टीम एबीएन, रांची। झारखंड में मौसम का मिजाज बदलने वाला है। रांची के मौसम वैज्ञानिक अभिषेक आनंद के अनुसार राज्य के कई जिलों में छह मार्च को बादल छाये रहेंगे। इतना ही नहीं सात और आठ मार्च को बारिश की भी संभावना है। शेष दिनों में मौसम में बड़े बदलाव की संभावना नहीं है। आने वाले दिनों में अधिकतम तापमान में बदलाव की कोई संभावना नहीं है।विभाग के अनुसार सबसे अधिक तापमान 36.0 डिग्री सेल्सियस जमशेदपुर में दर्ज किया गया। यह सामान्य से 2.4 डिग्री सेल्सियस अधिक है। न्यूनतम तापमान 13.0 डिग्री सेल्सियस सिमडेगा केवीके में दर्ज किया गया। छह मार्च को राज्य के दक्षिण, पश्चिमी और निकटवर्ती मध्य भागों में कहीं-कहीं आंशिक बादल छाये रहेंगे। इसका असर पूर्वी सिंहभूम, पश्चिम सिंहभूम, सिमडेगा, सरायकेला-खरसावां, कोडरमा, लातेहार, लोहरदगा में देखने को मिलेगा।सात मार्च को राज्य के उत्तगर-पश्चिमी, दक्षिण-पश्चिम और निकटवर्ती मध्यक भागों में कहीं-कहीं आंशिक बादल छाये रहेंगे। कहीं-कहीं मेघ गर्जन के साथ हल्की बारिश होने की संभावना है। कुछ जगहों पर वज्रपात की आशंका भी है। इसका असर पलामू, गढ़वा, चतरा, कोडरमा, लातेहार, लोहरदगा, गुमला, खूंटी, हजारीबाग, रांची, पश्चिम सिंहभूम, सिमडेगा आदि जिलों में देखने को मिलेगा। आठ मार्च को राज्य के पश्चिमी और निकटवर्ती मध्य भागों में कहीं-कहीं गर्जन के साथ हल्कीर बारिश होने की संभावना है। इसका असर पलामू, गढ़वा, चतरा, कोडरमा, लातेहार, लोहरदगा, गुमला, खूंटी, हजारीबाग, रांची, पश्चिम सिंहभूम, सिमडेगा आदि जिलों में देखने को मिलेगा।
टीम एबीएन, रांची। झारखंड में मौसम का मिजाज बदल रहा है। धीरे-धीरे ठंड जा रही है और गर्मी दस्तक देने लगी है। फरवरी के महीने में ही लोगों को जून का अहसास होने लगा है। दोपहर में तेज धूप पसीने छुड़ाने लगी है।राज्य में बिना बसंत ऋतु आये, गर्मी के आने और कई जिलों में सामान्य से अधिक तापमान को लेकर मौसम वैज्ञानिक अभिषेक आनंद ने बताया कि राज्य में पिछले वर्ष की तरह ही इस वर्ष भी समय से पहले गर्मी ने दस्तक दे दी है। उन्होंने कहा कि ठंड राज्य से चली गयी है, राज्य के कई जिलों में पारा सामान्य से ऊपर है। उन्होंने कहा कि पिछले वर्ष भी होली से पहले राज्य में लू चलने लगी थी।अभिषेक आनंद ने कहा कि वैश्विक स्तर पर क्लाइमेट चेंज, पश्चिमी विक्षोभ के कमजोर पड़ने और पहाड़ों पर कम बर्फबारी के अलावा अलनीनो का प्रभाव और बरसात के बाद झारखंड में लंबे ड्राई स्पेल ऐसी वजहें है, जिसके कारण गर्मी समय से पहले आ गयी है।उन्होंने कहा कि कभी संयुक्त बिहार के समय में ग्रीष्म कालीन राजधानी रांची, अब 20 वर्ष पहले वाली रांची नहीं रही है। राजधानी बनने के बाद शहर में तेजी से कंस्ट्रक्शन, प्रदूषण, जंगल की सघनता कम होने की वजह से यहां का भी तापमान बढ़ा है।
