अगले 5 दिनों में 4 डिग्री तक गिरेगा पारा, इस राज्य में आंधी-तूफान की चेतावनी;आईएमडी ने जारी किया अलर्ट टीम एबीएन, रांची। झारखंड के अधिकतर हिस्सों में अगले पांच दिनों में लू की स्थिति से राहत मिलने की संभावना है, क्योंकि अधिकतम तापमान में चार डिग्री सेल्सियस तक गिरावट आ सकती है। अधिकरियों ने गुरुवार को इसकी जानकारी दी। 30 मई तक आॅरेंज अलर्ट जारी अधिकारियों ने बताया कि भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) ने 20 जिलों में 30 मई तक गरज के साथ बारिश की आशंका को लेकर आॅरेंज अलर्ट जारी किया है। रांची मौसम विज्ञान केंद्र के उप निदेशक अभिषेक आनंद ने कहा, राज्य के कई हिस्सों में पिछले 24 घंटों में अधिकतम तापमान में एक से दो डिग्री सेल्सियस की गिरावट दर्ज की गयी है। अगले दो दिनों में इसमें चार डिग्री सेल्सियस तक की और गिरावट आने की संभावना है। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश के उत्तर-पश्चिम से लेकर ओडिशा के दक्षिणी तटीय क्षेत्र तक और दक्षिण बिहार से लेकर आंध्र प्रदेश के उत्तरी तटीय क्षेत्र तक फैली दो निम्न दबाव प्रणालियों के कारण लू की स्थिति में राहत मिलने की उम्मीद है। पिछले कुछ दिनों में झारखंड के अधिकांश हिस्सों में अधिकतम तापमान 40 डिग्री सेल्सियस से ऊपर पहुंच गया था।बुधवार को डाल्टनगंज में राज्य का सबसे अधिक तापमान 43.8 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जबकि मंगलवार को यह 44.8 डिग्री सेल्सियस था। मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) के अनुसार, राज्य की राजधानी रांची में मंगलवार को तापमान 39.2 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया, हालांकि बुधवार को इसमें कुछ गिरावट आयी और यह 37 डिग्री सेल्सियस पर आ गया।
भीषण गर्मी में प्यासा झारखंड! हजारों हैंडपंप और सोलर पंप खराब, चुआ और नदी के सहारे जी रहे लोग टीम एबीएन, रांची। झारखंड में पड़ रही भीषण गर्मी ने लोगों का जीवन मुश्किल कर दिया है। राज्य के शहरी और ग्रामीण दोनों इलाकों में पेयजल संकट गहराता जा रहा है। हीटवेव के बीच लोगों को पानी के लिए घंटों मशक्कत करनी पड़ रही है, जबकि सरकार की कई योजनाएं जमीनी स्तर पर दम तोड़ती नजर आ रही हैं। रांची समेत कई शहरों में नगर निगम द्वारा वाटर टैंकरों से पानी की आपूर्ति की जा रही है, लेकिन बढ़ती मांग के मुकाबले यह व्यवस्था फेल साबित हो रही है। जल जीवन मिशन के तहत बिछायी गयी पाइपलाइनें कई जगहों पर केवल शोभा की वस्तु बनकर रह गयी हैं। शहरों में लगाए गए डीप बोरिंग भी बड़ी संख्या में खराब पड़े हैं। नामकुम प्रखंड के टुंगरीटोली में ग्रामीण आज भी चुआ से पानी भरने को मजबूर हैं। ग्रामीण क्षेत्रों की स्थिति और गंभीर बनी हुई है। पिछले वित्तीय वर्ष 2025-26 में लगाये गये सोलर जलमीनार, सोलर पंप और हजारों हैंडपंप खराब पड़े हैं। कई गांवों में लोग नदी, झरना और कुएं के सहारे प्यास बुझा रहे हैं। चाईबासा में 2554 सोलर आधारित जल योजनाओं में से 245 योजनाएं खराब पायी गयी हैं। कहीं पंप धंस गए हैं तो कहीं बोरिंग फेल हो चुकी है। इसके कारण ग्रामीणों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। दुमका के पहाड़िया टोला में दो सोलर टंकियों में से एक पूरी तरह बंद पड़ी है, जबकि पांचों चापाकल वर्षों से खराब हैं। यहां करीब 50 आदिवासी परिवार एक किलोमीटर दूर से पानी ढोने को मजबूर हैं। घाटशिला के बृंदावानपुर गांव में एक साल से खराब पड़ी सोलर जलमीनार के कारण ग्रामीण गंभीर जल संकट झेल रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि शिकायतों के बावजूद अब तक कोई स्थायी समाधान नहीं निकाला गया है। विभागीय आंकड़ों के अनुसार राज्य में 52 हजार से अधिक हैंडपंप खराब पड़े हैं। विभाग मिस्त्रियों की कमी और तकनीकी समस्याओं का हवाला दे रहा है, लेकिन भीषण गर्मी में आम जनता भगवान भरोसे नजर आ रही है।
झारखंड में भीषण गर्मी का कहर, कई जिलों में लू की चेतावनी; अस्पतालों को हाईअलर्ट पर रहने का निर्देश टीम एबीएन, रांची। झारखंड में गर्मी अब लोगों को झुलसाने लगी है। सुबह से ही तेज धूप और गर्म हवाओं ने लोगों का हाल बेहाल कर दिया है। राजधानी रांची समेत राज्य के कई जिले इन दिनों भीषण गर्मी की चपेट में हैं। हालात ऐसे हैं कि दोपहर के समय सड़कें सूनी नजर आ रही हैं और लोग घरों में रहने को मजबूर हैं। मौसम विभाग ने दो दिनों तक कई जिलों में लू चलने की चेतावनी जारी की है। रांची का अधिकतम तापमान 38.9 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जो पिछले 24 घंटे की तुलना में 0.4 डिग्री अधिक रहा। वहीं जमशेदपुर में तापमान 43.1 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया। चाईबासा में 41.8 डिग्री और बोकारो में 41.1 डिग्री सेल्सियस तापमान रिकॉर्ड किया गया। तेज धूप और उमस भरी गर्मी के कारण लोगों को दिनभर परेशानियों का सामना करना पड़ा। लोगों को विशेष सतर्क रहने की सलाह मौसम विभाग के अनुसार अभी को भी गर्मी से राहत मिलने की संभावना कम है। रांची, गुमला, सिमडेगा, रामगढ़, गिरिडीह, धनबाद, देवघर समेत कई जिलों में दोपहर तक तेज धूप पड़ने की संभावना है।हालांकि शाम के समय कुछ इलाकों में तेज हवा और हल्की बारिश हो सकती है, जिससे लोगों को थोड़ी राहत मिलने के आसार हैं। इस बार सबसे ज्यादा गर्मी मेदिनीनगर में रिकॉर्ड की गयी, जहां तापमान 45.2 डिग्री सेल्सियस पहुंच गया। मौसम विभाग ने गढ़वा, पलामू और चतरा के लोगों को विशेष सतर्क रहने की सलाह दी है। सरकारी अस्पतालों को हाई अलर्ट पर रहने का निर्देश इधर, हीट स्ट्रोक के खतरे को देखते हुए स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी ने राज्य के सभी सरकारी अस्पतालों को हाई अलर्ट पर रहने का निर्देश दिया है। अस्पतालों में ओआरएस, दवाइयों, अतिरिक्त बेड और कूलिंग सुविधाओं की व्यवस्था सुनिश्चित करने को कहा गया है।
