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पेट्रोल का स्टॉक कर रहे युवक की जलकर मौत
Published / 2026-03-13 18:47:59
पेट्रोल का स्टॉक कर रहे युवक की जलकर मौत

ये तो जान से खिलवाड़… पेट्रोल का स्टॉक कर रहा था युवक, उसी में लग गई आग; जिंदा जलकर मौतएबीएन सेंट्रल डेस्क। मिडिल ईस्ट में युद्ध ईरान-अमेरिका और इजराइल के बीच चल रहा है, लेकिन इस युद्ध का असर सभी देशों पर देखने को मिल रहा है। भारत में तो LPG गैस सिलेंडर के लिए लोग लंबी-लंबी लाइनों में लग रहे हैं, फिर भी उन्हें सिलेंडर नहीं मिल पा रहा है।पेट्रोलियम पदार्थों को लेकर उड़ी अफवाह का असर ऐसा है कि अब तो लोग पेट्रोल-डीजल भी स्टॉक करके रखने लगे हैं। ऐसे में कई जगह आग लगने की घटनाएं सामने आई हैं। झारखंड के गढ़वा में तो एक युवक की इसी तरह के हादसे में जान चली गई। आग में झुलसे युवक की पहचान थाना क्षेत्र के ही ओबरा गांव निवासी शंभू प्रसाद गुप्ता के रूप में हुई। आनन-फानन में पुलिस ने शंभू को इलाज के लिए सदर अस्पताल में भर्ती कराया। यहां डॉक्टरों ने उसका प्राथमिक उपचार किया, लेकिन हालात ज्यादा गंभीर होने के चलते डॉक्टरों ने उसे रांची रेफर कर दिया। हालांकि रास्ते में ही शंभू की मौत हो गई। सदर अस्पताल के डॉक्टरों ने बताया कि युवक का शरीर 80 प्रतिशत तक झुलस चुका था। बचने की उम्मीद कम थी।तेज रफ्तार कार ने मारी टक्करपुलिस ने घटना की जानकारी देते हुए बताया कि शंभू ने लोटो गांव में पेट्रोल पंप पर प्लास्टिक के गैलन में पेट्रोल भराया। उसे मोपेड पर रखकर जैसे ही सड़क पर आया, तभी एक तेज रफ्तार कार ने मोपेड में टक्कर मार दिया। इससे गैलन फट गया और आग लग गई। शंभू भी आग की चपेट में आ गया। आग लगने के बाद वह इधर-उधर दौड़ने लगा। घटनास्थल पर मौजूद लोग जब तक आग बुझाते, तब तक शंभू गंभीर रूप से झुलस चुका था। रांची ले जाते समय रास्ते में उसकी मौत हो गई।पेट्रोल का स्टॉक कर रहा था युवकशंभू के परिजनों ने बताया कि युद्ध के चलते पेट्रोल-डीजल न मिलने का डर था। पेट्रोल खत्म न हो जाए, इसके लिए शंभू पेट्रोल लेकर घर आ रहा था। रास्ते में हादसे में उसकी मौत हो गई। गांव के मुखिया ने बताया कि शभूं पेट्रोल स्टॉक कर रहा था। उस डर था कि कहीं गैस सिलेंडर की तरह पेट्रोल की भी दिक्कत न हो जाए। यही स्टॉक करना उसके लिए भारी पड़ गया।

हमारे देश में इंधन की कोई कमी नहीं: हरदीप पुरी
Published / 2026-03-12 21:09:40
हमारे देश में इंधन की कोई कमी नहीं: हरदीप पुरी

