मानव सेवा ही सच्ची प्रभु सेवा : सद्गुरु कृपा अपना घर आश्रम पहुंचे संत शिरोमणि स्वामी सदानंद जी महाराज, निराश्रितों से मिलकर कराया भोजनआश्रम में शीघ्र ही 50 और सुविधायुक्त बेड लगाये जाएंगे: सदानंद महाराजटीम एबीएन, रांची। पुंदाग स्थित एम.आर.एस. श्री कृष्ण प्रणामी सेवा धाम ट्रस्ट द्वारा संचालित श्री कृष्ण प्रणामी मंगल राधिका सदानंद सेवा धाम के अंतर्गत संचालित सद्गुरु कृपा अपना घर आश्रम (सत्य प्रेम सभागार) में परम पूजनीय, वंदनीय संत शिरोमणि श्री श्री 108 स्वामी श्री सदानंद जी महाराज ने आश्रम में निवासरत निराश्रितजनों, दीनबंधु प्रभुजनों एवं सेवादारों से आत्मीय मुलाकात कर उनका कुशलक्षेम जाना।इस दौरान उन्होंने सभी को अपने कर-कमलों से आशीर्वाद प्रदान किया तथा स्नेहपूर्वक भोजन भी कराया। गुरुदेव के सान्निध्य से पूरा आश्रम आध्यात्मिक ऊर्जा, सेवा भावना और आत्मीयता से ओत-प्रोत हो उठा। गुरुदेव ने आश्रम में रह रहे प्रत्येक प्रभुजन से व्यक्तिगत रूप से संवाद किया और उनके स्वास्थ्य, भोजन, आवास तथा दैनिक आवश्यकताओं की जानकारी ली। उन्होंने आश्रम में उपलब्ध व्यवस्थाओं पर संतोष व्यक्त करते हुए कहा कि किसी भी निराश्रित, असहाय एवं जरूरतमंद व्यक्ति को अपने जीवन में उपेक्षित महसूस नहीं होना चाहिए। समाज के प्रत्येक सक्षम व्यक्ति का यह नैतिक और मानवीय दायित्व है कि वह ऐसे सेवा कार्यों में बढ़-चढ़कर सहयोग करे। अपने आशीर्वचन में स्वामी सदानंद जी महाराज ने कहा कि मानव सेवा ही सच्ची प्रभु सेवा है। जब हम किसी असहाय, निराश्रित या पीड़ित व्यक्ति के चेहरे पर मुस्कान लाते हैं, तभी हमारा जीवन सार्थक होता है।उन्होंने समाज के सभी वर्गों से आश्रम के सेवा कार्यों में तन, मन और धन से सहयोग देने की अपील करते हुए कहा कि सेवा की यह सतत यात्रा जनसहयोग से ही और अधिक व्यापक बनेगी।इस अवसर पर गुरुदेव ने एक महत्वपूर्ण घोषणा करते हुए कहा कि आश्रम में निराश्रितों की बढ़ती आवश्यकता को देखते हुए शीघ्र ही 50 और आधुनिक सुविधायुक्त बेड लगाए जाएंगे, ताकि अधिक से अधिक असहाय एवं निराश्रित लोगों को सम्मानपूर्वक आश्रय और समुचित सुविधाएँ उपलब्ध कराई जा सकें। उन्होंने कहा कि ट्रस्ट का उद्देश्य केवल आश्रय देना नहीं, बल्कि प्रत्येक प्रभुजन को परिवार जैसा स्नेह, सम्मान और सुरक्षित वातावरण प्रदान करना है। ट्रस्ट के प्रवक्ता संजय सर्राफ ने बताया कि वर्तमान में आश्रम में 45 निराश्रित प्रभुजनों को भोजन, आवास, चिकित्सा, वस्त्र एवं अन्य आवश्यक सुविधाएँ पूर्णतः निःशुल्क उपलब्ध कराई जा रही हैं। ट्रस्ट निरंतर सेवा कार्यों का विस्तार कर रहा है ताकि अधिक से अधिक जरूरतमंद लोगों तक सहायता पहुँचाई जा सके।इस अवसर पर ट्रस्ट के अध्यक्ष डूंगरमल अग्रवाल, विजय अग्रवाल, राजेंद्र प्रसाद अग्रवाल, निर्मल जालान, संजय सर्राफ, शिव भगवान अग्रवाल, पंकज पोद्दार, रंजीत गाड़ोदिया, मधुसूदन जाजोदिया, नंदकिशोर चौधरी, सुरेश अग्रवाल, मनीष साहू, नवल अग्रवाल, मनीष जालान, पुजारी अरविंद पांडे, विशाल जालान, प्रभास गोयल, विष्णु सोनी सहित ट्रस्ट के अनेक पदाधिकारी, सदस्यगण उपस्थित रहे।
