एबीएन सेंट्रल डेस्क। सोशल मीडिया पर चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग को लेकर कई तरह की अफवाहें फैल रही हैं। दावा किया जा रहा है कि चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग को बीजिंग में हाउस अरेस्ट कर लिया गया है। यह सवाल तेजी से वायरल हो रहा है कि क्या चीन में शी जिनपिंग का तख्तापलट हो गया। हालांकि अब तक वहां की सरकारी मीडिया ग्लोबल टाइम्स और चीनी कम्युनिस्ट पार्टी की तरफ से कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है। शी जिनपिंग के नजरबंद और हाउस अरेस्ट को लेकर लोग सोशल मीडिया पर ट्वीट कर रहे हैं और सवाल पूछ रहें हैं। क्या चीन में गुपचुप तरीके से सत्ता परिवर्तन हो गया है।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। यूक्रेन के अधिकारियों ने कहा कि पूर्वी शहर इजियम में एक सामूहिक कब्र को खोद कर 436 शव निकाले गए हैं। उन्होंने बताया कि इनमें से 30 शवों पर उन्हें प्रताड़ित किये जाने के निशान हैं। खारकीव क्षेत्र के गवर्नर ओलेह स्येनेहुबोव और क्षेत्र के पुलिस प्रमुख वोलोदिमीर त्यमोश्को ने इजियम में कहा कि इस महीने यूक्रेनी सैनिकों द्वारा वापस अपने नियंत्रण में लिए गए इलाकों में 3 और सामूहिक कब्रों का पता लगाया गया है। आयोग के अध्यक्ष एरिक मूज ने कहा कि हमने जिन क्षेत्रों का दौरा किया, वहां बड़ी संख्या में लोगों को मारे जाने का पता चला। आयोग इस समय 16 शहरों और बस्तियों में इस तरह की हत्याओं के मामलों की जांच कर रहा है।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। चीन के सोशल मीडिया से लेकर कई अपुष्ट खबरें हैं, कि राष्ट्रपति शी जिनपिंग को नजरबंद कर चीन में सैन्य तख्तापलट कर दी गई है। वहीं, चीन का बाकी दुनिया से नहीं के बराबर संपर्क है, लिहाजा चीन में इस वक्त क्या हो रहा है, इसकी भी कुछ जानकारी नहीं है। लेकिन, चीनी सोशल मीडिया पर हजारों लोग लिख रहे हैं, कि शी जिनपिंग को हाउस अरेस्ट कर लिया गया है। कोरोना संकट के बाद से ही शी जिनपिंग पिछले दो सालों से चीन से बाहर नहीं निकले थे और पहली बार वो उज्बेकिस्तान के समरकंद में एससीओ शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने पहुंचे थे, जहां उनकी मुलाकात वैश्विक नेताओं से हुई थी, लेकिन पुतिन के अलावा किसी और नेता से उनकी द्विपक्षीय बैठक नहीं हुई और अब ऐसी रिपोर्ट है, कि शी जिनपिंग को नजरबंद कर लिया गया है। अपुष्ट खबरों के मुताबिक, शी जिनपिंग की मुलाकात लंबे अर्से से चायनीज कम्युनिस्ट पार्टी के भी बड़े नेताओं से नहीं हुई है और दो सालों में पहली बार शी जिनपिंग को देश से बाहर निकलते हुए देखा गया, जब उन्होंने समरकंद में एससीओ शिखर सम्मेलन में हिस्सा लिया। वहीं, शी जिनपिंग का इस साल जून में सऊदी अरब का दौरा भी रद्द हो गया था, जिसके लिए सऊदी ने काफी तैयारियां कर रखी थीं। वहीं, एससीओ संगठन का संस्थापक सदस्य होने के बाद भी चीनी नेता ने शिखर सम्मेलन में सक्रिय रूप से भाग नहीं लिया। उन्होंने शिखर सम्मेलन के उद्घाटन पर कोई यादगार भाषण नहीं दिया। पुतिन के अलावा नरेंद्र मोदी, या इस संगठन के किसी अन्य प्रमुख नेताओं से उनकी मुलाकात नहीं हुई। उन्होंने पुतिन के साथ डिनर कार्यक्रम में शामिल होने से मना कर दिया था और इसके पीछे कोविड को वजह बताया गया और बाद में पता चला कि, एससीओ शिखर सम्मेलन