19 जुलाई को देवघर में होगी झारखंड प्रांतीय मारवाड़ी सम्मेलन की तृतीय कार्य समिति की बैठक, भावी कार्यक्रमों की बनेगी रूपरेखा टीम एबीएन, रांची। झारखंड प्रांतीय मारवाड़ी सम्मेलन के सत्र 2025झ्र27 की एकदिवसीय तृतीय कार्य समिति की बैठक आगामी 19 जुलाई को देवघर जिला मारवाड़ी सम्मेलन के आतिथ्य में जैन मंदिर, देवघर में आयोजित की जायेगी। इस महत्वपूर्ण बैठक में संगठन की वर्तमान गतिविधियों की समीक्षा के साथ-साथ भविष्य की कार्ययोजना पर व्यापक विचार-विमर्श किया जायेगा। बैठक में राज्य के विभिन्न जिलों से आये प्रतिनिधियों की सक्रिय भागीदारी रहेगी। झारखंड प्रांतीय मारवाड़ी सम्मेलन के प्रांतीय महामंत्री विनोद कुमार जैन ने जानकारी देते हुए बताया कि बैठक की अध्यक्षता सम्मेलन के प्रांतीय अध्यक्ष सुरेश चंद्र अग्रवाल करेंगे। संगठन की मजबूती, सेवा कार्यों के विस्तार तथा आगामी कार्यक्रमों को अधिक प्रभावी बनाने के उद्देश्य से यह बैठक अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जा रही है। बैठक के दौरान पिछली कार्य समिति की बैठक की कार्यवाही की पुष्टि की जायेगी। इसके साथ ही प्रांतीय महामंत्री द्वारा संगठन की गतिविधियों से संबंधित विस्तृत प्रतिवेदन प्रस्तुत किया जायेगा। बैठक में अंकेक्षित आय-व्यय का अनुमोदन भी किया जायेगा, जिससे संगठन की वित्तीय पारदर्शिता एवं उत्तरदायित्व को और अधिक सुदृढ़ किया जा सके। इसके अतिरिक्त सम्मेलन के संविधान संशोधन से संबंधित प्राप्त प्रस्तावों पर विस्तृत चर्चा कर महत्वपूर्ण निर्णय लिये जायेंगे। संगठन के पूर्व प्रांतीय अध्यक्ष अपने अनुभव एवं मार्गदर्शन से कार्यकर्ताओं का उत्साहवर्धन करेंगे तथा संगठन को और अधिक सशक्त एवं प्रभावी बनाने के लिए अपने सुझाव भी देंगे। बैठक का एक प्रमुख उद्देश्य आगामी सामाजिक, सांस्कृतिक एवं सेवा कार्यक्रमों की रूपरेखा तैयार करना भी रहेगा। इस दौरान विभिन्न जिलों से आए प्रतिनिधि अपने-अपने क्षेत्रों की गतिविधियों, सुझावों एवं योजनाओं से कार्य समिति को अवगत कराएंगे, ताकि पूरे प्रदेश में सम्मेलन की गतिविधियों का प्रभावी विस्तार सुनिश्चित किया जा सके। प्रांतीय महामंत्री श्री जैन ने बताया कि इस बैठक में रांची से 20 से अधिक प्रतिनिधि भाग लेंगे, जबकि झारखंड के विभिन्न जिलों से भी 200 से भी अधिक प्रतिनिधि उपस्थित रहेंगे। संगठन की भावी दिशा, सेवा कार्यों की गति तथा संगठनात्मक सुदृढ़ीकरण के दृष्टिकोण से यह बैठक अत्यंत महत्वपूर्ण एवं परिणामकारी मानी जा रही है। उक्त जानकारी झारखंड प्रांतीय मारवाड़ी सम्मेलन के प्रांतीय संयुक्त महामंत्री सह प्रवक्ता संजय सर्राफ ने दी।
