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गुरु पूर्णिमा महोत्सव में शामिल होंगे डॉ. संत शिरोमणि स्वामी सदानंद महाराज, 19 को रांची आगमन
Published / 2026-07-17 18:01:35
गुरु पूर्णिमा महोत्सव में शामिल होंगे डॉ. संत शिरोमणि स्वामी सदानंद महाराज, 19 को रांची आगमन

गुरु पूर्णिमा महोत्सव में शामिल होंगे डॉ. संत शिरोमणि स्वामी सदानंद महाराज, 19 जुलाई को रांची आगमनटीम एबीएन, रांची। श्री कृष्ण प्रणामी सेवा धाम ट्रस्ट के संस्थापक परम पूज्य डॉ. संत शिरोमणि स्वामी सदानंद महाराज का रांची आगमन 19 जुलाई को होगा। ट्रस्ट के उपाध्यक्ष राजेंद्र प्रसाद अग्रवाल एवं प्रवक्ता सह मीडिया प्रभारी संजय सर्राफ ने संयुक्त रूप से बताया कि गुरुजी रांची के पुंदाग स्थित श्री राधा कृष्ण प्रणामी मंदिर में आयोजित गुरु पूर्णिमा महोत्सव में सहभागिता करेंगे। उन्होंने बताया कि 19 जुलाई को अपराह्न 2.30 बजे से शाम 5 बजे तक डॉ. संत शिरोमणि स्वामी सदानंद महाराज के सान्निध्य में भव्य सत्संग, भजन-कीर्तन एवं आध्यात्मिक प्रवचन का आयोजन किया जाएगा। इस दौरान गुरुजी अपने प्रेरणादायी आशीर्वचनों से श्रद्धालुओं का मार्गदर्शन करेंगे। कार्यक्रम में पारंपरिक विधि-विधान से गुरु पूजन भी संपन्न होगा तथा उपस्थित श्रद्धालुओं के बीच प्रसाद का वितरण किया जाएगा। ट्रस्ट के पदाधिकारियों ने सभी श्रद्धालुओं एवं धर्मप्रेमी नागरिकों से गुरु पूर्णिमा महोत्सव में अधिक से अधिक संख्या में उपस्थित होकर गुरुजी के दर्शन, सत्संग एवं आशीर्वचन का लाभ लेने तथा कार्यक्रम को सफल बनाने की अपील की है।

अंतरराष्ट्रीय न्याय दिवस न्याय, मानवाधिकार और वैश्विक शांति का देता है सशक्त संदेश : संजय सर्राफ
Published / 2026-07-15 19:55:09
अंतरराष्ट्रीय न्याय दिवस न्याय, मानवाधिकार और वैश्विक शांति का देता है सशक्त संदेश : संजय सर्राफ