भारतीय संस्कृति ज्ञान परीक्षा राज्य स्तरीय पुरस्कारों में रांची जिला के दो छात्र पुरस्कृतएबीएन सोशल डेस्क। गायत्री परिवार संस्थान युगतीर्थ शान्तिकुञ्ज तत्वावधान में भारतीय संस्कृति ज्ञान परीक्षा के 2025-26 झारखंड राज्य में रांची के दो विद्यार्थी राज्य स्तरीय मेरिट में चयनित हुए, जिन्हें भा सं ज्ञा प के प्रांतीय समन्वयक ताराचंद अग्रवाल टीम द्वारा आयोजित राज्य स्तरीय पुरस्कार वितरण समारोह गायत्री शक्तिपीठ, टाटानगर में पुरस्कृत किया गया। रांची जिला के भारतीय संस्कृति ज्ञान परीक्षा समन्वयक दीपक दयाल प्रसाद ने बताया कि विभिन्न विद्यालयों से उन विद्यार्थियों को आमंत्रित किया गया था, जिन्होंने परीक्षा में प्रथम, द्वितीय और तृतीय स्थान प्राप्त किया। बताया कि रांची जिलांतर्गत दो विद्यार्थी द्वितीय एवं तृतीय स्थान प्राप्त किए थे, जिनमें स्वामी विवेकानंद पब्लिक स्कूल रांची के द्वितीय स्थान प्राप्त कक्षा 6 के संदीप सिंह मुण्डा, पिता जी कृष्ण सिंह मुण्डा और बिरसा चिल्ड्रेन एकेडमी रांची कक्षा 8 की पलक कुमारी, पिता जी बिनोद भगत थे। उन्होंने बताया कि चयनित विद्यार्थियों को मेडल, प्रशस्ति पत्र और नगद राशि प्रदान कर सम्मानित किया गया। कार्यक्रम में उपस्थित मुख्य एवं अन्य अतिथि गण एवं शक्तिपीठ व्यवस्था टीम प्रतिनिधियों ने पुरस्कृत एवं सम्मानित करने उपरान्त विद्यार्थियों को आगे भी अध्ययन के साथ संस्कारों से जुड़े रहने और निरंतर प्रयास करने का प्रोत्साहन-संदेश दिया। उक्त जानकारी गायत्री परिवार के रांची जिला समन्वयक जय नारायण प्रसाद और भा सं ज्ञा प के रांची जिला समन्वयक दीपक दयाल प्रसाद ने दी।
शिशु का नामकरण संस्कारोत्सव गायत्री यज्ञीय विधान से संपन्न हुआटीम एबीएन, रांची। गायत्री परिवार गुदड़ी बाजार के मणिलाल साहु परिवार के बेटे बहु विशाल साहु एवं जस्सी राज की नवजात सन्तान मेहमान शिशु का अन्नप्राशन संस्कारोत्सव बहुत ही आनंदमय उल्लासमय मंगलमय गायत्री यज्ञीय अनुष्ठान विधान के दिव्य वातावरण में विस्तार से एवीन प्लाजा में मनाया गया। इस कार्यक्रम आयोजन में गायत्री महामंत्र का सस्वर पाठ व गुरुईशवंदना, पूजा साधन सामग्री शुद्धिकरण, षटकर्म से देवावाहन, नमन-वंदन, षोडशोपचार पूजन व स्वस्तिवाचन पाठ सहित नामकरण का संस्कारोत्सव विधान कराया गया। नामकरण संस्कार प्रकरण में माता पिता और शिशु के साथ साथ इस शुभ कार्यक्रम में शामिल सभी आगन्तुक परिजनों को भी वैदिक मंत्राभिषेक विधान किये गये। यज्ञीय पुरोहित प्रमोद कुमार ने बताया कि शिशु के अंत:करण में प्रारंभिक जीवन से ही मानवीय आदर्शों के प्रति निष्ठा भाव जगाना चाहिए। कहा कि जीवात्मा शिशु रूप में ईश्वर प्रदत्त एक मानवीय उपहार स्वरूप है, उसे जीवन का कर्तव्य व उत्तरदायित्व निर्वाह का बोध भी भविष्य में होना चाहिए।