एबीएन सेंट्रल डेस्क। भारत ने आज बड़े किल एल्टीट्यूड ब्रैकेट वाले दूसरे चरण की बैलिस्टिक मिसाइल डिफेंस (बीएमडी) इंटरसेप्टर एडी-1 मिसाइल का पहला परीक्षण किया। ये ट्रायल ओडिशा के तट पर एपीजे अब्दुल कलाम द्वीप से किया गया। इस मिसाइल का ट्रायल सभी बीएमडी हथियार प्रणाली तत्वों की भागीदारी के साथ किया गया। न्यूज एजेंसी एएनआई ने इस परीक्षण का वीडियो भी जारी किया है। एडी 1 लंबी दूरी की इंटरसेप्ट मिसाइल है और टू स्टेज वाली ठोस मोटर से चलती है। ये मिसाइल टारगेट पर सही निशाना लगाने के लिए स्वदेशी रूप से विकसिच एंडवांस कंट्रोल सिस्टम, नेविगेशन और गाइडेंस एल्गोरिदम से लैस है। इससे पहले अक्टूबर में अग्नि प्राइम न्यू जेनरेशन बैलिस्टिक मिसाइल का सफल परीक्षण किया गया था। अधिकारी ने इसकी जानकारी देते हुए बताया था कि नई पीढ़ी की परमाणु सक्षम बैलिस्टिक मिसाइल अग्नि प्राइम का 21 अक्टूबर को ओडिशा के तट से सफलतापूर्वक परीक्षण किया गया। मिसाइल परीक्षण सुबह करीब 9.45 पर किया गया। रक्षा अधिकारी ने बताया कि फ्लाइट के ट्रायल उड़ान के दौरान मिसाइल ने अधिकतम सीमा की यात्रा की और सभी परीक्षण उद्देश्यों को अच्छे से पूरा किया।
एबीएन नॉलेज डेस्क। पृथ्वी पर जो भी प्रकृतिक चीजें हैं, बेहद खूबसूरत हैं। जहां नदियों के बहते पानी की आवाज हमारे कानों को अच्छी लगती है। घास के मैदान में फैली शांति हमें सुकून देती है, वहीं पृथ्वी के अंदर से आने वाली आवाजें शायद इतनी खूबसूरत नहीं हैं। यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी (ईएसए) ने हाल ही में 5 मिनट का बेहद डरावना ऑडियो जारी किया है। ये पृथ्वी के चुंबकीय क्षेत्र की आवाज है, जिसे सुनकर आप डर सकते हैं। आप कल्पना भी नहीं कर सकते कि पृथ्वी का चुंबकीय क्षेत्र इस तरह की आवाज़ निकाल सकता है। ये 5 मिनट का ऑडियो है जिसमें भयानक क्रेक और कर्कश आवाजें हैं। इतना ही नहीं, इसमें गहरी सांस लेने जैसी आवाज़ें भी शामिल हैं। इन्हें सुनकर शायद आपको अपने कानों पर यकीन न हो। नीचे दिये गये वीडियो में आप पृथ्वी के अंदर से आने वाली आवाजों को सुन सकते हैं।
एबीएन सोशल डेस्क। सूर्य ग्रहण के बाद अब साल का आखिरी चंद्र ग्रहण लगने वाला है। ये चंद्र ग्रहण मेष राशि में लगेगा। यह चंद्र ग्रहण 08 नवंबर को लगेगा और भारत में दृश्यमान होगा। ज्योतिष शास्त्र के नजरिए से इस चंद्र ग्रहण को बेहद खास माना जा रहा है। ज्योतिषविदों का कहना है कि साल के आखिरी चंद्र ग्रहण के मौके पर ग्रहों की विशेष स्थिति बन रही है। आइए जानते हैं कि आगामी चंद्र ग्रहण पर ग्रहों की चाल कैसी रहने वाली है। जानें ग्रहण पर ग्रहों की चाल : चंद्र ग्रहण के दिन ग्रहों के सेनापति