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गणतंत्र दिवस पर फ्रांस के राष्ट्रपति होंगे चीफ गेस्ट!
Published / 2023-12-22 20:32:56
गणतंत्र दिवस पर फ्रांस के राष्ट्रपति होंगे चीफ गेस्ट!

फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुअल मैक्रों गणतंत्र दिवस समारोह में हो सकते हैं मुख्य अतिथि सूत्रों ने बताया कि फ्रांस के राष्ट्रपति मैक्रों को गणतंत्र दिवस समारोह में मुख्य अतिथि के तौर पर आमंत्रित किया गया है एबीएन सेंट्रल डेस्क। फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुअल मैक्रों इस बार 26 जनवरी को गणतंत्र दिवस समारोह में मुख्य अतिथि हो सकते हैं। समारोह से जुड़े लोगों ने शुक्रवार को यह जानकारी दी। भारत ने इस अवसर पर अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडन को आमंत्रित किया था लेकिन उन्होंने जनवरी में नई दिल्ली की यात्रा करने में असमर्थता जतायी। सूत्रों ने बताया कि फ्रांस के राष्ट्रपति मैक्रों को गणतंत्र दिवस समारोह में मुख्य अतिथि के तौर पर आमंत्रित किया गया है।

अयोध्या में 22 जनवरी के लिए सभी होटल हाउसफुल
Published / 2023-12-22 20:29:20
अयोध्या में 22 जनवरी के लिए सभी होटल हाउसफुल

योगी सरकार ने अयोध्या में एडवांस बुकिंग बंद करने का दिया आदेशएबीएन सेंट्रल डेस्क। राम मंदिर के निर्माण व संचालन का काम देख रहे श्रीराम तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट का कहना है कि श्रद्धालुओं को दर्शन प्राण प्रतिष्ठा के अगले दिन से मिलेंगे। राम मंदिर में जनवरी में होने वाले प्राण प्रतिष्ठा समारोह को लेकर अयोध्या में युद्धस्तर पर तैयारियां चल रही हैं। प्राण प्रतिष्ठा वाले दिन 22 जनवरी को आने वाले बड़ी तादाद में अति विशिष्ट अतिथियों को देखते हुए अयोध्या के होटलों व गेस्ट हाउस में बुकिंग बंद करा दी गयी है। योगी सरकार ने आदेश जारी कर 22 जनवरी को आमजन के लिए बुकिंग पर रोक लगाते हुए सभी तरह की एडवांस बुकिंग रद्द करने को कहा है। अयोध्या में होटलों, होम स्टे व गेस्ट हाउस की मांग जबरदस्त बढ़ी राम मंदिर के निर्माण व संचालन का काम देख रहे श्रीराम तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट का कहना है कि श्रद्धालुओं को दर्शन प्राण प्रतिष्ठा के अगले दिन से मिलेंगे। ट्रस्ट का अनुमान है कि 22 जनवरी के बाद से अयोध्या में हर दिन दो लाख के करीब श्रद्धालु दर्शन के लिये आयेंगे जबकि विशेष तिथियों पर यह तादाद पांच लाख तक जा सकती है। इतनी बड़ी तादाद में अयोध्या में आने वाले श्रद्धालुओं के ठहरने के लिए होटलों, होम स्टे व गेस्ट हाउस की मांग जबरदस्त बढ़ी है। अब तक अयोध्या में 5000 से ज्यादा घरों को होटलों में परिवर्तित कर दिया गया है। सैकड़ों की तादाद में पर्यटन विभाग को होम स्टे बनाने के आवेदन मिल चुके हैं। प्राण प्रतिष्ठा वाले दिन अयोध्या के श्री राम इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर 100 के करीब निजी विमान अतिथियों को लेकर उतरेंगे। मंदिर ट्रस्ट नें प्राण प्रतिष्ठा के लिए देश-विदेश में न्योता भेजा है। कई विदेशी प्रतिनिधियों के आने की उम्मीद है। ट्रस्ट की ओर से आमंत्रित लोगों में राजनेताओं के अलावा मुकेश अंबानी, गौतम अदाणी, अमिताभ बच्चन, सचिन तेंदुलकर व माधुरी दीक्षित जैसे वीवीआईपी भी शामिल हैं जो अपने निजी विमानों से आयेंगे। अयोध्या में नया बना इंटरनेशनल एयरपोर्ट 30 दिसंबर से संचालित होने लगेगा। इसी दिन दिल्ली से अयोध्या की पहली उड़ान सुबह 11.20 बजे आयेगी। इसी दिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एयरपोर्ट का उद्घाटन करने अयोध्या आ रहे हैं। एयरपोर्ट के सामने ही प्रधानमंत्री जनसभा को संबोधित करेंगे जिसके बाद अयोध्या में बने अंतरराष्ट्रीय रेलवे स्टेशन का लोकार्पण करेंगे। एयरपोर्ट व रेलवे स्टेशन का उद्घाटन करने के साथ ही प्रधानमंत्री 30 दिसंबर को ही 3000 करोड़ रुपये की परियोजनाओं का शिलान्यास व लोकार्पण करेंगे। प्राण प्रतिष्ठा अयोध्या के मौके पर ही रामलला के दर्शन के लिए भारतीय रेलवे 1000 स्पेशल ट्रेन चलायेगा। इन ट्रेनों को देश के डेढ़ दर्जन राज्यों के प्रमुख शहरों से अयोध्या तक चलाया जायेगा।

