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चीन : क्या जिनपिंग आजीवन करेंगे राज? फैसला आज
Published / 2022-10-22 14:17:03
चीन : क्या जिनपिंग आजीवन करेंगे राज? फैसला आज

एबीएन सेंट्रल डेस्क। चीन में सत्तारूढ़ कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ चाइना का एक हफ्ते से जारी महासम्मेलन (कांग्रेस) का समापन सत्र शनिवार को शुरू हो गया। लगभग दो हजार प्रतिनिधियों के पार्टी के संविधान में बदलाव को मंजूरी देने की उम्मीद है, जो चीनी नेता शी जिनपिंग की सत्ता पर पकड़ को और बढ़ा सकता है। वे अगले पांच सालों के लिए लगभग 200 सदस्यों की एक नई केंद्रीय समिति को औपचारिक रूप से मंजूरी देंगे। सीपीसी का 20वां अहम महासम्मेलन आज पार्टी की शक्तिशाली और शीर्ष नेताओं वाली केंद्रीय समिति के चुनाव के साथ संपन्न होगा। पार्टी के महासम्मेलन में आने वाले पांच सालों के लिए देश का एजेंडा तय किया जाता है। सीपीसी हर पांच साल में इस महा सम्मेलन का आयोजन करती है, जिसमें पूरे देश की शाखाओं के कुल 2296 निर्वाचित प्रतिनिधि हिस्सा लेते हैं। ये 20वां महा सम्मेलन आज पार्टी का संचालन करने वाली केंद्रीय समिति के चुनाव के साथ संपन्न होगा। मौजूदा केंद्रीय समिति में 376 सदस्य हैं, जिनमें से 205 पूर्णकालिक सदस्य जबकि 171 वैकल्पिक सदस्य हैं। नई केंद्रीय समिति की बैठक रविवार को राजनीतिक ब्यूरो का चुनाव करने के लिए होगी, जो स्थायी समिति का चुनाव करेगी। स्थायी समिति पार्टी की सबसे शक्तिशाली यूनिट है जो देश पर शासन करती है। स्थायी समिति की बैठक भी उसी दिन होगी जिसमें महा सचिव का चुनाव होगा। महासचिव ही 1.4 अरब आबादी वाले देश का शीर्ष नेता होता है। मौजूदा राजनीतिक ब्यूरो में 25 सदस्य हैं, जबकि स्थायी समिति में 69 वर्षीय जिनपिंग सहित सात सदस्य हैं। जिनपिंग साल 2002 से ही पार्टी के महा सचिव हैं। कयास लगाये जा रहे हैं कि स्थायी समिति रविवार को अप्रत्याशित रूप से शी को तीसरे कार्यकाल के लिए महासचिव बनाने का प्रस्ताव किया जायेगा। जिनपिंग इस साल सीपीसी प्रमुख और राष्ट्रपति के तौर पर अपना 10 साल का कार्यकाल पूरा कर रहे हैं। पार्टी संस्थापक माओत्से तुंग के बाद वह पहले चीनी नेता होंगे जो सत्ता में तीसरे कार्यकाल तक कायम रहेंगे। माओत्से तुंग ने करीब तीन दशक तक शासन किया। पर्यवेक्षकों का कहना है कि नया कार्यकाल मिलने का अभिप्राय जिनपिंग का भी माओ की तरह जीवनपर्यंत सत्ता में रहना हो सकता है।

...महज 45 दिनों में ही ब्रिटेन की प्रधानमंत्री लिज ट्रस का इस्तीफा
Published / 2022-10-20 22:29:36
...महज 45 दिनों में ही ब्रिटेन की प्रधानमंत्री लिज ट्रस का इस्तीफा

