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यूपी में उपचुनाव नहीं लड़ेगी लोजपा (रामविलास)
Published / 2024-10-20 22:48:59
यूपी में उपचुनाव नहीं लड़ेगी लोजपा (रामविलास)

हो गया बड़ा खेलाचुनाव लड़ने को लेकर केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान का बड़ा ऐलानएबीएन सेंट्रल डेस्क। केंद्रीय मंत्री और लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) पार्टी नेता चिराग पासवान ने शनिवार को बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी उत्तर प्रदेश में उपचुनाव नहीं लड़ने जा रही है। उन्होंने आगे स्पष्ट करते हुए कहा कि उनकी पार्टी केवल झारखंड में उपचुनाव लड़ेगी।मीडिया को दिये बयान में चिराग पासवान ने कहा कि उत्तर प्रदेश उपचुनाव में लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) पार्टी भारतीय जनता पार्टी का सपोर्ट करेगी। बता दें यूपी की कुल 10 सीटों पर उपचुनाव होना है।बिहार में जहरीली शराब से मौत के मामले में चिराग पासवान ने कहा कि बिहार सरकार लगातार इस मुद्दे पर गंभीरता से कार्रवाई कर रही है। उन्होंने कहा कि शराब तस्करी करने वाले लोगों को छोड़ा नहीं जायेगा, सभी आरोपियों पर कड़ी कार्रवाई होगी। केंद्रीय मंत्री ने बताया कि शराब तस्करी की रोकथाम के लिए राज्य में एक स्पेशल टीम बनाई गई है। जिसमें पुलिस व स्थानीय प्रशासन दोनों के कर्मचारी शामिल हैं। बाबा सिद्दीकी हत्याकांड पर केंद्रीय मंत्री ने कहा कि ये बेहद संवेदनशील और गंभीर चिंता का विषय है।उनका कहना था कि बाबा सिद्दीकी मेरी श्रद्धांजलि है,  मेरे उनसे व्यक्तिगत संबंध थे। वहीं, सलमान खान की सुरक्षा पर उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार और राज्य सरकार इस मुद्दे पर गंभीरता से काम कर रही है। राज्य में सभी लोगों की सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम किये गये हैं।

कुंभराज के ग्राम आंखखेडी में हुआ सत्संग, बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे
Published / 2024-10-20 21:46:28
कुंभराज के ग्राम आंखखेडी में हुआ सत्संग, बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे

एबीएन न्यूज नेटवर्क, गुना/कुंभराज। आज दिनांक 20/10/2024 दिन रविवार को गुना जिले के तहसील कुंभराज के ग्राम आंखखेड़ी में संत रामपाल जी महाराज का एलईडी टीवी के माध्यम से सत्संग हुआ, जिसमें उन्होंने मनुष्य जीवन के महत्व और मोक्ष के मार्ग पर अपने विचार साझा किये। संत रामपाल जी ने अपने प्रवचनों में बताया कि मनुष्य अपने शरीर और संपत्ति को सबसे प्रिय मानता है, लेकिन ये सब मृत्यु के समय साथ नहीं जाते। संसार एक स्वप्न के समान है और जब यह स्वप्न टूटता है, तब हमें अहसास होता है कि हमने अपना अनमोल जीवन व्यर्थ में बर्बाद कर दिया। संत जी ने समझाया कि संकट के समय में मनुष्य सच्चे भगवान को याद करता है, और वही सच्चे भगवान, परमात्मा कबीर हैं, जिनका वर्णन चारों वेद, कुरान, बाइबिल और गुरु ग्रंथ साहिब में भी मिलता है। संत रामपाल जी ने समाज में फैली बुराइयों और कुरीतियों को दूर करने पर जोर दिया। उन्होंने नशाखोरी, दहेज प्रथा, भ्रूण हत्या और रिश्वतखोरी जैसी समस्याओं से छुटकारा पाने के लिए सतभक्ति का मार्ग अपनाने की प्रेरणा दी। मौके पर कई प्रेरणादायक कथाओं का भी उल्लेख किया गया, जिससे प्रेरित होकर अनेक श्रद्धालुओं ने संत रामपाल जी महाराज से नाम दीक्षा ग्रहण की और जीवन भर सच्चे भगवान की शास्त्रानुकूल भक्ति करने का प्रण लिया। सत्संग में उपस्थित सेवादार करण दास, मुकेश दास, गुलाब दास, किशनदास, अरुण दास आदि मौजूद रहे।