पुंछ : सेना के वाहन पर आतंकियों ने की फायरिंग
Published / 2023-12-21 21:05:46
पुंछ : सेना के वाहन पर आतंकियों ने की फायरिंग

पुंछ में आतंकियों का हमला, सेना की गाड़ी पर की गई फायरिंगएबीएन सेंट्रल डेस्क। जम्मू-कश्मीर के पुंछ में सेना की गाड़ी पर घात लगाकर फायरिंग की गयी है। एक महीने से भी कम समय में इस क्षेत्र में सेना पर यह दूसरा आतंकी हमला था। घात लगाकर किये गये इस हमले का जवानों ने भी करारा जबाव दिया। फिलहाल, दोनों ओर से गोलीबारी जारी है। वहां अतिरिक्त सुरक्षा बल भेजा गया है। सूत्रों ने बताया कि पुंछ के सुरनकोट इलाके में डेरा की गली (जिसे डीकेजी के नाम से भी जाना जाता है) में सेना के ट्रक पर घात लगाकर हमला किया गया। अधिकारियों ने बताया कि हमले में किसी के हताहत होने की तत्काल कोई सूचना नहीं है। पिछले महीने, राजौरी के कालाकोट में सेना और उसके विशेष बलों द्वारा आतंकवाद विरोधी अभियान शुरू करने के बाद कार्रवाई में दो कैप्टन सहित सैनिक शहीद हो गये थे। यह क्षेत्र पिछले कुछ वर्षों में आतंकवादियों का गढ़ और सेना पर बड़े हमलों का केंद्र बन गया है। इस साल अप्रैल और मई में राजौरी-पुंछ क्षेत्र में दोहरे हमलों में 10 सैनिक शहीद हुए थे। 2003 से 2021 के बीच यह क्षेत्र काफी हद तक आतंकवाद से मुक्त हो गया था, जिसके बाद लगातार मुठभेड़ होने लगीं। पिछले दो वर्षों में क्षेत्र में आतंकवाद विरोधी अभियानों के दौरान 35 से अधिक सैनिक शहीद हुए हैं।

तीन संगठनों की मदद से नेपाली नाबालिग बंधुआ मजदूर हुए मुक्त
Published / 2023-12-21 18:19:31
तीन संगठनों की मदद से नेपाली नाबालिग बंधुआ मजदूर हुए मुक्त

