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जानें कार में सफर के दौरान नींद आने की वजह
Published / 2022-04-18 17:27:31
जानें कार में सफर के दौरान नींद आने की वजह

एबीएन नॉलेज डेस्क। कार से सफर की शुरूआत होते ही ज्यादातर लोगों को नींद आने लगती है। कभी सोचा है कि ऐसा क्यों होता है? इस पर अलग-अलग रिसर्च हुई हैं। रिसर्च में कई बातें सामने आई हैं। ऐसा होने की कई वजह बताई गई हैं जैसे, स्पीप डेब्ट, बोरियत और हाइवे हिप्नोसिस। सफर करने से पहले ही कई तैयारियां करनी पड़ती हैं। कोई चीज छूट न जाए, इसकी चिंता में नींद नहीं पूरी हो पाती। इसे ही स्लीप डेब्ट कहते हैं। यह नींद की सबसे बड़ी वजह होती है, अब इसका विज्ञान भी समझ लीजिए। द कंवर्सेशन की रिपोर्ट कहती है, चलती गाड़ी में नींद तभी आती है जब हम कुछ कर नहीं हो रहे होते हैं। ठीक वैसे ही जैसे रात में सोने के समय दिमाग और शरीर रिलैक्स होने लगता है। चलती कार में होने वाला मूवमेंट भी नींद लाने का काम करता है। इस स्थिति में शरीर ठीक वैसे ही काम करता है, जैसे बचपन में माता-पिता बच्चे को सुलाने के लिए गोद में लेकर हिलाते-डुलाते हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, विज्ञान की भाषा में इस स्थिति को हाइवे हिप्नोसिस कहते हैं। ऐसा ड्राइवर्स के साथ ही होता है और लम्बी दूरी के सफर में कार ड्राइव करते समय उन्हें नींद आने लगती है। चाय और कॉफी से वे इस नींद को दूर करने की कोशिश करते हैं। सफर में इस तरह नींद आने की तीसरी वजह होती है व्हाइट नॉइज। व्हाइट नॉइज उस शोर को कहते हैं जो इंजन की आवाज, हवा की सरसराहट और गाड़ी में बजने वाले संगीत से पैदा होता है। वैज्ञानिक इस बात का पता लगाने में जुटे हैं कि इस तरह के शोर में इंसान को कैसे नींद आ जाती है। वैज्ञानिकों का कहना है, बचपन में बच्चे को सुलाते समय पेरेंट्स भी अलग-अलग तरह की आवाज निकलाते हैं और बच्चा सो जाता है। हालांकि ऐसा क्यों होता है, इसकी सटीक वजह सामने नहीं आ पाई है। वैज्ञानिकों का कहना है, लंबे सफर के दौरान नींद आना लाजिमी है। अगर कोई 10 से 15 मिनट के सफर में भी सो जाता है तो उसके सोपाइट सिंड्रोम से पीड़ित होने का खतरा रहता है। यह न्यूरोलॉजिकल डिसआॅर्डर है। जिसमें अक्सर इंसान थका हुआ महसूस करता है।

मंगल ग्रह पर दिखे एलियंस के पांव के निशान? नासा की तस्वीर देख दुनिया हैरान
Published / 2022-04-17 08:31:46
मंगल ग्रह पर दिखे एलियंस के पांव के निशान? नासा की तस्वीर देख दुनिया हैरान

