65 मीटर ऊंचा... 20 एकड़ भूमि में बना जगन्नाथ मंदिर, कल से कर सकेंगे दर्शन एबीएन सेंट्रल डेस्क। पश्चिम बंगाल के पूर्व मेदिनीपुर जिले में समुद्र तट पर स्थित पर्यटन शहर दीघा में नवनिर्मित जगन्नाथधाम का बुधवार को अक्षय तृतीया के अवसर पर उद्घाटन किया जायेगा। यह मंदिर पुरी स्थित 12वीं सदी के मंदिर की प्रतिकृति है। एक अधिकारी ने बताया कि भगवान जगन्नाथ का मंदिर इस परियोजना का अभिन्न अंग है। उन्होंने बताया कि इस मंदिर को 20 एकड़ भूमि पर बनाया गया है और इसके लिए राजस्थान के बंसी पहाड़पुर से लाये गये लाल बलुआ पत्थर का उपयोग किया गया है। उन्होंने बताया कि लगभग 65 मीटर ऊंचा यह मंदिर जटिल नक्काशी और पारंपरिक डिजाइन का मिश्रण है। अधिकारी ने बताया कि पुरी के श्री जगन्नाथ मंदिर की तरह दीघा में नवनिर्मित जगन्नाथ मंदिर को भी गर्भगृह विमान, जगमोहन, नट मंदिर (नृत्य कक्ष) और भोग मंडप नामक चार मंडपों में विभाजित किया गया है जो इतिहास और परंपरा से समृद्ध हिंदू आस्था की जीवंत झलक दिखाते हैं। दीघा मंदिर में भगवान जगन्नाथ, भगवान बलभद्र और देवी सुभद्रा की मूर्तियां प्राचीन पुरी जगन्नाथ मंदिर की मूर्तियों की प्रतिकृतियां हैं और इन्हें पत्थर से तराशा गया है। पुरी मंदिर की तरह दीघा जगन्नाथ मंदिर के ऊपर भी हर शाम ध्वज फहराया जायेगा। मंदिर में पूर्व, पश्चिम, उत्तर और दक्षिण यानी सभी चारों दिशाओं से प्रवेश किया जा सकता है। अधिकारी ने बताया कि मुख्य द्वार से प्रवेश करने के बाद अरुण स्तंभ है, फिर सिंह द्वार और उसके ठीक सामने व्याघ्र द्वार है। मंदिर में हस्ति द्वार और अश्व द्वार भी हैं। मंदिर के गुंबद से लेकर हर दरवाजे को रंग-बिरंगी रोशनी से सजाया गया है।खास तौर पर उद्घाटन के दिन लेजर शो और डायनामिक लाइट शो होगा। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने सोमवार को कहा था कि यह मंदिर अगले कई हजार वर्षों तक लोगों के समागम स्थल के रूप में काम करेगा। बनर्जी ने कहा था कि दीघा अंतरराष्ट्रीय आकर्षण का एक पर्यटक केंद्र बन जाएगा। यह सद्भाव का स्थान बनेगा। उन्होंने कहा था, समुद्र के कारण दीघा का एक विशेष आकर्षण है। अब अगर यह तीर्थस्थल बन जाता है, तो और अधिक पर्यटक यहां आयेंगे। मुझे लगता है कि मूर्तिकारों ने शानदार काम किया है। दीघा पूर्व मेदिनीपुर जिले में एक लोकप्रिय समुद्री रिसॉर्ट शहर है।
एबीएन सेन्ट्रल डेस्क। भारत सरकार ने देश में रह रहे पाकिस्तानी नागरिकों को जल्द भारत छोड़ने का आदेश दिया है। जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में आतंकियों द्वारा 28 पर्यटकों की हत्या के बाद यह सख्त कदम उठाया गया है। झारखंड में फिलहाल 10 पाकिस्तानी नागरिक रह रहे हैं, जिनमें से 3 नाबालिग हैं। तीनों के उम्र 2 से 10 साल के बीच की है। ये लोग रांची, धनबाद, जमशेदपुर और हजारीबाग में निवास कर रहे हैं। इन 10 में से 7 पाक नागरिकों के पास लॉन्ग टर्म वीजा (LTV) है। मिली जानकारी के अनुसार एलटीवी