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बिजली-पानी के बाद स्पीड इंटरनेट के लिए तरस रहा पाकिस्तान
Published / 2022-08-28 15:12:43
बिजली-पानी के बाद स्पीड इंटरनेट के लिए तरस रहा पाकिस्तान

एबीएन सेंट्रल डेस्क। पाकिस्तान पर बिजली-पानी के बाद एक और भारी संकट आ गया है, जिससे पूरे देश को इस मुश्किल का सामना करना पड़ रहा है। पाकिस्तान में इंटरनेट सर्विस काफी डाउन हो रही है, पिछले कुछ समय से पाकिस्तान में इंटरनेट यूज करने वालों को काफी ज्यादा दिक्कत का सामना करना पड़ रहा है। इंटरनेट में खराबी का मुख्य कारण केबल बताया जा रहा है, पाकिस्तान में इंटरनेट संकट भी गहराता जा रहा है, इस समस्या से लोगों को फिलहाल निजात नहीं मिलने वाली है। आईटी और टेलीकॉम मंत्री बोले : इंटरनेट आउटेज का प्रमुख कारण बाढ़ रहा, पानी को हटाने के लिए हैवी मशीनरी का उपयोग किया गया जिससे फाइबर-ऑप्टिक्स केबल्स डैमेज हो गए। पाकिस्तान के आईटी और टेलीकॉम मंत्री ने इसको लेकर टेक्निकल रिपोर्ट में मांगी है, उन्होंने निकट भविष्य में ऐसी घटनाएं ज्यादा होने की भी बात कही है।

रूसी ठिकाने पर बड़े हमले में मारे गये 200 सैनिक : यूक्रेन
Published / 2022-08-28 05:25:38
रूसी ठिकाने पर बड़े हमले में मारे गये 200 सैनिक : यूक्रेन

एबीएन सेंट्रल डेस्क। यूक्रेन के लुहांस्क क्षेत्र के गवर्नर सेरही हैदाई ने एक टेलीग्राम पोस्ट में दावा किया कि हमारे सैनिकों ने रूसी कब्जे वाले कादिवका शहर में एक होटल में स्थापित ठिकाने पर हमला किया है। उन्होंने यूक्रेन के पूर्वी क्षेत्र में एक बेस को तबाह करके 200 रूसी हवाई पेराट्रूपर्स को मार दिया है। हैदाई का यह दावा ऐसे वक्त में आया है जब यूक्रेन के पूर्वी क्षेत्रों में रूस की प्रगति कथित रूप से ठप हो गई है। यूक्रेनी सेना 2014 के बाद से ही लुहांस्क और पास स्थित दोनेस्क प्रशासित जिले में रूस समर्थित अलगाववादियों से संघर्ष कर रही है। यह संघर्ष रूस के क्रीमिया पर कब्जे के साथ शुरू हुआ था। लुहांस्क के गवर्नर सेरही हैदाई ने अपनी पोस्ट में उन इमारतों की तस्वीरें भी दिखाई जिसमें कई तबाह इमारतें दिख रही हैं। उन्होंने बताया कि यूक्रेनी सैनिकों ने 19 जुलाई को पूर्वी यूक्रेन के दोनबास क्षेत्र में बीएम-21 मल्टीपल रॉकेट लॉन्चर दागा था। तब भी रूस को काफी क्षति हुई थी। शुक्रवार को यूक्रेनी सेना ने एक रूसी बेस पर हमला कर 200 एयरमैन मार दिए हैं। बता दें कि जुलाई में रूसी सेना द्वारा पूर्वी यूक्रेन के कई क्षेत्रों को कब्जे में लेने के बाद यूक्रेनी सेना उन्हें दोबारा अपने नियंत्रण में लेने की कोशिश कर रही है। रूस ने कहा, यूक्रेनी गोलाबारी जारी : क्रैमलिन ने यूक्रेन के खिलाफ उन आरोपों को दोहराया कि उसने क्षेत्र में कई नागरिकों को निशाना बनाया है। बृहस्पतिवार को यूएन में रूसी राजदूत वसीली नेबेंजिया ने कहा कि दोनबास में यूक्रेन की आपराधिक गोलाबारी जारी है जिसमें पिछले महीने करीब 100 नागरिक मारे जा चुके हैं। उधर, रूस के राष्ट्रीय रक्षा प्रबंधन केंद्र के प्रमुख मिखाइल मिजन्त्सिेव ने कहा कि लुहांस्क-दोनेस्क से 24,000 से ज्यादा लोगों को निकाला गया है।

