अगस्त 2027 से चलने लगेगी देश में बुलेट ट्रेन, पहले फेज में तय करेगी 50 किमी की दूरीएबीएन सेंट्रल डेस्क। मुंबई और अहमदाबाद के बीच 2027 में बुलेट ट्रेन चलनी शुरू हो जायेगी। इस दौरान सिर्फ 2 घंटे में ही मुंबई से अहमदाबाद पहुंचा जा सकेगा। शुक्रवार रेल मंत्री ने अश्विनी वैष्णव यह जानकारी साझा की है। बताया जा रहा है कि सूरत के पचास किलोमीटर के सेक्शन पर पहली बुलेट ट्रेन 2027 में चलेगी। यह बुलेट ट्रेन का पहला फेज है जो यात्रियों के लिए खोला जायेगा। रेलमंत्री ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर एक वीडियो भी शेयर की है। निर्माणाधीन मुंबई बुलेट ट्रेन स्टेशन का काम बहुत तेजी से हो रहा है। माना जा रहा है कि जिस तेजी से प्रोजेक्ट का काम चल रहा है उससे लग रहा है कि 2027 में ट्रैक पर पहली बुलेन ट्रेन दौड़ने लगेगी। इस ट्रेन के चलते से मुंबई और अहमदाबाद के बीच की दूरी भी सिमटकर रह करीब 2 घंटे रह जायेगी। इस ट्रेन के चलने दोनों शहरों के बीच कारोबार भी आसान हो जायेगा।
बीजेपी अध्यक्ष पद को लेकर सस्पेंस खत्म? जल्द हो सकता है बड़ा ऐलानएबीएन सेंट्रल डेस्क। भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष के चुनाव को लेकर लंबे समय से उठ रही अनिश्चितता अब राजनीतिक गलियारों में चर्चा का केंद्र बनी हुई है। पार्टी के सर्वोच्च पद के लिए नए अध्यक्ष के चयन को टाले जाने की खबरें लगातार आ रही हैं।वहीं पार्टी और इसके जनक संगठन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के बीच इस पद को लेकर सहमति न बनने की अटकलें भी तेज हो गई हैं। इसी कारण 2017 से भाजपा अध्यक्ष के पद पर जेपी नड्डा का कार्यकाल लगातार बढ़ाया जा रहा है और फिलहाल इस प्रक्रिया में कोई बदलाव नहीं दिख रहा। हाल ही में इस मसले को लेकर पार्टी के वरिष्ठ नेता और पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन गडकरी से भी सवाल पूछा गया था।जब उनसे पूछा गया कि आखिर भाजपा अध्यक्ष का चुनाव क्यों नहीं हो पा रहा और क्या पार्टी तथा संघ के बीच कोई मतभेद हैं, तो गडकरी ने इस सवाल का जवाब देते हुए मुस्कुराते हुए कहा कि यह सवाल सही व्यक्ति से नहीं पूछा गया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस विषय में सही जवाब भाजपा के वर्तमान अध्यक्ष जेपी नड्डा ही दे सकते हैं।इस संदर्भ में गडकरी ने कहा कि सवाल सही है, लेकिन गलत व्यक्ति से किया गया है। उन्होंने सुझाव दिया कि पार्टी और संघ के बीच संबंधों को लेकर और चुनाव प्रक्रिया को लेकर सवाल नड्डा से पूछे जाएं क्योंकि वे ही इस मामले के जिम्मेदार और सही उत्तरदाता हैं।भाजपा अध्यक्ष पद की बात करें तो 2017 से जेपी नड्डा इस पद पर बने हुए हैं। इससे पहले, 2014 से 2017 तक अमित शाह पार्टी अध्यक्ष रहे, जिन्होंने दो बार यह जिम्मेदारी संभाली। 