एबीएन सेंट्रल डेस्क। कश्मीर घाटी का इतिहास काफी प्राचीन है और इसमें कई राजवंशों और संस्कृतियों का प्रभाव देखने को मिलता है। यह क्षेत्र कभी हिंदू धर्म और बौद्ध धर्म का केंद्र था, और बाद में मुस्लिम शासन के अधीन भी रहा है। कल्हण की राजतरंगिणी कश्मीर के इतिहास का एक महत्वपूर्ण स्रोत है, जिसमें घाटी के राजाओं और शासकों का विवरण दिया गया है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, कश्मीर घाटी में ऋषि कश्यप ने झील को सुखाकर घाटी को वास योग्य बनाया था। महाभारत और नीलम पुराण में भी कश्मीर घाटी का उल्लेख मिलता है। प्राचीन काल में कश्मीर में हिंदू और बौद्ध धर्म का प्रभाव था। मौर्य सम्राट अशोक के शासनकाल में कश्मीर में बौद्ध धर्म का प्रसार हुआ था। कुषाण शासक कनिष्क के शासनकाल में कश्मीर बौद्ध संस्कृति का केंद्र बना था। 7वीं से 14वीं शताब्दी तक कश्मीर में हिंदू राजवंशों का शासन था। 14वीं शताब्दी में कश्मीर में इस्लाम का आगमन हुआ और 1320 में रिंचन शाह कश्मीर का पहला मुस्लिम शासक बना। कश्मीर सल्तनत ने 1320 से 1586 तक शासन किया। 1586 में कश्मीर मुगल साम्राज्य के अधीन आ गया। 1846 में जम्मू और कश्मीर रियासत ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी के अधीन आ गयी। 1857 में भारत के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम के बाद जम्मू और कश्मीर एक रियासत के रूप में अस्तित्व में आयी। 1947 में भारत के विभाजन के समय, जम्मू और कश्मीर के शासक महाराजा हरि सिंह ने भारत में विलय का फैसला लिया, जो भारत-पाकिस्तान युद्ध के दौरान हुआ। 1947 से जम्मू और कश्मीर भारत का हिस्सा है। 1957 में जम्मू और कश्मीर का संविधान लागू हुआ। 2019 में अनुच्छेद 370 को निरस्त कर दिया गया और जम्मू और कश्मीर को एक केंद्र शासित प्रदेश बना दिया गया। कश्मीर का इतिहास एक जटिल और समृद्ध इतिहास है, जिसमें विभिन्न संस्कृतियों और राजवंशों का प्रभाव देखने को मिलता है। यह क्षेत्र प्राचीन काल से ही अपनी प्राकृतिक सुंदरता और सांस्कृतिक विरासत के लिए जाना जाता है। कश्मीर का प्राकृतिक सौंदर्य जितना विश्वविख्यात है, उतना ही उसकी साहित्यिक सांस्कृतिक विरासत भी मूल्यवान और सर्वविदित है। ऊंची-ऊंची पहाड़ियां घाटियों के बीच में भास्वरित होती झीलें, झाड़ियों से भरे जंगल फूलों से घिरी पगडंडियां केसर-पुष्पों से महकते खेत, कल-कल करते झरने, बर्फ से आच्छादित पर्वतमालाएं आदि कश्मीर की अनुपम खूबसूरती को स्वत: ही बयां करते हैं। प्राकृतिक सौन्दर्य के साथ-साथ कश्मीर की सांस्कृतिक साहित्यिक धरोहर भी कम अनूठी और गौरवशाली नहीं है। इस धरती को धर्म-दर्शन और विद्या-बुद्धि की पुण्य-स्थली माना जाता है। शारदापीठ भी कहा जाता है और रेश्यवार (ऋषियों की बगीचों) के नाम से भी अभिहित किया जाता है। इस भूखण्ड ने भारतीय ज्ञानपरम्परा को बड़े-बड़े मनीषी विद्वान और कालजयी महापुरुष दिये हैं जिनका अवदान सदा स्मरणीय रहेगा। महान रसशास्त्री और शैवाचार्य अभिनव गुप्त, कवि-इतिहासकार (राजतरंगिणीकार) कल्हण काव्यशास्त्री मम्मट आनंदवर्धन, वामन, आचार्य क्षेमेन्द्र आदि के नाम इस सन्दर्भ में बड़े गर्व के साथ लिये जा सकते हैं।