राजस्थान में 99 साल पुराना गर्मी का रिकॉर्ड टूटाएबीएन सेन्ट्रल डेस्क (श्रीगंगानगर)। राजस्थान में शुक्रवार को भीषण गर्मी का प्रकोप जारी रहा और सीमावर्ती शहर गंगानगर में अधिकतम तापमान 49.4 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। मौसम विभाग ने उम्मीद जताई कि शनिवार से राज्य के कई इलाकों में मानसून पूर्व मौसमी गतिविधियां शुरू होने से लोगों को प्रचंड गर्मी से राहत मिलेगी। जयपुर स्थित मौसम केंद्र के अनुसार, शुक्रवार को गंगानगर में अधिकतम तापमान सामान्य से 7.9 डिग्री अधिक 49.4 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जो इस मौसम में सबसे अधिक है।शहर में 14 जून 1934 को अधिकतम तापमान 50 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया था। मौसम विभाग के मुताबिक, चुरू में अधिकतम तापमान 47.6 डिग्री, जैसलमेर में 46.9 डिग्री, बीकानेर में 46.4 डिग्री, जोधपुर में 46.3 डिग्री, फलोदी व बाड़मेर में 46.2 डिग्री, पिलानी में 45.4 डिग्री, लूणकरणसर में 45.2 डिग्री, पाली व फतेहपुर में यह 45 डिग्री, चित्तौड़गढ़ में 44.9 डिग्री, संगरिया में 44.6 डिग्री, झुंझुनू में 44.5 डिग्री, नागौर में 44.4 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया।राजधानी जयपुर में शुक्रवार को अधिकतम तापमान 44.5 डिग्री सेल्सियस रहा. मौसम विभाग के अनुसार, शनिवार को उदयपुर, कोटा, जयपुर व भरतपुर संभाग के कुछ भागों में मानसून पूर्व मौसमी गतिविधियों में बढ़ोतरी होने और तापमान में दो से तीन डिग्री गिरावट होने का अनुमान है।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष जगत प्रकाश नड्डा ने दावा किया है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी न सिर्फ अपना वर्तमान कार्यकाल पूरा करेंगे, बल्कि अगले आम चुनाव में भी सफलता के साथ सरकार का नेतृत्व करेंगे। श्री नड्डा केंद्र में श्री मोदी सरकार के 11 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में सोमवार को यहां पार्टी मुख्यालय में आयोजित एक विशेष संवाददाता सम्मेलन को संबोधित कर रहे थे। भाजपा अध्यक्ष ने कहा कि श्री मोदी के कार्यकाल को लेकर विपक्षी दलों की ओर से बेबुनियाद बातें की जाती हैं।
जनगणना की घोषणा ने परिसीमन की बहस को भी दोबारा जन्म दे दिया है। संविधान में कहा गया है कि लोक सभा क्षेत्रों का पुनसंर्योजन 2026 के बाद पहली जनगणना के आधार पर होना चाहिए एबीएन सेंट्रल डेस्क। केंद्र सरकार ने बुधवार को घोषणा की है कि अगली जनगणना दो चरणों में पूरी की जायेगी। पहले चरण में देश के पहाड़ी इलाकों मसलन जम्मू-कश्मीर, लद्दाख, उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश की जनगणना का काम 1 अक्टूबर, 2026 तक पूरा किया जायेगा। दूसरा चरण जिसे 1 मार्च, 2027 तक पूरा किया जाना है उसमें देश के बाकी हिस्सों की जनगणना की जायेगी। जनगणना का काम मूलतया 2021 में होना था। शुरुआत में इसे कोविड-19 महामारी के कारण टाला गया लेकिन हालात