44 सेकेंड में मचा देता है तबाही, भारत फ्रांस को देने जा रहा घातक रॉकेट लॉन्चर पिनाका, जिससे कांपते हैं चीन-पाकिस्तान एबीएन सेंट्रल डेस्क। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने फ्रांस में घोषणा की कि भारत फ्रांस को स्वदेशी पिनाका रॉकेट लॉन्चर देगा, जो 44 सेकंड में 72 रॉकेट लॉन्च कर सकता है। पिनाका की मारक क्षमता 38 किमी है। फ्रांस पहुंचे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ऐलान किया कि भारत फ्रांस को स्वदेशी पिनाका रॉकेट लॉन्चर देने जा रहा है। इससे दोनों देशों के रिश्ते एक खास मुकाम पर पहुंच गए हैं। फ्रांस भारत का स्ट्रैटजिक पार्टनर रहा है। उसका राफेल फाइटर जेट जब से भारत में आया है, चीन-पाकिस्तान की नींद उड़ गयी है। लेकिन भारत उसे अपना सबसे घातक हथियार देने जा रहा है। पिनाका रॉकेट लॉन्चर इतना घातक है कि सिर्फ 44 सेकेंड में 72 रॉकेट लॉन्च करता है। और उससे भी खास बात, इसके टारगेट्स हर बार अलग-अलग होते हैं। आज हम आपको इसकी खूबियां बताने जा रहे हैं। पिनाका की खूबियां सबसे बड़ी बात, पिनाका रॉकेट लॉन्चर स्वदेशी है। पिनाका की एक बैटरी में 6 फायरिंग यूनिट यानी लॉन्चर होती है और एक लॉन्चर में 12 ट्यूब होती हैं। यानी कि एक बैटरी में कुल मिलाकर 72 रॉकेट होते हैं और महज 44 सेकेंड ये सारे रॉकेट लॉन्च हो जाते हैं। लॉंचिंग के तुरंत बाद से लॉन्चर अपना लोकेशन बदलते हैं और फिर दोबारा से आर्मड हो जाते हैं। इससे दुश्मन को काफी कम वक्त मिलता है और तबाही काफी ज्यादा होती है। दुनिया इसे सबसे घातक लॉन्चर मानती है। पिनाका रॉकेट लॉन्चर की मारक क्षमता 38 किलोमीटर है। यानी 38 किलोमीटर दूर रहकर दुश्मन के ठिकानों को तबाह किया जा सकता है। इसके लिए आर्मी को न लड़ाकू विमान भेजने की जरूरत है और न किसी सैनिक की जान जोखिम में डालनी होगी। पिनाका एक साथ पूरी बैटरी दागने पर दुश्मन के 1000 गुना 800 मीटर के इलाके को पूरी तरह से तहस नहस कर सकता है। इसका एक राउंड तकरीबन 25-30 लाख रुपये के करीब बताया जाता है। हर रॉकेट का वजन 278 किलो है।
2025 में माघी पूर्णिमा तक लगभग 46 से 47 करोड़ लोग प्रयागराज में संगम पर स्नान कर चुके हैंएबीएन सेंट्रल डेस्क। प्रयागराज कुंभ में बुधवार को माघी पूर्णिमा के दिन दो करोड़ से भी ज्यादा लोगों ने संगम में स्नान किया। प्रयागराज में नया ट्रैफिक प्लान लागू करने के चलते संगम पहुंचने के लिए लोगों को 10 से 15 किलोमीटर तक पैदल चलना पड़ा। हालांकि इसके बाद भी श्रद्धालुओं के उत्साह में कमी नहीं आयी और देर शाम तक संगम पर पहुंचने वालों का तांता लगा रहा। मौनी अमावस्या को हुयी भगदड़ में मौतें फिर बसंत पंचमी के स्नान पर हुई आवागमन की अव्यवस्था से सबक लेते हुए प्रदेश सरकार ने माघी पूर्णिमा के लिए नया ट्रैफिक प्लान लागू किया था। बुधवार को सभी वीवीआईपी पास रद्द करते हुए पूरे शहर को नो व्हीकल जोन घोषित किया गया था। प्रयागराज आ रहे सभी वाहनों को शहर के बाहर की पार्किंगों में रोक दिया गया था। श्रद्धालुओं को ढोने के लिए सरकारी शटल बसें चलायी गयी थीं। हालांकि भीड़ को देखते हुए शटल बसों की तादाद नाकाफी थी और पार्किंग स्थल से संगम तक पहुंचने के लिए लोगों को 15 किमी तक पैदल चलना पड़ा। बुधवार को प्रयाग शहर की गलियों में भी वाहनों का प्रवेश रोक दिया गया था। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सुबह से लेते रहे अपडेट- पूरी हालात पर नजर रखने के लिए बुधवार तड़के से खुद मुख्यमंत्री ने वार रूम में अधिकारियों से फीडबैक लेना शुरू कर दिया था। माघी पूर्णिमा के स्नान को सकुशल संपन्न करवाने के लिए कल ही दर्जन भर अधिकारियों की अतिरिक्त ड्यूटी लगा दी गयी थी। माघी पूर्णिमा के स्नान के सकुशल संपन्न हो जाने पर पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) उत्तर प्रदेश, प्रशान्त कुमार द्वारा ने कहा गया कि यह महाकुंभ 2025 का पांचवां स्नान था, इसके उपरान्त महाशिवरात्रि का स्नान शेष है। मौनी अमावस्या की दु:खद घटना से सीख लेकर पहले से और बेहतर करने का प्रयास किया गया। इसके लिए कम्युनिटी फीडबैक शामिल किये जाने हेतु वहां कार्यरत अधिकारी एवं श्रद्धालुओं की कठिनाई सभी को शामिल करके बेहतर प्रबन्धन तकनीक अपनायी गयी थी, जिसका परिणाम है कि इस महाकुम्भ में आज तक लगभग 46 से 47 करोड़ जनता द्वारा स्नान किया गया है। महाकुंभ के अलावा कहां-कहां जा रहे श्रृद्धालु डीजीपी ने कहा कि प्रयागराज के अतिरिक्त हमारा चित्रकूट, मीरजापुर विंध्याचल मन्दिर, वाराणसी काशी विश्वनाथ, अयोध्या के राम मंदिर पर भी विशेष ध्यान है, क्योंकि महाकुंभ आने वाले श्रृद्धालु इन स्थानों पर भी जाते है। महाकुम्भ मेला क्षेत्र के सतत पर्यवेक्षण हेतु लाइव फीड को लखनऊ से देखा जा रहा है और इंटीग्रेटेड कमांड कंट्रोल सेंटर से उचित दिशा - निर्देश भी दिये जा रहे हैं।
संगम की बूदों में उफनाया माघी पूर्णिमा का अनंत विश्वास एबीएन सोशल डेस्क। पूजहिं माधव पद जलजाता/ परसि अखय बटु हरषहिं गाता...। संत तुलसी की इस चौपाई का आशय है कि गंगा, यमुना और अदृश्य सरस्वती की पावन त्रिवेणी में डुबकी लगाकर ऋषि-मुनि, देव-दनुज सभी संगम रूपी सिंहासन पर विराजमान जगत के स्वामी भगवान श्रीहरि माधव के चरण कमल को पूज कर धन्य हो जाते हैं। साथ ही अक्षयवट का स्पर्श कर उनके तन-मन के ताप-संताप हमेशा के लिए मिट जाते हैं। विश्व के सबसे बड़े सांस्कृतिक आयोजन महाकुंभ के पांचवें सबसे बड़े स्नान पर्व माघी पूर्णिमा पर एक बार फिर संगम की यही महिमा जगव्यापी श्रद्धा की अमृतमयी बूंदों के स्पर्श की अकुलाहट में साकार हुई। आधी रात से ही माघी पूर्णिमा की पावन डुबकी के लिए मचलता जन सागर दिन भर आस्था के तटबंधों को तोड़कर छलकने के लिए आतुर रहा।मेला प्रशासन ने दोपहर दो बजे तक 12 किमी लंबे संगम के 42 घाटों पर 1.83 करोड़ श्रद्धालुओं के डुबकी लगाने का दावा किया। न किसी ने सूर्योदय का इंतजार किया न पुण्यकाल का। आधी रात त्रिवेणी के सुरम्य तट पर हर कोई प्रयाग में माघी पूर्णिमा की महिमा का पुण्य बटोरने की ललक लिए डुबकी मारने लगा। खचाखच भीड़ की वजह से रेती पर न कपड़े रखने की जगह थी न ठिठकने की। उसी जन सैलाब में किसी का झोला तो किसी का कपड़ा