टीम एबीएन, रांची। हिंदी साहित्य भारती के उपाध्यक्ष सह झारखंड पेरेंट्स एसोसिएशन के प्रांतीय प्रवक्ता संजय सर्राफ ने कहा है कि अंतरराष्ट्रीय न्याय दिवस प्रतिवर्ष 17 जुलाई को मनाया जाता है। इस दिवस का उद्देश्य विश्वभर में न्याय, मानवाधिकार, कानून के शासन तथा मानवता के विरुद्ध होने वाले गंभीर अपराधों के प्रति जागरूकता बढ़ाना है। यह दिन वर्ष 1998 में रोम संविधि को अपनाये जाने की स्मृति में मनाया जाता है। इसी ऐतिहासिक संधि के आधार पर अंतरराष्ट्रीय अपराध न्यायालय की स्थापना का मार्ग प्रशस्त हुआ, जिसने युद्ध अपराध, नरसंहार,मानवता के विरुद्ध अपराध तथा आक्रमण जैसे जघन्य अपराधों के दोषियों को न्याय के कटघरे में लाने का वैश्विक तंत्र विकसित किया। अंतरराष्ट्रीय न्याय दिवस का मूल उद्देश्य यह संदेश देना है कि कोई भी व्यक्ति, चाहे वह कितना ही प्रभावशाली क्यों न हो, कानून से ऊपर नहीं है। यह दिवस विश्व समुदाय को न्याय, समानता, मानव गरिमा और उत्तरदायित्व के सिद्धांतों के प्रति प्रतिबद्ध रहने की प्रेरणा देता है। साथ ही यह पीड़ितों के अधिकारों की रक्षा तथा दोषियों को निष्पक्ष न्याय दिलाने की आवश्यकता पर बल देता है। इस दिवस का महत्व इसलिए भी अत्यधिक है क्योंकि आज विश्व के अनेक हिस्सों में युद्ध, हिंसा, आतंकवाद, जातीय संघर्ष और मानवाधिकारों के उल्लंघन जैसी घटनाएं सामने आती रहती हैं। ऐसे समय में अंतरराष्ट्रीय न्याय व्यवस्था वैश्विक शांति और मानवता की रक्षा का महत्वपूर्ण आधार बनती है। न्याय व्यवस्था न केवल अपराधियों को दंडित करती है, बल्कि पीड़ितों के विश्वास को भी मजबूत करती है और भविष्य में ऐसे अपराधों की पुनरावृत्ति रोकने का प्रयास करती है। अंतरराष्ट्रीय न्याय दिवस की प्रमुख विशेषता यह है कि यह किसी एक देश तक सीमित नहीं, बल्कि पूरी मानवता के हित से जुड़ा हुआ दिवस है। इस अवसर पर विभिन्न देशों में संगोष्ठियों, परिचर्चाओं, विधिक जागरूकता कार्यक्रमों, मानवाधिकार अभियानों तथा शैक्षणिक गतिविधियों का आयोजन किया जाता है। न्यायविद, विधि विशेषज्ञ, सामाजिक संगठन और युवा वर्ग कानून के शासन तथा मानवाधिकारों के संरक्षण के प्रति लोगों को जागरूक करते हैं। आज के समय में न्याय केवल न्यायालयों तक सीमित विषय नहीं, बल्कि सामाजिक जीवन का आधार बन चुका है। प्रत्येक नागरिक का दायित्व है कि वह कानून का सम्मान करे, मानवाधिकारों की रक्षा करे तथा न्यायपूर्ण समाज के निर्माण में अपनी सक्रिय भूमिका निभाये। अंतरराष्ट्रीय न्याय दिवस हमें यह प्रेरणा देता है कि न्याय, समानता, सत्य और मानव गरिमा ही एक शांतिपूर्ण, लोकतांत्रिक और समृद्ध विश्व की सबसे मजबूत नींव हैं। यही इस दिवस का वास्तविक संदेश और उद्देश्य है। 

भगवान जगन्नाथ रथ यात्रा पर श्री राधा-कृष्ण प्रणामी मंदिर में विशेष पूजा-अर्चना और महाप्रसाद का आयोजन
Published / 2026-07-14 20:26:45
भगवान जगन्नाथ रथ यात्रा पर श्री राधा-कृष्ण प्रणामी मंदिर में विशेष पूजा-अर्चना और महाप्रसाद का आयोजन

टीम एबीएन, रांची। भगवान श्री जगन्नाथ रथ यात्रा के पावन अवसर पर 16 जुलाई दिन गुरुवार को श्री कृष्ण प्रणामी सेवा धाम ट्रस्ट द्वारा संचालित श्री राधा कृष्ण प्रणामी मंदिर पुंदाग में विशेष पूजा- अनुष्ठान एवं भक्ति कार्यक्रम का आयोजन किया जायेगा। ट्रस्ट के उपाध्यक्ष राजेंद्र प्रसाद अग्रवाल एवं प्रवक्ता सह मीडिया प्रभारी संजय सर्राफ ने बताया कि इस अवसर पर भगवान श्रीकृष्ण एवं राधारानी का नयनाभिराम, अलौकिक एवं भव्य श्रृंगार किया जाएगा। मंदिर परिसर में भजन-कीर्तन, विशेष पूजा-अर्चना तथा सामूहिक आरती के माध्यम से भक्त भगवान की आराधना करेंगे। उन्होंने बताया कि भगवान को केसरिया खीर एवं ताजे फलों का महाभोग अर्पित किया जायेगा। पूजा-अर्चना के उपरांत उपस्थित श्रद्धालुओं के बीच महाप्रसाद का वितरण किया जायेगा। ट्रस्ट ने इस पावन अवसर पर रांची एवं आसपास के सभी श्रद्धालुओं से सपरिवार मंदिर पहुंचकर भगवान के दिव्य दर्शन, भजन-कीर्तन, आरती एवं महाप्रसाद का पुण्य लाभ प्राप्त करने की अपील की है। यह आयोजन श्रद्धा, भक्ति, सेवा और सामाजिक समरसता का संदेश प्रदान करेगा।

