साल 2023 के आखिरी मन की बात कार्यक्रम में बोले पीएम मोदीएबीएन सेंट्रल डेस्क। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के रेडियो कार्यक्रम मन की बात का आज 108वां एपिसोड प्रसारित हो रहा है। जिसे आकाशवाणी सहित अन्य प्लेटफॉर्म पर सुना जा सकता है। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि मैं आपको झारखंड के एक आदिवासी गांव के बारे में बताना चाहता हूं। इस गांव में बच्चों को मातृभाषा में शिक्षा देने के लिए अनूठी पहल की गयी है और बच्चों को कुडुख भाषा में शिक्षा दी जा रही है। कुडुख भाषा उरांव आदिवासी समुदाय की मातृभाषा है और इसकी अपनी लिपि भी है। यह भाषा धीरे-धीरे विलुप्त हो रही है। स्कूल को शुरू करने वाले अरविंद उरांव ने बच्चों को उनकी मातृभाषा में पढ़ाने के लिए यह स्कूल शुरू किया। मातृभाषा में सीखने की वजह से बच्चों के सीखने की गति भी तेज हो गयी है।
आयुष्मान भव अभियान में पांच करोड़ से अधिक आभा खातेएबीएन सेंट्रल डेस्क। आयुष्मान भव अभियान के दौरान पांच करोड़ से अधिक आभा (एबीएचए) खाते खोले गये हैं और कुल 4,44,92,564 आयुष्मान कार्ड बनाये गयेहैं। केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने शुक्रवार को यहां बताया कि एक लाख 15 हजार 923 आयुष्मान सभाओं का आयोजन किया गया हैं। आयुष्मान भव अभियान के अंतर्गत 13,84,309 स्वास्थ्य मेलों में आयुष्मान आरोग्य मंदिर मेलों और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र मेलों में संयुक्त रूप से लोगों की भागीदारी 11,30,98,010 तक पहुंच चुकी है। देशभर में 13,49,356 आयुष्मान आरोग्य मंदिर मेलों का सफलतापूर्वक आयोजन और संचालन किया गया और इन मेलों में 9,76,56,060 लोगों ने भागीदारी की।इन मेलों में 9,21,783 स्वास्थ्य, योग, ध्यान के साथ 1,02,90,345 टेली परामर्श शामिल थे। इसके अलावा 6,41,70,297 लोगों को निःशुल्क दवायें दी गयीं और 5,10,48,644 लोगों को निःशुल्क निदान सेवायें प्रदान की गयीं। मेलों में 74,04,356 लोगों को आयुष सेवाएं दी गयीं और 10,99,63,891 लोगों को जीवनशैली गतिविधियों के लिए परामर्श दिया गया। इनमें 45,43,705 गर्भवती माताओं ने पहली तिमाही में पंजीकरण कराया और उनका पहला एब्सोल्यूट न्यूट्रोफिल काउंट (एएनसी) चेकअप पूरा किया गया और 29,83,565 माताओं और 49,44,359 बच्चों का टीकाकरण दिया गया। इसके अलावा 18,94,71,490 लोगों की सात तरह की -टीबी, हाइपरटेंशन, डायबिटीज, ओरल कैंसर, ब्रेस्ट कैंसर, सर्वाइकल कैंसर और मोतियाबिंद स्क्रीनिंग की गयी।सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र मेले के तहत 37,664 मेलों में 1,54,41,950 लोगों का पंजीकरण हुआ और 1,10,05,931 रोगियों ने सामान्य ओपीडी से परामर्श लिया जबकि 49,67,675 रोगियों ने विशेषज्ञ ओपीडी से परामर्श लिया। इसके अलावा 38,309 बड़ी सर्जरी और 1,30,760 छोटी सर्जरी की गयी हैं।
देश में पिछले 24 घंटों में कोविड-19 के 692 नये मामले एबीएन सेंट्रल डेस्क। देश में पिछले 24 घंटे में कोविड-19 के 692 नए मामले दर्ज किये गये हैं और इसी अवधि में छह लोगों की मौत हुई। स्वास्थ्य मंत्रालय डाटा ने गुरुवार को यह जानकारी दी। इसके साथ, सक्रिय कोविड-19 मामलों की कुल संख्या 4,097 तक पहुंच गयी है, जो देश में कुल सक्रिय मामलों का 0.01 प्रतिशत है। इस संक्रमण से छह मरीजों की मृत्यु हुई। इनमें से दो मरीजों की मृत्यु महाराष्ट्र में हुईं, जबकि दिल्ली, कर्नाटक, केरल और पश्चिम बंगाल में एक-एक मौत हुई, जिससे मृतकों की कुल संख्या बढ़कर 5,33,346 हो गयी। स्वास्थ्य मंत्रालय ने बताया कि इस मामले में मृत्यु दर 1.18 प्रतिशत है। स्वस्थ होने वाले लोगों की संख्या बढ़कर 4,44,73,448 हो गयी है, जिससे रिकवरी दर 98.81 प्रतिशत तक पहुंच गयी है।