क्या लंबी चलेगी यूक्रेन से लड़ाई, आखिर कईं पुतिन करायेंगे 1,37,000 सैनिकों की भर्ती...
Published / 2022-08-25 17:40:14
क्या लंबी चलेगी यूक्रेन से लड़ाई, आखिर कईं पुतिन करायेंगे 1,37,000 सैनिकों की भर्ती...

एबीएन सेंट्रल डेस्क। यूक्रेन में मास्को की सैन्य कार्रवाई के बीच रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने गुरुवार को रूसी सेना को अपने सैनिकों की संख्या 137,000 से बढ़ाकर कुल 1.15 मिलियन (11 लाख 50 हजार) सैनिकों तक करने का आदेश दिया। एक जनवरी से प्रभावी होने वाले पुतिन के फरमान से यह साफ नहीं हुआ कि सेना बड़ी संख्या में सैनिकों का मसौदा तैयार करके स्वयंसेवी सैनिकों की संख्या में वृद्धि करके या दोनों के संयोजन से सैनिकों की संख्या बढ़ाएगी या नहीं। राष्ट्रपति के आदेश से रूसी सैन्य कर्मियों की कुल संख्या बढ़कर 2,039,758 हो जायेगी, जिसमें 1,150,628 सैनिक शामिल हैं। पिछले आदेश ने 2018 की शुरुआत में सेना की संख्या 1,902,758 और 1,013,628 रखी थी।

अमेरिका : पहली महिला जिल बाइडन एक बार फिर कोरोना संक्रमित
Published / 2022-08-25 08:19:18
अमेरिका : पहली महिला जिल बाइडन एक बार फिर कोरोना संक्रमित

एबीएन सेंट्रल डेस्क। अमेरिका की प्रथम महिला, जिल बाइडन बुधवार को एक बार फिर कोरोना संक्रमित हो गईं हैं। उन पर लगातार निगरानी रखी जा रही है। 24 अगस्त को उनका एक एंटीजन टेस्ट किया था, जिसमें वह कोरोना संक्रमित पाई गईं। व्हाइट हाउस का कहना है कि उन्हें हल्के लक्षणों का अनुभव हो रहा है। राष्ट्रपति के ठीक होने के हफ्तों बाद उनकी कोरोना रिपोर्ट पॉजिटिव आई है। व्हाइट हाउस ने बताया कि राष्ट्रपति जो बाइडन कोविड-19 से उबर चुके हैं। वह भी इस महीने की शुरुआत में कोरोना वायरस से उबरने के बाद फिर संक्रमित हो गये। बाइडन की उप संचार निदेशक केल्सी डोनोह्यू ने कहा कि जांच में उनके वायरस से संक्रमित होने की पुष्टि हुई और वह डेलावेयर में ही रहेंगी, जहां वह संक्रमित होने के बाद पृथकवास में थीं। हालांकि, राष्ट्रपति बाइडन यूएस सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन के दिशानिर्देशों का पालन करते हुए 10 दिनों के लिए घर के अंदर मास्क पहनेंगे, क्योंकि वह जिल बाइडन के सबसे करीबी हैं। जो बाइडन भी हो चुके हैं कोरोना पॉजिटिव : इससे पहले जो बाइडन हाल के ही दिनों में दो बार कोरोना पॉजिटिव आ चुके हैं। बाइडन को पहली बार 21 जुलाई को कोविड से संक्रमित पाया गया था। बाइडन ने अमेरिका के राष्ट्रपति का पद संभालने से पहले ही फाइजर की एंटी कोविड वैक्सीन की दोनों खुराक लगवा ली थीं। उपराष्ट्रपति कमला हैरिस भी हो चुकी हैं कोरोना संक्रमित : इसके बाद बाइडन ने सितंबर 2021 में पहली बूस्टर खुराक जबकि मार्च 2022 में टीके की एक अतिरिक्त खुराक ली थी। बाइडन से पहले उपराष्ट्रपति कमला हैरिस समेत व्हाइट हाउस के कई अधिकारी कोरोना वायरस से संक्रमित हो चुके हैं।

