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अफगानिस्तान : 6.1 की तीव्रता के भूकंप से कम से कम 250 लोगों की मौत की आशंका
Published / 2022-06-22 07:12:05
अफगानिस्तान : 6.1 की तीव्रता के भूकंप से कम से कम 250 लोगों की मौत की आशंका

एबीएन सेंट्रल डेस्क। भारत के पड़ोसी देश अफगानिस्तान और पाकिस्तान में बुधवार सुबह भूकंप आया। अफगानिस्तान में 6.1 की तीव्रता के भूकंप के झटके महसूस किए गए| रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, अफगानिस्तान में भूकंप से कम से कम 250 लोगों की मौत की खबर है। इसके अलावा पाकिस्तान और मलेशिया में भी भूकंप के झटके महसूस किए गए हैं। देश के आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के अनुसार, दक्षिणी अफगानिस्तान में 6.1 तीव्रता का भूकंप आया है, जिसमें कम से कम 250 लोग मारे गए हैं। भूकंप का केंद्र राजधानी काबुल के दक्षिण में खोस्त शहर से लगभग 44 किमी दक्षिण-पश्चिम में था| 250 लोग हुए घायल तालिबान प्रशासन के आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के प्रमुख मोहम्मद नसीम हक्कानी ने कहा कि अधिकांश मौतों की पुष्टि पड़ोसी प्रांत पक्तिका में हुई, जहां 100 लोग मारे गए और 250 घायल हुए। पाकिस्तान के कई शहरों में महसूस किए गए भूकंप के झटके : पाकिस्तान में भी 6.1 तीव्रता का भूकंप आया। फिलहाल, यहां जानमाल के नुकसान को लेकर कोई खबर नहीं है। जियो न्यूज के मुताबिक बुधवार तड़के पाकिस्तान के पंजाब और खैबर पख्तूनख्वा के कुछ हिस्सों में 6.1 तीव्रता का भूकंप आया। भूकंप के झटके इस्लामाबाद, मुल्तान, भाकर, फलिया, पेशावर, मलकंद, स्वात, मियांवाली, पाकपट्टन और बुनेर समेत कई जगहों पर महसूस किए गए।

यूक्रेन ने रूस की मिसाइल और 2 ड्रोन किये तबाह, जंग में 34,000 रूसी सैनिकों की मौत
Published / 2022-06-22 05:03:40
यूक्रेन ने रूस की मिसाइल और 2 ड्रोन किये तबाह, जंग में 34,000 रूसी सैनिकों की मौत

