एबीएन सेंट्रल डेस्क। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को कहा कि भारत अपनी सीमा की एक इंच जमीन से भी समझौता नहीं कर सकता और लोगों को देश की रक्षा के लिए अपनी सेना की ताकत पर विश्वास है। मोदी ने सशस्त्र बल कर्मियों के साथ दिवाली मनाने की अपनी परंपरा को जारी रखा। उन्होंने गुजरात के कच्छ जिले में सर क्रीक में कहा कि भारत के शत्रु जब भारतीय सशस्त्र बलों की ओर देखते हैं तो उन्हें अपने बुरे मंसूबों का अंत दिखाई देता है। यह स्थल भारत-पाकिस्तान सीमा के नजदीक स्थित है।मोदी ने सीमा सुरक्षा बल, सेना, नौसेना और वायुसेना के जवानों को संबोधित करते हुए कहा, भारत के लोगों को लगता है कि उनका देश आपके कारण सुरक्षित है, दुनिया जब आपको देखती है, तो उसे भारत की ताकत दिखाई देती है और दुश्मन जब आपको देखता है, तो उसे बुरे मंसूबों का अंत दिखाई देता है। जब आप जोश में दहाड़ते हैं, तो आतंक के आका कांप जाते हैं।प्रधानमंत्री ने कहा, आज देश में एक ऐसी सरकार है जो देश की सीमा के एक इंच से भी समझौता नहीं कर सकती है। उन्होंने कहा कि उनकी सरकार देश की रक्षा के लिए सेना के संकल्पों पर भरोसा करती है, दुश्मन की बातों पर नहीं। इस सप्ताह के शुरू में भारत और चीन ने पूर्वी लद्दाख के डेमचोक और देपसांग मैदानों में गतिरोध वाले दो स्थलों से सैनिकों की वापसी पूरी कर ली थी। यह कदम दोनों देशों के बीच वास्तविक नियंत्रण रेखा पर चार साल से अधिक समय से जारी गतिरोध को समाप्त करने के लिए हुए समझौते के बाद उठाया गया था।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। ब्रिटेन के किंग चार्ल्स तृतीय स्वास्थ्य लाभ के लिए क्वीन कैमिला के साथ तीन दिवसीय भारत दौरे पर आये। फरवरी में कैंसर की सर्जरी के बाद सेहत सुधारने के लिए उन्होंने बंगलूरू के एक स्वास्थ्य केंद्र में योग, ध्यान समेत कई भारतीय चिकित्सा पद्धति अपनायी। वह बंगलूरू में व्हाइटफील्ड के पास समथनहल्ली में अंतरराष्ट्रीय समग्र स्वास्थ्य केंद्र सौक्या में ठहरे थे। बीते साल 6 मई को यूनाइटेड किंगडम के किंग के तौर पर राज्याभिषेक के बाद यह शहर की उनकी पहली यात्रा थी। बकिंघम पैलेस के प्रवक्ता ने बुधवार को लंदन में कहा कि शाही जोड़े ने समोआ में राष्ट्रमंडल शासनाध्यक्षों की बैठक से ब्रिटेन वापस लौटते वक्त अपने लंबे सफर के बीच भारत में थोड़ा आराम किया। वे आज सुबह (बुधवार) ब्रिटेन लौट रहे हैं। एक अधिकारी के मुताबिक, सौक्या स्वास्थ्य केंद्र में यह शाही जोड़ा 27 अक्तूबर को पहुंचा था और तीन दिनों के लिए रुका था। 75 साल के किंग चार्ल्स की फरवरी में कैंसर की सर्जरी हुई थी। उनकी सेहत इसके बाद भी नासाज रहती है। किंग ने अपने कीमोथेरेपी सत्रों के बाद अपनी चिकित्सा टीम की सलाह पर यहां आने की योजना बनायी थी। किंग चार्ल्स ने यहां होम्योपैथी, आयुर्वेद और प्राकृतिक चिकित्सा से जुड़े कई इलाज करवाये। सौक्या जहां यह शाही जोड़ा ठहरा था वह अपनी ताजगी देने वाली उपचार पद्धतियों के लिए मशहूर है। इस केंद्र में योग, ध्यान सत्र और कई तरह की थेरेपी दी जाती हैं, जो आराम और स्वास्थ्य में सुधार में मदद करती हैं। सौक्या का संचालन डॉ इसाक मथाई करते हैं। मथाई किंग चार्ल्स के राज्याभिषेक में भारत से आमंत्रित अतिथियों में से एक रहे हैं।