एबीएन सेंट्रल डेस्क (जगदलपुर)। बस्तर जिले के कोड़ेनार थाना क्षेत्र अंर्तगत ग्राम तिरथुम में रहने वाले बोजो पोयाम की एक वर्षीय बेटी खेलने के दौरान पानी से भरे बाल्टी में जा गिरी, घटना के बाद परिजनों ने उसे उपचार के लिए अस्पताल ले गये, जहां उसे डॉक्टर ने मृत घोषित कर दिया। घटना के बाद पुलिस ने शव का पीएम करवा कर परिजनों को सौंप दिया है। पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार कोड़ेनार क्षेत्र के तिरथुम निवासी बोजो पोयाम अपनी पत्नी शांति व एक वर्षीय बेटी सविता पोयाम को छोड़कर अपने काम से चले गये। वहीं पत्नी अपने घर के कामों में लग गयी। बेटी खेलने के दौरान घर के बाहर निकल कर बाहर पानी से भरे बाल्टी में खेल रही थी, अचानक से बच्ची का पैर फिसल गया, और बच्ची सिर के बल पानी में जा गिरी। आज शनिवार शाम करीब 4 बजे जब शांति ने बच्ची को घर मे नहीं देखा तो उसे खोजने के लिए बाहर आयी। बच्ची को पानी बाल्टी में गिरे देख कर उसे आसपास के लोगों की मदद से उपचार के लिए किलेपाल के स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया। बच्ची की खराब हालत देखते हुए बेहतर उपचार के लिए मेकॉज लाया गया, जहां डॉक्टर ने मृत घोषित कर दिया।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। गुजरात के मेहसाणा जिले में शुक्रवार रात 4.2 तीव्रता का भूकंप आया। भूकंप के झटके रात 10:15 बजे महसूस किये गये और इसका केंद्र पाटन से 13 किलोमीटर दक्षिण-पश्चिम में था। भूकंप की हलचल महसूस होते ही लोग अपने घरों से बाहर निकल आये, लेकिन अधिकारियों के अनुसार किसी प्रकार के जानमाल के नुकसान की खबर नहीं है। नेशनल सेंटर फॉर सीस्मोलॉजी ने बताया कि भूकंप का केंद्र मेहसाणा क्षेत्र में था, जिसकी गहराई 10 किलोमीटर थी। यह स्थान गुजरात के राजकोट से लगभग 219 किमी उत्तर-पूर्व में और पाटन से 13 किमी दक्षिण-दक्षिण-पश्चिम में स्थित था। भूकंप के झटके बनासकांठा, पाटन, साबरकांठा और मेहसाणा के उत्तरी जिलों तक महसूस किये गये और ये 2 से 3 सेकंड तक रहे। गुजरात राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (जीएसडीएमए) के आंकड़ों के अनुसार, राज्य में पिछले 200 वर्षों में नौ बड़े भूकंप हो चुके हैं, जिनमें 26 जनवरी, 2001 को कच्छ में आये विनाशकारी भूकंप का भी समावेश है, जिसमें हजारों लोग मारे गये थे।
43वें भारतीय अंतरराष्ट्रीय व्यापार मेला में झारखंड की कला और संस्कृति के मुरीद हुए दर्शकएबीएन सेंट्रल डेस्क (नई दिल्ली)। किसी भी राज्य या देश के जनजीवन को समझना हो तो सबसे पहले उसकी कला और संस्कृति को समझना चाहिए। व्यापार मेले में झारखण्ड पवेलियन में इसकी जीती-जागती मिसाल देखने को मिल रही है। मेले में आने वाले दर्शक झारखण्ड पवेलियन में झारखंड की कला और संस्कृति से परिचित होने के साथ-साथ उसका हिस्सा बनना भी पसंद कर रहे हैं।