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राष्ट्रीय चिकित्सक दिवस 1 जुलाई को
Published / 2026-06-30 18:37:51
राष्ट्रीय चिकित्सक दिवस 1 जुलाई को

डॉक्टर्स राष्ट्र को स्वस्थ एवं सशक्त बनाने में दे रहे हैं महत्वपूर्ण योगदान : संजय सर्राफ टीम एबीएन, रांची। झारखंड पेरेंट्स एसोसिएशन के प्रवक्ता सह इंडियन रेड क्रॉस सोसाइटी के आजीवन सदस्य संजय सर्राफ ने कहा है कि हर वर्ष 1 जुलाई को भारत में राष्ट्रीय चिकित्सक दिवस, राष्ट्रीय डॉक्टर्स डे मनाया जाता है। यह दिवस देश के महानचिकित्सक, प्रख्यात शिक्षाविद्, स्वतंत्रता सेनानी तथा पश्चिम बंगाल के द्वितीय मुख्यमंत्री डॉ बिधान चंद्र रॉय की जयंती एवं पुण्यतिथि के अवसर पर मनाया जाता है। संयोगवश उनका जन्म और निधन दोनों ही 1 जुलाई को हुआ था। वर्ष 1991 में भारत सरकार ने उनके अतुलनीय योगदान के सम्मान में 1 जुलाई को राष्ट्रीय चिकित्सक दिवस के रूप में मनाने की शुरुआत की। इस दिवस का मुख्य उद्देश्य समाज में चिकित्सकों के अमूल्य योगदान के प्रति सम्मान और कृतज्ञता व्यक्त करना है। डॉक्टर केवल रोगों का उपचार ही नहीं करते, बल्कि लोगों को स्वस्थ जीवनशैली अपनाने के लिए प्रेरित भी करते हैं। रोगी की पीड़ा को अपना कर्तव्य मानकर दिन-रात सेवा करना, संकट की घड़ी में जीवन बचाने का प्रयास करना तथा चिकित्सा विज्ञान के माध्यम से मानवता की रक्षा करना डॉक्टरों की सबसे बड़ी पहचान है। चिकित्सक दिवस हमें यह संदेश देता है कि डॉक्टर केवल एक पेशा नहीं, बल्कि सेवा, समर्पण और करुणा का प्रतीक हैं। विशेषकर कोरोना महामारी जैसे कठिन समय में डॉक्टरों ने अपने परिवार और व्यक्तिगत सुख-सुविधाओं की चिंता किये बिना लाखों लोगों का जीवन बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभायी। उनकी निस्वार्थ सेवा ने पूरे समाज को यह एहसास कराया कि चिकित्सक वास्तव में धरती पर ईश्वर का दूसरा रूप हैं। इस अवसर पर देशभर के अस्पतालों, चिकित्सा संस्थानों, मेडिकल कॉलेजों तथा सामाजिक संगठनों द्वारा सम्मान समारोह, स्वास्थ्य जागरूकता अभियान, नि:शुल्क चिकित्सा शिविर, रक्तदान शिविर, संगोष्ठियां और जनजागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। इन आयोजनों के माध्यम से उत्कृष्ट कार्य करने वाले चिकित्सकों को सम्मानित किया जाता है तथा आमजन को स्वास्थ्य के प्रति जागरूक रहने का संदेश दिया जाता है। राष्ट्रीय चिकित्सक दिवस का महत्व केवल डॉक्टरों का सम्मान करने तक सीमित नहीं है, बल्कि समाज में डॉक्टर और मरीज के बीच विश्वास, सहयोग और संवेदनशीलता को मजबूत करना भी इसका प्रमुख उद्देश्य है। यह दिन हमें स्वास्थ्य के महत्व को समझने, नियमित स्वास्थ्य जांच कराने, स्वच्छता अपनाने तथा चिकित्सकों के परामर्श का पालन करने की प्रेरणा देता है। आज जब चिकित्सा विज्ञान निरंतर नई ऊंचाइयों को छू रहा है, तब डॉक्टरों की जिम्मेदारियां भी लगातार बढ़ रही हैं। ऐसे में राष्ट्रीय चिकित्सक दिवस हमें उन सभी चिकित्सकों के प्रति सम्मान, आभार और विश्वास व्यक्त करने का अवसर प्रदान करता है, जो अपने ज्ञान, सेवा और समर्पण से मानव जीवन की रक्षा कर राष्ट्र को स्वस्थ एवं सशक्त बनाने में महत्वपूर्ण योगदान दे रहे हैं।