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। प्रधानमंत्री नरेन्द्र माेदी ने मंगलवार को कहा कि इस दिवाली पर अयोध्या में 14 वर्ष नहीं बल्कि 500 वर्ष की प्रतीक्षा खत्म होगी। श्री मोदी मंगलवार को राष्ट्रीय राजधानी के अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थान में धन्वंतरि जयंती और नौवें आयुर्वेद दिवस समाराेह को संबोधित करते हुए कहा कि यह दिवाली ऐतिहासिक है क्योंकि अयोध्या में भगवान श्री राम के मंदिर को लाखों दीयों से रोशन किया जायेगा, जिससे उत्सव अभूतपूर्व होगा।प्रधानमंत्री ने कहा, इस साल की दिवाली में भगवान राम एक बार फिर अपने निवास पर लौट आये हैं। उन्होंने कहा कि यह प्रतीक्षा आखिरकार 14 नहीं बल्कि 500 वर्ष बाद खत्म हुई है। इससे पहले श्री मोदी ने एक अन्य कार्यक्रम में इस बार की दिवाली को बहुत खास बताया और कहा कि यह पहली दिवाली है।जब पांच सौ वर्ष की प्रतीक्षा के बाद प्रभु श्री राम अयोध्याधाम में अपने भव्य मंदिर में विराजमान हुए हैं। उन्होंने कहा कि इस बार की दिवाली का साक्षी होना बड़े सौभाग्य की बात है। श्री मोदी ने कहा, इस साल की दिवाली बहुत खास है, बहुत विशेष है। आपको लगेगा कि दिवाली तो हर बार आती है, इस बार विशेष क्या हो गया, मैं बताता हूं, विशेष क्या है।500 वर्षों के बाद प्रभु श्री राम अयोध्या के अपने भव्य मंदिर में विराजमान हुए हैं और उस भव्य मंदिर में विराजमान होने के बाद ये पहली दीपावली है। उन्होंने कहा, इस दीपावली की प्रतीक्षा में कई पीढ़ियां गुजर गईं, लाखों लोगों ने बलिदान दिये, यातनायें झेलीं। हम सभी बहुत सौभाग्यशाली हैं, जो ऐसी विशेष, खास, भव्य दिवाली के साक्षी बनेंगे।श्री मोदी ने कहा कि यह महज संयोग नहीं है कि इस वर्ष धनतेरस का त्योहार समृद्धि और स्वास्थ्य का संगम है, बल्कि यह भारत की संस्कृति और जीवन दर्शन का प्रतीक है। ऋषि-मुनियों का उल्लेख करते हुए प्रधानमंत्री ने बताया कि स्वास्थ्य को सर्वोच्च धन माना जाता है और यह प्राचीन धारणा योग के रूप में दुनिया भर में स्वीकार्यता पा रही है।
जातिगत गणना पर अभी कोई फैसला नहीं एबीएन सेंट्रल डेस्क। देश में जनगणना अब 2025 की शुरुआत में शुरू होने की संभावना है। इस बार जनगणना के आंकड़े 2026 में जारी किये जायेंगे। जिससे भविष्य में जनगणना का चक्र पूरी तरह बदल जायेगा। हालांकि, जाति जनगणना को लेकर अभी तक कोई फैसला नहीं लिया गया है। आधिकारिक सूत्रों ने यह जानकारी दी। जनगणना 1951 से प्रत्येक दस साल के अंतराल पर की जाती थी। लेकिन 2021 में कोरोना महामारी के कारण जनगणना टल गर्यी थी। इसके अलावा, राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर (एनपीआर) को भी अपडेट करने का काम बाकी है। अभी तक जनगणना की नयी तारीख का आधिकारिक तौर पर एलान नहीं किया गया है। सूत्रों ने बताया कि जनगणना और एनपीआर को अपडेट करने का काम अगले साल की शुरुआत में शुरू होने की संभावना है और जनगणना के आंकड़े 2026 में जारी किये जायेंगे। इससे भविष्य में जनगणना का चक्र बदल जायेगा, जैसे 2025-2035 और फिर 2035 से 2045। विपक्षी दल जाति जनगणना की भी मांग कर रहे हैं महा पंजीयक (रजिस्ट्रार जनरल) और जनगणना आयुक्त के कार्यालय ने जनगणना के दौरान पूछे जाने वाले 31 सवाल तैयार किए हैं। इनमें क्या परिवार का मुखिया अनुसूचित जाति या अनुसूचित जनजाति से संबंधित है और परिवार में कितने लोग रहते हैं जैसे सवाल शामिल हैं। विपक्षी कांग्रेस और राष्ट्रीय जनता दल (राजद ) जैसी सियासी पार्टियां जाति जनगणना की मांग