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श्रीलंका : नये राष्ट्रपति के लिए आज पहली बार सीधे संसद में चुनाव
Published / 2022-07-20 08:00:21
श्रीलंका : नये राष्ट्रपति के लिए आज पहली बार सीधे संसद में चुनाव

एबीएन सेंट्रल डेस्क। श्रीलंका में आज नए राष्ट्रपति का चुनाव किया जाएगा और 44 सालों के बाद पहली बार ऐसा हो रहा है, कि देश की संसद में नये राष्ट्रपति का चुनाव होगा। नए राष्ट्रपति का चुनाव सीक्रेट बैलेट से होगा। मंगलवार को श्रीलंका के सांसदों ने तीन सांसदों को राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार के तौर पर चुना है। जिसमे कार्यकारी राष्ट्रपति रानिल विक्रमसिंघे, डलास अलहपेरुमा और अनुरा कुमारा डिसनायके शामिल हैं। इन तीनों में से कोई एक श्रीलंका का अगला राष्ट्रपति बन सकता है। सात दशकों के इतिहास में अब तक के सबसे खराब आर्थिक संकट से निपटने के लिए 2 करोड़ 20 लाख की आबादी वाले इस द्वीप देश के भविष्य पर सवाल बने हुए हैं। श्रीलंका की सभी राजनीतिक पार्टियों ने एकजुट होकर सरकार बनाने का फैसला किया है और वो फैसला कितना कारगर होता है, वो आने वाला वक्त ही बताएगा। श्रीलंका के विपक्ष के नेता साजिथ प्रेमदासा, ने अपना नामांकन वापस ले लिया था। प्रेमदासा ने एक ट्वीट करके इसकी जानकारी दी थी। उन्होंने ट्वीट करके लिखा, अपने देश की बेहतरी के लिए मैं अपना नामांकन राष्ट्रपति पद से वापस लेता हूं। हमारी पार्टी डलास को राष्ट्रपति बनाने के लिए कड़ी मेहनत करेगी। बता दें कि राष्ट्रपति पद के लिए आज 225 सांसद अपने वोट का इस्तेमाल सीक्रेट बैलेट के जरिए करेंगे और देश के अगले राष्ट्रपति को चुनेंगे। श्रीलंका आज अपने नए राष्ट्रपति का चुनाव करेगा। नए राष्ट्रपति का चुनाव सीक्रेट बैलेट से होगा। मंगलवार को श्रीलंका के सांसदों ने तीन सांसदों को राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार के तौर पर चुना है। जिसमे डलास अलहपेरुमा, कार्यकारी राष्ट्रपति रानिल विक्रमसिंघे और अनुरा कुमारा डिसनायके शामिल हैं। इन तीनों में से कोई एक श्रीलंका का अगला राष्ट्रपति बन सकता है।

ब्रिटेन : भीषण गर्मी के प्रकोप से देश में पहली बार रेड अलर्ट
Published / 2022-07-20 07:51:18
ब्रिटेन : भीषण गर्मी के प्रकोप से देश में पहली बार रेड अलर्ट

एबीएन सेंट्रल डेस्क। ब्रिटेन में भीषण गर्मी का प्रकोप बढ़ता जा रहा है जिसके चलते देश में पहली बार रेड अलर्ट जारी किया गया है। ब्रिटेन में सोमवार को अब तक का सबसे गर्म दिन रहने की आशंका के बीच देश में लोगों को घरों के अंदर रहने और गैर-जरूरी यात्रा से बचने की सलाह दी गई है, क्योंकि तापमान यहां पहली बार 40 डिग्री सेल्सियस तक पहुंचने के करीब है। ब्रिटेन की स्वास्थ्य सुरक्षा एजेंसी (UKHSA) ने राष्ट्रीय आपातकाल लागू किया है और मौसम विज्ञान कार्यालय ने अत्यधिक गर्मी का पहला "रेड अलर्ट" जारी किया है। यह अलर्ट अत्यधिक गर्मी से जीवन के लिए खतरे की चेतावनी है। बुधवार को कुछ बारिश होने के पूर्वानुमान से पहले मंगलवार को लू के चरम पर पहुंचने का अनुमान व्यक्त किया गया है। मौसम कार्यालय की मुख्य कार्यकारी प्रोफेसर पेनी एंडर्सबी ने कहा, हम ब्रिटेन के इतिहास में सबसे गर्म दिन देख सकते हैं। उन्होंने बीबीसी से कहा, कल (मंगलवार) तापमान 40 डिग्री सेल्सियस और उससे अधिक रहने की संभावना है, संभावित अनुमान 41 का है। कुछ अनुमानों में यह आंकड़ा 43 का बताया जा रहा है, लेकिन हम उम्मीद कर रहे हैं कि यह उतना गर्म नहीं होगा। एंडर्सबी ने कहा, यह तापमान अभूतपूर्व है और हम इससे निपटने के अभ्यस्त नहीं हैं- गर्मी सैकड़ों या हजारों अतिरिक्त मौतों का कारण बनती है, इसलिए लोगों को सलाह का पालन करने की आवश्यकता है। ब्रिटेन में इससे पहले सर्वाधिक तापमान 38.7 डिग्री सेल्सियस 2019 में दर्ज किया गया था। डाउनिंग स्ट्रीट ने कहा कि गर्म मौसम को लेकर प्रबंधन करने और किसी भी संभावित नुकसान से बचने के लिए रेलवे की गति पर प्रतिबंधों की आवश्यकता हो सकती है। अत्यधिक गर्मी की वजह से रेल पटरियों, ओवरहेड पावर लाइन और सिग्नल उपकरण प्रभावित हो सकते हैं।

