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झारखंड : बादलों के डेरा से भीषण गर्मी से राहत
Published / 2024-06-01 20:56:46
झारखंड : बादलों के डेरा से भीषण गर्मी से राहत

टीम एबीएन, रांची। राजधानी के लोगों को भीषण गर्मी से राहत मिली है। शनिवार को रांची का अधिकतम तापमान 38 डिग्री के आसपास रहा। इस दौरान आसपास के कई इलाकों में हल्की बारिश हुई। जहां बारिश नहीं भी हुई तो वहां भी बादल छाये रहे। मौसम विज्ञान केंद्र के मुताबिक अगले दो से तीन घंटे में संताल परगना व गुमला के कुछ इलाकों में बारिश के साथ मध्यम दर्जे की मेघ गर्जन व वज्रपात की संभावना जतायी गयी है। मौसम विभाग का कहना है कि साइक्लोनिक डिप्रेशन का असर अब कमजोर पड़ गया है। हालांकि एक मानसून ट्रफ है, जो कि यूपी और बिहार होते हुए पार हो रहा है। इसका असर राज्य के कई इलाकों में देखने को मिला है। जिसके कारण रांची के आसपास के कई इलाकों में हल्की बारिश हुई। बारिश होने से राजधानी वासियों ने राहत की सांस ली।

समय से पहले देश में मानसून की दस्तक
Published / 2024-05-30 21:17:55
समय से पहले देश में मानसून की दस्तक

केरल में जमकर हो रही बारिशभारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) ने कहा कि दक्षिण-पश्चिम मानसून केरल में दस्तक दे चुका है और आज पूर्वोत्तर भारत के अधिकांश हिस्सों की ओर बढ़ गया है एबीएन सेंट्रल डेस्क। देश के कई राज्यों में भीषण गर्मी ने लोगों का हाल बेहाल कर रखा है। हालांकि, बुधवार को दिल्ली-एनसीआर समेत पूर्वोत्तर के कुछ हिस्सों में बारिश के होने से मौसम ने अचानक से करवट ली। अब दक्षिण पश्चिम मानसून ने गुरुवार को पूर्वानुमान से एक दिन पहले ही केरल और पूर्वोत्तर के कुछ हिस्सों में दस्तक दे दी। किस वजह से जल्दी आया मानसून मौसम वैज्ञानिकों ने कहा कि चक्रवात ने मानसून के प्रवाह को बंगाल की खाड़ी की ओर खींच लिया, जो पूर्वोत्तर में समय से पहले मानसून के दस्तक देने का एक कारण हो सकता है। चक्रवाती तूफान रेमल रविवार को पश्चिम बंगाल और बांग्लादेश के तट से टकराया था। भारत मौसम विज्ञान विभाग ने कहा कि दक्षिण-पश्चिम मानसून केरल में दस्तक दे चुका है और आज यानी 30 मई 2024 को पूर्वोत्तर भारत के अधिकांश हिस्सों की ओर बढ़ गया है। इससे पहले 15 मई को मौसम विभाग ने मानसून के 31 मई को केरल में दस्तक देने की घोषणा की थी। केरल में पिछले कुछ दिनों से भारी बारिश हो रही है, जिसके परिणामस्वरूप मई में अतिरिक्त बारिश दर्ज की गयी है। केरल में मानसून के आगमन की सामान्य तिथि एक जून और अरुणाचल प्रदेश, त्रिपुरा, नगालैंड, मेघालय, मिजोरम, मणिपुर व असम में मानसून के दस्तक देने की तिथि 5 जून है। यहां आज हो सकती है बारिश आईएमडी के लेटेस्ट अपडेट के मुताबिक, 24 घंटों में अंडमान और निकोबार द्वीप समूह, लक्षद्वीप, सिक्किम और पूर्वोत्तर में मध्यम से भारी बारिश होने की संभावना है। इसके अलावा, छत्तीसगढ़, ओडिशा, कर्नाटक के कुछ हिस्सों, तमिलनाडु और गोवा में हल्की बारिश होने का संभावना है। इसके अलावा, राजस्थान के लोगों को भी बारिश के होने से इस भीषण गर्मी से कुछ राहत मिल सकती है। कैसा रहेगा आज दिल्ली का मौसम दिल्ली में गुरुवार को न्यूनतम तापमान 30.4 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। आईएमडी ने दिन में हल्की बारिश होने और धूल भरी आंधी चलने का अनुमान भी जताया है। दिल्ली के प्राथमिक मौसम केंद्र सफदरजंग वेधशाला में बुधवार को अधिकतम तापमान 46.8 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जो 79 वर्षों में सबसे अधिक है। दिल्ली में 17 जून 1945 को तापमान 46.7 डिग्री सेल्सियस था। मौसम विभाग ने आज आंशिक रूप से बादल छाए रहने, लू चलने, धूल भरी आंधी या तूफान आने और तेज हवाओं के साथ बहुत हल्की बारिश होने की संभावना जतायी है।

