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जानें क्या है सनातन संस्कृति में घण्टी के रहस्य का वैज्ञानिक पक्ष
Published / 2024-01-14 15:10:07
जानें क्या है सनातन संस्कृति में घण्टी के रहस्य का वैज्ञानिक पक्ष

राजकुमारी पाण्डेय मंदिरों में घंटिया क्यों बजायी जाती है, जानें धार्मिक और वैज्ञानिक कारणएबीएन सोशल डेस्क। सनातन धर्म में प्राचीन काल से पूजा-पाठ को महत्व दिया जाता है। जिसके लिए लोग मंदिरों में जाते हैं। सभी मंदिरों में गर्भ गृह के सामने आपको घंटिया दिखाई देंगी। आमतौर पर लोग मंदिर के अंदर जाते ही पहले घंटी बजाते हैं। इतना ही नहीं हिंदू धर्म में मंदिरों के बाहर घंटी बांधने की परंपरा सदियों से चली आ रही है। लेकिन क्या आपको पता है कि आखिर क्यों मंदिर में जाने से पहले घंटी बजायी जाती है?दरअसल, सुबह और शाम के समय मंदिरों में पूजा और आरती होती है।जब आरती होती है तो मंदिर परिसर में विशेष लय और धुन में छोटी-छोटी घंटियां बजाई जाती हैं। धार्मिक मान्यता के मुताबिक जब मंदिरों में घंटी बजायी जाती हैं तो मंदिर में स्थापित भगवान की प्रतिमा में चेतना जागृत होने लगती है। उस दौरान पूजा-पाठ करना काफी फलदाई माना जाता है। इतना ही नहीं पुराणों में भी बताया गया है कि मंदिर में घंटी बजाने से मनुष्य के कई जन्मों का पाप खत्म हो जाता है।धार्मिक मान्यता के साथ-साथ मंदिर में घंटी बजाने के पीछे वैज्ञानिक वजह भी है।घंटी बजाने का वैज्ञानिक कारणवैज्ञानिक मान्यता के मुताबिक जब किसी मंदिर में घंटी बजती है तो वातावरण में कंपन होता और यह वायुमंडल की वजह से काफी दूर तक जाता है। उस दौरान जहां तक घंटी की आवाज सुनाई देती है वहां आसपास जीवाणु विषाणु सब खत्म हो जाते हैं। जिससे मंदिर और उसके आसपास का वातावरण भी शुद्ध होता है। इतना ही नहीं धार्मिक मान्यता के मुताबिक मंदिर में घंटी बजाने से नकारात्मक शक्तियां दूर होती हैं। इससे लोगों के सुख और समृद्धि के द्वार भी खुलते है।घंटी बजाने की धार्मिक मान्यताअयोध्या के प्रसिद्ध कथा वाचक और संत समिति के महामंत्री पवन दास शास्त्री बताते हैं कि घंटी बजाने से जो घंटी का कंपन है वह शरीर के अंदर चैतन्यता को जागृत कर देता है। दूसरी बात यह है कि हम जिस देवता का दर्शन करने जा रहे हैं उस देवता में भी चैतन्यता का संचार हो जाये। इतना ही नहीं पूरे वातावरण में चैतन्यता का संचार हो इसलिए मठ मंदिरों में घंटी बजाने का विधान है। घंटी हमेशा फूल की ही बनी होती है। जिसको कांसा कहा जाता है उसके कंपन से सबको चैतन्यता मिलती है।

अमेरिका और खाड़ी देशों में सबसे ज्यादा लोग सर्च कर रहे अयोध्या राम मंदिर
Published / 2024-01-13 21:17:33
अमेरिका और खाड़ी देशों में सबसे ज्यादा लोग सर्च कर रहे अयोध्या राम मंदिर

