Breaking
ताज़ा समाचार लोड हो रहा है...

वन और पर्यावरण

View All
150 किमी की रफ्तार से आगे बढ़ रहा बिपरजॉय, गुजरात में लैंडफाल शुरू
Published / 2023-06-15 21:56:20
150 किमी की रफ्तार से आगे बढ़ रहा बिपरजॉय, गुजरात में लैंडफाल शुरू

एबीएन सेंट्रल डेस्क। बिपरजॉय गुजरात के काफी करीब पहुंच गया है। आईएमडी ने इससे होने वाली तबाही को लेकर अलर्ट किया है। ऐसे में सुरक्षा की सभी तैयारियां पूरी कर ली गयी है। वहीं लोगों सुरक्षित जगहों पर पहुंचाने के लिए निकासी अभियान अभी भी जारी है।140 किमी की रफ्तार से चल सकती हैं हवाएं आईएमडी ने बताया है कि लैंडफॉल के दौरान हवा की रफ्तार 140 किलो मीटर प्रति घंटा तक जा सकती है। तूफान की वजह से गुजरात के कई जिलों में भारी बारिश की आशंका है। मोरबी में भारी बारिश के साथ तेज आंधी गुजरात के मोरबी में चक्रवात बिपरजॉय के प्रभाव से भारी बारिश के साथ तेज आंधी चल रही है। वहीं, द्वारका नगर पालिका के अग्निशमन अधिकारी जितेंद्र कराडिया ने बताया है कि हम मौके पर मौजूद हैं। हम मशीन से पेड़ को हटाने की कोशिश कर रहे हैं। गांव भर से हमें अब तक पेड़ गिरने, मकान की छत गिरने की कई फरियाद मिल चुकी है। हम बचावकार्य में जुटे हैं।

जानें झारखंड में कब होगी मानसून की एंट्री, कब से होगी झमाझम बारिश
Published / 2023-06-15 18:16:17
जानें झारखंड में कब होगी मानसून की एंट्री, कब से होगी झमाझम बारिश

टीम एबीएन, रांची। पिछले कई दिनों से झारखंड भीषण गर्मी की तपिश झेल रहा है। आसमान से बरस रही आग से लोग परेशान हैं। 18 जून तक राज्य के दक्षिणी भागों हीट वेव की संभावना जताई गई है। 15 से 17 जून तक राज्य के दक्षिणी, और उत्तर पश्चिमी भागों में हीट वेव का अलर्ट जारी किया है। इस दौरान तेज लू चलेगी। मौसम विभाग ने लोगों से घरों में रहने की अपील की है। झारखंड में गर्मी को ध्यान में रखते हुए सभी सरकारी और प्राइवेट स्कूल को 17 जून तक के लिए बंद करने का आदेश जारी कर दिया गया है। शिक्षा सचिव रवि कुमार ने आदेश जारी कर कहा है कि झारखंड में गर्मी पड़ने और लू को ध्यान में रखते हुए सभी सरकारी, गैर सरकारी के साथ निजी स्कूलों में भी ङॠ से 8वीं तक की क्लासेस को 17 जून तक बंद कर दिया गया है। जबकि 9वीं-12वीं तक 15 जून से पहले की तरह ही संचालित होंगे।5 दिनों में दस्तक देगा मानसूनवहीं, रांची मौसम विज्ञान केंद्र के प्रभारी अभिषेक आनंद की मानें तो अगले 5 दिनों तक राज्य के कुछ इलाकों में गर्जन के साथ हल्की बारिश होने की उम्मीद है। अगले 5 दिनों बाद मानसून की दस्तक झारखंड में होगी। जिससे लोगों को गर्मी से राहत मिल सकती है। वहीं, अगले 5 दिनों बाद मानसून की दस्तक झारखंड में होगी, जिससे लोगों को गर्मी से राहत मिल सकती हैं। वहीं, इससे पहले राज्य में कई हिस्से ऐसे भी हैं, जहां तेज हवा के साथ बारिश भी हो सकती है।पिछले 24 घंटों का हालमाना जा रहा है कि 19-20 जून को झारखंड में मानसून प्रवेश कर सकता है। मौसम विभाग के अनुसार मानसून का नार्दर्न लिमिट आफ मानसून देश में रत्नागिरी, कोटपाल, पुत्तापरथी, श्री हरिकोटा, मालदा, फारबिसगंज से होकर गुजर रहा है। वहीं, पिछले 24 घंटों में तापमान की बात की जाए तो कई इलाकों में गर्म हवाओं ने लोगों को काफी परेशान किया है। गोड्डा, देवघर, पलामू और जमशेदपुर में गर्म हवाओं का दौर जारी है। गोड्डा में सबसे अधिक 44.7 डिग्री सेल्सियस तापमान दर्ज किया गया। वहीं, रांची का तापमान 39.4 डिग्री सेल्सियस रहा। जमशेदपुर में 42.2 डिग्री सेल्सियस रहा।