श्रीलंका : आक्रोशित जनता का हंगामा जारी, विक्रमसिंघे ने फिर लगाई इमरजेंसी
Published / 2022-07-18 17:13:50
श्रीलंका : आक्रोशित जनता का हंगामा जारी, विक्रमसिंघे ने फिर लगाई इमरजेंसी

एबीएन सेंट्रल डेस्क। आर्थिक और राजनीतिक संकट से घिरे श्रीलंका में हालात तेजी से खराब हो रहे हैं। गोटबया राजपक्षे के इस्तीफे के बाद भी लोगों का आक्रोश कम नहीं हो रहा है। वे हिंसक प्रदर्शन में शामिल हो रहे हैं। ऐसे में कार्यवाहक राष्ट्रपति रानिल विक्रमसिंघे ने सोमवार को देश में स्टेट इमरजेंसी का ऐलान कर दिया है। रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, गोटबया राजपक्षे के देश छोड़कर भागने से आक्रोशित जनता अब नई मांग को लेकर प्रदर्शन कर रही है। प्रदर्शनकारी राष्ट्रपति पद को खत्म करके व्यवस्था में बदलाव लाने तक संघर्ष जारी रखने की बात कर रहे हैं। पिछले दिनों प्रदर्शनकारी राष्ट्रपति भवन में घुस आए थे। वहीं, संसद भवन और पीएम हाउस का घेराव किया था। जबकि रानिल विक्रमसिंघे का निजी घर प्रदर्शकारियों ने जला दिया था। इस बीच आर्थिक संकट का सामना कर रहे श्रीलंका के लोगों के लिए बेहद राहत देने वाली खबर सामने आ रही है। रिपोर्ट्स के मुताबिक श्रीलंका की सरकारी कंपनी सीलोन पेट्रोलियम कॉरपोरेशन (सीपीसी) ने रविवार को डीजल और पेट्रोल की खुदरा कीमतों में कमी की है। फरवरी के बाद पांच बार बढ़ोतरी के बाद ईंधन की कीमतों में यह पहली कमी है। 20 रुपये की कमी की गई : श्रीलंका में डीजल और पेट्रोल की खुदरा कीमतों में प्रत्येक में 20 रुपये की कमी की गई है। दोनों को मई के अंत में 50 और 60 रुपये बढ़ाया गया था। इसके साथ ही इंडियन आॅयल कंपनी के स्थानीय संचालन वाली कंपनी लंका इंडियन आॅयल कंपनी ने भी कहा कि वे भी ईंधन की कीमतों में कमी करेंगे। ईंधन की कतारों में हिंसा की कई घटनाएं सामने आई : श्रीलंका में 27 जून से सरकार ने ईंधन की आपूर्ति बंद कर दी थी और केवल आवश्यक सेवाओं के लिए ही पेट्रोल-डीजल की अनुमति है। वहीं, पेट्रोल-डीजल स्टेशनों के पास कई मील लंबी ईंधन कतारें देखी जा सकती हैं। ईंधन की कतारों में हिंसा की कई घटनाएं सामने आई हैं और ईंधन की कतारों में लगातार कई दिन बिताने के बाद लगभग 20 लोगों की मौत हो गई है।