यूक्रेन पर रूस का बड़ा हमला, रेलवे स्टेशन पर दागे रॉकेट; अब तक 22 की मौत
Published / 2022-08-25 08:09:43
यूक्रेन पर रूस का बड़ा हमला, रेलवे स्टेशन पर दागे रॉकेट; अब तक 22 की मौत

एबीएन सेंट्रल डेस्क। यूक्रेन के स्वतंत्रता दिवस के मौके पर रूस ने एक रेलवे स्टेशन पर रॉकेट से हमला किया है। इस हमले में कम से कम 22 लोगों की मौत हो गई और 50 से अधिक लोग घायल हो गए हैं। राष्ट्रपति व्लोदिमिर जेलेंस्की ने इस हमले की जानकारी दी है। आपको बता दें कि जेलेंस्की कई दिनों इस बात को लेकर आगाह कर रहे थे कि रूस इस सप्ताह किसी बर्बर कार्रवाई का प्रयास कर सकता है। यूक्रेनी समाचार एजेंसियों ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि जेलेंस्की ने वीडियो के माध्यम से संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद को बताया कि यह घातक हमला निप्रोपेट्रोवस्क क्षेत्र के चैपलने शहर में हुआ है। शहर की आबादी लगभग 3,500 है। यूक्रेन के राष्ट्रपति वलोडिमिर ज़ेलेंस्की ने कहा कि पूर्वी यूक्रेन में डोनेट्स्क के पश्चिम में लगभग 145 किमी (90 मील) पश्चिम में चैपलने शहर के एक स्टेशन पर एक ट्रेन पर रॉकेट से हमला हुआ है। जेलेंस्की ने कहा, रेस्क्यू ऑपरेशन जारी है, लेकिन दुर्भाग्य से मरने वालों की संख्या और बढ़ सकती है। यूक्रेन के राष्ट्रपति प्रशासन के उप प्रमुख किरिल टिमोशेंको ने अपने टेलीग्राम चैनल पर एक संदेश में कहा कि हमले में एक 11 वर्षीय बच्चे की भी मौत हुई है। इससे पहले दिन में, यूक्रेन के नियंत्रण वाले क्षेत्र के हर मीटर पर हवाई हमले के सायरन बजाए गए थे।

जंग की आग : बुरी तरह झुलसा यूक्रेन, अब तक 9,000 से ज्यादा सैनिकों की मौत
Published / 2022-08-24 03:41:35
जंग की आग : बुरी तरह झुलसा यूक्रेन, अब तक 9,000 से ज्यादा सैनिकों की मौत