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। वित्त वर्ष 2023-24 में रिकॉर्ड उत्पादन स्तर पर पहुंचने के बाद, वित्त वर्ष 2024-25 में देश में कुछ प्रमुख खनिजों के उत्पादन में मजबूत वृद्धि देखी गयी। मूल्य के हिसाब से कुल एमसीडीआर खनिज उत्पादन में लौह अयस्क का योगदान 70 प्रतिशत है। अनंतिम आंकड़ों के अनुसार, वित्त वर्ष 2024-25 में 289 मिलियन मीट्रिक टन (एमएमटी) लौह अयस्क के उत्पादन ने 4.3 प्रतिशत की वृद्धि के साथ वित्त वर्ष 2023-24 में हासिल किये गये 277 एमएमटी के उत्पादन रिकॉर्ड को तोड़ दिया है। इसी तरह, मैंगनीज अयस्क का उत्पादन भी वित्त वर्ष 2023-24 में हासिल किये गये 3.4 एमएमटी के उत्पादन रिकॉर्ड को पार कर गया है। वित्त वर्ष 2024-25 में यह 11.8 प्रतिशत बढ़कर 3.8 एमएमटी हो गया है। बॉक्साइट का उत्पादन भी वित्त वर्ष 2023-24 में 24 एमएमटी से 2.9 प्रतिशत बढ़कर वित्त वर्ष 2024-25 में 24.7 एमएमटी हो गया है। इसी अवधि के दौरान, सीसा सांद्रण उत्पादन 3.1 प्रतिशत वृद्धि के साथ 381 हजार टन (टीएचटी) से बढ़कर 393 टीएचटी हो गया। गैर लौह धातु क्षेत्र में वित्त वर्ष 2024-25 में प्राथमिक एल्युमीनियम उत्पादन ने वित्त वर्ष 2023-24 के उत्पादन रिकॉर्ड को तोड़ दिया है। वित्त वर्ष 2023-24 में प्राथमिक एल्युमीनियम उत्पादन 41.6 लाख टन (एलटी) था, वित्त वर्ष 2024-25 के दौरान यह बढ़कर 42 एलटी हो गया। रिफाइंड कॉपर उत्पादन में 12.6 प्रतिशत की जोरदार वृद्धि देखी गयी। वित्त वर्ष 2023-24 में यह 5.09 एलटी था, जो वित्त वर्ष 2024-25 में बढ़कर 5.73 एलटी हो गया। भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा एल्युमीनियम उत्पादक, रिफाइंड कॉपर में शीर्ष 10 उत्पादकों में से एक और दुनिया का चौथा सबसे बड़ा लौह अयस्क उत्पादक है। चालू वित्त वर्ष में लौह अयस्क के उत्पादन में निरंतर वृद्धि उपयोगकर्ता उद्योग यानी स्टील में मजबूत मांग की स्थिति को दर्शाती है। एल्युमीनियम और तांबे में वृद्धि के साथ, ये वृद्धि रुझान ऊर्जा, बुनियादी ढांचे, निर्माण, आॅटोमोटिव और मशीनरी जैसे उपयोगकर्ता क्षेत्रों में निरंतर मजबूत आर्थिक गतिविधि की ओर इशारा करते हैं।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने दोहराया है कि आंतरिक और बाह्य सुरक्षा के मुद्दे पर वह केंद्र सरकार के साथ हैं। तृणमूल कांग्रेस सुप्रीमो ने सोमवार को यहां संवाददाताओं से बातचीत के दौरान यह बात कही। वह स्थिति का जायजा लेने के लिए मुर्शिदाबाद के दौरे पर हैं।उन्होंने 11 और 12 अप्रैल को वक्फ विरोध प्रदर्शन के दौरान प्रभावित लोगों से भी बात की। सुश्री बनर्जी बरहामपुर में रुककर एक प्रशासनिक बैठक करेंगी। वह लोगों से मिलने के लिए मंगलवार को धुलियान और सुती भी जायेंगी। उन्होंने कहा, हमने स्पष्ट रूप से कहा है कि हमारी पार्टी (तृणमूल कांग्रेस) आंतरिक और बाह्य सुरक्षा के मुद्दे पर सरकार के साथ है। हम यहां फूट डालो और राज करो की नीति नहीं अपना रहे हैं। सुश्री बनर्जी ने कहा, मैं मुर्शिदाबाद पहले भी जा सकती थी, लेकिन अगर वहां शांति और स्थिरता नहीं है, तो हमें वहां जाकर अशांति नहीं फैलानी चाहिए। आज मैं वहां जा रही हूं, क्योंकि वहां अब स्थिरता है। मैं बरहामपुर पहुंचकर समीक्षा बैठक करूंगी। कल मैं धुलियान जाऊंगी और जिन लोगों के घर और दुकानें क्षतिग्रस्त हुई हैं, उन्हें जरूरी मुआवजा प्रदान करूंगी। गौरतलब है कि सड़क मार्ग से मुर्शिदाबाद की सुश्री बनर्जी की यात्रा सीमावर्ती जिले में वक्फ (संशोधन) अधिनियम के विरोध के दौरान सांप्रदायिक हिंसा के लगभग तीन सप्ताह बाद हुई है। यह विरोध प्रदर्शन 11 अप्रैल को हिंसक हो गया था, जिसमें दो लोगों की मौत हो गयी और कई अन्य घायल हो गये। इस दौरान बड़े पैमाने पर लोग विस्थापित भी हुए। मुख्यमंत्री ने बताया कि वह सड़क मार्ग से ही आगे की यात्रा करेंगी, क्योंकि खराब मौसम के कारण हेलीकॉप्टर से यात्रा करना खतरनाक होगा। इधर, दीघा जगन्नाथ मंदिर विवाद पर उन्होंने कहा कि वह पुरी के मंदिर और जगन्नाथ धाम का सम्मान करती हैं। उन्होंने कहा, हम पुरी के मंदिर का सम्मान करते हैं और हम जगन्नाथ धाम का भी सम्मान करते हैं। काली मंदिर और गुरुद्वारा पूरे देश में हर जगह हैं। मंदिर वहां और हर जगह हैं। फिर इस मुद्दे पर इतना गुस्सा क्यों है। गौरतलब है कि सुश्री बनर्जी 30 अप्रैल को दीघा में जगन्नाथ मंदिर के उद्घाटन के दौरान मौजूद थीं।