श्रीलंका : अंतरिम राष्ट्रपति बने पीएम रानिल विक्रमसिंघे, 20 तक स्कूल बंद
Published / 2022-07-15 14:34:33
श्रीलंका : अंतरिम राष्ट्रपति बने पीएम रानिल विक्रमसिंघे, 20 तक स्कूल बंद

एबीएन सेंट्रल डेस्क। आर्थिक संकट से जूझ रहे श्रीलंका में लंबे इंतजार और हजारों की संख्या में सड़क पर उतरे लोगों के आक्रामक तेवर के बाद गोटबाया राजपक्षे ने आखिरकार राष्ट्रपति पद से इस्तीफा दे दिया। हालांकि उन्होंने इस्तीफा देने से पहले देश छोड़कर पहले मालदीव फिर सिंगापुर पहुंच गए। इस बीच प्रधानमंत्री रानिल विक्रमसिंघे ने गोटबाया राजपक्षे का उत्तराधिकारी चुने जाने तक श्रीलंका के अंतरिम राष्ट्रपति के तौर पर आज शुक्रवार को शपथ ग्रहण कर ली। गोटबाया राजपक्षे ने दिवालिया हो चुके देश की अर्थव्यवस्था को न संभाल पाने के लिए अपनी सरकार के खिलाफ लंबे समय से चल रहे प्रदर्शनों के बाद इस्तीफा दे दिया। वह देश छोड़ कर पहले मालदीव और फिर वहां से सिंगापुर चले गए हैं। प्रधानमंत्री कार्यालय की ओर से जारी एक बयान में कहा गया कि देश के मुख्य न्यायाधीश जयंत जयसूर्या ने रानिल विक्रमसिंघे (73) को श्रीलंका के कार्यवाहक राष्ट्रपति के तौर पर शपथ दिलाई। देश छोड़ने के 2 दिन बाद दिया इस्तीफा : इससे पहले श्रीलंका के संसद अध्यक्ष महिंदा यापा अभयवर्धने ने आज सुबह 10 बजे आधिकारिक रूप से घोषणा की कि गोटबाया राजपक्षे ने राष्ट्रपति के पद से इस्तीफा दे दिया है। राजपक्षे ने अपने तथा अपने परिवार के खिलाफ बढ़ते जन आक्रोश के बीच देश छोड़कर चले जाने के दो दिन बाद इस्तीफा दिया है। 73 साल के गोटबाया राजपक्षे ने गुरुवार को एक ‘निजी यात्रा’ पर सिंगापुर जाने की अनुमति मिलने के तुरंत बाद उन्होंने संसद के अध्यक्ष को अपना इस्तीफा पत्र ई-मेल के जरिए भेज दिया। अध्यक्ष अभयवर्धने ने गोटबाया के इस्तीफा पत्र की विश्वसनीयता की पुष्टि करने के बाद उनके पद छोड़ने की आधिकारिक ऐलान कर दिया। उन्होंने इस्तीफा के बारे में बताते हुए कहा, मुझे राष्ट्रपति राजपक्षे द्वारा भेजा हुआ इस्तीफा पत्र मिला है। पत्र के अनुसार, राष्ट्रपति ने इस्तीफा दे दिया है, जो 14 जुलाई से प्रभावी हो गई है। अध्यक्ष अभयवर्धने ने अपने एक संक्षिप्त बयान में यह भी कहा कि प्रधानमंत्री रानिल विक्रमसिंघे संसद द्वारा नया राष्ट्रपति चुने जाने की प्रक्रिया पूरी होने तक अंतरिम राष्ट्रपति का प्रभार संभालेंगे। अभयवर्धने ने कहा, मैं सभी दलों के नेताओं, सरकारी अधिकारियों और सुरक्षा अधिकारियों से सहयोग करने का अनुरोध करता हूं। मैं जनता से विनम्रतापूर्वक ऐसा शांतिपूर्ण माहौल बनाने का अनुरोध करता हूं, जिसमें सभी सांसद अपने विवेक के अनुसार आजादी से काम कर सकें। श्रीलंका की संसद की बैठक कल शनिवार को होनी है। देश में शिक्षा मंत्रालय ने 20 जुलाई तक के लिए स्कूल बंद कर दिया है। पहले स्कूल 18 जुलाई तक बंद किया गया था।

श्रीलंका संकट : कोलंबो में प्रदर्शनकारी लगा रहे We Love India...Love You India के नारे
Published / 2022-07-15 05:37:38
श्रीलंका संकट : कोलंबो में प्रदर्शनकारी लगा रहे We Love India...Love You India के नारे