वाले नागरिकों को फिलहाल भारत छोड़ने की जरूरत नहीं है। इसलिए झारखंड में मौजूद ये 7 लोग यहीं रहेंगे। लेकिन 3 नाबालिग बच्चे हाल ही में कराची से रांची आये हैं। चूंकि वे नाबालिग हैं, उनकी मां को भारत छोड़ने का वीजा नहीं मिलेगा और न ही उनके पिता को भारत आने का वीजा मिलेगा, इसलिए इन्हें अकेले पाकिस्तान भेजना बड़ा सवाल बन गया है। झारखंड का गृह मंत्रालय इस मुद्दे पर केंद्रीय गृह मंत्रालय से निर्देश मांग रहा है। निर्देश के बाद तय होगा कि बच्चों को भारत में ही रखा जाएगा या फिर पाकिस्तान भेजा जायेगा।बता दें कि रांची की 3 लड़कियों की शादी पाकिस्तान में हुई है। ये महिलाएं लॉन्ग टर्म वीजा पर झारखंड में रह रही हैं। वहीं उनके बच्चे गर्मी की छुट्टियों में पाकिस्तान से झारखंड आये हैं। अब इन्हीं बच्चों के पाकिस्तान लौटने को लेकर केंद्र को फैसला लेना है।
पहलगाम हमले के दोषियों को बख्शेंगे नहीं, पीड़ितों को न्याय मिलकर रहेगा, मन की बात में मोदीपहलगाम हमले के दोषियों को बख्शेंगे नहीं, पीड़ितों को न्याय मिलकर रहेगा, मन की बात में मोदीएबीएन सेंट्रल डेस्क। प्रधानमंत्री मोदी ने मन की बात कार्यक्रम में कहा कि जम्मू कश्मीर में पर्यटकों की संख्या में अभूतपूर्व बढ़ोतरी हो रही थी और लोगों की कमाई बढ़ रही थी, लेकिन देश के दुश्मनों को और जम्मू कश्मीर के दुश्मनों को ये रास नहीं आया। आतंकी चाहते हैं कि कश्मीर फिर से तबाह हो जाए। मन की बात कार्यक्रम में पीएम मोदी ने एक बार फिर से पहलगाम हमले को लेकर दुख जताया और साथ ही पहलगाम के दोषियों को कड़ी सजा देने की बात दोहरायी।उन्होंने कहा कि पहलगाम की घटना ने देशवासियों को पीड़ा पहुंचाई है और इसे लेकर देशवासियों के मन में गहरी पीड़ा है। लोग पीड़ित परिजनों के दर्द को महसूस कर सकते हैं। हर भारतीय का खून आतंक की तस्वीरों को देखकर खौल रहा है। ऐसे समय में जब कश्मीर में शांति लौट रही थी और लोकतंत्र मजबूत हो रहा था। पर्यटकों की संख्या में अभूतपूर्व बढ़ोतरी हो रही थी और लोगों की कमाई बढ़ रही थी, लेकिन देश के दुश्मनों को और जम्मू कश्मीर के दुश्मनों को ये रास नहीं आया। आतंकी चाहते हैं कि कश्मीर फिर से तबाह हो जाए। इस मुश्किल वक्त में 140 करोड़ देशवासियों की एकता सबसे बड़ा आधार है। पीएम मोदी ने कहा कि हमें इस चुनौती का सामना करने के लिए अपने संकल्पों को मजबूत करना है। हमें एक दृढ़ राष्ट्र के रूप में अपनी इच्छाशक्ति को मजबूत करना है। भारत के लोगों में जो आक्रोश है, वो पूरी दुनिया में हैं। इस आतंकी हमले के बाद दुनियाभर से लगातार संवेदनाएं आ रही हैं। कई राष्ट्राध्यक्षों ने मुझे भी फोन करके पहलगाम की घटना पर दुख जताया है।इस जघन्य तरीके से किये गये आतंकी हमले की सभी ने कठोर निंदा की है। पूरा विश्व आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में देश के साथ खड़ा है। मैं पीड़ित परिवारों को भरोसा देता हूं उन्हें न्याय मिलेगा... और न्याय मिलकर रहेगा। इस हमले के दोषियों को कठोरतम जवाब दिया जायेगा।
