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पुरुषोत्तम अधिक मास 17 मई से 15 जून तक
Published / 2026-05-16 21:50:28
पुरुषोत्तम अधिक मास 17 मई से 15 जून तक

जीवन में आध्यात्मिक उन्नति, मानसिक शांति, भक्ति, साधना और पुण्य प्राप्ति का दिव्य अवसर : संजय सर्राफ एबीएन सोशल डेस्क। विश्व हिंदू परिषद झारखंड सेवा विभाग एवं श्री कृष्ण प्रणामी सेवा धाम ट्रस्ट के प्रांतीय प्रवक्ता संजय सर्राफ ने कहा है कि सनातन धर्म में पुरुषोत्तम अधिक मास ज्येष्ठ मास का अत्यंत विशेष धार्मिक एवं आध्यात्मिक महत्व माना गया है। इस वर्ष पुरुषोत्तम अधिक मास 17 मई से प्रारंभ होकर 15 जून तक रहेगा। हिंदू पंचांग के अनुसार यह अतिरिक्त मास लगभग प्रत्येक तीन वर्ष में एक बार आता है। जब किसी चंद्र मास में सूर्य की संक्रांति नहीं होती, तब उस मास को अधिक मास कहा जाता है। भगवान विष्णु ने इस मास को अपना नाम पुरुषोत्तम प्रदान किया, इसलिए इसे पुरुषोत्तम अधिक मास कहा जाता है। यह मास भगवान श्रीहरि विष्णु की आराधना, भक्ति, तप, दान और आत्मशुद्धि का श्रेष्ठ काल माना जाता है।धार्मिक मान्यताओं के अनुसार प्राचीन समय में अधिक मास को कोई विशेष महत्व नहीं दिया जाता था। इससे दुखी होकर अधिक मास भगवान विष्णु की शरण में पहुंचा। तब भगवान विष्णु ने उसे अपना नाम पुरुषोत्तम देकर सभी महीनों में श्रेष्ठ स्थान प्रदान किया। तभी से यह मास अत्यंत पवित्र और पुण्यदायी माना जाने लगा। पुराणों में भी पुरुषोत्तम मास की महिमा का विस्तार से वर्णन मिलता है।इस मास की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसमें किए गए जप, तप, व्रत, दान, पूजा-पाठ और सत्कर्मों का फल कई गुना अधिक प्राप्त होता है। श्रद्धालु इस अवधि में भगवान विष्णु, श्रीकृष्ण और श्रीराम की विशेष पूजा-अर्चना करते हैं। गीता पाठ, रामचरितमानस का पाठ, विष्णु सहस्रनाम, भजन-कीर्तन, सत्संग और गरीबों की सेवा का विशेष महत्व माना जाता है। मंदिरों में धार्मिक अनुष्ठान एवं कथा-प्रवचन आयोजित किए जाते हैं। पुरुषोत्तम अधिक मास का उद्देश्य मनुष्य को आध्यात्मिक मार्ग की ओर प्रेरित करना है। यह मास संयम, सदाचार, सेवा और ईश्वर भक्ति का संदेश देता है। इस दौरान व्यक्ति अपने भीतर की नकारात्मकता, अहंकार और बुराइयों को त्यागकर आत्मचिंतन करता है। इस मास में श्रद्धा और सच्चे मन से की गयी आराधना से जीवन के कष्ट दूर होते हैं तथा सुख, शांति और समृद्धि प्राप्त होती है। इस मास में विवाह, गृह प्रवेश, मुंडन और अन्य मांगलिक कार्य सामान्यत: नहीं किये जाते हैं। इसके स्थान पर पूजा-पाठ, दान-पुण्य और साधना को अधिक महत्व दिया जाता है। विशेष रूप से अन्न, वस्त्र, जल, गौ सेवा तथा जरूरतमंदों की सहायता को अत्यंत पुण्यकारी माना गया है।पुरुषोत्तम अधिक मास केवल धार्मिक अनुष्ठानों का समय नहीं, बल्कि आत्मशुद्धि और जीवन को सकारात्मक दिशा देने का अवसर भी है। यह मास मानव को धर्म, करुणा, सेवा और ईश्वर के प्रति समर्पण की भावना सिखाता है। श्रद्धा एवं भक्ति के साथ मनाया गया। पुरुषोत्तम अधिक मास जीवन में आध्यात्मिक उन्नति, मानसिक शांति और पुण्यफल प्रदान करने वाला माना गया है।

