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प्रकृति और भाई-बहन के प्रेम के पावन पर्व करमा पूजा की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं
Published / 2026-09-21 19:35:01
प्रकृति और भाई-बहन के प्रेम के पावन पर्व करमा पूजा की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं

प्रकृति, परंपरा और संस्कृति से जुड़े करमा पर्व के अवसर पर समस्त झारखंडवासियों एवं देशवासियों को हार्दिक शुभकामनाएंएबीएन सोशल डेस्क। झारखंड मुक्ति युवा मोर्चा, धनबाद के जिलाध्यक्ष सूरज महतो ने कहा है कि करमा पूजा हमें प्रकृति के संरक्षण, भाई-बहन के अटूट प्रेम और सामुदायिक एकता का संदेश देती है। करम देवता की कृपा से सभी के जीवन में सुख, शांति, समृद्धि और खुशहाली आए तथा हमारे जंगल, जल और जमीन सदैव सुरक्षित रहें।आइए, इस पावन पर्व पर हम अपनी समृद्ध आदिवासी संस्कृति और प्रकृति के संरक्षण का संकल्प लें। करमा पर्व की हार्दिक शुभकामनाएं।

राधाष्टमी महोत्सव पर श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान यज्ञ का हुआ भव्य शुभारंभ, भजनों पर झूमे श्रद्धालु
Published / 2026-09-20 21:28:35
राधाष्टमी महोत्सव पर श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान यज्ञ का हुआ भव्य शुभारंभ, भजनों पर झूमे श्रद्धालु

राधाष्टमी महोत्सव पर श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान यज्ञ का हुआ भव्य शुभारंभ, भजनों पर झूमे श्रद्धालुराधा भक्ति, प्रेम, समर्पण और करुणा की दिव्य स्वरूप: साध्वी गोपिकाएबीएन सेंट्रल डेस्क। डॉ. संत शिरोमणि स्वामी सदानंद जी महाराज के पावन सानिध्य में एम.आर.एस. श्री कृष्ण प्रणामी सेवा धाम ट्रस्ट द्वारा पुंदाग स्थित श्री राधा-कृष्ण प्रणामी मंदिर में श्री राधाष्टमी महोत्सव के पावन अवसर पर सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान यज्ञ का भव्य शुभारंभ हुआ। 20 सितंबर से 26 सितंबर तक आयोजित होने वाली कथा प्रतिदिन अपराह्न 2:30 बजे से शाम 5:30 बजे तक होगी। श्री राधाष्टमी के अवसर पर मंदिर में श्री राधा रानी का विशेष एवं मनोहारी श्रृंगार किया गया। वृंदावन से मंगाए गए आकर्षक एवं सुंदर आभूषणों से श्री राधा रानी को सजाया गया। दिव्य श्रृंगार के दर्शन के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ी। मंदिर परिसर भक्तिमय वातावरण से सराबोर रहा तथा श्रद्धालुओं ने श्रद्धा एवं भक्ति के साथ श्री राधा-कृष्ण के दर्शन किए।