एबीएन सेंट्रल डेस्क। ब्रिटेन की नवनिर्वाचित प्रधानमंत्री लिज ट्रस ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। वो महज 45 दिन ही इस पद पर रह पाईं। इस्तीफा देने के बाद ट्रस ने कहा कि जिस काम के लिए उन्हें चुना गया था वो नहीं कर पाई। इससे पहले बुधवार देर रात गृह मंत्री सुएला ब्रैवरमैन ने पद से इस्तीफा दे दिया था। एक बार फिर ब्रिटेन में चुनाव होंगे। प्रधानमंत्री की रेस में भारतवंशी पूर्व वित्त मंत्री ऋषि सुनक आगे बताए जा रहे हैं। बता दें कि ब्रिटेन की प्रधानमंत्री लिज ट्रस की सरकार से एक वरिष्ठ मंत्री के इस्तीफे और संसद के निचले सदन में सदस्यों द्वारा जमकर आलोचना के बृहस्पतिवार के घटनाक्रम के बाद अब उनके (ट्रस के) पद पर बने रहने को लेकर संशय पैदा हो गया था। पिछले महीने सरकार ने एक आर्थिक योजना पेश की थी, जिसके असफल होने के कारण आर्थिक उथल-पुथल और राजनीतिक संकट पैदा हो गया है। इसके बाद ट्रस को वित्त मंत्री बदलने के अलावा अपनी कई नीतियों को भी उलटना पड़ा। साथ ही उनके कार्यकाल के दौरान सत्तारूढ़ कन्जरवेटिव पार्टी में अनुशासनहीनता भी देखने को मिली है। कन्जरवेटिव पार्टी के कई नेताओं का कहना है कि ट्रस को प्रधानमंत्री पद से इस्तीफा दे देना चाहिए, हालांकि वह अपनी जगह कायम हैं और साफ कह चुकी हैं कि वह इस्तीफा नहीं देंगी। कन्जरवेटिव पार्टी के सांसद साइमन होरे ने कहा कि सरकार अव्यवस्थित हो गई है। उन्होंने बृहस्पतिवार को बीबीसी से कहा, किसी के पास ठोस योजना नहीं है। यह दिन-प्रतिदिन एक-दूसरे से उलझने के समान है। उन्होंने कहा कि ट्रस के पास स्थिति को बदलने के लिए लगभग 12 घंटे हैं। इस बीच, अंतरराष्ट्रीय व्यापार मंत्री एनी-मैरी ट्रेवलिन ने बृहस्पतिवार को सरकार का बचाव करते हुए कहा कि सरकार स्थिरता प्रदान करने में जुटी है। हालांकि वह इस बात की गारंटी नहीं दे पाईं कि ट्रस अगले चुनाव में पार्टी का नेतृत्व करेंगी। ट्रेवलिन ने कहा, "फिलहाल, मुझे लगता है कि यह सही है। जनमत सर्वेक्षणों में लेबर पार्टी को बड़ी बढ़त मिलती दिखाई दे रही है, जिसके मद्देनजर कन्जरवेटिव पार्टी के कई नेताओं का मानना है कि ट्रस को हटाकर ही कोई उम्मीद की जा सकती है। लेकिन वे इस बात को लेकर बंटे हुए हैं कि उन्हें कैसे हटाया जाए। इसके अलावा अभी तक ट्रस के विकल्प के तौर पर कोई नाम भी सामने नहीं आया है। इससे पहले, भारतीय मूल की ब्रिटिश गृह मंत्री सुएला ब्रेवरमैन ने लंदन में मंत्रिस्तरीय संचार के लिए अपने निजी ई-मेल का इस्तेमाल करने की गलती के बाद बुधवार को पद से इस्तीफा दे दिया। ब्रेवरमैन (42) ने अपने ट्विटर हैंडल पर त्यागपत्र पोस्ट किया। उन्होंने कहा, मैंने गलती की। मैं इसकी जिम्मेदारी स्वीकार करती हूं। ब्रेवरमैन ने कहा, मैंने अपने व्यक्तिगत ई-मेल से एक विश्वसनीय संसदीय सहयोगी को एक आधिकारिक दस्तावेज भेजा। जैसा कि आप जानते हैं, दस्तावेज आव्रजन के बारे में मंत्रिस्तरीय बयान था, जिसका प्रकाशन होना था। पिछले शुक्रवार को क्रासिंस्की क्वार्टेंग को वित्त मंत्री पद से हटा दिया गया था और उनके उत्तराधिकारी, वित्त मंत्री जेरेमी हंट ने सोमवार को सरकार के मिनी-बजट में कटौती कर दी थी। इस कदम से ट्रस के नेतृत्व के लिए संकट और बढ़ने की आशंका पैदा हो गई। साथ ही उनके प्रधानमंत्री बने रहने पर भी संकट के बादल मंडराने लगे।

चीन : सीपीसी की बैठक आज, शी जिनपिंग को क्या मिलेगी अगके कार्यकाल मंजूरी...
Published / 2022-10-16 15:29:02
चीन : सीपीसी की बैठक आज, शी जिनपिंग को क्या मिलेगी अगके कार्यकाल मंजूरी...