बिपरजॉय गंभीर चक्रवाती तूफान, कर सकता है भारी नुकसान
Published / 2023-06-15 13:06:01
बिपरजॉय गंभीर चक्रवाती तूफान, कर सकता है भारी नुकसान

भारतीय मौसम विभाग ने जारी की चेतावनीएबीएन सेंट्रल डेस्क। अरब सागर पर बने चक्रवाती तूफान बिपरजॉय को लेकर तटीय राज्यों की सरकारें हाईअलर्ट पर हैं। भीषण चक्रवाती तूफान बिपरजॉय गुरुवार शाम सौराष्ट्र और कच्छ के तटों से टकरायेगा। इंडिया मेट्रोलॉजिकल डिपार्टमेंट ने चेतावनी जारी करते हुए कहा है कि अगले कुछ घंटों के भीतर बिपरजॉय पूर्व मध्य और दक्षिण-पूर्व अरब सागर के ऊपर गंभीर चक्रवाती तूफान में तब्दील हो जायेगा। यह कुछ समय के लिए उत्तर दिशा में आगे बढ़ना जारी रखेगा और फिर उत्तर उत्तर पश्चिम की दिशा में मुड़ जायेगा। मौसम विभाग के महानिदेशक डॉ मृत्युंजय महापात्रा ने बताया कि बिपरजॉय बहुत ही गंभीर चक्रवाती तूफान है, यह भारी नुकसान करने की क्षमता रखता है। इसकी वजह से कच्छ में 2-3 मीटर ऊंची ज्वारीय लहरों के साथ पोरबंदर और द्वारका जिलों में तेज हवाओं के साथ अत्यधिक भारी बारिश होने की उम्मीद है। बिपरजॉय गुरुवार सुबह 05:30 बजे पूर्वोत्तर अरब सागर के ऊपर जखाऊ बंदरगाह (गुजरात) से लगभग 180 किमी पश्चिम-दक्षिण पश्चिम में है और तेजी से आगे बढ़ रहा है। गुरुवार शाम तक यह जखाऊ बंदरगाह के पास मांडवी और सौराष्ट्र-कच्छ एवं आसपास के तटों को पार करेगा।

गुजरात में भारी बारिश की चेतावनी, रेड अलर्ट जारी
Published / 2023-06-14 21:01:37
गुजरात में भारी बारिश की चेतावनी, रेड अलर्ट जारी