एबीएन सेंट्रल डेस्क। रूस ने 24 फरवरी को यूक्रेन पर हमला किया था। खबर के मुताबिक, हमला करने के बाद से करीब 9 हजार यूक्रेनी सैनिक युद्ध में मारे जा चुके हैं। जनरल वेलेरी जालुज्नी के मुताबिक, यूक्रेन के कई बच्चों की देखभाल करने की जरूरत है क्योंकि उनके पिता अग्रिम पंक्ति पर तैनात हैं और उनमें से करीब 9,000 सैनिक जान गवां चुके हैं। रूस और यूक्रेन में जंग खत्म होने के आसार नहीं दिख रहे हैं। पुतिन की सेना ने यूक्रेन के कई प्रमुख शहरों पर कब्जा कर लिया है। यूरोप की रोटी की टोकरी कहे जाने वाले देश की हालत जर्जर हो गई है। वहीं, अमेरिकी सैन्य अधिकारियों ने दो हफ्ते पहले अनुमान लगाया था कि रूस ने 70 हजार से 80 हजार सैनिकों को जंग में गंवा दिया है। इनमें मरने और घायलों को जोड़ा गया है। वहीं, अल जज़ीरा का कहना है कि, युद्धक्षेत्र के आंकड़ों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि करना असंभव है। जंग के बीच हजारों नागरिकों के मरने की खबरें भी प्राप्त हुई थीं। संयुक्त राष्ट्र का कहना है कि यूक्रेन पर रूसी आक्रमण के दौरान 5,587 नागरिक मारे गए हैं और 7,890 घायल हुए हैं। संयुक्त राष्ट्र की बाल एजेंसी ने जंग की बदसूरत दास्तां बताते हुए कहा कि रूस के हमले के बाद से अब तक कम से कम 972 यूक्रेनी बच्चे मारे गए हैं या घायल हुए हैं। यूनिसेफ के कार्यकारी निदेशक कैथरीन रसेल ने कहा कि ये संयुक्त राष्ट्र द्वारा सत्यापित आंकड़े हैं, लेकिन संख्या इससे कहीं अधिक हो सकती है। नाइपर नदी पर बसे इस शहर में 12 जुलाई से रूसी हमले तेज होने के बाद हालात खराब हैं, यहां 850 इमारतें क्षतिग्रस्त हुई हैं और उसकी करीब आधी आबादी शहर छोड़कर जा चुकी है। यूक्रेन और रूस के बीच चल रहा युद्ध अभी तक जारी है। दोनों देशों के बीच इस साल फरवरी माह में युद्ध शुरू हुआ था, अभी तक हजारों लोगों की इस युद्ध में मौत हो चुकी है। लेकिन अभी भी यह युद्ध खत्म होने का नाम नहीं ले रहा है। यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की ने कहा था कि तब तक कोई शांति नहीं हो सकती है जबतक रूस अपनी सेना को वापस नहीं बुलाता है। ऐसे में स्पष्ट है कि रूस और यूक्रेन के बीच अभी यह टकराव और लंबा चल सकता है। जेलेंस्की ने साफ कहा था है कि जब तक रूस अपने सैनिक वापस नहीं बुलाता है शांति की उम्मीद नहीं की जा सकती है। उन्होंने कहा कि शांति की संभावना की अपेक्षा तबतक नहीं की जा सकती है कि जबतक रूसी सैनिक वापस नहीं जाते हैं। इसके साथ ही जेलेंस्की ने व्लादिमीर पुतिन के साथ शांति वार्ता को लेकर बातचीत करने से भी इनकार कर दिया है। उन्होंने स्पष्ट कर दिया है कि जबतक सैनियों की वापसी नहीं होती है इसपर चर्चा नहीं होगी।

ब्राजील में विदेश मंत्री जयशंकर ने भरी हुंकार- सीमा समझौते की लगातार अवहेलना कर रहा चीन
Published / 2022-08-22 08:21:40
ब्राजील में विदेश मंत्री जयशंकर ने भरी हुंकार- सीमा समझौते की लगातार अवहेलना कर रहा चीन