अगले 7 दिनों तक तेज हवा के साथ बारिश व वज्रपात का अलर्टटीम एबीएन, रांची। झारखंड में अगले सात दिनों तक मौसम का मिजाज बदला हुआ रहने वाला है। मौसम विभाग के अनुसार, उत्तर-पूर्वी उत्तर प्रदेश और बिहार से जुड़ा चक्रवातीय परिसंचरण अब पूर्वी उत्तर प्रदेश के ऊपर सक्रिय है।इसका असर झारखंड के कई जिलों में देखने को मिल रहा है. राज्य में बारिश, तेज हवा और वज्रपात की संभावना बनी हुई है।पिछले 24 घंटों के दौरान राज्य के कई हिस्सों में हल्की से मध्यम बारिश दर्ज की गई। सबसे अधिक 50.3 मिमी बारिश सिमडेगा जिले के ठेठईटांगर में रिकॉर्ड की गई। वहीं बानो में 30.6 मिमी, नामकुम में 7.7 मिमी, रामगढ़ में 4.6 मिमी और जमशेदपुर में 1.0 मिमी वर्षा हुई।तापमान की बात करें तो सबसे अधिक तापमान डालटनगंज और सरायकेला में 41 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। चाईबासा का तापमान 40.4 डिग्री सेल्सियस पहुंच गया। वहीं खूंटी में 37.1 डिग्री और लोहरदगा में 38 डिग्री सेल्सियस तापमान रिकॉर्ड किया गया। राज्य का सबसे कम न्यूनतम तापमान गुमला में 21.7 डिग्री सेल्सियस रहा। मौसम विभाग ने कई जिलों के लिए ऑरेंज और येलो अलर्ट जारी किया है। ऑरेंज अलर्ट वाले इलाकों में 50 से 60 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवा चलने और वज्रपात की संभावना जताई गई है।20 मई को बोकारो और धनबाद में ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है। वहीं 23 मई को बोकारो, धनबाद, कोडरमा, हजारीबाग, रामगढ़, रांची और चतरा में तेज हवा और वज्रपात की चेतावनी दी गई है।19 मई को हजारीबाग और कोडरमा को छोड़कर राज्य के अधिकांश जिलों में येलो अलर्ट रहेगा। इनमें रांची, खूंटी, गुमला, लोहरदगा, सिमडेगा, पूर्वी सिंहभूम, पश्चिमी सिंहभूम, सरायकेला, देवघर, दुमका, गिरिडीह, गोड्डा, जामतारा, पाकुड़ और साहिबगंज शामिल हैं।20 मई को रांची, लोहरदगा, गुमला, खूंटी, सिमडेगा, जमशेदपुर और चाईबासा में येलो अलर्ट जारी किया गया है। वहीं 23 मई को लोहरदगा, गुमला, खूंटी, पलामू, गढ़वा और लातेहार में भी मौसम खराब रहने की संभावना है।रांची और आसपास के इलाकों में 19 मई से 25 मई तक आंशिक बादल छाए रहने, गरज के साथ बारिश और तेज हवा चलने का अनुमान है। मौसम विभाग ने लोगों से खराब मौसम के दौरान खुले मैदान, पेड़ और बिजली के खंभों से दूर रहने की अपील की है।
झारखंड में 17-18 मई को तेज आंधी के साथ होगी बारिश, अलर्ट जारी टीम एबीएन, रांची। झारखंड में मौसम इन दिनों अजीब करवट ले रहा है। दिन चढ़ते ही तेज धूप और गर्मी लोगों को परेशान कर रही है, तो वहीं दोपहर बाद कई इलाकों में आंधी और बारिश से मौसम अचानक बदल जा रहा है। आलम यह है कि रात में तापमान गिरने से थोड़ी राहत मिल रही है, लेकिन सुबह होते ही फिर गर्मी अपना असर दिखाती है। राज्य के लगभग सभी जिलों में अधिकतम तापमान 31 डिग्री सेल्सियस के पार पहुंच चुका है। सबसे ज्यादा गर्मी मेदिनीनगर में दर्ज की गयी, जहां पारा 44 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया। राजधानी रांची का अधिकतम तापमान 34.5 डिग्री सेल्सियस रहा। जमशेदपुर में 36 डिग्री, बोकारो में 36.5 डिग्री और चाईबासा में भी 36.5 डिग्री सेल्सियस तापमान रिकॉर्ड किया गया। वहीं रांची का न्यूनतम तापमान 19.2 डिग्री सेल्सियस दर्ज हुआ। 