स्वागत करते हुए जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रेन एलायंस के संस्थापक भुवन ऋभु ने कहा, डॉ बेहुरा जैसे लोग जो बिना किसी आत्मप्रचार के चुपचाप दृढ़ता और प्रतिबद्धता के साथ बच्चों की न्याय तक पहुंच सुनिश्चित करने के लिए लगातार काम कर रहे हैं, देश की युवा पीढ़ी के कार्यकर्ताओं के लिए प्रेरणा हैं। व्यवस्थागत सुधारों के लिए सुप्रीम कोर्ट से लेकर विभिन्न उच्च न्यायालयों में दायर उनकी जनहित याचिकाएं देश में बच्चों की ट्रैफिकिंग, बच्चों से बलात्कार, बाल यौन शोषण, बाल विवाह और बाल श्रम में उल्लेखनीय कमी लाने का औजार साबित हुई हैं। फाइट फॉर जस्टिस अवार्ड देश के उन आम नागरिकों की पहचान और उनका सम्मान करता है जिन्होंने तमाम बाधाओं के बावजूद सुप्रीम कोर्ट में कानूनी लड़ाई लड़कर जीत हासिल की और जिसके नतीजे में ऐतिहासिक फैसले आए जिनका देश और समाज पर दूरगामी असर हुआ। इस खबर से संबंधित और जानकारी के लिए जितेंद्र परमार (8595950825) से संपर्क करें।
जयशंकर ने विशेषज्ञों से किया विचार-विमर्श, दोनों देशों को दी सलाहएबीएन सेंट्रल डेस्क। मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच मंगलवार की रात ईरान ने इजरायल पर एक बड़े मिसाइल हमले को अंजाम दिया। इस घटना के बाद भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने विशेषज्ञों के साथ विचार-विमर्श किया। उन्होंने इस हमले पर गंभीर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि इजरायल को आत्मरक्षा का अधिकार है, लेकिन संघर्ष को और भड़कने से रोकना भी जरूरी है। भारत के विदेश मंत्रालय ने एक बयान जारी कर कहा है कि सभी संबंधित पक्षों को बातचीत और कूटनीति के माध्यम से मुद्दों को सुलझाना चाहिए। विदेश मंत्रालय ने कहा कि पश्चिम एशिया में बिगड़ती सुरक्षा स्थिति पर भारत गहरी चिंता जता रहा है और उसने सभी पक्षों से संयम बरतने और नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने का आह्वान किया है। भारत ने यह भी कहा कि संघर्ष के क्षेत्रीय आयामों को फैलने से रोकने की जरूरत है, और बातचीत के जरिए समाधान तलाशा जाना चाहिए। ईरान ने इजरायल पर एक साथ 150 बैलिस्टिक मिसाइलें दागीं, जो हाल के इतिहास में सबसे बड़ा हमला माना जा रहा है। ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड्स के अनुसार, इस हमले में पहली बार हाइपरसोनिक फत्ताह मिसाइलों का इस्तेमाल किया गया। बताया गया कि 90% मिसाइलें इजरायल के लक्ष्यों को भेदने में सफल रहीं। हालांकि, इजरायल और अमेरिका के नेतृत्व वाले रक्षात्मक गठबंधन ने इनमें से अधिकांश मिसाइलों को नष्ट कर दिया। इजरायल में अलार्म बजने के बाद लोग महफूज स्थानों पर शरण लेने लगे। यरुशलम और जॉर्डन नदी घाटी में विस्फोट की तेज आवाजें सुनाई दीं। इजरायली अधिकारियों ने कहा कि इस हमले में अब तक किसी के गंभीर रूप से घायल होने की सूचना नहीं है, हालांकि पश्चिमी तट में एक व्यक्ति की मौत हुई है। बता दें कि मध्य पूर्व में पिछले एक साल से उथल-पुथल जारी है, जब हमास ने इजरायल पर अभूतपूर्व हमला किया था। इस संघर्ष में अब तक 1200 से अधिक लोग मारे जा चुके हैं और 200 से अधिक लोगों को बंधक बनाया गया है। गाजा में युद्ध के कारण अब तक 41,000 से अधिक लोगों की जान जा चुकी है, जिससे सुरक्षा स्थिति और अधिक गंभीर हो गयी है। भारत ने सभी पक्षों से शांति और बातचीत के माध्यम से समाधान निकालने का आग्रह करते हुए कहा है कि संघर्ष को बड़ा रूप लेने से रोकना आवश्यक है।
