एबीएन सेंट्रल डेस्क। मंकीपॉक्स वायरस के चलते फैला संक्रमण दुनिया के अन्य देशों में भी फैल रहा है। ताजा मामला चीन से जुड़ा है। चीन में भी मंकीपॉक्स संक्रमण का पहला मामला सामने आया है। संक्रमित शख्स विदेश की यात्रा से चोंगकिंग पहुंचा था। उसके शरीर पर चकत्ते पाये जाने के साथ ही अन्य तरह के लक्षण भी पाये गये थे। इसके तुरंत बाद संक्रमित को क्वारंटीन करते हुए उसका इलाज शुरू कर दिया है। इससे पहले चीन के अधिकारी वाले हांगकांग में मंकीपॉक्स संक्रमण का मामला पाया गया था। चीन में मंकीपॉक्स संक्रमित शख्स के साथ कोविड-19 संक्रमितों की तरह व्यवाहार किया जा रहा है। रिपोर्ट की मानें तो मंकीपॉक्स वायरस अभी तक 108 देशों में अपने पैर पसार चुका है। WHO इसे देखते हेल्थ इमरजेंसी का ऐलान कर चुका है। वॉल स्ट्रीट जॉर्नल के हवाले से बताया है कि चीन में मंकीपॉक्स संक्रमण का पहला मामला चोंगकिंग सिटी में पाया गया है। रिपोर्ट के अनुसार, चोंगकिंग के स्वास्थ्य विभाग ने बताया कि विदेश से यहां पहुंचे शख्स के शरीर पर चकत्ते पाये जाने के साथ ही अन्य लक्षण भी पाये गये थे। इसके बाद कोरोना संक्रमितों की तर्ज पर उसे तत्काल क्वारंटीन कर दिया गया। प्रारंभिक रिपोर्ट मिलने के बाद चीन के रोग नियंत्रण एवं रोकथाम केंद्र ने मामले की समीक्षा की थी, उसके बाद शख्स में मंकीपॉक्स संक्रमण की अंतिम पुष्टि की गयी। अधिकारियों ने बताया कि संक्रमित का अस्पताल में इलाज चल रहा है और उसका कंडीशन स्थिर है। स्वास्थ्य विभाग की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि चोंगकिंग में प्रवेश करते ही संक्रमित को तत्काल क्वारंटीन कर दिया गया था। इस दौरान वह किसी से भी नहीं मिला था। चीन के पश्चिमी शहर चोंगकिंग सिटी में मंकीपॉक्स का पहला मामला मिलते ही लोगों की दिलचस्पी इस संक्रामक बीमारी के प्रति बढ़ गई। चीन के सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म वीबो पर हैशटैग ट्रेंड करने लगा। बताया जा रहा है कि 1 घंटे के अंदर इसे 12 करोड़ से ज्यादा व्यूज मिले। इससे पहले चीन के अधिकार वाले हांगकांग में पिछले सप्ताह मंकीपॉक्स संक्रमण का पहला मामला सामने आया था। स्वास्थ्य विभाग ने बताया था कि 30 वर्षीय संक्रमित शख्स फिलीपींस से हांगकांग पहुंचा था। फिलीपींस से पहले उसने अमेरिका और कनाडा की यात्रा की थी।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। शंघाई सहयोग संगठन के शिखर सम्मेलन में शुक्रवार को रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का गर्मजोशी के साथ स्वागत किया। दोनों राष्ट्राध्यक्षों के बीच हुई बैठक के दौरान पुतिन ने पीएम मोदी को रूस आने का न्योता दिया। इस दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि हमारी कई बार फोन पर बातचीत हुई है। हमें मिलकर काम करना होगा। आज का युग युद्ध का नहीं है। पीएम मोदी ने आगे कहा कि भारत-रूस के संबंध कई गुना बढ़े और आने वाले समय में हमारे संबंध और गहरे होंगे। पीएम मोदी ने कहा कि 22 साल से हमारी दोस्ती मजबूत हो रही है। उन्होंने कहा कि हम शांति के रास्ते पर आगे बढ़ेंगे। वहीं, बातचीत के दौरान पुतिन ने पीएम मोदी को जन्मदिन की बधाई दी। यूक्रेन युद्ध को लेकर पुतिन ने कहा कि प्रधानमंत्री इससे अवगत हैं। युद्ध जल्द खत्म करना चाहता हूं। इसके अलावा भारत को आजादी के 75 साल होने पर पुतिन ने बधाई दी। इससे पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एससीओ के शिखर सम्मेलन में खाद्य एवं ऊर्जा सुरक्षा संकट से निपटने के लिए लचीली आपूर्ति श्रृंखला की आवश्यकता पर बल दिया और कहा कि भारत की आर्थिक विकास दर इस साल 7.5 प्रतिशत रहने की उम्मीद है, जो दुनिया की प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में सबसे अधिक होगी। पीएम मोदी ने सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा कि कोविड-19 वैश्विक महामारी के बाद दुनिया के सामने आर्थिक रूप से पटरी पर लौटने की चुनौती है। उन्होंने कहा कि कोविड-19 और यूक्रेन में उपजे हालात के कारण वैश्विक आपूर्ति शृंखला बाधित हुई है, जिससे खाद्य एवं ऊर्जा सुरक्षा संकट पैदा हुआ। मोदी ने भारत के आर्थिक विकास का जिक्र करते हुए कहा कि भारत एक विनिर्माण केंद्र बनने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि भारत की अर्थव्यवस्था में इस साल 7.5 प्रतिशत की दर से वृद्धि होने की उम्मीद है और यह दर दुनिया की प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में सबसे अधिक होगी। मोदी ने कहा कि भारत एससीओ देशों के बीच आपसी विश्वास और सहयोग का समर्थन करता है। आठ देशों के इस प्रभावशाली समूह का शिखर सम्मेलन ऐसे समय में हो रहा है जब यूक्रेन पर रूस के हमले और ताइवान जलडमरूमध्य में चीन के आक्रामक सैन्य रुख के कारण भू-राजनीतिक उथल-पुथल मची हुई है। शिखर सम्मेलन के सीमित प्रारूप के दौरान विचार-विमर्श से पहले, समूह के स्थायी सदस्यों के नेताओं ने एक साथ तस्वीर खिंचवाई। शिखर सम्मेलन के परिसर में उज्बेकिस्तान के राष्ट्रपति शवकत मिर्जियोयेव ने मोदी का गर्मजोशी से स्वागत किया।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। चीन सरकार के लिए अभिलाषी टागरगेट तय करने के छह महीने बाद काफी कम हो गई है। अब कई बड़े बैंकों को 3 फीसदी ग्रोथ हासिल होने की उम्मीद भी नहीं दिख रही है। ग्रोथ अनुमान में मार्च के बाद कमी आई है, पहली बार 5.5 फीसदी के आधिकारिक लक्ष्य का ऐलान किया गया था, ब्लूमबर्ग के सर्वे में इस साल चीन को इकोनॉमिक ग्रोथ 3.5 फीसदी रहने पर सहमति बनी है। बार्कलेज ने कितना घटाया ग्रोथ अनुमान : बार्कलेज की चीफ चाइना इकोनॉमिस्ट जियान चांग ने पिछले हफ्ते अपने पूरे साल के ग्रोथ फोरकास्ट को 3.1 फीसदी से घटाकर 2.6 फीसदी कर दिया। उन्होंने लिखा, डेवलपर्स के लिए 2023 में कैश की परेशानी भी आएगी और इससे रियल एस्टेट मार्केट का भरोसा कमजोर होगा।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। रूस और यूक्रेन के बीच पिछले 6 महीने से भी अधिक समय से जंग जारी है। दोनों देशों के बीच इस युद्ध की शुरुआत 24 फरवरी 2022 को हुई थी। रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने विशेष सैन्य अभियान के तहत हजारों सैनिकों को यूक्रेन भेजा था। उस दिन से शुरू हुई बमबारी में अब तक हजारों लोगों की मौत हो चुकी है। अपनी जान बचाने के लिए लाखों यूक्रेनी यूक्रेन छोड़कर दूसरे देशों में पलायन कर चुके हैं। वहीं, इस विनाशकारी जंग की आग में जलकर सैंकड़ों यूक्रेनी शहर खंडहर में तब्दील हो चुके हैं। जंग के बीच यूक्रेन के कई इलाकों पर रूस का कब्जा भी हो चुका है। छह महीने के भीषण जंग के बाद भी यूक्रेनी राष्ट्रपति व्लोदिमीर जेलेंस्की के हौसले बुलंद हैं। उन्होंने साफ कर दिया है कि जब रूस के कब्जे से यूक्रेन की एक-एक इंच जमीन वापस नहीं ले लेते तब