झारखंड में कहर ढा रहा डेंगू, 39 नये केस मिले, अबतक 1447 मरीजों की पुष्टिटीम एबीएन, रांची। झारखंड में डेंगू के मरीजों की संख्या में रोज इजाफा हो रहा है। स्वास्थ्य विभाग के आंकड़े के मुताबिक गुरुवार को राज्य में डेंगू के 39 नये मरीज मिले हैं। इनमें 26 पूर्वी सिंहभूम, 9 साहिबगंज व 4 धनबाद के हैं। इस बीच, गुरुवार को टीएमएच जमशेदपुर में डेंगू पीड़ित एक आठ साल के बच्चे की मौत हो गयी। राज्य में अबतक 1447 डेंगू मरीजों की पुष्टि हुई है, जिनमें 901 पूर्वी सिंहभूम के हैं। रांची में 69 मरीज मिल चुके हैं। आरडीपी से नहीं हो रहा अत्यधिक लाभ चिकित्सकों के अनुसार डेंगू से मिलने वाले सिर्फ दस फीसदी मरीजों को ही प्लेटलेट्स की कमी हो रही है। जिनका प्लेटलेट्स कम हो रहा है उन्हें सिंगल डोनर प्लेटलेट्स की जरूरत पड़ रही है। आरडीपी से मरीजों को बहुत अधिक लाभ नहीं हो रहा है। पर, ब्लड बैंक में सिंगल डोनर प्लेटलेट्स के लिए किट न्यूनतम साढ़े नौ हजार रुपये में मिल रहा है। ऐसे में निम्न आय वर्ग के लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
एक और महामारी को लेकर डब्ल्यूएचओ की चेतावनीएबीएन हेल्थ डेस्क। कोरोना महामारी ने पूरी दुनिया पर असर डाला। इसकी यादें आज भी लोगों के जेहन में कैद हैं। इस महामारी ने लाखों लोगों की जान ली है। हाल ही में इस महामारी से हम उबरे ही थे कि वैज्ञानिकों ने एक संभावित महामारी को लेकर चिंता व्यक्त की है। इस महामारी को विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने डिजीज एक्स का नाम दिया है। डब्ल्यूएचओ ने चेताया है कि यह महामारी दुनिया में फैलना आरंभ हो चुकी है। यूके के हेल्थ एक्सपर्ट्स ने डिजीज एक्स को लेकर कहा कि जल्द ही एक नयी महामारी के रूप उभर सकती है। ये कोविड-19 से ज्यादा घातक साबित हो सकती है। 1918-1920 में स्पैनिश फ्लू ने दुनिया में हाहाकार मचाया था। इससे दुनिया भर में 5 करोड़ लोगों की जान चली गयी थी। डिसीज एक्स के कारण भी इतनी मौत होने की उम्मीद है। यूके की वैक्सीन टास्कफोर्स की चेयरमेन रहीं डेम केट बिंघम के अनुसार, डिसीज एक्स कोरोना वायरस से 7 गुना ज्यादा खतरनाक महामारी हो सकती है। यह करीब 5 करोड़ लोगों की जान ले सकती है।डब्ल्यूएचओ की रिपोर्ट के अनुसार, दुनिया भर में कोरोना से लगभग 70 लाख मौतें हुई थीं। इस महामारी ने चिंताओं को बढ़ा दिया है। अब डिसीज एक्स को कोरोना से भी अधिक घातक बताया जा रहा है। आइये जानने की कोशिश हैं कि डिसीज एक्स है क्या, कैसे फैलता है, इससे बचने के उपाए क्या है?डिसीज एक्स क्या है? डिसीज एक्स एक टर्म की तरह है। इसका प्रयोग ऐसी बीमारी के बारे में बताने को लेकर किया जाता है जो इंफेक्शन से फैल जाती है। इसे लेकर मेडिकल साइंस भी अनजान है। डब्ल्यूएचओ के अनुसार, डिसीज एक्स बिना किसी उपचार वाला एक नया वायरस है। ये जीवाणु, बैक्टीरिया या फंगस भी हो सकता है। विशेषज्ञों का कहना है, डिसीज एक्स एक रोगजनक एक्स के कारण हो सकता है. ये दूसरी बीमारी के फैलने कारण होता है। यह आरएनए वायरस की तरह जूनोटिक बीमारी से जुड़ा हो सकता है। यह जंगली या घरेलू जानवरों में होगा और फिर उनसे इंसानों में फैलने की उम्मीद लगायी जा रही है। कई विशेषज्ञों के अनुसार, लैब में होने वाली दुर्घटनाएं और बायोटेररिज्म की वजह से डिसीज एक्स हो सकता है जो संभावित रूप से वैश्विक विनाशकारी हो सकता है।