एबीएन सेंट्रल डेस्क। चीन की सत्तारूढ़ कम्युनिस्ट पार्टी ने रविवार को यहां सप्ताह भर चलने वाले अपने कांग्रेस सत्र का आगाज किया, जिसमें राष्ट्रपति शी जिनपिंग को रिकॉर्ड तीसरी बार पांच साल के कार्यकाल के लिए समर्थन मिलने की उम्मीद है। जिनपिंग को तीसरे कार्यकाल की मंजूरी मिलने के साथ ही शीर्ष नेताओं के 10 साल के कार्यकाल के बाद इस्तीफा देने का तीन दशकों से अधिक समय तक चला आ रहा नियम टूट जायेगा। शी (69) के अलावा चीनी नेतृत्व में दूसरे नंबर की हैसियत रखने वाले प्रधानमंत्री ली क्विंग समेत सभी शीर्ष अधिकारियों को इस सप्ताह के दौरान व्यापक फेरबदल में हटा दिया जायेगा। कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ चाइना (सीपीसी) की 20वीं नेशनल कांग्रेस ऐसे वक्त में हो रही है कि जब शी चिनफिंग के तथा व्यापक पाबंदियों और लॉकडाउन के जरिए कोरोना को बिल्कुल बर्दाश्त न करने की उनकी नीति के खिलाफ विरोध के सुर उठे हैं जो अपने आप में विरले है। इन पाबंदियों के कारण दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था में मंदी आ रही है। कांग्रेस में 2,296 ‘‘निर्वाचित' प्रतिनिधि बंद कमरे में होने वाली बैठक में शामिल होंगे। कांग्रेस के प्रवक्ता सुन येली ने शनिवार को यहां एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि कांग्रेस 16 अक्तूबर से 22 अक्तूबर तक आयोजित की जाएगी। शी आज कांग्रेस के समक्ष अपनी कार्य रिपोर्ट पेश कर सकते हैं। पांच साल में एक बार होने वाली इस कांग्रेस के मद्देनजर गुरुवार को सोशल मीडिया पर प्रसारित तस्वीरों में राजधानी बीजिंग के उत्तर पश्चिम में ऐसे बैनर लटके हुए देखे गए जिसमें शी की कोविड नीति और निरंकुश शासन का विरोध किया गया था। बीजिंग में विश्वविद्यालयों और प्रौद्योगिकी कंपनियों के गढ़ हैदियां जिले में एक पुल पर लगे बैनरों में लिखा हुआ था, भोजन, न कि कोविड जांच, सुधार, न कि सांस्कृतिक क्रांति, आजादी, न कि लॉकडाउन, वोट, न कि नेता, प्रतिष्ठा, न कि झूठ, नागरिक, न कि गुलाम। ऐसे बैनर लगाए जाने के बाद बीजिंग में सुरक्षा और कड़ी कर दी गई है। पर्यवेक्षकों के अनुसार, देश में बढ़ती बेरोजगारी को लेकर चिंताओं के अलावा पिछले 10 साल में अधिकारियों के खिलाफ भ्रष्टाचार रोधी कार्रवाई को लेकर भी असंतोष है। इस कांग्रेस पर नेतृत्व परिवर्तन और राष्ट्रपति शी को अभूतपूर्व रूप से तीसरा तथा संभवत: जीवन भर का कार्यकाल मिलने को लेकर देश और विदेश भर की निगाहें टिकी हैं।

महारानी के मुकुट में कब वापस होगा कोहिनूर? यहां जानें...
Published / 2022-10-15 15:04:50
महारानी के मुकुट में कब वापस होगा कोहिनूर? यहां जानें...