तक वह युद्धविराम के लिए तैयार नहीं हैं। सबसे बड़ी बात यह है कि रूसी राष्ट्रपति पुतिन तमाम कोशिशों के बाद भी जेलेंस्की के हौसले को डिगा न सके। यूक्रेन इस युद्ध में रूस का डटकर सामना किया। ये और बात है कि रूसी जंग का सामना करने के लिए यूक्रेन को कई देशों ने मदद किया। चाहे वो सैन्य सहायता हो, या वित्तिय सहायता हो या फिर मानवीय सहायता हो। इतने दिनों के युद्ध के दौरान करीब 10 देशों ने यूक्रेन को हर वो मदद की जिसकी युक्रेन को दरकार थी। इसी के दम पर यूक्रेन इस युद्ध में रूस के सामने टिका रहा और उसका मनोबल भी नहीं टूटा। नतीजतन इस युद्ध में रूस को अभी तक हताशा और निराशा हाथ लगी है क्योंकि वह अपने मकसद में कामयाब नहीं हो पाया है। हालांकि, इस युद्ध में कौन हारा और कौन जीता, फिलहाल यह कहना मुश्किल है, लेकिन यूक्रेन के खारकीव से रूसी सैनिकों की वापसी इस बात का संकेत देता है कि पुतिन इस युद्ध में कहीं न कहीं डगमगा गए हैं। शायद उन्होंने जो सोचा था उस पर पानी फिर गया। वहीं, इस बीच यूक्रेनी राष्ट्रपति जेलेंस्की ने बड़ा दावा करते हुए कहा है कि सितंबर महीने के शुरुआत में ही यूक्रेन ने रूस से 2 हजार किलोमीटर का इलाका फिर से हासिल कर लिया है। उन्होंने कहा कि यूक्रेनी फोर्स ने मजबूती के साथ नॉर्थ-ईस्ट खारकीव में बढ़ते हुए 20 बस्तियों को रूसी कब्जे से आजाद करा लिया है। जेलेंस्की ने बालाक्लिया शहर को भी दोबारा अपने कब्जे में लेने की बात कही है। खारकीव में रूस की सेना पीछे हट गई है। यूक्रेनी सेना ने बालाकलिया को रूसी फौज के कब्जे से छुड़ाने का दावा किया है। टाउन सेंटर में एक बार फिर से यूक्रेनी झंडा लहराया गया है। इस कामयाबी का हीरो यूक्रेनियन लैंड फोर्स के कमांडर कर्नल जनरल ओलेक्जेंडर को माना जा रहा है। कमांडर ओलेक्जेंडर ने कहा कि यूक्रेनी फौज को थोड़ी और जीत मिली, तो रूस की सेना बिखर जायेगी। इस घटनाक्रम पर यूक्रेनी रक्षा मंत्रालय ने भी अपना बयान जारी किया है और कहा है कि ये तो अभी शुरुआत है। रक्षा मंत्रालय ने कहा कि खारकीव में रूस के सप्लाई चेन और हथियारों के भंडार को भी तहस-नहस कर दिया गया है। वहीं, यूक्रेन के राष्ट्रपति व्लोदिमीर जेलेंस्की ने कहा, रूसी सेना से हमने कम से कम 30 इलाके खाली करा लिए हैं।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। 11 सितंबर 2001 की तारीख। न्यूयॉर्क की 110 मंजिला ट्विन टावर से पहला विमान सुबह 8.45 बजे टकराया। इमारत में आग बुझी भी नहीं थी कि 9 बजकर 3 मिनट पर एक और विमान दूसरे टावर टकराया। 56 मिनट तक आग और धुएं से जूझने के बाद टावर धराशायी हो गया। आज वर्ल्ड ट्रेड सेंटर पर हुए उस अटैक के 21 साल पूरे हो गये हैं। 19 आतंकियों ने 4 विमानों को कब्जे में लेने के बाद इस वारदात को अंजाम दिया था। ओसामा बिन लादेन का नाम इसी हमले के बाद चर्चा में आया था। अमेरिका ने इसी हमले का बदला लेते हुए लादेन को पाकिस्तान में घुसकर मारा।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। मैक्सिको में शनिवार को एक सड़क हादसे में कम से कम 18 लोगों की मौत हो गई। यहां मॉन्टेरी शहर की ओर जाने वाले राजमार्ग पर ईंधन से भरे टैंकर और बस में जोरदार टक्कर हो गई। इस घटना में 18 लोगों की मौके पर ही मौत हो गई। अधिकारियों ने बताया, टक्कर के बाद दोनों वाहनों में आग लग गई और वे पूरी तरह से जल कर खाक हो गये। पुलिस ने बताया कि शुरुआत में नौ लोगों के शवों को बरामद किया गया था। बाद में नौ अन्य लोगों के जले हुए शव बरामद हुए। अधिकारियों का कहना है कि हादसे में मृतकों की संख्या बढ़ भी सकती है। जानकारी के मुताबिक, हादसे में टैंकर चालक सुरक्षित है। उसे मामूली चोटें आई हैं। पुलिस उससे पूछताछ में जुटी हुई है। जांच में पता चला है कि बस हिडालगो से मॉन्टेरी शहर की ओर जा रही थी।