केंद्रीय रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ ने अंगवस्त्र, शॉल एवं स्मृति-चिह्न भेंट कर किया सम्मानित टीम एबीएन, रांची। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार के सेवा, सुशासन एवं गरीब कल्याण के सफल 12 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में रांची के सांसद सह केंद्रीय रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ द्वारा समाज के विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय योगदान देने वाली प्रतिष्ठित समाजसेवी हस्तियों को सम्मानित किया गया।इसी क्रम में रांची के कांके रोड स्थित भुवालका हाउस में आयोजित एक गरिमामय सम्मान समारोह में श्री कृष्ण प्रणामी सेवा धाम ट्रस्ट एवं सद्गुरु कृपा अपना घर आश्रम के उपाध्यक्ष, प्रख्यात समाजसेवी एवं व्यवसायी राजेंद्र प्रसाद अग्रवाल को उनके उत्कृष्ट सामाजिक योगदान एवं मानव सेवा के क्षेत्र में किये जा रहे उल्लेखनीय कार्यों के लिए सम्मानित किया गया। समारोह के दौरान केंद्रीय रक्षा राज्य मंत्री श्री संजय सेठ ने राजेंद्र प्रसाद अग्रवाल को अंगवस्त्र एवं शॉल ओढ़ाकर सम्मानित किया तथा स्मृति-चिह्न एवं विशेष पुस्तिका भेंट कर उनके सामाजिक कार्यों की सराहना की। इस अवसर पर श्री सेठ ने कहा कि समाज के विभिन्न क्षेत्रों में निस्वार्थ भाव से कार्य करने वाले समाजसेवी राष्ट्र निर्माण की प्रक्रिया में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। ऐसे व्यक्तित्वों का सम्मान करना न केवल उनके कार्यों का गौरव बढ़ाता है, बल्कि समाज के अन्य लोगों को भी सेवा एवं समर्पण के लिए प्रेरित करता है। ज्ञात हो कि राजेंद्र प्रसाद अग्रवाल लंबे समय से सामाजिक, धार्मिक एवं मानवीय सेवा कार्यों से जुड़े हुए हैं। वे श्री कृष्ण प्रणामी सेवा धाम ट्रस्ट तथा सद्गुरु कृपा अपना घर आश्रम के माध्यम से निराश्रित, दिव्यांग, असहाय एवं जरूरतमंद लोगों की सेवा में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं। उनके नेतृत्व एवं सहयोग से विभिन्न जनकल्याणकारी गतिविधियों का सफल संचालन किया जा रहा है, जिससे समाज के अनेक लोगों को लाभ मिल रहा है। इस सम्मान समारोह में पूर्व सांसद अजय मारू, पार्षद नकुल तिर्की, भगवती भुवालका, मुकेश काबरा, संजय सर्राफ, कैलाश सिंघानिया, रविंद्र मोदी, जयंत शाहदेव, पुष्पा भुवालका, आदित्य भुवालका सहित अनेक गणमान्य नागरिक, सामाजिक कार्यकर्ता एवं समाज के प्रतिष्ठित लोग उपस्थित थे।
वीरता, स्वाभिमान और राष्ट्रभक्ति की अमर गाथा रानी लक्ष्मीबाई का बलिदान दिवसरानी लक्ष्मीबाई का जीवन और बलिदान भारतीय नारी शक्ति की महान पहचान : संजय सर्राफटीम एबीएन, रांची। हिंदी साहित्य भारती के उपाध्यक्ष सह झारखंड प्रांतीय मारवाड़ी सम्मेलन के संयुक्त महामंत्री सह प्रवक्ता संजय सर्राफ ने कहा है कि भारत के स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास में वीरांगना महारानी लक्ष्मीबाई का नाम अदम्य साहस, देशभक्ति और आत्मसम्मान के प्रतीक के रूप में स्वर्णाक्षरों में अंकित है। झांसी की रानी लक्ष्मीबाई का बलिदान दिवस प्रतिवर्ष 18 जून को मनाया जाता है। इसी दिन वर्ष 1858 में अंग्रेजों के विरुद्ध युद्ध करते हुए उन्होंने मातृभूमि की रक्षा के लिए अपने प्राणों का सर्वोच्च बलिदान दिया था। उनका बलिदान भारतीय इतिहास की सबसे प्रेरणादायक घटनाओं में से