साइलेंट किलर के खतरे को गंभीरता से लेने की जरूरतएबीएन हेल्थ डेस्क। बदली जीवनशैली के चलते देश-दुनिया में बड़ी संख्या में लोग हाइपरटेंशन यानी हाई ब्लड प्रेशर से ग्रस्त हैं। हाई बीपी कई दूसरी गंभीर बीमारियों की वजह बनता है। इसका नियमित चेकअप जरूरी है। वहीं यदि लक्षण सामने आयें तो डॉक्टरी सलाह से उपचार कराना चाहिये। इस रोग को लेकर नई दिल्ली स्थित सर गंगा राम अस्पताल में जनरल फिजिशियन डॉ मोहसिन वली से रजनी अरोड़ा की बातचीत।हाइपरटेंशन हमारी सेहत के लिए एक बड़े खतरे के रूप में उभर रहा है। उम्र बढ़ने के साथ इसका खतरा भी बढ़ता है, लेकिन आजकल अनियमित जीवनशैली के चलते कम उम्र के वयस्कों में भी इसका खतरा बढ़ गया है। हाइपरटेंशन पीड़ित अधिकतर लोगों को जागरूकता न होने पर पता ही नहीं चलता, जब तक कोई समस्या न खड़ी हो जाए। दुनिया में एक बहुत बड़ी तादाद में लोग हाइपरटेंशन से ग्रस्त हैं जिनमें से दो-तिहाई लोग विकासशील देशों में हैं। भारत की बात करें तो हर तीन में से एक व्यक्ति को हाइपरटेंशन की समस्या है। गांवों में 10 प्रतिशत व शहरों में 25 प्रतिशत लोग इससे ग्रस्त हैं। मरीजों में से दो-तिहाई की उम्र 60 साल से कम होती है। वहीं 85 प्रतिशत लोग ऐसे भी होते हैं जिन्हें हाइपरटेंशन के विकार के साथ कोई दूसरी बीमारी भी होती है।क्या है हाइपरटेंशन रोगहृदय हमारे शरीर में एक पंप के रूप में काम करता है और उससे ब्लड सर्कुलेशन पूरे शरीर में होता है। ब्लड सर्कुलेशन के समय होने वाले ब्लड के दवाब को ब्लड प्रेशर कहते हैं। जब हार्ट ब्लड को पंप करता है तब प्रेशर ज्यादा होता है जिसे सिस्टोलिक ब्लड प्रेशर कहा जाता है। वहीं दूसरी बीट से पहले हार्ट रिलेक्स कर रहा होता है तब ब्लड प्रेशर कम होता है जिसे डायस्टोलिक ब्लड प्रेशर कहते हैं। विभिन्न व्यक्तियों में ब्लड प्रेशर में अंतर हो सकता है। व्यक्ति को ब्लड प्रेशर के नंबर जानना जरूरी है यानी सिस्टोलिक (ऊपर वाला) और डायस्टोलिक (नीचे वाला) का पता होना चाहिए। ब्लड प्रेशर दैनिक प्रक्रियाओं से प्रभावित होता है। अगर व्यक्ति का ब्लड प्रेशर 140/90 या उससे अधिक हो तो इसे हाइपरटेंशन या हाई ब्लड प्रेशर की अवस्था कहते हैं। कई बार हार्ट आर्टरीज पर दबाव पड़ने से उनके अंदर की लाइनिंग ब्लॉक हो जाती है। ब्लड सकुर्लेशन बाधित होने पर ब्लड प्रेशर बढ़ जाता है। जबकि स्वस्थ रहने के लिए ब्लड प्रेशर के दोनों पॉइंट्स को कंट्रोल करना जरूरी है। खासकर 55-60 साल से ज्यादा उम्र के बाद सिस्टोलिक हाइपरटेंशन का नियमित चैकअप कराना जरूरी है। इससे कार्डियोवेस्कुलर डिजीज होने का खतरा रहता है।दो तरह का हाइपरटेंशनप्राइमरी हाइपरटेंशन : इसके अधिकतर मरीजों में हाई ब्लड प्रेशर का कोई कारण स्पष्ट नहीं होता। सेकंडरी हाइपरटेंशन : यानी किसी बीमारी या दूसरे कारणों से हाई ब्लड प्रेशर की समस्या हो सकती है। हाइपरटेंशन को नियंत्रित रखने के लिए इसके कारण को जानना जरूरी है। करीब 95 प्रतिशत लोगों को बिना किसी कारण से एसेंशियल हाइपरटेंशन है जिसे मेडिसिन और लाइफ स्टाइल में बदलाव लाकर कंट्रोल किया जा सकता है।हाई ब्लड प्रेशर के कारणमरीजों की बड़ी संख्या है जिन्हें हाइपरटेंशन के कारणों का पता नहीं लगता। जिनमें कारणों का पता चल जाता है, उनका समुचित इलाज किया जा सकता है। छोटे बच्चों और युवाओं में हाइपरटेंशन के कई सेकंडरी कारण रहते हैं। जैसे- अनियमित और आरामपरस्त जीवनशैली, अनहेल्दी खानपान, खाने में नमक की अधिकता, पढ़ाई और कैरियर को लेकर तनाव, मोटापा, किडनी की बीमारी, आर्टरीज में ब्लॉकेज, हार्मोन संबंधी तकलीफ, गर्भावस्था, थायरॉयड, फैमिली हिस्ट्री, स्मोकिंग, एल्कोहल और नमकीन स्नैक्स का अधिक सेवन।कैसे जानें हाई ब्लड प्रेशर कोहाइपरटेंशन को साइलेंट किलर भी कहा जाता है क्योंकि इससे ग्रस्त 90 प्रतिशत रोगियों में इसके कोई लक्षण नहीं होते। बढ़ने पर सिरदर्द, धड़कन तेज होना, चलते समय सांस फूलना, चक्कर आना व थकावट आदि लक्षण होते हैं।