और किसी के परिवारीजन आंखों से ओझल होते रहे। उसी बीच में पुरोहितों-संतों की शंखध्वनियां भी तन-मन को पुलकित कर रही थीं और घंट-घड़ियाल के बीच आस्था, विश्वास और भक्ति की लहरें भी हर अंतस को छूती रहीं। भक्ति के अनंत सागर से निकली आस्था की दिव्य आभा ने संगम से लेकर चार हजार हेक्टेयर क्षेत्रफ्रल में बसे महाकुंभ नगर के शिविरों से निकले रास्तों पर हर तरफ अद्भुत छटा बिखेर दी। पौ फटते ही पूरब की लाली से फूटी किरणें संगम की लहरों पर उतर कर हर तन-मन में शक्ति और उल्लास का संचार करने लगीं। पुण्य की डुबकी लगाने के साथ ही उन्हीं लहरों पर लोक मंगल के गीत गाये जाते रहे।
एबीएन सेन्ट्रल डेस्क। दिल्ली में आयोजित अंतरराष्ट्रीय पुस्तक मेला में झारखंड की लेखिका रेणुका तिवारी द्वारा लिखित दोजख की हूरें का लोकार्पण सह संवाद कार्यक्रम प्रलेक् प्रकाशन के स्टाल पर किया गया।लोकार्पण प्रसिद्ध लेखक प्रोफेसर अनिल कुमार सिंह, प्रोफेसर केदार मीणा एवं प्रोफेसर प्रभात कुमार मिश्र (काशी हिंदू विश्वविद्यालय) एवं प्रसिद्ध हिंदी आलोचक, स्वामी रणधीर द्वारा संयुक्त रूप से किया गया। इस अवसर पर लेखिका रेणुका तिवारी ने अपने उपन्यास की पृष्ठभूमि और उद्देश्य पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि उपन्यास में वर्णित हर स्त्री चरित्र एक टीम लीडर और प्रतिरोध के विरुद्ध खड़ी एक नेतृत्वकर्ता है।जो उनके लिए निर्मित दोजख को अपनी हिम्मत से ध्वस्त कर जन्नत का निर्माण कर लेती है। प्रोफेसर अनिल कुमार सिंह ने कहा कि वैसे तो इसकी पृष्ठभूमि बिहार की है पर इस समस्या का फलक काफी व्यापक है।प्रोफेसर प्रभात मिश्र ने स्त्री विमर्श और लेखनका दायरा बढ़ चला है।स्त्री का लिखा हुआ सिर्फ स्त्री केंद्रित न होकर अब अपनी व्यापकता को दिखा रहा है। यह उपन्यास उसका परिचायक है। लेखक एवं आलोचक प्रोफेस र केदार मीणा ने अपने वक्तव्य में कहा कि यह उपन्यास बेहद महत्वपूर्ण है।जब हम विकसित देश के निर्माण में जुटे हैं, ऐसे समय मे अगर इस तरह की कोई घटना घटती है तो हमे शर्मसार कर देती है। साथ ही यह स्त्री विमर्श को भी नया आयाम देती है। स्त्री विमर्श लेखन अवसान की ओर है यह मान लिया गया है। पर इस उपन्यास का कथ्य बताता है कि अभी काफी कुछ लिखा जाना बाकी है। यह झकझोर देने वाली रचना है। इसे जरूर पढ़ा जाना चाहिए।युवा कवि आशुतोष ने कहा कि पुस्तक का नाम बेहद खूबसूरत है। हुर्रे जन्नत में होती हैं, पर स्त्री दोजख में भी जन्नत का निर्माण कर सकती है, अपने आत्मबल और साहस के कारण। यही इस उपन्यास का संदेश है जिसका स्वागत होना चाहिए।स्वामी रणधीर जी ने कहा कि ये पुस्तक नही है बल्कि वेद है। बिहार की इस घटना में बच्चीयों को किस तरह से प्रताड़ित किया गया, शोषण किया गया वह एक जघन्य अपराध की याद दिलाता है। ऐसी घृणित व्यवस्था पुरुषों द्वारा निर्मित दोजख का निर्माण करते हैं। पर वही स्त्री अपने विनाशकारी रूप में जब इस दोजख का अग्नि दहन करती है तो सबकुछ स्वाहा स्वाहा हो जाता है।उसके बाद स्त्री अपने लिये जन्नत का निर्माण करती है। तो यह स्त्री का अपना आत्मबल होता है जिसके कारण वह खड़ी हो जाती है। ऐसे उपन्यास का रचा जाना जरूरी है ताकि स्त्रियों का आत्मसम्मान बचा रह सके।इस कार्यक्रम में झारखंड से सुधीर कुमार, प्रीतम मिश्रा, अत्युत्तम छत्तीसगढ़ से, रंजीता मिश्रा विशेष रूप से सम्मिलित हुए।कार्यक्रम का समापन प्रलेक् प्रकाशन के प्रकाशक जितेंद्र पात्रों द्वारा धन्यवाद ज्ञापन से किया गया। उक्त जानकारी रांची सिटीज़न फोरम की सचिव रेणुका तिवारी ने दी।
