एबीएन सोशल डेस्क। आज 9 कुंडीय गायत्री महायज्ञ आयोजन का शुभारंभ प्रात:काल 8 बजे से सर्वतोभद्र देवपूजन अनुष्ठान से हुआ। अच्छी संख्या में हर एक कुण्ड पर पति पत्नी जोड़ी की भी उपस्थिति रही। पूजन पद्धति में तैंतीस दैवशक्तियों का आवाहन नमन वंदन षोडशोपचार पूजन व स्वस्तिवाचन पाठ हुआ।सायंकालीन सत्र में लोक कल्याण जिज्ञासा प्रकरण में भगवान विष्णु एवं नारद मध्य विशेष सद्ज्ञान तत्व संवाद पर चर्चा व कथा हुई। कथावाचक संतोष कुमार संगम ने कहा कि देवर्षि नारद को भगवान की विशेष अनुकम्पा मिली थी, क्यों कि उन्होंने परहित को अपना जीवनोद्देश्य माना था। बताया कि परमार्थ में सच्ची लगन हो तो पूण्य अर्जन के अतिरिक्त आत्म कल्याण का भी लाभ मिलता है। इस विषय पर अनेक महत्वपूर्ण प्राचीन कालीन, शास्त्रीय और सामयिक घटना क्रम की कथा सुनायी। आधुनिक काल की महा चेतना का अवतार, उनकी प्रतिज्ञानुसार ऋतंभरा प्रज्ञा गायत्री एवं मंगलमय प्रज्ञावतार युगपुरुष युग सृजेता, उनका लीला संदोह, सही सच्ची भक्ति व भक्तों के लिए आज की सामयिक समस्या समाधान, भगवान विष्णु व देवर्षि नारद के परामर्श, मार्गदर्शन और पृथ्वी लोक पर क्रियान्वयन पर अनेक उदाहरण दृष्टांत पेश करके बताया। प्रथम रामायण सीरियल निर्माण के संदर्भ में रामानंद सागर के साथ घटी घटना, अनुभूति और गुरुवरश्रीपूज्यवर के साथ विशेष भेंट मुलाकात, परस्पर गहन संवाद पर प्रकाश डालकर विस्तार से बताया। आगे चर्चा में बताया कि गुरुदेव श्रीप्रज्ञावतार की लिखी 19 वें पुराण पावन प्रज्ञा पुराण कथामृतम में रामायण काल, महाभारत काल में और प्रज्ञा पुराण कथामृतम में आधुनिक समस्याओं के शत प्रतिशत समाधान के सूत्र हैं। तब के रावणवृति और आज के तुलनात्मक परिस्थिति विश्लेषण कर प्रज्ञागीत गायन माध्यम से बताया कि आदमी को आदमी सुहाता नहीं अचिंत्य चिंतन, अनैतिक आचरण व अनास्था का दौर, प्रेम का अभाव, प्रकृति का कोप आदि कई विषय पर स्वाध्याय करने का परामर्श दिया। गंगा यमुना व त्रिवेणी से निकली एक एक अक्षर गा, य, त्री पर चर्चा करते हुए गयान् प्राणान् त्रायते सा गायत्री महामंत्र, यज्ञीय विधान, संस्कार प्रकरण पर विशेष ध्यानाकर्षित कर इसकी आवश्यकता व महत्ता पर प्रकाश डाला। उक्त जानकारी गायत्री परिवार के जय नारायण प्रसाद ने दी।
टीम एबीएन, रांची। रांची के पुंदाग स्थित श्री कृष्ण प्रणामी सेवा धाम ट्रस्ट द्वारा संत शिरोमणि परमहंस स्वामी सदानंद महाराज के सानिध्य में पुरुषोत्तम मास की पावन परमा एकादशी श्रद्धा, भक्ति एवं उल्लासपूर्ण वातावरण में मनायी गयी। मौके पर मंदिर परिसर में विशेष धार्मिक अनुष्ठान, पूजा-अर्चना, भजन-कीर्तन एवं सामूहिक आरती का आयोजन किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लेकर पुण्य लाभ अर्जित किया। कार्यक्रम का शुभारंभ वैदिक मंत्रोच्चार एवं विशेष पूजा-अर्चना के साथ हुआ। मंदिर के पुजारी पंडित अरविंद पांडे ने विधि-विधान से भगवान की आराधना संपन्न करायी तथा प्रसाद का भोग अर्पित किया। परमा एकादशी के पावन अवसर पर श्री राधा रानी का अलौकिक एवं मनमोहक श्रृंगार नए पोशाक एवं जड़ित आभूषणों से किया