2010 से 2013 तक नितिन गडकरी इस पद पर थे। इसके बाद मोदी सरकार के सत्ता में आने के बाद भाजपा अध्यक्ष पद को लेकर स्थिरता दिखी, लेकिन अब पार्टी के शीर्ष नेतृत्व और संघ के बीच एक साझा नाम को लेकर सहमति न बन पाने के कारण चुनाव टलते रहे हैं। पार्टी सूत्रों की मानें तो यह मनमुटाव और असमंजस ही कारण है कि नड्डा का कार्यकाल लगातार बढ़ाया जा रहा है और इस पद के लिए कोई नया चुनाव आयोजित नहीं किया जा रहा। राजनीतिक विश्लेषक इसे भाजपा के अंदरूनी समीकरणों और संघ के प्रभाव की जटिलताओं का नतीजा बता रहे हैं। इस बीच, यह भी कहा जा रहा है कि आगामी दिनों में इस विषय पर स्थिति स्पष्ट हो सकती है और पार्टी नेतृत्व जल्द ही इस मामले पर अपनी ठोस प्रतिक्रिया देगा।
75 साल के हुए PM नरेंद्र मोदी, CM हेमंत ने जन्मदिन की दी शुभकामनाएंएबीएन सेन्ट्रल डेस्क। देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का आज 75वां जन्मदिन है। पूरे देश में जश्न का माहौल है। अलग-अलग पार्टियों के नेता पीएम मोदी को जन्मदिन की शुभकामनाएं दे रहे हैं। वहीं, झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को जन्मदिन की बधाई दी है।मरांग बुरु सदैव उत्तम स्वास्थ्य और सुदीर्घ जीवन प्रदान करेंमुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने सोशल मीडिया एक्स पर लिखा, देश के माननीय प्रधानमंत्री आदरणीय श्री नरेंद्र मोदी जी को 75वें जन्मदिवस की अनेक-अनेक बधाई, शुभकामनाएं और जोहार। मरांग बुरु आपको सदैव उत्तम स्वास्थ्य और सुदीर्घ जीवन प्रदान करें, यही कामना करता हूं।... तो इस कारण भाजपा गुजरात में सत्ता में आईपीएम मोदी का जन्म 17 सितंबर 1950 को गुजरात के वडनगर में हुआ था। उन्होंने गुजरात विश्वविद्यालय से राजनीति विज्ञान में एमए की पढ़ाई की है। शुरुआती दिनों में नरेंद्र मोदी ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के साथ काम किया। उन्होंने गुजरात में भारतीय जनता पार्टी का क्षेत्रीय आयोजक के रूप में भी काम किया। जानकारी के मुताबिक, पीएम मोदी ने साल 1987 में राजनीति में एंट्री ली। वह 1988 में गुजरात बीजेपी संघ के महासचिव बने। इसके बाद वह 1995 में, नरेंद्र मोदी को भाजपा की राष्ट्रीय संघ के सचिव बने। उन्होंने 1995 और 1998 के गुजरात विधानसभा चुनावों में पार्टी के लिए प्रचार में अहम किरदार निभाया। इस कारण भाजपा गुजरात में सत्ता में आई।
असल पत्रकारिता करने देश भर के पत्रकार तैयार हों : त्रियुग नारायण तिवारीएबीएन सेन्ट्रल डेस्क (नई दिल्ली)। नेशनल यूनियन ऑफ जर्नलिस्ट्स (इंडिया) की राष्ट्रीय कार्यसमिति की दो दिनी बैठक विजयवाड़ा आन्ध्र प्रदेश में संपन्न हुई। जिसमें एनयूजे आई अध्यक्ष सुरेश शर्मा ने केन्द्र सरकार से आग्रह किया कि प्रेस की स्वतंत्रता कथन को सार्थक बनाने के लिए अभिव्यक्ति की आजादी वाले कानून में मीडिया की अभिव्यक्ति को अलग से परिभाषित करना चाहिए। अभिव्यक्ति का मौलिक अधिकार स्वयं के लिए है जबकि मीडिया दूसरों की अभिव्यक्ति को प्रमुखता देता है। अनुच्छेद 19 (1) (A) में इस प्रकार का संशोधन किया जाने की जरूरत है। यह समस्या इस कारण उत्पन्न हो रही है कि केन्द्र सरकार के कई विभागों के साथ राज्यों ने अपने सचिवालय में पत्रकारों के प्रवेश पर पाबंदी लगा दी है। यह स्वतंत्र प्रेस की परिभाषा के खिलाफ है।