एबीएन सेंट्रल डेस्क। लोकसभा में हरदीप पुरी ने कहा कि वैश्विक परिस्थितियों के बावजूद भारत ने ऊर्जा आपूर्ति को सुरक्षित रखने के लिए पर्याप्त कदम उठाये हैं। उन्होंने कहा, हमारे पास पर्याप्त कच्चा तेल उपलब्ध है। पेट्रोल, डीजल और गैस सिलेंडर की कोई कमी नहीं है। एलएनजी के कार्गो लगातार आ रहे हैं और वैकल्पिक मार्गों से भी आपूर्ति सुनिश्चित की जा रही है। उन्होंने यह भी बताया कि सीएनजी की आपूर्ति भी पूरी तरह सामान्य है और देश में ईंधन की उपलब्धता को लेकर किसी तरह की चिंता की जरूरत नहीं है।  अविश्वास प्रस्ताव पर ओम बिरला ने कहा कि लोकतंत्र में मजबूत विपक्ष जरूरी, नेता प्रतिपक्ष को कभी नहीं रोका; नियम सबसे ऊपर होर्मुज में 20 प्रतिशत आवाजाही प्रभावित मंत्री ने स्वीकार किया कि स्ट्रेट आॅफ होर्मुज में बढ़ते तनाव के कारण लगभग 20 प्रतिशत समुद्री आवाजाही प्रभावित हुई है। इसके बावजूद भारत ने अपने ऊर्जा स्रोतों को विविध बनाकर आपूर्ति को सुरक्षित रखा है। उन्होंने बताया कि भारत कनाडा, नॉर्वे और रूस सहित कई देशों से ईंधन आयात कर रहा है, जिससे सप्लाई चेन में किसी तरह की बड़ी बाधा नहीं आई है। एलपीजी उत्पादन में बढ़ोतरी हरदीप पुरी ने कहा कि सरकार ने घरेलू स्तर पर भी उत्पादन बढ़ाने के लिए कदम उठाए हैं। उनके अनुसार देश में एलपीजी उत्पादन में लगभग 28 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। इसके साथ ही सरकार ने वैकल्पिक ईंधन आपूर्ति चैनलों को सक्रिय कर दिया है। उन्होंने बताया कि जरूरत पड़ने पर केरोसिन तेल की उपलब्धता भी रिटेल नेटवर्क के माध्यम से सुनिश्चित की जा रही है।  कांग्रेस का सरकार पर हमला, राहुल बोले- पीएम नरेंद्र मोदी खुद घबराए हुए हैं, सदन में नहीं आ पा रहे तीन मंत्रियों की समिति बना कर निगरानी सरकार ने मौजूदा हालात की निगरानी के लिए तीन मंत्रियों की एक उच्चस्तरीय समिति भी बनायी है। यह समिति अंतरराष्ट्रीय स्थिति और घरेलू ऊर्जा आपूर्ति पर लगातार नजर रख रही है। मंत्री ने कहा कि सरकार ने लंबे समय तक ऐसे हालात से निपटने के लिए व्यापक योजना तैयार की है और ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सभी जरूरी कदम उठाये जा रहे हैं। घबराहट के कारण बढ़ी मांग हरदीप पुरी ने कहा कि देश में गैस और ईंधन की मांग में हालिया बढ़ोतरी का कारण पैनिक बाइंग है। उन्होंने लोगों से अपील की कि वे अनावश्यक घबराहट में ईंधन जमा न करें। उन्होंने कहा कि सरकार ने गैस वितरण के लिए प्राथमिकताएं तय कर दी हैं, ताकि जरूरतमंद क्षेत्रों और उपभोक्ताओं तक समय पर आपूर्ति पहुंच सके।

लोगों को सता रहा घरेलू रसोई गैस की किल्लत का डर!
Published / 2026-03-11 20:17:23
लोगों को सता रहा घरेलू रसोई गैस की किल्लत का डर!