रथ यात्रा 16 जुलाई को
Published / 2026-07-14 20:23:12
रथ यात्रा 16 जुलाई को

आस्था, समरसता और भगवान जगन्नाथ के लोक मंगल का महापर्व : संजय सर्राफ एबीएन सोशल डेस्क। विश्व हिंदू परिषद सेवा विभाग एवं श्री कृष्ण प्रणामी सेवा धाम ट्रस्ट के प्रांतीय प्रवक्ता संजय सर्राफ ने कहा है कि सनातन धर्म के प्रमुख उत्सवों में भगवान श्री जगन्नाथ की रथ यात्रा का विशेष स्थान है। इस वर्ष रथ यात्रा 16 जुलाई दिन गुरुवार को आषाढ़ शुक्ल द्वितीया के दिन निकाली जायेगी। यह पर्व विशेष रूप से ओडिशा के पुरी में विश्वविख्यात है, जहां भगवान जगन्नाथ, बड़े भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा भव्य रथों पर विराजमान होकर श्रीमंदिर से गुंडीचा मंदिर तक यात्रा करते हैं। इस दिव्य आयोजन में देश-विदेश से लाखों श्रद्धालु शामिल होकर प्रभु के दर्शन का सौभाग्य प्राप्त करते हैं। पौराणिक मान्यता के अनुसार, भगवान श्रीकृष्ण की बहन सुभद्रा ने एक बार अपने दोनों भाइयों श्रीकृष्ण (जगन्नाथ) और बलराम के साथ नगर भ्रमण की इच्छा व्यक्त की। बहन की इच्छा पूर्ण करने के लिए दोनों भाइयों ने रथ पर आरूढ़ होकर यात्रा की। इसी घटना की स्मृति में प्रतिवर्ष रथ यात्रा निकाली जाती है। एक अन्य मान्यता के अनुसार, यह यात्रा भगवान जगन्नाथ के अपनी मौसी के घर अर्थात गुंडीचा मंदिर जाने का प्रतीक है, जहां वे कुछ दिनों तक विश्राम करते हैं और फिर पुन: श्रीमंदिर लौटते हैं। रथ यात्रा केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि सामाजिक समरसता और मानवता का महान संदेश भी देती है। इस दिन जाति, वर्ग, भाषा और क्षेत्र की सभी सीमाएँ समाप्त हो जाती हैं। भगवान स्वयं मंदिर से बाहर निकलकर अपने भक्तों के बीच आते हैं, जिससे यह संदेश मिलता है कि ईश्वर सभी के हैं और उनके द्वार सभी के लिए समान रूप से खुले हैं। इस पर्व की सबसे बड़ी विशेषता तीन भव्य रथ हैं। भगवान जगन्नाथ का रथ नंदीघोष, बलभद्र का तालध्वज तथा माता सुभद्रा का दर्पदलन कहलाता है। इन विशाल रथों का निर्माण प्रत्येक वर्ष नयी लकड़ियों से पारंपरिक विधि के अनुसार किया जाता है। श्रद्धालु रथ की रस्सी खींचकर स्वयं को धन्य मानते हैं। धार्मिक मान्यता है कि श्रद्धापूर्वक रथ खींचने और भगवान के दर्शन करने से पुण्य की प्राप्ति होती है तथा जीवन में सुख, शांति और समृद्धि का वास होता है। रथ यात्रा का उद्देश्य केवल उत्सव मनाना नहीं, बल्कि लोककल्याण, सेवा, समानता, भक्ति और आध्यात्मिक जागरण का संदेश देना है। यह पर्व हमें अहंकार त्यागकर प्रेम, करुणा, सहयोग और सद्भाव के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है। भगवान जगन्नाथ का अर्थ ही है-जगत के नाथ,अर्थात संपूर्ण विश्व के स्वामी। इसलिए यह उत्सव संपूर्ण मानवता के कल्याण और विश्वबंधुत्व का प्रतीक माना जाता है। आज रथ यात्रा केवल पुरी तक सीमित नहीं है, बल्कि भारत के अनेक राज्यों तथा विश्व के अनेक देशों में भी श्रद्धा और उत्साह के साथ मनायी जाती है। यह महापर्व भारतीय संस्कृति, सनातन परंपरा, लोक आस्था और सामाजिक एकता का जीवंत प्रतीक है। भगवान जगन्नाथ की रथ यात्रा हमें यह संदेश देती है कि जब ईश्वर स्वयं अपने भक्तों के द्वार तक आते हैं, तब प्रत्येक व्यक्ति को भी प्रेम, सेवा और मानव कल्याण के मार्ग पर अग्रसर होकर समाज में सुख, शांति और सद्भाव स्थापित करने का संकल्प लेना चाहिए।

