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गृहमंत्री अमित शाह कायर और वीक निकले : सुखदेव भगत
Published / 2026-07-30 13:57:03
गृहमंत्री अमित शाह कायर और वीक निकले : सुखदेव भगत

गृहमंत्री अमित शाह कायर और वीक निकले : सुखदेव भगतदिल्ली की कानून व्यवस्था पर विफलता, जिम्मेदार वहीएबीएन न्यूज नेटवर्क, लोहरदगा। लोकसभा के माननीय सांसद सुखदेव भगत ने दिल्ली की कानून व्यवस्था को लेकर केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला।उन्होंने कहा, दिल्ली केंद्र सरकार के अंतर्गत है। प्रशासनिक व्यवस्था होम मिनिस्टर के अंतर्गत आती है। ये पूरी प्रशासनिक विफलता रही है। तो राहुल गांधी ने सही कहा है।सांसद ने सीधे गृह मंत्री अमित शाह पर निशाना साधते हुए कहा, "जाहिर है गृहमंत्री कौन है? गृहमंत्री अमित शाह जी हैं। वो इतने कायर निकले, वो इतने वीक निकले कि ये तो पार्लियामेंट से भी लीक हो गया। वो आज आए भी नहीं हैं।राहुल गांधी द्वारा नाम लिए जाने पर उठ रहे सवालों पर उन्होंने कहा, विपक्ष रूल बुक दिखा रहा है कि बिना सबूत का आप कैसे मेंशन कर सकते हैं। लेकिन अगर कोई टीम खेलती हो और कप्तान जीरो पर आउट हो जाता है तो भी टीम के कप्तान का नाम होता है। तो यहां पर प्रशासनिक विफलता है तो नाम किसका आएगा? निश्चित रूप से उनका आएगा।उन्होंने स्पष्ट किया कि दिल्ली की कानून व्यवस्था, पुलिस जो है वो केंद्र के अंतर्गत आती है।

मुंशी प्रेमचंद जयंती 31 जुलाई को
Published / 2026-07-29 21:55:35
मुंशी प्रेमचंद जयंती 31 जुलाई को

प्रेमचंद साहित्य के माध्यम से समाज की सच्चाई को आवाज देने वाले महान कथाकार : संजय सर्राफ टीम एबीएन, रांची। हिंदी साहित्य भारती के उपाध्यक्ष संजय सर्राफ ने कहा है कि हिंदी साहित्य के महान कथाकार, उपन्यासकार और समाज के सजग प्रहरी मुंशी प्रेमचंद की जयंती प्रत्येक वर्ष 31 जुलाई को मनाई जाती है। यह दिन भारतीय साहित्य में उनके अतुलनीय योगदान, सामाजिक सरोकारों और मानवीय संवेदनाओं को स्मरण करने का अवसर है। प्रेमचंद ने अपनी रचनाओं के माध्यम से भारतीय समाज, विशेषकर किसानों, मजदूरों, महिलाओं और वंचित वर्गों के जीवन की वास्तविक तस्वीर प्रस्तुत की। मुंशी प्रेमचंद का जन्म 31 जुलाई 1880 को वाराणसी के निकट लमही गांव में हुआ था। उनका मूल नाम धनपत राय श्रीवास्तव था। उन्होंने प्रारंभ में उर्दू में नवाब राय नाम से लेखन किया और बाद में प्रेमचंद नाम से हिंदी साहित्य में अपनी विशिष्ट पहचान बनाई। उनका जीवन संघर्षों से भरा रहा,लेकिन कठिन परिस्थितियों के बावजूद उन्होंने साहित्य-सृजन को समाज जागरण का माध्यम बनाया। प्रेमचंद का साहित्य केवल मनोरंजन का साधन नहीं, बल्कि सामाजिक चेतना का सशक्त माध्यम था। उन्होंने गरीबी, शोषण, जातिगत भेदभाव, किसान जीवन,नारी की स्थिति, ग्रामीण समस्याओं और सामाजिक विषमताओं को अपनी कहानियों और उपन्यासों का विषय बनाया। गोदान, गबन, निर्मला, सेवासदन और कर्मभूमि उनके प्रमुख उपन्यास हैं। वहीं ईदगाह, पूस की रात, कफन, पंच परमेश्वर, बड़े घर की बेटी और नमक का दरोगा जैसी कहानियां आज भी पाठकों के हृदय को प्रभावित करती हैं। उनकी सर्वाधिक चर्चित कृतियों में गोदान को विशेष स्थान प्राप्त है।इसमें किसान जीवन की कठिनाइयों, आर्थिक शोषण और सामाजिक व्यवस्था की जटिलताओं का अत्यंत मार्मिक चित्रण मिलता है। प्रेमचंद के पात्र काल्पनिक होते हुए भी भारतीय समाज के वास्तविक जीवन से जुड़े दिखाई देते हैं। यही उनकी लेखनी की सबसे बड़ी विशेषता थी।प्रेमचंद का मानना था कि साहित्य समाज का दर्पण होने के साथ-साथ उसे बेहतर दिशा देने का माध्यम भी होना चाहिए। उन्होंने साहित्य को आम आदमी के जीवन और उसकी पीड़ा से जोड़ा। उनकी भाषा सरल,सहज, प्रभावशाली और जनसामान्य के निकट थी। 8 अक्टूबर 1936 को प्रेमचंद का निधन हुआ,लेकिन उनकी रचनाएं आज भी जीवंत हैं। उनकी जयंती मनाने का उद्देश्य नयी पीढ़ी को उनके साहित्य, विचारों और सामाजिक दृष्टिकोण से परिचित कराना तथा साहित्य के माध्यम से मानवीय मूल्यों, समानता और संवेदनशीलता को मजबूत करना है। मुंशी प्रेमचंद भारतीय साहित्य के ऐसे अमर रचनाकार हैं, जिनकी कलम ने समाज के अंतिम व्यक्ति की आवाज को शब्द दिए। उनकी जयंती केवल एक महान साहित्यकार को याद करने का अवसर नहीं, बल्कि उनके साहित्य में निहित मानवता, न्याय, संवेदना और सामाजिक चेतना को अपने जीवन में उतारने की प्रेरणा भी देती है।