कर रहे हैं, ताकि देश में अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) की कुल संख्या का पता चल सके। एक सूत्र ने कहा कि सरकार ने अभी तक जाति जनगणना पर कोई फैसला नहीं लिया है। क्या सरकार परिसीमन के काम को आगे बढ़ायेगी इसके अलावा, अभी यह भी तय नहीं है कि क्या सरकार जनगणना के आंकड़े जारी होने के बाद 2026 में होने वाले परिसीमन के काम को आगे बढ़ायेगी। दक्षिणी राज्यों के कई राजनेताओं की चिंता है कि परिसीमन से उनके राज्यों की लोकसभा में सीटें कम हो सकती हैं और उनकी राजनीतिक ताकत कम हो सकती है, क्योंकि वे जनसंख्या नियंत्रण में सफल रहे हैं। जबकि, उत्तरी राज्यों में ऐसा नहीं है। दूसरी ओर, संविधान का अनुच्छेद 82 कहता है कि जब तक 2026 के बाद पहली जनगणना के आकंड़े जारी नहीं होते, तब तक लोकसभा में राज्यों के लिए सीटों का आवंटन 1971 की जनगणना के आधार पर फिर से नहीं किया जायेगा। इसका मतलब है कि 2025 में जनगणना होती है, तो उसके आंकड़ों के आधार पर परिसीमन नहीं किया जा सकता। एक सूत्र ने कहा, परिसीमन पर कोई भी फैसला लेने से पहले इन सभी कारकों पर गौर करना होगा। पहली जनगणना 1872 और आखिरी 2011 में हुई थी जनगणना की प्रक्रिया के दौरान प्रत्येक परिवार से पूछे जाने वाले 31 सवालों में परिवार में कितने लोग रहते हैं, परिवार की मुखिया महिला है या पुरुष, घर में कितने कमरे हैं और क्या परिवार के पास टेलीफोन, इंटरनेट या वाहन है जैसे सवाल शामिल हैं। भारत में हर दस साल में जनगणना होती है। पहली जनगणना 1872 में हुई थी। 1947 में आजादी मिलने के बाद पहली जनगणना 1951 में हुई थी और आखिरी जनगणना 2011 में हुई थी। आंकड़ों के मुताबिक, 2011 में भारत की कुल जनसंख्या 121 करोड़ थी। जबकि लिंगानुपात 940 महिलाएं प्रति 1000 पुरुष और साक्षरता दर 74.04 फीसदी था।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने सोमवार को कहा कि भारत में रक्षा क्षेत्र के साजो- सामान का निर्माण तंत्र नयी ऊंचाइयों को छू रहा है और देश में एक नई कार्य संस्कृति पैदा हुई है। श्री मोदी ने यहां भारतीय वायु सेवा के लिए नए परिवहन विमान सी- 295 की नयी विनिर्माण इकाई के उद्घाटन के दौरान यह बात कही। यह इकाई टाटा समूह और यूरोप की एयरबस एयरोस्पेस इंडस्ट्रीज के सहयोग से स्थापित की गयी है। यहां टाटा टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स लिमिटेड के टाटा एयरक्राफ्ट काम्प्लेक्स में स्थापित इस नयी सुविधा के उद्घाटन समारोह में स्पेन के प्रधानमंत्री पेड्रो सांचेज भी शामिल थे। दोनों प्रधानमंत्री ने नये कारखाने का एक साथ भ्रमण भी किया। यह कारखाना भारत में निजी क्षेत्र में किसी सैन्य विमान के निर्माण की पहले पूर्ण असेंबली सुविधा है। श्री मोदी ने इस अवसर पर आयोजित समारोह को संबोधित करते हुए कहा कि भारत में स्थापित सी - 295 वायुयान विनिर्माण का यह कारखाना यह साबित करता है कि भारत आज विश्व में वायुयान विनिर्माण के क्षेत्र में एक विश्वसनीय भागीदार के रूप में स्वीकार किया जाने लगा है। उन्होंने इस अवसर पर अपनी सरकार के विनिर्माण क्षेत्र के प्रोत्साहन के लिए गढ़े गये नारे- मेक इन इंडिया, मेक फॉर द वर्ल्ड (भारत में बनाओ, दुनिया के लिए बनाओ) का भी उल्लेख किया। श्री मोदी ने कहा कि सी-295 सैन्य परिवहन विमान की यह फैक्टरी नये भारत में नयी कार्य संस्कृति की झलक देती है। उन्होंने कहा, भारत का