मंगल, शनि, सूर्य और राहु आमने-सामने होंगे। ऐसे में भारत वर्ष की कुंडली में तुला राशि पर सूर्य, चंद्रमा, बुध और शुक्र की युति बन रही है। इसके अलावा, शनि कुंभ राशि में पंचम और मिथुन राशि में नवम भाव पर मंगल की युति विनाशकारी योग बना रही है। चंद्र ग्रहण का ऐसा संयोग बहुत ही अशुभ माना जा रहा है। वहीं, शनि और मंगल के आमने-सामने होने की वजह से षडाष्टक योग, नीचराज भंग और प्रीति योग भी बन रहा है। ऐसे में चंद्र ग्रहण के दौरान लोगों को बहुत संभलकर रहने की सलाह दी जा रही है। चंद्र ग्रहण के समय मंगल और बृहस्पति जैसे प्रमुख ग्रह वक्री अवस्था में रहेंगे। ज्योतिष शास्त्र में किसी ग्रह के वक्री होने का मतलब उसकी उल्टी चाल से होता है। किन राशियों पर ज्यादा प्रभाव : 08 नवंबर को लगने वाले चंद्र ग्रहण का पांच राशियों पर सबसे ज्यादा असर होगा। इसलिए इन राशि के जातकों को बहुत संभलकर रहने की सलाह दी जा रही है। चंद्र ग्रहण के दिन वृष, मिथुन, कन्या, तुला और वृश्चिक राशि के जातकों को बहुत संभलकर रहना होगा। इन जातकों को सेहत, आर्थिक, करियर और कारोबार के मोर्चे पर नुकसान झेलना पड़ सकता है। कितने बजे लगेगा ग्रहण : भारतीय समयानुसार, साल का आखिरी चंद्र ग्रहण 8 नवंबर 2022 को शाम 5 बजकर 32 मिनट से शुरू होगा और शाम 6 बजकर 18 मिनट पर समाप्त हो जायेगा। ऐसे में चंद्र ग्रहण का सूतक काल सुबह 9 बजकर 21 मिनट से शुरू होगा और शाम 6 बजकर 18 मिनट पर समाप्त हो जायेगा। कहां-कहां दिखेगा ग्रहण : साल का आखिरी चंद्र ग्रहण भारत समेत उत्तरी-पूर्वी यूरोप, एशिया, आॅस्ट्रेलिया, प्रशांत महासागर, हिंद महासागर, उत्तर अमेरिका और दक्षिण अमेरिका के अधिकांश हिस्सों से दर्शनीय होगा। दक्षिणी-पश्चिमी यूरोप और अफ्रीका महाद्वीप से कोई ग्रहण दिखाई नहीं देगा।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। इंस्टाग्राम की अब सर्विस बहाल हो गई है। दुनिया के कई हिस्सों में इंस्टाग्राम का सर्वर डाउन था। लोग मैसेज भेजने, रील देखने और फॉलोअर्स घटने की शिकायत कर रहे थे। इंस्टाग्राम ने मंगलवार तड़के कहा कि उसने एक सॉफ्टवेयर बग को ठीक कर दिया है, जिसने हजारों यूजर्स को फोटो-शेयरिंग प्लेटफॉर्म तक लगभग आठ घंटे तक पहुंचने से रोका था। इंस्टाग्राम लगभग 8 घंटों तक डाउन था। हजारों यूजर्स ने शिकयात की थी कि उनके अकाउंट के फॉलोअर्स अपने आप कम हो रहे थे। मेटा प्लेटफॉर्म्स इंक के स्वामित्व वाले इंस्टाग्राम ने बग को ठीक करने के बाद ट्वीट किया। इंस्टा ने लिखा, हमने अब इस बग को सही कर लिया है। हम जानते हैं कि इस बग की वजह से दुनिया भर के कई हिस्सों में लोगों को अपना अकाउंट चलाने में समस्या हो रही थी। कुछ यूजर्स को अस्थायी बदलाव का भी सामना करना पड़ा। इंस्टाग्राम के प्रवक्ता ने अकाउंट के अपने आप सस्पेंड होने पर कोई कमेंट नहीं किया। कई इंस्टाग्राम यूजर्स ने ट्वीट किया था कि उनके सस्पेंड अकाउंट को रिकवर करने के लिए उनसे ईमेल आईडी और फोन नंबर मांगे गये थे। ट्विटर पर हैशटैग माई इंस्टाग्राम ट्रेंड कर रहा है। आउटेज-ट्रैकिंग वेबसाइट डाउनडेटेक्टर पर 10:09 ईटी पर 7,500 से अधिक लोगों ने इंस्टा सर्वर डाउन होने की शिकायत की थी।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। अमेरिकी अंतरिक्ष एंजेसी नासा ने एक सूरज की मुस्कराती हुई तस्वीर जारी की है। इसे अंतरिक्ष एजेंसी की एक सैटेलाइट ने इसी सप्ताह कैप्चर की है। इस तस्वीर में सूरज पर इस तरह का पैटर्न नजर आ रहा है जिसे देखकर हर को हैरान है। ऐसा लग रहा है मानो सूरज मुस्करा रहा है। अंतरिक्ष एजेंसी ने तस्वीर को साझा करते हुए स्माइलिंग सन यानी मुस्कराया हुआ सूरज कहा। इसमें आगे कहा गया है कि आज नासा के सोलर डायनेमिक्स ऑब्जर्वेटरी ने सूरज को मुस्कराते हुए देखा। अल्ट्रावॉयलेट लाइट में देखे जाने पर सूरज पर दिख रहे इन काले धब्बों को कोरोनल होल कहा जाता है। यह वे इलाके होते हैं, जहां से तैज हवाएं चलकर अंतरिक्ष में जाती हैं। नासा के सोलर डायनेमिक्स ऑब्जर्वेटरी मिशन 11 फरवरी 2010 को लॉन्च किया गया था। इसका मुख्य उद्देश्य यह परीक्षण करना होता है कि सौर गतिविधियां कैसे हो रही हैं और यह अंतरिक्ष में मौसम को किस तरह प्रभावित कर रहा है। इस मिशन का स्पेसक्राफ्ट सूरज की आंतरिक संरचना, वायुमंडल, चुंबकीय क्षेत्र और उर्जा उत्पादन को मापता है। तस्वीर को लेकर लोगों की तरह-तरह की प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। कई अमेरिकी यूजर्स इसकी तुलना हेलोवीन पंपकिन से कर रहे हैं। वहीं भारत की बात करें तो सूरज का धार्मिक आस्था और विश्वासों में महत्व हैं, तो इस तस्वीर को भारतीय यूजर्स भी खूब पसंद कर रहे हैं। हालांकि, वैज्ञानिकों ने इस मुस्कराहट को लेकर चेतावनी दी है कि सूरज के कोरेनल होल जिस तरह दिख रहे हैं, इसका मतलब है सूरज से उठा तूफान पृथ्वी से टकरा सकते हैं। इसको लेकर स्पेसवेदर ने कहा, ये हंसता हुआ सूरज पृथ्वी की ओर सौर हवा की एक तिहाई धारा उगल रहा है। सूरज के सतह से द्रव्यमान और उर्जा के अलग-अलग तरह के उठने वाले विस्फोटों को सौर तूफान कहते हैं। ये पृथ्वी के चुंबकीय क्षेत्र को प्रभावित करती हैं, जिसके परिणामस्वरूप इन तूफानों से उत्तरी और दक्षिणी गोलार्ध में ध्रुवीय रोशनी ज्यादा दिखाई देने लगती है।