Breaking
ताज़ा समाचार लोड हो रहा है...
लाइव: 215
होम ई-पेपर देश झारखंड खेल समाचार राज काज कानून व्यवस्था करियर बिजनेस वर्ल्ड हेल्थ विचार ज्ञान विज्ञान समाज वन और पर्यावरण मनोरंजन बिहार विज्ञापन

समाज

View All
तेरापंथ युवक परिषद के शिविर में 24 यूनिट रक्त संग्रह
Published / 2026-09-16 18:31:52
तेरापंथ युवक परिषद के शिविर में 24 यूनिट रक्त संग्रह

टीम एबीएन, रांची। अखिल भारतीय तेरापंथ युवक परिषद के निर्देशन में तेरापंथ युवक परिषद रांची ने आज रक्तदान शिविर लगाया। तेरापंथ युवक परिषद रांची ने आज आर्किड ब्लड बैंक के सहयोग से दिगंबर जैन भवन हरमू में रक्तदान शिविर लगाया गया, जिसमें 24 लोगों ने रक्तदान किया एवं 38-40 लोगों के बीपी, शुगर, हीमोग्लोबिन आदि की जांच की गयी। सभी रक्तदाताओं को स्मृति चिन्ह एवं सर्टिफिकेट प्रदान किया गया। साथ हीं एर्कात्कोष पोर्टल में भी ब्लड बैंक के सहयोग से पंजीकृत किया गया। आज के शिविर का संचालन नेहा बैंगानी, पूजा नाहटा, अक्षिता नाहटा ने किया, शिविर को सफल बनाने मे विकास नाहटा, विवेक बैंगानी, ललित सेठिया, सुरेश, आदि का सहयोग रहा। युवक परिषद के अध्यक्ष पंकज बोहरा, मंत्री ललित सेठिया के द्वारा ब्लड बैंक प्रभारी शिखा जी का सम्मान किया गया। ब्लड बैंक के द्वारा युवक परिषद को स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया गया। शिविर में अमरचंद बैंगानी, विमल दस्सानी, प्रकाश चंद नाहटा, लाल चंद  बोथरा, अशोक गुलगुलिया, कमला नाहटा, सरिता दस्सानी, रति बोहरा, जिन्दगी नेहा सेठिया, साक्षी पिंचा आदि मुख्य रूप से मौजूद रहे। आर्किड लड बैंक से डॉ. सिमरन कौर, नर्स पल्ल्वी गुप्ता, तकनीकी टीम से रामप्रसाद, दीपक आदि ने सहयोग दिया। अध्यक्ष पंकज बोहरा ने सभी रक्तदाताओं को रक्तदान करने के लिए धन्यवाद दिया। उक्त जानकारी परिषद के मीडिया प्रभारी सुरेश जैन ने दी।

जैन भवन हरमू रोड में क्षमा दिवस आयोजित; संवत्सरी क्षमावाणी एवं विशाल रक्तदान शिविर संपन्न
Published / 2026-09-16 16:20:09
जैन भवन हरमू रोड में क्षमा दिवस आयोजित; संवत्सरी क्षमावाणी एवं विशाल रक्तदान शिविर संपन्न