रांची : आज देव स्नान यात्रा के साथ होगा रथ यात्रा महोत्सव का आगाज
Published / 2026-06-29 21:25:16
रांची : आज देव स्नान यात्रा के साथ होगा रथ यात्रा महोत्सव का आगाज

धुर्वा जगन्नाथ मंदिर में रथ यात्रा महोत्सव की तैयारियां तेज टीम एबीएन, रांची। रांची में भगवान जगन्नाथ की रथयात्रा की तैयारियां आज से शुरू हो गयी हैं। धुर्वा स्थित जगन्नाथ मंदिर में रथ यात्रा महोत्सव की तैयारियां तेज हो गयी हैं। आज देव स्नान यात्रा के साथ महोत्सव का आगाज हो जायेगा। देव स्नान अनुष्ठान के साथ भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा का विशेष स्नान होगा। स्नान के बाद शुरू होगा भगवान का अनासर काल। 16 जून से शुरू हो रहे जगन्नाथ रथ यात्रा के लिए रथ निर्माण का कार्य शुरू हो गया है। निर्माण कार्य में ओडिशा के अनुभवी कारीगर जुट गये हैं। 16 जुलाई को भगवान जगन्नाथ की भव्य रथ यात्रा निकलेगी। जिसमें श्रद्धालुओं की विशाल भीड़ उमड़ेगी। 15 दिनों का एकांतवास में भगवान जगन्नाथ चले जायेंगे।

विश्व सोशल मीडिया दिवस कल
Published / 2026-06-29 12:51:33
विश्व सोशल मीडिया दिवस कल

विश्व सोशल मीडिया दिवस 30 जून को, डिजिटल संवाद का सशक्त माध्यम और जिम्मेदार उपयोग का संदेशसोशल मीडिया का उपयोग समाज में सद्भाव, ज्ञान-वृद्धि, नवाचार और रचनात्मक संवाद के लिए किया जाए : संजय सर्राफटीम एबीएन, रांची। हिंदी साहित्य भारती के उपाध्यक्ष सह झारखंड पेरेंट्स एसोसिएशन के प्रांतीय प्रवक्ता संजय सर्राफ ने कहा है कि विश्व सोशल मीडिया दिवस प्रत्येक वर्ष 30 जून को मनाया जाता है। इस दिवस की शुरुआत वर्ष 2010 में हुई थी। इसका उद्देश्य सोशल मीडिया के माध्यम से लोगों, समाज, व्यवसाय, शिक्षा और शासन के बीच बढ़ते संवाद तथा इसके सकारात्मक प्रभाव को रेखांकित करना है। आज सोशल मीडिया केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं, बल्कि सूचना, शिक्षा, जन-जागरूकता, सामाजिक परिवर्तन और वैश्विक संपर्क का एक सशक्त मंच बन चुका है।वर्तमान डिजिटल युग में सोशल मीडिया ने दुनिया को एक वैश्विक परिवार के रूप में जोड़ने का कार्य किया है। फेसबुक, एक्स, ट्विटर, इंस्टाग्राम, यूट्यूब, व्हाट्सएप, लिंक्डइन और अन्य डिजिटल मंचों के माध्यम से लोग कुछ ही क्षणों में दुनिया के किसी भी कोने से जुड़ सकते हैं।शिक्षा, व्यापार, रोजगार, स्वास्थ्य, आपदा प्रबंधन, सामाजिक अभियानों और सरकारी योजनाओं की जानकारी के प्रसार में सोशल मीडिया की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण हो गई है।इस दिवस का प्रमुख उद्देश्य सोशल मीडिया के सकारात्मक उपयोग को बढ़ावा देना, डिजिटल साक्षरता विकसित करना तथा लोगों को सुरक्षित, जिम्मेदार और नैतिक ऑनलाइन व्यवहार के प्रति जागरूक करना है। यह दिवस यह संदेश भी देता है कि सोशल मीडिया का उपयोग समाज में सद्भाव, ज्ञान-वृद्धि, नवाचार और रचनात्मक संवाद के लिए किया जाए, न कि अफवाह, घृणा, भ्रामक सूचना या साइबर अपराध को बढ़ावा देने के लिए।विश्व सोशल मीडिया दिवस की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यह लोगों को डिजिटल प्लेटफॉर्म के लाभ और चुनौतियों दोनों के प्रति सचेत करता है। आज फर्जी समाचार, साइबर ठगी, ऑनलाइन उत्पीड़न, डेटा सुरक्षा और निजता जैसे विषय गंभीर चिंता का कारण बन रहे हैं। ऐसे में प्रत्येक नागरिक का दायित्व है कि वह किसी भी सूचना को साझा करने से पहले उसकी सत्यता की जांच करे, दूसरों की निजता का सम्मान करे तथा सोशल मीडिया का उपयोग संयम, विवेक और जिम्मेदारी के साथ करे। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि सोशल मीडिया का उपयोग सकारात्मक सोच, सामाजिक सेवा, शिक्षा, पर्यावरण संरक्षण, स्वास्थ्य जागरूकता और राष्ट्रीय एकता जैसे रचनात्मक कार्यों के लिए किया जाए तो यह समाज में व्यापक परिवर्तन का प्रभावी माध्यम बन सकता है। विश्व सोशल मीडिया दिवस हमें यह प्रेरणा देता है कि तकनीक का उपयोग मानवता के हित, सामाजिक सौहार्द, ज्ञान के प्रसार और लोकतांत्रिक मूल्यों को सुदृढ़ करने के लिए किया जाए। जिम्मेदार डिजिटल नागरिक बनकर ही हम सोशल मीडिया की वास्तविक शक्ति का सदुपयोग कर एक जागरूक, सुरक्षित और समृद्ध समाज के निर्माण में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