एक माना जाता है। महारानी लक्ष्मीबाई का जन्म 19 नवंबर 1828 को वाराणसी में हुआ था। उनका बचपन का नाम मणिकर्णिका था, जिन्हें प्यार से मनु कहा जाता था। विवाह के पश्चात वे झांसी की महारानी बनीं। जब अंग्रेजों ने हड़प नीति के तहत झांसी को अपने अधीन करने का प्रयास किया, तब रानी लक्ष्मीबाई ने इसका डटकर विरोध किया। वर्ष 1857 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम में उन्होंने अंग्रेजी सत्ता के विरुद्ध संघर्ष का नेतृत्व किया और वीरता की ऐसी मिसाल प्रस्तुत की, जो आज भी देशवासियों के लिए प्रेरणास्रोत है।18 जून 1858 को ग्वालियर के निकट कोटा-की-सराय में अंग्रेजी सेना से युद्ध करते हुए रानी लक्ष्मीबाई वीरगति को प्राप्त हुईं। अंतिम समय तक उन्होंने अपने साहस और रणकौशल का परिचय दिया। उनका प्रसिद्ध कथन-मैं अपनी झांसी नहीं दूंगी, आज भी देशभक्ति की भावना को प्रज्ज्वलित करता है। रानी लक्ष्मीबाई बलिदान दिवस का उद्देश्य नई पीढ़ी को राष्ट्रप्रेम, आत्मसम्मान, साहस और कर्तव्यनिष्ठा के मूल्यों से परिचित कराना है।यह दिवस हमें यह संदेश देता है कि देश की स्वतंत्रता, सम्मान और स्वाभिमान की रक्षा के लिए हर नागरिक को सदैव तत्पर रहना चाहिए। विद्यालयों, महाविद्यालयों, सामाजिक संस्थाओं तथा विभिन्न संगठनों ने इस अवसर पर संगोष्ठियों, निबंध प्रतियोगिताओं, सांस्कृतिक कार्यक्रमों और श्रद्धांजलि सभाओं का आयोजन किया जाता है। रानी लक्ष्मीबाई का जीवन और बलिदान भारतीय नारी शक्ति की महान पहचान है। उनका संघर्ष यह सिद्ध करता है कि दृढ़ संकल्प, साहस और देशभक्ति के बल पर असंभव प्रतीत होने वाली चुनौतियों का भी सामना किया जा सकता है। उनका बलिदान राष्ट्र की अमूल्य धरोहर है, जो आने वाली पीढ़ियों को सदैव प्रेरित करता रहेगा।
रांची : नौ कुंडीय गायत्री महायज्ञ व पावन प्रज्ञा पुराण कथामृतम कार्यक्रम का आज पांचवां दिन रहा एबीएन सोशल डेस्क। यज्ञीय अनुष्ठान विधान में शांतिकुंज हरिद्वार के प्रतिनिधिमंडल द्वारा वैदिक मंत्रोच्चार पाठ व जयघोष विधान से पूरा वातावरण गुंजायमान रहा। आज भी गायत्री महामंत्र का गुरु दीक्षा संस्कार 60 जनों ने ली। साथ ही दर्जनों ने जन्मदिन संस्कार, पुंसवन संस्कार, नामकरण संस्कार, विद्यारंभ संस्कार, अन्नप्राशन संस्कार अधिकाधिक ने लिये। यज्ञ स्थल पर आज भी बीपी, नेत्र जांच, चिकित्सा शिविर का भी आयोजन नि: शुल्क रहा।श्रद्धालुओं ने इस सेवा का खूब लाभ उठाया। पर्यावरण संरक्षण हेतु महायज्ञ में आयें हुए सभी आज भी श्रद्धालुओं को एक-एक वृक्ष भेंट के रूप में गायत्री परिवार के भाई-बहन ने प्रदान किया। संध्याकालीन सत्र में गायत्री दीपयज्ञ विधान हुआ। दीपयज्ञ के महत्वपूर्ण सूत्रों के अर्थ के भावार्थ में संतोष कुमार संगम ने बताया कि मनुष्य को वही करना चाहिए जिससे सबका हित हो। कहा कि विचारों को संयमित करने के लिए उन्हें किसी उद्देश्य से जोड़ देने चाहिए। मनुष्य का जीवन ही प्रत्यक्ष देवता है। जीवन देवता की उपासना का फल इसी लोक में मिल जाता है। आगे प्रज्ञा पुराण कथामृतम अंतर्गत संयमशीलता, कर्तव्य परायणता और उदार भक्ति भावना प्रकरण आदि अनेक विषय पर प्रकाश विस्तार से प्रकाश डाला। युग निर्माण योजना, विचार क्रांति के प्रणेता सृजेता परमपूज्य श्रीगुरुदेव वेदमूर्ति-तपोनिष्ठ पंडित श्रीराम शर्मा आचार्य के अच्छे विचारों से बुरे विचारों के काट, इस युग के