15 और 16 मई को इन जिलों में येलो अलर्ट मौसम विभाग के मुताबिक 15 मई को राज्य के उत्तर-पश्चिमी और उससे सटे उत्तरी हिस्सों को छोड़कर बाकी इलाकों में मौसम बदला रह सकता है। कई जगहों पर आंशिक रूप से बादल छाये रहने, हल्की से मध्यम बारिश और गरज-चमक के साथ बारिश होने की संभावना है। 16 मई को भी मौसम का यही मिजाज बने रहने के आसार हैं।हालांकि पलामू और गढ़वा को छोड़कर बाकी जिलों में बारिश और तेज हवा का असर देखने को मिल सकता है। मौसम विभाग ने पलामू और गढ़वा को छोड़कर लगभग पूरे झारखंड के लिए 15 और 16 मई को येलो अलर्ट जारी किया है। लोगों से खराब मौसम के दौरान सतर्क रहने की अपील की गयी है। 17 मई को इन जिलों में तेज आंधी का खतरा 17 मई को झारखंड में मौसम और ज्यादा आक्रामक तेवर दिखा सकता है। मौसम विभाग के अनुसार राज्य के उत्तर-पूर्वी और उससे सटे मध्य भागों में तेज आंधी-तूफान के साथ मौसम बिगड़ने की आशंका है। धनबाद, कोडरमा, हजारीबाग, बोकारो, रामगढ़ और रांची में 50 से 60 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चल सकती हैं। वहीं राज्य के दक्षिणी और उससे सटे मध्य हिस्सों में भी मौसम का असर देखने को मिलेगा। गुमला और खूंटी में गरज-चमक के साथ बारिश और 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवा चलने की संभावना जताई गई है।
टीम एबीएन, रांची। झारखंड के मौसम में बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। अगले कुछ दिनों तक राज्य के कई हिस्सों में गरज चमक के साथ बारिश और ओलावृष्टि की संभावना जतायी गयी है। पिछले 24 घंटों के दौरान राज्य के कई इलाकों में हल्की से मध्यम बारिश हुई। बोकारो जिले के तेनुघाट में सबसे अधिक 22.4 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गयी। इसके अलावा सिमडेगा में 18.4 मिलीमीटर, गुमला में 14 मिलीमीटर और गिरिडीह में 2.4 मिलीमीटर वर्षा हुई। खूंटी जिले में ओलावृष्टि भी देखी गयी। तापमान की बात करें तो डाल्टनगंज में अधिकतम तापमान 38.5 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जबकि रांची में न्यूनतम तापमान 16.6 डिग्री सेल्सियस रहा। मौसम विभाग ने 5 मई के लिए रांची, खूंटी, रामगढ़, बोकारो और धनबाद समेत दक्षिण पूर्वी हिस्सों जैसे पूर्वी और पश्चिमी सिंहभूम और सरायकेला खरसावां के लिए आॅरेंज अलर्ट जारी किया है। इन इलाकों में 50 से 60 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से तेज हवाएं चलने, भारी बारिश और ओलावृष्टि की संभावना है। 