एबीएन सेंट्रल डेस्क। श्रीलंका के राष्ट्रपति गोटबाया राजपक्षे के देश छोड़ने के बाद सरकार विरोधी प्रदर्शनकारियों का प्रदर्शन लगातार जारी है। प्रदर्शनकारियों के विरोध प्रदर्शन के बीच श्रीलंका से एक वीडियो वायरल हो रहा है। कोलंबो में श्रीलंकाई प्रदर्शनकारियों को भारत से बड़ी आस है। चीन की दगाबाजी से नाराज श्रीलंकाई प्रदर्शनकारियों को उम्मीद है कि भारत उनकी मदद करेगा। इसी बीच प्रदर्शनकारियों ने प्रदर्शन के दौरान जोर-जोर से नारे लगाए We love India...Love You India. प्रदर्शनकारियों ने चीन पर गंभीर आरोप लगाए हैं कि आज श्रीलंका के जो हालात है वो सब उसकी वजह से है। बता दें कि प्रदर्शनकारियों ने प्रधानमंत्री कार्यालय और राष्ट्रपति भवन पर कब्जा कर लिया था। सेना ने प्रदर्शनकारियों को हिंसा से दूर रहने या नतीजों का सामना करने के लिए तैयार रहने को कहा। साथ ही उसने आगाह किया कि सुरक्षा बलों को बल प्रयोग करने के लिए कानूनी अधिकार दिया गया है। बुधवार को प्रधानमंत्री कार्यालय और संसद के मुख्य मार्ग पर प्रदर्शनकारियों की सुरक्षा बलों के साथ झड़प के बाद कम से कम 84 लोगों को अस्पताल में भर्ती कराया गया। अवरोधकों को तोड़ने और प्रतिबंधित क्षेत्र में प्रवेश करने की कोशिश कर रही भीड़ पर पुलिस ने आंसू गैस के गोले दागे और पानी की बौछारें की थीं।

श्रीलंका : उग्र प्रदर्शनकारियों ने संसद को घेरा, अफरा-तफरी, देश में आपातकाल
Published / 2022-07-13 16:16:09
श्रीलंका : उग्र प्रदर्शनकारियों ने संसद को घेरा, अफरा-तफरी, देश में आपातकाल

एबीएन सेंट्रल डेस्क। श्रीलंका में आर्थिक संकट काफी ज्यादा गहराया हुआ है और प्रधानमंत्री रानिल विक्रमसिंघे मे देश की संसद को बता दिया है, कि अब श्रीलंका दिवालिया हो चुका है। वहीं, प्रदर्शनकारियों के राष्ट्रपति भवन में घुसने के बाद राष्ट्रपति गोटाबाया राजपक्षे फरार हो चुके हैं और वो मालदीव जा चुके हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, 20 जुलाई को श्रीलंका के नये राष्ट्रपति का चुनाव किया जाएगा, जबकि साजिथ प्रेमदासा को अंतरिम राष्ट्रपति नियुक्त किया गया है। वहीं, श्रीलंका के पीएम रानिल विक्रमसिंघे ने भी अपने पद छोड़ने के फैसले की घोषणा कर चुके हैं। लेकिन, सात दशकों के इतिहास में अब तक के सबसे खराब आर्थिक संकट से निपटने के लिए 2 करोड़ 20 लाख की आबादी वाले इस द्वीप देश के भविष्य पर सवाल बने हुए हैं। श्रीलंका की सभी राजनीतिक पार्टियों ने एकजुट होकर सरकार बनाने का फैसला किया है और वो फैसला कितना कारगर होता है, वो आने वाला वक्त ही बताएगा। श्रीलंका की सत्तारूढ़ पार्टी के कई प्रमुख सदस्य प्रधानमंत्री रानिल विक्रमसिंघे को अपने राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार के रूप में समर्थन देने के इच्छुक हैं, हालांकि अभी तक कोई निर्णय नहीं लिया गया है, सत्तारूढ़ पार्टी के एक शीर्ष सूत्र ने रॉयटर्स समाचार एजेंसी को इसकी जानकारी दी है। सूत्र ने नाम न छापने की शर्त पर कहा कि सदस्यों ने मंगलवार शाम को प्रधानमंत्री से मुलाकात की थी, जहां प्रधानमंत्री रानिल विक्रमसिंघे ने "भारी सहमति" ने राष्ट्रपति गोटाबाया राजपक्षे की जगह लेने पर सहमति जता दी है। श्रीलंका में प्रधानमंत्री कार्यालय के एक प्रवक्ता शानुका करुणारत्ने ने कहा है कि श्रीलंका में तत्काल प्रभाव से एक द्वीपव्यापी आपातकाल की घोषणा की गई है। वही राजधानी कोलंबो में कर्फ्यू भी लगा दिया गया है।