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। पापुआ न्यू गिनी के उत्तरपूर्वी इलाके में भूकंप के तेज झटके महसूस किए गए। अमेरिकी भूगर्भीय सर्वेक्षण (यूएसजीएस) ने भूकंप की तीव्रता 7.6 मापी है। अभी भूकंप से हुए नुकसान के बारे में जानकारी नहीं मिल पाई है, लेकिन यूएसजीएस ने कुछ लोगों के हताहत होने तथा नुकसान की आशंका जताई है। भूकंप सुबह छह बजकर 46 मिनट पर आया। शुरुआती आंकड़ों के अनुसार, भूकंप का केंद्र कम आबादी वाले इलाके कैनांतु से 67 किलोमीटर पूर्व में जमीन से 50-60 किलोमीटर की गहरायी में था। राष्ट्रीय समुद्री और वायुमंडलीय प्रशासन (एनओएए) ने कहा कि इलाके में सुनामी का कोई खतरा नहीं है। यह भूकंप के लिहाज से संवेदनशील क्षेत्र है। देश के मध्य क्षेत्र में 2018 में 7.5 तीव्रता के भूकंप में कम से कम 125 लोग मारे गये थे।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। भारत के विदेश मामलों के बड़े-बड़े एक्सपर्ट और रक्षा विशेषज्ञ अक्सर अमेरिका पर भरोसे को लेकर चिंता व्यक्त करते रहते हैं। उनका मानना है कि भारत को कभी आंख मूंदकर अमेरिका पर भरोसा नहीं करना चाहिए। उनकी इस चिंता को अमेरिका ने पाकिस्तान को हथियारों के लिए विशालकाय पैकेज की घोषणा कर सही साबित कर दिया है। यानि, जिस अमेरिकी डॉलर्स पर पाकिस्तान के खिलाफ आतंकवाद को पालता पोषता रहा, उस अमेरिका ने एक बार फिर पाकिस्तान को मेगा पैकेज देने का ऐलान किया है। सबसे हैरानी की बात ये है कि मोदी सरकार ने अमेरिका के इस फैसले को लेकर अभी तक चुप्पी साध रखी है। अमेरिका द्वारा भारत के साथ खेले जा रहे डबल गेम से एक्सपर्ट और रक्षा विशेषज्ञ है। दरअसलस अमेरिका द्वारा पाकिस्तान को सुरक्षा मजबूत करने के लिए दी गई वित्तीय सहायता को भारत के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है। अमेरिका की बाइडेन सरकार ने पाकिस्तान को एफ-16 फाइटर जेट के रखरखाव के लिए 45 करोड़ डॉलर की सहायता राशि मंजूर की है। साल 2018 के बाद से अमेरिका की ओर से पाकिस्तान को दी गई, यह एक बड़ी आर्थिक मदद है। साल 2018 में अमेरिका के तत्कालीन राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पाकिस्तान को दी जाने वाली सुरक्षा सहायता पर यह कहते हुए रोक लगा दी थी कि पाकिस्तान आतंकवाद से अमेरिका की लड़ाई में कुछ सहायता नहीं कर रहा है। लेकिन अब बाइडेन प्रशासन ने पाकिस्तान के लिए अपना खजाना खोल दिया है, वो भी तब, जब पाकिस्तान चीन से अपने संबंधों को आगे बढ़ा रहा है। हालांकि, अमेरिका ने पाकिस्तान को दी गई सुरक्षा सहायता राशि को लेकर भारत को सफाई भी दी है कि इससे क्षेत्र में सैन्य संतुलन पर कोई असर नहीं पड़ेगा। अमेरिका का कहना है कि इस आर्थिक सहायता से पाकिस्तान रक्षा क्षेत्र में अपनी मौजूदा समय की जरूरतों को पूरा करने की क्षमता बनाये रखेगा। वहीं सहायता को लेकर भारत में हो रही आलोचना पर अमेरिका ने कहा कि पाकिस्तान और भारत के साथ अलग-अलग संबंध हैं। ये कुछ ऐसा नहीं है कि एक से अगर संबंध रहेगा तो दूसरे से नहीं। अमेरिका के दोनों देशों के साथ संबंध स्थापित हैं। इंडिया टुडे से बातचीत करते हुए यूएस के एक अधिकारी डोनाल्ड लु ने बताया कि पाकिस्तान को सुरक्षा सहायता को लेकर हम भारत की ओर कई चिंताओं को सुन रहे हैं। उन्होंने आगे कहा कि पाकिस्तान को की गई इस मदद में किसी भी तरह का नया एयरक्राफ्ट या कोई नया हथियार नहीं शामिल है।