एबीएन सेंट्रल डेस्क। ब्रिटेन की महारानी एलिजाबेथ द्वितीय की मृत्यु के बाद उनके ताज में लगे कोहिनूर हीरे की भारत वापसी की मांग जोर पकड़े हुए है। 108 कैरेट का यह बेशकीमती हीरा पंजाब के महाराजा रणजीत सिंह के बेटे महाराजा दलीप सिंह ने 1849 में महारानी विक्टोरिया को भेंट किया था। 1937 में महारानी ने इसे अपने ताज में जड़वा लिया था। उत्तराधिकारी के नाते बाद में यह मुकुट एलिजाबेथ द्वितीय ने पहना था। सितंबर में महारानी एलिजाबेथ की मृत्यु के बाद कोहिनूर को वापस भारत लाने की मांग लगातार हो रही है। यह कोहिनूर दुनिया के सबसे बड़े व वजनी हीरे में शुमार है। इसकी वापसी की मांग को लेकर शुक्रवार को विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अरिंदम बागची से सवाल किया गया। बागची ने कहा कि सरकार इस मसले के संतोषजनक समाधान में लगातार जुटी हुई है। उन्होंने इस बारे में सरकार द्वारा कुछ सालों पहले संसद में दिये गये बयान का भी जिक्र किया। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अरिंदम बागची ने कहा कि सरकार ने संसद में कहा था कि हम यह मामला ब्रिटिश सरकार के सामने समय समय पर उठाते रहे हैं। मामले के संतोषजनक हल के प्रयास लगातार जारी रहेंगे। कैमिला को नहीं मिलेगा ताज : महारानी एलिजाबेथ के पिछले माह निधन के बाद ब्रिटेन में प्रिंस चार्ल्स अब किंग चार्ल्स III बन गये हैं। ब्रिटेन के राजपरिवार के वे अब राजा बन गये हैं। अगले साल मई में उनका औपचारिक राज्याभिषेक होगा। पहले कहा जा रहा था कि किंग चार्ल्स की पत्नी क्वीन कंसोर्ट कैमिला को यह कोहिनूर जड़ा ताज पहनाया जायेगा, लेकिन मीडिया रिपोर्ट में कहा जा रहा है कि यह ताज कैमिला को नहीं मिलेगा। कोहिनूर के स्वामित्व को लेकर विवाद और दूसरी पत्नी होने के नाते कैमिला की राजपरिवार में हैसियत के चलते वह इससे वंचित रहेंगी। बता किंग चार्ल्स तृतीय की पहली पत्नी डायना का एक सड़क हादसे में दशकों पूर्व निधन हो गया था।

पाकिस्तान दुनिया का सबसे खतरनाक देश : बाइडन
Published / 2022-10-15 13:43:22
पाकिस्तान दुनिया का सबसे खतरनाक देश : बाइडन

एबीएन सेंट्रल डेस्क। अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडन ने पाकिस्तान पर निशाना साधा है। अमेरिकी मध्यावधि चुनाव के लिए एक फंड जुटाने के कार्यक्रम के दौरान बाइडन ने पाकिस्तान को दुनिया के सबसे खतरनाक देशों में से एक करार दिया। इतना ही नहीं बाइडन ने इटली और हंगरी जैसे देशों पर भी निशाना साधा। गौरतलब है कि बाइडन लगातार दक्षिणपंथी देशों में लोकतंत्र की गिरती स्थिति और रूस-यूक्रेन युद्ध में पुतिन के समर्थन करने वाले देशों पर बयान देते रहे हैं। इसी कड़ी में उन्होंने इन तीन देशों को घेरा। अमेरिकी राष्ट्रपति ने पाकिस्तान को घेरते हुए कहा कि इस देश ने बिना किसी सामंजस्य के परमाणु हथियार जुटा रखे हैं। बाइडन के इस बयान की टाइमिंग काफी अहम है। दरअसल, हाल ही में पाकिस्तान के सेना प्रमुख जनरल कमर जावेद बाजवा अमेरिका में थे। यहां उन्होंने अमेरिकी रक्षा मंत्री के साथ कई और नेताओं से मुलाकात भी की थी। माना जा रहा था कि बाजवा की यह मुलाकात अमेरिका और पाकिस्तान के रिश्तों के लिए अहम साबित होगी। हालांकि, अब बाइडन के इस बयान से एक बार फिर अमेरिका-पाकिस्तान के रिश्तों में पड़ी दरार सामने आ गई है। हंगरी के प्रधानमंत्री विक्टर ओरबान को रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन का काफी करीबी माना जाता है। इसे लेकर बाइडन ने खतरा जताते हुए कहा, आप दुनियाभर में जारी चर्चाओं को देखें, खासकर लोकतंत्र के क्या मायने हैं, इस मुद्दे पर। लेकिन जब आप हंगरी को देखते हैं, जो कि एक नाटो का सदस्य है। मैं आपको उसके लोकतंत्र के बारे में बताकर बोर कर सकता हूं।