गैस एजेंसियों पर उमड़ी भीड़, होटलों ने दी बंद होने की चेतावनी एबीएन सेंट्रल डेस्क। पश्चिम एशिया में युद्ध और होर्मुज संकट के बीच भारत में एलपीजी सप्लाई को लेकर चिंता बढ़ी, सरकार ने आपूर्ति बनाए रखने के लिए कदम उठाये। पश्चिम एशिया में जारी युद्ध का असर अब भारत की ऊर्जा आपूर्ति पर भी दिखाई देने लगा है। संघर्ष के 12वें दिन देश के कई हिस्सों में रसोई गैस यानी एलपीजी की आपूर्ति को लेकर चिंता बढ़ गयी है। संभावित कमी की आशंका के चलते कुछ जगहों पर लोगों ने पहले से ही गैस सिलेंडर लेने के लिए जल्दबाजी शुरू कर दी है। वहीं होटल और ढाबा संचालकों ने चेतावनी दी है कि यदि आपूर्ति में बाधा आती है तो उनके लिए कारोबार चलाना मुश्किल हो सकता है। सरकार और प्रशासन स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं और ईंधन आपूर्ति को सुचारु बनाए रखने के लिए कदम उठा रहे हैं। हालांकि एलपीजी के परिवहन और आपूर्ति से जुड़े कारोबारियों का कहना है कि पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष का असर समुद्री मार्गों पर पड़ रहा है, जिससे गैस के शिपमेंट की आवाजाही प्रभावित हो सकती है। स्ट्रेट आफ होर्मुज से जुड़ी है सप्लाई की चिंता एलपीजी आपूर्ति को लेकर बढ़ती चिंता की सबसे बड़ी वजह स्ट्रेट आॅफ होर्मुज के आसपास की स्थिति है। यह समुद्री मार्ग दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा व्यापार मार्गों में से एक माना जाता है। फारस की खाड़ी को ओमान की खाड़ी और अरब सागर से जोड़ने वाला यह संकरा रास्ता तेल और गैस के वैश्विक व्यापार के लिए बेहद अहम है। भारत में इस्तेमाल होने वाली एलपीजी का बड़ा हिस्सा इसी समुद्री मार्ग के जरिए आता है। यदि यहां जहाजों की आवाजाही प्रभावित होती है तो गैस के शिपमेंट में देरी हो सकती है। इसी संभावना ने कई जगहों पर उपभोक्ताओं के बीच चिंता बढ़ा दी है। लखीमपुर खीरी में क्यों शुरू हुई घबराहट में खरीदारी उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी जिले में एलपीजी आपूर्ति को लेकर लोगों के बीच चिंता के कारण अचानक मांग बढ़ गई। मंगलवार को कई उपभोक्ता गैस एजेंसियों पर पहुंच गये ताकि वे जल्द से जल्द अपना सिलेंडर प्राप्त कर सकें। लखीमपुर शहर और आसपास के इलाकों में एलपीजी वितरण केंद्रों के बाहर लंबी कतारें देखी गयीं। लोगों का कहना था कि वे पहले से बुक किये गये सिलेंडर जल्द लेने की कोशिश कर रहे हैं ताकि भविष्य में संभावित कमी से बचा जा सके। प्रशासन ने कहा, घबराने की जरूरत नहीं हालांकि जिला प्रशासन ने लोगों से घबराने की अपील नहीं करने को कहा है। अधिकारियों का कहना है कि फिलहाल जिले में एलपीजी की कोई कमी नहीं है और आपूर्ति सामान्य रूप से जारी है। प्रशासन ने उपभोक्ताओं से अनावश्यक रूप से सिलेंडर जमा न करने और अफवाहों पर ध्यान न देने की सलाह दी है। डिलीवरी में देरी से बढ़ी चिंता स्थानीय निवासी प्रशांत ने बताया कि आम तौर पर सिलेंडर बुक करने के बाद उसी दिन या अगले दिन डिलीवरी हो जाती थी। लेकिन इस बार पांच दिन बीत जाने के बाद भी सिलेंडर नहीं पहुंचा। इसी वजह से उन्हें लगा कि शायद गैस की आपूर्ति में कोई समस्या आ रही है। कई कारोबारियों का कहना है कि कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर मिलना मुश्किल होता जा रहा है क्योंकि गैस एजेंसियां फिलहाल घरेलू उपभोक्ताओं को प्राथमिकता दे रही हैं। कारोबारियों में बढ़ी चिंता होटल और रेस्टोरेंट चलाने वाले कई व्यापारियों ने बताया कि पिछले कुछ दिनों से कमर्शियल गैस सिलेंडर की सप्लाई में दिक्कत आ रही है। इसके कारण किचन का काम प्रभावित होने लगा ह। कुछ जगहों पर कारोबारियों को सीमित गैस के साथ काम चलाना पड़ रहा है, जबकि कुछ रेस्टोरेंट अपने मेन्यू में भी