चक्रवाती तूफान बिपरजोय दिखाने लगा है रंग एबीएन सेंट्रल डेस्क। अत्यधिक गंभीर चक्रवाती तूफान बिपरजोय के गुरुवार को गुजरात में दस्तक देने की उम्मीद है, भारत मौसम विज्ञान विभाग ने शुक्रवार तक सौराष्ट्र-कच्छ क्षेत्रों के लिए बारिश की चेतावनी के साथ रेड अलर्ट जारी किया है और मछुआरों को समुद्र में नहीं जाने की सलाह दी है।बिपरजोय के उत्तर पूर्व की ओर बढ़ने और 15 जून की शाम तक जखाऊ पोर्ट के पास मांडवी और कराची के बीच सौराष्ट्र और कच्छ और पाकिस्तान के आसपास के तटों को पार करने की संभावना है। आईएमडी अलर्ट के जवाब में, पश्चिम रेलवे ने एहतियात के तौर पर चक्रवात संभावित क्षेत्रों से गुजरने वाली कम से कम 67 ट्रेनों को रद्द करने का फैसला किया है। रद्द की गई कुछ ट्रेनों में ओखा-राजकोट अनारक्षित स्पेशल, वेरावल-ओखा एक्सप्रेस, राजकोट-ओखा अनारक्षित स्पेशल, भावनगर टर्मिनस-ओखा एक्सप्रेस, अहमदाबाद-वेरावल एक्सप्रेस, पोरबंदर-वेरावल एक्सप्रेस शामिल हैं। रद्दीकरण से प्रभावित यात्री मौजूदा नियमों के अनुसार धनवापसी के पात्र होंगे। भारतीय तटरक्षक बल भी गुजरात के तट पर सक्रिय रूप से गश्त कर रहा है। बिपरजोय वर्तमान में पोरबंदर और देवभूमि द्वारका के दक्षिण पश्चिम में स्थित है। इसके गुरुवार शाम को अत्यधिक गंभीर चक्रवाती तूफान के रूप में जखाऊ बंदरगाह के पास से गुजरने की उम्मीद है। केंद्रीय मंत्री पुरुषोत्तम रूपाला ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने व्यवस्थाओं का जायजा लिया और अधिकारियों को सतर्क रहने और सभी जरूरी कदम उठाने का निर्देश दिया।गुजरात के जूनागढ़ में, तटीय क्षेत्रों के निवासियों को आश्रयों में स्थानांतरित किया जा रहा था। इस बीच, गुजरात के द्वारका में 400 से अधिक आश्रय गृहों की पहचान की गई और लोगों को आश्रय गृहों में स्थानांतरित किया जा रहा है।

चक्रवाती तूफान बिपोजॉय का भारत में गंभीर असर दिखना शुरू, कई राज्यों में अलर्ट
Published / 2023-06-10 12:03:15
चक्रवाती तूफान बिपोजॉय का भारत में गंभीर असर दिखना शुरू, कई राज्यों में अलर्ट

एबीएन सेंट्रल डेस्क। भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) ने चेतावनी देते हुए बेहद गंभीर चक्रवाती तूफान बिपरजोय के अगले चौबीस घंटों में और तेज होने की आशंका जतायी। भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) ने शनिवार को कहा कि बेहद गंभीर चक्रवाती तूफान बिपरजॉय के अगले चौबीस घंटों में और तेज होने की उम्मीद है और यह उत्तर-उत्तरपूर्व की ओर बढ़ेगा।आईएमडी ने एक ट्वीट में कहा, 9 जून को 2330 बजे आईएसटी पर 16.0उ और लंबे 67.4पू के पास पूर्व-मध्य अरब सागर पर बहुत गंभीर चक्रवाती तूफान बिपरजोय। अगले 24 घंटों के दौरान उत्तर-उत्तर-पूर्व की ओर बढ़ने और आगे बढ़ने की संभावना है। चक्रवात बिपरजोय की प्रत्याशा में अरब सागर तट पर वलसाड में तीथल बीच पर ऊंची लहरें देखी गयी हैं। एहतियात के तौर पर तीथल बीच को 14 जून तक पर्यटकों के लिए बंद कर दिया गया है। हमने मछुआरों को समुद्र में नहीं जाने के लिए कहा और वे सभी वापस आ गये हैं। लोगों को जरूरत पड़ने पर समुद्र के किनारे स्थित गांव में स्थानांतरित कर दिया जायेगा। उनके लिए आश्रय बनाये गये हैं। हमने 14 जून तक पर्यटकों के लिए तिथल बीच को बंद कर दिया है।इन राज्यों में येलो अलर्ट जारीइससे पहले, अगले 36 घंटों में चक्रवात बिपारजॉय के तेज होने के पूर्वानुमान के साथ, मौसम विभाग ने मछुआरों को भी सलाह दी है कि वे केरल, कर्नाटक और लक्षद्वीप के तट से दूर समुद्र में न जायें। इसके अलावा केरल के तिरुवनंतपुरम, कोल्लम, पठानमथिट्टा, अलाप्पुझा, कोट्टायम, इडुक्की, कोझिकोड और कन्नूर में येलो अलर्ट जारी किया है।

झारखंड : 12 जून से होगी प्री-मानसून बारिश
Published / 2023-06-09 14:27:55
झारखंड : 12 जून से होगी प्री-मानसून बारिश

