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महिला सशक्तिकरण : अभी तो बस शुरुआत है...
Published / 2023-03-12 20:59:38
महिला सशक्तिकरण : अभी तो बस शुरुआत है...

सत्यनारायण गुप्ताएबीएन एडिटोरियल डेस्क। अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस से ठीक 4 दिन पहले महिला आईपीएल शुरू हुआ है। जिसमें यह नारा लगा "यह तो बस शुरुआत है।" लेकिन शुरुआत तो बहुत पहले से हो चुकी थी। रजिया सुल्तान (महिला शासिका) झांसी की रानी लक्ष्मीबाई (स्वतंत्रता सेनानी) देविका रानी (फिल्मों में अभिनय) इंदिरा गांधी (राजनीति) शकुंतला देवी (गणितज्ञ) पीटी उषा (एथलिट) कल्पना चावला (अंतरिक्ष) रीता फारिया और सुष्मिता सेन (सौंदर्य प्रतियोगिता) की उपलब्धियों से आज की भारतीय महिला बहुत आगे निकल चुकी हैं।पिछले वर्ष जब देश में अमृत महोत्सव वर्ष की शुरुआत हुई देश को पहली आदिवासी महिला राष्ट्रपति मिली। खेल के मैदान में पीवी सिंधु, रिचा घोष, मीराबाई चानू, निखत जरीन, प्रियंका नूटक्की (शतरंज ग्रैंडमास्टर) प्रियंका मोहिते (800 मीटर से अधिक ऊंचाई वाली पांच पर्वत चोटियों पर चढ़ने वाले पर्वतारोही) ने देश का गौरव बढ़ाया। साथ ही पीटी ऊषा का भारतीय ओलंपिक संघ का पहली महिला अध्यक्ष बनना भी  मील का पत्थर  रहा।वर्ष 2022 में हिंदी लेखिका गीतांजलि श्री को "रेत समाधि" के लिए बुकर पुरस्कार मिला। वहीं भारतीय लेखिका मीनाकंडा सामी को इंटरनेशनल" हर्मन कैस्टन पुरस्कार 2022" पुरस्कार प्राप्त हुआ।वर्ष 2023 में उमी कमानी और अनुपमा रामचंद्रन की जोड़ी ने स्नूकर विश्व कप जीतकर तथा शेफाली वर्मा की कप्तानी में अंडर -19 टी 20 महिला विश्वकप जीतकर खेल जगत में भारत का परचम लहराया। वहीं भारत में जन्मी गीता गोपीनाथ आईएमएफ में चीफ़ इकाॅनोमिस्ट के पद पर नियुक्त होने वाली पहली महिला बनीं। केरल की सोम क्रिश्चियन कैलिफोर्निया कम्युनिटी कॉलेज सिस्टम का 11वां स्थाई चांसलर चुनी गयी। उधर अमेरिका से ही खबर है कि हो सकता है अगले राष्ट्रपति चुनाव में दो भारतीय मूल की महिलाओं में ही भिड़ंत हो। निकी हिली और कमला हैरिस के बीच।अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस की शुरुआत आज से 115 वर्ष पहले 1908 में हुई। 1908 में 8 मार्च के दिन अमेरिका में महिलाओं ने एक परेड का आयोजन किया था। उनकी मांग थी कि महिलाओं के काम के घंटे कम हो, वेतन अच्छा मिले और महिलाओं को वोट डालने का हक भी मिले। इसके एक वर्ष बाद अमेरिका की सोशलिस्ट पार्टी ने पहला राष्ट्रीय महिला दिवस मनाने का ऐलान किया। इसे अंतरराष्ट्रीय बनाने का ख्याल सबसे पहले क्लारा जेटकिन नाम की एक महिला के ध्यान में आया था। उन्होंने अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस मनाने का सुझाव 1910 में डेनमार्क की राजधानी कोपेनहेगन में कामकाजी महिलाओं के सम्मेलन में दिया था। पहला अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस 2011 में मनाया गया। 2017 में रुस की महिलाओं के प्रदर्शन के बाद वहां के जार को पद से हटना पड़ा। अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस को औपचारिक मान्यता संयुक्त राष्ट्र संघ द्वारा 1975 में दी गयी।अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस की पहचान जामुनी रंग से होती है इसे इंसाफ और सम्मान का प्रतीक माना जाता है। कई देशों में अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर राष्ट्रीय अवकाश रहता है। चीन में राष्ट्रीय परिषद के सुझाव पर बहुत से महिलाओं को 8 मार्च के को आधे दिन की छुट्टी दी जाती है। इटली में महिलाओं को 8 मार्च को सीमौसा फूल देकर अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस मनाया जाता है। अमेरिका में मार्च का महीना महिलाओं का महीना होता है। राष्ट्रपति की तरफ से घोषणा जारी की जाती है जिसमें अमेरिकी महिलाओं की उपलब्धियों का बखान किया जाता है। वर्ष 2023 में अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के लिए संयुक्त राष्ट्र की थीम है : "एम्ब्रैस  इक्विटी" जिसका अर्थ है लैंगिक समानता पर ध्यान देना।

जातियों की स्वाभाविक विदाई शुभ संकेत...
Published / 2023-02-25 23:37:57
जातियों की स्वाभाविक विदाई शुभ संकेत...