विश्व जनसंख्या दिवस 11 जुलाई कोसंतुलित जनसंख्या ही समृद्ध समाज और विकसित राष्ट्र की आधारशिला : संजय सर्राफएबीएन सोशल डेस्क। हिंदी साहित्य भारती के उपाध्यक्ष सह झारखंड पेरेंट्स एसोसिएशन के प्रवक्ता संजय सर्राफ ने कहा है कि हर वर्ष 11 जुलाई को विश्व जनसंख्या दिवस मनाया जाता है। इसकी शुरुआत वर्ष 1989 में संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम द्वारा की गई थी। इस दिवस को मनाने की प्रेरणा 11 जुलाई 1987 को मिली, जब विश्व की जनसंख्या पाँच अरब के आँकड़े तक पहुँच गई थी।तब से यह दिन बढ़ती जनसंख्या, संसाधनों के संतुलित उपयोग तथा सतत विकास के प्रति लोगों को जागरूक करने के उद्देश्य से मनाया जाता है। विश्व जनसंख्या दिवस का मुख्य उद्देश्य जनसंख्या वृद्धि से जुड़ी चुनौतियों, परिवार नियोजन, मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य, लैंगिक समानता, महिलाओं के सशक्तिकरण, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा तथा स्वास्थ्य सेवाओं के प्रति लोगों में जागरूकता बढ़ाना है। यह दिवस इस बात पर बल देता है कि जनसंख्या केवल संख्या नहीं, बल्कि प्रत्येक व्यक्ति के जीवन की गुणवत्ता, अवसर और अधिकार भी उतने ही महत्वपूर्ण हैं।वर्तमान समय में विश्व की जनसंख्या लगातार बढ़ रही है। बढ़ती आबादी के कारण भोजन, पानी, ऊर्जा, आवास, स्वास्थ्य, शिक्षा और रोजगार जैसी मूलभूत आवश्यकताओं पर दबाव बढ़ता जा रहा है। इसके साथ ही पर्यावरण प्रदूषण, जलवायु परिवर्तन, प्राकृतिक संसाधनों का अत्यधिक दोहन तथा जैव विविधता पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। इसलिए जनसंख्या और संसाधनों के बीच संतुलन बनाए रखना समय की सबसे बड़ी आवश्यकता बन गया है।भारत विश्व के सर्वाधिक जनसंख्या वाले देशों में शामिल है। ऐसे में परिवार नियोजन, छोटे परिवार का महत्व महिलाओं की शिक्षा, किशोर स्वास्थ्य, पोषण तथा जागरूक नागरिकता को बढ़ावा देना अत्यंत आवश्यक है। जब प्रत्येक परिवार शिक्षित, स्वस्थ और आर्थिक रूप से सक्षम होगा, तभी देश का समग्र और सतत विकास संभव हो सकेगा।विश्व जनसंख्या दिवस के अवसर पर विद्यालयों, महाविद्यालयों, स्वास्थ्य संस्थानों एवं सामाजिक संगठनों द्वारा संगोष्ठियाँ, जागरूकता रैलियाँ, स्वास्थ्य शिविर, पोस्टर प्रतियोगिताएँ तथा जनजागरूकता अभियान आयोजित किए जाते हैं। इन कार्यक्रमों के माध्यम से लोगों को जनसंख्या नियंत्रण के वैज्ञानिक उपायों तथा जिम्मेदार अभिभावक बनने के लिए प्रेरित किया जाता है।विश्व जनसंख्या दिवस हमें यह संदेश देता है कि संतुलित जनसंख्या ही समृद्ध समाज और विकसित राष्ट्र की आधारशिला है। यदि हम शिक्षा, स्वास्थ्य, लैंगिक समानता और परिवार नियोजन को प्राथमिकता दें तो आने वाली पीढ़ियों के लिए सुरक्षित, स्वस्थ और समृद्ध भविष्य का निर्माण किया जा सकता है। यही इस दिवस का वास्तविक उद्देश्य और सबसे बड़ा संदेश है।