माता पिता अभिभावक शिशु के जीवन में दोष दुर्गुण से बचाये रखने और उसके स्वभाव में सुसंस्कार, सद्गुण ग्रहण आदि समय समय पर बताते समझाते रहना चाहिए। इस विधान में पवित्रता से शुभ पात्र में लिखित, संस्कारित परिष्कृत, संयोजित ढंके हुए नामपट को हटाकर नाम वरेण्य की घोषणा की गयी और भाव किया गया कि घोषित नाम व्यक्तित्व का प्रतीक बन कर सबका गौरव बढ़ाने वाला हो।शिशु के दीर्घायुष्य व स्वस्थ-सुखद जीवन और उज्जवल की मंगलकामना पाठ बाद यज्ञीय कर्मकांड सहित विशेष मंत्र आहुति प्रदान की गयी और अंत में यज्ञाचार्य, अभिभावक, साधक, आगंतुक गणों ने शिशु के ऊपर अक्षत, गंगाजल व पुष्प की वर्षा और आशीर्वाद मंत्र पाठ कर मंगल कामना और स्वस्थ-सुखद जीवन व उज्ज्वल भविष्य की मंगलमय स्वस्तिवाचन पाठ किये। प्रसाद वितरण कर समापन किया गया। उक्त जानकारी गायत्री परिवार के मणिलाल साहु और जय नारायण प्रसाद ने दी।
टीम एबीएन, रांची। आज दिनांक 21.07.2026 को जोगता नागरिक समिति ने इस दूषित पर्यावरण को देखते हुए जोगता मोड पर नागरिकों के बीच पौधे का बितरण किया गया।जोगता नागरिक समिति के अध्यक्ष अनुज कुमार सिन्हा ने कहा कि अगर हमारे देश के हर व्यक्ति के माध्यम से एक पौधा लगाया जाए तो हमारे देश मे प्रदुषण से हमेसा के लिए मुक्ति मिल जाए।जिसमे मुख्य रुप से एस के मोबीन, आशीष सरकार, मन्नु महतो, पान्डे जी, हसीब खान, असगर मियां, निर्मल कुमार, मंगल चौहान, अजय चौहान, बिन्दवा देवी, गुडीया परविन, राज कुमार आदि लोग उपस्थित थे।
राष्ट्रीय ध्वज अंगीकरण दिवस, तिरंगे के सम्मान, स्वाभिमान और राष्ट्रीय एकता का प्रतीक : संजय सर्राफएबीएन सेंट्रल डेस्क। हिंदी साहित्य भारती के उपाध्यक्ष सह झारखंड पेरेंट्स एसोसिएशन के प्रांतीय प्रवक्ता संजय सर्राफ ने कहा है कि भारत में राष्ट्रीय ध्वज अंगीकरण दिवस प्रत्येक वर्ष 22 जुलाई को मनाया जाता है। इसी दिन वर्ष 1947 में संविधान सभा ने स्वतंत्र भारत के राष्ट्रीय ध्वज तिरंगे को औपचारिक रूप से अपनाया था। स्वतंत्रता प्राप्ति से लगभग तीन सप्ताह पहले लिये गये इस ऐतिहासिक निर्णय ने देश को एक ऐसी पहचान प्रदान की, जो आज भी राष्ट्रीय गौरव, एकता, स्वतंत्रता और लोकतांत्रिक मूल्यों का प्रतीक है। भारतीय राष्ट्रीय ध्वज तीन समान क्षैतिज पट्टियों से बना है। सबसे ऊपर केसरिया रंग साहस, त्याग और बलिदान का संदेश देता है। बीच में सफेद रंग सत्य, शांति और पारदर्शिता का प्रतीक