हृदयनारायण दीक्षितएबीएन एडिटोरियल डेस्क। जाति खासी चर्चा में है। डॉ लोहिया और डॉ अंबेडकर सहित अनेक चिंतकों ने भारत की जातीय संरचना को राष्ट्रीय एकता के विरुद्ध बताया है। डॉ लोहिया ने जाति तोड़ो का नारा भी दिया था। डॉ अंबेडकर ने भी जाति के समूल नाश का ध्येय लेकर लगातार काम किया था। जाति खात्मा सभी महान नेताओं का स्वप्न रहा है। लेकिन जाति की अस्मिता बढ़ाने का गलत काम जारी है। जाति की कोई संवैधानिक परिभाषा नहीं है। बेशक भारत में सैकड़ों जातियां हैं। जाति का अस्तित्व है। जाति की राजनीति है। जातियां राष्ट्रीय एकता में बाधक रही हैं। मूलभूत प्रश्न है कि आखिर जातियां हैं क्या?फ्रांसीसी विद्वान सेनार्ट के अनुसार ये एक निकाय जैसी हैं। अनुवांशिकता से प्रतिबद्ध है। कतिपय उत्सवों के अवसर पर इनके लोग इकट्ठे होते हैं। समान धंधों व्यवसायों के कारण आपस में जुड़े रहते हैं। कुछ जातियों में परंपरागत जाति मनवाने के लिए जातिवाह्य घोषित करने की परंपरा भी रही है। भारत की वर्तमान जाति व्यवस्था में यह विवेचन लागू नहीं होता। एक विद्वान एच मस्ले के अनुसार- जाति परिवारों का समूह होती हैं। प्रायः व्यवसाय विशेष की सूचक होती हैं। प्रत्येक जाति का एक पौराणिक पुरुष होता है। पौराणिक पुरुष अदृश्य देवता भी हो सकता है। जाति के सभी सदस्य स्वयं को उस पुरुष या देवता के प्रति निष्ठावान रखते हैं। जाति की यह परिभाषा भी भारतीय जाति व्यवस्था का पूरा अर्थ नहीं प्रकट करती।हिस्ट्री ऑफ कास्ट इन इंडिया में डॉ केतकर ने लिखा है- यह एक सामाजिक समूह होती हैं। इसकी सदस्यता संतति और इस प्रकार जन्मे लोगों तक ही सीमित रहती है। इसके सदस्यों पर कठोर सामाजिक नियमों के अधीन समाज के बाहर विवाह न करने पर पाबंदी रहती है। यहां जाति का सबसे प्रमुख गुण है कि जाति समूह के बाहर विवाह करने पर पाबंदी रहती है। एक विद्वान नेस्फील्ड ने लिखा है- जाति समाज का ऐसा समूह होती हैं जो अन्य वर्ग से किसी प्रकार का सम्बंध स्वीकार नहीं करती। इसके सदस्य अपने जाति समूह के बाहर अन्य जाति समूह से विवाह का रिश्ता नहीं जोड़ते। वे अन्य जातियों से खानपान का रिश्ता भी नहीं जोड़ते। लेकिन भारत में खानपान के बंधन टूट गए हैं। स्वाधीनता संग्राम के पहले से ही भारत में जातियों की अस्मिता को राष्ट्रीय एकता में बाधक माना गया था। संविधान निर्माता भी जातियों की समाप्ति चाहते थे। इसीलिए संविधान की उद्देशिका में जातियों का उल्लेख भी नहीं है। उद्देशिका संविधान का सारतत्व है। उद्देशिका का प्रारम्भ, हम भारत के लोग से होता है। पूरे देश के जन गण मन को हम भारत के लोग के दायरे में रखना और अभिज्ञात करना संविधान निर्माताओं का स्वप्न रहा है। उद्देशिका संविधान का प्राण है। संविधान की उद्देशिका में राष्ट्र के स्वप्न अन्तर्निहित हैं। जाति समाप्ति और हम भारत के लोग में विलय संविधान निर्माताओं का स्वप्न रहा है।जातियां राष्ट्रीय एकता में बाधक है। लेकिन दुर्भाग्य से समाज में उनकी गहन उपस्थिति व अस्मिता है। विचारहीन राजनीति जाति अस्मिता को मजबूत करने पर आमादा है। दुनिया के प्रत्येक संविधान का एक दर्शन होता है। दर्शन विहीन संविधान राष्ट्र के अंतःकरण का भाग नहीं बनता। भारत के संविधान का एक दर्शन है। संविधान निर्माण के प्रारम्भ में पंडित नेहरू ने संविधान सभा में उद्देश्य संकल्प का प्रस्ताव रखा था। यह प्रस्ताव 22 जनवरी, 1947 को पारित हुआ। संकल्प में कहा गया था- संविधान सभा भारत को स्वतंत्र, प्रभुत्व सम्पन्न गणराज्य के रूप में घोषित करने के अपने सत्यनिष्ठ संकल्प की और भावी शासन के लिए संविधान बनाने की घोषणा करती है। आगे कहा है- प्रभुत्व सम्पन्न स्वतंत्र भारत की सभी शक्तियां और अधिकार उसके संगठक भाग और शासन के सभी अंग लोक से उत्पन्न हैं। जनता को सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक न्याय प्रतिष्ठा और अवसर की तथा विधि के समक्ष समता, विचार, अभिव्यक्ति, विश्वास, उपासना, व्यवसाय, संगमन और कार्य की स्वतंत्रता, विधि और सदाचार के अधीन होगी। महत्वपूर्ण बात यह कही गई थी- यह प्राचीन भूमि विश्व में अपना समुचित और गौरवपूर्ण स्थान प्राप्त करेगी और विश्व शांति और मानव कल्याण के लिए स्वेच्छा से अपना पूरा सहयोग देगी। यहां प्राचीन भूमि शब्द ध्यान देने योग्य है। भूमि का अर्थ धरती नहीं है। प्राचीन भूमि का अर्थ प्राचीन संस्कृति है। इसी संकल्प से उद्देशिका की रचना हुई थी। उद्देशिका में जाति इकाई नहीं है। लेकिन राजनीति मरणासन्न जाति अस्मिता को बार बार पुनर्जीवन देती है।भारत जातियों का संगठन नहीं है। संविधान में जातियों की अस्मिता नहीं है। डॉ अंबेडकर ने कहा था- जाति अप्राकृतिक है और यह बहुत दिन तक जीवित नहीं रह सकती। वैदिक काल में जातियां नहीं थीं। वर्ण व्यवस्था भी नहीं थी। उस समय सामाजिक समानता थी। राजनीति में मार्क्सवाद, पूंजीवाद, समाजवाद की तरह ब्राह्मणवाद शब्द प्रयोग भी चलता है। ब्राह्मणवाद का संकेत जाति व्यवस्था से है। जाति की समाप्ति के लिए अनेक महान नेताओं ने परिश्रम किये थे और अनेक संगठनों ने भी। कोलकाता के ब्रह्म समाज, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और कुछ समाजवादी विचारक भी जाति समाप्ति के पक्षधर थे। सबका उद्देश्य जाति समाप्ति था। शूद्र शब्द बहुत चलता है। सामूहिक रूप में शूद्र सैकड़ों व्यवसायों से जुड़े समूहों का साझा नाम हो सकता है। डॉ अंबेडकर के अनुसार अंतर्विवाह ही जाति उत्पत्ति का कारण है। कुछ वर्गों ने अपने लिए दूसरे वर्गों के सदस्यों के साथ विवाह पर रोक लगायी। डॉ अंबेडकर ने प्रश्न उठाया है- जाति उद्भव के अध्ययन से हमें इस प्रश्न का उत्तर मिलना चाहिए कि वो कौन सा वर्ग था जिसने अपने लिए बाड़ा खड़ा किया। डॉ अंबेडकर ने कहा है- मैं इसका प्रत्यक्ष उत्तर देने में असमर्थ हूं। ब्राह्मण वर्ग ने स्वयं की घेराबंदी एक जाति के रूप में क्यों कर ली। डॉ अंबेडकर ने कोलंबिया विश्वविद्यालय में जाति व्यवस्था पर शोधपूर्ण भाषण दिया था- मैं आपको एक बात बताना चाहता हूं कि जाति धर्म का नियम मनु प्रदत्त नहीं है। वह ब्राह्मणों को जाति व्यवस्था का जन्मदाता नहीं मानते। कहते हैं- ब्राह्मण अनेक गलतियां करने के दोषी रहे हों और मैं कह सकता हूं वे ऐसे थे। लेकिन जाति व्यवस्था को गैर ब्राह्मणों पर लाद देने की उनकी क्षमता नहीं थी। अपनी तर्कपटुता से उन्होंने भले ही इस प्रक्रिया को सहायता प्रदान की हो। लेकिन अपनी ऐसी योजना को निश्चित रूप से अपने सीमित दायरे से आगे नहीं बढ़ा सकते थे। समाज को अपने स्वरूप के अनुरूप ढालना कितना गौरवशाली और कितना कठिन कार्य होता है। ऐसा कार्य करने में किसी को भी आनंद प्राप्त हो सकता है और वह इस प्रशस्ति कार्य को कर सकता है। लेकिन वह इसे बहुत आगे तक नहीं ले जा सकता। जाति समाप्ति के लिए कठिन परिश्रम की आवश्यकता है। राज बदलना आसान होता है। समाज बदलना कठिन। संविधान निर्माताओं ने अनुसूचित जातियों को चिह्नित कर विशेष रक्षोपाय देने की व्यवस्था की थी। पिछड़े वर्गों की पहचान के लिए आयोग बनाने की भी व्यवस्था की गई थी। जातियां स्वाभाविक रूप में विदा हो रही हैं। यह शुभ है। (लेखक, उत्तर प्रदेश विधानसभा के पूर्व अध्यक्ष हैं।)

खरीद-फरोख्त की भट्ठी में जलता बचपन
Published / 2023-02-22 18:40:34
खरीद-फरोख्त की भट्ठी में जलता बचपन