एबीएन नॉलेज डेस्क। एलियंस को लेकर समय-समय पर हैरान करने देने वाली खबरें सामने आती रहती हैं। दुनिया में एलियंस के बारे में कई तरह दावे किए जाते हैं। धरती पर कई लोग एलियन और यूएफओ को देखने का दावा कर चुके हैं। एलियंस के बारे में कई बार ऐसे दावे किए जाते हैं जिनके बारे में जानकर वैज्ञानिक भी हैरत में पड़ जाते हैं। क्या ब्रह्मांड में एलियन का अस्तित्व है? इसका अभी तक कोई ठोस सबूत नहीं है। एलियन को लेकर दुनियाभर के वैज्ञानिक सालों से रिसर्च कर रहे हैं, लेकिन अभी तक एलियन के अस्तित्व को लेकर उन्हें कोई ठोस सबूत नहीं मिले हैं। लेकिन आए दिन एलियन और यूएफओ को देखने के दावे किए जाते हैं। अब इस बीच अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा (Nasa) ने मंगल ग्रह की एक तस्वीर जारी की है जो बेहद चौंकाने वाली है। नासा द्वारा जारी की गई तस्वीर में मंगल ग्रह पर एक गड्ढा दिखाई दे रहा है जिसको देखकर पूरी दुनिया हैरत में पड़ गई है। अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी की तरफ से इस तस्वीर को इंस्टाग्राम पर शेयर किया गया है। नासा की इस तस्वीर को देखकर सोशल मीडिया यूजर्स कई तरह के दावे कर रहे हैं। कुछ यूजर्स का कहना है कि कहीं ये एलियंस के पैर के निशान तो नहीं हैं। नासा ने मार्स ऑर्बिटर के हाई कैपेसिटी वाले कैमरे से इस तस्वीर को खींचा है।

कन्याकुमारी में एक साथ दिखेंगे चांद-सूरज! जानें कब होगी यह अद्भुत घटना
Published / 2022-04-16 09:43:29
कन्याकुमारी में एक साथ दिखेंगे चांद-सूरज! जानें कब होगी यह अद्भुत घटना

एबीएन सेंट्रल डेस्क। प्रकृति अपने अंदर कई ऐसी चीजें समेटे हुई है जिसे आसानी से तो नहीं देखा जा सकता, लेकिन इन्हें देखना अपने आप में ही एक अलग अनुभव होता है। कुछ ऐसा ही होने वाला है तमिलनाडु के कन्याकुमारी में, जहां सूर्यास्त और चंद्रोदय को एक साथ देखा जा सकेगा। यह अद्भुत घटना तमिल के चिथिराई महीने में देखने को मिलती है जो कि कल यानी 16 अप्रैल को देखने को मिलेगी। कन्याकुमारी की अनूठी भूवैज्ञानिक संरचना जो भारत के किसी भी हिस्से में मौजूद नहीं है। यहां अरब सागर, बंगाल की खाड़ी और हिंद महासागर तीनों ही मिलते हैं। यहां के "सी व्यू प्वाइंट" से चंद्रमा को उगते हुए और सूरज को डूबते हुए एक ही समय पर देख सकते हैं। इस बार यह दुर्लभ आकाशीय घटना शनिवार 16 अप्रैल को देखने को मिलेगी। इसका दीदार करने के लिए कई राज्यों से टूरिस्ट कन्याकुमारी पहुंचने लगे हैं। वहीं जिले की पुलिस भी सुरक्षा के कड़े इंतजाम कर रही है। वहीं, चैत्र पूर्णिमा पर कन्याकुमारी के भगवती अम्मा मंदिर में भी विशेष पूजा होगी। इसके साथ ही कन्याकुमारी से करीब सौ किलोमीटर दूर कुट्रालम फॉल्स में भी पानी आना शुरू हो गया है। सामान्यतः यह जून के महीने में शुरू होता है, लेकिन इस बार यह गर्मियों में ही शुरू हो गया है।

तेजी से बदल जाता है नेप्च्यून के वायुमंडल का तापमान
Published / 2022-04-15 08:14:42
तेजी से बदल जाता है नेप्च्यून के वायुमंडल का तापमान