तुर्की : कोयला खदान में विस्फोट, से 25 की मौत, दर्जनों फंसे
Published / 2022-10-15 09:29:12
तुर्की : कोयला खदान में विस्फोट, से 25 की मौत, दर्जनों फंसे

एबीएन सेंट्रल डेस्क। तुर्की की कोयला खदान में बड़ा हादासा हो गया है। तुर्की की कोयला खदान में विस्फोट होने से 25 लोगों की मौत हो गयी हैं। बीबीसी की रिपोर्ट के मुताबिक, तुर्की के उत्तरी बार्टिन प्रांत में एक कोयला खदान में हुए विस्फोट में 25 लोगों की मौत हो गयी और दर्जनों लोग फंसे हुए हैं। धमाका शुक्रवार को काला सागर तट पर अमासरा स्थित प्लांट में हुआ। रिपोर्ट मुताबिक जिस वक्त खदान में धमाका हुआ, वहां करीब 110 लोग काम कर रहे थे। इसलिए अभी ये साफ नहीं हो पाया है कि कितने लोग अब भी अंदर खदान में फंसे हुए हैं। लगभग 28 लोग घायल हैं। तुर्की के स्वास्थ्य मंत्री फहार्टिन कोकास ने कहा कि अभी तक 11 लोगों को कोयले की खदान में से रेस्क्यू करके बचाया गया है। विस्फोट के समय खदान में करीब 110 लोग काम कर रहे थे, जिनमें से लगभग आधे 300 मीटर अंदर गहरे खदान में काम कर रहे थे। हादसे में घायल 28 लोगों का अस्पताल में इलाज तल रहा है। ये कोयले का खदान 300 से 350 मीटर गहरी है, ये एक जोखिम भरा क्षेत्र है। वहीं तुर्की के ऊर्जा मंत्री फातिह डोनमेज ने न्यूज एजेंसी रॉयटर्स को बताया, प्रारंभिक आकलन से पता चलता है कि विस्फोट संभवतः फायरएम्प-कोयला खदानों में पाये जाने वाली ज्वलनशील गैसों की वजह से हुआ। हालांकि हम इस मामले की तह तक जायेंगे। सोशल मीडिया पर सामने आई तस्वीरें विचलित करने वाली हैं। हादसे की जगह अपने दोस्तों और प्रियजनों की तलाश में भीड़ इकट्ठा हो गई है। बार्टिन प्रांत के गवर्नर ने नुर्ताक अरसलान ने कहा कि विस्फोट लगभग खदान की एंट्री गेट से 300 मीटर (985 फीट) नीचे हुआ। यह खदान राज्य के स्वामित्व वाली तुर्की हार्ड कोल एंटरप्राइजेज की है।

बीजिंग में पहली बार... राष्ट्रपति जिनपिंग को हटाने के बैनर लगे
Published / 2022-10-14 10:12:41
बीजिंग में पहली बार... राष्ट्रपति जिनपिंग को हटाने के बैनर लगे