के आधिकारिक समापन से पहले शी जिनपिंग मुश्किल से बीजिंग के लिए रवाना हुए थे। शायद वह किसी बड़ी और भयावह बात को लेकर चिंतित और भयभीत थे। अब बीजिंग से सामने आ रही खबरें दुनिया को हिला सकती हैं। वैश्विक मीडिया को पता नहीं है कि शी जिनपिंग के घर पर उनके साथ क्या हो रहा है। ईमानदारी से, इस समय जो लोग चाहते हैं कि तानाशाह सत्ता में बना रहे, उन्हें अपने तीसरे कार्यकाल के बारे में भूल जाना चाहिए, ऐसा प्रतीत होता है कि चायनीज कम्युनिस्ट पार्टी के दिग्गजों ने पहले ही सत्ता के लिए उसकी लालसा को कुचल दिया है। हालांकि, पिछले साल ये रिपोर्ट आई थी, कि चीन में शी जिनपिंग का विरोध गुट काफी एक्टिव है, जिसमें चीन के प्रधानमंत्री ली केकियांग भी शामिल थे, लेकिन बाद में आई मीडिया रिपोर्ट्स में ये भी कहा गया कि शी जिनपिंग ने भ्रष्टाचार खत्म करने के नाम पर अपने तमाम विरोधियों को निपटा दिया है। चीनी सोशळ मीडिया पर हजारों की संख्या में लोग लिख रहे हैं, कि बीजिंग पर सैन्य कब्जा हो गया है और शी जिनपिंग का तख्तापलट हो गया है, हालांकि, दुनिया को पता नहीं है कि क्या हो रहा है क्योंकि शहर अंततः दुनिया से कट गया है। न्यूज हाईलैंड विजन के अनुसार, पूर्व चीनी राष्ट्रपति हू जिंताओ और पूर्व चीनी प्रधानमंत्री वेन जियाबाओ ने स्थायी समिति के पूर्व सदस्य सोंग पिंग को मनाकर सेंट्रल गार्ड ब्यूरो (सीजीबी) का नियंत्रण वापस अपने हाथों ले लिया है। आपको बता दें कि, सीजीबी का उद्देश्य, कम्युनिस्ट पार्टी के पोलित ब्यूरो स्थायी समिति के सदस्यों और अन्य सीसीपी नेताओं को सुरक्षा प्रदान करना है। सीजीबी चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग की सुरक्षा के लिए भी जिम्मेदार है और अगर सीजीबी पर किसी और का नियंत्रण हो गया, तो इसे सैन्य तख्तापलट ही कहा जायेगा।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। इंडोनेशिया के उत्तरी प्रांत एकेह में शनिवार तड़के भूकंप के तेज झटके महसूस किये गये। हालांकि, इससे तत्काल किसी नुकसान की खबर नहीं है। अधिकारियों ने बताया कि भूकंप के बाद सुनामी का कोई खतरा नहीं है। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, तड़के आये भूकंप के चलते लोग अपने घरों से बाहर भागते दिखे, लेकिन बाद में उन्हें संदेश मिला कि सुनामी की चेतावनी नहीं दी गई है। गौतरलब है कि वर्ष 2004 में एकेह प्रांत के अपटतीय क्षेत्र में आए शक्तिशाली भूकंप की वजह से कई देशों में सुनामी आई थी और करीब 2,30,000 लोगों की जान गई थी। अमेरिकी भू विज्ञान सर्वेक्षण ने बताया कि रिक्टर पैमाने पर शनिवार को आये भूकंप की तीव्रता 6.2 मापी गई और इसका केंद्र एकेह प्रांत के तटीय शहर मिउलाबोह से 40 किलोमीटर दक्षिण-दक्षिण पश्चिम में सतह से 49 किलोमीटर नीचे था। हालांकि, इंडोनेशिया की मौसम, जलवायु एवं भूभौतिक एजेंसी ने कहा है कि भूकंप की तीव्रता 6.4 थी।