एबीएन सेंट्रल डेस्क। रूस और यूक्रेन के बीच जंग करीब 4 महीने से जारी है। मंगलवार को जंग के 118वें दिन यूक्रेन की वायु सेना ने दावा किया कि उसने रूस की एक मिसाइल, दो ड्रोन और दो गोला बारूद डिपो नष्ट कर दिया है। यूक्रेन एयरफोर्स ने फेसबुक पर इसकी जानकारी शेयर की। बयान में कहा गया कि एयरफोर्स ने कीव और डोनेट्स्क क्षेत्रों में दो ड्रोन को मार गिराया। जंग के बीच रूस ने यूक्रेन से दो पूर्व अमेरिकी सैनिकों को पकड़ा है, इनके नाम अलेक्जेंडर ड्रूके और एंडी हुइन्ह हैं। रूस का दावा है कि ये दोनों यूक्रेन की ओर से जंग में शामिल थे। यूक्रेन के अधिकारियों का कहना है कि दोनों अपनी इच्छा से यूक्रेनी सेना में रूस से लड़ाई करने के लिए शामिल हुए थे। यूक्रेन का दावा है कि 24 फरवरी और 21 जून के बीच यूक्रेनी सेना ने रूस के करीब 34 हजार 100 सैनिकों को मारा है। मंगलवार को ही यूक्रेनी सेना ने 26 रूसी सैनिकों को भी मार गिराया। रूसी सैनिकों ने खार्किव के इंडस्ट्रियल्नी जिले में गोलाबारी की, जिसमें करीब 7 नागरिक घायल हो गए। कीव में भी बमबारी की गई है। 21 जून को अमेरिकी अटॉर्नी जनरल मेरीक गारलैंड अचानक यूक्रेन के दौरे पर पहुंच गए। मेरीक के इस दौरे का उद्देश्य युद्ध अपराध में शामिल रूसियों की पहचान कर उन पर मुकदमा चलाना था। इस दौरान उन्होंने रूसी युद्ध अपराधों की जांच में मदद करने के लिए एक वरिष्ठ अभिवक्ता की नियुक्ति की घोषणा की। रूस के कब्जे वाले क्रीमिया प्रांत में काला सागर से तेल निकालने वाले प्लेटफॉर्म पर यूक्रेन की सेना ने युद्ध के 118वें दिन हमला किया है। करीब चार माह से जारी इस जंग में यूक्रेन ने बाहर किसी बड़े रूसी ठिकाने पर पहली बार हमला किया है। उधर, पूर्व के सेवेरोदोनेस्क और लिसिचेंस्क शहरों के बड़े क्षेत्र पर रूसी कब्जा स्वीकारते हुए दक्षिणी प्रांत में हमले बढ़ा दिए हैं। रूस समर्थित क्षेत्रीय प्रमुख ने जानकारी दी कि क्रीमिया के बाहरी क्षेत्र पर किए गए यूक्रेनी सेना के हमले में तीन लोग घायल हैं, जबकि सात कर्मचारी लापता हैं। क्रेमलिन ने भी क्रीमिया में लापता कर्मियों की बात स्वीकारी है। ब्रिटिश खुफिया सैन्य अफसर ने यूक्रेनी सेना द्वारा पश्चिम की दी हुई हार्पून एंटी-शिप मिसाइलों के पहली बार सफल इस्तेमाल का दावा किया। उधर, रूसी सेना ने मंगलवार तड़के पूर्वी यूक्रेन के सेवेरोदोनेस्क शहर के पास सिवरस्की दोनेस्क नदी क्षेत्र तथा तोशकिवका शहर पर कब्जा करने का दावा किया। रूस-यूक्रेन जंग के कारण यूक्रेनी ओडेसा बंदरगाह में 14 देशों के 39 मालवाहक जहाज फंसे हुए हैं। ये जहाज कालासागर में रूसी नौसेना की नाकाबंदी के चलते चार माह से कहीं नहीं निकल पा रहे हैं। बीते दिनों रूसी गोलाबारी से ओडेसा बंदरगाह को भारी नुकसान हुआ है। रूस के पत्रकार दिमित्रि मुरातोव को शांति के लिए मिले नोबेल पुरस्कार की नीलामी 10.35 करोड़ डॉलर में हुई है। एक अनजान खरीदार ने इस नोबेल प्राइस को खरीदा जो मुरातोव को पिछले साल फिलीपींस की पत्रकार मारिया रसा के साथ फ्रीडम ऑफ एक्सप्रेशन की रक्षा के लिए मिला था। यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की ने कहा कि यूरोपीय संघ (ईयू) में उनके देश को शामिल करने को लेकर परिषद की बैठक से पूर्व रूस हमले और तेज करेगा। इस सप्ताह के अंत में होने वाले सम्मेलन में ईयू नेता यूक्रेन की सदस्यता का समर्थन कर सकते हैं।

कुवैत में नुपुर के खिलाफ किया प्रदर्शन, तो उन्हें वापस लौटना होगा
Published / 2022-06-14 06:17:27
कुवैत में नुपुर के खिलाफ किया प्रदर्शन, तो उन्हें वापस लौटना होगा