21 छात्रों की मौत पर आखिर जश्न क्यों : सुखदेव भगत
Published / 2026-07-29 21:51:02
21 छात्रों की मौत पर आखिर जश्न क्यों : सुखदेव भगत

संसद में उठे मुद्दे पर सांसद सुखदेव भगत का केंद्र सरकार पर तीखा हमला राहुल गांधी के बयान का किया समर्थन, बोले, तथ्यों से ध्यान भटकाने की कोशिश, प्रहलाद जोशी की टिप्पणी को बताया संकीर्ण मानसिकता का परिचायक एबीएन न्यूज नेटवर्क, नई दिल्ली/लोहरदगा। लोहरदगा के कांग्रेस सांसद सुखदेव भगत ने संसद में शिक्षा व्यवस्था, छात्रों की आत्महत्या और महिलाओं के सम्मान से जुड़े मुद्दों को लेकर केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी द्वारा उठाये गये मुद्दों का समर्थन करते हुए कहा कि उनके भाषण में तथ्य और प्रमाण आधारित बातें रखी गईं, लेकिन सरकार जवाब देने के बजाय मुद्दों से ध्यान भटकाने का प्रयास कर रही है। सांसद भगत ने संसद में केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के समर्थन में लगे नारों पर सवाल उठाते हुए कहा कि यदि देश में 21 छात्रों की आत्महत्या जैसे गंभीर मामले सामने आए हैं, तो ऐसे समय में सरकार का रवैया संवेदनशील और जवाबदेह होना चाहिए। उन्होंने कहा कि क्या इन छात्रों की मौत के बावजूद सत्ता पक्ष जश्न मना रहा है? आखिर इन नारों का संदेश क्या है? उन्होंने केंद्रीय मंत्री प्रहलाद जोशी की बलात्कार पीड़िता से संबंधित टिप्पणी की भी कड़ी आलोचना की। सांसद भगत ने कहा कि ऐसी टिप्पणियां न केवल संकीर्ण मानसिकता को दशार्ती हैं, बल्कि समाज के एक वर्ग के प्रति पूर्वाग्रह और असंवेदनशील सोच को भी उजागर करती हैं। उन्होंने कहा कि जिन परिस्थितियों में आत्ममंथन और पश्चाताप की आवश्यकता थी, वहां ऐसे बयानों का बचाव करना अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है। सांसद ने कहा कि देश की जनता सरकार से शिक्षा व्यवस्था में सुधार, छात्रों की सुरक्षा और महिलाओं के सम्मान जैसे मुद्दों पर गंभीर और रचनात्मक कदमों की अपेक्षा करती है। लेकिन जिस प्रकार इन सवालों से बचने की कोशिश की जा रही है, उससे सुधार की उम्मीद कमजोर पड़ती दिखाई देती है। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी ने संसद में छात्रों, युवाओं और समाज से जुड़े गंभीर मुद्दों को पूरी जिम्मेदारी के साथ उठाया है। सरकार को इन सवालों का राजनीतिक जवाब देने के बजाय ठोस समाधान प्रस्तुत करना चाहिए।