अयोध्या राम मंदिर ने धार्मिक पर्यटन के लिए खींचा पूरी दुनिया का ध्यानएबीएन सोशल डेस्क। अयोध्या में बन रहे भव्य राम मंदिर के उद्घाटन की तैयारियां जोरों से चल रही हैं और इसकी गूंज विदेशों तक पहुंच गयी है। देशवासियों की नहीं बल्कि पूरी दुनिया की नजर 22 जनवरी को होने वाले वाले राम मंदिर के उद्घाटन समारोह पर टिकी हैं। यही वजह है कि #अयोध्या राम मंदिर ट्रैंड कर रहा  है। राम मंदिर ने धार्मिक पर्यट को नया आयाम दे दिया है। धार्मिक स्थलों के बारे में जानने के इच्छुक दुनिया भर के लोगों में राम मंदिर को लेकर अलग के्रज है और अयोध्या राम मंदिर को सर्च करने वालों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। अयोध्या में राम मंदिर निर्माण के फैसले के बाद से तो यहां के बारे में जानने वालों की संख्या आसमान छू गयी। 30 दिसंबर को राम मंदिर किया गया सबसे अधिक सर्च राम मंदिर के उद्घाटन की तिथि के आ जाने के अयोध्या के बारे में सर्च करने वालों की संख्या 1806 फीसदी बढ़ी थी। अयोध्या के बारे में सबसे ज्यादा सर्च 30 दिसंबर को की गयी। इस दिन अयोध्या एयरपोर्ट का उद्घाटन हुआ था और साथ ही अयोध्या के पुनर्निर्मित रेलवे स्टेशन से ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2 नयी नवेली अमृत भारत एक्सप्रेस को हरी झंडी दिखायी थी। आनलाइन ट्रेवल प्लेटफॉर्म मेक माय ट्रिप के अनुसार, पिछले दो साल में धार्मिक जगहों के बारे में सर्च करने वालों की संख्या लगभग 97 फीसदी बढ़ गयी है। साल 2021 से 2023 के बीच लोग यात्राओं के लिए धार्मिक स्थलों को प्राथमिकता दे रहे हैं। इनमें भी आकर्षण का केंद्र अयोध्या और वहां बन रहा राम मंदिर है।अमेरिका और खाड़ी देशों से सर्चिंग बढ़ी मेक माय ट्रिप के आंकड़ों के अनुसार, फिलहाल अयोध्या के बारे में लोग सबसे ज्यादा सर्च कर रहे हैं। यह आंकड़ा 585 फीसदी तक बढ़ चुका है।  कंपनी के अनुसार, अमेरिका से 22.5 फीसदी और खाड़ी देशों से 22.2 फीसदी सर्च इस बारे में की गयी। इसके अलावा कनाडा, नेपाल और आस्ट्रेलिया के लोग भी अयोध्या और राम मंदिर के बारे में जानना चाह रहे हैं। कंपनी के आनलाइन आंकड़ों  के मुताबिक लोगों में धार्मिक यात्राएं करने की रुचि तेजी से बढ़ी है। पिछले 2 सालों में लोगों की प्राथमिकताएं तेजी से बदली हैं। अयोध्या में राम मंदिर के निर्माण से यह सोच और ज्यादा मजबूत होती जा रही है।

मंजिल लैग्रेंज प्वाइंट-1 पर पहुंचा आदित्य एल-1
Published / 2024-01-06 20:45:41
मंजिल लैग्रेंज प्वाइंट-1 पर पहुंचा आदित्य एल-1