एबीएन सेंट्रल डेस्क। खाड़ी देश कुवैत में भाजपा की पूर्व प्रवक्ता नुपुर शर्मा के खिलाफ प्रदर्शन करने वाले भारतीय दोबारा कभी कुवैत वापस नहीं लौट पाएंगे। जल्द ही उन्हें वापस भारत भेज दिया जाएगा। इसके बाद शायद ही कुवैत सरकार उन्हें वापस आने की मंजूरी दे। दरअसल, कुवैत में अप्रवासियों के लिए श्रम कानून इतने सख्त हैं कि इनका उल्लंघन करना वहां पाप के समान है। और कुवैत सरकार द्वारा कानून का पालन न करने पर नरमी की कोई संभावना नहीं रहती। इंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक, श्रम कानूनों के मामले में अप्रवासियों के लिए अलग से नियम बनाए गए हैं। इसमें अप्रवासी कामगारों को कुवैत में किसी भी प्रकार का प्रदर्शन या धरना देने की अनुमति नहीं है। इसके बाद भी वहां रह रहे भारतीयों और एशियाई नागरिकों ने नुपुर शर्मा के खिलाफ प्रदर्शन किया, जिसके बाद उन्हें वापस भारत भेजने का फैसला किया गया है। रिपोर्ट के मुताबिक, उन्हें जल्द ही वापस भेज दिया जाएगा। क्या है पूरा मामला : भारत की पूर्व प्रवक्ता नुपुर शर्मा के खिलाफ 10 जून को कुवैत में प्रदर्शन किया गया था। फहाहील इलाके में हुए इस प्रदर्शन में भारतयों समेत अप्रवासी एशियाई नागरिक शामिल हुए थे। इसके बाद कुवैत सरकार ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया और उन्हें उनके देश वापस भेजने का फैसला किया। दोबारा नहीं लौट पाएंगे कुवैत : नियमों के तहत कानून का उल्लंघन करने पर कुवैत सरकार अप्रवासियों को वापस उनके देश भेज देती है। इसके अलावा दोबारा उनके देश आने पर प्रतिबंध भी लगा देती है। ऐसे में प्रदर्शन करने वाले भारतीय दोबारा कुवैत नहीं जा पाएंगे। भारत सरकार की तरफ से भी नहीं मिलेगी मदद : इस मामले में भारत सरकार की तरफ से भी कोई मदद मिलने की उम्मीद नहीं है। दरअसल, कुवैत में भारतीय दूतावास की ओर से पहले से ही इस मामले में एडवाइजरी जारी की जा चुकी है। दूतावास का कहना है कि यहां काम करने वाले कामगारों को कुवैत के नियमों का पालन करना होगा। ऐसे में भारत सरकार भी उनकी कोई मदद नहीं कर पाएगी।

पाकिस्तान में बढ़ा बेरोजगारी संकट, विदेशों में नौकरी पाने वालों की संख्या 27.6% बढ़ी
Published / 2022-06-13 07:30:54
पाकिस्तान में बढ़ा बेरोजगारी संकट, विदेशों में नौकरी पाने वालों की संख्या 27.6% बढ़ी

एबीएन सेंट्रल डेस्क। पाकिस्तान की आर्थिक स्थिति लगातार बदहाल होती जा रही है। हालात इतने खराब हो चुके हैं कि देश में रहने वाले नागरिक अब दूसरे देशों के पास शरण ले रहे हैं। एक रिपोर्ट में पाकिस्तान से विदेश जाने वाले लोगों को लेकर चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। पाकिस्तान की बदहाल आर्थिक स्थिति का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि देश में ज्यादातर युवा विदेश में नौकरी पाना चाहते हैं। ऐसा ही एक खुलासा इस रिपोर्ट में हुआ है। स्थानीय मीडिया ने बताया कि वर्ष 2021 में विदेश में नौकरी चाहने वाले पाकिस्तानियों की संख्या पिछले वर्ष की तुलना में बढ़कर 27.6 प्रतिशत हो गई है। ऐसा इसलिए हुआ है क्योंकि पाकिस्तान में आर्थिक संकट के कारण रोजगार बाजार में गिरावट आई है। दरअसल, COVID महामारी ने पाकिस्तान में रोजगार के अवसरों को लेकर बड़ा झटका दिया। जिसका असर देश की आर्थिक स्थिति पर भी काफी पड़ा। पाकिस्तान के प्रवासी प्रवासी रोजगार ब्यूरो ने वर्ष 2021 में 2,86,648 श्रमिकों को विदेशी रोजगार के लिए पंजीकृत किया।

अमेरिका के फिलाडेल्फिया में भीड़ पर अंधाधुंध गोलीबारी, अब तक 3 की मौत; कई घायल
Published / 2022-06-05 08:48:13
अमेरिका के फिलाडेल्फिया में भीड़ पर अंधाधुंध गोलीबारी, अब तक 3 की मौत; कई घायल