दिल्ली के स्वास्थ्य मंत्री सौरभ भारद्वाज के अनुसार, राजधानी में बुधवार को कोविड-19 सब-वैरिएंट जेएन 1 का पहला मामला दर्ज किया गया। कुल तीन संदिग्धों के नमूनों का परीक्षण के लिए प्रयोगशाला में भेजा गया था। इनमें से एक की पहचान जेएन1 के रूप में की गयी जबकि अन्य दो की पुष्टि ओमिक्रॉन के रूप में की गयी।दिल्ली में अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) ने कोविड-19 के बढ़ते मामलों के मद्देनजर दिशानिर्देश जारी किये हैं। एम्स निदेशक ने आकस्मिक उपायों पर चर्चा के लिए विभाग प्रमुखों के साथ बैठक की। इस बैठक में कोविड-19 परीक्षण, संक्रमण से संक्रमित मरीजों के लिए निर्दिष्ट क्षेत्रों और अस्पताल में भर्ती होने के प्रोटोकॉल पर नीतियों पर चर्चा की गयी।
भारत में कोरोना ने पकड़ी रफ्तारएबीएन सेंट्रल डेस्क। भारत में बीते 24 घंटे में कोविड-19 के 529 नये मामले सामने आए तथा उपचाराधीन मरीजों की संख्या 4,093 दर्ज की गयी। स्वास्थ्य मंत्रालय ने बुधवार को यह जानकारी दी। केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय की ओर से बुधवार को सुबह आठ बजे तक अद्यतन आंकड़ों के अनुसार, बीते 24 घंटों में कोरोना वायरस के संक्रमण से तीन लोगों की मौत हुई है।मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक बीते 24 घंटे में कोविड-19 से कर्नाटक में दो और गुजरात में एक मरीज की मौत हुई है। ठंड और कोरोना वायरस के नए उपस्वरूप के कारण हाल के दिनों में संक्रमण के मामलों में तेजी आयी है। इससे पहले पांच दिसंबर तक दैनिक मामलों की संख्या घटकर दोहरे अंक तक पहुंच गयी थी। वर्ष 2020 की शुरुआत से अब तक लगभग चार वर्षों में देश भर में कोरोना वायरस से लगभग साढ़े चार करोड़ से अधिक लोग संक्रमित हुए तथा इससे 5.3 लाख से अधिक मौतें हुईं। स्वास्थ्य मंत्रालय की वेबसाइट के अनुसार इस बीमारी से उबरने वाले लोगों की संख्या बढ़कर 4.4 करोड़ हो गयी है। स्वस्थ होने की राष्ट्रीय दर 98.81 प्रतिशत है, वहीं मृत्यु दर 1.19 प्रतिशत है। मंत्रालय के अनुसार, देश में अभी तक कोविड-19 रोधी टीकाकरण अभियान के तहत 220.67 करोड़ खुराक दी जा चुकी हैं।
खेत-खलिहान के प्रयोगधर्मियों के नवाचारों को संरक्षण आज की जरूरतएबीएन सेंट्रल डेस्क। बदलते सिनेरियो में सरकार को अब विश्वविद्यालयों की बड़ी-बड़ी और संसाधनयुक्त प्रयोगशालाओं से अलग खेत को ही प्रयोगशाला बनाकर अपनी मेहनत, नवाचारी, परंपरागत और आधुनिकतम खेती के बीच सामंजस्य बनाते हुए नित नये प्रयोग करने वाले प्रयोगधर्मी किसानों की मेहनत को मान्यता, संरक्षण और पहचान देने की पहल भी करनी होगी। इसमें कोई दोराय नहीं की देश के कृषि विश्वविद्यालयों में शोध और अनुसंधान के क्षेत्र में विश्वस्तरीय कार्य हो रहा है और आज खेती किसानी के क्षेत्र में देश नित-नये आयाम स्थापित कर रहा है। कृषि के क्षेत्र में भारत आज अग्रणी देश बन गया है। हालात यह हो गये हैं कि आज गेहूं और धान के निर्यात पर रोक के बावजूद देश के किसानों की ही मेहनत का फल है कि बागवानी व अन्य कृषि उत्पादों का निर्यात बढ़ाकर देश निर्यात के नये कीर्तिमान स्थापित करने की और अग्रसर है। पर यहां हमें यह नहीं भूलना होगा कि रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों के अत्यधिक उपयोग