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। चार्ल्स तृतीय को आज यानी शनिवार को सेंट जेम्स पैलेस में एक ऐतिहासिक समारोह में आधिकारिक रूप से ब्रिटेन का किंग घोषित किया जायेगा। यह नए सम्राट के राज्याभिषेक की सार्वजनिक घोषणा है। महारानी एलिजाबेथ द्वितीय के सबसे बड़े बेटे 73 वर्षीय चार्ल्स अपनी मां के निधन के बाद स्वाभाविक रूप से सम्राट बन गए हैं और महारानी के निधन के 24 घंटों के भीतर पारंपरिक रूप से राज्याभिषेक संबंधी एक परिषद की बैठक बुलाई जाती है, लेकिन महारानी के निधन की घोषणा में विलंब होने की वजह से इस समारोह को शुक्रवार को आयोजित करने के लिए वक्त नहीं मिला। किंग चार्ल्स तृतीय की नई उपाधि की सार्वजनिक घोषणा करने की प्रक्रिया कई चरणों में पूरी होगी। दिवंगत महारानी के निधन से शोक में झुके ध्वज नये सम्राट के राज्याभिषेक की घोषणा के बाद पूरी तरह फहराए जायेंगे। इस कार्यक्रम का पहली बार टेलीविजन का प्रसारण किया जायेगा। राज्याभिषेक संबंधी परिषद में कैबिनेट के वरिष्ठ मंत्री, न्यायाधीश और चर्च ऑफ इंग्लैंड से लोग शामिल होते हैं। परिषद में सम्राट चार्ल्स महारानी के निधन की निजी तौर पर घोषणा करेंगे और चर्च ऑफ स्कॉटलैंड की रक्षा की शपथ लेंगे। भारतीय समय के मुताबिक, चार्ल्स 2 बजे शपथ ग्रहण करेंगे। इस समारोह में चार्ल्स की पत्नी कैमिला शामिल होंगी, जो अब क्वीन कंसोर्ट बन गई हैं। सम्राट के बेटे विलियम भी इसमें शामिल होंगे, जिन्हें अब प्रिंस ऑफ वेल्स की उपाधि मिल गई है। वहीं, अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडेन ब्रिटेन की महारानी एलिजाबेथ द्वितीय के अंतिम संस्कार में शामिल होंगे। बाइडेन ने शुक्रवार को कहा, हां, मुझे (कार्यक्रम की) विस्तार से जानकारी नहीं है, लेकिन मैं जाऊंगा। उनसे सवाल किया गया था कि क्या वह महारानी के अंतिम संस्कार में शामिल होंगे या नहीं। बाइडेन ने एक अन्य सवाल के जवाब में बताया कि उन्होंने महाराजा चार्ल्स किंग्स तृतीय से अभी तक बात नहीं की है। उन्होंने कहा, मैं उन्हें जानता हूं। मैंने अभी उनसे बात नहीं की है। ब्रिटेन के बैंक नोट और सिक्कों पर दशकों से महारानी एलिजाबेथ द्वितीय की तस्वीर लगी है। उनका चित्र दुनियाभर में दर्जनों अन्य देशों की मुद्राओं पर भी है जो कि ब्रिटिश साम्राज्य के औपनिवेशिक प्रभाव का द्योतक है। महारानी के निधन के बाद ब्रिटेन, कनाडा, ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड और अन्य देशों को अपनी मुद्रा में परिवर्तन करने में वक्त लगेगा, लेकिन इसका यह मतलब नहीं है कि एलिजाबेथ के चित्र वाले नोट और सिक्के नहीं चलेंगे। मुद्रा पर अब महारानी की जगह राजा चार्ल्स तृतीय की तस्वीर होगी, मगर यह तत्काल संभव नहीं। बैंक ऑफ इंग्लैंड ने कहा, वर्तमान में महारानी के चित्र वाली मुद्रा कानूनी तौर पर मान्य रहेगी। आधिकारिक तौर पर 10 दिवसीय राष्ट्रीय शोक के बाद ब्रिटेन के केंद्रीय बैंक मुद्रा के संबंध में घोषणा करेगी।
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