एबीएन सेंट्रल डेस्क। शनिवार देर रात अमेरिका के फिलाडेल्फिया में बंदूकधारी ने भीड़ पर अंधाधुंध गोलीबारी शुरू कर दी। इस घटना में अब तक कम से कम 3 लोगों की मौत हो गई है, जबकि कई घायल हैं। अमेरिकी न्यूज़ चैनल एनबीसी के मुताबिक ये घटना मध्यरात्रि के बाद की है। कहा जा रहा है कि इसमें कई बंदूकधारी शामिल थे। शुरूआती रिपोर्ट के मुताबिक मृतकों की संख्या बढ़ सकती है। अब तक कम से कम 14 लोगों के घायल होने की पुष्टि हो चुकी है। फिलहाल ये स्पष्ट नहीं है कि संदिग्ध मारा गया है या नहीं। अधिकारियों का कहना है कि कोई गिरफ्तारी नहीं हुई है, लेकिन एक हथियार बरामद किया गया है। फिलहाल पूरे इलाके को घेर दिया गया है। पुलिस ने कहा कि बंदूकधारियों की तलाश रविवार सुबह तड़के जारी रही। शूटरों में से एक को अमेरिकन स्ट्रीट पर दक्षिण की ओर भागते हुए देखा गया था। पुलिस के मुताबिक घटनास्थल पर दो बंदूकें मिलीं, जिनमें से एक में एक मैगजीन थी। अधिकारियों ने साउथ स्ट्रीट पर दूसरी और पांचवीं सड़कों के बीच के क्षेत्र को रात भर के लिए बंद कर दिया था।

बांग्लादेश : कंटेनर डिपो में आग के बाद भीषण ब्लास्ट, 35 की मौत, 300 से ज्यादा गंभीर
Published / 2022-06-05 08:33:02
बांग्लादेश : कंटेनर डिपो में आग के बाद भीषण ब्लास्ट, 35 की मौत, 300 से ज्यादा गंभीर

एबीएन सेंट्रल डेस्क। बांग्लादेश के चटगांव में एक शिपिंग कंटेनर डिपो में बड़ा हादसा हुआ है। रविवार देर रात यहां पर भीषण आग लग गई। इस हादसे में अब तक 35 लोगों की मौत हो चुकी है। मरने वालों में 5 दमकल कर्मी भी हैं। 300 से ज्यादा लोग घायल हुए हैं। मृतकों की संख्या बढ़ने की आशंका जताई जा रही है। सरकारी चतग्राम मेडिकल कॉलेज हॉस्पिटल में तैनात एक पुलिस अधिकारी ने समाचार एजेंसी पीटीआई को बताया कि अब तक 35 शवों को अस्पताल के मुर्दाघर में लाया जा चुका है। ये हादसा चटगांव के सीताकुंड उपजिले के कदमरासुल इलाके के बीएम कंटेनर डिपो में हुआ। चटगांव मेडिकल कॉलेज अस्पताल पुलिस चौकी के पुलिस अधिकारी नूरुल आलम के मुताबिक, कंटेनर डिपो में आग शनिवार रात करीब 9 बजे लगी थी। फायर सर्विस यूनिट के कर्मचारी आग बुझाने में जुटे हुए थे, उसी दौरान रात करीब 11:45 बजे एक तेज धमाका हुआ और आग फैल गई। कंटेनर में केमिकल होने के कारण आग एक कंटेनर से दूसरे कंटेनर तक फैलती चली गई। ये धमाका इतना तेज था कि उसकी आवाज कई किलोमीटर दूर तक सुनी गई। आसपास स्थित घर हिल गए। कई घरों की खिड़कियों के शीशे भी टूट गए। चटगांव के स्वास्थ्य और सेवा विभाग के प्रमुख इस्ताकुल इस्लाम ने बताया कि शनिवार की रात सीताकुंडा उपजिला के कदमरासुल इलाके में स्थित बीएम कंटेनर डिपो में आग लग गई। आग लगने और उसके बाद हुए विस्फोटों में बहुत से लोगों की मौत हो गई। पुलिस और दमकल कर्मियों सहित सैकड़ों लोग झुलस गए। चटगांव रीजन के चीफ डॉक्टर ने समाचार एजेंसी एएफपी को बताया कि हादसे में मरने वालों की संख्या बढ़कर 35 हो चुकी है। 300 से ज्यादा लोग जख्मी हुए हैं। घायलों का इलाज जारी है। बीएम कंटेनर डिपो के निदेशक मुजीबुर रहमान ने कहा कि यह अभी साफ नहीं है कि आग किस वजह से लगी, लेकिन लगता है कि आग कंटेनर से शुरू हुई। चटगांव फायर ब्रिगेड और नागरिक सुरक्षा के सहायक निदेशक मोहम्मद फारुक हुसैन सिकंदर ने बताया कि आग बुझाने के लिए 19 से ज्यादा दमकलों को लगाया गया।