प्रथम दिवस वृंदावन से पधारीं सुप्रसिद्ध कथावाचिका साध्वी गोपिका जी ने श्रीमद्भागवत महापुराण के महात्म्य तथा श्री राधा रानी के स्वरूप, महिमा एवं श्री राधाष्टमी के आध्यात्मिक महत्व पर विस्तार से भावपूर्ण कथा प्रस्तुत की। उन्होंने कहा कि श्री राधा भक्ति, प्रेम, समर्पण और करुणा की दिव्य स्वरूप हैं। श्री राधा-कृष्ण की आराधना मनुष्य के जीवन में प्रेम, सद्भाव और आध्यात्मिक चेतना का संचार करती है। कथा के दौरान साध्वी गोपिका जी ने भक्ति एवं आध्यात्मिक संदेशों के माध्यम से श्रद्धालुओं को श्रीमद्भागवत के विभिन्न प्रसंगों से जोड़ा। कथा स्थल पर वातावरण उस समय और भी भक्तिमय हो गया, जब श्री राधा-कृष्ण के भजनों की मधुर धुन गूंज उठी। मेरे राधा रानी, मेरे कृष्ण मुरारी सहित अन्य भक्तिमय भजनों तथा रचा है सृष्टि जिस प्रभु ने, वही सृष्टि चला रहे हैं जैसे भजनों पर श्रद्धालु भावविभोर होकर झूमते और नृत्य करते नजर आए। कथा के उपरांत ट्रस्ट के पदाधिकारियों ने साध्वी गोपिका जी को अंगवस्त्र ओढ़ाकर अभिनंदन एवं सम्मान किया। इसके बाद सामूहिक आरती की गई और श्रद्धालुओं के बीच प्रसाद का वितरण हुआ। कथा में बड़ी संख्या में महिला एवं पुरुष श्रद्धालुओं ने उपस्थित होकर श्रीमद्भागवत कथा का श्रवण किया। ट्रस्ट के प्रवक्ता सह मीडिया प्रभारी संजय सर्राफ ने बताया कि सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान यज्ञ के द्वितीय दिवस मंगलाचरण एवं सुखदेव जन्म प्रसंग की कथा सुनाई जाएगी। उन्होंने श्रद्धालुओं से प्रतिदिन कथा में अधिक से अधिक संख्या में शामिल होकर आध्यात्मिक लाभ प्राप्त करने का आह्वान किया। इस अवसर पर डूंगरमल अग्रवाल, विजय अग्रवाल, निर्मल छावनिका, राजेंद्र प्रसाद अग्रवाल, पूरणमल सर्राफ, सुरेश अग्रवाल, मधुसूदन जाजोदिया, शिव भगवान अग्रवाल, नंदकिशोर चौधरी, संजय सर्राफ,अरविंद अग्रवाल, विशाल जालान, पुजारी अरविंद पांडेय, मनीष सोनी, विष्णु सोनी, ज्ञान प्रकाश शर्मा, पवन पोद्दार, विद्या देवी अग्रवाल, उर्मिला पाड़िया, सुनीता अग्रवाल, सरिता अग्रवाल, सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित थे।