सामान्य होने के बाद भी इसमें देरी क्यों होती रही यह स्पष्ट नहीं है। बहरहाल इस बात का स्वागत किया जाना चाहिए कि सरकार ने जनगणना के लिए एक समयसीमा की घोषणा कर दी है। यह जनगणना 16 वर्षों के अंतराल पर होने जा रही है और इसमें स्वतंत्रता के पश्चात पहली बार विस्तृत जाति जनगणना के आंकड़े भी शामिल किये जायेंंगे। इससे पहले अंतिम जाति जनगणना 1931 में की गयी थी। भारत जैसे तेजी से विकसित होते देश में दशकीय जनगणना अत्यधिक महत्त्वपूर्ण है। लंबे अंतराल को देखते हुए 2027 की जनगणना के आंकड़ों की उत्सुकता से प्रतीक्षा होगी। पिछली जनगणना के बाद से देश काफी बदल चुका है। उदाहरण के लिए देश का सकल घरेलू उत्पाद जो 2011 की जनगणना में करीब 1.8 लाख करोड़ डॉलर था उसके 2027 तक 5 लाख करोड़ डॉलर का आंकड़ा पार कर जाने का अनुमान है। देश में शहरीकरण की गति भी तेज हुई है। नीतिगत उद्देश्यों की बात करें तो ताजातरीन आंकड़ों की सख्त आवश्यकता है। जैसा कि सरकार के एक पूर्व सांख्यिकीविद ने इस समाचार पत्र को बताया, कई सर्वेक्षण जिनका इस्तेमाल करके अर्थव्यवस्था की स्थिति का आकलन किया जाता है और नीतियां बनायी जाती हैं, वे अब उतने विश्वसनीय नहीं रहे क्योंकि वे यह काम 2011 की जनगणना के आधार पर कर रहे हैं। कारोबार की बात करें तो जिस बिक्री को ग्रामीण माना जा रहा है और उस मद में डाला जा रहा है उसका कुछ हिस्सा शहरी हो सकता है। ऐसे में जनगणना स्पष्टता लाने में मदद करेगी। इसके अलावा यह जानना भी महत्त्वपूर्ण है कि आबादी का वास्तविक आकार क्या है। इसके बारे में अनुमान है कि यह चीन से अधिक हो चुकी है और हमारा देश दुनिया का सबसे अधिक आबादी वाला मुल्क है। यह भी संभव है कि जन्मदर घटी हो और वह सर्वेक्षणों में दिए गए संकेतों से काफी कम हो चुकी हो। ऐसे में जनगणना कई अहम सवालों के जवाब देगी और बेहतर जानकारीपरक नीति बनाने में मददगार होगी। आम सामाजिक-आर्थिक पहलुओं के अलावा 2027 की जनगणना के राजनीतिक असर भी होंगे। जैसा कि हमने ऊपर कहा इसमें जाति के आंकड़े जुटाये जायेंगे। यह ध्यान देना जरूरी है कि जाति जनगणना 2024 के चुनावों में भी एक बड़ा राजनीतिक मुद्दा थी। वास्तविक जनगणना के आंकड़ों के साथ राजनीति में जाति की प्रासंगिकता और बढ़ेगी। इस मामले से राजनीतिक परिपक्वता के साथ निपटना होगा। जाति के आंकड़े आरक्षण बढ़ाने की मांग को मजबूत करेंगे। इसके अलावा अन्य पिछड़ा वर्ग की श्रेणी में शामिल होने की होड़ बढ़ सकती है। इससे उपवर्ग तैयार करने की मांग पैदा बढ़ सकती है। इससे समाज में विभाजन बढ़ सकता है जिसका प्रबंधन करना होगा। जनगणना की घोषणा ने परिसीमन की बहस को भी दोबारा जन्म दे दिया है। संविधान में कहा गया है कि लोक सभा क्षेत्रों का पुनसंर्योजन 2026 के बाद पहली जनगणना के आधार पर होना चाहिए। विधायिका में एक तिहाई महिलाओं का आरक्षण भी अगले परिसीमन पर निर्भर है। यह स्पष्ट नहीं है कि अंतिम जनगणना रिपोर्ट कितनी जल्दी उपलब्ध होगी और क्या 2029 के लोक