पंडित नेहरू से लगाकर अटल जी तक प्रेस की स्वतंत्रता के पुरजोर समर्थक रहे हैं। एनयूजे आई महासिचव त्रियुग नारायण तिवारी ने बैठक में कहा कि एक बार फिर से पत्रकारों को असल पत्रकारिता करना चाहिए। आज के लोकतंत्र को इसी प्रकार की पत्रकारिता की जरूरत है।बैठक में कई प्रस्तावों को स्वीकार किया गया है। बीकानेर की बैठक में प्रस्ताव के माध्यम से संकल्प लिया गया था कि मीडिया को उसकी लोकतांत्रिक ताकत का अहसास कराने के लिए एनयूजे आई जामवंत की भूमिका निभाकर हनुमान रूपि मीडिया को उसकी शक्ति की याद दिलायेगे। उसी क्रम में इस बार भी एक पत्रकार हितैषी प्रस्ताव पारित किया गया। एनयूजे अाई अध्यक्ष ने इस पर अपनी बात रखते हुए कहा कि देश भर में पत्रकारों के सामने बड़ा संकट आया हुआ है। उन्हें समाचार संकलन के लिए सचिवालय में प्रवेश पर पाबंदी लगा दी गई हैं। यह लोकतंत्र की मान्य परम्परा के खिलाफ है। कई राज्यों से सूचना मिलती है कि पत्रकार कोई समाचार जिसमें राज्य के हित को प्रभावित करके अपना हित साधा गया है प्रकाशित कर दिया जाता है तब उस पत्रकार के खिलाफ सरकारी कार्य में बाधा का प्रकरण दर्ज कराकर परेशान किया जाता है। जब पत्रकार यह पूछता है कि भ्रष्टाचार करना, जनता के काम को टालने की मानसिकता कब से सरकारी कार्य में बाधा हो जाता है तब पुलिस नाकद दबाव बनाती है। इससे देश के कई राज्यों में समाचार संकलन करना कठिन काम हो रहा है। सरकारों की इस गोपनीयता की लोकतंत्र में क्या जरूरत है समझना कठिन है। इसलिए एक प्रस्ताव पारित किया गया है। जिसमें कहा गया है कि अनुच्छेद 19 (1) (A) में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के साथ मीडिया की अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को अलग से परिभाषित किया जाना चाहिए। क्योंकि इस अनुच्छेद में अपनी अभिव्यक्ति की चर्चा है। जबकि मीडिया किसी अन्य के कथन को अभिव्यक्त का मंच उपलब्ध कराता है। इस प्रस्ताव को वरिष्ठ पत्रकार व लेखक उमेश चतुर्वेदी ने प्रस्तुत किया जिसका समर्थन बिहार जाने-माने पत्रकार राकेश प्रवीर ने किया। खुली बहस के बाद इस प्रस्ताव को स्वीकार किया गया? वरिष्ठ पत्रकार और यूपी यूनिट के प्रदेश अध्यक्ष सर्वेश कुमार सिंह के हस्तक्षेप से यह प्रस्ताव पारित हुआ। चंडीगढ़ के कुछ साथियों ने इस प्रस्ताव के विपक्ष में अपनी बात कही जो बाद में प्रस्ताव की भावना से सहमत हो गये।अध्यक्ष सुरेश शर्मा ने देश भर से आये पत्रकारों का आव्हान किया कि वे जन सरोकार के समाचारों को प्रमुखता दें। जिससे लोकतंत्र काे ताकत मिल सके आैर मीडिया की सार्थकता दिखाई देने लगे। उन्होंने कहा कि संगठन का अभिप्राय आपसी समन्वय, भाईचारा और सुखदुख में सहभागिता होता है। इस उन्होंने जोर दिया। प्रस्ताव पेश करते समय उमेश चतुर्वेदी ने कहा कि आज समय की मांग है कि मीडिया को अलग से परिभाषित किया जाये। समर्थन करते हुए राकेश प्रवीर ने कहा कि समाचार संकलन की परेशानी यहां तक हो गई है कि सूचना के अधिकार कानून का भी कोई प्रभाव नहीं हो रहा है।