श्री राधा-कृष्ण प्रणामी मंदिर में अन्नपूर्णा महाप्रसाद का हुआ आयोजन
Published / 2026-07-13 23:12:19
श्री राधा-कृष्ण प्रणामी मंदिर में अन्नपूर्णा महाप्रसाद का हुआ आयोजन

श्री राधा-कृष्ण प्रणामी मंदिर में अन्नपूर्णा महाप्रसाद का हुआ आयोजनटीम एबीएन, रांची। रांची के पुंदाग स्थित एमआरएस श्री कृष्ण प्रणामी सेवा धाम ट्रस्ट द्वारा संचालित श्री कृष्ण प्रणामी मंगल राधिका सदानंद सेवाधाम श्रीराधा-कृष्ण प्रणामी मंदिर में डॉ संत शिरोमणि स्वामी सदानंद महाराज जी के सानिध्य में 274 वां श्री कृष्ण प्रणामी अन्नपूर्णा सेवामहाप्रसाद का श्रद्धापूर्वक आयोजन किया गया। कार्यक्रम में हजारों श्रद्धालुओं ने भाग लेकर भगवान श्री राधा-कृष्ण का आशीर्वाद प्राप्त किया।इस अवसर पर मंदिर में श्री राधा रानी जी का दिव्य एवं अलौकिक श्रृंगार आकर्षक आभूषणों एवं मनोहारी पुष्पों से किया गया, दोपहर 12 बजे मंदिर के पुजारी अरविंद कुमार पांडेय ने विधिवत पूजा-अर्चना एवं मंत्रोच्चार के साथ महाप्रसाद का भोग लगाया। इसके पश्चात महाप्रसाद में मसालेदार वेजिटेबल खिचड़ी,लीची जूस, एवं आलू चिप्स का पैकेट का वितरण श्रद्धालुओं के बीच किया गया। मंदिर परिसर में उपस्थित लगभग 2 हजार से अधिक श्रद्धालुओं ने श्रद्धापूर्वक महाप्रसाद ग्रहण किया। भक्ति रस से ओत-प्रोत भजन संध्या कार्यक्रम में ट्रस्ट के भजन गायकों द्वारा सुमधुर एवं मनमोहक भजनों की प्रस्तुति देकर उपस्थित श्रद्धालुओं को भावविभोर कर दिया। भजनों पर श्रद्धालु खूब झूमे तथा पूरा मंदिर परिसर राधे-कृष्ण एवं श्याम के जयकारों से कृष्णमय एवं भक्तिमय हो गया। तत्पश्चात सामूहिक रूप से महाआरती का आयोजन किया गया, ट्रस्ट के प्रवक्ता सह मीडिया प्रभारी संजय सर्राफ ने बताया कि मंदिर में सुबह से ही श्रद्धालुओं का तांता लगा रहा तथा लगभग 5 हजार से अधिक भक्तों ने भगवान के दर्शन किये। उन्होंने बताया कि मंदिर में प्रतिदिन दोपहर 12 बजे से 2 बजे तक वेजिटेबल खिचड़ी महाप्रसाद का वितरण किया जाता है। कार्यक्रम को सफल बनाने में डूंगरमल अग्रवाल, राजेंद्र प्रसाद अग्रवाल, निर्मल छावनिका, विजय अग्रवाल, सुरेश अग्रवाल, शिव भगवान अग्रवाल, पूरणमल सर्राफ, नंदकिशोर चौधरी, अरविंद अग्रवाल, संजय सर्राफ, सुरेश भगत, पवन पोद्दार, ज्ञान प्रकाश शर्मा सहित अन्य सदस्यों का महत्वपूर्ण योगदान रहा।