सभा चुनाव के पहले परिसीमन की कवायद पूरा करने के लिए पर्याप्त समय होगा। अगर 2029 के पहले ऐसा नहीं होता है तो भी राजनीतिक विवाद का एक और मोर्चा खुल सकता है। दक्षिण भारत के राज्यों को डर है कि उनका प्रतिनिधित्व कम होगा क्योंकि उत्तर और दक्षिण भारत के बीच आबादी में अंतर बढ़ा है। ऐसे में जनगणना जहां बेहतर नीति निर्माण में मदद करेगी वहीं इसके राजनीतिक प्रभावों का भी प्रबंधन करना होगा।
मोदी सरकार के 11 साल : तीन बड़े कदम, जिन्होंने बदल दी आम जिंदगी एबीएन सेंट्रल डेस्क। इस साल की शुरुआत में महाकुंभ प्रयागराज में था। वहां छोटे से छोटा रेहड़ी वाला भी यूपीआई पेमेंट ले रहा था। एक बार एक रेहड़ी वाले से बातचीत में पता चला कि उसके अकाउंट में एक लाख से ऊपर रुपये की बचत हो गयी है, क्योंकि यूपीआई से आये पेमेंट के अधिकांश हिस्से को वह बचत के रूप में सुरक्षित कर लेता है। कैश से ही कारोबार को आगे बढ़ाने का प्रयास करता है। पहले शायद उसके लिए यह संभव नहीं था। यह चमत्कार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की जन-धन योजना और डिजिटल पेमेंट की क्रांति के कारण संभव हो पाया है। यदि जन-धन योजना में गरीब रेहड़ी वाले का बैंक अकाउंट जीरो बैलेंस पर न खुलता तो शायद वह कभी बैंक खाता खोलने का सपना नहीं देख पाता। मोदी सरकार का यह तीसरा कार्यकाल चल रहा है। 9 जून को सरकार के 11 साल पूरे हो गये हैं। यह जनता का विश्वास है, जो लगातार तीसरी बार नरेंद्र मोदी सत्ता में बने हुए हैं। पिछले 11 सालों में दुनिया ने भारत की आर्थिक और सामरिक शक्ति को देखा है, लेकिन गरीब कल्याण को लेकर नरेंद्र मोदी ने कुछ ऐसी योजनाएं शुरू की, जो युग परिवर्तनकारी हैं। अगस्त 2014 में प्रधानमंत्री बनने के चंद महीने बाद नरेंद्र मोदी ने जन-धन योजना की शुरुआत की। इसमें जीरो बैलेंस में बैंक खाता खोला गया। शुरुआत में विपक्ष ने इस योजना को लेकर मोदी सरकार का उपहास उड़ाया, लेकिन योजना के तहत 55 करोड़ से ऊपर खाते खुले, जिनमें ग्रामीण और अर्द्ध शहरी क्षेत्र के लगभग 36.63 करोड़ खाते हैं। इन खातों में 2.30 लाख करोड़ रुपए की धनराशि जमा है। अच्छी बात है कि 55.6% यानी 29.37 करोड़ खाते महिलाओं के नाम पर हैं। यह भी सच है कि दिसंबर 2023 में 20% खाता निष्क्रिय थे। हालांकि, निष्क्रिय खातों में भी 12,779 करोड़ रुपए की धनराशि जमा है। डिजिटल पेमेंट के क्षेत्र में जब क्रांति आई तो सबसे बड़ा गेम चेंजर यूपीआई पेमेंट बना। यूपीआई से रुपये सीधे बैंक खाते में जाता है। यदि इतनी बड़ी संख्या में बैंक खाते न खोले गए होते तो शायद यूपीआई पेमेंट को भी सफल नहीं किया जा सकता था। मुझे याद है, जब मैं किशोर था और उत्तर प्रदेश में अपने गांव जाता था, तब गांवों के अधिकांश लोग खुले में शौच के लिए जाया करते थे। महिलाओं के लिए तो शौच जाने का एक निश्चित समय निर्धारित था। या वो अलसुबह अंधेरे में या शाम को सूरज छिपने के बाद शौच के लिए खेतों में जा सकती थीं। इससे ज्यादा पीड़ादायक उनके जीवन में कुछ नहीं था। ऐसा नहीं है कि मोदी सरकार पहली बार स्वच्छ भारत मिशन जैसी योजना लेकर आई, लेकिन ईमानदारी से किसी ने इस मिशन को पूरा किया तो वह यही सरकार है। 