है, जबकि सबसे नीचे हरा रंग समृद्धि, विकास और प्रकृति के प्रति सम्मान का संदेश देता है। ध्वज के मध्य सफेद पट्टी पर गहरे नीले रंग का 24 तीलियों वाला अशोक चक्र अंकित है, जो सारनाथ स्थित अशोक स्तंभ के धर्मचक्र से प्रेरित है। यह न्याय, धर्म, सतत प्रगति और कर्मशील जीवन का प्रतीक माना जाता है। राष्ट्रीय ध्वज अंगीकरण दिवस का उद्देश्य देशवासियों में तिरंगे के प्रति सम्मान, राष्ट्रभक्ति और राष्ट्रीय कर्तव्यों के प्रति जागरूकता का भाव विकसित करना है। यह दिवस हमें उन स्वतंत्रता सेनानियों के त्याग और बलिदान की भी याद दिलाता है, जिन्होंने स्वतंत्र भारत के निर्माण के लिए अपना सर्वस्व समर्पित कर दिया। तिरंगा केवल कपड़े का एक टुकड़ा नहीं, बल्कि करोड़ों भारतीयों की भावनाओं, संघर्षों और आकांक्षाओं का जीवंत प्रतीक है। इस अवसर पर विद्यालयों, महाविद्यालयों, सरकारी एवं निजी संस्थानों तथा सामाजिक संगठनों द्वारा ध्वजारोहण, राष्ट्रगान, देशभक्ति गीत, निबंध, चित्रकला, भाषण एवं जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किये जाते हैं। इन आयोजनों के माध्यम से नयी पीढ़ी को राष्ट्रीय ध्वज के इतिहास, उसकी गरिमा और सम्मान की परंपरा से परिचित कराया जाता है। साथ ही नागरिकों को भारतीय ध्वज संहिता का पालन करते हुए तिरंगे के सम्मान और उसके उचित उपयोग के प्रति भी प्रेरित किया जाता है। आज के समय में, जब भारत विश्व मंच पर नयी ऊंचाइयों को प्राप्त कर रहा है, राष्ट्रीय ध्वज अंगीकरण दिवस का महत्व और भी बढ़ जाता है। यह दिवस हमें याद दिलाता है कि देश की विविधता में एकता ही हमारी सबसे बड़ी शक्ति है। तिरंगे की शान बनाये रखना प्रत्येक भारतीय का नैतिक और संवैधानिक दायित्व है। 22 जुलाई के इस प्रेरणादायी अवसर पर हम सभी राष्ट्र की अखंडता, एकता और समृद्धि के लिए समर्पित रहने तथा तिरंगे के सम्मान को सदैव सर्वोपरि रखने का संकल्प लें।
रांची में ज्ञेय और नियोग सागर जी महाराज का मंगल प्रवेशझारखंड की राजधानी रांची में पूज्य आचार्य श्री 108 ज्ञेयसागर जी एवं नियोग सागर जी महाराज संघ का मंगल प्रवेश एबीएन सोशल डेस्क। रांची झारखंड की राजधानी रांची आज आध्यात्मिक उल्लास और धर्ममय वातावरण से सराबोर हो उठी, जब परम पूज्य आचार्य श्री 108 ज्ञेयसागर जी महाराज ससंघ का नगर में भव्य एवं मंगल प्रवेश हुआ। आचार्यश्री के आगमन पर बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने विनयपूर्वक अगवानी कर जयघोष के साथ उनका स्वागत किया। प्रात: 6 बजे महावीर भवन बरियातू से विहार कर 8 बजे वासुपूज्य जिनालय में मंगल प्रवेश के बाद बाईसवें तीर्थंकर देवाधिदेव 1008 श्री नेमीनाथ भगवान का निर्वाण दिवस मनाया गया तत्पश्चात जैन मन्दिर अपर बाजार में 8.30 बजे मंगल प्रवेश हुआ। इस दौरान श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह देखने को मिला। मार्ग में जगह-जगह श्रद्धालुओं ने आचार्यश्री के दर्शन कर एवं पादप्रक्षालन कर उनका आशीर्वाद प्राप्त किया। नगर में धर्म, संयम और आध्यात्मिक चेतना का अद्भुत वातावरण निर्मित हो गया।