एबीएन सेंट्रल डेस्क। अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन की ताइवान के समर्थन में दिए गए बयान व चेतावनी के बाद तिलमिलाए चीन ने फिर ताइवान को निशाना बनाया है। बाइडेन की धमकी के बाद चीन के 30 लड़ाकू विमानों ने एक साथ ताइवानी वायु सीमा में घुसपैठ की है। जानकारी मिलते ही ताइवान क एयर डिफेंस फोर्स हरकत में आ गई और रेडियो के जरिए भी चीनी पायलटों को चेतावनी देकर अपने इलाके से दूर जाने को कहा। जिसके बाद ताइवानी विमानों को पास आता देख चीनी लड़ाकू विमान अपनी सीमा में भाग खड़े हुए। ताइवानी विदेश मंत्रालय ने बताया है कि 30 मई को पीपुल्स लिबरेशन आर्मी एयरफोर्स के 30 लड़ाकू विमानों ने दक्षिण पश्चिमी एयर डिफेंस जोन में प्रवेश किया। इसमें 2 शानक्सी केजे-500 अवाक्स विमान, 4 शानक्सी वाई-8 ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट, 1 शानक्सी वाई-8 अर्ली वार्निंग, 1 शानक्सी वाई-8 एंटी सबमरीन वॉरफेयर विमान, 6 जे-16 लड़ाकू विमान, 8 जे-11 लड़ाकू विमान, 4 जे-10 लड़ाकू विमान, 2 सुखोई एसयू-35 और 2 सुखोई-30 लड़ाकू विमान शामिल थे। अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडेन ने ताइवान के समर्थन में कहा था कि अगर चीन ताइवान पर हमला करता है तो उनका देश सैन्य हस्तक्षेप करेगा। बाइडेन ने कहा कि यूक्रेन पर रूस के हमले के बाद स्वशासित द्वीप की रक्षा करने का दबाव और भी बढ़ गया है। उन्होंने कहा कि ताइवान के खिलाफ बल प्रयोग करने का चीन का कदम न केवल अनुचित होगा, बल्कि यह पूरे क्षेत्र को विस्थापित कर देगा और यूक्रेन में की गई कार्रवाई के समान होगा। इसके बाद चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता वांग वेनबिन ने जो बाइडेन के ताइवान को लेकर दिए गए बयान की निंदा करते हुए कहा था कि हम अमेरिकी टिप्पणी को खारिज करते हैं। ताइवान चीनी क्षेत्र का अभिन्न हिस्सा है और जहां तक ताइवान की बात है यह पूरी तरह से चीन का आंतरिक विषय है, जिसमें किसी विदेशी हस्तक्षेप की कोई गुंजाइश नहीं है। उन्होंने कहा कि चीन की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता सहित देश के मुख्य हितों के मुद्दों पर समझौता या रियायत की कोई गुंजाइश नहीं है।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन ने मंगलवार को टेक्सास के एक प्राथमिक विद्यालय में एक बंदूकधारी द्वारा 18 छोटे बच्चों की गोली मारकर हत्या करने के बाद अमेरिकियों से देश की शक्तिशाली बंदूक समर्थक लॉबी के खिलाफ खड़े होने का आह्वान किया। व्हाइट हाउस से दिए एक संबोधन में बाइडन ने कहा कि भगवान के नाम पर कब हम बंदूक लॉबी के खिलाफ खड़े होंगे। उन्होंने कहा कि इस देश के प्रत्येक नागरिक के लिए, प्रत्येक माता-पिता के लिए इस दर्द को कार्रवाई में बदलने का समय आ गया है। हमें इस देश के प्रत्येक निर्वाचित अधिकारी को यह स्पष्ट करना होगा। यह कार्य करने का समय है। इस दौरान बाइडन ने खुद अपनों को खोने का दुख साझा किया जिसमें साल 1972 में उन्होंने एक कार दुर्घटना में अपनी पत्नी और बेटी को खो दिया था। साल 2015 में उन्होंने बेटे को खो दिया था। उन्होंने कहा कि एक बच्चे को खोना आपकी आत्मा का एक टुकड़ा चीरने जैसा है। आपके सीने में एक खोखलापन रह जाता है। आप कभी भी पहले जैसे नहीं रह जाते हैं। अमेरिका में सामूहिक बंदूक हिंसा की हालिया घटना में एक 18 साल के बंदूकधारी ने मंगलवार को दक्षिण टेक्सास के एक प्राथमिक विद्यालय में गोली चला दी, जिसमें 19 छात्रों समेत 28 की मौत हो गई। 