वायनाड में प्रियंका को टक्कर देंगे नव्या हरिदास
Published / 2024-10-20 20:40:30
वायनाड में प्रियंका को टक्कर देंगे नव्या हरिदास

भाजपा ने उपचुनाव के लिए 25 उम्मीदवारों का किया ऐलानजानें वायनाड से प्रियंका गांधी के खिलाफ किसे बनाया प्रत्याशीएबीएन सेंट्रल डेस्क। भारतीय जनता पार्टी ने झारखंड के उम्मदीवारों के साथ-साथ 24 विधानसभा और 1 लोकसभा सीट पर उपचुनाव के लिए 25 उम्मीदवारों की लिस्ट जारी की है। भाजपा ने वायनाड लोकसभा सीट के लिए प्रत्याशी का ऐलान किया है।पार्टी ने केरल की वायनाड लोकसभा सीट पर उपचुनाव लिए नव्या हरिदास को उम्मीदवार बनाया है। हालांकि, अभी भाजपा ने उत्तर प्रदेश की विधानसभा सीटों के लिए उम्मीदवारों का ऐलान नहीं किया है। साथ ही नांदेड़ लोकसभा सीट के लिए अभी उम्मीदवार के नाम का ऐलान बाकी है। इसके अलावा भाजपा ने असम की तीन, बिहार की दो, छत्तीसगढ़ की 1, कर्नाटक की दो, केरल की दो, मध्य प्रदेश की 2, राजस्थान की 6 और पश्चिम बंगाल की भी 6 विधानसभा सीटों पर होने वाले उपचुनाव के लिए उम्मीदवारों की घोषणा की है। भाजपा ने रमाकांत भार्गव को मध्य प्रदेश की बुधनी से टिकट दिया है। यह सीट शिवराज सिंह चौहान ने खाली की थी। बताया जा रहा है कि शिवराज सिंह चौहान अपने बेटे कार्तिकेय के लिए इस सीट पर टिकट चाहते थे।कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा चुनावी पिच पर डेब्यू करने जा रही हैं। वह केरल की वायनाड लोकसभा सीट से चुनाव लड़ेंगी जो उनके भाई और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी के छोड़ने के बाद खाली हुई है। प्रियंका गांधी वायनाड लोकसभा सीट से अपना नामांकन 23 अक्टूबर को दाखिल करेंगी। इस दौरान राहुल गांधी भी उनके साथ मौजूद रहेंगे। अपना नामांकन दाखिल करने से पहले प्रियंका गांधी रोड शो निकालेंगी।झारखंड और महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव के साथ ही 14 राज्यों की 48 विधानसभा सीटों और दो राज्यों की दो लोकसभा सीटों पर उपचुनाव हो रहे हैं, जिन दो लोकसभा सीटों पर उपचुनाव के लिए तारीखों का ऐलान हुआ है, उनमें राहुल गांधी के इस्तीफे से रिक्त हुई केरल की वायनाड लोकसभा सीट भी है।यूपी की 9 सीटों समेत 13 राज्यों की 47 विधानसभा सीटों पर 13 नवंबर को मतदान होंगे। केरल के वायनाड लोकसभा सीट पर उपचुनाव के लिए भी 13 नवंबर को ही वोट डाले जायेंगे। वहीं, उत्तराखंड की केदारनाथ विधानसभा सीट और महाराष्ट्र की नांदेड़ लोकसभा सीट पर 20 नवंबर को उपचुनाव होंगे। सभी विधानसभा और लोकसभा सीटों के उपचुनाव के नतीजे 23 नवंबर को घोषित किये जायेंगे।

मध्य प्रदेश : रीवा जिले में गुरु मां करिश्मा शेट्टी का हुआ आगमन
Published / 2024-10-17 20:35:04
मध्य प्रदेश : रीवा जिले में गुरु मां करिश्मा शेट्टी का हुआ आगमन