भारत से कौन-कौन से समझौतों को तोड़ने की गीदड़भभकी दे रहा पाकिस्तान, इसका क्या और कितना असर? भारत और पाकिस्तान के बीच अब तक कितने द्विपक्षीय समझौते हुए हैं? ये समझौते किस-किस बात को लेकर हुए हैं? इनके मायने क्या हैं? अगर यह समझौते टूटते हैं तो इनका क्या असर हो सकता है? आइये जानते हैं एबीएन सेंट्रल डेस्क। जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद भारत ने पाकिस्तान के साथ सिंधु जल समझौते को खत्म करने का एलान कर दिया है। इसके अलावा राजनयिक स्तर पर भी कई बड़े एलान हुए हैं। इस बीच पाकिस्तान ने भी दबाव में आते हुए भारत के साथ शिमला, कराची समझौते समेत अलग-अलग द्विपक्षीय समझौतों को तोड़ने की धमकी दी है। ऐसे में यह जानना अहम है कि आखिर भारत और पाकिस्तान के बीच अब तक कितने द्विपक्षीय समझौते हुए हैं? ये समझौते किस-किस बात को लेकर हुए हैं? इनके मायने क्या हैं? अगर यह समझौते टूटते हैं तो इनका क्या असर हो सकता है? आइये जानते हैं। सिंधु जल समझौता : कब हुआ- 19 सितंबर 1960, किस बारे में : भारत और पाकिस्तान के बीच सिंधु जल संधि पर 19 सितंबर 1960 को कराची में हस्ताक्षर हुए थे। समझौता सिंधु नदी और इसकी सहायक नदियों के पानी के इस्तेमाल को लेकर हुआ था। विश्व बैंक की तरफ से पहल के बाद समझौते करने के लिए भारत पाकिस्तान के बीच अलग-अलग स्तर पर 9 साल तक बात चली थी। भारत की तरफ से प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू और पाकिस्तान की तरफ से राष्ट्रपति मोहम्मद अयूब खान ने संधि पर हस्ताक्षर किये थे। सिंधु जल समझौते पर रोक लगाये जाने के बाद पाकिस्तान में जल संकट की स्थिति पैदा हो सकती है। पाकिस्तान की 80 फीसदी खेती योग्य भूमि सिंधु नदी प्रणाली के पानी पर निर्भर है। पानी रोके जाने के बाद अन्न संकट की स्थिति उत्पन्न हो जायेगी। सिंधु और उसकी सहायक नदियों पर पाकिस्तान के प्रमुख शहर कराची, लाहौर, मुल्तान निर्भर हैं। धार्मिक तीर्थस्थलों के दौरे को लेकर समझौता : कब हुआ : सितंबर 1974, किस बारे में : भारत और पाकिस्तान में मौजूद अलग-अलग धर्मस्थलों में पर्यटकों को आवाजाही की सहूलियत देने के लिए समझौता हुआ। पाकिस्तान की 15 जगहें और भारत की पांच जगहें 2018 तक इस समझौते के अंतर्गत रहीं। इनमें भारत से अजमेर शरीफ दरगाह, निजामुद्दीन दरगाह, अमीर खुसरो का मकबरा सबसे ज्यादा पर्यटन वाला स्थल रहा है। वहीं, पाकिस्तान में शादानी दरबार, ननकाना साहिब स्थित गुरुद्वारा और पंज साहिब गुरुद्वारा शामिल है। इसके तहत हर साल धार्मिक त्योहारों के दौरान 3000 सिख तीर्थयात्री को पाकिस्तान जाने की इजाजत मिलती है। हवाई सीमा के उल्लंघन से जुड़ा समझौता : कब हुआ : 6 अप्रैल 1991, किस बारे में : भारत और पाकिस्तान के बीच यह समझौता नई दिल्ली में हुआ था। इसका लक्ष्य पड़ोसी देशों के बीच गलती या अनैच्छिक तरीके से हवाई सीमा के उल्लंघन की घटनाओं को कम करना है। इसके