18 साल के बंदूकधारी का नाम सल्वाडोर रामोस बताया जा रहा है, जिसे पुलिस अधिकारियों ने घटनास्थल पर जवाबी कार्रवाई में मार डाला।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। एक्सएलआरआई जमशेदपुर के एक्सपीजीडीएम की ओर से क्लॉकस्पीड 2.0 का आयोजन 29 मई को किया जा रहा है। एक्सएलआरआई की ओर से दूसरी बार उक्त फ्लैगशिप आॅपरेशंस एंड सप्लाइ चेन कॉन्क्लेव का आयोजन होगा। 29 मई को आयोजित होने वाला ये कॉन्क्लेव वर्चुअल मोड में होगा। इसमें मुख्य अतिथि के रूप में हावार्ड मेडिकल स्कूल के सेंटर फॉर ग्लोबल डेवलपमेंट एंड लेक्चर के सीनियर फेलो प्रशांत यादव मौजूद रहेंगे। क्रिएटिंग वैल्यू थ्रू अ सस्टेनेबल सप्लाइ चेन विषय पर आयोजित इस कॉन्क्लेव में देश के कई प्रतिष्ठित संस्थानों के प्रतिनिधि शामिल होंगे। जो मौजूदा दौर में सप्लाइ चेन मैनेजमेंट के साथ ही अलग-अलग विषयों पर मंथन करेंगे। कार्यक्रम की शुरूआत एक्सएलआरआइ के स्ट्रेटेजिक मैनेजमेंट के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ रघु टाटा करेंगे। इस दौरान टाटा स्टील के चीफ ग्रुप शीपिंग रंजन सिन्हा इस बात पर अपनी बातों को रखेंगे कि आखिर किस प्रकार से अच्छे ह्यूमन रिसोर्स तैयार किये जाएं, उसकी प्रक्रिया, टेक्नोलॉजी के इस्तेमाल के साथ ही अस्थिरता, अनिश्चितता, जटिलता, अस्पष्टता जैसी गंभीर विषयों पर अपनी बातों को रखेंगे। इस दौरान मोगलिक्स के वीपी जसमीत सिंह मारवाह, स्नैपडील के बिजनेस फिनांस एंड प्रोक्योरमेंट के डायरेक्टर नरेश बाबू दत्ता, वेक्टर कंसल्टिंग ग्रुप के पाटर्नर अरविंद सिंह राणा, हामोर्नी आइएनसी की संस्थापक ऋचा पंत भी पैनल डिस्कशन में हिस्सा लेंगे।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। आर्थिक संकट से जूझ रहे पाकिस्तान में सरकार की परेशानियां बढ़ती जा रही हैं। पेट्रोल और डीजल की बढ़ती कीमतों ने समस्या को और गंभीर कर दिया है। अब इंधन संकट से निपटने के लिए पाकिस्तान सरकार ने नया प्लान तैयार बनाया है। पाकिस्तान के एक प्रमुख अखबार में छपी रिपोर्ट के मुताबिक, सरकार ने कार्यदिवस कम करने के प्लान को मंजूर कर लिया है। सरकार का मानना है कि इस योजना से ईंधन बचेगा और विदेशी मुद्रा की खपत भी कम हो जाएगी। दरअसल, एक तरफ जहां पाकिस्तान में तेल की खपत बढ़ रही है, तो दूसरी ओर पेट्रोल-डीजल की कीमतें भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ रही हैं जिस कारण अर्थव्यवस्था चरमरा रही है। पाक सरकार का मानना है कि काम के दिन करके पेट्रोल-डीजल बचाने की योजना से 2.7 अरब डॉलर वार्षिक तक विदेशी मुद्रा की बचत हो सकती है। स्टेट बैंक ऑफ पाकिस्तान ने यह प्रस्ताव तैयार किया है। इसके तहत ऑफिस में अब सिर्फ 4 दिन काम करने और तीन दिन छुट्टियां देने की बात कही गई है। इस प्लानिंग से POL बचत प्रति महीने औसत 12.2 करोड़ बचत का अनुमान है। 