लायंस क्लब ऑफ रांची ने किया जरूरतमंदों के बीच वस्त्र, भोजन एवं चप्पल वितरण
Published / 2026-06-28 19:48:57
लायंस क्लब ऑफ रांची ने किया जरूरतमंदों के बीच वस्त्र, भोजन एवं चप्पल वितरण

लायंस क्लब ऑफ रांची ने बिरसा शिक्षा निकेतन में बच्चों व जरूरतमंदों के बीच वस्त्र, भोजन एवं चप्पलों का किया वितरणटीम एबीएन, रांची। सामाजिक सेवा के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को आगे बढ़ाते हुए लायंस क्लब ऑफ रांची द्वारा रविवार को धुर्वा स्थित जगन्नाथपुर के बिरसा शिक्षा निकेतन में सेवा कार्यक्रम का आयोजन किया गया। क्लब के अध्यक्ष लायन दिलीप कुमार बंका की अध्यक्षता में आयोजित इस कार्यक्रम में विद्यालय के लगभग 200 छात्र-छात्राओं के बीच नए वस्त्र एवं फूड पैकेट का वितरण किया गया। इस अवसर पर बच्चों को नए कपड़े एवं खाद्य सामग्री उपलब्ध कराई गई। सामग्री प्राप्त कर बच्चों के चेहरे खुशी से खिल उठे। कार्यक्रम के दौरान उपस्थित अभिभावकों ने भी क्लब की इस सेवा भावना की सराहना करते हुए आभार व्यक्त किया।इसके पश्चात विद्यालय से सटे बस्ती क्षेत्र के लगभग 100 जरूरतमंद महिला एवं पुरुषों के बीच पहनने के लिए चप्पलों का वितरण किया गया। इस सेवा कार्य से स्थानीय लोगों में विशेष उत्साह एवं प्रसन्नता देखने को मिली। समस्त कार्यक्रम का सफल संचालन एवं व्यवस्थापन विद्यालय के प्रधानाध्यापक के कुशल निर्देशन एवं देखरेख में संपन्न हुआ।उन्होंने लायंस क्लब ऑफ रांची द्वारा किए जा रहे सामाजिक एवं मानवीय कार्यों की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे सेवा कार्य समाज में सहयोग एवं संवेदनशीलता की भावना को सशक्त बनाते हैं। कार्यक्रम में क्लब के पूर्व अध्यक्ष लायन राजेश मोर, लायन ओमप्रकाश, लायन अनुज सहाय, अभिनव कौशल, रजनी मोर, मंजू कुमार, सुजाता गाड़ोदिया, उत्तम कुमार तथा क्लब की प्रथम महिला बीना बंका सहित अनेक सदस्य उपस्थित रहे। कार्यक्रम के लिए वस्त्र, फूड पैकेट एवं अन्य सामग्री उपलब्ध कराने में लायन निशि अग्रवाल, लायन मनोज माहेश्वरी, शुभम बंका एवं निर्मल मानपुरिया का विशेष एवं सराहनीय योगदान रहा। उपस्थित लोगों ने क्लब के इस सेवा अभियान की मुक्त कंठ से प्रशंसा करते हुए भविष्य में भी ऐसे जनहितकारी कार्यक्रमों के निरंतर आयोजन की अपेक्षा व्यक्त की। उक्त जानकारी लायंस क्लब आंफ रांची के मीडिया प्रभारी निर्मल मानपुरिया ने दी।