श्री राधा कृष्ण प्रणामी मंदिर में श्रद्धा व भक्तिभाव से मना वट सावित्री पर्व एवं शनि देव जयंती
Published / 2026-05-16 21:49:22
श्री राधा कृष्ण प्रणामी मंदिर में श्रद्धा व भक्तिभाव से मना वट सावित्री पर्व एवं शनि देव जयंती

एबीएन सोशल डेस्क। रांची के पुंदाग स्थित श्री राधा कृष्ण प्रणामी मंदिर परिसर में संत शिरोमणि परमहंस स्वामी सदानंद महाराज के सानिध्य में श्री कृष्ण प्रणामी सेवा धाम ट्रस्ट द्वारा वट सावित्री पर्व एवं शनि देव जयंती श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक वातावरण के बीच हर्षोल्लास के साथ मनायी गयी। मौके पर मंदिर परिसर भक्तिमय माहौल से सराबोर रहा तथा बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लेकर पुण्य लाभ प्राप्त किया। कार्यक्रम का शुभारंभ विशेष पूजा-अर्चना से हुआ। मंदिर के पुजारी पंडित अरविंद पांडे ने विधिवत मंत्रोच्चार के साथ भगवान की पूजा संपन्न कराई। इस अवसर पर श्री राधा रानी का अलौकिक एवं आकर्षक श्रृंगार सफेद पोशाक एवं जड़ित आभूषणों से किया गया, जिसने श्रद्धालुओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।मंदिर में सजे दिव्य दरबार के दर्शन के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ी। पूजा-अर्चना के दौरान भगवान को लड्डू, मेवा, फल एवं वेजिटेबल खिचड़ी का विशेष भोग अर्पित किया गया। साथ ही शनि देव जयंती के अवसर पर हनुमान चालीसा का सामूहिक पाठ भी किया गया। श्रद्धालुओं ने भक्ति भाव से हनुमान चालीसा का पाठ कर शनि दोष से मुक्ति एवं सुख-समृद्धि की कामना की।मंदिर परिसर जय श्री राम और जय शनिदेव के जयकारों से गूंज उठा। इसके पश्चात सामूहिक महाआरती का आयोजन किया गया, जिसमें सैकड़ों श्रद्धालुओं ने भाग लिया। दीपों की रोशनी, घंटियों की मधुर ध्वनि और भक्तिमय वातावरण ने सभी को आध्यात्मिक आनंद से भर दिया। महाआरती के उपरांत श्रद्धालुओं के बीच वेजिटेबल खिचड़ी प्रसाद का वितरण किया गया। सभी भक्तों ने श्रद्धा एवं भक्ति भाव से प्रसाद ग्रहण किया। कार्यक्रम के दौरान ट्रस्ट के अध्यक्ष डूंगरमल अग्रवाल, उपाध्यक्ष राजेंद्र प्रसाद अग्रवाल, सचिव मनोज चौधरी एवं प्रवक्ता संजय सर्राफ ने वट सावित्री पर्व एवं शनि देव जयंती के महत्व पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि वट सावित्री पर्व भारतीय संस्कृति में अखंड सौभाग्य, पति की दीर्घायु एवं पारिवारिक सुख-समृद्धि का प्रतीक माना जाता है। वहीं शनि देव जयंती न्याय, कर्म और धर्म के महत्व का संदेश देती है।उन्होंने कहा कि धार्मिक एवं सांस्कृतिक पर्व समाज में आस्था, नैतिक मूल्यों और आध्यात्मिक चेतना को मजबूत करने का कार्य करते हैं। ऐसे आयोजनों से समाज में सेवा, संस्कार और एकता की भावना को बढ़ावा मिलता है।उक्त जानकारी ट्रस्ट के प्रवक्ता सह मीडिया प्रभारी संजय सर्राफ ने दी। उक्त जानकारी श्री कृष्ण प्रणामी सेवा धाम ट्रस्ट के प्रवक्ता सह मीडिया प्रभारी संजय सर्राफ ने दी।