वैचारिक प्रदूषण और उनसे उपजी समस्याओं के समाधान व निपटान अंतर्गत, ग्राम तीर्थ योजना अंतर्गत व्यक्ति निर्माण, परिवार निर्माण, समाज कल्याण व राष्ट्रीय कल्याण के साथ याज्ञवल्क्य ऋषि यज्ञीय विधान के ज्ञान विज्ञान पर, परम पूज्य के लेखन गायत्री महाविज्ञान और कथन भारतीय संस्कृति के निर्माता यज्ञ पिता गायत्री माता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि कथाएं मानव जीवन को बहुत प्रभावित करती हैं। अंत में आरती उपरांत शांति-पाठ व सर्व मंगलाय वंदना सहित जयघोष कर समापन हुआ। उक्त जानकारी गायत्री परिवार महिला मंडल शाखा हरमू हाउसिंग कॉलोनी, रांची के जय नारायण प्रसाद और कुणाल कुमार ने दी।
270 वें अन्नपूर्णा सेवा महाप्रसाद में हजारों श्रद्धालुओं ने लिया प्रसाद टीम एबीएन, रांची। परम पूज्य डॉ. संत शिरोमणि स्वामी सदानंद महाराज जी के पावन सानिध्य में एम.आर.एस. श्री कृष्ण प्रणामी सेवा धाम ट्रस्ट द्वारा संचालित श्री कृष्ण प्रणामी मंगल राधिका सदानंद सेवाधाम स्थित श्री राधा कृष्ण प्रणामी मंदिर, पुंदाग में सोमवती अमावस्या का पावन पर्व श्रद्धा, भक्ति और सेवा भाव के साथ हर्षोल्लासपूर्वक मनाया गया। इस अवसर पर मंदिर परिसर में दिनभर आध्यात्मिक वातावरण बना रहा तथा हजारों श्रद्धालुओं ने भगवान श्री राधा-कृष्ण के दर्शन कर पुण्य लाभ प्राप्त किया। पर्व के अवसर पर ट्रस्ट की ओर से 270वें श्री कृष्ण प्रणामी अन्नपूर्णा सेवा महाप्रसाद का आयोजन किया गया। इस शुभ अवसर पर श्री राधा रानी का नवीन दिव्य वस्त्रों एवं आकर्षक आभूषणों से भव्य अलौकिक श्रृंगार किया गया। मनोहारी स्वरूप के दर्शन के लिए श्रद्धालुओं की लंबी कतारें लगी रहीं और पूरा मंदिर परिसर भक्तिरस से सराबोर हो उठा। दोपहर 12 बजे मंदिर के पुजारी अरविंद कुमार पांडेय ने वैदिक मंत्रोच्चार के साथ लड्डू, फल, पेड़ा, चूरमा, खिचड़ी एवं मेवा सहित विविध प्रकार के महाप्रसाद का विधिवत भोग भगवान को अर्पित किया। इसके उपरांत श्रद्धालुओं के बीच मसालेदार वेजिटेबल खिचड़ी, शीतल जलजीरा शर्बत तथा सत्तू पानी का वितरण किया गया। मंदिर परिसर में उपस्थित दो हजार से अधिक श्रद्धालुओं ने श्रद्धापूर्वक महाप्रसाद ग्रहण किया। संध्या बेला में आयोजित भजन-संध्या कार्यक्रम ने पूरे आयोजन को और अधिक भक्तिमय बना दिया। ट्रस्ट के भजन गायक मनीष सोनी ने प्रभु श्याम एवं श्री राधा-कृष्ण की महिमा पर आधारित सुमधुर एवं मनमोहक भजनों की प्रस्तुति दी, जिस पर श्रद्धालु भावविभोर होकर झूम उठे। राधे-राधे और जय श्री कृष्ण के जयघोषों से पूरा वातावरण कृष्णमय हो गया। इसके पश्चात सभी श्रद्धालुओं ने सामूहिक रूप से महाआरती में भाग लेकर सुख, शांति और समृद्धि की कामना की। ट्रस्ट के प्रवक्ता सह मीडिया प्रभारी संजय सर्राफ ने बताया कि सोमवती अमावस्या के अवसर पर प्रात:काल से ही मंदिर में श्रद्धालुओं का तांता लगा रहा और दिनभर में पांच हजार से अधिक भक्तों ने भगवान श्री राधा-कृष्ण के दर्शन किए। उन्होंने बताया कि मंदिर में प्रतिदिन दोपहर 12 बजे से 2 बजे तक अन्नपूर्णा सेवा के अंतर्गत वेजिटेबल खिचड़ी महाप्रसाद का वितरण किया जाता है, जिसमें प्रतिदिन सैकड़ों श्रद्धालु प्रसाद ग्रहण करते हैं। इस अवसर पर डूंगरमल अग्रवाल, विजय अग्रवाल, राजेंद्र प्रसाद अग्रवाल, निर्मल जालान, मनोज चौधरी, सज्जन पाड़िया, निर्मल छावनिका, सुरेश अग्रवाल, पूरणमल सर्राफ, शिव भगवान अग्रवाल, मधुसूदन जाजोदिया, नंदकिशोर चौधरी, संजय सर्राफ, अनूप अग्रवाल, सुनील पोद्दार, अरविंद अग्रवाल, विष्णु सोनी, पवन पोद्दार, सुरेश भगत सहित ट्रस्ट के सदस्य एवं बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।