आषाढ़ के गुप्त नवरात्र का पावन पर्व 15 जुलाई से
Published / 2026-07-12 22:01:27
आषाढ़ के गुप्त नवरात्र का पावन पर्व 15 जुलाई से

आत्मचिंतन, संयम, सेवा, श्रद्धा और आध्यात्मिक जागरण का संदेश देने वाला दिव्य अवसर : संजय सर्राफ एबीएन सोशल डेस्क। विश्व हिंदू परिषद सेवा विभाग एवं श्री कृष्ण प्रणामी सेवा धाम ट्रस्ट के प्रांतीय प्रवक्ता संजय सर्राफ ने कहा है कि चैत्र और शारदीय नवरात्रि के बारे में तो सभी जानते हैं लेकिन बहुत कम लोगों को यह जानकारी होती है कि आषाढ़ माह में आने वाली गुप्त नवरात्रि अत्यंत रहस्यमय और प्रभावशाली मानी जाती है। इस विशेष नवरात्रि में देवी दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा के साथ-साथ दस महाविद्याओं की भी साधना की जाती है। इन विद्याओं में मां काली, मां तारा, मां त्रिपुर सुंदरी, मां भुवनेश्वरी, छिन्नमस्ता, मां त्रिपुर भैरवी, मां धूमावती, मां बगलामुखी, मां मातंगी और मां कमला शामिल है, आषाढ़ मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा से प्रारंभ होने वाली गुप्त नवरात्र इस वर्ष 15 जुलाई से 23 जुलाई तक मनाई जाएगी। यह नौ दिवसीय पर्व देवी शक्ति की उपासना, आत्मशुद्धि, आध्यात्मिक साधना तथा तांत्रिक सिद्धियों की प्राप्ति के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। सामान्यत: चैत्र और शारदीय नवरात्र पूरे देश में व्यापक रूप से मनाए जाते हैं, जबकि आषाढ़ और माघ की नवरात्र को गुप्त नवरात्र कहा जाता है। इन दिनों में साधक, संत, योगी और तंत्र-मंत्र की साधना करने वाले श्रद्धालु विशेष रूप से माँ आदिशक्ति की आराधना करते हैं। धार्मिक मान्यता के अनुसार, गुप्त नवरात्र का वर्णन विभिन्न पुराणों एवं तांत्रिक ग्रंथों में मिलता है। कथा के अनुसार, एक समय देवर्षि नारद ने भगवान से प्रश्न किया कि ऐसे गृहस्थ और साधक, जो गुप्त रूप से देवी की आराधना करना चाहते हैं, उनके लिए कौन-सा श्रेष्ठ समय है। तब देवी उपासना के लिए आषाढ़ और माघ की गुप्त नवरात्र का महत्व बताया गया। माना जाता है कि इन दिनों में श्रद्धापूर्वक की गई साधना शीघ्र फलदायी होती है तथा साधक को माँ दुर्गा की विशेष कृपा प्राप्त होती है। गुप्त नवरात्र के नौ दिनों में मां दुर्गा के नौ स्वरूपों शैलपुत्री, ब्रह्मचारिणी, चंद्रघंटा, कूष्मांडा, स्कंदमाता, कात्यायनी, कालरात्रि, महागौरी और सिद्धिदात्री-की विधिवत पूजा की जाती है। भक्त कलश स्थापना, अखंड ज्योति, दुर्गा सप्तशती का पाठ, देवी कवच, अर्गला स्तोत्र, कीलक स्तोत्र तथा मंत्र-जप के माध्यम से मां भगवती का आह्वान करते हैं। अनेक श्रद्धालु नौ दिनों का व्रत रखकर सात्विक जीवन अपनाते हैं और सेवा, दान तथा संयम का पालन करते हैं।आषाढ़ गुप्त नवरात्र का प्रमुख उद्देश्य मन, वचन और कर्म की शुद्धि, आत्मबल की वृद्धि तथा आध्यात्मिक उन्नति है। यह पर्व हमें सिखाता है कि सच्ची साधना बाहरी प्रदर्शन नहीं, बल्कि अंतर्मन की पवित्रता और ईश्वर के प्रति अटूट श्रद्धा में निहित है। इस अवधि में की गयी प्रार्थना, ध्यान और जप व्यक्ति के भीतर सकारात्मक ऊर्जा, आत्मविश्वास तथा मानसिक शांति का संचार करते हैं। यह पर्व साधकों के लिए अत्यंत फलदायी माना गया है। आषाढ़ गुप्त नवरात्र केवल धार्मिक अनुष्ठान का पर्व नहीं, बल्कि आत्मचिंतन, संयम, सेवा, श्रद्धा और आध्यात्मिक जागरण का संदेश देने वाला दिव्य अवसर है। यदि इन नौ दिनों में श्रद्धा, विश्वास और नियमपूर्वक माँ भगवती की उपासना की जाये, तो जीवन में सुख, समृद्धि, साहस, शांति और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। यही इस पावन पर्व की सबसे बड़ी विशेषता और सार्थकता है।