बदलाव करने पर मजबूर हो गये हैं। प्रशासन ने बताया अफवाह से पैदा हुआ दबाव जिला आपूर्ति अधिकारी अंजनी कुमार सिंह ने स्थिति को लेकर कहा कि यह स्थिति उपभोक्ताओं में फैली घबराहट की वजह से बनी है। उनके मुताबिक जिले में एलपीजी की आपूर्ति सामान्य है और स्टॉक भी पर्याप्त है। उन्होंने बताया कि जिले में कुल 83 एलपीजी वितरण केंद्रों के माध्यम से लगभग 16 हजार घरेलू गैस सिलेंडर भेजे गए हैं, जबकि सामान्य दिनों में औसतन 15 हजार सिलेंडर की मांग रहती है। प्रशासन का कहना है कि लोग अनावश्यक घबराहट में अतिरिक्त सिलेंडर लेने की कोशिश कर रहे हैं, जिससे सप्लाई पर दबाव दिखाई दे रहा है। उत्तराखंड सरकार ने बनाया वैकल्पिक ईंधन का प्लान गैस सप्लाई को लेकर अनिश्चितता के बीच उत्तराखंड सरकार ने एहतियाती कदम उठाने शुरू कर दिये हैं। सरकार ने उन व्यवसायों के लिए वैकल्पिक व्यवस्था तैयार करने के निर्देश दिए हैं जो बड़े पैमाने पर एलपीजी पर निर्भर हैं। राज्य सरकार ने उत्तराखंड वन विकास निगम को निर्देश दिया है कि जरूरत पड़ने पर पर्याप्त मात्रा में जलाऊ लकड़ी उपलब्ध करायी जाये। यदि एलपीजी की आपूर्ति में ज्यादा परेशानी आती है तो होटल और अन्य व्यावसायिक प्रतिष्ठान इस लकड़ी को वैकल्पिक ईंधन के रूप में इस्तेमाल कर सकते हैं। गोवा में रेस्टोरेंट कारोबार पर चिंता एलपीजी की उपलब्धता को लेकर चिंता केवल एक राज्य तक सीमित नहीं है। गोवा में भी रेस्टोरेंट मालिकों ने आशंका जताई है कि यदि कमर्शियल गैस सिलेंडर की आपूर्ति में सुधार नहीं हुआ तो कई रेस्टोरेंट को अस्थायी रूप से बंद करना पड़ सकता है। गोवा के मुख्यमंत्री प्रमोद सावंत ने इस मुद्दे को गंभीर बताते हुए कहा कि इसे जल्द ही केंद्र के पेट्रोलियम मंत्रालय के सामने उठाया जायेगा। उन्होंने कहा कि यह पर्यटन उद्योग से जुड़ा महत्वपूर्ण मामला है और सरकार जल्द समाधान निकालने की कोशिश करेगी। गोवा में तीन हजार से अधिक पंजीकृत रेस्टोरेंट हैं और इनमें से अधिकांश अपने किचन संचालन के लिए कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर पर ही निर्भर हैं। चेन्नई में कुछ होटल बंद करने पड़े तमिलनाडु की राजधानी चेन्नई में भी गैस की कमी का असर देखने को मिला है। यहां कुछ होटल और खाने के प्रतिष्ठानों को अस्थायी रूप से अपना काम बंद करना पड़ा। एक लोकप्रिय होटल के बाहर लगाये गये नोटिस में लिखा गया कि एलपीजी सप्लाई नहीं मिलने की वजह से 11 मार्च 2026 को होटल बंद रखा जायेगा। होटल संगठनों के अनुसार कई रेस्टोरेंट के पास मौजूद कमर्शियल गैस का स्टॉक केवल एक या दो दिन तक ही चल पायेगा। स्थिति को देखते हुए कई रेस्टोरेंट मालिकों ने अपने मेन्यू में बदलाव किया है और ऐसे व्यंजन पर ध्यान दिया जा रहा है जिनमें गैस की खपत कम हो। एलपीजी की सप्लाई सुरक्षित रखने के लिए सरकार के कदम देश में रसोई गैस यानी एलपीजी की कमी न हो, इसके लिए केंद्र सरकार ने कुछ जरूरी कदम उठाये हैं। सरकार ने तेल रिफाइनरियों से कहा है कि वे एलपीजी का उत्पादन बढ़ायें, ताकि देश में गैस की सप्लाई बनी रहे और घरेलू जरूरतों को आसानी से पूरा किया जा सके। सरकार ने आवश्यक वस्तु अधिनियम के तहत यह भी तय किया है कि गैस वितरण में सबसे पहले घरेलू उपभोक्ताओं को प्राथमिकता दी जायेगी। यानी घरों में इस्तेमाल होने वाले गैस सिलेंडर को पहले उपलब्ध कराया जायेगा, जबकि व्यावसायिक उपयोग बाद में किया जायेगा। इसके अलावा, गैस सिलेंडर की जमाखोरी रोकने के लिए नियमों में भी बदलाव किया गया है। पहले उपभोक्ता एक सिलेंडर लेने के 21 दिन बाद नया सिलेंडर बुक कर सकते थे। अब इस समय को बढ़ाकर 25 दिन कर दिया गया है। इससे लोग जरूरत से ज्यादा सिलेंडर जमा नहीं कर पायेंगे और गैस की सप्लाई सभी तक सही तरीके से पहुंच सकेगी।