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। आपने अभी तक दिल्ली-एनसीआर में भारी ट्रैफिक समस्या देखी होगी। रात के समय की सैटेलाइट तस्वीर को देखकर आपको लगता होगा कि दिल्ली में तो वाहनों का जाल बिछा है। लेकिन आज एक ऐसी तस्वीर सामने आई है जिसको देखकर लग रहा है कि धरती से ज्यादा ट्रैफिक आसमान में है। दरअसल, विश्वभर की फ्लाइट्स ट्रैकिंग सर्विस फ्लाइटरडार24 ने एक क्लिप पोस्ट की है। इस क्लिप को अब तक 50 लाख लोग देख चुके हैं। क्लिप में आप देख सकते हैं कि रूस से निकलने वाली फ्लाइट्स की संख्या कितनी ज्यादा है। रूस में इसके खिलाफ विरोध प्रदर्शन भी हो रहे हैं। रूस की पुलिस को लोगों को हिरासत में ले रही है। पुतिन के परमाणु अटैक की धमकी की बाद पूरी दुनिया मानों सहम गई है। रूस के लोगों को डर सता रहा है कि देश में मार्शल लॉ लगाया जा सकता है। इसके बाद लड़ने की उम्र के पुरुषों को रूस छोड़ने की अनुमति नहीं दी जायेगी। ये सारी उड़ाने रूस से निकलकर दूसरे देशों तक जा रही हैं। गूगल डेटा ने बताया कि लोग सबसे ज्यादा फ्लाइट्स सर्च कर रहे हैं। रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने राष्ट्र के नाम दिए एक भाषण में सभी नागिरकों को एक हो जाने का निर्देश दिया। द्वितीय विश्व युद्ध के बाद पहली बार रूस से एकतरफा टिकट तेजी से बिक गए और टिकट की कीमतें आसमान छू गईं। मीडिया रिपोर्टों में कहा गया है कि राष्ट्रपति के अभिभाषण ने आशंका जताई थी कि मार्शल लॉ लगाया जा सकता है और लड़ने की उम्र के पुरुषों को रूस छोड़ने की अनुमति नहीं दी जायेगी। यूक्रेन के साथ करीब सात माह से जारी युद्ध में मिले झटकों के बाद रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने तीन लाख आरक्षित सैनिकों की आंशिक तैनाती की घोषणा की और रूस की संप्रभुता के लिए इसे आवश्यक बताते हुए आरोप लगाया कि पश्चिमी देश उनके देश (रूस) को नष्ट करने का प्रयास कर रहे हैं। अधिकारियों ने बताया कि 3,00,000 रिजर्विस्ट (आरक्षित सैनिक) की आंशिक तैनाती की योजना बनाई गई है। पुतिन ने टेलीविजन के जरिए देश को संबोधित करते हुए चेतावनी भरे लहजे में पश्चिमी देशों से कहा कि रूस अपने क्षेत्र की रक्षा के लिए हर संभव कदम उठायेगा और यह कोरी बयानबाजी नहीं है। राष्ट्रपति ने कहा कि उन्होंने आदेश पर हस्ताक्षर कर दिये हैं और यह प्रक्रिया तत्काल प्रारंभ हो जायेगी।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। महारानी एलिजाबेथ द्वितीय को अंतिम विदाई दे दी गई। उनके ताबूत को विंडसर कैसल स्थित सेंट जॉर्ज चैपल के शाही वॉल्ट (शव कक्ष) में नीचे रख दिया गया। पूरी दुनिया की निगाहें इस पर टिकी थीं। रिपोर्टों के अनुसार महारानी के अंतिम संस्कार को दुनियाभर में 400 करोड़ से अधिक लोगों ने देखा। इसके साथ ही यह इतिहास में सबसे ज्यादा देखा जाने वाला प्रसारण बन गया। महारानी एलिजाबेथ द्वितीय के अंतिम संस्कार को 410 करोड़ लोगों ने टैलीवीजन पर देखा। इससे पहले अटलांटा ओलिम्पिक समारोह को 360 करोड़ लोगों ने टैलीवीजन पर देखा था। वेल्स की महारानी डायना के अंतिम संस्कार को 250 करोड़, 2005 में लाइव 8 कंसर्ट को 200 करोड़ लोगों ने देखा था। 2018 में प्रिंस हैरी के शादी समारोह को 190 करोड़, फ्रांस और क्रोशिया के बीच खेले गये 2018 वर्ल्ड कप फाइनल को 110 करोड़ लोगों ने देखा था। हालांकि यह पहली बार नहीं है जब रानी ने टेलीविजन रिकार्ड तोड़ा है। इससे पहले 1953 में उनका राज्याभिषेक सबसे पहले टीवी पर दिखाया गया था जो यूपके में 27 मिलियन लोगों ने देखा था।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। ब्रिटेन की महारानी एलिजाबेथ-II आज अपने अंतिम सफर पर निकल चुकी हैं। वेस्टमिंस्टर एबे में आज उन्हें अंतिम विदाई दी जा रही है। अंतिम संस्कार में अलग-अलग देशों के राष्ट्राध्यक्षों सहित करीब 2000 मेहमान शामिल हैं। महारानी के अंतिम संस्कार के समय पूरे ब्रिटेन में दो मिनट का राष्ट्रीय मौन रहेगा। बता दें कि महारानी एलिजाबेथ-II का 8 सितंबर को स्कॉटलैंड के बाल्मोरल कैसल में 96 साल की उम्र में निधन हो गया था। 