6 मई से 10 मई तक पूरे झारखंड में गरज, चमक और 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से तेज हवाओं को लेकर येलो अलर्ट प्रभावी रहेगा। रांची और आसपास के इलाकों में 4 मई से 8 मई तक आंशिक रूप से बादल छाए रहेंगे और बीच-बीच में बारिश की संभावना है। इस दौरान अधिकतम तापमान 31 से 33 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 20 से 21 डिग्री सेल्सियस के आसपास रहने का अनुमान है। मौसम विभाग के अनुसार अगले तीन दिनों में अधिकतम तापमान में 2 से 3 डिग्री सेल्सियस की गिरावट हो सकती है, जिससे लोगों को गर्मी से राहत मिलेगी। विभाग ने लोगों से खराब मौसम के दौरान सावधानी बरतने और सुरक्षित स्थानों पर रहने की अपील की है।
झारखंड में मौसम बदलने के बाद भी क्यों लग रही है ज्यादा गर्मी ? डाल्टनगंज में पारा चरम परटीम एबीएन, रांची । झारखंड में गर्मी अब सिर्फ तापमान से नहीं, बल्कि बढ़ती आर्द्रता यानी ह्यूमिडिटी से और ज्यादा परेशान कर रही है। मौसम केंद्र, रांची के ताजा आंकड़ों के मुताबिक राज्य के कई जिलों में नमी का स्तर काफी ऊंचा दर्ज किया गया है, जिससे लोगों को चिपचिपी और उमस भरी गर्मी का सामना करना पड़ रहा है।बोकारो और जमशेदपुर में हाल बेहालसबसे ज्यादा असर बोकारो और जमशेदपुर में देखने को मिल रहा है। बोकारो में अधिकतम आर्द्रता 92% और जमशेदपुर में 91% तक पहुंच गई है। इतनी ज्यादा नमी के कारण यहां तापमान भले ही कुछ जगहों से कम हो, लेकिन लोगों को असल में ज्यादा गर्मी महसूस हो रही है।नहीं सूख रहा पसीनाज्यादा ह्यूमिडिटी की वजह से पसीना सूख नहीं रहा और उमस लगातार बेचैनी बढ़ा रही है। वहीं, चाईबासा में भी आर्द्रता 66% दर्ज की गई है, जिससे यहां भी गर्मी का असर सामान्य से ज्यादा महसूस हो रहा है।राजधानी रांची में 57% और डाल्टनगंज में करीब 59% आर्द्रता दर्ज की गई है, जिससे यहां भी हल्की से मध्यम उमस बनी हुई है।इन जिलों में ज्यादा गर्मी से लोग बेहालपिछले 24 घंटों में राज्य के कई हिस्सों में तापमान सामान्य से ऊपर दर्ज किया गया, जिससे लोगों को भीषण गर्मी का सामना करना पड़ा।सबसे ज्यादा तापमान पलामू के डाल्टनगंज में 44.9 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया, जो राज्य में सबसे अधिक रहा। इसके अलावा चाईबासा में 42.4 डिग्री और रांची में 40.2 डिग्री तापमान दर्ज किया गया। गुमला में भी पारा 40.4 डिग्री तक पहुंच गया, जिससे यह साफ है कि दक्षिणी और मध्य झारखंड के कई इलाके हीट वेव जैसी स्थिति झेल रहे हैं।इन जिलों में सामान्य से ज्यादा तापमानरिपोर्ट के अनुसार, रांची में अधिकतम तापमान सामान्य से 3.5 डिग्री अधिक रहा, जबकि डाल्टनगंज में 4.0 डिग्री की बढ़ोतरी दर्ज की गई। चाईबासा में भी तापमान सामान्य से 4.1 डिग्री ऊपर रहा, जो गर्मी की तीव्रता को दर्शाता है।हालांकि जमशेदपुर में अधिकतम तापमान 37.5 डिग्री रहा, जो सामान्य से थोड़ा कम है। वहीं बोकारो में भी 35.1 डिग्री दर्ज किया गया। लेकिन अधिकांश जिलों में न्यूनतम तापमान भी सामान्य से ऊपर बना हुआ है, जिससे रात में भी गर्मी से राहत नहीं मिल रही।