लोकसभा अध्यक्ष ओम बिड़ला ने सुखदेव भगत के कार्यों से प्रभावित होकर उन्हें प्रभावी विभाग का बनाया सदस्यराहुल गांधी ने सुखदेव भगत को संसद में दिए गए भाषण के लिए पत्र लिख कर दिये थे बधाईटीम एबीएन, लोहरदगा/ रांची। लोहरदगा लोकसभा से पहली बार सुखदेव भगत सांसद बनने के बाद पहले ही संसद सत्र में उन्होंने अपने व्यवहार अनुशासन से संसद के सभी सदस्यों में अपनी अमित छाप छोड़ने का काम किया है। इसके साथ ही प्रतिपक्ष के नेता राहुल गांधी ने सुखदेव भगत को संसद में प्रखर रूप से जन समस्याओं को रखने एवं उनके द्वारा संसद में दिए गए भाषण के लिए राहुल गांधी ने पत्र लिखकर सुखदेव भगत को बधाई दिए थे। लोकसभा के अध्यक्ष ओम बिड़ला सुखदेव भगत के कार्यों से प्रभावित होकर उन्हें प्रभावी विभाग कोयला, इस्पात एवं खनन मंत्रालय से जुड़ी लोकसभा का स्थायी समिति का सदस्य मनोनीत किया है। झारखंड एक खनिज संपदा से भरा हुआ राज्य है। सुखदेव भगत को कोयला, इस्पात एवं खनन मंत्रालय के लोकसभा के स्थायी सदस्य बनने पर झारखंड को काफी फायदा होगा।
राजमाता विजया राजे सिंधिया की बेटी हैं वसुंधरा वसुंधरा राजे राजस्थान की दो बार रहीं सीएमवसुंधरा राजे 5 बार लोकसभा सांसद भी बनीं मोदी-शाह ने खेला बड़ा दांव, जानें भाजपा में क्या पक रहा है राजस्थान की पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे भाजपा की राष्ट्रीय अध्यक्ष बन सकती हैं। संघ की पहली पसंद वसुंधरा राजे हैं, जबकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह शिवराज सिंह चौहान का समर्थन कर रहे हैं। वसुंधरा राजे फिलहाल भाजपा की राष्ट्रीय उपाध्यक्ष हैं और दो बार राजस्थान की मुख्यमंत्री रह चुकी हैं एबीएन सेंट्रल डेस्क (जयपुर/कोटा)। भाजपा के केंद्रीय संगठन में राजस्थान की हाडौती अंचल के नाम का डंका बजने के संकेत मिल रहे हैं। माना जा रहा है कि राजस्थान की दो बार मुख्यमंत्री रह चुकीं वसुंधरा राजे भाजपा की राष्ट्रीय अध्यक्ष बन सकती हैं। इसे लेकर राजस्थान की सियासत में हलचल तेज है। बताया जा रहा है कि वसुंधरा राजे का नाम राष्ट्रीय अध्यक्ष के लिए संघ की पहली पसंद बना हुआ है। इस खबर के बाहर आने के बाद से वसुंधरा राजे खेमे में खुशी की लहर दौड़ पड़ी है। राजे को सोशल मीडिया पर मिलने लगी अग्रिम बधाइयां राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाने की अग्रिम बधाइयां भी वसुंधरा राजे को सोशल मीडिया पर मिलने लगी है। वसुंधरा राजे के अलावा संघ की तरफ से संजय जोशी का नाम रखा गया था। हालांकि यह बताया जा रहा है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह की तरफ से शिवराज सिंह चौहान के नाम को आगे किया गया है। लेकिन संघ सिर्फ वसुंधरा राजे के नाम को राष्ट्रीय अध्यक्ष पद के लिए सबसे उपयुक्त नाम मान रहा है। पार्टी की ओर से फैसला क्या होगा? खैर अभी यह देखने वाली बात है। एक नजर में वसुंधरा राजे वसुंधरा राजे राजस्थान की दो बार मुख्यमंत्री रही चुकी हैं। साल 2003 से 2008 तक और साल 2013 से 2018 तक वह राजस्थान की सीएम रहीं। केंद्र में भी वसुंधरा राजे ने महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभायी हैं, फिलहाल वह बीजेपी की राष्ट्रीय उपाध्यक्ष पद पर हैं। ऐसे में अगर उन्हें राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाया जाता है तो वसुंधरा राजे का यहां पर प्रमोशन होगा। राष्ट्रीय उपाध्यक्ष से वह अध्यक्ष बनेंगी। वसुंधरा राजे राजस्थान की दो बार मुख्यमंत्री रही हैं।