तीन गैरसरकारी संगठनों और हरियाणा पुलिस के साझा प्रयासों से बंधुआ मजदूरी से मुक्त हुई नेपाली नाबालिगएबीएन सेंट्रल डेस्क। तीन गैरसरकारी संगठनों की दो देशों में चार दिन तक चली गहन खोजबीन और आखिर में हरियाणा पुलिस की तत्परता से नेपाल की एक 15 वर्षीय नाबालिग को हरियाणा के जींद जिले में एक मुर्गीपालन फार्म से मुक्त कराया गया। इन गैरसरकारी संगठनों एसोसिएशन फॉर वालंटरी एक्शन जिसे बचपन बचाओ आंदोलन (बीबीए) के नाम से भी जाना जाता है, एमडीडी आफ इंडिया, हरियाणा और देहात, उत्तर प्रदेश को नेपाल के नेपालगंज से लापता हुई 15 वर्षीय बच्ची समीहा (बदला हुआ नाम) के ट्रैफिकिंग के जरिए भारत लाये जाने के बाबत एक खुफिया सूचना प्राप्त हुई थी। बच्ची द्वारा भेजे गये लोकेशन से पता चला कि उसे हरियाणा ले जाया गया है। अपने-अपने राज्यों में बाल अधिकारों की सुरक्षा के लिए काम कर रहे इन संगठनों ने तत्काल यह जानकारी हरियाणा की सफीदों पुलिस से साझा की। पुलिस की टीमों ने इन संगठनों के सहयोग और उनसे मिली जानकारी पर कार्रवाई करते हुए आखिरकार बच्ची को मुक्त करा लिया। बच्ची को उसकी मां के साथ नेपाल रवाना कर दिया गया है। तीसरी कक्षा में ही पढ़ाई छोड़ देने वाली समीहा रोजी-रोजगार की तलाश में थी। इसी दौरान कुछ महीने पहले उसकी एक रिक्शा चालक शिवा और एक बुजुर्ग महिला हसीना से मित्रता हो गयी। शिवा और हसीना ने भांप लिया कि बच्ची आर्थिक तंगी की शिकार है औ किसी भी तरह दो-चार पैसे कमाना चाहती है। इन दोनों ने बच्ची को अपने साथ भारत जाने के लिए राजी कर लिया। हसीना ने उससे हरियाणा में एक मुर्गीपालन फार्म में नौकरी और अच्छी तनख्वाह दिलाने का वादा किया। समीना पांच भाई-बहनों में सबसे छोटी थी और सिर से पिता का साया भी उठ चुका था। गरीबी की मार झेल रहे परिवार के भले के लिए उसने तुरंत हामी भर दी।      जींद जिले के सफीदों स्थित मुर्गीपालन फार्म में पहुंचते ही समीहा ने खतरे को भांप लिया और किसी तरह चोरी-छिपे अपनी मां को फोन से संपर्क कर बताया कि वह खतरे में है। उसने मां को व्हाट्सऐप पर अपनी लोकेशन भी भेजी। भारत-नेपाल सीमा पर छोटी सी किराने की दुकान चलाने वाली समीहा की मां पहले ही उसकी गुमशुदगी की रिपोर्ट पुलिस में दर्ज करा चुकी थी। बेटी को खतरे में देख घबराई मां ने तुरंत भारत-नेपाल सीमा पर काम कर रहे एक बाल अधिकार कार्यकर्ता को इसकी जानकारी जिन्होंने अपनी सहकर्मी और देहात, उत्तर प्रदेश की कार्यकारी निदेशक देवयानी चतुर्वेदी को इस बाबत सूचित किया। अब तक दोनों कार्यकर्ताओं को भली भांति समीना के ठिकाने का अंदाजा हो गया था और उन्हें हरियाणा में किसी से संपर्क करने की जरूरत थी। देवयानी ने बताया कि जैसे ही हमें यह जानकारी मिली, हमें पता था कि बिना बहुत से लोगों को बताये हमें तेजी से कदम उठाने होंगे। इसलिए हमने तुरंत सलाह के लिए नई दिल्ली में बचपन बचाओ आंदोलन से संपर्क किया। उन्होंने तुरंत एमडीडी आफ इंडया से कॉन्फ्रेंस कॉल पर हमारी बात करायी और हमने सभी जानकारियां उनसे साझा की। एमडीडी की टीम ने बिना समय गंवाए बच्ची को मुक्त कराने के लिए हरियाणा पुलिस से संपर्क किया। एमडीडी आॅफ इंडिया, हरियाणा के सीईओ सुरिंदर सिंह मान ने बताया- हमने तत्काल सफीदों के पुलिस अधीक्षक आशीष कुमार से संपर्क किया जिन्होंने तुरंत बताये गये लोकेशन पर बच्ची की तलाश के लिए पुलिस टीम रवाना की। इस दौरान हमने इस बात का इत्मीनान करने के लिए कि बच्ची को कहीं दूसरी जगह तो नहीं ले जाया गया है, उससे कई बार फोन पर बात की। पुलिस टीम ने मौके पर पहुंच कर बच्ची को मुक्त करा लिया। उन्होंने कहा कि यह बाल दुव्यार्पार, बाल मजदूरी, बाल यौन शोषण और बाल विवाह के खिलाफ काम कर रहे तीनों संगठनों के साझा प्रयासों का नतीजा है जिससे बच्ची को मुक्त कराया जा सका।बच्ची को बाल कल्याण समिति, जींद के समक्ष पेश किया गया और उसे एक आश्रय गृह में रखा गया। काउंसलिंग के दौरान बच्ची ने स्वीकार किया कि वह नौकरी के लालच में अपने घर वालों को बताये बिना भारत आ गयी थी।  काउंसलिंग और चिकित्सा जांच के बाद समीहा को उसकी मां को सुपुर्द कर दिया गया और दोनों नेपाल रवाना हो गयीं। बाल मजदूरों को मुक्त कराने के रास्त में आ रही चुनौतियों का जिक्र करते हुए बचपन बचाओ आंदोलन के निदेशक मनीष शर्मा ने कहा कि कई राज्यों और कुछ देशों से मुफलिसी के शिकार और असहाय बच्चों की ट्रैफिकिंग की जा रही है। खतरों से अंजान होने के कारण ये बच्चे आसान निशाना होते हैं और बाल दुर्व्यापारी इन्हें बाल मजदूरी और वेश्यावृत्ति के दलदल में धकेल देते हैं। हम देश के कोने-कोने से इन बच्चों को मुक्त करान के हर संभव प्रयास कर रहे हैं लेकिन जब तक बाल दुर्व्यापार के खिलाफ कड़े कानून नहीं बनाए जाते और दोषियों को एक समयसीमा में सख्त सजा नहीं दी जाती तब तक इस लड़ाई को जीता नहीं जा सकता और कमजोर पृष्ठभूमि के बच्चों के सिर पर खरा बरकरार रहेगा। इससे संबंधित अधिक जानकारी के लिए कृपया जितेन्द्र परमार (8595950825) से संपर्क करें।

कोरोना के बढ़ते मामलों पर कड़ी निगरानी रखें राज्य : स्वास्थ्य मंत्रालय
Published / 2023-12-19 22:04:00
कोरोना के बढ़ते मामलों पर कड़ी निगरानी रखें राज्य : स्वास्थ्य मंत्रालय