एबीएन नॉलेज डेस्क। सौरमंडल के सभी ग्रह अपनी अनोखी विशेषताएं लिए हुए हैं। इनमें नेप्च्यून ग्रह सूर्य से सबसे ज्यादा दूर है और बाकी ग्रहों की तरह इसका अध्ययन भी वैज्ञानिकों के लिए अहमियत रखता है। पिछले दो दशकों के अध्ययन से पता चला है कि नेप्च्यून ग्रह के वायुमंडल का तापमान अप्रत्याशित रूप से बदल रहा है। दुनिया भर के कई टेलीस्कोप के आंकड़ों की मदद से वैज्ञानिक नेप्च्यून की वायुमंडल की तापमान में इस बदालव क साफ तस्वीर बनाने में सफल रहे हैं और उम्मीद के खिलाफ उन्होंने पाया की इस ग्रह का औसत तापमान कम हो रहा है। दो दशकों से बदलाव : लेस्टर यूनिवर्सिटी के अंतरिक्ष वैज्ञानिकों की अगुआई में हुए इस अध्ययन में बताया गया है कि नेप्च्यून के वायुमंडल के पिछले दो दशकों में कैसे बदलाव आ रहा है। इसी सप्ताह प्लैनेटरी साइंस जर्नल में प्रकाशित इस अध्ययन में वैज्ञानिकों ने नेप्च्यून के वायुमंडल से निकलने वाली गर्मी के स्पैक्ट्रम में थर्मल इंफ्रारेड तरंगों का अवलोकन किया। कहां से लिए आंकड़े : इस शोध में लेस्टर के अलावा नासा के जेट प्रपल्शन लैबोरटरी का भी योगदान है, जिसमें शोधकर्ताओं ने अलग अलग जगहों से दो दशकों तक लिए गए सभी थर्मल इंफ्रारेड तस्वीरो के आंकड़ों का अध्ययन किया। ये आंकड़े यूरोपियन साउदर्न ऑबजर्वेटरी के वेरी लार्ज टेलीस्कोप, चीली के जैमिनी साउथ टेलीस्कोप के साथ हवाई के सुबारू, केल और जेमिनी नॉर्थ टेलीस्कोप एवं नासा के स्प्लिट्जर टेलीस्कोप के आंकड़े शामिल थे। तापीय चमक में कमी, क्यों नहीं थी इसकी उम्मीद : इस अध्ययन के प्रमुख लेखक और लेस्टर यूनिवर्सिटी के पोस्ट डॉक्टोरल रिसर्च एसोसिएट डॉ माइकल रोमन ने बताया कि इस बदालव की आशा नहीं था। चूंकि हमें इसे शुरुआती दक्षिणी गर्मी के मौसम से अवलोकन कर रहे थे इसलिए हम आशा कर रहे थे कि धीरे धीरे यहां गर्मी बढ़नी चाहिए ना कि ठंडक। दक्षिणी ध्रुव पर तो कुछ और ही : इस अध्ययन के सहलेखक और जेपीएल में वरिष्ठ शोध वैज्ञानिक डॉ ग्लेन ओर्टोन ने बताया कि उनके आंकड़ों नेप्च्यून के इस मौसम का आधे से ज्यादा समय के थे, इसलिए शोधकर्ता इतने बड़े और तेज बदलाव की उम्मीद नहीं कर रहे थे। फिर भी आंकड़ों से चौंकाने वाले और नाटकीय बदलाव देखने को मिले जिसमें दक्षिणी ध्रुव 11 डिग्री सेल्सियस ज्यादा गर्म थे जो पिछले औसत की तुलना में ज्यादा गर्मी दर्शा रहा है। इन्हीं आंकडों के आधार पर ही शोधकर्ता नेप्च्यून के वायुमंडल के तापमान की स्प्ष्ट और पूरी तस्वीर बना सके, जिसमें शोधकर्ताओं को यह जानकर हैरानी हुई की ये आंकड़े साफ तौर पर दर्शा रहे हैं कि नेप्च्यून की तापीय चमक कम हो गई है। साल 2003 से शुरू हुई थर्मल इमेजिंग से पता चला है कि नेप्च्यून के समतापमंडल में वैश्विक औसत तापमान में 2018 तकलगभग 8 डिग्री सेल्सियस तक की गिरावट आई है।