देश में पेट्रोलियम इंधनों की कमी नहीं : पीएम
Published / 2026-03-11 14:40:03
देश में पेट्रोलियम इंधनों की कमी नहीं : पीएम

एबीएन सेंट्रल डेस्क। भारत सरकार ने साफ किया है कि देश में LPG, पेट्रोल या डीजल की कोई कमी नहीं है। पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी का कहना है कि जो भी समस्याएं आ रही हैं, वो Panic Buying के चलते हैं।Panic Buying मतलब अफवाहों के कारण बिना आवश्यकता के भी लोग ज़्यादा से ज़्यादा जमा कर रहे हैं । इसी के चलते लंबी लाइनें देखी जा रही हैं।उन्होंने कहा कि हमारे पास 7-8 हफ़्ते का रिज़र्व है। इसके अलावा हम अन्य देशों से तेल और LPG, पेट्रोल और डीजल खरीद पर बात कर रहे हैं।ईरान ने भी रूस से आने वाले तेल टैंकरों पर हमला नहीं करने का आश्वाशन दिया है। उधर पुतिन ने कहा है कि हम जो गैस यूरोप को भेजते थे, उनमें कटौती कर एशिया के देशों जैसे भारत और चीन को भेजेंगे।

4,474 करोड़ की दो मेगा परियोजनाओं को मोदी कैबिनेट की मंजूरी
Published / 2026-03-10 21:42:05
4,474 करोड़ की दो मेगा परियोजनाओं को मोदी कैबिनेट की मंजूरी

रेलवे को मोदी कैबिनेट का बड़ा तोहफा एबीएन सेंट्रल डेस्क। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में मंत्रिमंडल की आर्थिक कार्य समिति ने आज रेल मंत्रालय की लगभग 4,474 करोड़ रुपये की कुल लागत वाली दो महत्वपूर्ण रेलवे परियोजनाओं को स्वीकृति प्रदान की है। इन परियोजनाओं के लागू होने से रेलवे नेटवर्क की क्षमता में वृद्धि होगी और यात्रियों के साथ-साथ माल ढुलाई के आवागमन में भी उल्लेखनीय सुधार देखने को मिलेगा। इन दो परियोजनाओं को मिली मंजूरी कैबिनेट द्वारा जिन दो प्रमुख परियोजनाओं को मंजूरी दी गई है, उनमें सैंथिया-पाकुड़ चौथी लाइन और संतरागाछी-खड़गपुर चौथी लाइन शामिल हैं। इन दोनों परियोजनाओं के जरिए रेलवे नेटवर्क को और मजबूत बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। रेलवे लाइन की क्षमता बढ़ने से ट्रेनों के आवागमन में उल्लेखनीय सुधार होगा। इससे भारतीय रेलवे की परिचालन दक्षता और सेवा विश्वसनीयता में भी बढ़ोतरी होगी। मल्टी-ट्रैकिंग परियोजनाओं से परिचालन व्यवस्था अधिक सुव्यवस्थित होगी और ट्रेनों की भीड़भाड़ कम करने में भी सहायता मिलेगी। नये भारत के विजन के अनुरूप परियोजनाएं ये परियोजनाएं प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नए भारत के दृष्टिकोण के अनुरूप हैं। इनका उद्देश्य क्षेत्र के लोगों को व्यापक विकास के माध्यम से आत्मनिर्भर बनाना है। इससे क्षेत्र में रोजगार और स्वरोजगार के अवसर भी बढ़ने की संभावना है। इन परियोजनाओं को पीएम-गति शक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान के अंतर्गत तैयार किया गया है। इस योजना में एकीकृत योजना और विभिन्न हितधारकों के परामर्श के माध्यम से मल्टी-मोडल कनेक्टिविटी और लॉजिस्टिक दक्षता बढ़ाने पर विशेष ध्यान दिया गया है। इससे लोगों, वस्तुओं और सेवाओं के निर्बाध आवागमन के लिए बेहतर कनेक्टिविटी उपलब्ध होगी। पश्चिम बंगाल और झारखंड के जिलों को मिलेगा लाभ इन दोनों परियोजनाओं के तहत पश्चिम बंगाल और झारखंड राज्यों के कुल पांच जिलों को लाभ मिलेगा। इससे भारतीय रेलवे के मौजूदा नेटवर्क में लगभग 192 किलोमीटर की वृद्धि होगी। हजारों गांवों को मिलेगी बेहतर कनेक्टिविटी स्वीकृत मल्टी-ट्रैकिंग परियोजनाओं से लगभग 5,652 गांवों को रेल कनेक्टिविटी का लाभ मिलेगा। इन गांवों की कुल आबादी करीब 147 लाख है, जिन्हें बेहतर रेल सेवाओं का फायदा मिलेगा। इन परियोजनाओं के पूरा होने के बाद कई प्रमुख पर्यटन स्थलों के लिए रेल संपर्क में भी सुधार होगा। इनमें बोलपुर-शांतिनिकेतन, नंदिकेश्वरी मंदिर (शक्तिपीठ), तारापीठ (शक्तिपीठ), पटाचित्र ग्राम, धडिका वन, भीमबंध वन्यजीव अभ्यारण्य और रामेश्वर कुंड जैसे स्थान शामिल हैं। माल ढुलाई क्षमता में भी होगा इजाफा स्वीकृत परियोजनाएं कोयला, पत्थर, डोलोमाइट, सीमेंट, स्लैग, जिप्सम, लोहा और इस्पात, खाद्यान्न, पीओएल और कंटेनर जैसी वस्तुओं के परिवहन के लिए महत्वपूर्ण मार्ग साबित होंगी। इन परियोजनाओं से रेलवे की माल ढुलाई क्षमता में भी बड़ा इजाफा होगा। पर्यावरण संरक्षण में भी मिलेगा लाभ क्षमता वृद्धि कार्यों के परिणामस्वरूप प्रति वर्ष 31 मिलियन टन अतिरिक्त माल ढुलाई की क्षमता विकसित होगी। रेलवे पर्यावरण के अनुकूल और ऊर्जा दक्ष परिवहन माध्यम होने के कारण जलवायु लक्ष्यों को हासिल करने और देश की लॉजिस्टिक लागत को कम करने में भी मदद करेगा। इससे लगभग 6 करोड़ लीटर तेल आयात में कमी आएगी और करीब 28 करोड़ किलोग्राम कार्बन डाइआॅक्साइड उत्सर्जन कम होगा, जो लगभग 1 करोड़ पौधारोपण के बराबर माना गया है।

