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बोर्ड परीक्षा के समय तनाव व अनिद्रा की समस्या बच्चों के लिए बन सकता है, खतरा बचाव के लिए करें योग-प्राणायाम : योगाचार्य महेश पाल
Published / 2025-02-01 18:49:00
बोर्ड परीक्षा के समय तनाव व अनिद्रा की समस्या बच्चों के लिए बन सकता है, खतरा बचाव के लिए करें योग-प्राणायाम : योगाचार्य महेश पाल

एबीएन हेल्थ डेस्क। अभी हाल ही मैं बोर्ड परीक्षाएं प्रारंभ होने जा रही है। इस समय विद्यार्थियों को तनाव, डिप्रेशन, अनिद्रा एवं स्वास्थ्य संबंधी बहुत सी समस्याओं का सामना करना पड़ता है। योगाचार्य महेश पाल बताते हैं कि परीक्षा के दिनों में जहां विद्यार्थियों से सबसे अच्छे अंक लाने की ज्यादा अपेक्षा की जाती है। वहीं माता-पिता को अपने बच्चों के उज्ज्वल भविष्य की चिंता सताती है। परीक्षा के समय पैदा हुए ऐसे माहौल से बच्चों में मानसिक दबाव इतना बढ़ जाता है कि कभी-कभी वे परीक्षा ही नहीं दे पाते या फेल हो जाते हैं। इसके परिणामस्वरूप कई बच्चे अवसाद (डिप्रेशन) में चले जाते हैं। यहां तक कि कुछ बच्चे आत्महत्या तक कर लेते हैं। बीते सालों में ऐसी कई घटनाएं सामने आयी हैं, जिनमें परीक्षा में खराब प्रदर्शन या अच्छे अंकों से पास नहीं होने की वजह से बच्चों ने गलत कदम उठाये, ऐसे में परीक्षा के दौरान होने वाले तनाव के कारणों से होता है। ऐसे कई कारण हमारे सामने नजर आये है जिसमें, माता- पिता कई बार अपने बच्चे की तुलना दूसरे बच्चों से करने लगते हैं। इसका बच्चे के मस्तिष्क पर गलत प्रभाव पड़ता है। ऐसे में माता-पिता और रिश्तेदारों की महत्वाकांक्षाओं पर खरा न उतरने पर विद्यार्थियों का आत्मविश्वास कम हो सकता है। इसका सीधा असर परीक्षा प्रदर्शन पर पड़ता है,  कई बार विद्यार्थी अपने दोस्तों व अन्य सहपाठियों से प्रतियोगिता करने लगता है। ऐसे में अगर परीक्षा में कम अंक आयें, तो दोस्त विद्यार्थी का मजाक बनाते हैं। वहीं, फेल होने पर दोस्तों से अलग होने का डर भी हो जाता है। एग्जामोफोबिया - मतलब परीक्षा का डर। कई विद्यार्थियों परीक्षा को लेकर यही सोचते हैं कि वे अच्छा प्रदर्शन नहीं कर पायेंगे। उन्हें हर समय परीक्षा से जुड़े बुरे विचार ही मन में आते हैं। इस कारण वे परीक्षा में अच्छा प्रदर्शन नहीं कर पाते। अधिक नींद आना या बिल्कुल भी नींद न आना, याददाश्त को मजबूत करने के लिए अच्छी नींद बेहद जरूरी है, जो परीक्षा के तनाव में बच्चे नहीं लेते हैं। कुछ विद्यार्थी इस दौरान बिल्कुल नहीं सोते हैं तो कुछ बहुत अधिक सोते हैं। परीक्षा में अच्छे प्रदर्शन करने के लिहाज से ये दोनों स्थितियां सही नहीं हैं। इन सभी कारणों को देखते हुए बोर्ड परीक्षा के समय विद्यार्थियों को तनाव डिप्रेशन अनिद्रा की समस्या से बचाव के लिए योग प्राणायाम अति आवश्यक है। हमारी दैनिक दिनचर्या में योग अभ्यास महत्वपूर्ण योगदान देता है, जिसमें हम सूर्य नमस्कार, वृक्षासन, ताड़ासन, अर्ध ताड़ासन, भुजंगासन, शसकासन, उष्ट्रासन, सर्वांगासन, अनुलोम-विलोम, नाड़ी शोधन प्राणायाम, चंद्रभेदी प्राणायाम, भ्रामरी प्राणायाम और आज्ञा चक्र पर ध्यान, योग के माध्यम से तनाव मुक्त रहकर बोर्ड परीक्षा में सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन कर सकते हैं। सूर्य नमस्कार : सूर्य नमस्कार का अभ्यास संपूर्ण शरीर को लचीला बनाता है। इसके अभ्यास से पाचन-तंत्र दुरुस्त रहता है। यह शरीर को डिटॉक्स करता है। ताडासन : लाभ-ताड़ासन के अभ्यास से शारीरिक और मानसिक संतुलन बना रहता है। ताड़ासन करने से पाचन तंत्र सही रहता है। वृक्षासन : सीधे खड़े होकर दायें पैर को उठा कर बायें जंघा पर इस प्रकार रखें कि पैर का पंजा नीचे की ओर तथा एड़ी जंघा के मूल में लगी हुई हो। दोनों हाथों को नमस्कार की स्थिति मे सामने रखे यह आसान एकाग्रता बढ़ाने में मदद करता है। भुजंगासन : पेट के अंगों को उत्तेजित करता है भुजंगासन तनाव और थकान को दूर करने में मदद करता है। अनुलोम-विलोम प्राणायाम : इसके अभ्यास से तनाव और चिंता, अनिद्रा की समस्या को ठीक करता है यह पूरे शरीर में शुद्ध आॅक्सीजन की आपूर्ति बढ़ाता है। भ्रामरी : यह आपके मस्तिष्क को शांत बनाए रखने में मदद करता है। भ्रामरी प्राणायाम रक्तचाप को नियंत्रित करता है, जिससे हाई ब्लड प्रेशर से राहत मिलती है। यह तनाव को दूर करता है, बेहतर नींद के लिए इसे रात्रिकालीन नियमित योग के रूप में शामिल किया जाता है। ध्यानयोग : ध्यान योग करने के लिए कमर गर्दन सीधी करके बैठ जायें। दोनों आंखों को बंद कर ले दोनों भौहों के बीच में आज्ञा चक्र पर अपना पूरा ध्यान लगायें। श्वास की गति सामान्य रखें। इसके अभ्यास से नींद की समस्या, अनिद्रा तनाव, चिंता भय को समाप्त करता है। इन सभी योग अभ्यास के माध्यम और एक अच्छी दिनचर्या व संतुलित आहारचर्या से विद्यार्थी अपने आप को पूर्णता चिंतामुक्त तनावमुक्त रहकर अपनी परीक्षा में अच्छा प्रदर्शन कर सकता है। योग से विद्यार्थी का आत्मविश्वास बढ़ता है, जिससे बह हर समस्या से बाहर निकलने में सक्षम बनता है। इसलिए हमें योग को अपनी दिनचर्या में जरूर स्थान देना चाहिए।