क्या है रिस्कसामान्य व्यक्ति में सिस्टोलिक ब्लड प्रेशर 140 और डायसिस्टोलिक 90 से नीचे होना चाहिए। जबकि डायबिटीज के मरीजों में रिस्क बहुत बढ़ जाता है इसलिए उनका ब्लड प्रेशर 130/80 से कम होना चाहिए। हाई ब्लड प्रेशर को पहचानकर सही इलाज न हो तो इसका बढ़ा हुआ स्तर हार्ट, ब्रेन, लिवर, आंखों आदि को क्षति पहुंचाता है। मरीज को कई समस्याएं हो सकती हैं जैसे- हार्ट अटैक, हार्ट फेल्योर, ब्रेन हैमरेज, ब्रेन स्ट्रोक, पैरालाइसिस होने का खतरा, रेटिनल हैमरेज, पेरिफरल मस्कुलर डिजीज, किडनी फेल्योर आदि।समुचित उपचार है जरूरीहाइपरटेंशन के मरीज लक्षण या दिक्कत महसूस न होने पर आमतौर पर उपचार कराने से कतराते हैं। लेकिन इससे उनका ब्लड प्रेशर बढ़ जाता है और दूसरी समस्याएं होने की संभावना बढ़ जाती है। जबकि हाई ब्लड प्रेशर की जांच शुरूआती स्टेज पर होने और समुचित ध्यान रखने पर इसे ठीक किया जा सकता है। डॉक्टर मरीज को जीवनशैली में बदलाव लाने की सलाह देते हैं। अगर 2 महीने तक मरीज का हाई ब्लड प्रेशर कंट्रोल में नहीं आता, तो उसे मेडिसिन दी जाती हैं।ऐसे करें बचावजरूरी है नियमित रूप से हाई ब्लड प्रेशर की जांच करवायें और जानें कि आपका ब्लड प्रेशर स्टेटस क्या है। अगर आप प्री- हाइपरटेंशन मरीज की कैटेगरी में आते हैं तो इससे बचाव के समुचित कदम उठाने जरूरी हैं। समुचित जांच, सही सलाह और जीवनशैली में बदलाव से सिस्टोलिक हाइपरटेंशन को नियंत्रित किया जा सकता है। खासकर युवाओं को अपना ब्लड प्रेशर जरूर चैक कराना चाहिए। अगर ब्लड प्रेशर ज्यादा हो तो डॉक्टर को कंसल्ट करें। घर के बने संतुलित और पौष्टिक आहार का सेवन करें जिसमें ज्यादा से ज्यादा मौसमी फल-सब्जियां हों। केला, मौसमी, अनार, नारियल पानी जैसे पोटेशियम रिच पदार्थों का सेवन अधिक करें। फास्ट फूड, जंक फूड व वसायुक्त आहार से परहेज करें। ज्यादा नमक वाली चीजें कम खाएं। चाय-कॉफी का सेवन सीमित मात्रा में करें। घर पर ब्लडप्रेशर मॉनीटर से रेगुलर चैक करें। अगर आपका ब्लड प्रेशर काफी समय से 140/90 मिमी एचजी से अधिक हो तो डॉक्टर के परामर्श से नियमित दवाई लें। वॉक, योगा, मेडिटेशन या एक्सरसाइज करें।
सभी बंद पड़े 108 एंबुलेंस को 15 दिन में संचालित किया जाये : अजय कुमार सिंह टीम एबीएन, रांची। झारखंड के स्वास्थ्य, चिकित्सा शिक्षा एवं परिवार कल्याण विभाग के अपर मुख्य सचिव अजय कुमार सिंह के द्वारा राज्य के सभी सिविल सर्जन और उपाधीक्षकों के साथ स्वास्थ्य विभाग के अंतर्गत आने वाले सभी निकासी एवं व्ययन पदाधिकारियों के कार्यों की समीक्षा की गयी। इस समीक्षा बैठक में अपर मुख्य सचिव ने सभी को निर्देश देते हुए कहा कि जितने भी 108 एंबुलेंस छोटी-मोटी खराबी के कारण बंद हैं उन्हें 15 दिनों के अंदर प्रस्ताव तैयार प्राक्कलन के अनुसार राशि उपलब्ध करवाई जाये। उन्होंने कहा कि एंबुलेंस 100 प्रतिशत संचालित होने चाहिए। इसके साथ उन्होंने सभी अस्पतालों में सभी प्रकार के आवश्यक उपकरण एवं मशीनों का आंकलन कर उसकी सूची विभाग को प्रेषित करने के निर्देश दिए ताकि मशीनों का क्रय किया जा सके। वीडियो कांफ्रेंस के दौरान उन्होंने जिन अस्पतालों में एक्स रे मशीन नहीं है उसकी सूची उपलब्ध कराने के निर्देश दिए। साथ ही एक सप्ताह के अंदर मॉड्यूलर ओटी का प्रस्ताव उपलब्ध कराने का निर्देश दिया। वीसी के दौरान सीटी स्कैन और एमआरआई मशीन पर भी चर्चा की गयी। अपर मुख्य सचिव ने कहा कि जहां जगह नहीं है वहां आईपीएच मानक के अनुरूप स्थान उपलब्ध कराया जाए। वर्ष 2025-26 में आवंटित राशि उपावंटन के साथ-साथ एनएचएम की योजनाओं की समीक्षा तथा आवश्यक दिशा निर्देश दिये गये। अपर मुख्य सचिव ने सभी जिलों के सिविल सर्जन और उपाधीक्षकों को सदर अस्पताल से लेकर पीएचसी तक के स्वास्थ्य केंद्रों के रंग-रोगन एवं सुसज्जित करने का निर्देश दिया। उन्होंने निर्देश देते हुए कहा कि 1 महीने के अंदर सभी कार्यों को संपन्न करते हुए सभी का फोटोग्राफ अपलोड करें। एक महीने के बाद फिर से कृत कार्रवाई की समीक्षा की जाएगी। वर्तमान वित्तीय वर्ष की वांछित राशि उपलब्ध करा दी गई है, जिस पर अपर मुख्य सचिव ने विस्तार से चर्चा की।