तहत सैन्य एयरक्राफ्ट्स के दोनों देशों की सीमा के 10 किलोमीटर के दायरे में उड़ान भरने पर मनाही है। भारत-पाकिस्तान के एयरक्राफ्ट एक-दूसरे की जल सीमा में भी बिना इजाजत के उड़ान नहीं भर सकते। हालांकि, इस समझौते का दोनों देशों के बीच सबसे ज्यादा उल्लंघन हुआ है। पहलगाम में आतंकी हमले के बाद पाकिस्तान ने भारत की नागरिक उड़ानों के लिए अपनी हवाई सीमा बंद कर ली। बैलिस्टिक मिसाइल के परीक्षण को लेकर समझौता : कब हुआ : अक्तूबर 2005, किस बारे में : भारत-पाकिस्तान के बीच यह समझौता अक्तूबर 2005 में हुआ था। इसके तहत दोनों देशों को किसी बैलिस्टिक मिसाइल के परीक्षण से कम से कम तीन दिन पहले ऐसे टेस्ट की जानकारी देनी होगी। फिर चाहे वह जमीन से लॉन्च होने वाली बैलिस्टिक मिसाइल हो या समुद्री क्षेत्र से। इसके तहत दोनों देश एक-दूसरे की सीमा से 40 किलोमीटर दूर पर लॉन्च साइट नहीं बना सकते। इसके अलावा इनका प्रभावी क्षेत्र भी सीमा से 75 किलोमीटर के दायरे में नहीं होना चाहिए। यह समझौता अब तक कायम रहा है। एलओसी पर संघर्षविराम का समझौता : कब हुआ : नवंबर 2003, किस बारे में : पाकिस्तान और भारत ने लाइन आॅफ कंट्रोल (नियंत्रण रेखा) पर संघर्षविराम को लेकर समझौता किया। हालांकि, पाकिस्तान ने समय-समय पर भारत के साथ इस समझौते का उल्लंघन किया है। भारत सरकार ने भी पाकिस्तान की इन नापाक कोशिशों का मुहंतोड़ जवाब दिया है।
निशाने पर लश्कर, जैश, हिजबुल के टॉप आंतकी पहलगाम हमले के बाद खुफिया एजेंसियों ने 14 संदिग्ध आतंकवादियों की लिस्ट बनायी है, जिनमें लश्कर, जैश और हिजबुल के सदस्य हैं। पीएम मोदी ने सजा का आश्वासन दिया है। खुफिया एजेंसियों ने 14 संदिग्ध आतंकवादियों की लिस्ट बनायी है लिस्ट में लश्कर, जैश और हिजबुल के सदस्य शामिल हैं पीएम मोदी ने आतंकियों को सजा का आश्वासन दिया है एबीएन सेंट्रल डेस्क। पहलगाम आतंकी हमले के बाद खुफिया एजेंसियों ने हमले की साजिश रचने के संदिग्ध स्थानीय आतंकवादियों की तलाश तेज कर दी है। इस नरसंहार में 26 लोगों की जान चली गयी। दक्षिण कश्मीर के अनंतनाग, शोपियां और पुलवामा जिलों में सक्रिय 14 आतंकवादियों की लिस्ट तैयार की गयी है। लिस्ट के अनुसार पहचाने गए आतंकवादियों में से आठ लश्कर-ए-तैयबा से जुड़े हैं, जबकि तीन-तीन जैश-ए-मोहम्मद और हिजबुल मुजाहिदीन से जुड़े हैं।लिस्ट में शामिल एक व्यक्ति वांटेड लश्कर आतंकवादी एहसान उल हक पहले ही कार्रवाई का सामना कर चुका है। हाल ही में सुरक्षा बलों ने पुलवामा में उसके घर को ध्वस्त कर दिया। पहलगाम हत्याकांड में अब तक क्या? पहलगाम हमले में 16 लोगों को बैसरन मैदान में गोली मार दी गयी। इसे 2019 के पुलवामा बम विस्फोट के बाद क्षेत्र में सबसे घातक आतंकवादी हमलों में से एक माना गया। हमले के बाद भारत ने पाकिस्तान के खिलाफ कई कदमों की घोषणा की। इसमें सिंधु जल संधि को रद्द करना शामिल था। भारत ने अटारी में एकीकृत चेक पोस्ट (कउढ) को बंद करने, पाकिस्तानी