रक्तदान की मिसाल बने समाजसेवी उमेश सिंहसैकड़ों बार किया स्वैच्छिक रक्तदान, जरूरतमंदों के लिए हमेशा तैयारएबीएन न्यूज नेटवर्क, लोहरदगा। जिले में समाजसेवा केवल शब्दों से नहीं, बल्कि कर्मों से होती है और इसका जीवंत उदाहरण हैं समाजसेवी एवं बजरंग दल के पूर्व संयोजक उमेश सिंह वर्षों से निस्वार्थ भाव से मानव सेवा में जुटे उमेश सिंह ने एक बार फिर जरूरतमंद की मदद कर यह साबित कर दिया कि रक्तदान वास्तव में महादान है।बुधवार को गढ़ा टोली निवासी प्रीति खालको को गर्भावस्था के दौरान ऑपरेशन के लिए चिकित्सकों ने एक यूनिट ओ पॉजिटिव रक्त की आवश्यकता बताई थी।जैसे ही इसकी सूचना उमेश सिंह को मिली, वे बिना किसी देरी के सदर अस्पताल पहुंचे और रक्तदान कर प्रीति खालको की सहायता की।समय पर मिले रक्त से मरीज और उसके परिजनों को बड़ी राहत मिली। उमेश सिंह अब तक सैकड़ों बार स्वैच्छिक रक्तदान कर चुके हैं।उनकी पहचान ऐसे समाजसेवी के रूप में है जो दिन हो या रात, किसी भी जरूरतमंद के लिए हमेशा तत्पर रहते हैं। उन्होंने न केवल स्वयं अनेक बार रक्तदान किया है, बल्कि हजारों युवाओं को भी रक्तदान के लिए प्रेरित किया है। उनके प्रयासों से कई लोगों की जान बच चुकी है और अनेक परिवारों के चेहरे पर मुस्कान लौट आई है।समाज में ऐसे लोग प्रेरणा के स्रोत होते हैं, जो बिना किसी स्वार्थ के मानव सेवा को अपना धर्म मानते हैं। उमेश सिंह का यह सेवा भाव युवाओं के लिए अनुकरणीय है। यदि अधिक से अधिक लोग नियमित रूप से स्वैच्छिक रक्तदान करें,तो रक्त की कमी के कारण किसी भी मरीज की जान जोखिम में नहीं पड़ेगी।उमेश सिंह ने सभी स्वस्थ लोगों से अपील की कि वे समय-समय पर स्वैच्छिक रक्तदान करें,क्योंकि आपका एक यूनिट रक्त किसी जरूरतमंद को नया जीवन दे सकता है। उनका यह कार्य समाज के लिए प्रेरणा है और मानवता की सच्ची सेवा का उत्कृष्ट उदाहरण भी है।
पापों के नाश, आत्मशुद्धि, सेवा और मोक्ष का पावन पर्व : संजय सर्राफ एबीएन सोशल डेस्क। श्री कृष्ण प्रणामी सेवा धाम ट्रस्ट एवं विश्व हिंदू परिषद सेवा विभाग के प्रांतीय प्रवक्ता संजय सर्राफ ने कहा है कि भारतीय सनातन संस्कृति में एकादशी व्रतों का विशेष महत्व है। इन्हीं में से एक है योगिनी एकादशी, जो आषाढ़ मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी को श्रद्धा एवं भक्ति के साथ मनायी जाती है। इस वर्ष यह पावन पर्व 10 जुलाई दिन शुक्रवार को मनाया जायेगा। यह एकादशी भगवान श्रीहरि विष्णु को समर्पित है और इसे पापों के नाश, आत्मशुद्धि तथा मोक्ष प्रदान करने वाला श्रेष्ठ व्रत माना गया है। पुराणों के अनुसार योगिनी एकादशी का उल्लेख ब्रह्मवैवर्त पुराण एवं पद्म पुराण में मिलता है। इसके संबंध में कुबेर के पुष्पमाली हेममाली की कथा प्रसिद्ध