प्रगति मैदान में जारी 43वें भारतीय अंतर्राष्ट्रीय व्यापार मेले में झारखण्ड अपनी कला और संस्कृति के चलते दर्शकों में काफी लोकप्रिय हो रहा है। पवेलियन में लाह की चूड़ियों को दर्शक काफी पसंद कर रहे हैं। खास कर महिलाएं लाह की बनी चूड़ियों एवं आभुषणों की खरीदारी कर रही हैं। मुख्यमंत्री लघु एवं कुटीर उद्यम विकास बोर्ड के अंतर्गत लाह हस्तशिल्प स्वावलंबी सहकारी समिति लिमिटेड के अध्यक्ष एवं पवेलियन में लाह की चूड़ियों के विक्रेता झाबरमल बताते हैं कि झारखंड लाह उत्पादन में भारत का प्रथम स्थान रखता है। उनकी संस्था 450 से अधिक महिलाओं को मिलाकर लाह की चूड़ियां एवं आभूषण बनाते हैं। उन्होंने बताया कि उनके पास इस वर्ष व्यापार मेले में 50 रु से लेकर 2000 रु तक लाह की चूड़ियां उपलब्ध हैं।
तेल की कीमतों पर केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री का बड़ा बयान, सुनकर खुश हो जायेंगे आपएबीएन सेंट्रल डेस्क। दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा कच्चा तेल उपभोक्ता और आयातक देश भारत उम्मीद कर रहा है कि अमेरिका और कनाडा जैसे पश्चिमी देशों में कच्चे तेल का अधिक उत्पादन होने से बाजार में शांति होगी और कीमतों में स्थिरता आयेगी।केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने बृहस्पतिवार को यह बात कही। भारतीय उद्योग परिसंघ (सीआईआई) के 12वें पीएसई शिखर सम्मेलन में पुरी ने कहा कि पश्चिमी गोलार्ध के देश अधिक उत्पादन कर रहे हैं, जिससे पेट्रोलियम निर्यातक देशों के संगठन ओपेक को भी उत्पादन बढ़ाने के लिए प्रभावित किया जा सकता है। इससे वे अधिक कमाई कर सकेंगे। तेल कीमतों में उतार-चढ़ाव अपनी जरूरतों को पूरा करने के लिए आयात पर निर्भर अर्थव्यवस्थाओं को परेशान करता है क्योंकि उन्हें न केवल ईंधन खरीदने पर अतिरिक्त खर्च करना पड़ता है, बल्कि इससे मुद्रास्फीति भी आती है जो उनके लोगों की क्रय शक्ति को कम करती है। उन्होंने कहा, आज पश्चिमी गोलार्ध से वैश्विक बाजार में अधिक उत्पादन आ रहा है।ब्राजील, गुयाना, कनाडा और अमेरिका अधिक उत्पादन कर रहे हैं... अधिक से अधिक तेल आने के कारण, उम्मीद है कि बाजार की स्थिति शांत हो जायेगी। पुरी ने कहा कि इससे कुछ हद तक उन उत्पादकों को भी लाभ होगा जिन्होंने तेल उत्पादन में कटौती की है, ताकि अधिक राजस्व अर्जित करने के लिए अधिक उत्पादन किया जा सके। कच्चे तेल निर्यातक देशों के संगठन और रूस के नेतृत्व वाले सहयोगी (संयुक्त रूप से ओपेक+) ने 2022 के अंत से कीमतों को बढ़ाने और मांग को पूरा करने के लिए उत्पादन में भारी कटौती की है। ओपेक+ के सदस्य वर्तमान में कुल 58.6 लाख बैरल प्रति दिन (बीपीडी) या वैश्विक मांग का लगभग 5.7 प्रतिशत उत्पादन कटौती कर रहे हैं। बाद में पत्रकारों से उन्होंने कहा कि ओपेक+ उत्पादन में कटौती के अपने फैसले की सक्रियता से समीक्षा कर रहा है और एक या दो महीने में इस मुद्दे पर निर्णय ले सकता है।