1 साल में इसके 1.5 अरब डॉलर तक पहुंचने का अनुमान है। प्रस्ताव में ये बताया गया है कि कार्य दिवस के दिन तेल की खपत 90 प्रतिशत होती है, जबकि छुट्टी वाले दिन यह आंकड़ा सिर्फ 10 प्रतिशत है। इसके अलावा स्टेट बैंक ऑफ पाकिस्तान ने दूसरा और तीसरा प्लान भी तैयार किया है। दूसरे प्लान के मुताबिक, उसने 4 वर्किंग डे, 2 लीव डे और एक दिन लॉकडाउन करने का सुझाव दिया है। इससे हर महीने करीब 17.5 करोड़ डॉलर बचत का अनुमान है। सालाना यह 2.1 अरब डॉलर तक पहुंच सकता है। वहीं तीसरे प्लान में 4 वर्किंग डे, 1 दिन की छुट्टी और 2 दिन लॉकडाउन का सुझाव दिया गया है। इस प्लान में सालाना 2.7 अरब डॉलर बचत की उम्मीद है।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। भारत ने अमेरिका के साथ अपनी साझीदारी एवं मैत्री संबंधों को वैश्विक शांति एवं स्थिरता तथा मानवता के कल्याण के लिए एक "अच्छाई की ताकत" करार दिया है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने आज यहां अमेरिका के राष्ट्रपति जोसेफ आर बाइडेन के साथ द्विपक्षीय बैठक में यह विचार व्यक्त किया। अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया, भारत एवं जापान के चतुष्कोणीय गठजोड़ "क्वॉड" की चौथी शिखर बैठक में भाग लेने आये प्रधानमंत्री मोदी ने क्वॉड शिखर बैठक के बाद बाइडेन से अलग से भेंट की। भारतीय प्रतिनिधिमंडल में विदेश मंत्री एस जयशंकर, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल, विदेश सचिव विनय मोहन क्वात्रा एवं अन्य अधिकारी शामिल थे। जबकि अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल में वहां के विदेश मंत्री एंटोनी जे ब्लिंकन, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार जैक सुलीवन शामिल थे। रणनीतिक साझीदारी को भरोसे की साझीदारी करार दिया : इस मुलाकात में दोनों नेताओं ने भारत अमेरिका मैत्री संबंधों एवं रणनीतिक साझीदारी की समीक्षा की और इसे अधिक व्यापक एवं गहन बनाने के उपायों पर चर्चा की। दोनों नेताओं ने हिन्द प्रशांत क्षेत्र और वैश्विक पटल पर ताजा घटनाक्रमों पर भी विचार विमर्श किया। रूस-यूक्रेन युद्ध के बारे में भी अमेरिका ने अपनी चिंताओं से भारत को अवगत कराया। बैठक में मोदी ने अपने आरंभिक वक्तव्य में बाइडेन से मुलाकात पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा, आपसे मिलकर हमेशा बहुत ख़ुशी होती है। आज हमने एक और सकारात्मक और उपयोगी क्वॉड शिखर बैठक में भी साथ साथ भाग लिया। उन्होंने भारत और अमेरिका की रणनीतिक साझीदारी को सही मायने मे एक विश्वास एवं भरोसे की साझीदारी करार दिया और कहा कि हमारे साझा मूल्यों, और सुरक्षा सहित कई क्षेत्रों में हमारे समान हितों ने इस विश्वास एवं भरोसे के बंधन को मजबूत किया है। उन्होंने कहा कि हमारे जनता के बीच संपकर् और घनिष्ठ आर्थिक सम्बन्ध भी हमारी साझीदारी को अद्वितीय बनाते है। दोनों देशों में व्यापार और निवेश में भी निरंतर विस्तार होता जा रहा है : प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत एवं अमेरिका के बीच व्यापार और निवेश में भी निरंतर विस्तार