झारखंड के इन क्षेत्रों में एक जून से मिलेगी राहत, होगी बारिश
Published / 2024-05-30 21:11:46
झारखंड के इन क्षेत्रों में एक जून से मिलेगी राहत, होगी बारिश

टीम एबीएन, रांची। झारखंड की राजधानी रांची के मौसम वैज्ञानिक अभिषेक आनंद ने कहा कि इसी दिन यानी 1 जून को राज्य के उत्तर-पूर्वी और दक्षिणी भागों में कहीं-कहीं गरज और तेज हवाओं के साथ वज्रपात होने की संभावना है। शनिवार एवं रविवार यानी 2 और 3 जून को भी झारखंड के उत्तर-पूर्वी तथा दक्षिणी भागों में कहीं-कहीं गरज के साथ बारिश हो सकती है। इस दौरान तेज हवाएं चलेंगी। कुछ जगहों पर वज्रपात भी हो सकता है। झारखंड के 24 में से 18 जिलों में लोग लू का प्रकोप झेल रहे हैं। इंसानों के साथ-साथ पशु-पक्षियों पर भी इसका असर दिखने लगा है। बृहस्पतिवार (30 मई) को सूबे में 7 लोगों की मौत हो गयी। सबसे ज्यादा 4 लोगों की मौत पलामू में हुई। गिरिडीह में एक बिरहोर की, तो सरायकेला में 2 लोगों की गर्मी से मौत हो गयी। गिरिडीह जिले में सैकड़ों चमगादड़ मर गये हैं।

मानसून के साथ ही शुरू होगा रंग-बरंगी बीमारियों का दौर
Published / 2024-05-29 22:03:27
मानसून के साथ ही शुरू होगा रंग-बरंगी बीमारियों का दौर