न्यायमूर्ति संजीव खन्ना बने उच्चतम न्यायालय के 51वें मुख्य न्यायाधीशएबीएन सेंट्रल डेस्क। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने सोमवार को न्यायमूर्ति संजीव खन्ना को उच्चतम न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश पद की शपथ दिलायी। श्रीमती मुर्मु ने राष्ट्रपति भवन में आयोजित एक समारोह में शीर्ष अदालत के वरिष्ठतम न्यायाधीश न्यायमूर्ति खन्ना को 51वें मुख्य न्यायाधीश के पद की शपथ दिलायी। वह 13 मई 2025 को सेवानिवृत्त होंगे। मौके पर उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, शीर्ष अदालत के पूर्व मुख्य न्यायाधीश डी वाई चंद्रचूड़ के अलावा मौजूदा और पूर्व न्यायाधीश, कई केंद्रीय मंत्री और अनेक गणमान्य लोग मौजूद थे।
महिला आयोग ने गुरुग्राम का स्कूल बंद करने के दिये आदेशबच्चे से छेड़छाड़ का मामलाएबीएन सेंट्रल डेस्क (गुरुग्राम)। हरियाणा के गुरुग्राम में एक प्राइवेट स्कूल में साढ़े तीन साल की बच्ची के साथ छेड़छाड़ के मामले में महिला आयोग सख्त हो गया है। आयोग ने स्कूल और पुलिस की भूमिका पर सवाल खड़े करते हुए आदेश दिए कि जब तक आरोपी गिरफ्तार नहीं होगा, ये स्कूल बंद रहेगा। साथ में गुरुग्राम पुलिस कमिश्नर को इलाके के एसएचओ और मामले की महिला जांच अधिकारी की शिकायत की है।हरियाणा महिला आयोग की प्रदेश अध्यक्ष रेनू भाटिया ने रविवार को बताया कि प्राइवेट स्कूल में छेड़छाड़ का शिकार हुई बच्ची की मां ने उनसे संपर्क किया था। उनको बताया कि उनकी साढ़े तीन साल की बेटी के साथ स्कूल में उत्पीड़न हुआ है, लेकिन स्कूल और पुलिस कोई कार्रवाई नहीं कर रहे। इस मामले में हरियाणा बाल आयोग की टीम भी दौरा कर चुकी है।रेनू बताया ने बताया कि दरअसल बच्ची एक फूड डिलीवरी बॉय को देखकर डर गयी थी। बच्ची ने माता-पिता को बताया कि स्कूल के वॉशरूम में एक शख्स ने उसके साथ गलत हरकत की है। इसकी शिकायत परिजनों ने स्कूल से की तो स्कूल ने उन्हें 5 घंटे बिठाए रखा और उनको सीसीटीवी फुटेज का एडिटेड वीडियो दिखाया। पुलिस ने भी उन्हें कार्रवाई के नाम पर एक सप्ताह तक टरकाया। महिला आयोग की अध्यक्ष ने बताया कि आयोग की टीम स्कूल पहुंची, तो उन्होंने अपनी जांच में आरोपी को चिह्नित किया। जांच में सामने आया कि स्कूल ने इस घटना के बाद अपने आरोपी स्टाफ को बचाने की कोशिश की और उसे छुट्टी पर भेज दिया। पुलिस ने देरी से एफआईआर की और अभी तक आरोपी को गिरफ्तार नहीं किया है। भाटिया ने बताया कि जब तक आरोपी को गिरफ्तार नहीं किया जाता, तब तक ये प्राइवेट स्कूल बंद रहेगा।