शनि देव जयंती 16 मई शनिवार को
Published / 2026-05-15 22:02:34
शनि देव जयंती 16 मई शनिवार को

शनि देव जयंती 16 मई शनिवार कोसत्य, न्याय, अनुशासन एवं अच्छे कर्मों की देता है प्रेरणा: संजय सर्राफएबीएन सोशल डेस्क। विश्व हिंदू परिषद झारखंड सेवा विभाग एवं श्री कृष्ण प्रणामी सेवा धाम ट्रस्ट के प्रांतीय प्रवक्ता संजय सर्राफ ने कहा है हिंदू धर्म में न्याय के देवता एवं कर्म फलदाता भगवान शनिदेव की जयंती अत्यंत श्रद्धा, आस्था और भक्ति के साथ मनाई जाती है। इस वर्ष शनि जयंती का पर्व 16 मई दिन शनिवार को पड़ रहा है, जो अपने आप में अत्यंत दुर्लभ एवं शुभ संयोग माना जा रहा है। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार शनिवार के दिन शनि जयंती का आना विशेष पुण्यदायी एवं कल्याणकारी माना जाता है। इस दिन भगवान शनिदेव की विधिवत पूजा-अर्चना करने से जीवन के कष्ट, बाधाएं एवं ग्रह दोष दूर होते हैं तथा सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है।धार्मिक मान्यता के अनुसार भगवान शनिदेव सूर्यदेव एवं माता छाया के पुत्र हैं। वे न्यायप्रिय देवता माने जाते हैं और मनुष्य को उसके कर्मों के अनुसार फल प्रदान करते हैं। शनि जयंती ज्येष्ठ अमावस्या के दिन मनाई जाती है। इस दिन शनिदेव का जन्म हुआ था। इसलिए श्रद्धालु इस दिन उपवास रखकर तेल, तिल, उड़द, काला वस्त्र एवं लोहे का दान करते हैं तथा शनि मंदिरों में विशेष पूजा-अर्चना करते हैं।शनि जयंती का मुख्य उद्देश्य मनुष्य को सत्य, न्याय, अनुशासन एवं अच्छे कर्मों की प्रेरणा देना है। शनिदेव को कठोर दंड देने वाला देवता माना जाता है, लेकिन वे सद्कर्म करने वालों पर विशेष कृपा भी बरसाते हैं। यही कारण है कि लोग इस दिन अपने जीवन की परेशानियों, आर्थिक संकट, रोग, शत्रु बाधा एवं शनि दोष से मुक्ति की कामना करते हुए पूजा-पाठ करते हैं। इस दिन पीपल वृक्ष की पूजा, सरसों के तेल का दीपक जलाना, शनि स्तोत्र एवं हनुमान चालीसा का पाठ करना अत्यंत शुभ माना जाता है। कई स्थानों पर भंडारा, दान-पुण्य एवं धार्मिक अनुष्ठानों का आयोजन भी किया जाता है। श्रद्धालु काले तिल एवं तेल से शनिदेव का अभिषेक कर आशीर्वाद प्राप्त करते हैं। शनि जयंती केवल धार्मिक पर्व ही नहीं, बल्कि आत्मचिंतन एवं कर्म सुधार का संदेश देने वाला पावन अवसर भी है। यह पर्व हमें सिखाता है कि जीवन में सदैव सत्य, ईमानदारी और धर्म के मार्ग पर चलना चाहिए। इस वर्ष शनिवार को पड़ रही शनि जयंती का यह अद्भुत संयोग श्रद्धालुओं के लिए विशेष फलदायी एवं मंगलकारी माना जा रहा है।

