टीम एबीएन, रांची। झारखंड में मानव तस्करों के कुकृत्यों का उजागर स्वाभाविक सा बनता चला जा रहा है। विश्व हिंदू परिषद के क्षेत्र मंत्री डॉ बिरेन्द्र साहु ने कहा कि समाचार पत्रों के माध्यम से ज्ञात हुआ है कि रांची के ही 51 वर्षीय मानव तस्कर फ्रांसिस किस्पोटा को बिहार के मोतिहारी में रेलवे सुरक्षा बल के द्वारा 21 बच्चों के साथ गिरफ्तार किया गया है। यह विषय अत्यंत ही निंदनीय है। डॉ साहु ने कहा- झारखंड धर्म स्वतंत्रय अधिनियम 2017 जैसे कानून होने के बाद भी झारखंड के ही गोड्डा एवं साहिबगंज सहित बिहार के भागलपुर से 5 से 12 वर्ष तक के बच्चों की तस्करी के ख्याल से शिक्षा के नाम पर मोतिहारी के चांदमारी मोहल्ले में रखा जाता है।इसकी भनक तक राज्य सरकार को नहीं लगती है, जो चिंतनीय विषय है। 21 बच्चों में ज्यादातर जनजातीय परिवार के बच्चे हैं, जो दर्शाती है कि आज भी ईसाई मिशनरियों के द्वारा जनजातीय परिवार हीं धर्मांतरण व मानव तस्करी के लिए सबसे बड़ा लक्षित समाज है।तस्करों द्वारा बच्चों को या तो उनके अंगों का व्यापार किया जाता है अथवा भीख मांगने अथवा नौकर-चाकर बनाकर रखने का कार्य कराया जाता है। बच्चों को अपने संरक्षण में रखकर उन्हें धर्मांतरित भी कर दिया जाता है, ऐसे में झारखंड का यह कानून किस काम का है? इस बात को सरकार व प्रशासन को सोचना चाहिए।डॉ साहु ने कहा कि झारखंड सरकार मानव तस्कर फ्रांसिस किसपोटा पर कानूनी कार्रवाई कर उन्हें कड़ी से कड़ी सजा दे तथा झारखंड धर्म स्वतंत्रता अधिनियम 2017 को कड़ाई से पालन करें। उक्त जानकारी विहिप झारखंड प्रांत के प्रचार-प्रसार सह प्रांत प्रमुख प्रकाश रंजन (9334433338) ने दी।
शिव महापुराण कथा में उमड़ा आस्था का महासागरआठ लाख श्रद्धालुओं ने सुनी कथापशुपति व्रत, एक लोटा जल एवं दुंदुभी निर्ह्राद वध प्रसंग ने श्रद्धालुओं को किया भावविभोरटीम एबीएन, रांची। श्री शिव महापुराण कथा के दौरान आज कथा स्थल पर आस्था का अभूतपूर्व जनसैलाब उमड़ पड़ा। अनुमानत: लगभग आठ लाख श्रद्धालुओं ने कथा श्रवण कर भगवान शिव की महिमा का रसपान किया। कथा स्थल हर हर महादेव एवं श्री शिवाय नमस्तुभ्यं के जयघोष से गूंजता रहा। पूज्य गुरुदेव के ओजस्वी एवं भावपूर्ण प्रवचनों ने श्रद्धालुओं को भक्ति, आस्था और धर्म के प्रति गहराई से जोड़ दिया। आज की कथा में गुरुदेव ने विशेष रूप से पशुपति व्रत के महात्म्य का विस्तार से वर्णन किया। उन्होंने कहा कि सच्चे भाव, श्रद्धा और विश्वास के साथ किया गया व्रत व्यक्ति के जीवन की बड़ी से बड़ी बाधाओं को दूर कर सकता है। इसी क्रम में उन्होंने अपने प्रसिद्ध संदेश एक लोटा जल सब समस्याओं का हल के माध्यम से कई प्रेरणादायक प्रसंग सुनाये। गुरुदेव ने धनबाद निवासी एक व्यक्ति की मार्मिक कथा सुनाई, जिसकी किडनी गंभीर रूप से खराब हो चुकी थी।