रांची : धूमधाम से मना 59वां वार्षिक श्री श्याम महोत्सव
Published / 2026-09-20 17:58:20
रांची : धूमधाम से मना 59वां वार्षिक श्री श्याम महोत्सव

टीम एबीएन, रांची। दिलदार कन्हैया ने मुझको अपनाया है में लीन हुआ रांची अवसर था 59वां वार्षिक श्री श्याम महोत्सव का चतुर्थ दिवस। श्री श्याम मण्डल रांची के 59 वें वार्षिक श्री श्याम मोहत्सव के चतुर्थ दिवस 20 सितम्बर 2026 रविवार को अग्रसेन पथ स्थित श्री श्याम मन्दिर में श्री श्याम प्रभु का प्रातः में मंगल आरती के पश्चात  नवीन वस्त्र व अत्यंत मनमोहक श्रृंगार किया गया। प्रातः 8 बजे से 250 महिला एवम पुरुष द्वारा सुन्दर काण्ड का सस्वर पाठ किया गया तथ पश्चात 11 बजे से स्थानीय भजन मण्डलीयां श्री हनुमान मण्डल , रांची - श्री शिव भक्त मण्डल, रांची ने एक से बढ़ कर एक भजनों की गंगा श्री श्याम प्रभु के चरणों में अर्पित किया जिससे मन्दिर में आए हुए भक्तगण भाव विभोर होने पर मजबूर हो गए। इस अवसर पर श्री श्याम प्रभु को भक्तों द्वारा 501 सवामणी का भोग अर्पित किया गया साथ ही दो हजार भक्तों के सवामणी का पूर्ण प्रसाद ग्रहण किया। आज के कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण था इंदौर से पधारे प्रसिद्ध भजन गायक शिवम रावल ने क्या लगता हूं बाबा तेरा, कुछ अपनी सुना बाबा, आयो सांवरियो सरकार, साथी हमारा कौन बनेगा, तेरे दर पे आके मुझे क्या मिला है, दिलदार कन्हाई ने मुझको अपनाया है इत्यादि भजनों की लय पर श्याम भक्तों को झूमने पर मजबूर कर दिया साथ ही सम्पूर्ण दिवस मन्दिर में आए हुए भक्तगण के बीच प्रसाद का वितरण किया जा रहा था। कार्यक्रम के अंत में श्याम मण्डल के मंत्री धीरज बंका ने वार्षिक प्रतिवेदन प्रस्तुत किया तथा श्री श्याम मोहत्सव श्री श्याम मण्डल के अधिकृत यू ट्यूब चैनल पे प्रसारण किया गया। रात्रि 10 बजे श्री श्याम प्रभु का महाआरती कर 59 वें श्री श्याम महोत्सव का समापन किया गया। आज के कार्यक्रम को सफल बनाने में नितेश लाखोटिया, लल्लू सारस्वत, महेश सारस्वत, लड्डू सारस्वत, जितेश अग्रवाल, विजय शंकर साबू, अरुण धनुका, अजय रूंगटा, कुणाल जलान, मनोज ढांढनीयां प्रियांश पोद्दार का विशेष सहयोग रहा। उक्त जानकारी श्री श्याम मण्डल श्री श्याम मन्दिर, अग्रसेन पथ रांची के मीडिया प्रभारी सुमित पोद्दार (9835331112) ने दी। 

जरूरतमंदों के बीच सेवा की मिसाल, संकल्प महिला समिति ने बांटी राहत सामग्री!
Published / 2026-09-19 21:18:12
जरूरतमंदों के बीच सेवा की मिसाल, संकल्प महिला समिति ने बांटी राहत सामग्री!

एबीएन न्यूज नेटवर्क, तैतूलमारी (धनबाद)। कतरास क्षेत्र की संकल्प महिला समिति ने 19 सितंबर को तैतूलमारी कुष्ठ प्रशिक्षण केंद्र अस्पताल में लगभग 40 जरूरतमंद लोगों के बीच राशन एवं खाद्य सामग्री का वितरण कर सामाजिक सरोकार की मिसाल पेश की। इस दौरान आटा, चावल, चना दाल, आलू, नमक, सरसों तेल और बिस्किट वितरित किये गये। यह पहल दीक्षा महिला मंडल की अध्यक्षा अर्चना अग्रवाल एवं सभी उपाध्यक्षों के मार्गदर्शन में की गयी। कार्यक्रम का उद्देश्य जरूरतमंद परिवारों को दैनिक आवश्यकताओं में सहयोग देना और सेवा, संवेदना व सहयोग की भावना को मजबूत करना रहा। कार्यक्रम को सफल बनाने में संकल्प महिला समिति की अध्यक्षता संटू झा के साथ आशा, मिसेज खान, अनिशा सिंह, पार्वती सिंह एवं वीणा का सक्रिय सहयोग रहा।

रक्तदान ही असली जीवनदाता : डॉ राजू कच्छप
Published / 2026-09-19 21:16:06
रक्तदान ही असली जीवनदाता : डॉ राजू कच्छप