मुकुंदएबीएन एडिटोरियल डेस्क। सूडान में इस साल पहली जनवरी को दुनिया का सबसे कुख्यात और अमीर मानव तस्कर किडेन जेकारियास हब्टेमरियाम इंटरपोल के हत्थे चढ़ चुका है। वह अफ्रीकी देश इरीट्रिया का रहने वाला है। हब्टेमरियाम के लीबिया में संचालित शिविर में यूरोप जाने के लिए लालायित हजारों पूर्वी अफ्रीकी प्रवासियों को बंधक बनाकर रखा जाता था। खुलासा हुआ था कि इस शिविर में बंधक बनाकर रखी गई महिलाओं और बच्चों का यौन शोषण कराया जाता था। देश-दुनिया में फलते-फूलते इस उद्योग की जड़े कितनी गहरी हैं, इसका खुलासा 24 घंटे पहले जयपुर में जारी की गई रेलवेज-मेकिंग द ब्रेक इन ट्रैफिकिंग नामक रिपोर्ट से भी होता है। इस रिपोर्ट को नोबेल शांति पुरस्कार विजेता कैलाश सत्यार्थी और रेलवे सुरक्षा बल के महानिदेशक संजय चंदर ने जयपुर में 18वीं यूआईसी विश्व रेलवे सुरक्षा कांग्रेस में सार्वजनिक किया है। इसमें कहा गया है कि आज मानव तस्करी दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा संगठित आपराधिक उद्योग है। यह रिपोर्ट हर संवेदनशील, विकासशील, प्रगतिशील व्यक्ति और राष्ट्र को चुनौती देती है। कैलाश सत्यार्थी इस दिशा में 1980 से बचपन बचाओ आंदोलन के माध्यम से काम कर रहे हैं।बचपन बचाओ आंदोलन और रेलवे सुरक्षा बल का संयुक्त अध्ययन रेलवेज-मेकिंग द ब्रेक इन ट्रैफिकिंग आंखें खोलने के लिए काफी है। बचपन बचाओ आंदोलन अब तक 1,13,500 बच्चों को क्रूर पंजों से छुड़ा चुका है। सत्यार्थी अब यह अभियान रेलवे सुरक्षा बल के साथ मिलकर चला रहे हैं। उनका मानना है कि इस घिनौने और बर्बर उद्योग से जुड़े खूंखार मानव तस्कर आमतौर पर रेलगाड़ियों का प्रयोग करते हैं। इस संगठित आपराधिक उद्योग की कमर तोड़ने में यह बल महत्वपूर्ण भूमिका अदा कर सकता है। बचपन बचाओ आंदोलन के इस मकसद को पूरा करने में रेलवे सुरक्षा बल से काफी मदद मिल रही है। जनवरी, 2020 से अब तक 1600 से ज्यादा बच्चों को मानव तस्करों के चंगुल से छुड़ाया जा चुका है। इन बच्चों को रेलवे स्टेशन और ट्रेन के डिब्बों से अपराधियों को दबोचकर मुक्त कराया गया। खुशी की बात है कि बचपन बचाओ आंदोलन और रेलवे सुरक्षा बल कई साल से ऐसे अपराधियों के चेहरों से नकाब हटा रहे हैं। यह उद्योग अरबों डॉलर की कमाई का साधन बन चुका है।इन बच्चों से जबरन मजदूरी, वेश्यावृत्ति और भीख मंगवाई जाती है। किशोरियों को शादी के लिए बेच दिया जाता है। यह कितना दुखद है कि कोविडकाल में लॉकडाउन इन मानव तस्करों के लिए उत्सव की तरह रहा। यह किसी से छिपा नहीं है कि इस काल ने लाखों लोगों को गरीबी की ओर धकेला और इन अपराधियों ने इन बेवश परिवारों को शिकार बनाया। रेलवे सुरक्षा बल ने जनवरी, 2020 से अब तक संयुक्त छापामार कार्रवाई में 337 मानव तस्करों को गिरफ्तार भी किया गया है। सत्यार्थी कहते हैं कि संभवत: यह दुनिया में मानव तस्करों के खिलाफ सबसे बड़ा अभियान है। रेलवे सुरक्षा बल के महानिदेशक संजय चंदर की भूमिका इस अभियान में स्वप्नदर्शी जैसी है। वह इंटरनेशनल यूआईसी सेक्योरिटी प्लेटफॉर्म के चेयरमैन भी हैं। इस रिपोर्ट को सार्वजनिक करने के मौके पर आयोजित समारोह में इस प्लेटफॉर्म के 22 सदस्य देशों के प्रतिनिधि भी शामिल हुए। इन प्रतिनिधियों ने बचपन बचाओ आंदोलन और रेलवे सुरक्षा बल के इस अभिनव अभियान को अपने यहां लागू करने पर सहमति जताई है। सभी का मानना है कि बच्चों को सुरक्षित रखना पहली प्राथमिकता होनी चाहिए। अच्छी बात यह है कि इस समय दुनियाभर में नई बाल सुरक्षा नीति की जरूरत महसूस की जा रही है। सत्यार्थी और चंदर ने इस पर काम भी शुरू कर दिया है। राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो की रिपोर्ट में 2021 में रोजाना आठ बच्चों की तस्करी और उनका उत्पीड़न होने संबंधी आंकड़ा दिया गया है। इस आकंड़े के मुताबिक इस साल भारत में मानव तस्करी के कुल 2,189 मामले दर्ज किये गये। 2020 में यह संख्या 1,714 थी। विशेषज्ञों ने रिपोर्ट पर चिंता जताते हुए देश में सख्त मानव तस्करी रोधी कानून लागू करने की मांग की थी। कहते हैं बाल शोषण दुनिया का सबसे बुरा काम है। बुरे काम का नतीजा भी बुरा ही होता है। मशहूर फाइनेंशर अमेरिका का जेफरी एप्सटिन यौन संतुष्टि के लिए बच्चों की खरीद-फरोख्त के लिए दुनिया में कुख्यात रहा है। एप्सटिन को सुरक्षा एजेंसियों ने गिरफ्तार कर सलाखों के पीछे किया था। अगस्त 2019 में उसने मैनहटन की जेल में फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली थी। उसके आत्मघाती अंत से क्रूर अपराधियों को सबक लेने की जरूरत है। जेफरी एपस्टीन पर सेक्स रैकेट चलाने और अमेरिका के कई बड़े राजनेताओं को लड़कियां सप्लाई करने का आरोप भी रहा है।

मानवता के पुजारी थे रामकृष्ण परमहंस
Published / 2023-02-17 23:50:45
मानवता के पुजारी थे रामकृष्ण परमहंस