होता जा रहा है, यद्यपि ये हमारी क्षमता से अभी बहुत कम है। उन्होंने विश्वास जताया कि भारत अमेरिका निवेश इन्सेंटिव करार से निवेश की दिशा में ठोस प्रगति देखने को मिलेगी। उन्होंने कहा कि हम तकनीक के क्षेत्र में अपना द्विपक्षीय सहयोग बढ़ा रहे हैं, और वैश्विक मुद्दों पर भी आपसी समन्वय सुदृढ़ कर रहे हैं। हम दोनों ही देश हिन्द-प्रशांत क्षेत्र के बारे में भी समान नजरिया रखते हैं और न सिर्फ द्विपक्षीय स्तर पर बल्कि अन्य समान विचारों वाले देशों के साथ अपने साझा मूल्यों और साझा हितों को सुरक्षित रखने के लिए काम कर रहे हैं। क्वॉड और कल घोषित आईपीईएफ इसके सक्रिय उदहारण हैं। आज हमारी चर्चा से इस सकारात्मक पहल को और गति मिलेगी। अच्छाई की ताकत बनी रहेगी मोदी ने कहा, मुझे विश्वास है की भारत और अमेरिका की मित्रता, वैश्विक शांति और स्थिरता, पृथ्वी के सातत्य और मानव जाति के कल्याण के लिए एक अच्छाई की ताकत बनी रहेगी। अमेरिकी राष्ट्रपति बाइडेन ने मोदी के विचारों की सराहना की और कहा कि भारत एवं अमेरिका एक साथ मिल कर बहुत कुछ कर सकते हैं और करेंगे। उनका संकल्प है कि भारत अमेरिका के बीच साझीदारी विश्व में सबसे घनिष्ठ साझीदारी बने। उन्हें इस बात की खुशी है कि यूएस डेवेलेपमेंट फाइनेंस कॉर्पोरेशन भारत में महत्वपूर्ण परियोजनाओं, वैक्सीन उत्पादन, स्वच्छ ऊर्जा पहलों को समर्थन जारी रखने पर सहमत हो गया है। यह भी खुशी की बात है कि हम भारत अमेरिका वैक्सीन एक्शन प्रोग्राम को भी आगे बढ़ाएंगे। बाइडेन ने कहा कि हमने यूक्रेन पर रूस के क्रूर एवं गैरवाजिब हमले के दुष्प्रभावों और समूची वैश्विक व्यवस्था पर पड़ने वाले असर के बारे में भी बात की है। अमेरिका एवं भारत इन नकारात्मक प्रभावों को कम करने के उपायों पर निकटता से काम करते रहेंगे।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिका, जापान व ऑस्ट्रेलिया के नेताओं ने मंगलवार को यहां बहुपक्षीय सुरक्षा संवाद की दूसरी सामने-सामने की बैठक में हिस्सा लिया, जिसमें वे हिंद-प्रशांत क्षेत्र के विकास तथा आपासी हित के वैश्विक मुद्दों पर विचारों का आदान-प्रदान करेंगे। वहीं अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का क्वाड शिखर सम्मेलन में स्वागत किया। बाइडन ने कहा कि आपसे व्यक्तिगत तौर पर दोबारा मिलकर बहुत अच्छा लग रहा है। रूस-यूक्रेन युद्ध पर बाइडन ने कहा कि पुतिन सिर्फ एक संस्कृति को खत्म करने की कोशिश कर रहे हैं। यह एक यूरोपीय मुद्दे से अधिक है, यह एक वैश्विक मुद्दा है। अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा कि रूस के यूक्रेन को अनाज का निर्यात करने से रोकने से वैश्विक खाद्य संकट और बढ़ सकता है। बाइडन ने कहा कि रूस जब तक यूक्रेन के खिलाफ युद्ध जारी रखेगा, अमेरिका अपने सहयोगियों के साथ काम करेगा।