क्या आप भी टॉयलेट में यूज करते हैं फोन, तो हो जायें सावधान
Published / 2025-01-23 23:02:03
क्या आप भी टॉयलेट में यूज करते हैं फोन, तो हो जायें सावधान

राजकुमारी पाण्डेयएबीएन हेल्थ डेस्क। टॉयलेट सीट पर मोबाइल फोन चलाने से कई तरह की स्वास्थ्य समस्याएं हो सकती है। इसलिए, टॉयलेट सीट पर मोबाइल फोन का इस्तेमाल करने से बचना चाहिए।टॉयलेट सीट पर मोबाइल फोन चलाने से होने वाले नुकसानटॉयलेट में बैठकर लंबे समय तक मोबाइल फोन का इस्तेमाल करने से पेल्विक फ़्लोर की मांसपेशियां कमज़ोर हो सकती हैं।टॉयलेट में मोबाइल फोन चलाने से बवासीर जैसी समस्या हो सकती है।टॉयलेट में मोबाइल फोन चलाने से आंतों से जुड़ी समस्याएं हो सकती हैं।टॉयलेट में मोबाइल फोन चलाने से गर्दन और रीढ़ की हड्डी पर दबाव पड़ सकता है।टॉयलेट में मोबाइल फोन चलाने से पीठ दर्द, गर्दन में खिंचाव, और असुविधा हो सकती है।टॉयलेट में मोबाइल फोन चलाने से स्वच्छता संबंधी समस्याएं हो सकती हैं।टॉयलेट में मोबाइल फोन चलाने से साल्मोनेला और ई कोलाई जैसे कीटाणु फैल सकते हैं।

अल्सर बन सकता है आंतो में कैंसर का कारण : महेश पाल
Published / 2025-01-18 18:10:07
अल्सर बन सकता है आंतो में कैंसर का कारण : महेश पाल