झालावाड़ जिले की झालरापाटन विधानसभा सीट से विधायक निर्वाचित होती आ रही हैं। साल 2023 में भी वह विधायक निर्वाचित हुई हैं। वसुंधरा राजे 5 बार लोकसभा सांसद बन चुकी हैं। 1985 से वह सक्रिय राजनीति में हैं। बता दें कि 8 मार्च 1953 का वसुंधरा राजे का जन्म था। वह राजमाता विजया राजे सिंधिया की वह बेटी हैं। उनके बेटे दुष्यंत सिंह झालावाड़-बारां लोकसभा सीट से मौजूदा सांसद हैं।
खत्म हुआ इंतजार, इस तारीख को खाते में आ जायेगी पीएम किसान की 18वीं किस्तयोजना के नियमों के अनुसार पीएम किसान का लाभ केवल उन किसानों को मिलेगा जिनका ई-केवाईसी और भूमि का वेरिफिकेशन पूरा होगाएबीएन सेंट्रल डेस्क। पीएम किसान सम्मान निधि के तहत आर्थिक लाभ प्राप्त करने वाले देश के करोड़ों किसानों का इंतजार अब खत्म हो गया है। केंद्र सरकार ने पीएम किसान की 18वीं किस्त की तारीख का ऐलान कर दिया है। पीएम किसान की आफिशियल वेबसाइट पर दी गयी जानकारी के मुताबिक, 5 अक्टूबर को किसानों के बैंक अकाउंट में 18वीं किस्त की राशि जमा कर दी जायेगी। पीएम किसान की 17वीं किस्त 18 जून को जारी की गयी थी। पीएम किसान की 18वीं किस्त पाने के लिए ई-केवाईसी करवाना न भूलें अगर आप भी हर चार महीने में एक बार मिलने वाली पीएम किसान सम्मान निधि योजना का लाभ उठाते हैं तो ई-केवाईसी और अपनी भूमि का वेरिफिकेशन करवाना न भूलें। दरअसल, योजना के नियमों के अनुसार पीएम किसान का लाभ केवल उन किसानों को मिलेगा जिनका ई-केवाईसी और भूमि का वेरिफिकेशन पूरा होगा।
झारखंडियों का 1 लाख 36 करोड़ दे दीजिये, हेमंत सोरेन ने नरेंद्र मोदी को लिखा पत्रटीम एबीएन, रांची। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने पीएम नरेंद्र मोदी को पत्र लिखा है। उन्होंने पत्र में लिखा कि झारखंडियों का हक मांगो तो जेल डाल देते हैं, पर अपने हक के लिए हर कुबार्नी मंजूर है। हम बीजेपी के सहयोगी राज्यों की तरह स्पेशल स्टेटस नहीं मांग रहे, ना हीं हम कुछ राज्यों की तरह केंद्रीय बजट का बड़ा हिस्सा मांग रहे हैं। हमें बस हमारा हक दे दीजिए, यही मांग है। उन्होंने आगे लिखा कि हमारी मांग सिर्फ न्याय की है, विशेषाधिकार की नहीं। झारखंड के लोगों ने अपने राज्य के लिए लंबा संघर्ष किया है, और अब हम चाहते हैं कि हमारे संसाधनों और अधिकारों का उचित उपयोग हो। हम अपने बकाये के 1 लाख 36 हजार करोड़ से झारखंड को विकास के नए पथ पर ले जाएंगे- ऐसा विकास जो हमारे पर्यावरण, आदिवासी/मूलवासी और हर एक झारखंडी समुदायों के हितों की रक्षा करे।मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने पीएम को लिखा कि हम शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार करेंगे, ताकि हमारे बच्चों का भविष्य उज्ज्वल हो सके। हम अपनी भाषा और संस्कृति का और बेहतर संरक्षण करेंगे, ताकि हमारी पहचान बनी रहे साथ ही हम हमारे युवाओं को रोजगार के नए आयाम उपलब्ध करायेंगे और उसके आभाव में उन्हें उचित भत्ता देंगे। पीएम को लिखे पत्र में सीएम हेमंत सोरेन ने कहा कि हमारे हक पर, हमारे पैसों पर केंद्र सरकार जल्द फैसला ले और झारखंड के विकास में बाधा न बने, बल्कि सहयोगी बने। हम अपने अधिकारों के लिए लड़ेंगे, चाहे इसके लिए कितनी भी कठिनाइयों का सामना करना पड़े।
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