बाबा रामदेव ने बताया ऐसा देसी नुस्खा जो पुरानी से पुरानी कब्ज का कर देगा इलाज, निकल जायेगी आंतों में जमी गंदगी बता दें कि कब्ज से राहत दिलाने में घरेलू नुस्खे भी आपकी मदद कर सकते हैं। बाबा रामदेव ने भी ऐसा ही एक नुस्खा शेयर किया है, जो कब्ज की समस्या से राहत दिलाने में मदद करेगा एबीएन हेल्थ डेस्क। आज के समय में लोगों की लाइफस्टाइल और खानपान ऐसा हो गया है जिसकी वजह से अक्सर लोगों को कब्ज जैसी समस्या हो जाती है। अमूमन लोगों को गैस, कब्ज और एसिडिटी की समस्या से परेशान रहते हैं। लंबे समय तक जब इस तरह की परेशानी होती है तो ये छोटी सी समस्या कई बड़ी समस्याओं का कारण बन जाता है। इसलिए कब्ज जैसी समस्या को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। वैसे तो कब्ज से राहत पाने के लिए बाजार में कई तरह की दवाइयां मिलती हैं लेकिन ये कब्ज का परमानेंट इलाज नहीं है। बता दें कि कब्ज से राहत दिलाने में घरेलू नुस्खे भी आपकी मदद कर सकते हैं। बाबा रामदेव ने भी ऐसा ही एक नुस्खा शेयर किया है। जो कब्ज की समस्या से राहत दिलाने में मदद करेगा। बाबा रामदेव वे बताया कब्ज का घरेलू इलाज बाबा रामदेव ने बताया कि किस तरह से गुलाब की पंखुडियां कब्ज से राहत दिलाने में मदद कर सकती हैं। गुलाब की खूबसूरती और महक ही नहीं बल्कि इसके गुण भी बहुत गजब के हैं। यह सेहत के लिए भी फायदेमंद होता है। इसके साथ ही यह पेट, दिमाग और एसिडिटी के लिए एक बेहतरीन औषधि है। गुलकंद बनाने के लिए क्या-क्या चाहिए गुलाब की पंखुडियां मिश्री के दाने शहद काली मिर्च हरी इलायची गुलकंद कैसे बनायें गुलकंद बनाने के लिए सबसे पहले गुलाब की पंखुडियों को तोड़कर एक ओखली में डालें, उसमें मिश्री के दाने डालकर अच्छी तरह से कूट लें। इसके बाद इसमें शहद और काली मिर्च डालकर अच्छा सा पेस्ट तैयार करें। अब इस पेस्ट को एक कांच के जार में डालकर धूप में रख दें। इसके बाद इसमें इलायची डालकर सभी चीजों को मिक्स कर लें। कैसे करना है सेवन बाबा रामदेव ने बताया कि आप इस पूरे मिश्रण को ऐसे भी खा सकते हैं। वहीं जिन लोगों को कब्ज की समस्या है उनके लिए ये बेहद लाभदायी है। इसका रोजाना सेवन कब्ज की समस्या से राहत दिलाने में मदद कर सकता है।
एबीएन हेल्थ डेस्क। वर्तमान समय की व्यस्त दिनचर्या व हमारे खानपान में आये बदलाव के कारण हम कई गंभीर समस्याओं से घिरते जा रहे हैं, उन्हें में से एक है चाय। चाय हमारे स्वास्थ्य पर विपरीत प्रभाव डालती है। चाय के नुकसान के बारे में योगाचार्य महेश पाल बताते कि अगर आप रोजाना सुबह चाय पीते है तो सावधान हो जाइये शायद आपको पता नहीं चाय लोगों को गंभीर रोगों से ग्रस्त कर रही है। सुबह की शुरुआत अधिकतर लोग चाय के साथ करते हैं, लेकिन यह चाय लोगों को अंदर ही अंदर बहुत ज्यादा नुकसान पहुंचा रही है। उनके स्वास्थ्य को खोखला करती जा रही है। सुबह-सुबह खाली पेट चाय पीना सेहत के लिए खतरनाक होता है। चाय आपके शरीर में पोषक तत्वों को रोकने का काम करती है। चाय उन लोगों के लिए ज्यादा खतरनाक साबित हो सकती है जिन्हें पेट संबंधित परेशानियां रहती है। सुबह अगर सबसे पहले खाली पेट चाय पी जाये तो यह जहर की तरह असर करती है। चाय में फ्लेवोनोइड्स के साथ केफिन और टेनिंन तत्व पाये जाते हैं और दूध में केसीन नाम का प्रोटीन होता है। जब यह मिलते हैं आपसे मिलकर एक कॉम्प्लेक्स बनाते हैं जो शरीर में फ्लेवोनोइड्स की गतिविधि को कम कर देता है। इससे शरीर को नुकसान होता है। जैसे कि एंटीआक्सिडेंट की क्षमता कम होना और पाचन तंत्र पर नकारात्मक प्रभाव पड़ना, इससे पेट की एसिडिटी बढ़ जाती है। जिससे पेट दर्द, अपच और गैस की समस्या हो जाती है, दूध में मौजूद संतृप्त वसा और कोलेस्ट्रॉल लंबे समय तक अधिक मात्रा मै चाय में सेवन करने पर हृदय स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचा सकता है। चाय में