एनयूजे आई महासचिव त्रियुग नारायण तिवारी ने बैठक में कहा कि आज पत्रकारिता को एक बार फिर से मिशन बनाने की जरूरत है। आज का मिशन असल पत्रकारिता होना चाहिए। जनती की समस्याओं को सरकार व प्रशासन तक ले जाना और उसका निराकरण करवाने का प्रयास भी करना चाहिए? उन्होंने कहा कि यह न जाने क्यों कहा जाने लग गया कि मीडिया का काम विषय की ओर ध्यान आकर्षित करना है। आज केवल ध्यानाकर्षित करने से काम नहीं चलता क्योंकि नौकरशाही पर किसी अन्य का नियंत्रण नहीं रहा है। श्री तिवारी ने कहा कि मीडिया में काम करने वालों की समस्याओं के समाधान के प्रति राज्यवार चिंता की जाना चाहिए।एनयूजे आई के पूर्व अध्यक्ष व वरिष्ठ नेता अशोक मलिक ने संगठन को ताकतवर बनाने और पत्रकारों के हित में अधिक कार्य करने की सलाह दी। वरिष्ठ पत्रकार राजीव शुक्ला ने कहा कि हर किसी को अपना स्थान बनाने का मौका मिलता है। आप उसकी प्रतीक्षा करिये और खुद को सिद्ध करिये स्थान खुद मिल जायेगा। वरिष्ठ पत्रकार रवीन्द्र वाजपेयी ने कहा कि समाचारों का आपसी संव्यवहार एक दूसरे राज्याें की गतिविधियों काे समझने का मौका देता है। इससे प्रदेश की या पत्रकाराें की समस्या को राष्ट्रीय मंच मिलता है। आयोजन को विभिन्न अवसरों पर सर्वश्री सर्वेश कुमार सिंह, बलदेव शर्मा, हरेश वशिष्ठ, आभा निगम, कविता राज, पुरूषोत्तम, नागेश्वर राव, कैलाश नायक, भवानी जोशी, अभिजीत चौधरी सहित अन्य साथियों ने संबोधित किया।बैठक में कई प्रस्तावों पर चर्चा हुई। नया वेतनमान तय करने के वेज बोर्ड का गठन करने, मीडिया आयोग बनाकर पत्रकारों के व्यापक स्वरूप के हिसाब मीडिया काउंसिल बनाने, रेल सुविधाओं को फिर से बाहल करने, टाेल नाकों पर पत्रकारों को टोल मुक्त करने, समाचार जगत को जीएसटी के दायरे से पूर्व की भांति बाहर करने के साथ ही आरएनआई और डीएव्हीपी के आये दिन आने वाले परिपत्रों के बंधने से मुक्ति दिलाने की भी मांग की गई। कविता राज ने महिला पत्रकारों की समस्याओं के संबंधन में कुछ सुझाव दिये। महिला सेल की प्रमुख आभा निगम ने प्रकोष्ठ की बैठक कर महिला पत्रकारों की समस्याओं पर व्यापक चर्चा की। देशव्यापी अभियान चला कर महिलाओं को सरल और सम्मानजनक पत्रकारिता करने की दिशा में सहायता करने की घोषणा की।बैठक का आयोजन आन्ध्र प्रदेश के बड़े पत्रकार संगठन और एनयूजे आई की संबद्ध इकाई पेन जाप के द्वारा किया गया था। राष्ट्रीय उपाध्यक्ष और पेन जाप के अध्यक्ष बड़े प्रभाकर और उनकी समस्त टीम के प्रति सभी प्रदेशों के सदस्यों ने आभार माना और उनका अभिवादन किया गया। इस अवसर पर प्रदेश के विभिन्न पत्रकारों का सम्मान किया गया। कुछ विशिष्ठ लोगों का भी मंच पर स्वागत किया गया। दो दिनी इस बैठक का परिणामदायक समापन हुआ। अन्त में सभी सहभागियों का आभार महासचिव त्रियुगनारायण तिवारी ने माना। अध्यक्ष सुरेश शर्मा ने इसके बाद बैठक समाप्त करने की घोषणा की। अगली बैठक की बाद में सूचना दी जायेगी। यह कहा गया कि साथियों की सुविधा के लिए अब बैठक के स्थान की सूचना और पहले दी जाना चाहिए क्योंकि आरक्षण नियमों में बदलाव हो गया है और दो माह पहले अब टिकिट बुक होने लगे हैं।