हाल ए मौसम : हीट वेव की चपेट में झारखंडटीम एबीएन, रांची। झारखंड के कई हिस्सों में भीषण गर्मी का असर जारी है। पिछले 24 घंटों के दौरान कुछ स्थानों पर हल्की बारिश और गरज के साथ छींटे भी दर्ज किए गए हैं, लेकिन इससे गर्मी में खास राहत नहीं मिली है। राज्य में सबसे अधिक तापमान पलामू के डालटनगंज में 43.4 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। वहीं सबसे कम न्यूनतम तापमान गुमला में 17.7 डिग्री सेल्सियस रहा।जमशेदपुर में अधिकतम तापमान 42.4 डिग्री और न्यूनतम 25.6 डिग्री दर्ज किया गया, जहां 0.2 मिमी बारिश भी हुई। चाईबासा में अधिकतम 42.4 और न्यूनतम 25.8 डिग्री, सरायकेला में अधिकतम 42.4 और न्यूनतम 23.0 डिग्री, बोकारो में अधिकतम 42.1 और न्यूनतम 22.1 डिग्री दर्ज किया गया।इसके अलावा पाकुड़ में अधिकतम 41.1 और न्यूनतम 25.4 डिग्री, रांची में अधिकतम 38.6 और न्यूनतम 22.8 डिग्री, खूंटी में अधिकतम 37.8 और न्यूनतम 19.7 डिग्री, लोहरदगा में अधिकतम 37.7 और न्यूनतम 22.0 डिग्री और लातेहार में अधिकतम 34.6 और न्यूनतम 24.0 डिग्री तापमान रिकॉर्ड किया गया।मौसम विभाग ने 22 और 23 अप्रैल को राज्य के उत्तर पूर्वी और मध्य हिस्सों के कुछ जिलों में हीट वेव की चेतावनी जारी की है। इस दौरान बोकारो, धनबाद, जामताड़ा और दुमका जिले प्रभावित हो सकते हैं।मौसम विभाग के अनुसार, 24 अप्रैल से मौसम में बदलाव के संकेत हैं। इस दिन देवघर, धनबाद, दुमका, गिरिडीह, गोड्डा, जामताड़ा, पाकुड़ और साहिबगंज में गर्जन, वज्रपात और 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से तेज हवा चलने की संभावना है।25 अप्रैल को रांची, बोकारो, गुमला, हजारीबाग, खूंटी, कोडरमा, लोहरदगा, रामगढ़ सहित मध्य भाग के जिलों में, साथ ही पूर्वी और पश्चिमी सिंहभूम, सिमडेगा और सरायकेला खरसावां जैसे दक्षिणी जिलों में 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से हवाएं चलने और बारिश होने के आसार हैं। उत्तर पूर्वी जिलों में भी इसका असर देखने को मिलेगा। 26 से 28 अप्रैल के बीच पूरे राज्य में आंशिक रूप से बादल छाये रहेंगे और कई स्थानों पर हल्की से मध्यम बारिश या गरज के साथ छींटे पड़ सकते हैं।राजधानी रांची में 22 और 23 अप्रैल को मौसम शुष्क बना रहेगा और आसमान साफ रहेगा। इस दौरान अधिकतम तापमान 39 से 40 डिग्री सेल्सियस के बीच रहने की संभावना है। हालांकि 25 से 28 अप्रैल के बीच रांची में भी बादल छाने और गर्जन के साथ बारिश होने के संकेत हैं।
विश्व पृथ्वी दिवस (22 अप्रैल) पर विशेष योगेश कुमार गोयल एबीएन एडिटोरियल डेस्क। धरती आज केवल गर्म नहीं हो रही, वह मानो भीतर ही भीतर धधक रही है और यह आग प्राकृतिक नहीं, मानवीय लालसाओं की उपज है। हर साल 22 अप्रैल को मनाया जाने वाला विश्व पृथ्वी दिवस मानव सभ्यता के सामने खड़े उस गहन संकट की चेतावनी है, जिसे हमने स्वयं अपने हाथों से जन्म दिया है। विडंबना है कि जलवायु परिवर्तन पर वैश्विक मंचों (दोहा, कोपेनहेगन, कानकुन) में वर्षों से चिंतन, विमर्श और संकल्पों की पुनरावृत्ति होती रही है किंतु धरातल पर परिवर्तन नगण्य है। विकास की परिभाषा जब