ट्विटर गेम : अब एलन मस्क को भरना होगा 1 अरब डॉलर जुर्माना!
Published / 2022-06-04 03:38:45
ट्विटर गेम : अब एलन मस्क को भरना होगा 1 अरब डॉलर जुर्माना!

एबीएन सेंट्रल डेस्क। ट्विटर ने शुक्रवार को कहा कि एलन मस्क द्वारा सोशल मीडिया फर्म के 44 अरब डॉलर के अधिग्रहण के लिए एचएसआर अधिनियम के तहत वेटिंग पीरियड अब समाप्त हो गई है। सोशल मीडिया कंपनी ने कहा कि अब सौदे को पूरा करना शेष नीतिगत समापन शर्तों के अधीन है, जिसमें ट्विटर के शेयरधारकों द्वारा समर्थन और लागू नियामक समर्थन की प्राप्ति शामिल है। समय सीमा खत्म होने के बाद अब सारा दारोमदार एलन मस्क पर आ चुका है। अब या तो दुनिया के सबसे अमीर मस्क ट्विटर खरीदेंगे या उन्हें भारी भरकम जुर्माना देना होगा। दरअसल कुछ समय पहले एलन मस्क ने एक ट्वीट के जरिए कहा कि फिलहाल ट्विटर डील को कुछ समय के लिए होल्ड कर दिया गया है। उन्होंने चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि 20 प्रतिशत ट्विटर खाते फर्जी हैं। मस्क ने कहा कि ट्विटर खरीदने के लिए उन्होंने जो पेशकश की थी वह ट्विटर के ग्राहकों की असली संख्या के आधार पर थी, और वह सौदे को लेकर तब तक आगे नहीं बढ़ेंगे, जब तक इस बात का सबूत न हो कि पांच फीसदी से कम खाते फर्जी हैं। हालांकि इसके बाद मस्क ने बाद में स्पष्ट किया था कि वह अभी भी ट्विटर को खरीदने के लिए प्रतिबद्ध हैं। लेकिन ट्विटर, मस्क के व्यवहार से नाराज हो गई। इसके बाद ट्विटर ने पलटवार करते हुए सैन फ्रांसिस्को स्थिति अमेरिकी सरकार के सिक्योरिटीज एंड एक्सचेंज कमीशन में एक स्टेटमेंट फाइल किया। ट्विटर कंपनी का कहना था कि अगर ट्विटर कंपनी अपने प्लेटफॉर्म पर फर्जी खातों की संख्या साबित करने में नाकाम भी रहती है, फिर भी एलन मस्क को तय 44 अरब डील में ट्विटर खरीदना होगा। ट्विटर ने कहा कि कंपनी ने फैसला किया है, कि एलन मस्क को अपने प्रस्ताव से पीछे हटने की इजाजत नहीं दी जाएगी। अगर एलन मस्क एकतरफा ट्विटर खरीदने का सौदा रद्द करते हैं, तो फिर उन्हें एक अरब डॉलर का हर्जाना बतौर ब्रेकअफ फीस के तौर पर भरना होगा। इसके साथ ही अनुबंध का जो उल्लंघन होता है, उसके मुकदमे में जो भारी भरकम कानूनी खर्च आएगा, वो भी एलन मस्क को ही देना होगा। लिहाजा, एलन मस्क के लिए अब अपने पैर पीछे खींचना आसान नहीं होने वाला है। इससे पहले मार्च में टेस्ला कंपनी के मालिक एलन मस्क ने ट्विटर को 44 अरब डॉलर में खरीदने की बात कही थी। कंपनी की ओर से कहा गया था कि डील के अनुसार कंपनी के शेयर धारकों को 54.20 अमेरिकी डॉलर प्रति शेयर के बदले दिए जाएंगे। इस ऐलान के बाद एलन मस्क ने कहा कि मैं ट्विटर को पहले से कहीं बेहतर बनाना चाहता हूं, इसमे नए फीचर लाकर, लोगों में भरोसा बढ़ाने के लिए इसके एलगोरिदम को लोगों के सामने रखा जाएगा। ट्विटर में जबरदस्त क्षमता है, मैं कंपनी के साथ काम करने को लेकर उत्सुक हूं।