गुरु मां के दर्शन के लिए उमड़ी लोगों की भीड़ एबीएन सेंट्रल डेस्क। मध्य प्रदेश के रीवा जिले के जवा कस्बे के बरौली पांडेय गांव में बीते दिन प्रख्यात गुरु मां करिश्मा शेट्टी का आगमन हुआ। जहां विवेक कुमार पांडेय ने अपनी गुरु मां करिश्मा शेट्टी का एक भव्य आयोजन के माध्यम से स्वागत किया। इस अद्वितीय आयोजन में पांडेय और गांव के लोगों ने गुरु मां करिश्मा शेट्टी पर पुष्पों व दूध की वर्षा के माध्यम से सम्मानित किया, जो गांव की पारंपरिक रिवाज है। इस प्राचीन परंपरा का अर्थ है शुद्धता और श्रद्धा। गुरु मां के दर्शन पाने के लिए लोगों की भारी भीड़ देखने को मिली, जहां दर्जनों की संख्या मे श्रद्धालु अपनी श्रद्धा अर्पित करने को दूर दूर से आये थे। गुरु मां करिश्मा शेट्टी का आगमन पूरे गांव के लिए एक विशेष क्षण था। उनके आगमन का इंतजार कर रहे लोगों की ऊर्जा हर गुजरते पल के साथ बढ़ती गयी। जैसे ही वह आयीं, लोग उनके चरण स्पर्श के लिए उमड़ पड़े, इस विश्वास के साथ कि उनके दर्शन से उनके जीवन में सकारात्मक बदलाव आयेगा। उपस्थित लोगों के लिए, यह एक ऐसा अनुभव था जिसमें आंसू, मुस्कान और प्रार्थनाएं सभी एक साथ घुल-मिल गये। गुरु मां करिश्मा शेट्टी ने लोगों के मन की गहराइयों को भांपते हुए उनके जीवन की घटनाओं को समझा और उन्हें समाधान दिये। उनकी सहजता और करुणा ने लोगों पर गहरा प्रभाव छोड़ा। कुछ ग्रामीणों ने कहा कि उनके पास अलौकिक शक्तियां हैं जो उन्होंने पहले कभी अनुभव नहीं की थीं। जैसे-जैसे यह खबर फैलने लगी, भीड़ बढ़ने लगी और लगभग नियंत्रण से बाहर हो गयी। पुलिस और सुरक्षाकर्मी, जो उनके साथ थे, उन्हें सुरक्षित स्थान पर ले जाने की कोशिश में जुट गये। बावजूद इसके, डॉ शेट्टी ने अपना संयम बनाये रखा और हर उस व्यक्ति को समय दिया, जिसने उनसे मार्गदर्शन मांगा। गांव के लोगों का मानना है कि गुरु मां करिश्मा शेट्टी केवल एक आध्यात्मिक नेता नहीं हैं; वे उन्हें समृद्धि और भाग्य का जीवित स्वरूप मानते हैं। गांव में ऐसे कई किस्से प्रचलित हैं कि उनके आशीर्वाद से लोग अकूत संपत्ति और सफलता प्राप्त करते हैं।एक ग्रामीण ने कहा, उनके पास ऐसी शक्तियां हैं जो हमने कभी नहीं देखीं, जबकि दूसरे ने उनकी दयालुता का जिक्र करते हुए कहा, उन्होंने हम सभी से समय लेकर बात की, खासकर बुजुर्गों से, और हमारे हर समस्या का समाधान बेहद विनम्रता से दिया। यह आयोजन संतोष और श्रद्धा की भावना के साथ संपन्न हुआ। गुरु मां करिश्मा शेट्टी की करुणा और आध्यात्मिक ज्ञान ने लोगों को अभिभूत कर दिया। पांडेय गाँव के लोगों के लिए, उनका यह दौरा एक दुर्लभ और परिवर्तनकारी अनुभव था, जिसने उन्हें और भी अधिक श्रद्धा और सम्मान के साथ गुरु मां से जोड़ दिया।

त्योहारों में नयी दिल्ली से पटना के बीच चलेगी स्पेशल वंदे भारत और तेजस
Published / 2024-10-15 21:30:24
त्योहारों में नयी दिल्ली से पटना के बीच चलेगी स्पेशल वंदे भारत और तेजस