जैन भवन हरमू रोड में क्षमा दिवस आयोजित; संवत्सरी क्षमावाणी एवं विशाल रक्तदान शिविर संपन्नएबीएन सोशल डेस्क। श्री साधुमार्गी जैन संघ, रांची के तत्वावधान में जैन भवन, हरमू रोड में बुधवार, 16 सितंबर 2026 को पर्युषण महापर्व का अंतिम दिवस क्षमा दिवस के रूप में अत्यंत श्रद्धा एवं भक्ति के साथ मनाया गया।इस अवसर पर स्वाध्यायी श्रीमती पुष्पा जी ओसवाल ने अंतकृद्दशांग सूत्र का वाचन पूर्ण कर सती चंदनबाला का प्रेरक प्रसंग सुनाया। उन्होंने श्रद्धालुओं को क्षमा ध्यान कराते हुए संदेश दिया कि अपने भीतर के क्रोध और अहंकार को त्यागकर परस्पर क्षमा याचना करना ही आत्मशुद्धि का सच्चा मार्ग है। कार्यक्रम में रांची नगर निगम की मेयर रोशनी खलखो एवं झारखंड प्रदेश महिला मोर्चा की प्रदेश अध्यक्ष डॉ. सीमा सिंह की विशेष अतिथि के रूप में उपस्थिति रही। इस अवसर पर केसर देवी पींचा, मूलचंद सुराणा, राकेश बछावत (समता युवा संघ के अध्यक्ष), हुक्मीचंद चोरड़िया, विकास सुराणा एवं विनोद बेंगानी सहित समाज के अनेक गणमान्य सदस्य उपस्थित रहे। कार्यक्रम के दौरान तेरापंथ युवक परिषद के सहयोग से विशाल रक्तदान शिविर का आयोजन भी किया गया, जिसमें लोगों ने उत्साहपूर्वक भाग लेकर मानव सेवा का संदेश दिया।महापर्व के दौरान तपस्या करने वाले विशाल दस्सानी, रेशमा बोहरा, पूजा बोहरा, पायल कोठारी, छोटे लाल चोरड़िया, रूबी बांठिया, खुशबू दस्सानी, दिशा बेगानी, ममता पिंचा, रति बोहरा, नाहर बेंगानी, सुमन बछावत, सरिता दस्साणी एवं पंकज बोहरा की समाज द्वारा भावभीनी अनुमोदना की गई, अंत में संवत्सरी प्रतिक्रमण संपन्न हुआ और उपस्थित सभी श्रद्धालुओं ने एक-दूसरे से क्षमा याचना करते हुए “मिच्छामि दुक्कड़म” कहा। कार्यक्रम ने आत्मशुद्धि, क्षमा, संयम और मानव सेवा का संदेश दिया। उक्त जानकारी उत्तम जैन ने दी। 

ध्रुव चरित्र, सती-शिव प्रसंग और गणेश चतुर्थी से भक्तिमय हुआ अग्रसेन भवन
Published / 2026-09-15 21:48:50
ध्रुव चरित्र, सती-शिव प्रसंग और गणेश चतुर्थी से भक्तिमय हुआ अग्रसेन भवन

सजीव झांकियों ने मोहा श्रद्धालुओं का मन दृढ़ संकल्प, तपस्या और अटूट विश्वास से असंभव कार्य भी संभव हो सकता है : दिनेश जी एबीएन सोशल डेस्क। सराफ परिवार के तत्वावधान में महाराजा अग्रसेन भवन, रांची में आयोजित सात दिवसीय श्रीमद्भागवत गीता कथा अमृत महोत्सव के तृतीय दिवस का आयोजन श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक उल्लास के वातावरण में हुआ। जगन्नाथधाम के सुप्रसिद्ध कथावाचक एवं व्यास महाराज श्री दिनेश जी भारद्वाज ने व्यास पीठ से श्रीमद्भागवत के विविध प्रेरणादायी प्रसंगों का विस्तारपूर्वक वर्णन किया। कथा के दौरान श्रद्धालु भाव-विभोर होकर भगवान के जयकारे लगाते रहे। कथावाचक श्री दिनेश जी भारद्वाज ने श्रीमद्भागवत के प्रसंगों को क्रमवार प्रस्तुत करते हुए सृष्टि के विस्तार एवं कपिलोख्यान का वर्णन किया। उन्होंने बताया कि भगवान की सृष्टि व्यवस्था में प्रत्येक जीव की अपनी भूमिका है और मनुष्य को अपने जीवन का उद्देश्य समझकर धर्म, सदाचार एवं ईश्वर भक्ति के मार्ग पर चलना चाहिए। कपिल मुनि के उपदेशों के माध्यम से ज्ञान, वैराग्य और भक्ति के महत्व को समझाया गया। इसके बाद सती-शिव चरित्र का अत्यंत भावपूर्ण वर्णन किया गया। भगवान शिव और माता सती के प्रसंग के माध्यम से श्रद्धालुओं को भगवान के प्रति अटूट श्रद्धा, पारिवारिक मर्यादा, आत्मसम्मान तथा धर्म के प्रति समर्पण का संदेश दिया गया। कथा के प्रसंगों का सजीव चित्रण प्रस्तुत किये जाने से पूरा वातावरण भावनात्मक एवं आध्यात्मिक हो उठा। कथा व्यास ने बालक ध्रुव जी के चरित्र का वर्णन करते हुए कहा कि दृढ़ संकल्प, तपस्या और भगवान के प्रति अटूट विश्वास से असंभव कार्य भी संभव हो सकता है। बालक ध्रुव ने विपरीत परिस्थितियों के बावजूद अपने लक्ष्य से विचलित हुए बिना भगवान नारायण की आराधना की और परम पद प्राप्त किया। ध्रुव चरित्र बच्चों और युवाओं को विशेष रूप से लक्ष्य के प्रति समर्पित रहने की प्रेरणा देता है।गणेश चतुर्थी के अवसर पर कथा में भगवान श्रीगणेश की महिमा का भी विस्तार से वर्णन किया गया। भगवान गणेश को प्रथम पूज्य एवं विघ्नहर्ता बताते हुए उनके स्वरूप, महिमा और पूजन के आध्यात्मिक महत्व पर प्रकाश डाला गया। गणेश जी सहित कथा के विभिन्न प्रसंगों की मनोहारी सजीव झांकियां प्रस्तुत की गयीं, जिन्हें देखकर श्रद्धालु मंत्रमुग्ध हो गये। कथा स्थल को भव्य एवं अलौकिक रूप से सजाया गया था। सुमधुर भजनों और संकीर्तन से पूरा महाराजा अग्रसेन भवन भक्तिमय हो उठा। श्रद्धालु भक्ति में झूमते हुए भगवान के जयकारे लगाते रहे। कथा के समापन पर सामूहिक आरती की गयी तथा सभी श्रद्धालुओं के बीच प्रसाद का वितरण हुआ। मीडिया प्रभारी संजय सर्राफ ने बताया कि कथा के चतुर्थ दिवस प्रह्लाद चरित्र, गजेंद्र मोक्ष, समुद्र मंथन, वामन भगवान अवतार एवं श्रीकृष्ण जन्मोत्सव के अत्यंत रोचक और भावपूर्ण प्रसंगों का वर्णन किया जाएगा। मौके पर दयानंद सर्राफ, सीताराम सर्राफ, गोपाल सर्राफ, ओम सर्राफ, गिरधारी सर्राफ, पवन सर्राफ, भगवान सर्राफ, रामस्वरूप सर्राफ, प्रदीप सर्राफ, निर्मल मानपुरिया, अनुप सर्राफ, संजय सर्राफ, दिलीप सर्राफ, विजय सर्राफ, संदीप सर्राफ, मोनू सर्राफ, विक्रांत सर्राफ, मुकेश काबरा, विनोद महलका, प्रेम अग्रवाल गौरीशंकर अग्रवाल, राजेंद्र अग्रवाल, विष्णु सोनी सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित थे।