रक्षा विनिर्माण उद्योग नयी ऊंचाइयों को छू रहा है। प्रधानमंत्री ने कहा कि स्पेन के प्रधानमंत्री सांचेज की यह पहली भारत यात्रा है और भारत तथा स्पेन की भागीदारी नई ऊंचाइयां छू रही है। उन्होंने कहा कि यह नया कारखाना न केवल दोनों देशों के संबंधों को और सशक्त करेगा बल्कि मेक इन इंडिया मेक फॉर द वर्ल्ड मिशन को भी गति प्रदान करेगा। श्री मोदी ने इस अवसर पर एयरबस और टाटा समूह की पूरी टीम को नये कारखाने को तीव्र गति से स्थापित करने के लिए बधाई दी। श्री मोदी ने टाटा समूह के पूर्व अध्यक्ष रतन टाटा को भी श्रद्धांजलि अर्पित की, जिनका हाल में निधन हो गया। प्रधानमंत्री ने इस कारखाने की आधारशिला अक्टूबर 2022 में रखी थी और अब यह वायु सेना के लिए परिवहन विमान के विनिर्माण के लिए तैयार है। प्रधानमंत्री ने कहा कि सरकार रक्षा विनिर्माण क्षेत्र में निजी क्षेत्र के लिए अवसरों का विस्तार कर रही है और सरकारी कंपनियों को और अधिक कार्य कुशल बना रही है। उन्होंने आर्डनेंस फैक्टरीज बोर्ड का पुनर्गठन कर उनकी जगह सात बड़ी कंपनियां बनाये जाने तथा रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) और हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (हाल) जैसे प्रतिष्ठानों को मजबूत करने के लिए उठाये गये कदमों का भी जिक्र किया।
एबीएन न्यूज नेटवर्क। ओडिशा के भद्रक जिले में तेज हवाओं और भारी बारिश के कारण कई पेड़ उखड़ गए, क्योंकि शुक्रवार की सुबह चक्रवात दाना के आने की प्रक्रिया जारी है. तेज हवाओं और भारी बारिश के कारण पेड़ उखड़ने से इलाके में कई सड़कें अवरुद्ध हो गईं. भारत मौसम विज्ञान विभाग के अनुसार, ओडिशा में वर्तमान में 100-110 किलोमीटर प्रति घंटे की गति से तेज हवाएं चल रही हैं, जो 120 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंच सकती हैं। भारत मौसम विज्ञान विभाग ने सोशल मीडिया एक्स पर पोस्ट किया और कहा कि गंभीर चक्रवाती तूफान दाना 12 किलोमीटर प्रति घंटे की गति से उत्तर-उत्तरपश्चिम की ओर बढ़ गया है और यह धामरा से लगभग 15 किलोमीटर उत्तर और हबलीखाती नेचर कैंप से 30 किलोमीटर उत्तर-उत्तरपश्चिम में उत्तरी तटीय ओडिशा पर केंद्रित है. आईएमडी ने यह भी बताया कि अगले 1-2 घंटों तक भूस्खलन की प्रक्रिया जारी रहेगी। भुवनेश्वर से जारी गंभीर चक्रवाती तूफान दाना पर प्रति घंटा बुलेटिन संख्या 16 के अनुसार, गंभीर चक्रवाती तूफान दाना 10 किमी प्रति घंटे की गति से उत्तर-उत्तरपश्चिम की ओर बढ़ गया । उत्तरी तटीय ओडिशा में चक्रवाती तूफान में कमजोर हो गया. आज सुबह 08:30 बजे भद्रक से लगभग 30 किमी उत्तरपूर्व और धामरा से 50 किमी उत्तर-उत्तरपश्चिम में अक्षांश 21.20 डिग्री उत्तर और देशांतर 86.70 डिग्री पूर्व के पास केंद्रित रहा। चक्रवात के केंद्र के आसपास अधिकतम निरंतर हवा की गति लगभग 80-90 किमी प्रति घंटा है। जो बढ़कर 100 किमी प्रति घंटा हो सकती है। जारी जानकारी के अनुसार, लैंडफॉल प्रक्रिया पूरी हो चुकी है। यह उत्तर ओडिशा में उत्तर-पश्चिम की ओर बढ़ने की संभावना है और अगले 06 घंटों के दौरान धीरे-धीरे कमजोर होकर गहरे दबाव में बदल जाएगा। यह सिस्टम पारादीप में डॉपलर मौसम रडार की निरंतर निगरानी में है।