त्योहारों पर प्रीमियम ट्रेनों का तोहफा, नई दिल्ली से पटना के बीच चलेंगी स्पेशल वंदेभारत और तेजसएबीएन सेंट्रल डेस्क। उत्तर मध्य रेलवे त्योहारों पर यात्रियों को प्रीमियम ट्रेनों का तोहफा देने जा रहा है। इसके तहत नई दिल्ली से पटना के बीच स्पेशल वंदेभारत और तेजस चलेंगी। कानपुर में त्योहारों पर यात्रियों को जल्द गंतव्य तक पहुंचाने के लिए प्रीमियम ट्रेनों का तोहफा मिलने जा रहा है। इनमें स्पेशल वंदेभारत व तेजस शामिल हैं। यह नई दिल्ली से पटना स्टेशन के बीच संचालित होंगी। इनमें आरक्षण की प्रक्रिया शुरू हो गयी है। उत्तर मध्य रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी शशिकांत त्रिपाठी ने बताया कि नई दिल्ली से स्पेशल वंदेभारत 02252 सुबह 8.25 बजे चलेगी और दोपहर 1.02 बजे सेंट्रल आयेगी। यहां तीन मिनट रुककर रात आठ बजे पटना स्टेशन पहुंचेगी। यह 30 अक्तूबर, एक, तीन और छह नवंबर को चलेगी। रिवर्स ट्रेन 02251 पटना से 31 अक्तूबर, दो, चार, सात नवंबर की सुबह 7.30 बजे चलेगी। यह सेंट्रल स्टेशन पर दोपहर 2.18 बजे आयेगी और यहां दो मिनट रुककर शाम सात बजे नई दिल्ली पहुंचेगी। नई दिल्ली से 29 व 31 अक्तूबर, दो व पांच नवंबर की सुबह 8.25 बजे स्पेशल तेजस सुपरफास्ट 02248 रवाना होगी।  यह दोपहर 1.12 बजे कानपुर आएगी। यहां तीन मिनट रुककर रात 8.30 बजे पटना स्टेशन पहुंचेगी। रिवर्स ट्रेन 02247 पटना से 30 अक्तूबर, एक, तीन व छह नवंबर की शाम 7.30 बजे चलेगी। दोपहर 2.38 बजे सेंट्रल स्टेशन आयेगी। यहां दो मिनट रुककर शाम 7.35 बजे नई दिल्ली पहुंचेगी।

कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी को संत रामपाल जी महाराज के अनुयायियों ने उन्हें गीता तेरा ज्ञान अमृत पुस्तक भेंट की
Published / 2024-10-15 20:22:01
कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी को संत रामपाल जी महाराज के अनुयायियों ने उन्हें गीता तेरा ज्ञान अमृत पुस्तक भेंट की

कमल सिंह लोधा एबीएन न्यूज नेटवर्क, गुना। मध्य प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष जीतू पटवारी ने मंगलवार को कराहल, श्योपुर जाते समय राघौगढ़ विधानसभा क्षेत्र के पार्वती चौकी, नीमखेड़ी सराय पर कांग्रेस कार्यकतार्ओं से मुलाकात की। इस दौरान, संत रामपाल जी महाराज के अनुयायियों ने उन्हें गीता तेरा ज्ञान अमृत पुस्तक भेंट की। इस मुलाकात में राघौगढ़ विधायक जयवर्धन सिंह भी मौजूद थे। जीतू पटवारी ने इस दौरान मीडिया से बातचीत में कहा कि मध्य प्रदेश में लगातार बारिश के कारण किसानों की फसलें खराब हुई हैं। उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने सोयाबीन और गेहूं के दामों की लड़ाई लड़ी है और जल्द ही खेत गांव यात्रा निकाली जायेगी। इसमें सरकार को समझायेंगे कि खेत गांव यात्रा कांग्रेस का कार्यकर्ता जायेगा और फसलों के खराब होने और फसलों के दामों पर बात की जायेगी। इसके अलावा, जीतू पटवारी ने गुना जिले के पत्रकारों पर बढ़ते हमले पर भी अपनी प्रतिक्रिया दी। कहा कि जंगल राज में क्या होता है, यही होता है।

10 साल में रिकॉर्ड 31 गुना बढ़ चुकी रक्षा निर्यात की रकम
Published / 2024-10-10 21:07:30
10 साल में रिकॉर्ड 31 गुना बढ़ चुकी रक्षा निर्यात की रकम