इसरो की एक और कामयाबी : चंद्रयान-3 के बाद भारत ने रचा एक और इतिहास एबीएन नॉलेज डेस्क। चांद पर उतरने के बाद भारत ने एक और इतिहास रच दिया है। सूर्य मिशन पर निकले भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के आदित्य एल-1 ने अपनी मंजिल लैग्रेंज प्वाइंट-1 (एल1) पर पहुंच कर एक कीर्तिमान हासिल किया है। इसी के साथ आदित्य-एल 1 अंतिम कक्षा में भी स्थापित हो गया। यहां आदित्य दो वर्षों तक सूर्य का अध्ययन करेगा और महत्वपूर्ण आंकड़े जुटायेगा। भारत के इस पहले सूर्य अध्ययन अभियान को इसरो ने 2 सितंबर को लॉन्च किया था। पीएम मोदी ने किया ट्वीट इसरो की इस सफलता पर पीएम मोदी ने भी खुशी जाहिर की है। उन्होंने ट्वीट कर इसरो की सराहना करते हुए लिखा कि भारत ने एक और मील का पत्थर हासिल किया। भारत की पहली सौर वेधशाला आदित्य-एल 1 अपने गंतव्य तक पहुंच गयी। सबसे जटिल अंतरिक्ष मिशनों में से एक को साकार करने में हमारे वैज्ञानिकों के अथक समर्पण का प्रमाण है। यह असाधारण उपलब्धि सराहना योग्य है। हम मानवता के लाभ के लिए विज्ञान की नयी सीमाओं को आगे बढ़ाना जारी रखेंगे। उन्होंने आगे कहा कि वह इस असाधारण उपलब्धि की सराहना करने में देश के साथ शामिल हैं। क्या है एल-1 प्वाइंट एल-1 प्वाइंट के आसपास के क्षेत्र को हेलो आर्बिट के रूप में जाना जाता है, जो सूर्य-पृथ्वी प्रणाली के बीच मौजूद पांच स्थानों में से एक है, जहां दोनों पिंडों का गुरुत्वाकर्षण प्रभाव के बीच साम्यता है। मोटे तौर पर ये वे स्थान हैं, जहां दोनों पिंडों की गुरुत्व शक्ति एक दूसरे के प्रति संतुलन बनाती है। पृथ्वी और सूर्य के बीच इन पांच स्थानों पर स्थिरता मिलती है, जिससे यहां मौजूद वस्तु सूर्य या पृथ्वी के गुरुत्वाकर्षण में नहीं फंसती है। एल-1 बिंदु पृथ्वी से लगभग 15 लाख किलोमीटर दूर है। यह पृथ्वी और सूर्य के बीच की कुल दूरी का केवल 1 फीसदी है। दोनों पिंडों की कुल दूरी 14.96 करोड़ किलोमीटर है। इसरो के एक वैज्ञानिक के अनुसार हेलो आॅर्बिट सूर्य के चारों ओर पृथ्वी के घूमने के साथ-साथ घूमेगा। उत्सकुता से देख रही दुनिया इसरो के इस अभियान को पूरी दुनिया में उत्सुकता से देखा जा रहा है, क्योंकि इसके सात पेलोड सौर घटनाओं का व्यापक अध्ययन करेंगे और वैश्विक वैज्ञानिक समुदाय को डाटा मुहैया करायेंगे, जिससे सभी सूर्य के विकिरण, कणों और चुंबकीय क्षेत्रों का अध्ययन कर पाएंगे। अंतरिक्ष यान में एक कोरोनोग्राफ है, जो वैज्ञानिकों को सूर्य की सतह के बहुत करीब देखने और नासा व यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी के सौर और हेलिओस्फेरिक वेधशाला (एसओएचओ) मिशन के डाटा को पूरक डाटा मुहैया कराएगा। क्योंकि, आदित्य एल-1 अपनी स्थिति में स्थित एकमात्र वेधशाला है। 18 सितंबर से शुरू कर दिया काम शुक्रवार को आदित्य एल-1 को अंतरिक्ष में सफर करते हुए 126 दिन पूरे हो गये। अपनी यात्रा शुरू करने के 16 दिन बाद यानी 18 सितंबर से आदित्य ने वैज्ञानिक डाटा एकत्र करना और सूर्य की इमेजिंग शुरू कर दी थी। वैज्ञानिकों को अब तक एल-1 से सौर ज्वालाओं के हाई-एनर्जी एक्स-रे, फुल सोलर डिस्क इमेज मिल चुके हैं। पीएपीए और एएसपीईएक्स के सोलर विंड आयन स्पेक्ट्रोमीटर सहित चार उपकरण फिलहाल सक्रिय हैं और अच्छी तरह से काम कर रहे हैं। हेलो आर्बिट में पहुंचने के बाद सूईट पेलोड सबसे पहले सक्रिय होगा। सात पेलोड हैं तैनात आदित्य पर सात वैज्ञानिक पेलोड तैनात किए गए हैं। इनमें विजिबल एमिशन लाइन कोरोनोग्राफ (वीईएलसी), सोलर अल्ट्रावॉयलेट इमेजिंग टेलीस्कोप (सूइट), सोलर लो एनर्जी एक्स-रे स्पेक्ट्रोमीटर (सोलेक्सस), हाई-एनर्जी एल1 आॅर्बिटिंग एक्स-रे स्पेक्ट्रोमीटर (हेल1ओएस) शामिल हैं, जो सीधे तौर पर सूर्य को ट्रैक करें। वहीं, तीन इन-सीटू (मौके पर) मापने वाले उपकरण हैं, जिनमें आदित्य सोलर विंड पार्टिकल एक्सपेरिमेंट (एएसपीईएक्स), प्लाज्मा एनालाइजर पैकेज फॉर आदित्य (पीएपीए), और एडवांस थ्री डाइमेंशनल हाई रिजोल्यूशन डिजिटल मैग्नेटोमीटर (एटीएचआरडीएम) शामिल हैं।