नागरिकों के लिए सार्क वीजा छूट योजना को रद्द करने और उच्चायोग में शीर्ष अधिकारियों की संख्या कम करने की भी घोषणा की। पाकिस्तान ने सिंधु जल संधि को रद्द करने के भारत के कदम को खारिज कर दिया और चेतावनी दी कि पानी को रोकने का कोई भी प्रयास युद्ध की कार्रवाई मानी जायेगी। उसने 1972 के शिमला समझौते को रद्द करने की भी धमकी दी, जो नियंत्रण रेखा को मान्यता देता है। इस बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि आतंकवादियों का धरती के अंत तक पीछा किया जायेगा और आश्वासन दिया कि हर आतंकवादी और उनके समर्थकों की पहचान की जायेगी, उनका पता लगाया जायेगा और उन्हें सजा दी जायेगी।
देश की 2,16,000 पंचायतों को गरीबी उन्मूलन और बेहतर आजीविका, स्वास्थ्य, जल की पर्याप्तता, समुचित अधोसंरचना और सुशासन जैसे मानकों पर आंका गया और रैंकिंग प्रदान की गयी एबीएन सेंट्रल डेस्क। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्रीय पंचायती राज दिवस के अवसर पर दिए अपने संबोधन में कहा कि बीते दशक में कई पहल की गयी हैं। इस संबंध में हाल ही में पंचायती राज मंत्रालय ने जमीनी स्तर पर सतत विकास लक्ष्यों को हासिल करने की दिशा में एक महत्त्वपूर्ण कदम उठाया और पंचायत एडवांसमेंट इंडेक्स (पीएआई) शुरू किया। देश की 2,16,000 पंचायतों को गरीबी उन्मूलन और बेहतर आजीविका, स्वास्थ्य, जल की पर्याप्तता, समुचित अधोसंरचना और सुशासन जैसे मानकों पर आंका गया और रैंकिंग प्रदान की गयी। यह सूचकांक देश के सतत विकास के एजेंडे में ग्रामीण स्थानीय निकायों की अहम भूमिका की साहसी स्वीकारोक्ति है। संयुक्त राष्ट्र जहां विभिन्न देशों के स्तर पर सतत विकास लक्ष्यों के क्रियान्वयन की प्रगति की निगरानी करता है और नीति आयोग का एसडीजी इंडिया इंडेक्स राज्य स्तर के प्रदर्शन पर नजर रखता है वहीं हाल के वर्षों में इन लक्ष्यों के स्थानीयकरण पर जोर दिया गया है ताकि उनका प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जा सके। इस संदर्भ में पीएआई एक स्वागतयोग्य कदम है और भविष्य में इसकी कवरेज को सभी 2,69,000 पंचायतों तक बढ़ाया जाना चाहिए। बहरहाल, इसके परिणाम चिंताजनक हैं। एक भी पंचायत ऐसी नहीं रही जिसने अचीवर्स की श्रेणी में जगह बनायी हो। केवल 699 पंचायतों को अग्रणी घोषित किया गया है। इसके अलावा बहुत बड़े पैमाने पर भौगोलिक असमानताएं भी हैं। 699 अग्रणी पंचायतों में से 346 गुजरात की, 270 तेलंगाना की और 42 त्रिपुरा की हैं, जबकि कई राज्य काफी पीछे हैं। पंचायतें शासन का वह स्तर हैं जो जनता के सबसे करीब होता है। शीर्ष से नीचे की ओर आने के मॉडल के बजाय पंचायत के नेतृत्व वाला रूख ऐसी रणनीतियां बनाने की इजाजत देता है जो हर गांव की खास सामाजिक-आर्थिक, सांस्कृतिक और पर्यावरण संबंधी चुनौतियों को ध्यान में रख सकें। भारत जैसे विविधतापूर्ण देश में तो यह और भी अहम है जहां अक्सर सबके लिए एक समान नीतियां नाकाम साबित होती हैं। बहरहाल, अपर्याप्त