कब आ रहा है मानसून : घिर-घिर आयेंगे बदरा, फिर-फिर आयेंगे बदरा, संग में कुछ रोग ला सकते हैं बदरा... पूर्वानुमान के मुताबिक इस साल मानसून 1 जून से भारत में प्रवेश कर सकता है। मानसून की शुरुआत अपने साथ लाती है ढेर सारी बीमारियां और कई तरह के संक्रमण। इस लेख में विस्तार से जानें मानसून के बारे में, मानसून में होने वाले रोगों के बारे में और बरसात में होने वाली बीमारियों से बचाव के उपायों के बारे में... अनिता शर्मा एबीएन हेल्थ डेस्क। मानसून शब्द अरबी शब्द मौसिम से आया है, जिसका अर्थ है मौसम। अक्सर जब लोग मानसून के बारे में सोचते हैं, तो कई दिनों और हफ्तों तक होने वाली भारी बारिश का ख्याल करते हैं। जबकि असल में बरसात जो है वो मानसून का हिस्सा भर है। मानसून महज बरसात से कहीं अलग है। मासनूस अपने आप में हमारे वातावरण की एक पूरी प्रक्रिया या घटना है। ये बिलकुल भी जरूरी नहीं कि मानसून बरसात ही लाए, कई बार ये शुष्क मौसम का कारण बन सकता है। तो मानसून है क्या और ये घटना आखिर घटित कैसे होती है। इसका जवाब है कि मानसून हवा की दिशा में बदलाव के कारण होता है जो मौसम बदलने पर होता है। कम शब्दों में मानसून हवाओं का बदलाव है, जो अक्सर बहुत ज्यादा बरसात वाले मौसम या बहुत शुष्क मौसम का कारण बनता है। हालांकि मानसून आमतौर पर एशिया के कुछ हिस्सों से जुड़ा होता है, यह कई उष्णकटिबंधीय और उपोष्णकटिबंधीय क्षेत्रों में भी हो सकता है- जिसमें संयुक्त राज्य अमेरिका के कई हिस्से भी शामिल हैं। मानसून हवाओं में मौसमी बदलाव के कारण होता है। अब हवाओं में बदलाव क्यों होता है। तो जब मौसम बदलने के कारण जमीन और जल का तापमान बदलता है, तो इसका सीधा असर हवांओं पर होता है और वे हवाएं अपना रुख बदल लेती हैं। इसे ऐसे समझें जब गर्मियों की शुरुआत होती है तो जमीन जल स्रोतों यानी वॉटर बॉडीज से पहले और जल्दी गर्म होती है। और मानसूनी हवाएं हमेशा ठंडी से गर्म की ओर बहती हैं। गर्मियों में जब जमीन ज्यादा गर्म होती है तो ये मानसूनी हवाएं इस क्षेत्र की ओर आती हैं और इधर बरसात करती हैं। मानसून को नक्शे पर समझते हैं अभी तक आपने समझा कि मानसून असल में क्या है। अब नक्शे पर इसका मलबत समझते हैं। मानसून उन हवाओं को कहा जाता है जो हिंद महासागर और अरब सागर की ओर से भारत के दक्षिण-पश्चिम तट पर आती हैं। ये भारत, पाकिस्तान, बांग्लादेश जैसे देशों में भारी वर्षा का कारण बनती हैं। इन्हें मौसमी हवाएं भी कहा जा सकता है। भारत में मानसून कब शुरू होता है जैसा कि हमने आपको बताया हिन्द महासागर एवं अरब सागर की ओर से आनी वाली मौसमी हवाएं मानसून हैं, जिनके साथ दक्षिणी एशिया क्षेत्र में बरसात आती है। भारत में मानसून दक्षिण-पश्चिम तट पर जून माह में आता है। सितंबर तक इसका असर देखने को मिलता है। कुल मिलकार जून से शुरू हुआ इन मौसमी हवाओं का प्रभाव चार महीने तक रहता है। अगर मानसून जून में आता है, तो अप्रैल-मई महीने में बरसात क्यों हुई बीते कुछ सालों से अप्रैल-मई के महीने में भी भारी बरसात देखी जा रही है। मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार इसका कारण क्लाइमेट चेंज है। वहीं वेस्टर्न डिस्टरबेंस  भी इसके पीछे के कारण बने। बीते कुछ सालों से अप्रैल महीने में वेस्टर्न डिस्टरबेंस देखने को मिल रहा है। जिसके चलते ये बिना मानसून की बरसात देखी गई। इस बरसात के पीछे का कारण होती हैं वेस्टर्न डिस्टरबेंस से बनने वाली चक्रवाती हवाएं न कि मौसमी बदलाव। मौसम विभाग द्वारा जारी साल 2024 के माससून को लेकर जारी पूर्वानुमान के मुताबिक इस साल करीब 106 फीसदी बारिश की संभावना है। हालांकि इसमें 5 फीसदी कम ज्यादा हो सकता है। मौसम विभाग के मुताबिक इस साल मानसून 1 जून से भारत में प्रवेश कर सकता है। यह केरल में 1 जून, कर्नाटक, असम, त्रिपुरा और गोवा में 5 जून, तेलंगाना, सिक्किम और महाराष्ट्र में 10 जून, बिहार, झारखंड, ओडिशा, छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश और गुजरात के कुछ हिस्सों में 15 जून के आसपास दस्तकद दे सकता है। वहीं