बचाव के लिए हमेशा करें योग प्राणायामएबीएन हेल्थ डेस्क। अल्सर एक प्रकार का घाव या छाला है जो शरीर की अंदरूनी सतहों पर बनता है। योगाचार्य महेश पाल बताते हैं कि  यह आमतौर पर पेट की अंदरूनी परत, छोटी आंत या ग्रासनली (इसोफेगस) में होता है। पेट में बनने वाला एक्स्ट्रा एसिड गैस्ट्रिक अल्सर का मुख्य कारण है अल्सर का यदि समय पर सही इलाज न किया जाये तो यह आंतों में कैंसर का कारण भी बन सकता है। अल्सर तब होता है जब पेट में बनने वाला अम्ल (एसिड) इन आंतरिक सतहों को नुकसान पहुंचाता है, जिससे छाले या घाव हो जाते हैं, जो पेट, आहार नाल या आंतों की अंदरूनी सतह पर विकसित होते हैं, जिस जगह पर अल्सर होता है उसके आधार पर इसे अलग-अलग नामों से जाना जाता है जैसे पेट में होने वाले अल्सर को गैस्ट्रिक अल्सर कहा जाता है।उसी तरह छोटी आंत के अगले हिस्से में होने वाले अल्सर को डुओडिनल अल्सर कहा जाता है, गैस्ट्रिक अल्सर, जिसे पेट का अल्सर भी कहा जाता है, पेट की आंतरिक परत में होने वाला एक घाव या छाला है। यह तब होता है, जब पेट की म्यूकस परत कमजोर हो जाती है और पेट के अम्ल द्वारा क्षतिग्रस्त हो जाती है, अल्सर को बढ़ावा देने के लिए हेलीकोवेक्टर पाईलोरी बैक्टीरिया भी जिम्मेदार माना जाता है।यह बैक्टीरिया पेट की म्यूकस परत को कमजोर करता है, जिससे पेट का अम्ल (एसिड) आंतरिक परत को नुकसान पहुंचाता है, बही दूसरी और नॉन-स्टेरॉयडल एंटी-इंफ्लेमेटरी ड्रग्स, जैसे कि इबुप्रोफेन, एस्पिरिन और नेप्रोक्सेन का लंबे समय तक या अधिक मात्रा में सेवन करने से अल्सर हो सकता है। ये दवाएं पेट की सुरक्षा करने वाली म्यूकस परत को कमजोर करती हैं। जब हम अल्सर से ग्रसित होते हैं तो हमारे सामने कई समस्याओं उत्पन्न होती हैं जिसमें अल्सर से पेट और छोटी आंत की दीवार में छेद हो जाता है इससे पेट की गुहा में गंभीर संक्रमण हो सकता है। आंतरिक रक्तस्राव  रक्तस्राव के कारण धीरे-धीरे रक्त की कमी से एनीमिया हो सकता है, जबकि गंभीर रक्त हानि के लिए रक्त आधान की आवश्यकता हो सकती है।गंभीर मामलों में खूनी उल्टी, मल में रक्त आना पेप्टिक अल्सर पाचन तंत्र को अवरुद्ध कर देता हैं, जिससे हम बिना किसी संभावित स्पष्टीकरण के आसानी से भरा हुआ महसूस कर सकते हैं, बार-बार सीने में जलन, वजन तेजी से घटने,  गैस बनना, भूख न लगना आदि पेट में अल्सर होने के ही कारण है।जब हमें यह महसूस होता है कि हमें अल्सर धीरे-धीरे हमारे शरीर में हो चुका है तो उसके कई लक्षण हमारे सामने नजर आते हैं जिसमें रात में, खाली पेट या खाने के कुछ समय बाद तेज दर्द, गैस और खट्टी डकार, उल्टी, पेट के उपरी हिस्से में दर्द, पेट का भारीपन, भूख में कमी, वजन घटना, सुबह-सुबह हल्की मितली, अल्सर होने के पीछे के कारण नजर सामने आते हैं।जिसमें हेलीकोवेक्टर पाईलोरी बैक्टीरिया, धूम्रपान, अत्यधिक शराब का सेवन, तनाव- चिंता, मसालेदार व तला हुआ भोजन, अवस्थित दिनचर्या व भोजनचर्या आदि, अल्सर व अल्सर से होने वाली समस्याओं से बचाव के लिए योग-प्राणायाम काफी उपयोगी साधन के रूप में है जिससे हम अपने शरीर को अल्सर व अन्य होने वाली बीमारियों से बचा सकते हैं जिसमें अल्सर से बचाव के लिए,पवनमुक्त आसन  यह आपके पेट में जमा होने वाली सभी गैसों से छुटकारा पाने में मदद करता है और अल्सर के प्रभाव से बचाता है। अर्द्धमत्येंद्रासन का अभ्यास हेलीकोवेक्टर पाईलोरी बैक्टीरिया के संक्रमण से बचाता है जो अल्सर होने के लिए जिम्मेदार है, नाड़ी शोधन प्राणायाम  तनाव व चिंता से बचाव करता है, कपालभाति के अभ्यास से आंतो को ऊर्जा मिलती है और पाचन तंत्र व कब्ज की समस्या से राहत मिलती है, यह अभ्यास  आंतो को स्वस्थ बनाता है, यदि हमें कोई गंभीर शारीरिक रोग है तो उसके लिए योग अभ्यास के द्वारा हम धीरे-धीरे ठीक कर सकते हैं लेकिन योग अभ्यास योगाचार्य, योग गुरु के ही मार्गदर्शन में ही किया जाये, जिससे हमें योग का पूरा लाभ मिल सके।

स्वामी विवेकानंद ने युवाओं को शारीरिक व मानसिक रूप से ओजस्वी तेजस्वी बनाने के लिए सूर्य नमस्कार योग की संरचना की : योगाचार्य महेश पाल
Published / 2025-01-11 21:52:06
स्वामी विवेकानंद ने युवाओं को शारीरिक व मानसिक रूप से ओजस्वी तेजस्वी बनाने के लिए सूर्य नमस्कार योग की संरचना की : योगाचार्य महेश पाल