बढ़ रहे कोविड के मामलेस्वास्थ्य मंत्रालय ने राज्यों से लगातार निगरानी बनाये रखने को कहा केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने सोमवार को भारत के कुछ राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों में कोविड-19 मामलों में ताजा वृद्धि और नए जेएन-1 सब-वेरिएंट के पहले मामले का पता चलने पर राज्यों को सलाह जारी की एबीएन सेंट्रल डेस्क। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने सोमवार को भारत के कुछ राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों में कोविड-19 मामलों में ताजा वृद्धि और नये जेएन-1 सब-वेरिएंट के पहले मामले का पता चलने पर राज्यों को सलाह जारी की। केरल में ओमिक्रॉन के सब-वेरिएंट का नया मामला सामने आया है। केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव सुधांश पंत ने राज्य सरकारों को भेजे पत्र में देश में कोविड की स्थिति पर लगातार निगरानी बनाये रखने की जरूरत पर जोर दिया है। यह रेखांकित करते हुए कि केंद्र और राज्य सरकारों के बीच लगातार और सहयोगात्मक कार्यों के कारण हम कोविड के फैलने पर नियंत्रण बनाए रखने में सक्षम हुए हैं। उन्होंने कहा : हालांकि जैसे-जैसे कोविड-19 वायरस फैलता जा रहा है और इसका महामारी विज्ञान व्यवहार व्यवस्थित हो रहा है। भारत में मौसम की स्थिति और अन्य सामान्य रोगजनकों के प्रसार के साथ सार्वजनिक स्वास्थ्य में चुनौतियों से प्रभावी ढंग से निपटने के लिए गति बनाये रखना महत्वपूर्ण है। यह पत्र तब आया है, जब भारत में सोमवार को कोविड के 1,828 मामले दर्ज किये गये। केरल में मामलों की संख्या सबसे अधिक 1,634 है। केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव ने आगामी त्योहारी सीजन को देखते हुए राज्यों को श्वसन स्वच्छता के पालन द्वारा बीमारी के फैलाव में वृद्धि के जोखिम को कम करने के लिए आवश्यक सार्वजनिक स्वास्थ्य उपाय और अन्य व्यवस्थाएं करने की सलाह दी। सभी राज्यों को सलाह दी गयी है कि वे सभी जिलों में कोविड परीक्षण दिशानिर्देशों के अनुसार पर्याप्त परीक्षण सुनिश्चित करें और आरटी-पीसीआर और एंटीजन परीक्षणों की अनुशंसित हिस्सेदारी बनाए रखें। उन्हें पता लगाने के लिए एकीकृत स्वास्थ्य सूचना मंच (आईएचआईपी) पोर्टल सहित सभी स्वास्थ्य सुविधाओं में नियमित आधार पर जिलेवार इन्फ्लूएंजा जैसी बीमारी (आईएलआई) और गंभीर तीव्र श्वसन बीमारी (एसएआरआई) मामलों की निगरानी और रिपोर्ट करने के लिए भी कहा गया है। मंत्रालय ने आरटी-पीसीआर परीक्षणों की संख्या बढ़ाने और भारतीय सार्स कोव-2 जीनोमिक्स कंसोर्टियम (इंसाकॉग) प्रयोगशालाओं में जीनोम अनुक्रमण के लिए सकारात्मक नमूने भेजने के लिए भी प्रोत्साहित किया, ताकि समय पर नए वेरिएंट का पता लगाया जा सके।जेएन-1, बीए-2.86 ओमिक्रॉन वेरिएंट का एक उप-वंश है और अन्य देशों में फैलने से पहले इसे पहली बार अगस्त में लक्जमबर्ग में पाया गया था। बीए-2.86, जिसे पिरोला संस्करण के रूप में भी जाना जाता है, पहली बार जुलाई में डेनमार्क में पाया गया था। यूएस सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन (सीडीसी) के अनुसार जेएन-1, बीए-2.86 के समान वंश का हिस्सा है और इसमें एक अतिरिक्त स्पाइक उत्परिवर्तन - एल455एस उत्परिवर्तन शामिल है, जिसमें प्रतिरक्षा-विरोधी गुण हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने भी मजबूत निगरानी और अनुक्रम साझा करने के लिए कहा है, क्योंकि वैश्विक स्तर पर मामले बढ़ रहे हैं। डब्ल्यूएचओ में कोविड-19 तकनीकी प्रमुख मारिया वान केरखोव ने एक्स पर पोस्ट किये गये एक वीडियो संदेश में कहा, मौजूदा कोविड मामलों में से लगभग 68 प्रतिशत एक्सबीबी सबलाइनेज और जेएन-1 जैसे अन्य समूहों के मामले हैं।

5.5 तीव्रता के भूकंप से हिली जम्मू कश्मीर की धरती
Published / 2023-12-18 22:30:16
5.5 तीव्रता के भूकंप से हिली जम्मू कश्मीर की धरती

जम्मू कश्मीर और लद्दाख में भूकंप, रिक्टर स्केल पर 5.5 की तीव्रता, एक घंटे में चार बार कांपी धरतीएबीएन सेंट्रल डेस्क। केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में सोमवार दोपहर भूकंप के झटके महसूस किये गये। जम्मू, श्रीनगर, पुंछ, किश्तवाड़, कारगिल समेत दोनों प्रदेशों के कई हिस्सों में भूकंप के झटके लगे। एक घंटे के भीतर चार बार धरती कांपी। सबसे पहला झटका दोपहर तीन बजकर 48 मिनट पर लगा। इसके बाद दूसरा झटका तीन बजकर 57 मिनट पर महसूस किया गया। दूसरे झटके की तीव्रता 3.8 रही। इन दोनों झटकों का केंद्र लद्दाख का कारगिल क्षेत्र रहा। इसके बाद तीसरा झटका चार बजकर एक मिनट पर दर्ज किया गया। इसकी तीव्रता 4.8 रही। चौथा झटका चार बजकर 18 मिनट पर लगा। इसकी तीव्रता 3.6 दर्ज की गयी। तीसरे और चौथे भूकंप का केंद्र जम्मू संभाग का जिला किश्तवाड़ रहा। राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र ने ये जानकारी साझा की है। इसके चलते किसी तरह के जानमाल के नुकसान की फिलहाल सूचना नहीं मिली है।लोगों ने बताया कि उन्होंने दो बार झटके महसूस किये। पहले के मुकाबले दूसरा झटका कम तीव्र था। कई जगहों पर लोग अपने घरों और कार्यालयों से बाहर निकल आये। कई लोगों ने तुरंत अपनों को फोन कर भूकंप के झटके महसूस होने की जानकारी साझी की और उनका हालचाल भी जाना।