गया। सुसज्जित दिव्य स्वरूप के दर्शन कर श्रद्धालु भावविभोर हो उठे और उन्होंने अपने परिवार तथा समाज के सुख, शांति एवं समृद्धि की कामना की। धार्मिक आयोजन के दौरान भजन-कीर्तन एवं सामूहिक आरती ने पूरे वातावरण को भक्तिमय बना दिया। श्रद्धालुओं ने भगवान के भजनों का रसास्वादन करते हुए। आध्यात्मिक आनंद की अनुभूति की। मंदिर परिसर में गूंजते भक्ति गीतों एवं मंत्रोच्चार ने श्रद्धा और आस्था का अद्भुत संगम प्रस्तुत किया। अनुष्ठान के उपरांत सैकड़ों श्रद्धालुओं के बीच वेजिटेबल खिचड़ी प्रसाद का वितरण किया गया श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण कर सेवा एवं समर्पण की इस पावन परंपरा की सराहना की। ट्रस्ट द्वारा आयोजित यह कार्यक्रम सामाजिक सद्भाव, धार्मिक चेतना और भारतीय संस्कृति के संरक्षण का भी प्रेरणादायी संदेश देता रहा। मौके पर ट्रस्ट के अध्यक्ष डूंगरमल अग्रवाल, उपाध्यक्ष राजेंद्र प्रसाद अग्रवाल, सचिव मनोज चौधरी एवं प्रवक्ता संजय सर्राफ ने परमा एकादशी की महत्ता एवं आध्यात्मिक महत्व पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि पुरुषोत्तम मास में आने वाली परमा एकादशी अत्यंत पुण्यदायी मानी जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन उपवास, जप, तप, दान और भगवान विष्णु की आराधना करने से जीवन के कष्ट दूर होते हैं तथा सुख, समृद्धि और आध्यात्मिक उन्नति का मार्ग प्रशस्त होता है।
श्रद्धा और पवित्रता से भरी पूरी पात्रता ही धन्य होती है : यज्ञ पुरोहित टीम एबीएन, रांची। हरमू हाउसिंग कॉलोनी स्थित मदर टेरेसा पार्क में 5 दिवसीय गायत्री महायज्ञ एवं पावन प्रज्ञा पुराण कथामृतम आयोजन का शुभारंभ गुरुवार से मंगलकलश पूजन-अर्चन व भव्य शोभा यात्रा महिला मंडल संचालन टीम नायिका सुषमा दीदी के सानिध्य व प्रतिनिधित्व में सुबह 9 बजे निकाली गयी। मंगल कलश रथ-दर्शन व यात्रा पूजन स्थल से निकलकर आसपास मुख्य क्षेत्र का भ्रमण कर गायत्री महामंत्र का सस्वर पाठ, प्रज्ञागीत, सद्विचार, सद्भाव संवर्धन, सद्वाक्य स्टीकर, बैनर, पोस्टर आदि अनेक स्लोगन पट्टी लेकर जयघोष तथा शंखनाद से गुंजायमान करते शोभा यात्रा निकाली गयी। फिर पूजा स्थल वापस आकर सभी ने कलश देवता की आरती की। पूजन प्रारंभ गायत्री शक्तिपीठ सेक्टर टू की व्यवस्था टीम और सहायक जोन समन्वयक आजादी सिंह के नेतृत्व एवं मार्गदर्शन में परिव्राजक टीम नायक प्रमोद कुमार और सहायक, गायक टीम के सहयोग में वैदिक विधान से किया गया। पुरोहित प्रमोद कुमार ने मंगल द्रव्य से पूर्ण कलश पूजन व शोभायात्रा की महत्ता, प्रज्ञागीत भजन, शोभा यात्रा की विशेषता, आवश्यकता पर प्रकाश डालकर बताया कि श्रद्धा व पवित्रता से भरी पूरी पात्रता ही धन्य होती है। पात्रता को मंगलमय गुणों से विभूषित किया जाता है। बताया कि कलश विश्व ब्रह्मांड और विराट ब्रह्म, भू पिंड का प्रतीक है। यह शान्ति व सृजन का संदेशवाहक है। आज से रोज सायंकाल में देवमंच से प्रज्ञा भजन-कीर्तन और प्रज्ञा पुराण कथामृतम का पाठ होगा। कल सुबह से विस्तृत देव पूजन-अर्चन, षोडशोपचार व स्वस्तिवाचन पाठ एवं यज्ञीय अनुष्ठान विधान तथा नि:शुल्क संस्कार आदि कार्यक्रम शामिल रहेगा। उक्त जानकारी गायत्री परिवार के कुणाल कुमार और जयनारायण प्रसाद ने दी।