वट सावित्री व्रत 16 मई को, अखंड सौभाग्य, समर्पण और नारी शक्ति का पावन पर्व
Published / 2026-05-14 19:21:52
वट सावित्री व्रत 16 मई को, अखंड सौभाग्य, समर्पण और नारी शक्ति का पावन पर्व

यह पर्व त्याग, आत्मविश्वास प्रेम और कर्तव्य निष्ठा का देता है संदेश : संजय सर्राफ एबीएन सोशल डेस्क। विश्व हिंदू परिषद सेवा विभाग एवं श्री कृष्ण प्रणामी सेवा धाम ट्रस्ट के प्रांतीय प्रवक्ता संजय सर्राफ ने कहा है भारतीय संस्कृति में पति-पत्नी के अटूट प्रेम, समर्पण एवं अखंड सौभाग्य का प्रतीक माने जाने वाला वट सावित्री व्रत इस वर्ष 16 मई दिन शनिवार को श्रद्धा एवं भक्ति भाव के साथ मनाया जाएगा। यह पर्व मुख्य रूप से विवाहित महिलाओं द्वारा अपने पति की दीर्घायु, उत्तम स्वास्थ्य और सुख-समृद्धि की कामना हेतु रखा जाता है। भारतीय सनातन परंपरा में यह व्रत नारी के त्याग, तप, निष्ठा और अटूट विश्वास का अद्भुत उदाहरण माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार ज्येष्ठ मास की अमावस्या तिथि को मनाया जाने वाला यह पर्व वट वृक्ष एवं सावित्री-सत्यवान की पौराणिक कथा से जुड़ा हुआ है।कहा जाता है कि पतिव्रता सावित्री ने अपने दृढ़ संकल्प, तपस्या और बुद्धिमत्ता से यमराज से अपने पति सत्यवान के प्राण वापस प्राप्त कर लिये थे। तभी से यह व्रत अखंड सौभाग्य और वैवाहिक सुख का प्रतीक बन गया। इस दिन महिलाएं प्रात: स्नान कर नये वस्त्र धारण करती हैं तथा वट वृक्ष की पूजा-अर्चना करती हैं। वट वृक्ष के तने में कच्चा सूत या धागा लपेटकर परिक्रमा की जाती है और सावित्री-सत्यवान की कथा सुनी जाती है। व्रती महिलाएं निर्जला अथवा फलाहार व्रत रखकर अपने परिवार की सुख-शांति एवं पति की लंबी आयु की कामना करती हैं। वट वृक्ष को भारतीय संस्कृति में अत्यंत पवित्र एवं जीवनदायी माना गया है। इसकी विशालता, दीर्घायु और सदैव हरा-भरा रहने का गुण जीवन में स्थिरता, समृद्धि और निरंतरता का संदेश देता है। धार्मिक दृष्टि से वट वृक्ष में ब्रह्मा, विष्णु और महेश का वास माना गया है। यही कारण है कि इसकी पूजा का विशेष महत्व बताया गया है। वट सावित्री व्रत केवल धार्मिक अनुष्ठान भर नहीं, बल्कि भारतीय पारिवारिक मूल्यों, दांपत्य जीवन की मयार्दा और नारी शक्ति के सम्मान का भी प्रतीक है। यह पर्व महिलाओं को धैर्य, त्याग, आत्मविश्वास और कर्तव्यनिष्ठा की प्रेरणा देता है। साथ ही परिवार में प्रेम, विश्वास और आपसी सामंजस्य को मजबूत करने का संदेश भी देता है। वर्तमान समय में जब पारिवारिक संबंधों में दूरियां बढ़ती जा रही हैं, ऐसे में वट सावित्री जैसे पर्व भारतीय संस्कृति की जड़ों से जुड़े रहने और पारिवारिक मूल्यों को सहेजने की प्रेरणा देते हैं। यह पर्व समाज को यह संदेश देता है कि सच्चा प्रेम, समर्पण और विश्वास किसी भी कठिनाई को पराजित कर सकता है। आस्था, संस्कृति और पारिवारिक एकता का प्रतीक वट सावित्री व्रत भारतीय सनातन परंपरा की अमूल्य धरोहर है, जो आज भी समाज में नारी सम्मान, दांपत्य प्रेम और संस्कारों की ज्योति को प्रज्वलित किए हुए है।