कल से चढ़ेगा पारा; लू का अलर्टटीम एबीएन, रांची। झारखंड में 12 जून से प्री-मानसून बारिश की शुरुआत हो जायेगी। मौसम विभाग का पूर्वानुमान है कि झारखंड के उत्तरी-पूर्वी और मध्य भाग में स्थित जिलों में हल्के से मध्यम दर्जे की बारिश होगी। विभाग का यह भी कहना है कि शनिवार से राज्य का पारा और 2 डिग्री सेल्सियस चढ़ेगा इसलिए, फिलहाल गर्मी से राहत नहीं मिलेगी। राज्य में मानसूनी बारिश शुरू होने के बाद ही गर्मी से राहत की उम्मीद है।मौसम विभाग (रांची) के मौसम वैज्ञानिक अभिषेक आनंद ने बताया कि 19 जून से झारखंड में मानसून औपचारिक रूप से दस्तक देगा। गुरुवार और शुक्रवार को रांची का अधिकतम तापमान 39 डिग्री दर्ज किया गया लेकिन शनिवार को यह 2 डिग्री बढ़कर 41 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच जायेगा।मौसम विभाग का कहना है कि संताल परगना सहित राज्य के कई हिस्सों में लू चलेगी। गर्म हवाओं की वजह से भी राज्य में दिन के तापमान में इजाफा होगा। तेज धूप और गर्मी लोगों को परेशान करती रहेगी।मौसम वैज्ञानिक अभिषेक आनंद ने बताया कि 19 जून को मानसून झारखंड में दस्तक देगा। कल ही मानसून ने 4 दिन की देरी से केरल में दस्तक दी है और कर्नाटक तक में मानसूनी बारिश शुरू हो गयी है। तमिलनाडु के भी कई इलाकों में शुक्रवार को बारिश हो रही है।आमतौर पर झारखंड में मानसून का प्रवेश 10 जून तक हो जाता है लेकिन इस बार 1 सप्ताह की देरी से दस्तक देगा। मानसूनी बारिश शुरू होने के बाद ही झारखंड में गर्मी, तेज धूप और लू से राहत मिलने की उम्मीद है। इस बीच चिकित्सकों ने लू के बीच राज्यवासियों के लिए कुछ चेतावनी और सलाह दी है।उनका कहना है कि लू के थपेड़े स्ट्रोक और ब्रेन हेमरेज का कारण बन सकते हैं। यदि जरूरी न हो तो दोपहर में बाहर न निकलें। तरल पदार्थ मसलन पानी, शर्बत, जूस, छाछ, नींबू पानी आदि का सेवन करते रहें। बाहर निकलना हो तो पूरे शरीर को ढंकने वाले गर्म कपड़े पहनकर जायें।

गंभीर तूफान में बदला चक्रवात बिपारजॉय
Published / 2023-06-08 14:31:29
गंभीर तूफान में बदला चक्रवात बिपारजॉय

अगले 12 घंटे में गुजरात के तटों पर दिख सकता है असरएबीएन सेंट्रल डेस्क। भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) ने बुधवार को कहा कि चक्रवाती तूफान बिपारजॉय अगले 12 घंटों के दौरान पूर्व-मध्य और आसपास के दक्षिण-पूर्व अरब सागर के ऊपर एक बहुत ही गंभीर चक्रवाती तूफान में बदल जायेगा। आईएमडी ने एक ट्वीट में कहा कि गंभीर चक्रवाती तूफान बिपारजॉय पूर्व-मध्य और आस-पास के दक्षिण-पूर्व अरब सागर के ऊपर पिछले 6 घंटों के दौरान 5 किमी प्रति घंटे की गति के साथ लगभग उत्तर की ओर बढ़ा और, एक बहुत ही गंभीर चक्रवाती तूफान में बदल गया। आईएमडी, अहमदाबाद की निदेशक मनोरमा मोहंती ने मीडिया से कहा कि कहा कि चक्रवात पोरबंदर जिले से लगभग 1,060 किलोमीटर दक्षिण-पश्चिम में केंद्रित है। उन्होंने कहा कि चक्रवात से तटीय जिलों में 40 से 50 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से हवा चलने की संभावना है। तूफान के कारण खराब मौसम और समुद्र की स्थिति अगले तीन-चार दिनों में हवा की गति को 135-145 किमी प्रति घंटे से 160 किमी प्रति घंटे तक ले जा सकती है। मौसम विभाग ने मछुआरों को समुद्र में न जाने की चेतावनी जारी की है। मौसम विभाग ने मछुआरों को 14 जून तक अरब सागर में न जाने की चेतावनी दी गयी है। आईएमडी के एक अधिकारी ने कहा कि चक्रवात से सौराष्ट्र और दक्षिण गुजरात क्षेत्रों में नौ से 11 जून के बीच हल्की बारिश होने की संभावना है।

जीवन का स्रोत पर्यावरण ही है...
Published / 2023-06-04 19:22:54
जीवन का स्रोत पर्यावरण ही है...