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। प्रसिद्ध आध्यात्मिक गुरु और पद्मश्री सम्मानित बाबा शिवानंद का शनिवार रात स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के चलते निधन हो गया। वे वाराणसी के बीएचयू अस्पताल में भर्ती थे। बाबा के शिष्यों का दावा है कि उनकी उम्र 128 वर्ष थी। बाबा शिवानंद को 30 अप्रैल को कुछ स्वास्थ्य परेशानियों के चलते बीएचयू अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहां उन्होंने शनिवार देर रात अंतिम सांस ली। उनका पार्थिव शरीर कबीरनगर कॉलोनी स्थित निवास स्थान पर अंतिम दर्शन के लिए रखा गया है। शिष्यों के अनुसार, अंतिम संस्कार आज शाम किया जायेगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बाबा शिवानंद के निधन पर शोक जताया। अपने एक्स अकाउंट पर पीएम मोदी ने लिखा, योग साधक और काशी निवासी शिवानंद बाबा जी के निधन से अत्यंत दुख हुआ है। योग और साधना को समर्पित उनका जीवन देश की हर पीढ़ी को प्रेरित करता रहेगा। योग के जरिए समाज की सेवा के लिए उन्हें पद्मश्री से सम्मानित भी किया गया था। शिवानंद बाबा का शिवलोक प्रयाण हम सब काशीवासियों और उनसे प्रेरणा लेने वाले करोड़ों लोगों के लिए अपूरणीय क्षति है। मैं इस दु:ख की घड़ी में उन्हें श्रद्धांजलि देता हूं। बचपन में ही माता-पिता को खोया बाबा शिवानंद का जन्म 8 अगस्त 1896 को तत्कालीन पूर्वी बंगाल (अब बांग्लादेश) के सिलहट जिले में हुआ था। जब वे सिर्फ 6 वर्ष के थे, तभी भुखमरी के कारण उनके माता-पिता का निधन हो गया था। इसके बाद ओंकारानंद नामक संत ने उन्हें अपनी देखरेख में लिया और उन्हें आध्यात्मिक शिक्षा और अनुशासन की राह पर चलाया। संयमित जीवनशैली ही लंबी उम्र का रहस्य बाबा शिवानंद ने अपना जीवन त्याग, संयम और योग साधना में समर्पित कर दिया था। वे हर दिन सुबह 3 बजे उठते थे, कठिन योगाभ्यास करते और अपने सारे कार्य स्वयं करते थे। उनका भोजन बहुत साधारण था—सिर्फ उबला हुआ खाना और वह भी आधा पेट। वे गर्मियों में एसी और सर्दियों में हीटर का प्रयोग नहीं करते थे, बल्कि जमीन पर चटाई बिछाकर लकड़ी के तकिये पर सोते थे। कभी नहीं पड़े बीमार शिष्यों के अनुसार बाबा शिवानंद ने कभी कोई बीमारी नहीं झेली। वर्ष 2019 में कोलकाता और चेन्नई स्थित अपोलो अस्पतालों में जब उनका मेडिकल परीक्षण कराया गया, तो उन्हें पूरी तरह स्वस्थ पाया गया था। 2022 में मिला था पद्मश्री, पीएम मोदी हुए थे प्रभावित 21 मार्च 2022 को बाबा शिवानंद को राष्ट्रपति भवनमें आयोजित समारोह में तत्कालीन राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने पद्मश्री सम्मान से सम्मानित किया था। जब सफेद धोती-कुर्ता पहने हुए, 125 वर्ष के बाबा शिवानंद मंच पर पहुंचे, तो उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी को प्रणाम किया। यह दृश्य भावुक कर देने वाला था, जब पीएम मोदी भी अपनी कुर्सी से उठकर हाथ जोड़कर उन्हें झुककर प्रणाम किया। राष्ट्रपति कोविंद ने भी उन्हें सम्मानपूर्वक अपने हाथों से उठाया था। सीएम योगी ने दी श्रद्धांजलि उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बाबा शिवानंद के निधन पर शोक व्यक्त करते हुए कहा, काशी के प्रसिद्ध योगगुरु पद्मश्री स्वामी शिवानंद जी का निधन अत्यंत दु:खद है। योग क्षेत्र में उनका योगदान अविस्मरणीय है। आपकी साधना और योगमय जीवन संपूर्ण समाज के लिए प्रेरणा है। बाबा विश्वनाथ से प्रार्थना है कि दिवंगत आत्मा को मोक्ष प्रदान करें और शोकाकुल अनुयायियों को यह दु:ख सहने की शक्ति दें। ओम शांति!