हथियारों की बिक्री में कैसे आये और तेजी? यह पहला मौका है, जब कोई भारतीय रक्षा विनिर्माता देश से बाहर रक्षा विनिर्माण कारखाना लगा रही है। यह मोरक्को का भी पहला बड़ा रक्षा विनिर्माण संयंत्र होगाएबीएन सेंट्रल डेस्क। रक्षा मंत्रालय के आंकड़ों से संकेत मिलता है कि 2023-24 में देश का रक्षा निर्यात 22,000 करोड़ रुपये के रिकॉर्ड आंकड़े पर पहुंच गया। निर्यात की यह रकम 2013-14 से अब तक 31 गुना बढ़ चुकी है और इस वृद्धि में किसी तरह की सुस्ती की संभावना भी नहीं है। पिछले वित्त वर्ष की तुलना में निर्यात 32.5 फीसदी गुना बढ़ा है। 2024-25 की पहली तिमाही में रक्षा निर्यात 6,915 करोड़ रुपये रहा, जो पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि के 3,885 करोड़ रुपये से 78 फीसदी अधिक था। पिछले दिनों रक्षा निर्यात को और गति मिली, जब निजी क्षेत्र की देसी रक्षा विनिर्माता टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स लिमिटेड (टीएएसएल) ने मोरक्को की रॉयल आर्म्ड फोर्सेस के साथ समझौते की घोषणा की। इस समझौते के तहत मोरक्को की सेना के जवानों को ले जाने के लिए बख्तरबंद वाहन बनाये जायेंगे। इन्हें व्हील्ड आर्मर्ड प्लेटफॉर्म्स या व्हाप 8़8 कहा जाता है। इन्हें मोरक्को के कासाब्लांका में बनाया जायेगा। यह पहला मौका है, जब कोई भारतीय रक्षा विनिमार्ता देश से बाहर रक्षा विनिर्माण कारखाना लगा रही है। यह मोरक्को का भी पहला बड़ा रक्षा विनिर्माण संयंत्र होगा। व्हाप के आकार, सुरक्षा, तरह-तरह के इस्तेमाल और कम कीमत को देखते हुए माना जा रहा है कि उपद्रव से जूझ रही अफ्रीकी सेनाएं इसे खरीदने के लिए आकर्षित होंगी। देश के रक्षा निर्यात में तेजी का कुछ श्रेय कीमत की सीढ़ी पर हमारी उछाल को भी जाता है। दशक भर पहले भारत कम कीमत के गोला-बारूद और हथियार ही निर्यात करता था। आज हम तेजस हल्के लड़ाकू विमान, पिनाक मल्टी बैरल रॉकेट लॉन्चर और ब्रह्मोस क्रूज मिसाइल जैसे महंगे हथियार प्लेटफॉर्म पूर्वी एशियाई देशों को बेच रहे हैं, जिनमें वियतनाम, मलेशिया और फिलिपींस शामिल हैं। एक ब्रह्मोस मिसाइल की कीमत करीब 36.5 लाख डॉलर है। दिलचस्प है कि दस साल पहले हम साल में कुल इतनी कीमत का रक्षा निर्यात कर पाते थे। रक्षा निर्यात में इजाफे का गणित सीधा है: रक्षा मंत्रालय की रक्षा उत्पादन नीति 2018 में तत्कालीन रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा था कि 2025 तक रक्षा एवं विमानन वस्तु एवं सेवा क्षेत्र में 1.7 लाख करोड़ रुपये का सालाना कारोबार हासिल करते हुए 20-30 लाख लोगों के लिए रोजगार तैयार किये जायेंगे। इसके लिए निवेश में करीब 70,000 करोड़ रुपये का इजाफा भी किया जाना था। मगर 2018 की नीति के मुताबिक देश का रक्षा उत्पादन 2013-14 में 43,746 करोड़ रुपये था और मामूली इजाफे के साथ 2016-17 में 55,894 करोड़ रुपये तक पहुंच पाया। नीति में दिये गये महत्त्वाकांक्षी लक्ष्य को हासिल करने के लिए 35,000 करोड़ रुपये के हथियार खरीदने वाले विदेशी खरीदार चाहिए थे। इसका मतलब था कि आयात पर अपनी निर्भरता घटाते हुए हमें 2025 तक प्रमुख हथियार और प्लेटफॉर्म बनाने में आत्मनिर्भर होना है। इनमें लड़ाकू विमान, मझोली भारवहन क्षमता वाले विमान, हमले और अन्य कामों में इस्तेमाल होने वाले हेलीकॉप्टर, युद्धपोत, जमीनी लड़ाकू वाहन, स्वचालित हथियार प्रणाली, मिसाइल सिस्टम, गन सिस्टम, छोटे हथियार, गोला-बारूद, निगरानी प्रणाली, इलेक्ट्रॉनिक युद्ध प्रणाली, संचार उपकरण, रात में लड़ने में मदद करने वाली प्रणाली, मानवरहित हवाई वाहन और प्रशिक्षण उपकरण आदि शामिल हैं। किंतु इस नीति