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। लेबर पार्टी के नेता एंथनी अल्बानीस ऑस्ट्रेलिया के नए प्रधानमंत्री चुने गए हैं। अल्बानीस (59) ने उन्हें देश का 31वां प्रधानमंत्री बनाने के लिए मतदाताओं का कैंपरडाउन उपनगर में आभार व्यक्त किया और सिडनी में अपनी परवरिश का उल्लेख किया। अल्बानीस ने अपने समर्थकों से कहा, यह हमारे महान देश के बारे में बहुत कुछ कहता है कि एक पेंशनभोगी अकेली मां का बेटा जो कैंपरडाउन में सार्वजनिक आवास में पला-बढ़ा, वह आज रात ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री के रूप में आपके सामने खड़ा हो सकता है। उन्होंने कहा, हर माता-पिता अगली पीढ़ी के लिए ज्यादा चाहते हैं। मेरी मां ने मेरे लिए एक बेहतर जिंदगी का सपना देखा था और मुझे उम्मीद है कि मेरी यात्रा ऑस्ट्रेलियाई लोगों को सितारों की बुलंदियों तक पहुंचने के लिए प्रेरित करेगी। हालांकि यह स्पष्ट नहीं है कि अल्बानीस की पार्टी बहुमत की सरकार बना सकती है या उसे निर्दलीय अथवा अन्य छोटे दलों के निर्वाचित सांसदों का समर्थन चाहिए होगा। डाक मतपत्रों की गिनती अभी जारी : डाक मतपत्रों की गिनती अभी चल रही है, जिससे कई दिनों तक मतगणना चलने की संभावना है और इसे देखते हुए अल्बानीस संभवतः रविवार को कार्यवाहक प्रधानमंत्री के रूप में शपथ ले सकते हैं, ताकि वह तोक्यो में अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडन, जापान के प्रधानमंत्री फुमिओ किशिदा और भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ मंगलवार के क्वाड शिखर सम्मेलन में भाग ले सकें। विश्लेषकों का मानना है कि मॉरिसन और उनकी टीम की जलवायु, कोविड-19 सहित अपने तीन साल के कार्यकाल में महिलाओं के अधिकार, राजनीतिक अखंडता और प्राकृतिक आपदाएं जैसे कई मुद्दों से निपटने में नाकामी चुनाव में हार का कारण बनी। भारत के लिए अजनबी नहीं अल्बानीस : ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री स्कॉट मॉरिसन के चुनाव में हार स्वीकार करने के बाद भारत में ऑस्ट्रेलिया के उच्चायुक्त बैरी ओ फारेल ने शनिवार को कहा कि ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री बनने जा रहे एंथनी अल्बानीस भारत से भली-भांति परिचित हैं। ऑस्ट्रेलिया के चुनाव में लेबर पार्टी ने 2007 के बाद 15 साल बाद पहली चुनावी जीत हासिल की है। विपक्षी नेता एंथनी अल्बानीस को प्रधानमंत्री के रूप में शपथ दिलाई जाएगी। उच्चायुक्त ने ट्वीट कर कहा, ऑस्ट्रेलिया के निर्वाचित प्रधानमंत्री एंथनी अल्बानीस भारत के लिए अजनबी नहीं हैं क्योंकि उन्होंने एक यात्री के तौर पर 1991 में देश की यात्रा की थी और 2018 में एक संसदीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व किया था। 2018 की यात्रा के दौरान उन्होंने भारत-ऑस्ट्रेलिया आर्थिक, रणनीतिक संबंधों को और गहरा किए जाने की प्रतिबद्धता जताई थी। पीएम मोदी के साथ द्विपक्षीय बैठक तो तैयार अल्बानीस : अगर अल्बनीज आगामी क्वाड नेताओं की बैठक में भाग लेने के लिए टोक्यो जाते हैं, तो वह प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी के साथ द्विपक्षीय बैठक करने के लिए तैयार हैं। क्वाड समिट 24 मई को है। पिछले कुछ वर्षों में भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच संबंध मजबूत हुए हैं। पिछले महीने, दोनों देशों ने द्विपक्षीय व्यापार में विविधता लाने के लिए एक व्यापार समझौता किया। जून 2020 में, भारत और ऑस्ट्रेलिया ने अपने संबंधों को एक व्यापक रणनीतिक साझेदारी तक बढ़ाया और रसद समर्थन के लिए सैन्य ठिकानों तक पारस्परिक पहुंच के लिए एक ऐतिहासिक समझौते पर हस्ताक्षर किए। म्युचुअल लॉजिस्टिक्स सपोर्ट एग्रीमेंट (एमएलएसए) दोनों देशों की सेनाओं को समग्र रक्षा सहयोग को बढ़ाने के अलावा आपूर्ति की मरम्मत और पुनः पूर्ति के लिए एक-दूसरे के ठिकानों का उपयोग करने की अनुमति देता है।