इस अवसर पर आचार्य श्री ज्ञेयसागर जी महाराज ने अपने मंगल संदेश में कहा कि मनुष्य का वास्तविक उत्थान आत्मचिंतन, संयम, सदाचार और करुणा से ही संभव है। उन्होंने सभी से जीवन में अहिंसा, सत्य, क्षमा और आत्मकल्याण के मार्ग पर चलने का आह्वान किया। आचार्यश्री ने कहा कि धर्म केवल पूजा-पाठ तक सीमित नहीं है, बल्कि अपने व्यवहार और आचरण को श्रेष्ठ बनाना ही सच्ची साधना है।रांची के जैन समाज के पदाधिकारियों ने बताया कि आचार्यश्री के सान्निध्य में आगामी दिनों चतुर्मास रांची में होना है। चातुर्मास के दौरान विभिन्न धार्मिक कार्यक्रम, प्रवचन, स्वाध्याय एवं आध्यात्मिक आयोजन संपन्न होंगे, जिनमें समाज के साथ-साथ सभी धर्मप्रेमी नागरिकों को सहभागी बनने का अवसर मिलेगा।मंगल प्रवेश में जैन समाज के पदाधिकारी, महिला मंडल, युवाओ तथा बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे। सभी ने आचार्यश्री के सान्निध्य को रांची के लिए सौभाग्य बताते हुए उनके मंगलमय प्रवास से धर्म एवं संस्कारों के व्यापक प्रसार की कामना की। यह जानकारी मीडिया प्रभारी राकेश काशलीवाल ने दी।
शिशु के अंतःकरण में (प्रारंभिक जीवन से ही) मानवीय आदर्शों के प्रति निष्ठा भाव जगाना चाहिए : प्रमोद कुमारशिशु का नामकरण संस्कारोत्सव गायत्री यज्ञीय विधान से संपन्न हुआटीम एबीएन, रांची। गायत्री परिवार गुदड़ी बाजार के मणिलाल साहु परिवार के बेटे बहु विशाल साहु एवं जस्सी राज की नवजात शिशु का अन्नप्राशन संस्कारोत्सव बहुत ही आनन्दमय उल्लासमय मंगलमय गायत्री यज्ञीय अनुष्ठान विधान के दिव्य वातावरण में विस्तार से एवीन प्लाजा में मनाया गया। इस कार्यक्रम आयोजन में गायत्री महामंत्र का सस्वर पाठ व गुरुईश वंदना, पूजा साधन सामग्री शुद्धिकरण, षटकर्म, संकल्प, कलश पूजन, दीप पूजन, देवावाहन, नमन-वंदन व षोडशोपचार पूजन व स्वस्ति वाचन पाठ रक्षा विधान सहित नामकरण का संस्कारोत्सव विधान कराया गया। नामकरण संस्कार प्रकरण में माता पिता और शिशु के साथ साथ इस शुभ कार्यक्रम में शामिल सभी आगन्तुक परिजनों को भी वैदिक मंत्राभिषेक विधान किए गए। यज्ञीय पुरोहित प्रमोद कुमार ने बताया कि शिशु के अंतःकरण में प्रारंभिक जीवन से ही मानवीय आदर्शों के प्रति निष्ठा भाव जगाना चाहिए।