भारत में 95% आबादी के पास बीमा नहीं : रिपोर्ट
Published / 2023-12-14 22:29:10
भारत में 95% आबादी के पास बीमा नहीं : रिपोर्ट

बीमा प्रसार में तेजी के लिए नए उपाय की जरूरतएबीएन सेंट्रल डेस्क। सरकार और बीमा नियामक के प्रयासों के बावजूद देश की लगभग 95 प्रतिशत आबादी का बीमा नहीं है। राष्ट्रीय बीमा अकादमी ने गुरुवार को जारी एक रिपोर्ट में यह जानकारी दी। भारतीय बीमा नियामक एवं विकास प्राधिकरण (इरडा) के चेयरमैन देवाशीष पांडा ने यह रिपोर्ट जारी की। इस मौके पर उन्होंने उद्योग से उन कदमों का अनुकरण करने का आग्रह किया, जिनकी मदद से यूपीआई, बैंक खाते खोलने और साथ ही मोबाइल पहुंच बढ़ाने में भारी सफलता मिली। पांडा ने कहा कि उच्च जोखिम वाले क्षेत्रों में एक अनिवार्य प्राकृतिक आपदा बीमा की जरूरत है और इस रिपोर्ट में इसकी सिफारिश भी की गयी है। सभी के लिए बीमा के लक्ष्य को हासिल करने के लिए ऐसा करना जरूरी है। रिपोर्ट के मुताबिक, देश की 144 करोड़ आबादी में 95 प्रतिशत आबादी बीमा के दायरे में नहीं है। देश में आने वाली प्राकृतिक आपदाओं और अन्य जलवायु संबंधी आपदाओं की संख्या में वृद्धि के मद्देनजर बीमा प्रसार को बढ़ाना महत्वपूर्ण है। रिपोर्ट में कहा गया है कि निम्न और मध्यम आय वर्ग के 84 प्रतिशत लोगों और तटीय क्षेत्रों, दूसरी और तीसरी श्रेणी के शहरों के 77 प्रतिशत लोगों के पास बीमा का अभाव है। रिपोर्ट के मुताबिक, 73 प्रतिशत आबादी स्वास्थ्य बीमा के दायरे में नहीं है और इस दिशा में सरकार, गैर सरकारी संगठनों और उद्योग समूहों के बीच सहयोग बढ़ने की जरूरत है।

भारत की संप्रभुता और अखंडता को सुप्रीम कोर्ट ने रखा बरकरार : नरेंद्र मोदी
Published / 2023-12-12 19:22:08
भारत की संप्रभुता और अखंडता को सुप्रीम कोर्ट ने रखा बरकरार : नरेंद्र मोदी