एबीएन सेंट्रल डेस्क। उत्तर प्रदेश में समाजवादी मुखिया अखिलेश यादव को राज्य में मुस्लिम तुष्टिकरण और पीडीए राजनीति की चिंता है और यही कारण है कि वे कहते हैं कानपुर के शहीद शुभम द्विवेदी के परिवार से उनका कोई संबंध नहीं है और उनके घर जाने का उनके पास समय नहीं है। कश्मीर घाटी के पहलगाम हमले में 26 निहत्थे निर्दोष पर्यटकों की धर्म पूछकर और कलमा न पढ़ पाने पर की गई नृशंस हत्याओं के बाद, देश में आतंकवाद के खिलाफ भीषण आक्रोश है। देश का जन जन पाकिस्तान से बदला लेने के लिए तड़प रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पहले बिहार की मधुबनी रैली में और फिर मन की बात रेडियो कार्यक्रम में देश को विश्वास दिलाया है कि पीड़ितों को न्याय मिलकर रहेगा तथा पाकिस्तान को ऐसा दंड दिया जायेगा, जिसकी उसने कल्पना भी नहीं की होगी। आतंकवादी घटनाओं के इतिहास में ऐसा पहली बार हुआ कि देश के गृहमंत्री तुरंत अपने सभी कार्यक्रम रद करके घटनास्थल पहुंचे और पीड़ितों के साथ खड़े रहे। इस घटना के बाद से भारत के आतंकवाद से निपटने के निर्णय को विश्व के सभी प्रमुख देशों ने अपना पूरा समर्थन दिया है। लगभग पूरा वैश्विक समुदाय संकट की इस घड़ी में भारत के साथ खड़ा हुआ दिखाई दे रहा है। भारत के विरोधी दलों की स्थिति इसके पूर्णतया विपरीत है। भारत सरकार द्वारा बुलायी गयी सर्वदलीय बैठक में तो विपक्ष ने सरकार का साथ देते हुए पहलगाम हमले की निंदा की तथा सरकार के निर्णयों का पूर्ण समर्थन देने की बात की किंतु कुछ ही घंटों में इनके तेवर बदल गये और ये वापस अपनी तुष्टीकरण की राजनीति में लग गये। स्वाभाविक रूप से इनके पाकिस्तान परस्त एजेंडा का नेतृत्व कांग्रेस पार्टी कर रही है जिसने अपनी सोशल मीडिया टीम के माध्यम से प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के विरुद्ध अत्यंत निंदनीय कैम्पेन आरंभ किया है। कांग्रेस पार्टी द्वारा जारी एक ताजा मीम में प्रधानमंत्री का शीर्ष रहित स्केच दिखाया गया है। कांग्रेस सहित विपक्ष के सभी नेता और प्रवक्ता टीवी चैनलों तथा सार्वजनिक मंचों पर जिस प्रकार की बयानबाजी कर रहे हैं उससे स्पष्ट है इनको देश से कोई मतलब नहीं है बस अपने वोट बैंक को खुश करना है भले ही देश की सुरक्षा को दांव पर क्यों न लगाना पड़े। आज कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, राजद और आम आदमी पार्टी के प्रवक्ताओं की बयानबाजी कर रहे हैं इन नेताओं के गिरे हुए स्तर का प्रमाण है। पाकिस्तानी माडिया व यूटूबूर्स विरोधी दलों के इन्हीं नेताओं के बयानों को आधार मानकर भारत के खिलाफ प्रोपोगैंडा चला रहा है। सबसे पहले गांधी परिवार के दामाद रॉबर्ट वार्ड्रा जिस पर आर्थिक भ्रष्टाचार के मामले में गिरफ्तारी की तलवार लटक रही है उसने आपत्तिजनक बयान दिया फिर कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धरमैया जो मुस्लिम तुष्टीकरण और जातिवाद की राजनीति में गले तक फंसे हैं ने कहा कि इस समय पाकिस्तान के खिलाफ युद्ध छेड़ने की कोई आवश्यकता नहीं है। कर्नाटक सरकार के ही एक मंत्री ने कहा कि आतंकियों ने धर्म पूछ कर हत्याएं नहीं की हैं। महाराष्ट्र कांग्रेस के नेता और विधायक विजय वडेटटीवार ने पीड़ितों की गवाही पर ही प्रश्न खड़े कर दिये। उनका कहना है कि क्या आतंकवादियों के पास लोगों को गोली मारने से पहले उनका धर्म पूछने का समय होता है। उनसे पहले बिलकुल यही टिप्पणी कर्नाटक के मंत्री आरबी थिम्मापुर ने की थी। जब जनता में इन विधायकों के खिलाफ आक्रोश बढ़ा तब ये अपने बयान से पलट गये। उधर, कांग्रेस नेता सैफुद्दीन सोज अनगर्ल बयानबाजी कर चुके हैं। कांग्रेस का पूरा आईटी सेल अपनी गालीबाज प्रवक्ता के नेतृत्व में अनर्गल प्रलाप कर रहा