महंगे दामों वाली सब्जियां किसानों की बढ़ा रही क्रय शक्ति एबीएन सेंट्रल डेस्क। किसानों की इन दिनों हरी पत्तेदार और मिर्च-टमाटर जैसी सब्जियों की पैदावार से मोहभंग होने के साथ ही उन्हें अब महंगी और विदेशी सब्जियों की खेती रास आने लगी है। इन सब्जियों से किसान हजारों रुपए की कमाई आसानी से करने लगे हैं। बड़े-बड़े नगरों एवं महानगरों में इन सब्जियों की मांग बढ़ चुकी है, जिनमें गुच्छी, चेरी टमाटर, जुकीनी, पर्सले, बोक चाय और शतावरी जैसे औषधीय पौधे भी हैं, जिन्हें इन दिनों बाहर से आयात किया जा रहा है। देश के बाजारों में ये सब्जियां 12 सौ से 15 सौ रुपये प्रति किलो बिकने लगी है। चेरी टमाटर की किस्म साधारण टमाटर से कुछ अलग है। पास्ता से लेकर सलाद और कई प्रकार के व्यंजनों में इसका इस्तेमाल किया जा रहा है। छोटी साइज होने के बावजूद चेरी टमाटर 250 से 300 रुपए किग्रा बिक रहा है। इसकी उपज महाराष्ट्र के विभिन्न क्षेत्रों के किसान लेने लगे हैं। पर्सले-विदेशी धनिया के नाम से मशहूर हो रहे अजमोद हरी पत्तेदार सब्जी है। इसका स्वाद धनिया से काफी अलग है और सलाद के रूप में बड़े होटलों में इसका उपयोग किया जा रहा है। बाजार में ये पत्तेदार सब्जी सौ रुपए प्रति किलो बिक रही है। गुच्छी जंगली मशरूम है। इसकी किस्म हिमालय की तलहटी में तैयार की गई। चमत्कारी औषधीय गुणों के कारण देश के हर हिस्से में इसकी मांग बढ़ चुकी है। पहले यह मशरूम प्राकृतिक रूप से उगता था, लेकिन अब वैज्ञानिकों ने इसे नई तकनीक ईजाद कर किसानों को इसके लिए प्रशिक्षित कर दिया है। इसकी कीमत लाखों में है और किसान नई तकनीक के दम पर इसकी खेती कर अच्छा-खासा मुनाफा कमाने लगे हैं। जुकीनी कद्दू वर्गीय सब्जी है। इसका आकार खीरा या तोरई की तरह है। इसका उपयोग वजन घटाने में कारगर साबित हुआ है। बड़े नगरों- महानगरों में जिम जाने व फिटनेस की चिंता रखने वालों की यह पहली पसंद बन चुकी है। बाजार में 150 से 200 रुपये प्रति किलो के भाव से ये बिक रहा है और इसकी डिमांड दिन-प्रतिदिन बढ़ती जा रही है।बोकचाय फाइव स्टार होटल की डिमांड बन चुकी है। यह पत्तेदार सब्जी है और इसे उगाना बहुत आसान है। इसके एक तने की कीमत 115 रुपये के लगभग किसानों को मिल रही है। इसकी खेती भी किसानों के लिए वरदान साबित होने लगी। शतावरी जो एक औषधीय गुणों से भरपूर पौधा है, इसे दूसरे देशों से आयात किया जाता रहा है। यह यहां 1200 से 1500 प्रति किलो की कीमत पर बिकने लगा है। इसकी उपज फिलहाल गंगा के मैदानी और बिहार के पठारी इलाकों में अधिक है लेकिन अब इसकी उपज उत्तर प्रदेश, गुजरात और महाराष्ट्र में भी ली जाने लगी है।
गर्मी ने दे दी दस्तक, फरवरी में ही कई जिलों में सामान्य से 5℃ तक अधिक तापमान!टीम एबीएन, रांची। झारखंड में फरवरी के महीने में ही गर्मी ने दस्तक दे दी है। इस बार सुहावना बसंत ऋतु आया ही नहीं। राज्य में तापमान बढ़ने से फरवरी महीने में ही लोगों को गर्मी का अहसास होने लगा है। रांची में जहां अधिकतम तापमान सामान्य से 4.2℃ ऊपर चला गया है। वहीं, चाईबासा का अधिकतम तापमान सामान्य से 5.7℃, बोकारो का अधिकतम तापमान सामान्य से 5.3℃, डालटनगंज का अधिकतम तापमान सामान्य से 3.9℃ और जमशेदपुर का अधिकतम तापमान सामान्य से 4.2℃ ऊपर पहुंच गया है। चाईबासा जिले को छोड़ बाकी सभी जिलों में न्यूनतम तापमान भी सामान्य से ऊपर हैं।