बासुकीनाथ पाण्डेय एबीएन सेन्ट्रल डेस्क। आज हम सब एक पुरानी राजनीतिक घटना को याद कर रहे हैं, जब 1989 में राजीव गांधी चोर है का नारा गूंजा था। यह नारा लालू प्रसाद यादव, मुलायम सिंह यादव और वीपी सिंह ने मिलकर उठाया था, जो उस समय विपक्ष की ताकत बन गया था। यह नारा बिहार से लेकर उत्तर प्रदेश तक गूंजा और लोगों के दिलों में अपनी जगह बना लिया। उस समय यह नारा राजीव गांधी की सरकार के खिलाफ एक मजबूत आवाज बनकर उभरा था, जो भ्रष्टाचार के आरोपों से घिरी थी। लेकिन समय का पहिया घूमता है, और आज वही लोग, जो कभी एक-दूसरे के खिलाफ नारे लगाते थे, एक साथ दिखाई दे रहे हैं। लालू प्रसाद यादव, मुलायम सिंह यादव और उनके समर्थक अब एक मंच पर एकजुट हो गए हैं। यह देखकर लगता है कि राजनीति में सिद्धांतों से ज्यादा सत्ता और गठबंधन की राजनीति हावी हो गई है। क्या यह दोहरा चरित्र नहीं है? जो कल तक चोर कहते थे, आज वही एक साथ खड़े हैं।1989 का वह दौर याद करें, जब वीपी सिंह ने रक्षा मंत्री पद से इस्तीफा देकर भ्रष्टाचार के खिलाफ मोर्चा खोला था। बोफोर्स घोटाले ने राजीव गांधी की सरकार को हिला कर रख दिया था, और जनता ने इसका जवाब चुनाव में दिया। लालू और मुलायम ने भी इस आंदोलन में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया था, जो समाजवादी विचारधारा के प्रतीक बन गए थे। लेकिन आज का मंजर कुछ और ही कहानी बयान करता हैराजनीति में गठबंधन और सत्ता की भूख ने पुराने नारों को धुंधला कर दिया है। गली-गली में शोर है, राजीव गांधी चोर है का नारा अब इतिहास बन चुका है, और आज के दौर में सभी एक-दूसरे के साथ मिलकर सियासी खेल खेल रहे हैं। यह बदलाव जनता के लिए सोचने का विषय है कि आखिर सच्चाई क्या है? क्या यह सब सिर्फ सत्ता के लिए है या कुछ और?हमें अपने देश की राजनीति को समझने की जरूरत है। हर नेता के पास अपनी कहानी और अपने वादे होते हैं, लेकिन क्या वे वादों पर कायम रहते हैं? लालू, मुलायम और वीपी सिंह की जोड़ी ने कभी एकजुट होकर सत्ता के खिलाफ आवाज उठाई थी, लेकिन आज उसी सत्ता के लिए वे एक साथ हैं। यह विडंबना नहीं तो और क्या है? आइए, हम सब मिलकर सही और गलत की पहचान करें। तो दोस्तों, इस पोस्ट को शेयर करें और अपनी राय दें। क्या आपको लगता है कि राजनीति में सिद्धांत मायने रखते हैं या सिर्फ सत्ता? अपनी टिप्पणियों में बताएं और इस बहस को आगे बढ़ाएं। (लेखक एबीएन से जुड़े हैं।)
बोकारो क्षेत्र से नक्सलवाद पूरी तरह समाप्त, जल्द ही पूरा देश नक्सलवाद से मुक्त होगा : शाह एबीएन सेंट्रल डेस्क। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने झारखंड के हजारीबाग में नक्सल विरोधी सफल अभियान को बड़ी कामयाबी बताते हुए सोमवार को कहा कि इस अभियान के बाद उत्तरी झारखंड के बोकारो क्षेत्र से नक्सलवाद पूरी तरह से समाप्त हो गया है और जल्द ही पूरा देश नक्सलवाद की समस्या से मुक्त हो जायेगा। श्री शाह ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में कहा, आज झारखंड के हजारीबाग में सीआरपीएफ की कोबरा बटालियन और राज्य पुलिस की जॉइंट टीम को एंटी नक्सल आपरेशन में बड़ी कामयाबी मिली है। इस अभियान में एक करोड़ रुपये का इनामी और कुख्यात नक्सली कमांडर सीसीएम सहदेव सोरेन उर्फ परवेश को ढ़ेर कर दिया गया है।