कई सालो से खुले में अंतिम संस्कार करने को मजबूर ग्रामीणएबीएन सेंट्रल डेस्क (मध्यप्रदेश गुना)। जिले के राघौगढ़ विकासखंड के वार्ड नं 13 ग्राम बहादुरगढ़ में कई वर्षो से पक्की श्मशान घाट नहीं होने की वजह से ग्रामीणों को अपने दिवंगत परिजनों का अंतिम संस्कार खुले में करने को मजूबर हैं। सबसे ज्यादा परेशानी शव का अंतिम संस्कार करने में बारिश में होती है। लेकिन जिम्मेदार अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों का इस गांव की तरफ कोइ भी ध्यान नहीं है।ग्रामीणों ने कई बार पार्षद और जिम्मेदार अधिकारियों को इस समस्या के बारे में भी बता दिया गया है, फिर भी कोई भी सुनवाई नहीं हो रही है। आपको बता दें गुना जिले के राघोगढ़ तहसील के वार्ड नंबर 13 ग्राम बहादुरगढ में कई वर्षो से पक्की शमशान घाट नहीं होने से ग्रामीणों को अंतिम संस्कार करने में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।बुधवार 23 अक्टूबर को वृद्धा सोनिया बाई जाटव (85) का निधन हो गया था। गांव में श्मशान घाट नहीं होने से वजह से खुले में अंतिम संस्कार किया गया। बरसात के दिनों में इस गांव के ग्रामीण तिरपाल व प्लास्टिक ढंककर शव का अंतिम संस्कार करते हैं। ग्रामीणों ने बताया कि कई वर्षों से इस गांव में पक्की श्मशान घाट नहीं है और न ही पक्की सड़क है। बरसात के दिनों में बहुत ज्यादा परेशानी आती है। आज एक वृद्ध महिला का निधन हो गया था, जिसका अंतिम संस्कार किया गया। रास्ते में पक्की सड़क न होने और पुल के नीचे नाली का गंदा पानी होने की वजह से निकलने में बहुत परेशानी रही। कई बार पार्षद और सीएमओ को भी इस समस्या के बारे में बता दिया है। फिर भी कोई भी सुनवाई नहीं हो रही है। जल्द से जल्द इस गांव में नया मरघट शाला बनवायी जाये।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। भारत और चीन के बीच एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम में पूर्वी लद्दाख सीमाक्षेत्र में वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर गश्त की व्यवस्था पर एक सहमति बन गई है जिससे वर्ष 2020 में बने गतिरोध के पूर्ण समाधान का रास्ता खुल गया है। विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की रूस यात्रा के बारे में जानकारी देने के लिए सोमवार को बुलाये गये संवाददाता सम्मेलन में यह घोषणा की। श्री मोदी रूस के कजान में होने वाले 16 वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में भाग लेने के लिए कल तड़के रवाना होंगे जहां उनकी चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ द्विपक्षीय बैठक होने की संभावना है। भारत एवं चीन के नेताओं के बीच द्विपक्षीय बैठक की संभावना के बारे में पूछे जाने पर विदेश सचिव ने सीमा पर स्थिति की जानकारी देते हुए कहा कि वर्ष 2020 में कुछ इलाकों में कुछ घटनाएं हुईं थी। चीनी वातार्कारों के साथ कूटनीतिक स्तर पर समन्व्य और परामर्श पर कार्य प्रणाली (डब्ल्यूएमसीसी) और सैन्य स्तर पर कमांडरों की बैठकें चल रहीं हैं। पिछले कुछ हफ्तों में हुई चचार्ओं के परिणामस्वरूप वास्तविक नियंत्रण रेखा पर गश्त व्यवस्था पर एक सहमति बनी है तथा इससे आमने- सामने के टकराव की स्थिति दूर हो रही है और इससे वर्ष 2020 के बाद इन क्षेत्रों में उत्पन्न मुद्दों के समाधान का मार्ग प्रशस्त हुआ है। चीनी राष्ट्रपति एवं प्रधानमंत्री मोदी के बीच द्विपक्षीय बैठक की संभावना के बारे में पूछे जाने पर श्री मिस्री ने कहा कि अभी इस बारे में तैयारियां चल रही हैं। जैसे ही कुछ निर्णय होगा तो मीडिया से साझा किया जायेगा। प्रधानमंत्री