सर्वोच्च न्यायालय ने अनुच्छेद 370 पर अपने फैसले में भारत की संप्रभुता और अखंडता को बरकरार रखा है : नरेन्द्र मोदीनरेन्द्र मोदीएबीएन एडिटोरियल डेस्क। भारत के माननीय सर्वोच्च न्यायालय ने अनुच्छेद 370 और 35 (ए) को निरस्त करने पर 11 दिसंबर को ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। माननीय सर्वोच्च न्यायालय ने अपने फैसले में भारत की संप्रभुता और अखंडता को बरकरार रखा है, जिसे प्रत्येक भारतीय द्वारा सदैव संजोया जाता रहा है। सुप्रीम कोर्ट का यह कहना पूरी तरह से उचित है कि 5 अगस्त 2019 को हुआ निर्णय संवैधानिक एकीकरण को बढ़ाने के उद्देश्य से लिया गया था, न कि इसका उद्देश्य विघटन था। सर्वोच्च न्यायालय ने इस तथ्य को भी भलीभांति माना है कि अनुच्छेद 370 का स्वरूप स्थायी नहीं था। जम्मू, कश्मीर और लद्दाख की खूबसूरत और शांत वादियां, बर्फ से ढंके पहाड़, पीढ़ियों से कवियों, कलाकारों और हर भारतीय के दिल को मंत्रमुग्ध करते रहे हैं। यह एक ऐसा अद्भुत क्षेत्र है जो हर दृष्टि से अभूतपूर्व है, जहां हिमालय आकाश को स्पर्श करता हुआ नजर आता है, और जहां इसकी झीलों एवं नदियों का निर्मल जल स्वर्ग का दर्पण प्रतीत होता है। लेकिन पिछले कई दशकों से जम्मू-कश्मीर के अनेक स्थानो पर ऐसी हिंसा और अस्थिरता देखी गयी, जिसकी कल्पना तक नहीं की जा सकती। वहां के हालात कुछ ऐसे थे, जिससे जम्मू-कश्मीर के परिश्रमी, प्रकृति प्रेमी और स्नेह से भरे लोगों को कभी भी रू-ब-रू नहीं होना चाहिए था।लेकिन दुर्भाग्यवश, सदियों तक उपनिवेश बने रहने, विशेषकर आर्थिक और मानसिक रूप से पराधीन रहने के कारण, तब का समाज एक प्रकार से भ्रमित हो गया। अत्यंत बुनियादी विषयों पर स्पष्ट नजरिया अपनाने के बजाय दुविधा की स्थिति बनी रही जिससे और ज्यादा भ्रम उत्पन्न हुआ। अफसोस की बात यह है कि जम्मू-कश्मीर को इस तरह की मानसिकता से व्यापक नुकसान हुआ।देश की आजादी के समय तब के राजनीतिक नेतृत्व के पास राष्ट्रीय एकता के लिए एक नई शुरुआत करने का विकल्प था। लेकिन तब इसके बजाय उसी भ्रमित समाज का दृष्टिकोण जारी रखने का निर्णय लिया गया, भले ही इस वजह से दीर्घकालिक राष्ट्रीय हितों की अनदेखी करनी पड़ी।मुझे अपने जीवन के शुरूआती दौर से ही जम्मू-कश्मीर आंदोलन से जुड़े रहने का अवसर मिला है। मेरी अवधारणा सदैव ही ऐसी रही है जिसके अनुसार जम्मू-कश्मीर महज एक राजनीतिक मुद्दा नहीं था, बल्कि यह विषय समाज की आकांक्षाओं को पूरा करने के बारे में था। डॉ श्यामा प्रसाद मुखर्जी को नेहरू मंत्रिमंडल में एक महत्वपूर्ण विभाग मिला हुआ था और वे काफी लंबे समय तक सरकार में बने रह सकते थे। फिर भी, उन्होंने कश्मीर मुद्दे पर मंत्रिमंडल छोड़ दिया और आगे का कठिन रास्ता चुना, भले ही इसकी कीमत उन्हें अपनी जान देकर चुकानी पड़ी। लेकिन उनके अथक प्रयासों और बलिदान से करोड़ों भारतीय कश्मीर मुद्दे से भावनात्मक रूप से जुड़ गए। कई वर्षों बाद अटल जी ने श्रीनगर में एक सार्वजनिक बैठक में इंसानियत, जम्हूरियत और कश्मीरियत का प्रभावशाली संदेश दिया, जो सदैव ही प्रेरणा का महान स्रोत भी रहा है।मेरा हमेशा से दृढ़ विश्वास रहा है कि जम्मू-कश्मीर में जो कुछ हुआ था, वह हमारे राष्ट्र और वहां के लोगों के साथ एक बड़ा विश्वासघात था। मेरी यह भी प्रबल इच्छा थी कि मैं इस कलंक को, लोगों पर हुए इस अन्याय को मिटाने के लिए जो कुछ भी कर सकता हूं, उसे जरूर करूं। मैं हमेशा से जम्मू-कश्मीर के लोगों की पीड़ा को कम करने के लिए काम करना चाहता था।सरल शब्दों में कहें तो, अनुच्छेद 370 और 35 (ए) जम्मू, कश्मीर और लद्दाख के सामने बड़ी बाधाओं की तरह थे। ये अनुच्छेद एक अटूट दीवार की तरह थे तथा गरीब,वंचित, दलितों-पिछड़ों-महिलाओं के लिए पीड़ादायक थे। अनुच्छेद 370 और 35(ए) के कारण जम्मू-कश्मीर के लोगों को वह अधिकार और विकास कभी नहीं मिल पाया, जो उनके साथी देशवासियों को मिला। इन अनुच्छेदों के कारण, एक ही राष्ट्र के लोगों के बीच दूरियां पैदा हो गयीं। इस दूरी के कारण, हमारे देश के कई लोग, जो जम्मू-कश्मीर की समस्याओं को हल करने के लिए काम करना चाहते थे, ऐसा करने में असमर्थ थे, भले ही उन लोगों ने वहां के लोगों के दर्द को स्पष्ट रूप से महसूस किया हो।एक कार्यकर्ता के रूप में, जिसने पिछले कई दशकों से इस मुद्दे को करीब से देखा हो, वो इस मुझे मुद्दे की बारीकियों और जटिलताओं से भली-भांति परिचित था। मैं एक बात को लेकर बिल्कुल स्पष्ट था- जम्मू-कश्मीर के लोग विकास चाहते हैं तथा वे अपनी ताकत और कौशल के आधार पर भारत के विकास में योगदान देना चाहते हैं। वे अपने बच्चों के लिए जीवन की बेहतर गुणवत्ता चाहते हैं, एक ऐसा जीवन जो हिंसा और अनिश्चितता से मुक्त हो। इस प्रकार, जम्मू-कश्मीर के लोगों की सेवा करते समय, हमने तीन बातों को प्रमुखता दी- नागरिकों की चिंताओं को समझना, सरकार के कार्यों के माध्यम से आपसी-विश्वास का निर्माण करना तथा विकास, निरंतर विकास को प्राथमिकता देना।मुझे याद है, 2014 में, हमारे सत्ता संभालने के तुरंत बाद, जम्मू-कश्मीर में विनाशकारी बाढ़ आई थी, जिससे कश्मीर घाटी में बहुत नुकसान हुआ था। सितंबर 2014 में, मैं स्थिति का आकलन करने के लिए श्रीनगर गया और पुनर्वास के लिए विशेष सहायता के रूप में 1000 करोड़ रुपये की घोषणा भी की। इससे लोगों में ये संदेश भी गया कि संकट के दौरान हमारी सरकार वहां के लोगों की मदद के लिए कितनी संवेदनशील है। मुझे जम्मू-कश्मीर में विभिन्न क्षेत्रों के लोगों से मिलने का अवसर मिला है और इन संवादों में एक बात समान समान रूप से उभरती है- लोग न केवल विकास चाहते हैं, बल्कि वे दशकों से व्याप्त भ्रष्टाचार से भी मुक्ति चाहते हैं।