फरवरी जयन्ती पर विशेषरमेश सर्राफ धमोराएबीएन एडिटोरियल डेस्क। स्वामी रामकृष्ण परमहंस भारत के सुप्रसिद्ध संत, महान विचारक व मानवता के पुजारी थे। स्वामी रामकृष्ण परमहंस ने सभी धर्मों को एक बताते हुए उनकी एकता पर जोर दिया था। उनका मानना था कि सभी धर्मों का आधार प्रेम है। उन्हें बचपन से ही विश्वास था कि ईश्वर के दर्शन हो सकते हैं। ईश्वर की प्राप्ति के लिए उन्होंने कठोर साधना और भक्ति की। अपनी साधना से रामकृष्ण इस निष्कर्ष पर पहुंचे कि संसार के सभी धर्म सच्चे हैं और उनमें कोई भिन्नता नहीं है। वे ईश्वर तक पहुंचने के भिन्न-भिन्न साधन मात्र हैं।इनका जन्म पश्चिम बंगाल के हुगली जिले में कामारपुकुर नामक गांव में 18 फरवरी 1836 को एक निर्धन निष्ठावान ब्राहमण परिवार में हुआ था। इनके जन्म पर ही ज्योतिषियों ने रामकृष्ण के महान भविष्य की घोषणा कर दी थी। ज्योतिषियों की भविष्यवाणी सुन इनकी माता चन्द्रा देवी तथा पिता खुदिराम अत्यन्त प्रसन्न हुए। इनको बचपन में गदाधर नाम से पुकारा जाता था। पांच वर्ष की उम्र में ही वो अदभुत प्रतिभा और स्मरणशक्ति का परिचय देने लगे। अपने पूर्वजों के नाम व देवी-देवताओं की स्तुतियां, रामायण, महाभारत की कथायें इन्हे कंठस्थ याद हो गयी थी।1843 में इनके पिता का देहांत हो गया तो परिवार का पूरा भार इनके बड़े भाई रामकुमार पर आ पड़ा था। रामकृष्ण जब नौ वर्ष के हुए इनके यज्ञोपवीत संस्कार का समय निकट आया। उस समय एक विचित्र घटना हुई। ब्राह्मण परिवार की परम्परा थी कि नवदिक्षित को इस संस्कार के पश्चात अपने किसी सम्बंधी या किसी ब्राह्मण से पहली शिक्षा प्राप्त करनी होती थी। एक लुहारिन जिसने रामकृष्ण की जन्म से ही परिचर्या की थी। बहुत पहले ही उनसे प्रार्थना कर रखी थी कि वह अपनी पहली भिक्षा उसके पास से प्राप्त करे। लुहारिन के सच्चे प्रेम से प्रेरित हो बालक रामकृष्ण ने वचन दे दिया था।अतः यज्ञोपवित के पश्चात घर वालों के लगातार विरोध के बावजूद इन्होंने ब्राह्मण परिवार में प्रचलित प्रथा का उल्लंघन कर अपना वचन पूरा किया और अपनी पहली भिक्षा उस लुहारिन से प्राप्त की। यह घटना सामान्य नही थी। सत्य के प्रति प्रेम तथा इतनी कम उम्र में सामाजिक प्रथा के इस प्रकार उपर उठ जाना रामकृष्ण की आध्यात्मिक क्षमता और दूरदर्शिता को ही प्रकट करता है।रामकृष्ण का मन पढ़ाई में न लगता देख इनके बड़े भाई इन्हे अपने साथ कलकत्ता ले आये और अपने पास दक्षिणेश्वर में रख लिया। यहां का शांत एवं सुरम्य वातावरण रामकृष्ण को अपने अनुकूल लगा। 1858 में इनका विवाह शारदा देवी नामक पांच वर्षीय कन्या के साथ सम्पन्न हुआ। जब शारदा देवी ने अपने अठारहवें वर्ष मे पदार्पण किया तब श्री रामकृष्ण ने दक्षिणेश्वर के अपने कमरे में उनकी षोड़शी देवी के रुप में आराधना की। यही शारदा देवी रामकृष्ण संघ में माताजी के नाम से परिचित हैं।रामकृष्ण के जीवन में अनेक गुरु आये पर अन्तिम गुरुओं का उनके जीवन पर बहुत प्रभाव पड़ा। एक थी भैरवी जिन्होने उन्हे अपने कापालिक तंत्र की साधना करायी और दूसरे थे श्री तोतापुरी उनके अन्तिम गुरु। गंगा के तट पर दक्षिणेश्वर के प्रसिद्व मंदिर में रहकर रामकृष्ण मां काली की पूजा किया करते थे। गंगा नदी के दूसरे किनारे रहने वाली भैरवी को अनुभुति हुई कि एक महान संस्कारी व्यक्ति रामकृष्ण को उसकी दीक्षा की आवश्यकता हैं। गंगा पार कर वो रामकृष्ण के पास आयी तथा उन्हे कापालिक दीक्षा लेने को कहा। रामकृष्ण ने भैरवी द्वारा बतायी पद्धति से लगातार साधना कर मात्र तीन दिनों में ही सम्पूर्ण क्रिया में निपुण हो गये।रामकृष्ण के अन्तिम गुरु तोतापुरी थे जो सिद्ध तांत्रिक तथा हठ योगी थे। उन्होने रामकृष्ण को दीक्षा दी। रामकृष्ण को दीक्षा दी गई परमशिव के निराकार रुप के साथ पूर्ण संयोग की। पर आजीवन तो उन्होंने मां काली की आराधना की थी। वे जब भी ध्यान करते तो मां काली उनके ध्यान में आ जाती और वे भावविभोर हो जाते। जिससे निराकार का ध्यान उनसे नहीं हो पाता था।तोतापुरी ध्यान सिद्ध योगी थे। उनको अनुभव हुआ कि रामकृष्ण के ध्यान में मां काली प्रतिष्ठित हैं। उन्होने शक्ति सम्पात के द्वारा रामकृष्ण को निराकार ध्यान में प्रतिष्ठित करने के लिके बगल में पड़े एक शीशे के टुकड़े को उठाया और उसका रामकृष्ण के आज्ञाचक्र पर आघात किया जिससे रामकृष्ण को अनुभव हुआ कि उनके ध्यान की मां काली चूर्ण-विचूर्ण हो गई हैं और वे निराकार परमशिव में पूरी तरह समाहित हो चुके हैं। वे समाधिस्थ हो गये। ये उनकी पहली समाधी थी जो तीन दिन चली। तोतापुरी ने रामकृष्ण की समाधी टूटने पर कहा। मैं पिछले 40 वर्षो से समाधि पर बैठा हूं पर इतनी लम्बी समाधी मुझे कभी नही लगी।रामकृष्ण परमहंस के पास जो कोई भी जाता वह उनकी सरलता, निश्चलता, भोलेपन और त्याग से इतना अभिभूत हो जाता कि अपना सारा पांडित्य भूलकर उनके पैरों पर गिर पड़ता था। गहन से गहन दार्शनिक सवालों के जवाब भी वे अपनी सरल भाषा में इस तरह देते कि सुनने वाला तत्काल ही उनका मुरीद हो जाता। इसलिए दुनियाभर की तमाम आधुनिक विद्या, विज्ञान और दर्शनशास्त्र पढ़े महान लोग भी जब दक्षिणेश्वर के इस निरक्षर परमहंस के पास आते तो अपनी सारी विद्वता भूलकर उसे अपना गुरु मान लेते थे।इनके प्रमुख शिष्यों में स्वामी विवेकानन्द, दुर्गाचरण नाग, स्वामी अद्भुतानंद, स्वामी ब्रह्मानंदन, स्वामी अद्यतानन्द, स्वामी शिवानन्द, स्वामी प्रेमानन्द, स्वामी योगानन्द थे। श्री रामकृष्ण के जीवन के अन्तिम वर्ष कारुण रस से भरे थे। 15 अगस्त 1886 को अपने भक्तों और स्नेहितों को दुख के सागर में डुबाकर वे इस लोक में महाप्रयाण कर गये।रामकृष्ण परमहंस महान योगी, उच्चकोटि के साधक व विचारक थे। सेवा पथ को ईश्वरीय, प्रशस्त मानकर अनेकता में एकता का दर्शन करते थे। सेवा से समाज की सुरक्षा चाहते थे। रामकृष्ण का सारा जीवन अध्यात्म-साधना के प्रयोगों में बीता। वे लगातार कई घंटों तक समाधि में लीन हो जाते थे। चैबीस घंटे में बीस-बीस घंटों तक वे उनसे मिलनेवाले लोगों का दुख-दर्द सुनते और उसका समाधान भी बताते।स्वामी रामकृष्ण परमहंस के भोले प्रयोगवाद में वेदांत, इस्लाम और ईसाइयत सब एक रूप हो गए थे। निरक्षर और पागल तक कहे जाने वाले रामकृष्ण परमहंस ने अपने जीवन से दिखाया था कि धर्म किसी मंदिर, गिरजाघर, विचारधारा, ग्रंथ या पंथ का बंधक नहीं है। रामकृष्ण परमहंस मुख्यतः आध्यात्मिक आंदोलन के प्रणेता थे। जिन्होंने देश में राष्ट्रवाद की भावना को आगे बढ़ाया। उनकी शिक्षा जातिवाद एवं धार्मिक पक्षपात को नकारती हैं।स्वामी रामकृष्ण परमहंस के विचारों को जन-जन तक पहुंचाने के लिये उनके परम् शिष्य स्वामी विवेकानन्द ने एक मई 1897 को बेलुड़ में रामकृष्ण मिशन की स्थापना की। इस मिशन की स्थापना के केंद्र में वेदान्त दर्शन का प्रचार-प्रसार है। रामकृष्ण मिशन के उद्देश्य मानवता के सर्वांगीण कल्याण के लिए काम करना, विशेष रूप से गरीबों और दलितों के उत्थान के लिए। मार्च 2022 तक रामकृष्ण मिशन और रामकृष्ण मठ के पूरे विश्व में 265 केंद्र कार्यरत हैं।

विकसित भारत की उम्मीद जगाता केंद्रीय आम बजट
Published / 2023-02-15 18:21:51
विकसित भारत की उम्मीद जगाता केंद्रीय आम बजट