गिरीश्वर मिश्र एबीएन एडिटोरियल डेस्क। हमारा पर्यावरण पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु और आकाश इन पंच महाभूतों या तत्वों से निर्मित है। आरम्भ में मनुष्य इनके प्रचंड प्रभाव को देख चकित थे। ऐसे में यदि इनमें देवत्व के दर्शन की परम्परा चल पड़ी तो कोई अजूबा नहीं है। आज भी भारतीय समाज में यह एक स्वीकृत मान्यता के रूप में आज भी प्रचलित है।अग्नि, सूर्य, चंद्र, आकाश, पृथ्वी, और वायु आदि ईश्वर के प्रत्यक्ष तनु या शरीर कहे गए है। अनेकानेक देवी-देवताओं की संकल्पना प्रकृति के उपादानों से की जाती रही है जो आज भी प्रचलित है। शिव पशुपति और पार्थिव हैं तो गणेश गजानन हैं। सीताजी पृथ्वी माता से निकली हैं। द्रौपदी यज्ञ की अग्नि से उपजी याज्ञसेनी हैं। वैसे भी पर्यावरण का हर पहलू हमारे लिए उपयोगी है और जीवन को सम्भव बनाता है। वनस्पतियां हर तरह से लाभकर और जीवनदायी हैं। वृक्ष वायु-संचार के मुख्य आधार हैं। शीशम और सागौन के वृक्ष सिर्फ फर्नीचर के लिए लकड़ी ही नहीं देते बल्कि पर्यावरण को संतुलित रखते हैं। बरगद, पीपल और नीम आदि वातावरण को स्वस्थ बनाते हैं। कई वृक्ष देवताओं के आवास माने जाते हैं तो कई देवस्वरूप मान लिए गए हैं। आयुर्वेद में नाना प्रकार की जीवनदायी औषधियां विभिन्न वृक्षों के पत्तों, फलों, फूलों, जड़ों और छालों से मिलती हैं। इसी तरह विविध प्रकार के अन्न और शाक सब्जी के साथ आम, अमरूद, लीची, केला, संतरा और सेव आदि वृक्षों से मिलने वाले मधुर और सुस्वादु फल बलबर्धक और प्रिय भोज्य हैं। भारतीय पर्यावरण-चिंतन का सबसे विलक्षण पक्ष यह है कि पार्थिव रचनाएं भी हमारे लिए पूज्य हैं। अनेक कुंड, सरोवर, वन और पर्वत पवित्र तीर्थ के रूप में आराधना स्थल के रूप में लोकप्रिय हैं। नदियों में स्नान पुण्यदायी है। माघ पूस की कड़क ठंड में प्रयाग में संगम तट पर लोग कल्पवास करते हैं। मंदिर में प्राण-प्रतिष्ठा के बाद पत्थर और काठ की मूर्तियां सजीव स्वीकार ली जाती हैं।फिर स्नान, पूजन और नैवेद्य आदि के विधि-विधान के साथ उनकी उपासना की जाती है। यह सब न केवल मूर्त रूप अमूर्त तक पहुंचने का माध्यम है बल्कि अपने चतुर्दिक स्थित वातावरण के लिए आदर और सम्मान के भाव का भी सूचक है। इनका आशय यही है कि पर्यावरण कोई निर्जीव वस्तु नहीं है। उसके पोषण की व्यवस्था की गयी और उसे हेठा नहीं देखा गया। वस्तुत: भारतीय सोच में मनुष्य को भी प्रकृति के विभिन्न तत्वों में से एक था और अन्य तत्वों से प्रभावित भी होता था। यत् पिंडे तद् ब्रह्मांडे और सर्वं खल्विदं ब्रह्म कह कर व्यष्टि और समष्टि तथा मनुष्य और प्रकृति के बीच एक अनोखी किस्म की अनिवार्य पारस्परिकता और परस्पर निर्भरता को जीवन का आधार बनाया गया। इस ब्रह्मांड की परिकल्पना में ग्रह नक्षत्र को भी जीवन में स्थान दिया गया। नव ग्रहों का स्मरण और पूजन दैनिक कृत्य का हिस्सा बनाया गया। जीवन का ताना-बाना प्रकृति के संदर्भ में ही आयोजित किए जाने की व्यवस्था बनी जो सृष्टि में सबकी एक दूसरे के सापेक्ष्य सत्ता की पुष्टि करती है। वह जीवों और पदार्थों की असंबद्ध उपस्थिति को नकारती है और पारस्परिकता को प्रतिष्ठित करती है। आज भी जीवन में ज्योतिष के परामर्श पर विशेष ध्यान