टीम एबीएन, रांची। अग्रसेन पथ स्थित श्री श्याम मंदिर में दिनांक 11 जून 2026 को परमा एकादशी उत्सव अत्यंत श्रद्धा व भक्तिमय वातावरण में आयोजित किया गया। प्रात: श्री श्याम प्रभु को नवीन वस्त्र (बागा) पहनाकर कर स्वर्ण आभूषणों से अलंकृत कर गुलाब, रजनीगंधा, बेला, जरबेरा, आॅर्किड, गेंदा, तुलसी व के ताजे एवम खुशबूदार फूलों से श्री श्याम प्रभु का दिव्य शीश का अनुपम श्रृंगार किया गया। साथ ही मन्दिर परिसर में विराजमान बजरंगबली एवं शिव परिवार का भी इस अवसर पर विषेश श्रृंगार किया गया। प्रात: काल में श्रृंगार आरती से ही भगतों की भीड़ श्री श्याम दर्शन के लिए आतुर थी। रात्रि 9 बजे श्री श्याम प्रभु की पावन ज्योत प्रज्वलित कर श्री श्याम मण्डल के सदस्यों द्वारा सर्व प्रथम गणेश वन्दना के साथ श्याम रस से ओतप्रोत संगीतमय संकीर्तन का शुभारम्भ किया गया। मन मस्त हुआ मेरे श्याम दरस तेरा पा करके, धन घड़ी भाग्य हमारा लीले चढ़ श्री श्याम पधारया, अनोखा जो भी हुआ श्याम के द्वार हुआ, मोर छड़ी लहराई रे रसिया ओ संवारा, श्याम तेरे भरोसे मेरा ये परिवार है... इत्यादि भजनों की लय पर झूमते हुए भक्तगण ज्योत में आहुति प्रदान कर रहे थे। मौके पर श्री श्याम प्रभु को विभिन्न प्रकार के मिष्ठान- फल- मेवा- रबड़ी व केसरिया दूध का भोग निवेदित किया गया। रात्रि 12 बजे महाआरती व प्रसाद वितरण के साथ कार्यक्रम का समापन किया गया।आज के इस कार्यक्रम को सफल बनाने में रमेश सारस्वत, ओम जोशी, चंद्र प्रकाश बागला, धीरज बंका, विवेक ढांढनीयां, विकाश पाडिया, नितेश केजरीवाल, जीतेश अग्रवाल, अनुराग पोद्दार, नितेश लाखोटिया, ज्ञान प्रकाश बागला का विषेश सहयोग रहा। उक्त जानकारी श्री श्याम मंडल श्री श्याम मंदिर, अग्रसेन पथ रांची के मीडिया प्रभारी सुमित पोद्दार (9835331112) ने दी।
एबीएन न्यूज नेटवर्क, धनबाद। सरस्वती विद्या मंदिर सिनीडीह, धनबाद में विश्व हिंदू परिषद के 10 दिवसीय और बजरंग दल के 7 दिवसीय प्रांतीय प्रशिक्षण वर्ग का भव्य समापन हुआ। कार्यक्रम का शुभारंभ विश्व हिंदू परिषद के केंद्रीय प्रन्यासी मंडल के सदस्य माननीय जगन्नाथ शाही, अतिथि के रूप में उपस्थित बीसीसीएल के अधिकारी सत्यकाम आनंद, प्रांत मंत्री मिथिलेश्वर मिश्र, प्रांत सहमंत्री मनोज पोद्दार, प्रांत बजरंग दल संयोजक रंगनाथ महतो, वर्ग प्रमुख द्वारिका तिवारी, जिला अध्यक्ष विपिन मंडल एवं विभाग सह मंत्री विकास गिरी ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्ज्वलित कर किया। बजरंग दल के शिक्षार्थियों ने 7 दिनों की कठिन साधना के साथ शारीरिक और बौद्धिक प्रशिक्षण प्राप्त किया। प्रशिक्षणार्थियों द्वारा समापन समारोह में दंड, नियुद्ध, यष्टि, बाधा और सामूहिक योग के आकर्षक एवं शौर्यपूर्ण प्रदर्शन ने उपस्थित जनमानस को मंत्रमुग्ध कर दिया। मौके पर मुख्य वक्ता के रूप में उपस्थित जगन्नाथ शाही ने कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए कहा कि विश्व हिंदू परिषद भगवान