लद्दाख, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश में 20 जून तक प्रवेश कर सकता है। मौसम विभाग के मुताबिक साल 2024 में बेहतर मानसून की संभावना के पीछे अल नीनो प्रभाव है, जो धीरे-धीरे कमजोर हो रही है। इससे अगस्त-सितंबर के बीच ला नीना की स्थिति पैदा हो सकती है, जिसका अर्थ यह लगाया गया है कि इस वजह से बारिश सामान्य से अधिक हो सकती है। क्या है अल-नीनो और ला-नीना देखिये चर्चा जो चला वो कहां तक आ पहुंचा। हमने मानसून जाना, फिर समझा कि मानसून आता कैसे है साल 2024 में मानसून कब आयेगा। इसके साथ ही हमें पता चला कि इस साल ला नीना की स्थिति के चलते बारिश सामान्य से ज्यादा हो सकती है। अब समझते हैं कि ये अल-नीनो और ला-नीना क्या हैं। जैसा कि हमने आपको बताया- मानसून मौसम बदलने से हवा के रूख में होने वाला बदलाव है। आमतौर पर हवाएं भूमध्य रेखा के साथ पश्चिम की ओर बहती हैं, जो समुद्र के गर्म पानी को दक्षिण अमेरिका से एशिया की ओर ले जाती हैं। अब गर्म पानी को ठंडा करने के लिए समुंद्र के नीचे का पानी ऊपरी सतह पर आता है। इससे दो विपरीज जलवायु पैटर्न अल-नीनो और ला-नीना बनते हैं। अल-नीनो क्या है: जब यह हवा मजबूत होती है, तो दक्षिण अमेरिका से ज्यादा गर्म पानी एशिया की तरफ आता है। यह अल-नीनो की स्थिति है। जिससे वातावरण में एक कूलिंग प्रभाव पैदा होता है। ला नीना क्या है : वहीं, जब यह हवाएं कमजोर होती हैं, तो एशिया की लाया जाने वाला गर्म पानी कम मात्रा में इधर आता है। तो समुद्र की गहरायी का ठंडा पानी ऊपर नहीं आता। इससे वातावरण में गर्म प्रभाव पैदा होता है। जिसे ला नीना के नाम से जाना जाता है।ला नीना होने पर ज्यादा बरसात होती है। मानसून के साथ आती हैं मानसूनी बीमारियां हमने आपको मानसून की तो पूरी जानकारी दी। और आपको यह भी पता चला कि मानसून इस बार पूरे जोर पर होगा और बरसात अधिक होने की संभावना है। मानसून सुनते ही ज्यादातर लोग खुशी से झूम उठते हैं। और साल 2024 में गर्मी ने जो बदमाशी की हुई है उसके बाद तो हर कोई मानसून के ही इंतजार में है। लेकिन मानसून की शुरूआत अपने साथ लाती है ढेर सारी बीमारियां और कई तरह के संक्रमण। जो स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरे पैदा कर सकते हैं। लेकिन अच्छी बात यह है कि अगर आप मानसून में कुछ बुनियादी सावधानियां बरतते हैं तो सेहतमंद रह सकते हैं। भारत में मानसून के दौरान होने वाले रोग मुख्यत: तीन तहर से फैलते या होते हैं। पहले मच्छर जनित रोग, दूसरे दूषित पानी, हवा और भोजन से हाने वाले रोग, तीसरे संक्रामक रोग। मच्छर जनित रोग मानसून मच्छरों के पनने के लिए सबसे अच्छा मौसम या वक्त है। और भारत में मच्छर और मच्छर से होने वाले रोग बड़ी समस्या हैं। डेंगू और मलेरिया जैसे रोग भारत में बेहद आम हो जाते हैं मानसून के दौरान। एक अनुमान के अनुसार भारत में हर साल पूरी दुनिया में सामने आए डेंगू के मामलों का 35 फीसदी तो मलेरिया के मामलों का 11 फीसदी होता है। डेंगू: डेंगू का वायरस एडेनोस मच्छर के काटने से फैलता है। भले डेंगू जंगल की आग की तरह फैल रहा है, लेकिन यह संक्रामक बीमारी नहीं है। यह छूने या छींकने से नहीं फैलता है, लेकिन संक्रमित व्यक्ति के आसपास रहने पर सावधान रहना चाहिए। आमतौर पर वायरल सर्दी से अन्य वायरस और कीटाणु शरीर को संक्रमित कर सकते हैं। चिकनगुनिया: चिकनगुनिया का वायरस कुछ दिनों तक बुखार और जोड़ों के दर्द का कारण बनता है जो हफ्तों या महीनों तक रह सकता है। चिकनगुनिया एक वायरल फीवर है जो संक्रमित मच्छरों के काटने से होता है। चिकनगुनिया वायरस इनफेक्टेड मच्छर जब किसी व्यक्ति को काट लेता है तो यह वायरस उस व्यक्ति के शरीर में प्रवेश कर जाता है। चिकनगुनिया के संक्रमण होने पर अचानक बुखार और जोड़ों में दर्द की समस्या हो सकती है। मलेरिया: मलेरिया एक जानलेवा मच्छर जनित रक्त रोग है। लक्षणों में बुखार, ठंड लगना और सिरदर्द शामिल हैं। यह परजीवी संक्रमित मच्छरों के काटने से मनुष्यों में फैलता है। मच्छर जनित रोगों से बचाव के उपाय : जहां मच्छरों का प्रकोप ज्यादा हो वहां आने जाने से बचें। मच्छर से बचने के लिए मच्छरदानी का उपयोग करें। मच्छर या कीड़े भगाने वाली क्रीम का उपयोग करें। घर और उसके आसपास पानी इकट्ठा न होने देंलंबी स्लीव्स की शर्ट और पैंट पहनें। घर के अंदर और बाहर मच्छरों को कंट्रोल करने के लिए जरूरी कदम उठाएं। स्वच्छता बनाए रखें और अपने बाथरूम को नियमित रूप से साफ करेंमच्छरों से खुद के बचाव के लिए मच्छरदानी का इस्तेमाल करें। मच्छर मारने या भगाने वाली दवा का छिड़काव करें। खूब सारा पानी पिएं और खुद को हाइड्रेटेड रखें।  