दिया जाता है। बड़ी संख्या में विवाह आज भी वर और वधू की जन्म-कुंडली मिला कर तय होते हैं। राशि-फल मीडिया में अभी भी लोकप्रिय है। इस प्रसंग में यह तथ्य भी बेहद महत्व का है कि समस्त जगत के पदार्थों की मूल संरचना के स्तर पर गम्भीर समानता पहचानी गई है। मनुष्य का भी निर्माण अन्य पदार्थों जैसा ही है। तुलसीदासजी क्षिति जल पावक गगन समीरा, पंचरचित अति अधम सरीरा कह कर यही स्थापित करते हैं। पर हम हैं जो अपने में इतने खोए रहते हैं कि अपने अस्तित्व-रचना के आधार के रूप में इन भौतिक तत्वों की अनुभूति के लिए तैयार नहीं होते। हम अपने को एक अतिविशिष्ट एक चेतन रचना मानते हैं और शेष को जड़ समझते हैं। पाँच तत्वों में से वायु और उससे बना वातावरण अन्य चार के मुकाबले में जरूर प्रकट महत्व पा सका क्योंकि श्वांस-प्रश्वास तो जीवन का पर्याय है। वह प्राण से जुड़ा होने के कारण जीवन का आधार बन गया और जीव को प्राणी (प्राणयुक्त) कह दिया गया। अग्नि, जल, आकाश और पृथ्वी अपनी उपयोगिता के आधार पर महत्व पाते हैं। जीवित रहने के लिए जरूरी सारे आवश्यक तत्व हमें प्रकृति से ही मिलते हैं। रूप, रस, गंध और स्पर्श की जो संवेदनाएं हमें समृद्ध और सुखी करती हैं उनका स्रोत हमारे पर्यावरण में ही स्थित है। इस तरह हमारी स्थिति अन्य तत्वों के सापेक्ष भी समझी जानी चाहिए। पर हुआ इसके उल्टा और हमने सब कुछ को अपने स्वार्थ के अनुरूप देखना शुरू किया और भ्रमवश स्वयं को सृष्टि का केंद्र मान बैठे। धरती पर मानव के विकास के इतिहास की यात्रा के बीच प्रकृति और पर्यावरण से परे स्वयं को सारी सृष्टि का केंद्र मान बैठना निर्णायक साबित हुआ। अहंकारदीप्त मनुष्य अपने को सर्वश्रेष्ठ प्राणी मान बैठा और स्व (अपने) और अन्य (दूसरे) के बीच दुर्भेद्य रेखा खींच दी। हमने खुद को उपभोक्ता और पर्यावरण को निर्जीव वस्तु मान उपभोग्य बना दिया। फिर निर्लज्जता के साथ युद्धस्तर पर जल, थल, अंतरिक्ष, वन, पर्वत, वनस्पति और खनिज संपदा के दोहन और शोषण में जुट गये। अब दूसरे ग्रहों के शोषण के लिए तजबीज हो रही है। सृष्टि में हस्तक्षेप और उस पर अधिकार जमाने की प्रवृत्ति की कोई सीमा नहीं दिख रही है। यह जरूर है कि पांच तत्वों में विसंगति आने पर हमारे सामने मुश्किल चुनौती खड़ी हो जाती है। विगत इतिहास साक्षी है कि इन तत्वों की अति या न्यूनता के चलते तरह-तरह के कष्ट सहने पड़ते हैं। अतिवृष्टि, अनावृष्टि, ओला पड़ना, धरती की उर्वरा शक्ति का ह्रास, वन में आग, बड़वाग्नि (सुनामी!), बिजली गिरना आदि लगातार हो रहे हैं । सब मिल कर व्यापक जलवायु परिवर्तन को जन्म दे रहे हैं और सारा विश्व आज चिंतित हो रहा है। पृथ्वी का तापक्रम लगातार बढ़ रहा है, ओजोन की परत में छेद हो रहा है।विभिन्न गैसों का उत्सर्जन ग्राह्य सीमा से अधिक हो रहा है, वनस्पतियों की प्रजातियां लुप्त हो रही हैं, ग्लेशियर पिघल रहे हैं, वनों की अंधाधुंध कटाई हो रही, कूड़े-कचरे से धरती और उसके नीचे ही नहीं अंतरिक्ष में भी प्रदूषण बढ रहा है, गंगा जैसी पवित्र नदियां औद्योगिक कचरों और शहरी मल के चलते भयंकर प्रदूषण का शिकार हो रही हैं।