राम और कृष्ण की प्रेरणाओं पर चलने वाला संगठन है, इसीलिए विहिप का ध्येय वाक्य धर्मो रक्षति रक्षित: है। वहीं, बजरंग दल सेवा, सुरक्षा और संस्कार के मार्ग पर आगे बढ़ता है। रामकाज कीन्हें बिना मोहि कहां विश्राम हम सभी कार्यकर्ताओं का मूल ध्येय होना चाहिए। उन्होंने आगे कहा कि जिस प्रकार भगवान श्री राम ने बिना किसी बड़े साधन के वन जाकर, अपने कुशल नेतृत्व से वनवासियों और जीव-जंतुओं को संगठित कर दुराचारी शक्तियों का विनाश किया, वही प्रेरणा हमें आज भी समाज को संगठित करने के लिए लेनी चाहिए। उन्होंने रामराज के आदर्शों, केवट और निषाद राज से मित्रता, गिलहरी के योगदान, जटायु के बलिदान और भरत-मिलाप के प्रेम व त्याग का उदाहरण देते हुए कार्यकर्ताओं को धर्म के मार्ग पर चलते हुए राष्ट्ररक्षा का संकल्प दिलाया। वन गमन कर अपने त्यागमय जीवन का आदर्श प्रभु श्रीराम ने रखा। सद्भाव और समरसता का मार्ग बताया। श्री शाही ने कहा प्रभु श्रीराम और श्री कृष्ण एक कुशल संगठन कर्ता थे। संगठनकर्ता को राष्ट्र के सुख में अपना सुख और राष्ट्र के दुख में अपना दुख दिखता है। परंतु यह दुख देखकर वह निराश नहीं होता बल्कि पूरी शक्ति के साथ दुख और बाधा मिटाने के काम में लगता है। प्रभु श्रीराम ने धरती को निशाचर विहिन करने का संकल्प लिया था और उसे पूर्ण किया। विश्व हिंदू परिषद के प्रांत मंत्री मिथिलेश्वर मिश्र ने अपने स्वागत उद्बोधन में कहा यह प्रशिक्षण कार्यक्रम प्रत्येक वर्ष अलग-अलग जिलों में आयोजित किया जाता है जिसमें प्रशिक्षण प्राप्त कर कार्यकर्ता राष्ट्र एवं धर्म की रक्षा तथा समाज सेवा के कार्य में सक्रिय योगदान देते हैं। परिषद वर्ग पालक एवं प्रांत सहमंत्री मनोज पोद्दार तथा प्रांत संयोजक रंगनाथ महतो ने वर्गों में उपस्थिति तथा प्रशिक्षण कार्यक्रमों का विवरण रखा। समारोह का कुशल संचालन प्रांत गोरक्षा प्रमुख कमलेश सिंह ने किया। धन्यवाद ज्ञापन वर्ग के सह व्यवस्थाप्रमुख धनबाद विभाग सहमंत्री सोनू गिरी ने किया। मौके पर विश्व हिंदू परिषद के प्रांत संगठन मंत्री चितरंजन कुमार, प्रांत सेवा सहप्रमुख विनय कुमार, प्रांत विशेष संपर्क सह प्रमुख संतोष प्रसाद, धनबाद विभाग संयोजक अजीत पांडे, धनबाद ग्रामीण जिला मंत्री विकास कुमार, धनबाद महानगर मंत्री आनंद कुमार, जिला सहमंत्री लल्लु झा, प्रांत बलोपासना प्रमुख रवि वर्मा, प्रांत विद्यार्थी प्रमुख अमित पासवान, सहप्रमुख अमर प्रसाद, चंदन कुमार, अशोक कुमार, हरे राम सहित सैकड़ों की संख्या में कार्यकर्ता और स्थानीय गणमान्य लोग उपस्थित रहे। उक्त जानकारी विश्व हिंदू परिषद, झारखंड के प्रचार प्रसार प्रांत प्रमुख प्रकाश रंजन ने दी।