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडेन की एशिया यात्रा से चीन तिलमिलाया उठा है। बाइडेन की दक्षिण कोरिया एवं जापान यात्रा से बौखलाए चीन ने विवादित दक्षिण चीन सागर में सैन्य अभ्यास शुरू कर दिया है। बाइडेन की यह यात्रा काफी हद तक चीन से संभावित खतरे का मुकाबला करने पर केंद्रित है। दक्षिणी द्वीपीय हेनान प्रांत में चीनी समुद्री सुरक्षा प्रशासन कार्यालय ने कहा कि बृहस्पतिवार को यह सैन्याभ्यास शुरू हुआ जो सोमवार तक चलेगा। उसने कहा कि अन्य विमानों एवं जहाजों को संबंधित क्षेत्र में आने की मनाही होगी, लेकिन उसने उसका ब्योरा नहीं दिया। चीन दक्षिण चीन सागर पर दावा करता है और अहम समुद्री मार्ग एशिया में संभावित टकराव का बिंदु बन गया है। अमेरिका ने संप्रभुता के मुद्दे पर कोई रूख तो नहीं अपनाया है लेकिन वह समुद्र में स्वतंत्र रूप से आने जाने तथा जंगी जहाजों को उस क्षेत्र में चीन के कब्जे वाले सैन्यीकृत द्वीपों के समीप ले जाने पर जोर डालता है। वह इसे नौवहन परिचालन की स्वतंत्रता बताता है। चीन ऐसे मिशनों को नियमित रूप से जानबूझकर की गयी भड़काऊपूर्ण कार्रवाई बताता है। उसका कहना है कि इससे शांति एवं स्थायित्व खतरे में पड़ जाती है।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। जापान की राजधानी टोक्यो में 24 मई को क्वाड नेताओं की बैठक होने जा रही है। इस बैठक में भारत के पीएम नरेंद्र मोदी, जापान के पीएम फुमियो किशिदा और अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडेन भाग ले रहे हैं। आॅस्ट्रेलिया में 21 मई को आम चुनाव हैं इसलिए यह साफ नहीं है कि आॅस्ट्रेलिया की ओर से क्वाड शिखर सम्मेलन में कौन भाग लेगा। इस बीच टोक्यो पुलिस ने कहा है कि क्वाड नेताओं की कड़ी सुरक्षा को लेकर करीब 18 हजार पुलिस अधिकारियों को टोक्यो में तैनात किया जाएगा। जापान टाइम्स की एक रिपोर्ट के अनुसार टोक्यो के मेट्रोपॉलिटन एक्सप्रेसवे पर 22 मई से तीन दिनों के लिए यातायात प्रतिबंध लगाया जाएगा। टोक्यो मेट्रोपॉलिटन पुलिस विभाग को आशंका है कि यूक्रेन पर रूस के आक्रमण के बीच तनावपूर्ण अंतरराष्ट्रीय वातावरण में हमलों और व्यवधानों का खतरा बढ़ सकता है। ऐसे में टोक्यो पुलिस ड्रोन का जवाब देने के लिए दंगा पुलिस और सुरक्षा दल भी तैनात करेंगे। 19 मई को टोक्यो पुलिस की स्पेशल दंगा यूनिट ने अमेरिकी दूतावास के पास एक सड़क का निरीक्षण किया है। टोक्यो पुलिस सॉफ्ट टारगेट पर हमलों के खिलाफ भी उपायों को भी मजबूत कर रही है जो कि आमतौर पर सरकार या सैन्य सुविधाओं की तुलना में कम सुरक्षित होते हैं लेकिन वहां बड़ी भीड़ हो सकती है। जैसे कि नेताओं के रहने के ठिकाने, टोक्यो स्टेशन और टोक्यो एयरपोर्ट।
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