दुनिया के पहले एंटी मिसाइल लेज़र सिस्टम का इजरायल ने किया सफल परीक्षण
Published / 2022-04-15 04:57:56
दुनिया के पहले एंटी मिसाइल लेज़र सिस्टम का इजरायल ने किया सफल परीक्षण

एबीएन सेंट्रल डेस्क। इजरायल ने दुनिया के पहले एंटी मिसाइल लेज़र सिस्टम का सफल परीक्षण किया है। इस बात की जानकारी खुद इजरायल के प्रधानमंत्री नफ्ताली बेनेट ने दी है। इस मिसाइल डिफेंस सिस्टम को आयरन बीम लेज़र इंसपेक्शन का नाम दिया गया है। ये दुनिया की पहली ऊर्जा-आधारित हथियार प्रणाली है। इससे यूएवी, रॉकेट और मोर्टार को नीचे गिराने के लिए एक लेजर का इस्तेमाल किया जाता है। इजरायल के प्रधानमंत्री बेनेट के मुताबिक इससे एक शॉट के लिए महज 3.5 डॉलर का खर्चा आता है। इजरायल के रक्षा मंत्रालय के रक्षा अनुसंधान और विकास निदेशालय ने उच्च शक्ति वाले आयरन बीम लेजर इंटरसेप्शन सिस्टम के साथ सफलतापूर्वक परीक्षण पूरा किया। इजरायल के प्रधानमंत्री बेनेट इस ऐतिहासिक पल का वीडियो शेयर करते हुए लिखा कि सुनने में ये साइंस फिक्शन जैसा लग सकता है, लेकिन ये सच है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक आयरन बीम लेजर इंटरसेप्शन सिस्टम को गाजा के पास तैनात किया जाएगा। इजरायल के रक्षा मंत्री बेनी गैंट्ज़ ने एक बयान में कहा कि लेजर रक्षा प्रणाली का इस्तेमाल जल्द से जल्द किया जाएगा।

पिनाका रॉकेट लॉन्चर का डीआरडीओ ने किया सफल परीक्षण
Published / 2022-04-09 17:42:40
पिनाका रॉकेट लॉन्चर का डीआरडीओ ने किया सफल परीक्षण

एबीएन नॉलेज डेस्क। रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) तथा सेना ने पोखरण रेंज में पिनाका एम के -1 रॉकेट प्रणाली और पिनाका एरिया डिनायल म्यूनेशन रॉकेट प्रणाली का पोखरण रेंज में सफल परीक्षण किया है। पिछले सप्ताह किए गए इस परीक्षण के दौरान कुल 24 रॉकेट प्रणाली का अलग-अलग दूरी के लिए परीक्षण किया गया। परीक्षण के दौरान सभी रॉकेटों ने सटीक निशाने लगाए और परीक्षण के सभी उद्देश्यों को सफलतापूर्वक हासिल किया गया। इन परीक्षणों के दौरान प्रौद्योगिकी हस्तांतरण का आरंभिक चरण पूरा हो गया है और औद्योगिक साझीदार इनके उत्पादन के लिए तैयार हैं। पिनाका रॉकेट प्रणाली पुणे स्थित आमार्मेंट रिसर्च एंड डेवलपमेंट एस्टेब्लिशमेंट ने डीआरडीओ की एक प्रयोगशाला के सहयोग से विकसित की है। यह रॉकेट प्रणाली पिनाका रॉकेट का उन्नत संस्करण है। सेना पिछले एक दशक से पिनाका रॉकेट से लैस है। डीआरडीओ के अध्यक्ष डॉक्टर जी सतीश रेड्डी ने सफल परीक्षण के लिए वैज्ञानिकों की टीमों को बधाई दी है।

निजी अंतरिक्ष यात्रियों को लेकर स्पेसएक्स रॉकेट हुआ रवाना
Published / 2022-04-09 10:11:08
निजी अंतरिक्ष यात्रियों को लेकर स्पेसएक्स रॉकेट हुआ रवाना