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। तमिलनाडु में महेंद्रगिरि में इंडियन स्पेस रिसर्च ऑर्गेनाइजेशन के प्रोपलशन कॉम्प्लेक्स (आईपीआरसी) के हाई एल्टिट्यूड टेस्ट केंद्र में सीई-20 इंजन का उड़ान संबंधी परीक्षण किया गया। यह इसरो के सबसे भारी रॉकेट का इंजन है। इसरो अब अपने एलवीएम -3 के अगले फेज के कमर्शियल मिशन से बस एक कदम दूर है। इसरो ने बताया कि यह इंजन एलवीएम -3 मिशन के लिए निर्धारित किया गया है, जिसके तहत वनवेब इंडिया-1 के अगले 36 उपग्रह को प्रक्षेपित किया जायेगा। सूत्रों ने बताया कि लंदन स्थित सैटेलाइट कम्युनिकेशन कंपनी वनवेब के इन सैटेलाइट्स को इसरो की बिजनेस ब्रांच न्यू स्पेस इंडिया लिमिटिड (एनएसआईएल) अगले साल की शुरुआत में लॉन्च कर सकती है। एनएसआईएल द्वारा श्रीहरिकोटा के सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र (एसडीएससी-एसएचएआर) से 23 अक्टूबर को वनवेब के पहले 36 सैटेलाइट को लॉन्च किया गया था। इसके कुछ दिनों के बाद ही शुक्रवार को सीई-20 इंजन का उड़ान संबंधी परीक्षण किया गया। एलवीएम -3 इसरो का सबसे भारी रॉकेट है और यह चार टन कैटेगरी की सैटेलाइट को भूसमकालिक कक्षा में भेजने में सक्षम है। स्पेस एजेंसी ने एक फोटो के साथ ट्वीट में कहा, सीई-20 इंजन का उड़ान परीक्षण महेंद्रगिरि में आईपीआरसी की हाई एल्टिट्यूड टेस्ट फैसिलिटी में किया गया। इसने आगे कहा, इंजन को लॉन्च व्हीकल मार्क -3 (एलवीएम -3) मिशन के लिए सौंपा गया है, जिसे अगले 36 सैटेलाइट को लॉन्च करने के लिए तैयार किया गया है। इसरो के सबसे भारी रॉकेट एलवीएम3-एम2 ने 23 अक्टूबर को अपने पहले कमर्शियल मिशन के तहत ब्रिटेन की कंपनी के लिए 36 ब्रॉडबैंड कम्युनिकेशन सैटेलाइट को सफलतापूर्वक निर्धारित कक्षाओं में स्थापित कर दिया था। इसरो ने इसे ऐतिहासिक मिशन बताया था और एलवीएम को 8000 किलोग्राम तक के उपग्रहों को ले जाने की क्षमता वाले सबसे भारी उपग्रहों में से एक करार दिया था। ब्रिटेन की कंपनी वनवेब लिमिटेड इस मिशन के लिए इसरो की कमर्शियल ब्रांच एनएसआईएल के साथ करार किया था। वनवेब लिमिटेड अंतरिक्ष के क्षेत्र में काम करने वाला ग्लोबल कम्युनिकेशन नेटवर्क है, जो सरकारों और उद्योगों को इंटरनेट कनेक्टिविटी उपलब्ध कराता है। भारती इंटरप्राइजेज वनवेब का एक प्रमुख निवेशक है। इससे पहले, सात अगस्त को एजेंसी का पहला छोटा उपग्रह प्रक्षेपण यान (एसएसएलवी) टर्मिनल चरण में डेटा लॉस का शिकार हो गया था और उससे संपर्क टूट गया था।