साथ ही, दो अन्य इनामी नक्सलियों- रघुनाथ हेंब्रम उर्फ चंचल और बिरसेन गांझू उर्फ रामखेलावन को भी सुरक्षा बलों ने मार गिराया। इस आपरेशन के बाद उत्तरी झारखंड के बोकारो क्षेत्र से नक्सलवाद पूरी तरह से समाप्त हो गया है। जल्द ही पूरा देश नक्सलवाद की समस्या से मुक्त होगा। उल्लेखनीय है कि हजारीबाग जिले के गोरहर थाना क्षेत्र के पनतीतरी जंगल में पुलिस के साथ मुठभेड़ में भाकपा (माओवादी) केंद्रीय समिति के सदस्य और एक करोड़ रुपये के इनामी नक्सली कमांडर सहदेव सोरेन समेत तीन नक्सली मारे गये। सहदेव सोरेन लंबे समय से पुलिस के लिए सिरदर्द बना हुआ था। हाल ही में झारखंड पुलिस ने उसके ऊपर एक करोड़ रुपये का इनाम घोषित किया था। वह कई बड़ी नक्सली घटनाओं का मास्टरमाइंड रहा था, जिसके कारण पुलिस और केंद्रीय एजेंसियां लगातार उसकी तलाश में थीं।
रिक्टर स्केल पर 5.8 रही तीव्रता, असम के उदलगुरी में था भूकंप का केंद्र एबीएन सेंट्रल डेस्क। पूर्वोत्तर के कई हिस्सों में भूकंप के झटके महसूस किये गये। रिक्टर स्केल पर भूकंप की तीव्रता 5.8 मापी गयी है। असम सरकार के अधिकारियों ने इस बारे में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि रविवार को देश के पूर्वोत्तर क्षेत्र के कुछ हिस्सों में 5.8 तीव्रता का भूकंप आया। अधिकारियों ने बताया कि भूकंप रविवार शाम 4.41 बजे आया और इसका केंद्र उदलगुरी जिले में था। भूकंप की गहराई 5 किमी थी। भूकंप के कारण बंगाल से भूटान तक झटके महसूस किये गये। भूकंप के कारण लोग दहशत में आ गए और घरों से बाहर निकल आये। उन्होंने बताया कि किसी भी प्रकार के जान-माल के नुकसान की तत्काल कोई रिपोर्ट नहीं है। भूकंप का केंद्र उस स्थान को कहते हैं जिसके ठीक नीचे प्लेटों में हलचल से भूगर्भीय ऊर्जा निकलती है। इस स्थान पर भूकंप का कंपन ज्यादा होता है। कंपन की आवृत्ति ज्यों-ज्यों दूर होती जाती हैं, इसका प्रभाव कम होता जाता है। फिर भी यदि रिक्टर स्केल पर 7 या इससे अधिक की तीव्रता वाला भूकंप है तो आसपास के 40 किमी के दायरे में झटका तेज होता है। लेकिन यह इस बात पर भी निर्भर करता है कि भूकंपीय आवृत्ति ऊपर की तरफ है या दायरे में। यदि कंपन की आवृत्ति ऊपर को है तो कम क्षेत्र प्रभावित होगा।
स्वास्थ्य मंत्री बोले – अस्पतालों में सभी तरह की तैयारी कर ली गईएबीएन सेन्ट्रल डेस्क (नई दिल्ली)। राजधानी में H3N2 वायरस को लेकर बढ़ती चिंताओं के बीच दिल्ली के स्वास्थ्य मंत्री पंकज सिंह ने लोगों को आश्वस्त करते हुए कहा है कि यह कोई गंभीर बीमारी नहीं है, बल्कि एक सामान्य मौसमी वायरल संक्रमण है जिससे डरने की आवश्यकता नहीं है। उन्होंने साफ कहा कि सरकार और स्वास्थ्य विभाग पूरी स्थिति पर नजर रखे हुए हैं और सभी ज़रूरी प्रबंध किए जा चुके हैं।