उन्होंने बताया कि उस व्यक्ति ने पूर्ण श्रद्धा और विश्वास के साथ पशुपति व्रत का पालन किया तथा भगवान शिव की कृपा से उसकी किडनी स्वस्थ हो गयी। इस प्रसंग को सुनकर कथा स्थल पर उपस्थित श्रद्धालु भावुक हो उठे और पूरा पंडाल बाबा भोलेनाथ के जयकारों से गूंज उठा। इसके साथ ही गुरुदेव ने दो युवतियों का प्रसंग भी सुनाया, जो पुलिस सेवा की तैयारी कर रही थीं। उन्होंने कहा कि जीवन में मेहनत आवश्यक है, लेकिन जब मेहनत के साथ भगवान शिव की कृपा जुड़ जाती है तो सफलता निश्चित हो जाती है। उन युवतियों ने कठिन परिश्रम के साथ शिव आराधना की और उन्हें सफलता प्राप्त हुई। गुरुदेव ने युवाओं को संदेश दिया कि परिश्रम और प्रभु भक्ति दोनों का संतुलन जीवन को ऊंचाइयों तक पहुंचाता है।आज की कथा का सबसे भावुक क्षण तब आया जब एक दंपत्ति का उल्लेख किया गया, जिन्हें विवाह के पच्चीस वर्षों बाद पुत्र रत्न की प्राप्ति हुई। दंपत्ति बाबा से मिलकर अपनी भावनाएं व्यक्त करने पहुंचे थे। इस प्रसंग ने कथा स्थल पर उपस्थित हजारों श्रद्धालुओं की आंखें नम कर दीं और वातावरण अत्यंत भावुक हो उठा।अपने प्रवचन में गुरुदेव ने कहा कि सिद्ध होना सरल है, लेकिन शुद्ध होना कठिन है। उन्होंने बताया कि मनुष्य को केवल उपलब्धियों के पीछे नहीं भागना चाहिए, बल्कि अपने विचारों, व्यवहार और जीवन को शुद्ध बनाने का प्रयास करना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि भगवान शिव पर अर्पित किया गया जल कभी व्यर्थ नहीं जाता।शिवलिंग पर चढ़ाये गये जल को लेकर उन्होंने कहा कि भगवान गणेश स्वयं उस भक्त की नैया पार लगाने का कार्य करते हैं, जो सच्चे भाव से भगवान शिव की आराधना करता है।कथा के दौरान गुरुदेव ने दुंदुभी निर्ह्राद वध प्रसंग का भी अत्यंत प्रभावशाली वर्णन किया। उन्होंने बताया कि भगवान विष्णु द्वारा हिरण्याक्ष के वध के बाद उसका पुत्र दुंदुभीनिर्ह्राद अत्यंत क्रोधित हो गया और देवताओं से प्रतिशोध लेने लगा। वह जानता था कि देवता यज्ञों के बल पर शक्तिशाली रहते हैं, इसलिए उसने ऋषि-मुनियों और ब्राह्मणों पर अत्याचार करना शुरू कर दिया तथा धर्म को नष्ट करने का प्रयास किया।गुरुदेव ने कहा कि दैत्य दुंदुभी मायावी था और लोगों में भय फैलाने के लिए विभिन्न रूप धारण करता था। एक समय उसने बाघ का विकराल रूप धारण कर ब्राह्मणों पर आक्रमण किया। जब धर्म संकट में पड़ गया, तब भगवान शिव स्वयं शिवलिंग से प्रकट हुए और उस बाघ रूपी दैत्य का संहार कर दिया।कथा के अनुसार, जिस स्थान पर भगवान शिव ने दुंदुभी निर्ह्राद का वध किया, वहां उसकी भीषण दहाड़ पूरी सृष्टि में गूंज उठी और बाद में वहीं व्याघ्रेश्वर लिंग की स्थापना होने की मान्यता है। गुरुदेव ने श्रद्धालुओं को संदेश देते हुए कहा कि जब-जब अधर्म बढ़ता है और भक्त कष्ट में होते हैं, तब-तब भगवान शिव उनकी रक्षा के लिए प्रकट होते हैं। सत्य, श्रद्धा और भक्ति ही जीवन का वास्तविक मार्ग है।पूरे कथा स्थल पर भक्ति और आस्था का अद्भुत वातावरण देखने को मिला। श्रद्धालु घंटों तक कथा में डूबे रहे और भंडारे में भी बड़ी संख्या में लोगों ने प्रसाद ग्रहण किया। आयोजन समिति ने श्रद्धालुओं की भारी उपस्थिति के बीच व्यवस्था बनाये रखने में सहयोग करने हेतु प्रशासन एवं स्वयंसेवकों के प्रति आभार व्यक्त किया।