एबीएन सेंट्रल डेस्क। चीन में मौजूदा सरकार के खिलाफ असंतोष पनपने के संकेत मिल रहे हैं। गुरुवार को बीजिंग में दुकानों के बाहर अचानक कई बैनर नजर आने लगे। उनमें राष्ट्रपति शी जिनपिंग को पद से हटाने और कोरोना पाबंदियां खत्म करने जैसे कई नारे लिखे हुए थे। यह पहला मौका है जब जिनपिंग के खिलाफ ऐसे बैनर नजर आये हैं। चीन की राजधानी बीजिंग की सड़कों पर इन बैनरों की कई तस्वीरें व वीडियो ट्विटर पर कल तेजी से वायरल हुए। ट्विटर चीन में ब्लॉक है। जिनपिंग के खिलाफ सोशल मीडिया में नाराजगी तब खुलकर सामने आई है, जब चीन की सत्तारूढ़ कम्युनिस्ट पार्टी का 10 साल में दो बार होने वाला सम्मेलन शुरू होने वाला है। इन बैनरों पर राष्ट्रपति जिनपिंग को पद से हटाने और कठोर कोरोना पाबंदियां खत्म करने की मांग की गई थी। सोशल मीडिया में वायरल ये बैनर बीजिंग के उत्तर-पश्चिमी हैडियन जिले में टंगे नजर आए थे। कुछ ही समय में स्थानीय प्रशासन ने उन्हें हटवा दिया, लेकिन तब तक इनकी तस्वीरें सोशल मीडिया के जरिए दुनियाभर में फैल चुकी थी। जिनपिंग का यह विरोध इसलिए अहम है, क्योंकि सत्तारूढ़ कम्युनिस्ट पार्टी आगामी 20 वें सम्मेलन में राष्ट्रपति के तौर पर उनके तीसरे कार्यकाल पर मुहर लगाने जा रही है। बीजिंग में होने वाले इस सम्मेलन को लेकर चीन की सरकारी एजेंसियां व अधिकारी हाई अलर्ट पर हैं। इसलिए जैसे ही ये बैनर दिखे, उन्हें तत्काल हटा दिया गया। वायरल वीडियो में से एक पर लिखा था, हम कोविड परीक्षण नहीं चाहते हैं, हमें खाना चाहिए। हम लॉकडाउन नहीं चाहते हैं, हम मुक्त होना चाहते हैं। बता दें, चीन में शून्य कोविड नीति लागू होने के कारण अलग अलग इलाकों में बार-बार लॉक डाउन लगाया जा रहा है। इससे कारोबारियों व आम लोगों को भारी मुसीबतों का सामना करना पड़ रहा है। इससे चीन के लोग निराश हैं। न्यूज एजेंसियों ने जिनपिंग विरोधी बैनरों को लेकर जब चीन की पुलिस से उसके आधिकारिक वीचैट के जरिये संपर्क कर प्रतिक्रिया जानना चाही तो किया गया तो कोई जवाब नहीं दिया गया। चीन में इंटरनेट पर कड़ा पहरा है। सोशल मीडिया पर भी पाबंदी है।

पहले वर्ल्ड बैंक अब आईएमएफ कर रहा मोदी की तारीफ- कहा- भारत से सीखे दुनिया...
Published / 2022-10-13 09:52:49
पहले वर्ल्ड बैंक अब आईएमएफ कर रहा मोदी की तारीफ- कहा- भारत से सीखे दुनिया...

एबीएन सेंट्रल डेस्क। वर्ल्ड बैंक के बाद अब आईएमएफ यानी अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष भी मोदी सरकार की कैश ट्रांसफर योजना का मुरीद हो गया है। अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष ने भारत के डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर और इसी तरह के अन्य सामाजिक कल्याण कार्यक्रमों की तारीफ की और इसे चमत्कार बताया। इतना ही नहीं, आईएमएफ ने पूरी दुनिया को भारत से सीखने की सलाह दी है। बता दें कि इससे पहले कोरोना काल में कैश ट्रांसफर योजना के लिए वर्ल्ड बैंक ने भी भारत की तारीफ की थी। दरअसल, आईएमएफ के फिस्कल अफेयर डिपार्टमेंट के डिप्टी डायरेक्टर पॉओलो मौरो ने बुधवार को भारत में नकद हस्तांतरण योजना (कैश ट्रांसफर स्कीम) की सराहना की और देश के विशाल आकार को देखते हुए इसे एक लॉजिस्टिक चमत्कार बताया। आईएमएफ के वित्तीय मामलों के विभाग के उप निदेशक पाओलो मौरो ने कहा कि भारत से बहुत कुछ सीखने को है। हमारे पास दुनिया भर में कुछ अन्य उदाहरणों से सीखने के लिए बहुत कुछ है। हमारे पास लगभग हर महाद्वीप और आय के हर स्तर के उदाहरण हैं। अगर मैं भारत के मामले को देखता हूं, तो यह वास्तव में काफी प्रभावशाली है। उन्होंने कहा कि वास्तव में देश के विशाल जनसंख्या को देखते हुए यह एक लॉजिस्टिक चमत्कार है कि कम आय वाले लोगों की मदद करने वाले ये कार्यक्रम सचमुच करोड़ों लोगों तक कैसे पहुंचते हैं। आईएमएफ अधिकारी ने भारत में बहुत सारे तकनीकी नवाचारों की सफलता और नकद हस्तांतरण योजना को सफल बनाने में विशिष्ट पहचान प्रणाली आधार के उपयोग की ओर भी इशारा किया। उन्होंने कहा कि सरकार के ये कार्यक्रम महिलाओं, बुजुर्गों और किसानों को ध्यान में रखकर बनाये गये हैं और उन्होंने कहा कि इसकी सबसे रोचक बात यह है कि इसमें काफी तकनीकी इनोवेशन्स हैं। उन्होंने कहा कि भारत के मामले में एक बात जो चौंकाने वाली है, वह है विशिष्ट पहचान प्रणाली यानी आधार का इस्तेमाल। लेकिन अन्य देशों में मोबाइल बैंकिंग के माध्यम से उन लोगों को पैसा भेजने का अधिक उपयोग होता है, जिनके पास वास्तव में बहुत सारा पैसा नहीं है, लेकिन उनके पास एक सेल फोन है। विश्व बैंक के अध्यक्ष डेविड मालपास ने बुधवार को कहा कि कोविड-19 महामारी संकट के दौरान भारत ने गरीब और जरूरतमंद लोगों को जिस प्रकार से समर्थन दिया है वह असाधारण है। विश्व बैंक ने न केवल भारत सरकार की तारीफ की, बल्कि उसने अन्य देशों को सीखने की सलाह भी दी थी। वर्ल्ड बैंक के मुखिया डेविड मालपास ने गरीबी एवं पारस्परिक समृद्धि रिपोर्ट’ जारी करते हुए कहा कि अन्य देशों को भी व्यापक सब्सिडी के बजाए भारत की तरह लक्षित नकद हस्तांतरण जैसा कदम उठाना चाहिए। विश्व बैंक के अध्यक्ष ने कहा, डिजिटल नकद हस्तांतरण के जरिए भारत ग्रामीण क्षेत्र के 85 फीसदी परिवारों को और शहरी क्षेत्र के 69 फीसदी परिवारों को खाद्य एवं नकदी समर्थन देने में सफल रहा जो उल्लेखनीय है।

