एबीएन सेंट्रल डेस्क। बंगाल और ओडिशा पर साइक्लोन मोचा का खतरा मंडराने लगा है। बंगाल की खाड़ी के दक्षिण-पूर्व में चक्रवाती सर्कुलेशन की स्थिति बनने को मौसम वैज्ञानिक अगले सप्ताह क्षेत्र में चक्रवाती तूफान आने की आशंका तेज होने के रूप में देख रहे हैं।भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) के महानिदेशक मृत्युंजय महापात्रा ने कहा, एक चक्रवाती परिसंचरण की स्थिति निचले और मध्य क्षोभमंडल स्तरों में बंगाल की खाड़ी और दक्षिण-पूर्व में बन रही है। इसके प्रभाव से आठ मई तक उसी क्षेत्र में कम दबाव का क्षेत्र बनने का अनुमान है।उन्होंने कहा कि कम दबाव का क्षेत्र बनने के बाद संभावित चक्रवात के मार्ग और तीव्रता के बारे में जानकारी बाद में उपलब्ध करायी जायेगी। महापात्रा ने कहा कि नौ मई के आसपास बंगाल की खाड़ी के दक्षिण-पूर्व में कम दबाव का क्षेत्र बनने और इसके चक्रवाती तूफान में बदलने की आशंका है।
टीम एबीएन, रांची। पिछले कुछ दिनों से राजधानी समेत पूरे राज्य में आंशिक बादल छाये रहने व बूंदाबांदी से जहां तापमान गिर गया था। वहीं ताजा आंकड़ा बता रहा है कि 10 मई तक पूरे राज्य का आसमान साफ रहेगा और मौसम शुष्क बना रहेगा, जिससे तापमान में 2 से 3 डिग्री तक वृद्धि होगी। फिर से गर्मी का असर बढ़ेगा।पिछले 24 घंटे के मौसम की बात करें तो लोहरदगा के कुछ हिस्सों में सबसे अधिक 18.6 मिमी वर्षा रिकार्ड की गई है। वहीं सबसे अधिक अधिकतम तापमान 36.3 डिग्री गोड्डा का, जबकि सबसे कम न्यूनतम तापमान 21.5 डिग्री रामगढ़ जिले का रिकार्ड किया गया है। मौसम में लगातार हो रहे बदलाव का असर शहर के आम जनजीवन पर भी देखने को मिल रहा है। मौसमी बीमारी मसलन सर्दी, खांसी, जुकाम से पीड़ित लोगों की संख्या अस्पतालों में बढ़ने लगी है। मौसम केंद्र के वरीय विज्ञानी अभिषेक आनंद ने बताया कि मोचा चक्रवात का असर झारखंड में दिखेगा। बंगाल के कुछ हिस्सों में और उत्तर पूर्वी राज्यों में इसका अधिक असर दिखेगा। 7 मई तक चक्रवात की तीव्रता का निर्धारण होने और कम दबाव का क्षेत्र बनने के बाद ही झारखंड में इसका असर होगा।
टीम एबीएन, रांची। झारखंड के किसानों के लिए एक बुरी खबर है। राज्य में दो दिन तक ओलावृष्टि होने की चेतावनी मौसम विभाग ने दी है। मौसम विभाग ने शुक्रवार को इस संबंध में ऑरेंज अलर्ट जारी कर दिया। भारत मौसम विज्ञान विभाग के मौसम केंद्र रांची ने कहा है कि 30 अप्रैल और 1 मई को झारखंड के उत्तरी तथा निकटवर्ती मध्य भागों में कहीं-कहीं ओलावृष्टि हो सकती है। इससे किसानों की फसल को नुकसान हो सकता है। कहा गया है कि सरसों, फल एवं सब्जियों, दलहनी फसल को नुकसान हो सकता है। मवेशियों को भी नुकसान हो सकता है। इसलिए किसानों से सतर्कता बरतने के लिए कहा गया है। मौसम केंद्र रांची के मुताबिक, खेतों