जोधपुर बढ़ रहा है जिहादी अतिवाद!एबीएन सेंट्रल डेस्क। राजस्थान के जोधपुर महानगर में दिवाली से एक दिन पूर्व एक हिंदू महिला का 6 टुकडे कर दफनाया हुआ शव बरामद हुआ। बताते चलें कि ब्यूटी पार्लर चलाने वाली महिला के पड़ोसी गुल मोहम्मद की बेगम ने कबूला कि काट-कूट कर उसके घर के पिछवाड़े के 10 फुट गहरे गड्ढे में जेसीबी से जमीन में दफनाया गया 50 वर्षीया अनीता चौधरी का शव था।लव-जिहाद न जाने कितनी हिंदू बेटियों को लीलेगा महिला अनीता चौधरी चार दिन से लापता थी। दुर्भाग्य देखिये कि जिहादी गुल मोहम्मद अभी भी गिरफ्तारी से बहुत दूर है। लोगों ने विश्वास जताया है कि राजस्थान पुलिस और राजस्थान सीएमओ तो घटना के अपराधी जिहादी और उन सभी षड्यंत्रकरियों को शीघ्र सलाखों के पीछे लात मार कर धकेलेंगे ही। किंतु, हिंदू समाज को भी सजग रहकर ऐसी जिहादी मानसिकता के साथ सख्ती से निपटना होगा। जोधपुर जैसे शांतिपूर्ण शहर में लगातार बढ़ते इन जिहादियों द्वारा उत्पात व हिंसा के समाचार दिल दहला देने वाले हैं। उक्त जानकारी विहिप के राष्ट्रीय प्रवक्ता विनोद बंसल ने दी।
चुनाव आयोग ने 14 विधानसभा क्षेत्रों में उपचुनाव की तारीख बदलीअब 20 नवंबर को होंगे चुनाव, चुनाव आयोग ने जारी किये आदेशएबीएन सेंट्रल डेस्क। भारत निर्वाचन आयोग ने पंजाब, केरल और उत्तर प्रदेश के 14 विधानसभा क्षेत्रों में होने वाले उपचुनाव की तारीख में बदलाव की घोषणा की है। पहले ये उपचुनाव 13 नवंबर 2024 को निर्धारित थे, लेकिन अब इन्हें 20 नवंबर 2024 को कराया जायेगा।चुनाव आयोग ने 15 अक्तूबर 2024 को प्रेस नोट जारी करते हुए 15 राज्यों की 48 विधानसभा और 2 लोकसभा सीटों पर उपचुनाव की तिथियां घोषित की थीं। लेकिन विभिन्न राष्ट्रीय और राज्य स्तरीय राजनीतिक दलों जैसे भाजपा, कांग्रेस, बसपा, रालोद समेत कई सामाजिक संगठनों ने आयोग को 13 नवंबर को कई सांस्कृतिक और धार्मिक गतिविधियों का हवाला देकर तारीख बदलने का आग्रह किया था। उनका कहना था कि इससे मतदान में बाधा उत्पन्न हो सकती है और वोटर की भागीदारी कम हो सकती है।इन कारणों को ध्यान में रखते हुए, आयोग ने 14 विधानसभा सीटों पर मतदान की तारीख 13 नवंबर से बदलकर 20 नवंबर कर दी है। इनमें केरल की पलक्कड़, पंजाब की डेरा बाबा नानक, चब्बेवाल (एससी), गिद्दड़बाहा, बरनाला और उत्तर प्रदेश की मीरापुर, कुन्दरकी, गाजियाबाद, खैर (एससी), करहल, शिशामऊ, फूलपुर, कटेहरी और मजहवा सीटें शामिल हैं। हालांकि, इन उपचुनावों की मतगणना की तारीख 23 नवंबर 2024 और चुनाव प्रक्रिया की समाप्ति की तारीख 25 नवंबर 2024 ही रहेगी। चुनाव तिथियां (बदलाव के साथ) राज्य- विधानसभा क्षेत्र- पहले की तारीख- नयी तारीखकेरल- पलक्कड़- 13 नवंबर 2024- 20 नवंबर 2024 पंजाब- डेरा बाबा नानक- 13 नवंबर 2024- 20 नवंबर 2024 पंजाब- चब्बेवाल- 13 नवंबर 2024 20 नवंबर 2024 पंजाब- गिद्दड़बाहा- 13 नवंबर 2024- 20 नवंबर 2024 पंजाब- बरनाला- 13 नवंबर 2024- 20 नवंबर 2024 उत्तर प्रदेश- मीरापुर- 13 नवंबर 2024- 20 नवंबर 2024 उत्तर प्रदेश- कुन्दरकी- 13 नवंबर 2024- 20 नवंबर 2024 उत्तर प्रदेश- गाजियाबाद- 13 नवंबर 2024- 20 नवंबर 2024 उत्तर प्रदेश- खैर- 13 नवंबर 2024- 20 नवंबर 2024 उत्तर प्रदेश- करहल- 13 नवंबर 2024- 20 नवंबर 2024 उत्तर प्रदेश- शिशामऊ- 13 नवंबर 2024- 20 नवंबर 2024 उत्तर प्रदेश- फूलपुर- 13 नवंबर 2024- 20 नवंबर 2024 उत्तर प्रदेश- कटेहरी- 13 नवंबर 2024- 20 नवंबर 2024 उत्तर प्रदेश- मजहवा- 13 नवंबर 2024- 20 नवंबर 2024नोट: मतगणना की तारीख 23 नवंबर 2024 और चुनाव प्रक्रिया की समाप्ति 25 नवंबर 2024 रहेगी।