केवल आर्थिक वृद्धि, उपभोग और संसाधनों के अधिकतम दोहन तक सीमित हो जाये तो प्रकृति का संतुलन बिगड़ना अपरिहार्य हो जाता है। पिछले कुछ वर्षों में प्रकृति अपने विकराल रूप के माध्यम से लगातार संकेत दे रही है कि संतुलन की सीमा लांघी जा चुकी है। कहीं भीषण सूखा, कहीं अनियंत्रित वर्षा, कहीं असामान्य ठंड और कहीं प्रचंड गर्मी, मौसम अब अनुमान का विषय नहीं रहा। उत्तरी ध्रुव के तापमान में असामान्य वृद्धि और पर्वतीय क्षेत्रों में बढ़ती गर्माहट इस संकट की गंभीरता को और स्पष्ट करती है। विकास के नाम पर हम प्रकृति से भयानक तरीके से जिस तरह का खिलवाड़ कर रहे हैं, उसके परिणामस्वरूप मौसम का मिजाज कब कहां किस कदर बदल जाए, कुछ भी भविष्यवाणी करना मुश्किल होता जा रहा है। ग्लोबल वार्मिंग के चलते दुनियाभर में मौसम का मिजाज किस कदर बदल रहा है, इसका अनुमान इसी से लगाया जा सकता है कि उत्तरी ध्रुव के तापमान में एक-दो नहीं बल्कि करीब 30 डिग्री तक की बढ़ोतरी देखी गयी। मौसम की प्रतिकूलता साल-दर-साल किस कदर बढ़ती जा रही है, यह इसी से समझा जा सकता है कि कहीं भयानक सूखा तो कहीं बेमौसम अत्यधिक वर्षा, कहीं जबरदस्त बर्फबारी तो कहीं कड़ाके की ठंड, कभी-कभार ठंड में गर्मी का अहसास तो कहीं तूफान और कहीं भयानक प्राकृतिक आपदाएं, ये सब प्रकृति के साथ हमारे खिलवाड़ के ही दुष्परिणाम हैं और हमें यह सचेत करने के लिए पर्याप्त हैं कि अगर हम इसी प्रकार प्रकृति के संसाधनों का बुरे तरीके से दोहन करते रहे तो हमारे भविष्य की तस्वीर कैसी होने वाली है। जलवायु परिवर्तन से निपटने के नाम पर वैश्विक चिंता व्यक्त करने से आगे हम शायद कुछ करना ही नहीं चाहते। हम यह समझना ही नहीं चाहते कि पहाड़ों का सीना चीरकर हरे-भरे जंगलों को तबाह कर हम जो कंक्रीट के जंगल विकसित कर रहे हैं, वह वास्तव में विकास नहीं बल्कि विकास के नाम पर हम अपने विनाश का ही मार्ग प्रशस्त कर रहे हैं। पहाड़ों में बढ़ती गर्माहट के चलते हमें अक्सर घने वनों में भयानक आग लगने की खबरें सुनने को मिलती रहती हैं।पहाड़ों की इसी गर्माहट का सीधा असर निचले मैदानी इलाकों पर पड़ता है, जहां का पारा अब हर वर्ष बढ़ता जा रहा है। धरती का तापमान यदि इसी प्रकार साल-दर-साल बढ़ता रहा तो आने वाले वर्षों में हमें इसके गंभीर परिणाम भुगतने को तैयार रहना होगा। हमें यह बखूबी समझ लेना होगा कि जो प्रकृति हमें उपहारस्वरूप शुद्ध हवा, शुद्ध पानी, शुद्ध मिट्टी तथा ढेरों जनोपयोगी चीजें दे रही है, अगर मानवीय क्रियाकलापों द्वारा पैदा किए जा रहे पर्यावरण संकट के चलते प्रकृति कुपित होती है तो उसे सबकुछ नष्ट कर डालने में पलभर की देर नहीं लगेगी। यह केवल आंकड़ों की कहानी नहीं बल्कि उस असंतुलन की सजीव अभिव्यक्ति है, जिसे हमने तथाकथित विकास के नाम पर जन्म दिया है। वनों की अंधाधुंध कटाई ने न केवल जैव विविधता को संकट में डाला है बल्कि कार्बन संतुलन को भी गंभीर रूप से प्रभावित किया है। परिणामस्वरूप, वायुमंडल में ग्रीनहाउस गैसों