लायंस क्लब ऑफ रांची अंबर ने लगाया निःशुल्क नेत्र जांच शिविर
Published / 2026-06-28 19:26:14
लायंस क्लब ऑफ रांची अंबर ने लगाया निःशुल्क नेत्र जांच शिविर

लायंस क्लब ऑफ रांची अंबर ने लगाया निःशुल्क नेत्र जांच शिविरटीम एबीएन, रांची। लायंस क्लब ऑफ रांची अंबर ने बालगृह आश्रम, आईटीआई कैंपस, हेहल में निःशुल्क नेत्र जांच शिविर लगाया। शिविर का आयोजन आश्रम प्रबंधक प्रियांशु रंजन के सहयोग और डॉ. हेमलता भारती के नेतृत्व में मेडिकल टीम ने सिनर्जी ग्लोबल हॉस्पिटल और रांची लाइफ केयर हॉस्पिटल के सहयोग से किया।शिविर में बच्चों की आंखों की जांच की गई और दृष्टि संबंधी समस्याओं की पहचान कर सूची तैयार की गई। जांच में मोतियाबिंद के दो मरीज भी मिले, जिन्हें आगे के उपचार के लिए चिह्नित किया गया। बच्चों के बीच बिस्किट, टॉफी और अन्य खाद्य सामग्री भी बांटी गई। कार्यक्रम का संचालन क्लब की अध्यक्ष दीपाली रस्तोगी और सचिव रश्मि सिंह के नेतृत्व में हुआ।इस मौके पर जीएमटी कोऑर्डिनेटर एवं सेकंड VDG इलेक्ट लायन सुजीत जी, जीएमटी इलेक्ट लायन गणेश जी, लायन सुनील कुमार वर्मा जी, लायन योगेंद्र जी, लायन नीरज जी, लायन रंजीत जी, लायन अनुज जी, लायन संजय जी सहित अन्य सदस्यों ने सहयोग किया।

संत कबीर दास सत्य, समरसता और मानव मानवता के अमर संदेशवाहक : संजय सर्राफ
Published / 2026-06-28 16:41:28
संत कबीर दास सत्य, समरसता और मानव मानवता के अमर संदेशवाहक : संजय सर्राफ