है। अपने कर्तव्य की उपेक्षा करने के कारण उसे श्राप मिला और वह कुष्ठ रोग से पीड़ित हो गया। बाद में ऋषि मार्कण्डेय के निर्देश पर उसने योगिनी एकादशी का व्रत किया, जिससे वह श्रापमुक्त होकर पुन: स्वस्थ और सम्मानित जीवन प्राप्त कर सका। यह कथा हमें कर्तव्यनिष्ठा, अनुशासन और भगवान के प्रति श्रद्धा का संदेश देती है। योगिनी एकादशी का मुख्य उद्देश्य मनुष्य को बुरे कर्मों से दूर कर सदाचार, संयम, सेवा और आध्यात्मिक जीवन की ओर प्रेरित करना है।इस दिन श्रद्धालु प्रात: स्नान कर भगवान विष्णु एवं माता लक्ष्मी की पूजा करते हैं, व्रत रखते हैं, विष्णु सहस्रनाम तथा गीता का पाठ करते हैं और रात्रि में भजन-कीर्तन के माध्यम से प्रभु का स्मरण करते हैं। अगले दिन द्वादशी तिथि में विधिपूर्वक पारण किया जाता है। इस एकादशी की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसे अनेक यज्ञों और दानों के समान फलदायी माना गया है। धार्मिक मान्यता के अनुसार श्रद्धापूर्वक किया गया यह व्रत मनुष्य को पापों से मुक्ति, मानसिक शांति, उत्तम स्वास्थ्य, पारिवारिक सुख और आध्यात्मिक उन्नति प्रदान करता है। साथ ही दीन-दुखियों की सेवा, अन्न, वस्त्र एवं जल का दान तथा पर्यावरण संरक्षण जैसे सत्कर्मों का भी विशेष महत्व बताया गया है।आज के भौतिकवादी युग में योगिनी एकादशी का संदेश और भी अधिक प्रासंगिक हो जाता है। यह पर्व हमें आत्मसंयम, कर्तव्यपालन, सेवा, करुणा, नैतिक मूल्यों और ईश्वर के प्रति अटूट विश्वास का मार्ग दिखाता है। यदि हम इस एकादशी की भावना को अपने दैनिक जीवन में उतारें, तो व्यक्तिगत जीवन के साथ-साथ समाज में भी सद्भाव, नैतिकता और आध्यात्मिक चेतना का विस्तार होगा। यही योगिनी एकादशी का वास्तविक महत्व और संदेश है।
महान राष्ट्रवादी, शिक्षाविद, भविष्यदृष्टा विशेष विचारधारा का राजनीतिक दल भारतीय जनसंघ के संस्थापक अध्यक्ष डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी को उनके जन्म-जयंती के शुभ अवसर पर श्रद्धा सुमन अर्पित एबीएन न्यूज नेटवर्क, लोहरदगा। एक देश में दो विधान, दो प्रधान, दो निशान, नहीं चलेंगे... का उद्घोष कर उन्होंने राष्ट्र की एकता, अखंडता तथा राष्ट्र प्रथम के संकल्प को एक नूतन संजीवनी से संपोषित किया। भारत अखंड रहे इसके लिए उन्होंने अपना बलिदान देकर संपूर्ण राष्ट्र में जन जागरण का कार्य किया। अखंड भारत के प्रति उनका समर्पण तथा राष्ट्र के प्रति उनकी भावना हम सभी को प्रेरणा, ऊर्जा और शक्ति से भर देता है। सादर शत-शत नमन...।