भारत अगले AI शिखर सम्मेलन की मेजबानी करके खुश होगा... पेरिस में बोले PM मोदीएबीएन सेन्ट्रल डेस्क। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के साथ AI एक्शन समिट की सह-अध्यक्षता की। इस दौरान, उन्होंने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के लिए संचालन व्यवस्था और मानक स्थापित करने के वैश्विक प्रयासों का आह्वान किया।प्रधानमंत्री ने कहा कि मैं स्थायी AI के लिए परिषद में AI फाउंडेशन की स्थापना के निर्णय का स्वागत करता हूं। भारत अगले AI शिखर सम्मेलन की मेजबानी करके खुश होगा। पीएम मोदी ने कहा कि AI हमारी अर्थव्यवस्था, सुरक्षा और समाज को नया आकार दे रहा है और मानवता के लिए कोड लिख रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि हम एआई युग के शुरुआती दौर में हैं, जो आने वाले समय में मानवता के मार्ग को आकार देगा।भारत करेगा अगले AI शिखर सम्मेलन की मेजबानीपेरिस में आयोजित AI एक्शन समिट के पूर्ण सत्र में पीएम मोदी ने स्थायी AI के लिए परिषद में AI फाउंडेशन की स्थापना के फैसले का स्वागत किया. उन्होंने कहा कि भारत अगले AI शिखर सम्मेलन की मेजबानी करने के लिए तैयार है।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। महाकुंभ मेले में मंगलवार शाम छह बजे तक एक दिन में 1.23 करोड़ श्रद्धालुओं ने त्रिवेणी संगम में डुबकी लगायी। इनमें 10 लाख कल्पवासी और 1.13 करोड़ श्रद्धालु शामिल रहे। 10 फरवरी तक कुल 44.74 करोड़ श्रद्धालु स्नान कर चुके हैं और अगर आज छह बजे तक के आंकड़े को जोड़ लें तो यह आंकड़ा 45 करोड़ के पार है। सरकार ने 45 दिनों में 45 करोड़ से अधिक श्रद्धालुओं के महाकुंभ में स्नान करने का अनुमान जताया था, जबकि यह आंकड़ा 29 दिनों में ही पूरा हो गया। प्रयागराज में आयोजित महाकुंभ मेले में पूरा देश आ रहा है। 29 दिनों में 45 करोड़ से अधिक श्रद्धालु पवित्र त्रिवेणी में स्नान कर चुके हैं। बता दें कि सरकार ने अनुमान जताया था कि पूरे महाकुंभ में कुल 45 करोड़ से ज्यादा लोग आयेंगे।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। प्रयागराज महाकुंभ के अलौकिक वातावरण में मां गंगा, यमुना और अंत: सलिला सरस्वती के पावन संगम में आज स्नान करने का सौभाग्य प्राप्त हुआ। श्रद्धा और विश्वास का यह विशाल समागम भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत का अद्भुत और जीवंत प्रतीक है। महाकुंभ मानवता को एकता और आध्यात्मिकता का संदेश देता है। मां गंगा से मेरी प्रार्थना है कि वे सब पर अपनी कृपा बनाये रखें और सभी के जीवन में सुख और शांति का संचार करती रहें। उक्त बातें देश की पहली नागरिक महामहिम राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने कही। वह सोमवार को त्रिवेणी संगम में आयोजित महाकुंभी में स्नान के बाद उक्त प्रतिक्रिया दी।