Wow... यह महज 21 मिनट में अंतरिक्ष में 650 किमी ऊंचाई पर पहुंच जायेगा नया उपग्रह
Published / 2024-01-01 11:39:33
Wow... यह महज 21 मिनट में अंतरिक्ष में 650 किमी ऊंचाई पर पहुंच जायेगा नया उपग्रह

नये साल के पहले ही दिन लॉन्च हुआ भारत का एक और अंतरिक्ष मिशनएबीएन नॉलेज डेस्क। भारत ने साल की शुरुआत खगोल विज्ञान के सबसे बड़े रहस्यों में से एक ब्लैक होल के बारे में जानकारी जुटाने के लिए उपग्रह भेज कर की है। सुबह 9.10 बजे भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन के इस पहले एक्स-रे पोलरीमीटर उपग्रह यानी एक्सपोसैट को रॉकेट पोलर सैटेलाइट लॉन्च व्हीकल (पीएसएलवी) सी 58 के जरिए लॉन्च किया।यह महज 21 मिनट में अंतरिक्ष में 650 किमी ऊंचाई पर जायेगा। इस रॉकेट का यह 60वां मिशन होगा। इस मिशन में एक्सपोसैट के साथ साथ 10 अन्य उपग्रह भी पृथ्वी की निचली कक्षा में स्थापित होंगे।इसरो ने बताया कि इस उपग्रह का लक्ष्य सुदूर अंतरिक्ष से आने वाली गहन एक्स-रे का पोलराइजेशन यानी ध्रुवीकरण पता लगाना है। यह किस आकाशीय पिंड से आ रही हैं, यह रहस्य इन किरणों के बारे में काफी जानकारी देते हैं। पूरी दुनिया में एक्स-रे ध्रुवीकरण को जानने का महत्व बढ़ा है। यह पिंड या संरचनाएं ब्लैक होल, न्यूट्रॉन तारे (तारे में विस्फोट के बाद उसके बचे अत्यधिक द्रव्यमान वाले हिस्से), आकाशगंगा के केंद्र में मौजूद नाभिक आदि को समझने में मदद करता है। इससे आकाशीय पिंडों के आकार और विकिरण बनाने की प्रक्रिया को समझने में मदद मिलेगी।