श्री श्याम मन्दिर में धूमधाम से मनी अपरा एकादशी
Published / 2026-05-13 22:15:16
श्री श्याम मन्दिर में धूमधाम से मनी अपरा एकादशी

टीम एबीएन, रांची। अग्रसेन पथ स्थित श्री श्याम मन्दिर में दिनांक 13 मई 2026 को अपरा एकादशी उत्सव अत्यंत श्रद्धा भाव वातावरण में आयोजित किया गया। प्रातः से ही भक्तों की भारी भीड़ इस पावन दिवस पर श्री श्याम प्रभु का दर्शन करने के लिए उमड़ पड़ी।इस अवसर पर श्री श्याम प्रभु को सुंदर नवीन वस्त्र ( बागा ) पहनाकर स्वर्ण आभूषणों से अलंकृत कर जूही , बेला , रजनीगंधा , गुलाब, एवम तुलसी दल की मालाओं से अत्यंत मनमोहक श्रृंगार किया गया साथ ही मन्दिर में विराजमान बजरंगबली एवम शिव परिवार का भी इस अवसर पर विषश श्रृंगार किया गया । रात्रि 9 बजे से श्री श्याम प्रभु के जयकारों की बीच पावन ज्योत प्रज्वलित कर श्री श्याम मण्डल के सदस्यों द्वारा भावपूर्ण संकीर्तन प्रारम्भ किया गया । तुझको रिझाएंगे भजन तेरा सुनाएंगे, खूब सज्यों श्रृंगार खाटू वाले को, छोड़ेंगे ना हम तेरा द्वार ओ बाबा सात जन्म तक  हमें तो जी भी दिया श्याम बाबा ने दिया... इत्यादि भजनों की लय पर भक्तगण झूमते रहे । इस अवसर पर श्री श्याम प्रभु को विभिन्न प्रकार के मेवा - फल - खीर चूरमा व केसरिया दूध का भोग अर्पित किया गया । रात्रि 12 बजे महाआरती व प्रसाद वितरण के साथ कार्यक्रम का समापन किया गया ।आज के कार्यक्रम को सफल बनाने में ओम जोशी , रमेश सारस्वत , चन्द्र प्रकाश बागला , धीरज बंका , मनोज ढांढणनीयां, गौरव परसरामपुरिया , नितेश केजरीवाल ,  नितेश लाखोटिया , विकाश पाडिया, प्रियांश पोद्दार का सहयोग रहा। उक्त जानकारी श्री श्याम मण्डल श्री श्याम मन्दिर, अग्रसेन पथ के रांची के मीडिया प्रभारी सुमित पोद्दार (9835331112) ne दी।

श्री श्याम मन्दिर में धूमधाम से मनी अपरा एकादशी
Published / 2026-05-13 22:12:30
श्री श्याम मन्दिर में धूमधाम से मनी अपरा एकादशी