एबीएन सेंट्रल डेस्क। विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कहा है कि चीन ने भारत के साथ सीमा समझौतों की अवहेलना की है, जिससे द्विपक्षीय संबंधों पर असर पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि स्थायी संबंध एकतरफा नहीं हो सकते है और इसमें परस्पर सम्मान होना चाहिए। क्षेत्र के साथ समग्र द्विपक्षीय संबंधों को बढ़ावा देने के उद्देश्य से दक्षिण अमेरिका की अपनी छह दिवसीय यात्रा के पहले चरण में यहां पहुंचे जयशंकर ने शनिवार को यहां भारतीय समुदाय के साथ बातचीत के दौरान यह टिप्पणी की। भारत-चीन संबंधों पर एक सवाल के जवाब में जयशंकर ने कहा कि भारत और चीन के बीच 1990 के दशक से समझौते हैं। उन्होंने कहा, उन्होंने (चीनी) इसकी अवहेलना की है। कुछ साल पहले गलवान घाटी में क्या हुआ था, आप जानते हैं। उस समस्या का समाधान नहीं हुआ है और यह स्पष्ट रूप से प्रभाव डाल रहा है। गौरतलब है कि पूर्वी लद्दाख में चीनी और भारतीय सैनिकों के बीच लंबे समय से गतिरोध बना हुआ है। पैंगोंग झील क्षेत्रों में हिंसक झड़प के बाद पांच मई, 2020 को हुए गतिरोध का समाधान करने के लिए दोनों पक्षों ने अब तक कोर कमांडर स्तर की 16 दौर की वार्ता की है। वर्ष 2009 से 2013 तक चीन में भारत के राजदूत रहे जयशंकर ने कहा कि संबंध एकतरफा नहीं हो सकते और इसे बनाए रखने के लिए परस्पर सम्मान होना चाहिए। जयशंकर ने कहा, वे हमारे पड़ोसी हैं और हर कोई अपने पड़ोसी के साथ मैत्री के साथ रहना चाहता है… मुझे आपका और आपको मेरा सम्मान करना चाहिए। उन्होंने कहा, हमारा दृष्टिकोण बहुत स्पष्ट हैं कि यदि आपको बेहतर संबंध बनाने है, तो एक-दूसरे के प्रति सम्मान होना चाहिए। प्रत्येक के अपने हित होंगे और हमें एक-दूसरे की चिंताओं के बारे में संवेदनशील होने की जरूरत है। जयशंकर ने कहा, स्थायी संबंध एक तरफा नहीं हो सकते। हमें आपसी सम्मान और आपसी संवेदनशीलता की आवश्यकता है। पिछले सप्ताह बैंकॉक में जयशंकर ने कहा थ कि चीन ने सीमा पर जो किया है, उसके बाद भारत और उसके संबंध अत्यंत मुश्किल दौर से गुजर रहे हैं। उन्होंने इस बात पर जोर दिया था कि अगर दोनों पड़ोसी देश हाथ नहीं मिलाते हैं तो एशियाई शताब्दी नहीं आयेगी। जयशंकर ने बैंकॉक में प्रतिष्ठित चुलालांगकोर्न विश्वविद्यालय में "हिंद-प्रशांत का भारतीय दृष्टिकोण" विषय पर व्याख्यान देने के बाद कुछ सवालों का जवाब देते हुए यह बात कही थी। ब्राजील के अलावा, जयशंकर पराग्वे और अर्जेंटीना का दौरा करेंगे और यह विदेश मंत्री के रूप में दक्षिण अमेरिकी क्षेत्र की उनकी पहली यात्रा है। विदेश मंत्रालय ने कहा कि इस यात्रा का उद्देश्य महामारी के बाद के युग में सहयोग के नए क्षेत्रों को तलाशना है।

सबसे बड़ी नदी के सूखते ही निकले भगवान बुद्ध, जानें चीनी समाज में बौद्ध धर्म की जड़ों की गहराई...
Published / 2022-08-21 16:02:08
सबसे बड़ी नदी के सूखते ही निकले भगवान बुद्ध, जानें चीनी समाज में बौद्ध धर्म की जड़ों की गहराई...