उस साल मैंने जम्मू-कश्मीर में जान गंवाने वाले लोगों की याद में दीपावली नहीं मनाने का फैसला किया। मैंने दीपावली के दिन जम्मू-कश्मीर में मौजूद रहने का भी फैसला किया। जम्मू एवं कश्मीर की विकास यात्रा को और मजबूती प्रदान करने के लिए हमने यह तय किया कि हमारी सरकार के मंत्री बार-बार वहां जायेंगे और वहां के लोगों से सीधे संवाद करेंगे। इन लगातार दौरों ने भी जम्मू एवं कश्मीर में सद्भावना कायम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभायी। मई 2014 से मार्च 2019 के दौरान 150 से अधिक मंत्रिस्तरीय दौरे हुए। यह अपने आप में एक कीर्तिमान है। वर्ष 2015 का विशेष पैकेज जम्मू एवं कश्मीर की विकास संबंधी जरूरतों को पूरा करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम था। इसमें बुनियादी ढांचे के विकास, रोजगार सृजन, पर्यटन को बढ़ावा देने और हस्तशिल्प उद्योग को सहायता प्रदान करने से जुड़ी पहल शामिल थीं। हमने खेलशक्ति में युवाओं के सपनों को साकार करने की क्षमता को पहचानते हुए जम्मू एवं कश्मीर में इसका भरपूर सदुपयोग किया। विभिन्न खेलों के माध्यम से, हमने वहां के युवाओं की आकांक्षाओं और उनके भविष्य पर खेलों से जुड़ी गतिविधियों के परिवर्तनकारी प्रभाव को देखा। इस दौरान विभिन्न खेल स्थलों का आधुनिकीकरण किया गया, प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किये गये और प्रशिक्षक उपलब्ध कराये गये। स्थानीय स्तर पर फुटबॉल क्लबों की स्थापना को प्रोत्साहित किया जाना इन सबमें एक सबसे अनूठी बात रही। इसके परिणाम शानदार निकले। मुझे प्रतिभाशाली फुटबॉल खिलाड़ी अफशां आशिक का नाम याद आ रहा है। वो दिसंबर 2014 में श्रीनगर में पथराव करने वाले एक समूह का हिस्सा थी, लेकिन सही प्रोत्साहन मिलने पर उसने फुटबॉल की ओर रुख किया, उसे प्रशिक्षण के लिए भेजा गया और उसने खेल में उत्कृष्ट प्रदर्शन किया। मुझे फिट इंडिया डायलॉग्स के एक कार्यक्रम के दौरान उसके साथ हुई बातचीत याद है, जिसमें मैंने कहा था कि अब बेंड इट लाइक बेकहम से आगे बढ़ने का समय है क्योंकि अब यह ऐस इट लाइक अफशां है। मुझे खुशी है कि अब तो अन्य युवाओं ने किकबॉक्सिंग, कराटे और अन्य खेलों में अपनी प्रतिभा दिखानी शुरू कर दी है।पंचायत चुनाव भी इस क्षेत्र के सर्वांगीण विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण पड़ाव साबित हुआ। एक बार फिर, हमारे सामने या तो सत्ता में बने रहने या अपने सिद्धांतों पर अटल रहने का विकल्प था। हमारे लिए यह विकल्प कभी भी कठिन नहीं था और हमने सरकार को गंवाने के विकल्प को चुनकर उन आदर्शों को प्राथमिकता दी जिनके पक्ष में हम खड़े हैं। जम्मू एवं कश्मीर के लोगों की आकांक्षाएं को सर्वोच्च प्राथमिकता दी गयी है। पंचायत चुनावों की सफलता ने जम्मू एवं कश्मीर के लोगों की लोकतांत्रिक प्रकृति को इंगित किया। मुझे गांवों के प्रधानों के साथ हुई एक बातचीत याद आती है। अन्य मुद्दों के अलावा, मैंने उनसे एक अनुरोध किया कि किसी भी स्थिति में स्कूलों को नहीं जलाया जाना चाहिए और स्कूलों की सुरक्षा की जानी चाहिए। मुझे यह देखकर खुशी हुई कि इसका पालन किया गया। आखिरकार, अगर स्कूल जलाये जाते हैं तो सबसे ज्यादा नुकसान छोटे बच्चों का होता है। 5 अगस्त का ऐतिहासिक दिन हर भारतीय के दिल और दिमाग में बसा हुआ है। हमारी संसद ने अनुच्छेद 370 को निरस्त करने का ऐतिहासिक निर्णय पारित किया और तब से जम्मू, कश्मीर और लद्दाख में बहुत कुछ बदलाव आया है। न्यायिक अदालत का फैसला दिसंबर 2023 में आया है, लेकिन जम्मू, कश्मीर और लद्दाख में विकास की गति को देखते हुए जनता की अदालत ने चार साल पहले अनुच्छेद 370 और 35 (ए) को निरस्त करने के संसद के फैसले का जोरदार समर्थन किया है। राजनीतिक स्तर पर, पिछले 4 वर्षों को जमीनी स्तर पर लोकतंत्र में फिर से भरोसा जताने के रूप में देखा जाना चहिये। महिलाओं, आदिवासियों, अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और समाज के वंचित वर्गों को उनका हक नहीं मिल रहा था। वहीं, लद्दाख की आकांक्षाओं को भी पूरी तरह से नजरअंदाज किया जाता था। लेकिन, 5 अगस्त 2019 ने सब कुछ बदल दिया। सभी केंद्रीय कानून अब बिना किसी डर या पक्षपात के लागू होते हैं, प्रतिनिधित्व भी पहले से अधिक व्यापक हो गया है। त्रिस्तरीय पंचायती राज प्रणाली लागू हो गई है, बीडीसी चुनाव हुए हैं, और शरणार्थी समुदाय, जिन्हें लगभग भुला दिया गया था, उन्हें भी विकास का लाभ मिलना शुरू हो गया है। केंद्र सरकार की प्रमुख योजनाओं ने शत-प्रतिशत लक्ष्य हासिल किया है, ऐसी योजनाओं में समाज के सभी वर्गों को शामिल किया गया है। इनमें सौभाग्य और उज्ज्वला योजनाएं शामिल हैं। आवास, नल से जल कनेक्शन और वित्तीय समावेशन में प्रगति हुई है। लोगों के लिए बड़ी चुनौती रही स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र में भी बुनियादी ढांचे का विकास किया गया है। सभी गांवों ने खुले में शौच से मुक्त-ओडीएफ प्लस का दर्जा प्राप्त कर लिया है। सरकारी रिक्तियां, जो कभी भ्रष्टाचार और पक्षपात का शिकार होती थीं, पारदर्शी और सही प्रक्रिया के तहत भरी गयी हैं। आईएमआर जैसे अन्य संकेतकों में सुधार दिखा है। बुनियादी ढांचे और पर्यटन में बढ़ावा सभी देख सकते हैं। इसका श्रेय स्वाभाविक रूप से जम्मू-कश्मीर के लोगों की दृढ़ता को जाता है, जिन्होंने बार-बार दिखाया है कि वे केवल विकास चाहते हैं और इस सकारात्मक बदलाव के वाहक बनने के इच्छुक हैं।इससे पहले जम्मू, कश्मीर और लद्दाख की स्थिति पर सवालिया निशान लगा हुआ था। अब, रिकॉर्ड वृद्धि, रिकॉर्ड विकास, पर्यटकों के रिकॉर्ड आगमन के बारे में सुनकर लोगों को सुखद आश्चर्य होता है। सुप्रीम कोर्ट ने  11 दिसंबर के अपने फैसले में एक भारत, श्रेष्ठ भारत की भावना को मजबूत किया है। इसने हमें याद दिलाया कि एकता और सुशासन के लिए साझा प्रतिबद्धता ही हमारी पहचान है। आज जम्मू, कश्मीर और लद्दाख में जन्म लेने वाले प्रत्येक बच्चे को साफ-सुथरा माहौल मिलता है, जिसमें वह जीवंत आकांक्षाओं से भरे अपने भविष्य को साकार कर सकता है। आज लोगों के सपने बीते समय के मोहताज नहीं, बल्कि भविष्य की संभावनाएं हैं। जम्मू और, कश्मीर में मोहभंग, निराशा और हताशा की जगह अब विकास, लोकतंत्र और गरिमा ने ले ली है।