कहा कि जीवात्मा शिशु रूप में ईश्वर प्रदत्त एक मानवीय उपहार स्वरूप है, उसे जीवन का कर्तव्य व उत्तरदायित्व निर्वाह का बोध भी भविष्य में होना चाहिए। माता पिता अभिभावक शिशु के जीवन में दोष दुर्गुण से बचाये रखने और उसके स्वभाव में सुसंस्कार, सद्गुण ग्रहण आदि समय समय पर बताते समझाते रहना चाहिए। इस विधान में पवित्रता से शुभ पात्र में लिखित, संस्कारित, संयोजित ढके हुए नामपट को हटाकर नाम वरेण्य की घोषणा की गयी और भाव किया गया कि घोषित नाम व्यक्तित्व का प्रतीक बन कर सबका गौरव बढ़ाने वाला हो। आगे मंत्र पाठ कर सबने दोहराया कि शुद्धोऽसि, बुद्धोऽसि, शिशु चिरजीवी हो, कर्तव्यनिष्ठ हो, धर्मशील हो, ओजस्वी तेजस्वी हो, प्रगतिशील हो, 21 वी सदी उज्जवल भविष्य हो, सबके उद्घोषणा बाद शेष यज्ञीय विधान कर्मकाण्ड सहित विशेष मंत्र आहुति प्रदान किए गए।अंत में यज्ञीय आचार्य, अभिभावक, साधक, आगन्तुक गणों ने शिशु के ऊपर अक्षत, गंगाजल व पुष्प की वर्षा से स्वस्थ-सुखद जीवन व उज्जवल भविष्य की मंगलमय स्वस्तिवाचन पाठ कर आशीर्वाद दिए। फिर प्रसाद वितरण कर समापन किया गया। उक्त जानकारी गायत्री परिवार के मणिलाल साहु और जय नारायण प्रसाद ने दी।
स्वामी सदानंद महाराज ने दिया मानव सेवा का संदेश एबीएन सोशल डेस्क। श्री कृष्ण प्रणामी सेवा धाम ट्रस्ट के संस्थापक परम पूज्य डॉ. संत शिरोमणि स्वामी सदानंद महाराज के पावन सान्निध्य में रांची के पुंदाग स्थित श्री राधा कृष्ण प्रणामी मंदिर में गुरु पूर्णिमा महोत्सव श्रद्धा, भक्ति एवं आध्यात्मिक उल्लास के साथ संपन्न हुआ। इस अवसर पर बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने उपस्थित होकर गुरु पूजन,सत्संग, भजन- कीर्तन तथा आध्यात्मिक प्रवचनों का लाभ प्राप्त किया। महोत्सव का शुभारंभ वैदिक मंत्रोच्चार एवं पारंपरिक विधि-विधान के साथ गुरु पूजन से हुआ। इसके पश्चात भव्य सत्संग एवं संगीतमय भजन-कीर्तन का आयोजन किया गया, जिसमें पूरा मंदिर परिसर भक्तिमय वातावरण से गुंजायमान हो उठा। श्रद्धालु गुरु भक्ति एवं भगवान श्री राधा-कृष्ण की आराधना में भाव-विभोर दिखाई दिए।अपने प्रेरणादायी आध्यात्मिक प्रवचन में परम पूज्य डॉ. संत शिरोमणि स्वामी सदानंद महाराज ने गुरु पूर्णिमा के आध्यात्मिक, सांस्कृतिक एवं सामाजिक महत्व पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि गुरु केवल ज्ञान देने वाले नहीं, बल्कि जीवन को सही दिशा प्रदान करने वाले पथ-प्रदर्शक होते हैं। गुरु के सान्निध्य में ही मनुष्य आत्मिक उन्नति, संस्कार और सेवा के वास्तविक मार्ग को प्राप्त करता है। उन्होंने कहा कि ट्रस्ट द्वारा संचालित देश के विभिन्न सेवा धामो में निराश्रितजनों की सेवा, गौ सेवा तथा मानव सेवा निरंतर की जा रही है। मानव सेवा और गौ सेवा से बढ़कर कोई पुण्य कार्य नहीं है। समाज का प्रत्येक सक्षम व्यक्ति यदि सेवा कार्यों में अपनी सहभागिता सुनिश्चित करे तो अनेक जरूरतमंदों के जीवन में आशा का प्रकाश फैलाया जा सकता है। उन्होंने सभी श्रद्धालुओं से