फ्रांस में तेजी से फैल रहा मंकीपॉक्स, 51 हुए संक्रमित
Published / 2022-06-04 03:30:20
फ्रांस में तेजी से फैल रहा मंकीपॉक्स, 51 हुए संक्रमित

एबीएन सेंट्रल डेस्क। फ्रांस में मंकीपॉक्स के मामले लगातार बढ़ते जा रहे हैं। यह बीमारी अब लोगों को कोरोना वायरस की तरह ही डराने लगी है। बीते शुक्रवार को फ्रांसीसी स्वास्थ्य अधिकारियों ने जानकारी देते हुए बताया कि देश में अब तक मंकीपॉक्स के कुल 51 मरीज मिले हैं। वहीं बीते बुधवार को फ्रांस में कुल 33 मामले दर्ज किए गए थे। फ्रेंच नेशनल पब्लिक हेल्थ एजेंसी ने कहा है कि मंकीपॉक्स से पीड़ित सभी मरीज पुरुष हैं, लेकिन राहत की बात है कि अब तक सिर्फ 1 मरीज को अस्पताल में भर्ती कराने की जरूरत पड़ी। इस मरीज को भी हॉस्पिटल से छुट्टी दे दी गई है। एनडीटीवी के मुताबिक फ्रांस में लोगों को मंकीपॉक्स की वैक्सीन लेने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। फ्रांस के हेल्थ मिनिस्टर ब्रिगिट बौर्गुइग्न ने कहा कि स्वास्थ्य अधिकारियों को उम्मीद नहीं थी कि इतनी संख्या में मंकीपॉक्स के मरीज सामने आएंगे। उन्होंने कहा है कि देश में वैक्सीन की कोई कमी नहीं है। साथ ही उन्होंने लोगों से वैक्सीन लगवाने की अपील की है। फ्रांस की सरकार ने मंकीपॉक्स के रोगी के संपर्क में आने वाले स्वास्थ्य कर्मचारियों को भी टीका लेने की बात कही है। इधर, यूएस सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन ने शुक्रवार को जानकारी देते हुए कहा कि दुनिया में मंकीपॉक्स के अब तक 700 से अधिक मामले सामने आए हैं। अगर बात करें संयुक्त राज्य अमेरिका की तो यहां 21 मामले दर्ज किए गए हैं। मंकीपॉक्स के बढ़ते मामलों ने विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्लूएचओ) की चिंता बढ़ा दी है। हाल ही में डब्लूएचओ के प्रमुख टेड्रोस अदनोम ने प्रभावित देशों से सर्विलांस बढ़ाने की अपील की है। सबसे बड़ी राहत की बात है कि मंकीपॉक्स वायरस से मृत्यु दर आमतौर पर काफी कम है और किसी भी देश में अब तक इस बीमारी से कोई भी मौत की सूचना नहीं मिली है। इस वायरस की चपेट में आए मरीज को पहले बुखार होता है। इसके बाद उसके शरीर पर चेचक की तरह दाने हो सकते हैं। साथ ही लिम्फ नोड में सूजन भी हो सकती है। खास बात है कि मंकीपॉक्स चेचक, खसरा, खुजली जैसी बीमारियों से अलग है। आमतौर पर इस बीमारी के लक्षण हैं- बुखार, सिरदर्द, पीठ दर्द, मांसपेशियों में दर्द, कमजोरी, लिम्फ नोड्स में सूजन। मंकीपॉक्स की चपेट में आए मरीजों को बुखार आमतौर पर 1 से 3 दिनों तक रहता है।

विश्व चाय बाजार में धाक जमाने की फिराक में बांग्लादेश
Published / 2022-06-02 17:04:30
विश्व चाय बाजार में धाक जमाने की फिराक में बांग्लादेश