दिनांक 11.06 से 15.06.2026 तक पावन प्रज्ञा पुराण कथा एवं नौ कुण्डीय गायत्री महायज्ञ रांची शहर के हरमू हाउसिंग कॉलोनी के मदर टेरेसा पार्क में कार्यक्रम का आज चौथा दिन रहाप्रज्ञा पुराण कथामृतम युग स्रष्टा ऋषि की अमृत वाणी है : संतोष कुमार संगमएबीएन सोशल डेस्क। रविवार को सुबह यज्ञीय अनुष्ठान विधान में संगतिकरण, सामाजिक समरसता,पर्यावरण की शुद्धि, उत्तम मानसिक स्वास्थ्य,श्रेष्ठ व्यक्तित्व आदि हेतु, शांतिकुंज हरिद्वार के प्रतिनिधि टीम द्वारा वैदिक मंत्रोच्चार व गुरुवंदना पाठ से शुभारंभ हुआ। यज्ञ में करीब तीन सौ श्रद्धालुओं की उपस्थिति रही, दो पाली में आहुति प्रदान की गई।परिजनों में जन्मदिन, पुंसवन नामकरण संस्कार, एक दर्जन से ज्यादा बच्चों के विद्यारंभ संस्कार, अन्नप्राशन संस्कार, दो दर्जन गायत्री महामंत्र दीक्षा संस्कार आदि हुए। आज भी नेत्र जांच व चिकित्सा शिविर का आयोजन नि: शुल्क रखा गया था, जिसमें सौ से अधिक श्रद्धालुओं ने इस सेवा का लाभ उठायें।पर्यावरण संवर्धन हेतु महायज्ञ में आयें हुए सभीश्रद्धालुओं को एक-एक वृक्ष पौधे भेंट रूप में गायत्री परिवार के भाई-बहन द्वारा प्रदान किया गया। गायत्री परिवार के सौजन्य से बीपी एवं शुगर चेकअप कैंप और होम्योपैथी चिकित्सा शिविर नि:शुल्क लगाया गया था। साहित्य पटल पर युग साहित्य की खरीद में अच्छी तादाद रही।कार्यक्रम में शाम 5 बजे से 9 बजे तक संगीतमय पावन प्रज्ञा पुराण की कथा का चौथा दिन था। महामनीषी समाधानी पिप्पलाद व श्वेतकेतु संवाद अंतर्गत विचार संयम, विचार क्रांति पर आज कथामृतम आयोजन में परम्पराओं की तुलना में विवेक का प्रयोग, साधना,स्वाध्याय, संयम सेवा तथा गुरुवरश्रीपूज्यवर द्वारा सन्1958 का प्रथम हजार कुण्डीय महायज्ञ संपन्न में शिष्यों को किस तरह का निमंत्रण पत्र भेजकर बुलाया , चर्चा हुई।प्रज्ञा पुराण कथामृतम अध्याय में अजस्र अनुदान उपलब्धि, तत्व चिन्तन,परिवार खण्ड, परिवार निर्माण व गृहस्थ जीवन, वसुधैव कुटुंबकम, आस्था संकट स्थिति, निकृष्ट चिन्तन-निवारण पर प्रकाश डाला गया।साथ ही एक बार गुरुदेव श्री व देवराहा बाबा का एक रहस्यमय संवाद पर गहन चर्चा, सदगुरु, सद्ज्ञान, सद्भाव, संवेदना, सद्विचार, सदग्रंथ पर, देव दक्षिणा में एक बुराई छोड़ने व एक अच्छाई ग्रहण का संकल्प, अंशदान समयदान, उपासना साधना के नियम संयम और स्वस्थ-सुखद जीवन विषय रहे। उक्त जानकारी प्रज्ञा पुराण कथा एवं नौ कुण्डीय गायत्री महायज्ञ आयोजक मंडल, अखिल विश्व गायत्री परिवार गायत्री शक्तिपीठ सेक्टर-२ धुर्वा रांची के जय नारायण प्रसाद और कुणाल कुमार ने दी।
टीम एबीएन, रांची। रविवार को दिगम्बर जैन समाज के द्वारा प्रतिभा सम्मान समारोह का आयोजन हुआ, जिसमें करीब 50 ऐसी प्रतिभाओं का सम्मान किया गया जिन्होंने 10 वी, 12वी,C.A, एवम् इंजीनियरिंग में सर्वोच्च उतीर्ण अंक प्राप्त कर अपना भविष्य सुनिश्चित किया है, जैन समाज के ऐसे प्रतिभाओं का सम्मान करना एक गौरव की बात है। समारोह की शुरुआत स्मिता पांड्या ने मंगलाचरण कर की। इस समारोह में समाज की कई विशिष्ट हस्तियाँ मौजूद थी जिन्होंने प्रशासनिक स्तर पर या अन्य जगहों पर अपना पूर्ण योगदान देकर जैन समाज का गौरव बढ़ाया है। सभा का संचालन मुख्य संयोजक कमल सेठी ने किया,अध्यक्ष प्रदीप बाकलीवाल ने अपने विचार रखे। उन्होंने कहा प्रतिभा सम्मान समारोह दिगम्बर जैन समाज के द्वारा काफी लंबे समय से किया जा रहा है।