है। उत्तर प्रदेश में समाजवादी मुखिया अखिलेश यादव को राज्य में मुस्लिम तुष्टिकरण और पीडीए राजनीति की चिंता है और यही कारण है कि वे कहते हैं कानपुर के शहीद शुभम द्विवेदी के परिवार से उनका कोई संबंध नहीं है और उनके घर जाने का उनके पास समय नहीं हैं। वहीं सरकार को घेरने के लिए वो बलिदानियों को 10-10 करोड़ का मुआवजा देने की मांग कर रहे हैं और भाजपा सरकार पर हमलावर हैं। स्मरणीय है कि ये यह वही अखिलेश यादव हैं जो माफिया मुख्तार और अतीक अहमद के घर जाकर मर्सिया पढ़ते हैं। यह वही अखिलेश यादव हैं जिन्होंने 2012 से 2017 के मध्य संविधान को दरकिनार रखते हुए आतंकवादियां की रिहाई का हरसंभव प्रयास किया था। यही नहीं भारतीय किसान यूनियन के नेता राकेश टिकैत ने पहलगाम की दुखद घटना की निंदा तो नहीं की लेकिन जब भारत सरकार ने सिंधु नदी जल समझौता स्थगित किया तब उसके पेट में दर्द होने लगा। ज्ञातव्य है कि पाकिस्तानी नागरिकों को सीमा पर छोड़ने वाली एक गाड़ी पर इनकी यूनियन का नाम लिखा था। टिकैत ने यहां तक कह दिया कि पहलगाम के आतंकी सीमा पार नहीं सब यहीं पर छुपे हुए हैं। स्पष्ट है टिकैत पाकिस्तानी मीडिया का नायक बनना चाहता है, लेकिन क्यों? पाकिस्तान टीवी पर भारत के विरोधी दलों के नेताओं के बयान चल रहे हैं। पाकिस्तान के बड़े एक्स अकाउंट इनको कोट रहे हैं। आज देश कांग्रेस से सवाल पूछ रहा है कि उनके और पाकिस्तानी मंत्रियों के बयानों में इतनी समानता क्यों हैं? अचानक सिद्धारमैया सहित कांग्रेस व विरोधी दलों के नेता पाकिस्तानी मीडिया के प्रिय बन गये हैं। ये लोग जो अभी सर्वदलीय बैठक में सरकार के साथ होने का मुखौटा लगे थे इनका मुखौटा देश के जनमानस के समक्ष उतर चुका है। संभवत: यह लोग अपनी तुष्टीकरण की राजनीति की समाप्ति की आशंका से भयभीत हो गये हैं अगर युद्ध के बाद पाकिस्तान चार टुकड़ों में विभाजित हो गया और प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व वाली सरकार आतंकवाद का सफाया करने में सफल हो गई तब इन दलों की राजनीति का क्या होगा? यही कारण है कि यह सभी दल पाकिस्तान व आतंकियों के लिए लगातार कवर फायर कर रहे हैं। मुस्लिम तुष्टिकरण में अंधे इन दलों के नेताओं को यह नहीं पता कि जनता उनकी प्रत्येक गतिविधि को देख रही है। अपने नेताओं की बयानबाजी से चौतरफा घिरी कांग्रेस पार्टी ने जब तक अपने नेताओं को अनर्गल बयानबाजी से बचने का निर्देश दिया तब तक बहुत देर चुकी थी लेकिन फिर भी उसके नेताओं ने अपनी पार्टी का निर्देश लेने से इंकार दिया। अब भी कांग्रेस पार्टी और इनके पेड हैंडल्स के सोशल मीडिया एकाउंटस को देखा जाये तो वो आपत्तिजनक शब्दावली से भरे पड़े हैं। पाकिस्तान के खिलाफ कड़े कदम उठाने और आतंकवाद पर अंतिम प्रहार करने से पूर्व देश के अंदर छिपे हुए गद्दारों का बेनकाब होना अनिवार्य है फिर वह चाहे राजनैतिक दल हों, नेता हों या किसी अनाम गोपनीय संगठन का कोई भी सदस्य या यूटूबर्स आदि। पहलगाम में हुए आतंकी हमलों पर देश विरोधी टिप्पणी करने के आरोप में पूर्वोत्तर के तीन राज्यों में अब तक 25 लोगों को हिरासत में लिया गया हैं। उत्तर प्रदेश में लोक गायिका नेहा सिंह पर एफआईआर दर्ज की गई है। गिरफ्तार किये लोगों में विधायक, पत्रकार, छात्र, एक वकील, एक महिला और सेवा निवृत्त शिक्षक शामिल हैं यह सभी लोग इंटरनेट मीडिया पर लगातार आपत्तिजनक पोस्ट कर रहे थे। भारत के हर राज्य और हर कोने में अभी भी हजारों की संख्या में देशविरोधी अराजक तत्व मौजूद हैं जिन पर भी निर्णायक कार्यवाही का यही समय है।