श्री श्याम मंदिर में धूमधाम से मनी योगिनी एकादशी
Published / 2026-07-10 21:24:31
श्री श्याम मंदिर में धूमधाम से मनी योगिनी एकादशी

एबीएन सोशल डेस्क। अग्रसेन पथ स्थित श्री श्याम मन्दिर में दिनांक 10 जुलाई 2026 को योगिनी एकादशी उत्सव अत्यंत धूमधाम एवम भग्तिमय वातावरण में आयोजित किया गया।  प्रात: श्री श्याम प्रभु को नवीन वस्त्र (बागा) पहनाकर स्वर्ण आभूषणों से अलंकृत कर रजनीगंधा, गुलाब, बेला, गैंदा, तुलसीदल की मालाओं से श्री श्याम प्रभु का श्रृंगार किया गया। साथ ही मंदिर में विराजमान शिव परिवार एवं बजरंगबली का भी इस अवसर पर विशेष श्रृंगार किया गया।  रात्रि 9 बजे श्री श्याम प्रभु के जयकारों के बीच पावन ज्योत प्रज्वलित की गयी। श्री श्याम तुम्हारे कदमों में हम नजर बिछाए बैठे हैं, हारे का सहारा है बाबा श्याम हमारा, अपने दिल का हाल सुनावन आयां हां, बस इतनी तमन्ना है हे श्याम तुम्हें देखूं... इत्यादि मधुर भजनों की लय पर भग्तगण श्री श्याम प्रभु को रिझाते रहे। मौके पर श्री श्याम प्रभु को विभिन्न प्रकार के मिष्ठान, फल, मेवा व केसरिया दूध का भोग अर्पित किया गया। रात्रि 12 बजे महाआरती व प्रसाद वितरण के साथ कार्यक्रम का समापन किया गया। आज के इस कार्यक्रम में गोपी किशन ढांढनियां, ओम जोशी, रमेश सारस्वत, बालकिशन पररमपुरिया, नितेश लाखोटिया, चंद्र प्रकाश बगला, धीरज बंका, अभिषेक डालमिया, राजेश सारस्वत, विकास पाडिया का विशेष सहयोग रहा। उक्त जानकारी श्री श्याम मंडल श्री श्याम मंदिर, अग्रसेन पथ रांची के मीडिया प्रभारी सुमित पोद्दार ने दी।