में जलभराव के कारण सरसों की फसलें झुक सकती हैं। उसकी जड़ की वृद्धि बाधित हो जायेगी। तना सड़ जायेगा और अल्टरनेरिया ब्लाइट जैसी बीमारियां हो सकती हैं। ओलावृष्टि की वजह से सरसों की फली गिर जायेगी। इसलिए किसानों को अपनी फसल की समय पर कटाई कर लेनी चाहिए। साथ ही उन्हें सुरक्षित स्थानों पर रखना चाहिए। कृषि क्षेत्र पर ओलावृष्टि का प्रभाव आधारित पूर्वानुमान में कहा गया है कि अगर फली पीली भूरी हो गयी हो, तो उसकी कटाई कर लें।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। देश के कई हिस्सों में पिछले कई महीनों से भीषण गर्मी और हीटवेव का असर देखा जा रहा है। हालांकि बारिश की वजह से फिलहाल मौसम खुशनुमा बना हुआ है। इसी बीच मौसम विभाग ने मंगलवार को एक नई रिपोर्ट जारी की। इसके मुताबिक भारत के ज्यादातर इलाकों में 2060 तक हीटवेव का समय 12 से 18 दिनों तक बढ़ जाएगा।मौसम विभाग की प्रॉसेस एंड प्रेडिक्शन आॅफ हीट एंड कोल्ड वेव इन इंडिया शीर्षक वाली रिपोर्ट में हीटवेव को लेकर कुछ सिफारिशें भी की गईं हैं। इसमें नई बनने वाली बिल्डिंग में वेंटिलेशन की सुविधा, गर्मी से होने वाले तनाव के बारे में जागरूकता बढ़ाना, काम के समय में बदलाव, पहले अलर्ट जारी करना और ठंडे आश्रय स्थलों का निर्माण पर जोर देने की बात कही गई है। क्या है हीटवेव क्लाइमेटोलॉजी आईएमडी ने अपनी रिपोर्ट ने ट्रॉपिकल साइक्लोन के अपवाद के साथ अन्य खतरों की तुलना में अधिक हीटवेव का दावा किया है। इसने हीटवेव क्लाइमेटोलॉजी को जानने के लिए साल 1961 से 2020 तक के डेटा का प्रयोग किया गया है। कब जारी होता है हीटवेव का अलर्ट दरअसल आईएमडी हीटवेव का अलर्ट जब जारी करता है, जब अधिकतम तापमान सामान्य से 4.5 डिग्री अधिक और 40 डिग्री से ऊपर होता है। वहीं भीषण गर्मी का अलर्ट तब जारी किया जाता है जब तापमान सामान्य से 6.5 डिग्री ज्यादा और 40 डिग्री से ऊपर होता है। बता दें कि हीटवेव आमतौर पर सेंट्रल और नॉर्थ-वेस्ट इंडिया (हीटवेव जोन) और आंध्र प्रदेश और उड़ीसा के तटीय क्षेत्रों में मार्च से जून के समय में होता है। 30 साल में तीन दिन बढ़ा हीटवेव देश का नॉर्थ एरिया, तटीय आंध्र प्रदेश और उड़ीसा में औसतन दो से अधिक हीटवेव दर्ज की जाती है। वहीं कुछ इलाकों में तो हीटवेव चार से भी ज्यादा हो जाती है। एक साल में औसतन दो से तीन लू चलती हैं। पिछले 30 साल में हीटवेव के समय में तीन दिन बढ़े हैं।कई इलाकों में 18 दिन बढ़ जायेगा हीटवेव रिपोर्ट के मुताबिक भविष्य में हर साल हीटवेव का समय दो दिन बढ़ेगा। इसका मतलब 2060 तक 12 से 18 हीटवेव के दिन बढ़ जायेंगे। सेंट्रल और नॉर्थ-वेस्ट इंडिया और आंध्र प्रदेश के तटीय इलाकों में सबसे लंबी गर्मी की लहर 10 दिनों से अधिक रहती है। वहीं भारत के नॉर्थ-वेस्ट में सबसे लंबा समय 15 दिनों से भी अधिक हो गया है। रिपोर्ट में पाया गया कि सेंट्रल और नॉर्थ-वेस्ट इंडिया में सबसे लंबी भीषण गर्मी आम तौर पर पांच दिनों तक पड़ती है। रिपोर्ट के मुताबिक 21 वीं सदी के अंत तक वर्तमान जलवायु से 30 गुना गर्मी बढ़ जायेगी।