कई जिले से बीएलओ, वालेंटियर और बीएजी के 312 सदस्यीय टीम जायेगी नई दिल्ली, सीईओ ने बैठक कर दी जानकारी टीम एबीएन, रांची। मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी के रवि कुमार ने कहा कि भारत निर्वाचन आयोग द्वारा देश के सभी राज्यों के निर्वाचन संबंधी पदाधिकारियों को नयी दिल्ली के इंडिया इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट आफ डेमोक्रेसी एंड इलेक्शन मैनेजमेंट (आइआइआइडीएम) में ट्रेनिंग देने का कार्य किया जा रहा है। इसी क्रम में झारखंड के बीएलओ, वालेंटियर एवं बूथ अवेयरनेस ग्रुप (बीएजी) के 312 सदस्य की टीम अपने एक्सपेरिएंस शेयर के लिए नई दिल्ली स्थित आइआइआइडीएम में 19 एवं 20 मई दो दिवस के लिये जायेंगे। इस हेतु सभी संबंधित जिलों के उप निर्वाचन पदाधिकारी अपने जिले के बीएलओ, वालेंटियर एवं बैग के सदस्यों को चयनित करते हुए उनकी सूची सोमवार तक उपलब्ध करा दें, जिससे अग्रेतर कार्रवाई की जा सके।के रवि कुमार शनिवार को निर्वाचन सदन में आनलाइन माध्यम से सभी जिलों के उप निर्वाचन पदाधिकारियों के साथ बैठक कर रहे थे। मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी के रवि कुमार ने कहा कि भारत के मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के झारखंड भ्रमण के दौरान रामगढ़ के वालेंटियर एवं रांची दशम फॉल के बीएलओ से उन्होंने मुलाकात किया था। इस दौरान उनके साथ हुए एक्सपेरिएंस शेयर से मुख्य चुनाव आयुक्त अत्यंत प्रभावित हुए थे। मुख्य चुनाव आयुक्त के पहल पर पहली बार देश के अन्य राज्यों के सामने झारखंड के बीएलओ, वालेंटियर एवं बूथ अवेयरनेस ग्रुप (बीएजी) के सदस्य लोकसभा एवं विधानसभा चुनाव 2024 के अपने कार्यों एवं अनुभवों को साझा करेंगे। बैठक में मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी के रवि कुमार ने कहा कि झारखंड राज्य के मतदान से जुड़े स्टेक होल्डर को यह अवसर प्राप्त हुआ है। सभी संबंधित जिलों के उप निर्वाचन पदाधिकारी अपने जिले के बीएलओ, वालेंटियर एवं बूथ अवेयरनेस ग्रुप (बीएजी) के सदस्यों को चयनित करते हुए उनके आवागमन की व्यवस्था सुनिश्चित करें। मौके पर उप मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी सह उप सचिव देवदास दत्ता सहित आनलाइन माध्यम से सभी जिलों के उप निर्वाचन पदाधिकारी उपस्थित रहे।
वंदे भारत और शताब्दी ट्रेन से सरकार की कितनी होती है कमाई? आरटीआई में खुलासा एबीएन सेंट्रल डेस्क। भारतीय रेलवे ने बीते कुछ वर्षों में यात्री सुविधाओं को आधुनिक बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। इसमें वंदे भारत एक्सप्रेस और शताब्दी एक्सप्रेस जैसी प्रीमियम और सेमी-हाई स्पीड ट्रेनें प्रमुख हैं। इन ट्रेनों की तेज रफ्तार, अत्याधुनिक सुविधाएं और समयबद्धता ने यात्रियों को आकर्षित किया है। लेकिन इन सबके बीच एक बड़ा सवाल यह भी है : क्या इन ट्रेनों से सरकार को अच्छी कमाई हो रही है? आरटीआई में हुआ खुलासा : राजस्व का अलग रिकॉर्ड नहीं मध्य प्रदेश के निवासी चंद्रशेखर गौड़ द्वारा दायर एक सूचना के अधिकार (आरटीआई) आवेदन के जवाब में रेलवे मंत्रालय ने चौंकाने वाली जानकारी दी। मंत्रालय ने कहा कि रेलवे ट्रेन के हिसाब से होने वाली कमाई का अलग से रिकॉर्ड नहीं रखता। उन्होंने बताया कि विभाग ट्रेन-वार राजस्व नहीं मापता, जिससे वंदे भारत या शताब्दी जैसी किसी विशेष ट्रेन से होने वाली कमाई को स्पष्ट रूप से बताया नहीं जा सकता। यात्री संख्या और दूरी का ब्योरा मौजूद, लेकिन कमाई का नहीं रेलवे द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, वंदे भारत एक्सप्रेस वर्तमान में 102 मार्गों पर संचालित हो रही है, जो कि देश के 24 राज्यों और 284 जिलों को जोड़ती है। अब तक इन ट्रेनों से दो करोड़ से अधिक यात्री सफर कर चुके हैं। 