योगिनी एकादशी पर भक्ति, सेवा और समर्पण का अद्भुत संगम
Published / 2026-07-10 21:13:32
योगिनी एकादशी पर भक्ति, सेवा और समर्पण का अद्भुत संगम

श्री राधा-कृष्ण प्रणामी मंदिर में उमड़ी श्रद्धालुओं की आस्था हरि नाम से बढ़कर जग में, कोई नहीं आधार,राधा- कृष्ण कृपा बरसा, हो सबका उद्धार... एबीएन सोशल डेस्क। परम पूज्य डॉ. संत शिरोमणि स्वामी सदानंद महाराज जी के पावन सान्निध्य में एमआरएस श्री कृष्ण प्रणामी सेवा धाम ट्रस्ट द्वारा संचालित श्री कृष्ण प्रणामी मंगल राधिका सदानंद सेवाधाम स्थित श्री राधा कृष्ण प्रणामी मंदिर, पुंदाग में योगिनी एकादशी का पावन पर्व श्रद्धा, भक्ति एवं सेवा भाव के साथ हर्षोल्लासपूर्वक मनाया गया। पूरे दिन मंदिर परिसर आध्यात्मिक वातावरण, हरिनाम संकीर्तन एवं भगवान श्री राधा-कृष्ण के जयघोष से गुंजायमान रहा। योगिनी एकादशी के अवसर पर श्री राधा रानी का नवीन दिव्य वस्त्रों एवं आकर्षक आभूषणों से भव्य एवं अलौकिक श्रृंगार किया गया। मनोहारी स्वरूप के दर्शन के लिए सुबह से ही श्रद्धालुओं का तांता लगा रहा। श्रद्धालुओं ने भगवान श्री राधा-कृष्ण के दर्शन कर सुख, समृद्धि एवं लोक-कल्याण की मंगलकामना की। दोपहर 12 बजे मंदिर के पुजारी अरविंद कुमार पांडेय ने वैदिक मंत्रोच्चार के साथ लड्डू, फल, खिचड़ी एवं मेवा सहित विविध प्रकार के महाप्रसाद का विधिवत भोग भगवान को अर्पित किया। भोग के उपरांत श्रद्धालुओं के बीच मसालेदार वेजिटेबल खिचड़ी का वितरण किया गया। मंदिर परिसर में उपस्थित सैकड़ों श्रद्धालुओं ने श्रद्धापूर्वक महाप्रसाद ग्रहण कर स्वयं को धन्य माना। भजन- जागरण ने पूरे वातावरण को भक्तिमय बना दिया। ट्रस्ट के भजन गायक मनीष सोनी ने श्री राधा-कृष्ण एवं प्रभु भक्ति पर आधारित सुमधुर भजनों की प्रस्तुति देकर श्रद्धालुओं को भाव-विभोर कर दिया। उनके गाये भजनों में योगिनी एकादशी आई हरि नाम की ज्योत जगाई..,राधे राधे जपो निरंतर, मिट जाये हर संताप। एकादशी का पुण्य पाकर, भर जाए जीवन आप.., हरि नाम से बढ़कर जग में, कोई नहीं आधार। राधा कृष्ण कृपा बरसाएं, हो सब का उद्धार। श्रद्धालु भजनों की मधुर धुनों पर भक्ति रस में सराबोर होकर झूमते रहे। इस अवसर पर ट्रस्ट के उपाध्यक्ष राजेंद्र प्रसाद अग्रवाल एवं प्रवक्ता संजय सर्राफ ने योगिनी एकादशी का आध्यात्मिक महत्व बताते हुए कहा कि यह एकादशी पापों के क्षय, आत्मशुद्धि, ईश्वर भक्ति तथा सेवा-साधना का महान पर्व है।उन्होंने बताया कि योगिनी एकादशी का व्रत एवं भगवान विष्णु की आराधना से जीवन में सुख, शांति और आध्यात्मिक उन्नति का मार्ग प्रशस्त होता है। संजय सर्राफ ने बताया कि योगिनी एकादशी के पावन अवसर पर बेंगलुरु निवासी अनिष्क नारायण के सौजन्य से सद्गुरु कृपा अपना घर आश्रम में रह रहे 50 से अधिक निराश्रितों को प्रेमपूर्वक भोजन कराया गया। ट्रस्ट ने इसे मानव सेवा को ईश्वर सेवा मानने की प्रेरणादायी पहल बताया। इस अवसर पर डूंगरमल अग्रवाल, राजेंद्र प्रसाद अग्रवाल, निर्मल जालान, मनोज चौधरी, सज्जन पाड़िया, सुरेश अग्रवाल, पूरणमल सर्राफ, शिव भगवान अग्रवाल, मधुसूदन जाजोदिया, नंदकिशोर चौधरी, संजय सर्राफ, अरविंद अग्रवाल, प्रभास गोयल, विशाल जालान, सुरेश चौधरी, विष्णु सोनी, पवन पोद्दार, सुरेश भगत, ज्ञान चंद्र शर्मा सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।