1. महारानी एलिजाबेथ-II का अंतिम संस्कार का कार्यक्रम जारी है। अंतिम विदाई का पूरा कार्यक्रम वेस्टमिंस्टर ऐबी में आयोजित जा रहा है। पिछले 11 दिनों के शाही रस्म के बाद आज महारानी के पार्थिव शरीर को उनके पति प्रिंस फिलिप की कब्र के नजदीक दफनाया जायेगा।। 2. महारानी के अंतिम संस्कार में शामिल होने के लिए विभिन्न देशों के राष्ट्राध्यक्ष लंदन पहुंचे हैं। करीब 2000 लोगों की वहां उपस्थिति है। इनमें अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडेन, भारत के राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू सहित कई हस्तियां शामिल हैं। 3. अंतिम संस्कार के समय केवल शाही परिवार के सदस्य ही वेस्टमिंस्टर एबे में वर्दी पहन सकते हैं। वो भी वो जो सैन्य रैंक रखते हैं। मतलब साफ है कि अंतिम विदाई के वक्त किंग चार्ल्स III, विलियम- द प्रिंस ऑफ वेल्स, ऐनी- द प्रिंसेस रॉयल और प्रिंस एडवर्ड- द अर्ल ऑफ वेसेक्स सैन्य वर्दी पहनेंगे। 4. जब महारानी एलिजाबेथ को अंतिम संस्कार के लिए ले जाया जायेगा, उस वक्त ब्रिटेन इस ऐतिहासिक क्षण का गवाह बनेगा। इस अंतिम संस्कार में दुनियाभर के कई राजनेता और हस्तियां शामिल होंगी और बड़ी संख्या में लोग भी दिखाई देंगे। उन जिस तरह से वेस्टमिंस्टर ऐबी में जाया जायेगा, वो भी ऐतिहासिक क्षण होगा। 5. महारानी एलिजाबेथ के पार्थिव शरीर को वेस्टमिंस्टर हॉल से ऐबी तक एक सम्मान रैली के जरिए ले जाया जायेगा। इस दौरान रास्ते में रॉयल नेवी और रॉयल मरीन के सैनिक भी तैनात रहेंगे। स्कॉटिश और आयरिश रेजिमेंट के पाइप और ड्रम समेत लगभग 200 संगीतकार इस रैली का नेतृत्व करेंगे। किंग चार्ल्स III और रॉयल फैमिली के बाकी मेंबर्स गाड़ी में सवार होकर ऐबी पहुंचेंगे। 6. एलिजाबेथ-II 70 साल 214 दिन तक ब्रिटेन की महारानी रहीं। उनके अंतिम संस्कार के समय जाहिर है कि लाखों लोगों की आखें नम होंगी। पूरे ब्रिटेन में दो मिनट का मौन रखा जायेगा। 7. महारानी एलिजाबेथ द्वितीय के अंतिम संस्कार कार्यक्रम में करीब 10 लाख लोगों के जुटने की संभावना है। ब्रिटेन के सिनेमाघरों में भी महारानी के अंतिम संस्कार का प्रसारण किया जायेगा। कई अतिरिक्त ट्रेंने चलाई गई हैं। 100 से अधिक उड़ानों को रद्द कर दिया गया है। 8. बता दें कि 1965 में ब्रिटेन के पूर्व प्रधानमंत्री सर विंस्टन चर्चिल के बाद ब्रिटेन में सम्राट का राजकीय अंतिम संस्कार पहली बार होगा। महारानी के अंतिम संस्कार में केवल शाही परिवार उपस्थित होगा। महारानी के अंतिम संस्कार में रूस, अफगानिस्तान, म्यांमार, सीरिया और नॉर्थ कोरिया को इवाइट नहीं किया गया है।