नयी दिल्ली : सांसद सुखदेव भगत के पुत्र के रिसेप्शन में जुटे देशभर की सियासत के दिग्गज
Published / 2026-07-28 18:43:34
नयी दिल्ली : सांसद सुखदेव भगत के पुत्र के रिसेप्शन में जुटे देशभर की सियासत के दिग्गज

दिल्ली में सजा सियासत का महाकुंभ, सांसद सुखदेव भगत के पुत्र अभिनव सिद्धार्थ के रिसेप्शन में जुटे देशभर के दिग्गज राहुल गांधी, मल्लिकार्जुन खड़गे, ओम बिरला, हरिवंश, अनुराग ठाकुर, सुप्रिया सुले समेत विभिन्न दलों के शीर्ष नेताओं ने दी शुभकामनाएं, होटल अशोका बना राष्ट्रीय राजनीतिक हस्तियों का संगम एबीएन न्यूज नेटवर्क, लोहरदगा। लोहरदगा लोकसभा क्षेत्र के सांसद सुखदेव भगत के पुत्र अभिनव सिद्धार्थ के विवाहोपरांत आयोजित भव्य रिसेप्शन समारोह सोमवार को नई दिल्ली के प्रतिष्ठित होटल अशोका में राष्ट्रीय स्तर के राजनीतिक समागम में तब्दील हो गया। समारोह में सत्ता और विपक्ष के अनेक शीर्ष नेताओं की एक साथ मौजूदगी ने इसे विशेष बना दिया। देशभर से पहुंचे जनप्रतिनिधियों, प्रशासनिक अधिकारियों, उद्योग जगत की हस्तियों और शुभचिंतकों ने नवदंपति को शुभाशीष देकर उनके सुखद एवं मंगलमय वैवाहिक जीवन की कामना की। रिसेप्शन समारोह में लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी, कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला, राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश, सांसद सुप्रिया सुले, सांसद नवीन जिंदल, सांसद अनुराग ठाकुर, कांग्रेस नेता पवन खेड़ा, सांसद गौरव गोगोई सहित विभिन्न राजनीतिक दलों के अनेक वरिष्ठ नेताओं की गरिमामयी उपस्थिति रही। इसके अलावा गोवा, कर्नाटक, तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, ओडिशा, बिहार, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, गुजरात, छत्तीसगढ़ और झारखंड सहित देश के विभिन्न राज्यों से सांसद, विधायक, मंत्री, वरिष्ठ एवं पूर्व प्रशासनिक अधिकारी, कांग्रेस के राष्ट्रीय पदाधिकारी तथा बड़ी संख्या में सामाजिक कार्यकर्ता और शुभचिंतक समारोह में शामिल हुए। समारोह में आत्मीयता और सौहार्द का अनूठा वातावरण देखने को मिला। विभिन्न राजनीतिक विचारधाराओं से जुड़े नेताओं ने एक मंच पर उपस्थित होकर नवदंपति को आशीर्वाद दिया और सांसद सुखदेव भगत एवं उनके परिवार को शुभकामनाएं प्रेषित कीं। इस अवसर पर सांसद सुखदेव भगत ने सभी अतिथियों के प्रति हार्दिक आभार व्यक्त करते हुए कहा कि देशभर से मिले स्नेह, सम्मान और शुभकामनाओं ने इस पारिवारिक आयोजन को अविस्मरणीय बना दिया। उन्होंने समारोह में शामिल होकर नवदंपति को आशीर्वाद देने वाले सभी गणमान्य अतिथियों, मित्रों एवं शुभचिंतकों का धन्यवाद ज्ञापित किया।