मोदी कौन सा नया धमाका करने जा रहे हैं, जानकर लोग कहेंगे 2029 भी कंफर्म करा लिया अभिनय आकाश एबीएन एडिटोरियल डेस्क। विपक्ष ने इसे लेकर सरकार से सवाल भी पूछे हैं। जनगणना वास्तव में कैसे की जाती है, इसका परिसीमन, महिला संसद कोटा से संबंध है। जाति जनगणना लोगों की जरूरत है या फिर इसकी मांग सिर्फ और सिर्फ एक सियासी या चुनावी जिद है। तमाम सवालों के जवाब आइये इस रिपोर्ट के जरिए आपको देते हैं। भारत की आबादी कितनी है? इस सवाल का जवाब आपको गूगल पर मिल जायेगा। लेकिन इस अगला सवाल आयेगा कि इंटरनेट पर मौजूद इस जानकारी को आप सत्यापित कैसे करेंगे। संदर्भ किसका देंगे। तब आपको भारत के आधिकारिक जनगणना के आंकड़ों की जरूरत पड़ेगी। सोचिये कि अगर आपको एक साधारण से सवाल के जवाब के लिए इस रिपोर्ट की आवश्यकता है तो 140 करोड़ लोगों के जीवन के हर पहलू के लिए जिम्मेदार सरकार को कितने महीन आंकड़ों की जरूरत पड़ती होगी। हम सब की शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार, आवास आदि के लिए जो नीतियां बनायी जाती हैं, वो जनगणना के आंकड़ों के आधार पर ही तैयार की जाती है। भारत में 12 बरस से जनगणना हुई ही नहीं। केंद्र सरकार ने जनगणना कराने का फैसला कर लिया है। ये 2025 में शुरू होकर 2026 तक चलेगी। अब सरकार इसमें जातिगत जनगणना कराएगी या नहीं ये कंफर्म नहीं है। विपक्ष ने इसे लेकर सरकार से सवाल भी पूछे हैं। जनगणना वास्तव में कैसे की जाती है, इसका परिसीमन, महिला संसद कोटा से संबंध है। जाति जनगणना लोगों की जरूरत है या फिर इसकी मांग सिर्फ और सिर्फ एक सियासी या चुनावी जिद है। तमाम सवालों के जवाब आइये इस रिपोर्ट के जरिए आपको देते हैं। जनगणना का शेड्यूल क्या है सरकारी सूत्रों के मुताबिक जनगणना 2025 में शुरू होकर 2026 तक चलेगी। इस जनगणना में लोगों से संप्रदाय भी पूछा जा सकता है। लोकसभा सीटों का परिसीमन जनगणना के बाद होगा। जाति जनगणना के बारे में केंद्र ने अभी कोई फैसला नहीं लिया है। जनगणना में जाति कैसे आयी? भारत में जनगणना के बीच जाति जनगणना का बीज अंग्रेजों ने बोया था। फूट डालों और राज करो उन्हीं की नीति थी। समझ लीजिए कि जाति जनगणना उसी पॉलिसी की टूल किट थी। बहुत संक्षेप में हम 1881 से 2024 तक आते हैं। 1881 से 1931 तक अंग्रेजों ने छह बार जाति जनगणना करवाई। 1941 में भी जाति की गिनती हुई लेकिन डेटा प्रकाशित नहीं किया गया। 1951 में स्वतंत्र भारत की पहली सरकार ने एससी-एसटी को छोड़कर बाकी जाति की गिनती रोक दी। 2011 में केंद्र ने जाति जनगणना को मंजूरी दी, लेकिन डेटा जारी नहीं किया। 