कैंप में 35 लोगों ने किया रक्तदान, सबों को सर्टिफिकेट और हेलमेट भेंट किया गया टीम एबीएन, रांची। रक्त दान महादान है। रक्तदाता जीवन दाता होता है। उपर्युक्त बातें मधुर मेडीकेयर द्वारा आयोजित ब्लड डोनेशन कैंप में  सिविल सर्जन डॉ राजू कच्छप ने कही। श्री कच्छप ने कहा कि आज विज्ञान ने हर एक क्षेत्र में प्रगति किया है चाहे वो स्वास्थ्य का क्षेत्र ही क्यो न हो। स्वास्थ्य के क्षेत्र में अनेक कृतिमान है परंतु रक्त का विकल्प अभी नहीं है। रक्तदान ही असली जीवनदान है। डॉ अशोक कुमार ओड़िया ने कहा कि नियमित रक्तदान करना चाहिए। रक्तदान करने से शरीर स्वस्थ रहता है। डॉ विवेक कुमार मधुर ने कहा कि आपातकाल स्थिति, दुर्घटनाओं या गंभीर स्थिती के दौरान रक्त की कमी को सिर्फ स्वस्थ मनुष्य के स्वैच्छिक रक्तदान से रक्त की पूर्ति संभव है। एक यूनिट रक्त से तीन लोगों के जीवन को संवारा जा सकता है। इन्होंने उपस्थित जनों से रक्तदान के लिए अपील किया। महिला चिकित्सक डॉ  नेहा मधुर ने कहा कि रक्तदान से रक्तचाप भी कंट्रोल में रहता है एक स्वस्थ इंसान को रक्तदान करना चाहिए। मौके पर डॉ चंदन कुमार, वरिष्ठ पत्रकार दीपक कुमार मुखर्जी, गौतम लेनिन, मधुर मेडिकेयर अस्पताल के निदेशक अजय कुमार मधुर ने भी रक्तदान पर अपने विचार रखा। कैंप में अन्य लोगो के अलावा सावित्री मधुर, सुरेंद्र ठाकुर अमन साहू, राहुल राज, अंगद सिंह, नेहा सिंह, सुरेश्वरी कुमारी, चंद्रभूषण मिश्रा, खालिद हुसैन, सुरेश्वरी कुमारी ब्लड बैंक के विकास कुमार, हफीजुल अंसारी, अंजिता लकड़ा, शिल्पा सोरेन आदि मौजूद थे। कुल 35 व्यक्तियों ने मौके पर रक्तदान किया। सभी रक्तदाताओं को प्रमाण पत्र के साथ एक एक हेलमेट प्रदान कर उत्साहवर्धन किया गया।

श्री राधाष्टमी महोत्सव पर सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान यज्ञ 20 सितंबर से
Published / 2026-09-19 21:12:14
श्री राधाष्टमी महोत्सव पर सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान यज्ञ 20 सितंबर से