एबीएन सेंट्रल डेस्क। बड़ी संख्या में बांग्लादेश के किसान अब चाय की खेती करने लगे हैं। इससे उनकी आमदनी बढ़ने के संकेत हैं। अब चाय के कारोबार से जुड़े लोग यह दावा कर रहे हैं कि अगले कुछ वर्षों में बांग्लादेश विश्व बाजार के लिए चाय एक बड़ा सप्लायर बन जाएगा। जानकारों के मुताबिक बीते कुछ दशकों में बांग्लादेश के किसानों ने कभी चाय की खेती को तरजीह नहीं दी। उनका ध्यान धान, मक्का, आलू, तंबाकू और गन्ने की खेती पर टिका रहा। लेकिन शेख हसीना वाजेद की सरकार की कोशिशों से अब सूरत बदल रही है। शेख हसीना की अवामी लीग सरकार बांग्लादेश को चाय का एक बड़ा उत्पादक देश बनाने की योजना पर काम कर रही है। प्रति एकड़ दो हजार किलोग्राम तक चाय : इसके तहत कुछ किसानों ने प्रति एकड़ दो हजार किलोग्राम तक चाय की पत्ती उपजाई है। बताया जाता है कि ज्यादातर आलू किसानों ने चाय की खेती को अहमियत दी है। इसकी वजह यह है कि आलू की खेती घाटे का सौदा बनती चली गई है। वेबसाइट निक्कईएशिया.कॉम ने अब चाय की खेती कर रहे किसान मौदूद हुसैन की कहानी छापी है। हुसैन ने पिछले साल चाय की पत्तियों की बिक्री से 18 लाख टका का मुनाफा कमाया। बाकी किसी फसल से उन्हें इतना मुनाफा नहीं हुआ था। उन्होंने वेबसाइट से कहा- जब मैंने देखा कि बहुत कम मेहनत और निवेश से चाय की फसल उग सकती है, तो मेरी सोच बदल गई। एक सीजन में हम पांच से छह बार इन पत्तियों को तोड़ कर सीधे फैक्टरियों को बेच सकते हैं, जिससे हमें काफी फायदा होता है। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक पिछले एक दशक में चाय की खेती करने वाले किसानों की संख्या में दस गुना बढ़ोतरी हुई है। देश के सिर्फ पांच उत्तरी जिलों में जिलों में आज आठ हजार से ज्यादा किसान चाय की खेती कर रहे हैं। बांग्लादेश के इस इलाके में चाय उद्योग में अब 30 हजार से ज्यादा लोगों को रोजगार मिला हुआ है। इन जिलों में चाय के लगभग दो दर्जन प्रोसेसिंग प्लांट हैं। उत्पादन नौ करोड़ 65 लाख किलोग्राम तक पहुंचा : बांग्लादेश टी बोर्ड के आंकड़ों के मुताबिक साल 2021 में पांच उत्तरी जिलों में 11,400 एकड़ से अधिक जमीन पर चाय की खेती हुई। जबकि 2020 में मुश्किल से 455 एकड़ जमीन पर ये खेती हुई थी। 2021 में यहां एक करोड़ 40 लाख किलोग्राम से अधिक तय की प्रोसेसिंग हुई, जबकि 2020 में ये आंकड़ा एक करोड़ 32 लाख किलोग्राम था। वैसे बांग्लादेश का कुल चाय उत्पादन पिछले साल नौ करोड़ 65 लाख किलोग्राम था। आज भी बांग्लादेश में चाय का सबसे ज्यादा उत्पादन देश के पूर्वी जिलों में होता है। इनमें अब श्रीमंगल जिले को देश की चाय राजधानी के नाम से जाना जा रहा है। जानकारों के मुताबिक बांग्लादेश में चाय की खेती की शुरुआत ब्रिटिश काल में ही हुई थी। एक समय ये इलाका चाय के प्रमुख उत्पादकों में था। लेकिन बाद में यहां चाय की खेती का चलन घट गया। अब सरकार ने फिर किसानों को चाय उपजाने के लिए प्रेरित किया है। लेकिन जानकारों के मुताबिक बांग्लादेश में उत्पादित चाय की गुणवत्ता अभी भी कमजोर है। अगर सरकार क्वालिटी सुधारने की अपनी योजना में सफल रही, तो अनुमान है कि बांग्लादेश विश्व चाय बाजार में अपनी धाक जमा लेगा।

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