राष्ट्रीय एकता के प्रबल समर्थक थे डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी : संजय सर्राफटीम एबीएन, रांची। हिंदी साहित्य भारती के उपाध्यक्ष सह विश्व हिंदू परिषद सेवा विभाग के प्रांतीय प्रवक्ता संजय सर्राफ ने कहा है कि भारत के महान शिक्षाविद्, प्रखर राष्ट्रवादी चिंतक, स्वतंत्रता सेनानी तथा जनसंघ के संस्थापक डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की जयंती प्रतिवर्ष 6 जुलाई को पूरे देश में श्रद्धा और सम्मान के साथ मनाई जाती है। डॉ श्यामा प्रसाद मुखर्जी की 125 वीं जयंती इस वर्ष मनाई जा रही है। वर्ष 1901 में कोलकाता में जन्मे डॉ. मुखर्जी ने अपने जीवन को राष्ट्रहित, शिक्षा, लोकतंत्र और राष्ट्रीय एकता के लिए समर्पित कर दिया। उनकी जयंती केवल एक महान व्यक्तित्व का स्मरण करने का अवसर नहीं, बल्कि राष्ट्र निर्माण के प्रति उनके विचारों और आदर्शों को आत्मसात करने का भी प्रेरक अवसर है। डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी असाधारण प्रतिभा के धनी थे। वे कम आयु में ही कोलकाता विश्वविद्यालय के कुलपति बने और शिक्षा के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान दिया।स्वतंत्र भारत की पहली केंद्रीय मंत्रिपरिषद में उन्होंने उद्योग एवं आपूर्ति मंत्री के रूप में कार्य किया, किंतु सिद्धांतों से समझौता न करते हुए उन्होंने अपने पद से इस्तीफा दे दिया। वर्ष 1951 में उन्होंने भारतीय जनसंघ की स्थापना की, जिसने आगे चलकर भारतीय राजनीति की दिशा और दशा को प्रभावित किया।डॉ. मुखर्जी का सबसे बड़ा योगदान भारत की अखंडता और एकता के प्रति उनकी अटूट प्रतिबद्धता थी। उन्होंने जम्मू-कश्मीर में लागू अलग व्यवस्था का विरोध करते हुए एक देश में दो विधान, दो प्रधान और दो निशान नहीं चलेंगे, का संदेश दिया। राष्ट्रीय एकीकरण के लिए उनके संघर्ष और बलिदान को देश सदैव स्मरण करता है। वर्ष 1953 में जम्मू-कश्मीर में नजरबंदी के दौरान उनका निधन हो गया, जिसे राष्ट्र के लिए उनके सर्वोच्च बलिदान के रूप में देखा जाता है। उनकी जयंती का उद्देश्य नई पीढ़ी को राष्ट्रभक्ति, लोकतांत्रिक मूल्यों, कर्तव्यनिष्ठा, ईमानदारी और राष्ट्रीय एकता के प्रति जागरूक करना है। इस अवसर पर देशभर में संगोष्ठियों, विचार गोष्ठियों, पुष्पांजलि कार्यक्रमों तथा विभिन्न सामाजिक और शैक्षणिक आयोजनों के माध्यम से उनके व्यक्तित्व एवं कृतित्व को स्मरण किया जाता है। उनके विचार आज भी आत्मनिर्भर भारत, सुशासन, शिक्षा सुधार और राष्ट्रीय स्वाभिमान के लिए प्रेरणा प्रदान करते हैं।डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी का जीवन हमें यह संदेश देता है कि राष्ट्र सर्वोपरि है और उसके सम्मान, सुरक्षा तथा एकता के लिए निस्वार्थ भाव से कार्य करना प्रत्येक नागरिक का कर्तव्य है। उनकी जयंती हमें उनके आदर्शों को अपनाने, राष्ट्रीय चेतना को सुदृढ़ करने और एक सशक्त, समृद्ध एवं अखंड भारत के निर्माण में सक्रिय योगदान देने की प्रेरणा देती है। यही उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी।