सुप्रसिद्ध कथा वाचिका साध्वी गोपिका करायेगी कथा का रसपान टीम एबीएन, रांची। डॉ. संत शिरोमणि स्वामी सदानंद जी महाराज के पावन सानिध्य में एम.आर.एस. श्री कृष्ण प्रणामी सेवा धाम ट्रस्ट द्वारा पुंदाग स्थित श्री राधा-कृष्ण प्रणामी मंदिर में श्री राधाष्टमी महोत्सव पर सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान यज्ञ सप्ताह का आयोजन 20 सितंबर से 26 सितंबर तक किया जायेगा। कथा प्रतिदिन अपराह्न 2:30 बजे से शाम 5:30 बजे तक होगी। ट्रस्ट के अध्यक्ष डूंगरमल अग्रवाल, उपाध्यक्ष राजेंद्र प्रसाद अग्रवाल, सचिव मनोज चौधरी एवं प्रवक्ता सह मीडिया प्रभारी संजय सर्राफ ने बताया कि कथा की सभी तैयारियां पूरी कर ली गयी हैं। इस सात दिवसीय धार्मिक आयोजन में वृंदावन की सुप्रसिद्ध कथा वाचिका साध्वी गोपिका जी श्रद्धालुओं को श्रीमद्भागवत कथा का रसपान करायेंगी। कथा के प्रथम दिवस 20 सितंबर, रविवार को श्रीमद्भागवत कथा के महात्म्य के साथ भगवान श्रीकृष्ण के गोवर्धन चरित्र प्रसंग का विस्तार से वर्णन किया जायेगा। कथा के दौरान भक्ति भाव से ओत-प्रोत भजनों के साथ भगवान की लीलाओं पर आधारित सजीव झांकियों की मनोहारी प्रस्तुति भी होगी, जो श्रद्धालुओं के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र रहेगी। आयोजन के प्रत्येक दिन कथा के पश्चात सामूहिक आरती एवं प्रसाद वितरण किया जायेगा। ट्रस्ट ने बताया कि श्रीमद्भागवत कथा केवल धार्मिक ग्रंथ का श्रवण ही नहीं, बल्कि जीवन को सदाचार, भक्ति, प्रेम, सेवा और आध्यात्मिक संस्कारों से जोड़ने का माध्यम है। कथा श्रवण से मनुष्य को धर्म एवं कर्तव्य के मार्ग पर चलने की प्रेरणा मिलती है। ट्रस्ट के प्रवक्ता संजय सर्राफ ने रांची सहित आसपास के सभी श्रद्धालुओं एवं धर्मप्रेमी बंधु-भगिनियों से अधिक से अधिक संख्या में कथा में शामिल होकर श्रीमद्भागवत कथा का श्रवण करने तथा आध्यात्मिक लाभ प्राप्त करने का आग्रह किया है। आयोजन को लेकर मंदिर परिसर में श्रद्धा एवं भक्ति का वातावरण तैयार किया जा रहा है।