रक्तचाप और स्ट्रोक की मुख्य वजह, कई बीमारियों की जतायी आशंकाएबीएन हेल्थ डेस्क। भारतीय अपने भोजन में जरूरत से ज्यादा नमक का सेवन कर रहे हैं। एक सर्वेक्षण में सामने आया है कि प्रत्येक भारतीय रोजाना आठ ग्राम नमक खा रहा है, जबकि रोजाना अधिकतम पांच ग्राम नमक ही पर्याप्त है। अधिक नमक रक्तचाप (बीपी), ब्लॉकेज और स्ट्रोक जैसी बीमारियों की वजह बन रहा है। राष्ट्रीय एनसीडी निगरानी सर्वेक्षण (एनएनएमएस) की रिपोर्ट में भारतीयों के यूरिन में सोडियम की मात्रा भी अधिक पायी जा रही है। इस रिपोर्ट को बंगलूरू स्थित भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद-राष्ट्रीय रोग सूचना विज्ञान और अनुसंधान केंद्र (आईसीएमआर- एनसीडीआईआर) के शोधकर्ताओं ने पूरा किया है। सर्वे में भाग लेने वालों की यूरिन जांच दिल्ली स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) के डॉक्टरों ने की है।गैर संचारी रोगों को लेकर उच्च सोडियम युक्त आहार लोगों के लिए नुकसानदायक हो सकता है। डब्ल्यूएचओ ने सभी सदस्य देशों से कहा है कि एक व्यक्ति के लिए दिनभर में अधिकतम पांच ग्राम नमक का सेवन ही काफी होता है, लेकिन भारत में इससे 60 फीसदी अधिक नमक खा रहे हैं।महिलाओं की तुलना में पुरुषों को नमक ज्यादा पसंदमेडिकल जर्नल नेचर में प्रकाशित सर्वेक्षण में शोधकर्ताओं ने बताया कि देश के 150 केंद्रों पर दो तरह से 12 हजार लोगों पर अध्ययन किया गया। इनमें से एक समूह के यूरिन नमूने लेकर जांच की गयी, जबकि दूसरे समूह से बातचीत से सर्वे पूरा किया। 18 से 69 साल की आयु के 10,659 लोगों ने सर्वे में भाग लिया, जिनमें से 2,266 की यूरिन जांच की गयी।महिलाओं की तुलना में पुरुषों को नमक का स्वाद ज्यादा पसंद है। इतना ही नहीं, शहरी लोग नमकीन और चिप्स के जरिये नमक का अधिक सेवन कर रहे हैं, जबकि ग्रामीण क्षेत्रों में लोग भोजन के साथ चुटकी भर नमक ऊपर से लेते हैं।गैस्ट्रिक कैंसर जैसी बीमारियों का भी खतराएनसीडीआईआर के निदेशक डॉ. प्रशांत माथुर ने बताया, आहार में सोडियम का उच्चस्तर स्ट्रोक और हृदय विफलता के जोखिम को भी बढ़ाता है। नमक के सेवन के हानिकारक हृदय संबंधी प्रभावों के अलावा यह गैस्ट्रिक कैंसर के लिए एक संभावित जोखिम कारक भी हो सकता है। भारत में गैर संचारी रोगों का भार काफी अधिक है।सालाना होने वाली कुल मौतों में अकेले हृदय रोगों (सीवीडी) का अनुमान 28.1 फीसदी है। इतना ही नहीं, साल 1990 में 7.8 लाख मौतों की तुलना में 2016 में 16.3 लाख मौतें उच्च रक्तचाप के कारण हुईं।
24 साल का हेल्थ वर्कर संक्रमित, अलर्ट जारीएबीएन सेंट्रल डेस्क। केरल के कोझिकोड जिले में निपाह वायरस के एक और मामले की पुष्टि हुई है। राज्य की स्वास्थ्य मंत्री वीना जॉर्ज ने बुधवार को यह जानकारी दी। स्वास्थ्य मंत्री वीना जॉर्ज ने एक बयान में कहा कि एक निजी अस्पताल के 24 वर्षीय स्वास्थ्य कर्मी के निपाह वायरस से संक्रमित होने की पुष्टि हुई है। इसके साथ ही केरल में निपाह वायरस से संक्रमित होने वाले लोगों की संख्या बढ़कर पांच हो गयी है। राज्य सरकार ने वायरस को फैलने से रोकने के लिए रोकथाम क्षेत्र और प्रतिबंधों की घोषणा कर दी है। जिसके बाद मरीजों के संपर्क में आये लोगों की सूची भी चिंता का कारण बन गई है