एबीएन नॉलेज डेस्क। स्पेसएक्स रॉकेट शुक्रवार को अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (आईएसएस) की ओर रवाना हो गया। यह करीब 20 घंटे की उड़ान पूरी कर शनिवार को अंतरिक्ष स्टेशन पर पहुंच जाएगा। इस यात्रा में सभी निजी अंतरिक्ष यात्री हैं। इस मिशन को नासा का सहयोग मिला है। स्पेसएक्स अब तक रॉकेट्स की मदद से सैटेलाइट्स को अंतरिक्ष में भेजती थी। पहली बार अंतरिक्ष यात्रियों को भेज कर उसने इतिहास रच दिया है। एग्जिऑन स्पेस-1 मिशन को अमेरिका के फ्लोरिडा के कैनेडी स्पेस सेंटर से सुबह 11:17 बजे लॉन्च किया गया। इसे कॉमर्शियल स्पेस ट्रैवल की शुरुआत बताया गया है। इस घटना के वेबकास्ट के अनुसार स्पेसएक्स लॉन्च वाहन 25 मंजिला लंबा है जिसको लाइव वीडियो में दिखाया गया। इसमें दो चरण वाला फाल्कन 9 रॉकेट भी शामिल है, इसके ऊपर क्रू ड्रैगन कैप्सूल हैं। क्रू कम्पार्टमेंट के अंदर लगे कैमरों ने रॉकेट के अंतरिक्ष की ओर बढ़ने से कुछ क्षण पहले केबिन में चारों यात्रियों के फुटेज को दिखाया। वे फ्लाइट सूट में आराम से बैठे दिखाई दिए। यात्रियों को स्पेस स्टेशन लेकर जा रहा मिशन एग्जिऑम, स्पेसएक्स और नासा के बीच पार्टनरशिप में भेजा गया है। अब तक अंतरिक्ष यात्रियों को भेजने के लिए अलग-अलग देश की सरकारें काम करती रही हैं। प्राइवेट कंपनियों को ऐसे मिशन्स का हिस्सा नहीं बनाया गया। अब स्पेसएक्स और एग्जिऑम के साथ नासा की पार्टनरशिप कॉमर्शियल स्पेस मिशन्स की शुरुआत कर दी है। यदि सबकुछ योजना के अनुसार होता है तो नासा के सेवानिवृत्त अंतरिक्ष यात्री माइकल लोपेज-एलेग्रिया के नेतृत्व में ये चारों शनिवार को अंतरिक्ष स्टेशन पर पहुंचेंगे। स्पेसएक्स ड्रैगन के क्रू में माइकल के अलावा अमेरिकी टेक बिजनेसमैन लैरी कॉनर, कनाडा के बिजनेसमैन मार्क पेथी और इजराइल के आइटन स्टिब्ब भी शामिल हैं। इन सभी को अंतरिक्ष यात्रा से जुड़ी ट्रेनिंग दी गई है और इन्हें ले जाने वाले फाल्कन 9 रॉकेट को भी पहले टेस्ट किया गया था। अंतरराष्ट्रीय स्पेस स्टेशन (ISS) को अमेरिका और रूस समेत कई देश मिलकर संचालित करते हैं। यह अंतरिक्ष में बनी एक प्रयोगशाला है, जहां धरती से जाने वाले एस्ट्रोनॉट्स रहते हैं और कई तरह के प्रयोग करते हैं।

नेटवर्क होने के बावजूद कॉल नहीं कर पा रहे जियो यूजर्स
Published / 2022-04-07 17:18:13
नेटवर्क होने के बावजूद कॉल नहीं कर पा रहे जियो यूजर्स