दूषित पानी, हवा और भोजन से हाने वाले रोग हैजा: हैजा भी आंत का ही एक गंभीर संक्रमण है।  हैजा विब्रियो कॉलेरी नाम के जीवाणु से होता है।  यह छोटी आंत में बैक्टीरिया द्वारा के पहुंच जाने पर होता है।  इसमें दस्त, उल्टी हो सकते हैं।  हेपेटाइटिस ए : हेपेटाइटिस ए मानसून में होने वाले वायरल संक्रमणों में से एक है।  यह भी आपके लिवर को प्रभावित करता है।  यह लिवर में भयंकर सूजन का कारण बन सकता है।  टाइफाइड: टाइफाइड बुखार एक बैक्टीरियल इन्फेक्शन है।  यह दूषित पानी या खाने की वजह से होता है।  टाइफाइड में पाचन तंत्र प्रभावित होता है।  यह आंतों के रास्ते को प्रभावित करता है।  यही वहज है इसे आंतों का बुखार भी कहा जाता है।  अगर यह रक्तप्रवाह में फैल जाए तो जानलेवा हो सकता है।  पीलिया : दूषित भोजन और पानी से पीलिया हो सकता है।  पीलिया सबसे आम लिवर डिसआर्डर में से एक है जिसमें हमारे ब्लड फ्लो में बिलीरुबिन का लेवल बढ़ जाता है।  बिलीरुबिन एक पीले रंग का तरल पदार्थ होता है जो की पित्त (बाइल) में पाया जाता है।  यह रेड ब्लड सेल्स के टूटने से और बोन मैरो सेल से बनता है। लेप्टोस्पायरोसिस : मानसून के दौरान गंदे पानी के कारण यह होता है।  इसे वैलस डिजीज के नाम से भी जाना जाता है।  गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल संक्रमण : गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल संक्रमण बैक्टीरिया, वायरल या परजीवी से हो सकता है।  इसके लक्षणों में दस्त, पेट में ऐंठन और मतली शामिल हो सकते हैं।  मानसून में दूषित पानी, हवा और भोजन से हाने वाले रोगों से बचने के उपाय पानी उबाल कर पिएं।  फल और सब्जियों को खाने से पहले अच्छे से धो लें।  खाना ढंककर रखें।  बाजार में बनने वाले भोजन से दूरी बनाएं।  खाना बनाते समय हाथों अच्छी तरह साफ करें।  शौच के बाद हाथों को साबुन से धोएं।  बच्चे का टीकाकरण पूरा करें।  हवा से संचारित होने वाले रोग सर्दी और फ्लू: जैसा कि हमने बताया मानसून हवा में होने वाला मौसमी बदलाव है।  इस दौरान हवा से फैलने वाले कई संक्रमण बढ़ जाते हैं।  जो सर्दी, खांसी, सामान्य फ्लू, वायरल बुखार जैसी समस्याओं का कारण बनते हैं।  इस दौरान कमजोर इम्यूनिटी वाले लोग जैसे बच्चे और बुजुर्ग ज्यादा प्रभावित होते हैं।  इस दौरान सामान्यत: सर्दी और फ्लू और इन्फ्लुएंजा होते हैं।  मानसून में हवा से संचारित होने वाले रोगों से कैसे बचें मास्क लगाकर रखें।  छींकते और खांसते समय मुंह और नाक को ढक लें।  गर्म पानी पिएं।  हाथों को बार बार धोते रहें।  हाथों से चेहरे को छूने से बचें।  प्रभावित लोगों से दूरी बनाएं।  घर की वेंटिलेशन बेहतर करें।  मानसून में खुद को स्वस्थ रखने के लिए अपनाएं ये टिप्स : मानसून के दौरान अपने पेट को आराम दें।  बेहद तलाभुना न खाएं।  अपने आहार को हल्का रखें।  हल्का भोजन खाएं।  मानसून के दौरान संक्रमण बहुत तेजी से फैलता है।  इससे बचने के लिए अपने सब्जियों और फलों को सिरके से धोएं।  बेशक बरसात हो रही है और आपको पसीना कम आ रहा हो, लेकिन मानसून में हमेशा अपने आप को हाइड्रेटेड रखें।  जैसा कि हमने बताया मानसून में मच्छर जनित रोग बहुत फैलते हैं।  ऐसे में मच्छरों से बचने के लिए हर उपाय अपनाएं।  पूरी आस्तीन वाले हल्के कपड़े पहनें।  प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत बनाएं।  इसके लिए संतुलित आहार लें।  साफ, ताजा, धुले हुए फल और सब्जियां खाएं।  तले-भुने, तेल और सोडियम से भरपूर आहार न लें।  डेयरी उत्पादों के सेवन से बचें।