पृथ्वी दिवस/ 22 अप्रैल पर विशेष डॉ सौरभ मालवीय एबीएन एडिटोरियल डेस्क। पृथ्वी हमारा निवास स्थान है। मनुष्य सहित सभी प्राणी इसी धरती पर जन्म लेते हैं और इसी पर जीवनयापन करते हैं। पृथ्वी हमारे जीवन का आधार है। पृथ्वी से हमें वायु, जल और भोजन प्राप्त होता है। यह कहने में अतिश्योक्ति नहीं है कि पृथ्वी ने मनुष्य व अन्य सभी प्राणियों को जीवन प्रदान किया है। किन्तु मनुष्य ने पृथ्वी को क्या दिया? इस प्रश्न का उत्तर यही है कि मनुष्य ने पृथ्वी को कुछ नहीं दिया, अपितु उसे दूषित किया है। वायु प्रदूषित होकर विषैली हो गई है और जल भी दूषित हो रहा है। स्थिति इतनी भयंकर है कि यमुना सहित अनेक नदियों का जल पीने योग्य नहीं है। केंद्रीय भूजल बोर्ड के एक अध्ययन के अनुसार 25 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के 221 जिलों के कुछ स्थानों का जल आर्सेनिक युक्त पाया गया है। दूषित पेयजल के सेवन से उनके स्वास्थ्य पर बुरा प्रभाव पड़ रहा है। ऐसे क्षेत्रों के लोग दूषित जलजनित रोगों की चपेट में आ जाते हैं। सरकारी आंकड़ों के अनुसार भूजल संकट के कारण देश के लगभग 50 प्रतिशत ग्रामीण परिवारों को आज भी स्वच्छ पेयजल उपलब्ध नहीं है। ऐसे में वे दूषित जल पीने को विवश हैं। देश में लोगों को पर्याप्त जल नहीं मिल पा रहा है। देश में प्रति व्यक्ति पानी की वार्षिक 1700 घन मीटर से कम उपलब्धता है। अंतरिक्ष से लिए गए आंकड़ों के आधार पर देश में पानी की उपलब्धता का पुनर्मूल्यांकन के अध्ययन के आधार पर आशंका व्यक्त की गई है कि वर्ष 2031 के लिए प्रति व्यक्ति पानी की औसत वार्षिक उपलब्धता घटकर 1367 घन मीटर रह जायेगी, जिससे जल संकट और गंभीर हो जायेगा। एक रिपोर्ट के अनुसार देश में कुल वैश्विक जलस्रोत का मात्र 4 प्रतिशत ही उपलब्ध है, जबकि यहां विश्व की कुल वैश्विक जनसंख्या का 18 प्रतिशत भाग निवास करता है। केंद्रीय जल आयोग की एक रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2010 में देश में उपलब्ध कुल जल स्रोतों में से 78 प्रतिशत का उपयोग सिंचाई के लिए किया जा रहा था। जल संकट के कारण वर्ष 2050 तक यह दर घटकर लगभग 68 प्रतिशत रह जायेगी। यह शुभ संकेत नहीं है। उल्लेखनीय है कि देश के लगभग 198 मिलियन हेक्टेयर कृषि योग्य क्षेत्र के लगभग आधे भाग की सिंचाई के साधन उपलब्ध हैं। इसमें से 63 प्रतिशत क्षेत्र में भूमिगत जल से सिंचाई की जाती है, जबकि 24 प्रतिशत क्षेत्र की सिंचाई के लिए नहरों के जल का उपयोग किया जाता है। इसमें 2 प्रतिशत क्षेत्र की सिंचाई तालाब