सरकार व सामाजिक संगठन मिलकर 2030 तक हासिल करेंगे बाल विवाह मुक्त भारत का लक्ष्य : सावित्री ठाकुर
Published / 2026-07-28 13:48:58
सरकार व सामाजिक संगठन मिलकर 2030 तक हासिल करेंगे बाल विवाह मुक्त भारत का लक्ष्य : सावित्री ठाकुर

सरकार व सामाजिक संगठन मिलकर 2030 तक हासिल करेंगे बाल विवाह मुक्त भारत का लक्ष्य : सावित्री ठाकुरएबीएन सोशल डेस्क। केंद्रीय महिला एवं बाल विकास राज्य मंत्री सावित्री ठाकुर ने नई दिल्ली के कांस्टीट्यूशन क्लब में बाल अधिकारों की सुरक्षा के लिए जमीन पर काम कर रहे 250 से भी अधिक नागरिक समाज संगठनों के नेटवर्क जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रेन के देश भर से आए सहयोगी संगठनों के चार दिवसीय राष्ट्रीय परामर्श इंश्योरिंग ए चाइल्ड राइट्स, पोटेंशियल एंड प्रास्पेरिटी के उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए कहा कि सरकार सबके साथ और नागरिक समाज संगठनों के सहयोग से 2030 तक बाल विवाह मुक्त भारत के लक्ष्य को हासिल कर लेगी।इस राष्ट्रीय परामर्श में देश के सभी 782 जिलों के प्रतिनिधियों को संबोधित करते हुए सावित्री ठाकुर ने कहा कि बाल संरक्षण के क्षेत्र में काम करना बहुत ही चुनौतीपूर्ण होता है। लेकिन सरकार के साथ कदम से कदम मिलाकर आप सभी चुनौतियों से पार पा रहे हैं। किसी भी बच्चे की जिंदगी बचाना सबसे नेक काम होता है। छोटी उम्र की बच्चियां ट्रैफिकिंग की शिकार हो जाती हैं और फिर कभी अपने घर नहीं लौट पातीं। ऐसी बच्चियों को किसी फरिश्ते का इंतजार होता है और इन्हें यौन शोषण के दलदल से मुक्त कराने वाले नागरिक समाज संगठनों के स्वयंसेवी किसी फरिश्ते से कम नहीं होते। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 2030 तक बाल विवाह के खात्मे को प्रतिबद्ध हैं। बाल विवाह मुक्त भारत को सफल बनाने के लिए कई योजनाएं लागू की गई हैं। उन्होंने इस अभियान को सफल बनाने की दिशा में जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रेन के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि बाल विवाह मुक्त भारत के सपने को हासिल करने में जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रेन का योगदान अविस्मरणीय रहेगा।इस मौके पर एमपी ज फॉर चिल्ड्रेन के संयोजक व लोकसभा में तेलुगु देशम पार्टी के संसदीय दल के नेता लावु कृष्णा देवरायलु ने कहा कि बाल विवाह के खिलाफ शुरू किया गया जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रेन का यह आंदोलन अब पूरी दुनिया में फैल रहा है। यह एक असाधारण प्रयास है और भारत ने दिखाया है कि बाल विवाह का खात्मा संभव है। बताते चलें कि लावु ने सोशल मीडिया के खतरों से बच्चों को बचाने के लिए संसद में एक निजी विधेयक भी पेश किया है।जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रेन के संस्थापक व प्रख्यात बाल अधिकार कार्यकर्ता भुवन ऋभु ने कहा, 27 नवंबर 2024 को बाल विवाह मुक्त भारत अभियान से निकली चिनगारी जल्द ही राष्ट्रव्यापी आंदोलन में बदल गई। तब से यह आंदोलन न्याय, तकनीक, नेतृत्व और सामूहिक प्रयासों के जरिए हरेक बच्चे के सशक्तीकरण के व्यापक दृष्टिकोण में तब्दील हो गया है। भारत यह दिखा रहा है कि जब सरकारें, नागरिक समाज, अकदामिक जगत, समुदाय और युवा किसी साझा लक्ष्य के प्रति एकजुट हो जाएं तो बदलाव अवश्यंभावी है। अब यह सिर्फ भारत की ही कहानी नहीं रही बल्कि यह पूरी दुनिया को संदेश है कि कोई भी देश अगर सबसे महत्तवपूर्ण निवेश कर सकता है तो वह निवेश बच्चों पर है।”उन्होंने कहा कि हर बार जब हम किसी गांव में एक बाल विवाह रोकते हैं तो हम सिर्फ एक बच्चे की ही सुरक्षा नहीं कर रहे बल्कि यह पूरे समुदाय को एक स्पष्ट संदेश है कि एक आधुनिक समाज में बाल विवाह की कोई जगह नहीं है। सरकार के साथ मिलकर पिछले तीन वर्षों में हमने साढ़े पांच लाख से भी अधिक बाल विवाह रोके हैं। इस खबर से संबंधित और अधिक जानकारी के लिए जितेंद्र परमार (8595950825)  से संपर्क करें।