बंगाल की तरफ तेज रफ्तार से बढ़ रहा चक्रवाती तूफान रेमल
Published / 2024-05-25 22:17:41
बंगाल की तरफ तेज रफ्तार से बढ़ रहा चक्रवाती तूफान रेमल

एबीएन सेंट्रल डेस्क। बंगाल की खाड़ी के ऊपर बनी निम्न दबाव प्रणाली चक्रवाती तूफान रेमल में तब्दील हो गया है और इसके रविवार आधी रात को पश्चिम बंगाल के सागर द्वीप तथा बांग्लादेश के खेपुपारा के बीच समुद्र तट से टकराने की आशंका है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) ने यह जानकारी दी। इस मानसून पूर्व सीजन में बंगाल की खाड़ी में यह पहला चक्रवाती तूफान है।भारत मौसम विज्ञान विभाग द्वारा शनिवार शाम 7:50 बजे जारी ताजा जानकारी के मुताबिक पूर्व-मध्य बंगाल की खाड़ी के ऊपर गहरा दबाव चक्रवाती तूफान रेमल में तब्दील हो गया और खेपुपारा से लगभग 360 किलोमीटर दक्षिण-दक्षिणपूर्व और सागर द्वीप से 350 किलोमीटर दक्षिण-दक्षिण पूर्व में केंद्रित है।मॉनसून से पहले इस मौसम में बंगाल की खाड़ी में यह पहला चक्रवात है। हिंद महासागर क्षेत्र में चक्रवात के नामकरण प्रणाली के अनुसार, इस तूफान का नाम रेमल रखा गया है। ओमान द्वारा रेमल नाम दिया गया यह चक्रवात, उत्तर हिंद महासागर क्षेत्र में चक्रवातों के नामकरण परंपरा के बाद, इस प्री-मानसून सीजन में बंगाल की खाड़ी में पहली चक्रवाती गतिविधि को चिह्नित करता है।IMD ने एक बयान में कहा कि चक्रवात रेमल रविवार आधी रात के आसपास बांग्लादेश और पश्चिम बंगाल तटों के बीच से गुजर सकता है और एक गंभीर चक्रवाती तूफान (SCS) बन सकता है। IMD ने X पर पोस्ट करते हुए कहा कि पूर्वी मध्य बीओबी पर दबाव सागर द्वीप (WB) के 380 किमी दक्षिण पूर्व और खेपुपारा (बांग्लादेश) के 490 किमी दक्षिण में उसी क्षेत्र में गहरे अवसाद में बदल गया। 25 तारीख की शाम तक एक चक्रवाती तूफान में तब्दील हो जायेगा और SCS के रूप में 26 की आधी रात के आसपास बांग्लादेश और पश्चिम बंगाल तटों के बीच से गुजरेगा।