कैफीन की मात्रा नींद की गुणवत्ता पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकती है और मानसिक तनाव बढ़ा सकती है। चाय का अत्यधिक सेवन वजन बढ़ाने में योगदान कर सकता है। वही चाय के अंदर टैनिंन होते हैं जो कि एक तरह का पेनिफेनोल है। टैनिन चाय में पाया जाने वाला एक यौगिक है जो आयरन के अवशोषण को बाधित कर सकता है, जिससे आयरन की कमी हो सकती है। साथ ही स्टमक लाइनिंग को नुकसान पहुंचाता है। साथ ही इससे पेट में एसिड प्रोडक्शन बढ़ता है। दरअसल, हम जो चाय रोजाना पीते हैं, उसमें टैनिन भरपूर मात्रा में होता है। इसे पीने से न केवल आंतों का स्वास्थ्य खराब होता है बल्कि अन्य बीमारियों का खतरा भी बढ़ जाता है। चाय में मौजूद टैनिन का लिवर पर इतना बुरा प्रभाव पड़ता है कि इससे सूजन हो सकती है। खाली पेट चाय पीने से गैस, कब्ज एसिडिटी और पाचन संबंधी समस्याएं हो सकती हैं। खाली पेट चाय पीने पर हार्टबर्न यानी सीने में जलन की दिक्कत होती है। इससे अपच और एसिड रिफ्लक्स भी हो सकता है। हमें लगता है कि एक कप चाय से क्या ही हो जायेगा लेकिन एक कप चाय में भी 10 से 60 प्रतिशत तक कैफीन होता है, जो कोर्टिसोल लेवल्स को अचानक से बढ़ा देता है। यह स्ट्रेस हार्मोन है जिससे फ्रेश महसूस करने के बजाय एंजाइटी महसूस होने लगती है। खाली पेट चाय पीने से दांतों को नुकसान पहुंचता है, इससे दांत सड़ने लगते हैं और मसूड़ों की दिक्कत होने लगती है। इसके अलावा चाय पीने से पेशाब की समस्या हो सकती है। चाय आपको डिहाइड्रेट कर सकती है सुबह-सुबह खाली पेट चाय पीने से पुरुषों में प्रोस्टेट कैंसर का खतरा भी बढ़ जाता है। प्रोस्टेट कैंसर तब शुरू होता है जब प्रोस्टेट में कोशिकाओं के डीएनए में परिवर्तन होता है। कोशिका के डीएनए में निर्देश होते हैं जो कोशिका को बताते हैं कि क्या करना है। स्वस्थ कोशिकाओं में, डीएनए कोशिकाओं को एक निश्चित दर पर बढ़ने और गुणा करने के लिए कहता है। अत्यधिक चाय पीने से प्रोस्टेट में कोशिकाओं के डीएनए में परिवर्तन होने का खतरा बढ़ने की संभावना अधिक हो जाती है जिससे पुरुषों मै प्रोटेस्ट कैंसर होने का खतरा बढ़ जाता है। हालांकि यह उन पुरुषों को ज्यादा होता है जो दिन में पांच से छह कप चाय पीते हैं लेकिन सुबह खाली पेट पीने से यह खतरा और ज्यादा बढ़ जाता है। चाय पीने के नुकसान भी बहुत है। चाय में कैफीन के साथ-साथ थियोफिलाइन भी पाया जाता है, जो आपके शरीर में डिहाइड्रेशन का कारण बनता है। इसकी वजह से कब्ज के साथ कई अन्य परेशानियां भी हो सकती है जिसमें तनाव और चिंता की समस्या अनिद्र, नींद की कमी, एसिडिटी, त्वचा पर मुंहासे, अपच की समस्या, हृदय रोग, चाय में कैफीन और तेज पत्ती अम्ल वाले तत्वों को बढ़ा सकती है, जो आपके शरीर से कैल्शियम को बाहर निकालते हैं। इससे हड्डियां कमजोर हो सकती है। डायबिटीज का खतरा बढ़ता है, सुबह खाली पेट दूध वाली चाय पीने से इतने सारे हमारे स्वास्थ्य संबंधित नुकसान होते हमें सुबह चाय पीने से बचना चाहिए, फलों का जूस व फल, अंकुरित अनाज, जूस का सेवन करना चाहिए और हमारे दैनिक दिनचर्या में योग प्राणायाम, योग के द्वारा चाय से उत्पन्न हो रही बीमारियों से बचा जा सकता है। जैसे गैस कब्ज हृदय रोग अपच एवं अन्य रोगों से भी बच सकते हैं और हमें हमारे दैनिक दिनचर्या में संतुलित आहार व संतुलित दिनचर्या का पालन करना चाहिए।
मानसिक स्वास्थ्य: जिसे भारत में सबसे ज्यादा नजरअंदाज किया जाता है, वही सबसे जरूरी हैएबीएन सेंट्रल डेस्क। भारत में हर 7 में से 1 व्यक्ति किसी न किसी मानसिक समस्या से जूझ रहा है। फिर भी, मानसिक स्वास्थ्य को लेकर समाज में चुप्पी, शर्म और डर बना हुआ है। लोग डॉक्टर के पास सिरदर्द के लिए तो जाते हैं, लेकिन अंदर के दर्द को छिपा जाते हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, डिप्रेशन वर्ष 2030 तक दुनिया में सबसे बड़ी बीमारी बनने जा रही है। सामान्य लक्षण लगातार उदासी या अकेलापन रोजमर्रा के कामों में रुचि की कमी