श्री श्वेताम्बर जैन मंदिर, डोरंडा में भक्ति भाव से  की गयी स्नात्र पूजा
Published / 2026-09-15 17:43:24
श्री श्वेताम्बर जैन मंदिर, डोरंडा में भक्ति भाव से की गयी स्नात्र पूजा

श्री श्वेताम्बर जैन मंदिर, डोरंडा में भक्ति भाव से  की गयी स्नात्र पूजाटीम एबीएन, रांची। आज पर्युषण पर्व के अष्टम दिवस पर श्वेताम्बर जैन मंदिर डोरंडा मे सर्वप्रथम भक्ति भाव से सुबह 7:30 बजे स्नात्र पूजा की गयी, तत्पश्चात मुंबई से पधारें साधर्मी बंधु श्री धैर्य पियूष भाई एवं तीर्थ धर्मवीर शाह जी के द्वारा प्रवचन किया गया। आज के प्रवचन मे जैन धर्म मे क्षमापना के महत्व एवं भगवान महावीर के आदर्शो के बारे मे बताया गया! प्रवचन मे बताया गया कि जैन धर्म मे क्षमापना का विशेष महत्व दिया गया है!क्षमा मन से, वचन और अपने कर्मों से करनी चाहिए। इसका सार यही है कि मनुष्य जीवन मे एक दूसरे से बोलचाल में, कार्यक्षेत्र में, घरेलु झगड़े-आपसी मतभेद, मनमुटाव आदि होते रहते है, सो आज के दिन सभी एक दूसरे से अपने द्वारा दूसरे के प्रति किये किये गए गलतियों के लिए आपसे मे क्षमा मांगते है एवं एक दूसरे को क्षमा भी करते है, ताकि मनुष्य के जीवन मे, आपसी रिश्तो मे गाँठ न रहे, बैर भुलाकर क्षमा याचना की जाती हैं। आज के दिन जैन अनुयायी समस्त जीव जगत से क्षमा याचना करते है, जिसमे मनुष्य, जीव-जंन्तु, वनस्पति,पशु-पक्षी, जलचर, नभचर, थलचर आदि हैं। जैन धर्म के श्वेतांबर परंपरा में चातुर्मास के इन निरंतर आठ दिन तक विशेष रूप से धर्म-ध्यान, तपस्या आदि करके कर्मों कि निर्जरा की जाती है।आज पर्युषण के अंतिम दिन समाज के लोगों के द्वारा अपने कर्मों की निर्जरा हेतु दिन भर धार्मिक अनुष्ठान किये गए एवं उपवास रखा गया, शाम मे 3:30 बजे से सामूहिक सावंत्सरिक प्रतिक्रमण हुआ तत्पश्चात सभी श्रावकों ने एक दूसरे से क्षमायाचना की।डोरंडा जैन मंदिर मे दिनांक 20-09-26 को सकल जैन श्वेताम्बर समाज का क्षमापना कार्यक्रम आयोजित किया जा रहा है, उस दिन सुबह 8:30 बजे मंदिर जी से शोभायात्रा निकाली जाएगी, तत्पश्चात बच्चों एवं महिलाओ द्वारा सांस्कृतिक कार्यक्रम, संघ के द्वारा सभी तपस्वीयों का बहुमान किया जायेगा एवं दोपहर मे स्वामीवातसल्य का आयोजन हैं।आज के कार्यक्रम मे मुख्य रूप से सम्पतलाल रामपुरिया, अनिल कोठारी, बालवीर जैन, पुष्पा सेठिया, मनीष सेठिया, राकेश कोठारी, ज्योति रामपुरिया, सरोज सेठिया, विनय नाहटा, संयम बोथरा आदि उपस्थित हुए। उक्त जानकारी संगठन के प्रमोद बोथरा ने दी।