झारखंड : 25 से 27 मई तक इन इलाकों में बारिश के आसार
Published / 2024-05-23 20:20:41
झारखंड : 25 से 27 मई तक इन इलाकों में बारिश के आसार

राज्य में लोगों को गर्मी से मिली राहतटीम एबीएन, रांची। झारखंड के लोगों को मौजूदा समय में गर्मी से भारी राहत मिली है। कल रांची समेत कई जिलों में हल्की बारिश हुई। फिलहाल रांची के मौसम की बात करें तो आसमान में हल्के बादल छाये हुए हैं। वहीं तापमान की बात करें तो यह 29 डिग्री है। मौसम विभाग की मानें तो बंगाल की खाड़ी में एक निम्न दबाव बन गया है। जो उत्तर-पूर्व की ओर बढ़ रहा है। इस कारण आज यानी 23 मई को भी कई जिलों में बारिश हो सकती है। लेकिन गढ़वा, पलामू, चतरा और लोहरदगा में बारिश की संभावना कम है। जबकि 25 से 27 मई तक कई स्थानों पर हल्के से मध्यम दर्जे की बारिश हो सकती है। संताल परगना, कोल्हान और राजधानी के आसपास के जिलों में इसका ज्यादा असर रहेगा।वहीं, बीते 24 घंटों की बात करें तो राजमहल में करीब 113 मिमी बारिश हुई है। गोड्डा में भी 72 मिमी से अधिक बारिश पिछले 24 घंटे में हुई है। वहीं, दूसरी तरफ रांची के किसान बारिश और ओलावृष्टि से परेशान थे। बुधवार को राजधानी के कई इलाकों में बारिश हुई जिससे खेत में लगी फसलों को भी नुकसान हुआ। वहीं, शहरी इलाकों में दो बजे के बाद हल्की बारिश हुई। इस दौरान गर्जन के साथ तेज हवा चली। रांची मौसम विज्ञान केंद्र की मानें तो बंगाल की खाड़ी में एक लो प्रेशर बन रहा है। इस कारण 26 मई के बाद राजधानी और आसपास के इलाकों में बारिश की संभावना है। इसका असर दूसरे दिन यानी कि 27 मई तक देखने को मिल सकता है। इस वजह से कई इलाकों में गर्जन के साथ बारिश की संभावना है। इस दौरान न्यूनतम तापमान 22 से 24 डिग्री सेसि के बीच हो सकता है।

झारखंड : बदला रांची का मौसम, झमाझम बारिश से मौसम हुआ सुहाना
Published / 2024-05-19 21:19:04
झारखंड : बदला रांची का मौसम, झमाझम बारिश से मौसम हुआ सुहाना

बदला मौसम, रांची को गर्मी से मिली राहत, झारखंड में 24 तक बारिश के आसार टीम एबीएन, रांची। पिछले कुछ दिनों से झारखंड के अलग-अलग हिस्सों में मौसम का मिजाज अलग-अलग है। कुछ हिस्सों में भीषण गर्मी पड़ रही है, तो कुछ हिस्सों के लोगों को राहत मिल रही है। पलामू और संताल परगना में जबरदस्त गर्मी पड़ रही है। गढ़वा में सबसे अधिक तापमान रहा। वहां का तापमान 42.7 डिग्री सेसि है। पलामू का तापमान 42.6 डिग्री सेसि है। संताल परगना के भी करीब-करीब सभी जिलों का अधिकतम तापमान 40 डिग्री सेसि से अधिक है। वहीं राज्य के मध्य हिस्से और कोल्हान के लोगों को गर्मी से राहत है। राजधानी का अधिकतम तापमान शुक्रवार की तुलना में करीब छह डिग्री सेसि नीचे चला गया। जमशेदपुर का अधिकतम तापमान भी 37 डिग्री सेसि के आसपास रहा। हजारीबाग और आसपास में भी अधिकतम तापमान 37 डिग्री सेसि के आसपास रहा। राज्य में दूसरे चरण का मतदान 20 मई को होना है। इस दिन कोडरमा, चतरा और हजारीबाग में मतदान होना है। मतदान के दिन कोडरमा में 39 से 41, हजारीबाग में 38-40 तथा चतरा में 39 से 41 डिग्री सेसि के बीच तापमान रह सकता है। 19 मई को संताल परगना और पलामू प्रमंडल में हीट वेव की चेतावनी है। वहीं, पूर्वी, मध्य और दक्षिणी जिलों में कहीं-कहीं गर्जन के साथ बारिश का अनुमान है। तेज गति की हवा भी चल सकती है। मौसम केंद्र ने अनुमान किया है कि राज्य के कई हिस्सों में 24 मई तक हल्के से मध्यम दर्जे की बारिश हो सकती है। मौसम में लगातार बदलाव देखने के लिए मिलेगा।