एवं कुंओं के जल से की जाती है तथा 11 प्रतिशत क्षेत्र की सिंचाई के लिए अन्य स्रोत का उपयोग किया जाता है। इससे स्पष्ट हो जाता है कि भारतीय कृषक आज भी सिंचाई के लिए भूमिगत जल पर निर्भर करते हैं। इसलिए भूजल का अत्यधिक दोहन किया जाता है। इससे भूमिगत जलस्तर निरंतर गिरता जा रहा है। जल प्राणियों के जीवन का आधार है। जल के बिना कोई भी प्राणी जीवित नहीं रह सकता। सूखे एवं भूमि का जल स्तर नीचे गिरने के कारण अनेक क्षेत्रों में जल संकट व्याप्त हो गया है। इससे निपटने के लिए जल संरक्षण अति आवश्यक है। भीषण गर्मी के समय देश के प्राय: समस्त क्षेत्रों में विशेषकर ग्रामीण क्षेत्रों में जल की समस्या उत्पन्न हो जाती है। तालाब भी शुष्क हो जाते हैं। कुंओं का जल बहुत नीचे उतर जाता है अथवा वे भी सूख जाते हैं। इसके कारण ग्रामीणों को उपयोग के लिए पर्याप्त जल प्राप्त नहीं होता है। इस समस्या के दृष्टिगत केंद्र सरकार ने अमृत सरोवर योजना प्रारम्भ की है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 24 अप्रैल, 2022 को आजादी के अमृत महोत्सव के उपलक्ष्य में इसका शुभारंभ किया था। इस योजना का उद्देश्य देश के प्रत्येक जिले में कम से कम 75 जलाशयों का विकास एवं कायाकल्प करना है। देशव्यापी इस योजना के अंतर्गत प्रत्येक राज्य के प्रत्येक जिले में 75 से अधिक तालाबों का निर्माण करवाना है। अमृत सरोवर योजना से राज्यों को अनेक प्रकार के लाभ प्राप्त हो सकेंगे। तालाबों का निर्माण होने तथा पुराने तालाबों का जीर्णोद्धार होने से क्षेत्रीय लोगों की जल की समस्या का समाधान हो सकेगा। इससे गर्मी के समय भूजल स्तर को बनाए रखने में सहायता प्राप्त हो सकेगी। इन तालाबों के जल का उपयोग कृषि कार्यों के लिए किया जा सकेगा। इसके अतिरिक्त पशु पालन में भी इस जल का उपयोग हो पाएगा। लावारिस पशुओं एवं पक्षियों को भी पीने के लिए जल उपलब्ध हो सकेगा। इसके अतिरिक्त तालाबों का निर्माण होने से उस स्थान पर सुंदरीकरण होगा। तालाबों के तट पर पीपल, बरगद, नीम, अशोक, सहजन, महुआ, जामुन एवं कटहल आदि के पौधे लगाए जाएंगे। इससे जहां पर्यावरण स्वच्छ होगा तथा हरियाली में वृद्धि होगी, वहीं इससे पर्यटन को भी बढ़ावा मिल सकेगा। इससे ग्रामीण क्षेत्र में अर्थव्यवस्था सुदृढ़ हो सकेगी। इन तालाबों का उपयोग मछली पालन, मखाने एवं सिंघाड़े की खेती में भी किया जा सकेगा। इस योजना के अंतर्गत ग्रामीण क्षेत्रों में 50 हजार से अधिक तालाबों का निर्माण करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। प्रत्येक तालाब एक एकड़ क्षेत्र में होगा, जिसमें 10 हजार घन मीटर पानी की धारण करने की क्षमता होगी। इस बात का विशेष ध्यान रखा जाएगा कि इसमें वर्ष भर जल भरा रहे। इस अमृत सरोवर योजना के माध्यम से ग्रामीण वासियों को मनरेगा