2 अक्टूबर 2014 को नरेंद्र मोदी ने गांधी जयंती पर स्वच्छ भारत मिशन की शुरूआत की थी। आज 9.63 करोड़ से अधिक शौचालय बनाकर ग्रामीण क्षेत्रों को खुले में शौच से मुक्त किया जा चुका है। यह एक ऐसा कदम है, जिसने महिलाओं के जीवन में क्रांतिकारी परिवर्तन लाया। भारत के सिर से एक कलंक भी मिट गया।
बंगलूरू भगदड़ मामले की नैतिक जिम्मेदारी लीएबीएन सेन्ट्रल डेस्क। बंगलूरू में हुर्द भगदड़ के बाद विवादों में घिरे कर्नाटक राज्य क्रिकेट संघ से बड़ी खबर आ रही है। जानकारी के मुताबिक, ए. शंकर और ईएस जयराम ने केएससीए के सचिव और कोषाध्यक्ष के रूप में अपने-अपने पदों से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने आरसीबी के आईपीएल ट्रॉफी समारोह के दौरान मची भगदड़ की नैतिक जिम्मेदारी ली है। हादसे में 11 लोगों की मौत हो गयी थी। एक संयुक्त बयान में शंकर और जयराम ने कहा कि उन्होंने गुरुवार रात को केएससीए अध्यक्ष को अपना इस्तीफा सौंप दिया है। बयान में कहा गया, पिछले दो दिनों में हुई अप्रत्याशित और दुर्भाग्यपूर्ण घटनाओं की वजह से हम यह बताना चाहते हैं कि हमने कर्नाटक राज्य क्रिकेट संघ के सचिव और कोषाध्यक्ष के रूप में अपने-अपने पदों से इस्तीफा दे दिया है। हालांकि, हमारी भूमिका बहुत सीमित थी। इससे पहले केएससीए अध्यक्ष रघुराम भट, सचिव शंकर और कोषाध्यक्ष जयराम ने कर्नाटक हाईकोर्ट में याचिका लगाई थी कि गेट प्रबंधन और भीड़ प्रबंधन संघ की जिम्मेदारी नहीं थी। उन्होंने विधान सौधा में आरसीबी आईपीएल समारोह आयोजित करने की अनुमति मांगी थी। विधान सौध में सम्मान समारोह बिना किसी बड़ी गड़बड़ी के संपन्न हो गया, लेकिन एम. चिन्नास्वामी स्टेडियम के बाहर अनहोनी हो गयी, जहां आरसीबी के सोशल मीडिया आमंत्रण के बाद लाखों लोग एकत्र हुए, जिसे बाद में हटा दिया गया। इस वजह से विजय परेड को रद्द करना पड़ा, लेकिन स्टेडियम के अंदर समारोह जारी रहा। बावजूद इसके कि बाहर इतना बड़ा हादसा हो गया।
UPI यूजर्स के लिए बड़ी खबर, इस दिन UPI सेवाएं रहेंगी बंदनहीं हो पाएगा कोई डिजिटल ट्रांजैक्शनएबीएन सेन्ट्रल डेस्क। देश के सबसे बड़े प्राइवेट बैंक HDFC बैंक ने अपने ग्राहकों को अलर्ट किया है। बैंक की UPI सेवाएं और कुछ डिजिटल सुविधाएं 8 जून 2025 को चार घंटे के लिए बंद रहेंगी। इस अस्थायी बंदी का कारण सिस्टम अपग्रेड है, जिससे भविष्य में ग्राहकों को बेहतर सेवाएं मिल सकेंगी।कब बंद रहेंगी सेवाएं?बैंक ने जानकारी दी है कि यह मेंटेनेंस 8 जून को सुबह 2:30 बजे से 6:30 बजे तक किया जाएगा। इस दौरान:HDFC बैंक के सेविंग्स और करंट अकाउंट से जुड़ी UPI सेवाएं काम नहीं करेंगी।RuPay क्रेडिट कार्ड के जरिए किए जाने वाले UPI पेमेंट भी प्रभावित होंगे।मोबाइल ऐप और थर्ड-पार्टी ऐप्स (जैसे PhonePe, Google Pay, Paytm) से ट्रांजैक्शन संभव नहीं होंगे।