के सात वर्ष बाद भी भारत दुनिया का सबसे बड़ा रक्षा खरीदार है और अपनी रक्षा जरूरतों का 50 फीसदी आयात करता है। रक्षा निर्यात लक्ष्य हासिल करने के लिए वह अब भी संघर्ष कर रहा है। ये लक्ष्य हासिल करना भारतीय उद्योग जगत की क्षमताओं से परे नहीं है। लेकिन इसके लिए जरूरी बदलाव को गति चार कदम गति देंगे। पहला, आरंभिक सफलता बेशक उन रक्षा प्लेटफॉर्म के निर्यात में मिली है, जिन्हें भारत में डिजाइन किया गया और बनाया गया किंतु यह शुरुआती कदम भर है। इन प्लेटफॉर्मों को अपनी सेना में तुरंत शामिल करने की जरूरत है, जहां उनका विकास होगा और क्षमताएं भी दिखेंगी। जब कोई नया प्लेटफॉर्म अच्छा प्रदर्शन करता है या अद्भुत क्षमता दिखाता है तो मीडिया की एक टीम को उस पर नजर रखनी चाहिए, उसकी उपलब्धियों का रिकॉर्ड रखना चाहिए और सुनिश्चित करना चाहिए कि वह संभावित खरीदारों की नजर में आये। देश में बेहतरीन प्रदर्शन रहेगा तभी विदेशी ग्राहक भी उसे गंभीरता से देखेंगे। दूसरा, जो उपकरण या प्लेटफॉर्म विकास के आखिरी चरण में हो या सेना में आने वाला हो, उसका परीक्षण वास्तविक जरूरतों और परिस्थितियों के हिसाब से होना चाहिए। अर्जुन टैंक और तेजस युद्धक विमान ऐसे स्वदेशी प्लेटफॉर्म हैं, जिनमें बदलाव की मांग आती रहती हैं। आरंभ में रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) अर्जुन में बदलाव करता रहा मगर बदलावों की मांग खत्म ही नहीं हुई और अंत में टैंक अपनी ही अपेक्षाओं के तले दब गया।इससे देश की सेना को सबक मिल गया होगा कि संपूर्णता अक्सर अच्छाई की दुश्मान होती है। हमारी सेना किसी भी प्लेटफॉर्म में अक्सर इतना कुछ डालने के लिए कुख्यात है, जिसकी जंग के मैदान में शायद ही कभी जरूरत पड़े। यही वजह है कि डीआरडीओ या युद्धपोत डिजाइन निदेशालय अक्सर बदलाव पर बदलाव करता रहता है और अंत में उत्पाद खत्म ही हो जाता है। तीसरा सबक यह है कि रक्षा निर्यात ऐसे वाणिज्यिक उपकरणों का होता है, जिनसे खरीदार के लिए उत्पाद या प्लेटफॉर्म की लागत कम हो और विक्रेता के लिए उनकी कीमत बढ़ जाये। जो सरकार हथियारों की बिक्री पर जोर दे रही हो उसे पूरा जोर इसी पर देना चाहिए। इसलिए सैनिकों, अधिकारियों, राजनियकों, अर्थशास्त्रियों, टेक्नोक्रेट्स और मीडिया को भी कम लागत पर आर्डर हासिल करने के लिए जोर लगाना चाहिए। चौथा और आखिरी सबक यह है कि हमें रक्षा खरीद एजेंसियों को ऐसा बनाना है कि फायदा ज्यादा से ज्यादा हो और देर कम से कम हो। अमेरिका जैसे प्रमुख रक्षा निर्यातकों ने इसके लिए बाकायदा विभाग बनाया है, जिसे रक्षा सहयोग कार्यालय का नाम दिया गया है। यह विभाग हथियारों की बिक्री पर नजर रखता है और जिम्मेदारी बांटता है। इसकी वजह से नियंत्रण कड़ा करने के इरादे से युद्ध सामग्री की एक सूची बनायी गयी है और निर्यात पर नियंत्रण के लिए मानक प्रक्रिया तय की गयी है। हमारे देश में रक्षा संवर्द्धन विभाग में एक छोटे से प्रकोष्ठ के अलावा ऐसी कोई एजेंसी नहीं है, जिसे निर्यात से जुड़े काम सौंपे गये हों। ऐसा विभाग अंतिम उपभोक्ता के प्रमाणन जैसी समस्याओं से निपटने में संस्थागत विशेषज्ञता प्रदान करेगा और तेजस जैसे विमानों की बिक्री के लिए जरूरी पेचीदा मंजूरी भी प्रदान करेगा। पेचीदा इसलिए है क्योंकि तेजस में विभिन्न देशों के सिस्टम और सब सिस्टम लगे रहते हैं। उदाहरण के लिए इजरायल से एयरबोर्न रडार, ब्रिटेन से इजेक्शन सीट और फ्रांस से कांच के कॉकपिट के लिए मंजूरी की जरूरत होगी। रूसी इंजन के निर्माण में देर होने की समस्या अलग है। इन प्रक्रियाओं से निपटने के लिए एक संस्थान का निर्माण हमारी प्राथमिकता होनी चाहिए।