विप्र फाउंडेशन जोन 6 के प्रदेश नवगठित पदाधिकारियों व कार्यकारिणी ने सभा में ग्रहण किया पदभार टीम एबीएन, रांची। विप्र फाउंडेशन झारखंड प्रदेश कार्यकारिणी के पदभार, अभिनंदन व स्वागत समारोह मारवाड़ी भवन, हरमू रोड, रांची में आयोजित हुआ। समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में राष्ट्रीय संगठन महामंत्री उअ डॉ सुनील शर्मा (बॉम्बे) उपस्थित थे। गणेश वंदना, विप्र मंगलकामना एवं दीप प्रज्ज्वलन के साथ कार्यक्रम की शुरुआत हुई। कार्यक्रम की अध्यक्षता नव निर्वाचित अध्यक्ष उअ जयप्रकाश शर्मा ने की एवम समारोह में पधारे सभी बिप्र बंधुओ का स्वागत भी किया। उपरोक्त कार्यक्रम में प्रदेश कमेटी के पदाधिकारियों की घोषणा की गयी। साथ ही जिला कमेटी रांची, जमशेदपुर, सिमडेगा, गिरिडीह, रामगढ़, देवघर के अध्यक्ष, महामंत्री के नामो की विधिवत घोषणा की गयी। इस अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप मुंबई से पधारे राष्ट्रीय संगठन महामंत्री सीए डॉक्टर सुनील शर्मा को पुष्प गुच्छ, अंग वस्त्र व मोमेंटो को देकर उनका अभिनंदन और स्वागत किया। जोन 6 के प्रदेश अध्यक्ष जयप्रकाश शर्मा ने उपस्थित सभी विप्र बंधुओं का अभिनंदन और स्वागत करते हुए विप्र फाउंडेशन के क्रियाकलापों की जानकारी सभा में रखी। उन्होंने कहा कि समाज में लोगों को संगठित करना, उनके हितों के लिए कार्य करना, शिक्षा एवं रोजगार में प्रथम प्राथमिकता के द्वारा बहाली में सहयोग करना एवं राजस्थान सहित कई जगहो पर अलग-अलग प्रकल्पों द्वारा समाज में आखिरी प्रावधान तक के व्यक्तियों के बीच पहुंचाना हमारा लक्ष्य रहेगा। इस अवसर पर क्षेत्रीय अध्यक्ष पुरुषोत्तम शर्मा, झारखंड प्रभारी एवं राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य निरंजन लाल शर्मा, क्षेत्रीय संगठन महामंत्री संबलपुर निवासी शरद शर्मा ने भी अपने संबोधन के माध्यम से विप्र फाउंडेशन के कार्यों की सराहना करते फाउंडेशन के प्रकल्प का लाभ जन-जन तक पहुंचाने युवा साथियों को संकल्प दिलाने के सकारात्मक सहयोग पर बल दिया। उन्होंने कहा कि आज के युवाओं को शिक्षा और रोजगार से जोड़ उन्हें सकारात्मक सहयोग देकर आगे बढ़ाने का कार्य करें। इस अवसर पर प्रदेश के संगठन मंत्री प्रदीप शर्मा ने प्रदेश पदाधिकारी के नामों की सूची को पढ़कर सुनाया एवं नवगठित पदाधिकारीयो व कार्यकारणी सदस्यों का को पदभार ग्रहण करती हुई उनका अभिनंदन और स्वागत भी किया। मुख्य अतिथि के रूप में मुंबई से पधारे हमारे बीच राष्ट्रीय संगठन मंत्री महामंत्री का डॉक्टर सुनील शर्मा ने भी विप्र फाउंडेशन के प्रकल्पों की जानकारी पटल पर रखी। डॉ सुनील शर्मा ने कहा ब्राह्मण समाज के उत्थान के लिए शिक्षा संस्कार एवं