PM मोदी ने किया दुनिया के सबसे ऊंचे रेलवे ब्रिज का उद्घाटनवंदे भारत की भी दी सौगातएबीएन सेन्ट्रल डेस्क। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शुक्रवार को जम्मू-कश्मीर के दौरे पर पहुंचे और राज्य को 46 हजार करोड़ रुपये की विकास परियोजनाएं समर्पित कीं। इस दौरान उन्होंने दो ऐतिहासिक और तकनीकी दृष्टि से अद्वितीय पुलों चिनाब ब्रिज और अंजी पुल का उद्घाटन किया। साथ ही कटरा से श्रीनगर के बीच चलने वाली वंदे भारत ट्रेन को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। चिनाब नदी पर बना चिनाब ब्रिज अब विश्व का सबसे ऊंचा रेलवे आर्च ब्रिज बन चुका है। इसकी ऊंचाई एफिल टॉवर से भी अधिक है और यह समुद्र तल से 359 मीटर ऊपर स्थित है। यह पुल न केवल इंजीनियरिंग की दृष्टि से बेमिसाल है बल्कि यह देश के हर कोने को कश्मीर घाटी से जोड़ने में भी अहम भूमिका निभाएगा। यह पुल उधमपुर-श्रीनगर-बारामूला रेल लिंक परियोजना का हिस्सा है, जो जम्मू-कश्मीर के भौगोलिक और भावनात्मक दोनों रूपों में भारत से जोड़ने का कार्य करेगा।अंजी पुल की विशेषताएं भी कम नहींप्रधानमंत्री ने अंजी पुल का भी उद्घाटन किया, जो भारत का पहला केबल-स्टे रेलवे ब्रिज है। यह पुल कटरा और रियासी को जोड़ता है और इसकी खूबसूरती के साथ मजबूती भी अद्वितीय है। कठिन भौगोलिक स्थितियों में इस पुल का निर्माण एक बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है।कटरा-श्रीनगर वंदे भारत ट्रेन से हर मौसम में यात्रा संभवप्रधानमंत्री ने कटरा से श्रीनगर के बीच वंदे भारत ट्रेन को रवाना किया। यह ट्रेन अब हर मौसम में घाटी को जम्मू क्षेत्र से जोड़ेगी। यह सुविधा न केवल यात्रियों को राहत देगी बल्कि तीर्थयात्रियों और पर्यटकों के लिए भी बड़ी सौगात होगी। इससे कटरा से श्रीनगर की यात्रा का समय घटकर सिर्फ 3 घंटे के करीब रह जाएगा।सुरक्षा के बाद अब विकास की दस्तकप्रधानमंत्री का यह दौरा पहलगाम में हुए हालिया आतंकी हमले के बाद हो रहा है, जिससे यह संदेश गया कि अब जम्मू-कश्मीर में विकास को रोका नहीं जा सकता। कश्मीर में यह यात्रा सुरक्षा और स्थिरता के नए युग की शुरुआत मानी जा रही है।दिल की दूरी और दिल्ली की दूरी अब कमप्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि ये परियोजनाएं दिल की दूरी और दिल्ली की दूरी को कम करेंगी। उन्होंने कहा कि कनेक्टिविटी बढ़ने से क्षेत्र में रोजगार, निवेश और पर्यटन के नए द्वार खुलेंगे। यह न केवल स्थानीय लोगों को फायदा देगा, बल्कि देशभर से आने वाले सैलानियों के लिए भी जम्मू-कश्मीर अब और पास हो जाएगा।पर्यटन और व्यापार को मिलेगा बढ़ावाइन संरचनाओं के शुरू होने से पर्यटन में जबरदस्त उछाल आने की संभावना है। अमरनाथ यात्रा हो या गुलमर्ग की बर्फीली वादियां, अब ट्रेन से सुरक्षित और सुविधाजनक यात्रा संभव होगी। इसके अलावा व्यापारिक गतिविधियों को भी रफ्तार मिलेगी, जिससे स्थानीय बाजारों को नया जीवन मिलेगा।