क्योंकि 700 लोग मरीजों के संपर्क में आए हैं। केरल की स्वास्थ्य मंत्री वीना जॉर्ज ने कहा कि इन 700 में से लगभग 77 लोग हाई रिस्क की श्रेणी में हैं। निपाह से संक्रमित लोगों के लिए राज्य सरकार ने कई तरह की गाइडलाइंस बनाई हैं। उच्च जोखिम वाले निपाह रोगियों को अपने घरों के अंदर रहने के लिए कहा गया है। निपाह के जिन दो मरीजों की मौत हुई है, उनके रूट प्रकाशित कर दिए गए हैं, ताकि लोग उन रास्तों का उपयोग बिल्कुल भी न करें। इसके साथ ही निपाह वायरस के बढ़ते मामलों को देखते हुए कोझिकोड में त्योहारों और समारोहों में बड़ी संख्या में लोगों के इकट्ठा होने पर भी रोक लगा दी गई है। कर्नाटक में दक्षिण कन्नड़ जिला प्रशासन ने जिले में अलर्ट जारी कर दिया है। स्वास्थ्य विभाग ने पुलिस से जिले में प्रवेश करने वाले वाहनों की जांच के लिए सीमा पर चेकपोस्ट खोलने को कहा है। पुलिस को केरल से राज्य में प्रवेश करने वाले फलों की जांच करने का निर्देश दिया गया है।
पांच बीमारी को छोड़ सभी प्रकार की बीमारी का होगा इलाजटीम एबीएन, कोडरमा। न्यू कॉलोनी कोडरमा में नेचुरोपैथी सेन्टर का विधिवत उद्घाटन हजारीबाग के सुरेंद्र कुमार पांडेय के द्वारा फीता काट कर किया गया। मौके पर सेंटर में पूजा कर वातावरण को शुद्ध किया गया।वहीं उद्घाटन में आये लोगों को इसके बारे में बताते हुए गौतम कुमार पांडेय ने कहा कि नेचुरोपैथी के माध्यम से पांच बीमारी को छोड़कर जिसमें एक्सीडेंटल, डिलीवरी, पोलियो ग्रसित, सीरियस रोगी और 90 वर्ष से ऊपर के व्यक्ति को छोड़कर हर प्रकार के रोग का ईलाज किया जायेगा।आगे उन्होंने बताया कि यहां पर फियोथैरेपी और आयुर्वेद के माध्यम से गारंटी के साथ ईलाज किया जायेगा। साथ ही एक अच्छा प्लेटफार्म भी दिया जायेगा। इसमें पुराने से पुराने रोग जैसे बांझपन, लकवा, गठिया इत्यादि का इलाज किया जायेगा।मौके पर सेंटर के संचालक सत्यम कुमार मेहता, चंद्रप्रकाश चौधरी, करण कुमार सन्तोष, विनोद कुमार पांडेय, चंदन कुमार, विक्रम कुमार, गौतम कुमार, सुनील कुमार, मुकेश कुमार के साथ काफी संख्या में लोगउपस्थित थे।
विश्व में प्रदूषित वायु से प्रत्येक वर्ष असमय हो जाती है 70 लाख लोगों की मौत : गुटेरसएबीएन सेंट्रल डेस्क। संयुुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनिया गुटेरेस ने बुधवार को कहा कि दुनिया भर में प्रत्येक वर्ष प्रदूषित वायु से 70 लाख से अधिक लोगों की असमय मौत हो जाती है। गुटेरेस ने आज यहां सात सितंबर को मनाये जाने वाले नीले आकाश के लिए स्वच्छ वायु का अंतरराष्ट्रीय दिवस पर यह बात कही। उन्होंने कहा कि विश्व की करीब 99 प्रतिशत आबादी कालिख, गन्धक और विषैले रासायनों वाली वायु में सांस ले रही है और इसका वैश्विक तापमान में वृद्धि से गहरा संबंध है। यहां जारी बयान में उन्होंने कहा कि वायु प्रदूषण की समस्या निम्न एवं मध्यम आय वाले देशों में अधिक गंभीर है। उन्होंने कहा कि वायु प्रदूषण किसी सीमा में नहीं बंधा रहता और इसके दूषक तत्व हजारों किलोमीटर तक फैलते जाते है। प्रत्येक महाद्वीप पर जलवायु संकट का विनाशकारी प्रभाव बढ़ता जा रहा है। उन्होंने कहा कि वैश्विक समस्याओं के समाधान के लिए हमें मिलकर स्वच्छ वायु के लिए काम करना होगा। उन्होंने कहा कि हमें जीवाश्म ईंधन, विशेषकर कोयले का उपयोग कम करने, स्वच्छ अक्षय उूर्जा को बढ़ावा देना होगा। उन्होंने कहा कि इस लक्ष्य के लिए मैंनेे एक जलवायु एकजुटता संधि का प्रस्ताव रखा है। जिसकेे अंतर्गत सभी बड़े उत्सर्जकों को अपने उत्सर्जन को कम करने का प्रयास करेंंगे और संपन्न देश वित्तीय और तकनीकी सहायता जुटायेंगे। उन्होंने कहा कि मैंने एक एक्सिलरेशन एजेण्डा का प्रस्ताव भी रखा है।