नई दिल्ली : प्रदेश प्रभारी के. राजू से मिले कांग्रेस के वरिष्ठ नेता धीरज प्रसाद साहू
Published / 2026-07-25 20:17:28
नई दिल्ली : प्रदेश प्रभारी के. राजू से मिले कांग्रेस के वरिष्ठ नेता धीरज प्रसाद साहू

नई दिल्ली : प्रदेश प्रभारी के. राजू से मिले कांग्रेस के वरिष्ठ नेता धीरज प्रसाद साहूदिल्ली में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता धीरज प्रसाद साहू ने प्रदेश प्रभारी के. राजू से की शिष्टाचार मुलाकात, झारखंड की राजनीतिक स्थिति और SIR पर हुई चर्चाएबीएन सेंट्रल डेस्क। नई दिल्ली में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता एवं पूर्व राज्यसभा सांसद धीरज प्रसाद साहू ने झारखंड प्रदेश कांग्रेस के प्रभारी के. राजू से शिष्टाचार मुलाकात की। इस दौरान दोनों नेताओं के बीच झारखंड की वर्तमान राजनीतिक परिस्थितियों, संगठनात्मक गतिविधियों तथा राज्य में चल रहे विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) अभियान सहित विभिन्न समसामयिक मुद्दों पर विस्तार से चर्चा हुई। मुलाकात को संगठनात्मक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि आगामी राजनीतिक गतिविधियों और चुनावी तैयारियों के बीच कांग्रेस लगातार अपने संगठन को मजबूत करने की दिशा में सक्रिय है।बैठक के दौरान झारखंड में कांग्रेस संगठन की मजबूती, कार्यकर्ताओं की भूमिका, गठबंधन की स्थिति तथा जनहित से जुड़े मुद्दों पर भी विचार-विमर्श किया गया। साथ ही राज्य में निर्वाचन आयोग द्वारा चलाए जा रहे विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) कार्यक्रम की प्रगति और उससे जुड़े विभिन्न पहलुओं पर भी चर्चा हुई। दोनों नेताओं ने लोकतांत्रिक प्रक्रिया को सशक्त बनाने तथा मतदाता सूची की पारदर्शिता सुनिश्चित करने के महत्व पर अपने विचार साझा किए।मुलाकात के बाद कांग्रेस के वरिष्ठ नेता एवं पूर्व राज्यसभा सांसद धीरज प्रसाद साहू ने कहा कि प्रदेश प्रभारी के. राजू के साथ उनकी यह मुलाकात अत्यंत सकारात्मक रही। उन्होंने बताया कि झारखंड के राजनीतिक हालात, संगठन की मजबूती और जनता से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर विस्तार से चर्चा हुई। उन्होंने कहा कि कांग्रेस हमेशा जनता की आवाज़ को प्राथमिकता देती है और राज्य के विकास, सामाजिक न्याय तथा लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने विश्वास जताया कि कांग्रेस कार्यकर्ता पूरी ऊर्जा के साथ जनता के बीच जाकर पार्टी की नीतियों और विचारधारा को मजबूत करेंगे।धीरज प्रसाद साहू ने कहा कि झारखंड में चल रहे विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) अभियान को पूरी पारदर्शिता और निष्पक्षता के साथ संचालित किया जाना चाहिए, ताकि कोई भी पात्र मतदाता अपने मताधिकार से वंचित न रहे। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र की मजबूती के लिए निष्पक्ष मतदाता सूची अत्यंत आवश्यक है और इस दिशा में सभी संबंधित एजेंसियों को संवेदनशीलता के साथ कार्य करना चाहिए।वहीं, झारखंड प्रदेश कांग्रेस के प्रभारी के. राजू ने कहा कि झारखंड कांग्रेस संगठन को और अधिक मजबूत बनाने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि राज्य के वरिष्ठ नेताओं और कार्यकर्ताओं के साथ नियमित संवाद स्थापित किया जा रहा है, ताकि संगठन को बूथ स्तर तक सशक्त बनाया जा सके। उन्होंने कहा कि कांग्रेस जनता के मुद्दों को लेकर लगातार संघर्ष कर रही है और आने वाले समय में पार्टी पूरे दमखम के साथ जनता के बीच जाएगी।