योजना के अंतर्गत रोजगार उपलब्ध करवाया जा सकेगा। इससे बेरोजगारों को रोजगार उपलब्ध होगा। विगत दिनों प्रधानमंत्री मोदी अमृत सरोवर योजना के अंतर्गत 11 माह में लगभग 40 हजार तालाबों को विकसित करने की उपलब्धि की सराहना कर चुके हैं। केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने कहा है कि 15 अगस्त 2023 तक 50 हजार अमृत सरोवर बनाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। उल्लेखनीय है कि पर्यावरण संरक्षण के प्रति लोगों को जागरूक करने के लिए प्रत्येक वर्ष 22 अप्रैल को विश्व में पृथ्वी दिवस मनाया जाता है। (लेखक, माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय भोपाल में सहायक प्राध्यापक हैं।)
4 डिग्री सेल्सियस तक कम होगा अधिकतम तापमान टीम एबीएन, रांची। झारखंड में गर्मी का प्रकोप जारी है। राज्य के 24 जिलों में से 17 जिलों में अधिकतम तापमान 40 डिग्री सेल्सियस से अधिक रिकॉर्ड किया गया। वहीं राज्य के पूर्वी भाग संथाल, कोल्हान और पश्चिमी भाग में हीट वेव का प्रकोप ज्यादा दिखा। लेकिन गुरुवार को शाम होते होते राजधानी रांची में भी आसमान में हल्की बारिश और हवा में नमी की वजह से चिलचिलाती गर्मी से राहत मिली है। वहीं पलामू जिले में उत्तरी भाग में शुक्रवार को अगले 03 घंटे के लिए मेघगर्जन और वज्रपात की चेतावनी जारी करते हुए मौसम साफ होने तक सजग और सतर्क रहने की अपील की गयी है। तपिश और हलक सूखा देने वाला गर्मी के बीच रांची मौसम विज्ञान केंद्र ने झारखंडवासियों के लिए गर्मी से राहत की खबर दी है। मौसम केंद्र रांची ने अपने मौसम पूवार्नुमान में 21 अप्रैल को राज्य के एकाध इलाके में हल्की बारिश की संभावना जताई है। वहीं 22 और 23 अप्रैल को राज्य में हल्की बारिश का क्षेत्र बढ़ेगा। अगले चार दिन में हल्की बारिश और आसमान में आंशिक बादल छाए रहने से अधिकतम तापमान में 04 डिग्री सेल्सियस तक कि गिरावट होगी। अधिकतम तापमान में कमी की वजह से लोगों को भीषण गर्मी से राहत मिलने से आसार हैं। इस दौरान कोल्हान और संथाल के इलाके में कुछेक जगहों पर गर्म हवाएं चल सकती हैं। वहीं राज्य के पश्चिमी तथा मध्य भाग के ऊपर बनी टर्फ लाइन और हवा के बिखराव की वजह से मिलने वाली नमी का असर दिखेगा और लोगों को गर्मी से राहत मिलता महसूस होगा। रांची मौसम केंद्र के कार्यकारी निदेशक अभिषेक आनंद ने बताया कि पिछले 24 घंटे में झारखंड में मौसम शुष्क रहा है। सबसे अधिक तापमान 44.7 डिग्री सेल्सियस गोड्डा का रिकॉर्ड किया गया है। वहीं जमशेदपुर का अधिकतम तापमान 44.1 डिग्री सेल्सियस, डाल्टनगंज का अधिकतम तापमान 43.8 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। अप्रैल महीना शुरू होते ही पूरे देश में गर्मी का कहर बरस रहा है। अप्रैल महीने में ही लोगों की हालत खराब होती दिख