आध्यात्मिक उन्नति, पुण्य और भगवान विष्णु की कृपा प्राप्ति का दुर्लभ पर्व : संजय सर्राफ एबीएन सोशल डेस्क। विश्व हिंदू परिषद सेवा विभाग एवं श्री कृष्ण प्रणामी सेवा धाम ट्रस्ट के प्रांतीय प्रवक्ता संजय सर्राफ ने कहा है कि सनातन धर्म में एकादशी व्रतों का विशेष महत्व माना गया है, किंतु परमा एकादशी का स्थान अत्यंत विशिष्ट है। यह एकादशी केवल अधिक मास (पुरुषोत्तम मास) में आती है, जो लगभग तीन वर्ष में एक बार पड़ता है। इस वर्ष परमा एकादशी 11 जून दिन गुरुवार को मनायी जायेगी। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार यह व्रत भगवान विष्णु एवं माता लक्ष्मी की आराधना के लिए समर्पित है और इसे करने से मनुष्य को आध्यात्मिक शांति, सुख-समृद्धि तथा पापों से मुक्ति का मार्ग प्राप्त होता है पौराणिक कथाओं में वर्णित है कि परमा एकादशी व्रत का पालन करने से जीवन की अनेक बाधाएं दूर होती हैं और व्यक्ति के भीतर संयम, भक्ति तथा सदाचार की भावना विकसित होती है।परमा शब्द का अर्थ है-श्रेष्ठ या सर्वोच्च। इसी कारण यह एकादशी अत्यंत पुण्यदायी मानी गयी है। धार्मिक ग्रंथों के अनुसार अधिक मास में किये गये जप, तप, दान और व्रत का फल कई गुना बढ़ जाता है। इस दिन प्रात: स्नान कर भगवान विष्णु का पूजन, तुलसी अर्पण, विष्णु सहस्रनाम का पाठ तथा व्रत का संकल्प लिया जाता है। श्रद्धालु अपनी श्रद्धा और सामर्थ्य के अनुसार उपवास रखते हैं तथा गरीबों और जरूरतमंदों को अन्न, वस्त्र एवं अन्य उपयोगी वस्तुओं का दान करते हैं। धार्मिक परंपराओं में दान और सेवा को इस व्रत का महत्वपूर्ण अंग माना गया है। परमा एकादशी का मुख्य उद्देश्य केवल उपवास करना नहीं, बल्कि आत्मशुद्धि, आत्मसंयम और मानव सेवा की भावना को जागृत करना है। यह पर्व हमें लोभ, क्रोध और अहंकार जैसी नकारात्मक प्रवृत्तियों से दूर रहकर सत्य, करुणा और धर्म के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है। साथ ही यह संदेश भी देता है कि आध्यात्मिक उन्नति के लिए भक्ति के साथ-साथ सद्कर्म और परोपकार भी आवश्यक हैं। आज के भौतिकवादी युग में परमा एकादशी का महत्व और भी बढ़ जाता है। यह पर्व हमें जीवन में संतुलन, नैतिकता और आध्यात्मिक चेतना बनाये रखने की प्रेरणा देता है। श्रद्धा और विश्वास के साथ किया गया यह व्रत व्यक्ति, परिवार और समाज में सुख, शांति तथा सकारात्मक ऊर्जा का संचार करने वाला माना गया है। यही कारण है कि परमा एकादशी को सनातन संस्कृति के सबसे पावन और कल्याणकारी व्रतों में गिना जाता है।
कृष्ण-सुदामा की मित्रता का अमर संदेश : सच्ची दोस्ती में नहीं होता धन-दौलत का महत्व काली कमली वाला मेरा यार है मेरा मनमोहन मुरली वाला है.. एबीएन सोशल डेस्क। महाराजा अग्रसेन भवन अपर बाजार में आयोजित सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा का श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक उल्लास के बीच विश्राम हो गया। समापन दिवस पर कथा व्यास आचार्य पं अश्विनी मिश्र ने भगवान श्रीकृष्ण और सुदामा की अमर मित्रता का भावपूर्ण प्रसंग सुनाकर श्रद्धालुओं को भावविभोर कर दिया।उन्होंने सात दिवसीय कथा का संक्षिप्त व्याख्यान दिया सनातन धर्म, द्रौपदी के चीर हरण, छल, कपट, ग्रहस्थ जीवन, बेटियों के स्नेह, न्याय व्यवस्था पर भी प्रकाश डाला। कथावाचक ने कहा कि सच्ची मित्रता कभी धन, पद, प्रतिष्ठा या वैभव पर आधारित नहीं होती, बल्कि उसका वास्तविक आधार प्रेम, विश्वास, सम्मान और समर्पण होता है, उन्होंने श्रीकृष्ण-सुदामा की मित्रता का उदाहरण देते हुए बताया कि विपरीत परिस्थितियों और गरीबी के बावजूद सुदामा ने कभी अपनी मित्रता का लाभ उठाने का प्रयास नहीं किया तथा अपने स्वाभिमान और मित्रता की गरिमा को बनाये रखा।