31 मई को केरल तट पर दस्तक देगा मानसून
Published / 2024-05-17 19:37:53
31 मई को केरल तट पर दस्तक देगा मानसून

एबीएन सेंट्रल डेस्क। केंद्रीय मौसम एवं जलवायु परिवर्तन विभाग की ओर से 31 मई को केरल में मानसून के दस्तक देने की संभावना जतायी गयी है। ऐसे में यह जानने के लिए कि झारखंड में मानसून कब तक दस्तक देगा और इस वर्ष झारखंड में कैसा रहेगा मानसून ?मौसम केंद्र के निदेशक ने बताया कि झारखंड में मानसून के दस्तक देने की सामान्य तिथि 12 जून और रांची में 15 जून है। अभी तक के जो मानसून कंडीशन बने हैं, उसके अनुसार मानसून आगमन के सामान्य तिथि से प्लस-माइनस 04 दिन में मानूसन दस्तक दे देगा।झारखंड में इस बार मानसून समय पर दस्तक देगा। मौसम विभाग के अनुमान के मुताबिक 8 से 16 जून के बीच झारखंड में मानसून प्रवेश करेगा और चार से पांच दिनों में पूरे राज्य को कवर कर लेगा। इस बार अच्छी बारिश की संभावना जतायी जा रही है।

सात दिन पहले एक जून को दस्तक दे सकता है मानसून
Published / 2024-05-16 22:08:06
सात दिन पहले एक जून को दस्तक दे सकता है मानसून

मानसून के दस्तक देने की सामने आयी तारीख, जानें मौसम एबीएन सेंट्रल डेस्क। देश में दक्षिण-पश्चिम मानसून की प्रगति केरल में मानसून के आरंभ से चिह्नित होती है। यह गर्म और शुष्क मौसम से बरसात के मौसम में संक्रमण को दर्शाने वाला एक महत्वपूर्ण संकेतक है। जैसे-जैसे मानसून उत्तर की ओर बढ़ता है, क्षेत्रों में चिलचिलाती गर्मी के तापमान से राहत का अनुभव होता है। मानसून, 2024 के दस्तक देने की तारीख आ गयी है। दक्षिण-पश्चिम मानसून आम तौर पर लगभग 7 दिनों के मानक विचलन के साथ 1 जून को केरल में प्रवेश करता है। भारत मौसम विज्ञान विभाग 2005 से केरल में मानसून के आरंभ की तारीख के लिए परिचालन पूवार्नुमान जारी कर रहा है। इस उद्देश्य के लिए 4 दिनों की मॉडल त्रुटि के साथ स्वदेशी रूप से विकसित अत्याधुनिक सांख्यिकीय मॉडल का उपयोग किया जाता है।भारत मौसम विज्ञान विभाग के मुताबिक इस वर्ष दक्षिण पश्चिम मानसून का 4 दिन की मॉडल त्रुटि के साथ 31 मई को केरल में आगमन होने की संभावना है। आमतौर पर केरल में दस्तक देने के 10 दिनों के भीतर झारखंड में मानसून प्रवेश कर जाता है। इस हिसाब से झारखंड में इसके 10 जून तक आने की संभावना है। पिछले 19 वर्षों (2005-2023) के दौरान केरल में मानसून के आरंभ की तारीख के आईएमडी के परिचालन पूवार्नुमान 2015 को छोड़कर सही साबित हुए थे। हाल के 5 वर्षों (2019- 2023) के लिए पूवार्नुमान सत्यापन नीचे तालिका में दिया गया है। वर्ष वास्तविक              आगमन तिथि                   पूर्वानुमान तिथि 2019                                               8 जून                                                            6 जून 2020                                              1 जून                                                              5 जून 2021                                              3 जून                                                              31 मई 2022                                              29 मई                                                            27 मई 2023                                               8 जून                                                              4 जून

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