सुनीता सिंह एबीएन एडिटोरियल डेस्क। 1 फरवरी को लोकसभा में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के द्वारा पेश बजट मोदी सरकार के  सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास नारे को प्रदर्शित करने की कोशिश करती दिख रही है। विपक्षी पार्टियों को लग रहा था कि अगला लोकसभा चुनाव 2024 में है तो यह पूरी तरह लोकलुभावन बजट होगा, लेकिन मोदी जी ने उनके मंसूबे पर पानी फेर दिया और बजट को लोकलुभावन और रेवड़ी संस्कृति के विपरीत, देश के विकास को प्राथमिकता देते हुए 70 वर्षों से चली आ रही राजनीतिक बजट के कांग्रेसी संस्कृति पर भी तमाचा जड़ दिया है। इसमें कोई दो मत नहीं है कि भारत के अमृत काल की शुरूआत का यह पहला बजट अगले 25 वर्षों के लिए देश का दिशा तय करेगा, जब भारत आजादी की एक सदी पूरा करेगा।  वैश्विक महामारी और यूक्रेन तथा रूस के बीच चल रहे अंतरराष्ट्रीय संघर्ष के बाद भी 2023 -24 वर्ष के लिए भारत की विकास दर 7.0% आंकी गई है, जो सभी प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में सबसे अधिक है। इसके अलावा देश में प्रति व्यक्ति आय 2014 से दोगुनी हो गई है, जो 2014 के बाद किये गये प्रभावी उपायों की सफलता को ही साबित करती है। देश में लगातार कर का संग्रह बढ़ रहा है, ऐसी स्थिति में बजट में मध्यम वर्ग को इनकम टैक्स में बड़ी राहत दी गई है। इस बजट में नई कर व्यवस्था में आयकर छूट की सीमा को 7 लाख करने की घोषणा करने को एक ऐतिहासिक कदम कहा जा सकता है। वेतनभोगी वर्ग और 7 लाख या उससे अधिक आय वाले वेतन भोगी पेंशनरों को अब 33,800 रुपये का लाभ मिलेगा। यह कर छूट वेतन भोगी और मध्यम वर्ग को अवश्य ही बहुत सशक्त बनाएगी। वहीं, आयकर रिटर्न के लिए औसत प्रोसेसिंग समय अब 93 दिन से घटाकर 16 दिन कर दिया गया है। इंफ्रास्ट्रक्चर में देखा जाये तो मोदी सरकार ने 10 लाख करोड़ रुपये आवंटित करके इस क्षेत्र में सरकारी निवेश में 33% की वृद्धि करके एक बड़ा ऐतिहासिक कदम उठाया है। सरकार ने लगातार इंफ्रास्ट्रक्चर में निवेश पर ध्यान केंद्रित करते हुए पहली बार भारत इंफ्रास्ट्रक्चर में 10 लाख करोड़ रुपये का निवेश तक पहुंच गया है। देखा जाय तो इंफ्रास्ट्रक्चर के खर्च का अर्थव्यवस्था पर बहुत बड़ा प्रभाव पड़ता है। आरबीआई के अनुसार, इस तरह के निवेश पर खर्च किये गये प्रत्येक "1 से तत्काल वर्ष में 2.45 रुपए का रिटर्न मिलता है। रेल सेक्टर में 2.40 लाख करोड़ रुपये के आवंटन की अभूतपूर्व ऐतिहासिक घोषणा की गयी है। इससे रेलवे लाइनों का विस्तार, रेलवे की क्षमता बढ़ाने और यात्री तथा माल परिवहन लागत को कम करने में भी मदद मिलेगी। पीएम आवास योजना के लिए मौजूदा बजट आवंटन को रिकॉर्ड 66% बढ़ाकर 79,000 करोड़ रुपए कर दिया गया है। मोदी सरकार का किसानों को सशक्त करने पर लगातार ध्यान रहा है और इस बार के बजट में कृषि ऋण लक्ष्य को 11% बढ़ाकर 20 लाख करोड़ रुपये करने की घोषणा की है। इसके अलावा पीएम किसान के तहत 11.4 कर और किसानों को 2.2 लाख करोड़ रुपये के डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर डीबीटी की घोषणा की गई है। यह किसानों को नए उपकरणों और बीजों की खरीद के माध्यम से अपने कार्यों का विस्तार करने के लिए धन उपलब्ध करायेगा। मत्स्य पालन में शामिल लोगों को और सक्षम बनाने के लिए सरकार 6000 करोड़ रुपए के इन्वेस्टमेंट के साथ पीएम मत्स्य संपदा योजना के तहत एक उप योजना भी शुरू किया जायेगा। इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था का भी विस्तार होगा। सरकार एक विशाल डेंटललिस्ट स्टोरेज कैपेसिटी स्थापित करने की भी योजना बना रही है, जो किसानों को अपनी उपज को स्टोर करने और बिक्री के माध्यम से लाभकारी मूल्य प्राप्त करने में मदद करेगी इस बार के बजट में भारत को बाजरा या श्री अन्ना के लिए एक वैश्विक केंद्र बनाने की व्यवस्था भी की जा रही है। वैकल्पिक उर्वरकों के उपयोग को बढ़ावा देने पर केंद्रित एक योजना बेहतर उर्वरकों के साथ किसानों की मदद के लिए पीएम प्रणाम योजना भी शुरू की जाएगी। इसके अलावा सरकार 1 करोड़ किसानों को प्राकृतिक खेती अपनाने की सुविधा भी मुहैया करायेगी। मोदी सरकार में युवा सशक्तिकरण पर भी लगातार जोर दिया जा रहा है। इस संबंध में प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना 4.0 की घोषणा की गयी है। इसके माध्यम से अगले 3 वर्षों के भीतर लाखों युवाओं को कौशल विकास का अवसर प्रदान किया जायेगा। जो आन जॉब प्रशिक्षण, उद्योग साझेदारी, नए कौशल प्रशिक्षण और उद्योग की जरूरतों के साथ पाठ्यक्रमों को मिलने पर फोकस के प्रमुख क्षेत्र होंगे। अंतरराष्ट्रीय अवसर प्राप्त करने में मदद करने के लिए 30 कौशल भारत अंतरराष्ट्रीय केंद्र स्थापित किये जायेंगे। नेशनल अप्रेंटिसशिप प्रमोशन स्कीम में सुधार के साथ देशभर में 47 लाख युवाओं को डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर के माध्यम से पारिश्रमिक मिलता है। इसके अलावा यह उनकी उभरती हुई तकनीक, साफ्टवेयर और डेटा क्षेत्रों तक पहुंचने में सक्षम बनायेगा। पारंपरिक शिल्पकारों के कौशल विकास पर केंद्रित एक समर्पित योजना, पीएम विश्वकर्मा कौशल सम्मान की भी घोषणा की गयी है। इसके माध्यम से उन्नत कौशल प्रशिक्षण, आधुनिक डिजिटल तकनीकों का ज्ञान और कुशल ग्रीन टेक्नोलॉजी, ब्रांड का प्रचार, स्थानीय और वैश्विक बाजारों के साथ जुड़ाव, डिजिटल भुगतान और सामाजिक सुरक्षा के साथ-साथ वित्तीय सहायता प्रदान की जायेगी। मोदी सरकार ने महिलाओं को सशक्त करने के लिए भी अभूतपूर्व कोशिशें चला रखी है। वित्त मंत्री ने महिला सम्मान बचत प्रमाण पत्र (एक बार की छोटी बचत योजना )का प्रस्ताव दिया है। इस योजना में 7.5 प्रतिशत की निश्चित ब्याज दर के लाभ के साथ 2 साल की अवधि के लिए महिलाओं या लड़कियों के नाम पर 2 लाख तक की राशि जमा की जा सकती है। इसके अलावा ग्रामीण महिलाओं को  मोबिलाइज करने के लिए सरकार 81 लाख स्वयं सहायता समूह को धन का विस्तार करेगी।  ताकि उन्हें बड़े उत्पादक उद्यमों और समूहों में अपग्रेड किया जा सके। और इसके साथ ही महिलाओं को पूर्व में घोषित नीतियों का लाभ भी मिलता रहेगा। जो महिलाओं को और भी अधिक मजबूत करेगा। जनजातीय विकास और सशक्तिकरण भी मोदी सरकार के लिए बहुत प्रमुख विषय रहा है। बजट में आवास, स्वच्छ पेयजल, शिक्षा, सड़क और कनेक्टिविटी जैसी सुविधाओं तक पहुंच में सुधार पर ध्यान केंद्रित करने के लिए 15000 करोड़ रुपए के इन्वेस्टमेंट के साथ पीएमवी टीजी विकास मिशन की घोषणा की गई है। इसके अलावा 3.5 लाख आदिवासी छात्रों की सेवा करने वाले 740 एकलव्य मॉडल आवासीय विद्यालयों के लिए 38,800 शिक्षकों की भर्ती भी की जायेगी। इससे आदिवासी वर्गों को अपने जीवन स्तर को सुधारने में बहुत बड़ी मदद मिलेगी। वहीं, केंद्रीय केंद्रीय बजट 2023 में अनुसूचित जाति के छात्रों के लिए पोस्ट मैट्रिक छात्रवृत्ति योजना को अब तक का सर्वाधिक आवंटन 6,359. दशमलव 14 करोड़ रुपए का प्रदान किया गया है। इसी के साथ पर्यावरण को भी बजट में विशेष महत्व दिया गया है। जिससे वैश्विक पर्यावरण संरक्षण को एक नया मुकाम मिलेगा। भारत ग्रीन इकोनामी बनाने और कार्बन तटस्थ देश प्राप्त करने की दृष्टि से प्रयासरत है। इस संबंध में बजट में ऊर्जा परिवर्तन की दिशा में प्राथमिकता पूंजी निवेश के रूप में 35 हजार करोड़ रुपये आवंटित किया गया है। इसके अलावा प्रभावी ढंग से रीसाइक्लिंग और पुन: उपयोग के लिए 500 वेस्ट टू वेल्थ प्लांट स्थापित किया जायेगा। इसके लिए "10 हजार करोड़ के निवेश के साथ एक नई योजना, गोवर्धन की घोषणा भी की गयी है। इसके अलावा छोटे-छोटे सभी क्षेत्रों की भागीदारी को बजट में सुनिश्चित किया गया है और सभी के भागीदारी के साथ भारत के विकास का जो रोड मैप तैयार हुआ है, उसमें 5 ट्रिलियन अर्थव्यवस्था के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए बजट कारगर साबित होगी। आज जब पूरे विश्व की निगाहें भारत पर हैं क्योंकि हमारा देश जी-20 की अध्यक्षता कर रहा है,तब अवश्य ही यह बजट भारत को विकसित देश बनाने और पूरे विश्व में भारत की भूमिका को मजबूत करने में एक बेहतर अवसर प्रदान करेगा। (लेखिका झारखंड भाजपा प्रदेश कार्यसमिति की सदस्य हैं।)

शुरुआत से ही देशभर में हो रहा है जीएसटी का विरोध
Published / 2023-02-04 23:04:26
शुरुआत से ही देशभर में हो रहा है जीएसटी का विरोध