व्यास दिनेश भारद्वाज का श्री राधा-कृष्ण प्रणामी मंदिर में हुआ भव्य अभिनंदन
Published / 2026-09-19 21:10:32
व्यास दिनेश भारद्वाज का श्री राधा-कृष्ण प्रणामी मंदिर में हुआ भव्य अभिनंदन

असहाय एवं जरूरतमंद लोगों की सेवा करना मानव जीवन का महत्वपूर्ण दायित्व : भारद्वाज जी एबीएन सोशल डेस्क। जगन्नाथधाम के सुप्रसिद्ध कथावाचक एवं व्यास महाराज श्री दिनेश जी भारद्वाज का पुंदाग स्थित श्री राधा-कृष्ण प्रणामी मंदिर में श्रद्धा एवं सम्मानपूर्वक अभिनंदन किया गया। मंदिर परिसर में आयोजित इस विशेष अवसर पर भक्तिमय एवं आध्यात्मिक वातावरण बना रहा। व्यास महाराज को विधिवत व्यास पीठ पर विराजमान कराया गया। मौके पर एम.आर.एस. श्री कृष्ण प्रणामी सेवा धाम ट्रस्ट के उपाध्यक्ष राजेंद्र प्रसाद अग्रवाल, प्रवक्ता सह मीडिया प्रभारी संजय सर्राफ तथा मंदिर के पुजारी पंडित अरविंद पांडेय ने व्यास महाराज श्री दिनेश जी भारद्वाज को अंगवस्त्र ओढ़ाकर, श्री राधा-कृष्ण का लॉकेट पहनाकर एवं स्मृति-चिह्न भेंट कर सम्मानित किया। सम्मान से अभिभूत व्यास महाराज ने सभी के प्रति आभार व्यक्त किया।व्यास पीठ से अपने संक्षिप्त संबोधन में श्री दिनेश जी भारद्वाज ने भगवान श्रीकृष्ण के स्वरूप, उनकी लीलाओं एवं भक्तिमय जीवन-दर्शन की सुंदर व्याख्या की। उन्होंने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण का जीवन प्रेम, करुणा, धर्म, सेवा और लोककल्याण का संदेश देता है। उन्होंने पुंदाग स्थित श्री राधा-कृष्ण प्रणामी मंदिर की भव्यता, आध्यात्मिक वातावरण और सुंदर स्थापत्य की भूरि-भूरि प्रशंसा करते हुए इसे श्रद्धालुओं के लिए प्रेरणादायी एवं आकर्षण का केंद्र बताया। व्यास महाराज के साथ पधारे सराफ परिवार के सदस्यों का भी ट्रस्ट की ओर से आत्मीय अभिनंदन किया गया। उन्हें अंगवस्त्र ओढ़ाकर तथा श्री राधा-कृष्ण का लॉकेट पहनाकर सम्मानित किया गया। इसके पश्चात श्री दिनेश जी भारद्वाज ने मंदिर के द्वितीय तल पर ट्रस्ट द्वारा संचालित सद्गुरु कृपा अपना घर आश्रम का निरीक्षण किया।उन्होंने आश्रम में निवास कर रहे निराश्रित, दिव्यांग एवं जरूरतमंद प्रभुजनों से आत्मीय मुलाकात की तथा उनका कुशलक्षेम जाना। आश्रम में भोजन, स्वास्थ्य देखभाल, शिक्षा, योग, मनोरंजन एवं अन्य आवश्यक सेवाओं के माध्यम से की जा रही मानव सेवा को देखकर उन्होंने सेवा कार्यों की भूरि-भूरि प्रशंसा की।इस अवसर पर आश्रम में निवास कर रहे प्रभुजनों के बीच फल का वितरण भी किया गया। व्यास महाराज ने कहा कि असहाय एवं जरूरतमंद लोगों की सेवा करना मानव जीवन का महत्वपूर्ण दायित्व है। उन्होंने समाज के सभी वर्गों से ऐसे पुनीत सेवा कार्यों में तन-मन-धन से सहयोग करने का आह्वान किया, ताकि अधिक से अधिक जरूरतमंद लोगों को आश्रय एवं आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराई जा सकें। इसके बाद व्यास महाराज मंदिर परिसर में स्थित श्री कृष्ण प्रणामी गौ सेवा धाम पहुंचे और गौसेवा की। उन्होंने गौसेवा के महत्व को रेखांकित करते हुए सेवा कार्यों से जुड़े सभी लोगों की सराहना की। पूरे कार्यक्रम में श्रद्धा, सेवा, सम्मान और आध्यात्मिकता का सुंदर समन्वय देखने को मिला। 