चीन : ओमिक्रॉन के दो नये वैरिएंट ने मचाई भारी तबाही
Published / 2022-10-11 17:44:36
चीन : ओमिक्रॉन के दो नये वैरिएंट ने मचाई भारी तबाही

एबीएन सेंट्रल डेस्क। चीन में कम्युनिस्ट पार्टी की नेशनल कांग्रेस से पहले एक बार फिर से कोरोना का नया खतरा मंडराने लगा है। यहां ओमिक्रॉन के दो नए सब वैरिएंट BF.7 और BA.5.1.7 की पुष्टि हुई है। विशेषज्ञों का कहना है कि दोनों ही सब वैरिएंट अत्यधिक संक्रामक हैं और BF.7 सब वैरिएंट सोमवार को कई चीनी प्रांतों में फैल गया है। स्थानीय रोग रोकथाम और नियंत्रण केंद्र के उप निदेशक ली शुजियान ने बताया कि BF.7 सब वैरिएंट की पुष्टि सबसे पहले उत्तर पश्चिमी चीन में हुई थी। वहीं BA.5.1.7 भी चीन में पाया गया है। उत्तरी चीनी प्रांत शेडोंग के अधिकारियों ने बताया कि चार अक्तूबर को BF.7 की पुष्टि की गई थी। WHO ने दी चेतावनी : ओमिक्रॉन के BF.7 वैरिएंट को लेकर विश्व स्वास्थ्य संगठन की ओर से चेतावनी जारी की गई है। कहा गया है कि यह सब वैरिएंट जल्द ही नया संस्करण बना सकता है। एक विशेषज्ञ ने कहा है कि BF.7 वैरिएंट की रोकथाम के लिए जल्द ही उपाय नहीं किए गए तो यह जल्द ही पूरे चीन को अपनी चपेट में ले सकता है। चीन में अभी भी लागू है जीरो कोविड पॉलिसी : एक तरफ दुनिया भर के देश कोरोना प्रतिबंधों से बाहर आ चुके हैं, तो चीन ने अभी भी अपने नागरिकों के लिए जीरो कोविड पॉलिसी लागू की हुई है। इसके तहत सीमा पर प्रतिबंधों, सामूहिक परीक्षण, व्यापक क्वारंटाइन, लॉकडाउन लगाना है। जीरो कोविड पॉलिसी के लागू होने से चीन के नागरिकों को कड़े प्रतिबंधों से गुजरना पड़ रहा है। वहीं इसकी वहज से चीन के अलावा अन्य देशों में भी राष्ट्रपति शी जिनपिंग की आलोचना हो रही है।

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