दिगम्बर जैन भवन, हरमू रोड में पर्युषण महापर्व के अष्टम दिवस क्षमा दिवस पर क्षमा और आत्मशुद्धि का संदेश
Published / 2026-09-15 17:38:18
दिगम्बर जैन भवन, हरमू रोड में पर्युषण महापर्व के अष्टम दिवस क्षमा दिवस पर क्षमा और आत्मशुद्धि का संदेश

दिगम्बर जैन भवन, हरमू रोड में पर्युषण महापर्व के अष्टम दिवस क्षमा दिवस पर क्षमा और आत्मशुद्धि का संदेशएबीएन सेंट्रल डेस्क। पर्युषण महापर्व के अष्टम एवं अंतिम दिवस को क्षमा दिवस के रूप में श्रद्धा और आत्मचिंतन के साथ मनाया गया। श्री साधुमार्गी जैन संघ, रांची द्वारा आयोजित धार्मिक कार्यक्रम में स्वाध्यायी श्रीमती पुष्पा जी ओसवाल ने क्षमा के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि भगवान महावीर ने कहा है कि "क्षमा वीरस्य भूषणम् अर्थात् क्षमा वीरों का आभूषण है," केवल वही व्यक्ति सच्चे अर्थों में क्षमा कर सकता है, जिसमें अपने क्रोध, अहंकार और प्रतिशोध की भावना पर विजय पाने का साहस हो। क्षमा दुर्बलता नहीं, बल्कि आत्मबल और आंतरिक शक्ति का प्रतीक है। इस अवसर पर अंतकृद्दशांग सूत्र के वाचन का समापन हुआ। स्वाध्यायी श्रीमती पुष्पा जी ओसवाल ने चंदनबाला के जीवन का प्रेरणादायक प्रसंग सुनाया। उन्होंने बताया कि चंदनबाला भगवान महावीर की परम श्रद्धालु शिष्या थीं। अनेक कठिनाइयों और विपरीत परिस्थितियों के बावजूद उन्होंने धैर्य, संयम और धर्म का मार्ग नहीं छोड़ा।चंदनबाला के प्रसंग को बताते हुए उन्होंने कहा कि भगवान महावीर ने लंबे समय तक कठोर तप करने के बाद विशेष अभिग्रह लिया था कि वे एक विशिष्ट परिस्थिति में रहने वाली कन्या के हाथों से ही आहार ग्रहण करेंगे! चंदनबाला ने पूर्ण श्रद्धा और निर्मल भाव से उन्हें उड़द के बचे हुए दाने अर्पित किए। भगवान महावीर ने उनका आहार स्वीकार किया और उनका तप पूर्ण हुआ।चंदनबाला का जीवन श्रद्धा, त्याग, धैर्य, संयम और सेवा का अनुपम उदाहरण है। स्वाध्यायी जी ने कहा कि पर्युषण केवल आठ दिनों का धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि आत्मनिरीक्षण और आत्मशुद्धि का अवसर है। व्यक्ति को अपने भीतर के क्रोध, मान, माया और लोभ को पहचानकर उनसे मुक्त होने का प्रयास करना चाहिए। क्षमा दिवस पर मन, वचन और कर्म से हुई भूलों के लिए क्षमा मांगना तथा दूसरों को हृदय से क्षमा करना ही पर्व की वास्तविक सार्थकता है। संध्याकाल मे सामूहिक सांवत्सरिक प्रतिक्रमण का आयोजन किया गया, जिसमे काफ़ी संख्या मे लोगों ने भाग लिया। कल 16 सितंबर को जैन भवन मे सुबह 10  बजे से स्वाध्यायी जी का विदाई समारोह एवं क्षमावाणी कार्यक्रम आयोजित होगा।कल तेरापंथ युवक परिषद की ओर से रक्तदान शिविर का भी आयोजन किया जा रहा है। समाज के लोगों से अधिक से अधिक संख्या में रक्तदान कर इस सेवा कार्य में सहभागी बनने का आह्वान किया गया। रांची संघ में विभिन्न तपस्याएं भी गतिमान हैं। इनमें प्रमुख रूप से विशाल दस्सानी, पायल कोठारी, पूजा बोहरा, रेशमा बोहरा, दिशा बेंगानी, छोटेलाल जी चोरड़िया, रुबी बांठिया, ममता पींचा एवं खुशबू दसानी तप-साधना में रत हैं साथ हीं आज अधिकतर श्रावकों के उपवास था।आज के कार्यक्रम में छोटे लाल चौरड़िया, केसर देवी पींचा, मूलचंद सुराणा, हुक्मीचंद चोरड़िया, विकास सुराणा, विनोद बेंगानी, माणिक बोथरा, सुमित बैंगानी,  सहित अनेक श्रावक-श्राविकाएं उपस्थित रहे। आप सभी मिडिया बंधुओ से आग्रह है कि कल के कार्यक्रम मे  अवश्य पहुंचने का कष्ट करें और प्रसाद ग्रहण करें। उक्त जानकारी संगठन के उत्तम जैन ने दी।