एबीएन हेल्थ डेस्क। 12 जनवरी 2025 को स्वामी विवेकानंद जी की 162 वी जन्म उत्सव को राष्ट्रीय युवा दिवस के रूप में राष्ट्र निर्माण के लिए युवा सशक्तिकरण थीम पर मना रहे हैं, राष्ट्रीय युवा दिवस के अवसर पर पूरे देश में सूर्य नमस्कार का सामूहिक अभ्यास किया जाता है, योगाचार्य महेश पाल बताते है कि संयुक्त राष्ट्र संघ के निर्णयानुसार सन् 1984 ई. को अन्तरराष्ट्रीय युवा वर्ष घोषित किया गया। इसके महत्त्व का विचार करते हुए भारत सरकार ने 1984 को राष्ट्रीय युवा दिवस मनाने की घोषणा की 1985 से यह आयोजन हर साल भारत में  युवाओं को सशक्त, स्वस्थ, समृद्धसाली, ओजस्वी तेजस्वी व राष्ट्र निर्माण के प्रति जागरूक बनाने के उद्देश्य यह दिवस प्रति वर्ष मनाया जाता है।युवाओं के प्रेरणा स्रोत स्वामी विवेकानंद ने युवाओं को राष्ट्र निर्माण के लिए संबोधित करते हुए कहा उत्तिष्ठत जाग्रत प्राप्य वरान्निबोधत अर्थात उठो, जागो और तब तक मत रुको, जब तक कि अपने लक्ष्य तक न पहुंच जाओ। यह मूल मंत्र कमोबेश हर युवा के दिल में एक चित्र के रूप में शोभायमान होना चाहिए,स्वामी विवेकानन्द जी का जन्म12 जनवरी, 1863  कलकत्ता मै हुआ था उनका देवलोक गमन 4 जुलाई 1902 को हुआ, स्वामी रामकृष्ण परमहंस उनके गुरु थे योगग्रंथों के अनुसार स्वामी विवेकानंद स्वयं राजयोगी थे, सभी योग मैं राज योग सर्वश्रेष्ठ माना जाता है, स्वामी विवेकानंद जी के अनुसार सूर्य नमस्कार योग से युवा सशक्त व ऊजार्वान बनता है, युवा शक्ति देश और समाज की रीढ़ होती है। युवा देश और समाज को नए शिखर पर ले जाते हैं। युवा देश का वर्तमान हैं, तो भूतकाल और भविष्य के सेतु भी हैं। युवा गहन ऊर्जा और उच्च महत्वाकांक्षाओं से भरे हुए होते हैं। उनकी आंखों में भविष्य के इंद्रधनुषी स्वप्न होते हैं। समाज को बेहतर बनाने और राष्ट्र के निर्माण में सर्वाधिक योगदान युवाओं का ही होता है। युवा बेहतर भविष्य के लिए मतदान के माध्यम से ईमानदार और विकासपरक सोच वाले प्रतिनिधि को चुनने और भ्रष्ट लोगों का सामाजिक दुत्कार को पहली सीढ़ी मानते हैं। समाज में तेजी से आ रहे बदलाव के प्रति बड़ी संख्या में युवाओं का नजरिया शार्टकट की बजाय कर्म और श्रम के माध्यम से सफलता प्राप्त करने की ओर होना जरूरी है लेकिन दिन प्रतिदिन वर्तमान समय में युवाओं की चाल बदलती जा रही है युवा दिन प्रतिदिन भोग विलासिता की वस्तुओं में लीन होता जा रहा है और दिनचर्या व आहारचार्य के असंतुलन के कारण युवाओं के अंदर कई शारीरिक व मानसिक समस्याएं जन्म ले  रही हैं जिसमें मोटापा, तनाव, चिड़चिड़ापन, धूम्रपान, शराब व नशे की लत, दुबलेपन से ग्रसित, पश्चिम सभ्यता की और उन्मुखता, पारिवारिक व सामाजिक उच्च मूल्यों का हीन होना, युवाओं मैं घटती बौद्धिकता, असंतुलित विचार शैली आदि इन समास्याओं से घिरा युवा कैसे राष्ट्र निर्माण में सहयोगी बन सकता हैं हमारे देश का युवा स्वामी विवेकानंद,  भगत सिंह, चंद्रशेखर आजाद जैसा ओजस्वी, तेजस्वी निरोगी, उच्च संस्कार व चरित्रवान उच्च व्यक्तिवान हो, जिससे समाज को एक नयी दिशा दे सके आज भारत में करीब 48 करोड़ यूथ पॉपुलेशन है। यानी, कुल आबादी के करीब 35% लोग युवा हैं। फिर भी हमारे देश का युवा हमारी सनातन संस्कृति एवं अपनी क्षमताओं को पहचान नहीं पा रहा है वह नकारात्मक विचारों व अनैतिक कार्यों में फसकर अपने उच्च मूल्यों को खोता जा रहा है, युवा का अर्थ है ओजस्वी तेजस्वी,समृद्धबान, असंभव कार्य को भी संभव बनाने की क्षमता रखना उच्च संस्कारवान उच्च व्यक्तिवान, राष्ट्र निर्माण व श्रेष्ठ कार्यों में अग्रिम पंक्ति में रहना, समाज को एक नयी दिशा देना, भारतीय सनातन संस्कृति को वैश्विक स्तर पर एक नई पहचान दिलाना, स्वामी विवेकानंद जी ने युवाओं का शारीरिक व मानसिक विकास के लिए सूर्य नमस्कार की संरचना की सूर्य नमस्कार के अंतर्गत 12 आसनों का समावेश है।जिसमें- प्रणाम नमस्कार, हस्तोहस्तासन, उतानास अश्व संचालन, दंडासन, साष्टांग नमस्कार, भुजंगासन पर्वतासन, अश्व संचालन, पादहस्तासन, ऊधर्बहस्तासन, प्रणामनमस्कार , सूर्यनमस्कार के अभ्यास से युवा सशक्त व ऊर्जावान बनता है, सूर्यनमस्कार से  युवाओं में स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं तनाव, मोटापा, स्वांस संबंधी रोगों का  समाधान होता है और संस्कारों व चरित्र एवं उच्च विचारों का निर्माण होता है, युवा देश का वर्तमान व भविष्य है, युवाओं का एक दिशा में रहकर कार्य करना और उच्च सफलताओं को प्राप्त करना राष्ट्र निर्माण में अहम भूमिका निभाता है इसलिए आओ युवाओं इस साल हमारी विसंगतियों को छोड़कर सूर्य नमस्कार योग के द्वारा स्वयं को स्वस्थ  सशक्त व समृद्ध बनाएं और राष्ट्र निर्माण में अपनी भूमिका निभाये।