दो चरण में होगी गिनती; कोविड के कारण 2021 में टली थी गणना एबीएन सेंट्रल डेस्क। केंद्र सरकार देश में जाति जनगणना का एलान पहले ही कर चुकी है। अब सरकार ने तारीखों का भी एलान कर दिया है। सूत्रों को मुताबिक, भारत में 1 मार्च 2027 से जातीय जनगणना शुरू होगी। यह जनगणना देशभर में दो चरणों में करायी जायेगी। सूत्रों के मुताबिक पहाड़ी राज्यों जैसे लद्दाख, जम्मू कश्मीर, उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश में 1 अक्तूबर 2026 से जनगणना शुरू होगी। वहीं मैदानी इलाकों में जातीय जनगणना की शुरुआत 2027 में होगी।
भारत में सोलर प्लस स्टोरेज बिजली की लागत में भारी गिरावट एबीएन सेंट्रल डेस्क। भारत में सोलर ऊर्जा की लागत कोयला से सस्ती हो गई है, जिससे 24/7 बिजली उपलब्ध हो रही है। केंद्रीय मंत्री प्रल्हाद जोशी ने बताया कि यह बदलाव भारत की औद्योगिक प्रतिस्पर्धात्मकता के लिए महत्वपूर्ण है और प्रधानमंत्री मोदी के सतत विकास दृष्टिकोण का प्रमाण है। केंद्रीय नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्री प्रल्हाद जोशी ने मंगलवार को एक नई स्टडी का हवाला देते हुए कहा कि भारत में सोलर प्लस स्टोरेज आधारित बिजली अब अधिकांश राज्यों में औद्योगिक बिजली दरों से भी सस्ती हो गई है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर केंद्रीय मंत्री ने कहा, यह सफलता भारत की औद्योगिक प्रतिस्पर्धात्मकता के लिए एक बड़ा बदलाव है। यह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सतत विकास को प्राप्त करने के दृष्टिकोण का भी प्रमाण है। कैलिफोर्निया यूनिवर्सिटी, बर्कले के इंडिया एनर्जी एंड क्लाइमेट सेंटर (आईईसीसी) के एक अध्ययन के अनुसार, भारत अब 6 रुपये प्रति किलोवाट घंटे से कम की दर पर चौबीसों घंटे बिजली उपलब्ध करा सकता है, जो कोयला आधारित प्लांट्स की तुलना में सस्ती है और 25 वर्षों तक महंगाई से भी जुड़ी नहीं हुई है। स्टडी में बताया गया कि भारत में बैटरी स्टोरेज लागत पिछले 18 महीनों में 50 प्रतिशत से कम हो गई है। इसके कारण स्टोरेज के साथ सोलर ऊर्जा की संयुक्त लागत नये कोयला आधारित प्लांट्स से भी कम हो गयी है। स्टडी की लेखक और कैलिफोर्निया यूनिवर्सिटी में फैकल्टी सदस्य डॉ निकित अभ्यंकर ने कहा, भारत में सोलर ऊर्जा और स्टोरेज अब अधिकांश राज्यों में औद्योगिक बिजली दरों से सस्ती है और ये कीमतें दशकों तक स्थिर रहेंगी। आधिकारिक जानकारी के मुताबिक, भारत की सोलर एनर्जी क्षमता पिछले 11 वर्षों में तेजी से बढ़ी है और इस वर्ष 31 मार्च तक 105.65 गीगावाट तक पहुंच गयी है, जो कि 2014 में मात्र 2.82 गीगावाट थी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जलवायु परिवर्तन के खिलाफ लड़ाई में देश को अग्रणी बनाने और कार्बन फुटप्रिंट को कम करने के लिए 2030 तक रिन्यूएबल एनर्जी क्षमता के लिए 500 गीगावाट का लक्ष्य तय किया है।
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