अखिल भारतीय तेरापंथ युवक परिषद का रक्तदान शिविर 16 से
Published / 2026-09-14 23:06:47
अखिल भारतीय तेरापंथ युवक परिषद का रक्तदान शिविर 16 से

टीम एबीएन, रांची। अखिल भारतीय तेरापंथ युवक परिषद के निर्देशन में तेरापंथ युवक परिषद रांची द्वारा रक्तदान शिविर लगाए जा रहे हैं। अखिल भारतीय तेरापंथ युवक परिषद् के द्वारा भारत सरकार के सहयोग से "मेगा ब्लड डोनेशन ड्राइव के अंतर्गत "रक्तदान कर्तव्यम्" के  तहत हर वर्ष की भांति इस बार भी पुरे विश्व भर के अलग अलग देशो मे रक्तदान शिविर लगाए जा रहे हैं। जिसके अंतर्गत तेरापंथ युवक परिषद राँची के द्वारा भी रक्तदान करवाने हेतु रक्तदान शिविर लगाए जा रहे हैं। जिसके अंतर्गत राँची मे 16 सितंबर को दिगम्बर जैन भवन हरमू मे एवं 19 तारीख को मोशन क्लासेज लालपुर मे रक्तदान शिविर लगाया जा रहा है। साथ ही अन्य संस्थाओ के साथ 17 सितम्बर से 23 सितंबर तक रक्तदान शिविर आयोजित किये जायेंगे। MBDD झारखण्ड के संयोजक विशाल दस्सानी एवं ब्लड बैंक संयोजक सुरेश नाहटा ने बताया की "रक्तदान कर्तव्यम्" के दौरान आयोजित सभी कैंप भारत सरकार की वेबसाइट ERaktkosh Portal पर पंजीकृत किये जायेंगे साथ ही सभी डोनर का विवरण उसमे अधतन भी किया जायेगा जिससे सभी को ऑनलाइन सर्टिफिकेट भी मिलेगा साथ हीं शिविरो मे इस दौरान ब्लड देने वालों को विशेष सम्मानित किया जायेगा।अध्यक्ष पंकज बोहरा ने बताया की ब्लड बैंक के सहयोग से सुबह 10 बजे से शाम 5 बजे तक शिविर आयोजित किये जायेंगे, तेरापंथ युवक परिषद के सदस्यों के द्वारा अधिक से अधिक लोगों को रक्तदान करने के लिए प्रेरित किया जा रहा हैं, ताकि अधिक से अधिक रक्तदान करवाया जा सके। उक्त जानकारी सुरेश नाहटा ने दी। 