रोजगार की आवश्यकता है इस दिशा में विप्रो फाउंडेशन पूरे देश में कार्य कर रहा है। ब्राह्मण समाज एकत्र होगा एकता तभी आयेगी हम राजनीतिक दृष्टि से अपेक्षित है वह उपेक्षा एकता के साथ खत्म होगी उन्होंने कहा कि भवन और शिक्षा के क्षेत्र में झारखंड को मजबूत बनावे जिससे हम ब्राह्मण समाज का उत्थान कर सके। कार्यक्रम में झारखंड के सभी जिलों बोकारो, देवघर, सिमडेगा, जमशेदपुर, चाईबासा, रामगढ़, गिरिडीह से काफी संख्या में महिला और पुरुषों ने हिस्सा लिया। उपरोक्त कार्यक्रम में जय प्रकाश शर्मा, पुरुषोत्तम लाल शर्मा, संगठन मंत्री प्रदीप शर्मा, अजय दाधीच, गणेश दायमा, निरंजन लाल शर्मा, अमित मणि शर्मा, प्रमोद सारस्वत, पवन शर्मा, रमेश चंद्र शर्मा, लक्ष्मी चंद दीक्षित, डॉ राजकुमार शर्मा, बबलू हरित, किशन शर्मा, रेखा शर्मा उमंग जोशी, ललित शर्मा, मानसी खंडेलवाल, अशोक पुरोहित, शशांक भारद्वाज, जमशेदपुर से सांवरलाल शर्मा राष्ट्रीय पदाधिकारी, ललित शर्मा, देवराज, राजेश, बैजनाथ, अनिल, लाला भारद्वाज, सुरेश, राजेश, प्रदीप मिश्रा, दिलीप, सनी, मनोज, अंकित सहित काफी संख्या में लोग मौजूद थे। मंच का संचालन शशांक भारद्वाज एवं धन्यवाद संगठन महामंत्री प्रदीप शर्मा ने दिया। उक्त जानकारी आयोजन समिति के प्रमोद सारस्वत ने दी।
भजन -जागरण में खूब झूमे श्रद्धालु टीम एबीएन, रांची। रांची के पुंदाग स्थित एम.आर.एस. श्री कृष्ण प्रणामी सेवा धाम ट्रस्ट द्वारा संचालित श्री कृष्ण प्रणामी मंगल राधिका सदानंद सेवाधाम श्रीराधा-कृष्ण प्रणामी मंदिर में डॉ संत शिरोमणि स्वामी सदानंद महाराज जी के सानिध्य में 273 वां श्री कृष्ण प्रणामी अन्नपूर्णा सेवा महाप्रसाद का श्रद्धापूर्वक आयोजन किया गया। कार्यक्रम में हजारों श्रद्धालुओं ने भाग लेकर भगवान श्री राधा-कृष्ण का आशीर्वाद प्राप्त किया। इस अवसर पर मंदिर में श्री राधा रानी जी का दिव्य एवं अलौकिक श्रृंगार आकर्षक आभूषणों एवं मनोहारी पुष्पों से किया गया, दोपहर 12 बजे मंदिर के पुजारी अरविंद कुमार पांडेय ने विधिवत पूजा-अर्चना एवं मंत्रोच्चार के साथ महाप्रसाद का भोग लगाया। इसके पश्चात महाप्रसाद में मसालेदार वेजिटेबल खिचड़ी, छाछ, लीची जूस, एवं आलू चिप्स का पैकेट का वितरण श्रद्धालुओं के बीच किया गया। मंदिर परिसर में उपस्थित लगभग 1500 से अधिक श्रद्धालुओं ने श्रद्धापूर्वक महाप्रसाद ग्रहण किया। भक्ति रस से ओत-प्रोत भजन संध्या कार्यक्रम में ट्रस्ट के भजन गायकों द्वारा सुमधुर एवं मनमोहक भजनों की प्रस्तुति देकर उपस्थित श्रद्धालुओं को भावविभोर कर दिया। भजनों पर श्रद्धालु खूब झूमे तथा पूरा मंदिर परिसर राधे-कृष्ण एवं श्याम के जयकारों से कृष्णमय एवं भक्तिमय हो गया। तत्पश्चात सामूहिक रूप से महाआरती का आयोजन किया गया। ट्रस्ट के प्रवक्ता सह मीडिया प्रभारी संजय सर्राफ ने बताया कि मंदिर में सुबह से ही श्रद्धालुओं का तांता लगा रहा तथा लगभग 4 हजार से अधिक भक्तों ने भगवान के दर्शन किये। उन्होंने बताया कि मंदिर में प्रतिदिन दोपहर 12 बजे से 2 बजे तक वेजिटेबल खिचड़ी महाप्रसाद का वितरण किया जाता है।