सुदामा चरित्र ने श्रद्धालुओं को किया भावविभोर, हवन एवं पूर्णाहुति के साथ श्रीमद्भागवत कथा अमृत महोत्सव संपन्न
Published / 2026-09-18 18:06:45
सुदामा चरित्र ने श्रद्धालुओं को किया भावविभोर, हवन एवं पूर्णाहुति के साथ श्रीमद्भागवत कथा अमृत महोत्सव संपन्न

सात दिनों तक भक्ति और आध्यात्मिक ज्ञान की गंगा में सराबोर रहा महाराजा अग्रसेन भवन एबीएन सोशल डेस्क। सराफ परिवार के तत्वावधान में महाराजा अग्रसेन भवन, रांची में आयोजित सात दिवसीय श्रीमद्भागवत गीता कथा अमृत महोत्सव उमंग, उल्लास एवं भक्तिमय वातावरण के बीच भव्य रूप से संपन्न हुआ। सातवें एवं अंतिम दिवस जगन्नाथधाम के सुप्रसिद्ध कथावाचक एवं व्यास महाराज श्री दिनेश जी भारद्वाज ने व्यास पीठ से भगवान श्रीकृष्ण के परम भक्त सुदामा चरित्र का भावपूर्ण एवं विस्तृत वर्णन किया। कथा के उपरांत हवन एवं पूर्णाहुति के साथ सात दिवसीय धार्मिक आयोजन का विधिवत समापन हुआ। अंतिम दिवस कथा स्थल का विशेष रूप से भव्य एवं अलौकिक श्रृंगार किया गया था। पुष्पों से की गयी आकर्षक सजावट श्रद्धालुओं के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र रही। सजीव झांकियों के माध्यम से कथा प्रसंगों का सुंदर एवं भावपूर्ण चित्रण किया गया, जिससे पूरा वातावरण आध्यात्मिक ऊर्जा से भर उठा। व्यास महाराज दिनेश जी भारद्वाज ने सुदामा चरित्र का वर्णन करते हुए कहा कि भगवान श्रीकृष्ण और सुदामा की मित्रता संसार के लिए प्रेम, अपनत्व, निस्वार्थ भाव और सच्ची मित्रता का अनुपम उदाहरण है। अत्यंत निर्धन होने के बावजूद सुदामा ने कभी भगवान से अपनी गरीबी दूर करने की याचना नहीं की। पत्नी के आग्रह पर वे भगवान श्रीकृष्ण से मिलने द्वारका पहुंचे और अपने बालसखा के लिए चिउड़ा लेकर गये। व्यास महाराज ने भावपूर्ण प्रसंग सुनाते हुए बताया कि भगवान श्रीकृष्ण ने अपने निर्धन मित्र सुदामा का जिस प्रेम और आत्मीयता से स्वागत किया, वह भगवान की भक्तवत्सलता को दशार्ता है। श्रीकृष्ण ने सुदामा के चरण स्वयं धोए और उनके प्रेम से लाये गये तुच्छ से उपहार को भी अत्यंत प्रेमपूर्वक स्वीकार किया। सुदामा जब द्वारका से लौटे तो भगवान ने बिना मांगे ही उनका जीवन सुख-समृद्धि से भर दिया। उन्होंने कहा कि भगवान के दरबार में धन-दौलत नहीं, बल्कि भक्त की भावना और प्रेम सबसे महत्वपूर्ण है। कथा के दौरान व्यास महाराज के सुमधुर भजनों पर श्रद्धालु भावविभोर होकर झूमते रहे। भगवान के जयकारों से कथा स्थल गुंजायमान रहा। इसके बाद विधिवत हवन एवं पूणार्हुति का आयोजन किया गया, जिसमें श्रद्धालुओं ने आहुति देकर विश्व कल्याण, सुख-शांति एवं समृद्धि की कामना की। सामूहिक आरती के पश्चात श्रद्धालुओं के बीच प्रसाद का वितरण किया गया। महाप्रसाद में सैकड़ों श्रद्धालुओं ने ग्रहण किया प्रसाद सात दिवसीय कथा के समापन अवसर पर सराफ परिवार की ओर से महाप्रसाद का आयोजन किया गया। इसमें बड़ी संख्या में महिलाओं, पुरुषों एवं श्रद्धालुओं ने श्रद्धापूर्वक प्रसाद ग्रहण किया। पूरे आयोजन के दौरान श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह एवं आस्था देखने को मिली। मीडिया प्रभारी संजय सर्राफ ने सराफ परिवार की ओर से पूज्य व्यास महाराज दिनेश जी भारद्वाज के प्रति कोटि-कोटि नमन एवं हृदय से आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि व्यास महाराज ने सात दिनों तक श्रीमद्भागवत कथा के माध्यम से श्रद्धालुओं को धर्म, भक्ति, संस्कार, सदाचार, प्रेम एवं मानवता का संदेश दिया। उन्होंने आयोजन को सफल बनाने में प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रूप से सहयोग करने वाले सभी श्रद्धालुओं, सहयोगियों एवं समाज के लोगों के प्रति भी आभार व्यक्त किया। सात दिनों तक चले इस आध्यात्मिक आयोजन ने रांचीवासियों को भक्ति, ज्ञान और संस्कारों से जोड़ते हुए श्रीमद्भागवत के दिव्य संदेश को जन-जन तक पहुंचाने का सार्थक प्रयास किया।

विश्वकर्मा पूजा सृजन, शिल्प और तकनीकी कौशल के आराध्य देव : संजय सर्राफ
Published / 2026-09-16 21:52:42
विश्वकर्मा पूजा सृजन, शिल्प और तकनीकी कौशल के आराध्य देव : संजय सर्राफ