टीम एबीएन, रांची। अग्रसेन पथ स्थित श्री श्याम मन्दिर में दिनांक 13 मई 2026 को अपरा एकादशी उत्सव अत्यंत श्रद्धा भाव वातावरण में आयोजित किया गया। प्रातः से ही भक्तों की भारी भीड़ इस पावन दिवस पर श्री श्याम प्रभु का दर्शन करने के लिए उमड़ पड़ी।इस अवसर पर श्री श्याम प्रभु को सुंदर नवीन वस्त्र ( बागा ) पहनाकर स्वर्ण आभूषणों से अलंकृत कर जूही , बेला , रजनीगंधा , गुलाब, एवम तुलसी दल की मालाओं से अत्यंत मनमोहक श्रृंगार किया गया साथ ही मन्दिर में विराजमान बजरंगबली एवम शिव परिवार का भी इस अवसर पर विषश श्रृंगार किया गया । रात्रि 9 बजे से श्री श्याम प्रभु के जयकारों की बीच पावन ज्योत प्रज्वलित कर श्री श्याम मण्डल के सदस्यों द्वारा भावपूर्ण संकीर्तन प्रारम्भ किया गया । तुझको रिझाएंगे भजन तेरा सुनाएंगे, खूब सज्यों श्रृंगार खाटू वाले को, छोड़ेंगे ना हम तेरा द्वार ओ बाबा सात जन्म तक  हमें तो जी भी दिया श्याम बाबा ने दिया... इत्यादि भजनों की लय पर भक्तगण झूमते रहे । इस अवसर पर श्री श्याम प्रभु को विभिन्न प्रकार के मेवा - फल - खीर चूरमा व केसरिया दूध का भोग अर्पित किया गया । रात्रि 12 बजे महाआरती व प्रसाद वितरण के साथ कार्यक्रम का समापन किया गया ।आज के कार्यक्रम को सफल बनाने में ओम जोशी , रमेश सारस्वत , चन्द्र प्रकाश बागला , धीरज बंका , मनोज ढांढणनीयां, गौरव परसरामपुरिया , नितेश केजरीवाल ,  नितेश लाखोटिया , विकाश पाडिया, प्रियांश पोद्दार का सहयोग रहा। उक्त जानकारी श्री श्याम मण्डल श्री श्याम मन्दिर, अग्रसेन पथ के रांची के मीडिया प्रभारी सुमित पोद्दार (9835331112) ne दी।

श्री राधा कृष्ण प्रणामी मंदिर में श्रद्धा और भक्ति के साथ मनी अपरा एकादशी
Published / 2026-05-13 22:08:01
श्री राधा कृष्ण प्रणामी मंदिर में श्रद्धा और भक्ति के साथ मनी अपरा एकादशी