बार-बार सिरदर्द या थकान नींद की समस्या आत्मविश्वास में गिरावट या आत्महत्या के विचार सेरोटोनिन और डोपामिन जैसे न्यूरोट्रांसमीटर का असंतुलन क्रॉनिक तनाव के कारण कोर्टिसोल का उच्च स्तर सोचने, निर्णय लेने और याद रखने की क्षमता में गिरावट बचाव और समाधान 30 मिनट की फिजिकल एक्टिविटी से ब्रेन में एंडोर्फिन बढ़ता है — जो नेचुरल मूड बूस्टर है 7-8 घंटे की नींद मस्तिष्क की मरम्मत और भावनात्मक संतुलन के लिए जरूरी है संतुलित आहार में ओमेगा-3, विटामिन इ12, और मैग्नीशियम जैसे पोषक तत्व जरूरी हैं मेडिटेशन और डीप ब्रीदिंग से एक्टिविटी कम होती है — यानी स्ट्रेस घटता है मनोचिकित्सक या मनोवैज्ञानिक से परामर्श लें — यह पूरी तरह वैज्ञानिक और प्रभावशाली उपाय है अब समय आ गया है कि भारत मानसिक स्वास्थ्य को उतनी ही प्राथमिकता दे, जितनी दिल, दिमाग और हड्डियों को दी जाती है। खुद से प्यार की शुरुआत — अपने मन का इलाज करने से होती है।
एबीएन हेल्थ डेस्क। योगनिद्रा का अर्थ है आध्यात्मिक नींद, योग निद्रा लें और दिनभर तरोताजा रहें। प्रारंभ में यह किसी योग विशेषज्ञ से सीखकर करें तो अधिक लाभ होगा। योगनिद्रा द्वारा शरीर व मस्तिष्क स्वस्थ रहते हैं। यह नींद की कमी को भी पूरा कर देती है। इससे थकान, तनाव व अवसाद भी दूर हो जाता है। राज योग में इसे प्रत्याहार कहा जाता है। जब मन इन्द्रियों से विमुख हो जाता है। प्रत्याहार की सफलता एकाग्रता लाती है। योगनिद्रा में से भी हमें एकाग्रता आती है, योग निद्रा ध्यान का मुख्य उद्देश्य शारीरिक मानसिक बीमारियों व समस्याओं का हल करना एवं ब्रह्मांडीय ऊर्जा से जुड़ना है,योगनिद्रा ध्यान का प्रयोग रक्तचाप, मधुमेह, हृदय रोग, सिरदर्द, तनाव, चिड़चिड़ापन, एकाग्रता, आत्मविश्वास में कमी, भावनात्मक असंतुलन, भय, पेट में घाव, दमे की बीमारी, गर्दन दर्द, कमर दर्द, घुटनों, जोड़ों का दर्द, साइटिका, अनिद्रा, अवसाद और अन्य मनोवैज्ञानिक बीमारियों, स्त्री रोग में प्रसवकाल की पीड़ा में बहुत ही लाभ दायक है। योगाचार्य महेश पाल ने बताया कि योगनिद्रा ध्यान एक विश्राम तकनीक है, जिसे योगिक नींद भी कहा जाता है। यह एक ऐसी गहरी आराम की अवस्था है, जिसमें व्यक्ति जागते हुए भी गहरी विश्राम की स्थिति में होता है, बिना पूरी तरह से सोए हुए यह जागने और सोने के बीच की स्थिति है, जहां व्यक्ति बाहरी दुनिया से सचेत रहते हुए भी अपने अंदर की शांति और आराम का अनुभव करता है और ईश्वरीय चेतना से जुड़ जाता है।योगनिद्रा ध्यान के प्रथम चरण में समस्त प्रकार के शारीरिक व मानसिक रोगों व समस्याओं से निजात मिलती है, एवं हमारे चारो और धीरे-धीरे सकारात्मक ऊर्जा का घेरा (औरा) विकसित हो जाता है, योगनिद्रा ध्यान के दूसरे चरण में चेतना, अर्धचेतन अवस्था में रहेगी जिसमें स्वयं को स्वंय मैं खोजने का अभ्यास होता है, जिसमे बंद आंखों से अपनी अंत:चेतना से शरीर के बाहरी आवरण एवं अंत:करण को देखने का अभ्यास होता है।योग निद्रा ध्यान के तीसरे चरण मैं ब्रह्मांडीय ऊर्जा से जुड़ने, ईश्वरीय उच्च चेतना में लीन होने का अभ्यास होता है, यहांं समस्त विचार शून्य हो जाते हैं, योग निद्रा ध्यान का अभ्यास करने से पहले कुछ जरूरी बातों का ध्यान रखना होता है जिसमे अगर आप प्रथम चरण का अभ्यास करने बाले है तो आपको आपकी दैनिक दिनचर्या 7 दिन पहले से सही करनी होगी, योगनिद्रा ध्यान के दूसरे चरण के अभ्यास के लिए 15 दिन पहले से दिनचर्या ठीक करनी होगी।तीसरे चरण के लिए 21 दिन पहले दैनिक दिनचर्या को ठीक करना होगा तब जाकर हम इसका लाभ लेने मैं सक्षम बनते हैं, हमारी दिनचर्या इस प्रकार होगी योग निद्राध्यान के अभ्यास के पहले सुबह नाश्ते में फल, सलाद और अंकुरित अनाज, जूस ले दोपहर मैं सात्विक भोजन खाये जिसमें चावल, रोटी, हरि सब्जिया, सभी प्रकार की दाल उड़द की दाल को छोड़कर ले सकते हैं, शाम का भोजन सात्विक एवं हलका ले और 4 से 5:30 या 6 बजे तक कर ले।