के. राजू ने कहा कि विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) की प्रक्रिया पूरी तरह निष्पक्ष, पारदर्शी और संविधान की भावना के अनुरूप होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि प्रत्येक पात्र नागरिक का नाम मतदाता सूची में शामिल होना लोकतंत्र की मूल आवश्यकता है। यदि किसी भी स्तर पर अनियमितता सामने आती है तो कांग्रेस लोकतांत्रिक तरीके से अपनी बात रखेगी और जनता के अधिकारों की रक्षा के लिए हर संभव प्रयास करेगी।यह मुलाकात ऐसे समय में हुई है जब झारखंड की राजनीति कई महत्वपूर्ण मुद्दों को लेकर सक्रिय है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि कांग्रेस संगठन को मजबूत करने और आगामी रणनीति तय करने के उद्देश्य से वरिष्ठ नेताओं के बीच लगातार संवाद का दौर जारी है। धीरज प्रसाद साहू और प्रदेश प्रभारी के. राजू की यह मुलाकात भी इसी क्रम में महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा सरकार की हार, राहुल गांधी के संघर्ष की पहली जीत : सुखदेव भगत
Published / 2026-07-25 20:08:10
धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा सरकार की हार, राहुल गांधी के संघर्ष की पहली जीत : सुखदेव भगत

धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा सरकार की हार, राहुल गांधी के संघर्ष की पहली जीत : सांसद सुखदेव भगतदबाव में देना पड़ा इस्तीफा, छात्रों और युवाओं के आंदोलन के आगे झुकी अहंकारी केन्द्र सरकारएबीएन न्यूज नेटवर्क, लोहरदगा। लोहरदगा के सांसद सुखदेव भगत ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए इसे केंद्र सरकार की नैतिक हार और कांग्रेस नेता राहुल गांधी के दो वर्षों से चल रहे संघर्ष की पहली बड़ी जीत बताया। उन्होंने कहा कि यह इस्तीफा स्वेच्छा से नहीं, बल्कि छात्रों, युवाओं और विपक्ष के लगातार बढ़ते दबाव का परिणाम है। सांसद सुखदेव भगत ने कहा कि दो वर्ष पहले राहुल गांधी ने देश के छात्रों के भविष्य और शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता के लिए जो अभियान शुरू किया था, आज उसका पहला महत्वपूर्ण परिणाम सामने आया है। उन्होंने कहा कि धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा उनकी संवेदनशीलता का प्रमाण नहीं, बल्कि जनता के दबाव के आगे सरकार के झुकने का संकेत है। उन्होंने कहा कि देशभर में युवाओं और छात्रों ने जिस तरह अन्याय के खिलाफ आवाज उठाई, उससे यह साबित हो गया कि उनकी मांगें न्यायसंगत थीं। यदि सही मुद्दों को लेकर लगातार लोकतांत्रिक तरीके से संघर्ष किया जाए तो सबसे अहंकारी सरकार को भी झुकना पड़ता है। शिक्षा मंत्री का इस्तीफा इसी संघर्ष का परिणाम है। सांसद भगत ने कहा कि यह केवल शुरुआत है। राहुल गांधी के नेतृत्व में छात्रों और युवाओं के अधिकारों की लड़ाई आगे भी जारी रहेगी। उन्होंने दावा किया कि इस घटनाक्रम ने स्पष्ट कर दिया है कि सरकार की नीतियों पर सवाल उठाने वालों की आवाज को लंबे समय तक दबाया नहीं जा सकता और लोकतांत्रिक संघर्ष अंततः अपनी जीत दर्ज करता है।