2023-24 में वंदे भारत ट्रेनों द्वारा तय की गयी कुल दूरी इतनी थी कि वह पृथ्वी के चारों ओर 310 चक्कर लगाने के बराबर है। हालांकि यात्रियों की संख्या और दूरी की गणना उपलब्ध है, लेकिन इससे हुई कमाई का ब्योरा रेलवे के पास नहीं होना हैरान करने वाला है। बढ़ती बुकिंग दर: लोकप्रियता की मिसाल रेलवे की एक पुरानी आरटीआई के जवाब में यह भी बताया गया कि वंदे भारत ट्रेनों में औसतन 92% सीटें बुक रहती हैं। यह दर कई अन्य एक्सप्रेस ट्रेनों की तुलना में कहीं अधिक है। इसका मतलब है कि इन ट्रेनों की लोड फैक्टर काफी उच्च है, जिससे संभावित राजस्व भी उच्च होना चाहिए। रेलवे का कुल यात्री राजस्व कितना है? वित्त वर्ष 2025-26 के लिए रेलवे ने यात्री राजस्व में 16% वृद्धि का अनुमान जताया है। इससे कुल पैसेंजर रेवेन्यू 92,800 करोड़ तक पहुंचने की संभावना है। इसमें वंदे भारत, शताब्दी, एसी-3 और अन्य प्रीमियम ट्रेनों का योगदान महत्वपूर्ण माना जा रहा है। हालांकि इसमें से वंदे भारत या शताब्दी ट्रेनों से कितनी आय हुई, यह अलग से पता नहीं लगाया जा सकता।
एबीएन सेन्ट्रल डेस्क (जॉर्ज टाउन प्रयागराज। प्रयागराज जन कल्याण चैरिटेबल ट्रस्ट द्वारा ASG eye hospital के तत्वाधान में प्रयागराज जन कल्याण चैरिटेबल ट्रस्ट मुख्य ट्रस्टी सुनील कुमार तिवारी ने बताया कि आई आईटीएम कॉलेज के परिसर में निशुल्क नेत्र परीक्षण का आयोजन किया गया था, जिसमें अस्पताल के डॉक्टर टेक्नीशियन नर्स स्टाफ ने विभिन्न प्रकार के नेत्र रोगों का परीक्षण किया।जिसमें निशुल्क चश्मा निशुल्क दवाइयां और निशुल्क परामर्श दिया गया। ट्रस्ट के ट्रस्टी सुनील कुमार तिवारी ने बताया कि अस्पताल द्वारा गरीब बच्चों को बिजली विभाग के स्टाफ जस्ट टाउन थाने के कुछ इंप्लाइज और जॉर्ज टाउन क्षेत्र के बहुत सी सारी जनता ने अपने नेत्र रोग का उपचार कराया और मुफ्त में दवाई चश्मा लेकर अत्यधिक उत्साहित रहे।ट्रस्टी ने बताया कि इस तरीके का आयोजन ट्रस्ट हमेशा करता रहेगा और करता रहा है, जिससे क्षेत्र के गरीब निर्धन रोगी आवश्यकता अनुसार लोगों कि जांच होती रहेगी ताकि हमारे क्षेत्र की जनता खुशहाल और अच्छे व्यतीत करती रहे। आई आईटीएम कॉलेज जॉर्ज टाउन प्रयागराज के डायरेक्टर सुनील कुमार तिवारी ने बताया कि इस तरीके का आयोजन अगर परिसर में होता रहेगा तो हमारे कॉलेज के स्टूडेंट उसका लाभ उठाते रहेंगे।ट्रस्ट के सहयोग से यह कार्यक्रम हम सहयोग करते रहेंगे। अगला विजन ट्रस्ट की ओर से गरीब बच्चों को शिक्षा प्रदान करना, गरीब लड़कियों की शादी विवाह में सहयोग करना, निर्धन व्यक्तियों को सहयोग करना, स्वास्थ्य जांच करते रहना, गंभीर बीमारियों में अस्पतालों में उनका एडमिट करना आदि विभिन्न साफ सफाई का इसी तरीके से कैंप लगते रहेंगे।मुख्य ट्रस्टी सुनील कुमार तिवारी ने बताया कि 25 और 26 को ग्राम भिटरिया घोड़ेडीह तहसील करछना प्रयागराज में यह ट्रस्ट पुन ह कैंप लगाएगी। इस अवसर पर ट्रस्ट के मुख्य ट्रस्टी सुनील कुमार तिवारी, डॉ नागेंद्र मणि त्रिपाठी, योगेंद्र सिंह, प्रदीप कुमार, ऋषभ तिवारी, ट्रस्ट के लीगल एडवाइजर दिलीप कुमार ओझा, एडवोकेट आयुष तिवारी, तुषार तिवारी, नैतिक तिवारी एवं डॉक्टर के पैनलनल में अभिनव अभिषेक, योगेश मिश्रा, वैद्य विकास तिवारी, वैद्य विनोद मिश्रा, केवल जीत आदि मौजूद रहे।