रांची : आरटीसी में आरएसएस ने किया विशेष युवा कार्यक्रम
Published / 2026-07-09 21:31:12
रांची : आरटीसी में आरएसएस ने किया विशेष युवा कार्यक्रम

टीम एबीएन, बरियातू/ रांची। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ, वाल्मीकि नगर द्वारा संघ शताब्दी वर्ष के पावन अवसर पर एक विशेष युवा कार्यक्रम का सफल आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम पीएचईडी कॉलोनी स्थित आरटीसी हाई स्कूल (जैक बोर्ड) के परिसर में आयोजित हुआ, जिसमें क्षेत्र के युवाओं और विद्यालय के छात्र-छात्राओं ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया और राष्ट्र निर्माण में अपनी भूमिका को रेखांकित किया। कार्यक्रम को मुख्य वक्ता के रूप में संबोधित करते हुए वाल्मीकि नगर (बरियातू क्षेत्र) के सह नगर संघचालक अभिनव शाह ने कहा कि समाज और राष्ट्र में किसी भी बड़े और सकारात्मक बदलाव की शुरूआत हमेशा खुद से होती है। उन्होंने जोर देकर कहा, बड़े बदलाव के लिए हमें स्वयं से प्रारंभ करना होगा। अपने ओजस्वी उद्बोधन में श्री शाह ने युवाओं को राष्ट्र के प्रति उनके नागरिक कर्तव्यों का बोध कराया। उन्होंने वर्तमान समय में स्व आधारित जीवन (स्वदेशी, स्वावलंबन और अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जुड़ाव) की प्रासंगिकता पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने कहा कि जब तक प्रत्येक नागरिक अपने कर्तव्यों के प्रति सजग नहीं होगा और अपने जीवन को स्व के गौरव से नहीं जोड़ेगा, तब तक परम वैभवशाली राष्ट्र की कल्पना अधूरी है। संघ शताब्दी वर्ष के माध्यम से समाज के हर वर्ग, विशेषकर युवाओं को इस विचार दर्शन से जोड़ने का संकल्प लिया गया है। इस कार्यक्रम के सफल संचालन और संयोजन में आयोजक मंडल के रूप में संघ के सह नगर कार्यवाह मनीष, रितेश कुमार, आदर्श कुमार एवं कृष्ण कुमार की प्रमुख भूमिका रही।इसके साथ ही विद्यालय के शिक्षकगण और युवा प्रतिभागियों ने भी कार्यक्रम को सफल बनाने में अपना महत्वपूर्ण योगदान दिया। कार्यक्रम का समापन राष्ट्रभक्ति के संकल्प और सुमधुर वंदे मातरम् के गायन के साथ हुआ। उक्त जानकारी राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ, वाल्मीकि नगर के प्रचार विभाग के संजीत कुमार ने दी।

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