एबीएन सेंट्रल डेस्क। यूरोप के बाद अब चीन भीषण गर्मी से तबाह है। चीन के कई शहरों में तापमान की बढोतरी नित दिन नए रिकॉर्ड बना रही है। तेजी से बढ़ रहे तापमान की वजह से चीन ने साल का पहला राष्ट्रीय सूखा अलर्ट भी जारी किया है। गर्मी की वजह से चीन की कई नदियां भी सूख रही हैं। इस बीच एशिया की सबसे बड़ी नदी भी लगभग तीन चौथाई सूख चुकी है। यांग्तजी नदी के गिरते जलस्तर के कारण चीन के दक्षिण पश्चिम शहर चोंगकिंग में एक जलमग्न द्वीप और उस पर बौद्ध मूर्तियां मिली हैं। ये तीनों बौद्ध मूर्तियां एक चट्टान में बड़ी खूबसूरती से तराशी गईं हैं। सिन्हुआ समाचार एजेंसी के मुताबिक ये मूर्तियां लगभग 600 साल पुरानी हो सकती हैं। ये मूर्तियां फोयेलियांग नामक द्वीप चट्टान के पाई गईं, जिन्हें शुरू में मिंग और किंग राजवंशों के दौरान निर्मित के रूप में पहचाना गया था। इनमें से एक में कमल के आसन पर बैठे एक साधु को दर्शाया गया है। चीन में ये मूर्ति मिलने की वजह भीषण गर्मी के कारण नदी का जलस्तर कम होना है। एक रिपोर्ट के मुताबिक, चीन में जलवायु परिवर्तन की वजह से तापमान बढ़ रहा है और गर्मी के प्रकोप से जियांग्शी प्रांत में पोयांग झील ही नहीं, बल्कि उसके अलावा 34 काउंटी में 66 नदियों का पानी कम हो गया है। इससे नदियां सिकुड़ गईं हैं। चीनी सरकार ने पिछले दिनों यांग्त्ज़ी डेल्टा नदी को लेकर येलो अलर्ट जारी किया। चीन के सरकारी वैज्ञानिकों ने चेतावनी दी है, कि चीन में जमीन का तापमान वैश्विक औसत के मुकाबले तेजी से बढ़ रहा है और अभी जो गर्मी की लहर चल रही है, वो साफ तौर पर ग्लोबल वार्मिंग का असर है और इसके प्रभावों ने चिंताएं बढ़ा दी है। इस महीने की शुरुआत में चीन के राष्ट्रीय जलवायु केंद्र ने कहा कि, जून के मध्य से देश में लगभग 90 करोड़ लोग लू से प्रभावित हुए हैं। हुबेई के प्रांतीय आपातकालीन प्रबंधन विभाग के मुताबिक चीन के हुबेई प्रांत में 42 लाख लोग गंभीर सूखे से पीड़ित हैं। हर दिन यहां डेढ़ लाख लोगों तक सरकार द्वारा पीने का पानी पहुंचाया जा रहा है। इतने कम पानी की वजह से यहां खेती करना लगभग असंभव हो चुका है। जमीन में दरारें पड़ने लगी हैं। सीएनएन की रिपोर्ट के मुताबिक चीन की यांग्त्शी नदी लगभग सूख चुकी है। एशिया की सबसे बड़ी इस नदी में पानी लाने के लिए चीनी वैज्ञानिक प्रयास में जुट गए हैं। चीनी वैज्ञानिक बादल बनाने और बारिश लाने के लिए सिल्वर आयोडाइड छड़ को आसमान में विमान से छोड़ रहे हैं।

चीन में दिखे दोहरे संकट के संकेत
Published / 2022-08-20 15:19:54
चीन में दिखे दोहरे संकट के संकेत