4500 करोड़ की झारखंड-बंगाल की रेल लाइन परियोजना को मंजूरी
Published / 2026-03-10 18:34:57
4500 करोड़ की झारखंड-बंगाल की रेल लाइन परियोजना को मंजूरी

बंगाल-झारखंड से जुड़ी रेलवे लाइन विस्तार की 4500 करोड़ रुपये की दो परियोजनाओं को मंजूरी एबीएन सेंट्रल डेस्क (नयी दिल्ली)। मंत्रिमंडल की आर्थिक मामलों की समिति (सीसीईए) ने पश्चिम बंगाल और झारखंड से जुड़ी रेलवे की करीब 4500 करोड़ रुपये की दो मल्टी-ट्रैकिंग परियोजनाओं को मंगलवार को मंजूरी दी जिससे भारतीय रेल नेटवर्क लगभग 192 किमी बढ़ेगा। परियोजनाओं में सैंथिया-पाकुड़ चौथी लाइन और सांतरागाछी-खड़गपुर चौथी लाइन के निर्माण की परियोजनाएं शामिल हैं जो दोनों राज्यों के कुल पांच जिलों से जुड़ी हैं।

अब दिसंबर 2028 तक बढ़ा जल जीवन मिशन
Published / 2026-03-10 18:33:15
अब दिसंबर 2028 तक बढ़ा जल जीवन मिशन

जल जीवन मिशन को दिसंबर 2028 तक बढ़ाने की मंजूरी, केंद्र और 1.51 लाख करोड़ रुपये देगा एबीएन सेंट्रल डेस्क। मंत्रिमंडल ने केंद्र की ओर से 1.51 लाख करोड़ रुपये के अतिरिक्त आवंटन के प्रस्ताव के साथ जल जीवन मिशन (जेजेएम) कार्यक्रम को दिसंबर 2028 तक बढ़ाने की मंजूरी दे दी है जिसमें जेजेएम 2.0 के तहत ग्रामीण पेयजल आपूर्ति क्षेत्र में बुनियादी सुधार कर इसे पेयजल वितरण सेवा पर केंद्रित किया जायेगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में मंत्रिमंडल के इस निर्णय की जानकारी देते हुए सूचना एवं प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव ने संवाददाताओं को बताया कि संरचनात्मक सुधारों के साथ जेजेएम को दिसंबर 2028 तक बढ़ाया गया है। इसके लिए मंत्रिमंडल ने इस कार्यक्रम पर कुल परिव्यय को बढ़ाकर 8.69 लाख करोड़ रुपये करने की मंजूरी दी है, जिसमें कुल केंद्रीय सहायता 3.59 लाख करोड़ रुपये है। वर्ष 2019-20 में इसके लिए केंद्र की ओर से 2.08 लाख करोड़ रुपये स्वीकृत किये गये थे। इस तरह केंद्र ने अपनी ओर से इसमे अब 1.51 लाख करोड़ रुपये की अतिरिक्त सहायता मंजूर की है। उन्होंने कहा कि जल शक्ति मंत्रालय जल जीवन मिशन (जेजेएम) के कार्यान्वयन को अब बुनियादी ढांचे के निर्माण की जगह सेवा वितरण की ओर मोड़ने की बात कही है। इसके तहत ग्रामीण पेयजल व्यवस्था और गावों में पाइपलाइन से स्वच्छ पेयजल की आपूर्ति के लिए संस्थागत पारिस्थितिकी तंत्र द्वारा समर्थित किया जायेगा। आज के निर्णय के अनुसार जेजेएम के लिए अब एक समान राष्ट्रीय डिजिटल ढांचा सुजलम भारत स्थापित किया जायेगा। इसमें प्रत्येक गांव को एक विशिष्ट सुजल गांव अथवा सेवा क्षेत्र आईडी आवंटित की जायेगी। यह आईडी स्रोत से नल तक संपूर्ण पेयजल आपूर्ति प्रणाली का डिजिटल मानचित्रण करेगी। इसमें पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए, जल अर्पण के माध्यम से योजनाओं के शुभारंभ और औपचारिक हस्तांतरण में ग्राम पंचायतों और पशु एवं जल आपूर्ति समितियों की भागीदारी सुनिश्चित की जायेगी। मंत्रिमंडल की बैठक के बाद जारी विज्ञप्ति में कहा कहा गया है कि ग्राम पंचायत राज्य सरकार द्वारा पर्याप्त संचालन एवं रखरखाव तंत्र स्थापित किए जाने की पुष्टि होने पर ही कार्यों के पूर्ण होने का प्रमाण पत्र जारी करेगी और स्वयं को हर घर जल घोषित करेगी। सामुदायिक स्वामित्व और भागीदारी को परिचालन दक्षता और जल स्रोत की स्थिरता के लिए महत्वपूर्ण मानते हुए, यह कार्यक्रम जल उत्सव को एक वार्षिक, समुदाय-नेतृत्व वाले रखरखाव एवं समीक्षा कार्यक्रम के रूप में बढ़ावा देगा। वर्ष 2019 में गावों में नल से पेयजल की सुविधा 3.23 करोड़ (17 प्रतिशत) परिवारों के पास थी। इस कार्यक्रम के तहत उसके बाद 12.56 करोड़ से अधिक अतिरिक्त ग्रामीण परिवारों को पानी के कनेक्शन प्रदान किये जा चुके हैं। सरकार का कहना है कि वर्तमान में, देश में राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों द्वारा चिन्हित 19.36 करोड़ ग्रामीण परिवारों में से, लगभग 15.80 करोड़ (81.61 प्रतिशत) परिवारों के पास नल के पानी के कनेक्शन उपलब्ध हैं। एसबीआई रिसर्च की रिपोर्ट के अनुसार, जेजेएम ने 9 करोड़ महिलाओं को पानी लाने के काम से मुक्त किया है, जिससे वे अन्य आर्थिक गतिविधियों में अधिक भागीदारी कर पा रही हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने अनुमान लगाया है कि जेजेएम से महिलाओं को पानी के प्रबंध में प्रतिदिन 5.5 करोड़ घंटे की बचत हो रही है, डायरिया से होने वाली 4 लाख मौतों को रोका जा सका है। इस मिशन के प्रभाव से दूषित पेयजल जनित बीमारियों में कमी से 1.4 करोड़ जीवन वर्ष (डीएएलवाई) की बचत हुई है। सरकारी विज्ञप्ति में नोबेल पुरस्कार विजेता प्रोफेसर माइकल क्रेमर के हवाले से कहा गया है कि पांच वर्ष से कम आयु के बच्चों की मृत्यु दर में 30 प्रतिशत की संभावित कमी हुई है। इससे प्रतिवर्ष 1,36,000 बच्चों की जान बचायी जा सकी है। आईआईएम बैंगलोर और अंतर्राष्ट्रीय श्रम संगठन (आईएलओ) के हवाले से कहा गया है कि जेजेएम के माध्यम से 59.9 लाख प्रत्यक्ष और 2.2 करोड़ अप्रत्यक्ष व्यक्ति-वर्ष के संभावित रोजगार सृजन का अनुमान है।