ध्रुव चरित्र, सती-शिव प्रसंग एवं गणेश चतुर्थी से भक्तिमय हुआ अग्रसेन भवन
Published / 2026-09-14 22:36:43
ध्रुव चरित्र, सती-शिव प्रसंग एवं गणेश चतुर्थी से भक्तिमय हुआ अग्रसेन भवन

ध्रुव चरित्र, सती-शिव प्रसंग एवं गणेश चतुर्थी से भक्तिमय हुआ अग्रसेन भवनसजीव झांकियों ने मोहा श्रद्धालुओं का मनदृढ़ संकल्प, तपस्या और अटूट विश्वास से असंभव कार्य भी संभव हो सकता है : दिनेश जीएबीएन सोशल डेस्क। सराफ परिवार के तत्वावधान में महाराजा अग्रसेन भवन, रांची में आयोजित सात दिवसीय श्रीमद्भागवत गीता कथा अमृत महोत्सव के तृतीय दिवस का आयोजन श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक उल्लास के वातावरण में हुआ। जगन्नाथधाम के सुप्रसिद्ध कथावाचक एवं व्यास महाराज श्री दिनेश जी भारद्वाज ने व्यास पीठ से श्रीमद्भागवत के विविध प्रेरणादायी प्रसंगों का विस्तारपूर्वक वर्णन किया। कथा के दौरान श्रद्धालु भाव-विभोर होकर भगवान के जयकारे लगाते रहे‌।कथावाचक श्री दिनेश जी भारद्वाज ने श्रीमद्भागवत के प्रसंगों को क्रमवार प्रस्तुत करते हुए सृष्टि के विस्तार एवं कपिलोख्यान का वर्णन किया। उन्होंने बताया कि भगवान की सृष्टि व्यवस्था में प्रत्येक जीव की अपनी भूमिका है और मनुष्य को अपने जीवन का उद्देश्य समझकर धर्म, सदाचार एवं ईश्वर भक्ति के मार्ग पर चलना चाहिए। कपिल मुनि के उपदेशों के माध्यम से ज्ञान, वैराग्य और भक्ति के महत्व को समझाया गया।इसके बाद सती-शिव चरित्र का अत्यंत भावपूर्ण वर्णन किया गया। भगवान शिव और माता सती के प्रसंग के माध्यम से श्रद्धालुओं को भगवान के प्रति अटूट श्रद्धा, पारिवारिक मर्यादा, आत्मसम्मान तथा धर्म के प्रति समर्पण का संदेश दिया गया। कथा के प्रसंगों का सजीव चित्रण प्रस्तुत किए जाने से पूरा वातावरण भावनात्मक एवं आध्यात्मिक हो उठा।कथा व्यास ने बालक ध्रुव जी के चरित्र का वर्णन करते हुए कहा कि दृढ़ संकल्प, तपस्या और भगवान के प्रति अटूट विश्वास से असंभव कार्य भी संभव हो सकता है। बालक ध्रुव ने विपरीत परिस्थितियों के बावजूद अपने लक्ष्य से विचलित हुए बिना भगवान नारायण की आराधना की और परम पद प्राप्त किया। ध्रुव चरित्र बच्चों और युवाओं को विशेष रूप से लक्ष्य के प्रति समर्पित रहने की प्रेरणा देता है।गणेश चतुर्थी के अवसर पर कथा में भगवान श्रीगणेश की महिमा का भी विस्तार से वर्णन किया गया। भगवान गणेश को प्रथम पूज्य एवं विघ्नहर्ता बताते हुए उनके स्वरूप, महिमा और पूजन के आध्यात्मिक महत्व पर प्रकाश डाला गया। गणेश जी सहित कथा के विभिन्न प्रसंगों की मनोहारी सजीव झांकियां प्रस्तुत की गईं, जिन्हें देखकर श्रद्धालु मंत्रमुग्ध हो गए। कथा स्थल को भव्य एवं अलौकिक रूप से सजाया गया था। सुमधुर भजनों और संकीर्तन से पूरा महाराजा अग्रसेन भवन भक्तिमय हो उठा। श्रद्धालु भक्ति में झूमते हुए भगवान के जयकारे लगाते रहे। कथा के समापन पर सामूहिक आरती की गई तथा सभी श्रद्धालुओं के बीच प्रसाद का वितरण हुआ।मीडिया प्रभारी संजय सर्राफ ने बताया कि कथा के चतुर्थ दिवस प्रह्लाद चरित्र, गजेंद्र मोक्ष, समुद्र मंथन, वामन भगवान अवतार एवं श्रीकृष्ण जन्मोत्सव के अत्यंत रोचक और भावपूर्ण प्रसंगों का वर्णन किया जाएगा। इस अवसर पर दयानंद सर्राफ, सीताराम सर्राफ, गोपाल सर्राफ, ओम सर्राफ, गिरधारी सर्राफ, पवन सर्राफ, भगवान सर्राफ, रामस्वरूप सर्राफ, प्रदीप सर्राफ, निर्मल मानपुरिया, अनुप सर्राफ, संजय सर्राफ, दिलीप सर्राफ, विजय सर्राफ, संदीप सर्राफ, मोनू सर्राफ, विक्रांत सर्राफ, मुकेश काबरा, विनोद महलका, प्रेम अग्रवाल गौरीशंकर अग्रवाल, राजेंद्र अग्रवाल, विष्णु सोनी सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित थे।