शिव महापुराण कथा में उमड़ा आस्था का महासागरआठ लाख श्रद्धालुओं ने सुनी कथापशुपति व्रत, एक लोटा जल एवं दुंदुभी निर्ह्राद वध प्रसंग ने श्रद्धालुओं को किया भावविभोरटीम एबीएन, रांची। श्री शिव महापुराण कथा के दौरान आज कथा स्थल पर आस्था का अभूतपूर्व जनसैलाब उमड़ पड़ा। अनुमानत: लगभग आठ लाख श्रद्धालुओं ने कथा श्रवण कर भगवान शिव की महिमा का रसपान किया। कथा स्थल हर हर महादेव एवं श्री शिवाय नमस्तुभ्यं के जयघोष से गूंजता रहा। पूज्य गुरुदेव के ओजस्वी एवं भावपूर्ण प्रवचनों ने श्रद्धालुओं को भक्ति, आस्था और धर्म के प्रति गहराई से जोड़ दिया। आज की कथा में गुरुदेव ने विशेष रूप से पशुपति व्रत के महात्म्य का विस्तार से वर्णन किया। उन्होंने कहा कि सच्चे भाव, श्रद्धा और विश्वास के साथ किया गया व्रत व्यक्ति के जीवन की बड़ी से बड़ी बाधाओं को दूर कर सकता है। इसी क्रम में उन्होंने अपने प्रसिद्ध संदेश एक लोटा जल सब समस्याओं का हल के माध्यम से कई प्रेरणादायक प्रसंग सुनाये। गुरुदेव ने धनबाद निवासी एक व्यक्ति की मार्मिक कथा सुनाई, जिसकी किडनी गंभीर रूप से खराब हो चुकी थी।उन्होंने बताया कि उस व्यक्ति ने पूर्ण श्रद्धा और विश्वास के साथ पशुपति व्रत का पालन किया तथा भगवान शिव की कृपा से उसकी किडनी स्वस्थ हो गयी। इस प्रसंग को सुनकर कथा स्थल पर उपस्थित श्रद्धालु भावुक हो उठे और पूरा पंडाल बाबा भोलेनाथ के जयकारों से गूंज उठा। इसके साथ ही गुरुदेव ने दो युवतियों का प्रसंग भी सुनाया, जो पुलिस सेवा की तैयारी कर रही थीं। उन्होंने कहा कि जीवन में मेहनत आवश्यक है, लेकिन जब मेहनत के साथ भगवान शिव की कृपा जुड़ जाती है तो सफलता निश्चित हो जाती है। उन युवतियों ने कठिन परिश्रम के साथ शिव आराधना की और उन्हें सफलता प्राप्त हुई। गुरुदेव ने युवाओं को संदेश दिया कि परिश्रम और प्रभु भक्ति दोनों का संतुलन जीवन को ऊंचाइयों तक पहुंचाता है।आज की कथा का सबसे भावुक क्षण तब आया जब एक दंपत्ति का उल्लेख किया गया, जिन्हें विवाह के पच्चीस वर्षों बाद पुत्र रत्न की प्राप्ति हुई। दंपत्ति बाबा से मिलकर अपनी भावनाएं व्यक्त करने पहुंचे थे। इस प्रसंग ने कथा स्थल पर उपस्थित हजारों श्रद्धालुओं की आंखें नम कर दीं और वातावरण अत्यंत भावुक हो उठा।अपने प्रवचन में गुरुदेव ने कहा कि सिद्ध होना सरल है, लेकिन शुद्ध होना कठिन है। उन्होंने बताया कि मनुष्य को केवल उपलब्धियों के पीछे नहीं भागना चाहिए, बल्कि अपने विचारों, व्यवहार और जीवन को शुद्ध बनाने का प्रयास करना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि भगवान शिव पर अर्पित किया गया जल कभी व्यर्थ नहीं जाता।शिवलिंग पर चढ़ाये गये जल को लेकर उन्होंने कहा कि भगवान गणेश स्वयं उस भक्त की नैया पार लगाने का कार्य करते हैं, जो सच्चे भाव से भगवान शिव की आराधना करता है।