एबीएन नॉलेज डेस्क। सूरजमुखी के बारे में सबसे ज्यादा चर्चा यही रही है कि यह हमेशा सूरज की दिशा के मुताबिक घूमता है। एक दिलचस्प बात यह भी है कि वैज्ञानिक इसे फूल नहीं मानते। जानिये सूरजमुखी को सिंगल फूल क्यों नहीं माना जाता... विज्ञान के नजरिये से देखें तो सूरजमुखी का फूल हमेशा से ही काफी दिलचस्प रहा है। सबसे ज्यादा चर्चा यही रही है कि यह फूल हमेशा सूरज की दिशा के मुताबिक घूमता है। यानी सूरज के मुताबिक इसकी दिशा बदलती रहती है, लेकिन एक दिलचस्प बात यह भी है कि वैज्ञानिक इसे फूल नहीं मानते। विज्ञान में जो फूल की परिभाषा तय की गई है, उन मानकों पर यह खरा नहीं उतरता। जानिये सूरजमुखी को सिंगल फूल क्यों नहीं माना जाता वैज्ञानिकों का कहना है, सूरजमुखी एक फूल नहीं है, यह फूलों का गुच्छा है। इसलिए इसकी गिनती फूल में नहीं की जाती। इसके पीछे कई कारण गिनाये गये हैं। उनका कहना है, सूरजमुखी की एक पंखुड़ी और जिस भूरे हिस्से से वो जुड़ी होती है, उसे मिलाकर एक फूल माना जाता है। लेकिन इस फूल में दर्जनों पंखुड़ियां होती हैं और बीच वाले जिसे भूरे हिस्से से जुड़ी होती हैं वो सैकड़ों भागों में बंटा होता है। इसलिए सूरजमुखी को फूलों का गुच्छा कहा जाता है। इसकी और भी कई वजह गिनाई गई हैं। अब उन्हें भी समझ लेते हैं. आमतौर पर एक फूल से एक बीज या एक फल तैयार होता है, लेकिन सूरजमुखी के मामले में ऐसा नहीं है। इसके बीच वाले हिस्से को डिस्क कहते हैं, जिसमें बीज विकसित होते हैं। सूरजमुखी के एक फूल में 1 से 2 हजार तक बीज विकसित होते हैं। इससे नए पौधे तैयार होते हैं। इसके अलावा इसे चिड़ियों और इंसानों को खिलाने के काम में भी लिया जाता है। इसमें कई पोषक तत्व पाए जाते हैं। आमतौर पर लोग मानते हैं कि सूरजमुखी का रंग पीला ही होता है, जबकि ऐसा नहीं है। दुनियाभर में इसकी 70 प्रजातियां हैं, जो अलग-अलग आकार की होती हैं। कुछ प्रजातियों की लम्बाई कम होती हैं तो कुछ की ज्यादा। ये अलग-अलग रंग के होते हैं। पीले रंग के अलावा लाल, नारंगी और बैंगनी रंग के भी सूरजमुखी होते हैं।
देशभर में डाउन हुआ WhatsApp का सर्वर, यूजर्स को मैसेज भेजने में आ रही दिक्कत एबीएन नॉलेज डेस्क। पॉपुलर मैसेजिंग प्लेटफॉर्म व्हाट्सएप्प देशभर में डाउन हो गया था। भारत में कई लोग इसको उपयोग नहीं कर पा रहेथे। लोगों को मैसेज भेजने और पाने में परेशानी हो रही थी। करीब 30 मिनट तक इसका सर्वर डाउन रहा। व्हाट्सएप डाउन होने की शिकायत लोग ट्विटर पर भी करते दिखे। शुरुआती जानकारी के अनुसार सर्वर डाउन हो जाने से यूजर्स इनका इस्तेमाल नहीं कर पाये। यूजर्स के मैसेज ठीक तरह से डिलीवर नहीं हो पाये, तो वे दूसरों से पूछने लगे। इसके बाद पता चला कि कोई भी इनका उपयोग नहीं कर पा रहा है। व्हाट्सएप के उपभोक्ता होने को लेकर डाउन डिटेक्टर ने भी रिपोर्ट किया है ट्विटर पर डाउन डिटेक्टर ने लिखा है कि व्हाट्सएप को लेकर यूजर्स 3:17 AM EDT से कह रहे हैं कि ये बंद हो गया है। भारत में करीब आधे घंटे से लोग वॉट्सऐप पर मैसेज नहीं सेंड कर पा रहे हैं। इसको लेकर अभी ऑफिशियल जानकारी सामने नहीं आई है। यूजर्स के मुताबिक सर्वर क्रैश हो जाने की वजह से ऐसा हुआ है। लेकिन, व्हाट्सएप की ओर से जब तक ऑफिशियल बयान नहीं आ जाता है तब तक कुछ कहा नहीं जा सकता है।