विश्व हिन्दू परिषद।*प्रेस वक्तव्य:*महाकुंभ शिविर, प्रयागराज। फरवरी 9, 2025। महाकुंभ मेला क्षेत्र स्थित विश्व हिंदू परिषद (विहिप) शिविर में चल रही त्रि-दिवसीय बैठक रविवार को इस संकल्प से साथ पूरी हो गई कि अब किसी भी स्थिति में हम मंदिरों को सरकारी नियंत्रण से मुक्ति दिला कर ही रहेंगे। बैठक में उपस्थित देश - विदेश के 950 प्रतिनिधियों ने मिलकर एक बड़ी रणनीति भी बनाई है। इस बारे में विस्तृत जानकारी देते हुए विहिप के अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष श्री आलोक कुमार ने आज कहा कि मंदिर मुक्ति आंदोलन के प्रथम चरण में विश्व हिंदू परिषद के कार्यकर्ता अन्य हिंदू संगठनों के साथ मिलकर प्रत्येक राज्य के मुख्यमंत्री को ज्ञापन दे कर मांग करेंगे कि सरकारें हिंदू मंदिरों को वापस हिंदू समाज को सौंपे। उत्तर भारत और दक्षिण भारत में बड़ी जनसभाएं कर इस संबंध में अपनी मांगे बुलंद करेंगे।आंदोलन के दूसरे चरण में प्रत्येक राज्य की राजधानी व महानगरों में वहां के बुद्धजीवी समाज की सभाएं कर इसके लिए व्यापक जन समर्थन जुटाएंगे।जिन राज्यों में यह समस्या ज्यादा विकट है, वहां आगामी विधानसभा सत्र के दौरान हमारे कार्यकर्ता विधानसभा और विधान परिषद के सदस्यों से मिलकर वहां के राजनीतिक दलों पर मंदिरों की मुक्ति हेतु दबाव बनाएंगे।कुंभ मेला क्षेत्र में एक पत्रकार वार्ता को संबोधित करते हुए विहिप अध्यक्ष ने बताया कि बैठक में इस बात पर भी सहमति बनी कि मंदिरों को अपने नियमित कामकाज के संचालन हेतु अधिकतम स्वतंत्रता होनी चाहिए। मंदिर प्रबंधन में किसी भी प्रकार का बाहरी नियंत्रण अब स्वीकार्य नहीं होगा।उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि मंदिर मुक्ति आंदोलन में हम केवल उन्हीं मंदिरों की बात कर रहे हैं जो अभी तक सरकारी नियंत्रण में है, अन्य मंदिरों की नहीं।श्री आलोक कुमार ने कहा कि हमारा मत है कि मंदिर के पैसों को केवल हिंदू कार्यों के लिए खर्च किया जाना चाहिए। इस संबंध के कानून में पूरी तरह से पारदर्शी वही खाते और अंकेक्षण की व्यवस्था होगी।मंदिरों के संचालन में संपूर्ण हिंदू समाज की सहभागिता और मंदिरों के लिए बने ट्रस्ट में अन्य लोगों के साथ महिलाओं व अनुसूचित समाज का प्रतिनिधित्व भी होगा।मंदिरों के अर्चकों, पुरोहितों व अन्य कर्मचारियों को मिलने वाले वेतन व भत्तों में कोई कमी नहीं की जाएगी और किसी भी हालत में उनका वेतन उस राज्य के लिए निर्धारित न्यूनतम वेतन से काम नहीं होगा।उन्होंने यह भी बताया कि विहिप प्रतिनिधि जब मुख्य मंत्रियों को मिलने जाएंगे तो वह अपने साथ उस राज्य के लिए इस संबंध में प्रस्तावित कानून का एक प्रारूप भी उनको सौंपेंगे।बैठक में देश भर के सभी प्रांतों के अलावा ब्रिटेन, अमेरिका, कनाडा, जर्मनी, हांगकांग मॉरीशस, दक्षिणी अफ्रीका, फ्रांस, थाईलैंड, श्रीलंका, नेपाल बांग्लादेश, गुयाना जैसे अनेक देशों के प्रतिनिधि उपस्थित थे।