के कारण जहां गेहूं, धान आदि के उत्पादन के हालात सेचुरेशन वाले हो गये हैं वहीं भूमि की उर्वरा शक्ति प्रभावित होने के साथ ही पानी का अत्यधिक दोहन, स्वास्थ्य और सेहत के लिए हानिकारक होता जा रहा है। आज देश जैविक व परंपरागत खेती की और बढ़ रहा है। हालांकि यह भी उपलब्धि है कि हमारा सिक्किम दुनिया का पहले नंबर पर जैविक अनाज उत्पादक प्रदेश बन गया है। खैर इस सबके बीच हमें उन प्रयोगधर्मी भूमिपुत्रों को प्रोत्साहित और उनकी मेहनत को संरक्षित और आगे बढ़ाने के लिए आगे आना होगा जो अपनी सीमित साधन, संसाधन और विपरीत वित्तीय परिस्थितियों के बावजूद नयी इबारत लिख रहे हैं। सही मायने में देखा जाये तो इन प्रयोगधर्मी अन्नदाताओं की मेहनत व लगन को किसी कृषि वैज्ञानिक से कम नहीं आका जा सकता। देश के अनेक प्रयोगधर्मी भूमिपुत्रों में से अपनी खेती-अपना खाद, अपना बीज-अपना स्वाद को ध्येय बनाकर उत्तर प्रदेश के वाराणसी जिले के टड़िया गांव के किसान वैज्ञानिक श्रीप्रकाश सिंह रघुवंशी ऐसे ही देश कुछ गिने-चुने खेत को ही प्रयोगशाला बनाकर जुटे हुए हैं। सच ही कहा गया है कि ईश्वर किसी ना किसी तरह से न्याय अवश्य करता है। इसी का जीता जागता उदाहरण श्रीप्रकाश रघुवंशी है। 23 साल की आयु में बीमारी के दौरान पेनिसिलिन की इंजेक्शन के दुष्प्रभाव से आंखों पर अधिक असर पड़ने के कारण आंखों की परेशानी के कारण खेत और खेती को ही प्रयोगशाला बनाकर श्रीप्रकाश ने जो नवाचार और प्रयोग किए आज उन्हें संरक्षित करने की अधिक आवश्यकता है। निकट भविष्य में श्रीप्रकाश को पूरी तरह से दिखाई देना बंद होने की संभावना के अहसास के डर से लग रहा है कि ऐसी विकट स्थिति आई तो कृषि क्षेत्र में उनकी शोध यात्रा थम जाएगी। उन्हें चिंता है कि गेहूं, अरहर, सरसों आदि की उनके द्वारा विकसित कुदरत और करिश्मा प्रजाति के बीज और 200 प्रकार के देसी बीजों के खजाने का क्या होगा। श्रीप्रकाश ने नित नये प्रयोग करते हुए 200 प्रकार की देशी वैरायटी के बीज विकसित किये हैं। इनमें गेहूं की 80 प्रजाति, धान की 20 प्रजाति, अरहर की 5 प्रजाति, सरसों की 3 प्रजाति सहित हमारी जलवायु और वातावरण में अच्छी, जल्दी पकने वाली देशी प्रजातियों को विकसित करने का अहम काम किया गया है। गेहूं कुदरत-9 और कुदरत-8 विश्वनाथ लंबे वाली वाला होता है। एक बाली में 80-90 दाने होते हैं। तेज पानी, हवा से पौधा गिरता नहीं। उत्पादन क्षमता 25 से 30 क्विंटल प्रति एकड़ है। दाना मोटा, चमकदार और वजनदार होता होता है। खास बात यह है कि देश के कृषि विश्वविद्यालयों द्वारा किये जा रहे दावों को जांचा परखा गया है और गुणवत्ता पर खरे उतरे हैं। देश के कई हिस्सों में खासतौर से उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, बिहार, राजस्थान, पंजाब हरियाणा आदि में 100, 50, 25 ग्राम के सैंपल्स उपलब्ध कराकर प्रयोग किया गया है और यह प्रयोग सफल रहा है। अब श्रीप्रकाश की चिंता यही है कि इन स्वदेशी बीजों का बैंक बन जाए तो इनका उपयोग, उत्पादन और संरक्षण का काम हो सकेगा। इसका लाभ अंततोगत्वा देश के कृषि क्षेत्र को ही मिलेगा।