उन्होंने आग्रह किया हैै कि सभी देश इसे लागू करे। उन्होंने कहा कि हमें रसोई में स्वच्छ ईंधन और विद्युत वाहनों के उपयोग को बढ़ावा देना होगा। हमें लोगों को पैदल और साइकिल से चलने के लिए प्रोत्साहित करना और जिम्मेदारी से कचरा प्रबंधन का व्यवहार में लाना होगा। उन्होंने कहा कि आने वाली पीढ़ियों को एक स्वस्थ पृथ्वी के लिए वायु सर्वहितकारी और सबकी जिम्मेदारी को अपनाना होगा।
एबीएन हेल्थ डेस्क। विश्व स्वास्थ्य संगठन-डब्ल्यूटीओ ने पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों के कठोर वैज्ञानिक परीक्षण की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा है कि सभी के स्वास्थ्य और कल्याण के लिए इनका समग्रता और बेहतर समझदारी के साथ आकलन किया जाना चाहिए। आयुष मंत्रालय ने सोमवार को यहां बताया कि डब्ल्यूटीओ ने प्रथम डब्ल्यूएचओ पारंपरिक चिकित्सा वैश्विक शिखर सम्मेलन 2023 का गुजरात घोषणापत्र जारी कर दिया है। मंत्रालय के अनुसार डब्ल्यूटीओ का गुजरात घोषणापत्र वैश्विक प्रतिबद्धता और सभी के लिए स्वास्थ्य एवं कल्याण का लक्ष्य पाने के लिए पारंपरिक चिकित्सा क्षमता के उपयोग की पुष्टि करता है।घोषणापत्र ने स्वदेशी ज्ञान, जैव विविधता और पारंपरिक, पूरक और एकीकृत चिकित्सा के प्रति वैश्विक प्रतिबद्धताओं की पुष्टि की है। डब्ल्यूएचओ ने कहा है कि पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों के लिए समग्रता, संदर्भ-विशिष्ट, बेहतर समझ, आकलन और कठोर वैज्ञानिक तरीकों के प्रयोग की आवश्यकता है।इस पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए केंद्रीय आयुष मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने कहा कि गुजरात घोषणापत्र पारंपरिक चिकित्सा प्रणाली के हमारे प्राचीन ज्ञान को बढ़ावा देने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की प्रतिबद्धता का प्रमाण है।डब्ल्यूएचओ के महानिदेशक टेड्रोस अघानाम घेब्रेयेस ने कहा कि गुजरात घोषणापत्र विज्ञान के माध्यम से पारंपरिक चिकित्सा की क्षमता का दोहन करने के लिए एक उत्प्रेरक के रूप में काम करेगा और राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्रणालियों में पारंपरिक औषधियों के एकीकरण पर फोकस करेगा और पारंपरिक चिकित्सा की शक्ति प्रकट करने में मदद करेगा। पारंपरिक चिकित्सा पर पहला वैश्विक शिखर सम्मेलन विश्व स्वास्थ्य संगठन और आयुष मंत्रालय ने 17-18 अगस्त को गांधीनगर, गुजरात में आयोजित किया था।