कथा के दौरान गुरुदेव ने दुंदुभी निर्ह्राद वध प्रसंग का भी अत्यंत प्रभावशाली वर्णन किया। उन्होंने बताया कि भगवान विष्णु द्वारा हिरण्याक्ष के वध के बाद उसका पुत्र दुंदुभीनिर्ह्राद अत्यंत क्रोधित हो गया और देवताओं से प्रतिशोध लेने लगा। वह जानता था कि देवता यज्ञों के बल पर शक्तिशाली रहते हैं, इसलिए उसने ऋषि-मुनियों और ब्राह्मणों पर अत्याचार करना शुरू कर दिया तथा धर्म को नष्ट करने का प्रयास किया।गुरुदेव ने कहा कि दैत्य दुंदुभी मायावी था और लोगों में भय फैलाने के लिए विभिन्न रूप धारण करता था। एक समय उसने बाघ का विकराल रूप धारण कर ब्राह्मणों पर आक्रमण किया। जब धर्म संकट में पड़ गया, तब भगवान शिव स्वयं शिवलिंग से प्रकट हुए और उस बाघ रूपी दैत्य का संहार कर दिया।कथा के अनुसार, जिस स्थान पर भगवान शिव ने दुंदुभी निर्ह्राद का वध किया, वहां उसकी भीषण दहाड़ पूरी सृष्टि में गूंज उठी और बाद में वहीं व्याघ्रेश्वर लिंग की स्थापना होने की मान्यता है। गुरुदेव ने श्रद्धालुओं को संदेश देते हुए कहा कि जब-जब अधर्म बढ़ता है और भक्त कष्ट में होते हैं, तब-तब भगवान शिव उनकी रक्षा के लिए प्रकट होते हैं। सत्य, श्रद्धा और भक्ति ही जीवन का वास्तविक मार्ग है।पूरे कथा स्थल पर भक्ति और आस्था का अद्भुत वातावरण देखने को मिला। श्रद्धालु घंटों तक कथा में डूबे रहे और भंडारे में भी बड़ी संख्या में लोगों ने प्रसाद ग्रहण किया। आयोजन समिति ने श्रद्धालुओं की भारी उपस्थिति के बीच व्यवस्था बनाये रखने में सहयोग करने हेतु प्रशासन एवं स्वयंसेवकों के प्रति आभार व्यक्त किया।
घर घर अलख जगायेंगे हम, शांतिकुञ्ज का संदेश जन-जन को पहुचायेंगे प्रज्ञागीत से 5 कुंडीय यज्ञ सोलल संपन्न एबीएन सोशल डेस्क। गायत्री परिवार युगतीर्थ शांतिकुञ्ज तत्वावधान में गायत्री शक्तिपीठ सेक्टर टू के मार्गदर्शन में कांके प्रखंड समन्वय समिति के सान्निध्य में एक दिवसीय व 5 कुंडीय गायत्री महायज्ञ गुरु-ईश ध्यान वंदना, मंगलाचरण, पवित्रीकरण, न्यासकरण षटकर्म और मंगल कलश पूजन- अर्चन, स्वस्तिवाचन, रक्षा विधान पाठ कर यज्ञीय अनुष्ठान एवं संध्या कालीन दीपयज्ञ से समापन हुआ। यह एक दिवसीय एवं 5 कुंडीय गायत्री महायज्ञ कार्यक्रम था। यह कार्यक्रम शांतिकुञ्ज मुख्यालय के निर्देशानुसार कई संकल्पों के साथ संपन्न हुआ। इस बाबत प्रखंड समन्वियका रेणु श्रीवास्तव बहिन तथा जिला महिला युवा समन्वयियका सुलोचना शाहदेव बहिन की सदस्य टीम के सान्निध्य व सहयोग में संपन्न हुआ। दोनों ने विगत जनवरी 2026, बैरागी द्वीप वसंतोत्सव समारोह सम्मेलन में अपनी टीम की भागीदारी तथा उसमें लिये गये संकल्प तथा गत माह 22 अप्रैल शक्तिपीठ सेक्टर टू की विशेष संकल्प गोष्ठी की जानकारी यज्ञीय विधान के दौरान सबको बताया। गायत्री उपासना साधना का अर्थ, भावार्थ, व्याख्यान एवं चमत्कार अवर्णनीय है। हम आसानी से वर्णन नहीं कर सकते। परम पूज्य गुरुदेव वेदमूर्ति-तपोनिष्ठ ने इस पर बहुत विशाल व विस्तार से हजारों पुस्तकें लिख डाली हैं। उनका कहना है कि मंत्रों का सूक्ष्म प्रभाव बहुत ही महत्वपूर्ण है। उसमें भी गायत्री महामंत्र की महिमा, महत्ता तो और अधिक विलक्षण है। यह परमात्मा की मूल शक्ति और बहुत ही महत्वपूर्ण, मूल्यवान है। इस महाशक्ति का लाभ असंदिग्ध है, जिन्हें वह सुलभ हुआ, लाभ हुआ वो निहाल हुआ, धन्य हो गये।