देश की बेटियां अंतरराष्ट्रीय स्तर पर राष्ट्र के लिए योगासन खेल में सर्वाधिक गोल्ड मेडल जीतकर  देश का गौरव व मान बढ़ायेंगी : डॉ जयदीप आर्य
Published / 2025-01-08 21:25:17
देश की बेटियां अंतरराष्ट्रीय स्तर पर राष्ट्र के लिए योगासन खेल में सर्वाधिक गोल्ड मेडल जीतकर देश का गौरव व मान बढ़ायेंगी : डॉ जयदीप आर्य

एबीएन सोशल डेस्क। राष्ट्रीय स्तर पर अश्मिता खेलो इंडिया महिला योगासन लीग 2024-25 का आयोजन देश की राजधानी नई दिल्ली में हुआ, जिसके मुख्य अथिति पूज्य सुधांशु जी महाराज, विश्व जागृति मिशन के संस्थापक, डॉ जयदीप आर्य वर्ल्ड योगासना के महासचिव यह एक भव्य आयोजन हुआ। जिसने सभी उपस्थित लोगों पर एक अमिट छाप  छोड़ी। योगाचार्य महेश पाल ने बताया कि यह प्रतियोगिता खेलो इंडिया की तर्ज पर  महिला खिलाड़यो को आगे बढ़ाने के उद्देश्य से आयोजित की गयी। इस योगासन प्रतियोगिता में पूरे देश के 270 से भी अधिक महिला खिलाड़ियों ने भाग लिया यह प्रतियोगिता दो एज ग्रुप में 5 जनवरी से 8 जनवरी तक आयोजित की गई जिसमें अंडर-18, और 18 से 55 वर्ष की आयु के योग महिला खिलाडियों ने भाग लिया। यह प्रतियोगिता 5 इवेंट मै संपन्न हुई ट्रेडिशनल, आर्टिस्टिक सिंगल, आर्टिस्टिक पियर आर्टिस्टिक ग्रुप और रिदमिक पियर ट्रेडिशनल में प्रथम स्थान मध्य प्रदेश की सपना पाल व अनुष्का चटर्जी पश्चिम बंगाल में प्राप्त किया बही आर्टिस्टिक सिंगल में दिल्ली व प. बंगाल का प्रथम स्थान रहा आर्टिस्टिक पियर मै मध्य प्रदेश व महाराष्ट्र का प्रथम स्थान रहा रिदमिक पियर में उत्तराखंड में दिल्ली का प्रथम स्थान जिन महिला खिलाड़ियों ने प्रथम स्थान प्राप्त किया।उन्हें  30000 की राशि प्रदान की गई द्वितीय स्थान प्राप्त करने पर ?25000 की राशि प्रदान की गई तृतीय स्थान प्राप्त करने वालों को ?20000 चतुर्थ स्थान प्राप्त करने वालों को 15000 और 5३ँ स्थान प्राप्त करने वाले पर ?10000 की राशि प्रदान की गई मुख्य अतिथियों द्वारा विजेता खिलाड़ियों को मेडल, सर्टिफिकेट व पुरस्कार राशि प्रदान कर सम्मानित किया गया। यह योगासना प्रतियोगिता योगासन इंद्रप्रस्थ द्वारा आयोजित की  गयी, जो कि योगासन भारत का एक संबद्ध इकाई है, योगासन भारत एक राष्ट्रीय खेल संघ है  जिसे भारत सरकार द्वारा मान्यता प्राप्त है। वर्ल्ड योगासन के महासचिव डॉ जयदीप आर्य ने अपने उद्बोधन में कहा कि  योगासन को एक परिवर्तनकारी खेल के रूप में प्रस्तुत किया, जो शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य को बढ़ावा देता है।वह दिन दूर नहीं जब देश की बेटियां अंतरराष्ट्रीय स्तर पर राष्ट्र के लिए योगासन खेल मै सर्वाधिक गोल्ड मेडल जीतकर  देश का गौरव व मान बढ़ाएंगी  बही पुज्य श्री सुधांशु जी महाराज ने योगासन की महत्ता पर प्रकाश डाला और इसके माध्यम से आंतरिक शक्ति और अनुशासन को बढ़ावा देने की बात कही,भव्य समापन समारोह हुआ जिसमें गणमान्य व्यक्तियों को स्मृति चिह्न, शॉल और गुलदस्ते से सम्मानित किया गया। इस अवसर पर योगा कर भारत के कोषाध्यक्ष रचित कौशिक, श्री नीरज शर्मा, प्रवीण शर्मा , इंद्र नारायण डॉ एस रंजन, डॉ नसीम हैदर, श्री सुंदरलाल, एसपी सिंह, राजवीर सिंह, अभिमन्यु यादव, जसवीर सिंह, जितेंद्र सिंह प्रदीप माथुर सुनील कुमार शैलेंद्र विनीत कुमार ए राधिका सुश्री शीला दहिया डॉक्टर आर कटारिया श्री संदीप सिंह सिंघल श्री अशोक बंसल श्री रोहतास चौधरी डॉ राज पवन कुमार एसपी सिंह आदि उपस्थित रहे। कार्यक्रम के अंत में रचित कौशिक द्वारा सभी का आभार व्यक्त किया गया।