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन ने फिर कहा है कि चीन के हमले करने की स्थिति में अमेरिका ताइवान की रक्षा करेगा। एक सीबीएस साक्षात्कार में जब श्री बाइडेन से पूछा गया कि क्या चीन के ताइवान पर हमला करने पर अमेरिकी सेना ताइवान की रक्षा करेगी। इसके जवाब में अमेरिकी राष्ट्रपति ने हामी भरते हुए हां में जवाब दिया। यह साक्षात्कार रविवार को प्रसारित हुआ जिसके बाद व्हाइट हाउस ने दोहराया कि अमेरिकी नीति में कोई बदलाव नहीं हुआ है। उन्होंने कहा कि अमेरिका की नीति हमेशा रणनीतिक अस्पष्टता में से एक रही है। अमेरिका ताइवान की रक्षा करने के लिए प्रतिबद्ध नहीं है, लेकिन विकल्प को भी खारिज नहीं करता है। ताइवान पूर्वी चीन के तट पर एक स्व-शासित द्वीप है जिसे चीन अपने क्षेत्र के रूप में दावा करता है। अमेरिका लंबे समय से इस मुद्दे पर कूटनीतिक सख्ती बरते हुए है। एक ओर यह चीन नीति का पालन करता है, जो चीन के साथ उसके संबंधों का आधार भी है। श्री बाइडेन ने रविवार को सीबीएस को दिए अपने एक घंटे के साक्षात्कार में इसे दोहराया। उन्होंने कहा कि एक चीन की नीति है और ताइवान अपनी स्वतंत्रता पर अपने निर्णय स्वयं लेता सकता है। हम आगे नहीं बढ़ रहे हैं, उन्हें चीन से आजादी पाने के लिए प्रोत्साहित नहीं कर रहे हैं। यह ताइवान का अपना निर्णय है। इस बार भी व्हाइट हाउस ने एक बयान जारी किया, राष्ट्रपति ने यह पहले भी कहा है, जिसमें इस साल की शुरुआत में टोक्यो भी शामिल है। उन्होंने तब भी स्पष्ट किया था कि हमारी ताइवान नीति नहीं बदली है। यह सच है। पर एक साल में यह तीसरी बार है कि जब राष्ट्रपति बाइडेन अक्टूबर 2021 में और फिर इस साल मई में सैन्य कार्रवाई के वादे का संकेत देने में आधिकारिक रुख से कायम हैं। इस महीने की शुरुआत में अमेरिका ने ताइवान को रक्षा के लिए 1.1 अरब डालर के हथियार और मिसाइल बेचने पर सहमति दी थी, जिसके बाद से चीन का गुस्सा सातवें आसमान पर है। गौरतलब है कि अमेरिकी संसद की अध्यक्ष नैन्सी पेलोसी के अगस्त में द्वीप का विवादास्पद दौरा करने के बाद अमेरिका और चीन के बीच तनाव बढ़ गया। इसके बाद श्री बाइडेन ने कहा था कि चीन की इस तरह की प्रक्रिया अच्छी नहीं है। बाइडेन ने कल के साक्षात्कार में कहा कि रूस को यूक्रेन में युद्ध में रासायनिक या सामरिक परमाणु हथियारों का उपयोग नहीं करने की चेतावनी भी दी गई है।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। ताइवान में रविवार को एक बार फिर भूकंप का झटका महसूस किया गया है। इस तरह पिछले 24 घंटों के अंदर दूसरी बार यहां पर भूकंप आ गया है। रिक्टर स्केल पर भूकंप की तीव्रता 7.2 बताई गई है और इसने यूजिंग जिले को प्रभावित किया है। इससे पहले शनिवार को भी यहां भूकंप का जोरदार झटका महसूस किया गया। यह भूकंप 6.9 की तीव्रता से दक्षिणी पूर्वी ताइवान में आया था। इसके चलते यहां पर एक बिल्डिंग गिर गई थी और सड़कें फट गई थीं। बताया जाता है कि भूकंप के चलते यहां पर कई घरों को नुकसान हुआ है। इसके अलावा भूकंप के चलते ट्रेन के कुछ डिब्बों के भी पलट जाने की घटना सामने आई है। जानकारी के मुताबिक पिछले दो दिन से यहां पर लगातार भूकंप के झटके आ रहे हैं। बता दें कि 7.2 तीव्रता का यह भूकंप युजिंग से 85 किमी पूर्व में दोपहर करीब 12:14 बजे आया। वहीं शनिवार शाम दक्षिण पूर्वी ताइवान में भूकंप के झटके महसूस किए गए थे। समाचार एजेंसी एपी की रिपोर्ट के मुताबिक भूकंप की तीव्रता रिक्टर स्केल पर 6.4 दर्ज की गई थी। भूकंप से किसी जान-माल के नुकसान अब तक खबर नहीं है। हालांकि यूएस जियोलॉजिकल सर्वे ने भूकंप की तीव्रता 6.6 बताई है। जल जियोलॉजिकल सर्वे ने कहा कि भूकंप का केंद्र 10 किलोमीटर (6.2 मील) की गहराई में ताइतुंग काउंटी में गुआनशान टाउनशिप के पास था।
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