परम पूज्य गुरुदेव और वं माता जी ने अपने युग के अपने दादा गुरुदेव जी के निदेर्शानुसार अपना तपोबल व संकल्प बल से इस वैदिक महामंत्र को सर्व सुलभ और स्वस्थ-सुखद बनाया। जन-जन के तन-मन को लाभान्वित करने तथा जन-जन के जीवन के लिए घर-घर अलख जगाने के लिए सर्व सुलभ व सरल बना दिया। यह सर्वदा, सर्वथा सर्व हितकारी उपासना सबके लिए स्वस्थ-सुखद है। इससे अनेक कठिनाइयां हल होती हैं। नवरात्र अनुष्ठान काल में इसकी सामूहिक जप-अनुष्ठान पुरश्चक्रण की महत्ता और बढ़ जाती है। गायत्री महामंत्र संजीवनी विद्या एवं सरल यज्ञीय विधान महत्ता, आवश्यकता तथा इसकी अपेक्षित उपयोगिता पर प्रकाश डाल बताया कि यह 5 कुंडीय गायत्री महायज्ञ जन्म शताब्दी अनुयाज क्रम की एक कड़ी है। यज्ञीय विधान 3 पाली में हुआ। एक दर्जन दीक्षा संस्कार भी हुए। यह कार्यक्रम अब तेजी से कांके प्रखंड के अनेकानेक पंचायत व ग्रामीण क्षेत्रों में भी जन-जन के लिए रोचक स्तर पर अनुभव कराना है और नयी पीढ़ी के बच्चों को यज्ञीय विधान से सुसंस्कारवान बनाना है। सुबह दोपहर यज्ञीय अनुष्ठान विधान से आहुतियां प्रदान की गई और सायंकालीन दीपयज्ञ में जन्म दिवस संस्कारोत्सव भी सोल्लास मनाये गये। सबकी मंगलमय कामना व शांति-पाठ कर कार्यक्रम संपन्न किये गये। उक्त जानकारी गायत्री परिवार के रेणु श्रीवास्तव, सुलोचना शाहदेव और जय नारायण प्रसाद ने दी।
श्री राधा-कृष्ण प्रणामी मंदिर में भक्ति, भजन और अन्नपूर्णा महाप्रसाद का भव्य आयोजन टीम एबीएन, रांची। रांची के पुंदाग स्थित एमआर एस श्री कृष्ण प्रणामी सेवा धाम ट्रस्ट द्वारा संचालित श्री कृष्ण प्रणामी मंगल राधिका सदानंद सेवाधाम श्रीराधा-कृष्ण प्रणामी मंदिर में डॉ संत शिरोमणि स्वामी सदानंद महाराज जी के सान्निध्य में 265 वें श्री कृष्ण प्रणामी अन्नपूर्णा सेवा महाप्रसाद का भव्य एवं भक्तिमय आयोजन श्रद्धा एवं उल्लास के साथ संपन्न हुआ। कार्यक्रम में हजारों श्रद्धालुओं ने भाग लेकर भगवान श्री राधा-कृष्ण का आशीर्वाद प्राप्त किया। मौके पर मंदिर परिसर को भक्ति एवं आध्यात्मिक वातावरण से सराबोर कर दिया गया। मंदिर में श्री राधा रानी जी का दिव्य एवं अलौकिक श्रृंगार आकर्षक आभूषणों एवं मनोहारी पुष्पों से किया गया, जिसकी छटा देखते ही बन रही थी। दोपहर 12 बजे मंदिर के पुजारी अरविंद कुमार पांडेय द्वारा विधिवत पूजा-अर्चना एवं मंत्रोच्चार के साथ महाप्रसाद का भोग लगाया गया। इसके पश्चात शिव भगवान अग्रवाल के सौजन्य से मसालेदार वेजिटेबल खिचड़ी, जलजीरा शर्बत एवं सत्तू पानी का वितरण श्रद्धालुओं के बीच किया गया। मंदिर परिसर में उपस्थित लगभग 1500 से अधिक श्रद्धालुओं ने श्रद्धापूर्वक महाप्रसाद ग्रहण किया।