सर्वोच्च न्यायालय का फैसला आशा का प्रतीक : पीएम मोदी
Published / 2023-12-11 20:25:02
सर्वोच्च न्यायालय का फैसला आशा का प्रतीक : पीएम मोदी

सुप्रीम कोर्ट का फैसला मजबूत भारत के निर्माण की आशा का प्रतीक : मोदीएबीएन सेंट्रल डेस्क। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को जम्मू कश्मीर को विशेष दर्जा देने वाले अनुच्छेद 370 को निरस्त करने संबंधी उच्चतम न्यायालय के फैसले का स्वागत रिपीट स्वागत करते हुए कहा कि यह आदेश एक मजबूत और अधिक एकजुट भारत के निर्माण की आशा की किरण है।प्रधानमंत्री की यह टिप्पणी भारत के मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली पांच-न्यायाधीशों की संविधान पीठ द्वारा सर्वसम्मति से उस संवैधानिक फैसले को वैध ठहराए जाने के बाद आयी, जिसने भारतीय संविधान के अनुच्छेद 370 को निरस्त कर दिया और इससे जम्मू-कश्मीर का विशेष दर्जा निष्प्रभावी हो गया।प्रधानमंत्री ने एक्स पर कहा, आज का फैसला सिर्फ एक कानूनी फैसला नहीं है बल्कि यह आशा की किरण होने के साथ ही उज्जवल भविष्य का वादा है तथा एक मजबूत और अधिक एकजुट भारत के निर्माण के हमारे सामूहिक संकल्प का प्रमाण है।उच्चतम न्यायालय के फैसले को ऐतिहासिक बताते हुए उन्होंने कहा कि यह संवैधानिक रूप से 05 अगस्त, 2019 को संसद द्वारा लिए गये फैसले को बरकरार रखता है। यह जम्मू, कश्मीर और लद्दाख में हमारी बहनों और भाइयों के लिए आशा, प्रगति और एकता की एक शानदार घोषणा है। न्यायालय ने अपने गहन ज्ञान से एकता के मूल तत्व को मजबूत किया है, जिसे हम भारतीय होने के नाते सबसे अधिक महत्व देते हैं।प्रधानमंत्री ने जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के लोगों को आश्वास्त करते हुए कहा- आपके सपनों को पूरा करने के लिए हमारी प्रतिबद्धता अटूट है। हम यह सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध हैं कि प्रगति का लाभ न केवल आप तक पहुंचे, बल्कि इसका लाभ हमारे समाज के सबसे कमजोर और हाशिए पर रहने वाले वर्गों तक भी पहुंचे, जो अनुच्छेद 370 के कारण पीड़ित थे।

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