श्री राधा कृष्ण प्रणामी मंदिर में श्रद्धा और भक्ति के साथ मनी अपरा एकादशीटीम एबीएन, रांची। रांची के पुंदाग स्थित श्री राधा कृष्ण प्रणामी मंदिर परिसर में श्री कृष्ण प्रणामी सेवा धाम ट्रस्ट द्वारा अपरा एकादशी का पावन पर्व श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक उल्लास के साथ मनाया गया। संत शिरोमणि परमहंस स्वामी सदानंद महाराज के सानिध्य में आयोजित इस धार्मिक कार्यक्रम में श्रद्धालुओं ने भाग लेकर पुण्य लाभ प्राप्त कियाकार्यक्रम का शुभारंभ सुबह विशेष पूजा-अर्चना से हुआ। मंदिर परिसर में भक्तिमय वातावरण के बीच श्रद्धालुओं ने भगवान श्री हरि विष्णु एवं श्रीराधा-कृष्ण का स्मरण करते हुए सुख, शांति एवं समृद्धि की कामना की। पूरे मंदिर परिसर में भक्ति गीतों, मंत्रोच्चार और जयकारों से आध्यात्मिक वातावरण व्याप्त रहा।इस अवसर पर श्री राधा रानी का विशेष एवं अलौकिक श्रृंगार किया गया। उन्हें सुंदर पोशाक एवं जड़ित आभूषणों से सुसज्जित किया गया, जिसने श्रद्धालुओं का मन मोह लिया। दिव्य श्रृंगार से सजे श्री राधा रानी के दर्शन के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ी। मंदिर की भव्य सजावट और भजन संकीर्तन से भक्तिमय माहौल ने सभी को आध्यात्मिक आनंद से भर दिया।मंदिर के पुजारी पंडित अरविंद पांडे ने विधिवत मंत्रोच्चार के साथ पूजा-अर्चना संपन्न कराई, उन्होंने भगवान को लड्डू, मेवा, फल एवं केसरिया दूध का विशेष भोग अर्पित किया‌।श्रद्धालुओं ने भी भगवान के चरणों में पुष्प एवं प्रसाद अर्पित कर परिवार की सुख-समृद्धि और मंगलमय जीवन की कामना की।पूजा-अर्चना के पश्चात सामूहिक महाआरती का आयोजन किया गया।दीपों की जगमगाहट, घंटियों की मधुर ध्वनि और राधे-राधे एवं हरि बोल के जयघोष से पूरा मंदिर परिसर भक्तिमय हो उठा ।श्रद्धालुओं ने अत्यंत श्रद्धा और भक्ति भाव से आरती में भाग लिया तथा प्रभु कृपा प्राप्ति की प्रार्थना की।धार्मिक अनुष्ठान के उपरांत श्रद्धालुओं के बीच वेजिटेबल खिचड़ी प्रसाद का वितरण किया गया। बड़ी संख्या में उपस्थित भक्तों ने भक्ति भाव से प्रसाद ग्रहण किया। प्रसाद वितरण के दौरान सेवा और समर्पण की भावना का सुंदर दृश्य देखने को मिला। इस अवसर पर  ट्रस्ट के अध्यक्ष डूंगरमल अग्रवाल, उपाध्यक्ष राजेंद्र प्रसाद अग्रवाल एवं प्रवक्ता संजय सर्राफ ने कहा कि सनातन धर्म में अपरा एकादशी का विशेष महत्व है। यह एकादशी पापों का नाश करने वाली एवं मोक्ष प्रदान करने वाली मानी जाती है। इस दिन व्रत, पूजा, दान और भगवान विष्णु का स्मरण करने से व्यक्ति को आध्यात्मिक शांति एवं अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है। उन्होंने कहा कि एकादशी का व्रत केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक नहीं, बल्कि आत्मशुद्धि, संयम और सकारात्मक जीवनशैली का संदेश भी देता है। ऐसे धार्मिक आयोजन समाज में संस्कार, नैतिकता और आध्यात्मिक चेतना को मजबूत करते हैं, प्रवक्ता संजय सर्राफ ने बताया कि 16 मई को वट सावित्री पूजा के अवसर पर मंदिर में विशेष पूजा का आयोजन किया गया है। उक्त जानकारी श्री कृष्ण प्रणामी सेवा धाम ट्रस्ट के प्रवक्ता सह मीडिया प्रभारी संजय सर्राफ ने दी।

अपने कर्तव्यों का दृढ़ता पूर्वक पालन करना सिखाती है भागवत कथा : श्री गौरव कृष्ण पाठक
Published / 2026-05-13 21:10:42
अपने कर्तव्यों का दृढ़ता पूर्वक पालन करना सिखाती है भागवत कथा : श्री गौरव कृष्ण पाठक