भक्ति रस से ओत-प्रोत भजन संध्या कार्यक्रम में ट्रस्ट के भजन गायक मनीष सोनी ने राधे राधे बरसाने वाली राधे, कान्हा रे कान्हा, तूने लाखों का जीवन संवारा एवं अच्युतम केशवम् कृष्ण दामोदरम् जैसे सुमधुर एवं मनमोहक भजनों की प्रस्तुति देकर उपस्थित श्रद्धालुओं को भावविभोर कर दिया। भजनों पर श्रद्धालु झूम उठे तथा पूरा मंदिर परिसर राधे-कृष्ण एवं श्याम के जयकारों से कृष्णमय एवं भक्तिमय हो गया। तत्पश्चात सामूहिक रूप से महाआरती का आयोजन किया गया, जिसमें सैकड़ों श्रद्धालुओं ने दीप प्रज्ज्वलित कर भगवान श्री राधा-कृष्ण की आराधना की। वातावरण पूरी तरहआध्यात्मिक ऊर्जा एवं भक्तिरस से सराबोर हो उठा। ट्रस्ट के प्रवक्ता सह मीडिया प्रभारी संजय सर्राफ ने बताया कि मंदिर में सुबह से ही श्रद्धालुओं का तांता लगा रहा तथा लगभग 3 हजार से अधिक भक्तों ने भगवान के दर्शन किये। उन्होंने जानकारी दी कि मंदिर में प्रतिदिन दोपहर 12 बजे से 2 बजे तक वेजिटेबल खिचड़ी महाप्रसाद का वितरण किया जाता है, जिसमें प्रतिदिन 400 से अधिक श्रद्धालु प्रसाद ग्रहण करते हैं। कार्यक्रम को सफल बनाने में डूंगरमल अग्रवाल, राजेंद्र प्रसाद अग्रवाल, शिव भगवान अग्रवाल, पूरणमल सर्राफ, सुरेश अग्रवाल, अरविंद अग्रवाल, विशाल जालान, विष्णु सोनी, मनीष सोनी, पवन पोद्दार, सुरेश भगत, ज्ञान प्रकाश शर्मा, हरीश सोनी सहित अनेक श्रद्धालुओं का महत्वपूर्ण योगदान रहा।
कलशयात्रा के साथ आरंभ हुआ भागवत प्रतिष्ठा सह श्रीमद्भागवत ज्ञान यज्ञ जय श्री राधे के नारे से गूंज उठा भंडरा गांवएबीएन न्यूज नेटवर्क, भंडरा। कलशयात्रा के साथ भंडरा पूरी तरह भक्तिमय हो गया है। सात दिवसीय श्री भागवत प्रतिष्ठा सह श्रीमद्भागवत सप्ताह ज्ञान यज्ञ के मद्देनजर शुक्रवार सुबह भंडरा ठाकुरबाड़ी मंदिर प्रांगण से एक हजार से अधिक महिलाओं ने जय श्री कृष्ण के जयघोष के साथ कलशयात्रा निकाला। इसमें प्रखंड के तमाम गावों के लोग शामिल हुए। यज्ञाचार्य रमाकांत शास्त्री जी महाराज और गौरव कृष्णजी महाराज के सानिध्य में आयोजित इस कलशयात्रा में पुरुषों की संख्या भी काफी अधिक थी। भगवान के जयघोष के साथ सभी भौरो नदी पहुंचे जहां यज्ञाचार्य द्वारा मंत्रोचारण के बाद कलश में जल भर कर भगवा रंग से सजे सभी महिला व पुरुषों ने श्री राधे के जयघोष के साथ नगर भ्रमण करते हुए ठाकुर बाड़ी स्थित यज्ञ स्थल पहुंचे। यहां कलश स्थापन के पश्चात मृदाहरण का अनुष्ठान हुआ। तत्पश्चात भंडारे का आयोजन हुआ। जिसमें हजारों लोगों ने प्रसाद ग्रहण किया। कार्यक्रम के मुख्य आयोजक राधा मोहन शर्मा ने बताया कि नौ मई को पंचांग पूजन, मंडप प्रवेश, अग्निमंथन व जलाधिवास का अनुष्ठान होगा।जलयात्रा के दौरान ईश्वरी मोहन शर्मा, किशोरी मोहन शर्मा, राजु शर्मा, कृष्ण चैतन्य ब्रह्मचारी, आनंद दुबे, भीम साहू, अनित कुमार कुंदन, श्रीकांत, बसंत साहू, सुरेश साहू, अजीत अग्रवाल, आनंद साहू दिनेश, भीम नाथ शाहदेव, बिंदु साहू रुपेश मिश्रा, संतोष साहू, शंकर साहू, श्रवण गुप्ता, अनिल साहू, सुरेन्द्र यादव, ललन सोनार, उतम गुप्ता आदि मुख्य रुप से शामिल हुए।