जिसपर फाइटर प्लेन भी कर सकेंगे लैंडिंग योगी सरकार का यूपी के 3.54 करोड़ बिजली उपभोक्ताओं को मई की गर्मी में बड़ा तोहफा, बिजली बिल हो गया इतना कम योगी सरकार का बड़ा कदम : यमुना एक्सप्रेसवे पर तय होंगे नये बस रूट, जेवर से नोएडा तक अब नई कनेक्टिविटी एक्सप्रेस वे के किनारे कई औद्योगिक क्लस्टर विकसित किये जा रहे हैं। गंगा एक्सप्रेस वे को प्रदेश के अन्य प्रमुख अक्सप्रेस वेज से भी जोड़ा जा रहा है। एबीएन सेंट्रल डेस्क। पश्चिमी उत्तर प्रदेश को प्रयागराज से जोड़ने वाले देश के सबसे लंबे गंगा एक्सप्रेस वे का काम इसी साल नवंबर तक पूरा कर लिया जायेगा। इसी साल के अंत तक गंगा एक्सप्रेस वे को सार्वजनिक यातायात के लिए खोल दिया जायेगा। एक्सप्रेस वे के किनारे कई औद्योगिक क्लस्टर विकसित किए जा रहे हैं। गंगा एक्सप्रेस वे को प्रदेश के अन्य प्रमुख अक्सप्रेस वेज से भी जोड़ा जा रहा है। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने एक्सप्रेस-वे परियोजना के कार्यों को निर्धारित समय में गुणवत्ता के साथ पूर्ण करने के निर्देश दिये हैं। उन्होंने यूपीडा के अधिकारियों को निर्देशित किया कि सभी कार्यों को निर्धारित समय-सीमा में उच्च गुणवत्ता के साथ पूर्ण किया जाये। शाहजहांपुर जिले में गंगा एक्सप्रेस-वे के कार्यों का स्थलीय निरीक्षण करने के दौरान मुख्यमंत्री ने साढ़े तीन किलोमीटर लम्बी नवनिर्मित हवाई पट्टी का भी निरीक्षण किया, जहां भारतीय वायु सेना के लड़ाकू विमानों की लैण्डिंग का पहला पूर्वाभ्यास शुक्रवार को होने जा रहा है। इस हवाई पट्टी पर वायुसेना के विमान की नाइट लैंडिंग भी हो सकेगी। गंगा एक्सप्रेस वे के निर्माण की समीक्षा के दौरान मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 2021 में प्रधानमंत्री जी ने स्वयं शाहजहांपुर में इसका शिलान्यास किया था। गंगा एक्सप्रेस-वे को फर्रुखाबाद, आगरा एक्सप्रेस-वे और बुन्देलखण्ड एक्सप्रेस-वे से जोड़ा जायेगा। एक्सप्रेस-वे के किनारे औद्योगिक विकास को बढ़ावा देने के लिए कई औद्योगिक क्लस्टर विकसित किए जा रहे हैं, जिससे स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर भी सृजित होंगे। मुख्यमंत्री ने कहा कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश को प्रयागराज से जोड़ने के लिए गंगा एक्सप्रेस-वे के निर्माण का फैसला वर्ष 2019 के प्रयागराज कुम्भ में लिया गया था। वर्ष 2020 में मंत्रिपरिषद से स्वीकृति मिलने के बाद तेजी से इस सम्बन्ध में कार्यवाही को आगे बढ़ाया गया। प्रदेश में 594 किलोमीटर लम्बा तथा सिक्स लेन का यह एक्सप्रेस-वे पश्चिमी उत्तर प्रदेश को प्रयागराज से जोड़ने का महत्वपूर्ण माध्यम बनेगा। अब तक 85 फीसदी काम पूरा हो चुका है। इस एक्सप्रेस वे को भविष्य में आठ लेन का किया जा सकेगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि परियोजना के लिए 18,000 एकड़ भूमि किसानों से खरीदी गयी। देश के सबसे बड़े एक्सप्रेस-वे के रूप में उभरे गंगा एक्सप्रेस-वे का निर्माण चार पैकेजों में किया जा रहा है। इसका निर्माण नवम्बर, 2025 तक पूरा कर लिया जायेगा। गंगा एक्सप्रेस-वे पर जनपद शाहजहांपुर में अंतरराष्ट्रीय स्तर की हवाई पट्टी तैयार की गयी है, जिसका उपयोग आपातकालीन स्थितियों में एरोप्लेन की लैंडिंग और टेक-आॅफ के लिए किया जा सकेगा। इसके अतिरिक्त इस पट्टी का उपयोग एम्बुलेन्स सहित इमरजेंसी सेवाओं के लिए भी किया जा सकता है। मुख्यमंत्री ने कहा कि महाकुंभ जैसे आयोजनों के मद्देनजर मेरठ से हरिद्वार, काशी, पूर्वांचल, गाजीपुर, शक्तिनगर एवं सोनभद्र तक भी कनेक्टिविटी परियोजनाएं विकसित की जायेंगी। उन्होंने कहा कि शुक्रवार को गंगा एक्सप्रेस-वे की हवाई पट्टी पर भारतीय वायुसेना के लड़ाकू विमानों का ऐतिहासिक लैण्डिंग शो आयोजित किया जायेगा। गंगा एक्सप्रेस-वे जनपद मेरठ सेहापुड़, बुलंदशहर, अमरोहा, सम्भल, बदायूं, शाहजहांपुर, हरदोई, उन्नाव, रायबरेली, प्रतापगढ़ होते हुए प्रयागराज तक बनाया जा रहा जो 2 नवंबर, 2025 को पूरा होने पर जनता के लिए लोकार्पित किया जाएगा। इसकी लागत 36,230 करोड़ रुपये है और निर्माण कार्यों की कार्यदायी संस्था द्वारा 30 वर्ष की गारंटी होगी।
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