श्रीलंका संकट : इस्तीफा से पहले राष्ट्रपति गोटबाया राजपक्षे ने देश छोड़ पहुंचे मालदीव
Published / 2022-07-13 05:01:55
श्रीलंका संकट : इस्तीफा से पहले राष्ट्रपति गोटबाया राजपक्षे ने देश छोड़ पहुंचे मालदीव

एबीएन सेंट्रल डेस्क। श्रीलंका के राष्ट्रपति गोटबाया राजपक्षे मालदीव की राजधानी माले पहुंच गए हैं। यहां सूत्रों ने बुधवार सुबह यह जानकारी दी। गंभीर आर्थिक संकट से जूझ रहे श्रीलंका में प्रदर्शनकारियों के राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री रानिल विक्रमसिंघे के आधिकारिक आवास पर कब्जा जमाने के बाद राजपक्षे ने बुधवार को इस्तीफा देने की घोषणा की थी। सूत्रों ने मालदीव के सूत्रों के हवाले से बताया कि गत रात वेलाना हवाई अड्डे पर मालदीव सरकार के प्रतिनिधियों ने राजपक्षे की अगवानी की। इससे पहले सोमवार रात को राजपक्षे और उनके भाई बासिल ने राजपक्षे परिवार के खिलाफ बढ़ते जन आक्रोश के बीच देश छोड़ने की कोशिश की, लेकिन हवाई अड्डे पर आव्रजन अधिकारियों ने उन्हें रोक दिया। बासिल देश के पूर्व वित्त मंत्री हैं। अभी तक राजपक्षे के श्रीलंका छोड़ने पर कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है। वहीं श्रीलंकाई संसद के स्पीकर महिंदा यापा अबेवर्धने ने कहा है कि राजनीतिक दल के नेताओं ने संसद में मतदान के माध्यम से 20 जुलाई को एक नए राष्ट्रपति का चुनाव करने का फैसला किया है।

चीन में 90 दिन तक बैंक से पैसे निकालने पर रोक, विरोध में सड़कों पर उतरे लोग
Published / 2022-07-12 18:08:59
चीन में 90 दिन तक बैंक से पैसे निकालने पर रोक, विरोध में सड़कों पर उतरे लोग