अगर 5 से 6 बजे तक नहीं खा पाते हैं तो फिर रात्रि मैं भोजन न करे एक गिलास दूध पी सकते हैं, भोजन में लहसुन और प्याज का प्रयोग न करें, उसके पश्चात रात्रि विश्राम 10 बजे तक सो जाए, सोने से पहले सामान्य श्वास - प्रस्वास एवं भ्रामरी प्राणायाम का अभ्यास 5-10 मिनिट जरूरी करके सोये, सुबह 5 बजे उठकर नित्य शौच क्रिया एवं स्नान से फ्री होकर एक गिलास गुनगुने पानी मैं एक चम्मच नींबू एक चम्मच शहद मिलाकर पिए और हल्का योग अभ्यास करे, इससे हमारा संपूर्ण शरीर डिटॉक्स हो जायेगा हमारे मन के विचार संतुलित हो जाएंगे और हम पूर्ण रूप से योग निद्रा ध्यान के लिए तैयार हो जाएंगे, योग निद्रा ध्यान करते समय ढीले और आरामदायक कपड़े पहनें। टाइट या असुविधाजनक कपड़े पहनने से बचें।
एबीएन हेल्थ डेस्क। 19 अप्रैल 2025 को हम 16वां विश्व लिवर दिवस भोजन ही औषधि है। इस थीम के साथ मनाने जा रहे हैं, योगाचार्य महेश पाल बताते हैं कि विश्व लीवर दिवस हर साल 19 अप्रैल को इस दिन का उद्देश्य लीवर के स्वास्थ्य के बारे में जागरूकता बढ़ाना है और लोगों को लीवर की देखभाल व लीवर महत्व के बारे में जागरूक करना है।विश्व लीवर दिवस पहली बार 19 अप्रैल, 2010 को मनाया गया था। इसे यूरोपियन एसोसिएशन फॉर द स्टडी ऑफ द लिवर (ईएएसएल) द्वारा स्थापित किया गया था। ईएएसएल की स्थापना की वर्षगांठ के उपलक्ष्य में इसे 19 अप्रैल को मनाया जाता है,वर्तमान की व्यस्त दैनिक दिनचर्या व हमारे खान पान में आये परिवर्तन के कारण हमारा लीवर कई सारी बीमारियों से ग्रस्त धीरे-धीरे होता जा रहा है।लिवर को स्वस्थ बनाने के लिए योग प्राणायाम एक उत्तम विकल्प के रूप में है, आइये हम जाने की लीवर हमारे शरीर में किस प्रकार से काम करता है,लीवर रक्त से विषाक्त पदार्थों को हटाता है, जैसे कि शराब और दवाएं, लीवर पित्त नामक तरल पदार्थ का उत्पादन करता है जो भोजन को पचाने में मदद करता है।लीवर ग्लूकोज को संग्रहीत करता है और आवश्यकतानुसार रक्त में रिलीज करता है,लीवर रक्त को साफ करने और शरीर में रक्त की मात्रा को नियंत्रित करने में मदद करता है,लीवर प्रोटीन का उत्पादन करता है जो रक्त में रक्त के थक्के और संक्रमण से लड़ने में मदद करते हैं।लीवर विटामिन और खनिजों को संग्रहीत करता है जो बाद में शरीर द्वारा उपयोग के लिए आवश्यक होते हैं, लीवर हार्मोनों के संतुलन को बनाए रखने में मदद करता है,जो हमारे शरीर की कई प्रक्रियाओं को नियंत्रित करते हैं,लीवर कोलेस्ट्रॉल को नियंत्रित करने में मदद करता है, जो हृदय स्वास्थ्य के लिए आवश्यक है।एक स्वस्थ लीवर का वजन लगभग 1.2 से 1.5 किलोग्राम के बीच होता है,लीवर पेट के ऊपरी दाहिने हिस्से में पसलियों के पिंजरे के नीचे स्थित होता हैं, हमारे खानपान में आए परिवर्तन के कारण एवं दैनिक दिनचर्या अवस्थित होने के कारण हमारे लीवर से संबंधित कई फंक्शन डिस्टर्ब हो जाते हैं जिसके वजह से लीवर कई रोगों से ग्रस्त हो जाता है, जिसमे है, हेपेटाइटिस (Hepatitis), लिवर में सूजन की स्थिति।हेपेटाइटिस A, B, और C जैसे वायरल संक्रमण, शराब का सेवन, या ऑटोइम्यून प्रतिक्रिया के कारण हो सकता है, सिरोसिस लिवर में निशान पड़ने की स्थिति। यह लिवर में सूजन और क्षति के कारण हो सकती है, जिससे लिवर का कार्य प्रभावित होता है, फैटी लिवर रोग, लिवर में वसा का जमा होना। यह शराब के सेवन, मोटापा, और मधुमेह के कारण होता है।लिवर कैंसर में कोशिकाओं का अनियंत्रित रूप से बढ़ना। यह सिरोसिस या हेपेटाइटिस बी या सी के कारण हो सकता है, लिवर की विफलता लिवर के कार्य में अचानक या धीरे-धीरे कमी होना। यह गंभीर लिवर की बीमारियों या दवाओं के अत्यधिक सेवन के कारण हो सकता है, लिवर की बीमारी के कुछ कारण हमारे सामने नजर आये है जिनमे वायरल संक्रमण, हेपेटाइटिस A, B, और C, अत्यधिक शराब का सेवन, मोटापा और मधुमेह इन स्थितियों से फैटी लिवर रोग हो सकता है।