कोरोना के बाद अब तहलका मचाने की तैयारी में एचएमपीवी वायरस
Published / 2025-01-07 18:41:39
कोरोना के बाद अब तहलका मचाने की तैयारी में एचएमपीवी वायरस

एचएमपीवी वायरस को लेकर अलर्ट मोड पर झारखंड, प्रशासन ने शुरू किये विशेष इंतजाम टीम एबीएन, रांची। कोरोना से अभी लोग ठीक से उबर भी नहीं पाये थे कि इसी बीच एचएमपीवी एक नया खतरा बनकर बढ़ने लगा है। सबसे पहले चीन से खबरें सामने आयी कि देश में इस वायरस के संक्रमण ने अस्पतालों और श्मशान में भीड़ बढ़ा दी है, लेकिन बीते सोमवार को भारत में भी इस संक्रामक रोग का पहला मामला सामने आ गया। वहीं, चीनी वायरस एचएमपीवी को लेकर झारखंड भी अलर्ट है। रिम्स में जल्द शुरू हो जायेगी एचएमपीवी संक्रमण की जांच एचएमपीवी वायरस को लेकर स्वास्थ्य मंत्री इरफान अंसारी ने कहा कि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के नेतृत्व में झारखंड किसी भी स्वास्थ्य आपात स्थिति से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार है। वर्तमान में, एचएमपीवी (ह्यूमन मेटान्यूमोवायरस) वायरस के संबंध में कोई तत्काल चिंता नहीं है, क्योंकि यह आबादी के लिए तत्काल खतरा पैदा नहीं करता है। राज्य सरकार ने किसी भी संभावित स्वास्थ्य चुनौती से निपटने के लिए पर्याप्त तैयारी और व्यवस्था की है। उन्होंने कहा कि एक डॉक्टर होने के नाते, मैं सभी उपलब्ध चैनलों के माध्यम से स्थिति पर बारीकी से नजर रख रहा हूं और केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के साथ नियमित संचार बनाए रख रहा हूं। वर्तमान में, हमें किसी भी अलार्म के संबंध में केंद्रीय स्वास्थ्य अधिकारियों से कोई औपचारिक संचार नहीं मिला है। मैंने विभाग के सचिव को राज्य भर में तैयारियों के मौजूदा स्तर का आकलन करने के लिए सिविल सर्जनों के साथ एक बैठक बुलाने का निर्देश दिया है। अंसारी ने कहा कि रिम्स में 2 से 3 दिन के अंदर एचएमपीवी संक्रमण की जांच शुरू हो जायेगी। बाजार से भी जांच किट खरीदने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। जमशेदपुर के एमजीएमसीएच में भी जांच शुरू कराने की योजना है। झारखंड सरकार सभी नागरिकों के स्वास्थ्य और कल्याण की सुरक्षा के लिए प्रतिबद्ध अंसारी ने कहा कि मैं जनता को आश्वस्त करता हूं कि हमारे पास सभी आवश्यक व्यवस्थाएं हैं और तत्काल चिंता का कोई कारण नहीं है। हालांकि, चल रहे सर्दी के मौसम को देखते हुए, अतिरिक्त सावधानी बरतना विशेष रूप से महत्वपूर्ण है। यह विशेष रूप से 5 वर्ष से कम उम्र के व्यक्तियों और 70 वर्ष से अधिक उम्र के लोगों के लिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि इस दौरान वे स्वास्थ्य जोखिमों के प्रति अधिक संवेदनशील होते हैं। हम सभी को सूचित रहने, स्वास्थ्य दिशा-निर्देशों का पालन करने और अपनी और अपने प्रियजनों की सुरक्षा के लिए निवारक उपाय करने की दृढ़ता से सलाह देते हैं। राज्य सरकार सभी नागरिकों के स्वास्थ्य और कल्याण की सुरक्षा के लिए पूरी तरह से प्रतिबद्ध है और किसी भी उभरती स्वास्थ्य चुनौतियों से निपटने के लिए सक्रिय कदम उठाती रहेगी। उन्होंने कहा कि रिम्स में एचएमपीवी संक्रमण की जांच शुरू करने की तैयारी की जा रही है। मशीन उपलब्ध है, लेकिन जांच किट का इंतजार है। ये किट एनआईवी पुणे से मंगाई जा रही हैं। इसके लिए पत्र भेजा गया है। जल्द ही रिम्स में जांच की सुविधा शुरू हो जायेगी।