लीडर ऑफ प्रोपेगैंडा ग्रुप हैं राहुल गांधी : निशिकांत दुबे
Published / 2026-03-09 17:31:12
लीडर ऑफ प्रोपेगैंडा ग्रुप हैं राहुल गांधी : निशिकांत दुबे

भाजपा सांसद ने राहुल गांधी को लीडर ऑफ प्रोपेगैंडा बताया, चीन के मुद्दे पर विपक्ष को घेराएबीएन सेंट्रल डेस्क। भारतीय जनता पार्टी के सांसद निशिकांत दुबे ने चीन के मुद्दे पर विपक्ष पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि संसद नहीं चल रही है, जबकि वह इस विषय पर सदन में बोलना चाहते थे। दुबे ने विपक्ष और उसके नेता राहुल गांधी पर तीखी टिप्पणी करते हुए कहा कि इतना कमजोर विपक्ष और लीडर ऑफ प्रोपेगेंडा जैसा नेता उन्होंने लोकतंत्र में पहले कभी नहीं देखा। उन्होंने आरोप लगाया कि नासमझी को घमंड में बदलकर विपक्ष लगातार बयानबाजी कर रहा है। 1962 के युद्ध का जिक्रउन्होंने कहा कि सवाल चीन का है और पूरी दुनिया जानती है कि चीन पहले भारत का पड़ोसी नहीं था। उस समय नेपाल, भूटान और तिब्बत तीन बफर स्टेट थे। 1950 में तिब्बत पर चीन का नियंत्रण स्थापित होने के बाद चीन भारत का पड़ोसी बना। दुबे ने कहा कि 1962 के भारत-चीन युद्ध में चीन ने लगभग 38 हजार वर्ग किलोमीटर क्षेत्र, जिसमें अक्साई चिन शामिल है, पर कब्जा कर लिया। उन्होंने आगे कहा कि इसके बाद भी कई सवाल अनुत्तरित रहे। इंदिरा गांधी पर भी तीखी टिप्पणीउन्होंने आरोप लगाया कि 1969 में तत्कालीन सरकार के गृहमंत्री विद्याचरण शुक्ला ने संसद में कहा था कि चीन ने 1962 के बाद किस तरह अपने जासूसों को दूतावास के जरिए सक्रिय किया और भारत में आर्थिक तथा वैचारिक प्रभाव बढ़ाने की कोशिश की। निशिकांत दुबे ने इंदिरा गांधी पर भी तीखी टिप्पणी की। बाद में राहुल गांधी पर हमला बोलते हुए दुबे ने कहा कि विपक्ष इस मुद्दे पर संसद में चर्चा से बच रहा है। उनका कहना था कि यदि इस विषय पर चर्चा होती है तो कई बातें सामने आ जाएंगी।