श्रीप्रकाश के बहाने यहां चिंतनीय और विचारणीय हालात यह हो जाता है कि देश के ऐसे भूमि पुत्रों को राष्ट्रीय पुरस्कारों से सम्मानित किया जाना ही पर्याप्त नहीं है। सम्मान अपने आपमें मायने रखता है पर इनकी मेहनत और प्रयोग को जब उपादेय माना जाता है तो उसके संरक्षण और संवर्द्धन किया जाना चाहिए। मेरा मानना है कि केन्द्र व राज्य सरकार के कृषि मंत्रालयों को ऐसे नवाचारी, अपनी धुन में मस्त, मानव समाज और कृषि जगत के लिए किये जा रहे कार्यों को पहचान के साथ ही प्रोत्साहित किया जाना चाहिए। बल्कि होना तो यह चाहिए कि मंत्रालयों में एक अनुभाग ऐसा होना चाहिए जो केवल ऐसे लोगों को प्रोत्साहित करने, उन्हें सहयोग करने, आवश्यकतानुसार संसाधन उपलब्ध कराने और परीक्षण के बाद खरी उतरने वाले प्रयोगों को सरकार द्वारा अपने हाथ में लेकर आगे बढ़ाने के प्रयास किये जाने चाहिए। आज किसानों को भ्रमण कराया जाता है। यदि ऐसे नवाचारी भूमिपुत्रों के खेत खलिहान का भ्रमण कराया जाता है, अनुभवों से रूबरू कराया जाता है तो यह अधिक लाभदायक होगा इसमें कोई संदेह नहीं किया जाना चाहिए। देखा जाए तो श्रीप्रकाश तो एक बहाना है। हां यह अवश्य है कि उत्तर प्रदेश सरकार और केन्द्र सरकार के कृषि मंत्रालय को आगे आकर श्रीप्रकाश द्वारा 200 से अधिक किये गये 20 प्रजाति के बीज बैंक की स्थापना कर संरक्षित करने के लिए आगे आना चाहिए। श्रीप्रकाश के स्वास्थ्य की विपरीत परिस्थिति को देखते हुए संबल प्रदान करना चाहिए। यह केवल श्रीप्रकाश की ही बात नहीं हैं देश के हर कोने में इस तरह के कर्मयोगी मिल जायेंगे।मिशन फार्मर साइंटिस्ट परिवार के महेंद्र मधुप ने इस तरह के कर्मयोगियों व उनके प्रयोगों को अन्वेषक किसान सहित अपनी पुस्तकों व अनवरत लेखकीय प्रयासों से सामने लाने की पहल की है। सरकार को इन्हें मान्यता देनी चाहिए। केवल पुरस्कारों से कुछ होने वाला नहीं हैं अपितु इनकी मेहनत के नवाचारों को विस्तारित किया जाना चाहिए। इसमें कोई दोराय नहीं कि सरकार पहले जांचें परखें पर जांच परख के बाद जब उपयोगी सिद्ध होती है तो फिर सरकार को ऐसे प्रयोगों को आगे बढ़ाना चाहिए। भले ही विश्वविद्यालयों में अन्य पीठों की तरह इस तरह की नवाचारी प्रयोगधर्मी भूमि पुत्रों के लिए भी पीठ की स्थापना कर आगे आ सकती है। कोरोना के बाद विश्व में नए हालात आए हैं जलवायु परिवर्तन और तापमान में बढ़ोतरी के कारण नयी परिस्थितियां सामने आ रही है। विश्व में आसन्न खाद्यान्न संकट को लेकर चेताया जा रहा है। तब इस तरह की पहल की आवश्यकता और अधिक हो जाती है। (लेखक, स्वतंत्र टिप्पणीकार हैं और ये उनके निजी विचार हैं।)
वीर बाल दिवस भारतीयता की रक्षा के लिए कुछ भी करने के संकल्प का प्रतीक है : मोदीएबीएन सेंट्रल डेस्क। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को कहा कि भारतीयों ने अत्याचारियों का सम्मान के साथ सामना किया है और जब हम अपनी विरासत पर गर्व महसूस करते हैं, तो दुनिया का नजरिया भी बदल जाता है।श्री मोदी ने आज यहां वीर बाल दिवस के अवसर पर आयोजित एक समारोह को संबोधित करते हुए कहा कि राष्ट्र वीर साहिबजादे के अमर बलिदानों को याद कर रहा है और उनसे प्रेरणा ले रहा है क्योंकि आजादी के अमृत काल में भारत के लिए वीर बाल दिवस का एक नया अध्याय शुरू हो रहा है। प्रधानमंत्री ने पिछले साल इसी दिन मनाये गये पहले वीर बाल दिवस के उत्सव को याद किया। उन्होंने कहा- वीर बाल दिवस भारतीयता की रक्षा के लिए कभी न हार मानने वाले रवैये का प्रतीक है। यह दिन हमें याद दिलाता है कि जब बहादुरी की ऊंचाइयों की बात आती है तो उम्र कोई मायने नहीं रखती है।प्रधानमंत्री ने इसे सिख गुरुओं की विरासत का उत्सव बताते हुए कहा कि गुरु गोबिंद सिंह जी और उनके चार वीर साहिबजादों का साहस और आदर्श आज भी हर भारतीय का हौसला बढ़ाते हैं। प्रधानमंत्री ने बाबा मोती राम मेहरा के परिवार के बलिदान और दीवान टोडरमल की भक्ति को याद करते हुए कहा कि वीर बाल दिवस उन माताओं के लिए एक राष्ट्रीय श्रद्धांजलि है जिन्होंने अद्वितीय साहस वाले बहादुरों को जन्म दिया। उन्होंने कहा कि गुरुओं के प्रति यह राष्ट्र के सच्ची भक्ति ज्वाला को प्रज्ज्वलित करती है।