बैठक में पर्यावरण संरक्षण, सामाजिक समरसता, कुटुंब प्रबोधन, नागरिक कर्तव्य, स्वदेशी व स्व का बोध जैसे पांच परिवर्तनों को भी जनमानस के आचार व्यवहार और संस्कारों का हिस्सा बनाने का संकल्प लिया गया। विश्व भर में हिंदू समाज से जुड़े अन्य ज्वलंत मुद्दों पर भी विस्तार से विचार विनिमय हुआ।इस बैठक में युग पुरुष पूज्य स्वामी श्री परमानंद जी महाराज व बौद्ध लामा पूज्य श्री चोस फेल ज्योतपा जी, राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के सर कार्यवाह श्री दत्तात्रेय होसवोले तथा पूर्व सर कार्यवाह व विहिप के पालक अधिकारी श्री भैया जी जोशी भी उपस्थित रहे। उक्त जानकारी विश्व हिंदू परिषद के राष्ट्रीय प्रचार प्रसार प्रमुख विजय शंकर तिवारी ने दी।
एबीएन सेंट्रल डेस्क (दिल्ली)। दिल्ली में आयोजित अंतरराष्ट्रीय पुस्तक मेला में रेणुका तिवारी द्वारा लिखित दोजख की हूरें का लोकार्पण सह संवाद कार्यक्रम प्रलेक् प्रकाशन के स्टाल पर किया गया। लोकार्पण प्रसिद्ध लेखक प्रोफेसर केदार मीणा एवं प्रोफेसर प्रभात कुमार मिश्र (काशी हिंदू विश्वविद्यालय) एवं प्रसिद्ध हिंदी आलोचक, स्वामी रणधीर ने संयुक्त रूप से किया। लेखिका रेणुका तिवारी ने अपने उपन्यास की पृष्ठभूमि और उद्देश्य पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि उपन्यास में वर्णित हर स्त्री चरित्र एक टीम लीडर और प्रतिरोध के विरुद्ध खड़ी एक नेतृत्वकर्ता है, जो उनके लिए निर्मित दोजख को अपनी हिम्मत से ध्वस्त कर जन्नत का निर्माण कर लेती है। प्रोफेसर केदार मीणा ने कहा कि वैसे तो इसकी पृष्ठभूमि बिहार की है पर इस समस्या का फलक काफी व्यापक है। प्रोफेसर प्रभात मिश्र ने स्त्री विमर्श और लेखनका दायरा बढ़ चला है। स्त्री का लिखा हुआ सिर्फ स्त्री केंद्रित न होकर अब अपनी व्यापकता को दिखा रहा है। यह उपन्यास उसका परिचायक है। युवा कवि आशुतोष ने कहा कि पुस्तक का नाम बेहद खूबसूरत है। हुर्रे जन्नत में होती हैं, पर स्त्री दोजख में भी जन्नत का निर्माण कर सकती है, अपने आत्मबल और साहस के कारण। यही इस उपन्यास का संदेश है जिसका स्वागत होना चाहिए। स्वामी रणधीर जी ने ये पुस्तक नही है बल्कि वेद है। बिहार की इस घटना में बच्चियों को किस तरह से प्रताड़ित किया गया। शोषण किया गया वह एक जघन्य अपराध की याद दिलाता है। ऐसी घृणित व्यवस्था पुरुषों द्वारा निर्मित दोजख का निर्माण करते हैं। पर वही स्त्री अपने विनाशकारी रूप में जब इस दोजख का अग्नि दहन करती है तो सबकुछ स्वाहा स्वाहा हो जाता है। उसके बाद स्त्री अपने लिये जन्नत का निर्माण करती है। तो यह स्त्री का अपना आत्मबल होता है जिसके कारण वह खड़ी हो जाती है। ऐसे उपन्यास का रचा जाना जरूरी है ताकि स्त्रियों का आत्मसम्मान बचा रह सके। इस कार्यक्रम में झारखंड से सुधीर कुमार,प्रीतम मिश्रा, अत्युत्तम छत्तीसगढ़ से,रंजीता मिश्रा विशेष रूप से सम्मिलित हुए। कार्यक्रम का समापन प्रलेक प्रकाशन के प्रकाशक जितेंद्र पात्रों ने धन्यवाद ज्ञापन से किया।
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