अजय दीप वाधवाएबीएन बिजनेस डेस्क। जब भारत में सरकार ने जीएसटी लागू करने का निर्णय लिया, तब कई राजनीतिक दलों ने कई कारणों से इसका विरोध किया। भारत सरकार के सामने एक बहुत बड़ा कार्य इन सबको जीएसटी के लिए राजी करवाना था, क्योंकि जीएसटी के लिए न सिर्फ संविधान संशोधन करवाना था बल्कि जीएसटी कानून को भी संसद से पास करवाना था। और उसके बाद सबसे बड़ा कार्य, उसे भारत के कम से कम आधे राज्यों की विधान सभाएं से भी पास करवाना था। इन सबके लिए आवश्यक था कि भारत सरकार विपक्षी दलों को भी साथ ले क्योंकि कई राज्यों में उनकी सरकारें थी। जीएसटी के पूर्व भारत में जो भी केंद्रीय कर प्रणाली होती थी उसमें उसके नियमों और दरों में परिवर्तन केंद्र सरकार समय समय पर किया करती थी। जैसा कि हम आज भी पाते हैं कि आय कर के नियमों और दरों में परिवर्तन केंद्रीय सरकार हर वर्ष अपने बजट के माध्यम से करती है और उसमें राज्य सरकारों कि कोई हस्तक्षेप नहीं होता। पर भारत सरकार, विपक्षी दलों वाली राज्य सरकारों के समर्थन लेने हेतु जीएसटी को एक विकेंद्रीकरण कर प्रणाली के रूप में लाना चाहती थी जिसके नियमों और दरों में परिवर्तन सिर्फ केंद्र सरकार के बजाए केंद्र और राज्य, दोनों सरकारों के सहयोग से, होता रहे। इसी कारण जीएसटी काउंसिल का गठन किया गया जो कि जीएसटी के दरों और नियमों में परिवर्तन करने की सबसे बड़ी नीतिगत संस्था है और भारत सरकार इसके निर्णयों को ही अधिनियम के माध्यम से देश में लागू करती है। जीएसटी काउंसिल भारत के प्रजातांत्रिक और केंद्र व राज्य सरकारों के नीतिगत मामलों में सहभागिता का ऐतिहासिक उदाहरण है। जीएसटी काउंसिल के सदस्य भारत के सभी राज्यों के वित मंत्री हैं और भारत सरकार के वित मंत्री इसकी बैठकों की अध्यक्षता करते हैं। जीएसटी के किसी भी नियम या जीएसटी की दरों में परिवर्तन जीएसटी काउंसिल करती है और भारत सरकार का कार्य महज उन निर्णयों को लागू करना होता है। जीएसटी काउंसिल का हर निर्णय दो तिहाई बहुमत से लिया जाता है। केंद्र सरकार का इसमें वोटिंग अधिकार एक तिहाई ही है, जिसका मतलब है कि एक तिहाई राज्यों के समर्थन के बिना केंद्रीय वित मंत्री भी कोई निर्णय लागू नहीं करवा सकते हैं। वे सिर्फ प्रस्ताव ला सकते हैं जिसे राज्य सरकारों के सहयोग के बाद ही दो तिहाई बहुमत से पारित किया जा सकता है।सारांश में इतना कहा जा सकता है कि जब भी हमें जीएसटी के किसी नियम में परिवर्तन या इसके नियमों में परिवर्तन करवाने की आशा हो तो हमें व्यवसायिक संगठनों के मध्यम से जीएसटी काउंसिल में अनुरोध भेजना चाहिए, क्योंकि यह ही जीएसटी कर प्रणाली की हमारे देश में सर्वोच्च नीति निर्धारक संस्था है। (लेखक सीएमए, कॉस्ट एवम मैनेजमेंट अकाउंटेट और कर सलाहकार हैं।)

बजट में सबके सपनों का सम्मान
Published / 2023-02-01 23:39:30
बजट में सबके सपनों का सम्मान

विक्रम उपाध्यायएबीएन एडिटोरियल डेस्क। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने उम्मीद से कहीं अधिक अच्छा बजट पेश किया है। जिनको भी यह आशंका थी कि देश अन्य बड़े देशों की तरह मंदी के दौर में प्रवेश कर रहा है और सरकार भी आर्थिक दुष्चक्र में फंस रही है, उन्हें घोर निराशा मिली है और जिनको यह भरोसा था कि वैश्विक स्तर पर भारत अकेला देश होने वाला है, जो न सिर्फ कोविड और युद्ध के प्रभाव से खुद को निकाल लेगा, बल्कि एक मजबूत अर्थव्यवस्था के रूप में खड़ा हो जाएगा, उसके लिए यह बजट सोने में सुहागा है। उद्योग जगत इतना गदगद है कि वह इस बजट को 10 में से 20 नंबर देने के लिए तैयार है।प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने आर्थिक सर्वेक्षण के आने के बाद कहा था कि वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण पूरा प्रयास करेंगी कि यह बजट आंकाक्षाओं और अपेक्षाओं का बजट होने के साथ एक ग्लोबल सितारा के रूप में देश को आगे बढ़ाने वाला बजट पेश करें। और ऐसा ही हुआ। वित्त मंत्री ने इस बजट में भरपूर पैसा, लगभग सभी क्षेत्रों में नई टैक्नोलॉजी का रोड मैप और भविष्य को संवारने वाला मार्ग दर्शन भी प्रस्तुत किया। 10 लाख करोड़ रुपये का पूंजीगत व्यय का बजट, 22 लाख करोड़ रुपये का कृषि लोन, 7900 करोड़ रुपया की आवास योजना, दो लाख 40 हजार करोड़ रुपये रेलवे के लिए और हजारों करोड़ रुपये की सामाजिक क्षेत्र की योजनाएं एक मजबूत अर्थव्यवस्था के बजट की गारंटी हैं। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने भारत के भविष्य को संवारने वाले कई प्रयोजनों की घोषणा की है, जिससे आने वाले साल में भारत की तस्वीर बदल सकती है।आठ साल में भारत की तस्वीर वैसे काफी बदल गई है। जब से नरेन्द्र मोदी की सरकार सत्ता में आई है, भारत में प्रति व्यक्ति की आय बढ़कर दोगुनी हो गई है। वित्त मंत्री ने बजट भाषण में यह बताया कि इस समय भारत में प्रति व्यक्ति आय एक लाख 97 हजार रुपये है जो कि अब तक का सबसे अधिक है। आज भारत में कोई भी व्यक्ति भूखा नहीं सोता। मुफ्त खाद्यान्न योजना कोविड के दौरान प्रारंभ की गई थी वह आगे एक साल के लिए और बढ़ा दी गई है और उसके लिए बजट में दो लाख करोड़ रुपये का प्रावधान कर दिया गया है। आम गरीब का जीवन सरल और सुविधायुक्त रहे, इसका प्रयास लगातार आठ साल से यह सरकार करती आ रही है और इस प्रयास का परिणाम भी सामने है। मोदी सरकार ने इस दौरान 11 करोड़ 70 लाख घरों में शौचालय का निर्माण किया है, नौ करोड़ घरों को मुफ्त एलपीजी सिलेंडर उपलब्ध कराया है, वैक्सीन की 220 करोड़ डोज मुफ्त उपलब्ध कराई गई है। पीएम जनधन स्कीम के तहत 47 करोड़ 80 लाख लोगों के खाते खुलवाए गए हैं और दो लाख 20 हजार करोड़ रुपये पीएम किसान निधि योजना के तहत देश के किसानों को सीधे लाभ पहुंचाया है।यह देश किसानों का है, उनकी आय बढ़े बिना वास्तविक तरक्की नहीं हो सकती। इस बार के बजट में मोदी सरकार ने कृषि क्षेत्र के लिए भरपूर वित्त की व्यवस्था के साथ ही उसे टेक्नोलॉजी और अनुसंधान से सीधे जोड़ दिया है। 22 लाख रुपये के कृषि लोन के प्रावधान के साथ साथ छह हजार करोड़ रुपये का अलग प्रावधान मछुआरों के लिए भी किया गया है। खेती एक विरासत है और इस विरासत को बचाने के लिए इस बजट में गजब का प्रावधान किया गया है। सरकार इस साल एक करोड़ किसानों को रासायनिक खादों के बिना एवं पूरी तरह जैविक खेती के लिए चुनेगी और उन्हें विशेष प्रोत्साहन देगी ताकि हमारी परंपरागत खेती बची रहे और रासायनिक खादों व कीटनाशकों के आयात को भी कम किया जा सके।स्टार्टअप्स के मामले में भारत विश्व में तीसरा सबसे अधिक स्टार्टअप्स वाला देश है। प्रधानमंत्री की अपेक्षा के अनुरूप इस बजट में कृषि क्षेत्र में लिए स्टार्टअप्स की भूमिका बड़ी कर दी गई है। ये स्टार्टअप्स किसानों को यह जानकारी देंगे कि किस क्षेत्र में कौन सी फसल लगाएं। देखभाल कैसे करें। इनकी उत्पादकता कैसे बढ़ाएं और इन्हें कहां और कैसे बेचे। इसी क्रम में सरकार ने सहकारी संस्थाओं को भी इस बजट के जरिए नई जिम्मेदारी है। सहकारी संस्थाएं कृषि उपजों के उचित भंडारण के लिए ढांचागत व्यवस्था का निर्माण करेंगी ताकि किसान उचित समय में अपनी उपज को बाजार में बेचकर अधिकतम मुनाफा कमा सके।कृषि के साथ सूक्ष्म, लघु और मझोले उद्योग हमारी अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं और कोरोना के बाद इन पर ही सबसे अधिक मार पड़ी है। सरकार ने आज इनके लिए कई बजटीय प्रावधानों की घोषणा की है। एक तो कोविड के दौरान परियोजनाओं को पूरा नहीं करने के कारण जिन एसएमई इकाइयों की धरोहर राशि या प्रोफारमेंस गारंटी के रूप में काटी गई राशि को जब्त कर ली गई थी, वे अब सब लौटाई जायेंगी। दूसरा दो लाख करोड़ रुपये का लोन फंड सृजित किया गया है और क्रेडिट गारंटी स्कीम के तहत बिना किसी कोलेटरल के लोन के लिए भी 9 हजार करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। एसएमई इकाइयों को सरकार केवल एक प्रतिशत ब्याज पर यह लोन जारी करेगी।इस बजट की सबसे बड़ी घोषणा पूंजीगत खर्च की राशि में बढ़ोतरी करना है। सरकार ने पिछले साल की तुलना में इस साल 33 प्रतिशत की वृद्धि के साथ 10 लाख करोड़ रुपये के कैपिटल एक्सपेंडिचर यानी पूंजीगत व्यय की घोषणा की है। पूंजीगत व्यय का आशय ऐसे खर्च से है, जिससे सराकर देश के लिए संपत्ति का निर्माण करती है। यह मुख्यतौर पर ढांचागत विकास, मशीनरी और कार्यशील पूंजी के तौर पर इस्तेमाल किया जाता है। इसका आशय है कि सरकार 10 लाख करोड़ रुपये सड़क, बंदरगाह, एयरपोर्ट, रेलवे और अन्य ट्रांसपोर्ट मोड पर खर्च करेगी। इससे देश में बड़े पैमाने पर रोजगार उत्पन्न होगा, क्योंकि ढांचागत क्षेत्र में व्यय का मतलब, सीमेंट, स्टील, ट्रांसपोर्ट और अन्य सहयोगी उद्योगों में भी विकास होना है।रही बात कर और शुल्क के ढांचे में परिवर्तन की, तो इस बजट में जहां उद्योगों के लिए राहत दी गई है। वही आम और सैलरी क्लॉस के लोगों के लिए बड़े तोहफे का ऐलान किया गया है। भारत पूरी दुनिया के लिए एक मैन्यूफैक्चरिंग हब बने इसके लिए आयात शुल्कों में कुछ छूट के ऐलान किए गए हैं, खासकर मोबाइल, टीवी, इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए जरूरी कच्चे माल के आयात को आसान बना दिया गया है। बहुत दिनों से यह कहा जा रहा था कि मध्य आयवर्ग के लिए यह सरकार कुछ नहीं कर रही है, जबकि यह वर्ग ही देश के उपभोक्ता बाजार को संभालता है। इस बजट में सारी शिकायतें दूर कर दी गई हैं। टैक्स डिडक्शन की सीमा तीन लाख करने के साथ ही अब सात लाख की आय को कर मुक्त कर दिया गया है। टैक्स स्लैब भी ऐसा बना दिया गया है कि अधिकतर करदाताओं को इसका लाभ मिल सकता है। तीन लाख तक निल और तीन से छह लाख तक केवल पांच प्रतिशत कर की दर रखी गई है। अब 15 लाख से अधिक आय वालों को ही 30 प्रतिशत का कर देना है।कुल मिलाकर इसे भविष्यपरक बजट कहा जा रहा है। यह माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में न सिर्फ भारत दुनिया का सबसे अधिक तेजी से बढ़ रही अर्थव्यस्था बना रहेगा, बल्कि पांच ट्रिलियन की इकोनोमी बनने की दिशा में तेजी से बढ़ेगा और जर्मनी एवं जापान को पीछे छोड़कर चीन और अमेरिका के बाद दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन जायेगा। (लेखक, वरिष्ठ पत्रकार हैं, ये उनके निजी विचार हैं।)