एबीएन सेंट्रल डेस्क (श्याम सरन)। दुनिया वैश्विक आर्थिक वृद्धि के वाहक के रूप में चीन की भूमिका को लेकर इतनी अभ्यस्त हो चुकी है कि अब चीन में आर्थिक मंदी की आशंका अर्थशास्त्रियों, कारोबारियों और विद्वानों को समान रूप से चिंतित कर रही है। वैश्विक अर्थव्यवस्था में चीन का कद निरंतर बढ़ता जा रहा है। चीन का 19.9 लाख करोड़ डॉलर का नॉमिनल सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) वैश्विक जीडीपी का 15 फीसदी है जो इसे दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनाता है। विश्व व्यापार में भी इसकी अच्छी खासी हिस्सेदारी है और यह दुनिया का सबसे बड़ा निर्यातक तथा दूसरा सबसे बड़ा आयातक है। दुनिया में धातुओं की कुल खपत का 50 फीसदी चीन में होता है। वह तेल का सबसे बड़ा आयातक भी है। अनुमान है कि चीन वैश्विक आर्थिक वृद्धि में 30 फीसदी का हिस्सेदार है। चीन की अर्थव्यवस्था वैश्वीकृत है और वह दुनिया के सभी बड़े बाजारों से जुड़ा हुआ है। उसकी अर्थव्यवस्था और शेष विश्व के साथ उसके आर्थिक तथा वाणिज्यिक अंतसंर्बंधों का वैश्विक अर्थव्यवस्था के साथ गहरा संबंध है। चीन की अर्थव्यवस्था में बीते कुछ समय से धीमापन आ रहा है। 2007-08 के वित्तीय और आर्थिक संकट के बाद वह इकलौता बड़ा देश है जिसने निरंतर 6 फीसदी की वृद्धि दर हासिल की। 2022 में उसके 5.5 फीसदी की वृद्धि हासिल करने की बात कही गयी लेकिन लगता नहीं कि वह 3.5 फीसदी से अधिक वृद्धि हासिल कर पाएगा। यह विगत कई वर्षों की न्यूनतम दर है। इससे भी ज्यादा अहम बात यह है कि चीन की अर्थव्यवस्था में लंबे समय से चला आ रहा ढांचागत असंतुलन सामने आ रहा है। बीते चार दशक में संपत्ति क्षेत्र ही चीन की आर्थिक वृद्धि का वाहक रहा। जीडीपी में इसकी हिस्सेदारी करीब 30 फीसदी रही। परिसंपत्ति बाजार का फाइनैंसिंग मॉडल शुरू से ही टिकाऊ नहीं था। आमतौर पर परिसंपत्ति डेवलपर अपार्टमेंट बनाने के पहले ही उसकी पूरी कीमत वसूल कर लेते हैं। ऐसे में जुटाए गए फंड का इस्तेमाल जमीन खरीदने तथा अन्य गतिविधियों में किया जा सकता है। तब दूसरी परियोजना की बिक्री से संग्रहित राशि का इस्तेमाल पहली परियोजना के निर्माण में किया जा सकता है। लेकिन यह सिलसिला कभी भी बिखर सकता है। चीन में यही हुआ। चीन की सरकार ने परिसंपत्ति क्षेत्र को ठीक करने की कोशिश की जिससे परिसंपत्ति कीमतों में गिरावट आई। इससे बड़ी कंपनियां दिवालिया हो गईं और ऐसे में बड़ी तादाद में खरीदार कर्ज में रह गये जबकि उनके लिए घर नहीं थे। जून 2021 के बाद के 12 महीनों में परिसंपत्ति की बिक्री 22 फीसदी घटी। एक अन्य रिपोर्ट के अनुसार चीन के डेवलपरों ने बीते तीन वर्षों में 66 लाख वर्ग मीटर परिसंपत्ति बनानी शुरू की लेकिन वे इसका आधा ही पूरा कर सके। चीन में परिसंपत्ति का इस्तेमाल बचत के रूप में भी किया जाता है क्योंकि वहां निवेश के ठिकाने कम हैं और जमा दर बेहद कम है। अनुमान के मुताबिक 59 फीसदी चीनी परिवारों ने अचल संप?त्ति में निवेश किया है। हाल के वर्षों में पहली बार परिसंप?त्ति कीमतों में गिरावट का खपत व्यय पर काफी असर हुआ है। जानकारी के मुताबिक इस वर्ष अप्रैल में खुदरा बिक्री साल दर साल आधार पर 11.1 फीसदी घटी जबकि मई में इसमें 6.7 फीसदी की कमी आई। हालांकि जून में कुछ सुधार हुआ और यह 3.1 फीसदी धनात्मक रही। चीन में मांग कमजोर है इसलिए यही कारण है कि अन्य देशों की तुलना में वहां मुद्रास्फीति भी कम है और 2-2.5 फीसदी के दायरे में है। धीमी अर्थव्यवस्था का एक और संकेत बढ़ती बेरोजगारी में देखा जा सकता है। खासकर युवाओं में। 