देशभर में किरकिरी के बाद केन्द्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा
Published / 2026-07-25 19:58:27
देशभर में किरकिरी के बाद केन्द्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा

केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफाएबीएन सेंट्रल डेस्क। देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा नीट के पेपर लीक विवाद और पिछले कई हफ्तों से चल रहे भारी विरोध प्रदर्शनों और चौतरफा दबाव के बीच केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने शनिवार को अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने अपना इस्तीफा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भेज दिया है।मेडिकल छात्रों के भविष्य से जुड़े इस संवेदनशील मुद्दे पर सरकार की चौतरफा आलोचना हो रही थी और इस इस्तीफे को परीक्षा प्रणाली में जवाबदेही तय करने की दिशा में एक बड़े कदम के रूप में देखा जा रहा है। बता दें कि, पेपर लीक के बाद कॉकरोच जनता पार्टी ने शुरू से धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग की और अपने फैसले पर अड़ी रही। आज सरकार और सीजेपी के तीसरे दौर की वार्ता से पहले केंद्रीय शिक्षा मंत्री ने इस्तीफा सौंपा है।देश के युवाओं की अपेक्षाओं का गहरा सम्मान करता हूंउन्होंने कहा, मैं देश के युवाओं की आकांक्षाओं, भावनाओं और उनकी न्यायोचित अपेक्षाओं का गहरा सम्मान करता हूं। भारत की युवा पीढ़ी के सपनों को साकार करना हम सभी के राजनीतिक एवं सामाजिक जीवन का नैतिक संकल्प रहा है। आदरणीय प्रधानमंत्री के दूरदर्शी नेतृत्व में राष्ट्र की सेवा करने का जो अवसर मुझे प्राप्त हुआ, उसके लिए मैं प्रधानमंत्री का आभार प्रकट करता हूं।नीट पेपर लीक पर क्या बोले धर्मेंद्र प्रधानउन्होंने आगे लिखा, तीन मई 2026 को हुई नीट-यूजी की परीक्षा में अनियमितता पाई गई। भारत सरकार ने इसको तुरंत संज्ञान में लेते हुए जांच सीबीआई को सौंपी और परीक्षा को रद्द किया एवं पुनः परीक्षा की तारीख की घोषणा की। इसके साथ ही अगले वर्ष से इस परीक्षा को सीबीटी मोड में करने का निर्णय लिया गया।धर्मेंद्र प्रधान बोले- छात्रों के साथ अन्याय नहीं होने देंगेपहले ही दिन से मैंने इसकी जिम्मेदारी ली और इस परिस्थिति से कभी मुंह नहीं मोड़ा। मेरा यह संकल्प था कि हम किसी भी मेधावी छात्र की संभावना परीक्षा माफिया के कारण खराब नहीं होने देंगे, किसी भी छात्र के साथ अन्याय नहीं होने देंगे। उन्होंने आगे लिखा, 16 जुलाई को घोषित नीट-यूजी के परिणाम संतोषजनक रहे, जिसमें गरीब पृष्ठभूमि से आए कई मेधावी छात्रों को भी सफलता मिली।एंटी-पेपर लीक बिल पर टिकीं निगाहेंधर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा केवल एक मंत्री का जाना नहीं है, बल्कि यह देश की पूरी परीक्षा और नीतिगत व्यवस्था की पारदर्शिता पर उठे गंभीर सवालों का नतीजा है। अब देश के लाखों प्रभावित छात्रों की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि क्या सोमवार को संसद में पेश होने वाला नया एंटी-पेपर लीक बिल और केंद्रीय एजेंसियों की चल रही जांच उनकी खोई हुई मानसिक शांति और परीक्षा प्रणाली में उनके भरोसे को वापस बहाल कर पाएगी।