की मात्रा खतरनाक स्तर तक पहुंच गई है। सवाल है कि धरती का तापमान बढ़ते जाने के प्रमुख कारण क्या हैं? इसका सबसे अहम कारण है ग्लोबल वार्मिंग, जो तमाम तरह की सुख-सुविधाएं व संसाधन जुटाने के लिए किये जाने वाले मानवीय क्रियाकलापों की ही देन है। पेट्रोल और डीजल आधारित ऊर्जा स्रोतों ने वातावरण में कार्बन डाइआक्साइड का स्तर इतना बढ़ा दिया है कि पृथ्वी की तापीय संतुलन प्रणाली चरमराने लगी है। विशेषज्ञों का अनुमान है कि वातावरण में पहले की अपेक्षा 30 फीसदी ज्यादा कार्बन डाईआॅक्साइड मौजूद है, जिसकी मौसम का मिजाज बिगाड़ने में अहम भूमिका है। पेड़-पौधे कार्बन डाईआॅक्साइड को अवशोषित कर पर्यावरण संतुलन बनाने में अहम भूमिका निभाते हैं लेकिन पिछले कुछ दशकों में वन क्षेत्रों को बड़े पैमाने पर कंक्रीट के जंगलों में तब्दील किया जाता रहा है। धरती के बढ़ते तापमान का प्रभाव अब केवल पर्यावरण तक सीमित नहीं रहा बल्कि यह मानव अस्तित्व के लिए भी चुनौती बन चुका है। ध्रुवीय क्षेत्रों में तेजी से पिघलती बर्फ समुद्र के जलस्तर को बढ़ा रही है, जिससे विश्व के कई तटीय शहरों के डूबने का खतरा मंडरा रहा है। आने वाले दशकों में तापमान में संभावित 4-5 डिग्री की वृद्धि न केवल जंगलों में आग की घटनाओं को बढ़ाएगी बल्कि विशाल भूभाग को सूखे और मरुस्थलीकरण की ओर धकेल देगी।यह परिदृश्य कोई भविष्यवाणी नहीं बल्कि वर्तमान संकेतों का तार्किक विस्तार है। इस संकट के मूल में केवल औद्योगिक गतिविधियां ही नहीं, अनियंत्रित जनसंख्या वृद्धि और उपभोगवादी जीवनशैली भी प्रमुख कारण हैं। बढ़ती आबादी की आवश्यकताओं ने प्राकृतिक संसाधनों पर असहनीय दबाव डाला है। पृथ्वी का क्षेत्रफल सीमित है लेकिन मानव की इच्छाएं असीमित। यही असंतुलन आज वैश्विक पर्यावरणीय संकट का मूल कारण बन चुका है। प्रसिद्ध भौतिक विज्ञानी स्टीफन हॉकिंग की चेतावनी कि यदि यही प्रवृत्ति जारी रही तो पृथ्वी भविष्य में आग का गोला बन सकती है, केवल एक वैज्ञानिक टिप्पणी नहीं बल्कि गंभीर भविष्यसूचक संकेत है। अब प्रश्न यह नहीं कि संकट है या नहीं बल्कि यह है कि क्या हम इसे स्वीकार कर समाधान की दिशा में ठोस कदम उठाने को तैयार हैं? पृथ्वी दिवस हमें केवल जागरूकता का संदेश नहीं देता बल्कि आत्ममंथन का अवसर भी प्रदान करता है। आवश्यकता इस बात की है कि विकास की अवधारणा को पुनर्परिभाषित किया जाये, जहां आर्थिक उन्नति के साथ पर्यावरणीय संतुलन को भी समान महत्व मिले।नवीकरणीय ऊर्जा, वनीकरण, जल संरक्षण और सतत विकास की नीतियां अब विकल्प नहीं, अनिवार्यता बन चुकी हैं। यदि हम अब भी नहीं चेते तो आने वाली पीढ़ियां हमें उस पीढ़ी के रूप में याद करेंगी, जिसने अपनी सुविधाओं के लिए पूरी पृथ्वी को संकट में डाल दिया। धरती हमारी विरासत नहीं बल्कि आने वाली पीढ़ियों से लिया गया उधार है और इस उधार को सुरक्षित लौटाना हमारी नैतिक जिम्मेदारी है। (लेखक, स्वतंत्र टिप्पणीकार हैं।)
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