श्री श्वेताम्बर जैन मंदिर, डोरंडा में बताया गया भगवान् महावीर का संदेश
Published / 2026-09-14 17:23:33
श्री श्वेताम्बर जैन मंदिर, डोरंडा में बताया गया भगवान् महावीर का संदेश

एबीएन सोशल डेस्क। श्री श्वेताम्बर जैन मंदिर, डोरंडा मे आज भगवान ऋषभदेव, पार्श्वनाथ भगवान, महावीर भगवान, नमी नाथ भगवान की जीवनी एवं उनके संदेशो को बताया गया। आज पर्युषण पर्व के सप्तम दिन जैन मंदिर डोरंडा मे भक्ति भाव से सुबह 7:30 बजे स्नात्र पूजा की गयी, तत्पश्चात मुंबई से पधारें साधर्मी बंधु श्री धैर्य पियूष भाई एवं तीर्थ धर्मवीर शाह जी के द्वारा प्रवचन किया गया। जिसमे भगवान महावीर, पार्श्वनाथ भगवान, नेमीनाथ भगवान एवं भगवान ऋषभ देव जी के जीवन चरित्र एवं उनके शासन काल का समय के वारे मे वर्णन किया गया, एवं उनके संदेशो के पढ़कर सुनाया एवं बताया कि इस काल में सबसे पहले मोक्ष जाने वाली मरुदेवी माता हुई, कहा जाता है।संध्या मे गिरनार की भाव पूर्वक यात्रा की गई जिसमे यहां रहते हुए साक्षात गिरनार के नमीनाथ दादा के दर्शन हुए, बताया गया कि वर्तमान में मौजूद प्रतिमाओं में सबसे प्राचीन प्रतिमा गिरनार मे है, गिरनार नाथ को संवारने में वास्तुपाल, तेजपाल, संप्रति राजा का महत्वपूर्ण योगदान रहा है। संध्या मे आरती, भक्ति भजन संध्या की गयी, जिसमे काफी श्रद्धालू उपस्थित हुए। आज वारसॉ सूत्र का चढ़ावा किया गया, कल पर्युषण के अंतिम दिन वारसॉ सूत्र का वांचन किया जायेगा! कल पर्युषण के अंतिम दिन समाज के लोगों के द्वारा अपने कर्मों की निर्जरा हेतु दिन भर धार्मिक अनुष्ठान एवं उपवास आदि रखा जायेगा, शाम मे 3:30 बजे से सामूहिक सावंत्सरिक  प्रतिक्रमण रहेगा।आज के कार्यक्रम मे मुख्य रूप से सम्पतलाल रामपुरिया, सुभाष बोथरा, सुरेश बोथरा, सुशीला सेठिया, सुमन बोथरा, प्रेमलता नाहटा, उषा सेठिया, संजय नाहटा, प्रमोद बोथरा उषा कोठारी आदि उपस्थित हुए। उक्त जानकारी प्रमोद बोथरा ने दी।

मनुष्य के जीवन मे जिज्ञासा ही ज्ञान का प्रथम द्वार: दिनेश भारद्वाज
Published / 2026-09-13 21:16:48
मनुष्य के जीवन मे जिज्ञासा ही ज्ञान का प्रथम द्वार: दिनेश भारद्वाज