एबीएन सेंट्रल डेस्क। देश के कुछ हिस्सों में रिलायंस जियो का नेटवर्क डाउन होता दिख रहा है। उपयोगकर्ताओं ने अपनी शिकायतों की रिपोर्ट करने के लिए माइक्रोब्लॉगिंग साइट ट्विटर और डाउनडेक्टर का सहारा लिया है। ज्यादातर यूजर्स का कहना है कि नेटवर्क होने के बावजूद वे कॉल नहीं कर पा रहे हैं। कंपनी ने अभी तक इस पर कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया है। आउटेज ट्रैकिंग वेबसाइट डाउनडेक्टर का कहना है कि जियो का नेटवर्क रात 8:06 बजे से बंद है। वेबसाइट के अनुसार, लगभग 66 प्रतिशत उपयोगकर्ता सिग्नल प्राप्त करने में असमर्थ थे। नेटवर्क की समस्या केवल मोबाइल उपयोगकर्ताओं के लिए सामने आई है। कंपनी की ब्रॉडबैंड सेवा अप्रभावित रही। कई उपयोगकर्ताओं ने ट्विटर पर उन मुद्दों के बारे में पोस्ट किया जिसका वे सामना कर रहे थे। एक यूजर ने कहा कि पूरा नेटवर्क मिलने के बावजूद वह कॉल नहीं कर पा रहा था।

आज या कल तक धरती पर आ सकता है सौर तूफान
Published / 2022-04-06 17:25:24
आज या कल तक धरती पर आ सकता है सौर तूफान

एबीएन नॉलेज डेस्क। केतिक तस्वीर धरती के स्पलैश जोन वैक्यूम आॅप स्पेस में सोलर साइकिल के तेज होने के साथ सूर्य तेजी से प्लाज्मा को बाहर निकाल रहा है। नेशनल ओशनिक एंड एटमॉस्फेरिक एडमिनिस्ट्रेशन के तहत आने वाले द स्पेस वेदर प्रेडिक्शन सेंटर ने बुधवार और गुरुवार को सौर विकिरण तूफान की भविष्यवाणी की है क्योंकि सूर्य रविवार को सतह पर खुलने वाली दर्रे से प्लाज्मा के फिलामेंट्स को बाहर निकाल रहा है। अमेरिका स्थित अंतरिक्ष पर्यवेक्षक ने सूर्य पर S22H30 के पास केंद्रित फिलामेंट विस्फोट से कोरोनल मास इजेक्शन के प्रत्याशित आगमन के जवाब में एक छोटे भू-चुंबकीय तूफान के लिए अलर्ट जारी किया। एजेंसी ने चेतावनी दी कि पृथ्वी पर सौर विकिरण तूफान आने की संभावना है जिसमें प्रोटॉन का स्तर 1 (माइनर) लेवल से अधिक है। कल तक सौर तूफान के बढ़ने की संभावना : भू-चुंबकीय तूफान के 7 अप्रैल तक बढ़ने की संभावना है, जिससे पृथ्वी की निचली कक्षा में सेटेलाइट्स पर मामूली प्रभाव के साथ-साथ बिजली ग्रिड में उतार-चढ़ाव और उच्च ऊंचाई पर आॅरोरस (उत्तरी रोशनी और दक्षिणी रोशनी) हो सकता है। भू-चुंबकीय तूफान से छोटे रेडियो ब्लैकआउट भी हो सकते हैं। -चुंबकीय तूफान पृथ्वी के मैग्नेटोस्फीयर की एक बड़ी गड़बड़ी है जो तब होती है जब सौर हवा से पृथ्वी के आसपास के अंतरिक्ष वातावरण में ऊर्जा का एक बहुत ही कुशल आदान-प्रदान होता है। विस्फोट का नवीनतम स्रोत ह्यआग की घाटी : विस्फोट का नवीनतम स्रोत एक स्थान है जिसे आग की घाटी कहा जाता है, जो कि स्पेस वेदर के अनुसार, चुंबकत्व का एक काला रेशा है जो सूर्य के वातावरण में खुल गया है। घाटी की दीवारें कम से कम 20,000 किमी ऊंची और 10 गुना लंबी हैं। कई विशेषज्ञों की ओर से यह अनुमान लगाया जा रहा है कि चुंबकीय फिलामेंट्स के टुकड़े विस्फोट स्थल से पृथ्वी की दिशा में सीएमई के रूप में निकल सकते हैं।

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