बजट शानदार और आवंटन ईमानदार
Published / 2023-02-01 23:35:59
बजट शानदार और आवंटन ईमानदार

मुकुंदएबीएन एडिटोरियल डेस्क। अमृतकाल के पहले केंद्रीय बजट की लगभग सभी ने तारीफ की है। आमतौर पर बजट पेश होने के बाद हाय-तौबा मचाने वाले शांत हैं। इस खामोशी के मायने हैं कि बजट शानदार है। इसमें हर क्षेत्र को ईमानदार आवंटन किया गया है। तभी तो केंद्रीय वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण के बजट भाषण के समापन पर मेजें थपथपाई गईं। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने प्रारंभिक प्रतिक्रिया में कहा है कि देश के विकास को इस बजट से नई ऊर्जा मिलेगी। प्रधानमंत्री ने साहसिक बजट के लिए वित्तमंत्री को बधाई दी है। उन्होंने कहा अमृत काल का पहला बजट विकसित भारत के विराट संकल्प को पूरा करने के लिए एक मजबूत नींव का निर्माण करेगा। ये बजट वंचितों को वरीयता देता है। ये बजट आज की आकांक्षी समाज, गांव, गरीब, किसान, मध्यम वर्ग सभी के सपनों को पूरा करेगा।संभवत: यह पहला ऐसा बजट है जिस पर विपक्ष के घाघ नेता भी कटाक्ष करने से बच रहे हैं। इसका सीधा अर्थ है कि बजट में ऐसा बहुत कुछ है, जो देश के मध्यम वर्ग ही नहीं, हर वर्ग के लिए फायदेमंद है। वैसे भी बजट में सात लाख रुपये तक की आय में कर को शून्य किया गया है। अपनी तल्ख टिप्पणियों के लिए प्रख्यात कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने संभवत: इसीलिए कहा है कि बजट में कुछ चीजें अच्छी हैं। मैं इसे पूरी तरह नकारात्मक नहीं कहूंगा, लेकिन अभी कई सवाल उठेंगे। बजट में मनरेगा का जिक्र नहीं है। थरूर ने कहा सरकार मजदूरों के लिए क्या करने जा रही है? बेरोजगारी और महंगाई पर नियंत्रण के लिए क्या करने जा रही है इस पर जिक्र नहीं है।इस बजट पर समाजवादी पार्टी डिंपल यादव ने जरूर असहज करने वाली टिप्पणी की है। वह इसे चुनावी बजट ठहराती हैं। उन्होंने कहा है इसमें किसानों के लिए कुछ नहीं है। रेलवे को पूरी तरह नजरअंदाज किया गया है। आधी से ज्यादा आबादी गांव में बसती है। उनके लिए कुछ नहीं किया गया है। आर्थिक मोर्चे पर डिंपल यादव की यह टिप्पणी समान विचारधारा वाले दलों के अन्य नेताओं की प्रतिक्रिया से मेल नहीं खाती।हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल मानते हैं कि अमृतकाल का पहला बजट क्रांतिकारी है। यह समाज के हर वर्ग को राहत देने वाला है। विशेषकर मध्यम वर्ग को आयकर में राहत दी गई है। नया टैक्स स्लैब राहत देने वाला है। युवा, महिला और वरिष्ठ नागरिक सभी को केंद्र ने राहत प्रदान की है। लालू यादव की पार्टी राजद के सांसद मनोझ झा इसमें रोजगार के लिए गोल-गोल बातें की गई हैं। इस खास लोगों ने खास लोगों के लिए तैयार किया है। केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी ने कहा है बजट से विपक्ष भले ही नाराज हो, पर समूचा भारत प्रफुल्लित है। डिजिटल लाइब्रेरी की स्थापना की घोषणा क्रांतिकारी कदम है। नारी शक्ति सशक्त राष्ट्र का निर्माण कैसे कर सकती है इसका प्रतिबिंब इस बजट में है। इसे आगे बढ़ाते हुए केंद्रीय मंत्री वीके सिंह का कहते हैं कि इस बजट में अगले 25 सालों के लिए भारत कैसे आगे बढ़े, उसकी नींव रखी गई है। दूसरे मंत्री प्रह्लाद पटेल का नजरिया विश्वास से लबरेज है। वह इसे अमृतकाल में सरकार का रोडमैप बताते हैं। बड़ी बात यह कहते हैं कि हम दुनिया में अपनी अर्थव्यवस्था को 10वें से पांचवें स्थान पर ले आए इससे बेहतर और कुछ नहीं हो सकता।कांग्रेस सांसद कार्ति चिदंबरम ने ना-नुकुर करते हुए खुलेदिल से इसकी तारीफ की है। उन्होंने कहा कि बजट का बड़ा हिस्सा राष्ट्रपति के अभिभाषण और आर्थिक सर्वेक्षण रिपोर्ट की पुनरावृत्ति है। टैक्स में किसी भी तरह की कटौती का स्वागत है। लोगों के हाथ में पैसा देना अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने का सबसे अच्छा तरीका है। जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री फारूक अब्दुल्ला भी खुश हैं। उन्होंने कहा है कि सुखद यह है कि बजट में मध्यम वर्ग को मदद दी गई है। सबको कुछ न कुछ दिया गया है। डेढ़ घंटे तक हमने बजट सुना है। केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉ मनसुख मांडविया का मानना है कि यह प्रगति, उन्नति और नई गति का बजट है। रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने कहा है केंद्रीय बजट किसानों, महिलाओं, हाशिये पर पड़े वर्गों एवं मध्यम वर्ग को सहायता प्रदान करने की प्राथमिकता के साथ विकास एवं कल्याण पर केंद्रित है। बजट के प्रस्तावों से देश को कुछ वर्षों के भीतर ही पांच ट्रिलियन (पांच हजार अरब) डॉलर की अर्थव्यवस्था और विश्व की शीर्ष तीन अर्थव्यवस्थाओं में से एक बनने के लक्ष्य को पूरा करने में मदद मिलेगी। (ये लेखक के निजी विचार हैं।)

भारतीय विदेश नीति में आक्रामकता जरूरी!
Published / 2023-02-01 23:33:03
भारतीय विदेश नीति में आक्रामकता जरूरी!