परीक्षित जन्म और शुकदेव जी के पावन प्रसंग से भक्तिमय हुआ अग्रसेन भवन टीम एबीएन, रांची। सराफ परिवार के तत्वावधान में महाराजा अग्रसेन भवन, रांची में आयोजित सात दिवसीय श्रीमद्भागवत गीता कथा अमृत महोत्सव के द्वितीय दिवस का आयोजन श्रद्धा, भक्ति एवं आध्यात्मिक उल्लास के वातावरण में हुआ। जगन्नाथ धाम के सुप्रसिद्ध कथावाचक एवं व्यास महाराज दिनेश जी भारद्वाज ने व्यास पीठ से श्रीमद्भागवत कथा के विभिन्न महत्वपूर्ण प्रसंगों का अत्यंत भावपूर्ण एवं विस्तृत वर्णन। कथा का शुभारंभ मंगलाचरण से हुआ। कथावाचक दिनेश जी भारद्वाज ने भगवान श्रीहरि का स्मरण करते हुए श्रीमद्भागवत के माहात्म्य पर प्रकाश डाला। उन्होंने शुकदेव जी के जन्म एवं पूजन का प्रसंग सुनाते हुए बताया कि शुकदेव जी जन्म से ही वैराग्य एवं ज्ञान के स्वरूप थे। उनका जीवन संसार में रहते हुए भी परमात्मा के प्रति पूर्ण समर्पण और आत्मज्ञान का संदेश देता है। इस प्रसंग का कथा स्थल पर सजीव चित्रण किया गया, जिससे श्रद्धालु भावविभोर हो उठे। इसके बाद राजा परीक्षित के जन्म का प्रसंग प्रस्तुत किया गया। कथा व्यास ने बताया कि परीक्षित भगवान श्रीकृष्ण के अनन्य भक्त थे और उनका जन्म स्वयं भगवान की कृपा से सुरक्षित हुआ। महाभारत युद्ध के पश्चात जब अभिमन्यु-पुत्र परीक्षित के जीवन पर संकट आया, तब भगवान श्रीकृष्ण ने उनकी रक्षा कर धर्म की परंपरा को आगे बढ़ाया। परीक्षित का चरित्र हमें विपरीत परिस्थितियों में भी भगवान पर विश्वास बनाए रखने की प्रेरणा देता है। कथा में आगे राजा परीक्षित द्वारा जीवन, मृत्यु, धर्म और परमात्मा से संबंधित किये गये जिज्ञासापूर्ण प्रश्नों का वर्णन किया गया। इन प्रश्नों के उत्तर देने के लिए शुकदेव जी का आगमन हुआ और यहीं से श्रीमद्भागवत कथा के दिव्य ज्ञान की धारा प्रवाहित हुई। कथावाचक ने कहा कि मनुष्य के जीवन में जिज्ञासा ही ज्ञान का प्रथम द्वार है और जब जिज्ञासा भगवान की ओर मुड़ती है, तब जीवन का वास्तविक उद्देश्य समझ में आता है।कथा के दौरान प्रस्तुत सुमधुर भजनों से पूरा कथा स्थल भक्तिमय हो उठा। श्रद्धालु भक्ति में झूमते और भगवान के जयकारे लगाते नजर आये। कथा स्थल को आकर्षक पुष्पों से भव्य रूप से सजाया गया था। अंत में श्रद्धालुओं ने सामूहिक आरती में भाग लिया तथा प्रसाद का वितरण किया गया। मीडिया प्रभारी संजय सर्राफ ने बताया कि कथा के तृतीय दिवस सृष्टि का विस्तार, कपिल व्याख्यान, सती-शिव चरित्र एवं ध्रुव जी के चरित्र से जुड़े प्रेरणादायी प्रसंगों का विस्तारपूर्वक वर्णन किया जाएगा। मौके पर दयानंद सर्राफ, सीताराम सर्राफ, श्रीगोपाल सर्राफ, ओम सर्राफ, गिरधारी सर्राफ, पवन सर्राफ, भगवान सर्राफ, रामस्वरूप सर्राफ, प्रदीप सर्राफ, निर्मल काबरा, निर्मल मानपुरिया, अनुप सर्राफ, विनोद महलका, मनोज चौधरी, सज्जन पाड़िया, सरवन सिंघानिया, आनंद अग्रवाल, गौरीशंकर अग्रवाल, रविकांत सुल्तानिया,संजय सर्राफ, दिलीप सर्राफ, विजय सर्राफ, संदीप सर्राफ, मोनू सर्राफ, विक्रांत सर्राफ, विकास अग्रवाल, सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित थे।

Newsletter

Subscribe to our website and get the latest updates straight to your inbox.

We do not share your information.

Tranding