आज से लगभग 22 वर्ष पहले इस कार्यक्रम की शुरुआत हुई थी उस समय में यह कार्यक्रम बहुत व्यापक पैमाने पर किया जाता था। जैन धर्म में ज्ञान को आत्मोन्नति का सर्वोच्च साधन माना गया है। हमारे आगमों एवं आचार्यों ने सदैव यह संदेश दिया है कि ज्ञान के माध्यम से ही व्यक्ति अपने जीवन को श्रेष्ठ दिशा प्रदान कर सकता है। हमारा जैन समाज सदैव शिक्षा, संस्कार और नैतिक मूल्यों को प्राथमिकता देता आया है। आज का यह प्रतिभा सम्मान समारोह केवल अंकों या उपलब्धियों का सम्मान नहीं है, बल्कि उन प्रयासों, त्याग, अनुशासन और निरंतर परिश्रम का अभिनंदन है, जिनके माध्यम से हमारे बच्चों ने सफलता के नए आयाम स्थापित किए हैं। यह समारोह समाज की नई पीढ़ी में उत्कृष्टता की भावना जागृत करने,उन्हें उच्च लक्ष्य निर्धारित करने तथा राष्ट्र एवं समाज के प्रति उत्तरदायित्व का भाव विकसित करने का एक विनम्र प्रयास है। हमारा विश्वास है कि आज सम्मानित होने वाले ये प्रतिभाशाली विद्यार्थी भविष्य में अपने परिवार, समाज और राष्ट्र का नाम गौरवान्वित करेंगे तथा भगवान महावीर के सिद्धांतों—अहिंसा, संयम, सत्य और करुणा—को अपने जीवन में आत्मसात करते हुए आदर्श नागरिक बनेंगे। विद्या धनं सर्वधनप्रधानम्।विद्या मित्रं प्रवासे च॥ अर्थ :विद्या सभी धनों में श्रेष्ठ धन है और जीवन के प्रत्येक मार्ग में सच्ची मित्र होती है। 10th और 12th चाहे वो किसी भी विषय से हो, साइंस कॉमर्स आर्ट्स या किसी भी बोर्ड के हैं, उनके बच्चों को आमंत्रित करते हैं। साथ ही ऐसे प्रतिभावान, जो किसी भी तरह की परिक्षा पास कर जाते है उनका भी हम सम्मान करते हैं अभिनंदन करते हैं। सभा के मुख्य अतिथि जैन समाज राँची से आईएएस दक्ष जैन एवं श्रीमती ईशा जैन आइ आर एस विशिष्ट अतिथि विजय पाण्डया एवं पूर्व अध्यक्षगणों ने दीप प्रज्वलित कर किया। प्रतिभावान छात्रों के परिजन भी सभा में उपस्थित थे। समाज के मंत्री जितेन्द्र छाबड़ा ने सभी के बीच अपनी बात रखते हुए कहा कि यह हमारे लिए अत्यंत ही गौरव का विषय है कि आज हम उन विद्यार्थियों को सम्मानित कर रहे हैं जिन्होंने 10th 12th प्रोफेशनल या विशिष्ट क्षेत्र में उत्कृष्ट प्रदर्शन किया है और समाज और परिवार का नाम रोशन किया है। प्रतिभा सम्मान सिर्फ पुरस्कार वितरण नहीं यह प्रेरणा है आने वाली पीढियां के लिए परिश्रम और आत्मविश्वास से सब कुछ हासिल हो सकता है।आज हमारे विद्यार्थी डॉक्टर, CA इंजीनियर, प्रशासनिक अधिकारी बन रहे हैं जो हमारे लिए संतोष की बात है। इस मंच से उन्होंने विद्यार्थियों को बधाई दिया और विद्यार्थियों के माता-पिता और गुरुजनों का भी आभार व्यक्त किया जिनके मार्गदर्शन में बच्चों ने सफलता पाई। उन्होंने बच्चों को कहा की न केवल आपको पढ़ाई में अव्वल लाना है बल्कि जैन सिद्धांतों को जीवन में उतारकर एक अच्छा नागरिक भी बनना है। उन्होंने कहा कि यह सम्मान आपके प्रयासों की पहली सीढ़ी है मंजिले अभी और भी है राहे लंबी है मगर विश्वास रखें कि आप सक्षम हैं।