श्री मोदी ने बच्चों के गायन और तीन मार्शल आर्ट का प्रदर्शन देखा। मौके पर प्रधानमंत्री ने दिल्ली में युवाओं के मार्च-पास्ट को भी हरी झंडी दिखायी। प्रधानमंत्री ने कहा कि वीर बाल दिवस अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मनाया जा रहा है क्योंकि अमेरिका, ब्रिटेन, आस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड, संयुक्त अरब अमीरात और यूनान में वीर बाल दिवस से संबंधित कार्यक्रम देखे गये हैं।प्रधानमंत्री ने चमकौर और सरहिंद की लड़ाई के अतुलनीय इतिहास को याद करते हुए कहा कि इस इतिहास को भुलाया नहीं जा सकता। उन्होंने कहा कि भारतीयों ने क्रूरता और निरंकुशता का सम्मान के साथ सामना किया।प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा कि दुनिया ने भी हमारी विरासत पर तभी ध्यान दिया जब हमने अपनी विरासत को उसका उचित सम्मान देना शुरू किया। आज जब हम अपनी विरासत पर गर्व कर रहे हैं तो दुनिया का नजरिया भी बदल गया है। श्री मोदी ने कहा कि भारत अब गुलामी की मानसिकता को त्याग रहा है और उसे देश की क्षमताओं, प्रेरणाओं और लोगों पर पूरा भरोसा है। श्री मोदी ने कहा कि भारत अर्थव्यवस्था, विज्ञान, अनुसंधान, खेल और कूटनीति की वैश्विक समस्याओं में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।उन्होंने कहा कि भारत एक ऐसे समय से गुजर रहा है जो युगों में आता है। कई कारक एक साथ आए हैं जो भारत के लिए स्वर्णिम काल निर्धारित करेंगे। उन्होंने भारत की युवा शक्ति पर जोर दिया और कहा कि आज देश में युवाओं की आबादी आजादी की लड़ाई के दौरान की तुलना में कहीं ज्यादा है और युवाओं की वर्तमान पीढ़ी देश को अकल्पनीय ऊंचाइयों तक ले जा सकती है।
भारत रत्न, पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेई की 100वीं जयंती 25 दिसंबर को एबीएन सेंट्रल डेस्क। भारतीय जनता पार्टी के प्रेरणा पुरुष भारत रत्न पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेई की 100वीं जयंती 25 दिसंबर 2023 को सुशासन दिवस के रूप में मनी। भाजपा अटल जी की जयंती को प्रतिवर्ष सुशासन दिवस के रूप में मनाती है। यह जानकारी कार्यक्रम के प्रदेश संयोजक बबन गुप्ता ने आज दी। श्री गुप्ता ने बताया कि पूरे प्रदेश में सभी बूथों सहित शक्ति केंद्र एवं सांगठनिक जिला स्तर पर भव्यता के साथ सुशासन दिवस को मनाया जायेगा। पार्टी के पदाधिकारी, सांसद विधायकगण, जन प्रतिनिधि अपने अपने स्थानों पर अटल जी की प्रतिमा, चित्र पर श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए उन्हें नमन करेंगे।बताया कि जिला स्तर पर अटल जी के व्यक्तित्व एवम कृतित्व की चर्चा केलिए गोष्ठी, काव्यांजलि का आयोजन किया गया है, जिसमें प्रदेश अध्यक्ष एवम पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी धनबाद नगर में गोष्ठी को संबोधित करेंगे।