संत कबीर दास सत्य, समरसता और मानव मानवता के अमर संदेशवाहक : संजय सर्राफएबीएन सोशल डेस्क। विश्व हिंदू परिषद सेवा विभाग एवं श्री कृष्ण प्रणामी सेवा धाम ट्रस्ट के प्रांतीय प्रवक्ता संजय सर्राफ ने कहा है कि भारत के महान संत, समाज सुधारक और निर्गुण भक्ति धारा के प्रमुख कवि संत कबीर दास की जयंती पूरे देश में श्रद्धा, आस्था और सम्मान के साथ मनाई जाती है। इस वर्ष संत कबीर दास जयंती 29 जून को ज्येष्ठ पूर्णिमा के अवसर पर मनाई जाएगी। इस दिन देशभर में कबीर पंथी आश्रमों,मंदिरों तथा विभिन्न सामाजिक- सांस्कृतिक संस्थाओं द्वारा सत्संग, भजन-कीर्तन, कबीर वाणी का पाठ, प्रवचन,भंडारा एवं सेवा कार्यों का आयोजन किया जाता है।संत कबीर दास के जन्म के संबंध में विभिन्न मत प्रचलित हैं, किंतु व्यापक रूप से माना जाता है कि उनका जन्म वर्ष 1398 ईस्वी में ज्येष्ठ पूर्णिमा के दिन वाराणसी के निकट लहरतारा क्षेत्र में हुआ था। लोक परंपरा के अनुसार उनका पालन-पोषण मुस्लिम दंपति किया। इसी कारण उनके जीवन में हिंदू और मुस्लिम दोनों परंपराओं का सुंदर समन्वय दिखाई देता है।संत कबीर दास जयंती से जुड़ी कथा के अनुसार कबीर बचपन से हीआध्यात्मिक प्रवृत्ति के थे।वे स्वामी रामानंद को अपना गुरु बनाना चाहते थे। कहा जाता है कि एक दिन वे प्रातःकाल उस मार्ग पर लेट गए जहाँ से स्वामी रामानंद गंगा स्नान के लिए जाते थे। अंधेरे में उनका पैर कबीर पर पड़ गया और उनके मुख से अनायास राम-राम शब्द निकला। कबीर ने इसे ही गुरु-मंत्र मान लिया और आजीवन राम नाम का स्मरण करते हुए प्रेम, भक्ति, सत्य और मानवता का संदेश फैलाया।इस जयंती का मुख्य उद्देश्य संत कबीर की शिक्षाओं, मानवीय मूल्यों और सामाजिक समरसता के संदेश को जन-जन तक पहुँचाना है।उन्होंने जाति-पांति, ऊँच-नीच, धार्मिक कट्टरता, पाखंड और बाहरी आडंबर का विरोध किया तथा सच्चे आचरण, ईश्वर-भक्ति, सत्य, प्रेम और सेवा को जीवन का वास्तविक धर्म बताया। उनके दोहे आज भी समाज को सही दिशा प्रदान करते हैं और नैतिक जीवन जीने की प्रेरणा देते हैं।संत कबीर दास जयंती की विशेषता यह है कि यह किसी एक धर्म या समुदाय का पर्व नहीं, बल्कि संपूर्ण मानवता के लिए प्रेम, समानता औरभाईचारे का उत्सव है। आज के समय में, जब समाज विभाजन, कट्टरता और वैमनस्य जैसी चुनौतियों का सामना कर रहा है,तब कबीर का संदेश-जाति न पूछो साधु की, पूछ लीजिए ज्ञान,और भी अधिक प्रासंगिक हो जाता है।संत कबीर दास जयंती हमें यह प्रेरणा देती है कि धर्म का वास्तविक स्वरूप मानव सेवा, सत्य, करुणा और सद्भाव में निहित है। यदि हम उनके आदर्शों को अपने जीवन में अपनाएँ, तो एक समरस, शांतिपूर्ण और नैतिक समाज की स्थापना का मार्ग और अधिक प्रशस्त हो सकता है।

राष्ट्रीय सांख्यिकी दिवस 29 जून को
Published / 2026-06-27 21:18:09
राष्ट्रीय सांख्यिकी दिवस 29 जून को