मुख्य अतिथि ने अपने वक्तव्य में बच्चों के साथ कई तरह की बातें साझा की अपने उद्देश्य को सुनिश्चित करने और अनुशासन बनाए एवं धर्म के मूलभूत सिद्धांतों का पालन करने की एवं परिजनों को भी कई तरह की सलाह दी। आयोजन के विशिष्ट अतिथि विजय पाण्ड्या ने भी अपनी बात रखी। मुख्य अतिथि का समाज के अध्यक्ष प्रदीप बाकलीवाल एवं जीतेन्द्र छाबड़ा ने प्रतीक चिह्न भेंट कर स्वागत किया। वर्ग 10 एवं वर्ग 12 के कुल 44 बच्चो ने और 4 बच्चे ने CA एवम् अन्य क्षेत्रों में अव्वल स्थान प्राप्त किया है। समाज में ऐसे अभिभावक जो अपने बच्चो को उच्चतम शिक्षा हेतू आर्थिक रूप से असमर्थ हो तो समाज उन अभिभावकों को मार्गदर्शन कर सहायता प्रदान करता हैं। इस अवसर पर समाज के गणमान्यों के अलावा पूरा सभागार भरा था।इस अवसर पर समाज के अध्यक्ष श्री प्रदीप बाकलीवाल, मंत्री जितेंद्र छाबड़ा, पूरणमल सेठी, नरेंद्र पांड्या, नरेंद्र गंगवाल, पदम गोधा,संजय छाबड़ा आदि उपस्थित थे। कार्यक्रम का संचालन कमल सेठी ने किया। यह जानकारी मीडिया प्रभारी राकेश काशलीवाल ने दी।
मानव सेवा का अनुपम उदाहरण, सद्गुरु कृपा अपना घर आश्रम का द्वितीय स्थापना दिवस हर्षोल्लास के साथ संपन्नआश्रम में शीघ्र ही 50 अतिरिक्त बेड की होगी व्यवस्था : विजय अग्रवालटीम एबीएन, रांची। जिले के पुंदाग स्थित श्री कृष्ण प्रणामी मंगल राधिका सदानंद सेवा धाम परिसर में संचालित सद्गुरु कृपा अपना घर आश्रम (सत्य-प्रेम सभागार) का द्वितीय स्थापना दिवस परम पूज्य डॉ. संत शिरोमणि स्वामी सदानंद जी महाराज के पावन सानिध्य में अत्यंत श्रद्धा, उत्साह एवं सेवा भाव के साथ मनाया गया। एम.आर.एस. श्री कृष्ण प्रणामी सेवा धाम ट्रस्ट, रांची द्वारा संचालित इस आश्रम में पीड़ित, मंदबुद्धि, दिव्यांग एवं निराश्रित प्रभुजनों की सेवा को समर्पित इस आयोजन ने मानवता और करुणा का प्रेरणादायी संदेश दिया। श्री राधा कृष्ण प्रणामी मंदिर परिसर में आयोजित द्वितीय वार्षिक स्थापना समारोह की अध्यक्षता ट्रस्ट के अध्यक्ष डूंगरमल अग्रवाल ने की।कार्यक्रम का शुभारंभ ट्रस्ट के पदाधिकारियों एवं आगंतुक अतिथियों द्वारा दीप प्रज्वलित कर किया गया। इस अवसर पर आध्यात्मिक वातावरण के बीच सेवा, समर्पण और समाज कल्याण के संकल्प को और अधिक सुदृढ़ करने का संदेश दिया गया। ट्रस्ट के संरक्षक विजय कुमार अग्रवाल ने स्वागत उद्बोधन में सभी अतिथियों का अभिनंदन करते हुए कहा कि वर्तमान में आश्रम में 48 मंदबुद्धि एवं दिव्यांग निराश्रित प्रभुजनों की निस्वार्थ भाव से सेवा की जा रही है। उन्होंने बताया कि आश्रम में रह रहे प्रभुजनों को पौष्टिक एवं संतुलित भोजन, नियमित स्वास्थ्य परीक्षण, बौद्धिक शिक्षा, योगाभ्यास, मनोरंजन, स्वच्छ एवं सुरक्षित वातावरण तथा दैनिक जीवन की सभी आवश्यक सुविधाएँ उपलब्ध कराई जा रही हैं। उन्होंने कहा कि इस पुनीत सेवा अभियान में सत्यनारायण पोद्दार चैरिटेबल ट्रस्ट का निरंतर सहयोग अत्यंत सराहनीय और प्रेरणादायक है। उन्होंने यह भी जानकारी दी कि बढ़ती आवश्यकता को देखते हुए शीघ्र ही आश्रम में 50 अतिरिक्त बेड की व्यवस्था की जाएगी, ताकि अधिक से अधिक निराश्रित और असहाय लोगों को आश्रय एवं सेवा उपलब्ध कराई जा सके। उन्होंने कहा कि पूज्य स्वामी सदानंद जी महाराज के प्रेरणादायी मार्गदर्शन में आज देश के विभिन्न राज्यों में 16 अपना घर आश्रम संचालित हो रहे हैं। जहाँ चार हजार से अधिक दिव्यांग एवं निराश्रित प्रभुजनों की सेवा पूरी श्रद्धा और समर्पण के साथ की जा रही है। समाजसेवी पंकज पोद्दार ने अपने संबोधन में कहा कि यह सेवा अभियान समाज में मानवता, करुणा और परोपकार की भावना को सशक्त बना रहा है तथा लोगों को जरूरतमंदों की सेवा के लिए प्रेरित कर रहा है। उन्होंने समाज के सभी वर्गों से इस महान कार्य में सहयोग देने की अपील की।