एबीएन नॉलेज डेस्क। भारत ने आज अग्नि प्राइम न्यू जेनरेशन बैलिस्टिक मिसाइल का सफल परीक्षण किया है। इस बात की जानकारी रक्षा अधिकारी ने दी है। अधिकारी ने बताया कि नई पीढ़ी की परमाणु सक्षम बैलिस्टिक मिसाइल अग्नि प्राइम का शुक्रवार को ओडिशा के तट से सफलतापूर्वक परीक्षण किया गया। मिसाइल परीक्षण सुबह करीब 9.45 पर किया गया। रक्षा अधिकारी ने बताया कि फ्लाइट के ट्रायल उड़ान के दौरान मिसाइल ने अधिकतम सीमा की यात्रा की और सभी परीक्षण उद्देश्यों को अच्छे से पूरा किया। अग्नि प्राइम बैलिस्टिक मिसाइल के लगातार तीसरे सफल उड़ान परीक्षण के बाद मिसाइल सिस्टम की सटीकता और विश्वसनीयता स्थापित की गई है। अधिकारी ने बताया कि पूरे ट्राजेक्टोरी को कवर करने के लिए टर्मिनल प्वाइंट पर दो डाउन रेंज शिप सहित अलग-अलग स्थानों पर तैनात रडार, टेलीमेट्री और इलेक्ट्रो आॅप्टिकल ट्रैकिंग सिस्टम जैसे कई रेंज इंस्ट्रूमेंटेशन द्वारा हासिल डेटा का इस्तेमाल करके सिस्टम की परफॉर्मेंस को वैलिडेट किया गया है। इससे पहले रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (डीआरडीओ) ने 18 दिसंबर 2021 को ओडिशा के तट पर डॉ एपीजे अब्दुल कलाम द्वीप से नई पीढ़ी की परमाणु सक्षम बैलिस्टिक मिसाइल अग्नि पी का सफलतापूर्वक परीक्षण किया था। अलग-अलग टेलीमेट्री, रडार, इलेक्ट्रो-आॅप्टिकल स्टेशन और पूर्वी तट के साथ स्थित डाउन रेंज जहाजों ने मिसाइल ट्रेजेक्टरी और मानकों को ट्रैक किया था और उनकी निगरानी की थी। इस मिसाइल ने उच्च स्तर की सटीकता के साथ सभी मिशन उद्देश्यों को पूरा करते हुए अपने लक्ष्य को हासिल किया था। इस दूसरे उड़ान परीक्षण ने सिस्टम में इंटीग्रेट सभी एडवांस टेक्नोलॉजी के भरोसेमंद प्रदर्शन को साबित किया था। अग्नि पी डुअल रिडनडेंट नेविगेशन और मार्गदर्शन सिस्टम के साथ एक दो चरणों वाली केनिस्ट्राइज्ड सॉलिड प्रोपेलेंट बैलिस्टिक मिसाइल है। इसी साल 14 अक्टूबर को भारत की परमाणु क्षमता से लैस पनडुब्बी आईएनएस अरिहंत ने बंगाल की खाड़ी में बैलिस्टिक मिसाइल का सफल प्रक्षेपण किया था। रक्षा मंत्रालय ने बताया था कि हथियार प्रणाली ने सभी परिचालन और तकनीकी मानक को पूरा किया था। यह प्रक्षेपण भारत की सामरिक क्षमताओं को और बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि थी।
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