डॉ अनिल कुमार निगमएबीएन एडिटोरियल डेस्क। विदेश में खालिस्तान समर्थित समूहों की बढ़ती गतिविधियां भारत की एकता, अखंडता और शांति व्यवस्था के लिए संकट बनती जा रही हैं। अमेरिका और ब्रिटेन के बाद कनाडा और आॅस्ट्रेलिया में पाकिस्तान समर्थित खालिस्तान समूहों द्वारा भारत के खिलाफ षड़यंत्र तेज हो गया है। आॅस्ट्रेलिया में जिस तरीके से खालिस्तान समर्थकों ने भारतीयों पर हमला किया और राष्ट्रीय ध्वज का अपमान किया, वह हर भारतीय की आन, बान और शान पर न केवल हमला है बल्कि यह भारत की अस्मिता पर आघात है।दिल्ली में सिख फॉर जस्टिस रेफरेंडम 2020 और खालिस्तान के देश विरोधी स्लोगन लगाने के मामले में दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने देश विरोधी गतिविधियों में शामिल कुछ संदिग्धों की पहचान भी की है। लेकिन सुरसा की मुंह की तरह बढ़ रही इस समस्या के प्रति केंद्र सरकार को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अधिक गंभीर और आक्रामक होने की आवश्यकता है। विदित है कि ऑस्ट्रेलिया में खालिस्तान समर्थकों का उत्पात लगातार बढ़ता जा रहा है। खालिस्तान समर्थक समूहों द्वारा ऑस्ट्रेलिया के मेलबर्न में राष्ट्रीय ध्वज लेकर जा रहे भारतीयों पर हमला करने का एक वीडियो सामने आया है। खालिस्तान समर्थक अपना खुद का झंडा हाथ में लिए हैं। वे राष्ट्रीय ध्वज लिए लोगों पर हमला कर देते हैं और भारत के राष्ट्रीय ध्वज का अपमान भी करते हैं। मौके पर ऑस्ट्रेलिया की पुलिस भी खड़ी है और वह उत्पात मचाते लोगों को शांत कराने की कोशिश कर रही है। इस हमले में पांच लोग घायल हुए। एक युवक को अस्पताल में भर्ती कराया गया।ध्यातत्व है कि पहले भी ऑस्ट्रेलिया में खालिस्तानी समर्थकों का उत्पात देखने को मिला है। ऑस्ट्रेलिया में एक पखवाड़े के अंदर तीन बार हिंदू मंदिरों पर हमला हुआ। खालिस्तानियों ने तीन मंदिरों को निशाना बनाकर तोड़फोड़ की थी और उनकी दीवारों पर भारत विरोधी नारे लिखे थे। उन्होंने खालिस्तान के समर्थन में उत्तेजक बातें भी दीवारों पर लिखी थीं। यह घटना भारत के लिए तो चिंताजनक है ही, ऑस्ट्रेलिया की सरकार के लिए भी एक चुनौती है जिसने कुछ दिन पहले खालिस्तानी तत्वों को काबू करने को लेकर एक अहम सुरक्षा बैठक की थी।ऑस्ट्रेलिया में काफी समय से खालिस्तान समर्थकों की गतिविधियों को समर्थन मिल रहा है। सोशल मीडिया पर उनकी असामाजिक गतिविधियां जोरों पर चल रही हैं। एएनआई की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि विवादित पोस्टर सोशल मीडिया पर धड़ल्ले से प्रसारित हो रहे हैं। इस तरह के पोस्टर पर सतवंत सिंह और केहर सिंह की तस्वीरें लगी हैं। सतवंत सिंह वही सुरक्षा कर्मी था जिसने प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या की थी। जबकि केहर सिंह को उनकी हत्या की साजिश के आरोप में फांसी की सजा दी गई थी।कनाडा में भी भारत विरोधी गतिविधियां काफी बढ़ गई हैं। भारतीय विदेश मंत्रालय और कनाडा में भारतीय उच्चायोग ने इन घटनाओं को कनाडा प्रशासन के सामने उठाया और उनसे इन अपराधों में उचित कार्रवाई की मांग की है। हालांकि भारत विरोधी गतिविधियों में संलिप्त अपराधियों को अब तक समुचित सजा नहीं मिली है। यही कारण है कि विदेश मंत्रालय ने भारतीयों के लिए एक एडवाइजरी भी जारी की। इसमें कनाडा में रहने वाले भारतीयों को वहां बढ़ रही सांप्रदायिक हिंसा और भारत विरोधी गतिविधियों के लिए चेताया गया। यही नहीं, अमेरिका में पाकिस्तान समर्थित खालिस्तानी अलगाववादी समूहों द्वारा भारत विरोधी गतिविधियां चल रही हैं जिस पर भारत ने भी चिंता व्यक्त की है।भारत के हिंदू नेताओं और बड़े राजनेताओं की टारगेट किलिंग की साजिश की खबरें भी आई हैं। खुफिया एजेंसियों के अनुसार इस तरह की साजिश में पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई का हाथ है। ज्ञात हुआ है कि आईएसआई ने खालिस्तानी आतंकियों और पंजाब से फरार होकर विदेश में बैठे अपराधी तत्वों के जरिए पंजाब में हिंदू नेताओं को मारने की साजिश रची है। वास्तविकता तो यह है कि लगभग एक साल से खालिस्तान आंदोलन फिर से चर्चा में आ गया है।पंजाब ने आतंकवाद का अत्यंत डरावना और काला दौर देखा है। वर्ष 1980 और 90 के दशक में पंजाब का प्रशासन और आम जनजीवन बुरी तरह से अस्त-व्यस्त हो गया था। सुबह घर से निकला व्यक्ति शाम को घर वापस आएगा भी, इसकी कोई गारंटी नहीं होती थी। पंजाब केसरी अखबार के संपादक लाला जगत नारायण और उनके पुत्र रमेश समेत हजारों लोगों की हत्या कर दी गई थी। सरकार बहुत ही मशक्कत के बाद पंजाब को आतंकवाद से मुक्त करा सकी थी।दिल्ली में सिख फॉर जस्टिस रेफरेंडम 2020 और खालिस्तान के समर्थनमें नारे लगाने के मामले में दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने देश विरोधी गतिविधियों में शामिल कुछ संदिग्धों की पहचान की है। सुरक्षा एजेंसियों को इस बात की आशंका है कि दिल्ली से जिन संदिग्धों की पहचान हुई है वे सभी स्लीपर सेल हो सकते हैं। इसी वर्ष जनवरी महीने में दिल्ली के जनकपुरी, तिलक नगर, पश्चिम विहार समेत 12 स्थानों पर खालिस्तान के समर्थन में दीवारों पर लगाए पोस्टर विदेशी साजिश का हिस्सा हैं। पोस्टर लगाने के ही मामले में दिल्ली पुलिस ने हाल में ही एफआईआर दर्ज की थी और कुछ लोगों को हिरासत में लिया। पुलिस की जांच में यह पता चला है कि विदेश में बैठे गुरपंत सिंह पन्नू के इशारे पर दिल्ली में खालिस्तान की एंट्री हुई थी। सुरक्षा एजेंसियों के मुताबिक दोनों को देश की राजधानी दिल्ली में देश विरोधी गतिविधियों को अंजाम देने के लिए फंडिंग की गई थी। वर्ष 2020-21 किसान आंदोलन के दौरान खालिस्तान समर्थक समूहों द्वारा विदेशी फंडिंग की बात पहले ही साबित हो चुकी है।पिछले एक वर्ष में खालिस्तान को समर्थन देने के मामले में विदेश की धरती पर जिस तरीके से साजिश रची जा रही है, वह अत्यंत गंभीर मामला है। हालांकि भारत सरकार इसको लेकर आस्ट्रेलिया और कनाडा वार्ता कर रही है, पर सरकार को इस मुद्दे को लेकर अधिक आक्रामक होने की आवश्यकता है। जी-20 के माध्यम और अमेरिका सहित यूरोपीय देशों के समक्ष पाकिस्तान को और अधिक एक्पोज करने की आवश्यकता है। भारत, कनाडा और आस्ट्रेलिया सहित अन्य देशों के साथ ऐसे समझौता करे कि वे अपनी धरती का इस्तेमाल भारत विरोधी गतिविधियों के लिए किसी भी कीमत पर न होने दें। इसके अलावा भारत सरकार पंजाब सहित देश के युवाओं को अधिक से अधिक जागरूक करे कि वे देश की मुख्यधारा के साथ चलें और दिग्भ्रमित होने से बचें। इसी में उनका और देश हित निहित है। (लेखक, स्वतंत्र टिप्पणीकार हैं।)

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