वित्तीय संसाधन भी ग्रामीण स्थानीय निकायों के सुचारू कामकाज में एक बड़ी बाधा हैं। देश की अधिकांश पंचायतें फंड के लिए सरकार के ऊपरी स्तरों पर बहुत अधिक निर्भर रहती हैं और उनके पास अपने राजस्व के लिए बहुत सीमित संसाधन होते हैं। संपत्ति, स्थानीय बाजारों या कारोबारों पर या तो समुचित कर नहीं लग पाता या फिर इन पर कर लगाना राजनीतिक रूप से बहुत संवेदनशील होता है, खासतौर पर गरीब या छोटे गांवों में ऐसा करना मुश्किल होता है। रिजर्व बैंक द्वारा पंचायतों की वित्तीय स्थिति पर कराया गया एक अध्ययन बताता है कि 2022-23 में सभी स्रोतों से प्रति पंचायत औसत राजस्व महज 21.23 लाख रुपये था। इसमें से स्थानीय करों और शुल्क द्वारा उनका निजी राजस्व कुल राजस्व का केवल 1.1 फीसदी ही था। सीमित तकनीकी अधोसंरचना और डिजिटल साक्षरता की कमी भी समस्या को बढ़ाती है। इनकी वजह से निगरानी, आकलन और प्रगति की रिपोर्टिंग पर असर पड़ता है। जमीनी स्तर पर प्रयासों का विभाजित होना भी उतना ही दिक्कतदेह है। गांवों में कई सरकारी विभाग बहुत कम तालमेल के साथ एक ही समय पर काम करते हैं। इसका परिणाम काम के दोहराव और संसाधनों की बरबादी के रूप में सामने आता है। विभिन्न विभागों की गतिविधियों और योजनाओं में तालमेल नहीं होने पर अक्सर सतत विकास लक्ष्यों के अधीन परिकल्पित समग्र विकास दूर ही बना रहता है। पंचायतों की पूर्ण संभावनाओं का इस्तेमाल करने के लिए यह प्रयास किया जाना चाहिए कि उनकी सांस्थानिक क्षमता बढ़ाई जा सके। इसमें लक्षित प्रशिक्षण मुहैया कराना, डिजिटल समावेशन को बढ़ाना, निर्णय प्रक्रिया में सामुदायिक भागीदारी को बढ़ावा और फंड का समय पर आवंटन शामिल है। विभागों के बीच बेहतर समन्वय भी महत्त्वपूर्ण है।
पाकिस्तान में पानी की किल्लत तय सिंधु जल संधि रद्द होने का जल्द दिखेगा असर; भारत का जल भंडारण विस्तार पर जोर एबीएन सेंट्रल डेस्क। आने वाले दिनों में जमीनी स्तर पर ऐसी कार्रवाई देखी जा सकती है जिससे 1960 की सिंधु जल संधि पर लगी रोक का प्रभाव दिखने लगेगा। इस संधि के जरिये भारत से पाकिस्तान की सिंधु नदी घाटी में बहने वाली नदियों के पानी के इस्तेमाल पर नियंत्रण किया जाता है। इस मसले की जानकारी रखने वाले सूत्र ने यह जानकारी दी है। सूत्र ने इस तरह की धारणा को भी खारिज कर दिया कि पश्चिम की नदियों, सिंधु, झेलम और चिनाब पर भारत की जल भंडारण क्षमता बढ़ाए बिना कोई कार्रवाई नहीं की जा सकती है जिन पर संधि के मुताबिक पाकिस्तान का अधिकार है। सूत्र ने बताया कि इन नदियों पर भंडारण क्षमता का विस्तार अब एजेंडे में है जो संधि की उन पाबंदियों के न रहने से अधिक संभव हो गया है जो पानी के एक नदी घाटी से दूसरी नदी घाटी में हस्तांतरण पर लगाया गया था।