2011 की जनगणना में 46 लाख जातियों और उपजातियों का पता चला था। तब कांग्रेस के नेतृत्व वाली यूपीए-2 की सरकार थी। आज के इंडिया अलायंस के कई सहयोगी तब अड़े हुए थे। लेकिन तब मनमोहन सिंह की सरकार ने जातियों की गिनती को सार्वजनिक नहीं किया। 2021 में कोविड की वजह से जनगणना नहीं हो पाई। विडंबना देखिए कि 2024 के चुनाव और उसके बाद से कांग्रेस उसी जाति जनगणना के लिए बैटिंग कर रही है, जिसके आंकड़े उसने खुद 2011 में जारी नहीं किए थे। क्या-क्या जानकारी मांगी जायेगी जनगणना के दौरान लोगों से पूछे जाने वाले सवाल तैयार कर लिये गये हैं। इनमें क्या परिवार का मुखिया या अन्य सदस्य अनुसूचित जाति/ अनुसूचित जनजाति से संबंधित हैं। परिवार के सदस्यों की कुल संख्या, परिवार की मुखिया महिला है या नहीं? परिवार के पास कितने कमरे हैं? परिवार में कितने विवाहित जोड़े हैं? क्या परिवार के पास टेलीफोन, इंटरनेट कनेक्शन, मोबाइल, दोपहिया, चारपहिया वाहन है या नहीं आदि सवाल शामिल किये गये हैं। दक्षिण के राज्य टेंशन में क्यों आये? जनगणना में संप्रदाय के बारे में भी पूछा जायेगा। मान लीजिये कर्नाटक राज्य जहां वोक्कालिंगा और लिंगायत समुदाय है उसके बारे में पूछा जायेगा। दक्षिण की विभिन्न राज्य सरकारों ने सार्वजनिक रूप से इस जनगणना के दौरान लोगों से पूछे जाने वाले सवाल तैयार कर लिए गए हैं। इनमें क्या परिवार का मुखिया या अन्य सदस्य अनुसूचित जाति/ अनुसूचित जनजाति से संबंधित हैं। परिवार के सदस्यों की कुल संख्या, परिवार की मुखिया महिला है या नहीं? परिवार के पास कितने कमरे हैं? परिवार में कितने विवाहित जोडे़ हैं? क्या परिवार के पास टेलीफोन, इंटरनेट कनेक्शन, मोबाइल, दोपहिया, चारपहिया वाहन है या नहीं आदि सवाल शामिल किए गए हैं चिंता को उठाया है। इसमें आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री और एनडीए की सहयोगी टीडीपी के मुखिया चंद्रबाबू नायडू का भी नाम शामिल है। उन्होंने राज्य के लोगों से आबादी के प्रभाव का जिक्र है। इसके साथ ही अधिक बच्चे पेदा करने के लिए प्रोत्साहित किया है। इस मामले में सरकार के सूत्रों ने कहा कि वे इस चिंता से अवगत हैं और कोई भी उपाय जो दक्षिणी राज्यों को नुकसान पहुंचा सकता है, उससे बचा जायेगा। जनगणना जल्दी पूरी करने के 2 बड़े कारण पहला- साल 2026 में गठित होने वाले डिलिमिटेशन कमिशन के आधार पर लोकसभा और विधानसभा सीटों का नए सिरे से सीमांकन होना है। 2026 तक लोकसभा, राज्यसभा और विधानसभाओं के निर्वाचन क्षेत्रों की संख्या पर फ्रीज लगा था। आबादी के नए आंकड़ों के हिसाब से इन निर्वाचन क्षेत्रों का नए सिरे से सीमांकन होगा। संसद की सीटों की संख्या भी बढ़ेगी। दूसरा- इन बढ़ी सीटों के हिसाब से महिलाओं के लिए लोकसभा व विधानसभाओं में एक तिहाई सीटें आरक्षित की जायेंगी। इसके लिए ऐतिहासिक विधेयक सितंबर 23 में पारित किया जा चुका है। जनगणना का नया चक्र शुरू होगा, अगली 2035, फिर 2045 में होगी 2025 की जनगणना से नया सेंसस चक्र शुरू हो जोगा। नयी साइकिल 2025 के बाद 2035 और इसके बाद 2045 की होगी। 