कार्यक्रम को सफल बनाने में ट्रस्ट के अध्यक्ष डूंगरमल अग्रवाल, उपाध्यक्ष राजेंद्र प्रसाद अग्रवाल, शिव भगवान अग्रवाल, पूरणमल सर्राफ, विशाल जालान, आशुतोष कुमार मिश्रा, पवन पोद्दार, ज्ञान चंद्र शर्मा, अमिता जालान, सिद्धि जालान, सीमा कक्कड़, निमा कक्कड़, अनिल मस्करा, सुनीता मस्करा, सायरा मस्करा, विशाखा जालान, वंदना जालान, अविकल मस्करा सहित अनेक श्रद्धालुओं का महत्वपूर्ण योगदान रहा।
सैकड़ों श्रद्धालुओं ने ग्रहण किया आनंद बाजार प्रसाद टीम एबीएन, रांची। कांके रोड स्थित तिरुपति अपार्टमेंट परिसर रविवार को आध्यात्मिक वातावरण से सराबोर हो उठा, जब विनय कुमार सिन्हा एवं उनकी धर्मपत्नी प्रभा श्रीवास्तव के सौजन्य तथा गुरु कृपा की प्रेरणा से श्री श्री 108 सद्गुरु ठाकुर अनुकूलचंद्र जी (देवघर) के पावन सान्निध्य में सत्संग एवं भजन-कीर्तन का भव्य आयोजन किया गया।कार्यक्रम में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लेकर भक्ति एवं आध्यात्मिक चिंतन का लाभ उठाया। कार्यक्रम का शुभारंभ मंगलाचरण एवं भजन-कीर्तन से हुआ। मधुर भजनों की प्रस्तुति से पूरा परिसर भक्तिमय हो गया और उपस्थित श्रद्धालु भक्ति रस में भाव-विभोर हो उठे। इसके पश्चात आयोजित सत्संग में ठाकुर जी के ऋत्विक एवं सेवानिवृत्त आईएएस केके सिंह, एचसी तुलिल, अजय कुमार सिंह तथा मनोज कुमार ने अपने प्रेरणादायी उद्बोधन में सद्गुरु ठाकुर अनुकूलचंद्र जी के जीवन-दर्शन,उनके आध्यात्मिक संदेश तथा मानव जीवन के वास्तविक उद्देश्य पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि सद्गुरु के बताये मार्ग पर चलकर व्यक्ति अपने जीवन को सार्थक, अनुशासित और समाजोपयोगी बना सकता है। वक्ताओं ने प्रेम, सेवा, सदाचार, मानवता और आध्यात्मिक मूल्यों को जीवन में अपनाने का आह्वान किया। उनके प्रेरक विचारों ने उपस्थित श्रद्धालुओं को गहराई से प्रभावित किया। सत्संग एवं भजन-कीर्तन के उपरांत आनंद बाजार (भोजन प्रसाद) का आयोजन किया गया, जिसमें सैकड़ों श्रद्धालुओं ने श्रद्धापूर्वक प्रसाद ग्रहण किया। पूरे आयोजन में अनुशासन, सेवा और सहयोग की उत्कृष्ट भावना देखने को मिली। इस अवसर पर तपन सरकार, श्याम दाड़ी, सोना मुखर्जी, तिरुपति सोसायटी की सचिव, कोषाध्यक्ष सहित तिरुपति अपार्टमेंट के सभी सदस्य एवं अनेक श्रद्धालु उपस्थित रहे। कार्यक्रम की जानकारी तिरुपति सोसायटी के पूर्व सचिव संजय सर्राफ ने दी।
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