मंगलवार को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में एक आतंकवादी हमले में 26 लोगों के मारे जाने के एक दिन बाद, भारत ने सिंधु जल संधि को रद्द कर दिया और पाकिस्तान के साथ राजनयिक संबंधों को कम कर दिया। सरकार ने कहा था कि हमले के सीमा पार संबंध थे और घोषणा की कि जब तक पाकिस्तान सीमा पार आतंकवाद को समर्थन देना पूरी तरह खत्म नहीं करता है तब तक इस जल संधि को तत्काल प्रभाव से स्थगित किया जा रहा है। विश्व बैंक की मध्यस्थता में इस संधि पर भारत और पाकिस्तान ने 19 सितंबर, 1960 को हस्ताक्षर किया था। इस संधि के तहत, सिंधु नदी प्रणाली के उपयोग के संबंध में दोनों देशों के अधिकारों और दायित्वों को परिभाषित किया। इस संधि के तहत पश्चिम की नदियों, सिंधु, झेलम और चिनाब के पानी को पाकिस्तान और पूर्व की नदियों, रावी, व्यास और सतलुज के पानी को भारत को आवंटित किया गया था। भारत के सिंधु जल संधि मामले के प्रबंधन से पहली बार जुड़े सूत्र ने कहा, पाकिस्तान के लिए न केवल पानी की मात्रा बल्कि प्रवाह का अनुमान लगाना भी उतना ही महत्वपूर्ण है और इन चीजों को भारत पहले से ही प्रभावित कर सकता है। सूत्र ने बताया, आने वाले समय में पानी के प्रवाह की भविष्यवाणी पर असर दिखने की संभावना है क्योंकि भारत उन अधिकारों को पूरी तरह से लागू करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है जो उसे संधि के तहत मिले थे और अब उस संधि की कुछ पाबंदियां अब लागू नहीं हैं। गौरतलब है कि पाकिस्तान की 80 प्रतिशत से अधिक सिंचाई सिंधु नदी घाटी के पानी पर निर्भर करती है। सूत्र ने बताया कि इस समझौते के तहत, भारत ने पश्चिमी नदियों का उपयोग गैर-उपभोग वाले उद्देश्यों के लिए करने का अधिकार बरकरार रखा था जिसमें सीमित सिंचाई और जलविद्युत उत्पादन शामिल है। हालांकि, उनके प्रवाह को इस तरह से संग्रहित करने या बदलने पर बाधाएं थीं जिससे पानी का प्रवाह प्रभावित हो सकता था। संधि के तहत भारत को पहले से जो अधिकार मिले हुए थे उसका अधिकतम इस्तेमाल करते हुए भारत पश्चिमी नदियों से संभवत: 20,000 मेगावॉट जलविद्युत क्षमता की संभावनाएं तैयार कर सकता है क्योंकि 2016 में करीब 3,000 मेगावॉट का उत्पादन ही हो पाया था।
हवाई यात्रा में जबरदस्त उछाल एबीएन सेंट्रल डेस्क। देश में घरेलू एयरलाइन कंपनियों से मार्च में 1.45 करोड़ लोगों ने यात्रा की। यह एक साल पहले की समान अवधि की तुलना में 8.79 प्रतिशत अधिक है। शनिवार को जारी आधिकारिक आंकड़ों में यह जानकारी दी गयी। भारतीय एयरलाइन कंपनियों के जरिये पिछले साल मार्च में कुल 1.33 करोड़ लोगों ने यात्रा की थी। नागर विमानन महानिदेशालय (डीजीसीए) ने अपनी मासिक घरेलू यात्री परिवहन रिपोर्ट में कहा कि मार्च, 2025 के दौरान घरेलू एयरलाइन से यात्रा करने वाले यात्रियों की संख्या 145.42 लाख थी, जबकि पिछले वर्ष इसी अवधि के दौरान यह संख्या 133.68 लाख थी। बीते महीने में इंडिगो से कुल 93.1 लाख लोगों ने यात्रा की, जिससे उसकी बाजार हिस्सेदारी 64 प्रतिशत रही। वहीं एयर इंडिया समूह (पूर्ण सेवा प्रदाता एयर इंडिया और किफायती विमान सेवा एयर इंडिया एक्सप्रेस) से 38.8 लाख लोगों ने यात्रा की, जिससे उसकी