जब लीवर का कार्य डिस्टर्ब होता या धीरे धीरे लीवर रोगों से ग्रस्त होने लगता हैं तो उसके कुछ लक्षण हमारे सामने नजर आते हैं, पीलिया त्वचा और आंखों का पीला पड़ना,पेट में दर्द, सूजन, और बेचैनी, लगातार थकान या कमजोरी, भूख न लगना, भूख में कमी, पैरों और टखनों में सूजन, खुजली वाली त्वचा, गहरे रंग का मूत्र, पीला मल, आसानी से चोट लगना और रक्तस्राव, अगर अर्ध रात्रि के समय गहरी नींद(12 से 3) में अचानक से हमारी नींद खुलने लगे और यह लगातार हर वीक में दो या तीन बार होता हो तो आप समझ लीजिए आपके लवर से संबंधित कोई बड़ी बीमारी होने वाली है। लीवर से संबंधित रोगों से बचाव के लिए हमें हमारे दैनिक दिनचर्या व भोजन में परिवर्तन कर योग प्राणायाम को अपने जीवन में स्थान देना चाहिए लीवर से संबंधित कुछ महत्वपूर्ण योग अभ्यास है, धनुरासन, भुजंगासन, अधोमुख श्वानासन, नौकासन, हलासन, कपालभति, नाड़ी शोधन प्राणायाम।धनुरासन:- यह आसन लिवर को स्ट्रेच करता है और सक्रिय बनाता है।भुजंगासन:- यह आसन भी लिवर को एक्टिव और स्ट्रेच करता है।अधोमुख श्वानासन : यह आसन लीवर में सूजन को कम करता है और बाइल उत्पादन को बढ़ाता है।नौकासन : यह आसन पेट की चर्बी को कम करने में मदद करता है और लिवर के कार्यों में सुधार करता है।हलासन : यह आसन रीढ़ की स्ट्रेचिंग के साथ रक्त परिसंचरण को बढ़ावा देता है, जिससे लिवर के स्वास्थ्य में सुधार होता है।कपालभाति-: यह क्रिया शरीर में रक्त प्रवाह को बढ़ाता है और लिवर को हेल्दी बनाता है।अनुलोम-विलोम : यह प्राणायाम शरीर में रक्त प्रवाह को बेहतर बनाता है, जिससे लिवर को पर्याप्त पोषण और ऑक्सीजन मिलती है, आइये हम सब मिलकर इस लिवर दिवस पर शपथ लें कि हम हमारे लीवर को पूर्णतया स्वस्थ बनाकर रखेंगे और योग प्राणायाम को हमारी दिनचर्या में स्थान देंगे जिससे कि हमारा लीवर और हम पूर्ण रूप से स्वस्थ रहे।
अदिति भसीन एबीएन हेल्थ डेस्क। आज के दौर में हम शारीरिक स्वास्थ्य को तो प्राथमिकता देते हैं, लेकिन मानसिक स्वास्थ्य की अनदेखी कर देते हैं। क्या आपने कभी सोचा है कि हम भावनात्मक तनाव को गंभीरता से क्यों नहीं लेते? जब तक कोई बड़ी समस्या न हो, तब तक हम इसे नजरअंदाज करते रहते हैं। लेकिन मानसिक स्वास्थ्य का ख़्याल रखना उतना ही जरूरी है जितना शारीरिक स्वास्थ्य का। मानसिक रूप से स्वस्थ व्यक्ति ही अपने जीवन में संतुलन बना सकता है, बेहतर निर्णय ले सकता है और खुशहाल जीवन जी सकता है। मानसिक स्वास्थ्य के लिए प्रभावी कदम अपनी भावनाओं को समझें और स्वीकार करें : हर भावना का एक कारण होता है। अगर आप गुस्सा, दु:ख, या चिंता महसूस कर रहे हैं, तो इसे नकारने की बजाय इसे समझने की कोशिश करें। जब हम अपनी भावनाओं को स्वीकार करते हैं, तो हम उन पर बेहतर नियंत्रण पा सकते हैं। बात करें और अपनी भावनाएं व्यक्त करें : कई बार हम अपने दुख और तकलीफ को अपने भीतर दबा लेते हैं, जिससे वह अंदर ही अंदर बढ़ता जाता है।किसी भरोसेमंद व्यक्ति से अपनी भावनाएं साझा करें : चाहे वह परिवार का सदस्य हो, दोस्त हो या मनोवैज्ञानिक। जब हम अपनी भावनाओं को शब्दों में ढालते हैं, तो मन हल्का महसूस करता है और समस्याओं के समाधान की दिशा में बढ़ सकते हैं। स्वस्थ जीवनशैली अपनायें : शारीरिक गतिविधियाँ, अच्छा खान-पान और पर्याप्त नींद मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाने में मदद करते हैं। नियमित व्यायाम तनाव को कम करता है और सकारात्मकता को बढ़ाता है। सकारात्मक सोच विकसित करें : नकारात्मक विचारों में फंसने की बजाय, हर परिस्थिति में सकारात्मक पहलू खोजने की कोशिश करें। यह बदलाव धीरे-धीरे आत्मविश्वास बढ़ाने में मदद करेगा। मनोरंजन और आत्म-देखभाल को समय दें : अपनी पसंद के अनुसार कोई हॉबी अपनायें, जैसे कि किताबें पढ़ना, संगीत सुनना, पेंटिंग करना या प्रकृति के साथ समय बिताना। यह मानसिक शांति और संतुलन बनाए रखने में मदद करता है। मदद मांगने से न हिचकें : अगर आपको लगता है कि आपका मानसिक स्वास्थ्य प्रभावित हो रहा है और आप खुद से ठीक महसूस नहीं कर पा रहे हैं, तो मनोवैज्ञानिक या काउंसलर से परामर्श लें। यह कमजोरी नहीं, बल्कि आत्म-देखभाल की निशानी है।