उन्होंने कहा कि द्वारकाधीश बनने के बाद भी भगवान श्रीकृष्ण अपने बाल सखा सुदामा को नहीं भूले। जब सुदामा द्वारका पहुंचे तो श्रीकृष्ण ने उन्हें गले लगाकर सम्मान दिया और पूरी दुनिया के सामने सच्ची मित्रता का आदर्श प्रस्तुत किया। कथावाचक ने कहा कि सच्चा मित्र वही होता है जो सुख-दुख में साथ निभाये, विपरीत परिस्थितियों में भी मित्र का सम्मान बनाए रखे और कभी उसका साथ न छोड़े। उन्होंने कहा कि कृष्ण-सुदामा की मित्रता आज भी समाज के लिए प्रेरणा का स्रोत है। इस दौरान सांवरिया है सेठ म्हारी राधा सेठानी है... काली कमली वाला मेरा यार है मेरा मनमोहन मुरली वाला है... जैसे भजनों पर श्रद्धालु भक्त के सागर में गोता लगाते रहे। इस दौरान राधे राधे से पुरा कार्यक्रम स्थल गूंजता रहा। आगे उन्होंने कहा कि लोगों में नफरत बढ़ रही है डाकघर प्रेम के कारण चलता था और कचहरी नफरत कि वजह से चलती है। वर्तमान में डाकघर कम हो रहे हैं और नफरत बढ़ने से प्रेम कम हो रहा है। सबसे अधिक पुण्य कमाने वाले मंत्री, चिकित्सक और शिक्षक ये सभी देश का निर्माण करते हैं। इनको अपने कर्म पूरे ईमानदारी से करने चाहिए तभी बिकास होगा। कार्यक्रम के समापन पर हवन पूजन किया गया। भागवत का मूल पाठ आचार्य बिष्णु शर्मा ने सहयोग देवनारायण शास्त्री, अमन शर्मा, संगीत की प्रस्तुति नेहाल शर्मा, अमन झा, प्रताप कुमार, लव कुश शर्मा ने दिया। कार्यक्रम में सुदामा कि भूमिका में कृत अग्रवाल, कृष्ण की भुमिका में पलक अग्रवाल और रुक्मिणी कि भूमिका में रिद्धि मंगल ने निभायी। कथा के समापन पर श्रद्धालुओं के बीच सुमन अरविंद कुमार मंगल, मेद्या अर्पित मंगल ने प्रसाद का वितरण किया। पूरे कथा स्थल पर भक्ति और श्रद्धा का वातावरण बना रहा तथा श्रद्धालुओं ने धर्म लाभ प्राप्त किया।मौके पर पदमा देवी, रेणु मंगल, आशा मंगल, आशा देवी, सरिता देवी, अंजना देवी, रेखा देवी, पिस्ता अग्रवाल, सुशीला देवी, निर्मला गोयल, वीणा देवी, पिंकी अग्रवाल, पायल अग्रवाल, अनीता देवी, विनीता केजरीवाल, दीपाली भदानी, संजय अग्रवाल, सुशील अग्रवाल, शुभाष मंगल, अरविंद चौधरी, विनोद अग्रवाल, केदारमल अग्रवाल, मुरारी लाल, दामोदर अग्रवाल, जगदीश अग्रवाल, पंडित रत्नेश मिश्रा और गोपाल मिश्रा, वैदिक अग्रवाल सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु भक्त उपस्थित रहे। कथा के समापन के साथ ही राधे -राधे के जयकारों से पूरा वातावरण भक्तिमय हो उठा। श्री कृष्ण प्रणामी सेवा धाम ट्रस्ट के प्रवक्ता संजय सर्राफ ने सात दिवसीय श्रीमद् भागवत कथा के सफल आयोजन के लिए मंगल परिवार को बहुत-बहुत शुभकामनाएं दी।