जानें कैसे रहा साल 2023
Published / 2023-12-29 21:43:53
जानें कैसे रहा साल 2023

एबीएन नॉलेज डेस्क। साल 2023 राजनीतिक मायनों से झारखंड में बहुत हलचल भरी रही। जहां लिफाफा प्रकरण ने मौजूदा राज्य सरकार को हिला कर रख दिया, तो वहीं कांग्रेस सांसद धीरज साहू के घर से मिले 351 करोड़ रुपये कैश ने पूरे देश-विदेश का ध्यान अपनी ओर खींचा। वहीं, 4 साल बाद विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष मिला तो वहीं बेबी देवी के सिर पर जीत का ताज सजा। आइये जानते हैं उन मुद्दों को जो इस साल चर्चा का विषय बना रहा।हफ्ते तक विधायकों को छत्तीसगढ़ में रखा गया प्रदेश की भाजपा सरकार ने सीएम हेमंत सोरेन पर पत्थर खनन मामले को लेकर सवाल उठाया था। इसके साथ ही उनकी विधानसभा की सदस्यता रद्द किए जाने की मांग की थी, जिसे लेकर राज्यपाल को लिफाफा भी भेजा गया था, जिसे राज्यपाल ने समीक्षा के लिए रखते हुए कहा था कि अभी लिफाफा नहीं खुला है। ऐसे में जहां विपक्ष हेमंत सरकार को गिराने में लगी हुई थी तो वहीं अपने कुछ विश्वसत नेताओं की निगरानी में हेमंत अपने सभी विधायकों को लेकर छत्तीसगढ़ रवाना हो गये थे और करीब हफ्तेभर तक वहीं के पांच सितारा रिसॉर्ट में सभी विधायकों को ठहराया गया था।बाबूलाल को बनाया गया प्रदेश अध्यक्षसाल 2023 में बाबूलाल मरांडी को भाजपा ने प्रदेश अध्यक्ष की कमान सौंपी। इसी के साथ पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास को ओडिशा का राज्यपाल बना दिया गया। पूर्व मंत्री अमर बाउरी को विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष का दर्जा दिया गया। बता दें कि पहले नेता प्रतिपक्ष के लिए बाबूलाल मरांडी का नाम प्रस्तावित था, लेकिन कुछ वजहों की वजह से आखिर चार साल बाद नेता प्रतिपक्ष का पद भरा गया और अमर बाउरी को चुना गया। जगरनाथ महतो की पत्नी के सिर सजा जीत का ताजझारखंड के स्वर्गीय शिक्षा मंत्री जगरनाथ महतो के निधन के बाद डुमरी विधानसभा में उपचुनाव किया गया, जिसमें उनकी पत्नी बेबी देवी को चुनाव में उतारा गया और इस चुनाव में आजसू प्रत्याशी यशोदा देवी को हराते हुए बेबी देवी के सिर पर जीत का ताज सजा।धीरज साहू के अलमारी से मिला 351 करोड़ कैशकांग्रेस नेता धीरज साहू की चर्चा तो मीडिया से लेकर सोशल मीडिया तक पर बनी रही। इतना ही नहीं आईटी रेड में अलमारी में मिले 351 करोड़ कैश की तस्वीर तो सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हुई। खबर तब सुर्खियों में बन गयी जब रेड के लिए तीन दर्जन गई नोट काउंटिंग मशीन भी नोटों की काउंटिंग के लिए कम पड़ गयी।

दिमाग को बोझिल बनाती सोशल मीडिया
Published / 2023-12-17 20:20:07
दिमाग को बोझिल बनाती सोशल मीडिया

दिमाग रखना है दुरुस्त, तो सोशल मीडिया से रहें दूर एबीएन नॉलेज डेस्क। एक नये अध्ययन में यह पाया गया है कि सोशल मीडिया का कम इस्तेमाल करने से उपयोगकर्ताओं को काम का दबाव कम महसूस होता है और उनमें बेचैनी या घबराहट भी कम होती है। सोशल मीडिया का उपयोग 30 मिनट तक कम करके मानसिक स्वास्थ्य को दुरूस्त करने के साथ ही नौकरी के प्रति संतुष्टि की भावना में सुधार लाने में मदद मिलती है जबकि इसका लगातार उपयोग करने वाले लोगों को अपने काम पर ध्यान लगाने में मुश्किल होती है। एक नये अध्ययन में यह पाया गया है कि सोशल मीडिया का कम इस्तेमाल करने से उपयोगकर्ताओं को काम का दबाव कम महसूस होता है और उनमें बेचैनी या घबराहट भी कम होती है। जर्मनी में रुर यूनिवर्सिटी, बोचम और जर्मन सेंटर फॉर मेंटल हेल्थ के अनुसंधानकर्ताओं ने पाया कि सोशल मीडिया से दूरी बनाने से लोगों को अपना काम करने का अधिक वक्त मिलता है और उन्हें ध्यान भटकने की समस्या भी कम होती है। पत्रिका बिहेवियर एंड इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी में प्रकाशित अध्ययन के लेखक जूलिया ब्रेलोव्स्किया ने कहा कि जो लोग सोशल मीडिया फीड पर नजर रखने के लिए अपना काम रोक देते हैं, उनके लिए अपने काम पर ध्यान केंद्रित करना और मुश्किल हो जाता है। अध्ययन के लिए अनुसंधानकर्ताओं ने 166 लोगों को शामिल किया, जिनमें से सभी नौकरी करते थे और वे बिना काम के सोशल मीडिया पर हर दिन कम से कम 35 मिनट का वक्त बिताते हैं। ब्रेलोव्स्किया ने कहा- इतने कम वक्त में भी हमने पाया कि जिन लोगों ने सोशल मीडिया पर हर दिन 30 मिनट से कम वक्त बिताया उनमें मानसिक स्वास्थ्य और नौकरी के प्रति संतुष्टि की भावना में सुधार आया।