एबीएन सोशल डेस्क। विश्व हिंदू परिषद सेवा विभाग एवं श्री कृष्ण प्रणामी सेवा धाम ट्रस्ट के प्रांतीय प्रवक्ता संजय सर्राफ ने कहा है कि भारत की सनातन परंपरा में भगवान विश्वकर्मा को सृष्टि के महान शिल्पकार, वास्तुकार एवं निर्माण-कला के अधिष्ठाता देवता के रूप में पूजा जाता है। प्रत्येक वर्ष कन्या संक्रांति, अर्थात सूर्य के कन्या राशि में प्रवेश के अवसर पर विश्वकर्मा पूजा मनायी जाती है। यह पर्व प्रत्येक वर्ष 17 सितंबर को मनायी जाती है। यह पर्व विशेष रूप से कारखानों, औद्योगिक प्रतिष्ठानों, निर्माण संस्थानों, कार्यशालाओं, तकनीकी संस्थानों तथा दुकानों में श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया जाता है।पौराणिक मान्यताओं के अनुसार भगवान विश्वकर्मा देवताओं के दिव्य वास्तुकार और शिल्पकार हैं। उन्होंने देवताओं के लिए अनेक भव्य भवनों, अस्त्र-शस्त्रों और दिव्य नगरों का निर्माण किया। विभिन्न पुराणों और धार्मिक परंपराओं में उनके द्वारा स्वर्गलोक, इंद्रपुरी, द्वारका तथा लंका जैसे दिव्य नगरों के निर्माण से संबंधित कथाएं मिलती हैं। इसी कारण उन्हें निर्माण, वास्तुकला, शिल्प और तकनीकी दक्षता का प्रतीक माना जाता है। विश्वकर्मा पूजा का मूल उद्देश्य उन साधनों, औजारों, मशीनों और उपकरणों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करना है, जिनके माध्यम से मनुष्य अपने श्रम और कौशल से निर्माण एवं उत्पादन करता है। इस दिन कारीगर, अभियंता, तकनीशियन, श्रमिक, उद्योगपति और व्यवसायी अपने कार्यस्थल तथा उपकरणों की विधिवत पूजा करते हैं। विश्वकर्मा पूजा के अवसर पर कारखानों एवं प्रतिष्ठानों की साफ-सफाई कर मशीनों और औजारों को सजाया जाता है। भगवान विश्वकर्मा की प्रतिमा या चित्र स्थापित कर विधि-विधान से पूजा, हवन एवं आरती की जाती है। कई स्थानों पर श्रमिकों और कर्मचारियों के लिए प्रसाद एवं भंडारे का भी आयोजन किया जाता है।यह पर्व केवल धार्मिक आस्था तक सीमित नहीं है, बल्कि श्रम, हुनर, तकनीक और उत्पादन के महत्व को भी रेखांकित करता है। यह संदेश देता है कि किसी भी निर्माण कार्य की सफलता के पीछे श्रमिकों, कारीगरों और तकनीकी विशेषज्ञों का महत्वपूर्ण योगदान होता है। कार्यस्थल पर सुरक्षा, अनुशासन और मशीनों के उचित रखरखाव के प्रति जागरूकता बढ़ाने का भी यह उपयुक्त अवसर है। विश्वकर्मा पूजा का प्रमुख संदेश है कि श्रम का सम्मान, कौशल का विकास और तकनीक का सदुपयोग ही प्रगति का आधार है। यह पर्व मनुष्य को ईमानदारी, लगन, सृजनशीलता और कर्मनिष्ठा के साथ अपने कार्य को करने की प्रेरणा देता है। आधुनिक युग में जब विज्ञान और तकनीक जीवन के प्रत्येक क्षेत्र का महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुके हैं, तब विश्वकर्मा पूजा की प्रासंगिकता और भी बढ़ जाती है। इस प्रकार भगवान विश्वकर्मा की आराधना केवल मशीनों और औजारों की पूजा नहीं, बल्कि सृजन की शक्ति, श्रम की गरिमा, तकनीकी ज्ञान और आत्मनिर्भरता के प्रति सम्मान का पर्व है। यह पर्व समाज को कर्म, कौशल और रचनात्मकता के माध्यम से राष्ट्र की प्रगति में योगदान देने की प्रेरणा प्रदान करता है।

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