भूमि में बीज ही नहीं संस्कार भी उपजते हैं : सहायक जोन समन्वयक एबीएन सोशल डेस्क (रांची)। गायत्री परिवार युगतीर्थ शक्तिपीठ सेक्टर टू के सान्निध्य में रविवार को सुबह से देर सायंकाल तक 3 विशेष कार्यक्रम आयोजन किये गये, जिनकी सभी उपस्थितजनों ने सराहनीय बताया और तदनुरूप वातावरण विस्तार के अनुयाज कार्यक्रम में सहयोगात्मक विचार व्यक्त किये। हरमू हाउसिंग कॉलोनी स्थित मदर टेरेसा पार्क में 5 दिवसीय 11 जून 2026 से आयोजित होने वाली श्रीमद्भागवत पावन प्रज्ञा पुराण कथामृतम् के लिए गायत्री परिवार शांतिकुञ्ज के मार्गदर्शन युगतीर्थ शांतिकुञ्ज के मार्गदर्शन में यहां गायत्री शक्तिपीठ सेक्टर टू पुरोहित टीम एवं महिलामंडल ने भूमिपूजन यज्ञीय विधान तथा युग निर्माण लाल मशाल का पूजन-अर्चन कर झंडोत्तोलन किया। मौके पर गायत्री परिवार झारखंड प्रांत सहायक जोन समन्वयक ने भूमि पूजन दौरान बताया कि भारतीय संस्कृति में प्रत्येक धर्म कृत्य व यज्ञीय आयोजन पूर्व भूमिपूजन शुभ कर्म आवश्यक माना गया है। कहा कि भूमि में बीज ही नहीं संस्कार भी उपजते हैं। इस अनुष्ठान विधान उपरान्त इसके प्रचार प्रसार हेतु आस-पास क्षेत्र तथा नगर वासियों को भाव भरा आमंत्रण देने इस पावन पवित्र पुण्यकर्म में भागीदारी कर कथामृतम् श्रवण कर लाभान्वित होने के कार्यकर्ताओं को आवाह्न किया। बताया कि गुरुवर श्रीपूज्यवर का रचित यह 19वां पावन प्रज्ञा पुराण कथा आज के मानव जीवन, परिवार व समाज में चल रही अनेकानेक समस्याओं के युगानुकुल समाधान और आध्यात्मिक दृष्टिकोण से प्रखर तत्वों का श्रवण करने का मौका मिलेगा। इस दुर्लभ अवसर का लाभ उठाने के लिए जन-जन की भागीदारी के लिए सभी को सादर आमंत्रित किया गया। यह कार्यक्रम दिनांक 11 से 15 जून तक 5 दिवसीय आयोजन निर्धारित है। इसके पूर्व सुबह 7-9 बजे मध्य 28वां चलें गांव की ओर ग्राम तीर्थ योजना अंतर्गत गायत्री साधकों व भाई-बहनों ने कामड़े क्षेत्र में जनसंपर्क अभियान करके घर-घर, जन-जन को शांतिकुञ्ज का संदेश में अखंड ज्योति मासिक पत्रिका, युग निर्माण योजना मासिक, हारिये न हिम्मत, गायत्री चालीसा, स्थापना फोटो, प्रज्ञा अभियान पाक्षिक आदि पाकेट बुक्स स्वाध्याय हेतु प्रदान किये। तीसरे चरण में देर संध्याकाल में धूर्वा बसस्टैंड गायत्री प्रज्ञापीठ में स्थानीय नवगठित ट्रस्ट एवं नगरी प्रखंड समन्वय समिति सदस्यगणों का सम्मान समारोह गोष्ठी मुख्य ट्रस्टी मनोज कुमार राय की अध्यक्षता में हुई। उसमें 10 विषयों पर चर्चा व विचार-विमर्श किये गये। गोष्ठी में रांची जिला समन्वयक, युवा सह समन्वयक तथा प्रांतीय सहायक जोन समन्वयक की उपस्थिति में सभी पदधारी, प्रभारी प्रतिनिधिगणों को कर्तव्य व उत्तरदायित्व निर्वाह का बोध कराया तथा सभी को अनेक प्रपत्र व शांतिकुञ्ज मुख्यालय से प्राप्त दीक्षा का आशीर्वाद पत्र तथा गतवर्ष ज्योति कलश रथ यात्रा संबन्धित आशीर्वादी पत्र सहित मंत्र पट्टा एवं कई भेंट चिह्न प्रदान कर अनुयाज क्रम में निर्धारित कार्यक्रम का महत्व बताकर मार्गदर्शन कर सम्मानित किये गये। उक्त जानकारी मुख्य ट्रस्टी प्रज्ञापीठ बस स्टैंड धुर्वा के मनोज कुमार राय और रांची के जिला समन्वयक जय नारायण प्रसाद ने दी।