1881 से हर दस साल बाद होने वाली जनगणना 2021 में होनी थी, जो 3 साल से अधिक देरी से शुरू होने की संभावना है। सूत्रों ने कहा, पूरी कवायद 2 से ढाई साल में पूरी होगी। ऐसे में इस डेटा को सिर्फ 2031 तक सीमित रखना तार्किक नहीं होगा। इस बार की जनगणना डिजिटल होगी और सेल्फ इन्यूमिरेशन ऐप का सहारा भी लिया जायेगा। ताकि, जनगणना कम समय में पूरी की जा सके। जनगणना की जो कवायद 3 साल में फैली होती है, उसे 18-24 महीनों में पूरा करने का प्रयास किया जाएगा। जनगणना वर्ष में जनसंख्या गणना फरवरी के दूसरे और चौथे सप्ताह के बीच होती है। सामने आए आंकड़े जनगणना वर्ष में 1 मार्च की आधी रात तक भारत की जनसंख्या को दशार्ते हैं। फरवरी में गणना अवधि के दौरान जन्म और मृत्यु का हिसाब देने के लिए, गणनाकार संशोधन करने के लिए मार्च के पहले सप्ताह में घरों में लौटते हैं। महिला आरक्षण का एंगल भी है खास 84वें संविधान संशोधन की भाषा कहती है कि परिसीमन केवल वर्ष 2026 के बाद ली गई पहली जनगणना के आंकड़ों पर ही हो सकता है। इससे पता चलता है कि जनगणना का जनसंख्या गणना भाग 2026 के बाद किया जाना है। इसलिए, यदि जनगणना अभ्यास अगले साल शुरू होना है और सरकार 2029 के लोकसभा चुनावों के लिए परिसीमन प्रक्रिया शुरू करना चाहती है। मौजूदा प्रावधान में संशोधन की आवश्यकता हो सकती है। 16वें वित्त आयोग की सिफारिशें यहां एक महत्वपूर्ण तत्व हो सकती हैं।वित्त आयोग, हर पांच साल में गठित एक निकाय, केंद्र और राज्यों के बीच वित्तीय संसाधनों के हस्तांतरण की सिफारिश करता है। 16वें वित्त आयोग को अगले साल के अंत तक अपनी रिपोर्ट सौंपनी है। इसके अलावा, संसद ने पिछले साल 128वें संविधान संशोधन को मंजूरी दी, जिसमें महिलाओं के लिए लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में 33 प्रतिशत सीटें आरक्षित की गईं। हालाँकि, यह परिसीमन अभ्यास के बाद लोकसभा और राज्य विधानसभाओं की सीटों में संशोधन के बाद ही प्रभावी होगा। जातीय जनगणना की मांग ऐसी भी उम्मीद है कि अगली जनगणना में अलग जाति जनगणना की आवश्यकता को खत्म करने के लिए जाति डेटा भी एकत्र किया जा सकता है, जिसकी हाल के वर्षों में कुछ राजनीतिक दलों द्वारा मांग की गई है। जनगणना में जाति संबंधी आंकड़ों का संग्रह अभूतपूर्व नहीं होगा। 1941 की जनगणना तक जाति से संबंधित कुछ जानकारी प्राप्त की गई थी और यह प्रथा स्वतंत्र भारत में ही बंद कर दी गई थी। पहले के कुछ वर्षों में जनगणना में सभी धर्मों के लोगों की जाति या संप्रदाय की जानकारी प्राप्त की जाती थी। अन्य वर्षों में, केवल हिंदुओं का जाति डेटा एकत्र किया गया था। 1951 की जनगणना के बाद से यह प्रथा बंद कर दी गई और तब से केवल अनुसूचित जाति या जनजाति पर डेटा एकत्र किया गया है।
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