टीम एबीएन, रांची। देश के प्रसिद्ध हॉस्पिटल चेन्नई महिपाल के हृदय रोग, हड्डी और अन्य रोगों के विशेषज्ञ डॉक्टर की सेवा झारखंड वासियों को 1 सितंबर से रांची में ही उपलब्ध हो जायेगी। यह सुविधा राजधानी के लालपुर स्थित कमल फार्मा में मिलेगी, जहां आज इंडिया ट्रीटमेंट डॉट कॉम का उद्घाटन किया गया। मुख्य अतिथि रांची के सांसद संजय सेठ ने आज इंडिया ट्रीटमेंट डॉट कॉम के कार्यालय का उद्घाटन कमल फार्मा लालपुर चौक में किया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि रांची में चिकित्सा सहायता केंद्र का खुलना एक बहुत बड़ी सेवा है। इससे मरीजों की समस्याओं का समाधान तो तुरंत हो जायेगा। इसके अलावा दिल्ली, कोलकाता, चेन्नई और मुंबई के बड़े अस्पतालों के डॉक्टर यहां बैठेंगे। इससे रांची सहित झारखंड के लोगों को इलाज के लिए बाहर के राज्यों में नहीं जाना पड़ेगा। रांची के पूर्व डिप्टी मेयर संजीव विजयवर्गीय ने कहा की बीमारी किसी भी परिवार के लिए सबसे परेशानी वाला सबब होता है। ऐसे समय में बीमार व्यक्ति और उनके परिजनों को सहायता की जरूरत होती है। रांची में इंडिया ट्रीटमेंट डॉट कॉम द्वारा मरीजों और उनके परिजनों को मेडिकल सुविधा मुहैया करायी जायेगी, जो अनूठी पहल है। चेंबर आफ कॉमर्स के पूर्व अध्यक्ष कुणाल अजमानी ने कहा इस संस्था के माध्यम से मरीजों को रांची में ही देश के बड़े हॉस्पिटल के डॉक्टर उपलब्ध कराया जा रहा है और उन्हें इलाज में सहयोग किया जायेगा। जो झारखंड और रांची के लिए पहली और अनूठी पहल है। रांची इंडिया ट्रीटमेंट डॉट कॉम के एसोसिएट पार्टनर बजरंग वर्मा और कमल नाथ महतो ने बताया कि सितंबर महीने से चेन्नई के प्रसिद्ध महिपाल अस्पताल के हृदय, हड्डी सहित अन्य रोगों के विशेषज्ञ डॉक्टर यहां अपनी सेवा देंगे। जिससे रांची समेत झारखंड के जिलों के मरीजों को इलाज के लिए बाहर नहीं भटकना पड़ेगा। इसके अलावा हमारी संस्था की ओर से यदि कोई पेशेंट इलाज के लिए बाहर जाते हैं। तो उनकी सारी व्यवस्था वाहन, ठहरने के लिए रूम के साथ संबंधित हॉस्पिटल में इलाज में मरीजों और उनके परिजनों को सहयोग किया जायेगा। उद्घाटन कार्यक्रम में इंडिया ट्रीटमेंट डॉट कॉम के सीईओ सुमित वैद्य, एसपी चट्टोराज, महिला रोग विशेषज्ञ डॉ करुणा शाहदेव, वार्ड 11 के पूर्व पार्षद अभय कुमार सिंह, रमेश सिंह, अजय पोद्दार, श्रीराम शर्मा, बसंत दास, अजय गुप्ता सहित कई लोग उपस्थित थे।
एबीएन हेल्थ डेस्क। दिल्ली के एक निजी अस्पताल के चिकित्सकों ने रोबोट की मदद से एक जटिल गाल ब्लैडर सर्जरी को सफलतापूर्वक अंजाम दिया है। फोर्टिस अस्पताल शालीमार के रोबोटिक- लैप जीआई ओंकोलॉजी, बेरियाट्रिक एंड मिनीमल इन्वेसिव सर्जरी के प्रधान निदेशक एवं विभागाध्यक्ष डॉ प्रदीप जैन ने गुरुवार को यहां संवाददाताओं को बताया कि 36 वर्षीय महिला का गॉल ब्लैडर आसपास फैली छोटी आंत एवं बड़ी आंत में बुरी तरह से फंसा हुआ था और बाइल डक्ट भी फंसी थी। डॉ जैन ने बताया कि पीड़ित महिला का सीटी स्कैन और पेट स्कैन किया गया और रोबोट की मदद से उनका गालब्लैडर निकालने का फैसला किया गया। उन्होंने बताया कि महिला का इलाज समय पर इलाज न किया जाता तो गालब्लैडर आसपास के अंगों से और चिपक सकता था। उनके गॉलब्लैडर की दीवार भी सख्त हो गयी थी। उन्होंने कहा, हमने सफलतापूर्वक उनकी रोबोटिक सर्जरी की। रोबोटिक-असिस्टेंस से की जाने वाली सर्जरी खासतौर से इस प्रकार की जटिल और चुनौतीपूर्ण प्रक्रियाओं में काफी संभावनाओं से भरपूर है। उन्होंने कहा कि पारंपरिक सर्जरी की तुलना में रोबोटिक सर्जरी काफी फायदेमंद होती है। इसके प्रयोग के लिए लचीले उपकरणों के साथ-साथ बाइल डक्ट को ठीक प्रकार से देखने के लिए विशेषज्ञ तकनीकों का भी लाभ मिलता है।
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