22 फरवरी को रांची का अधिकतम तापमान 32.8℃ रिकॉर्ड किया गया, जबकि न्यूनतम 15.9 डिग्री सेल्सियस। इसके अलावा जमशेदपुर में अधिकतम 35.2 ℃ और न्यूनतम 16.3℃, डाल्टनगंज में अधिकतम 35.5℃ और न्यूनतम 14.2℃ तापमान रिकॉर्ड किया गया।जबकि 23 फरवरी को रांची में अधिकतम 33℃ और न्यूनतम 16.5℃, जमशेदपुर में अधिकतम 37.2 ℃ और न्यूनतम 16℃, डाल्टनगंज में अधिकतम 35.8℃ और न्यूनतम 14.6℃ तापमान रिकॉर्ड किया गया। वहीं बात करें तो 24 फरवरी की तो रांची में अधिकतम 32.7℃ और न्यूनतम 16.4℃, जमशेदपुर में अधिकतम 35.2 ℃ और न्यूनतम 17.7℃ जबकि डाल्टनगंज में अधिकतम 34.4℃ न्यूनतम 15.1℃ तापमान रिकॉर्ड किया गया।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। सीसीएल न सिर्फ कोयला का उत्पादन कर देश की ऊर्जा आवश्यकताओं की पूर्ति करता है बल्कि प्रकृति को बचाने एवं पारिस्थितिक तंत्र को संतुलित रखने की दिशा में भी हमेशा प्रयासरत है। इसी क्रम में सीएसआर के तहत सीसीएल ने घायल जानवरों के बचाव एवं उपचार के लिए 24*7 पशु एम्बुलेंस सह आपातकालीन सेवा वाहन और संक्रमित पेड़ों के उपचार के लिए ट्री एम्बुलेंस की खरीद हेतु क्रमशः 37.4 लाख और 51 लाख रुपये मूल्य के 2 समझौता ज्ञापनों पर हस्ताक्षर किये।
टीम एबीएन, रांची। झारखंड में अब ठंड जा रही है। गर्मी दस्तक देने लगी है। वहीं कई जिलों में मौसम अपना मिजाज बदल रहा है। रांची मौसम विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिक अभिषेक आनंद के मुताबिक आने वाले पांच दिनों में राज्य के तापमान में वृद्धि होगी। यह वृद्धि पांच से छह डिग्री तक हो सकती है। मौसम विभाग के अनुसार हवा के रूख में अब बदलाव हो रहा है। जिसके कारण राज्य में अधिकतम और न्यूनतम तापमान में बढ़ोतरी हो रही है। उत्तर दिशा से आने वाली हवा के साथ पश्चिम की शुष्क और गर्म हवा भी आने लगी है। समय बीतने के साथ पश्चिम की गर्म हवा जोर पकड़ेगी और वातावरण गर्म होगा। झारखंड में अक्टूबर मध्य के बाद से बारिश नहीं हुई है। फिलहाल, बंगाल की खाड़ी में भी बारिश को लेकर सिस्टम बनने के आसार कम है। धरती की सतह सूख रही है। नमी कम हो जाने और गर्म हवा से वातावरण गर्म हो रहा है।
टीम एबीएन, रांची। फरवरी महीना अपने अंतिम पड़ाव पर है। अभी होली का त्योहार आना भी बाकी है। लेकिन इससे पहले ही मौसम ने करवट ले ली है। दिन में गर्मी का एहसास हो रहा है। हालांकि सुबह शाम ठंड अभी बाकी है। मौसम विभाग की माने तो दो से तीन दिनों में पारा ऊपर चढ़ेगा। आगामी कुछ दिनों में मौसम में बदलाव दिख सकता है।रांची मौसम विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिक अभिषेक आनंद ने अनुमान व्यक्त किया है कि देवघर, दुमका, धनबाद और साहिबगंज के तापमान में अगले कुछ दिनों में दो-तीन डिग्री सेल्सियस की गिरावट आयेगी। इसके बाद धीरे-धीरे तापमान में वृद्धि होगी। हालांकि, पिछले कुछ दिनों से रांची और आसपास के जिलों में दोपहर के समय तेज धूप खिलने से गर्मी महसूस होने लगी है। ऐसे में रांची में दिन का तापमान 32 डिग्री तक पहुंचने का अनुमान है। वहीं रात को न्यूनतम तापतान भी 16 से 17 डिग्री पहुंच जायेगा। इसके बाद लोगों को गर्मी का एहसास होने लगेगा।