श्री श्याम मंदिर में स्वामी सदानंद महाराज ने श्री कृष्ण कथा का अमृतमय रस बरसायाटीम एबीएन, रांची। श्री श्याम मंदिर परिसर गिरिडीह में श्याम सेवा समिति ट्रस्ट द्वारा एक दिवसीय भव्य श्री कृष्ण कथा का आयोजन श्रद्धा, भक्ति एवं उल्लासपूर्ण वातावरण में संपन्न हुआ। इस अवसर पर सुप्रसिद्ध कथा वाचक एवं श्री कृष्ण प्रणामी सेवा धाम ट्रस्ट के संस्थापक डॉ. संत शिरोमणि स्वामी सदानंद जी महाराज ने अपने मुखारविंद से भगवान श्री कृष्ण के जीवन, उनके आदर्शो, धर्म स्थापना और मानव कल्याण के संदेशों का अत्यंत सुंदर एवं भावपूर्ण वर्णन किया।उन्होंने भगवान श्री कृष्ण के बाल्यकाल, माखन चोरी,गोवर्धन पूजा, रासलीला, कंस वध तथा महाभारत में दिए गए गीता ज्ञान का अत्यंत प्रभावशाली ढंग से वर्णन किया कथा के माध्यम से उन्होंने मानव जीवन में प्रेम, सेवा, सत्य एवं धर्म के महत्व को भी रेखांकित किया।कार्यक्रम के दौरान संगीतमय भजनों की मधुर प्रस्तुति ने श्रद्धालुओं को भावविभोर कर दिया। साथ ही भगवान श्री कृष्ण की जीवंत झांकियों ने उपस्थित भक्तों का मन मोह लिया। पूरा मंदिर परिसर राधे-राधे एवं जय श्री कृष्ण के जयघोष से गूंज उठा। श्रद्धालु भक्ति रस में सराबोर होकर कथा एवं भजनों का आनंद लेते रहे। श्री कृष्ण प्रणामी सेवा धाम ट्रस्ट रांची के प्रवक्ता सह मीडिया प्रभारी संजय सर्राफ ने बताया कि इस अवसर पर रांची से ट्रस्ट के अध्यक्ष डूंगरमल अग्रवाल, उपाध्यक्ष राजेंद्र प्रसाद अग्रवाल, सुरेश अग्रवाल, शिव भगवान अग्रवाल, अरविंद अग्रवाल एवं मनीष सोनी विशेष रूप से गिरिडीह पहुंचे। सभी अतिथियों का स्वागत करते हुए स्वामी सदानंद जी महाराज ने उन्हें श्री राधा कृष्ण का पावन दुपट्टा ओढ़ाकर आशीर्वाद प्रदान किया। कथा आयोजन में श्याम सेवा समिति ट्रस्ट के काशी अग्रवाल, किशन बगड़िया, पवन चूड़ीवाला, विनोद धागेच, रामगोपाल खंडेलवाल एवं पिंटू खंडेलवाल सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु एवं गणमान्य लोग उपस्थित रहे।
मातृ दिवस 10 मई को... मां का आशीर्वाद ही जीवन की सबसे बड़ी पूंजी है उनका स्थान सदैव सर्वोपरि रहेगा : संजय सर्राफएबीएन सोशल डेस्क। हिंदी साहित्य भारती के उपाध्यक्ष सह झारखंड पेरेंट्स एसोसिएशन के प्रांतीय प्रवक्ता संजय सर्राफ ने कहा है मां केवल एक शब्द नहीं, बल्कि प्रेम, त्याग, ममता, करुणा और समर्पण का जीवंत स्वरूप होती है। संसार में मां का स्थान सर्वोच्च माना गया है।मां अपने बच्चों के जीवन को संवारने, संस्कार देने और हर परिस्थिति में उनका साथ निभाने का कार्य करती है। इसी मातृत्व, त्याग और असीम प्रेम के प्रति सम्मान प्रकट करने के उद्देश्य से प्रतिवर्ष मातृ दिवस अर्थात मदर्स डे मनाया जाता है। मातृ दिवस प्रत्येक वर्ष मई महीने के दूसरे रविवार को मनाया जाता है। इस वर्ष यह दिवस 10 मई को मनाया जाएगा। यह दिन दुनिया भर में माताओं के सम्मान, उनके योगदान और परिवार एवं समाज में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका को स्मरण करने के लिए समर्पित होता है।मातृ दिवस मनाने की शुरुआत अमेरिका से हुई थी। इसकी शुरुआत का श्रेय अमेरिकी महिला एना जार्विस को दिया जाता है। उन्होंने अपनी मां की स्मृति में माताओं के सम्मान हेतु विशेष दिवस मनाने का अभियान चलाया था। उनके प्रयासों से वर्ष 1914 में अमेरिका के तत्कालीन राष्ट्रपति वुडरो विल्सन ने मई के दूसरे रविवार को आधिकारिक रूप से मातृ दिवस घोषित किया।