रांची : 269वें अन्नपूर्णा सेवा में उमड़ा आस्था का सागर, हजारों श्रद्धालुओं ने ग्रहण किया महाप्रसाद राधे राधे बोल मनवा, राधे राधे बोल, राधा नाम अमृत है प्यारा.. एबीएन सोशल डेस्क। परम पूज्य डॉ संत शिरोमणि स्वामी सदानंद महाराज जी के पावन सानिध्य में एमआरएस श्री कृष्ण प्रणामी सेवा धाम ट्रस्ट द्वारा संचालित श्री कृष्ण प्रणामी मंगल राधिका सदानंद सेवाधाम एवं श्री राधा-कृष्ण प्रणामी मंदिर पुंदाग में रविवार को 269 वें श्री कृष्ण प्रणामी अन्नपूर्णा सेवा महाप्रसाद का भव्य एवं श्रद्धामय आयोजन किया गया। इस अवसर पर संपूर्ण मंदिर परिसर भक्ति, सेवा और आध्यात्मिक उल्लास के वातावरण से सराबोर रहा। हजारों श्रद्धालुओं ने भगवान श्री राधा-कृष्ण के दर्शन कर पुण्य लाभ प्राप्त किया तथा महाप्रसाद ग्रहण कर स्वयं को धन्य महसूस किया। कार्यक्रम के दौरान भगवान श्री राधा-कृष्ण का दिव्य श्रृंगार किया गया। विशेष रूप से श्री राधारानी को आकर्षक एवं मनोहारी आभूषणों तथा पुष्पों से अलंकृत किया गया, जिसकी भव्यता ने श्रद्धालुओं का मन मोह लिया। मंदिर में सुबह से ही भक्तों की लंबी कतारें लगी रहीं और पूरे दिन श्रद्धालुओं का आगमन निरंतर जारी रहा। दोपहर 12 बजे मंदिर के पुजारी अरविंद कुमार पांडेय द्वारा वैदिक मंत्रोच्चार एवं विधि-विधान के साथ भगवान को महाप्रसाद अर्पित किया गया। पूजा-अर्चना के उपरांत श्रद्धालुओं के बीच महाप्रसाद वितरण प्रारंभ हुआ। महाप्रसाद में मसालेदार वेजिटेबलखिचड़ी, ताजगी से भरपूर लीची शरबत, सत्तू पानी, शीतल जल एवं आलू चिप्स का वितरण किया गया। मंदिर परिसर में उपस्थित लगभग दो हजार से अधिक श्रद्धालुओं ने श्रद्धापूर्वक महाप्रसाद ग्रहण किया। इस अवसर पर ट्रस्ट के सुप्रसिद्ध भजन गायक मनीष सोनी ने अपने मधुर कंठ से एक से बढ़कर एक भक्तिमय भजनों की प्रस्तुति दी। उनके गाए भजनों- राधे-राधे बोल मनवा,राधे-राधे बोल,राधा नाम अमृत है प्यारा, जीवन कर दे अनमोल.. अन्नपूर्णा मैया की महिमा, जग में सबसे न्यारी, जो भी दर पर शीश झुकाए,भर दे झोली सारी.. राधे-कृष्ण की ज्योति जले, हर मन मंदिर में, प्रेम, दया और सेवा बरसे, जन-जन के अंतर में.. की मधुर स्वर लहरियों पर श्रद्धालु भावविभोर होकर झूम उठे और पूरा वातावरण राधा-कृष्ण की भक्ति में डूब गया। भजन-संध्या के उपरांत सामूहिक महाआरती का आयोजन किया गया, जिसमें उपस्थित श्रद्धालुओं ने एक स्वर में प्रभु का गुणगान कर आध्यात्मिक आनंद का अनुभव किया। ट्रस्ट के प्रवक्ता सह मीडिया प्रभारी संजय सर्राफ ने बताया कि सुबह से लेकर देर शाम तक पांच हजार से अधिकश्रद्धालुओं ने भगवान श्री राधा-कृष्ण के दर्शन किये। उन्होंने कहा कि मंदिर में प्रतिदिन दोपहर 12 बजे से 2 बजे तक अन्नपूर्णा सेवा के अंतर्गत वेजिटेबल खिचड़ी महाप्रसाद का वितरण किया जाता है, जिसमें प्रतिदिन सैकड़ों श्रद्धालु शामिल होकर प्रसाद ग्रहण करते हैं। यह सेवा मानवता, परोपकार और सनातन संस्कृति के मूल्यों को सुदृढ़ करने का एक निरंतर प्रयास है। इस अवसर पर- डूंगरमल अग्रवाल, राजेंद्र प्रसाद अग्रवाल, निर्मल जालान, मनोज चौधरी, सज्जन पाड़िया, पूरणमल सर्राफ, सुरेश अग्रवाल, अरविंद अग्रवाल, संजय सर्राफ, विष्णु सोनी, पवन पोद्दार, सुरेश भगत सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु एवं ट्रस्ट सदस्य उपस्थित रहे।
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