मारवाड़ी युवा मंच ने यूएई से 180 भारतीयों को सुरक्षित भेजा भारत
Published / 2026-03-08 18:05:30
मारवाड़ी युवा मंच ने यूएई से 180 भारतीयों को सुरक्षित भेजा भारत

मारवाड़ी युवा मंच की अंतरराष्ट्रीय पहल : यूएई से 180 भारतीयों को सुरक्षित भेजा भारतटीम एबीएन, रांची। अखिल भारतीय मारवाड़ी युवा मंच की अंतरराष्ट्रीय शाखा मारवाड़ी युवा मंच अबू धाबी एवं दुबई (यूएई) ने मानवता की मिसाल पेश करते हुए संकट की घड़ी में भारतीयों को सुरक्षित भारत भेजने का सराहनीय कार्य किया है।प्रांतीय अध्यक्ष विशाल पाड़िया ने बताया कि मध्य एशिया में बने युद्ध जैसे हालात के बीच कई भारतीय नागरिक वहाँ फँस गए थे। ऐसी कठिन परिस्थिति में दुबई एवं अबू धाबी शाखा के पदाधिकारियों और सदस्यों ने तत्परता दिखाते हुए राहत कार्य शुरू किया। उनके प्रयासों से फुजैरह से मुंबई तक चार्टर्ड फ्लाइट की व्यवस्था कर लगभग 180 भारतीयों को सुरक्षित भारत भेजा गया, जो मानवता का प्रेरणादायक उदाहरण है।मारवाड़ी युवा मंच अबू धाबी के अध्यक्ष श्री आनंद गुप्ता ने मोबाइल पर बातचीत के दौरान बताया कि राहत कार्य में विभिन्न देशों की शाखाएँ लगातार सहयोग कर रही हैं। ओमान शाखा द्वारा प्रभावित लोगों के लिए निःशुल्क रहने की व्यवस्था की गई है। इसके अलावा अन्य संस्थाओं द्वारा भी निःशुल्क भोजन एवं आवास की व्यवस्था की जा रही है, जिसमें मंच के सदस्य सक्रिय सहयोग कर रहे हैं। इस पूरे राहत कार्य में लगभग 25 से अधिक स्वयंसेवक 24 घंटे सेवा में जुटे हुए हैं और लोगों को एक-दूसरे से संपर्क कराने सहित हर संभव सहायता प्रदान कर रहे हैं।प्रांतीय संयोजक, सूचना जनसंपर्क प्रचार-प्रसार अमित शर्मा ने सहायता के लिए संपर्क नंबर भी साझा किये हैं। किसी भी प्रकार की परेशानी होने पर निम्नलिखित नंबरों पर संपर्क किया जा सकता है :श्री आनंद गुप्ता (अध्यक्ष, अबू धाबी) : +971 565699100श्री रविन्द्र अग्रवाल (अध्यक्ष, दुबई) : +971 50 455 2817श्री हिमांशु अग्रवाल : +971 56 622 2813मंच के उमेश गर्ग (कन्वीनर, इंटरनेशनल फोरम) एवं हेमंत शाह (वाइस चेयरमैन, इंटरनेशनल फोरम) ने इस मानवीय पहल के लिए दुबई से रवींद्र अग्रवाल, अबूधाबी से आनंद गुप्ता (अध्यक्ष) एवं हिमांशु अग्रवाल, ओमान से बसंत बगारिया एवं अनुराग अग्रवाल, सऊदी अरब से लक्ष्मण सिंह परमार, बहरीन से विनीत मारू, कुवैत से आदित्य तथा कतर से शेखर अग्रवाल सहित पूरी टीम को हृदय से बधाई एवं साधुवाद दिया। उक्त जानकारी झारखंड प्रांतीय मारवाड़ी युवा मंच के प्रांतीय संयोजक, सूचना जनसंपर्क प्रचार-प्रसार अमित शर्मा ने दी।

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