बाजार हिस्सेदारी 26.7 प्रतिशत रही। दो अन्य प्रमुख एयरलाइन कंपनियों- अकासा एयर और स्पाइसजेट से इस साल मार्च में क्रमश: 7.2 लाख और 4.8 लाख लोगों ने यात्रा की, जिससे इन दोनों कंपनियों की बाजार हिस्सेदारी क्रमश: पांच प्रतिशत और 3.3 प्रतिशत हो गयी। समय पर उड़ाने भरने या गंतव्य पर पहुंचने के मामले में इंडिगो का प्रदर्शन सबसे अच्छा रहा। कंपनी का इस मामले में प्रदर्शन 88.1 प्रतिशत पर रहा। उसके बाद अकासा एयर का स्थान रहा जिसने 86.9 प्रतिशत जबकि एयर इंडिया समूह और स्पाइसजेट की क्रमश: 82 प्रतिशत और 72.1 प्रतिशत उड़ानें समय पर रहीं। समय पर उड़ान भरने या गंतव्य पर पहुंचने की गणना प्रमुख हवाई अड्डों - बेंगलुरु, दिल्ली, हैदराबाद और मुंबई के लिए की गयी है।
पहलगाम हमले में पाकिस्तान का सीधा हाथ, भारत ने पेश किए पक्के सबूत ! पूरा विश्व खड़ा साथLOC पर जवाबी कार्रवाई: पाकिस्तान की गोलीबारी का भारतीय सेना ने दिया तीखा जवाब एबीएन सेन्ट्रल डेस्क। जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद भारत ने पाकिस्तान की भूमिका को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर निर्णायक कार्रवाई शुरू कर दी है। भारत ने विदेशी सरकारों के सामने तकनीकी खुफिया और मानव स्रोतों के जरिए जुटाए गए ठोस सबूत पेश किए हैं, जिनसे साफ होता है कि इस हमले में पाकिस्तान स्थित आतंकी संगठनों की सीधी भूमिका है।पाकिस्तानी कनेक्शन की पुष्टिभारतीय एजेंसियों ने इस हमले के लिए जिम्मेदार आतंकियों की पहचान कर ली है। जांच में यह सामने आया है कि हमले में शामिल आतंकियों का सीधा संबंध पाकिस्तान स्थित आतंकी संगठन द रेजिस्टेंस फ्रंट (TRF) से है, जो लश्कर-ए-तैयबा का सहयोगी संगठन है। इलेक्ट्रॉनिक सर्विलांस में इन आतंकियों के सिग्नल पाकिस्तान के दो ठिकानों से जुड़े पाए गए हैं।PM मोदी की 13 राष्ट्राध्यक्षों से बात प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बीते दो दिनों में अमेरिका, ब्रिटेन, फ्रांस, जापान, इजराइल, इटली, मिस्र, जॉर्डन, सऊदी अरब, नेपाल, मॉरीशस, डच और ऑस्ट्रेलिया जैसे 13 देशों के प्रमुखों से बातचीत की। सभी नेताओं ने हमले की निंदा करते हुए भारत के साथ एकजुटता जताई। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने भी कई देशों के विदेश मंत्रियों व राजदूतों से संवाद कर भारत की स्थिति स्पष्ट की।भारत की ताबड़तोड़ कार्रवाईभारत ने पाकिस्तान के खिलाफ निम्नलिखित कड़े कदम उठाए हैं:सिंधु जल संधि निलंबित: केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सीआर पाटिल ने कहा कि अब पाकिस्तान को एक बूंद पानी नहीं मिलेगा।कूटनीतिक संबंध सीमित: पाकिस्तान के साथ राजनयिक स्तर पर संपर्क और दूतावास की गतिविधियों को सीमित किया गया।वीजा सेवाएं रोक दी गईं: पाकिस्तानी नागरिकों के लिए वीज़ा तत्काल प्रभाव से निलंबित, पाक हिंदुओं के लिए छूट बनी रहेगी।
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