रतन टाटा के आखिरी शब्दों में छिपा गहरा अर्थ
Published / 2024-10-10 11:08:12
रतन टाटा के आखिरी शब्दों में छिपा गहरा अर्थ

रतन टाटा के आखिरी शब्दों में छिपा गहरा अर्थटीम एबीएन, रांची। भारत के प्रसिद्ध उद्योगपति रतन टाटा अब हमारे बीच नहीं रहे। 10 अक्टूबर, 2024 को 86 वर्ष की आयु में उनका निधन हुआ, जिसने न केवल भारत में बल्कि पूरे विश्व में शोक की लहर दौड़ा दी। रतन टाटा का जीवन और कार्य एक प्रेरणा बनकर उभरे हैं, और उनकी कमी को महसूस करना सभी के लिए कठिन होगा।रतन टाटा ने अपने करियर में कई महत्वपूर्ण उपलब्धियाँ हासिल कीं और टाटा ग्रुप को वैश्विक स्तर पर स्थापित किया। उनका दृष्टिकोण और नेतृत्व क्षमता ने टाटा समूह को एक नई दिशा दी, जिससे यह न केवल एक सफल व्यवसाय बना, बल्कि सामाजिक जिम्मेदारी निभाने में भी अग्रणी रहा। वे हमेशा सामाजिक उत्थान और विकास के लिए प्रतिबद्ध रहे, जिससे कई लोग लाभान्वित हुए।हाल ही में, रतन टाटा की स्वास्थ्य स्थिति को लेकर कई अफवाहें फैलने लगी थीं। उन्होंने इन अफवाहों का खंडन करते हुए खुद ही सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट साझा किया। यह पोस्ट उनके जीवन का अंतिम संदेश बन गया और उन्होंने अपने फॉलोअर्स को अपनी स्थिति के बारे में जानकारी दी।रतन टाटा का व्यक्तिगत जीवन भी उतना ही दिलचस्प था। वे कई वर्षों तक सिमी गरेवाल के साथ एक खास रिश्ते में रहे, लेकिन यह शादी में नहीं बदल सका। इसके बावजूद, उनकी दोस्ती लंबे समय तक बनी रही। सिमी ने रतन को परफेक्ट जेंटलमैन बताया और उनके बारे में अपनी भावनाएँ साझा कीं।रतन टाटा की निधन ने सभी को हैरान कर दिया है, लेकिन उनका जीवन हमें यह सिखाता है कि हमें हमेशा समाज की भलाई के लिए काम करना चाहिए। उनकी सोच, कार्य और योगदान हमेशा लोगों के दिलों में जिंदा रहेंगे। रतन टाटा ने हमें सिखाया कि असली सफलता केवल व्यवसाय में नहीं, बल्कि समाज की सेवा करने में है। उनकी यह आखिरी बातें न केवल उनके जीवन का सार हैं, बल्कि हमें आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करने वाली भी हैं।

कांग्रेस मुख्यालय पर सुबह छूटे पटाखे, दोपहर में सन्नाटा
Published / 2024-10-08 21:22:28
कांग्रेस मुख्यालय पर सुबह छूटे पटाखे, दोपहर में सन्नाटा