समारोह के दौरान ट्रस्ट के सभी संस्थापक सदस्यों (फाउंडर्स) को स्मृति चिन्ह एवं अंगवस्त्र प्रदान कर सम्मानित किया गया। वहीं विभिन्न सामाजिक एवं धार्मिक संस्थाओं से पधारे प्रतिनिधियों का सम्मान ट्रस्ट के उपाध्यक्ष राजेंद्र अग्रवाल एवं प्रवक्ता संजय सर्राफ द्वारा अंगवस्त्र ओढ़ाकर किया गया। कार्यक्रम की एक विशेष और भावनात्मक झलक तब देखने को मिली जब आश्रम में रह रहे सभी निराश्रित प्रभुजनों को नवीन वस्त्र पहनाकर समारोह में सम्मानपूर्वक सम्मिलित किया गया। इससे आयोजन में सेवा और आत्मीयता की भावना और अधिक प्रकट हुई। कार्यक्रम का सफल संचालन ट्रस्ट के सचिव मनोज कुमार चौधरी ने किया। समारोह के उपरांत सभी श्रद्धालुओं एवं अतिथियों के लिए महाप्रसाद का आयोजन भी किया गया। इस अवसर पर-निर्मल छावनिका, सज्जन पाड़िया, निर्मल जालान, पूरणमल सर्राफ, शिव भगवान अग्रवाल, मधुसूदन जाजोदिया, संजय सर्राफ, राजेंद्र अग्रवाल, विशाल जालान, अनूप अग्रवाल, सुनील पोद्दार, नंदकिशोर चौधरी, सुरेश कुमार अग्रवाल, अरविंद अग्रवाल, प्रभास गोयल, विष्णु सोनी, मनीष सोनी, विनय सरावगी, भगवती भुवालका, ललित कुमार पोद्दार, विनोद जैन, पवन शर्मा, निर्मल बुधिया, पवन पोद्दार, रवि शंकर शर्मा, दीपक मारू, चंडी प्रसाद डालमिया, मुकेश काबरा, दीपेश निराला, मनोज बजाज, काशी प्रसाद कनाई,अशोक पुरोहित, प्रकाश बजाज, सुनील केडिया, श्याम सुंदर शर्मा, किशन शर्मा, रमेश शर्मा, रोहित सरावगी, अशोक लाट, विकास अग्रवाल, रौनक झुनझुनवाला, प्रेमचंद श्रीवास्तव, नारायण पटवारी, तरुण सर्राफ, गोविंद अग्रवाल, वासुदेव भल्ला,रमेश बजाज, मनोज जालान, आलोक सरावगी, विद्या देवी अग्रवाल सहित बड़ी संख्या में ट्रस्ट के सदस्य गण एवं गणमान्य लोग उपस्थित रहे।
एबीएन सोशल डेस्क। आज दिनांक 13 जून 2026 को सायं 5 बजे मदर टेरेसा पार्क, हरमू हाउसिंग कॉलोनी, रांची में दिव्य एवं ज्ञानवर्धक कार्यक्रम में उपस्थित होकर लाभ प्राप्त करने के लिए पावन प्रज्ञा पुराण कथा एवं 9 कुण्डीय गायत्री महायज्ञ के शुभ अवसर पर एक विशेष प्रेरणादायक व्याख्यान का आयोजन किया गया। आज का विषय रहा भारतीय ज्ञान परंपरा, वेद-पुराण और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस : भविष्य की नयी दिशा इस विशेष सत्र में गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड एचीवर, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस विशेषज्ञ एवं शिक्षाविद् डॉ. संतोष कुमार द्वारा भारतीय संस्कृति, वेद, पुराण, रामायण, महाभारत एवं आधुनिक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) के अद्भुत संबंधों पर प्रेरणादायक संवाद प्रस्तुत किया गया। यह व्याख्यान विशेष रूप से युवाओं, विद्यार्थियों, शिक्षकों एवं जागरूक नागरिकों के लिए अत्यंत उपयोगी रहा, जिसमें तकनीक के सकारात्मक उपयोग, भारतीय संस्कारों की महत्ता तथा भविष्य की नयी दिशा पर चर्चाएं की गयीं। सुबह 9 कुंडीय यज्ञीय अनुष्ठान विधान में शनिवार को दीक्षा संस्कार हुआ। इसमें एक दर्जन से ज्यादा मंत्र दीक्षा संस्कार हुए। साथ ही आई चेक अप कैंप बीपी, शुगर चेकअप कैंप लगा था, दर्जनों ने लाभ उठाये। 