15 से 24 की आयु वर्ग में बेरोजगारी दर 20 फीसदी है। चीन की अर्थव्यवस्था राष्ट्रपति शी चिनफिंग की कोविड शून्य नीति के कारण भी प्रभावित है। इसके चलते लॉकडाउन लग रहे हैं और शेष विश्व के साथ चीन का संपर्क प्रभावित हुआ है। ज्यादा चिंता की बात यह है कि इस विपरीत आर्थिक माहौल के बीच भूराजनीतिक घटनाक्रम भी विपरीत है। अमेरिका के साथ तनाव बढ़ता जा रहा है। यूक्रेन युद्ध के कारण भी दोनों देशों में अविश्वास बढ़ा है। ताइवान खाड़ी को लेकर उत्पन्न संकट इसका ताजा उदाहरण है। बाद वाला संकट कई वजहों से ज्यादा उल्लेखनीय है। ताइवान खाड़ी जापान और कोरिया से व्यापार और ईंधन प्रवाह के लिए अहम रास्ता है। अगर चीन वहां बार-बार सैन्याभ्यास करता है और नौवहन तथा हवाई सेवाएं बाधित होती हैं तो यह मार्ग बदलना होगा क्योंकि लागत बढ़ेगी और आपूर्ति शृंखला जटिल हो जाएगी। ताइवान चीन समेत कई देशों को उन्नत सेमीकंडक्टर का अहम आपूर्तिकर्ता है। इस सब के बीच वैश्विक उद्योगों को आपूर्ति बा?धित होगी। चीन और ताइवान का निवेश और व्यापार का रिश्ता बहुत गहरा है। यह तनाव उस पर असर डालेगा। इस वर्ष चीन की कम्युनिस्ट पार्टी की 20वीं कांग्रेस भी होने वाली है जहां शी चिनफिंग पांच वर्ष का और कार्यकाल चाहेंगे। यूक्रेन युद्ध और ताइवान संकट को लेकर चीन की प्रतिक्रिया यकीनन उस बैठक में एक अहम कारक होगी। शी चिनफिंग ताइवान मामले पर अमेरिकी दबाव के आगे झुकते नहीं नजर आना चाहेंगे क्योंकि वह चीनी नागरिकों के लिए भावनात्मक मुद्दा है। चीन अपनी महत्त्वाकांक्षी बेल्ट और रोड पहल के क्रियान्वयन में भी चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। महामारी के कारण उत्पन्न बाधा ने कई अन्य साझेदार देशों के आर्थिक कुप्रबंधन को भी उजागर किया तथा संसाधनों की सीमा को भी। इससे तमाम मोर्चों पर दिक्कत आई। श्रीलंका जैसे मामलों ने चीन की प्रतिष्ठा खराब की है कि वह अपने साझेदारों को कर्ज के जाल में फंसाता है। इसके चलते विकासशील देश चीन की विकास सहायता को लेकर बहुत चौकन्ने हो गए हैं। चीन इस पहल को समेट रहा है और एशिया, अफ्रीका और लैटिन अमेरिका में भारी अधोसंरचना विकास के बजाय उन परियोजनाओं पर ध्यान केंद्रित कर रहा है जिनके भूराजनीतिक लाभ सामने आएं। भारत के लिए इन बातों का क्या मतलब है? पहला, अमेरिका-चीन विवाद बढ़ने के साथ चीन भारत और अमेरिका के बीच किसी भी तरह की सुरक्षा साझेदारी को लेकर अधिक चिंतित रहेगा और भारतीय सीमाओं पर दबाव भी बढ़ा सकता है। दूसरा, हमारे पड़ोस में चीन का प्रभुत्व कम हो सकता है? जिससे भारत के लिए यह अवसर बन सकता है कि भारत इस उपमहाद्वीप में अपना खोया हुआ प्रभाव दोबारा हासिल कर सके। तीसरा, चीन की जीडीपी वृद्धि में लगातार गिरावट वै?श्विक अर्थव्यवस्था में आ रहे धीमेपन पर असर डालेगी और यह भारत की बाह्य आ?र्थिक संभावनाओं के लिए भी कोई अच्छी बात नहीं होगी। इन विरोधाभासी घटनाओं को संतुलित करना भारत की विदेश नीति के सामने एक जटिल चुनौती पेश करेगा। (लेखक पूर्व विदेश सचिव और सेंटर फॉर पॉलिसी रिसर्च के सीनियर फेलो हैं।)

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