सेवा, समर्पण और परोपकार की भावना के साथ ट्रस्ट की विभिन्न जनकल्याणकारी गतिविधियों में सक्रिय सहयोग देने का आह्वान किया। महोत्सव के दौरान श्री राधा रानी एवं भगवान श्रीकृष्ण का अलौकिक एवं मनोहारी श्रृंगार किया गया। ठाकुरजी को नवीन एवं आकर्षक वस्त्रों के साथ सुंदर आभूषणों से सुसज्जित किया गया, जिसके दर्शन के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ी। सायंकाल 101 दीपों से भव्य महाआरती संपन्न हुई, जिससे पूरा मंदिर परिसर दिव्य आलोक से प्रकाशित हो उठा और वातावरण भक्तिमय हो गया।कार्यक्रम के समापन पर श्रद्धालुओं के बीच महाप्रसाद का वितरण किया गया। उक्त जानकारी देते हुए ट्रस्ट के प्रवक्ता संजय सर्राफ ने बताया कि मौके पर डूंगरमल अग्रवाल, विजय अग्रवाल, निर्मल छावनिका, राजेंद्र प्रसाद अग्रवाल, निर्मल जालान, शिव भगवान अग्रवाल, संजय सर्राफ, मधुसूदन जाजोदिया, सुरेश अग्रवाल, पंकज पोद्दार, नंदकिशोर चौधरी, नवल अग्रवाल, विशाल जालान, मनीष साहू,प्रभास गोयल, विष्णु सोनी, अरविंद पांडे, ज्ञान प्रकाश शर्मा, विद्या देवी अग्रवाल सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे। सभी ने गुरु पूर्णिमा के इस पावन पर्व पर गुरु के बताए सेवा, सद्भाव और आध्यात्मिक जीवन के आदर्शों का पालन करने का संकल्प लिया।
श्री जगन्नाथ की पावन रथ यात्रा पर आरएसएस ने किया सेवा कार्यटीम एबीएन, रांची। भगवान श्रीजगन्नाथ की पावन रथ यात्रा पर आज रांची स्थित श्री जगन्नाथ मंदिर परिसर में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ, रांची महानगर के स्वयंसेवकों ने सेवाकार्य किया।प्रात: 4 बजे से दोपहर 3 बजे तक 200 से अधिक स्वयंसेवक मंदिर के गर्भगृह से भगवान श्रीजगन्नाथ, भगवान बलभद्र एवं माता सुभद्रा के विग्रहों को विधिवत नीचे लाने, सुरक्षा व्यवस्था, श्रद्धालुओं के सुचारु आवागमन तथा अन्य आवश्यक व्यवस्थाओं के संचालन में पूर्ण समर्पण, अनुशासन एवं सेवाभाव के साथ निरंतर सक्रिय रहे।इस सेवाकार्य में राष्ट्र सेविका समिति, रांची महानगर की 15 बहनों ने भी उत्साहपूर्वक सहभागिता निभायी तथा विभिन्न व्यवस्थाओं के संचालन में महत्वपूर्ण सहयोग प्रदान किया। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ द्वारा समाज जीवन के विविध क्षेत्रों में सेवा, संगठन और सामाजिक समरसता की भावना से निरंतर सेवाकार्य किये जाते हैं। भगवान श्रीजगन्नाथ की रथ यात्रा के अवसर पर किया गया यह सेवाकार्य भी समाज के प्रति उत्तरदायित्व, अनुशासन और निस्वार्थ सेवा की उसी परंपरा का सशक्त उदाहरण है। उक्त जानकारी राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ, रांची महानगर के महानगर सह प्रचार प्रमुख शिवेंदु सागर ने दी।
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