21 वीं सदी उज्जवल भविष्य से संबंधित एक बड़ा युग साहित्य स्टाल लगा है, जिस के माध्यम से लोगों ने पुस्तकें अपनी रूचि व अपेक्षा अनुसार स्वाध्याय पाठ-संवाद के लिए खरीदे। संध्याकालीन सत्र में झारखंड प्रान्त जोन समन्वयक राम नरेश प्रसाद, व सहायक जोन समन्वयक आजादी सिंह, जिला समन्वयक, जयनारायण प्रसाद, शक्तिपीठ व्यवस्थापक भी जटाशंकर,झा की उपस्थिति रही। ए आई के प्रवक्ता डाक्टर संतोष कुमार जी का गायत्री महामंत्र चादर से स्वागत अभिनंदन किया गया। सायंकाल सत्र में संगीतमय पावन प्रज्ञा पुराण कथामृतम में प्रज्ञा योगाभ्यास, शाकाहार भोजन, स्वास्थ्य संवर्धन, संरक्षण और पर्यावरण परिष्करण संरक्षण और संवर्धन, वृक्षारोपण प्रकरण पर प्रकाश डाला गया। कल रविवार को भी यज्ञ व संस्कार होगा, दीक्षा सहित और भी संस्कार सभी नि:शुल्क होंगें। ब्लड डोनेशन कैंप लगेगा। उक्त जानकारी गायत्री परिवार यज्ञीय समिति सदस्यगण एवं कुणाल कुमार, राजू कुमार अंकित, जय नारायण प्रसाद ने दी।
सेवादार बोले- मानव सेवा ही सच्ची प्रभु सेवा एबीएन सोशल डेस्क। संत शिरोमणि स्वामी सदानंद महाराज के पावन सानिध्य में श्री कृष्ण प्रणामी सेवा धाम ट्रस्ट द्वारा संचालित पीड़ित मानव सेवा के पवित्र केंद्र श्री कृष्ण प्रणामी मंगल राधिका सदानंद सेवा धाम, पुंदाग रांची स्थित सद्गुरु कृपा अपना घर आश्रम (सत्य प्रेम सभागार) में रह रहे 50 मंदबुद्धि, दिव्यांग एवं निराश्रित प्रभुजनों के लिए महिला चेतना मंच की ओर से विशेष भोजन सेवा का आयोजन किया गया। इस अवसर पर आश्रम के रसोईघर में स्वच्छता एवं पौष्टिकता का विशेष ध्यान रखते हुए विभिन्न स्वादिष्ट व्यंजनों से युक्त भोजन प्रसादी तैयार करायी गयी। महिला चेतना मंच की सदस्यों ने अत्यंत आत्मीयता, श्रद्धा और सेवा भाव के साथ अपने हाथों से सभी प्रभुजनों को भोजन कराया। भोजन के दौरान आश्रम का वातावरण करुणा, प्रेम और मानवता की भावना से ओत-प्रोत रहा। श्री कृष्ण प्रणामी सेवा धाम ट्रस्ट के उपाध्यक्ष राजेंद्र प्रसाद अग्रवाल एवं ट्रस्ट के प्रवक्ता संजय सर्राफ ने कहा कि मानवता की सेवा ही ईश्वर की सच्ची आराधना है। समाज के उपेक्षित, असहाय और निराश्रित लोगों के जीवन में सम्मान, अपनापन और खुशियां लाने का कार्य सबसे बड़ा पुण्य है। उन्होंने कहा कि महिला चेतना मंच द्वारा किये जा रहे ऐसे सेवा कार्य समाज के लिए प्रेरणास्रोत हैं और सामाजिक उत्तरदायित्व की उत्कृष्ट मिसाल प्रस्तुत करते हैं। उन्होंने महिला चेतना मंच की सभी सदस्यों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि सेवा, संवेदना और समर्पण का यह भाव समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाने का माध्यम बनता है। ऐसे आयोजन समाज के विभिन्न वर्गों को मानव कल्याण के कार्यों से जुड़ने के लिए प्रेरित करते हैं। इस अवसर पर महिला चेतना मंच अध्यक्ष उषा मंत्री, सचिव किरण गाड़ोदिया, पुजारी अरविंद पांडे, सरोज पेड़ीवाल, उर्मिला राठी, सुशीला सिंघानिया, सरोज रथी, अनुपमा मंत्री, प्रभा मोदी, चंदा अग्रवाल, उषा डागा, मंजू, रश्मि, शारदा, कंचन, बिंदु, ज्योति, लक्ष्मी, मोनिका, रिंपल, रेखा, हेमा, कृष्णा सहित बड़ी संख्या में सदस्यगण उपस्थित रहे। उक्त जानकारी ट्रस्ट के प्रवक्ता संजय सर्राफ ने दी।
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