पिछले 24 घंटे की बात करें तो डाल्टनगंज में अधिकतम तापमान 32.1 डिग्री गढ़वा में न्यूनतम तापमान 13.8 रिकॉर्ड किया गया। वहीं कई जिलों में अधिकतम तापमान 30 डिग्री तक पहुंच गया है, जिससे साफ है कि इस बार गर्मी कहर बरपायेगी।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। दिल्ली के कुख्यात प्रदूषण की तुलना में हाल के महीनों में मुंबई के वायु प्रदूषण के बारे में बहुत कुछ सामने आ रहा है। दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने वैश्विक रैंकिंग ट्वीट की है जिसमें मुंबई को दूसरे स्थान पर दिखाया गया है। उन्होंने इस पोस्ट पर कैप्शन लिखा है कि लंबे समय के बाद राष्ट्रीय राजधानी दुनिया के सबसे प्रदूषित शहरों की सूची में नहीं है। हालांकि, यह एक ऐसा दिन था, जब दिल्ली को तेज हवाओं का फायदा मिला था जिसमें ज्यादातर प्रदूषक हवा में उड़ जाते हैं। यह रैंकिंग एक स्विस फर्म ने जारी की थी जो कि आईक्यू एयर नाम से दी जाती है। यह रैंकिंग आम तौर पर बदलती रहती है। जबकि मुंबई की वायु गुणवत्ता वास्तव में खराब हो गई है, आईक्यू एयर का नया डेटा वास्तविक तस्वीर के बारे में अलग और चिंताजनक रुझान दिखा रहा है। एनडीटीवी की एक्सक्लूसिव रिपोर्ट के अनुसार डेटा से पता चलता है कि राष्ट्रीय राजधानी का प्रदूषण स्तर भारत की वित्तीय राजधानी, मुंबई के स्तर से लगातार दोगुना रहा है। यह पीएम 2.5 पॉल्यूटेंट के लेवल पर आधारित है। यह सूक्ष्म और घातक कण (पीएम) मानव शरीर के लिए खतरा बढ़ा सकते हैं। यह कण खुद को फेफड़ों में और अन्य अंगों में गहराई तक एम्बेड कर सकते है।नया डेटा दिखाता है कि कैसे दिल्ली का वायु प्रदूषण स्तर 2022 में मुंबई के हर महीने की तुलना में अधिक रहा है, विशेष रूप से नवंबर-दिसंबर में, जब मुंबई का वायु प्रदूषण पहली बार राष्ट्रीय राजधानी को पार करने के लिए सुर्खियों में आया था और यह हाल के महीनों की बात नहीं है। पिछले चार वर्षों से, दिल्ली का वार्षिक पीएम 2.5 का औसत 95 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर रहा है, जबकि मुंबई का 45 माइक्रोग्राम रहा है।तट पर स्थित महानगर आमतौर पर समुद्री हवा से लाभान्वित होते हैं, जो मुख्य रूप से वाहनों, निर्माण और सड़क की धूल से शहर को प्रदूषण से मुक्त करते हैं। हालांकि, इस सर्दी में, डॉक्टरों ने विशेष रूप से बच्चों में श्वसन संक्रमण के रोगियों में तेजी की सूचना दी है। डेटा से पता चलता है कि नवंबर और दिसंबर में पीएम 2.5 का स्तर पिछले वर्ष की तुलना में 18 प्रतिशत बढ़ा है। सरकार के आंकड़े कथित तौर पर पिछले नवंबर में 60 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि दर्शाते हैं।