नंदकिशोर मुरलीधर एबीएन हेल्थ डेस्क। आज दुनियाभर के लोगों में बीमारियों ने अपना घर बना लिया है। लाख जागरूकता के बावजूद लोग इसपर सफलता पाने में असफल हो रहे हैं। जिससे स्थिति दिन-प्रतिदिन भयावह होती जा रही है। इन सबके बीच मानसिक स्वास्थ्य लोगों के बीच आम समस्या बनकर रह गयी है। जिसपर काबू पाना अब बेहद ही जरूरी हो गया है। आज इन्हीं समस्याओं से पार पाने की कोशिश में एक प्रसिद्ध मनोवैज्ञानिक अदिति भसीन से एबीएन के प्रधान संपादक नंदकिशोर मुरलीधर ने खास बातचीत की। पेश हैं प्रमुख अंश... प्रश्न: मानसिक स्वास्थ्य का असली मतलब क्या है?उत्तर: जब हम बीमार पड़ते हैं, तो डॉक्टर के पास जाते हैं, दवा लेते हैं, आराम करते हैं। लेकिन जब मन थक जाता है, टूट जाता है, तब क्या करते हैं? ज़्यादातर लोग इसे नज़रअंदाज़ कर देते हैं। मानसिक स्वास्थ्य का मतलब सिर्फ़ मानसिक बीमारियों से बचना नहीं, बल्कि अपनी भावनाओं को समझना, तनाव को संभालना और एक संतुलित जीवन जीना भी है।प्रश्न: आजकल इतनी ज़्यादा मानसिक स्वास्थ्य समस्याएं क्यों बढ़ रही हैं?उत्तर: पहले इंसान अपनों के साथ बैठकर दिल की बातें करता था, लेकिन आज हमारी दुनिया मोबाइल स्क्रीन में सिमट गई है। सोशल मीडिया पर हम हंसते-मुस्कुराते चेहरों को देखते हैं और अपनी ज़िंदगी से तुलना करने लगते हैं। पढ़ाई, करियर, रिश्तों का दबाव और समाज की उम्मीदें हमें अंदर ही अंदर तोड़ देती हैं। यही कारण है कि डिप्रेशन, एंग्जायटी, और स्ट्रेस जैसी समस्याएं बढ़ रही हैं।प्रश्न: लोग मानसिक स्वास्थ्य को लेकर खुलकर बात क्यों नहीं करते?उत्तर: क्योंकि हमें बचपन से यही सिखाया गया कि मज़बूत बनो, रोओ मत, कमज़ोर मत पड़ो। लेकिन क्या कभी किसी ने यह सिखाया कि अगर दर्द हो, तो उसे महसूस करो, अगर कुछ भारी लग रहा है, तो किसी से बात करो? हमारे समाज में मानसिक स्वास्थ्य पर बात करना अभी भी आसान नहीं है, लेकिन हमें इस सोच को बदलना होगा।प्रश्न: मानसिक शांति के लिए हम क्या कर सकते हैं?उत्तर: सबसे पहले हमें खुद को समझना होगा—क्या चीज़ हमें परेशान कर रही है? क्या हमें वाकई मदद की ज़रूरत है? छोटी-छोटी चीज़ें, जैसे सुबह उठकर थोड़ा ध्यान लगाना, खुद से प्यार करना, सोशल मीडिया से थोड़ा दूर रहना, अपनों से खुलकर बात करना—ये सब हमारी मानसिक सेहत के लिए बहुत ज़रूरी हैं। अगर ज़रूरत लगे, तो किसी मनोवैज्ञानिक या थेरेपिस्ट से मदद लेने में झिझकें नहीं।प्रश्न: EFT क्या है और यह कैसे मदद करता है?उत्तर: EFT (Emotional Freedom Techniques) एक ऐसी तकनीक है जो हमारे शरीर के ऊर्जा बिंदुओं पर टैपिंग करके भावनात्मक तनाव को कम करने में मदद करती है। जैसे जब हमें डर लगता है तो दिल तेज़ धड़कने लगता है, वैसे ही हमारे शरीर में कई जगह भावनाओं का असर पड़ता है। EFT से हम इन भावनाओं को पहचानकर उन्हें ठीक कर सकते हैं, जिससे तनाव और चिंता कम होती है।प्रश्न: अदिति, आप खुद मानसिक स्वास्थ्य के क्षेत्र में कैसे काम कर रही हैं?उत्तर: मैंने खुद ज़िंदगी में कई उतार-चढ़ाव देखे हैं—लोगों का खो जाना, खुद से जूझना, और यहां तक कि कैंसर से भी लड़ना। लेकिन इन अनुभवों ने मुझे सिखाया कि मानसिक शक्ति कितनी ज़रूरी है। मैं बतौर मनोवैज्ञानिक और एडवांस EFT प्रैक्टिशनर लोगों को उनकी भावनाओं को समझने, खुद को अपनाने और अपने दर्द से उबरने में मदद करती हूं। मेरी संस्था Healing Taps With Aditi मानसिक स्वास्थ्य जागरूकता पर काम कर रही है, ताकि हर किसी को यह समझ आए कि वे अकेले नहीं हैं।निष्कर्ष:मानसिक स्वास्थ्य सिर्फ़ एक शब्द नहीं, बल्कि हमारे जीने का तरीका है। जब मन हल्का होगा, तभी ज़िंदगी भी खूबसूरत लगेगी। तो खुद से प्यार करें, अपनी भावनाओं को समझें और अगर ज़रूरत हो, तो मदद लेने से न हिचकें। याद रखें—आपकी भावनाएं भी उतनी ही अहम हैं, जितने आप खुद।(अदिति भसीन, एडवांस EFT प्रैक्टिशनर, मनोवैज्ञानिक से खास बातचीत, 9798951510)
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