140 करोड़ लोगों को आत्मनिर्भर बनाना मोदी सरकार का लक्ष्यपीएम स्वनिधि के लाभार्थियों से बोले अमित शाहएबीएन सेंट्रल डेस्क। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने रविवार को कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी देश में गरीबों सहित 140 करोड़ लोगों को आत्मनिर्भर बनाना चाहते हैं और उन्होंने इसके लिए समर्पण के साथ काम किया है। शाह यहां पीएम स्वनिधि योजना के लाभार्थियों की एक सभा को संबोधित कर रहे थे। यह योजना रेहड़ी-पटरी वालों को आसान ऋण दिलाने में मदद करती है।उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी भारत को अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी एवं रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाना चाहते हैं तथा साथ ही उनका लक्ष्य गरीब लोगों को भी आत्मनिर्भर बनाना है। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि मोदी सरकार में गरीब लोगों को सबसे ज्यादा फायदा हुआ है। प्रधानमंत्री स्ट्रीट वेंडर आत्मनिर्भर निधि (पीएम-स्वनिधि योजना) के लाभार्थियों को ऋण देने के कार्यक्रम में गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेन्द्र पटेल भी मौजूद थे। अमित शाह ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने भारत को आत्मनिर्भर बनाने का आह्वान किया है और वह देश को अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी, रक्षा, सभी प्रकार के व्यवसायों तथा अन्य क्षेत्रों में आत्मनिर्भर बनाना चाहते हैं। उन्होंने कहा- प्रधानमंत्री मोदी सभी गरीबों सहित 140 करोड़ लोगों को आत्मनिर्भर बनाना चाहते हैं। अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी, अनुसंधान और विकास के अलावा, प्रधानमंत्री ने 60 करोड़ गरीबों के जीवन स्तर को बेहतर बनाने के लिए पूरे समर्पण के साथ काम किया है। गृह मंत्री ने कहा कि मेरे निर्वाचन क्षेत्र (गुजरात में गांधीनगर) में 1.5 लाख से अधिक लोगों ने पीएम-स्वनिधि योजना का लाभ उठाया है, जिसके तहत बिना किसी गारंटी के छोटे व्यवसाय और हाथ गाड़ियां चलाने वालों को वित्तीय सहायता दी जाती है।मुख्यमंत्री पटेल ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी और गृह मंत्री अमित शाह द्वारा शुरू की गई योजनाओं के परिणामस्वरूप देश में गरीब लोग अब आत्मनिर्भर जीवन जी रहे हैं। शाह अपने निर्वाचन क्षेत्र के एक दिवसीय दौरे पर हैं, जहां उनका विभिन्न कार्यक्रमों में शामिल होने का कार्यक्रम है।
शिवेश प्रताप सिंहएबीएन एडिटोरियल डेस्क। योगी ने कभी बीमारू माने जाने वाले उत्तर प्रदेश को विकास की दौड़ में अग्रणी स्थान पर ला खड़ा किया है। विश्लेषण मंच एसओआईसी के अनुसार सेंसेक्स तथा क्रेडिट लियोनिस सिक्योरिटीज एशिया आधारित रिपोर्ट्स के हिसाब से देश की जीडीपी में हिस्सेदारी के मामले में उत्तर प्रदेश दूसरे स्थान पर आ गया है। यह परिणाम योगी सरकार द्वारा किए जा रहे अहर्निश, ईमानदार एवं अनथक प्रयासों का परिणाम है। देश की कुल जीडीपी में महाराष्ट्र 15.7 प्रतिशत जीडीपी योगदान के साथ पहले पायदान पर है तो वहीं उत्तर प्रदेश 9.2 प्रतिशत जीडीपी के साथ दूसरे स्थान पर है। बीते कुछ समय से तमिलनाडु से कांटे की टक्कर में उत्तर प्रदेश को अब बढ़त मिली है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 2027 तक प्रदेश की अर्थव्यवस्था को वन ट्रिलियन इकोनॉमी बनाने का लक्ष्य रखा है। आइये जानते हैं की योगी का उत्तरप्रदेश कैसे आज से सात साल पहले असंभव से लगने वाले इस लक्ष्य को हासिल कर आगे बढ़ते हुए भारत के जीडीपी योगदान में प्रथम स्थान हासिल करने हेतु निरंतर प्रगतिशील है। किसी भी प्रदेश के लिए ऐसे बड़े लक्ष्य को हासिल करने के लिए मात्र घरेलू बाजार की निर्भरता को खत्म कर अपने निर्यात से पूरी दुनिया में व्यापारिक पैठ बनाने की आवश्यकता होती है। घरेलू बाजारों की मांग एवं क्रय शक्ति सीमित होती है जो एक सीमित राजस्व ही पैदा करने में