रही है। वहीं, उत्तर पूर्वी राज्यों में अभी से पारा 40 डिग्री के पार पहुंच चुका है। बिहार-झारखंड के कई जिलों में गर्मी को देखते हुए लू अलर्ट भी जारी कर दिया गया है। झारखंड की बात करें तो राजधानी रांची समेत करीब 19 जिलों में गर्मी रिकॉर्ड तोड़ती दिख रही है। वहीं, मौसम विभाग ने पूवार्नुमान जारी कर बताया कि कुछ दिनों तक राज्य में गर्मी का कहर जारी रहेगा, लेकिन जल्द ही लोगों को गर्मी से राहत मिलने की उम्मीद जतायी जा रही है।झारखंड में गर्मी का हाई अलर्टबता दें कि बीते दिन भी राज्य के अधिकरत जिलों का तापमान 40 डिग्री से अधिक रहा। जमशेदपुर में 44.1 डिग्री के साथ सबसे ज्यादा तापमान दर्ज किया गया। मौसम विभाग के अनुसार 21 अप्रैल से प्रदेशवासियों को राहत मिल सकती है। 21 से 24 अप्रैल तक राज्य के अलग-अलग हिस्सों में झमाझम बारिश की संभावना जतायी जा रही है। इसके साथ ही तेज हवा भी चल सकती है। वहीं, इस खबर से प्रदेशवासियों में खुशी की लहर है और वह बारिश का इंतजार कर रहे हैंं। कब बारिश आये और कब लोगों को इस तपती गर्मी से राहत मिले।लू से रहें सावधानबता दें कि गर्मी को देखते हुए लू से बचने की भी चेतावनी दी जा रही है। इसके लिए ज्यादा से ज्यादा पेय पदार्थ जैसे जूस, लस्सी, छाछ का सेवन करें। जितना हो सके उतना पानी पीयें। घर से निकलने से पहले उचित मात्रा में पानी जरूर पीयें। वहीं धूप में जब भी निकले चेहरा और सर ढककर ही बाहर निकलें। कोशिश करें की हल्के रंग के कपड़े पहनकर ही बाहर निकलें।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। इस वर्ष की फरवरी बीते 122 वर्षों में सबसे गर्म महीना माना गया था, जो वर्ष 1901 के बाद सबसे गर्म महीना था। लेकिन अब हालात और बिगड़ने वाले हैं। मौसम विज्ञान विभाग चेतावनी दे रहा है कि देश के अधिकतर हिस्सों में तापमान 40 डिग्री सेल्सियस पार कर जायेगा, वहीं कुछ जगहों पर पारा 50 पार भी जा सकता है। यह जानकारी गुरुवार को मौसम वैज्ञानिक डॉ एसएन सुनील पांडेय ने दी।उन्होंने बताया कि इसके बाद करने को कुछ खास बाकी नहीं रहेगा, लोग बीमारी नहीं, बल्कि वेट-बल्ब टेंपरेचर की वजह से खत्म होने लगेंगे। शुरुआत हो भी चुकी है, महाराष्ट्र के नवी मुंबई में रविवार दोपहर एक सम्मान समारोह के दौरान हीटवेव से 11 लोगों की जान चली गयी, जबकि एक की हालत गंभीर बताई जा रही है, वेट-बल्ब थ्रेशहोल्ड के चलते हालात बेकाबू हो सकते हैं।क्या है ये टेंपरेचर : अगर थर्मामीटर के बल्ब पर कोई गीला कपड़ा लपेटा जाये तो उसकी रीडिंग कम होने लगती है। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि कपड़ा पारे की गर्मी को सोख लेता है। लेकिन अगर आसपास की हवा नम हो, यानी उसमें पानी की मौजूदगी हो तो कपड़े से पानी के वाष्पीकरण होने की प्रक्रिया काफी धीमी रहेगी इससे थर्मामीटर का पारा वहीं का वहीं बना रहेगा। बिल्कुल यही बात इंसानी शरीर पर भी लागू होती है। अगर शरीर के आसपास मौजूद हवा में नमी हो, तो पसीना सूख नहीं पाता है, इससे तापमान कम नहीं हो पाता है।