डेटा, जो स्वच्छ हवा के लिए विश्व स्वास्थ्य संगठन के दिशानिर्देश (नीचे दी गई तालिका) के साथ प्रस्तुत किया गया है, दिखाता है कि दोनों शहर केवल 5 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर की सुरक्षित पीएम 2.5 सीमा से कितने दूर हैं। पिछले नवंबर और दिसंबर के लिए, दिल्ली ने डब्ल्यूएचओ के सुरक्षित वायु गुणवत्ता मानक को लगभग 40 गुना और मुंबई को लगभग 16 गुना पार कर लिया। दोनों ही स्वास्थ्य के लिए बहुत खतरनाक हैं।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। ऋतुराज बसंत इन दिनों पूरे शवाब पर है। एक ओर जहां जंगलों और सड़क के किनारे सूर्ख लाल वन ज्योति (पलाश के फूल) और सेमल के फूल प्राकृतिक सौंदर्य को चार चांद लगा रहे हैं, वहीं दूसरी ओर आम की टहनियों पर खिले आम के मंजर इस बात का एहसास दिला रहे हैं कि इस बार आम की बंपर पैदावार होगी। पेड़ों पर लदे आम के मंजरों को देखकर किसानों के चेहरे भी खिल गये हैं। आम उत्पादक किसानों को भरोसा है कि इस बार आम की भरपूर फसल होगी। तोरपा प्रखंड के किसान उत्पादक फगुवा सिंह कहते हैं कि मौसम अनुकूल रहा और मार्च-अप्रैल में थोड़ी बहुत बारिश हो गई, तो पिछल वर्ष की तुलना में आम की उपज अच्छी होगी। उनका कहना है कि मदमस्त बसंती बयार यदि आंधी में तब्दील हो गई, तो आम के मंजर झड़ जायेंगे। किसानों का कहना है कि लाही और मधुवा रोग का प्रकोप अभी से दिखने लगा है।खूंटी जिले में बीजू आम के साथ ही मालदा, दशहरी सहित अन्य वैरायटी के आम की भरपूर पैदावार होती है। किसान अभी से मंजरों पर दवा का छिड़काव करने लगे हैं। जिला प्रशासन ने बिरसा हरित ग्राम योजना के तहत जिले के छह प्रखंडों खूंटी, तोरपा, कर्रा, रनिया, मुरहू और अड़की प्रखंड के ग्रामीण इलाकों में छह हजार एकड़ से अधिक क्षेत्रफल में आम की बागवानी की है।तोरपा के ही सुंदारी गांव के आम उत्पादक किसान और जिला परिषद के पूर्व सदस्य प्रेमजीत भेंगरा कहते हैं कि झारखंड खासकर खूंटी जिले की जलवायु और भौगोलिक स्थिति आम की फसल के लिए काफी उपयुक्त है। पहाड़ी क्षेत्र होने के कारण यहां उद्यानिक खेती की आपार संभावनाएं हैं। यही कारण है कि इस क्षेत्र के किसान परंपरागत खेती के अलावा आम, ड्रैगन फ्रूट, लीची, अमरूद स्ट्रोबेरी जैसे फलों और सुंगध फूलों की खेती के अलावा लेमनग्रास आदि के उत्पादन में रुचि ले रहे हैं। भेंगरा ने कहा कि आम की फसल में मेहनत और लागत कम होने के कारण किसान इसकी खेती की ओर आकर्षित हो रहे हैं।तोरपा के 3600 किसान कर रहे आम की बागवानी : जिले में कार्यरत स्वयंसेवी संस्था प्रदान के अधिकारी रवि रंजन कुमार बताते हैं कि यहां कि मिट्टी आम ही नहीं, अन्य फलों और फूलों की खेती के लिए काफी अनुकूल है। उन्होंने कहा कि सिर्फ तोरपा प्रखंड में पिछले छह वर्षों में बिरसा हरित ग्राम योजना के तहत बड़े पैमाने पर आम की बागवानी की गई है। तोरपा एक ऐसा प्रखंड है, जिसमें बिरसा हरित ग्राम योजना के अंतर्गत पूरे झारखंड में सबसे अधिक आम बागवानी हुई है। आम बागवानी से 3600 किसान जुड़े हैं। तोरपा में इस वर्ष पांच से छह सौ एकड़ में आम की बागवानी की गयी है।
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