सक्षम होती है। एक्सपोर्ट के माध्यम से एक विशालकाय बाजार के साथ अच्छे लाभ एवं राजस्व प्राप्ति का रास्ता भी खुलता है। योगी सरकार को निर्यात का महत्व पता है इसलिए सरकार द्वारा जमीनी स्तर पर ऐसी नीतियों एवं योजनाओं का क्रियान्वयन किया जा रहा है जिससे निर्यात प्रोत्साहन को प्रदेश में बढ़ावा मिले योगी सरकार के गंभीर प्रयासों के कारण ही कोविड जैसी महामारी की विपरीत परिस्थितियों का सामना करते हुए भी उत्तर प्रदेश का निर्यात पिछले छह वर्षों में लगभग दोगुना हो गया है। उत्तर प्रदेश के राज्य निर्यात प्रोत्साहन ब्यूरो के डेटा के अनुसार 2016-17 में प्रदेश का निर्यात 84,000 करोड़ रुपये का था जो 2022-23 में बढ़कर दोगुने से अधिक यानी 1,74,000 करोड़ रुपये का हो गया है। वित्त वर्ष 2023-24 में सरकार द्वारा दो लाख करोड़ रुपये के निर्यात का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। यह सूचनाएं सिद्ध करती हैं कि कभी बीमारू राज्य का टैग लेकर घूमने वाला उत्तर प्रदेश योगी सरकार की क्रांतिकारी नीतियों के कारण भारत का नया एक्सपोर्ट हब बनने जा रहा है। उत्तर प्रदेश का 60 प्रतिशत निर्यात दुनिया के 10 देशों वियतनाम, नीदरलैंड, फ्रांस, चीन, मिश्र, अमेरिका, संयुक्त अरब अमीरात, नेपाल, यूनाइटेड किंगडम तथा जर्मनी को होता है। 2022-23 में सबसे अधिक निर्यात 32,800 करोड़ अमेरिका को, 14,300 करोड़ संयुक्त अरब अमीरात को तथा लगभग दस-दस हजार करोड़ जर्मनी एवं यूनाइटेड किंगडम को हुआ। उत्तर प्रदेश से वर्तमान में सबसे अधिक निर्यात की जाने वाली वस्तुओं में इलेक्ट्रिकल एवं इलेक्ट्रॉनिक वस्तुएं, दूरसंचार उपकरण, कॉटन, कृत्रिम फाइबर आदि के साथ गेहूं, चावल, कालीन एवं हस्तशिल्प भी महत्वपूर्ण निर्यात सामग्री है। परंतु चौंकाने वाली बात यह है कि इलेक्ट्रिकल एवं इलेक्ट्रॉनिक वस्तुएं उत्तर प्रदेश के संपूर्ण निर्यात का 18.9 प्रतिशत है। इसके बाद कपड़ा उद्योग 9.5 प्रतिशत का योगदान करता है। केंद्र की मोदी सरकार ने राज्यों के निर्यात को प्रोत्साहित करने के लिए देशभर के कुछ महत्वपूर्ण शहरों को सेंटर आॅफ एक्सपोर्ट एक्सीलेंस घोषित किया है जिससे कि निर्यात को एक समेकित विकास में सम्मिलित किया जा सके।एक्सपोर्ट एक्सीलेंस वाले शहरों में ऐसे शहरों को चयनित किया जाता है जिसकी उत्पादन सीमा 750 करोड रुपये से अधिक की हो और निर्यात क्षमता भविष्योन्मुख हो। आज भारत भर में केंद्र सरकार के द्वारा चिह्नित किए गए 43 सेंटर आफ एक्सपोर्ट एक्सीलेंस हैं। इनमें 12 सेंटर अकेले उत्तर प्रदेश में हैं जो इस प्रदेश के निर्यात सामर्थ्य को बनाते हैं। उत्तर प्रदेश चारों तरफ से स्थलीय एवं पहाड़ी सीमाओं के बीच स्थित है। सामान्यतया निर्यात प्रोत्साहन हेतु समुद्री सीमा किसी भी प्रदेश को बेहद महत्वपूर्ण बना देती है लेकिन उत्तर प्रदेश के पास कोई समुद्री सीमा न होते हुए भी 12 सेंटर आफ एक्सपोर्ट एक्सीलेंस की मौजूदगी प्रदेश सरकार के विकास के संकल्प को स्वयं बताती है। जलमार्ग से सस्ते यातायात का लाभ तटीय प्रदेशों को मिलता है लेकिन इस चुनौती के समाधान के लिए भी प्रदेश की योगी सरकार ने गंभीरता से कार्य करते हुए उत्तर प्रदेश के उद्योगों को जलमार्ग से जोड़ने के लिए कई महत्वपूर्णक कदम उठाए हैं। समुद्री बंदरगाहों की अनुपस्थिति में निर्यात की सुगमता के लिए उत्तर प्रदेश सरकार प्रदेश के भीतर शुष्क बंदरगाहों का एक मजबूत नेटवर्क खड़ा करने के लिए कार्यरत है।