सटीक, पारदर्शी और विश्वसनीय आंकड़ों से सशक्त राष्ट्र निर्माण का आधार : संजय सर्राफ टीम एबीएन,  रांची। हिंदी साहित्य भारती के उपाध्यक्ष सह झारखंड पेरेंट्स एसोसिएशन के प्रांतीय प्रवक्ता संजय सर्राफ ने कहा है कि राष्ट्रीय सांख्यिकी दिवस भारत में प्रत्येक वर्ष 29 जून को मनाया जाता है। यह दिवस भारत के महान सांख्यिकीविद् एवं वैज्ञानिक प्रोफेसर प्रशांत चंद्र महालनोबिस की जयंती के उपलक्ष्य में मनाया जाता है। इस दिवस की शुरूआत वर्ष 2007 में भारत सरकार द्वारा की गई थी। इसका उद्देश्य सांख्यिकी के महत्व के प्रति जन-जागरूकता बढ़ाना तथा नीति-निर्माण, विकास योजनाओं और सुशासन में विश्वसनीय आंकड़ों की भूमिका को रेखांकित करना है। सांख्यिकी किसी भी राष्ट्र के विकास की आधारशिला मानी जाती है। किसी देश की आर्थिक, सामाजिक, शैक्षिक, स्वास्थ्य, कृषि, उद्योग तथा रोजगार संबंधी योजनाओं का निर्माण विश्वसनीय आंकड़ों के आधार पर ही किया जाता है। सटीक और प्रमाणिक आंकड़े सरकार को योजनाओं की वास्तविक स्थिति का आकलन करने, संसाधनों का उचित उपयोग सुनिश्चित करने तथा विकास कार्यों को प्रभावी ढंग से लागू करने में सहायता प्रदान करते हैं। प्रोफेसर प्रशांत चंद्र महालनोबिस ने भारत में आधुनिक सांख्यिकी को नयी दिशा प्रदान की। उन्होंने महालनोबिस दूरी जैसी महत्वपूर्ण सांख्यिकीय अवधारणा विकसित की तथा बड़े पैमाने पर नमूना सर्वेक्षण  की वैज्ञानिक पद्धति को लोकप्रिय बनाया। उनके योगदान के कारण भारत में योजनाबद्ध विकास और आंकड़ा-आधारित नीति निर्माण को नई मजबूती मिली।राष्ट्रीय सांख्यिकी दिवस का मुख्य उद्देश्य विद्यार्थियों, शोधकर्ताओं, नीति-निर्माताओं और आम नागरिकों को सांख्यिकी के महत्व से परिचित कराना, आंकड़ों के वैज्ञानिक विश्लेषण को प्रोत्साहित करना तथा साक्ष्य-आधारित निर्णय लेने की संस्कृति को बढ़ावा देना है।मौके पर देशभर में संगोष्ठियों, कार्यशालाओं, व्याख्यानों, प्रतियोगिताओं और जागरूकता कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है, जिनमें सांख्यिकी के विभिन्न आयामों पर विशेषज्ञ अपने विचार साझा करते हैं। इस दिवस की विशेषता यह है कि यह केवल आंकड़ों के संग्रह तक सीमित नहीं है, बल्कि उनके सही विश्लेषण, पारदर्शी उपयोग और विश्वसनीय प्रस्तुतीकरण के महत्व पर भी बल देता है। आज के डिजिटल युग में डेटा को नई अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण संसाधन माना जाता है। कृत्रिम बुद्धिमत्ता (अक), मशीन लर्निंग, डिजिटल शासन, स्वास्थ्य अनुसंधान, जलवायु परिवर्तन, जनगणना तथा आर्थिक नियोजन जैसे क्षेत्रों में सांख्यिकी की भूमिका पहले से कहीं अधिक महत्वपूर्ण हो गयी है। राष्ट्रीय सांख्यिकी दिवस हमें यह संदेश देता है कि सटीक, पारदर्शी और विश्वसनीय आंकड़े किसी भी राष्ट्र की प्रगति, सुशासन और समावेशी विकास के लिए अनिवार्य हैं। वैज्ञानिक सोच, प्रमाण-आधारित निर्णय और उत्तरदायी प्रशासन के माध्यम से ही भारत एक विकसित, आत्मनिर्भर और समृद्ध राष्ट्र बनने की दिशा में निरंतर आगे बढ़ सकता है।

चांदन द्वादशी पर श्याम बाबा को लगा खीर-चूरमा का भोग
Published / 2026-06-26 20:41:35
चांदन द्वादशी पर श्याम बाबा को लगा खीर-चूरमा का भोग

एबीएन सोशल डेस्क। श्री श्याम मंडल, रांची द्वारा अग्रसेन पथ स्थित श्री श्याम मंदिर में आज दिनांक 26 जून 2026 को खाटू नरेश श्याम बाबा को चांदन द्वादशी के पावन अवसर पर संध्या 6:30 बजे  से रात्रि 9 बजे तक श्री श्याम प्रभु को खीर चूरमा का भोग अर्पित किया गया।  आज के भोग के मुख्य यजमान खुशबू-संजय गोयल ने श्याम बाबा को खीर चूरमा का भोग अर्पित किये। सर्व प्रथम मंडल के अध्यक्ष चंद्र प्रकाश बागला, मंत्री धीरज बंका एवं गोयल परिवार द्वारा गणेश पूजन कर मंदिर में विराजे वीर बजरंगबली एवं शिव परिवार का भी पूजन कर विभिन्न प्रकार के फल एवं मिष्ठान अर्पित कर श्री श्याम प्रभु को खीर चूरमे का भोग अर्पित किया। इस अवसर पर पूरा मंदिर परिसर हारे के सहारे की जय-लखदातार की जय जयकारों के गूंज उठा।  द्वाशी के दिन श्री श्याम प्रभु का प्रिय भोग खीर चूरमा को लेने भक्तगण कतारबद्ध होकर प्राप्त कर रहे थे साथ ही श्री श्याम मंडल के कार्यकर्ता आये हुए भक्तजनों को शुद्ध पिय जल का वितरण कर रहे थे तथा उनके चरण पादुका को रखने की उत्तम व्यवस्था बना हुआ था। आज के खीर चूरमा का भोग श्री श्याम मन्दिर में ही निर्मित किया गया तथा 550 से ज्यादा भक्तजनों प्रसाद प्राप्त किया। आज के इस कार्यक्रम को सफल बनाने में विकाश पाड़िया, प्रदीप अग्रवाल, अभिषेक डालमिया, अजय साबू, प्रमोद बगड़िया, महेश सारस्वत, अमित जलान,  प्रियांश पोद्दार, ज्योति पोद्दार का सहयोग रहा। उक्त जानकारी श्री श्याम मंडल श्री श्याम मंदिर, अग्रसेन मार्ग रांची के मीडिया प्रभारी सुमित पोद्दार (9835331112) ने दी।