की यात्रा के बारे में श्री मिस्री ने कहा, रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के निमंत्रण पर 16वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में भाग लेने के लिए श्री मोदी कल कजान के लिए प्रस्थान करेंगे। ब्रिक्स के इस संस्करण का विषय वैश्विक विकास और सुरक्षा के लिए बहुपक्षवाद को मजबूत करना है। भारत ब्रिक्स के लिए बहुत महत्वपूर्ण है और इसके योगदान ने आर्थिक विकास, सतत विकास और वैश्विक शासन सुधार जैसे क्षेत्रों में ब्रिक्स प्रयासों को आकार देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। पिछले साल जोहांसबर्ग में ब्रिक्स के पहले विस्तार के बाद यह पहला शिखर सम्मेलन होगा। श्री मिस्री ने कहा कि ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में संस्थापक सदस्यों के साथ-साथ नए सदस्य भी भाग लेंगे। शिखर सम्मेलन 22 अक्टूबर को शुरू होगा और पहले दिन की शाम को केवल शीर्ष नेताओं के लिए रात्रिभोज होगा। शिखर सम्मेलन का मुख्य दिन 23 अक्टूबर है और वहां दो मुख्य सत्र हैं, सुबह एक प्रतिबंधित पूर्ण सत्र और उसके बाद दोपहर में शिखर सम्मेलन के मुख्य विषय के लिए समर्पित एक खुला पूर्ण सत्र। शीर्ष नेताओं द्वारा कजान घोषणापत्र जारी किये जाने की भी उम्मीद है जो ब्रिक्स के लिए आगे का रास्ता तैयार करेगा। उन्होंने कहा कि शिखर सम्मेलन 24 अक्टूबर को समाप्त होगा लेकिन प्रधानमंत्री स्वदेश की महत्वपूर्ण प्रतिबद्धताओं के कारण 23 अक्टूबर को ही नयी दिल्ली लौट आयेंगे। उन्होंने कहा कि शिखर सम्मेलन के मौके पर, प्रधानमंत्री की कुछ द्विपक्षीय बैठकें होने की उम्मीद है। रूसी सेना में भारतीय नागरिकों के फंसे होने संबंधी एक सवाल के जवाब में विदेश सचिव ने कहा, हमारे दूतावास के अधिकारी उन भारतीयों के मुद्दे पर रूस के विदेश मंत्रालय और रक्षा मंत्रालय के वातार्कारों के साथ निकट संपर्क में हैं, जिन्हें अवैध रूप से या अन्यथा रूसी सेना में लड़ने के लिए अनुबंधित किया गया था। इस मामले पर राष्ट्रपति पुतिन के साथ श्री मोदी सहित उच्चतम स्तर पर विचार किया गया। अब तक लगभग 85 लोग रूस से लौटे हैं और दुर्भाग्य से, हमने संघर्ष के दौरान अपनी जान गंवाने वाले लोगों के पार्थिव शरीर वापस कर दिए हैं, लगभग 30 लोग बचे हैं और हम वहां सशस्त्र बलों में बचे सभी लोगों की रिहाई के लिए वार्ताकारों पर दबाव डाल रहे हैं। उम्मीद है कि बाकी लोग भी शीघ्र वापस आ जाएंगे।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा केरल की वायनाड लोकसभा सीट पर हो रहे उपचुनाव के लिए बुधवार 23 अक्टूबर को नामांकन पत्र दाखिल करेंगी। कांग्रेस सूत्रों के अनुसार श्रीमती वाड्रा के नामांकन पत्र दाखिल करने के दौरान कांग्रेस संसदीय दल की अध्यक्ष सोनिया गांधी, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी तथा पार्टी के अन्य प्रमुख नेता मौजूद रहेंगे। श्रीमती वाड्रा वायनाड संसदीय सीट के लिए हो रहे उपचुनाव में कांग्रेस के नेतृत्व वाले यूडीएफ की उम्मीदवार हैं। कांग्रेस नेत्री बुधवार को कलपेट्टा में चुनाव अधिकारी के समक्ष अपना नामांकन दाखिल करेंगी। नामांकन पत्र दाखिल करने से पहले वह श्री राहुल गांधी के साथ सुबह 11 बजे कलपेट्टा न्यू बस स्टैंड से रोड शो करेंगी और 12 बजे समर्थकों के साथ जिला कलक्टर के समक्ष नामांकन दाखिल करेंगी।
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