यादें 2023 की... : इस साल ट्रैंड में रही नाखूनों की ये कला, वेडिंग सीजन में करें ट्राई
Published / 2023-12-16 21:44:14
यादें 2023 की... : इस साल ट्रैंड में रही नाखूनों की ये कला, वेडिंग सीजन में करें ट्राई

एबीएन नॉलेज डेस्क। आवरआल लुक को परफेक्ट बनाने के लिए आउटफिट, मेकअप और हेयरस्टाइल के अलावा नेल आर्ट भी खूबसूरती पर चार-चांद लगा देते हैं। खासतौर पर इस वेडिंग सीजन में नेल आर्ट के जरिए आप अपनी खूबसूरती पर चार-चांद लगा सकते हैं। वैसे तो नेल आर्ट बहुत ही बारीकी से करवाने पड़ते हैं लेकिन आज आपको कुछ ऐसे डिजाइन्स दिखाते हैं जिन्हें आप इस वेडिंग सीजन ट्राई कर सकती हैं।   इस तरह के ब्लैक और गोल्डन नेल आर्ट आप इस वेडिंग सीजन ट्राई कर सकते हैं।  आप चाहें तो ऐसे मल्टी कलर का नेलआर्ट ट्राई कर सकते हैं। पर्पल, व्हाइट और सिल्वर कलर के ऐसे नेल आर्ट डिजाइन आप ट्राई कर सकते हैं। तीन कलर्स का कॉम्बिनेशन आपके हाथों की सुंदरता को डबल कर देगा। न्यूड कलर्स आजकल काफी ट्रैंड में है। ऐसे में यदि आप चाहें तो न्यूड नेल आर्ट भी इस वेडिंग सीजन  ट्राई कर सकते हैं। फ्लोरल नेल आर्ट का अगर आपको शौक है तो आप आसानी से इसे वेडिंग सीजन में ट्राई कर सकते हैं।

जानें 2023 में गूगल पर सबसे ज्यादा किया किया गया सर्च
Published / 2023-12-12 21:01:47
जानें 2023 में गूगल पर सबसे ज्यादा किया किया गया सर्च

सेक्स आन द बीच रेसिपी साल 2023 में गूगल पर हुई सबसे ज्यादा सर्चएबीएन नॉलेज डेस्क। साल 2023 कई खट्टे-मीठे, तीखे स्वाद देकर जा रहा है। इस साल गूगल पर सबसे ज्यादा जिस रेसिपी को लोगों ने सर्च किया वो थी सेक्स आन द बीच रेसिपी, जी हां ये वो ड्रिंक है जो इस साल लोग सबसे ज्यादा पीना और बनाना चाहते थे। तो आप भी अगर नया साल आने से पहले ये रेसिपी जान लेंगे तो इस साल न्यू ईयर पार्टी में आप भी अपने मेहमानों को सेक्स आन द बीच ड्रिंक सर्व करेंगे। सेक्स आन द बीच एक पॉप्युलर कॉकटेल है जिसे बनाना आसान है और इसका स्वाद बहुत रेफ्रेशिंग होता है। तो आप अगर इसे घर पर बनाना चाहते हैं तो आपका क्या सामग्री चाहिए और इसे बनाने का सही तरीका क्या है। आइये सब जानते हैं : सेक्स आन द बीच रेसिपी बनाने की सामग्री : 1 आँज वोडका 1 आँज पीच नैक्टार 1 आँज क्रैनबेरी जूस 1 आँज आरेंज जूस 1 आँज पाइनएप्पल जूस आधा आँज ग्रेनाडाइन सिरप बर्फ (क्रश की हुई) सेक्स आन द बीच रेसिपी बनाने का तरीका :शेकर में वोडका, पीच नैक्टार, क्रैनबेरी जूस, आरेंज जूस, पाइनएप्पल जूस और ग्रेनाडाइन सिरप डालें। शेकर को ड्यूल शेक के साथ ढंक दें और अच्छे से शेक करें ताकि सभी सामग्री अच्छे से मिल जायें। ग्लास में बर्फ (क्रश की हुई) डालें। शेकर से निकालकर उसे ग्लास में छलन के माध्यम से छलाना। ग्लास में छलाने के बाद, उसे गर्मी से बचाने के लिए ठंडा करें और ताजगी के साथ परोसें। नोट : आप इसे गर्मी में ठंडा करने के लिए बार-आइस या क्रश की हुई बर्फ का उपयोग कर सकते हैं। यह कॉकटेल ठंडा और रेफ्रेशिंग है और इसका स्वाद बहुत शानदार होता है। कृपया ध्यान दें कि शराब की सेवा केवल आदृष्ट वयस्क उम्र के व्यक्तियों के लिए उचित है।