एचएमपीवी से पैनिक न हों, ऐसे बरतें सावधानी
Published / 2025-01-06 20:22:52
एचएमपीवी से पैनिक न हों, ऐसे बरतें सावधानी

पैनिक न करें, सावधानी जरूरी; विशेषज्ञों ने बताये एचएमपीवी वायरस से बचाव के उपाय एबीएन हेल्थ डेस्क। भारत में ह्यूमन मेटान्यूमोवायरस (एचएमपीवी) के कुछ मामले सामने आने के बाद स्वास्थ्य मंत्रालय और विशेषज्ञों ने सतर्कता बढ़ा दी है। हालांकि, दिल्ली मेडिकल काउंसिल के अध्यक्ष और वरिष्ठ बाल रोग विशेषज्ञ डॉ अरुण गुप्ता ने कहा कि मौजूदा स्थिति चिंताजनक नहीं है और घबराने की आवश्यकता नहीं है। सावधानी डॉ गुप्ता ने बताया कि एचएमपीवी से जुड़े संक्रमण पहले भी देखे गए हैं और यह कोई नया वायरस नहीं है। भारत में जो मामले रिपोर्ट हुए हैं, वे नियमित निगरानी के दौरान पाये गये हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, फ्लू जैसे लक्षणों वाली बीमारियों में कोई अप्रत्याशित वृद्धि नहीं हुई है। फिर भी, कोरोना जैसी सावधानियों को अपनाने की सलाह दी गयी है।ऐसे बरतें सावधानी मास्क का उपयोग करना छींकते समय रुमाल या हाथ से नाक-मुंह ढंकना हाथों की नियमित सफाई भीड़भाड़ वाली जगहों से बचनाशनिवार को स्वास्थ्य मंत्रालय ने संयुक्त निगरानी समूह की बैठक आयोजित की। इसमें डीजीएचएस, आईसीएमआर, एनसीडीसी, डब्ल्यूएचओ और अन्य प्रमुख संस्थाओं के विशेषज्ञों ने हिस्सा लिया। बैठक में चीन में श्वसन रोगों के बढ़ते मामलों और मौसमी पैथोजेन्स जैसे इन्फ्लूएंजा, फरश् और एचएमपीवी की समीक्षा की गई। मंत्रालय ने बताया कि भारत में श्वसन संबंधी बीमारियों के लिए पहले से ही एक मजबूत निगरानी प्रणाली है। आईसीएमआर और आईडीएसपी नेटवर्क के आंकड़ों से पता चला है कि मौजूदा समय में कोई असामान्य वृद्धि नहीं हुई है। अस्पतालों के चिकित्सकों ने भी इसकी पुष्टि की है।

जानें चीन में फैले नये वायरस से बचने के उपाय
Published / 2025-01-03 18:37:36
जानें चीन में फैले नये वायरस से बचने के उपाय

चीन में फैले नये वायरस एचएमपीवी से बचने के क्या हैं उपाय, इसके लिए है कोई वैक्सीन? एबीएन हेल्थ डेस्क। हाल ही में चीन में मानव मेटान्यूमोवायरस (एचएमपीवी) के मामलों में वृद्धि देखी जा रही है। एचएमपीवी एक श्वसन वायरस है जो ऊपरी और निचले श्वसन संक्रमण का कारण बन सकता है। यह वायरस विशेष रूप से छोटे बच्चों, बुजुर्गों और कमजोर प्रतिरक्षा प्रणाली वाले लोगों को प्रभावित करता है। 2001 में खोजे गये इस वायरस का संबंध श्वसन सिंकिटियल वायरस (आरएसवी) से है, और यह न्यूमोविरिडे परिवार का सदस्य है। एचएमपीवी के लक्षण और प्रसार एचएमपीवी आमतौर पर सर्दियों और वसंत के दौरान अधिक सक्रिय होता है। इसके लक्षण सर्दी-जुकाम जैसे होते हैं, जिनमें खांसी, गले में खराश, बुखार और सांस लेने में दिक्कत शामिल हैं। यह वायरस संक्रमित व्यक्ति के खांसने, छींकने, या दूषित सतहों के संपर्क में आने से फैलता है। एचएमपीवी से बचने के उपाय एचएमपीवी से बचाव के लिए कुछ बुनियादी स्वच्छता उपायों का पालन करना जरूरी है।हाथों की सफाई : अपने हाथों को साबुन और पानी से कम से कम 20 सेकंड तक धोयें। संपर्क से बचाव : बीमार लोगों के साथ निकट संपर्क से बचें। स्वच्छता बनाये रखें : दूषित सतहों, जैसे दरवाजे की कुंडी और खिलौनों को नियमित रूप से साफ करें। सुरक्षित आदतें अपनायें : खांसते और छींकते समय मुंह और नाक ढंकें। अपनी निजी वस्तुओं जैसे कप और खाने के बर्तन साझा करने से बचें। घर पर रहें : बीमार होने पर घर पर रहकर संक्रमण को फैलने से रोकें। क्या है एचएमपीवी का इलाज? एचएमपीवी के लिए फिलहाल कोई विशिष्ट एंटीवायरल दवा या वैक्सीन उपलब्ध नहीं है। इसके इलाज में लक्षणों को कम करने और सहायक चिकित्सा देखभाल का सहारा लिया जाता है।