इसी क्रम में योगी सरकार ने सिंगापुर के स्टार कंसोर्सियम तथा संयुक्त अरब अमीरात के सर्राफ ग्रुपके साथ-साथ हिंदुस्तान पोर्ट प्राइवेट लिमिटेड व अमेरिका की दो कंपनियों मोबिलिटी इंफ्रास्ट्रक्चर तथा बेस्ट बेट्रकिंग ग्रुप के साथ एमओयू साइन किया है। वर्तमान में मुरादाबाद रेल लिंक्ड जॉइंट डोमेस्टिक एक्सिमट र्मिनल, रेल लिंक्ड प्राइवेट फ्रेट टर्मिनल तथा कानपुर व दादरी में शुष्क बंदरगाह सफलतापूर्वक कार्य कर रहे हैं। जलमार्ग के लिए वाराणसी से पश्चिम बंगाल के हल्दिया तक जलराज मार्ग संख्या एकप्रारंभ हो गया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का ध्यान उत्तर प्रदेश के पारंपरिक उद्योगों के संरक्षण एवं संवर्धन के द्वारा निर्यात को बढ़ाने पर है। इन पारंपरिक उद्योगों में भी दो ऐसे क्षेत्र टेक्सटाइल एवं इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण हैं जिसमें उत्तर प्रदेश के पास एक बहुत बड़ा अवसर है। उत्तर प्रदेश भारत का तीसरा सबसे बड़ा टेक्सटाइल उत्पादन करने वाला प्रदेश है तथा राष्ट्रीय उत्पादन में 13.24 प्रतिशत का योगदान करता है। उत्तर प्रदेश में लगभग ढाई लाख हैंडलूम बुनकर तथा चार लाख 21 हजार पावरलूम बुनकर मौजूद हैं। उत्तर प्रदेश सरकार इस क्षेत्र में निर्यातको और बढ़ाना चाहती है साथ ही सरकार का लक्ष्य है कि इस उद्योग से जुड़ा हुआ अंतिम व्यक्ति भी निर्यात से लाभान्वित हो सके क्योंकि कपड़ा उद्योग कम पूंजीनिवेश तथा अधिक मानवीय श्रम आधारित उद्योग है। 10 हजार की एक सिलाई मशीन दो लोगों को रोजगार दे सकती है। यही कारण है कि कपड़ा उद्योग न केवल निर्यात प्रोत्साहन कर सकता है अपितु बेरोजगारी की विकराल समस्या का भी समाधान कर सकता है। टेक्सटाइल के क्षेत्र में उत्तर प्रदेश का निर्यात लगातार बढ़ रहा है। यह योगदान उत्तर प्रदेश के चार जिलों से हो रहा है। नोएडा के रेडीमेड कपड़े, मेरठ का स्पोर्टवेयर, कानपुर के बच्चों के कपड़े तथा लखनऊ के पारंपरिक चिकन इसमें अपना अहम योगदान दे रहे हैं। केंद्र सरकार के साथ मिलकर उत्तर प्रदेश सरकार इन्हीं जनपदों में टेक्सटाइल उद्योग के निर्यात प्रोत्साहन पर ध्यान दे रही है। वर्तमान में उत्तर प्रदेश में 58 स्पिनिंग मिल्स तथा 74 टेक्सटाइल मिलें चल रही हैं। कपड़ा उद्योग के निर्यात प्रोत्साहन से उत्तर प्रदेश में लगभग 5 लाख लोगों को रोजगार मुहैया होगा। वैश्विक स्तर पर चीन का शेनझेन शहर इलेक्ट्रॉनिक विनिर्माण का सबसे बड़ा ठिकाना है। पूरे विश्व का 90% इलेक्ट्रॉनिक उत्पाद इसी शहर की देन है। इलेक्ट्रॉनिक उत्पादों के प्रति बनते रुझानों के कारण अब प्रदेश केसाथ-साथ केंद्र सरकार भी उत्तर प्रदेश को चीन के इलेक्ट्रॉनिक विनिर्माण के एकाधिकार के प्रत्युत्तर में उत्तर प्रदेश को इलेक्ट्रॉनिक विनिर्माण के क्षेत्र में वरीयता दे रही है। वित्त वर्ष 2022-23 में उत्तर प्रदेश ने 29,699 करोड़ रुपये का इलेक्ट्रॉनिक उत्पाद निर्यात किया। केंद्र सरकार के मंत्री राजीव चंद्रशेखर के अनुसार सरकार ने वित्त वर्ष 2025-26 तक 300 बिलियन डॉलर मूल्य के विनिर्माण का लक्ष्य रखा है। इसका एक तिहाई लक्ष्य यानी 100 बिलियन डॉलर उत्तर प्रदेश द्वारा पूरा किए जाने की अपेक्षा है।वर्तमान में उत्तर प्रदेश भारत के कंज्यूमर इलेक्ट्रॉनिक उत्पादों का सबसे बड़ा निर्यातक है। साथ ही इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम डिजाइन एवं विनिर्माण की 196 कंपनियां उत्तर प्रदेश में ही स्थापित हैं। (लेखक, स्वतंत्र टिप्पणीकार हैं और ये उनके निजी विचार हैं।)
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