कहीं ईश्वर के अपमान के कारण तो नहीं हुई थी टनल वाली घटना
Published / 2023-11-29 17:32:34
कहीं ईश्वर के अपमान के कारण तो नहीं हुई थी टनल वाली घटना

एबीएन नॉलेज डेस्क। विदेशी टनल एक्सपर्ट अर्नाल्ड डिक्स जितने बार भी टनल के अंदर गये और बाहर निकले, उतनी बार पास वापस स्थापित पूजा स्थल के आगे घुटनों पर बैठकर हाथ जोड़े और आंख बंद करके प्रार्थना की।इन्हीं अमेरिकी एक्सपर्ट ने आते ही टनल के मुहाने से हटाये गये पूजा स्थल को वापस रखवाया था। कहा था कि हिमालय ने गुस्सा दिखाया है। उन्होंने मजदूरों को बंधक बनाया है। अब हिमालय ही जब चाहेगा, तब उनको छोड़ेगा।हुआ भी ऐसा ही। अमेरिकी मशीन भी पहली बार किसी मिशन पर टूट गया और दरवाजे तक पहुंचकर भी सारे एक्सपर्ट लाचार हो गये थे। अमेरिकी टनल विशेषज्ञ ने कहा था कि उन्होंने मां काली से एक डील की है। शायद अब वे उस अध्यात्म अनुभव को साझा करेंगे।आज भी अर्नाल्ड उस छोटे से चबूतरे वाले मंदिर के में देवी, भोलेनाथ और बाबा बौगनाथ की पूजा की और बहुत देर तक वहीं बैठे रहे।सबसे अजूबा तब हुआ, जब इसी पूजा स्थल के पीछे चट्टान पर पानी की धारा निकल गयी और उससे बाबा भोलेनाथ की आकृति सी बन गयी। मौसम अचानक साफ हो गया। जबकि बारिश का अनुमान मौसम विभाग ने बता रखा था। उसे देखकर अर्नाल्ड ने कहा कि आज हिमालय और यहां के बाबा भोलेनाथ खुशखबरी देने वाले हैं।एक दूसरे धर्म के प्रख्यात इंजीनियर द्वारा हिंदू धर्म की मान्यताओं को इस स्तर तक समझना और इज्जत देना काफी कुछ कह जाता है, जहां विज्ञान डगमगाता है। वहीं से आस्था की शुरूआत होती है। विज्ञान और धर्म विपरीत नहीं बल्कि पूरक है।सभी 41 लोगों की सकुशल लौटे अब सरकार से कुछ उम्मीद कि अब हर मजदूर का 1 करोड़ का दुर्घटना इंश्योरेंस कंपलसरी हो ... और दूसरा पहाड़ों के मंदिर को धार्मिक स्थल रहने दें, पर्यटन स्थल न बनायें। प्रकृति से छेड़छाड़ कम से कम हो। और पहाड़ों के धार्मिक स्थान में रहने के होटल, घर आदि निर्माण न हों। लोग सुबह जाएं और वापस उसी दिन नीचे लौटें। बस मूलभूत सुविधा ही हो।प्रकृति ने बता दिया है किवह सर्वोपरि है…वही ईश्वर है…वही शक्ति है...हम सबको उसे मानना ही होगा।

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