रांची पहुंचे दिगंबर जैन संत परमपूज्य 108 श्री सुयश सागर जी महाराज
Published / 2026-06-26 20:37:16
रांची पहुंचे दिगंबर जैन संत परमपूज्य 108 श्री सुयश सागर जी महाराज

दिगंबर जैन संत आचार्य 108 श्री विशुद्ध सागर जी महाराज के परम् प्रभावक शिष्य परमपूज्य 108 श्री सुयश सागर जी महाराज का आगमन रांची में... एबीएन सेंट्रल डेस्क। ओडिशा प्रांत से तिलैया विहार के क्रम में परमपूज्य 108 श्री सुयश सागर जी महाराज का आगमन झारखंड की राजधानी रांची में हुआ। प्रात: 6 बजे बिरसा चौक से हरमू रोड किशोर गंज के रास्ते भुइयां टोली से विहार होकर लगभग 8.30 बजे मुनिश्री अपर बाजार जैन मंदिर पहुंचे रास्ते में जगह-जगह पर भक्तों ने उनका पाद प्रक्षालन एवं आरती कर अगुवानी की। मंदिर पहुंचने के उपरांत धर्म सभा हुई धर्म सभा में मुनी श्री ने प्रवचन में कहा कि जो उत्साह पिछले प्रवास में रांची वासियों में था वहीं उत्साह आज भी बरकरार है बल्कि उससे भी ज्यादा उत्साह देखने को मिला। अंतरंग का इनका उत्साह बता रहा है कि यहां के लोग निस्वार्थ साधु की सेवा वैयावृत्ति में निपुण है अग्रणी है।इनका पुण्य है कि साधु स्वयं ही चातुर्मास को आतुर रहते हैं निश्चित मानकर चलना पुण्य के नियोग से संसार में सामान्य सी वस्तु भी प्राप्त नहीं हो सकती। आपने महान पुण्य किया है कि आपको सहज ही यह सौभाग्य मिल रहा है कि आगामी चातुर्मास रांची में ही जन्मे मुनि श्री 108 ज्ञेय सागर जी महाराज का हो रहा है जिन धर्म का प्राप्त होना, देव शास्त्र की भक्ति प्राप्त होना सहज है। परंतु देव शास्त्र के साथ-साथ गुरु का समागम मिलना दुर्लभ है।गुरु के समागम के बिना देव शास्त्र की बातें समझ ही नहीं आती इसलिए गुरु का स्थान अग्रणी है एवं सर्वोत्तम है इसलिए अरिहंत को सर्वप्रथम स्थान मिला है। ग्रंथ पद्मपुराण की कुछ बातें बताई और ऐसी ही कई ज्ञानवर्धक बातें मुनिश्री ने कहीं। सभा का संचालन मंत्री जीतेंद्र छाबड़ा ने किया, और बाहर से आए अतिथियों का स्वागत किया। सभा में पूर्व अध्यक्ष पूरणमल सेठी, छीतरमल गंगवाल,  नरेंद्र पांड्या, उपाध्यक्ष संजय छाबड़ा, पदम गोधा, कैलाश बड़जात्या स्मिता पांड्या, वर्तमान कार्यकरिणी के सदस्यों एवं बाहर से आये खूंटी और झुमरीतिलैया के अतिथियों ने श्रीफल भेंट कर आशीर्वाद लिया। यह जानकारी मीडिया प्रभारी राकेश काशलीवाल ने दी।

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