प्रारंभिक रुझानों में हरियाणा में कांग्रेस प्रचंड बहुमत की ओर बढ़ रही थीएबीएन सेंट्रल डेस्क। देश की राजधानी के लुटियंस इलाके में 24 अकबर रोड स्थित कांग्रेस के मुख्यालय पर मंगलवार की सुबह पटाखे छोड़ते, ढोल नगाड़े बजाते और जलेबियां बांटते हुए जश्न का आगाज हुआ, लेकिन दोपहर होते-होते वहां सन्नाटा पसर गया क्योंकि मुख्य विपक्षी पार्टी हरियाणा में जीत से हार की तरफ बढ़ चली थी। हरियाणा विधानसभा चुनाव में कांग्रेस की जीत तय मानकर चल रहे पार्टी नेताओं और कार्यकर्ताओं के लिए नतीजे स्तब्ध करने वाले थे और कुछ कार्यकर्ताओं के लिए यह पचा पाना मुश्किल था कि कांग्रेस, भारतीय जनता पार्टी के मुकाबले लगातार तीसरी बार हार गयी। मतगणना आरंभ होने के तत्काल बाद जब रुझानों में कांग्रेस हरियाणा में भारी बढ़त बनाती तथा जम्मू-कश्मीर में अपनी सहयोगी नेशनल कॉन्फ्रेंस के साथ बहुमत की तरफ बढ़ती दिखायी दी तो कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने जश्न मनाना शुरू कर दिया। कुछ कार्यकर्ताओं ने जोश-जोश में पटाखे भी छोड़ डाले तो कुछ ने जलेबियां भी बांटीं और फिर ढोल नगाड़ों के साथ जश्न का माहौल भी बना दिया गया। हरियाणा के विधानसभा चुनाव के प्रचार के दौरान राहुल गांधी के जलेबी से जुड़े एक बयान की खूब चर्चा हुई थी। इसी पृष्ठभूमि में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने जलेबियां बांटनी शुरू कर दीं। मतगणना के करीब डेढ़ घंटे बाद जब हरियाणा के रुझानों में उलटफेर होना शुरू हुआ तो कांग्रेस नेताओं एवं कार्यकतार्ओं का उत्साह कम होता चला गया। कांग्रेस कार्यकर्ता जसवंत कुमार ने कहा, हम तो कभी सोच नहीं सकते थे कि हरियाणा में ऐसे परिणाम आएंगे। यह परिणाम हैरान करने वाला है। एक कार्यकर्ता के रूप में यह हमारे के लिए बहुत निराशाजनक है। कांग्रेस मुख्यालय पर कार्यकर्ताओं का जोश ठंडा पड़ने के साथ ही पार्टी महासचिव मुकुल वासनिक के कक्ष में बैठे कुछ नेताओं के चेहरों पर निराशा की लकीरें साफ देखी जा सकती थीं। कांग्रेस नेता दोपहर करीब एक बजे तक यह उम्मीद करते नजर आए कि मतगणना खत्म होते-होते पार्टी हरियाणा में 46 के जादुई आंकड़े को छू लेगी, हालांकि ऐसा नहीं हो सका और भाजपा तथा कांग्रेस के बीच अंतर बढ़ता चला गया। कांग्रेस दफ्तर में निराशा के इस माहौल के बीच पार्टी के एक पदाधिकारी अपने साथियों का हौसला बढ़ाते हुए यह कहते सुने गये कि अब महाराष्ट्र और झारखंड की तैयारी में जुट जाना है, इस नतीजे से परेशान नहीं होना है। देश के मुख्य विपक्षी दल की कैंटीन में भीड़ थी, लेकिन माहौल वहां भी निराशाजनक था। कैंटीन में रोजमर्रा से अलग कुछ पकवान भी बने थे ताकि उत्साहित कार्यकर्ता उनका लुत्फ उठा सकें। कैंटीन के मुख्य द्वार पर पकौड़ियां बनाकर रखी हुई थीं, लेकिन वहां खरीददारों की कमी देखी गई। कांग्रेस की कैंटीन में काम करने वाले एक युवक ने बड़े ही निराशा भरे लहजे में कहा, देख रहे हैं हरियाणा में क्या हो गया! अब इन पकौड़ियों को भला कौन पूछेगा। पार्टी के कुछ नेता मुख्यालय पर मीडिया के सवालों का जवाब दे रहे थे और यह समझाने की कोशिश करते रहे कि हरियाणा में हार जरूर हुई है, लेकिन जम्मू-कश्मीर में विपक्षी गठबंधन की बड़ी जीत हुई है। कांग्रेस के कुछ कार्यकर्ता तो हरियाणा के चुनाव नतीजों के लिए ईवीएम से जुड़ी आशंका के बारे में भी बात करते नजर आये।

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