एवेरेस्ट पर्वत शिखर भी प्रदूषण की गिरफ्त में है, शहर कंक्रीट के जंगल हो रहे हैं, बड़े पैमाने पर शुद्ध पेय जल की कमी हो रही है तथा आणविक ऊर्जा के उपयोग से जहां बिजली मिल रही है वहीं पर उसके अवशिष्ट कचरे के निस्तारण की स्थायी समस्या खड़ी हो रही है। हमारा पर्यावरण हमारे अपने व्यवहार के चलते जीवन के ही विरुद्ध होता जा रहा है। इस पर विचार के लिए अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर कई बैठकें हो चुकी हैं फिर भी स्पर्धा की राजनीति और उपभोग की संस्कृति के चलते समय पर प्रभावी कदम उठाने में हम पिछड़ रहे हैं। श्रीमद्भगवद्गीता में श्रीकृष्ण अर्जुन को कर्म की व्याख्या करते हुए बताते हैं कि आदि काल में यज्ञ अर्थात् कर्तव्य कर्मों के विधान के साथ प्रजा अर्थात् मनुष्य की रचना हुई (सहयज्ञा: प्रजा: सृषट्वा)। साथ में यह निर्देश भी दिया गया कि कर्तव्य कर्म के द्वारा देवताओं को उन्नत करो और देवता अपने कर्तव्य के द्वारा तुम लोगों को उन्नत करें। एक दूसरे को उन्नत करते हुए तुम लोग परम कल्याण को प्राप्त हो जाओगे । यज्ञ अर्थात् विहित कर्म से पुष्ट हो कर देवता बिना मांगे ही कर्तव्यपालन के आवश्यक संसाधन देते रहेंगे। इस तरह प्राप्त सामग्री को लोक की सेवा में लगाए बिना जो मनुष्य स्वयं उपभोग करता है वह वस्तुत: चोरी करता है।आगे सृष्टि-चक्र को समझाते हुए कहा गया है कि सभी प्राणी या जीव अन्न से उत्पन्न होते हैं (प्राण धारण करने के लिए जो खाया जाता है वह अन्न है)। उसी से शरीर की उत्पत्ति और भरण-पोषण होता है। अन्न या खाद्य पदार्थ जल से पैदा होते हैं और जल का आधार वर्षा है। वर्षा यज्ञ से होती है और यज्ञ कर्तव्य-कर्मों से संपन्न होता है जिसमें त्याग की भावना होती है।निष्काम भाव से किए जाने वाले कार्य ही यज्ञ होते हैं। आगे चल कर कहा गया है कि सर्वव्यापी परमात्मा यज्ञ या कर्तव्य कर्म में स्थित होता है। यही सृष्टि-चक्र का विधान है और जो इसके अनुसार नहीं चलता वह व्यर्थ और पापमय जीवन जीता है। इसलिए अनासक्त हो कर भली-भांति सतत कार्य करना चाहिए। कर्म से संही सिद्धि मिलती है। इसलिए लोक संग्रह को देखते हुए निष्काम भाव से कार्य करना ही सुसंगत है। आज की स्थिति में कर्म निष्काम न हो कर अधिकाधिक उपभोग से प्रेरित हो रहा है। इसकी चपेट में आ कर पर्यावरण को खतरा बढ़ता जा रहा है। उपभोग की प्रवृत्ति लोभ से जुड़ी है जिसे नए किस्म के उपभोग से नहीं सुलझाया जा सकेगा। पर्यावरण के साथ जीवन की डोर बंधी हुई है। उपभोग के विशाल तंत्र से उसे हम दिन-प्रतिदिन कमजोर करते जा रहे हैं। इस दुश्चक्र से निकलने के लिए लोक-संग्रह के भाव से त्यागपूर्वक उपभोग की शैली अपनानी होगी। हम सबका अनुभव है कि त्वचा शरीर का आवरण होती है पर वह शरीर का प्रमुख अंग है। वह शरीर की रक्षा करती है और उसे पोषक आहार भी उपलब्ध कराती है। त्वचा कहीं कट-फट जाय तो खून निकल आता है और संक्रमण का खतरा होता है। त्वचा हमारी शारीरिक सीमा भी है और वह सेतु भी जिससे शरीर से इतर या अन्य के साथ हमारा सम्पर्क स्थापित होता है। हमारा पर्यावरण भी सृष्टि में त्वचा जैसा ही आवरण है, अत्यंत सजीव और बेहद कोमल। उसकी रक्षा से ही जीवन-चक्र निर्बाध चल सकेगा। (लेखक, महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिन्दी विश्वविद्यालय, वर्धा के पूर्व कुलपति हैं।)