चेस्ट पेन (एंजाइना रोग) बना जीवन के लिए खतरा बचाव के लिए करें योग-प्राणायाम : योगाचार्य महेश पाल
Published / 2024-12-31 13:09:30
चेस्ट पेन (एंजाइना रोग) बना जीवन के लिए खतरा बचाव के लिए करें योग-प्राणायाम : योगाचार्य महेश पाल

एबीएन हेल्थ डेस्क। वर्तमान समय में दिन प्रतिदिन हमारा स्वास्थ्य गिरता जा रहा है जिसमें एक गंभीर समस्या हमारे सामने निकल कर आ रहे हैं वह है चेस्ट पेन (एंजाइना  रोग), सर्दी मै बढ़ता सीने का दर्द बच्चों व युबाओ को हार्ट अटैक व उनके  जीवन को संकट मै डाल रहा है।चेस्ट पेन की वजह से कई बच्चे, युवा, वरिष्ठजन अपनी जान गवा चुके हैं। योगाचार्य महेश पाल बताया कि नये साल की सुरूआत को अपने दिनचर्या मैं योग-प्राणायाम को शामिल कर करे और प्रत्येक दिन योग अभ्यास करे, जिससे कि हम पूरे साल स्वस्थ बने रहे।एनजाइना से तात्पर्य सीने में दर्द या बेचैनी से है जो आमतौर पर कोरोनरी हृदय रोग के कारण होता है। यह दिल के दौरे जैसा महसूस हो सकता है जिसमें आपकी छाती में दबाव या सिकुड़न होती है। इसे कभी-कभी एनजाइना पेक्टोरिस या इस्केमिक चेस्ट पेन कहा जाता है, कोरोनरी धमनियाँ रक्त वाहिकाएँ हैं जो आपके हृदय तक ऑक्सीजन युक्त रक्त पहुँचाती हैं।यदि आपके रक्त में कोलेस्ट्रॉल बहुत अधिक है तो यह आपकी धमनियों में जमा हो जाता है और उन्हें संकरा कर देता है।यदि आपकी धमनियाँ गंभीर रूप से संकरी हैं तो उनमें प्रवाहित होने वाले रक्त की मात्रा कम हो जाती है और आपके हृदय को पर्याप्त ऑक्सीजन युक्त रक्त नहीं मिल पाता है।एनजाइना के लक्षण तब शुरू हो होते हैं जब आपके दिल को सामान्य से ज़्यादा मेहनत करनी पड़ती है और उसे ज़रूरी ऑक्सीजन नहीं मिल पाती। ऐसा तब होता है जब आप शारीरिक रूप से ज़्यादा मेहनत करते हैं या भावनात्मक रूप से परेशान होते हैं एवं अधिक कोलेस्ट्रॉल और भारी खाना खाने के बाद भी ऐसा देखने मै आता है। एंजाइना रोग या सीने का दर्द होने के कुछ कारण है जिसमें पसलियों, पसली की कार्टिलेज, सीने की मांसपेशियों (पेशी-कंकालीय सीने की दीवार का दर्द), या सीने की नाड़ियों के विकार, फेफड़े को ढकने वाली झिल्ली की सूजन (प्लूराइटिस),हृदय को ढकने वाली झिल्ली की सूजन (पेरिकार्डाइटिस), पाचन संबंधी विकार (जैसे कि इसोफ़ेजियल रिफ़्लक्स या इसोफ़ेजियल ऐंठन, अल्सर रोग या पित्ताशय की पथरी), दिल का दौरा या एंजाइना (अक्यूट करोनरी सिंड्रोम और स्टेबल एंजाइना), योग व प्राणायाम से। चेस्टपेन (एंजाइना) से बचा जा सकता है जिसमें नाड़ी शोधन, सूर्य भेदी, भ्रामरी प्राणायाम, सूर्य नमस्कार,  चकरासन, उष्ट्रासन, वज्रासन, नाड़ीशोधन प्राणायाम नाड़ीयो के विकारों को दूर करता है।सूर्यभेदी प्राणायाम कोरोनरी धमनी के अवरोधों को दूर कर कोलेस्ट्रॉल को कंट्रोल करता है जो चेस्ट पेन का मुख्य कारण है, सूर्य नमस्कार शरीर में ऊर्जा का संचार करता है मोटापा को नियंत्रित करता है, चक्रासन पाचन संबंधी विकारों को दूर करता है।भ्रामरी प्राणायाम भावनात्मक रूप से स्ट्रांग बनता है चेस्ट पेन की समस्या से बचाव के लिए हमें हमारी दिनचर्या व भोजनचर्या को ठीक कर  प्रत्येक दिन योग अभ्यास  करना होगा, 2025 नया साल के रूप में हमारे सामने आ रहा है हम नित्य प्रतिदिन योग को अवश्य शामिल करें और 2025 में पूर्ण रूप से अपने आप को स्वस्थ बनायें।

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