देशभर में किरकिरी के बाद केन्द्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा
Published / 2026-07-25 19:53:21
देशभर में किरकिरी के बाद केन्द्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा

केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफाएबीएन सेंट्रल डेस्क। देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा नीट के पेपर लीक विवाद और पिछले कई हफ्तों से चल रहे भारी विरोध प्रदर्शनों और चौतरफा दबाव के बीच केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने शनिवार को अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने अपना इस्तीफा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भेज दिया है।मेडिकल छात्रों के भविष्य से जुड़े इस संवेदनशील मुद्दे पर सरकार की चौतरफा आलोचना हो रही थी और इस इस्तीफे को परीक्षा प्रणाली में जवाबदेही तय करने की दिशा में एक बड़े कदम के रूप में देखा जा रहा है। बता दें कि, पेपर लीक के बाद कॉकरोच जनता पार्टी ने शुरू से धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग की और अपने फैसले पर अड़ी रही। आज सरकार और सीजेपी के तीसरे दौर की वार्ता से पहले केंद्रीय शिक्षा मंत्री ने इस्तीफा सौंपा है।देश के युवाओं की अपेक्षाओं का गहरा सम्मान करता हूंउन्होंने कहा, मैं देश के युवाओं की आकांक्षाओं, भावनाओं और उनकी न्यायोचित अपेक्षाओं का गहरा सम्मान करता हूं। भारत की युवा पीढ़ी के सपनों को साकार करना हम सभी के राजनीतिक एवं सामाजिक जीवन का नैतिक संकल्प रहा है। आदरणीय प्रधानमंत्री के दूरदर्शी नेतृत्व में राष्ट्र की सेवा करने का जो अवसर मुझे प्राप्त हुआ, उसके लिए मैं प्रधानमंत्री का आभार प्रकट करता हूं।नीट पेपर लीक पर क्या बोले धर्मेंद्र प्रधानउन्होंने आगे लिखा, तीन मई 2026 को हुई नीट-यूजी की परीक्षा में अनियमितता पाई गई। भारत सरकार ने इसको तुरंत संज्ञान में लेते हुए जांच सीबीआई को सौंपी और परीक्षा को रद्द किया एवं पुनः परीक्षा की तारीख की घोषणा की। इसके साथ ही अगले वर्ष से इस परीक्षा को सीबीटी मोड में करने का निर्णय लिया गया।धर्मेंद्र प्रधान बोले- छात्रों के साथ अन्याय नहीं होने देंगेपहले ही दिन से मैंने इसकी जिम्मेदारी ली और इस परिस्थिति से कभी मुंह नहीं मोड़ा। मेरा यह संकल्प था कि हम किसी भी मेधावी छात्र की संभावना परीक्षा माफिया के कारण खराब नहीं होने देंगे, किसी भी छात्र के साथ अन्याय नहीं होने देंगे। उन्होंने आगे लिखा, 16 जुलाई को घोषित नीट-यूजी के परिणाम संतोषजनक रहे, जिसमें गरीब पृष्ठभूमि से आए कई मेधावी छात्रों को भी सफलता मिली।एंटी-पेपर लीक बिल पर टिकीं निगाहेंधर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा केवल एक मंत्री का जाना नहीं है, बल्कि यह देश की पूरी परीक्षा और नीतिगत व्यवस्था की पारदर्शिता पर उठे गंभीर सवालों का नतीजा है। अब देश के लाखों प्रभावित छात्रों की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि क्या सोमवार को संसद में पेश होने वाला नया एंटी-पेपर लीक बिल और केंद्रीय एजेंसियों की चल रही जांच उनकी खोई हुई मानसिक शांति और परीक्षा प्रणाली में उनके भरोसे को वापस बहाल कर पाएगी।

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सच तो सामने आकर रहेगा

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