अपने कर्तव्यों का दृढ़ता पूर्वक पालन करना सिखाती है भागवत कथा : श्री गौरव कृष्ण पाठकएबीएन न्यूज नेटवर्क, भंडरा। भंडरा के ठाकुरबाड़ी मंदिर प्रांगण में आयोजित भगवत प्रतिष्ठा सह श्रीमद्भागवत ज्ञान यज्ञ के पांचवें दिन  भागवत कथा में महाराज जी ने  गोवर्धन पूजा और भगवान कृष्ण की बाल लीलाओं का विस्तार से वर्णन किया।गोवर्धन लीला को कहते हुए उन्होंने बताया कि कैसे सात वर्षीय कन्हैया ने सात दिनों तक गोवर्धन पर्वत को अपनी सबसे छोटी उंगली पर धारण किया और इंद्र का अभिमान नष्ट किया। साथ ही इंद्र को अपने कर्तव्य पालन करने की शिक्षा दी और कहा कि अपनी सीमा का अतिक्रमण नहीं करना चाहिए। भक्ति का महत्व पर महाराज जी ने जोर दिया कि भगवान केवल प्रेम और निष्काम भक्ति के भूखे हैं। उन्होंने अपनी कथाओं में युवाओं को सनातन संस्कृति से जुड़ने पर भी जोर दिया। महाराज श्री ने गोवर्धन पूजा के माध्यम से प्रकृति संरक्षण का संदेश दिया और बताया कि कैसे भगवान इंद्र के अभिमान को तोड़कर भक्तों की रक्षा करते हैं।गोवर्धन पूजन का आध्यात्मिक अर्थ अहंकार का त्याग, प्रकृति के प्रति कृतज्ञता और निस्वार्थ भक्ति है। ये कथा सिखाती है कि ईश्वर के प्रति अटूट विश्वास रखने से विपत्तियां दूर होती हैं। प्रकृति का संरक्षण अनिवार्य है और गो-धन (गाय) की सेवा ही सच्चा धर्म है। यह आत्म-विश्वास और सामूहिक सामुदायिक भावना का प्रतीक है।श्रीकृष्ण ने ब्रजवासियों को कर्म में विश्वास करने और अपनी मेहनत से उपजे अन्न का सम्मान करने के लिए प्रेरित किया न कि केवल इंद्र की पूजा पर निर्भर रहने के लिए। शरणागति का प्रतीक गोवर्धन पर्वत के नीचे आश्रय लेकर व्रजवासियों ने ईश्वर की शरण में जाने का आध्यात्मिक  संदेश दिया। भागवत कथा में हजारों महिला पुरुष शामिल हुए।

भंडरा में निकली ठाकुर जी की भव्य शोभा यात्रा
Published / 2026-05-11 20:39:37
भंडरा में निकली ठाकुर जी की भव्य शोभा यात्रा

जयकारों से गूंजा नगर भागवत कथा के तीसरे दिन उमड़ा आस्था का सैलाब एबीएन न्यूज नेटवर्क, भंडरा। भंडरा में आयोजित सात दिवसीय भागवत प्रतिष्ठा सह श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान यज्ञ के चौथे दिन सोमवार को ठाकुर जी का भव्य नगर भ्रमण शोभा यात्रा निकाला गया। रथ पर सवार भगवान के अलौकिक स्वरूप के दर्शन कर हजारों भक्तों ने किया। कथा वाचक श्री गौरव कृष्ण शास्त्री जी के सानिध्य में शाम में ठाकुरबाड़ी परिसर से मनोहारी झांकी को फूलों से सुसज्जित रथ पर भगवान श्री कृष्ण को विराजमान कर शोभा यात्रा निकाला गया। ढोल-नगाड़ों, बैंड-बाजे, शंख-ध्वनि और हरे राम हरे कृष्ण के संकीर्तन के साथ नगर भ्रमण पर निकलें हजारों भक्त झूमते हुए भगवान को नगर भ्रमण कराया। शोभा यात्रा ठाकुरबाड़ी परिसर से शुरू होकर मुख्य बाजार, थाना चौक, ब्लॉक रोड होते हुए पूरे भंडरा नगर का भ्रमण करते हुए पुन: कथा स्थल पहुंची। रास्ते भर श्रद्धालुओं ने पुष्प वर्षा कर और आरती उतारकर ठाकुर जी का स्वागत किया। महिलाएं, बुजुर्ग, युवा और बच्चे सभी भक्ति भाव में लीन होकर राधे-राधे और जय श्री कृष्ण के जयकारे लगाते चल रहे थे। शोभा यात्रा के दौरान शांति और सुरक्षा व्यवस्था बनाये रखने के लिए भंडरा थाना प्रभारी मनोज कुमार गुप्ता के नेतृत्व में पुलिस बल तैनात रहा। स्वयंसेवकों ने भी भीड़ प्रबंधन में सहयोग किया। गर्मी को देखते हुए जगह-जगह शरबत और शीतल जल की व्यवस्था आयोजकों द्वारा की गयी थी। इस दौरान आयोजक राधा मोहन शर्मा, किशोरी मोहन शर्मा, ईश्वरी शर्मा, मोहन दुबे आदि उपस्थित थे।

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