इसके बाद धीरे-धीरे यह दिवस विश्व के अनेक देशों में मनाया जाने लगा। मातृ दिवस का मुख्य उद्देश्य माताओं के प्रति सम्मान और कृतज्ञता प्रकट करना है। मां अपने बच्चों केपालन-पोषण में अपना पूरा जीवन समर्पित कर देती है। वह परिवार की आधारशिला होती है, जो बिना किसी स्वार्थ के अपने बच्चों के सुख-दुख में सदैव साथ खड़ी रहती है। यह दिवस हमें मां के त्याग, संघर्ष और प्रेम को समझने तथा उनके प्रति सम्मान व्यक्त करने की प्रेरणा देता है। इस दिन लोग अपनी माताओं को उपहार देकर, शुभकामनाएं भेजकर,उनके साथ समय बिताकर तथा विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रमों के माध्यम से सम्मान प्रकट करते हैं। विद्यालयों, सामाजिक संस्थाओं एवं विभिन्न संगठनों द्वारा भी माताओं के सम्मान में कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। कई स्थानों पर मातृ शक्ति को सम्मानित कर समाज में उनके योगदान को सराहा जाता है।भारतीय संस्कृति में मां को देवी के समान माना गया है। हमारे धर्मग्रंथों में भी मातृ देवो भवः का संदेश दिया गया है, जिसका अर्थ है -मां को देवता के समान सम्मान देना।मां ही बच्चे की प्रथम गुरु होती है, जो उसे जीवन के नैतिक मूल्यों और संस्कारों की शिक्षा देती है।इसलिए मातृ दिवस केवल एक उत्सव नहीं, बल्कि मां के प्रति प्रेम, सम्मान और कृतज्ञता व्यक्त करने का पावन अवसर है।आज के आधुनिक एवं व्यस्त जीवन में परिवारों के बीच बढ़ती दूरियों के कारण यह दिवस और भी महत्वपूर्ण हो गया है। यह दिन हमें याद दिलाता है कि मां का सम्मान केवल एक दिन नहीं, बल्कि जीवन के हर दिन किया जाना चाहिए। मां का प्रेम अनमोल होता है, जिसकी तुलना संसार की किसी भी वस्तु से नहीं की जा सकती, निस्संदेह, मातृ दिवस हमें मां के त्याग और ममता को स्मरण कर उनके प्रति आदर, सेवा और प्रेम व्यक्त करने की प्रेरणा देता है। मां का आशीर्वाद ही जीवन की सबसे बड़ी पूंजी है और उनका स्थान सदैव सर्वोपरि रहेगा।
टीम एबीएन, रांची। झारखंड चित्रांश विचार मंच का एक प्रतिनिधिमंडल आज राज्यपाल संतोष गंगवार से राजभवन में शिष्टाचार भेंट कर मंच द्वारा प्रकाशित चित्रांश मंजूषा-3 स्मारिका उन्हें सप्रेम भेंट की। मौके पर राज्यपाल के साथ मंच की गतिविधियों, उसके सामाजिक योगदान एवं समाज में उसकी भूमिका पर सार्थक चर्चा हुई। मंच के उपाध्यक्ष सह पत्रिका संपादक राजीव सहाय ने कहा कि चित्रांश मंजूषा-3 समाज की संवेदनाओं, संस्कारों एवं सृजनशीलता का सजीव दस्तावेज है। उन्होंने कहा कि मंच का उद्देश्य साहित्य, कला एवं सामाजिक मूल्यों को नई पीढ़ी तक पहुंचाना है। प्रतिनिधिमंडल में राजीव सहाय, प्रखर जयपुरियार, संजय पीपरवाल, प्रमोद कुमार सिन्हा एवं साकेत बिहारी शरण शामिल थे। उक्त जानकारी झारखंड चित्रांश विचार मंच के उपाध्यक्ष राजीव सहाय ने दी।
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