पसीना निकलना ही काफी नहीं! : उन्होंने कहा कि नहीं, वैसे तो शरीर को ठंडा रखने में पसीना काफी काम करता है लेकिन सिर्फ पसीना निकलने से ही शरीर ठंडा नहीं रहता। वाष्पीकरण के जरिए शरीर से निकली गर्मी को सूखना भी चाहिए। हवा में नमी होने पर पसीना निकलता तो है, लेकिन भाप न बनकर शरीर पर ही बना रहता है। इससे तापमान बढ़ने लगता है, जिससे ऑर्गन फेल होने तक का खतरा रहता है।पारा ऊपर जाने पर क्या होता है : उन्होंने बताया कि हमारे लिए उच्चतम स्वीकार्य वेट-बल्ब टेंपरेचर 35 डिग्री सेल्सियस है। इस मार्कर के ऊपर जाने पर पसीना वाष्पीकृत होने में समस्या आने लगती है, जिससे शरीर का तापमान बढ़ने लगता है और फिर हाइपरथर्मिया की स्थिति भी आ सकती है। यह ऐसे परिस्थिति है, जिसमें शरीर जितनी गर्मी छोड़ सकता है, उससे ज्यादा अवशोषित या पैदा करता है
टीम एबीएन, रांची। झारखंड में एक्सएलआरआई जमशेदपुर के 21वें वीएसएल व कॉरपोरेट प्रोग्राम के 21वें दीक्षांत समारोह का बीते मंगलवार को आयोजन किया गया। इसमें संस्थान में संचालित विभिन्न कोर्सों के कुल 839 विद्यार्थियों को सर्टिफिकेट दिया गया। इस मौके पर मुख्य अतिथि के रूप में टाटा स्टील के सेफ्टी हेल्थ एंड सस्टेनेबिलिटी के पूर्व उपाध्यक्ष संजीव पॉल उपस्थित थे।उन्होंने एक्सलर्स को संबोधित करते हुए कहा कि संयुक्त राष्ट्र के इंटर-गवर्नमेंटल पैनल फॉर क्लाइमेट चेंज ने जलवायु परिवर्तन को लेकर अपनी नयी रिपोर्ट जारी की है, जिसके अनुसार 2030 तक धरती के तापमान में 1.5 डिग्री सेल्सियस तक बढ़ने का अनुमान है। इससे भारत समेत पूरी दुनिया पर बुरा प्रभाव पड़ेगा। उन्होंने कहा कि आज हम 8 बिलियन पर हैं और हमें संदेह है कि जीवन प्रत्याशा दर के मामले में यह 2040 तक जल्द ही 10 बिलियन हो जायेगा। इससे धरती पर संसाधनों पर जबरदस्त दबाव पड़ रहा है। हर किसी को क्लाइमेट चेंज के प्रति सजग रहने व इसमें अपनी जवाबदेही निभाने का आह्वान किया।संजीव पॉल ने इस अवसर पर एक्सएलआरआइ के डायरेक्टर फादर एस जॉर्ज ने एक्सएलआरआइ के विजन व मिशन से अवगत कराया। उन्होंने कहा कि आम तौर पर कोविड के बाद वर्चुअल लर्निंग चलन में आया, लेकिन एक्सएलआरआइ में पिछले 21 वर्षों से वर्चुअल लर्निंग के जरिए विद्यार्थियों को मैनेजमेंट की शिक्षा दी जा रही है। इस दौरान 11 अक्टूबर, 2023 से 10 अक्टूबर, 2024 के बीच एक्सएलआरआई द्वारा प्लेटिनम जुबली समारोह की भी घोषणा की गई। इस अवसर पर अलग-अलग कोर्स के टॉपर विद्यार्थियों को मेडल व सर्टिफिकेट दिया गया।
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