झारखंड : अभी 9 जून तक झुलसाती रहेगी गर्मी
Published / 2023-06-04 19:06:48
झारखंड : अभी 9 जून तक झुलसाती रहेगी गर्मी

बढ़ा हीट स्ट्रोक का खतरा, मौसम विभाग ने जारी किया अलर्टटीम एबीएन, रांची। झारखंड में लोग भीषण गर्मी से परेशान हैं। अभी एक सप्ताह तक इस गर्मी से राहत मिलने के आसार नहीं दिख रहे हैं। मौसम विभाग ने भी बुरी खबर ही दी है। मौसम ने 9 जून तक झारखंड के अलग-अलग हिस्सों में लू चलने यानी हीट वेव का येलो अलर्ट जारी किया है। संताल परगना में तो 5 जून से ही लू का कहर दिखने लगेगा। भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) के रांची स्थित मौसम केंद्र ने रविवार को यह चेतावनी जारी की है। मौसम विभाग के पूवार्नुमान पदाधिकारी ने जो चेतावनी जारी की है, उसमें कहा गया है कि 4 जून (सोमवार) को संताल परगना के देवघर, दुमका, गोड्डा, जामताड़ा, पाकुड़ और साहिबगंज के अलावा पड़ोसी जिले गिरिडीह एवं धनबाद में भी कुछ-कुछ जगहों पर लू की स्थिति देखी जा सकती है। इसके बाद अगले 5 दिन तक ऐसी ही स्थिति बनी रह सकती है।  5 और 6 जून को संताल एवं कोल्हान प्रमंडल में चलेगी लू इसी तरह, 5 जून (मंगलवार) को राज्य के पूर्वी हिस्से यानी संताल परगना के सभी 6 जिलों (देवघर, दुमका, गोड्डा, साहिबगंज, पाकुड़ और जामताड़ा) में लू के थपेड़े से लोग परेशान रहेंगे। इसके बाद 6 जून को संताल परगना के साथ-साथ धनबाद, गिरिडीह जिले और कोल्हान के सभी तीन जिलों पश्चिमी सिंहभूम, पूर्वी सिंहभूम एवं सरायकेला खरसावां में लू का असर देखा जायेगा। 6 से 9 जून तक झारखंड में पड़ेगी प्रचंड गर्मी इसके बाद 6 जून से 9 जून तक समूचे झारखंड में प्रचंड गर्मी का अनुभव लोगों को होगा। मौसम विभाग ने इस दौरान लोगों को सावधानी बरतने की भी सलाह दी है।

Newsletter

Subscribe to our website and get the latest updates straight to your inbox.

We do not share your information.

abnnews24

सच तो सामने आकर रहेगा

टीम एबीएन न्यूज़ 24 अपने सभी पाठकों और प्रेरणाश्रोतों का अभिनन्दन करता है। आपके सहयोग और विश्वास के लिए धन्यवाद।

विज्ञापन

© 2026 ABN News 24. All Rights Reserved.

कुल पाठक (Total Visitors): 56,316