एबीएन सेन्ट्रल डेस्क। चीन में शी जिनपिंग की जीरो कोविड पॉलिसी बुरी तरह फेल होने से यहां छोटे बैंकों की हालत बेहद ख़राब है। बैंकों पर भारी दबाव होने कारण जमा राशि की निकासी पर पूरी तरह प्रतिबन्ध लगा दिया गया है। हालात इतने खराब हैं कि हजारों ग्राहक अपने अकाउंट से ही पैसे निकालने के लिए परेशान हो रहे हैं। बैंकों द्वारा उनका जमा धन फ्रीज करने कारण लोग अब सड़कों पर उतर आए हैं और प्रदर्शन कर रहे हैं। वहीं चीनी अधिकारियों ने हेनान प्रान्त के केंद्रीय बैंक के बाहर शांतिपूर्ण विरोध-प्रदर्शन कर रहे करीब 3000 लोगों को हिंसक रूप से तितर-बितर कर दिया। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, अप्रैल महीने से ही चीन के मध्य हेनान प्रांत के चीनी शहर झेंग्झौ में चार ग्रामीण बैंकों ने लाखों डॉलर की जमा राशि को फ्रीज कर दिया है और 90 दिनों के लिए किसी भी तरह के निकासी पर रोक लगा दी है। जिससे निकासी न होने से हजारों ग्राहकों को जीवन यापन में संकट पैदा हो गया है। जिसको ध्यान में रखते हुए चीन के हजारों जमाकर्ता देश के केंद्रीय बैंक, पीपुल्स बैंक ऑफ चाइना की झेंग्झौ शाखा के बाहर एकत्र होकर विरोध-प्रदर्शन कर रहे हैं, जिसे चीनी पुलिस द्वारा बलपूर्वक कुचलने का प्रयास किया गया। चीनी मीडिया के ही आंकड़ों के अनुसार, हेनान प्रान्त में छोटे बैंकों में बैंकों में कुल जमा की कीमत 1.5 बिलियन अमेरिकी डॉलर तक हो सकती है। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार कोरोना की वजह से चीनी अर्थव्यवस्था इस समय आर्थिक मंदी के दौर से गुजर रही है। वहीं भीड़ स्थानीय अधिकारियों द्वारा कथित भ्रष्टाचार को भी जिम्मेदार मानते हुए उनके खिलाफ भी सड़कों पर उतर कर विरोध-प्रदर्शन कर रही है और अपनी जमा राशि को फ्रीज करने वाले बैंकों से अपनी जीवन भर की बचत वापस करने की माँग कर रही है। वहीं सादे कपड़ों में पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को खदेड़ दिया और जिससे कई लोग गंभीर रूप से घायल बताये जा रहे हैं। चीनी बैंक ग्राहकों को जमा राशि वापस लौटाने को हुए तैयार : इस बीच खबर है कि मध्य चीन के हेनान और अनहुई प्रांतों में वित्तीय नियामकों ने कुछ बैंक ग्राहकों को उनकी जमा राशि वापस देने का वादा किया है। जमा राशि वापस करने का यह वादा रविवार को खातों पर रोक के खिलाफ विरोध प्रदर्शन के हिंसक होने के बाद किया गया। अधिकारियों ने सोमवार देर रात जारी बयान में कहा कि 50,000 युआन (लगभग 7,400 अमरीकी डालर) या उससे कम जमा राशि वाले ग्राहकों को प्रतिपूर्ति की जाएगी। उन्होंने कहा कि अधिक जमा राशि वाले अन्य लोगों को उनकी राशि बाद में मिलेगी। अधिकारियों ने हालांकि इसकी कोई तिथि नहीं बतायी। बैंकों के खिलाफ विरोध प्रदर्शन ने व्यापक ध्यान आकर्षित किया क्योंकि गुस्साए जमाकर्ताओं ने छह ग्रामीण बैंकों से अपनी धनराशि वापस पाने की कोशिश करने के लिए हेनान के झेंग्झौ जाने की कोशिश की।

पेंटागन का दावा : अमेरिकी ड्रोन हमले में मारा गया इस्लामिक स्टेट सीरिया का सरगना
Published / 2022-07-12 17:48:14
पेंटागन का दावा : अमेरिकी ड्रोन हमले में मारा गया इस्लामिक स्टेट सीरिया का सरगना

एबीएन सेन्ट्रल डेस्क। अमेरिकी रक्षा विभाग के मुख्यालय पेंटागन ने मंगलवार को कहा कि उसने सीरिया में इस्लामिक स्टेट के एक नेता को ड्रोन हमले में मार गिराया। यूएस सेंट्रल कमान ने एक समाचार विज्ञप्ति में कहा कि माहेर अल-अगल मंगलवार को मारा गया और इस्लामिक स्टेट में एक अज्ञात वरिष्ठ अधिकारी गंभीर रूप से घायल हो गया। पेंटागन ने कहा है कि इस कार्रवाई में कोई आम नागरिक हताहत नहीं हुआ, हालांकि इस जानकारी की तुरंत पुष्टि नहीं की जा सकी। अमेरिका ने तुर्की की सीमा से सटे उत्तर पश्चिमी सीरिया के एक कस्बे जिंदरिस के बाहर हमला किया। इस्लामिक स्टेट जब अपने चरम पर था तब उसने सीरिया से इराक तक फैले 40,000 वर्ग मील से अधिक के क्षेत्र को नियंत्रित किया और 80 लाख से अधिक लोगों पर शासन किया। हालांकि, संगठन का क्षेत्रीय राज्य 2019 में ढह गया और इसके नेताओं ने गुरिल्ला रणनीति की ओर रुख किया। वाशिंगटन स्थित एक थिंक टैंक कार्नेगी एंडोमेंट फॉर इंटरनेशनल पीस के अनुसार, बाद में आईएसआईएस के नेताओं ने इसे कुशलतापूर्वक संगठनात्मक रूप से पुनर्गठित किया। अल-अगल पर हमला संगठन के प्रमुख अबू इब्राहिम अल-हाशिमी अल-कुरैशी की मौत के महीनों बाद हुआ, जिसने अपने ठिकाने पर अमेरिकी विशेष बलों के हमले के दौरान आत्महत्या कर ली थी। अमेरिका ने कहा कि अल-कुरैशी ने अपने परिवार के सदस्यों के साथ खुद को उड़ा लिया था।

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