यह सामान्य वायरल है, घबराएं नहीं, सतर्क रहें शुक्रवार, 12 सितंबर को मीडिया को संबोधित करते हुए मंत्री पंकज सिंह ने कहा, H3N2 को लेकर घबराने की कोई जरूरत नहीं है। यह बिल्कुल वैसा ही वायरल है जैसा हर साल मौसम बदलते वक्त देखने को मिलता है। समय पर इलाज और आराम से यह आसानी से ठीक हो जाता है।” उन्होंने लोगों से अपील की कि अफवाहों पर ध्यान न दें और कोई भी लक्षण दिखने पर नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र में जांच जरूर कराएं।क्या है H3N2 वायरस?H3N2 एक प्रकार का इन्फ्लुएंजा A वायरस है जो मुख्य रूप से श्वसन प्रणाली को प्रभावित करता है। यह वायरस संक्रमित व्यक्ति के खांसने, छींकने या बात करने से निकलने वाली सूक्ष्म बूंदों के जरिए तेजी से फैल सकता है।इसके आम लक्षणों में शामिल हैं:तेज़ बुखारगले में खराशखांसीबदन दर्दअत्यधिक थकावटज्यादा खतरा उन लोगों को होता है जिनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता कमज़ोर होती है।
छत्तीसगढ़ के गरियाबंद में सुरक्षाबलों को बड़ी सफलता, 1 करोड़ के इनामी समेत 10 नक्सली ढेर एबीएन सेंट्रल डेस्क। छत्तीसगढ़ के गरियाबंद जिले में सुरक्षाबलों और नक्सलियों के साथ मुठभेड़ हुई, जिसमें 10 नक्सलियों के ढेर होने की खबर है। इस मुठभेड़ में एक करोड़ का इनामी नक्सली सीसी मेंबर बालकृष्णा भी मारा गया है। एसपी निखिल राखेचा ने इसकी पुष्टि की है। रायपुर रेंज के आईजी अमरेश मिश्रा ने बताया कि गरियाबंद में सुरक्षा बलों और नक्सलियों के बीच मुठभेड़ जारी है और रुक-रुक कर गोलीबारी हो रही है। कुछ नक्सलियों के मारे जाने की संभावना है। सूत्रों के मुताबिक मारे गए नक्सलियों में सीसी सदस्य मनोज उर्फ मॉडेम बालकृष्ण भी शामिल है, जो संगठन का बड़ा चेहरा माना जाता था। सुरक्षा बलों की इस कार्रवाई को नक्सल विरोधी अभियान में बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है। आईजी ने की एनकाउंटर की पुष्टि रायपुर रेंज के आईजी अमरेश मिश्रा ने ये भी बताया कि गरियाबंद में गुरुवार (11 सितंबर) सुबह से नक्सल विरोधी अभियान जारी है। सुबह से ही मुठभेड़ चल रही है। रायपुर के पुलिस महानिरीक्षक ने मुठभेड़ की पुष्टि की है। नारायणपुर में 16 नक्सलियों ने किया सरेंडर वहीं छत्तीसगढ़ के नारायणपुर जिले में 16 नक्सलियों ने सरेंडर कर दिया। इन नक्सलियों ने वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के सामने आत्मसमर्पण किया। नारायणपुर के पुलिस अधीक्षक रॉबिन्सन गुरिया ने बताया कि सभी 16 नक्सली निचले स्तर के कैडर थे और जनताना सरकार, चेतना नाट्य मंडली और माओवादियों की पंचायत मिलिशिया के सदस्यों सहित विभिन्न इकाइयों से जुड़े थे। दंतेवाड़ा में 2 जवान घायल इसके अलावा छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा जिले में गुरुवार (11 सितंबर) को नक्सलियों द्वारा लगाये गये प्रेशर आईईडी विस्फोट में सीआरपीएफ के दो जवान घायल हो गये। अधिकारियों ने बताया कि यह घटना सुबह करीब 10।30 बजे इंद्रावती नदी पर बने सातधार पुल के पास हुई, जब सीआरपीएफ की 195वीं बटालियन का एक दल मालेवाही थाना क्षेत्र स्थित अपने शिविर से एरिया डोमिनेशन आॅपरेशन पर निकला था।
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